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द्वितीय शमूएल। (Second Samuel) ( एक सुझाव : इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में कार्यशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें। ) पहला अध्याय। १ अब शाऊल की मृत्यु के उपरान्त यह होने को आया , जब दाऊद उन अमालेक - वंशजों के संहार से वापस लौट चुका था , और दाऊद ज़िकलग में दो दिन वास कर चुका था ; २ यह तीसरे ही दिन होने को आया , कि देखो , शाऊल की छावनी में से एक आदमी फटे हुए कपड़ों के साथ और सर पर धूल - मिट्टी लिए बाहर निकल आया : तो भई यह ऐसा ही था , जब वो दाऊद के पास आ पहुँचा था , कि वो धरती पर ही गिर पड़ा , और उसने अभिवादन किया। ३ और दाऊद ने उस से कहा , भई कहाँ से पधारे हो तुम ? और उसने उस से कहा , इस्राएल की छावनी में से मैं बाहर बच निकला हूँ जी। ४ और दाऊद ने उस से कहा , बात किस ओर गई ? मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे , मुझे बता दो। और उसने उत्तर दिया , कि लोग तो रण से भाग गए हैं , और लोगों में से कई गिर कर मर भी गए हैं ; और शाऊल और ...