Posts

Showing posts from April, 2025
यहोशुआ की पुस्तक। पुराना अनुबंध। (Joshua) ( एक सुझाव : इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में कार्यशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें। ) पहला अध्याय। १ अब प्रभु के सेवक मूसा की मृत्यु के पश्चात यह होने को आया , कि प्रभु मूसा के सेवक , नून के बेटे यहोशुआ से बोले , कहते हुए , २ मेरा सेवक मूसा मर गया है ; इसलिए अब उठो , इस यर्दन के पार चले जाओ , तुम , और यह सभी लोग , उस भूमी में जो मैं उन्हें दे ही रहा हूँ , इस्राएल की सन्तानों को ही। ३ वह प्रत्येक स्थान जिसे तुम्हारे पैर का तलवा रौंदेगा , वही मैंने तुम्हें प्रदान कर दिया है , जैसा मैंने मूसा से कहा था। ४ जँगली - क्षेत्र और लेबनोन से लेकर उस महा नदी तक भी , फरात नदी तक , हित्ती - वंशजों की समस्त भूमी , और उस महा सागर तक सूर्यास्त की ओर , तुम्हारी सीमा होगी। ५ कोई भी आदमी तुम्हारे सामने खड़ा नहीं रह सकेगा तुम्हारे जीवन के समस्त दिन : जैसे मैं मूसा के साथ था , वैसे ही मैं तुम्हारे साथ रहूँगा : म...