उत्पत्ति : पुराना अनुबंध। (Genesis) (एक सुझाव : इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में कार्यशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें। ) पहला अध्याय। १ प्रारम्भ में ईश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी का सृजन किया। २ और पृथ्वी निराकार , और रिक्त थी ; और गहराई के चेहरे पर अन्धकार था। और ईश्वर का भावात्मा पानियों के चहरे पर चल - फिर रहा था। ३ और ईश्वर ने कहा , उजाला हो जाए : और उजाला हो गया। ४ और ईश्वर ने उस उजाले को देखा , कि वह अच्छा था : और ईश्वर ने उजाले को अन्धकार से विभाजित कर दिया। ५ और ईश्वर ने उजाले को दिन पुकारा , और अन्धकार को उन्होंने रात पुकारा : और वह सन्ध्या और वह सुबह पहला दिन थे। ६ और ईश्वर ने कहा , पानियों के बीच में एक विस्तार हो जाए , और वह पानियों को पानियों से विभाजित कर दे। ७ और ईश्वर ने एक विस्तार बनाया , और उन पानियों को जो विस्तार के नीचे थे , उन्होंने उन पानियों से विभाजित कर दिया , जो उस विस्तार के ऊपर थे : और ऐसा ही हो गया...
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