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Showing posts from November, 2023
तिमोथी को पौलुस का प्रथम पत्र। (First Timothy) पहला अध्याय। १ पौलुस, हमारे बचाने-वाले ईश्वर के, और हमारी आशा, प्रभु यीशु मसीह के आदेश द्वारा, यीशु मसीह का एक अपौस्ल;           २ विश्वास में मेरे अपने ही पुत्र तिमोथी को: हमारे पिताश्री ईश्वर द्वारा, और हमारे प्रभु यीशु मसीह द्वारा, कृपा, दया, और शान्ति हो। ३ जैसा मैंने मकिदुनिया जाते हुए तुम से यह निवेदन किया था, कि तुम इफिसुस में ही ठहरे रहो, ताकि तुम कुछों को यह आदेश दे सको, कि वो कोई अन्य सिद्धांत न सिखाएँ, ४ न ही कल्पित कहानियों, और अन्तहीन वंशावलियों की ओर ध्यान दें, जो विश्वास में ईश्वरीय आध्यात्मिक-निर्माण की अपेक्षा, प्रश्नों को उत्पन्न करती हैं: सो करो। ५ अब आदेश का अन्त एक शुद्ध हृदय, और अच्छी अन्तरात्मा, और निष्कपट विश्वास से उत्पन्न हुआ प्रेम है: ६ जिस से कुछ परे मुड़ कर, व्यर्थ बकवादों में भटक चुके हैं; ७ नियम के अध्यापक बनने की इच्छा रखते हुए; न ही समझते हुए कि वो क्या कहते हैं, न ही जिसकी वो अभिपुष्टि कर सकते हैं। ८ परन्तु हमें यह ज्ञान है कि नियम अच्छा है, यदि कोई व्यक्ति उसका नियमानुसार प्रय...
थिस्सलूनीकावासियों के लिए पौलुस का दूसरा पत्र।(Second Thessalonians) पहला अध्याय। १ पौलुस, और सिलवानुस, और तिमोथेयस से, थिस्सलूनीकावासियों के कलिसिए को जो पिताश्री हमारे ईश्वर में और प्रभु यीशु मसीह में है:  २ तुम्हें ईश्वर हमारे पिताश्री और प्रभु यीशु मसीह द्वारा कृपा और शान्ति हो। ३ भाई-जनो हम सदैव तुम्हारे लिए ईश्वर को धन्यवाद देने के ऋणी हैं, जैसा यह सुयोग्य है, क्योंकि तुम्हारा विश्वास अत्याधिकता से बढ़ रहा है, और तुम सभी में से प्रत्येक का एक दूसरे के प्रति प्रेम विपुल हो रहा है; ४ अतएव ईश्वर के कलिसियों में हम स्वयं तुम्हीं में तुम्हारे समस्त अत्याचारों और उत्पीड़नाओं में तुम्हारे धैर्य और विश्वास में गौरव मनाते हैं, जिन्हें तुम भुगत रहे हो: ५ जो ईश्वर के नेक न्याय-निर्धारण का प्रत्यक्ष प्रतीक है, कि तुम ईश्वर के राज्य के सुयोग्य गिन लिए जाओ, जिसके लिए तुम कष्ट भी झेलते हो:  ६ यह देखते हुए कि ईश्वर के लिए ये एक नेक बात है, कि वो उन्हें जो तुम्हें सताते हैं उत्पीड़ना का भुक्तान लौटा देते हैं; ७ और तुम जो सताए हुए हो हमारे साथ विश्राम, जब प्रभु यीशु अपने बलशाली दूतों के स...