अय्यूब की पुस्तक। (The Book of Job.) (एक सुझाव: इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में क्रियाशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें।) पहला अध्याय। १ अज़ की भूमी में एक पुरुष था, जिसका नाम अय्यूब था; और वो पुरुष परिपूर्ण और निष्कलंक था, और एक जो ईश्वर का भय माना करता था, और बुराई से परे ही हटा रहता था। २ और उसे पैदा हुए थे सात बेटे और तीन बेटियाँ। ३ उसकी सम्पत्ती भी सात हज़ार भेड़ें, और तीन हज़ार ऊँट, और पाँच सौ सांडों के जुए, और पाँच सौ मादा गधियाँ, और एक बहुत ही विशाल घर-बार; तो भई ये पुरुष तो पूरब के समस्त पुरुषों में से सबसे महान था। ४ और उसके बेटे अपने-अपने घरों में भोज अपने-अपने दिन भोज आयोजित किया करते थे, और भिजवाकर अपनी तीनों बहनों को उनके साथ खाने और पीने के लिया बुलवा लिया करते थे। ५ और ऐसा हुआ करता था, कि जब उनके भोज मनाने के दिवस सम्पन्न हो जाया करते थे, कि अय्यूब भिजवाकर उन्हें पुनीत किया करता था, और सुबह-सुबह शीघ्रता से उठ कर ही, जले-चढ़ावे उन सभी की संख्यानुसार ही चढ़ा दिया करता था: चूँकि कहता था, ये सम्भव हो सकता है कि मेरे बेटों ने पाप कर दिया हो, और अपने हृदयों में ...
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