भजनों की पुस्तक, भाग ३। (The Book of Psalms, Part 3.) अट्ठाईस्वाँ भजन। दाऊद का एक भजन। १ जी आप ही की ओर मैं चीख - पुकार मचाऊँगा , मेरी चट्टान ओ प्रभु ; मेरे प्रति चुप न रहें : कहिं यदि आप मेरे प्रति चुप रह जाएँ , तो मैं उनके जैसा बन जाऊँ जो नीचे गर्त में चले जाते हैं। २ जब मैं आपकी ओर चीखता हूँ तो मेरे अनुनयों की वाणी सुन लें जी , जब मैं अपने हाथों को आपकी पवित्र ईश्वरीय - वाणी की ओर ऊपर उठाता हूँ। ३ मुझे उन दुष्टों के साथ , और उन अधर्म - कर्ताओं के साथ परे न खींचें , जो अपने पड़ौसियों से शान्ति की बात तो करते हैं , परन्तु जिनके मनों में बुराई होती है। ४ उन्हें उन्हीं के कर्मोंनुसार ही , और उनके प्रयासों की दुष्टतानुसार ही प्रदान कर दें : उनके हाथों के कर्मानुसार ही उन्हें दे दें जी ; उन्हें लौटा दें वापस उन्हीं के भुक्तान को। ५ चूँकि वो न ही प्रभु के कर्मों पर , न ही उनके हाथों के कार्य पर ध्यान देते हैं , वो उन्हें नष्ट कर डालेंगे , ...