यहोशुआ की पुस्तक। पुराना अनुबंध। (Joshua)



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पहला अध्याय।


अब प्रभु के सेवक मूसा की मृत्यु के पश्चात यह होने को आया, कि प्रभु मूसा के सेवक, नून के बेटे यहोशुआ से बोले, कहते हुए,

मेरा सेवक मूसा मर गया है; इसलिए अब उठो, इस यर्दन के पार चले जाओ, तुम, और यह सभी लोग, उस भूमी में जो मैं उन्हें दे ही रहा हूँ, इस्राएल की सन्तानों को ही।

वह प्रत्येक स्थान जिसे तुम्हारे पैर का तलवा रौंदेगा, वही मैंने तुम्हें प्रदान कर दिया है, जैसा मैंने मूसा से कहा था।

जँगली-क्षेत्र और लेबनोन से लेकर उस महा नदी तक भी, फरात नदी तक, हित्ती-वंशजों की समस्त भूमी, और उस महा सागर तक सूर्यास्त की ओर, तुम्हारी सीमा होगी।

कोई भी आदमी तुम्हारे सामने खड़ा नहीं रह सकेगा तुम्हारे जीवन के समस्त दिन: जैसे मैं मूसा के साथ था, वैसे ही मैं तुम्हारे साथ रहूँगा: मैं तुम्हें विफल नहीं करूँगा, ही तुम्हें त्यागूँगा।

दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो: क्योंकि इन्हीं लोगों को तुम वह भूमी एक विरासत हेतु विभाजित करोगे, जिसका मैंने उनके पित्रों को वचन दिया था उन्हें दे देने हेतु।

बस केवल तुम दृढ़ता और बहुत शौर्य वाले बनो, ताकि तुम उस समस्त नियमानुसार ध्यान से कर सको, जिसका आदेश मूसा मेरे सेवक ने तुम्हें दिया है: उस से ही दाएँ हाथ की ओर मुड़ना, ही बाएँ की ओर, ताकि तुम जहाँ भी जाओ उन्नत हो।

यह नियम की पुस्तक तुम्हारे मूँह में से बाहर प्रस्थान नहीं करेगी; बल्कि तुम इस में दिन-रात मनन-चिंतन करोगे, ताकि तुम उस सभी के अनुसार ध्यान से कर सको जो इस में लिखा हुआ है: क्योंकि तब तुम अपना पथ उन्नत बना दोगे, और तब तुम्हारे पास अच्छी सफलता होगी।

क्या मैंने तुम्हें आदेश नहीं दिया है क्या? दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो; डरो मत, ही तुम निराश हो: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे साथ ही हैं जहाँ कहीं भी तुम जाते हो। 

१० तब यहोशुआ ने लोगों के अफ़सरों को आदेश दिया, कहते हुए,

११ छावनी में से चलते जाओ, और लोगों को आदेश दे दो, कहते हुए, खाद्य-पदार्थ उद्यत कर लो तुम; क्योंकि तीन दिनो में ही तुम इस यर्दन को पार करोगे, उस भूमी पर अधिकार करने, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें अधिकार करने हेतु दे रहे हैं।

१२ और रूबेन-वंशजों, और गाद-वंशजों, और मनश्शे की आधी प्रजाति से यहोशुआ बोला, कहता हुआ,

१३ उस शब्द का स्मरण करो जो प्रभु के सेवक मूसा ने तुम्हें आदेश दिया था, कहते हुए, प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें विश्राम प्रदान कर दिया है, और उन्होंने तुम्हें यह भूमी प्रदान कर दी है।

१४ तुम्हारी पत्नियाँ, तुम्हारे छोटे-नन्हें, और तुम्हारे मवेशी, उस भूमी में रहेंगे जिसे मूसा ने तुम्हें यर्दन के इस पार दे दी थी; परन्तु तुम अपने भाईयों के सामने सशस्त्रित चलते जाओगे, सभी बलशाली पराक्रमी पुरुष, और उन्हीं सहायता करोगे;

१५ जब तक कि प्रभु तुम्हारे भाई-ज़नो को विश्राम दे दें, जैसा कि उन्होंने तुम्हें दिया है, और उन्होंने भी उस भूमी पर अधिकार कर लिया हो जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन्हें देते हैं: तब तुम अपनी अधिकार की भूमी में वापस लौट जाओगे, और उसका आनंद लोगे, जो प्रभु के सेवक मूसा ने तुम्हें यर्दन के इस पार सूर्योदय की ओर दे दी है।

१६ और उन्होंने यहोशुआ को उत्तर दिया, कहते हुए, वह सभी जो तुम हमें आदेश दे रहे हैं हम करेंगे, और जहाँ कहीं भी तुम हमें भेजते हो, हम जाएँगे।

१७ उसी के अनुसार जैसा हमने मूसा का सभी बातों में श्रवण किया था, वैसे ही हम तुम्हारा श्रवण करेंगे: बस केवल प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे साथ रहें, जैसे वह मूसा के साथ थे।

१८ वह जो कोई भी हो जो तुम्हारे आदेश के विरुद्ध विद्रोह करता है, और तुम्हारे शब्दों का श्रवण नहीं करेगा उस सभी में जो तुम उसे आदेश देते हो, वही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: बस केवल दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो।




दूसरा अध्याय।


और नून के बेटे यहोशुआ ने शित्तिम से दो पुरुषों को बाहर गुप्त रूप से गुप्तचरी करने भेजे, कहते हुए, जाओ भूमी को देखो, यरीहो को ही। और वह चले गए, और एक रहाब नामक एक वैश्या के घर में गए, और वहीं ठहर गए।

और यह यरीहो के राजा को बता दिया गया था, कहते हुए, देखो, इस रात इस्राएल की सन्तानों में से जने यहाँ अंदर गए हैं देश का भेद निकाल लेने के लिए।

और यरीहो के राजा ने रहाब को भिजवाया, कहते हुए, बाहर ले आओ उन जनो को जो तुम्हारे पास गए हैं, जो तुम्हारे घर में प्रविष्ट हैं: क्योंकि वह सारे देश का भेद निकालने आए हैं।

और उस स्त्री ने उन दोनो जनो को लिया, और उन्हें छुपा दिया, और ऐसा कहा, मेरे पास तो आदमी आए, परन्तु मैं जानती नहीं कि वह कहाँ से थे:  

और यह होने को आया कि लगभाग दरवाज़े के बंद किए जाने के समय, जब अंधेरा था, वह जने बाहर चले गए: जहाँ वह जने गए मैं जानती नहीं: शीघ्रता से उनके पीछे चले जाओ; क्योंकि तुम उन्हें पार कर लोगे।

परन्तु उसने उन्हें घर की छत पर ऊपर लाकर उन्हें पटसन के डंठलों के साथ छुपा दिया था, जिन्हें उसने छत पर व्यवस्थित कर बिछा दिया था।

और उन आदमियों ने उनका यर्दन तक के पथ पर पारण-स्थान तक पीछा किया: और उनका पीछा करने वालों के बाहर निकल जाते ही, उन्होंने दरवाज़े को बंद कर दिया।

और उनके नीचे लेटने से पहले, वह उनके पास छत पर ऊपर आई;

और उसने उन पुरुषों से कहा, मैं जानती हूँ कि प्रभु ने तुम्हें भूमी प्रदान कर दी है, और कि तुम्हारा आतंक हम पर आकर गिर पड़ा है, और कि भूमी के सभी निवासी तुम्हारे कारण विलय हो रहे हैं।

१० क्योंकि हमने सुन लिया है कि प्रभु ने कैसे तुम्हारे लिए लाल समुद्र का पानी सुखा दिया था, जब तुम मिस्र में बाहर निकल आए थे; और कि तुमने एमोरवासियों के उन दो राजाओं के साथ क्या किया, जो यर्दन के उस पार थे, सिहोन और ओग, जिन्हें तुमने सरासर विनष्ट कर दिया।

११ और जैसे ही हमने इन बातों को सुना, हमारे मन पिघल गए, ही तुम्हारे कारण किसी भी आदमी में कोई भी साहस बचा रहा: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर, वही ऊपर स्वर्ग में, और नीचे पृथ्वी में ईश्वर हैं।

१२ इसलिए अब, मैं तुम से प्रार्थना करती हूँ, प्रभु की मूझे शपथ दे दो, क्योंकि मैंने तुम्हें करुणा दिखाई है, कि तुम भी मेरे पिता के घराने को करुणा दिखाओगे, और मुझे एक सच्चा प्रतीक दोगे: 

१३ और तुम मेरे पिता को, और मेरी माँ को, और मेरे भाई-जनो को, और मेरी बहनों को, और उस सब को जो उनके पास है जीवित बचा लोगे, और हमारे जीवनों का मृत्यु से बचाव कर लोगे।

१४ और उन पुरुषों ने उसे उत्तर दिया, हमारे प्राण तुम्हारे बदले, यदि तुम इस हमारे काम के विषय में चुप रहोगी। और यह होगा जब प्रभु ने हमें भूमी प्रदान कर दी होगी, कि हम तुम्हारे साथ करुणा और सत्य के साथ व्यवहार करेंगे।

१५ तब उसने खिड़की में से उन्हें एक डोरे से नीचे कर दिया: क्योंकि उसका घर उस नगरी की दीवार पर था, और वह उस दीवार पर बस्ती थी।

१६ और उसने उनसे कहा, तुम पर्वत की ओर चले जाओ, कहिं वह पीछा करने वाले तुमसे भेंट कर लें; और वहीं तीन दिनो तक स्वयं को छिपा लेना, जब तक वह पीछा करने वाले वापस नहीं लौट जाते हैं: और उसके पश्चात तुम अपने पथ पर चले जाना।

१७ और उन जनो ने उस से कहा, हम तुम्हारी इस शपथ से निर्दोष होंगे जो तुमने हमसे वचन दिलवाया है।

१८ देख लो, जब हम भूमी में आएँगे, तुम इस सुर्ख धागे के तार को खिड़की में बाँध दोगी जिस से तुमने हमें नीचे किया है: और तुम अपने पिता, और अपनी माता, और अपने भाई-जनो, और अपने पिता के समस्त घराने को, अपने पास घर में ले आओगी।

१९ और यह होगा, कि जो कोई भी तुम्हारे घर के द्वारों में से बाहर सड़क पर जाएगा, उसका रक्त उसी के सर पर पड़ेगा, और हम निर्दोष होंगे: और जो कोई भी तुम्हारे साथ घर में रहेगा, उसका रक्त हमारे सर पर पड़ेगा, यदि उस पर कोई भी हाथ पड़े।

२० और यदि तुम हमारे इस काम के विषय में बोल दोगी, तब हम तुम्हारी इस शपथ से मुक्त हो जाएँगे जो तुमने हम से वचन दिलवाया है।

२१ और उसने कहा, तुम्हारे शब्दोंनुसार ही ऐसा हो जाए। और उसने उन्हें परे भेज दिया, और उन्होंने परस्थान कर लिया: और उसने वह सुर्ख तार खिड़की में बाँध दिया।

२२ और वह चले गए, और पर्वत तक पहुँचे, और वहीं तीन दिन रुके रहे, जब तक कि वह पीछा करने वाले लौट गए थे: और उन पीछा करने वालों ने उन्हें उस पथ के सर्वत्र में ढूँढा, परन्तु उन्हें नहीं पाया।

२३ तो वह दोनो पुरुष वापस लौट आए, और पर्वत पर से अवरोहण किया, और पार चले गए, और नून के बेटे यहोशुआ के पास गए, और उसे वह सभी कुछ बता दिया जो उनके साथ घटा था:

२४ और उन्होंने यहोशुआ से कहा, सच में प्रभु ने वह समस्त भूमी हमारे हाथों में प्रदान कर दी है; क्योंकि भूमी के सभी निवासी हमारे कारण पिघल रहे हैं।



तीसरा अध्याय।


और यहोशुआ सुबह-सुबह उठा; और वह शित्तिम से प्रस्थान कर यर्दन गए, वह और इस्राएल की समस्त सन्तानें, और वहीं ठहर गए पार जाने से पहले। 

और तीन दिनों के पश्चात यह होने को आया, कि वह अफ़सर छावनी में से चलते गए;

और उन्होंने लोगों को आदेश दिया, कहते हुए, जब तुम प्रभु तुम्हारे ईश्वर का प्रतिज्ञा-पत्र वाला संदूक देखोगे, और वह पुरोहित लेवी-वंशज उसे ढोते हुए, तब तुम अपने स्थान में से प्रस्थान कर लोगे, और उसके पीछे-पीछे चले जाओगे।

तथापि तुम्हारे और उसके बीच एक दूरी होगी, लगभग दो हज़ार हाथ माप से: उसके निकट मत जाना, ताकि तुम उस पथ को जान सको जिस पर से तुम्हें जाना है: क्योंकि तुम इस पथ पर से अबसे पहले कभी नहीं आए हो।

और यहोशुआ ने लोगों से कहा, स्वयं को पुनीत कर लो: क्योंकि कल प्रभु तुम्हारे बीच अचरज भरे कार्य करेंगे।

और यहोशुआ उन पुरोहितों से बोला, कहता हुआ, ऊपर उठा लो प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को, और लोगों के आगे चलते जाओ। और उन्होंने प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ऊपर उठाया, और लोगों के आगे चल दिए।

और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, इस दिन मैं समस्त इस्राएल की दृष्टि में तुम्हें आवर्धित करना आरम्भ करूँगा, ताकि वह जान सकें, कि जैसे मैं मूसा के साथ था, वैसे ही मैं तुम्हारे साथ हूँगा।

और तुम उन पुरोहितों को जो प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढो रहे हैं आदेश दोगे, कहते हुए, जब तुम यर्दन के पानी के किनारे पहूँच जाओगे, तुम यर्दन में अचल खड़े हो जाओगे।

और यहोशुआ ने इस्राएल की सन्तानों से कहा, इधर जाओ, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर के शब्दों को सुन लो।

१० और यहोशुआ ने कहा, इस प्रकार तुम जान जाओगे कि वह जीवन्त ईश्वर तुम्हारे बीच हैं, और कि वह तुम्हारे सम्मुख कनानवासियों, और हित्ती वंशजों, और हिव्वीयों, और पेरिज़वासियों, और गिरगश-वंशजों, और एमोरवासियों, और यबूसी वंशजों को निश्च्य से ही बाहर खदेड़ देंगे।

११ देखो, समस्त पृथ्वी के प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र का संदूक तुम्हारे समक्ष पार जा रहा है यर्दन में। 

१२ अब इसलिए तुम इस्राएल की प्रजातियों में से बारह पुरुष ले लो, प्रत्येक प्रजाति में से एक पुरुष।

१३ और यह होने को आएगा, जैसे ही प्रभु के, समस्त पृथ्वी के प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोने वाले उन पुरोहितों के पाँवों के तलवे यर्दन के पानियों में टिकेंगे, कि यर्दन के पानी उन ऊपर से नीचे आते हुए पानियों से कट जाएँगे; और वह एक ढेर बनकर खड़े हो जाएँगे।

१४ और यह होने को आया, जब उन लोगों ने अपने शिविरों में से प्रस्थान किया, यर्दन को पार करने हेतु, और वह प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोने वाले पुरोहित लोगों के आगे;

१५ और जैसे वह जो उस संदूक को ढोने वाले यर्दन तक पहुँचे, और संदूक को ढोने वाले उन पुरोहितों के पाँव पानी के तट में डूबे, (क्योंकि यर्दन अपने तटों पर से समस्त फसल-कटाई के समय ऊपर प्रवाहित होती है,)

१६ कि वह पानी जो ऊपर से नीचे रहे थे खड़े होकर ऊपर एक ढेर में आदम नगर से बहुत दूर उठ गए, जो कि ज़रतन के साथ है: और वह जो नीचे मैदान के सागर की ओर रहे थे, नमक सागर ही, विफल हो गए, और कट गए: और वह जन यरीहो के ही ठीक विपरीत पार चले गए। 

१७ और प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोने वाले पुरोहित यर्दन के ही बीच सूखी धरती पर अचल खड़े हो गए, और समस्त इस्राएली सूखी धरती पर पार चले गए, जब तक कि सभी जन यर्दन पर से पूर्णतः पार जा चुके थे।



चौथा अध्याय।


और यह होने को आया, जब सभी जन यर्दन पर से पूर्णतः पार जा चुके थे, कि प्रभु यहोशुआ से बोले, कहते हुए,

बारह पुरुषों को लोगों में से ले ले, प्रत्येक प्रजाति में से एक पुरुष,

और उन्हें तुम आदेश दो, कहते हुए, तुम यहाँ से यर्दन के बीच में से बाहर बारह पत्थर निकाल लो, उसी स्थान में से जहाँ पुरोहितों के पाँव अचल खड़े थे, और तुम उन्हें अपने साथ पार उठा ले आओगे, और उन्हें उस निवास स्थान में छोड़ दोगे, जहाँ तुम इस रात निवास करोगे।

तब यहोशुआ ने उन बारह पुरुषों को बुलाया, जिन्हें उस ने इस्राएल की सन्तानों में से उद्यत किया था, प्रत्येक प्रजाति में से एक पुरुष:

और यहोशुआ ने उनसे कहा, प्रभु अपने ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक के सम्मुख यर्दन के बीच में ही पार चले जाओ, और प्रत्येक पुरुष तुम में से अपने कन्धे पर एक पत्थर उठा लेगा, इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों की संख्यानुसार ही:

ताकि यह तुम्हारे बेच एकि संकेत हो सके, कि जब तुम्हारी सन्तानें समय आने पर अपने पिताओं से पूछेंगी, कहती हुई, इन पत्थरों के विषय में आपका क्या अर्थ है?

तब तुम उन्हें उत्तर दोगे, कि प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक के सम्मुख यर्दन के पानी काट दिए गए थे; जब वह यर्दन के ऊपर पार गया था, यर्दन के पानी काट दिए गए थे: और यह पत्थर इस्राएल की सन्तानों के लिए एक सदैवत्वता का स्मारक होंगे।

और इस्राएल की सन्तानों ने ऐसा ही किया जैसा यहोशुआ ने आदेश दिया था, और यर्दन के बीच में से बाहर बारह पत्थर ऊपर निकाल लिए, जैसा प्रभु ने यहोशुआ से बोला था, इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों की संख्यानुसार ही, और उन्हें अपने साथ उठाकर उस स्थान तक पार ले गए जहाँ वह निवास कर रहे थे, और उन्हें वहीं नीचे रख छोड़ा।

और यहोशुआ ने यर्दन के बीच में बारह पत्थर स्थित कर दिए, उस स्थान में जहाँ संदूक को ढोने वाले उन पुरोहितों के पाँव खड़े थे: और वह वहीं हैं इसी दिन तक भी।

१० क्योंकि उस संदूक को ढोने वाले वह पुरोहित यर्दन के बीच में ही खड़े थे, जब तक कि वह सभी कुछ समाप्त हो चुका था जो प्रभु ने यहोशुआ को लोगों से बोलने का आदेश दिया था, उस सभी के अनुसार जो मूसा ने यहोशुआ को आदेश दिया था: और वह लोग फुर्ती से पार चले गए।

११ और यह होने को आया, जब सभी जन यर्दन पर से पूर्णतः पार जा चुके थे, कि प्रभु का संदूक पार गया, और वह पुरोहित, लोगों की उपस्थिति में।

१२ और रूबेन की सन्तानें, और गाद की सन्तानें, और मनश्शे की आधी प्रजाति, इस्राएल की सन्तानों के समक्ष सशस्त्रित पार गईं, जैसा मूसा ने उनसे बोला था;

१३ युद्ध के लिए प्रभु के सम्मुख लगभग चालीस हज़ार युद्ध हेतु उद्यत पार गए, यरीहो के मैदानों में।

१४ उस दिन प्रभु ने समस्त इस्राएल की दृष्टि में यहोशुआ को आवर्धित कर दिया; और उन्होंने उसका भय माना, जैसे उन्होंने मूसा का भय माना था, उसके जीवन के समस्त दिन।

१५ और प्रभु यहोशुआ से बोले, कहते हुए,

१६ साक्ष्य के संदूक को ढोने वाले उन पुरोहितों को आदेश दो, कि वह यर्दन में से ऊपर बाहर जाएँ।

१७ इसलिए यहोशुआ ने उन पुरोहितों को आदेश दिया, कहता हुआ, तुम यर्दन में से ऊपर बाहर जाओ।

१८ और यह होने को आया, जब प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोने वाले वह पुरोहित यर्दन के ही बीच में से ऊपर बाहर निकल आए थे, और उन पुरोहितों के तलवे सूखी धरती तक ऊपर उठ चुके थे, कि यर्दन के पानी वापस उनके स्थान में गए, और पहले समान उसके सभी किनारों पर प्रवाहित हो गए।

१९ और उस जनता ने पहले महीने के दसवें दिन पर यर्दन में से ऊपर बाहर निकल कर, गिलगल में पड़ाव डाल दिया, यरीहो की पूर्वी सीमा में।

२० और वह बारह पत्थर, जिन्हें उन्होंने यर्दन में से बाहर निकाले थे, यहोशुआ ने गिलगल में ही गाढ़ दिए।

२१ और वह इस्राएल की सन्तानों से बोला, कहता हुआ, जब तुम्हारी सन्तानें अपने पिताओं से आने वाले समय में पूछेंगी, कहती हुई, इन पत्थरों का क्या अर्थ है?

२२ तब तुम अपनी सन्तानों को अवगत करवाओगे, कहते हुए, इस्राएल सूखी भूमि पर इस यर्दन के पार आया था।

२३ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारे सामने से यर्दन के पानियों को सूखा दिया था, तुम्हारे पार चले जाने तक, जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने लाल समुद्र के साथ किया था, जिसे उन्होंने हमारे सामने सूखा दिया था, हमारे पार चले जाने तक:

२४ ताकि पृथ्वी की समस्त जनता प्रभु के हाथ से अवगत हो जाए, कि वह बलशाली है: ताकि तुम सदैवत्वता तक प्रभु अपने ईश्वर का भय मानो।



पाँचवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब एमोरवासियों के समस्त राजाओं ने, जो यर्दन की पश्चिमि ओर थे, और कनान-वासियों के सभी राजाओं ने, जो समुद्र के साथ थे, सुना की प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष यर्दन के पानियों को सूखा दिया था, हमारे पार चले जाने तक, कि उनके हृदय पिघल गए, ही उन में अब और कोई भी भावात्मा बची थी, इस्राएल की सन्तानों के कारण।

उस समय प्रभु ने यहोशुआ से कहा, तुम तीक्षण छुरे बना लो, और इस्राएल की सन्तानों का पुनः दूसरी बार ख़तना कर दो।

और यहोशुआ ने अपने लिए तीक्षण छुरे बना दिए, और इस्राएल की सन्तानों की आगे की चमड़ी का पहाड़ी पर ख़तना कर दिया।

और यह है यहोशुआ का ख़तना करने का कारण: वह सभी लोग जो मिस्र में से बाहर निकल कर आए थे, जो नर थे, सभी योद्धा पुरुष ही पथ पर जँगली-क्षेत्र में ही मर गए थे, मिस्र में से बाहर निकल आने के पश्चात।

अब सभी लोग जो बाहर निकल कर आए थे ख़तनित थे: परन्तु वह सभी जन जो जँगली-क्षेत्र में पथ पर जन्मे थे जैसे वह मिस्र में से बाहर निकले थे, उनका उन्होंने ख़तना नहीं किया था।

क्योंकि इस्राएल की सन्तानें जँगली-क्षेत्र में चालीस साल चलीं थीं, जब तक कि वो सभी लोग जो योद्धा पुरुष थे, जो मिस्र में से बाहर निकल कर आए थे, सफ़ाचट हो चुके थे, क्योंकि उन्होंने प्रभु की वाणी का अनुपालन नहीं किया था: जिन्हें प्रभु ने शपथ दी थी कि वह उन्हें भूमी नहीं दिखाएँगे, जिसका वचन प्रभु ने उनके पित्रों को दिया था कि वह हमें प्रदान कर देंगे, वह भूमी जो दूध और मधु से बहती है।

और उनकी सन्तानों का, जिन्हें उन्होंने उनके स्थान में स्थापित किया, उन्हीं का यहोशुआ ने ख़तना कर दिया: क्योंकि वह बेख़तनित थे, क्योंकि उन्होंने उनका पथ पर ख़तना नहीं किया था।

और यह होने को आया, जब उन्होंने उन सभी लोगों का ख़तना करना ख़त्म कर दिया था, कि वह शिविर में अपने स्थानों में बसे रहे, अपने ठीक हो जाने तक।

और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, इस दिन मैंने तुम पर से मिस्र की निंदा परे लुढ़का दी है। इस कारण वश इस दिन तक उस स्थान का नाम गिलगल कहलाया जाता है।

१० और इस्राएल की सन्तानों ने गिलगल में पड़ाव डाला, और यरीहो के मैदानों में संध्या के समय महीने के चौदहवें दिन में पार-करना रखा।

११ और उन्होंने अगले दिन पार-करने के पश्चात भूमी के पुराने अनाज में से ही खाया, बेख़मीरी रोटियाँ, और उसी दिन में भुना हुआ अनाज।

१२  और उनके भूमी के पुराने अनाज में से खा लेने के पश्चात अगले दिन मन्ना रुक गया; ही इस्राएल की सन्तानों के पास अब और कोई मन्ना था; बल्कि उन्होंने कनान की भूमी के फल में से ही उस वर्ष खाया।

१३ और यह होने को आया, जब यहोशुआ यरीहो के साथ था, उसने अपनी आँखें उठाईं और देखा, और देखो, उसके सामने एक पुरुष खड़े थे अपनी तलवार अपने हाथ में खींचे हुए: और यहोशुआ उनके पास गया, और उसने उनसे कहा, क्या तुम हमारे लिए हो, या हमारे प्रद्वंदियों के लिए?

१४ और उन्होंने कहा, नहीं; बल्कि मैं अब प्रभु की सेना का सेना-अध्यक्ष आया हूँ। और यहोशुआ धरती पर अपने चहरे के बल गिर पड़ा, और आराधना की, और उनसे कहा, मेरे प्रभु अपने नौकर से क्या कहते हैं?

१५ और प्रभु की सेना के सेना-अध्यक्ष ने यहोशुआ से कहा, अपने पैर पर से अपना जूता उतार लो; क्योंकि वह स्थान जिस पर तुम खड़े हो पवित्र है। और यहोशुआ ने वैसा ही कर दिया। 




छटा अध्याय।


अब यरीहो इस्राएल की सन्तानों के कारण कस कर बँद कर दिया गया था: कोई भी बाहर नहीं जाता था, और कोई भी भीतर नहीं आता था।

और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, देखो, मैंने तुम्हारे हाथ में यरीहो, और उसका राजा, और बलशाली पराक्रमी योद्धा पुरुष, प्रदान कर दिए हैं।

और तुम सभी योद्धा पुरुष नगर को घेर लोगे, और एक बार उस नगर की परिक्रमा करोगे। तुम इस प्रकार छह दिन करोगे।

और संदूक के आगे सात पुरोहित मेढ़ों के सींघों के सात चिंघाड़े उठा कर ले जाएँगे: और सातवें दिन तुम उस नगर की सात बार परिक्रमा करोगे, और वह पुरोहित उन चिंघाड़ो को बजा देंगे।

और यह होने को आएगा, कि जब वो मेढ़े के सींघ से एक लम्बी फूंक मचाएँगे, और जब तुम चिंघाड़े की ध्वनि सुनोगे, तो सभी लोग एक बड़ी चिल्लाहट के साथ चिल्ला पड़ेंगे; और उस नगर की दीवार समतल नीचे गिर जाएगी, और लोग ऊपर चढ़ाई कर लेंगे हर व्यक्ति सीधा-सीधा अपने आगे-आगे।

और नून के बेटे यहोशुआ ने पुरोहितों को बुलाया, और उनसे कहा, प्रतिज्ञा-पत्र के उस संदूक को ऊपर उठ लो, और सात पुरोहितों को प्रभु के संदूक के आगे-आगे मेढ़े के सींघों के सात चिंघाड़े उठा लेने दो।

और उसने लोगों से कहा, चलते चलो, और नगर को घेर लो, और उसे जो सशस्त्रित है प्रभु के संदूक के आगे-आगे चलते जाने दो।

और यह होने को आया, जब यहोशुआ ने लोगों से बोल दिया था, कि उन मेढ़े के सींघों के सात चिंघाड़े उठाए हुए वो सात पुरोहित प्रभु के आगे-आगे चलते गए, और उन्होंने वो चिंघाड़े बजा दिए: और प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र का वो संदूक उनके पीछे-पीछे रहा था।

और वो सशस्त्रित पुरुष उन पुरोहितों के सम्मुख गए जो चिंघाड़े बजा रहे थे, और पृष्ठरक्षक-दल संदूक के पश्चात रहा था, वो पुरोहित चलते जाते हुए, और चिंघाड़ों को बजाते हुए।

१० और यहोशुआ ने लोगों को आदेश दे दिया था, कहते हुए, तुम चिल्लाओगे नहीं, ही अपने वाणी से कोई भी शोर मचाओगे, ही तुम्हारे मूँह में से कोई भी शब्द बाहर निकलेगा, उस दिन तक जब मैं तुम्हें चिल्लाने के लिए कहूँगा; तब तुम चिल्लाओगे।

११ तो प्रभु के संदूक ने नगर की परिक्रमा कर दी, उसके चारों ओर एक बार जाकर: और वह शिविर में गए, और शिविर में वास किया।

१२ और यहोशुआ सुबह-सुबह उठा, और उन पुरोहितों ने प्रभु का वो संदूक ऊपर उठा लिया।

१३ और सात पुरोहित प्रभु के संदूक के आगे-आगे मेढ़े के सींघों के सात चिंघाड़े उठाए हुए लगातार चलते गए, और चिंघाड़ों को बजा रहे थे: और वो सशस्त्रित पुरुष उनके आगे-आगे जा रहे थे; परन्तु वो पृष्ठरक्षक-दल प्रभु के संदूक के पश्चात रहा था, वो पुरोहित चलते हुए, और चिंघाड़ों को बजाते हुए।

१४ और दूसरे दिन उन्होंने एक बार नगर की परिक्रमा की, और वापस शिविर में गए: ऐसा उन्होंने छह दिन किया।

१५ और यह होने को आया कि सातवें दिन, वो दिन के प्रभात में सुबह-सुबह उठे, और उसी रीति से नगर की सात बार परिक्रमा की: बस केवल उसी ही दिन उन्होंने नगर की परिक्रमा सात बार की।

१६ और यह होने को आया कि सातवीं बार, जब पुरोहितों ने चिंघाड़ों को बजाया, तो यहोशुआ ने लोगों से कहा, चिल्लाओ; क्योंकि प्रभु ने तुम्हें यह नगर दे दिया है।

१७ और यह नगर प्रभु के प्रति समर्पित होगा, यही, और वो सभी जो उस में है: केवल वो वैश्या रहाब जीएगी, वो, और वो सभी जो उसके साथ घर में हैं, क्योंकि उसने उन संदेशवाहकों को छुपाया था जिन्हें हमने भेजा था।

१८ और तुम, हर प्रकार से स्वयं को समर्पित वस्तु से परे रखना, कहिं तुम स्वयं को श्रापित बना दो, जब तुम उस समर्पित वस्तु में से ले लो, और इस्राएल के शिविर को एक श्राप बना दो, और उसे विचलित कर दो। 

१९ परन्तु समस्त रजत, और सोना, और पीतल और लोहे के पात्र, प्रभु के प्रति समर्पित हैं: वो प्रभु के ही कोषागार में आएँगे।

२० तो वो लोग चिल्ला पड़े जब उन पुरोहितों ने चिंघाड़ों को बजाया: और यह होने को आया, जब लोगों ने चिंघाड़े की ध्वनि सुनी, और वो लोग एक बड़ी चिल्लाहट से चिल्ला पड़े, कि भई वो दीवार नीचे समतल गिर पड़ी, तो उन लोगों ने नगर में ऊपर जाकर प्रवेश कर लिया, हर पुरुष अपने आगे-आगे सीधा-सीधा, और उन्होंने उस नगर पर अधिकार कर डाला।

२१ और उन्होंने तलवार की धार से उस सभी को पूर्णता से ही नष्ट कर डाला जो कुछ भी उस नगर में था, दोनो नर और नारी, युवा और वृद्ध, और साँड, और भेड़, और गधा।

२२ परन्तु यहोशुआ ने उन दोनो पुरुषों से कह दिया था जिन्होंने प्रदेश की गुप्तचरी की थी, उस वैश्या के घर में चले जाओ, और वहाँ से उस स्त्री को, और उस सभी को जो उसके पास है, बाहर निकाल लाओ, जैसा तुमने उसे वचन दिया था।

२३ और वो युवा पुरुष जो गुप्तचर थे अन्दर गए, और रहाब, और उसके पिता, और उसकी माँ, और उसके भाई-जनो, और उस सभी को जो उसके पास था बाहर निकाल लाए; और वो उसके समस्त कुल को बाहर निकाल लाए, और उन्हें इस्राएल के शिविर के बाहर छोड़ दिया।

२४ और उन्होंने उस नगर को और उस सभी को जो उस में था, अग्नी से जला डाला: बस केवल वो रजत, और सोना, और पीतल और लोहे के पात्र, उन्होंने प्रभु के कोषागार में रख दिए।

२५ और यहोशुआ ने रहाब उस वैश्या को, और उसके पिता के घरबार को, और उस सभी को जो उसके पास था, जीवित बचा लिया; और वो इस दिन तक इस्राएल में ही निवास करती है; क्योंकि उसने उन दूतों को छुपाया था, जिन्हें यहोशुआ ने यरीहो की गुप्तचरी करने हेतु भेजा था।

२६ और यहोशुआ ने उन्हें उस समय सौगन्ध दिलवाई, कहते हुए, प्रभु के सम्मुख शापित हो वो आदमी जो इस नगर यरीहो का उठ कर निर्माण करता है: वो अपने प्रथम जन्मे में उसकी नीव बिछाएगा, और अपने सबसे छोटे बेटे में वो उसके दरवाज़ों को स्थापित करेगा।

२७ तो प्रभु यहोशुआ के साथ थे; और उसकी कीर्ती देश के सर्वत्र में फैल गई।  



सातवाँ अध्याय।


परन्तु इस्राएल की सन्तानों ने उस समर्पित वस्तु में अपराध कर डाला: यहूदा की प्रजाति के ज़ेरह के बेटे ज़ब्दी के बेटे कर्मी के बेटे अकन ने उस समर्पित वस्तु में से ले लिया: और प्रभु का क्रोध इस्राएल की सन्तानों के विरुद्ध सुलग उठा।

और यहोशुआ ने यरीहो से आदमियों को एय भेजा, जो बेत-आवन के साथ है, बेतएल के पूर्वी पाशर्व पर, और उनसे बोला, कहता हुआ, ऊपर जाकर देश का भेद निकाल लो। और उन व्यक्तियों ने ऊपर जाकर एय का भेद निकाल लिया।

और उन्होंने यहोशुआ के पास वापस लौटकर उस से कहा, सभी लोगों को ऊपर मत जाने डो; बल्कि लगभग दो या तीन हज़ार आदमियों को ऊपर जाकर एय पर प्रहार कर देने दो; वहाँ सभी लोगों को मत थकाओ; क्योंकि वह तो बस थोड़े से ही हैं।

तो लोगों में वहाँ लगभग तीन हज़ार पुरुष ऊपर चल पड़े: और वह एय के आदमियों के सामने भाग खड़े हुए।

और एय के आदमियों ने उन में से लगभग छत्तीस आदमियों को मार दिया: क्योंकि उन्होंने दरवाज़े से लेकर शेबरिम तक भी उनका पीछा किया, और उन्हें ढलान पर मार गिराया: इस कारण वश लोगों के मन पिघल गए और पानी समान बन गए।

और यहोशुआ ने अपने कपड़े फाड़ डाले, और साँझ तक वह प्रभु के संदूक के समक्ष अपने चहरे के बल धरती पर गिर गया, वह और इस्राएल के वृद्ध-गण, और अपने सरों पर धूल डाल दी। 

और यहोशुआ ने कहा, हाय, हे प्रभु ईश्वर, आप किस कारण वश ही इस जनता को यर्दन पार लाए हैं, हमें एमोरवासियों के हाथ में प्रदान कर हमारा विनाश कर देने हेतु क्या? काश कि हम यर्दन के उसी पार ही संतुष्ट बसते रहते!

हे प्रभु, मैं क्या कहूँ, जब इस्राएल अपने शत्रुओं के समक्ष अपनी पीठें मोड़ देते हैं! 

क्योंकि कनानवासी और भूमी के समस्त निवासी यह सुनेंगे, और हमें चारों ओर से घेर लेंगे, और पृथ्वी पर से हमारे नाम को काट डालेंगे: और क्या करेंगे आप अपने महान नाम के लिए?

१० और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, तुम ऊपर उठो; अपने चहरे पर इस प्रकार तुम क्यों पड़े हुए हो?

११ इस्राएल ने पाप कर दिया है, और उन्होंने मेरे प्रतिज्ञा-पत्र के प्रति जो मैंने उन्हें आदेश दिया था अतिक्रमण भी कर डाला है: क्योंकि इन्होंने उस समर्पित वस्तु में से ही ले लिया है, और इन्होंने चोरी भी कर ली है, और धोखा भी दे दिया है, और इन्होंने उसे अपने ही सामान में भी रख दिया है।

१२ इसी कारण इस्राएल की सन्तानें अपने शत्रुओं के समक्ष खड़े नहीं रह सके, बल्कि इन्होंने अपनी पीठें अपने शत्रुओं की ओर मोड़ दीं, क्योंकि वह शापित थे: ही मैं तुम्हारे साथ अब और रहूँगा, सिवाय कि तुम उस समर्पित वस्तु का अपने बीच में से विध्वंस कर दो।

१३ उठो, पुनीत करो लोगों को, और कहो, स्वयं को कल के प्रति पुनीत कर दो: क्योंकि इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, हे इस्राएल, तुम्हारे बीच में एक समर्पित वस्तु है: तुम अपने शत्रुओं के सामने नहीं खड़े हो पाओगे, जब तक कि तुम वह समर्पित वस्तु अपने बीच में से परे नहीं ले जाओगे।

१४ इसलिए प्रातः में तुम अपनी प्रजातियोंनुसार लाए जाओगे: और यह होगा, कि वह प्रजाती जिसे प्रभु पकड़ लेते हैं उसके परिवारोंनुसार जाएगी; और वह परिवार जिसे प्रभु पकड़ लेंगे घरबारों के साथ जाएगा; और वह घरबार जिसे प्रभु पकड़ लेंगे एक-एक मानुष जाएगा।

१५ और यह होगा, कि वह जो उस समर्पित वस्तु के साथ पकड़ लिया जाएगा अग्नी से भस्म कर दिया जाएगा, वह और वह सब कुछ जो उसके पास है: क्योंकि उसने प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के प्रति अतिक्रमण कर दिया है, और क्योंकि उसने इस्राएल में अशनता क्रियान्वित कर दी है।

१६ तो यहोशुआ सुबह सुबह उठा, और इस्राएल को उनकी प्रजातियोंनुसार ले आया; और यहूदा की प्रजाती पकड़ी गई:

१७ और वह यहूदा के पारिवर को ले आया; और उन्होंने ज़ेरह-वंशजों के परिवार को पकड़ लिया: और वह ज़ेरह-वंशजों के परिवार एक-एक मानुष करके ले आया; और ज़ब्दी पकड़ा गया:

१८ और वह उसके घरबार को एक-एक मानुष करके लाया; और यहूदा की प्रजाति के ज़ेरह के बेटे ज़ब्दी के बेटे कर्मी के बेटे अकन को पकड़ लिया गया।

१९ और यहोशुआ ने अकन से कहा, मेरे बेटे, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इस्राएल के प्रभु ईश्वर को महिमा दे दो, और उनसे स्वीकार कर लो; और मुझे अभी बता दो कि तुमने क्या कर दिया है; मुझ से मत छुपाओ।

२० और अकन ने यहोशुआ को उत्तर दिया, और कहा, वास्तव में ही मैंने इस्राएल के प्रभु ईश्वर के विरुद्ध पाप कर दिया है, और ऐसा-ऐसा मैंने कर दिया है:

२१ जब मैंने लूट-पाट के बीच एक बेबिलोन के अच्छे वस्त्र को, और चाँदी के दो सौ शेकलों, और पचास शेक्ल भार की एक सोने की ईंट को देखा, तो मैंने उनके लिए लोलुप होकर उन्हें ले लिया; और देखो, वह मेरे तम्बू के बीच में धरती में ही छिपे हैं, और वह चाँदी उसके नीचे।

२२ तो यहोशुआ ने दूतों को भेजा, और वह तम्बू तक भाग कर गए; और देखो, वह उसके तम्बू में छिपा हुआ था, और वह चाँदी उसके तले।

२३ और उन्होंने उन्हें तम्बू के बीच में से बाहर निकाल लिया, और उन्हें यहोशुआ के पास, और इस्राएल की समस्त सन्तानों के पास ले आए, और उन्हें प्रभु के समक्ष बाहर बिछा दिया।

२४ और यहोशुआ और उसके साथ समस्त इस्राएल ने ज़ेरह के बेटे अकन, और वह चाँदी, और वह वस्त्र, और वह सोने की ईंट, और उसके बेटों को, और उसकी बेटियों को, और उसके सांडों को, और उसके गधों को, और उसके भेड़ों को, और उसके तम्बू को, और उस सभी को जो उसके पास था, ले लिया: और वह उन्हें अकोर की घाटी में ले आए।

२५ और यहोशुआ ने कहा, तुमने हमें क्यों विचलित किया है? प्रभु तुम्हें इस दिन विचलित कर देंगे। और समस्त इस्राएल ने उस पर पत्थरों से पथराव कर दिया, और उन्हें अग्नी से भस्म कर डाला, उन पर पत्थरों से पथराव कर देने के पश्चात।

२६ और उन्होंने इस दिन तक उस पर पत्थरों का एक विशाल ढेर खड़ा कर दिया। इस प्रकार प्रभु अपने क्रोध की क्रुद्धता से मुड़े। इसी कारण वश उस स्थान का नाम इस दिन तक अकोर की घाटी कहलाया जाता था।



आठवाँ अध्याय।


और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, डरो मत, ही तुम निराश हो: अपने साथ समस्त युद्ध के जने ले लो, और उठो, ऊपर एय चले जाओ: देखो, मैंने तुम्हारे हाथ में एय का राजा, और उसके जने, और उसका नगर, और उसकी भूमी, प्रदान कर दिए हैं:

और तुम एय और उसके राजा के साथ कर दोगे जैसा तुमने यरीहो और उसके राजा के साथ कर दिया था: बस केवल उसकी लूट-पाट, और उसके मवेशी तुम अपने स्वयं के लिए लूट लोगे: तुम नगर के लिए उसके पीछे घात लगा दो।

तो यहोशुआ उठा, और युद्ध के सभी जने, एय के विरुद्ध ऊपर जाने हेतु: और यहोशुआ ने तीस हज़ार बलशाली पराक्रमी नर योद्धा चुने, और उन्हें रातों-रात भेज दिया।

और उसने उन्हें आदेश दिया, कहते हुए, देखो, तुम नगर के साथ घात लगाओगे नगर के पीछे ही: नगर से बहुत दूर मत जाना, परन्तु तुम सभी तैयार रहना:

और मैं, और वह सभी जने जो मेरे साथ हैं, नगर के निकट आएँगे: और यह होने को आएगा, जब वह हमारे विरुद्ध, पहली बार के जैसे बाहर निकल आएँगे, कि हम उनके सामने भाग खड़े होंगे,

(क्योंकि वह हमारे पीछे बाहर निकल आएँगे) जब तक कि हमने उन्हें नगर से खींच लिया होगा; क्योंकि वह कहेंगे, यह तो हमारे सामने से पहली बार के जैसे भाग रहे हैं: इसलिए हम उनके सामने से भाग खड़े होंगे।

तब तुम अपनी घात लगाने के स्थान से उठोगे, और नगर पर अधिकार कर लोगे: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर देंगे।

और यह होगा, कि जब तुमने वह नगर पकड़ में ले लिया होगा, कि तुम उस नगर को अग्नी से भस्म कर दोगे: प्रभु के आदेशानुसार ही तुम करोगे। देखो, मैंने तुम्हें आदेश दे दिया है।

यहोशुआ ने इसलिए उन्हें बाहर भेज दिया: और वह घात लगाने चले गए, और बेतएल और एय के बीच बैठ गए, एय के पश्चिमि पाशर्व पर: परन्तु उस रात यहोशुआ लोगों के बीच ठहरे रहा।

१० और यहोशुआ सुबह-सुबह उठा, और जनो की गिनती ली, और ऊपर गया, वह और इस्राएल के वृद्ध-गण, लोगों के सामने एय की ओर।

११ और सभी जने, युद्ध के जने ही जो उसके साथ थे, ऊपर गए, और निकट आए, और नगर के सामने गए, और एय के उत्तरी पाशर्व में डेरा डाल दिया: अब उनके और एय के बीच एक घाटी थी।

१२ और उसने लगभग पाँच हज़ार पुरुष लिए, और उन्हें बेतएल और एय के बीच, नगर के पश्चिमी पाशर्व पर घात लगाने हेतु स्थित कर दिया। 

१३ और जब उन्होंने उन लोगों को स्थित कर दिया था, सारी सेना को ही जो नगर के उत्तर की ओर थी, और उनके घात लगाए हुए नगर के पश्चिमि में, यहोशुआ उसी रात घाटी के बीच में चला गया।

१४ और यह होने को आया, जब एय के राजा ने यह देखा, कि वह शीघ्रता से ही सुबह-सुबह उठे, और उस नगर के आदमी इस्राएल के विरुद्ध युद्ध करने बाहर चले गए, वह और उसके सभी जने, एक निश्चित समय पर मैदान के सामने ही; परन्तु वह अवगत था कि उसके विरुद्ध नगर के पीछे वह घात लगाए बैठे थे।

१५ और यहोशुआ और समस्त इस्राएल ने ऐसा किया कि मानो वह उनके सामने पिट गए थे, और पथ पर से जँगली-क्षेत्र में भाग खड़े हुए।

१६ और वह सभी लोग जो एय में थे एक साथ ही बुला लिए गए थे उनका पीछा करने हेतु: और उन्होंने यहोशुआ का पीछा किया, और नगर से दूर खींच लिए गए।

१७ और एय या बेतएल में एक भी आदमी बचा रहा, जो इस्राएल का पीछा करता हुआ बाहर नहीं गया: और उन्होंने उस नगर को खुला छोड़ दिया, और इस्राएल के पीछे पड़ गए।

१८ और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, एय की ओर अपने हाथ में उस भाले को बाहर फैला दो; क्योंकि मैं उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा। और यहोशुआ ने उस भाले को जो उसके हाथ में था, नगर की ओर फैला दिया।

१९ और वह घात लगाए हुए अपने स्थान में से फुर्ती से उठे, और वह उसके हाथ के फैलाते ही भाग पड़े: और उन्होंने नगर में प्रवेश कर कर उस पर अधिकार जमा लिया, और शीघ्रता से उस नगर को आग लगा दी।

२० और जब एय के आदमियों ने अपने पीछे देखा, उन्होंने देखा, और देखो तो, नगर का धूआँ स्वर्ग तक ऊपर उठ रहा था, और उनके पास शक्ती ही थी इस ओर या उस ओर भाग जाने की: और वह जने जो जँगली-क्षेत्र की ओर भागे थे अपने पीछा-करने वालों पर वापस मुड़ गए।

२१ और जब यहोशुआ और समस्त इस्राएल ने देखा कि उन घात लगाने वालों ने नगर पर अधिकार कर लिया था, और कि उस नगर का धूआँ ऊपर उठ रहा था, तो उन्होंने पुनः मुड़ कर एय के आदमियों को मार डाला।

२२ और वह अन्य उनके विप्रीत नगर में से बाहर निकले; तो वह इस्राएल के बीच में थे, कुछ इस ओर, और कुछ उस ओर: और उन्होंने उन पर वार कर दिया, कि उन्होंने उन में से किसी को भी बचे रहने या भाग जाने नहीं दिया।

२३ और उन्होंने एय के राजा को जीवित पकड़ लिया और उसे यहोशुआ के पास ले आए।

२४ और यह होने को आया, जब इस्राएल ने एय के सभी निवासियों को खेत में, जँगली-क्षेत्र में जहाँ उन्होंने उनका पीछा किया था, मार डालने का अन्त कर दिया था, और जब वह सभी तलवार की धार पर गिर पड़े थे, जब तक कि वह सफ़ाचट हो चुके थे, कि सभी इस्राएली एय में वापस गए, और उस पर तलवार की धार से प्रहार कर डाला।

२५ और यह ऐसा ही था, कि वह सभी जो उस दिन गिरे, दोनो आदमी और औरतें, बारह हज़ार थे, एय के सभी मानुष ही।

२६ क्योंकि यहोशुआ ने अपना हाथ नहीं रोका, जिस से कि उसने उस भाले को फैलाया था, जब तक कि उसने एय के समस्त निवासियों को पूर्णतः से नष्ट नहीं कर डाला था।

२७ बस केवल उस नगर के मवेशी और उसकी लूट-पाट इस्राएल ने अपने स्वयं के लिए लूट ली, प्रभु के उस शब्दानुसार ही जो उन्होंने यहोशुआ को आदेश दिया था।

२८ और यहोशुआ ने एय को जला डाला, और उसे सदैवत्वता के लिए एक ढेर, एक उजाड़ ही, इस तक ही बना डाला।

२९ और उसने साँझ के समय तक एय के राजा जो एक पेड़ पर टाँग दिया था: और सूर्य के ढलते ही, यहोशुआ ने आदेश दिया कि वह उसके शव को पेड़ पर से नीचे उतार लें, और उसे उस नगर के प्रवेश-द्वार पर फैंक दें, और उस पर पत्थरों का एक बड़ा ढेर खड़ा कर दें, जो इस दिन तक भी वहीं है।

३० तब यहोशुआ ने इस्राएल के प्रभु इश्वर के प्रति आयबल पहाड़ पर एक बलिवेदी का निर्माण किया, 

३१ जैसा प्रभु के सेवक मूसा ने इस्राएल की सन्तानों को आदेश दिया था, जैसा की मूसा के नियम की पुस्तक में लिखा हुआ है, पूरे पत्थरों की एक बलिवेदी, जिस पर किसी भी पुरुष ने कोई भी लोहा चलाया हो: और उन्होंने उस पर प्रभु के प्रति जले-चढ़ावे चढ़ाए, और शांति-चढ़ावों की बलि दी।

३२ और उसने वहीं उन पत्थरों पर मूसा के नियम की प्रतिलिपि लिख दी, जिसे उसने इस्राएल की सन्तानों की उपस्थिति में  लिखी।

३३ और समस्त इस्राएल, और उनके वृद्ध-गण, और अफ़सर, और उनके न्यायधीष, संदूक के इस ओर और उस ओर खड़े हो गए, उन लेवी-वंशज पुरोहितों के सामने, जो प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोते हैं, वह प्रवासी भी, उसी के समान जो उनके बीच जन्मा था; उन में से आधे गरज़िम पहाड़ के विपरीत थे, और उन में से आधे आयबल पहाड़ के विपरीत थे; जैसा प्रभु के सेवक मूसा ने पहले से ही आदेश दे दिया था, कि वह इस्राएल के लोगों को आशीष दें।

३४ और उसके पश्चात उस ने नियम के समस्त शब्द पढ़े, वह आशीर्वाद और श्राप, उस सभी के अनुसार जो नियम की पुस्तक में लिखा हुआ है।

३५ उस सभी में से जो मूसा ने आदेश दिया था, ऐसा एक भी शब्द था जो यहोशुआ ने पढ़ा था, इस्राएल की समस्त सभा के समक्ष, स्त्रियों और छोटे-नन्हों, और उनके बीच आने-जाने वाले उन प्रवासियों के साथ।




नौवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब उन सभी राजाओं, जो यर्दन के इस पार थे, पहाड़ियों में, और घाटियों में, और महा सागर की समस्त सीमाओं में लबानोन के सामने, हित्ती-वंशज, और एमोरवासियों, कनान-वासी, पेरिज़वासी, हिव्वी-वंशज, और यबूसी-वंशज, ने इसके विषय में सुना;

तो उन्होंने स्वयं को एक साथ एक ही मत से एकत्रित कर लिया, यहोशुआ के साथ और इस्राएल के साथ लड़ने हेतु।

और जब गिब्यन के निवासियों ने सुना कि यहोशुआ ने यरीहो और एय के साथ क्या कर दिया था,

तो उन्होंने कपटता की, और जाकर स्वयं को ऐसा बना दिया मानो कि वह राज-दूत हों, और अपने गधों पर पुराने बोरे लाद लिए, और पुरानी अंगूर-रस की फटी हुई पट्टियों से बँधी बोतलें;

और अपने पैरों पर घिसे हुए पट्टियों से बँधे जूते, और घिसे हुए वस्त्र पहने हुए; और उनकी भोजन-सामग्री की रोटी सूखी और फफूँदी भरी थी।

और वह गिलगल में छावनी तक यहोशुआ के पास चले गए, और उस से, और इस्राएल के पुरुषों से कहा, हम एक दूर-देश से आए हैं: इसलिए अब आप हमारे साथ एक संगठन बना लें।

और इस्राएल के पुरुषों ने उन हिव्वी-वंशजों से कहा, मान लो कि तुम हमारे बीच ही बसते हो; और हम कैसे तुम्हारे साथ एक संगठन बना लें?

और उन्होंने यहोशुआ से कहा, हम आपके नौकर हैं। और यहोशुआ ने उनसे कहा, कौन हो तुम? और कहाँ से आए हो तुम?

और उन्होंने उस से कहा, प्रभु आपके ईश्वर के नाम के कारण एक बहुत दूर-देश से आपके नौकर आए हैं: क्योंकि हम ने सुन ली है उनकी कीर्ती, और वह सभी जो उन्होंने मिस्र में किया,

१० और वह सब कुछ जो उन्होंने यर्दन पार एमोरवासियों के उन दो राजाओं के साथ किया, हेश्बोन के राजा सिहोन के साथ, और बशान के राजा ओग के साथ, जो अश्तरोत में था।

११ इसी कारण वश हमारे वृद्ध-गणों और हमारे देश के समस्त निवासी हम से बोले, कहते हुए, यात्रा के लिए अपने साथ खाद्य-पदार्थादी रख लो, और जाकर उनसे भेंट करो, और उनसे कहो, हम आपके नौकर हैं: इसलिए अब हमारे साथ एक संगठन बना लें। 

१२ उस दिन जब हम आपके पास जाने हेतु अपने घरों में से बाहर निकले थे यह हमारी भोजन-सामग्री के लिए रोटी गरम थी; परन्तु अब देख लें, यह तो सूखी हुई और फफूँदी भरी है:

१३ और अंगूर-रस की यह बोतलें जिन्हें हमने भरा था, नई थीं; और देखें, यह तो फट चुकी हैं: और यह हमारे वस्त्र और हमारे जूते उस बहुत ही लम्बी यात्रा के कारण पुराने हो चले हैं!

१४ और उन लोगों ने उनकी खाद्य-सामग्री में से तो ले लिया, और प्रभु के मूँह पर से परामर्श नहीं पूछा।

१५ और यहोशुआ ने उनके साथ शान्ति बना ली, और उनके साथ एक सगठन बना लिया, उन्हें जीवित रहने हेतु: और सभा के अध्यक्षों ने उन्हें वचन दे दिया।

१६ और यह होने को आया उनके उनके साथ संगठन बना लेने के तीन दिनो के अन्त के पश्चात, कि उन्होंने सुना की वह तो उनके पड़ौसी थे, और कि वह तो भई उन्हीं के बीच ही बसते थे!

१७ और इस्राएल की सन्तानों ने यात्रा की, और तीसरे दिन वह उनके नगरों तक पहूँच गए। अब उनके नगर गिब्यन, और केफिरा, और बीरोथ, और किरयथयरिम थे।

१८ और इस्राएल की सन्तानों ने उन पर प्रहार नहीं किया, क्योंकि सभा के अध्यक्षों ने उन्हें इस्राएल के प्रभु ईश्वर से वचन दे दिया था। और समस्त सभा उन अध्यक्षों के विरुद्ध बड़बड़ा पड़ी।

१९ परन्तु सभी अध्यक्षों ने समस्त सभा से कहा, हम ने तो उन्हें इस्राएल के प्रभु ईश्वर से वचन दे दिया है: इसलिए अब हम उन्हें नहीं छू सकते!

२० हम उनके साथ यह कर देंगे; हम उन्हें जीवित ही रहने देंगे, कहिं हम पर आक्रोश पड़े, उस शपथ के कारण जिसका हमने उन्हें वचन दे दिया है।

२१ और उन अध्यक्षों ने उन से कहा, उन्हें जीवित रहने दो; परन्तु उन्हें समस्त सभा के लिए लकड़हारे और पानी खींचने वाले बन जाने दो; जैसा अध्यक्षों ने उन्हें वचन दिया था।

२२ और यहोशुआ ने उन्हें बुलवा भेजा, और वह उनसे बोला, कहता हुआ, तुम ने हमें किस कारण वश छलित कर दिया, कहते हुए, हम तो तुम से बहुत ही दूर हैं; जब कि तुम तो हमारे ही बीच बसते हो?

२३ इसलिए अब तुम श्रापित हो, और तुम में से कोई भी मेरे ईश्वर के घर के लिए बंध्वा-दास, और लकड़हारा और पानी खींचने वाला बनने से मुक्त नहीं होगा।

२४ और उन्होंने यहोशुआ को उत्तर दिया, और कहा, चूँकि यह आपके नौकरों को निश्च्य से ही बता दिया गया था, कि कैसे प्रभु आपके ईश्वर ने मूसा उनके सेवक को आदेश दिया था, आपको यह समस्त भूमी प्रदान कर देने का, और आपके सामने से भूमी के समस्त निवासियों का विध्वंस कर देने का, इसलिए हम आपके कारण अपने जीवनों के लिए घोर भयभीत हो गए थे, और यह कर दिया है।

२५ और अब देख लें, हम आपके हाथ में हैं: जैसा आपको हमारे साथ करना भला और सही लगे, कर दें।

२६ तो वैसा ही उसने उनके साथ कर दिया, और उनका इस्राएल की सन्तानों के हाथ से बाहर उद्धार कर दिया, कि उन्होंने उन्हें मार नहीं डाला।

२७ और उस दिन यहोशुआ ने उन्हें, इस दिन तक भी, सभा के लिए और प्रभु की बलिवेदी के लिए लकड़हारा और पानी खींचने वाला बना दिया, उस स्थान में जिसे वह चुनें।



दसवाँ अध्याय।


अब यह होने को आया, जब यरूशलेम के राजा अदोनीज़दक ने सुन लिया था कि कैसे यहोशुआ ने एय पर अधिकार कर कर, उसे पूर्णतः नष्ट कर डाला था; जैसा कि उसने यरीहो और उसके राजा के साथ कर दिया था, वैसा ही उसने एय और उसके राजा के साथ कर डाला था; और कि कैसे गिब्यन के निवासियों ने इस्राएल के साथ शान्ति बना ली थी, और उन्हीं के बीच ही थे;

कि वो बहुत ही डर गए थे, चूँकि गिब्यन एक महा नगर था, राजसी नगरों के जैसा, और क्योंकि वह एय से महान था, और उसके सभी आदमी शूरवीर थे।

इसी कारण वश यरूशलेम के राजा अदोनीज़दक ने हेब्रोन के राजा होहम, और यरमुत के राजा पिरम, और लकिश के राजा यफिया, और एग्लोन के राजा दबर को भिजवाया, कहते हुए,

ऊपर मेरे पास आकर मेरी सहायता करो, ताकि हम गिब्यन पर प्रहार कर दें: क्योंकि उसने यहोशुआ के साथ और इस्राएल की सन्तानों के साथ शान्ति बना ली है।

इसलिए एमोरवासियों के उन पाँच राजाओं ने, यरूशलेम के राजा ने, हेब्रोन के राजा ने, यरमुत के राजा ने, लकिश के राजा ने, और एग्लोन के राजा ने, स्वयं को एक साथ एकत्रित कर लिया, और ऊपर चले गए, वह और उनकी सभी सेनाएँ, और गिब्यन के सामने पड़ाव डाल दिया, और उसके विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया।

और गिब्यन के लोगों ने गिलगल की छावनी में यहोशुआ को भिजवाया, कहते हुए, अपने नौकरों के प्रति अपना हाथ ढीला करें; शीघ्रता से हमारे पास ऊपर आकर हमें बचा लें और हमारी सहायता करें: क्योंकि पर्वतों में बसने वाले एमोरवासियों के सभी राजा हमारे विरुद्ध एक साथ संघाधीन हो गए हैं। 

तो यहोशुआ ने गिलगल से चढ़ाई की, उस ने, और उसके साथ सभी योद्धा पुरुषों ने, और सभी बलशाली पराक्रमी पुरुषों ने।

और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, उस ने मत डरना: क्योंकि मैंने उन्हें तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है; उन में से एक भी आदमी तुम्हारे सामने टिका नहीं रहेगा।

इसलिए यहोशुआ उन के पास अचानक ही धमका, और गिलगल से सारी रात ऊपर चलता गया।

१० और प्रभु ने उन्हें इस्राएल के समक्ष अस्त-व्यस्त कर डाला, और उनका गिब्यन में एक बड़े ही संघार के साथ संघार कर डाला, और उन्हें उस पथ के साथ-साथ भगा दिया जो बेतहोरोन तक ऊपर जाता है, और उन्हें अज़का तक और मकदा तक पीट डाला।

११ और यह होने को आया, कि जैसे वह इस्राएल के समक्ष भाग रहे थे, और वह होरोन तक की ढलान में थे, कि प्रभु ने उन पर अज़का तक विशाल पत्थर स्वर्ग में से नीचे फ़ेक डाले, और वह मर गए: उन ओलों से मारे जाने वाले उन से अधिक थे जिन्हें इस्राएल की सन्तानों ने तलवार से मारा।

१२ तब यहोशुआ प्रभु से बोला उस दिन में जब प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने उन एमोरवासियों को प्रदान कर दिया था, और उसने इस्राएल की दृष्टि में कहा, तू सूरज, गिब्यन पर अचल खड़ा रह; और तू चंद्रमा, अएलोन की घाटी में।

१३ और सूरज अचल खड़ा रहा, और चंद्रमा ठहरा रहा, जब तक कि लोगों ने अपने शत्रुओं पर अपना प्रतिषोध नहीं ले लिया था। क्या यह यशर की पुस्तक में नहीं लिखा हुआ है क्या? तो सूरज स्वर्ग के बीच में अचल खड़ा रहा, और लगभग एक पूरे दिन उसने ढलने हेतु हड़बड़ी नहीं की।

१४ और उसके समान ऐसा कोई भी दिन था, उस से पूर्व या उसके पश्चात, कि प्रभु ने एक पुरुष की वाणी का श्रवण किया हो: क्योंकि प्रभु इस्राएल के लिए लड़े थे।

१५ और यहोशुआ लौट आया, और उसके साथ समस्त इस्राएल, गिलगल की छावनी में।

१६ परन्तु यह पाँच राजा भाग-खड़े हुए, और स्वयं को मकदा में एक गुफा के अन्दर छुपा लिया।

१७ और यह यहोशुआ को बताया गया था, कहते हुए, वह पाँच राजा मकदा में एक गुफा में छुपे हुए पाए गए हैं।

१८ और यहोशुआ ने कहा, उस गुफा के मूँह पर बड़े पत्थर लुढ़का दो, और उन पर पहरेदारी करने के लिए आदमियों को स्थित कर दो:

१९ और तुम ठहरे मत रहो, बल्कि अपने शत्रुओं का पीछा करो, और उनके सबसे पृष्ठ-भाग वालों को पीट दो; उन्हें उनके नगरों में प्रवेश मत करने दो: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उन्हें तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है। 

२० और यह होने को आया, जब यहोशुआ और इस्राएल की सन्तानों ने उनके सफ़ाचट हो जाने तक, उनका एक बहुत ही बड़े संहार से संहार कर देने का अन्त कर दिया था, कि उन में से शेष जो बचे रह गए थे क़िलेबन्द नगरों में घुस गए। 

२१ और सभी जन यहोशुआ के पास मकदा में शान्ति से छावनी वापस लौट आए: किसी ने भी इस्राएल की सन्तानों के विरुद्ध अपनी जीभ नहीं हिलाई।

२२ तब यहोशुआ ने कहा, गुफा का मूँह खोल कर उन पाँचों राजाओं को मेरे पास गुफा से बाहर ले आओ।

२३ और उन्होंने ऐसा ही कर दिया, और उन पाँच राजाओं को उसके पास गुफा में से बाहर ले आए, यरूशलेम के राजा को, हेब्रोन के राजा को, यरमुत के राजा को, लकिश के राजा को, और एग्लोन के राजा को।

२४ और यह होने को आया, जब वह उन राजाओं को यहोशुआ के पास बाहर ले आए, कि यहोशुआ ने इस्राएल के समस्त पुरुषों को बुलवा लिया, और उन योद्धा पुरुषों के कप्तानों से कहा जो उसके साथ गए थे, निकट जाओ, अपने पैरों को इन राजाओं की गर्दनों पर रख दो। और वह निकट गए, और अपने पैरों को उनकी गर्दनों पर रख दिया।

२५ और यहोशुआ ने उनसे कहा, डरो मत, ही निराश हो, दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो: क्योंकि इसी प्रकार ही प्रभु तुम्हारे समस्त शत्रुओं के साथ कर देंगे जिनके विरुद्ध तुम लड़ते हो।

२६ और बाद में यहोशुआ ने उन पर वार कर कर उन्हें मार डाला, और उन्हें पाँच पेड़ों पर टाँग दिया: और वह संध्या तक उन पेड़ों पर टँगे थे।

२७ और यह होने को आया सूर्य के ढल जाने के समय पर, कि यहोशुआ ने आदेश दिया, और उन्होंने उन्हें पेड़ों पर से नीचे उतार लिया, और उन्हें उस गुफा में पटक दिया जहाँ वह छुपे हुए थे, और गुफा के मूँह पर विशाल पत्थर लगा दिए, जो इसी दिन तक लगे हुए हैं।

२८ और उस दिन यहोशुआ ने मकदा पर अधिकार कर लिया, और उसे तलवार की धार से परास्त कर डाला, और उसके राजा को उसने पूर्णतः नष्ट कर डाला, उन्हें, और उन सभी आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं; उसने किसी को भी जीवित नहीं छोड़ा: और उसने मकदा के राजा के साथ वैसा ही किया जैसा उसने यरीहो के राजा के साथ कर दिया था।

२९ तब यहोशुआ और समस्त इस्राएल उसके साथ, मकदा से लिब्ना तक पार चला गया, और लिब्ना के विरुद्ध लड़ गए:

३० और प्रभु ने उसे भी और उसके राजा को, इस्राएल के हाथ में प्रदान कर दिया; और उसने उसे, और उन समस्त आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं, तलवार की धार से परास्त कर डाला; उसने उस में किसी को भी जीवित नहीं छोड़ा; बल्कि उसके राजा के साथ वैसा ही कर डाला जैसा उसने यरीहो के राजा के साथ कर डाला था।

३१ और यहोशुआ लिब्ना से लकिश तक पार चला गया, और समस्त इस्राएल उसके साथ, और उसके सामने पड़ाव डाल कर, उसके विरुद्ध लड़े:

३२ और प्रभु ने लकिश को इस्राएल के हाथ में प्रदान कर दिया; जिसने उसे दूसरे दिन हथिया लिया, और उसे, और उन समस्त आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं, तलवार की धार से परास्त कर डाला, उस सभी के अनुसार जो उसने लिब्ना के साथ किया था।

३३ तब गेज़र का राजा होरम लकिश की सहायता करने ऊपर चला आया; और यहोशुआ ने उसे और उसके जनो को परास्त कर डाला, जब तक कि उसने अपने पास कोई भी जीवित नहीं रख छोड़ा था।

३४ और लकिश से यहोशुआ एग्लोन तक पार चला गया, और समस्त इस्राएल उसके साथ; और उन्होंने उसके सामने पड़ाव डाल कर उसके विरुद्ध लड़ाई की:

३५ और उन्होंने उस पर उसी दिन अधिकार कर लिया, और उसे तलवार की धार से परास्त कर डाला, और उन समस्त आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं उसने उस दिन पूर्णतः से नष्ट कर डाला, उस सभी के अनुसार जो उसने लिब्ना के साथ किया था।

३६ और यहोशुआ एग्लोन से ऊपर हेब्रोन तक चला गया, और समस्त इस्राएल उसके साथ, और उन्होंने उसके विरुद्ध लड़ाई की:

३७ और उन्होंने उसे हथिया लिया, और उसे और उसके राजा को और उसके सभी नगरों को, और उन सभी आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं तलवार की धार से परास्त कर डाला; उसने कोई भी जीवित नहीं छोड़ा उस सभी के अनुसार जो उसने एग्लोन के साथ कर दिया था; बल्कि उसने उसे और उन सभी आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं, पूर्णतः से नष्ट कर डाला।

३८ और यहोशुआ दबर लौट आया, और समस्त इस्राएल उसके साथ; और उसके विरुद्ध लड़ाई की:

३९ और उसने उस पर, और उसके राजा पर, और उसके समस्त नगरों पर अधिकार कर लिया; और उन्होंने उन्हें तलवार की धार से परास्त कर डाला, और उन सभी आत्माओं को जो वहीं अन्दर थीं पूर्णतः से नष्ट कर डाला; उसने कोई भी जीवित नहीं छोड़ा: जैसा उसने हेब्रोन के साथ किया था, वैसा ही उसने दबर और उसके राजा के साथ कर दिया; जैसा उसने लिब्ना और उसके राजा के साथ भी कर दिया था।

४० तो यहोशुआ ने समस्त पहाड़ियों के, और दक्षिण के, और घाटी के, और ज़ल-स्त्रोतों के प्रदेश को, और उनके समस्त राजाओं को परास्त कर दिया: उसने किसी को भी जीवित नहीं छोड़ा, बल्कि उन सभी श्वास लेने वालों को पूर्णतः नष्ट कर डाला, जैसा इस्राएल के प्रभु ईश्वर ने आदेश दिया था। 

४१ और योशुआ ने उन्हें कादेशबर्नेय से लेकर गाज़ा तक, और गोशन के समस्त देश को, गिब्यन तक परास्त कर डाला। 

४२ और यहोशुआ ने एक ही बार में इन समस्त राजाओं और उनकी भूमी पर अधिकार कर लिया, क्योंकि इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस्राएल के लिए लड़े थे।

४३ और गिलगल की छावनी में यहोशुआ लौट आया, और समस्त इस्राएल उसके साथ।




ग्यारहवाँ अध्याय। 


और यह होने को आया, जब हज़ोर के राजा यबिन ने उन बातों को सुन लिया था, तब उसने भिजवाया मदोन के राजा योबब को, और शिमरन के राजा को, और अक्षफ के राजा को, 

और पर्वतों के उत्तर की ओर के, और किनरथ के दक्षिण की ओर के, और घाटी में, और पश्चिम की ओर दोर की सीमाओं में राजाओं को,

और पूर्व और पश्चिम की ओर कनानवासी को, और एमोरवासी को, और हित्ती-वंशज को, और पेरिज़्ज़-वंशज को, और पर्वतों में यबूसी-वंशज को, और मिस्पेह की भूमी में हरमन तले हिव्वी को।

और वह बाहर निकल चले, वह और उनकी समस्त सेनाएँ उनके साथ, कई जन, जनौघ में समुद्र तट पर रेत के समान ही, बहुतेरे घोड़ों और रथों के साथ।

और जब यह सभी राजा एक साथ मिल चुके थे, उन्होंने आकर इस्राएल के विरुद्ध लड़ाई करने हेतु मेरम के पानियों पर एक साथ डेरा डाल दिया।

और प्रभु ने यहोशुआ से कहा, इनके कारण भयभीत मत हो: क्योंकि कल ही लगभग इसी समय मैं इन सभी को इस्राएल के समक्ष मृत प्रदान कर दूँगा: तुम इनके घोड़ों की टाँगों की पृष्ठ-माँसपेशियों के कण्डरे काट दोगे, और उनके रथों को अग्नी से जला दोगे।

तो यहोशुआ उनके विरुद्ध मेरम के पानियों तक अचानक ही धमका, और सभी योद्धा-जने उसके साथ; और वह उन पर टूट पड़े। 

और प्रभु ने उन्हें इस्राएल के हाथ में प्रदान कर दिया, जिन्होंने उन्हें पीट डाला, और उनका महा सिदोन तक, और  मिस्रफोतमिम तक, और पूर्व की ओर मिस्पेह की घाटी तक भगा दिया; और उन्होंने उन्हें तब तक आघातित किया, जब तक कि उन्होंने उन में से कोई भी जीवित नहीं छोड़ा।

और जैसा प्रभु ने उस से कहा था वैसा ही यहोशुआ ने उनके साथ कर दिया: और उसने उनके घोड़ों की टाँगों की पृष्ठ-माँसपेशियों के कण्डरे काट डाले, और उनके रथों को अग्नी से जला डाला।

१० और यहोशुआ उस समय वापस मुड़ चला, और उसने हज़ोर को हथिया लिया, और उसके राजा को तलवार से पीट डाला: क्योंकि उस समय से पूर्व हज़ोर उन सभी राज्यों का प्रमुख था।

११ और उन्होंने उन सभी आत्माओं को वहीं अन्दर थीं तलवार की धार से परास्त कर डाला, उन्हें पूर्णतः विनष्ट करते हुए: कोई श्वास लेने के लिए भी बचा रहा: और उसने हज़ोर को अग्नी से जला डाला।

१२ और यहोशुआ ने उन राजाओं के सभी नगरों पर, और उनके सभी राजाओं पर अधिकार जमा लिया, और उन्हें तलवार की धार से आघातित कि दिया, और उसने उन्हीं पूर्णतः विनष्ट कर डाला, जैसा प्रभु के सेवक मूसा ने आदेश दिया था।

१३ परन्तु उन नगरों के विषय में अभी भी अपने बल पर खड़े थे, इस्राएल ने उन में से किसी को भी भस्म नहीं किया, सिवाय हज़ोर के; उसे तो यहोशुआ ने भस्म कर डाला।

१४ और इन नगरों की समस्त लूट-पाट को, और मवेशियों को, इस्राएल की सन्तानों ने अपने स्वयं के लिए लूट लिया; परन्तु प्रत्येक व्यक्ति को उन्होंने तलवार की धार से मार डाला, जब तक कि उन्होंने उन्हें नष्ट कर डाला था, ही उन्होंने किसी को भी श्वास तक लेने के लिए बचा छोड़ा।

१५ और जैसा प्रभु ने अपने सेवक मूसा को आदेश दिया था, वैसा ही मूसा ने यहोशुआ को आदेश दे दिया, और तैसा ही यहोशुआ कर दिया; उस सभी में से जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था उसने कुछ भी अधूरा नहीं छोड़ा।

१६ तो यहोशुआ ने ले ली वह समस्त भूमी, वह पहाड़ियाँ, और वह समस्त गोशन की भूमी, और वह घाटी, और वह मैदान, और इस्राएल का वह पर्वत, और उसी की ही घाटी;

१७ हलक पहाड़ से लेकर ही, जो सेईर तक ऊपर जाती है, लेबानोन की घाटी में बअलगद तक ही हरमन पहाड़ के तले: और उनके सभी राजाओं को पकड़ कर उसने उन्हें परास्त कर दिया, और मार डाला।

१८ और यहोशुआ ने उन सभी राजाओं के साथ एक लम्बे समय तक युद्ध किया। 

१९ गिब्यन के निवासियों उन हिव्वियों के सिवाय, कोई भी एक नगर था जिसने इस्राएल की सन्तानों के साथ शान्ति बनाई: अन्य सभी को उन्होंने संग्राम में ले लिया।

२० क्योंकि यह प्रभु की ओर से था उनके हृदयों को कठोर बना देना, कि वह इस्राएल के विरुद्ध संग्राम करने जाएँ, ताकि वह उन्हें पूर्णतः नष्ट कर दे, और कि वह कोई भी अनुग्रह रखें, बलक वह उन्हें नष्ट कर डाले, जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२१ और उस समय यहोशुआ ने आकर काट डाला अनकिमों को पर्वतों से, हेब्रोन से, दबर से, अनब से, और यहूदा के समस्त पर्वतों से, और इस्राएल के समस्त पर्वतों से: यहोशुआ ने उनका पूर्णता से ही नाश कर डाला उनके नगरों के साथ।

२२ इस्राएल की सन्तानों की भूमी में कोई भी अनकिमों में से बचा नहीं रहा: वह केवल गाज़ा में, गथ में, और अशदोद में, बचे रह गए थे। 

२३ तो यहोशुआ ने वह समस्त भूमी ले ली, उस सभी के अनुसार जो प्रभु ने मूसा से कहा था; और यहोशुआ ने उसे इस्राएल को एक विरासत के लिए प्रदान कर दिया उनके विभाजनोंनुसार उनकी प्रजातियोंनुसार। और उस भूमी ने युद्ध से विश्राम लिया। 


बारहवाँ अध्याय।


अब यह भूमी के राजा हैं, जिन्हें इस्राएल की सन्तानों ने परास्त किया, और उनकी भूमी पर यर्दन के उस पार सूर्य के उदय होने की ओर अधिकार कर लिया, अर्नोन की नदी ले लेकर हरमन के पहाड़ तक, और पूर्व की ओर का समस्त मैदान:

एमोरवासियों का राजा सिहोन, जो हेश्बोन में बसता था, और अरोर से लेकर, जो अर्नोन नदी के तट पर है, और नदी के मध्य से लेकर, और गिलद के अर्ध से, यबक नदी तक भी, राज्य करता था, जो अम्मोन की सन्तानों की सीमा है;

और मैदान से लेकर किनरथ के समुद्र तक पूर्व की ओर, और मैदान के समुद्र तक, पूर्व की ओर नमक समुद्र तक ही, बेतजशिमोथ का पथ; और दक्षिण से लेकर, अशदोथपिस्गा के तले:

और बशान के राजा ओग की सीमा, जो विशालकाय-मनुष्यों के बचे हुओं में से था, जो अश्तरोत और एद्रेई में बसते थे,

और हरमन के पहाड़ पर, और सलका में, और समस्त बशान में, गशूरीवासियों और मअकथीवासियों की सीमा तक, और गिलद के अर्ध, हेश्बोन के राजा सिहोन की सीमा तक, राज्य करता था।

इन्हें प्रभु के नौकर मूसा ने और इस्राएल की सन्तानों ने परास्त कर दिया: और प्रभु के सेवक मूसा ने इसे रूबेन-वंशजों, और गाद-वंशजों, और मनश्शे-वंशजों की आधी प्रजाति को एक अधिकार स्वरूप प्रदान कर दिया।

और यह वह प्रदेश के राजा हैं जिन्हें यहोशुआ और इस्राएल की सन्तानों ने पश्चिम की ओर यर्दन के इस पार पराजित किया, लेबनोन की घाटी में बअलगाद से लेकर हलक के पहाड़ तक भी, जो सेईर तक ऊपर जाता है; जिसे यहोशुआ ने इस्राएल की प्रजातियों को उनके विभाजनोंनुसार एक अधिकार के लिए प्रदान किया; 

पर्वतों में, और घाटियों में, और मैदानों में, और जल-स्त्रोतों में, और जँगली-क्षेत्रों में, और दक्षिण के प्रदेश में; हित्ती वंशज, एमोरवासी, और कनानवासी, पेरिज़वासी, हिव्वी, और यबूसी वंशज:

यरीहो का राजा, एक; एय का राजा जो बेतएल के साथ है, एक;

१० यरुशलेम का राजा, एक; हेब्रोन का राजा, एक;

११ यरमुत का राजा, एक; लकिश का राजा, एक;

१२ एग्लोन का राजा, एक; गेज़र का राजा, एक;

१३ दबर का राजा, एक; गदर का राजा, एक;

१४ होरमा का राजा, एक; अराद का राजा, एक;

१५ लिब्ना का राजा, एक; अद्युल्लम का राजा, एक;

१६ मकदा का राजा, एक; बेतएल का राजा, एक;

१७ तप्पवा का राजा, एक; हेफर का राजा, एक;

१८ अफक का राजा, एक; लशरोन का राजा, एक;

१९ मदोन का राजा, एक; हज़ोर का राजा, एक;

२० शिमरनमरन का राजा, एक; अक्षफ का राजा, एक;

२१ थनक का राजा, एक; मगिद्दो का राजा, एक;

२२ केदेश का राजा, एक; करमल ले योकन्यम का राजा, एक;

२३ दोर की सीमा में दोर का राजा, एक; गिलगल के राष्ट्रों का राजा, एक;

२४ तिर्ज़ा का राजा, एक: सभी राजा इक्कत्तीस। 



तेरहवाँ अध्याय।


अब यहोशुआ वृद्ध हो चला था और दीर्घायु से ग्रस्त था; और प्रभु ने उस से कहा, भई तुम तो वृद्ध हो चले हो और दीर्घायु से ग्रस्त हो, और अभी भी बहुत सारी भूमी बची हुई है अधिकार करने के लिए।

यही है वह भूमी जो अभी भी बची हुई है: पलिश्तिमवासियों की समस्त सीमाएँ, और समस्त गशुरी,

सिहोर से लेकर, जो कि मिस्र के सामने है, उत्तर की ओर एक्रोन की सीमाओं तक भी, जिसकी गिनती कनानवासी के प्रति की जाती है: पलिश्तिमवासियों के पाँच मुखिया; गाज़ावासी, और अशदोथवासी, एशक्लोनवासी, गथीवासी, और एक्रोनवासी; अवावासी भी:

दक्षिण से लेकर, कनानवासियों की समस्त भूमी, और मराह जो सिदोन-वासियों के साथ ही है, अफेक तक, एमोरवासियों की सीमाओं तक:

और गिब्लियों की भूमी, और सारा लेबनोन, सूर्योदय की ओर, बअलगाद से लेकर हरमन पहाड़ तले हमात की प्रविष्टि तक।

लेबनोन से पहाड़ी प्रदेश के समस्त निवासियों को मिस्रफोतमिम तक, और समस्त सिदोन-वासियों को मैं इस्राएल की सन्तानों के सामने से बाहर खदेड़ डालूँगा: केवल उसे इस्राएलियों के लिए एक अधिकार हेतु पर्चियाँ डाल कर विभाजित कर देना, जैसा मैंने तुम्हें आदेश दिया है।

अब इसलिए इस भूमी को उन नौ प्रजातियों के लिए, और मनश्शे की आधी प्रजाती के लिए एक विरासत हेतु विभाजित कर दो,

जिनके साथ रूबेन-वंशजों, और गाद-वंशजों ने अपनी विरासत ग्रहण कर ली है, जिसे मूसा ने उन्हें यर्दन पार पूर्व की ओर प्रदान कर दी थी, जैसे प्रभु के सेवक मूसा ने उन्हें प्रदान कर ही दी थी;

अरोर से लेकर, जो अर्नोन नदी के किनारे पर है, और वह नगर जो उस नदी के बीच में है, और मिदबा का समस्त मैदान दिबोन तक;

१० और हेश्बोन में राज करने वाले एमोरवासियों के राजा सिहोन के समस्त नगर, अम्मोन की सन्तानों की सीमा तक;

११ और गिलद, और गशूरीवासियों और मअकथीवासियों की सीमा, और सारा हरमन पहाड़, और सलका तक सारा बशान;

१२ बशान में ओग का समस्त राज्य, जो अश्तरोत में और एद्रेई में राज करता था, जो विशालकाय-मनुष्यों के बचे हुओं में से बचा रह गया था: क्योंकि इन्हीं को ही मूसा ने पराजित कर दिया था, और इन्हें बाहर निष्कासित कर दिया था।

१३ तथापी इस्राएल की सन्तानें गशूरीवासियों को बाहर नहीं निकल पाईं, ही मअकथीवासियों को: बल्कि गशूरीवासी और मअकथीवासी इस्राएलियों के बीच ही इस दिन तक बसते हैं।

१४ बस केवल लेवी की प्रजाती को उसने कोई भी विरासत नहीं दी थी; इस्राएल के प्रभु ईश्वर की अग्नी से बनी बलियाँ ही उनकी विरासत हैं, जैसा उसने उनसे कहा।

१५ और मूसा ने रूबेन की प्रजाती की सन्तानों को उनके परिवारोंनुसार विरासत दे दी।

१६ और उनकी सीमा थी अरोर से लेकर, जो अर्नोन नदी के किनारे पर है, और वह नगर जो उस नदी के बीच में है, और मिदबा के समस्त मैदान दिबोन तक;

१७ हेश्बोन, और मैदान में जो उसके समस्त नगर हैं; दिबोन, और बमथबअल, और बेतबअलमन,

१८ और यहज़, और कदमोथ, और मफाथ,

१९ और किरयथाइम, और सिबमा, और घाटी के पहाड़ में ज़रथशहर,

२० और बेतपओर, अशदोथपिस्गा, और बेतजशिमोथ,

२१ और मैदान के समस्त नगर, और एमोरवासियों के राजा सिहोन का समस्त राज्य, जिसने हेश्बोन में राज किया था, जिसे मूसा ने पीट दिया था मिद्यान के शासकों के साथ, एवी, और रकेम, और ज़र, और हर, और रेबा, जो प्रदेश में बसते हुए, सिहोन के नवाब थे।

२२ बओर के बेटे, उस ज्योतिषी बिलाम को भी इस्राएल की सन्तानों ने उनके बीच तलवार से मार गिराया, जो उनके द्वारा मार गिरा दिए गए थे। 

२३ और रूबेन की सन्तानों की सीमा यर्दन थी, और उसी की सीमा। यह रूबेन की सन्तानों की विरासत थी उनके परिवारोंनुसार, उसके नगर और गाँव।

२४ और मूसा  ने गाद की प्रजाति को विरासत प्रदान कर दी, उनके परिवारोंनुसार गाद की सन्तानों को ही।

२५ और उनकी सीमा थी यज़र, और गिलद के समस्त नगर, और अम्मोन की सन्तानों की आधी भूमी, अरोर तक जो कि रब्बा के सामने है;

२६ और हेश्बोन से लेकर रमतमिज़पेह तक, और बतोनिम; और महानैम से लेकर दबर की सीमा तक;

२७ और घाटी में, बेतअरम, और बेतनिम्रा, और सुक्कोत, और जफ़ोन, हेश्बोन के राजा सिहोन का शेष राज्य, यर्दन और उसकी सीमा, पूर्व की ओर यर्दन के उस पार किनरथ के सागर की सीमा तक भी।

२८ यही गाद की सन्तानों की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, वह नगर, और उनके गाँव।

२९ और मूसा ने मनश्शे की आधी प्रजाति को विरासत प्रदान की: और यह मनश्शे की सन्तानों की आधी प्रजाति का अधिकार था, उनके परिवारोंनुसार।

३० और उनकी सीमा महानैम से लेकर थी, समस्त बशान, बशान के राजा ओग का समस्त राज्य, और याएर के सभी नगर जो बशान में हैं, साठ नगर:

३१ और गिलद का अर्ध, और अश्तरोत, और एद्रेई, बशान में ओग के राज्य के नगर, मनश्शे के बेटे मेकर की सन्तानों के थे,   

उनके परिवारोंनुसार मेकर की सन्तानों के आधे भाग के ही।

३२ यह वह देश हैं जिन्हें मूसा ने यरीहो के साथ पूर्व की ओर, यर्दन के उस पार मोआब के मैदानों में विरासत हेतु वितरित किए थे।

३३ परन्तु लेवी की प्रजाती को मूसा ने कोई भी विरासत नहीं प्रदान की: इस्राएल के प्रभु ईश्वर ही उनकी विरासत थे, जैसा उन्होंने उनसे बोला था।




चौदहवाँ अध्याय।


और यह वह राष्ट्र हैं जिन्हें कनान की भूमी में इस्राएल की सन्तानों ने विरासत में लिए, जिन्हें पुरोहित एलाज़र, और नून के बेटे यहोशुआ, और इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों के पिताओं के प्रमुखों ने उन्हें एक विरासत स्वरूप वितरित किए थे।

उन नौ प्रजातियों के लिए, और उस आधी प्रजाति के लिए, पर्चियाँ डाल कर उनकी विरासत नियुक्त थी, जैसा प्रभु ने मूसा के हाथ से आदेश दे दिया था। 

क्योंकि मूसा ने दो प्रजातियों और एक आधी प्रजाती को यर्दन के उस पास विरासत दे दी थी: परन्तु लेवी-वंशजों को उसने उनके बीच कोई भी विरासत नहीं दी थी।

क्योंकि युसुफ की सन्तानें दो प्रजातियाँ थीं, मनश्शे और एफ्रैम: इसी कारण उन्होंने लेवी-वंशजों को भूमी में कोई भी भाग नहीं दिया था, सिवाय उनके बसने हेतु नगर, उनकी सार्वजनिक-भूमियाँ के साथ उनके मवेशियों के लिए और उनकी सम्पत्तियों के लिए।

जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया, वैसा ही इस्राएल की सन्तानों ने कर दिया, और उन्होंने भूमी को विभाजित कर दिया।

तब यहूदा की सन्तानें यहोशुआ के पास गिलगल में आईं: और केनिज़ी-वंशज यपुन्ने के बेटे कालेब ने उस से कहा, तुम वह बात जानते हो जो प्रभु ने ईश्वर के बन्दे मूसा को मेरे और तुम्हारे समबन्ध में कादेशबर्नेय में कही थी। 

मैं चालीस वर्ष की आयु का था जब प्रभु के सेवक मूसा ने मुझे कादेशबर्नेय से भूमी का भेद निकाल लेने के लिए भेजा था; और मैं उन्हें पुनः शब्द ले आया जैसा वह मेरे हृदय में था।

तथापि मेरे भाई-जनों ने जो मेरे साथ ऊपर गए थे लोगों का हृदय पिघला दिया: परन्तु मैंने पूर्णतः से प्रभु मेरे ईश्वर का अनुसरण किया।

और मूसा ने उस दिन शपथ ली, कहते हुए, अवश्य ही वह भूमी जिसे तुम्हारे पैरों ने रौंदा है तुम्हारी और तुम्हारी सन्तानों की विरासत सदैवत्वता तक होगी, चूँकि तुमने प्रभु मेरे ईश्वर का पूर्णतः से अनुसरण किया है। 

१० और अब देख लो, प्रभु ने मुझे इन पैंतालीस साल जीवित रखा है, जैसा उन्होंने कहा, प्रभु के मूसा से इस शब्द के कह देने के समय से लेकर ही, जिस समय इस्राएल की सन्तानें जँगली-क्षेत्र में भटक रहीं थीं: और अब लो, मैं इस दिन पिचासी वर्ष की आयु का हूँ।

११ और तथापि मैं इस दिन वैसा ही प्रबल हूँ, जैसा मैं उस दिन था जब मूसा ने मुझे भेजा था: जैसा मेरा बल तब था, वैसा ही मेरा बल आज भी है, युद्ध हेतु, दोनो बाहर जाने के लिए, और अंदर जाने के लिए।

१२ अब इसलिए मुझे यह पर्वत प्रदान कर दो, जिसके विषय में उस दिन प्रभु बोले थे; क्योंकि तुम ने उस दिन सुना था कि कैसे वह अनक-वंशज वहीं थे, और कि वह नगर विशाल और क़िलेबन्द थे: यदि ऐसा हो कि प्रभु मेरे साथ होंगे, तब मैं उन्हें बाहर खदेड़ पाऊँगा, जैसा प्रभु ने कहा था।

१३ और यहुशुआ ने उसे आशीष दिया, और यपुन्ने के बेटे कालेब को विरासत के लिए हेब्रोन प्रदान कर दिया।

१४ इसलिए इस दिन तक, हेब्रोन उस केनिज़ी-वंशज यपुन्ने के बेटे कालेब की विरासत बन गई, क्योंकि उसने पूर्ण-रूप से इस्राएल के प्रभु ईश्वर का अनुसरण किया था।

१५ और हेब्रोन का नाम किर्यथरबा था; जो अर्बा अनक-वंशजों के बीच एक बड़ा व्यक्ति था। और भूमी युद्ध से शान्त थी।




पन्द्रहवाँ अध्याय।


तो यह यहूदा की सन्तानों की प्रजाति का भाग उनके परिवारोंनुसार था; दक्षिण की ओर एदोम ज़िन जँगली-क्षेत्र की सीमा तक भी था उस दक्षिणी सीमा का सीमान्त भाग। 

और उनकी दक्षिणी सीमा नमक समुद्र के तट से लेकर, खाड़ी से लेकर जो दक्षिण की ओर स्थित है:

और वह दक्षिणी पाशर्व की ओर बाहर निकलती हुई मलेहअक्रबिम तक, और चलती हुई ज़िन तक, और दक्षिणी पाशर्व के साथ ऊपर चढ़ती हुई कादेशबर्नेय तक, और चलती हुई हज़रोन तक, और ऊपर अदर तक जाती हुई, और करका को घेरे में लेती हुई:

वहाँ से वह अज़मोन की ओर चलती गई, और मिस्र की नदी तक बाहर चली गई; और वह सीमा-रेखा बाहर निकलती हुई समुद्र में थी: यही तुम्हारी दक्षिणी सीमा होगी।

और पूर्वी सीमा थी नमक समुद्र, यर्दन के अन्त तक ही। और उत्तरी क्षेत्र में उनकी सीमा यर्दन के सीमान्त भाग पर समुद्र की खाड़ी से लेकर थी:

और वह सीमा ऊपर बेतहोग्ल गई, और बेतअरबा की उत्तरी ओर के साथ चलती गई; और वह सीमा रूबेन के बेटे बोहन के पत्थर तक ऊपर चली गई:

और वह सीमा अकोर की घाटी से लेकर दबर की ओर ऊपर गई, और तो उत्तर की ओर, गिलगल की ओर देखती हुई, जो कि अदमिम तक ऊपर जाने के सामने है, जो नदी के दक्षिणी पाशर्व पर है: और वह सीमा एनशमश के जलों की ओर गई, और वह बाहर निकलती हुई एनरोगल तक थी:

और वह सीमा हिनम के बेटे की घाटी के साथ ऊपर यबूसी वंशज के दक्षिणी पाशर्व तक गई; वही यरूशलेम है: और वह सीमा पर्वत की चोटी तक भी ऊपर गई जो पश्चिम की ओर हिनम की घाटी के सामने है, जो कि विशालकाय-मानवों की घाटी के अंत में है उत्तर की ओर:

और वह सीमा पहाड़ी की चोटी से नफतोह के पानी के जल-स्त्रोत तक खींची गई, और वह एफरौन पहाड़ के नगरों तक बाहर गई; और वह सीमा बअलाह तक खींची गई, जो किरयथयरिम है:  

१० और वह सीमा बअलाह से पश्चिमि ओर सेईर पहाड़ तक घेरा बनाती हुई, यरीम पहाड़ के पाशर्व के साथ चलती गई, जो कसलोन है, उत्तर की ओर, और नीचे बेतशमश तक पहुँची, और तिम्ना तक चलती गई:

११ और वह सीमा एक्रोन के पाशर्व तक बाहर निकली उत्तर की ओर: और वह सीमा शिक्रोन तक खींची गई, और वह बअलाह पहाड़ तक चलती गई, और जबनील तक बाहर पहुँची; और वह सीमा-रेखा बाहर निकलती हुई समुद्र तक थी।

१२ और पश्चिमि सीमा उस महा सागर तक थी, और उसका तट। यही यहूदा की सन्तानों की सीमा चारों ओर है, उनके परिवारोंनुसार। 

१३ और यपुन्ने के बेटे कालेब को उसने यहूदा की सन्तानों के बीच एक भाग दे दिया, प्रभु के यहुशुआ को आदेश दे देने के अनुसार, अर्बा का नगर ही, अनक का पिता, जो हेब्रोन है।

१४ और कालेब ने वहाँ से अनक के तीन बेटों को खदेड़ दिया, शेशय, और अहीमन, और तलमय, अनक की सन्तानें।

१५ और वह वहाँ से ऊपर दबर के निवासियों के पास गया: और दबर का नाम पहले किरयथसफर था।

१६ और कालेब ने कहा, वो जो किरयथसफर को पीटता है, और उसे हथिया लेता है, उसी को मैं अक्सा अपनी बेटी पत्नी के लिए दे दूँगा।

१७ और ओतनिएल, कालेब के भाई कनज़ के बेटे ने उसे हथिया लिया: और उसने अपनी बेटी अक्सा उसे पत्नी के लिए दे दी।

१८ और यह होने को आया, कि जैसे वह उसके पास आई, उसने उसे उकसाया कि वह उसके पिता से एक खेत की माँग करे: और वह अपने गधे पर से उतरी; और कालेब ने उस से कहा, क्या चाहती हो तुम?

१९ जिसने उत्तर दिया, मुझे एक आशीर्वाद दे दें; क्योंकि आपने मुझे एक दक्षिणी भूमी दे दी है; मुझे जल-स्त्रोत भी प्रदान कर दें। और उसने उसे ऊपरी स्त्रोत, और निचले स्त्रोत प्रदान कर दिए।

२० यही यहूदा की सन्तानों की प्रजाति की विरासत उनके परिवारोंनुसार है।

२१ और दक्षिण की ओर, एदोम की सीमा की ओर, यहूदा की सन्तानों की प्रजाति के दूरतम नगर थे क़ब्ज़ील, और एदर, और जगुर,

२२ और किना, और दिमोना, और अदअदह,

२३ और केदेश, और हज़ोर, और ईथनन,

२४ ज़िफ, और तलेम, और बेलोथ,

२५ और हज़ोर, हद्थ, और करिओथ, और हेज़रोन, जो कि हज़ोर है,

२६ अमम, और शेमा, और मोलदा,

२७ और हज़रगदह, और हेशमोन, और बेतपलत,

२८ और हज़रशुअल, और बेएरशबा, और बिज़जोथजा,

२९ बअलाह, और ईम, और एज़म,

३० और अलतोलद, और कीसल, और होरमा,

३१ और ज़िकलग, और मदमना, और सनसना,

३२ और लबोथ, और शिलहिम, और एइन, और रिम्मन: समस्त नगर उन्नत्तीस हैं, उनके गाँवों के साथ:

३३ और घाटी में, एशतोल, और ज़ोरह, और अशना,

३४ और ज़नोह, और एनगनिम, और तप्पवा, और एनम,

३५ यरमुत, और अद्युल्लम, सोको, और अज़का, 

३६ और शरिम, और आदिथम, और गदेरा, और गदेरोथम; चौदह नगर उनके गाँवों के साथ:

३७ ज़ेनन, और हदशा, और मिग्दलगद, 

३८ और दिलेन, और मिस्पेह, और जोकथील,

३९ लकिश, और बोज़कथ, और एग्लोन,

४० और कब्बोन, और लहमस, और किथलिश,

४१ और गदरोथ, बेतडगन, और नमा, और मकदा; सोलह नगर उनके गावों के साथ:

४२ लिब्ना, और एथर, और अशान,

४३ और जिफटा, और अश्ना, और नेज़िब,

४४ और कईला, और अकज़िब, और मरेशा; नौ नगर उनके गाँवों के साथ:

४५ एक्रोन, उसके नगरों के साथ और उसके गाँव:

४६ एक्रोन से लेकर समुद्र तक भी, वह सभी जो अशदोद के निकट था, उनके गाँवों के साथ:

४७ अशदोद उसके नगरों के साथ और उसके गाँव, गाज़ा उसके नगरों के साथ और उसके गाँव, मिस्र की नदी तक, और वह महा सागर, और उसकी सीमा:

४८ और पर्वतों में, शमीर, और यतिर, और सोको,

४९ और दन्ना, और किरयतसन्ना, जो कि दबर है,

५० और अनब, और एशतमो, और अनिम,

५१ और गोशन, और होलोन, और गिलो; ग्यारह नगर उनके गाँवों के साथ:

५२ अरब, और दूमा, और एशेन,

५३ और जनुम, और बेततप्पू, और अफीका,

५४ और हमता, और किर्यथरबा, जो कि हेब्रोन है, और ज़िओर; नौ नगर उनके गाँवों के साथ:

५५ मओन, करमल, और ज़िफ, और यत्ता,

५६ और यज़रील, और योकदीम, और ज़नो,

५७ काईन, गिब्या, और तिम्ना; दस नगर उनके गाँवों के साथ:

५८ हलहल, बेतज़र, और गदर,

५९ और मअरत, और बेतअनोत, और एलतकोन; छह नगर उनके गाँवों के साथ:

६० किरयतबअल, जो कि किरयतयरीम है, और रब्बा; दो नगर उनके गाँवों के साथ:

६१ जँगली क्षेत्र में, बेतअरबा, मिद्दिन, और सकेका,

६२ और निबशन, और नमक का नगर, और एनगदी; छह नगर उनके गाँवों के साथ:

६३ और जहाँ तक यरूशलेम के निवासियों उन यबूसी-वंशजों की बात आती है, यहूदा की सन्तानें उन्हें बाहर नहीं खदेड़ सकीं: बल्कि वह यबूसी-वंशज यहूदा की सन्तानों के साथ इस दिन तक यरूशलेम में बसते हैं।




सोलहवाँ अध्याय।


और युसुफ की सन्तानों की पर्ची गिरी यरीहो के साथ यर्दन से लेकर, यरीहो के पानी तक पूर्व की ओर, उस जँगली-क्षेत्र तक जो यरीहो से ऊपर जाता है बेतएल पहाड़ के सर्वत्र में, 

और बेतएल से बाहर निकल कर जो लज़ तक जाता है, और जो अरकी की सीमाओं तक अटरोथ तक चलता जाता है,

और नीचे पश्चिम की ओर जफलेती की सीमा तक जाता है, निचले बेतहोरोन की सीमा तक, और गेज़र तक: और वह बाहर निकलता हुआ समुद्र तक था।

तो युसुफ की सन्तानें, मनश्शे और एफ्रैम ने अपनी विरासत ले ली।

और एफ्रैम की सन्तानों की सीमा-रेखा उनके परिवारोंनुसार इस प्रकार थी: पूर्व की ओर ही उनकी विरासत की सीमा थी अटरोथअद्दर, ऊपरी बेतहोरोन तक; 

और वह सीमा समुद्र की ओर बाहर निकली उत्तर के पाशर्व में मिकमथा तक; और वह सीमा पूर्व की ओर तनथशिलो तक गई, और उसके साथ पूर्व की ओर चलती हुई यनोह यक;

और वह यनोह से अटरोथ तक नीचे गई, और नेरथ तक, और यरीहो पहुँच गई, और यर्दन तक बाहर निकल चली।

सीमा तप्पवा से पशिमि ओर बाहर निकलती हुई कनह नदी तक गई; और वह बाहर निकलती हुई समुद्र तक थी। यही एफ्रैम की सन्तानों की प्रजाति की विरासत है उनके परिवारोंनुसार।

और एफ्रैम की सन्तानों के लिए पृथक नगर मनश्शे की सन्तानों की विरासत के बीच थे, सभी नगर उनके गाँवों के साथ।

१० और उन्होंने गेज़र में बसने वाले उन कनानवासियों को बाहर नहीं खदेड़ा: बल्कि वो कनानवासी एफ्रैम-वंशजों के बीच ही इस दिन तक बसते हैं और राजकर भरने के अधीन सेवारत हैं।



सत्रहवाँ अध्याय।


मनश्शे की प्रजाती के लिए भी पर्ची डाल कर एक भाग था; क्योंकि वह युसुफ का प्रथम जन्मा था; मेकर के लिए, मनश्शे का प्रथम जन्मा, गिलद का पिता: क्योंकि वो एक योद्धा पुरुष था, इसलिए उसके पास गिलद और बशान थे।

मनश्शे की शेष सन्तानों के लिए उनके परिवारोंनुसार भी पर्ची डाल कर एक भाग था; अबिएज़र की सन्तानों के लिए, 

हेलक की सन्तानों के लिए, असरिएल की सन्तानों के लिए, शकेम की सन्तानों के लिए, हेफर की सन्तानों के लिए, शेमिदा की सन्तानों के लिए: यही युसुफ के बेटे मनश्शे की नर सन्तानें थीं उनके परिवारोंनुसार।

परन्तु मनश्‍शे के बेटे मेकर के बेटे गिलद के बेटे हेफर के बेटे ज़्लोफहद के पास कोई बेटे नहीं थे, बल्कि बेटियाँ: और यह उसकी बेटियों के नाम हैं; महला, नूह, होग्ला, मिल्का, और तिर्ज़ा।

और वो पुरोहित एलाज़र के समक्ष निकट आईं, और नून के बेटे यहोशुआ के समक्ष, और अध्यक्षों के समक्ष, कहती हुईं, जी प्रभु ने मूसा को हमारे भाई-जनों के बीच हमें एक विरासत दे देने का आदेश दिया था। इसलिए प्रभु के आदेशानुसार उन्होंने उन्हें उनके पिता के भाईयों के बीच एक विरासत दे दी।

और मनश्शे के पास दस भाग गिरे, गिलद और बशान की भूमी के अतिरिक्त, जो यर्दन के उस पार थे;

क्योंकि मनश्शे की बेटियों के पास उसके बेटों के बीच एक विरासत थी: और मनश्शे के शेष बेटों के पास गिलद की भूमी थी।

और मनश्शे की सीमा थी आशेर से लेकर मिकमथा तक, जो शकेम के सामने है; और वह सीमा दाहिने हाथ पर चलती गई एनतप्पवा के निवासियों तक।

अब मनश्शे के पास तप्पवा की भूमी थी: परन्तु मनश्शे की सीमा पर तप्पवा एफ्रैम की सन्तानों का था;

और वह सीमा नीचे कनह नदी तक गई, नदी के दक्षिणी ओर: एफ्रैम के यह नगर मनशशे के नगरों के बीच हैं: मनश्शे की सीमा नदी के उत्तरी पाशर्व पर भी थी, और वह बाहर निकलती हुई समुद्र तक थी:

१० दक्षिणी ओर वह एफ्रैम की थी, और उत्तरी ओर वह मनश्शे की थी, और समुद्र उसकी सीमा है; और वह एक साथ आशेर में मिले उत्तर की ओर, और इस्सकार में पूर्व की ओर।

११ और इस्सकार में और आशेर में मनश्शे के पास थे बेतशान और उसकी नगरियाँ, और इब्लेम और उसकी नगरियाँ, और दोर के वासी और उसकी नगरियाँ, और एनदोर के वासी और उसकी नगरियाँ, और थनक के वासी और उसकी नगरियाँ, और मगिद्दो के वासी और उसकी नगरियाँ, तीन राष्ट्र ही। 

१२ तब भी मनश्शे की सन्तानें उन नगरों के निवासियों को बाहर नहीं खदेड़ सकीं; बल्कि कनानवासी उस भूमी में बसते रहे।

१३ तथापी यह होने को आया, जब इस्राएल की सन्तानें शक्तिशाली बढ़ चली थीं, तो उन्होंने कनानवासियों को करदाता बना दिया; परन्तु उन्हें पूर्णतः से बाहर नहीं खदेड़ डाला।

१४ और युसुफ की सन्तानें यहोशुआ से बोलीं, कहती हुईं, आपने हमें बस केवल एक ही पर्ची वाला भाग और एक ही खँड विरासत में लेने के लिए क्यों दिया है, यह देखते हुए कि मैं तो एक विशाल जन-समूह हूँ, क्योंकि प्रभु ने मुझे अब तक भी आशीष दिया है?

१५ और यहोशुआ ने उन्हें उत्तर दिया, यदि तुम एक विशाल जन-समूह हो, तो तुम ऊपर जंगल में जाकर पेरिज़वासियों की और विशालकाय-मानवों की भूमी में अपने लिए वहीं नीचे काट डालो, यदि एफ्रैम का पहाड़ तुम्हारे लिए बहुत कम हो।

१६ और युसुफ की सन्तानों ने कहा, वह पहाड़ हमारे लिए पर्याप्त नहीं है: और उन सभी कनानवासियों के पास जो घाटी की भूमी में बसते हैं लोहे के रथ हैं, बेतशान और उसकी नगरीयों वालों के पास, और जो यज़रील की घाटी वाले हैं।

१७ और यहोशुआ युसुफ के घराने से बोला, एफ्रैम से और मनश्शे से ही, कहता हुआ, तुम एक विशाल जन-समूह और बहुत बलपूर्वक हो: तुम एक ही पर्ची वाला भाग नहीं रखोगे:

१८ बल्कि वह पर्वत तुम्हारा होगा; क्योंकि वह एक जंगल है, और तुम उसे नीचे काट डालोगे: और उसके बाहरी छोर तुम्हारे होंगे: क्योंकि तुम उन कनानवासियों को बाहर खदेड़ डालोगे, भले ही उनके पास लोहे के रथ हों और भले ही वह बलशाली हों।



अठ्ठारहवाँ अध्याय।


और इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा शिलो में एक साथ एकत्रित हो गई, और वहीं सभा के तम्बू को खड़ा कर दिया। और वह भूमी उनके सम्मुख आधीन थी।

और इस्राएल की सन्तानों के बीच सात प्रजातियाँ शेष थीं, जिन्होंने अभी तक अपनी विरासत ग्रहण नहीं की थी।

और यहोशुआ ने इस्राएल की सन्तानों ने कहा, कितने समय तक तुम उस भूमी पर अधिकार करने में ढीले रहोगे, जिसे तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर ने तुम्हें प्रदान कर दी है?  

प्रत्येक प्रजाति से अपने बीच में से तीन पुरुष दे दो: और मैं उन्हें भेज दूँगा, और वह उठ कर भूमी में से होते हुए जाएँगे, और उनकी विरासतानुसार उसका सर्वेक्षण कर लेंगे; और वह पुनः मेरे पास जाएँगे।

और वह उसे सात भागों में विभाजित कर देंगे: यहूदा अपनी सीमा में दक्षिण में निवास करेगा, और युसुफ का घराना अपनी सीमाओं में उत्तर में निवास करेगा।

इसलिए तुम उस भूमी का सात भागों में सर्वेक्षण करोगे, और उसे मेरे पास यहाँ ले आओगे, ताकि मैं तुम्हारे लिए यहाँ प्रभु हमारे ईश्वर के सम्मुख पर्चियाँ डाल दूँ।

परन्तु लेवी-वंशजों का तुम्हारे बीच कोई भाग नहीं है; क्योंकि प्रभु का पुरोहितपद उनकी विरासत है: और गाद, और रूबेन, और मनश्शे की आधी प्रजाति के पास उनकी विरासत पूर्व में है यर्दन पार, जो प्रभु के सेवक मूसा ने उन्हें दी थी।

और वह लोग उठे, और चले गए: और यहोशुआ ने उन्हें निर्देश दिया जो भूमी का सर्वेक्षण करने गए थे, कहते हुए, जाओ और भूमी में से चलते जाओ, और उसका सर्वेक्षण कर लो, और मेरे पास पुनः जाना, ताकि मैं यहाँ तुम्हारे लिए प्रभु के सम्मुख शिलो में पर्चियाँ डाल दूँ। 

और वो पुरुष चले गए और उस भूमी में से होते हुए चलते चले गए, और उसका एक पुस्तक में नगरों से सात भागों में सर्वेक्षण कर दिया, और पुनः शिलो में यहोशुआ के पास छावनी के पास गए।

१० और यहोशुआ ने प्रभु के सम्मुख उनके लिए शिलो में पर्चियाँ डालीं: और वहीं यहोशुआ ने इस्राएल की सन्तानों को उनके विभाजनोंनुसार वह भूमी विभाजित कर दी।

११ और बिन्यामिन की सन्तानों की प्रजाति की पर्ची उनके परिवारोंनुसार आई: और उनकी पर्ची के खँड की सीमा यहूदा की सन्तानों और युसुफ की सन्तानों के बीच पड़ी।

१२ और उत्तर के पाशर्व में उनकी सीमा यर्दन से लेकर थी; और वह सीमा उत्तर की ओर यरीहो के पाशर्व तक ऊपर गई, और वह पर्वतों को पार करती हुई पश्चिम की ओर चलती गई; और वह बाहर निकलती हुई बेत-आवन के जँगली-क्षेत्र तक थी।

१३ और वहाँ से वह सीमा लज़ की ओर गई, लज़ के पाशर्व पर, जो बेतएल है, दक्षिण की ओर; और वह सीमा नीचे अटरोथअदर तक गई, उस पहाड़ी के निकट जो निचले बेतहोरोन के दक्षिणी पाशर्व पर है।

१४ और वहाँ से वह सीमा खींची गई, और दक्षिण की ओर सागर का कोना घेरा, उस पहाड़ी से लकर जो दक्षिण की ओर निचले बेतहोरोन के सामने है; और वह बाहर निकलती हुई किरयतबअल तक थी, जो कि किरयतयरीम है, यहूदा की सन्तानों का एक नगर: यही पश्चिमि खण्ड था।

१५ और दक्षिणी सीमा किरयतयरीम के छोर से लेकर थी, और वह सीमा पश्चिम की ओर बाहर निकली, और 

 नफतोह के पानियों के जल-स्त्रोत तक गई।

१६ और वह सीमा उस पर्वत के छोर तक नीचे पहुँची जो हिनम के बेटे की घाटी के सामने है, और जो उत्तर में विशालकाय-मानवों की घाटी में है, और हिनम की घाटी तक नीचे गई, यबूसी के साथ तक दक्षिण की ओर, और एनरोगल तक नीचे गई, 

१७ और जो उत्तर से खींची गई थी, और जो एनशमश की ओर आगे गई, और गलिलोत की ओर आगे गई, जो कि 

अदमिम की चढ़ाई के विपरी है, और रूबेन के बेटे बोहन के पत्थर तक नीचे गई,

१८ और चलती गई पाशर्व की ओर उत्तर की ओर अरबा के विपरीत, और नीचे अरबा तक चली गई:

१९ और वह सीमा चलती गई उत्तर की ओर बेतहोग्ल के पाशर्व तक: और वह सीमा बाहर निकलती हुई यर्दन के दक्षिणी छोर पर नमक सागर की उत्तरी खाड़ी तक गई: यही दक्षिणी सीमा थी।

२० और यर्दन उसकी सीमा थी पूर्व की ओर। यही बिन्यामिन की सन्तानों की विरासत थी, उनकी चारों ओर सीमाओं से, उनके परिवारोंनुसार। 

२१ अब बिन्यामिन की सन्तानों की प्रजाति के नगर उनके परिवारोंनुसार थे, यरीहो, और बेतहोग्ल, और कज़िज़ की घाटी,

२२ और बेतअरबा, और ज़मरिम, और बेतएल,

२३ और अविम, और परा, और ओफ़्रा,

२४ और केफरअम्मोनी, और ओफ्नी, और गबा; बारह नगर उनके गाँवों के साथ:

२५ गिब्यन, और रमा, और बीरोथ,

२६ और मिस्पेह, और केफिरा, और मोज़ा,

२७ और रकेम, और इरपल, और तर्ला,

२८ और ज़ला, एलेफ, और यबूसी, जो कि यरूशलेम है, गिब्यथ, और किरयत; चौदह नगर उनके गाँवों के साथ। यही बिन्यामिन की सन्तानों की विरासत है उनके परिवारोंनुसार।




उन्नीसवाँ अध्याय।


और दूसरी पर्ची शिमोन के लिए निकली, शिमोन की सन्तानों की प्रजाति के लिए ही उनके परिवारोंनुसार: और उनकी विरासत यहूदा की सन्तानों की विरासत में ही थी।

और उनकी विरासत में था बेएरशबा, या शेबा, और मोलदा,

और हज़रशुअल, और बअला, और एज़ेम,

अलतोलद, और बेतुल, और होरमा,

और ज़िकलग, और बेतमर्कबोत, और हज़रसूसा,

और बेतलेबाउत, और शरुहन; तेरह नगर उनके गाँवों के साथ:

एइन, रेमन, और एथर, और अशन: चार नगर उनके गाँवों के साथ:

और इन नगरों के चारों ओर के सभी गाँव बअलथबर तक, दक्षिण का रमत। यही बिन्यामिन की सन्तानों की प्रजाति की विरासत है उनके परिवारोंनुसार।

यहूदा की सन्तानों के भाग में थी शिमोन की सन्तानों की विरासत: क्योंकि यहूदा की सन्तानों का भाग उनके लिए अत्याधिक था: इसलिए शिमोन की सन्तानों की विरासत उनकी विरासत के बीच थी।

१० और ज़बूलून की सन्तानों के लिए तीसरी पर्ची निकली उनके परिवारोंनुसार: और उनकी विरासत की सीमा सरीद तक थी:

११ और उनकी सीमा ऊपर समुद्र तक गई, और मरला, और दब्बशेथ तक पहुँची, और उस नदी तक पहुँची जो योकनयम के सामने है;

१२ और सरीद से पूर्व की ओर सूर्योदय की ओर किसलोथतबोर की सीमा तक मुड़ गई, और फिर दबरथ तक निकली, और ऊपर जफिया तक जाती है,

१३ और वहाँ से चलती हुई पूर्व में पार करती हुई गित्तहेफर तक, इत्ताकज़िन तक, और बाहर निकलती हुई रेम्मनमथोअर तक नेयह तक;

१४ और वह सीमा उसे उत्तरी पाशर्व में हन्नथोन तक घेरती है: और वह जिफथहल की घाटी तक बाहर जाती है:

१५ और कथथ, और नहलल, और शिमरोन, और इदला, और बेतलेहम: बारह नगर उनके गाँवों के साथ।

१६ यही ज़बूलून की सन्तानों की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, यही नगर उनके गाँवों के साथ।

१७ और इस्सकार के लिए चौथी पर्ची निकली, इस्सकार की सन्तानों के लिए उनके परिवारोंनुसार।

१८ और उनकी सीमा थी जज़रील की ओर, और केसलथ, और शुनम,

१९ और हफरेम, और शीयोन, और अनहरथ,

२० और रबिथ, और किशयोन, और एबज़,

२१ और रेमथ, और एनगनिम, और एनहद्दा, और बेतपज़ेज़;

२२ और वह सीमा पहुँचती है तबोर तक, और शहज़िमा, और बेतशमश; और उनकी सीमा निकलती हुई यर्दन तक थी: सोलह नगर उनके गाँवों के साथ।

२३ यही इस्सकार की सन्तानों की प्रजाति की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, यह नगर और उनके गाँव।

२४ और पाँचवी पर्ची आशेर की सन्तानों की प्रजाति के लिए निकली उनके परिवारोंनुसार।

२५ और उनकी सीमा थी हलकथ, और हली, और बेतन, और अक्षफ,

२६ और अलमेलक, और अमद, और मिशेअल; और पश्चिमि ओर करमल तक पहुँचती है, और शिहोरलिबनथ तक;

२७ और सूर्योदय की ओर बेतडगन तक मुड़ी, और ज़बूलून तक पहुँचती है, और जिफथहल की घाटी तक बेतएमक के उत्तरी किनारे की ओर, और नेइएल, और बाएँ हाथ पर काबुल तक बाहर निकलती है,

२८ और हेब्रोन, और रहोब, और हमोन, और कनह, महा-ज़िदोन तक भी;

२९ और फिर वह सीमा रमा को मुड़ती है, और उस शक्तिशाली नगर टाय्र को; और वह सीमा होसा को मुड़ती है; और वह समुद्र के तट से लेकर अकज़िब तक बाहर निकल जाती है: 

३० अम्मा भी, और अफक, और रेहाब: बाईस नगर उनके गाँवों के साथ।

३१ यही इस्सकार की सन्तानों की प्रजाति की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, यह नगर उनके गाँवों सहित।

३२ छटी पर्ची नफटली की सन्तानों के लिए निकली, नफटली की ही सन्तानों के लिए उनके परिवारोंनुसार।

३३ और उनकी सीमा थी हेलफ से, अल्लोन से ज़ननिम तक, और अदामी, नेकब, और जबनील, लकुम तक; और वह बाहर यर्दन तक निकली:

३४ और फिर वह सीमा पश्चिम की ओर मुड़ी अज़नथतबोर तक, और वहाँ से बाहर हकक तक गई, और ज़बूलून तक पहुँची दक्षिणी किनारे पर, और पश्चिमि किनारे पर आशेर तक पहुँची, और यहूदा तक यर्दन पर सूर्योदय की ओर।

३५ और वह क़िलेबन्द नगर हैं जिद्दिम, ज़र, और हमथ, रकथ, और किनरथ,

३६ और अदमा, और रमा, और हज़ोर,

३७ और केदेश, और एद्रेई, और एनहज़ोर,

३८ इरोन, और मिगदलल, होरेम, और बेतनथ, और  बेतशमश; उन्नीस नगर उनके गाँवों के साथ।

३९ यही नफताली की सन्तानों की प्रजाती की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, यह नगर और उन्हें गाँव।

४० और सातवीं पर्ची दान की सन्तानों की प्रजाति के लिए निकली उनके परिवारोंनुसार।

४१ और उनकी विरासत के सीमा थी ज़ोरह, और एशतोल, और इरशमश,

४२ और शेलाबिन, और अएलोन, और जेथला,

४३ और एलोन, और थिमनथा, और एक्रोन,

४४ और एलतके, और गिबथोन, और बअलथ,

४५ और जेहद, और बेनबेरक, और गथरिमोन,

४६ और मेयारकन, और रकोन, जफो के विपरीत सीमा होती हुई।

४७ और दान की सन्तानों की सीमा उनके लिए बहुत छोटी थी; इसलिए दान की सन्तानें लेशम के विरुद्ध लड़ाई करने ऊपर गईं, और उसे हथिया लिया, और उसे तलवार की धार से काट दिया, और उस पर अधिकार कर लिया, और उस में बस गए, और उसे लेशम को दान पुकारा, उनके पिता दान के नाम पर।

४८ यही दान की सन्तानों की प्रजाति की विरासत है उनके परिवारोंनुसार, यही नगर उनके गाँवों के साथ।

४९ जब उन्होंने विरासत के लिए भूमी के विभाजन का अन्त कर दिया था उनकी सीमाओं से, तो इस्राएल की सन्तानों ने नून के बेटे यहोशुआ को उनके बीच एक विरासत दे दी:

५० प्रभु के शब्दानुसार उन्होंने उसे वह नगर दे दिया जो उसने माँगा था, तिम्नासेरा एफ्रैम पहाड़ में: और उसने उस नगर का निर्माण किया, और उस में बस गया।

५१ यही वह विरासतें हैं, जिन्हें पुरोहित एलाज़र, और नून के बेटे यहोशुआ, और इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों के पित्रों के मुखियों ने एक विरासत हेतु शिलो में पर्ची डाल कर प्रभु के सम्मुख सभा के तम्बू के द्वार पर विभाजित कर दिया। तो उन्होंने देश की विभाजन-क्रिया का अन्त कर दिया। 



बीसवाँ अध्याय।


प्रभु यहोशुआ से भी बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, अपने लिए शरण-नगरों को नियुक्त कर दो, जिनके विषय में में तुम से मूसा के हाथ बोला था:

ताकि वह हत्यारा जो किसी भी व्यक्ति को अनभिज्ञता से और अनजाने से मार देता है वहीं भाग खड़ा हो: और वह रक्त के प्रतिषोधी से तुम्हारी शरण होंगे।

और जब वो जो उन नगरों में से किसी में भाग गया है उस नगर के द्वार के प्रवेश में खड़ा होगा, और उस नगर के वृद्ध-गणों के कानों में अपनी बात घोषित करेगा, वह उसे अपने पास उस नगर में ले जाएँगे, और उसे एक स्थान दे देंगे, ताकि वह उनके बीच बस सके।

और यदि वह रक्त का प्रतिषोधी उसका पीछा करे, तो वह उस हत्यारे को उसके हाथ में नहीं प्रदान करेंगे; क्योंकि उसने अपने पड़ौसी को अनजाने में मार डाला, और उस से पहले से घृणा नहीं की थी।

और वह उस नगर में तब तक रहेगा, जब तक वह न्याय हेतु सभा के सम्मुख नहीं खड़ा हो जाता है, और जब तक कि उन दिनो के उच्च पुरोहित की मृत्यु नहीं हो जाती: तब वह हत्यारा वापस लौट जाएगा, और अपने ही स्वयं के नगर में, और अपने ही घर में जाएगा, उसी नगर में जहाँ से वो भागा था।

और उन्होंने गलील में केदेश नफ़्तालि पहाड़ में, और शकेम एफ्रैम पहाड़ में, और किर्यथरबा, जो कि हेब्रोन है, यहूदा के पर्वत में  नियुक्त किए।

और पूर्व की ओर यरीहो के साथ यर्दन के उस पार, उन्होंने जँगली-क्षेत्र में बज़र को नियुक्त किया रूबेन की प्रजाति में से उस मैदान पर, और गिलद में रमोथ गाद की प्रजाति में से, और बशान में गोलन, मनश्शे की प्रजाति में से।

यही वह नियुक्त नगर थे, इस्राएल की समस्त सन्तानों के लिए, और उस परदेशी के लिए जो उनके बीच बसता है, ताकि जो कोई भी किसी भी व्यक्ति को अनभिज्ञता से मार डाले वहाँ भाग जाए, और रक्त के प्रतिषोधी के हाथ मारा जाए, जब तक कि वह सभा के सम्मुख खड़ा हो गया हो।



इक्कीसवाँ अध्याय।


तब लेवी-वंशजों के पित्रों के प्रमुख, पुरोहित एलाज़र, और नून के बेटे यहोशुआ, और इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों के पित्रों के मुखियों के निकट आए;

और वह उन से कनान की भूमी में शिलो में बोले, कहते हुए, प्रभु ने मूसा के हाथ हमें बसने हेतु नगर, उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ हमारे मवेशियों के लिए, दे देने का आदेश दिया था।

और इस्राएल की सन्तानों ने अपनी विरासत में से लेवी-वंशजों को, प्रभु के आदेश पर, यह नगर और उनकी सार्वजनिक-भूमियाँ प्रदान कर दीं।

और कहाथ-वंशजों के परिवारों के लिए पर्ची निकली: और जो लेवी-वंशजों में से हारुन पुरोहित की सन्तानें थीं, पर्ची से यहूदा की प्रजाती में से और शिमोन की प्रजाति में से, और बिन्यामिन की प्रजाती में से, तेरह नगर रखे।

और कहाथ की शेष सन्तानों ने पर्ची से एफ्रैम की प्रजाति के परिवारों में से, और दान की प्रजाति में से, और मनश्शे की आधी प्रजाति में से, दस नगर रखे।

और गेरशौन की सन्तानों ने पर्ची से इस्सकार की प्रजाति के परिवारों में से, और आशेर की प्रजाति में से, और नफ्ताली की प्रजाति में से, और बशान में मनश्शे की आधी प्रजाति में से, तेरह नगर रखे।

मरेरी की सन्तानों ने अपने परिवारों से रूबेन की प्रजाति में से, और गाद की प्रजाति में से, और ज़बूलून की प्रजाति में से, बारह नगर रखे।

और इस्राएल की सन्तानों ने पर्चियाँ डाल कर लेवी-वंशजों को यह नगर उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ प्रदान कर दिए, जैसा प्रभु ने मूसा के हाथ आदेश दे दिया था।

और उन्होंने यहूदा की सन्तानों की प्रजाति में से, और शिमोन की सन्तानों की प्रजाति में से यह नगर प्रदान कर दिए, जिनक नाम यहाँ उल्लेखित है,

१० जिन्हें हारुन की सन्तानों ने, कहाथ-वंशजों के परिवारों में से होते हुए, जो कि लेवी की सन्तानें थे, रखा: क्योंकि उन्हीं की पहली पर्ची थी।

११ और उन्होंने उन्हें अर्बा का नगर, अनक का पिता, जो नगर हेब्रोन है, यहूदा के पहाड़ी प्रदेश में, उसकी चारों ओर की सार्वजनिक-भूमियों के साथ, प्रदान कर दिया।

१२ परन्तु नगर के खेत, और उसके गाँव, उन्होंने यपुन्ने के बेटे कालेब को उसके अधिकार हेतु प्रदान कर दिए।

१३ इस प्रकार उन्होंने पुरोहित हारुन की सन्तानों को हेब्रोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ प्रदान कर दिया, हत्यारे के लिए एक शरण का नगर होने के लिए; और लिब्ना उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

१४ और यतीर उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और एश्तमो उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

१५ और होलोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और दबर उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

१६ और एइन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और यत्ता उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और बेतशेमश उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; नौ नगर उन दोनो प्रजातियों में से।

१७ और बिन्यामिन की प्रजाति में से, गिब्यन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, गेबा उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

१८ अनथोथ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और अल्मोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

१९ उन पुरोहितों, हारुन की सन्तानों के सभी नगर, तेरह नगर थे उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ।

२० और कहात की सन्तानों के परिवार, वह लेवी-वंशज जो कहात की सन्तानों से बचे रह गए थे, उनके पास भी उनकी पर्ची से एफ्रैम की प्रजाति में से नगर थे।

२१ क्योंकि उन्होंने उन्हें प्रदान कर दिए, शेकम उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ एफ्रैम पहाड़ में, हत्यारे के लिए एक शरण-नगर हेतु; और गेज़र उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

२२ और किब्ज़ेम उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और बेतहोरोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, चार नगर। 

२३ और दान की प्रजाति में से एलतके उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, गिबथोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

२४ आयलोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, गथरिमोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

२५ और मनश्शे की आधी प्रजाति में से, तनाक उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और गथरिमोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; दो नगर।

२६ वह सभी नगर दस थे उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ उन शेष कहात की सन्तानों के परिवारों हेतु।

२७ और लेवी-वंशजों के परिवारों में से गेरशौन की सन्तानों को, मनश्शे की प्रजाति के दूसरे आधे भाग में से उन्होंने बशान में गोलन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ प्रदान कर दिया, हत्यारे के लिए एक शरण-नगर होने हेतु; और बीशतरा उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; दो नगर।

२८ और इस्सकार की प्रजाति में से, किशोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, दबरा उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

२९ यरमुत उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, एनगनिम उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

३० और आशेर की प्रजाति में से, मिशल उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, अब्दों उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

३१ हलकथ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और रेहोब उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

३२ और नफ़्ताली की प्रजाति में से, गलील में केदेश उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, हत्यारे के लिए एक शरण-नगर हेतु; और हमोतदोर उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और करतन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; तीन नगर।

३३ गेरशौन-वंशजों के सभी नगर उनके परिवारोंनुसार तेरह नगर थे उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ।

३४ और लेवी-वंशजों के शेष, मरेरी की सन्तानों के परिवारों को, ज़बूलून की प्रजाति में से, योकनयम उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और करता उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

३५ दिमना उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, नहलाल उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

३६ और रूबेन की प्रजाति में से, बज़र उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, और यहज़ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

३७ कदमोथ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, मफाथ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; चार नगर।

३८ और गाद की प्रजाति में से, गिलद में रमोथ उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, हत्यारे के लिए एक शरण-नगर हेतु; और महानैम उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ,

३९ हेश्बोन उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ, यज़र उसकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ; सभी बगर चार।

४० तो मरेरी की सन्तानों के लिए वह सभी नगर उनके परिवारों से, जो कि लेवी-वंशजों के परिवारों से शेष रेह गए थे, उनकी पर्ची से बारह नगर थे।

४१ लेवी-वंशजों के समस्त नगर इस्राएल की सन्तानों के अधिकार में अड़तालीस नगर थे उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ।

४२ यह प्रत्येक नगर चारों ओर अपनी सार्वजनिक-भूमियों के साथ थे: इसी प्रकार से थे यह सभी नगर।

४३ और प्रभु ने इस्राएल को वह समस्त भूमी प्रदान कर दी जिसकी उन्होंने उनके पित्रों को प्रदान कर देने की शपथ दी थी; और उन्होंने उस पर अधिकार कर लिया, और उस में बस गए।

४४ और प्रभु ने उन्हें चारों ओर आस-पास विश्राम दे दिया, उस सभी के अनुसार जो उन्होंने उनके पित्रों को वचन दिया था: और उनके सामने उनके समस्त शत्रुओं में से एक भी आदमी खड़ा था; प्रभु ने उनके समस्त शत्रुओं को उनके हाथ में प्रदान कर दिया।

४५ इस्राएल के घराने के लिए कोई भी अच्छी बात विफल नहीं हुई जो प्रभु ने उनसे कही थी; सभी कुछ पूर्ण होने को गया।



बाईसवाँ अध्याय।


और यहोशुआ ने रूबेन-वंशजों, और गाद-वंशजों, और मनश्शे की अर्ध प्रजाति को बुलाया,

और उनसे कहा, तुम ने उस सभी का पालन कर लिया है जो प्रभु के सेवक मूसा ने तुम्हें आदेश दिया था, और तुम ने मेरी वाणी का उस सभी में पालन कर लिया है जो मैंने तुम्हें आदेश दिया था:

तुम ने इस दिन तक अपने भाई-जनो को इन कई दिनो त्यागा नहीं, बल्कि प्रभु अपने ईश्वर के आदेश का प्रभार रखे रखा है। 

और प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने, जैसा उन्होंने उन्हें वचन दिया था, तुम्हारे भाई-जनो को अब विश्राम प्रदान कर दिया है: इसलिए तुम अब लौट जाओ, और अपने तम्बुओं में, और अपने अधिकार की भूमी में चले जाओ, जिसे प्रभु के नौकर मूसा ने तुम्हें यर्दन के उस पार दे दी थी।

परन्तु उस आदेश और उस नियम को करने का कर्मठता से ध्यान देना, जिसका प्रभार प्रभु के सेवक मूसा ने तुम्हें दिया था, प्रभु अपने ईश्वर से प्रेम करने का, और उनके समस्त पथों में चलने का, और उनके आदेशों का पालन करने का, और उनके साथ चिपट जाने का, और अपने सम्पूर्ण हृदय और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ उनकी सेवा करने का।

तो यहोशुआ ने उन्हें आशीष दे दिया, और उन्हें विदा कर दिया: और वह अपने तम्बुओं की ओर चले गए।

अब मूसा ने मनश्शे की अर्ध प्रजाति को बशान में अधिकार दे दिया था: परन्तु उसके दूसरे अर्ध को यहोशुआ ने पश्चिम की ओर यर्दन के इस पार उनके भाई-जनो के बीच दे दिया था। और जब यहोशुआ ने उन्हें भी उनके तम्बुओं की ओर विदा किया, तो उसने उन्हें आशीष दिया।

और वह उनसे बोला, कहता हुआ, बहुत धन-धान्यों के साथ और अत्याधिक मवेशियों के साथ, रजत के साथ और स्वर्ण के साथ, और पीतल के साथ, और लोहे के साथ, और बहुत सारे वस्त्र के साथ अपने तम्बुओं, वापस लौट जाओ: अपने भाई-जनो के साथ अपने शत्रुओं की लूट का विभाजन कर लेना।

और रूबेन की सन्तानें और गाद की सन्तानें और मनश्शे की अर्ध प्रजाति वापस लौट आए, और कनान की भूमी में शिलो से इस्राएल की सन्तानों से परस्थान कर लिया, गिलद देश में अपने अधिकार की भूमी में चले जाने हेतु, जिस पर उन्हें अधिकार दिया गया था, प्रभु के शब्दानुसार मूसा के हाथ।

१० और जब वह कनान की भूमी में यर्दन की सीमाओं तक पहूँच गए थे, तो रूबेन की सन्तानों और गाद की सन्तानों और मनश्शे की अर्ध प्रजाति ने वहाँ यर्दन के साथ ही एक बलिवेदी का निर्माण कर दिया, जो देखने में एक विशाल बलिवेदी थी।

११ और इस्राएल की सन्तानों ने यह कहना सुना, देखो तो, रूबेन की सन्तानों और गाद की सन्तानों और मनश्शे की अर्ध प्रजाति ने इस्राएल की सन्तानों के पथ पर, यर्दन की सीमाओं में, कनान की भूमी के सामने ही एक बलिवेदी का निर्माण कर लिया है।

१२ और जब इस्राएल की सन्तानों ने इसके विषय में सुना, तो इस्राएल की सन्तानों की सम्पूर्ण सभा ने स्वयं को एक साथ शिलो में एकत्रित कर लिया, उनके विरुद्ध युद्ध छेड़ देने के लिए।

१३ और इस्राएल की सन्तानों ने रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों, और मनश्शे की अर्ध प्रजाति के पास गिलद की भूमी में पुरोहित एलाज़र के बेटे फिनहास को भिजवा दिया,

१४ और उसके साथ इस्राएल की समस्त प्रजातियों के सर्वत्र में से दस अध्यक्ष, प्रत्येक घराने से एक अध्यक्ष; और वह हर एक अपने पित्रों के घराने का एक मुखिया था इस्राएल की हज़ारों के बीच।

१५ और वह रूबेन की सन्तानों और गाद की सन्तानों और मनश्शे की अर्ध प्रजाति के पास गिलद की भूमी में पहुँचे, और वह उनसे बोले, कहते हुए,

१६ प्रभु की पूरी सभा इस प्रकार कहती है, यह कैसा उल्लंघन है जो तुमने इस्राएल के ईश्वर के विरुद्ध कर डाला है, इस दिन प्रभु का अनुसरण करने से परे मुड़ जाना, कि तुमने एक बलिवेदी का अपने लिए निर्माण कर दिया है, ताकि तुम इस दिन प्रभु के विरुद्ध विद्रोह कर बैठो?

१७ क्या पओर की अधर्मता हमारे लिए बहुत छोती सी ही थी, जिस से कि हम इस दिन तक भी स्वच्छ नहीं हो पाए हैं, भले ही प्रभु की सभा में एक विपत्ती पड़ी थी,

१८ बल्कि इसी दिन तुम्हें अवश्य ही प्रभु का अनुसरण करने से परे मुड़ जाना है? और ऐसा होगा, यह देखते हुए कि तुम प्रभु के विरुद्ध विरोध कर बैठे हो, कि कल वह इस्राएल की पूरी सभा के प्रती आक्रोशित हो जाएँगे।

१९ और भई, यदि तुम्हारे अधिकार की भूमी अस्वच्छ हो, तो फिर तुम प्रभु के अधिकार की भूमी में पार चले आओ, जिस में प्रभु का तम्बू बसता है, और हमारे बीच अधिकार ले लो: परन्तु प्रभु के विरुद्ध विद्रोह मत करो, ही हमारे विरुद्ध विद्रोह करो, अपने लिए प्रभु हमारे ईश्वर की बलिवेदी के अतिरिक्त एक बलिवदी का निर्माण करने से।

२० क्या ज़ेरह के बेटे अकन ने उस श्रापित वस्तु में उल्लंघन नहीं किया था क्या, और इस्राएल की समस्त सभा पर आक्रोश पड़ा था? और वह पुरुष अपनी अधर्मता में अकेला ही नहीं नष्ट हुआ था।

२१ तब रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों, और मनश्शे की अर्ध प्रजाति ने उत्तर दिया, और इस्राएल के सहस्त्रों के मुखियों के कहा,

२२ ईश्वरों के प्रभु ईश्वर, ईश्वरों के प्रभु ईश्वर, वही जानते हैं, और इस्राएल जान जाएगा; कि यदि यह विद्रोह, या प्रभु के विरुद्ध यह अतिक्रमण हो, तो हमें इस दिन बचा मत रहने देना, 

२३ कि हमने अपने लिए एक बलिवेदी का, प्रभु का अनुसरण करने से मुड़ जाने हेतु, या उस पर जला-चढ़ावा या भोज-चढ़ावा चढ़ाने हेतु, या उस पर शान्ति-चढ़ावे चढ़ाने हेतु, निर्माण किया है, तो प्रभु स्वयं ही पूछ-ताछ कर लें;

२४ और कि हमने यह अपेक्षाकृत इसलिए नहीं कर दिया है इस बात के भय के मारे, कहते हुए, कि आने वाले समय में तुम्हारी सन्ताने हमारी सन्तानों से बोलें, कहते हुए, तुम्हें इस्राएल के प्रभु ईश्वर के साथ क्या करना-धरना भई? 

२५ क्योंकि तुम रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों, प्रभु ने यर्दन को हमारे और तुम्हारे बीच एक सीमा बना दी है; तुम्हारे पास प्रभु में कोई भी भाग नहीं है: इस प्रकार तुम्हारी सन्तानें हमारी सन्तानों को प्रभु का भय मानने से रोक देंगी।

२६ इसलिए हमने कहा, अब हम अपने लिए एक बलिवेदी उद्यत किए देते हैं, जले-चढ़ावे हेतु नहीं, ही बलि चढ़ाने हेतु:

२७ बल्कि वह हमारे और तुम्हारे, और हमारे पश्चात हमारी पीढ़ियों के बीच एक साक्ष्य हो, ताकि हम प्रभु के समक्ष सेवा, अपने जले-चढ़ावों के साथ, और अपने बलिदानों के साथ, और अपने शान्ति-चढ़ावों के साथ करें; ताकी आने वाले समय में तुम्हारी सन्ताने हमारी सन्तानों से कहें, तुम्हारे पास प्रभु में कोई भी भाग नहीं है।

२८ इसलिए हम ने कहा, कि यह आने वाले समय में ऐसा होगा, कि जब वह हम से या हमारी पीढ़ियों से ऐसा कहेंगे, कि हम पुनः कह देंगे, देख लो प्रभु की बलिवेदी का उदाहरण-स्वरूप, जिसका निर्माण हमारे पित्रों ने किया, जले-चढ़ावों हेतु नहीं, ही बलियों हेतु; बल्कि यह तो हमारे और तुम्हारे बीच एक साक्ष्य है।

२९ ऐसा कतई हो कि हम प्रभु के विरुद्ध विद्रोह कर दें, और इस दिन प्रभु का अनुसरण करने से परे मुड़ जाएँ, एक जले-चढ़ावों के लिए, और भोज-चढ़ावों के लिए, या बलियों के लिए, बलिवेदी बना देने हेतु, उस प्रभु हमारे ईश्वर की बलिवेदी के अतिरिक्त जो उनके तम्बू के समक्ष है।

३० और जब पुरोहित फिनहास ने और उन इस्राएल के सहस्त्रों के मुखियों और सभा के अध्यक्षों ने, जो उसके साथ थे, 

रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों, और मनश्शे की सन्तानों से बोले गए शब्दों को सुना, तो वह प्रसन्न हो गए।

३१ और पुरोहित एलाज़र के बेटे फिनहास ने रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों, और मनश्शे की सन्तानों से कहा, इस दिन हम यह आभास करते हैं कि प्रभु हमारे बीच हैं, क्योंकि तुमने प्रभु के विरुद्ध यह उल्लंघन नहीं किया है: अब तुमने इस्राएल की सन्तानों का प्रभु के हाथ से बचाव कर दिया है।

३२ और पुरोहित एलाज़र का बेटा फिनहास, और वह अध्यक्ष, गिलद की भूमी से बाहर, रूबेन की सन्तानों से, और गाद की सन्तानों से वापस लौट गए, कनान की भूमी में, इस्राएल की सन्तानों के पास, और उन्हें पुनः शब्द ले आए।

३३ और इस बात ने इस्राएल की सन्तानों को प्रसन्न कर दिया; और इस्राएल की सन्तानों ने ईश्वर को आशीष दिया, और उन जनो के विरुद्ध ऊपर जाकर युद्ध करने का आशय नहीं किया, उस भूमी को नष्ट कर देने हेतु जिस में रूबेन और गाद की सन्तानें निवास करती थीं। 

३४ और रूबेन की सन्तानों, और गाद की सन्तानों ने उस बलिवेदी को एद पुकारा: क्योंकि वह हमारे बीच एक साक्ष्य होगी कि प्रभु ईश्वर हैं।



तेईसवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, प्रभु के इस्राएल को उनके चारों ओर शत्रुओं से विश्राम प्रदान कर देने के एक बहुत की लम्बे समय पश्चात, कि यहोशुआ वृद्ध हो चला था और बहुत ही बूढ़ा हो गया था।

और यहोशुआ ने समस्त इस्राएल को, और उनके वृद्ध-गणों को, और उनके मुखियों को, और उनके न्यायाधीषों को, और उनके अफ़सरों को, बुलवा भेजा, और उनसे कहा, भई मैं तो वृद्ध हो चला हूँ और बहुत ही बूढ़ा हो गया हूँ:

और तुमने वह सभी कुछ देख लिया है जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उन सभी राष्ट्रों के साथ तुम्हारे कारण कर डाला है; क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ही वह हैं जिन्होंने तुम्हारे लिए लड़ाई की है।
देख लो, मैंने तुम्हें पर्ची डाल कर विभाजित कर दिए हैं यह बचे हुआ राष्ट्र, तुम्हारी प्रजातियों के लिए एक विरासत बन जाने के लिए, यर्दन से लेकर, उन सभी राष्ट्रों के साथ जिन्हें मैंने काट डाला है, पश्चिम की ओर महा सागर तक भी।

और प्रभु तुम्हारे ईश्वर, वही उन्हें तुम्हारे सामने से ढकेल देंगे, और उन्हें तुम्हारी दृष्टि में से बाहर खदेड़ देंगे; और तुम उनकी भूमी पर अधिकार जमा लोगे, जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रतिज्ञा दी थी। 

इसलिए तुम बहुत ही दृढ़ता पूर्वक बनो उसका पालन करने हेतु और उस सभी को करने हेतु जो मूसा के नियम की पुस्तक में लिखा हुआ है, ताकि तुम उस से दाएँ हाथ की ओर या बाएँ की ओर मुड़ जाओ;

ताकि तुम इन राष्ट्रों के बीच जाओ, यही जो तुम्हारे तुम्हारे बीच बचे रह गए हैं; ही उनके ईश्वरों के नाम का ज़िक्र करना, ही उनसे शपथ दिलवाना, ही उनकी सेवा करना, ही स्वयं उनके प्रति झुकना:

बल्कि प्रभु अपने ईश्वर के साथ चिपट जाना, जैसा तुमने इस दिन तक किया है।

क्योंकि प्रभु ने तुम्हारे समक्ष बड़े और शक्तिशाली राष्ट्रों को बाहर खदेड़ दिया है: परन्तु जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, कोई भी आदमी तुम्हारे समक्ष इस दिन तक भी खड़ा नहीं रह सका है। 

१० तुम में से एक ही आदमी एक हज़ार को भगा देगा: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर, वही हैं वह जो तुम्हारे लिए लड़ाई करते हैं, जैसी उन्होंने तुम्हें प्रतिज्ञा दे दी है।

११ इसलिए अपने स्वयं के प्रति बहुत चौकस रहना, कि तुम प्रभु अपने ईश्वर से प्रेम करो।

१२ अन्यथा यदि तुम किसी भी प्रकार से पीछे मुड़ चलो, और इन शेष राष्ट्रों के साथ चिपट जाओ, इन्हीं के साथ जो तुम्हारे बीच शेष रह गए हैं, और उनके साथ विवाह रचा लो, और उन में भीतर चले जाओ, और वह तुम में:

१३ निश्चितता से यह जान लो कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे समक्ष इन राष्ट्रों में से किसी को भी अब और नहीं खदेड़ेंगे; बल्कि यह तुम्हारे प्रति जाल और फंदे होंगे, और तुम्हारी आँखों में काँटे, जब तक कि तुम इस अच्छी भूमी पर से जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रदान की है, नष्ट नहीं हो जाओगे।

१४ और, देख लो, इस दिन मैं समस्त पृथ्वी के पथ पर जा रहा हूँ: और तुम अपने समस्त हृदयों में और अपनी समस्त आत्माओं में यह ज्ञान रखते हो, कि उन सभी अच्छी बातों में से एक भी बात विफल नहीं हुई है जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारे विषय में बोलीं थीं; सभी तुम्हारे प्रति होने को गई हैं, और उन में से एक भी बात विफल नहीं हुई है।

१५ इसलिए यह होने को आएगा, कि जिस प्रकार सभी अच्छी बातें तुम पर गई हैं, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रतिज्ञा दी थी; उसी प्रकार प्रभु तुम पर वह सभी बुरी बातें ले आएँगे, जब तक कि वह तुम्हारा इस अच्छी भूमी पर से विध्वंस नहीं कर देते हैं, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रदान की है।

१६ जब तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्र के प्रति अतिक्रमण कर चुकोगे, जो उन्होंने तुम्हें आदेश दिया था, और जाकर दूसरे ईश्वरों की सेवा कर चुकोगे, और स्वयं उनके प्रति झुक चुकोगे; तब प्रभु का क्रोध तुम्हारे विरुद्ध सुलग उठेगा, और तुम शीघ्रता से ही इस अच्छी भूमी पर से नष्ट हो जाओगे जो उन्होंने तुम्हें प्रदान की है।








चौबीसवाँ अध्याय।


और यहोशुआ ने इस्राएल की समस्त प्रजातियों को शकेम में एकत्रित कर लिया, और इस्राएल के वृद्ध-गणों, और उनके मुखियों, और उनके न्यायाधीषों, और उनके अफ़सरों को बुलवा भेजा; और उन्होंने स्वयं को ईश्वर के सम्मुख प्रस्तुत कर लिया।

और यहोशुआ ने सभी लोगों से कहा, इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, तुम्हारे पित्र प्राचीन समय में नहर के उस पार बसते थे, अब्राहम का पिता, और नाहोर का पिता, थराह ही: और उन्होंने अन्य ईश्वरों की सेवा की।

और मैंने तुम्हारे पित्र अब्राहम को नहर के उस पार से लिया, और उसका कनान की समस्त भूमी के सर्वत्र में नेतृत्व किया, और उसके बीज को गुणा किया, और उसे इसहाक प्रदान कर दिया।

और इसहाक को मैंने याकूब और एसाव प्रदान कर दिए: और एसाव को मैंने सेईर पहाड़ प्रदान कर दिया, उस पर अधिकार करने हेतु; परन्तु याकूब और उसकी सन्तानें नीचे मिस्र में चली गईं।

मैंने मूसा को भी और हारुन को भेजा, और मैंने मिस्र को विपत्तित कर दिया, उसी के अनुसार जो मैंने उनके बीच कर डाला था: और उसके पश्चात मैं तुम्हें बाहर निकाल लाया।

और मैं तुम्हारे पित्रों को मिस्र में से बाहर निकल लाया: और तुम समुद्र तक पहुँचे; और तुम्हारे पित्रों का मिस्रवासियों ने रथों और घुड़सवारों के साथ लाल समुद्र तक पीछा किया।

और जब वह प्रभु के प्रति चीख पड़े, उन्होंने तुम्हारे और मिस्रवासियों के बीच अंधकार कर दिया, और उन पर समुद्र को ले आए, और उन्हें ढक दिया; और तुम्हारी आँखों ने वह देख लिया है जो मैंने मिस्र में कर दिया है: और तुम एक दीर्घ काल तक जँगली-क्षेत्र में बसे।

और मैं तुम्हें एमोरवासियों की भूमी में ले आया, जो यर्दन के उस पार बसते थे; और वह तुम्हारे साथ लड़े: और मैंने उन्हें तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया, ताकि तुम उनकी भूमी पर अधिकार कर लो; और मैंने उनका तुम्हारे समक्ष विध्वंस कर दिया।

तब मोआब का राजा, ज़िपोर का बेटे बलक इस्राएल के विरुद्ध उठा और लड़ पड़ा, और उसने बओर के बेटे बिलाम को तुम्हें श्रापित कर देने हेतु बुलवा भेजा:

१० परन्तु मैंने बिलाम को नहीं सुना; इसलिए उसने तुम्हें फिर भी आशीष दिया: इस प्रकार मैंने तुम्हें उसके हाथ में से बचा लिया।

११ और तुम यर्दन के पार चल चले, और यरीहो पहूँच गए: और यरीहो के आदमी तुम्हारे विरुद्ध लड़ पड़े, एमोरवासी, और पेरिज़वासी, और कनानवासी, और हित्ती-वंशज, और गिरगश-वंशज, और हिव्वी-वंशज, और यबूसी-वंशज; और मैंने उन्हें तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया।

१२ और मैंने तुम्हारे सम्मुख ततईए को भेजा, जिसने उन्हें तुम्हारे सामने से खदेड़ दिया, एमोरवासियों के ही उन दो राजाओं को; तुम्हारी तलवार से नहीं, ही तुम्हारे धनुष से।

१३ और मैंने तुम्हें एक भूमी प्रदान कर दी है जिसके लिए तुम ने श्रम नहीं किया, और नगर जिनका तुमने निर्माण नहीं किया, और तुम उन में बसते हो; उन अंगूर-खेतों में से और उन जैतून के खेतों में से जिन्हें तुमने रोपा नहीं तुम खाते हो।

१४ इसलिए अब प्रभु का भय मान लो, और नेकनीयती में और सत्य में उनकी सेवा कर लो: और उन ईश्वरों को परे हटा दो जिनकी तुम्हारे पित्रों ने नहर के उस पार, और मिस्र में सेवा की थी; और तुम प्रभु की सेवा करो।

१५ और यदि तुम्हें प्रभु की सेवा करना बुरा लग रहा है, इसी दिन तुम चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे; चाहे तो उन ईश्वरों की जिनकी तुम्हारे पित्रों ने नहर के उस पार सेवा की थी, या एमोरवासियों के ईश्वरों की जिन की भूमी में तुम निवास करते हो: परन्तु मैं और मेरा घराना, हम तो प्रभु की सेवा करेंगे।

१६ और उन लोगों ने उत्तर दिया और कहा, ऐसा कतई हो कि हम प्रभु का अन्य ईश्वरों की सेवा करने हेतु, त्याग कर दें;

१७ क्योंकि प्रभु हमारे ईश्वर, वही हैं जो हमें और हमारे पित्रों को मिस्र की भूमी में से बाहर, बंध्वा-बेगारी के घर में से ऊपर बाहर निकाल लाए, और जिन्होंने हमारी दृष्टि में वह महान संकेत किए, और उस समस्त पथ पर हमारा परिरक्षण किया जिस में हम गए, और उन सभी लोगों के बीच, जिन में से हम पार चलते गए:

१८ और प्रभु ने हमारे सामने ने उस समस्त लोगों को बाहर खदेड़ दिया, एमोरवासियों को ही जो भूमी में बसते थे; इसलिए भी हम प्रभु की सेवा करेंगे; क्योंकि वही हमारे ईश्वर हैं।

१९ और यहोशुआ ने लोगों से कहा, तुम प्रभु की सेवा नहीं कर सकते हो भई: क्योंकि वह तो एक पवित्र ईश्वर हैं; वह एक ईर्ष्यालु ईश्वर हैं; वो तुम्हारे अतिक्रमणों को ही तुम्हारे पापों को क्षमा करेंगे।

२० यदि तुम प्रभु का त्याग कर दोगे, और परदेशी ईश्वरों की सेवा करोगे, तब वह मुड़ कर तुम्हें हानि पहुँचा देंगे, और तुम्हें समाप्त कर देंगे, तुम्हारे साथ भला कर देने के पश्चात।

२१ और उन लोगों ने यहोशुआ से कहा, नहीं भई; बल्कि हम तो प्रभु की सेवा करेंगे।

२२ और यहोशुआ ने लोगों से कहा, तुम अपने स्वयं के ही प्रति साक्षी हो कि तुमने प्रभु को चुन लिया है, उनकी सेवा करने हेतु। और उन्होंने कहा, हम साक्षी हैं।

२३ अब इसलिए परे हटा दो, उसने कहा, उन परदेशी ईश्वरों को जो तुम्हारे बीच हैं, और अपने हृदय को इस्राएल के प्रभु ईश्वर के प्रति झुका लो।

२४ और उन लोगों ने यहोशुआ से कहा, प्रभु हमारे ईश्वर की हम सेवा करेंगे, और उनकी वाणी का हम आज्ञापालन करेंगे।

२५ तो यहोशुआ ने उस दिन उन लोगों के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, और शकेम में उन्हें एक विधान और एक अध्यादेश स्थित कर दिया।

२६ और यहोशुआ ने इन शब्दों को ईश्वर के नियम की पुस्तक में लिख दिया, और एक विशाल पत्थर लेकर उसे वहाँ एक बाँझ के तले स्थित कर दिया, जो प्रभु के पुण्य-स्थान के साथ ही था।

२७ और यहोशुआ ने सभी लोगों से कहा, देखो, यही पत्थर हमारे प्रति एक साक्षी होगा; क्योंकि इसने प्रभु के उन सभी शब्दों को सुन लिया है जो वह हमारे साथ बोले थे: इसलिए यह तुम्हारे प्रति एक साक्ष्य होगा, कहिं तुम अपने ईश्वर को अस्वीकार कर दो।

२८ तो यहोशुआ ने लोगों को प्रस्थान कर लेने दिया, प्रत्येक पुरुष अपनी ही विरासत की ओर।

२९ और इन बातों के पश्चात यह होने को आया, कि प्रभु के उस सेवक, नून के बेटे यहोशुआ का देहान्त हो गया, एक सौ दस वर्षों का होता हुआ।

३० और उन्होंने उसे उसकी विरासत की सीमा में तिम्नासेरा में दफ़ना दिया, जो कि एफ्रैम के पहाड़ में है, गाश पहाड़ के उत्तरी पाशर्व पर।

३१ और इस्राएल ने प्रभु की सेवा यहोशुआ के समस्त दिनो में की, और उन वृद्ध-गणों के समस्त दिनो में जो यहोशुआ से अधिक जीए, और जो प्रभु के समस्त कार्यों से परिचित थे, जो उन्होंने इस्राएल के लिए किए थे।

३२ और युसुफ की उन अस्थियों को जिन्हें इस्राएल की सन्तानें मिस्र में से ऊपर बाहर ले आईं थीं, उन्होंने शकेम में दफ़ना दिया, एक धरती के टुकड़े में जिसे याकूब ने शकेम के पिता हमोर के बेटों से एक सौ चाँदी के टुकड़ों के लिए खरीदा था: और यह युसुफ की सन्तानों की विरासत बन गया।

३३ और हारुन का बेटा एलाज़र मर गया; और उन्होंने उसे एक पहाड़ में दफ़ना दिया जो फिनहास उसके बेटे का था, जो उसे एफ्रैम पहाड़ में प्रदान कर दिया गया था। 



०६/०८/२०२५: 






























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