द्वितीय शमूएल। (Second Samuel)



(एक सुझाव: इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में कार्यशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें।)




पहला अध्याय।


अब शाऊल की मृत्यु के उपरान्त यह होने को आया, जब दाऊद उन अमालेक-वंशजों के संहार से वापस लौट चुका था, और दाऊद ज़िकलग में दो दिन वास कर चुका था;

यह तीसरे ही दिन होने को आया, कि देखो, शाऊल की छावनी में से एक आदमी फटे हुए कपड़ों के साथ और सर पर धूल-मिट्टी लिए बाहर निकल आया: तो भई यह ऐसा ही था, जब वो दाऊद के पास पहुँचा था, कि वो धरती पर ही गिर पड़ा, और उसने अभिवादन किया।

और दाऊद ने उस से कहा, भई कहाँ से पधारे हो तुम? और उसने उस से कहा, इस्राएल की छावनी में से मैं बाहर बच निकला हूँ जी।

और दाऊद ने उस से कहा, बात किस ओर गई? मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मुझे बता दो। और उसने उत्तर दिया, कि लोग तो रण से भाग गए हैं, और लोगों में से कई गिर कर मर भी गए हैं; और शाऊल और उनका बेटा योनातन भी मर गए हैं।

और दाऊद ने उस युवा पुरुष से कहा जिसने उसे बताया था, तुम कैसे जानते हो कि शाऊल और उनका बेटा योनातन मर चुके हैं?

और उस युवा पुरुष ने जिसने उसे बताया था कहा, जी जैसे मैं संयोग से ही गिलबो पहाड़ पर था, देखें, शाऊल अपने भाले पर टिके हुए थे; और लो जी, वो रथ और वो घुड़सवार उनके पीछे ही पड़े हुए थे।

और जब उन्होंने अपने पीछे देखा, तो उन्होंने मुझे देखा, और मुझे पुकारा। और मैंने उत्तर दिया, जी मैं यहाँ हूँ।

और उन्होंने मुझ से कहा, कौन हो तुम भई? और मैंने उन्हें उत्तर दिया, मैं तो जी एक अमालेक-वंशज हूँ।

उन्होंने मुझ से पुनः कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मुझ पर खड़े हो कर मुझे मार डालो: क्योंकि वेदना पड़ी है मुझ पर, क्योंकि मेरा जीवन तो अभी भी मुझ में पूर्ण है।

१० तो मैंने उन पर खड़े होकर उन्हें मार डाला, क्योंकि मैं निश्चित था कि वो गिर पड़ने के पश्चात नहीं जी पाएँगे: और मैंने वो मुकुट ले लिया जो उनके सर पर था, और वो कड़ा जो उनकी बाँह पर था, और उन्हें यहाँ मेरे प्रभु के पास ले आया हूँ जी।

११ तब दाऊद ने अपने कपड़े पकड़ कर उन्हें फाड़ डाला; और इसी प्रकार ही उन सभी आदमियों ने जो उसके साथ थे:

१२ और उन्होंने शोक मनाया, और वो रोए, और शाऊल के लिए, और उसके बेटे योनातन के लिए, और प्रभु के लोगों के लिए, और इस्राएल के घराने के लिए, संध्या तक उपवास रखा; क्योंकि वो तलवार से गिरा दिए गए थे।

१३ और दाऊद ने उस युवा पुरुष से कहा जिसने उसे बताया था, कहाँ से हो तुम? और उसने उत्तर दिया, मैं एक परदेशी, एक अमालेक-वंशज का बेटा हूँ जी।

१४ और दाऊद ने उस से कहा, तू कैसे प्रभु के अभिषिक्त को नष्ट करने हेतु डरा नहीं अपने हाथ को आगे बढ़ाने से? 

१५ और दाऊद ने उन युवकों में से एक को बुलाकर कहा, निकट जाकर वार कर दो इस पर। और उसने उस पर वार कर डाला कि वो मर गया।

१६ और दाऊद ने उस से कहा, तेरा रक्त तेरे ही सर पर पड़े; क्योंकि तेरे ही मुँह ने तेरे विरुद्ध साक्ष्य दे दिया है, कहता हुआ, मैंने ही प्रभु के अभिषिक्त को मार डाला। 

१७ और दाऊद ने इस शोक-विलाप से शाऊल के प्रति और उसके बेटे योनातन के प्रति शोक-विलाप मनाया: 

१८ (उसने उनसे बोला भी यहूदा की सन्तानों को धनुष चलाना सिखाना: देखो यह यशर की पुस्तक में लिखा हुआ है।)

१९ तुम्हारे उच्च स्थानों पर इस्राएल का सौन्दर्य मार दिया गया है: वो बलशाली कैसे गिर पड़े!

२० यह गथ में बताना, इसकी अस्कलोन की सड़कों पर घोषणा मत करना; कहिं पलिश्तिम-वंशजों की बेटियाँ हर्ष मानाएँ, कहिं उन बेख़तनितों की बेटियाँ विजयोल्लास मनाएँ।

२१ तुम गिलबो के पर्वतों, कोई ओस पड़े, ही वर्षा गिरे तुम पर, ही आहुतियों के खेत: क्योंकि वहीं उन बलशाली की ढाल अधमता से फैंक दी गई है, शाऊल की ही ढाल, मानो कि उनका तेल से अभिषेक ही नहीं हुआ था।

२२ उन मरे हुओं के रक्त से, उन शूरवीरों की चर्बी से, योनातन कर धनुष पीछे नहीं मुड़ा, और शाऊल की तलवार रिक्त नहीं वापस लौटी।

२३ शाऊल और योनातन अपने जीवनों में प्यारे और मनोहर थे, और उनकी मृत्यु में वो पृथक थे: वो गरुड़ों से भी फुर्तीले थे, वो शेरों से भी शक्तिशाली थे।

२४ इस्राएल की तुम बेटियों, शाऊल पर रो लो, जिन्होंने तुम्हें सुर्ख से और अन्य सुखद वस्तुओं से आवृत किया, जिन्होंने तुम्हारे वस्त्रों पर स्वर्ण आभूषण लगाए।

२५ वो बलशाली कैसे गिर पड़े रण-भूमी के बीच! हे योनातन, तुम अपने उच्च स्थानों में मार दिए गए थे।

२६ मैं संतापित हूँ तुम्हारे लिए, मेरे भाई योनातन: अति-सुखद रहे हो तुम मेरे प्रति: मेरे प्रति तुम्हारा प्रेम अद्भुत था, स्त्रियों के प्रेम पार।

२७ वो बलशाली कैसे गिर पड़े, और युद्ध के शस्त्र नष्ट हो गए!



दूसरा अध्याय।


और इसके उपरान्त यह होने को आया, कि दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की, कहते हुए, क्या मैं यहूदा के नगरों में से किसी में भी ऊपर चला जाऊँ? और प्रभु ने उस से कहा, ऊपर चले जाओ। और दाऊद ने कहा, मैं ऊपर कहाँ जाऊँ जी? और उन्होंने कहा, हेब्रोन में।

तो दाऊद वहाँ ऊपर चला गया, और उसकी दोनो पत्नियाँ भी, अहिनोम वो जज़रील-वाली, और उस करमल-वाले नबल की पत्नी अबिगल।

और उसके साथ वो जो आदमी थे दाऊद ऊपर ले आया, प्रत्येक पुरुष उसके घर-बार के साथ: और वो हेब्रोन के नगरों में बस गए।

और यहूदा के पुरुष आए, और वहीं उन्होंने यहूदा के घराने पर दाऊद को राजा अभिषिक्त कर दिया। और उन्होंने दाऊद को बताया, कहते हुए, कि वो यबेशगिलद के ही पुरुष थे जिन्होंने शाऊल को दफ़नाया था।

और दाऊद ने यबेशगिलद के लोगों के पास दूत भिजवा दिए, और उनसे कहा, प्रभु का आशीष पड़े तुम पर, कि तुमने यह करुणा अपने प्रभु के प्रति दिखलाई है, शाऊल ही के प्रति, और उन्हें दफ़ना दिया है।

और अब प्रभु तुम्हारे प्रति करुणा और सत्य दिखला दें: और मैं भी तुम्हारे प्रति इस करुणा का भुक्तान कर दूँगा, क्योंकि तुम ने यह कार्य कर दिया है।

अब इसलिए तुम्हारे हाथों प्रबल हो जाएँ, और तुम वीर बनो: क्योंकि तुम्हारे मालिक शाऊल का देहान्त हो चुका है, और यहूदा के घराने ने मुझे उन पर राजा भी अभिषिक्त कर दिया है।

परन्तु शाऊल की सेना के कप्तान, नर के बेटे अबनर ने शाऊल के बेटे इशबोशेत को लिया, और उसे महनैम ले आया;

और उसे गिलद पर, और अशुरियों पर, और यज़रील पर, और एफ्रैम पर, और बिन्यामिन पर, और समस्त इस्राएल पर राजा बना दिया।

१० शाऊल का बेटा इशबोशेत चालीस वर्ष की आयु का था जब वो इस्राएल पर राज करने लेगा, और उसने दो वर्ष राज किया। परन्तु यहूदा का घराना दाऊद का अनुसरण करने लगा।

११ और हेब्रोन में यहूदा के घराने पर दाऊद के राजा होने का वो समय सात वर्ष और छह महीने था।

१२ और नर का बेटा अबनर, और शाऊल के बेटे इशबोशेत के सेवक, महानैम से बाहर निकल कर गिब्यन गए।

१३ और ज़रूआया का बेटा योआब, और दाऊद के सेवक बाहर निकल कर गिब्यन के कुण्ड के साथ एक साथ मिले: और वो नीचे बैठ गए, एक कुण्ड के एक ओर, और दूसरा कुण्ड के दूसरी ओर।

१४ और अबनर ने योआब से कहा, अब इन युवा पुरुषों को उठ कर हमारे सामने खेल खेल लेने दो। और योआब ने कहा, उठ जाने दो इन्हें।

१५ तब बिन्यामिन वाले जो शाऊल के बेटे इशबोशेत के थे, उठ कर संख्या में बारह, पार चले गए, और दाऊद के सेवकों में से बारह।

१६ और उन्होंने हर एक ने अपने बन्दे को सर से पकड़ कर अपनी तलवार उसके बन्दे के पाशर्व में भोंक डाली; तो वो एक साथ ही नीचे गिर पड़े: इस कारण वो स्थान हलकतहज़रिम कहलाया गया था, जो गिब्यन में है।

१७ और उस दिन एक बहुत ही घमासान युद्ध हुआ; और दाऊद के सेवकों के समक्ष अबनर और इस्राएल के लोग पीट दिए गए थे। 

१८ और वहाँ ज़रूआया के तीन बेटे थे, योआब, और अबिशय, और असहेल: और असहेल के पैर एक हिरन समान फुर्तीले थे।

१९ और असहेल अबनर के पीछे पड़ा हुआ था; और अबनर के पीछे जाने में वो ही दाएँ हाथ की ओर ही बाएँ की ओर मुड़ा। 

२० तब अबनर ने अपने पीछे देख कर कहा, क्या तुम असहेल हो? और उसने उत्तर दिया, मैं हूँ।

२१ और अबनर ने उस से कहा, परे मुड़ जाओ भई अपने दाएँ हाथ की ओर या बाएँ की ओर, और उन युवा पुरुषों में से एक को पकड़ लो, और तुम उसके शस्त्र लूट लो। परन्तु असहेल उसका पीछा करने से परे नहीं मुड़ रहा था।

२२ और अबनर ने पुनः असहेल से कहा, भई तू मेरा पीछा करने से परे मुड़ जा: मैं तुझे क्यों धरती पर पीट डालूँ? तो फिर मैं कैसे अपना चेहरा तेरे भाई योआब के सामने ऊपर उठाकर रखूँगा?

२३ परन्तु उसने परे मुड़ जाना स्वीकार नहीं किया: इस कारण वश अबनर ने भाले के पीछे के छोर से उस पर वार कर डाला पाँचवी पसली के नीचे ही, कि वो भाला उसके पीछे से बाहर निकल आया; और वो वहीं नीचे गिर पड़ा, और उसी स्थान में मर गया: और यह होने को आया, कि जितने भी उस स्थान पर पहुँचे जहाँ असहेल नीचे गिर कर मरा था, अचल ही खड़े रह गए।  

२४ योआब ने भी और अबिशय ने अबनर का पीछा किया: और सूर्यास्त हो चला था जब वो अम्माह की पहाड़ी तक पहुँचे थे, जो गिया के सामने है गिब्यन के जँगली-क्षेत्र के पथ के साथ।

२५ और बिन्यामिन की सन्तानों ने स्वयं को अबनर के पीछे-पीछे एक साथ एकत्रित कर लिया, और एक गुट बन कर, एक पहाड़ी पर खड़े हो गए।

२६ तब अबनर ने योआब को पुकारा और कहा, क्या तलवार सदा के लिए भक्षण करती रहेगी क्या? क्या तुम ये जानते नहीं कि अन्त में कटुता ही रह जाएगी? तो भई फिर और कितने समय तक तुम लोगों को अपने भाई-जनो का पीछा करने से वापस लौटने हेतु नहीं बोलोगे?

२७ और योआब ने कहा, ईश्वर के जीते जी, सिवाय कि तुमने बोला होता, अवश्य ही प्रातः में लोगों में से प्रत्येक अपने भाई का पीछा करने से ऊपर जा चला होता।

२८ तो योआब ने चिंघाड़ा फूँक डाला, और सभी लोग अचल खड़े हो गए, और इस्राएल के पीछे अब और नहीं पड़े, ही उन्होंने अब और अधिक लड़ाई की।

२९ और अबनर और उसके आदमी उस सारी रात मैदान में से पार चलते गए, और यर्दन को पार कर चले, और समस्त बिथ्रोन में से पार जाते गए, और वो महानैम पहुँचे।

३० और योआब अबनर का पीछा करने से वापस लौट आया: और जब उसने सभी लोगों को एक साथ एकत्रित कर लिया था, दाऊद के सेवकों में से उन्नीस आदमी और असहेल कम पड़ गए थे।

३१ परन्तु दाऊद के सेवकों ने बिन्यामिन में से, और अबनर के आदमियों में से पीट डाले थे, ताकि तीन सौ साठ आदमी मर चले थे।

३२ और उन्होंने असहेल को उठा कर बेतलेहम में उसके पिता के मक़बरे में दफ़ना दिया। और योआब और उसके आदमी सारी रात चलते चले, और वो पौ फटने पर हेब्रोन पहुँचे।



तीसरा अध्याय।


अब शाऊल के घराने के और दाऊद के घराने के बीच एक लम्बी लड़ाई छिड़ी रही: परन्तु दाऊद प्रबल से प्रबल होता चला गया, और शाऊल का घराना निर्बल से निर्बल होता चला गया।

और हेब्रोन में दाऊद को बेटे पैदा हुए: और उसका प्रथम-जन्मा अम्नोन था, उस यज़रील-वाली अहिनोम का;

और उसका दूसरा, किलेब, नबल उस करमल-वाले की पत्नी अबिगल का; और वो तीसरा, गेशर के राजा तलमय की बेटी मअका का बेटा अब्सलोम;

उर वो चौथा, अदोनीया, हगिथ का बेटा; और वो पाँचवाँ, शेफतिया अबितल का बेटा;

और वो छटा, इथरेम, दाऊद की पत्नी एग्ला से। यही दाऊद को हेब्रोन में पैदा हुआ थे।

और ये होने को आया, जब शाऊल के घराने और दाऊद के घराने के बीच लड़ाई छिड़ी रही, कि अबनर शाऊल के घराने के प्रति स्वयं की शक्ति बढ़ाता गया।

और शाऊल की एक रखेल थी जिसका नाम रिज़पा था, अयाह की बेटी: और वो अबनर से कहता है, भई किस कारण तुम मेरे पिता की रखेल के पास गए?

तो अबनर इशबोशेत के शब्दों के कारण बहुत आक्रोश से भर उठा, और कहा, क्या मैं किसी कुत्ते का सर हूँ, जो इस दिन यहूदा के विरुद्ध तुम्हारे पिता शाऊल के घराने के प्रति, उनके भाई-जनो के प्रति, और उनके मित्रों के प्रति, करुणता दिखलाता हूँ, और तुम्हें दाऊद के हाथ में नहीं प्रदान कर दिया है, कि तुम आज मुझ पर इस स्त्री के समबन्ध में ये दोष लगा रहे हो? 

ईश्वर तो ये अबनर के साथ कर ही दें, और इस से भी और अधिक, सिवाय, जिस प्रकार प्रभु ने दाऊद को शपथ दे दी है, उसी प्रकार ही मैं उनके लिए ही करूँगा;

१० शाऊल के घराने से राज्य का स्थानांतरण कर देना, और इस्राएल पर, और यहूदा पर, दान से लेकर बेएरशबा तक भी, दाऊद के ही सिंघासन को स्थापित कर देना।

११ और वो अबनर को एक भी शब्द पुनः उत्तर में दे सका, क्योंकि वो उस से डरता था।

१२ और अबनर ने दाऊद के पास अपने पक्ष में दूज भिजवा दिए, कहते हुए, ये भूमी किसकी है जी? कहते हुए, अपना संगठन मेरे साथ बना लें, और देखें, समस्त इस्राएल को आपकी ओर लाने में, मेरा हाथ आपके साथ होगा।

१३ और उसने कहा, ठीक है भई; मैं तुम्हारे साथ एक संगठन बनाऊँगा: परन्तु मैं तुम्हारे से एक बात चाहता हूँ, कि, तुम मेरा चेहरा नहीं देखोगे, सिवाय कि तुम पहले शाऊल की बेटी मिकल को लेते हुए आओ, जब तुम मेरे चहरे को देखने आते हो। 

१४ और दाऊद ने शाऊल के बेटे इशबोशेत के पास दूत भेजे, कहते हुए, मुझे मेरी पत्नी मिकल प्रदान कर दो, जिसकी मैंने अपने साथ पलिश्तिम-वंशजों की एक सौ आगे की चमड़ियों के लिए मंगनी की थी।

१५ और इशबोशेत ने भिजवाकर उसे उसके पति से ले लिया, लेश के बेटे फलतियल से ही।

१६ और उसका पति उसके साथ चलता गया उसके पीछे-पीछे रोता हुआ बहुरिम तक। तब अबनर ने उस से कहा, जा, वापस लौट जा भई। और वो वापस लौट गया।

१७ और अबनर ने इस्राएल के वृद्ध-गणों के साथ संचार किया, कहते हुए, तुम बीते समय में अपने पर दाऊद को राजा बनने हेतु खोजते थे:

१८ तो भई अब यही कर डालो: चूँकि प्रभु ने दाऊद के विषय में बोल दिया है, कहते हुए, मेरे सेवक दाऊद के हाथ से मैं अपने लोगों इस्राएल का पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में से बाहर और उनके समस्त शत्रुओं के हाथ में से बाहर, बचाव कर दूँगा।

१९ और अबनर बिन्यामिन के कानों में भी बोला: और अबनर हेब्रोन में दाऊद के कानो में भी वो सभी कुछ जो इस्राएल को भला प्रतीत था, और जो बिन्यामिन के सम्पूर्ण घराने को भला प्रतीत था, बोलने चला गया। 

२० तो अबनर हेब्रोन पहुँचा दाऊद के पास ही, और उसके साथ बीस आदमी थे। और दाऊद ने अबनर और उसके साथ उन आदमियों के लिए एक भोज रखा।

२१ और अबनर ने दाऊद से कहा, मैं उठ कर चला जाऊँगा, और समस्त इस्राएल को राजा मेरे प्रभु के पास एकत्रित कर दूँगा, ताकि वो आपके साथ एक संगठन बना दें, और कि आप उस सभी पर राज करें अपने मन की इच्छानुसार। और दाऊद ने अबनर को विदा कर दिया; और वो शान्ति से चला गया।

२२ और, देखो भई, दाऊद के सेवक और योआब एक सैन्य-दल का पीछा कर के रहे थे, और अपने साथ एक बड़ी लूट भीतर ले आए: परन्तु अबनर हेब्रोन में दाऊद के साथ नहीं था; चूँकि उसने उसे विदा कर दिया था, और वो तो शान्ति से चला जा चुका था।

२३ तो जब योआब और उसके साथ वो समस्त सेना पधार गए थे, उन्होंने योआब को बताया, कहते हुए, नर का बेटा अबनर राजा के पास अया था, और उन्होंने उसे विदा कर दिया है, और जी वो तो शान्ति से जा चला है।

२४ तब योआब राजा के पास पहुँचा, और कहा, अपने क्या कर डाला है जी? देखें, अबनर आपके पास अया; ये क्यों है कि अपने उसे विदा कर दिया, और वो जाकर चला भी गया है?

२५ आप नर के बेटे अबनर को जानते हैं, कि वो तो आपको धोखा देने आया था, और आपके आपके बाहर निकले की और आपके भीतर आने की जानकारी प्राप्त करने, और आपकी सभी करनीयों को जानने।

२६ और जब योआब दाऊद के पास से बाहर निकल आया था, उसने अबनर के पीछे-पीछे दूत भेजे, जो उसे पुनः सिरह के कुँएँ से वापस ले आए: परन्तु दाऊद को ये जानकारी नहीं थी।

२७ और जब अबनर हेब्रोन वापस गया था, योआब उसे दरवाज़े पर परे ले गया उस से शान्तिप्रीयता से वार्तालाप करने, और उसने उस पर वहीं पाँचवीं पसली के तले प्रहार कर डाला, कि वो मर गया, अपने भाई असहेल के लहू के वास्ते।

२८ और तत्-पश्चात जब दाऊद ने ये सुना, तो उसने कहा, नर के बेटे अबनर के रक्त से मैं और मेरा राज्य सदा के लिए प्रभु के समक्ष निर्दोष हैं: 

२९ उसे योआब के सर पर, और उसके पिता के समस्त घराने पर टिक जाने दो; और योआब के घराने में से एक भी विफल हो जिसे स्त्राव हो, या जो कुष्ठ-रोगी हो, या जो एक लाठी पर सहारा ले, या जो तलवार पर गिर जाए, या जिसके पास रोटी ही हो।

३० तो योआब और उसके भाई अबिशय ने अबनर को मार डाला, क्योंकि उसने गिब्यन में उनके भाई असहेल को युद्ध में मार डाला था।

३१ और दाऊद ने योआब और उन सभी लोगों से कहा जो उसके साथ थे, फाड़ डालो अपने कपड़ों को, और टाट-वस्त्र से कस लो स्वयं को, और अबनर के समक्ष शोक मनाओ। और राजा दाऊद स्वयं ही अरथी के पीछे-पीछे रहा था।

३२ और उन्होंने हेब्रोन में अबनर को दफ़ना दिया : और राजा ने अपनी वाणी उठाई, और अबनर की कब्र पर रोया; और सभी लोग रोए।

३३ और राजा ने अबनर के प्रति विलाप मनाया, और कहा, एक मूर्ख समान ही अबनर मर गया? 

३४ तुम्हारे हाथ बन्धे थे, ही तुम्हारे पैर बेड़ियों में जकड़े हुए थे: जैसे कोई आदमी दुष्ट आदमियों के सामने गिर जाता है, वैसे ही तुम गर गए। और सभी लोग पुनः उसके प्रति रो पड़े।

३५ और जब दिन-दिन होते हुए सभी लोग दाऊद को भोजन खिलवाने आए, दाऊद ने शपथ दी, कहते हुए, ईश्वर तो ये मेरे साथ कर ही दें, और इस से भी और अधिक, यदि मैं सूर्यास्त होने तक रोटी या कुछ भी और चख लूँ।

३६ और सभी लोगों ने उस पर ध्यान दिया, और इसने उन्हें प्रसन्न कर दिया: चूँकि जो कुछ भी राजा करता था लोगों को प्रसन्न कर देता था।

३७ क्योंकि सभी लोग और समस्त इस्राएल उस दिन यह समझ गए थे कि राजा ने नर के बेटे अबनर को नहीं मरवाया था।

३८ और राजा ने अपने नौकरों से कहा, जानते नहीं हो तुम क्या कि इस्राएल में इस दिन एक प्रमुख और एक महान पुरुष गिरा है?

३९ और मैं इसी दिन दुर्बल हूँ, भले ही मैं राजा अभिषिक्त हूँ; और यह आदमी ज़रूआया के बेटे मेरे लिए तो बहुत ही कठोर हैं: प्रभु बुराई के कर्ता को उसी की ही दुष्टतानुसार भुक्तान कर देंगे।



चौथा अध्याय।


और जब शाऊल के बेटे ने सुना कि अबनर हेब्रोन में मर चुका था, तो उसके हाथ तो ठण्डे पड़ गए, और समस्त इस्राएली विचलित हो उठे।

और शाऊल के बेटे के पास दो आदमी थे जो सैन्य-दलों के कप्तान थे: एक का नाम बअना था, और दूसरे का नाम रेकब  था, बिन्यामिन की सन्तानों में से एक बीरोथ-वाले रिम्मन के बेटे: क्योंकि बीरोथ की भी गिनती बिन्यामिन के प्रति की जाती थी:

और वो बीरोथ-वाले गित्तैम भाग गए, और वो वहीं अल्पवासी थे इस दिन तक।

और शाऊल के बेटे योनातन का एक बेटा था जो अपने पैरों पर लंगड़ा था। वो पाँच वर्ष की आयु का था जब यज़रील में से शाऊल और योनातन का समाचार आया था, और उसकी आया ने उसे उठाया, और भाग ली: और यह होने को आया, कि उसके भागने के उतावले-पन में, वो गिर गया और लंगड़ा बन गया। और उसका नाम मफिबोषेत था।

और उस बीरोथ-वाले रिम्मन के बेटे, रेकब और बअना चल दिए, और वो लगभग दिन की गर्मी में इशबोशेत के घर पहुँचे, जो दोपहर में एक बिस्तर पर लेटा हुआ था।

और वो वहीं उस घर में मध्य में पहुँचे, मानो कि वो गेहूँ लेने आए हों; और उन्होंने उस पर पाँचवी पसली के तले प्राहार कर डाला: और रेकब और बअना उसका भाई बच कर निकल गए।

चूँकि जब वो घर में पहुँचे थे, वो अपने शय्यन-कक्ष में अपनी शय्या पर लेटा हुआ था, और उन्होंने उस पर वार कर कर उसे मार डाला, और उसका सर बेधड़ कर, उसका सर लेकर, सारी रात मैदान में से पार परे चले गए।

और वो इशबोशेत का सर दाऊद के पास हेब्रोन ले आए, और राजा से कहा, देखें जी, आपके शत्रु शाऊल के बेटे इशबोशेत का सर, जो आपके जीवन को ढूँढ रहा था; और प्रभु ने राजा मेरे प्रभु का शाऊल पर, और उसके बीज पर प्रतिषोध ले लिया है। 

और दाऊद ने रेकब और बअना उसके भाई को, रिम्मन उस बीरोथ-वाले के बेटों को उत्तर दिया, और उनसे कहा, प्रभु के जीते जी, जिन्होंने मेरी आत्मा का समस्त आपदा से मुक्तिभक्तान कर दिया है,

१० जब एक ने मूझे बताया, कहते हुए, देखें जी, शाऊल तो मर गए हैं जी, भला समाचार ले आने की सोच लेकर, तो मैंने उसे पकड़ कर उसे ज़िकलग में मार डाला, जिसने सोचा था कि मैं उसे उसके समाचार के लिए एक पुरस्कार दे दूँगा:

११ तो फिर और कितना अधिक, जब दुष्ट आदमियों ने एक नेक पुरुष को अपने ही घर में अपने ही बिस्तर पर मार डाला है? तो इसलिए अब क्या मैं उसका रक्त तुम्हारे ही हाथ से नहीं माँगूँगा क्या, और तुम्हें पृथ्वी पर से विनष्ट कर डालूँगा?

१२ और दाऊद ने अपने युवा पुरुषों को आदेश दे दिया, और उन्होंने उन्हें मार डाला, और उनके हाथ और पैर काट डाले, और उन्हें हेब्रोन के कुण्ड के ऊपर टाँग दिया। परन्तु उन्होंने इशबोशेत का सर लेकर उसे हेब्रोन में अबनर के मक़बरे में दफ़ना दिया।



पाँचवाँ अध्याय।


तब हेब्रोन में दाऊद के पास इस्राएल की समस्त प्रजातियाँ गईं और बोलीं, कहती हुईं, देखें जी, हम तो आप ही का हांड-माँस हैं जी।

भूत-काल में भी जब शाऊल हम पर राजा थे, आप ही वो थे जो इस्राएल में बाहर नेतृत्व करते थे और भीतर ले आते थे: और प्रभु ने आपसे कहा, तुम मेरे जन इस्राएल का पोषण करोगे, और तुम इस्राएल पर कप्तान होगे। 

तो इस्राएल के समस्त वृद्ध-गण राजा के पास हेब्रोन पहुँचे; और प्रभु के सम्मुख राजा दाऊद ने उनके साथ हेब्रोन में एक संगठन बना दिया: और उन्होंने इस्राएल पर दाऊद को राजा अभिषिक्त कर दिया।

दाऊद तीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने चालीस वर्ष राज किया।

हेब्रोन में उसने यहूदा पर सात वर्ष और छह माह राज किया: और यरूशलेम में उसने समस्त इस्राएल और यहूदा पर तैंतीस वर्ष राज किया। 

और राजा और उसके आदमी उस भूमी के निवासियों, उन यबूसी-वंशजों के पास, यरूशलेम गए: जो दाऊद से बोले, कहते हुए, सिवाय कि तू अन्धों और लंगड़ों को दूर करे, तू यहाँ भीतर नहीं आएगा: यह सोचते हुए कि दाऊद वहाँ भीतर नहीं सकता था।

तथापि दाऊद ने ज़ियोन के गढ़ पर अधिकार जमा लिया: वही दाऊद का नगर है।

और दाऊद ने उस दिन कहा, जो कोई भी नाले तक ऊपर जाकर यबूसी-वंशजों को परास्त कर देगा, और उन अन्धों और लंगड़ों को, जो दाऊद की आत्मा से घृणित हैं, वही प्रमुख और कप्तान बन जाएगा। इसी कारण उन्होंने कहा, वो अन्धे और वो लंगड़े घर्म में नहीं प्रवेश करेंगे।

तो दाऊद उस क़िले में बस गया, और उसे दाऊद का नगर नाम दे दिया। और दाऊद ने मिल्लो से लेकर और भीतर की ओर चारों ओर निर्माण किया।

१० और दाऊद चलता चला गया, और महान बन गया, और सेनाओं के प्रभु ईश्वर उसके साथ थे। 

११ और टाय्र के राजा हिरम ने दाऊद के पास दूत, और देवदार के वृक्ष, और बढ़ई, और राजमिस्त्री भेजे: और उन्होंने दाऊद के लिए एक निवास का निर्माण कर दिया।

१२ और दाऊद ने आभास किया कि प्रभु ने उसे इस्राएल के ऊपर राजा संस्थापित कर दिया था, और कि उन्होंने अपने गण इस्राएल के वास्ते उसके राज्य को पदोन्नत कर दिया था। 

१३ और दाऊद ने यरूशलेम में से अपने लिए और रखैलें और पत्नियाँ ले लीं, उसके हेब्रोन से पधार जाने के पश्चात: और दाऊद को बेटे और बेटियाँ पैदा होते ही गए।

१४ और यह उनके नाम हैं जो उसे यरूशलेम में पैदा हुए थे; शम्मुआ, और शोबब, और नेथन, और सुलेमान,

१५ इभर भी, और एलिशुआ, और नेफेग, और यफिया,

१६ और एलिशामा, और एलिदा, और एलिफलेत।

१७ परन्तु जब उन पलिश्तिम-वंशजों ने सुना कि उन्होंने इस्राएल के ऊपर दाऊद को राजा अभिषिक्त कर दिया था, तो वो समस्त पलिश्तिम-वंशज दाऊद को ढूँढने चढ़ाई कर पड़े; और दाऊद ने इसके विषय में सुना, और गढ़ में नीचे चला गया।

१८ उन पलिश्तिम-वंशजों ने भी आकर स्वयं को रेफईम की घाटी में फैला दिया।

१९ और दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की, कहते हुए, जी क्या मैं इन पलिश्तिम-वंशजों के पास ऊपर जाऊँ? क्या आप उन्हें मेरे हाथ में प्रदान कर देंगे? और प्रभु ने दाऊद से कहा, चले जाओ ऊपर: क्योंकि मैं निस्संदेह इन पलिश्तिम-वंशजों को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा।

२० और दाऊद बअलपेरज़िम पहुँचा, और दाऊद ने उन्हें वहाँ परास्त कर डाला, और कहा, मेरे सम्मुख मेरे शत्रुओं पर प्रभु फूट पड़े हैं, पानियों के फूट पड़ने के समान ही। इसलिए उसने उस स्थान का नाम बअलपेरज़िम रख दिया।

२१ और वहीं उन्होंने अपनी प्रतिमाएँ छोड़ दीं, और दाऊद और उसके आदमियों ने उन्हें भस्म कर दिया।

२२ और वो पलिश्तिम-वंशज पुनः ऊपर चढ़ आए, और स्वयं को रेफईम की घाटी में फैला दिया।

२३ और जब दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की, तो उन्होंने कहा, तुम चढ़ाई नहीं करोगे; बल्कि उनके पीछे एक घेरा डाल दो, और उन पर उन बकाम के पेड़ों के सामने पड़ना।

२४ और इसे ऐसे होने देना कि जब तुम उन बकाम के पेड़ों की चोटीयों में कदम-ताल की ध्वनि सुनोगे, तब तुम फुर्ती कर लेना: चूँकि तभी प्रभु तुम्हारे आगे-आगे बाहर निकल पड़ेंगे, उन पलिश्तिम-वंशजों को पीट डालने हेतु।

२५ और दाऊद ने ऐसा ही किया, जैसा प्रभु ने उसे आदेश दिया था; और उन पलिश्तिम-वंशजों को गेबा से लेकर जब तक कि तुम गज़र पहुँचते हो, पीट डाला।


छटा अध्याय।


पुनः, दाऊद ने इस्राएल में से तीस हज़ार चुने हुओं को एक साथ एकत्रित किया।

और दाऊद उठ कर उसके साथ उन सभी लोगों के साथ गया, यहूदा के बअले से ईश्वर के संदूक को वहाँ से ऊपर लाने, जिनका नाम सेनाओं के प्रभु के नाम से कहलाया जाता है जो उन केरुबिमों के बीच निवास करते हैं।

और उन्होंने ईश्वर के संदूक को एक नई गाड़ी में रखा, और उसे गिब्या में अबिनादब के घर में से बाहर ले आए: और 

अबिनादब के बेटों उज़्ज़ा और अहयो उस नई गाड़ी को हाँक रहे थे।

और वो उसे अबिनादब के घर में से बाहर निकाल लाए जो कि गिब्या में था, ईश्वर के संदूक के साथ ही: और अहयो संदूक के आगे-आगे जा रहा था।

और दाऊद और इस्राएल का समस्त घराना प्रभु के सम्मुख सनोवर लकड़ी के समस्त प्रकार के वाद्य-यन्त्र बजा रहे थे, वीणाओं पर, और सारंगियों पर, और ढपलियों पर, और झंकारों पर, और झाँझों पर ही।

और जब वो नकोन के खलिहान पहूँच गए थे, उज़्ज़ा ने ईश्वर के संदूक की ओर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसे पकड़ लिया; क्योंकि उन बैलों ने उसे हिला दिया था।

और प्रभु का क्रोध उज़्ज़ा के विरुद्ध सुलग उठा; और ईश्वर ने उसे वहीं उसकी त्रुटि के कारण पीट डाला; और वो वहीं ईश्वर के संदूक के साथ ही मर गया।

और दाऊद अप्रसन्न था, चूँकि प्रभु उज़्ज़ा पर फूट पड़े थे: और उसने उस स्थान का नाम पेरेज़उज़्ज़ा इस दिन तक रख दिया।

और दाऊद उस दिन प्रभु से डर गया था, और कहा, प्रभु का संदूक मेरे पास कैसे आएगा?

१० तो दाऊद ने प्रभु के संदूक को दाऊद के नगर में अपने पास परे नहीं हटाया: बल्कि दाऊद उसे ओबेदएदोम उस गथी के घर में परे उठा ले गया।

११ और प्रभु का संदूक ओबेदएदोम उस गथी के घर में तीन महीने रहा: और प्रभु ने ओबेदएदोम को और उसके समस्त घर-बार को आशीर्वाद दिया।

१२ और यह राजा दाऊद को बताया गया था, कहते हुए, प्रभु ने ओबेदएदोम के घर को, और उसके सभी कुछ को आशीष दे दिया है जी, ईश्वर के संदूक के कारण। तो दाऊद गया और ईश्वर के संदूक को ओबेदएदोम के घर से प्रसन्नता सहित दाऊद के नगर में ले अया।

१३ और भई ऐसा था कि जब वो जो प्रभु के संदूक को ढोने वाले छह पद चाप की चले, कि उसने सांडों और मोटे-ताज़ों की बालियाँ चढ़ा दीं।

१४ और दाऊद प्रभु के समक्ष अपने सम्पूर्ण बल के साथ नाचा; और दाऊद एक छालटी के एफद से कसा हुआ था।

१५ तो दाऊद और इस्राएल का समस्त घराना प्रभु के संदूक को ऊपर ला रहे थे, शोर-गुल, और चिंघाड़े की ध्वनि के साथ।

१६ और जैसे प्रभु का संदूक दाऊद के नगर में प्रवेश कर रहा था, शाऊल की बेटी मिकल ने एक खिड़की में से झाँका, और राजा दाऊद को प्रभु के समक्ष छलाँगे लगाते और नाचते हुए देखा; और उसने उसके साथ अपने मन में घृणा की।

१७ और वो प्रभु के संदूक को अन्दर ले आए, और उसे उसके स्थान में स्थित कर दिया, उसे तम्बू के ही मध्य में जिसे दाऊद ने उसके लिए गाढ़ा था: और दाऊद ने जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे प्रभु के समक्ष चढ़ा दिए।

१८ और दाऊद द्वारा जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे चढ़ाने देने के अन्त के पश्चात ही, उसने लोगों को सेनाओं के प्रभु के नाम में आशीष दे दिया।

१९ और उसने समस्त लोगों के बीच, इस्राएल के सारे जनौघ के बीच ही, स्त्रियों को भी पुरुषों के समान, प्रत्येक को छेद वाला पराँठा, और माँस का एक अच्छा भाग, और अंगूर-रस का एक माप बाँट दिए। तो सभी लोगों ने प्रत्येक ने अपने घर विदाई ले ली।

२० तब दाऊद अपने घराने को आशीष देने वापस लौटा। और शाऊल की बेटी मिकल दाऊद से मिलने बाहर निकल कर बोली, भई आज तो इस्राएल के राजा कितने गौरवशाली थे जी, जिन्होंने स्वयं को अपने नौकरों की दासियों की दृष्टि में अनावृत कर दिया, जैसे लुच्चों-लफंगो में से कोई एक निर्लज्जता से स्वयं को अनावृत कर देता है!

२१ और दाऊद ने मिकल से कहा, ये प्रभु के समक्ष था, जिन्होंने मुझे तेरे पिता, और उनके समस्त घराने के समक्ष प्रभु के लोगों पर, इस्राएल पर, मुझे शासक नियुक्त किया: इसलिए मैं प्रभु के समक्ष नाच-लीला मचाऊँगा।

२२ और मैं तो अब इस से भी अधिक तुच्छ बनूँगा, और मेरी अपनी ही दृष्टि में नीच बन जाऊँगा: और जिन दासियों के विषय में तू बोल पड़ी है, वही मेरा आदर-सम्मान करेंगी।

२३ इस कारण शाऊल की बेटी मिकल अपनी मृत्यु के दिन तक, निःसन्तान ही रही।



सातवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब राजा अपने घर में बैठा हुआ था, और प्रभु ने उसे उसके समस्त शत्रुओं से चारों ओर विश्राम प्रदान कर दिया था; 

कि राजा ने पैग़म्बर नेथन से कहा, देखें अब, मैं तो एक देवदार के घर में वास करता हूँ जी, परन्तु ईश्वर का संदूक परदों में वास करता है।

और नेथन ने राजा से कहा, जाएँ, वो सभी कर दें जो कुछ भी आपके मन में है; चूँकि प्रभु आपके साथ हैं।

और उस रात यह होने को आया, कि प्रभु के शब्द नेथन के पास आए, कहते हुए,

जाओ और मेरे सेवक दाऊद को बता दो, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, क्या तुम मेरे लिए एक घर का निर्माण करोगे मेरे लिए निवास करने हेतु?

जबकि मैं तो किसी भी निवास में नहीं बसा उस समय से जब मैं इस्राएल की सन्तानों को मिस्र में से बाहर निकाल लाया, इस दिन तक भी, बल्कि एक शिविर में और एक तम्बू में मैं चला हूँ।

उन सभी स्थानों में जिन में मैं इस्राएल की समस्त सन्तानों के साथ चला हूँ, बोला मैं एक भी शब्द इस्राएल की प्रजातियों में से किसी से भी, जिन्हें मैंने इस्राएल मेरे लोगों को चराने का आदेश दिया था, कहते हुए, कि भई तुम मेरे लिए एक देवदार के घर का निर्माण क्यों नहीं कर रहे हो भई? 

अब इसलिए इस प्रकार तुम दाऊद मेरे सेवक से बोलोगे, इस प्रकार कहते हैं सेनाओं के प्रभु, मैंने तुम्हें भेड़ों के पीछे-पीछे चलने से, भेड़शाला से ही ले लिया, मेरे लोगों पर शासक बन जाने हेतु, इस्राएल पर ही:

और तुम्हारे साथ ही मैं था जहाँ कहीं भी तुम गए, और तुम्हारे दृष्टि से बाहर तुम्हारे समस्त शत्रुओं को काट डाला, और तुम्हारा नाम महान बना दिया, पृथ्वी पर उन महान पुरुषों के नाम समान।

१० इसके अतिरिक्त मैं अपने लोगों इस्राएल के लिए एक स्थान नियुक्त करूँगा, और उन्हें रोप दूँगा, ताकि वो एक अपने ही स्थान में निवास करें, और अधिक अस्तव्यसत हों; ही दुष्टता की सन्तानें उन्हें और अधिकि सताएँ, बीते हुए समयों के समान,

११ और उस समय से लकर जब मैंने अपने लोगों इस्राएल पर न्यायाधीषों को होने का आदेश दिया था, और तुम्हें तुम्हारे समस्त शत्रुओं से विश्राम दिलवा दिया है। प्रभु ये भी बता रहे हैं तुम्हें कि वो तुम्हारे लिए एक घर का निर्माण करेंगे।

१२ और जब तुम्हारे दिन पूर्ण हो जाएँगे, और तुम अपने पित्रों के साथ सो जाओगे, मैं तुम्हारे पश्चात तुम्हारे बीज को स्थापित करूँगा, जो तुम्हारी ही आँतों से प्रवृत्त होगा, और मैं उसके राज्य को संस्थापित करूँगा।

१३ वही मेरे नाम के लिए एक घर का निर्माण करेगा, और मैं उसके राज्य का सिंहासन सदा के लिए स्थापित कर दूँगा।

१४ मैं उसका पिता हूँगा, और वो मेरा बेटा होगा। यदि वो अधर्मता करेगा, मैं उसे लोगों के डण्डे से और मनुष्यों की सन्तानों के कोडों की धारियों से ठीक कर दूँगा:

१५ परन्तु मेरी दया उस से विदाई नहीं लेगी, जैसे मैंने उसे शाऊल से परे विदा कर दिया था, जिसे मैंने तुम्हारे सामने से परे हटा दिया।

१६ और तुम्हारा घराना और तुम्हारा राज्य तुम्हारे सामने सदा के लिए संस्थापित कर दिया जाएगा: तुम्हारा सिंहासन सदा के लिए संस्थापित कर दिया जाएगा।

१७ इन्हीं समस्त शब्दोनुसार और इस समस्त दृश्यानुसार ही, नेथन दाऊद से बोला।

१८ तब राजा दाऊद भीतर जाकर, प्रभु के सम्मुख बैठ गया, और उसने कहा, जी मैं कौन हूँ, हे प्रभु ईश्वर जी? और क्या है मेरा घर, कि आप मुझे यहाँ तक ले आए हैं?

१९ और यह तो तब भी आपकी दृष्टि में एक छोटी सी ही बात थी, हे प्रभु ईश्वर; परन्तु आप तो अपने सेवक के घर के विषय में आने वाले बहुत समय के लिए बोल चुके हैं। और क्या यही मानव की रीती है क्या, हे प्रभु ईश्वर जी?

२० और क्या अधिक दाऊद आपसे कह सकता है? चूँकि आप ही प्रभु ईश्वर, अपने सेवक से परिचित हैं।

२१ आपके शब्द के वास्ते, और आपके अपने ही हृदयानुसार, आपने यह सभी महान कार्य कर दिए हैं, अपने सेवक को इनसे अवगत करा देने हेतु।

२२ इस कारण वश आप महान हैं जी, हे प्रभु ईश्वर: क्योंकि और कोई भी नहीं है आपके जैसा, ही आपके सिवा और कोई भी अन्य ईश्वर है, उस सभीनुसार जो हमने अपने कानों से सुन लिया है।

२३ और पृथ्वी पर वो कौन सा एक राष्ट्र है आपके लोगों समान, इस्राएल के समान ही, जिसका ईश्वर ने जाकर अपने प्रति एक लोग बन जाने हेतु मुक्तिभुक्तान कर डाला, और अपने लिए एक नाम बना देने हेतु, और आपके लिए बड़े-बड़े और भयानक कार्य कर देने हेतु, आपकी भूमी के लिए ही, आपके गण के सम्मुख ही, जिनका आपने ही मिस्र से, राष्ट्रों और उनके ईश्वरों से मुक्तिभुक्तान कर डाला?

२४ क्योंकि आप ही ने अपने प्रति अपने गण इस्राएल को आप ही के प्रति सदा के लिए एक गण बन जाने हेतु संस्थापित कर दिया है: और आप ही, प्रभु जी, उनके ईश्वर बन चुके हैं।

२५ और अब, हे प्रभु ईश्वर, वो शब्द जो आप अपने सेवक के समबन्ध में, और उसके घराने के समबन्ध में बोल चुके हैं, उसे सदा के लिए स्थापित कर दें, और वैसे ही कर दें जैसा अपने कह दिया है जी।

२६ और अपने नाम को सदा के लिए आवर्धित हो जाने दें, कहते हुए, सेनाओं के प्रभु ही इस्राएल पर ईश्वर हैं: और अपने सेवक दाऊद के घराने को अपने समक्ष स्थापित हो जाने दें।

२७ चूँकि आप ही ने, हे सेनाओं के प्रभु, इस्राएल के ईश्वर, अपने सेवक को प्रत्यक्ष करवा दिया है, कहते हुए, मैं ही तुम्हारे लिए एक घर का निर्माण करूँगा: इसलिए आपके सेवक ने अपने ही हृदय में इस प्रार्थना की आपसे प्रार्थना करने हेतु खोज कर ली है।

२८ और अब, हे प्रभु ईश्वर, आप ही वो ईश्वर हैं, और आपके शब्द सत्य हों, और आपने इस भलाई का वचन अपने सेवक को दे दिया है:

२९ इसलिए अब यह आपको प्रसन्न कर दे कि आप अपने सेवक के घर को आशीष दे दें, ताकि वो आपके समक्ष सदा के लिए बना रहे: क्योंकि आप ही ने, हे प्रभु ईश्वर, यह बोल दिया है जी: और आपके ही आशीर्वाद के साथ अपने सेवक के घर को सदा के लिए धन्य होने दें।



आठवाँ अध्याय।


और इसके पश्चात यह होने को अया, कि दाऊद ने पलिश्तिम-वंशजों को हरा कर उन्हें आधीन कर दिया: और दाऊद ने 

पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में से बाहर मथगम्मा ले लिया।

और उसने मोआब को हरा दिया, और उन्हें एक रेखा के साथ मापा, उन्हें नीचे धरती पर पटक कर; दो रेखाओं के साथ उसने मापा मृत्यु के घाट उतार देने हेतु, और एक पूरी रेखा के साथ जीवित रखने के लिए। तो इस प्रकार वो मोआब-वंशज दाऊद के नौकर बन गए, और भेंटें लाए। 

दाऊद ने ज़ोबा के राजा, रहोब के बेटे, हददेज़र को भी हरा डाला, जैसे वो फरात नदी पर अपनी सीमा को पुनःस्थापित करने गया था।

और दाऊद ने उस से एक हज़ार रथ, सात सौ घुड़सवार, और बीस हज़ार पैदल सैनिक हथिया लिए: और दाऊद ने रथों के समस्त घोड़ों की टाँगों की पृष्ठ-माँसपेशियों के कण्डरे काट डाले, परन्तु उन में से उसने सौ रथों हेतु आरक्षित कर लिए।

और जब दमिश्क के सिरियवासी ज़ोबा के राजा हददेज़र की सहायता करने आए, दाऊद ने उन सिरीयावासियों में से बाईस हज़ार आदमी मार डाले।

तब दाऊद ने दमिश्क के सिरीया में चौकियाँ स्थापित कर दीं: और सिरीयावासी दाऊद के नौकर बन गए, और उपहार लाए। और प्रभु ने दाऊद का जहाँ कहीं भी वो गया, परिरक्षण किया।

और दाऊद ने हददेज़र के नौकरों पर से उन स्वर्ण ढालों को ले लिया, और उन्हें यरूशलेम ले अया।

और राजा दाऊद ने हददेज़र के नगरों बेता और बेरोथई से अत्याधिक पीतल ले लिया।

जब हमात के राजा तोए ने सुना कि दाऊद ने हददेज़र की समस्त सेना को परास्त कर डाला था,

१० तब तोए ने अपने बेटे योरम को राजा दाऊद के पास भेजा, उसे प्रणाम करने हेतु, और उसे आशीष देने हेतु, क्योंकि उसने हददेज़र के विरुद्ध लड़ाई की थी, और उसे हरा दिया था: क्योंकि वो अपने साथ रजत-पात्र, और स्वर्ण-पात्र, और पीतल के पात्र ले अया:

११ जिन्हें राजा दाऊद ने प्रभु के प्रति भी समर्पित कर दिए, उस रजत और सोने के साथ जो उसने उन सभी राष्ट्रों से समर्पित कर दिए थे जिन्हें उसने आधीन बना दिया था;

१२ सिरीया में से, और मोआब में से, और अम्मोन की सन्तानों में से, और पलिश्तिम-वंशजों में से, और अमालेक में से, और 

ज़ोबा के राजा, रहोब के बेटे, हददेज़र की लूट-पाट में से।

१३ और दाऊद ने अपने लिए एक नाम कमा लिया था जब वो नमक की घाटी में सिरीयावासियों के अट्ठारह हज़ार आदमियों को हरा कर वापस लौटा था।

१४ और उसने एदोम में चौकियाँ स्थापित कर दीं; एदोम के समस्त सर्वत्र में उसने चौकियाँ स्थापित कर दीं, और एदोम वाले दाऊद के सेवक बन गए।और प्रभु ने दाऊद का जहाँ कहीं भी वो गया, परिरक्षण किया।

१५ और दाऊद ने समस्त इस्राएल पर राज किया; और दाऊद ने न्याय और इन्साफ़ अपने समस्त लोगों के प्रति क्रियान्वित किया।

१६ और ज़रूआया का बेटा योआब सेना पर नियुक्त था; और अहिलुद का बेटा यहोशाफट अभिलेखक था;

१७ और अहितब का बेटा ज़दोक, और अबिथर का बेटा अहिमलेक, पुरोहित थे; और सेरिया लिपिक था; 

१८ और दोनो केरेथियों और पेलेथियों पर येहोयदा का बेटा बेनाया नियुक्त था; और दाऊद के बेटे प्रमुख अध्यक्ष थे।



नौवाँ अध्याय।


और दाऊद ने कहा, क्या शाऊल के घराने का कोई भी अभी तक बचा रह गया है, जिसके प्रति मैं योनातन के वास्ते करुणा दिखाऊँ?

और शाऊल के घराने में से एक ज़ीबा नमक नौकर था। और जब उन्होंने उसे दाऊद के पास बुलवा भेजा था, तो राजा ने उस से कहा, क्या तुम ज़ीबा हो? और उसने कहा, जी, आपका नौकर वही है।

और राजा ने कहा, क्या शाऊल के घराने का कोई भी अभी तक नहीं रहा है, जिसके प्रति मैं ईश्वर की करुणा दिखाऊँ? और ज़ीबा ने कहा, योनातन का एक बेटा अभी भी है, जो अपने पैरों पर लंगड़ा है जी।

और राजा ने उस से कहा, भई कहाँ है वो? और ज़ीबा ने राजा से कहा, देखें जी, वो तो लोदेबर में अम्मिअल के बेटे मेकर के घर में है जी। 

तब राजा दाऊद ने भिजवा कर उसे लोदेबर से अम्मिअल के बेटे मेकर के घर ले लिया।

अब जब शाऊल का बेटा, योनातन का बेटा, मफिबोषेत दाऊद के पास पहुँचा था, तो उसने अपने चहरे के बल गिर कर अभिवादन किया। और दाऊद ने कहा, मफिबोषेत। और उसने उत्तर दिया, देखें जी आपका सेवक!

और दाऊद ने उस से कहा, डरो मत: क्योंकि मैं अवश्य ही तुम्हें करुणा दिखाऊँगा तुम्हारे पिता योनातन के वास्ते, और तुम्हें तुम्हारे पिता शाऊल की समस्त भूमी पुनःस्थापित कर दूँगा; और तुम लगातार मेरी मेज़ पर ही रोटी खाओगे।

और उसने स्वयं को झुका कर कहा, जी कौन है आपका सेवक, कि आप मेरे जैसे इस एक मरे हुए कुत्ते पर अपनी दृष्टि टिकाएँ?

तब राजा ने शाऊल के नौकर ज़ीबा को बुला कर उस से कहा, मैंने तुम्हारे मालिक के बेटे को वो सभी कुछ प्रदान कर दिया है जो शाऊल का और उनके समस्त घराने का था।

१० इसलिए तुम, और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे नौकर इसके लिए भूमी को जोतेंगे, और तुम उन फलों को ले आओगे, ताकि तुम्हारे मालिक के बेटे के पास भोजन करने हेतु भोजन हो: परन्तु मफिबोषेत तुम्हारे मालिक का बेता मेरी ही मेज़ पर सदैव रोटी खाएगा। अब ज़ीबा के पास पन्द्रह बेटे और बीस नौकर थे।

११ तब ज़ीबा ने राजा से कहा, उस सभी के अनुसार जो मेरे प्रभु राजा ने अपने नौकर को आदेश दिया है, वैसा ही आपका नौकर करेगा। जहाँ तक मफिबोषेत की बात आती है, वो मेरी ही मेज़ पर खाएगा, राजा के बेटों में से एक के समान ही।

१२ और मफिबोषेत के पास एक युवा बेटा था, जिसका नाम मिका था। और वो सभी जो ज़ीबा के घर में बसते थे मफिबोषेत के नौकर थे।

१३ तो मफिबोषेत यरूशलेम में निवास करता था: क्योंकि वो राजा की मेज़ पर ही लगातार खाता था; और वो अपने दोनो पैरों पर लँगड़ा था।





दसवाँ अध्याय।


और इसके पश्चात यह होने को आया कि अम्मोन की सन्तानों का राजा मर गया, और हनुन उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।

तब दाऊद ने कहा, मैं नहश के बेटे हनुन को करुणा दिखाऊँगा, जिस प्रकार उसके पिता ने मूझे करुणा दिखाई थी। और दाऊद ने उसे अपने नौकरों को भिजवाकर उनके हाथ उसके पिता के लिए सान्त्वना प्रदान करने हेतु भेज दिया। तो भई दाऊद के नौकर अम्मोन की सन्तानों की भूमी में पहुँचे।

और अम्मोन की सन्तानों के अध्यक्षों ने अपने प्रभु हनुन से कहा, क्या आप सोचते हैं कि दाऊद आपके पिता का सम्मान करता है, कि उसने आपके पास सांत्वना देने वाले भेज दिए हैं? क्या दाऊद ने बल्कि अपने नौकर आपके पास नगर की छान-बीन करने, और उसकी गुप्तचरी करने, और उसे उलट-पलट कर देने के लिए नहीं भेजे क्या?

इस कारण वश हनुन ने दाऊद के नौकरों को पकड़ कर, उनकी दाढ़ियों के अर्ध भाग पर उस्तरा फिरवा दिया, और उनके वस्त्रों को बीच में ही, उनके नितम्भों तक ही काटकर उन्हें भेज दिया।

जब उन्होंने यह दाऊद को बताया, तो उसने उनसे मिलने हेतु भिजवा दिए, चूँकि वो आदमी बहुत ही लज्जित हो गए थे: और राजा ने कहा यरीहो में ठहरे रहो जब तक तुम्हारी दाढ़ियाँ नहीं उग जाती हैं, और तब वापस लौट आना।

और जब अम्मोन की सन्तानों ने देखा कि उन्होंने तो दाऊद के समक्ष दुर्गन्ध उतपन्न कर दी थी, तो अम्मोन की सन्तानों ने भिजवाकर बेतरेहब के सिरीयावासियों को, और ज़ोबा के सिरीयावासियों को भाड़े पर ले लिया, बीस हज़ार पैदल सैनिक, और राजा मअका के एक हज़ार आदमी, और इशतोब से बारह हज़ार आदमी।

और जब दाऊद ने इसके विषय में सुना, तो उसने योआब, और अपने समस्त बलशाली आदमियों की सेना को भेज दिया।

और अम्मोन की सन्ताने बाहर निकल पड़ीं, और दरवाज़े के प्रवेश पर रण-व्यूह रचा दिया: और ज़ोबा और रेहोब के सिरियवासी, और इशतोब, और मअका रण-भूमी में स्वयं के साथ ही थे।

जब योआब ने रण का मुख उसके विप्रीत आगे और पीछे देखा, तो उसने इस्राएल के सभी चुनिंदा आदमियों को चुन कर उन्हें उन सिरीयावासियों के विरुद्ध व्यूह में रचा दिया:

१० और बचे हुए लोगों को उसने अपने भाई अबिशय के हाथ में प्रदान कर दिया, ताकि वो उन्हें अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध व्यूह में रचा दे।

११ और उसने कहा, यदि वो सिरीयावासी मेरे लिए बहुत शक्तिशाली होंगे, तो तब तुम मेरी सहायता करोगे: परन्तु यदि अम्मोन की सन्तानें तुम्हारे लिए बहुत शक्तिशाली होंगे, तब मैं आकर तुम्हारी सहायता करूँगा।

१२ तुम अच्छे शौर्य-वाले बनो, और हम अपने लोगों हेतु, और अपने ईश्वर के नगरों हेतु पुरुषार्थी बन जाएँ: और प्रभु वही करें जो कुछ भी उन्हें भला प्रतीत हो।

१३ और योआब निकट आता गया, और वो लोग जो उसके साथ थे, उन सिरीयावासियों के विरुद्ध रण में: और वो उसके समक्ष भाग-खड़े हुए।

१४ और जब अम्मोन की सन्तानों ने देखा कि भई वो सिरीयावासी तो भाग गए थे, तो वो भी अबिशय के सामने से भाग लिए, और नगर में प्रवेश कर लिया। तो योआब अम्मोन की सन्तानों से वापस लौट कर, यरूशलेम पहुँचा।

१५ और जब उन सिरीयावासियों ने देखा कि वो तो भई इस्राएल के समक्ष पिट चुके थे, उन्होंने स्वयं को एक साथ एकत्रित कर लिया।

१६ और हदरेज़र ने भिजवाया और उन सिरीयावासियों को नदी पार थे बाहर ले आया: और वो हेलम पहुँचे; और हददेज़र की सेना का कप्तान शोबक उनके आगे-आगे गया।

१७ और जब यह दाऊद को बताया गया था, तो उसने समस्त इस्राएल को एक साथ एकत्रित कर लिया, और यर्दन पार चला गया, और हेलम पहुँचा। और उन सिरीयावासियों ने स्वयं दाऊद के विरुद्ध व्यूह में रचाकर उसके साथ लड़ गए।

१८ और वो सिरीयावासी इस्राएल के समक्ष भाग-खड़े हुए; और दाऊद ने उन सिरीयावासियों के सात सौ रथों के आदमियों को मार डाला, और चालीस हज़ार घुड़ सवार, और उनकी सेना के कप्तान शोबक को हरा दिया, जो वहीं मर गया।

१९ और जब उन सभी राजाओं ने जो हदरेज़र के नौकर थे देखा कि वो तो इस्राएल के समक्ष हार चुके थे, उन्होंने इस्राएल के साथ शान्ति स्थापित कर ली, और उनकी सेवा की। तो वो सिरीयावासी अम्मोन की सन्तानों की अब और सहायता करने से डर गए।



ग्यारहवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, उस वर्ष की समाप्ति के पश्चात, उस समय जब राजा युद्ध करने निकल पड़ते थे, कि दाऊद ने योआब और उसके साथ उसके नौकरों को, और समस्त इस्राएल को भेज दिया; और उन्होंने अम्मोन की सन्तानों को नष्ट कर डाला, और रब्बा पर घेरा-बन्दी कर दी। परन्तु दाऊद अभी यरूशलेम में ही ठहरा रहा।

और एक संध्या के समय यह होने को आया, कि दाऊद अपने बिस्तर पर से उठ कर राजा के घर की छत पर चल रहा था : और छत पर से ही उसने एक स्त्री को स्नान करते हुए देखा; और भई वो स्त्री दिखने में अति-सुन्दर थी।

और दाऊद ने भिजवाया और उस स्त्री के विषय में जानकारी प्राप्त की। और एक ने कहा, जी क्या ये बथशेबा नहीं है, एलीअम की बेटी, उस हित्ती-वंशज ऊरिया की पत्नी?

और दाऊद ने दूत भिजवाकर उसे ले लिया; और वो भीतर उसके पास गई, और वो उसके साथ लेट गया; क्योंकि वो अपनी अस्वच्छता से शुद्ध थी: और वो अपने घर वापस लौट गई।

और वो स्त्री गर्भवति हो अंगी, और भिजवाकर दाऊद को बता दिया, और कहा, जी मैं तो बच्चे के साथ हूँ।

और दाऊद ने योआब को भिजवाया, कहते हुए, मेरे पास उस हित्ती-वंशज ऊरिया को भेज दो। और योआब ने ऊरिया को दाऊद के पास भेज दिया।

और जब ऊरिया उसके पास पहुँचा था, तो दाऊद ने उस से योआब की कुशलता के विषय में, और लोगों की कुशलता, और युद्ध के विषय में पूछ-ताछ की।

और दाऊद ने ऊरिया से कहा, नीचे अपने घर चले जाओ भई, और अपने पाँव धो लो। और ऊरिया ने राजा के घर से बाहर प्रस्थान कर लिया, और राजा की ओर से व्यंजनों के भाग उसके पीछे-पीछे गए।

परन्तु ऊरिया अपने प्रभु के समस्त सेवकों के साथ राजा के घर के द्वार पर ही सो गया, और नीचे अपने घर नहीं गया।

१० और जब उन्होंने दाऊद को बताया, कहते हुए, जी ऊरिया तो नीचे अपने घर गया ही नहीं, तो दाऊद ने ऊरिया से कहा, भई तुम क्या अपनी यात्रा से नहीं आए क्या? तो फिर तुम नीचे अपने घर क्यों नहीं गए भई?

११ और ऊरिया ने दाऊद से कहा, जी, वो संदूक, और इस्राएल, और यहूदा, तम्बुओं में बसते हैं; और मेरे प्रभु योआब, और मेरे प्रभु के सेवक खुली रण-भूमीयों में डेरा डाले हैं जी; तो फिर क्या मैं अपने ही घर में भीतर चला जाऊँ, खाने और पीने, और अपने पत्नी के साथ लेटने? आपके जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, मैं यह कार्य नहीं करूँगा जी।

१२ और दाऊद ने ऊरिया से कहा, आज भी यहीं ठहरे रहो, और कल मैं तुम्हें प्रस्थान कर लेने दूँगा। तो ऊरिया उस दिन, और अगले दिन यरूशलेम में ही बैठा रहा।

१३ और जब दाऊद ने उसे बुलवा लिया था, तो उसने उसके सम्मुख खाया और पीया; और उसने उसे धुत कर दिया: और संध्या के समय वो अपने बिस्तर में अपने प्रभु के नौकरों के साथ ही सोने चला गया, परन्तु अपने घर नीचे वो नहीं गया।

१४ और प्रातः में ये होने को आया, कि दाऊद ने योआब को एक पत्र लिख कर उसे ऊरिया के हाथ भिजवा दिया।

१५ और उसने उस पत्र में लिखा, कहते हुए, सबसे भीषण युद्ध के सबसे अग्रिम क्षेत्र में तुम ऊरिया को नियुक्त कर देना, और तुम उस से पीछे हट जाना, ताकि वो पिट कर मर जाए।

१६ और यह होने को आया, जब योआब उस नगर का ध्यान से निरीक्षण कर लिया था, तो उसने ऊरिया को उस स्थान में नियुक्त कर दिया जहाँ वो जानता था कि शूरवीर आदमी थे।

१७ और उस नगर के आदमी बाहर निकल आए और योआब के साथ लड़े: और वहाँ दाऊद के नौकरों के कुछ लोग गिर गए; और ऊरिया वो हित्ती-वंशज भी मर गया।

१८ तब योआब ने भिजवाकर दाऊद को युद्ध समबन्धी सभी बातें बतला ड़ीं;

१९ और उस दूत को आदेश दिया, कहते हुए, जब तुम युद्ध-समबन्धी बातों का वर्णन करना राजा से समाप्त कर चुकोगे,

२० और यदि ऐसा होता है कि राजा का आक्रोश भभक उठता है, और वो तुमसे खटे हैं, भई तुम लड़ाई करने के समय नगर के इतने निकट क्यों चले गए भई? जानते नहीं थे क्या तुम कि वो दीवार पर से वार करेंगे?

२१ यरुबेशथ के बेटे अबिमलेक पर किसने वार किया था भई? क्या एक औरत ने नहीं उस पर दीवार पर से एक चक्की के पत्थर का टुकड़ा फैंक दिया था, कि वो थबज़ में मर गया था? तुम दीवार के निकट क्यों गए भई? तब तुम कहोगे, जी आपका सेवक ऊरिया वो हित्ती-वंशज भी मर गया है जी।

२२ तो वो संदेश-वाहक चला गया, और आकर दाऊद को वो सभी कुछ बतला दिया जिसके लिए योआब ने उसे भेजा था।

२३ और उस दूत ने दाऊद से कहा, जी निश्चितता से वो आदमी हमारे विरुद्ध प्रबल ठहरे, और हमारे पास रण-भूमी में बाहर निकल आए, और हम उनके विरुद्ध दरवाज़े के प्रवेश तक भी पहुँचे थे जी।

२४ और दीवार पर से वार करने वालों ने आपके नौकरों पर वार कर डाला; और राजा के कुछ नौकर मर गए हैं, और आपका 

 सेवक ऊरिया वो हित्ती-वंशज भी मर गया है जी।

२५ तब दाऊद ने उस संदेश-वाहक से कहा, तुम इस प्रकार योआब से कहोगे, भई ये बात तुम्हें अप्रसन्न करे, क्योंकि वो तलवार तो एक का, दूसरे समान ही भक्षण कर डालती है: उस नगर के विरुद्ध अपने रण को अधिक शक्तिशाली बनाओ, और उसे उलट-पलट कर डालो: और तुम उसे प्रोत्साहित करना।

२६ और जब ऊरिया की पत्नी ने सुना कि ऊरिया उसका पति मर चुका था, तो उसने अपने पति के लिए शोक मनाया।

२७ और जब वो शोक मनाना बीत चुका था, तो दाऊद ने भिजवाकर उसे अपने घर में ले लिया, और वो उसकी पत्नी बन गई, और उसे एक बेता जना। किन्तु उस कार्य से जो दाऊद ने कर डाला था प्रभु अप्रसन्न हो उठे।



बारहवाँ अध्याय।


और प्रभु ने नेथन को दाऊद के पास भेज दिया। और उसने उसके पास आकर उस से कहा, भई एक नगर में दो आदमी थे; एक धनवान, और दूसरा दरिद्र।

उस धनवान आदमी के पास तो भई बहुतेरे झुण्ड और पशु समूह थे:

परन्तु उस दरिद्र व्यक्ति के पास कुछ भी नहीं था, सिवाय एक छोटी सी मेमनी के, जिसे उसने पाल-पोस कर बड़ा किया था: और वो उसी के साथ ही बड़ी हुई थी, और उसके बच्चों के साथ; वो तो उसी के भोजन में से खाती थी, और उसी के ही प्याले में से पीती थी, और उसी की छाती पर लेटती थी, और वो उसके प्रति एक बेटी समान ही थी।

और उस धनवान आदमी के पास एक यात्री आया, और उसने उस यात्री के लिए अपने ही झुण्ड में से, और अपने ही पशु-समूह में से लेना तो बक्श दिया, उसके पास पधारे उस यात्री के लिए भोजन तैयार करने हेतु; बल्कि उसने उस दरिद्र आदमी की मेमनी को लेकर उस से उसके पास पधारे उस यात्री के लिए भोजन तैयार कर दिया।

और दाऊद का क्रोध उस आदमी के विरुद्ध बहुत ही सुलग उठा भई; और उसने नेथन से कहा, प्रभु के जीते जी, जिस आदमी ने यह काम किया है अवश्य ही मर जाएगा:

और वो उस मेमनी का चार-गुणा पुनःभुक्तान कर देगा, क्योंकि उसने यह काम कर दिया है, और क्योंकि उसे कोई दया नहीं दिखाई।

और नेथन ने दाऊद से कहा, आप ही वो आदमी हैं। इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, मैंने तुम्हें इस्राएल पर राजा नियुक्त किया, और मैंने तुम्हारा शाऊल के हाथ में से बाहर बचाव किया;

और मैंने ही तुम्हें तुम्हारे मालिक का घराना प्रदान किया, और तुम्हारे मालिक की पत्नियों को तुम्हारे वक्ष में, और इस्राएल का घराना और यहूदा का तुम्हें प्रदान कर दिया; और यदि यह बहुत ही थोड़ा सा था, इसके अतिरिक्त मैंने तुम्हें ऐसी-वासी वस्तुएँ भी प्रदान कर दी होतीं।

तो फिर किस कारण वश तुम ने प्रभु के आदेश से घृणा कर दी है भई, उनकी दृष्टि में बुराई कर देना? तुमने तलवार से ऊरिया उस हित्ती-वंशज को मार डाला, और उसकी पत्नी को लेकर अपनी पत्नी बना डाला, और उसकी अम्मोन की सन्तानों की तलवार से हत्या कर डाली है।

१० अब इसलिए तुम्हारे घराने से तलवार कभी भी नहीं विदा होगी; क्योंकि तुम ने मुझ से घृणा कर डाली है, और 

ऊरिया उस हित्ती-वंशज की पत्नी को लेकर अपनी पत्नी बना डाला है।

११ इस प्रकार कहते हैं प्रभु, देख लो भई, मैं तुम्हारे विरुद्ध तुम्हारे ही अपने घराने में से बुराई उठाऊँगा, और मैं तुम्हारी ही आँखों के सामने तुम्हारी पत्नियों को लेकर उन्हें तुम्हारे पड़ौसी को दे डालूँगा, और वो ही तुम्हारी पत्नियों के साथ इस सूर्य की दृष्टि में लेट जाएगा।

१२ क्योंकि तुमने तो ये छुप कर किया: परन्तु मैं यह काम समस्त इस्राएल के सामने, और सूर्य के सामने करूँगा।

१३ और दाऊद ने नेथन से कहा, मैंने प्रभु के विरुद्ध पाप कर दिया है। और नेथन ने दाऊद से कहा, प्रभु ने भी आपका पाप परे हटा दिया है; आप मरेंगे नहीं।

१४ लेकिन, इस करनी के कारण आपने प्रभु के शत्रुओं को ईश्वर-निन्दा करने हेतु बहुत बड़ा अवसर प्रदान कर दिया है, वो बच्चा भी जो आपको जन्मेगा अवश्य ही मर जाएगा।

१५ और नेथन अपने घर को विदा हो चला। और प्रभु ने उस बच्चे पर प्रहार कर डाला जो ऊरिया की पत्नी ने दाऊद को जना, और भई वो तो बहुत ही बीमार हो गया।

१६ इसलिए दाऊद ईश्वर से उस बच्चे के लिए विनती करने लगा; और दाऊद ने उपवास रखा, और भीतर चला गया, और धरती पर सारी रात पड़ा रहा।

१७ और उसके घराने ने वृद्ध-गण उठ कर उसके पास गए, उसे धरती पर से उठाने हेतु: परन्तु उसने ये नहीं चाहा, ही उसने उसने उनके संग रोटी खाई।

१८ और सातवें दिन यह होने को अया, कि उस बच्चे की मृत्यु हो गई। और दाऊद के सेवक उसे यह बताने से डर रहे थे कि उस बच्चे की मृत्यु हो चुकी थी: क्योंकि उन्होंने कहा, देखो, जब तक वो बच्चा जीवित ही था, हम उन से बोले, और उन्होंने हमारी वाणी का श्रवण नहीं किया: तो फिर वो स्वयं को किस प्रकार व्यग्रित कर लेंगे, यदि हम उन्हें बताते हैं कि उस बच्चे की तो मृत्यु हो चुकी है?

१९ परन्तु जब दाऊद ने देखा कि उसके सेवक फुस-फुसा रहे थे, दाऊद ने आभास किया कि उस बच्चे की मृत्यु हो चुकी थी: इस कारण दाऊद ने अपने सेवकों से कहा, क्या उस बच्चे की मृत्यु हो चुकी है? और उन्होंने कहा, वह मृत है जी।

२० तब दाऊद धरती पर से उठा, और नहाया, और स्वयं का विलेपन किया, और अपने वस्त्र बदले, और प्रभु के घर में कर आराधना की: फिर वो अपने ही स्वयं के घर आया; और जब उसने माँग की, उन्होंने उसके समक्ष रोटी परोस दी, और उसने खा ली।

२१ तब उसके सेवकों ने उस से कहा, जी ये क्या कार्य है जो अपने किया है? आपने उस बच्चे के जीवित रहते-रहते उपवास रखा और रोए; परन्तु जब वो बच्चा मर गया, तो आप उठ गए और रोटी खाई।

२२ और उसने कहा, जब वो बच्चा अभी भी जीवित ही था, मैंने उपवास रखा और रोया: क्योंकि मैंने कहा, भाला कौन बता सकता है कि ईश्वर मेरे प्रति कृपा दिखाएँगे, कि वो बच्चा जीवित रह ले?

२३ परन्तु अब तो वो मर चुका है, तो फिर किस कारण वश मैं उपवास रखूँ? क्या मैं उसे पुनः वापस ला सकता हूँ क्या? मैं उसके पास जाऊँगा, परन्तु वो मेरे पास वापस नहीं लौटेगा।

२४ और दाऊद ने बथशेबा अपनी पत्नी को ढाढ़स बाँधा, और उसके पास जाकर, उसके साथ लेट गया: और उसने उसे एक बेटा जना, और उसने उसका नाम सुलेमान रख दिया: और प्रभु उस से प्रेम करते थे।

२५ और उसने पैग़म्बर नेथन के हाथ भिजवाया; और उसने प्रभु के कारण यदिद्याह उसका नामकरण कर दिया। 

२६ और योआब ने अम्मोन की सन्तानों के रब्बा के विरुद्ध लड़ाई करी, और उस राजसी नगर पर अधिकार कर लिया।

२७ और योआब ने दाऊद को संदेश-वाहक भेजे, और कहा, मैंने रब्बा के विरुद्ध लड़ाई कर कर पानियों के नगर पर अधिकार कर लिया है।

२८ अब इसलिए शेष लोगों को एक साथ एकत्रित कर कर, नगर के विरुद्ध पड़ाव डाल कर उस पर अधिकार कर लें: कहिं मैं नगर को हथिया लूँ, और वो मेरे नाम से कहलाया जाए।

२९ और दाऊद सभी लोगों को एक साथ एकत्रित कर कर रब्बा चला गया, और उसके विरुद्ध लड़ाई कर कर उस पर अधिकार जमा लिया।

३० और उसने उनके राजा का मुकुट उसके सर पर से उतार लिया, जिसका भार सोने का एक तलनतन था, अनमोल रत्नों के साथ: और वो दाऊद के सर पर था। और वो बहुत अधिकता से उस नगर की लूट आगे ले आया।

३१ और वो उन लोगों को आगे ले आया जो उस में थे, और उन्हें आरों के तले, और लोहे के हेंगों के तले, और लोहे के कुल्हाड़ों के तले डाल दिया, और उन्हें ईंटों की भट्टी में से आर-पार गुज़रवाया: और इसी प्रकार उसने अम्मोन की सन्तानों के समस्त नगरों के साथ किया। तो दाऊद और वो समस्त लोग यरूशलेम वापस लौट आए।



तेरहवाँ अध्याय।


और इसके पश्चात यह होने को आया, कि दाऊद के बेटे अब्सलोम की एक सुन्दर बहन थी, जिसका नाम तमार था; और दाऊद का बेटा अम्नोन उस से प्रेम करता था।

और अम्नोन तो इतना व्यग्रित था, कि भई वो तो अपनी बहन तमार के लिए बीमार ही पड़ गया; क्योंकि वो एक कुँवारी थी; और उसके साथ कुछ भी कर देना अम्नोन को कठिन जान पड़ता था।

परन्तु अम्नोन के पास एक मित्र था, जिसका नाम योनादब था, दाऊद के भाई शिमेया का बेटा: और योनादब एक बहुत ही चालाक पुरुष था।

और उसने उस से कहा, भई तुम राजा के बेटे होते हुए, दिन-प्रति-दिन दुर्बल क्यों होते जा रहे हो? क्या तुम मुझे बताओगे नहीं क्या? और अम्नोन ने उस से कहा, मैं अपने भाई अब्सलोम की बहन तमार से प्रेम करता हूँ।

और योनादब ने उस से कहा, भई तुम लेट जाओ अपने बिस्तर पर ही, और स्वयं को बीमार बना लो: और जब तुम्हारे पिताजी तुम्हें देखने आते हैं, तो उन से कह देना, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मेरी बहन तमार को आकर मुझे भोजन दे देने दें जी, और मेरी दृष्टि में भोजन तैयार कर देने दें, ताकि मैं उसे देख कर उसे उसके हाथ से खा लूँ।

तो अम्नोन नीचे लेट गया, और स्वयं को बीमार बना दिया: और जब राजा उसे देखने गया था, तो अम्नोन ने राजा से कहा, जी मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, कि मेरी बहन तमार को जाने दें जी, और मेरी दृष्टि में मेरे लिए दो पूए बना लेने दें, ताकि मैं उसके हाथ से खा सकूँ।

तब दाऊद ने घर भिजवा दिए तमार के पास, कहते हुए, अभी ही अपने भाई अम्नोन के घर जाकर उसके लिए भोजन तैयार कर दो।

तो तमार अपने भाई अम्नोन के घर चली गई; और वो नीचे लेटा हुआ था। और उसने आटा लेकर उसे गूँथा, और उसकी दृष्टि में पूए तैयार किए, और उन पूओं को पका दिया।

और उसने एक थाल लेकर उन्हें उसके समक्ष परोस दिया; परन्तु उसने खाना अस्वीकार कर दिया। और अम्नोन ने कहा, मेरे आस-पास से सभी आदमियों को बाहर कर दो। और उसके आस-पास से प्रत्येक आदमी बाहर चला गया।

१० और अम्नोन ने तमार से कहा, भोजन को कक्ष में ले आओ ताकि मैं तुम्हारे हाथ से खा लूँ। और तमार ने उन पूओं को लेकर जो उसने बनाए थे, उन्हें कक्ष में अम्नोन अपने भाई के पास ले आई।

११ और जब वो उन्हें उसके पास खाने के लिए ले आई थी, तो उसने उसे पकड़ लिया, और उस से कहा, जाओ, मेरे साथ लेट जाओ, मेरी बहन।

१२ और उसने उसे उत्तर दिया, नहीं मेरे भाई, मुझ पर बल मत डालो; क्योंकि इस्राएल में ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया जाना चाहिए: तुम यह मूर्खता मत करो।

१३ और मैं, अपनी लज्जा लिए कहाँ जाऊँगी? और जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, तुम इस्राएल में मूर्खों के समान ही एक बन जाओगे। अब इसलिए मैं प्रार्थना करती हूँ तुमसे, राजा से बोलो; क्योंकि वो मुझे तुम से परे रोक कर नहीं रखेंगे।

१४ तथापि उसने उसकी वाणी का श्रवण करना नहीं चाहा: बल्कि उस से अधिक बलशाली होता हुआ, उसने उसके साथ लेट कर उसका बलात्कार कर डाला।

१५ तब अम्नोन उसके प्रति अत्याधिक घृणा से भर उठा; कि वो घृणा जिस से उसने उसके साथ घृणा की उस प्रीम से बड़ी थी जिस से कि वो उस से प्रेम करता था। और अम्नोन ने उस से कहा, उठ जा, चली जा।

१६ और उसने उस से कहा, ये तो कोई कारण नहीं बना: मुझे परे भेजने वाली ये बुराई तो उस दूसरी बुराई से भी बड़ी है, जो तुमने मेरे साथ कर डाली है! परन्तु उसने उसे नहीं सुना।

१७ तब उसने अपने नौकर को बुलाया जो उसके प्रति सेवारत था, और कहा, इसे समय इस औरत को मेरे पास से बाहर ले जाओ, और उसके पीछे से द्वार पर कुण्डा लगा देना।

१८ और वो एक भिन्न-भिन्न रंगों वाले एक वस्त्र से आवृत थी: क्योंकि ऐसे ही चौगों से राजाओं की बेटियाँ आवृत होती थीं। तब उसका नौकर उसे बाहर निकाल लाया, और उसके पीछे से द्वार पर कुण्डा लगा दिया।

१९ और तमार ने अपने सर पर राख डाल ली, और अपने भिन्न-भिन्न रंगों वाला वो वस्त्र फाड़ डाला जो उस पर था, और अपना हाथ अपने सर पर रख कर, चीखती हुई चलती चली गई।

२० और अब्सलोम उसके भाई ने उस से कहा, क्या तुम्हारा भाई अम्नोन तुम्हारे साथ रहा था क्या? किन्तु अभी चुप ही रहना मेरी बहन: वो तो तुम्हारा भाई है; इस बात पर मन मत लगाना। तो तमार अपने भाई अब्सलोम के घर में उजाड़ ही रहती रही।

२१ परन्तु जब राजा दाऊद ने इन सभी बातों के विषय में सुना तो वो बहुत ही आक्रोशित हो उठा।

२२ और अब्सलोम अपने भाई अम्नोन के साथ नहीं कुछ अच्छा बोला ही कुछ बुरा: चूँकि अब्सलोम अम्नोन से घृणा करता था, क्योंकि उसने उसकी बहन तमार का बलात्कार कर डाला था।

२३ और यह होने को अया कि दो पूर्ण वर्षों के उपरान्त, कि अब्सलोम के पास बअलहज़ोर में भेड़-कतरने वाले थे, जो कि एफ्रैम के साथ है: और अब्सलोम ने राजा के सभी बेटों को आमंत्रित किया।

२४ और अब्सलोम ने राजा के पास आकर कहा, जी देखें अब, आपके सेवक के पास भेड़-कतरने वाले हैं; मैं निवेदन करता हूँ आपसे कि राजा और उनके सेवक अपने सेवक के साथ चले चलें जी।

२५ और राजा ने अब्सलोम से कहा, नहीं मेरे बेटे, हम सब के सब अभी जाएँ तुम्हारे साथ कहिं हम तुम पर एक बोझ बन जाएँ। और उसने उस पर दबाव डाला: लेकिन उसने जाना नहीं चाहा, बल्कि उसे आशीष दे दिया।

२६ तब अब्सलोम में कहा, यदि नहीं, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मेरे भाई अम्नोन को हमारे साथ चले जाने दें जी। और राजा ने उस से कहा, वो क्यों जाए तुम्हारे साथ भई?

२७ परन्तु अब्सलोम ने उस पर दबाव डाला, कि उसने अम्नोन और राजा के सभी बेटों को उसके साथ चले जाने दिया।

२८ अब अब्सलोम ने अपने नौकरों को आदेश दे दिया था, कहते हुए, ध्यान दे लेना भई जब अम्नोन का मन मदिरा से मगन हो रहा होगा, और जब मैं तुमसे कहूँगा, प्राहार कर दो अम्नोन पर; तब उसे मार डालना, डरना मत: क्या मैंने तुम्हें आदेश नहीं दे दिया है क्या? शौर्य वाले बनो, और विक्रांत बन जाओ।

२९ और अब्सलोम के नौकरों ने अम्नोन के साथ अब्सलोम के आदेशानुसार ही कर दिया। तब राजा के सभी बेटे उठ खड़े हुए, और हर आदमी अपने खच्चर पर चढ़ कर भाग-खड़ा हुआ।

३० और यह होने को अया, जैसे वह पथ पर ही थे, कि समाचार दाऊद तक पहुँचा, कहते हुए, अब्सलोम ने राजा के सभी बेटों की हत्या कर दी है, और उन में से एक भी बचा नहीं रहा है।

३१ तब राजा उठा, और अपने वस्त्र फाड़ डाले, और धरती पर लेट गया; और उसके सभी नौकर साथ ही खड़े थे उनके वस्त्र फटे हुए।

३२ और योनादब, दाऊद के भाई शिमेया के बेटे ने उत्तर दिया और कहा, जी मेरे प्रभु यह अनुमान लगाएँ कि उन्होंने उन सभी युवा पुरुषों राजा के बेटों को मार डाला है; क्योंकि बस केवल अम्नोन ही मरा है: चूँकि अब्सलोम के ही निश्च्य से इस बात का निर्धारण कर दिया गया है उस दिन से लेकर जब उसने उसकी बहन को बलात्कार कर डाला था।

३३ अब इसलिए मेरे प्रभु राजा जी इस बात को मान में बिठा लें, यह सोचते हुए कि राजा के सभी बेटे मर गए हैं: क्योंकि केवल अम्नोन ही मरा है जी।

३४ परन्तु अब्सलोम भाग गया। और पहरा देने वाले उस युवा पुरुष ने अपनी आँखें उठाईं और देखा और, देखो तो, पहाड़ी के पथ पर से कई लोग रहे थे उसके पीछे।

३५ और योनादब से राजा से कहा, देखें जी, राजा के बेटे रहे हैं: जैसा आपके सेवक ने कहा था, वैसा ही है जी।

३६ और यह होने को आया, कि जैसे ही उसने अपने बोलने का अन्त कर दिया था, देखो, राजा के बेटे पहुँचे, और अपनी वाणी उठा कर रो पड़े: और राजा भी और उसके समस्त सेवक बहुत ही रो-बिलख रहे थे।

३७ परन्तु अब्सलोम भाग कर गेशर के राजा, अम्मिहद के बेटे तलमय के पास चला गया। और दाऊद ने प्रत्येक दिन अपने बेटे के लिए शोक मनाया।

३८ तो अब्सलोम भाग कर गेशर चला गया, और वहाँ तीन वर्ष रहा।

३९ और राजा दाऊद की आत्मा अब्सलोम के पास जाने की लालसा करती थी: क्योंकि वह सान्त्वनित था अम्नोन के समबन्ध में, यह देखते हुए कि वो मर चुका था।




चौदहवाँ अध्याय।


अब ज़रूआया के बेटे योआब ने आभास किया कि राजा का मन अब्सलोम की ओर था।

और उसने तकोआ भिजवा दिया, और वहाँ से एक विद्वान स्त्री को ले आया, और उस से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, अपने आप को एक शोक मनाने वाली का ढोंग रचा लो, और अब शोक मनाने वाले वस्त्र पहन लो, और स्वयं पर तेल मत लगाना, बल्कि उस स्त्री जैसी बन जाना जिसने एक बहुत ही लम्बे समय से मृत के लिए शोक मनाया हो।

और राजा के पास आकर, उनसे इस रीति से बोलना। तो योआब ने उसके मूँह में शब्द डाल दिए।

और जब तकोआ की वो स्त्री राजा से बोली, वो धरती पर अपने चहरे के बल गिर पड़ी, और अभिवादन किया और कहा, सहायता करें जी, हे  राजा!

और राजा ने उस से कहा, भई क्या सता रहा है तुम्हें? और उसने उत्तर दिया, जी मैं तो वास्तव में ही एक विधवा स्त्री हूँ, और मेरे पति मर चुके हैं।

और आपकी दासी के दो बेटे थे, और दो दोनो खेत में एक साथ झगड़ पड़े, और उन्हें पृथक करने वाला कोई भी था, और एक ने दूसरे पर वार कर कर उसे मार डाला।

और देखें जी, पूरा परिवार आपकी दासी के विरुद्ध उठ खड़ा हो गया है, और उन्होंने कहा, उसे जिसने अपने भाई को मर डाला प्रदान कर दो, ताकि हम उसे मार दें, उसके भाई के जीवन के लिए जिसे उसने मार डाला; और हम वारिस को भी मार डालेंगे: और इस प्रकार वो मेरे अंगारे को बुझा देंगे जो बचा रह गया है, और मेरे पति के प्रति पृथ्वी पर ही नाम ही एक स्मृति छोड़ेंगे।

और राजा ने उस स्त्री से कहा, अपने घर चली जाओ, और मैं तुम्हारे समबन्ध में निर्देश दे दूँगा।

और तकोआ की उस स्त्री ने राजा से कहा, मेरे प्रभु, हे राजा, जी अधर्मता तो मुझ पर पड़े और मेरे पिता के घराने पर: और राजा और उनका सिंहासन निर्दोष रहे।

१० और राजा ने कहा, जो कोई भी तुमसे कुछ भी कहता है, उसे मेरे पास ले आना, और वो तुम्हें अब और छुएगा भी नगिन।

११ तब उसने कहा, मैं प्रार्थना करती हूँ आपसे जी, राजा प्रभू अपने ईश्वर को स्मरण में ले आएँ, कि आप रक्त के प्रतिषोधियों को और अधिक विनाश करने की अनुमती दें जी, कहिं वो मेरे पुत्र को नष्ट कर दें। और उसने कहा, प्रभु के जीते जी, तुम्हारे बेटे का एक भी बाल धरती पर नहीं गिरेगा।

१२ तब स्त्री ने कहा, मैं प्रार्थना करती हूँ जी आपसे, कि अपनी दासी को एक शब्द बोल लेने दें मेरे प्रभु राजा से। और उसने कहा, बोलो।

१३ और उस स्त्री ने कहा, फिर किस कारण वश आपने ऐसी बात ईश्वर के लोगों के विरुद्ध सोच ली है जी? क्योंकि राजा यह बात एक दोषी के समान बोलते हैं, कि राजा अपने निष्कासित को पुनः घर वापस नहीं लाते हैं जी। 

१४ क्योंकि हमें तो मर ही जाना है, और हम धरती पर बिखरे हुए पानी जैसे हैं जो दोबारा एकत्रित नहीं किया जा सकता है; ही ईश्वर किसी का भी पक्ष लेते हैं: तथापि वो युक्तियों का अविष्कार करते हैं, ताकि उनके निष्कासित उनसे निष्कासित रहें।

१५ अब इसलिए कि मैं इस बात को अपने प्रभु राजा से कहने आई हूँ जी, क्योंकि लोगों ने मुझे डरा दिया है: और आपकी दासी ने कहा, मैं अब राजा से बोलूँगी; ऐसा हो सकता है कि राजा अपनी दासी की विनती को पूरा कर दें।

१६ क्योंकि राजा सुनेंगे, अपनी दासी का उस आदमी के हाथ से बचाव देने हेतु, जो मेरा और मेरे बेटे का एक ही साथ ईश्वर की विरासत में से बाहर विध्वंस कर देना चाहता है।

१७ तब आपकी दासी ने कहा, मेरे प्रभु राजा का शब्द अब सुखदायी होगा: क्योंकि ईश्वर के एक दूत के समान ही, मेरे प्रभु राजा हैं, भले और बुरे के बीच प्रभेद करने वाले: इसलिए प्रभु आपके ईश्वर आपके साथ ही रहेंगे जी।

१८ तब राजा ने उत्तर दिया और उस स्त्री से कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, कि मुझसे वो बात मत छुपाना जो मैं तुमसे पूछूँगा। और उस स्त्री ने कहा, मेरे प्रभु राजा अब बोलें जी।

१९ और राजा ने कहा, क्या इस सब में योआब का हाथ तुम्हारे साथ नहीं है क्या? और उस स्त्री ने उत्तर दिया और कहा, आपकी आत्मा के जीते जी, मेरे प्रभु राजा, कोई भी दाएँ हाथ को या बाएँ हाथ को नहीं मुड़ सकता है उस सभी से जो मेरे प्रभु राजा ने बोल दिया है जी: क्योंकि आपके नौकर ने, योआब ने मूझे निर्देश दिया, और उन्होंने यह सभी शब्द आपकी दासी के मूँह में डाल दिए जी:

२० इस प्रकार की भाषा लाने के लिए आपके सेवक योआब ने यह कार्य किया है: और मेरे प्रभु विद्वान है, इश्वर के एक दूत की विद्यानुसार, उन सभी बातों की जानकारी रखने के लिए जो पृथ्वी पर हैं।

२१ और राजा ने योआब से कहा, देखो अब, मैंने यह बात कर दी है: इसलिए जाओ, उस युवा पुरुष अब्सलोम को दोबारा वापस ले आओ।

२२ और योआब धरती पर अपने चहरे के बल गिर पड़ा, और स्वयं को झुका कर राजा को धन्यवाद दिया: और योआब ने कहा, आज आपका नौकर जानता है कि मैंने आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है जी, मेरे प्रभु, हे राजा, कि राजा ने अपने नौकर की याचना पूरी कर दी है।

२३ तो योआब उठ कर गेशर चला गया, और अब्सलोम को यरूशलेम ले आया।

२४ और राजा ने कहा, उसे अपने ही घर मुड़ जाने दो, और उसे मेरा चेहरा मत देखने देना। तो अब्सलोम अपने ही स्वयं के घर वापस पहुँचा, और राजा का चेहरा नहीं देखा।

२५ परन्तु समस्त इस्राएल में अब्सलोम जैसा अन्य कोई भी था, अपने सौन्दर्य के लिए इतना प्रशंसनीय: उसके पाँव के तलवे से लेकर उसके सर की चोटी तक भी उस में कोई भी खोट था भई।

२६ और जब वो अपना सर मुण्डवाता था, (क्योंकि वो हर वर्ष के अंत में उसे मुण्डवाता था: क्योंकि उसके बाल उस पर बोझ बन जाते थे, इसी कारण वश वो उन्हें मुण्डवा देता था): वो अपने सर के बालों को तोल कर दो सौ शेक्ल राजा के भारानुसर पाता था।

२७ और अब्सलोम को तीन बेटे पैदा हुए, और एक बेटी, जिसका नाम तमार था: वो एक सुन्दर मुखाकृति वाली एक स्त्री थी। 

२८ तो अब्सलोम यरूशलेम में दो पूरे साल रहता रहा, और राजा का चेहरा नहीं देखा।

२९ इसलिए अब्सलोम ने योआब को बुलवा भेजा, उसे राजा के पास भेज देने हेतु; परन्तु वो उसके पास नहीं आता था: और जब उसने पुनः दूसरी बार भिजवाया, वो नहीं आया।

३० इसलिए उसने अपने नौकरों से कहा, देखो भई, योआब का खेत मेर खेत के निकट ही है, और उसके पास वहाँ जौ है; जाकर उसे आग लगा दो। और अब्सलोम के नौकरों ने खेत को आग लगा दी।

३१ तब योआब उठकर अब्सलोम के पास उसके घर में पहुँचा, और उस से कहा, किस कारण वश तुम्हारे नौकरों ने मेरे खेत को आग लगा दी?

३२ और अब्सलोम ने योआब को उत्तर दिया, देखो, मैंने तुम्हारे पास भिजवाए, कहते हुए, यहाँ जाओ भई, ताकि मैं तुम्हें राजा के पास भेज दूँ, कहने हेतु, जी किस कारण वश मैं गेशर गया हूँ? मेरे लिए तो यह भला रहता वहीं रहते रहने में: अब इसलिए मुझे राजा का चेहरा देख लेने दों; और यदि मुझ में कोई भी अधर्मता हो, तो उन्हें मुझे मार डालने दो।

३३ तो योआब राजा के पास आया, और उसे बताया: और जब उसने अब्सलोम को बुला लिया था, तो वो राजा के पास गया, और स्वयं को अपने चहरे के बल धरती की ओर राजा के समक्ष झुका लिया: और राजा ने अब्सलोम को चूम लिया। 



पन्द्रहवाँ अध्याय।


और इसके उपरान्त यह होने को आया, कि अब्सलोम ने अपने लिए रथ और घोड़े, और पचास आदमी उसके आगे-आगे दौड़ने के लिए तैयार कर दिए।

और अब्सलोम सुबह-सुबह उठ कर, दरवाज़े के पथ के साथ खड़ा हुआ करता था: और यह ऐसे होता था, कि जब राजा के पास कोई भी वाद-विवाद वाला आदमी न्याय-निर्धारण हेतु आया करता था, तब अब्सलोम उसे बुलाकर कहा करता था, भई कौन से नगर से हो तुम? और वो कहता था, जी आपका नौकर इस्राएल में से किसी एक प्रजाति से है जी।

और अब्सलोम उस से कहता, देखो भई, तुम्हारे मसले तो अच्छे-भले और ठीक हैं; परन्तु तुम्हारी सुनवाई के लिए तो राजा द्वारा कोई भी नियुक्त नहीं है।

इसके अतिरिक्त अब्सलोम कहता था, भई, काश कि मैं भूमी पर न्यायाधीष बना दिया गया होता, ताकि कोइ भी अभियोग या वाद-विवाद लिया हुआ वो प्रत्येक व्यक्ति मेरे पास सके, और मैं उसका इन्साफ़ कर दूँ!

और यह ऐसा था, कि जब कोई भी आदमी उसके निकट उसका अभिवादन करने आता था, तो वो अपना हाथ आगे बढ़ा देता था, और उसे लेकर उसे चूम लेता था।

तो इस रीति से अब्सलोम समस्त इस्राएल के साथ किया करता था जो राजा के पास न्याय-निर्धारण के लिए आया करता था: तो अब्सलोम ने इस्राएल के लोगों के मनों का हरण कर लिया।

और चालीस सालों के पश्चात यह होने को आया, कि अब्सलोम ने राजा से कहा, जी मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मुझे जाकर मेरा प्रण चुका लेने दें जी, जो मैंने प्रभु के प्रति हेब्रोन में प्रण लिया था।

चूँकि आपके नौकर ने एक प्रण का प्रण लिया था जैसे मैं सिरिया में गेशर में वास कर रहा था, कहते हुए, यदि प्रभु अवश्य ही मुझे पुनः यरूशलेम में पुनःस्थापित कर देंगे, तो मैं प्रभु की सेवा करूँगा।

और राजा ने उस से कहा, शान्ति से चले जाओ। तो वो उठ कर हेब्रोन चला गया।

१० लेकिन अब्सलोम ने इस्राएल की समस्त प्रजातियों के सर्वत्र में गुप्तचर भेज दिए, कहते हुए, जैसे ही तुम चिंघाड़े की ध्वनि सुनते ही, तो तुम कहोगे, अब्सलोम हेब्रोन में राज्य करता है।

११ और अब्सलोम के साथ यरूशलेम में से दो सौ आमन्त्रित आदमी अपने भोलेपन में निकल चले, और उन्हें कुछ भी नहीं पता था।

१२ और अब्सलोम ने दाऊद के परामर्शदाता अहितोफल उस गिलो-वाले को उसके नगर गिलो से ही बुलवा भेजा, जैसे वो आहुतियों अर्पित कर रहा था। और यह षड्यंत्र बल पकड़े था; क्योंकि लोग अब्सलोम के साथ लगातार बढ़ते ही चले गए।

१३ और दाऊद के पास एक दूत आया, कहता हुआ, इस्राएल के आदमियों के मन अब्सलोम के पीछे लग लिए हैं जी।

१४ और दाऊद ने अपने समस्त सेवकों से कहा जो उसके साथ यरूशलेम में थे, उठो भई, और हम भाग जाते हैं; नहीं तो हम अब्सलोम से नहीं बच पाएँगे: वेग से प्रस्थान कर लो, कहिं वो अचानक हमें पार कर कर हमारे साथ बुराई कर बैठे, और नगर पर तलवार की धार से प्राहार कर डाले!

१५ और राजा के सेवकों ने राजा से कहा, देखें जी, आपके सेवक वो सभी कुछ कर देने हेतु तैयार हैं जो मेरे प्रभु राजा चुनेंगे।

१६ और वो राजा आगे निकल पड़ा, और उसका समस्त घर-बार उसके पीछे-पीछे। और राजा ने दस स्त्रियों को जो रखैलें थीं, घर के रख-रखाव हेतु पीछे छोड़ दिया।

१७ तो वो राजा आगे निकल पड़ा, और सभी लोग उसके पीछे-पीछे, और दूरी पर एक स्थान में ठहर गए।

१८ और उसके सभी नौकर उसके साथ-साथ चलते चले गए; और सभी केरेथी, और सभी पेलेथी, और सभी गथी-वासी, छह सौ आदमी जो उसके पीछे-पीछे गथ से आए थे, राजा के आगे-आगे चलते चले गए।

१९ तब राजा ने उस गथी-वासी इत्ते से कहा, भई तुम भी किस कारण वश हमारे साथ जा रहे हो? अपने स्थान वापस चले जाओ, और राजा के साथ ही ठहरे रहो: क्योंकि तुम तो एक परदेशी हो और एक देशनिष्कासित भी।

२० जबकि तुम तो बस कल ही आए थे, तो क्या मैं इस दिन तुम्हें हमारे साथ-साथ ही ऊपर-नीचे भटकाता फिरवाऊँ क्या? ये देखते हुए कि जहाँ मैं जाऊँ, मैं जाऊँ, तुम वापस लौट जाओ भई, और अपने भाई-जनो को वापस ले चलो: दया और सत्य हो तुम्हारे साथ।

२१ और इत्ते ने राजा को उत्तर दिया, और कहा, प्रभु के जीते जी, और मेरे प्रभु राजा के जीते जी, अवश्य ही जिस स्थान में मेरे प्रभु राजा होंगे, भले ही मृत्यु में या जीवन में, वहीं आपका सेवक भी होगा जी।

२२ और दाऊद ने इत्ते से कहा, जाओ और पार चले जाओ। और वो गथी-वासी इत्ते पार चला गया, और उसके सभी आदमी, और वो सभी नन्हें जो उसके साथ थे।

२३ और वो समस्त देश एक ऊँची वाणी से रो-धो रहा था, और वो सभी लोग पार चले गए: वो राजा भी स्वयं उस नदी किद्रोन के पार चला गया, और सभी लोग पार चले गए, जँगली-क्षेत्र के पथ की ओर।

२४ और लो ज़दोक भी, और उसके साथ सभी लेवी-वंशज, ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोते हुए: और उन्होंने ईश्वर के संदूक को नीचे ठहरा दिया; और अबिथर ऊपर जाता गया, जब तक कि सभी लोगों ने नगर से बाहर निकलना समाप्त कर दिया था।

२५ और राजा ने ज़दोक से कहा, ईश्वर के संदूक को नगर में वापस उठा कर ले जाएँ: यदि मैं प्रभु की दृष्टि में अनुग्रह पा लूँगा, तो वो मुझे पुनः ले आएँगे, और मुझे दोनो वो और अपना निवास-स्थान दिखला देंगे: 

२६ परन्तु यदि वो इस प्रकार कहते हैं, मुझे तुम में कोई भी आनन्द नहीं है; देख लें जी, मैं यहीं हूँ, वो मेरे साथ जो उन्हें भला लगे कर डालें।

२७ राजा ने पुरोहित ज़दोक से भी कहा, क्या आप भविष्यदर्शक नहीं हैं क्या? शान्ति से नगर वापस चले जाएँ, और आपके दोनो बेटे आपके साथ, अहिमाज़ आपका बेटा, और योनातन अबिथर का बेटा।

२८ देखें जी, मैं जँगली-क्षेत्र के मैदान में ठहरा रहूँगा, जब तक कि आपके पास से मुझे प्रमाण दे देने हेतु शब्द नहीं जाता है।

२९ इसलिए ज़दोक और अबिथर ईश्वर के संदूक को पुनः यरूशलेम उठा कर ले चले: और वो वहीं ठहरे रहे।

३० और दाऊद जैतूनों के पहाड़ की चढ़ाई पर ऊपर चलता गया, ऊपर जाता हुआ रोता हुआ, और उसने अपना शीर्ष ढका हुआ था, और वो नंगे पाँव जा रहा था: और वो सभी लोग जो उसके साथ थे प्रत्येक आदमी ने अपना सर ढका हुआ था, और वो ऊपर जा रहे थे, रोते-रोते जैसे वो ऊपर जा रहे थे।

३१ और किसी ने दाऊद को बताया, कहते हुए, जी अहिथोफल अब्सलोम के साथ उन षड्यंत्र-रचाने वालों के बीच ही है। और दाऊद ने कहा, हे प्रभु, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ जी, अहिथोफल के परामर्श को मूर्खता में परिवर्तित कर दें जी।

३२ और यह होने को आया कि जब दाऊद उस पहाड़ की चोटी पर पहुँचा था, जहाँ वो ईश्वर की आराधना करता था, देखो, हूशय वो अर्की उस से भेंट करने पहुँचा उसका चौगा फटा हुआ, और उसके सर पर धूल-मिट्टी:

३३ जिस से दाऊद ने कहा, भई यदि तुम मेरे साथ ही चलते चलोगे, तो तुम मुझ पर एक बोझ बन जाओगे: 

३४ परन्तु यदि तुम नगर में वापस लौट कर अब्सलोम से कहोगे, जी मैं तो आपका नौकर बनूँगा, हे राजा; जिस प्रकार मैं अब तक आपके पिता का नौकर रहा था, उसी प्रकार अब मैं आपका भी नौकर बन जाऊँगा जी; तब तुम मेरे लिए अहिथोफल के परामर्श को परास्त कर सकोगे।

३५ और क्या वहाँ तुम्हारे साथ वो पुरोहित ज़दोक और अबिथर नहीं हैं क्या? इसलिए ये ऐसा होगा कि जो कुछ भी बात तुम राजा के घर में से सुनोगे, तुम उसे उन पुरोहितों ज़दोक और अबिथर को बता दोगे।

३६ देखो, उनके पास वहाँ उनके साथ उनके दो बेटे हैं, ज़दोक का बेटा अहिमाज़, और योनातन अबिथर का बेटा; और उनके द्वारा तुम मुझे वो समस्त बात भिजवा दोगे जो तुम सुन सकते हो।

३७ तो दाऊद का मित्र हूशय नगर में पहुँचा, और अब्सलोम यरूशलेम में पहुँचा।



सोलहवाँ अध्याय।


और जब दाऊद उस पहाड़ की चोटी को बस थोड़ा सा ही पार कर चला था, देखो, मफिबोषेत का नौकर ज़ीबा उस से मिला, दो काठी लगे गधों के साथ, जिन पर दो सौ रोटियाँ, और एक सौ किशमिश के गुच्छे, और सौ ग्रीष्म-ऋतु वाले फल, और एक अंगूर-रस की बोतल लदे थे।

और राजा ने ज़ीबा से कहा, भई इन सब से क्या अर्थ बना रहे हो तुम? और ज़ीबा ने कहा, गधे तो राजा के घराने के लिए सवारी करने हेतु हैं जी; और रोटी और ग्रीष्म-ऋतु वाले फल युवा पुरुषों के खाने के लिए हैं; और अंगूर-रस कि ऐसे जो जँगली-क्षेत्र में शिथिल हो रहे हैं पी लें जी।

और राजा ने कहा, और तुम्हारे मालिक का बेटा कहाँ है भई? और ज़ीबा ने राजा से कहा, देखें जी, वो तो यरूशलेम में ही ठहरे हुए हैं: क्योंकि उन्होंने कहा, भई आज तो इस्राएल का घराना मुझे मेरे पिता का राज्य पुनःस्थापित कर देगा।

तब राजा ने ज़ीबा से कहा, देखो भई, तुम्हारा ही वो सभी कुछ है जो मफिबोषेत का है। और ज़ीबा ने कहा, मैं विनम्र याचना करता हूँ आपसे कि मैं आपकी दृष्टि में कृपा पा लूँ जी, मेरे प्रभु, हे राजा।

और जब राजा बहुरिम पहुँचा था, देखो, वहीं से शाऊल के घराने के परिवार में से एक आदमी बाहर निकल आया, जिसका नाम शिमई था, गेरा का बेटा: वो आगे आया, और आता हुआ गाली देता गया।

और उसने दाऊद पर पत्थर फेंके, और राजा दाऊद के समस्त सेवकों पर: और सभी लोग और वो सभी बलशाली पुरुष उसके दाहिने हाथ पर और बाएँ पर थे। 

और इस प्रकार शिमई ने कहा जब वो गाली दे रहा था, निकल बाहर, बाहर निकल तू खूनी आदमी, और तू बलियल के बन्दे:

प्रभु ने तुझ पर शाऊल के घराने का समस्त खून वापस लौटा डाला है, जिनके स्थान में तूने राज किया है; और प्रभु ने राज्य को तेरे बेटे अब्सलोम के हाथ में सौंप डाला है: और, देख ले भई, तू अपनी ही बुराई में पकड़ा जा चुका है, चूँकि तू एक खूनी आदमी है!

तब ज़रूआया के बेटे अभिशय ने राजा से कहा, भई ये मरा हुआ कुत्ता मेरे प्रभु राजा को गाली क्यों दे? जी मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मुझे वहाँ जाकर उसका सर हटा लेने दें। 

१० और राजा ने कहा, भई मुझे तुम से क्या करना-धरना तुम ज़रूआया के बेटों? गाली दे देने दो उसे ऐसे ही, क्योंकि प्रभु ने उस से कहा है, दाऊद को गाली दे दे। तो फिर भई कौन कहेगा, तूने ऐसा क्यों किया है भई?

११ और दाऊद ने अभिशय से, और अपने सभी नौकरों से कहा, देख लो भई, मेरा ही बेटा जो मेरी ही आँतों में से बाहर निकला था, मेरा ही जीवन दूँढ रहा है: तो फिर अब ये बिन्यामिन-वंशज और कितना अधिक कर देगा? अकेला छोड़ दो इसे, और गाली दे देने दो इसे; क्योंकि प्रभु ने इसे बोला है। 

१२ ऐसा हो सकता है कि प्रभु मेरी उत्पीड़ना पर दृष्टि टिका लें, और कि प्रभु मुझे भला भुक्तान कर दें इसके गाली-गलौच के लिए इस दिन।

१३ और जैसे दाऊद और उसके आदमी पथ पर चलते जा रहे थे, शिमई उसके विप्रीत पहाड़ी पर चलता चला गया, और वो गाली देता गया चलता हुआ, और उस पर पत्थर और धूल-मिट्टी फैंक्ता गया।

१४ और राजा और वो सभी लोग जो उसके साथ थे थके-माँदे आए, और वहीं स्वयं को पुनश्चरयित किया।

१५ और अब्सलोम, और इस्राएल के सभी लोग वो पुरुष, यरूशलेम पहुँचे, और अहिथोफल उसके साथ। 

१६ और यह होने को अया, जब दाऊद का मित्र हूशय वो अर्की अब्सलोम के पास गया था, कि हूशय से अब्सलोम से कहा, राजा जीवित रहें, राजा जीवित रहें।

१७ और अब्सलोम ने हूशय से कहा, क्या यही करुणा है तुम्हारी तुम्हारे मित्र के प्रति? भई तुम अपने मित्र के साथ क्यों नहीं चले गए?

१८ और हूशय ने अब्सलोम से कहा, नहीं जी; बल्कि जिसका भी प्रभु, और यह लोग, और इस्राएल के समस्त पुरुष चुनाव करेंगे, उसी का ही मैं बन जाऊँगा, और उसी के साथ ही मैं बस जाऊँगा।

१९ और पुनः, मैं किसकी सेवा करूँ? क्या मैं उनके बेटे की उपस्थिति में सेवा करूँ? जैसे मैं आपके पिता की उपस्थिति में सेवा की थे, वैसे ही मैं आपके उपस्थिति में हूँगा।

२० तब अब्सलोम ने अहिथोफल से कहा, अपने बीच परामर्श दे दें कि हम क्या करें।

२१ और अहिथोफल ने अब्सलोम से कहा, अपने पिता की रखैलों के पास चले जाएँ, जिन्हें उसने घर के रख-रखाव के लिए छोड़ रखा है; और सारा इस्राएल सुन लेगा कि आप अपने पिता द्वारा घृणित हैं: तब उन सभी के हाथ जो आपके साथ हैं सुदृढ़ हो जाएँगे।

२२ तो उन्होंने अब्सलोम के लिए घर की छत पर एक तम्बू फैला दिया; और अब्सलोम समस्त इस्राएल की दृष्टि में अपने पिता की रखैलों के पास चला गया।

२३ और अहिथोफल का परामर्श, जो वो उन दिनो परामर्श दिया करता था, उस पुरुष के समान था जिस ने ईश्वर की उक्तियों से ही पूछ-ताछ की हो: वैसा ही था अहिथोफल का समस्त परामर्श, दोनो दाऊद के साथ और अब्सलोम के साथ।



सत्रहवाँ अध्याय।


इसके अतिरिक्त अहिथोफल ने अब्सलोम से कहा, मुझे अभी ही बारह हज़ार आदमी चुन लेने दें, और मैं उठ कर इसी रात दाऊद का पीछा करूँगा:

और मैं उस पर पड़ूँगा जैसे वो थका-माँदा और ढीले-हाथ लिए हुआ है, और उसे डरा दूँगा: और वो सभी लोग जो उसके साथ हैं भाग जाएँगे; और मैं बस केवल राजा को ही मार डालूँगा:

और मैं उन सभी लोगों को आपके पास ही वापस ले आऊँगा: वो आदमी जिसे आप पाना चाहते हैं वैसा ही है मानो कि सभी वापस लौट आए हों: इस प्रकार सभी लोग शान्तिमय हो जाएँगे।

और इस कथन ने अब्सलोम को और इस्राएल के सभी वृद्ध-गणों को भला प्रसन्न कर दिया।

तब अब्सलोम ने कहा, अब उस अर्की हूशय को भी बुला लो, और हम इसी प्रकार सुन लेते हैं जो वो करता है भई।

और जब हूशय अब्सलोम के पास गया था, अब्सलोम उस से बोला, कहता हुआ, अहिथोफल ने इस प्रकार बोला है: क्या हम उसके कथनानुसार कर दें क्या? यदि नहीं; तुम बोलो भई।

और हूशय ने अब्सलोम से कहा, जी वो परामर्श जो अहिथोफल ने दिया है इस समय उचित नहीं है।

चूँकि, कहा हूशय ने, आप तो अपने पिता और उनके आदमियों से परिचित हैं जी, कि वो तो शूरवीर हैं, और जी वो तो अपने मनो में कड़वे हुए पड़े हैं, खेत में अपने बच्चे खोई हुई एक मादा-भालू समान: और आपके पिता जी तो एक योद्धा-पुरुष हैं जी, और वो तो लोगों के साथ ठहरेंगे नहीं।

देख लें जी, वो तो भई अब किसी गड्ढे में, या फिर किसी अन्य स्थान में छुपे हुए हैं: और ये होने को आएगा, जब पहल-पहल उन में से कुछ गिर पड़ेंगे, कि जो कोई भी ये सुनेगा कहेगा, भई अब्सलोम के पीछे-पीछे लगे हुए उन लोगों के बीच संहार मच उठा है!

१० और वो भी जो विक्रांत है, जिसका हृदय एक शेर के हृदय के समान है, पूरा ही पिघल जाएगा जी: क्योंकि सारा इस्राएल जानता है कि आपके पिता एक पराक्रमी आदमी हैं, और वो जो उनके साथ हैं बहादुर आदमी हैं।

११ इसलिए मैं परामर्श देता हूँ कि समस्त इस्राएल आपके पास एकत्रित हो जाए, दान से लेकर बेएरशबा तक भी, जनौघ में उस रेत के समान जो कि समुद्र के साथ है; और कि आप ही स्वयं युद्ध करने निकल चलें।

१२ इस प्रकार हम उन पर किसी स्थान में पड़ेंगे जहाँ वो पा लिए जाएँगे, और हम उन पर ऐसे गिर पड़ेंगे जैसे ओस धरती पर गिर पड़ती है: और उन में से और उनके साथ उन सभी आदमियों में से जो उनके साथ हैं, एक भी कैसा होता है बचा नहीं रहेगा जी।

१३ इसके अतिरिक्त, यदि वो किसी नगर में हों, तब समस्त इस्राएल उस नगर रस्से ले आएगा जी, और हम उसे नदी में ही खींच डालेंगे, जब तक कि वहाँ एक भी कंकड़ नहीं पाया जाएगा।

१४ और अब्सलोम और इस्राएल के सभी आदमियों ने कहा, भई हूशय का परामर्श अहिथोफल के परामर्श से बेहतर है। चूँकि प्रभु ने अहिथोफल के अच्छे परामर्श को परास्त कर डालने हेतु नियुक्ति दे दी थी, इस आशय से कि प्रभु अब्सलोम पर बुराई ले आएँ।

१५ तब हूशय ने उन पुरोहितों ज़दोक और अबिथर से कहा, भई इस प्रकार तो अहिथोफल ने अब्सलोम और इस्राएल के वृद्ध-गणों को परामर्श दिया है; और इस प्रकार मैंने परामर्श दे दिया है।

१६ अब इसलिए शीघ्रता से भिजवा कर दाऊद को बता दो, कहते हुए, इस रात जँगली-क्षेत्र के मैदानों में वास करें, बल्कि फुर्ती से पार चले जाएँ; कहिं राजा निगल ने लिए जाएँ, और वो सभी लोग जो उनके साथ हैं। 

१७ अब योनातन और अहिमाज़ एनरोगल में ठहरे हुए थे; ताकि वो नगर में प्रवेश करते हुए दिखाई दें: और एक नौकरानी ने जाकर उन्हें बता दिया; और उन्होंने जाकर राजा दाऊद को बता दिया।

१८ तथापि एक छोकरे ने उन्हें देख लिया, और अब्सलोम को बता दिया: परन्तु वो चले गए, दोनो के दोनो, शीघ्रता से ही, और बहुरिम में एक आदमी के घर पहुँचे, जिसके पास उसके आँगन में एक कूआँ था; जहाँ वो नीचे उतर गए।

१९ और उस स्त्री ने लेकर एक कपड़ा उस कूएँ के मुख पर फैला दिया, और उस पर पिसा हुआ अनाज फैला दिया; और यह बात पता नहीं चली।

२० और जब अब्सलोम के नौकर उस स्त्री के पास घर पहुँचे, तो उन्होंने कहा, भई अहिमाज़ और योनातन कहाँ हैं? और उस स्त्री ने उन से कहा, वो तो पानी की नदिका पार जा चुके हैं। और जब उन्होंने ढूँढा और वो उन्हें पा सके, तो वो वापस यरूशलेम लौट आए।

२१ और यह होने को आया, उनके प्रस्थान कर लेने के पश्चात, कि वो उस कूएँ में से ऊपर बाहर निकल आए, और जाकर राजा दाऊद को बता दिया, और दाऊद से कहा, जी उठ कर, शीघ्रता से पानी पर से पार चले जाएँ: क्योंकि इस प्रकार अहिथोफल ने आपके विरुद्ध परामर्श दे दिया है।

२२ तब दाऊद उठा, और वो सभी लोग जो उसके साथ थे, और वो यर्दन पार चले गए: प्रातः के प्रकाश के समय तक उन में से एक भी था जो यर्दन पार नहीं गया था।

२३ और जब अहिथोफल ने देखा कि उसके परामर्श का अनुसरण नहीं किया गया था, तो उसने अपने गधे पर काठी कसी, और वो उठा, और घर अपने बसेरे चला गया, अपने नगर, और उसने अपने घर-बार को निर्देश देकर, स्वयं को फाँसी लगा दी, और मर गया, और वो अपने पिता के मक़बरे में दफ़ना दिया गया था।

२४ तब दाऊद महानैम पहुँचा। और अब्सलोम यर्दन को पार कर चला, वो और इस्राएल के सभी आदमी उसके साथ।

२५ और अब्सलोम ने अमसा को योआब के स्थान में सेना पर कप्तान बना दिया: जो अमसा एक मर्द का बेटा था, जिसका नाम ईथरा था एक इस्राएली, जो योआब की माँ ज़रूआया की बहन, नहश की बेटी अबिगल के पास गया था।

२६ तो इस्राएल और अब्सलोम ने गिलद की भूमी में पड़ाव डाल दिया।

२७ और यह होने को आया, जब दाऊद महानैम गया था, कि अम्मोन की सन्तानों के रब्बा के नहश का बेटा शोबी, और लोदेबर के अम्मिअल का बेटा मेकर, और रोग्लिम वाला वो गिलद-वंशज बर्ज़िलाय, 

२८ ले आए चारपाईयाँ, और पात्र, और मिट्टी के बर्तन, और गेहूँ, और जौ, और आटा, और भुना हुआ अनाज, और राजमा, और दालें, और भुना-लोबिया,

२९ और मधु, और मक्खन, और भेड़ें, और गाय का पनीर, दाऊद के लिए, और उन लोगों के लिए जो उसके साथ थे, खाने के लिए: क्योंकि उन्होंने कहा, ये लोग तो जँगली-क्षेत्र में भूखे, और थके हुए, और प्यासे हैं।



अट्ठारहवाँ अध्याय।


और दाऊद ने उन लोगों को गिना जो उसके साथ थे, और उन पर हज़ारों के कप्तानों को और सौ-सौ के कप्तानों को नियुक्त कर दिया।

और दाऊद ने योआब के हाथ तले लोगों का एक तिहाई भाग अग्रसर कर दिया, और ज़रूआया के बेटे अबिशय, योआब के भाई के हाथ तले एक तिहाई भाग, और उस गथी-वासी इत्ते के हाथ तले एक तिहाई भाग। और राजा ने लोगों से कहा, मैं भी अवश्य ही तुम्हारे साथ अग्रसर हूँगा।

परन्तु उन लोगों ने उत्तर दिया, जी आप अग्रसर नहीं होंगे: क्योंकि यदि हम भाग जाएँ, तो वो हमारी चिन्ता नहीं करेंगे; ही यदि हम में से आधे मर जाएँ, वो हमारी चिन्ता करेंगे: परन्तु अब आप तो हमारे जैसे दस हज़ारों के मोल के हैं: इसलिए जी यह बेहतर है कि आप हमारी नगर में से ही सहायता कर दें।

और राजा ने उनसे कहा, जो भी तुम्हें उच्चतम भाए मैं कर दूँगा। और राजा दरवाज़े के साथ खड़ा रहा, और सभी लोग सौ-सौ और हज़ार-हज़ार करके अग्रसर हो चले।

और राजा ने योआब और अबिशय और इत्ते को आदेश दिया, कहते हुए, मेरे वास्ते उस युवा पुरुष, अब्सलोम ही के साथ, कोमलता से व्यवहार करना। और सभी लोगों ने सुना जब राजा ने सभी कप्तानों को अब्सलोम समबन्धी निर्देश दिया।

तो वो लोग इस्राएल के विरुद्ध रण-भूमी में बाहर निकल पड़े: और वो युद्ध एफ्रैम के वन में था;

जहाँ इस्राएल के लोग दाऊद के सेवकों के सम्मुख मार दिए गए थे, और उस दिन बीस हज़ार आदमियों का महा-संहार हुआ।

क्योंकि वो युद्ध उस समस्त प्रदेश के चहरे पर बिखर चुका था: और उस दिन उस वन ने अधिक लोगों का भक्षण कर डाला तलवार के भक्षण की तुलना में।

और अब्सलोम दाऊद के नौकरों से आमने-सामने मिला। और अब्सलोम एक खच्चर पर सवार था, और वो खच्चर एक विशाल बाँज के पेड़ की मोटी-मोटी डालों के नीचे चला गया, और उसका सर उस बाँज में अटक गया, और वो स्वर्ग और पृथ्वी के बीचों-बीच पकड़ लिया गया; और वो खच्चर जो उसके नीचे था चलता चला गया।

१० और किसी आदमी ने यह देखा, और योआब को बता दिया और कहा, देखें, मैंने अब्सलोम को एक बाँज में लटकते हुए देखा है।

११ और योआब ने उस आदमी से कहा जिसने उसे बताया था, और देख ले, तूने उसे देख लिया, तो भई फिर तूने उसे वहीं धरती पर ही क्यों नहीं मार डाला? और मैंने तुझे चाँदी के दस शेक्ल और एक कमर-पेटी दे दी होतीं।

१२ और उस आदमी ने योआब से कहा, भले ही मैं एक हज़ार चाँदी के शेक्ल अपने हाथ में ग्रहण कर लूँ, तब भी मैं अपना हाथ राजा के बेटे के विरुद्ध आगे नहीं बढ़ाऊँगा: क्योंकि हमारी ही सुनवाई में उन्होंने आपको, और अबिशय को, और इत्ते को आदेश दिया था, कहते हुए, ध्यान रख लेना कि कोई भी उस युवा पुरुष अब्सलोम को छुए न।

१३ अन्यथा मैंने अपने ही प्राण के विरुद्ध असत्यता कर डाली होती; क्योंकि कोई भी बात राजा से छुपी नहीं रहती है, और आप ने स्वयं ही अपने आप को मेरे ही विरुद्ध कर दिया होता।

१४ तब योआब ने कहा, मैं तुम्हारे साथ इस प्रकार नहीं ठहर सकता। और उसने तीन भाले अपने हाथ में लेकर, उन्हें अब्सलोम के हृदय में आर-पार घोंप डाला, जैसे वो अभी उस बाँज के बीच ही जीवित था,

१५ और योआब के अस्त्र ढोने वाले तीन युवा पुरुषों ने घेरा बना कर अब्सलोम पर वार कर दिया और उसे मार डाला।

१६ और योआब ने चिंघाड़ा बजा दिया, और वो लोग इस्राएल के पीछा करने से वापस लौट गए: क्योंकि योआब ने लोगों को रोक दिया था।

१७ और उन्होंने अब्सलोम को लेकर उसे वन में एक बड़े गड्ढे में फैंक डाला, और उस पर एक बहुत ही बड़ा पत्थरों का ढेर बना दिया: और समस्त इस्राएल भाग लिया प्रत्येक अपने तम्बू में।

१८ अब अब्सलोम ने अपने जीवनकाल में अपने स्वयं के लिए एक स्तम्भ लेकर ऊपर खड़ा करवा दिया था, जो कि राजा की घाटी में है: क्योंकि उसने कहा, मेरे पास कोई भी बेटा नहीं है मेरे नाम की स्मृति रखने हेतु: और उसने उस स्तम्भ का अपने ही नाम से नामकरण कर दिया: और वो इस दिन तक, अब्सलोम का स्थान कहलाया जाता है।

१९ तब ज़दोक के बेटे अहिमाज़ ने कहा, मुझे अब भाग कर राजा को समाचार ले जाने दें, कि कैसे प्रभु ने उनका उनके शत्रुओं के प्रति प्रतिषोध ले लिया है। 

२० और योआब ने उस से कहा, तुम इस दिन समाचार नहीं ले जाओगे, बल्कि तुम किसी दूसरे दिन समाचार ले जाओगे: परन्तु इस दिन तुम कोई भी समाचार नहीं ले जाओगे, क्योंकि राजा का बेटा मर गया है।

२१ तब योआब ने कुशी से कहा, जाओ राजा को बता दो जो तुमने देखा है। और कुशी स्वयं को योआब की ओर झुका कर, दौड़ पड़ा।

२२ तब ज़दोक के बेटे अहिमाज़ ने पुनः योआब से कहा, जो हो सो हो, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे कि मुझे भी कुशी के पीछे दौड़ जाने दें। और योआब ने कहा, भई मेरे बेटे, किस कारण तुम दौड़ोगे, ये देखते हुए कि तुम्हारे पास कोई समाचार तैयार नहीं है?

२३ परन्तु जो हो सो हो, कहा उसने, मुझे दौड़ जाने दें। और उसने उस से कहा, दौड़ जाओ। तब अहिमाज़ मैदान के पथ पर दौड़ पड़ा, और कुशी को पार कर गया।

२४ और दाऊद उन दो दरवाज़ों के बीच बैठा हुआ था: और पहरेदार दरवाज़े के ऊपर वाली छत पर चला गया, दीवार पर, और उसने अपने आँखें उठाईं और देखा, और देखो एक आदमी अकेला दौड़ता हुआ।

२५ और वो पहरेदार चीखा, और राजा को बताया। और राजा ने कहा, यदि वो अकेला है, तो उसके मूँह में समाचार है। और वो दौड़ता हुआ निकट आता चला गया।

२६ और पहरेदार ने एक और आदमी को दौड़ते हुए देखा: और पहरेदार ने द्वारपाल को पुकार कर कहा, देखो एक और आदमी अकेला दौड़ रहा है। और राजा ने कहा, तो वो भी समाचार ला रहा है।

२७ और पहरेदार ने कहा, जी मुझे प्रतीत हो रहा है कि अग्रिम वाले की दौड़ ज़दोक के बेटे अहिमाज़ की दौड़ के समान है। और राजा ने कहा, भई वो तो एक अच्छा आदमी है, और अच्छे समाचार के साथ रहा है।

२८ और अहिमाज़ ने पुकारा और राजा से कहा, सब कुशल है जी। और वो राजा के समक्ष धरती पर अपने चहरे के बल गिर पड़ा, और कहा, धन्य हों प्रभु आपके ईश्वर, जिन्होंने उन आदमियों को प्रदान कर डाला है जिन्होंने अपना हाथ मेरे प्रभु राजा के विरुद्ध उठाया था।

२९ और राजा ने कहा, क्या वो युवा पुरुष अब्सलोम सकुशल है? और अहिमाज़ ने उत्तर दिया, जब योआब ने राजा के नौकर और मुझे आपके नौकर को भेजा था, तो मैंने एक एक बड़ा कोलाहल मचा देखा, परन्तु मैं जानता था कि वो क्या था।

३० और राजा ने उस से कहा, परे मुड़ जाओ और यहाँ खड़े हो जाओ। और वो परे मुड़ गया और, अचल खड़ा हो गया।

३१ और देखो, कुशी पहुँचा; और कुशी ने कहा, समाचार, मेरे प्रभु राजा जी: क्योंकि प्रभु ने इस दिन उन सभी पर आपका प्रतिषोध ले डाला है जो आपके विरुद्ध उठ खड़े हुए थे।

३२ और राजा ने कुशी से कहा, क्या वो युवा पुरुष अब्सलोम सकुशल है? और कुशी ने उत्तर दिया, मेरे प्रभु राजा के शत्रु, और वो सभी जो आपके विरुद्ध आपको चोट पहुँचाने हेतु उठते हैं, उसी युवा पुरुष के समान हों।

३३ और राजा बहुत ही विचलित हो उठा, और दरवाज़े के कक्ष तक ऊपर चलता गया, और रोया: और जाते जाते वो इस प्रकार कहता गया, हाय मेरे बेटे अब्सलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे अब्सलोम! काश कि मैं तुम्हारे स्थान में मर गया होता, हाय अब्सलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे!






उन्नीसवाँ अध्याय।


और यह योआब को बताया गया था, देखो, राजा तो अब्सलोम के लिए रो-धो रहे हैं और शोक माना रहे हैं।

और वो विजय उस दिन सभी लोगों के प्रति शोक में परिवार्तित हो गई: क्योंकि उस दिन लोगों ने यह कहना सुना कि राजा कैसे अपने बेटे के लिए शोकार्तित हो गया था।

और लोगों ने नगर में उस दिन चुपके-चुपके से प्रवेश किया, जैसे लज्जित लोग मूँह छुपाते हुए परे सटकते जाते हैं जब वो युद्ध से भाग खड़े होते हैं।

लेकिन राजा ने अपना चेहरा ढक रखा था, और राजा एक ऊँची वाने से चेखा, हाय मेरे बेटे अब्सलोम, हाय अब्सलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे!

और योआब ने घर में प्रवेश किया राजा के पास, और कहा, इस दिन आपने अपने समस्त सेवकों के चेहरों को लज्जित कर डाला है, जिन्होंने इस दिन आपके जीवन को बचाया है, और आपके बेटों के जीवनों को, और आपकी बेटियों के जीवनों को, और आपकी पत्नियों के जीवनों को, और आपकी रखैलों के जीवनों को; 

कि आप तो जी अपने शत्रुओं से प्रेम करते हैं, और अपने मित्रों से घृणा करते हैं। क्योंकि आपके इस दिन घोषणा कर दी है कि आप तो अध्यक्षों का माँ रखते हैं ही सेवकों का: चूँकि इस दिन मैं यह आभास कर रहा हूँ, कि यदि अब्सलोम जीवित रहा होता, और हम सभी इस दिन मर गए होते, तो इस से आप भले प्रसन्न हो जाते।

इसलिए अब उठें जी, बाहर चले जाएँ, और अपने सेवकों के मनों को ढाढ़स बाँधें: क्योंकि मैं प्रभु की सौगन्ध खाता हूँ, यदि आप बाहर नहीं जाएँगे, इस रात आप के साथ एक भी ठहरा नहीं रहेगा: और यह आपके साथ उस से भी भत्तर होगा उस समस्त बुराई की तुलना में जो आप पर आपके युवकाल से लेकर अब तक पड़ी है।

तब राजा उठ कर दरवाज़े पर बैठ गया। और उन्होंने सभी लोगों को बता दिया, कहते हुए, देखो, राजा दरवाज़े में बैठे हुए हैं। और सभी लोग राजा के समक्ष गए: क्योंकि इस्राएल भाग खड़ा हुआ था प्रत्येक आदमी अपने तम्बू में।

और सभी लोग इस्राएल की सभी प्रजातियों के सर्वत्र में झगड़ रहे थे, कहते हुए, राजा ने तो हमें हमारे शत्रुओं के हाथ से बचा लिया है, और हमारा पलिश्तिम-वंशजों के हाथ से बचाव कर दिया है; और अब तो वो अब्सलोम के वास्ते भूमी में से बाहर भाग गए हैं।

१० और अब्सलोम जिसका हमने हमारे ऊपर अभिषेक कर दिया था, युद्ध में मर चुका है। अब इसलिए तुम राजा को वापस लाने के लिए कोई भी शब्द क्यों नहीं बोल रहे हो भई?

११ और राजा दाऊद ने उन पुरोहितों ज़दोक और अबिथर को भिजवाया, कहते हुए, यहूदा के वृद्ध गणों से बोलो, कहते हुए, भई तुम राजा को उनके घर में वापस लाने हेतु सबसे पीछे क्यों हो? ये देखते हुए कि समस्त इस्राएल की बातचीत राजा तक पहुँची है, उनके घर तक भी।

१२ तुम मेरे भाई-जन हो, तुम मेरा हाँड-माँस हो: फिर किस कारण वश तुम राजा को वापस लाने में अबसे पीछे हो?

१३ और तुम अमसा से कहना, क्या तुम मेरा हाँड-माँस नहीं हो क्या? ईश्वर तो ये मेरे साथ कर ही दें, और इस से भी और अधिक, यदि तुम योआब के स्थान में मेरे समक्ष लगातार सेना के कप्तान बन जाओ।

१४ और उसने यहूदा के समस्त पुरुषों का हृदय मोड़ लिया, एक ही पुरुष के हृदय समान; ताकि उन्होंने राजा को ये शब्द भिजवा दिया, जी आप वापस लौट आएँ, और आपके समस्त सेवक।

१५ तो वो राजा लौट आया और यर्दन पहुँचा। और यहूदा जाकर राजा से भेंट करने गिलगल पहुँचा, राजा को यर्दन पार करवाने।

१६ और बहुरिम वाला वो गेरा का बेटा शिमई, एक बिन्यामिन-वंशज, राजा दाऊद से मिलने यहूदा के आदमियों के साथ फुर्ती से नीचे पहुँचा।

१७ और उसके साथ बिन्यामिन के एक हज़ार आदमी थे, और शाऊल के घराने का नौकर ज़ीबा, अपने पन्द्रह बेटों और अपने बीस नौकरों के साथ; और वो राजा के सम्मुख यर्दन पार चले गए।

१८ और एक नौका, राजा के घराने को पार लाने हेतु, और जो कुछ भी उसकी सोच में भला था कर देने हेतु, पार गई। और 

गेरा का बेटा शिमई राजा के समक्ष नीचे गिर पड़ा, जैसे वो यर्दन पार कर चला था;

१९ और राजा से कहा, जी मेरे प्रभु मुझ पर अधर्मता ठहराएँ, ही आप उसे स्मरण में रखें जो आपके नौकर ने विकृतता से कर डाला था उस दिन जब मेरे प्रभु राजा यरूशलेम से बाहर चले जा रहे थे, कि राजा उसे अपने मन से लगाकर रखे रहें।

२० क्योंकि आपका नौकर जानता है जी कि मैंने पाप कर डाला है: इसलिए देखें जी, मैं तो इस दिन युसुफ के समूचे घराने से सर्व प्रथम गया हूँ मेरे प्रभु राजा से नीचे जाकर भेंट करने।

२१ परन्तु ज़रुआया के बेटे अबिशय ने उत्तर दिया और कहा, क्या इसके लिए शिमई मृत्यु के घाट नहीं उतार दिया जाएगा क्या, क्योंकि इसने प्रभु के अभिषिक्त को गाली दी?

२२ और दाऊद ने कहा, भई मुझे तुम से क्या करना-धरना तुम ज़रूआया के बेटों, कि तुम इस दिन मेरे प्रति विरोधी बन जाओ? क्या कोई भी आदमी इस्राएल में इस दिन मृत्यु के घाट उतारा जाएगा क्या? क्या मैं जानता नहीं हूँ क्या कि मैं ही इस दिन इस्राएल पर राजा हूँ?

२३ इसलिए राजा ने शिमई से कहा, तुम मरोगे नहीं। और राजा ने उसे शपथ दे दी।

२४ और शाऊल का बेटा मफिबोषेथ राजा से भेंट करने नीचे आया, और उसने ही अपने पैरों को सँवारा था, ही उसने अपनी दाढ़ी काटी थी, ही अपने कपड़े धोए थे, राजा के परस्थान कर लेने वाले दिन से लेकर उस दिन तक जब वह पुनः शान्ति से गया था।

२५ और यह होने को आया, जब वो राजा से भेंट करने यरूशलेम पहुँचा था, कि राजा ने उस से कहा, भई किस कारण वश तुम मेरे साथ नहीं गए मफिबोषेथ?

२६ और उसने उत्तर दिया, मेरे प्रभु, हे राजा, मेरे नौकर ने मुझे धोखा दे दिया जी: क्योंकि आपके सेवक ने कहा, मैं अपने लिए एक गधे पर काठी कसूँगा, ताकि मैं उस पर सवारी कर के, और राजा के पास चला जाऊँ; क्योंकि आपका सेवक लंगड़ा है जी।

२७ और इसने आपके सेवक की मेरे प्रभु राजा से चुगली कर डाली है जी; पर मेरे प्रभु राजा ईश्वर के एक दूत के समान हैं: इसलिए जो कुछ भी आपकी दृष्टि में भला हो कर दें जी।

२८ क्योंकि मेरे पिता के समस्त घराने वाले मेरे प्रभु राजा के सम्मुख बस केवल मृत पुरुष ही तो थे: तथापि आपने अपने सेवक को उनके बीच स्थित कर दिया जो आपकी अपनी मेज़ पर ही खाते हैं। अतः मुझे क्या अधिकार है कि मैं और अधिक राजा की ओर चीखूँ जी?

२९ और राजा ने उस से कहा, अपनी बातों के विषय में अब और क्यों बोलते हो तुम? मैंने कह दिया है, तुम और ज़ीबा भूमी को विभाजित कर लो।

३० और मफिबोषेथ ने राजा से कहा, हाँ जी, इसी को ही सब कुछ ले लेने दें जी, चूँकि मेरे प्रभु राजा पुनः अपने ही घर शान्ति से पधार चुके हैं।

३१ और रोग्लिम से वो गिलद-वंशज बर्ज़िलाय नीचे कर, राजा के साथ यर्दन पार गया, उसे यर्दन पार लाने हेतु।

३२ अब बर्ज़िलाय एक बहुत ही वृद्ध पुरुष था, अस्सी वर्ष की आयु का: और उसने राजा को संपोषण प्रदान किया था जैसे वो महानैम में ठहरा हुआ था; क्योंकि वो एक बहुत ही महान व्यक्ति था।

३३ और राजा ने बर्ज़िलाय से कहा, मेरे साथ पार चले आओ भई, और मैं तुम्हारा अपने साथ यरूशलेम में संपोषण करूँगा।

३४ और बर्ज़िलाय ने राजा से कहा, जी मेरे पास और कितना समय जीने के लिए बचा है, कि मैं राजा के साथ यरूशलेम ऊपर चला जाऊँ?

३५ जी मैं इस दिन अस्सी वर्ष का हूँ: और क्या मैं अच्छे और बुरे के बीच प्रभेद कर सकता हूँ क्या? क्या आपका सेवक उसका स्वाद चख सकता है जो मैं खाता हूँ और जो मैं पीता हूँ? क्या मैं अब और गाना गाने वाले पुरुषों और गाना गाने वाली स्त्रियों की वाणी सुन सकता हूँ क्या? तो फिर किस कारण आपका सेवक मेरे प्रभु राजा पर एक बोझ भी बन जाए जी? 

३६ आपका सेवक थोड़ी ही दूर राजा के साथ यर्दन पार जाएगा जी: और राजा किस कारण मेरा ऐसे भुक्तान से भुक्तान करें?

३७ मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, अपने सेवक को पुनः वापस मुड़ जाने दें जी, ताकि मैं अपने ही स्वयं के नगर में मर जाऊँ, और अपने पिता की और अपनी माता की कब्र के साथ ही दफ़ना दिया जाऊँ। लेकिन देखें अपने सेवक किमहम को; इसे मेरे प्रभु राजा के साथ पार चले जाने दें जा; और इसके साथ जो कुछ भी आपको भला प्रतीत हो कर दें।

३८ और राजा ने उत्तर दिया, किमहम मेरे साथ पार जाएगा, और मैं इसके साथ जो कुछ भी तुम्हें भला प्रतीत होगा कर दूँगा: और जो कुछ भी तुम्हें मुझ से अवश्यक्ता होगी, वही मैं तुम्हारे लिए कर दूँगा।

३९ और सभी लोग यर्दन पार चले गए। और जब राजा पार चला जा चुका था, राजा ने बर्ज़िलाय को चूमा और उसे आशीष दिया; और वो अपने ही स्थान वापस चला गया।

४० तब राजा गिलगल की ओर पार चलता गया, और किमहम उसके साथ पार चलता गया: और यहूदा के सभी लोग राजा को पार ले आए, और इस्राएल की आधी जनता भी।

४१ और देखो, इस्राएल की सारी जनता राजा के पास पहुँची, और राजा से कहा, हमारे भाई-जन यहूदा के आदमी क्यों आपको परे चुरा कर, राजा और उनके घराने को, और दाऊद के सभी आदमियों को उनके साथ यर्दन पार ले आए हैं?

४२ और यहूदा के सभी आदमियों ने इस्राएल के आदमियों को उत्तर दिया, क्योंकि राजा हमारे निकटवर्ती कुलवाले हैं भई: किस कारण वश फिर तुम इस बात के पीछे क्रोधित हो रहे हो भई? क्या हम ने राजा के भाड़े पर कुछ खा लिया है क्या? या क्या उन्होंने हमें कोई भी उपहार दिया है क्या?

४३ और इस्राएल के आदमियों ने यहूदा के आदमियों के उत्तर दिया और कहा, हमारे पास राजा में दास भाग हैं, और हमारे पास दाऊद में तुम्हारी तुलना में अधिक अधिकार भी है: फिर तुमने हम से घृणा क्यों की भई, कि हमारे राजा को वापस लाने हेतु हमारा परामर्श पहले क्यों नहीं लिया गया था? और यहूदा के आदमियों के शब्द इस्राएल के आदमियों के शब्दों की तुलना में अधिक क्रुद्ध थे।



बीसवाँ अध्याय।


और वहीं अकस्मात् बअलियल का एक बन्दा था, जिसका नाम शेबा था, बिकरी का बेटा, एक बिन्यामिन-वंशज: और उसने तुरही बजा दी और कहा, भई हमारे पास तो दाऊद में कोई भी भाग नहीं है, ही यिशय के बेटे में हमारे पास कोई भी विरासत है: इस्राएल, हर आदमी अपने तम्बुओं को चले जाओ!

तो इस्राएल का हर आदमी दाऊद के पीछे-पीछे चलने से परे हट कर बिकरी के बेटे शेबा के पीछे-पीछे चल पड़ा: परन्तु यहूदा के आदमी अपने राजा से चिपट कर रहे, यर्दन से लेकर यरूशलेम तक भी।

और दाऊद यरूशलेम में अपने घर पहुँचा; और राजा ने उन दस स्त्रियों, अपनी रखैलों को लेकर, जिन्हें उसने घर के रख-रखाव के लिए पीछे छोड़ दिया था, एक पृथक कक्ष में रख कर उनका संपोषण किया, परन्तु उनके पास नहीं गया। तो वो अपनी मृत्यु के दिन तक विधवावस्था में ही रहती रहीं, बन्द। 

तब राजा ने अमसा से कहा, तीन दिनो के अन्दर-अन्दर मेरे लिए यहूदा के आदमियों को संग्रहित कर दो, और तुम यहीं उपस्थित हो जाना।

तो अमसा यहूदा के आदमियों को संग्रहित करने चल दिया: परन्तु उसने उस स्थापित समय से जो उसने उसे नियुक्त किया था अधिक व्यतीत कर दिया।

और दाऊद ने अबिशय से कहा, भई अब तो बिकरी का बेटा शेबा हमें अब्सलोम की तुलना में अधिक हानि पहुँचाएगा: तुम अपने प्रभु के नौकरों को लेकर उसका पीछा करो, कहिं वो अपने लिए क़िलेबन्द नगर प्राप्त कर ले, और हम से बच निकल जाए।

और उसके पीछे-पीछे योआब के आदमी और केरेथी, और पेलेथी, और सभी पराक्रमी आदमी बाहर निकल पड़े: और वह यरूशलेम से बाहर अग्रसर हो चले, बिकरी के बेटे शेबा का पीछा करने।

जब वह गिब्यन में उस बड़े पत्थर पर थे, अमसा उनके सामने आया। और योआब का वस्त्र जो उसने पहना हुआ था उस पर कसा हुआ था, और उस पर एक तलवार के साथ एक कमर-पेटी उसकी कमर पर कसी हुई उसकी म्यान में; और जैसे वो रहा था वो बाहर निकल कर गिर गई।

और योआब ने अमसा से कहा, मेरे भाई, क्या तुम कुशल तो हो? और योआब ने उसे चूमने के लिए दाएँ हाथ से अमसा की दाढ़ी पकड़ ली।

१० परन्तु अमसा ने उस तलवार पर कोई ध्यान नहीं दिया जो योआब के हाथ में थी: तो उसने उसके साथ उस पर पाँचवीं पसली पर प्रहार कर डाला, और धरती पर उसकी आँतें बाहर उँडेल डालीं, और उस पर पुनः प्रहार नहीं किया; और वो मर गया। तो योआब और उसका भाई अबिशय बिकरी के बेटे शेबा का पीछा करने चल दिए।

११ और योआब के आदमियों में से एक ने उसके साथ खड़ा होकर कहा, वो जो योआब के पक्ष में है, और वो जो दाऊद के लिए है, उसे योआब के पीछे चले जाने दो।

१२ और अमसा मुख्य-पथ के बीच ही लहू में लोट रहा था। और जब उस आदमी ने देखा कि सभी लोग अचल खड़े हो जाते थे, तो उसने अमसा को मुख्य-पथ पर से बाहर परे खेत में पटक दिया, और उस पर एक कपड़ा फैंक डाला, जब उसने देखा कि हर कोई जो उसके साथ से रहा था अचल खड़ा होता जा रहा था। 

१३ जब उसे मुख्य-पथ पर से बाहर परे हटा दिया जा चुका था, सभी लोग योआब के पीछे-पीछे चलते चले गए, बिकरी के बेटे शेबा का पीछा करने हेतु।

१४ और वो इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से होता चला गया एबल, और बेतमेअकाह और सभी बेरियों तक: और वो एक साथ संग्रहित हो कर उसके पीछे-पीछे भी चल दिए।

१५ और उन्होंने आकर उस पर बेतमेअकाह के एबल में घेराबन्दी कर डाली, और उन्होंने नगर के विरुद्ध एक युद्ध-टीला खड़ा कर दिया, और वो रण वाले खुदे नाले में था: और वो सभी लोग जो योआब के साथ थे दीवार को नीचे गिराने के लिए उसे तोड़-फोड़ रहे थे।

१६ तब एक विद्वान स्त्री नगर में से चीख पड़ी, सुनो भई, सुन लो; मैं प्रार्थना करती हूँ तुमसे, योआब से कहो, यहाँ निकट जाएँ ताकि मैं आपके साथ वार्ता करूँ। 

१७ और जब वह उसके निकट गया था, तो उस स्त्री ने कहा, क्या आप योआब हैं? और उसने उत्तर दिया, मैं वही हूँ। तब उसने उस से कहा, अपनी दासी के शब्द सुन लें जी। और उसने उत्तर दिया, मैं सुन रहा हूँ।

१८ तब उसने बोला, कहते हुए, प्राचीन समय में वो बोला करते थे, कहते हुए, वो तो अवश्य ही एबल में सलाह लेंगे: और ऐसे वो मसले का हल किया करते थे।

१९ मैं इस्राएल में उन में से एक हूँ जो शान्तिमय और विश्वसनीय हूँ: आप तो इस्राएल में एक नगर को और एक माँ को नष्ट करना चाहते हैं: आप प्रभू की विरासत को क्यों निकल लेने चाहते हैं?

२० और योआब ने उत्तर दिया और कहा,ऐसा नहीं है, ऐसी बात नहीं है मेरे साथ, कि मैं निगल लूँ या नष्ट कर डालूँ।

२१ मसला ऐसा नहीं है: लेकिन एफ्रैम पहाड़ के एक बिकरी के बेटे शेबा नामक आदमी ने राजा के विरुद्ध, यहाँ तक कि दाऊद के विरुद्ध ही अपना हाथ खड़ा दिया है: केवल उसे ही प्रदान कर दो, और मैं नगर से प्रस्थान कर लूँगा। और उस स्त्री ने योआब से कहा, देखें जी, उसका सात दीवार पर से आपके पास पटक दिया जाएगा।

२२ तब वो स्त्री अपनी विद्या में उन सभी लोगों के पास चली गई। और उन्होंने बिकरी के बेटे शेबा का सर काट कर उसे योआब को फैंक डाला। और उसने तुरही बजा दी, और वो नगर से वापस विदा हो लिए, हर आदमी अपने तम्बू में। और योआब राजा के पास वापस यरूशलेम लौट अया।

२३ अब योआब इस्राएल की समस्त सेना पर नियुक्त था: और केरेथियों और पेलेथियों पर येहोयदा का बेटा बेनाया नियुक्त था:

२४ और अदोरम राजकर भरने वाले बेगारी-नौकरों पर नियुक्त था: और अहिलुद का बेटा यहोशाफट अभिलेखक था;

२५ और शेवा लिपिक था: और ज़दोक, और अबिथर, पुरोहित थे:

२६ और वो याएरी आयरा दाऊद का प्रमुख अध्यक्ष था।



इक्कीसवाँ अध्याय।


तब दाऊद के दिनो में तीन साल एक अकाल था, साल-दर-साल; और दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की। और प्रभु ने उत्तर दिया, ये शाऊल और उसके खूनी घराने के लिए है, क्योंकि उसने उन गिब्यन-वासियों को मार डाला था।

और राजा ने उन गिब्यन-वासियों को बुलाया; अब वो गिब्यन-वासी इस्राएल की सन्तानों में से नहीं थे, बल्कि एमोरवासियों के शेष बचे हुओं में से थे; और इस्राएल की सन्तानों ने उन्हें शपथ दे दी थी: और शाऊल इस्राएल की सन्तानों और यहूदा के प्रति अपने जोश में उन्हें मार डाला चाहता था।

इस कारण वश दाऊद ने उन गिब्यन-वासियों से कहा, मैं तुम्हारे लिए क्या कर दूँ? और मैं किस से पापमोचन करूँ, कि तुम प्रभु की विरासत को आशीष दे दो?

और उन गिब्यन-वासियों ने उस से कहा, हम शाऊल का, ही उसके घराने का कोई भी चाँदी या सोना लेंगे, ही हमारे लिए आप इस्राएल में किसी भी आदमी को मारेंगे। और उसने कहा, जो तुम कहोगे, मैं वही तुम्हारे लिए कर दूँगा।

और उन्होंने राजा को उत्तर दिया, उस आदमी जिसने हमें समाप्त कर डाला, और हमारे विरुद्ध युक्ति निकाली कि इस्राएल की सीमाओं में से किसी में भी बचे रह जाने से हमारा विध्वंस हो जाए, 

उसके बेटों में से सात आदमियों को हमें प्रदान कर दें, और हम उन्हें प्रभु द्वारा चुने गए शाऊल के गिब्या में प्रभु के प्रति लटका डालेंगे। और राजा ने कहा, मैं उन्हें प्रदान कर दूँगा।

परन्तु राजा ने शाऊल के बेटे, योनातन के बेटे, मफिबोषेत को बक्श दिया, प्रभु की उस शपथ के कारण जो उनके बीच था, दाऊद और शाऊल के बेटे योनातन के बेटे के बीच। 

बल्कि राजा ने अयाह की बेटी रिज़पा के दो बेटों को, जिन्हें उसने शाऊल को जने थे, अरमोनी और मफिबोषेत; और शाऊल की बेटी मिकल के पाँच बेटों को लेकर, जिन्हें उसने उस महोलथी बर्ज़िलाय के बेटे अद्रिएल के लिए जने थे:

उन्हें उन गिब्यन-वासियों के हाथों में प्रदान कर दिया, और उन्होंने उन्हें प्रभु के सम्मुख पहाड़ी में लटका दिया: और वो सातों एक साथ ही गिर पड़े, और जौ की फसल कटाई के आरम्भ में, पहले दिनो में, फसल कटाई के दिनो में ही, उन्हें मृत्यु के घाट उतार दिया गया था।

१० और अयाह की बेटी रिज़पा ने टाट-वस्त्र लेकर उसे अपने लिए एक पत्थर पर बिछा दिया, फसल-कटाई के आरम्भ से लेकर जब तक उन पर स्वर्ग में से पाने टपक पड़ा था, और उसने उन पर दिन में ही पवन के पंछियों को टिकने दिया, ही रात को खेत के जानवरों को।

११ और ये दाऊद को बता दिया गया था जो अयाह की बेटी रिज़पा ने, शाऊल की रखैल ने, कर दिया था।

१२ और दाऊद ने जाकर शाऊल की अस्थियों को और उसके बेटे योनातन की अस्थियों को यबशगिलद के आदमियों से ले लिया, जिन्होंने उन्हें बेतशन की सड़क पर से चुरा लिया था, जहाँ उन पलिश्तिम-वंशजों ने उन्हें लटकाया हुआ था, जब उन पलिश्तिम-वंशजों ने गिलबो में शाऊल को मार डाला था:

१३ और वो वहाँ से शाऊल की अस्थियों को और उसके बेटे योनातन की अस्थियों को ले आया; और उन्होंने उन लटके हुओं की अस्थियों को एकत्रित कर लिया।

१४ और शाऊल की और उसके बेटे योनातन की अस्थियों को उन्होंने ज़ेला में बिन्यामिन के देश में उसके पिता किश के मक़बरे में दफ़ना दिया: और जो कुछ भी राजा ने आदेश दिया था उन्होंने क्रियान्वित कर दिया। और उसके पश्चात ईश्वर ने भूमी के लिए विनय को स्वीकार कर लिया।

१५ इसके अतिरिक्त उन पलिश्तिम-वंशजों ने इस्राएल के साथ पुनः युद्ध छेड़ दिया; और दाऊद नीचे जा रहा था और उसके सेवक उसके साथ और उन पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध लड़ रहे थे: और दाऊद मूर्छित हो रहा था।

१६ और उस विशालकाय-मानुष के बेटों में से एक, इषबिबेनब, जिसके भाले का भार पीतल के तीन सौ शेक्ल था, एक नई तलवार से कसा हुआ, दाऊद को मार डालने की सोच में था।

१७ परन्तु ज़रुआया के बेटे अभिशय ने उसकी सहायता ही, और उस पलिश्तिम-वंशज पर वार कर कर उसे मार डाला। तब दाऊद के आदमियों ने उसे शपथ दी कहते हुए, आप अब और हमारे साथ युद्ध करने बाहर नहीं निकलेंगे जी, ताकि आप इस्राएल के दीपक को बुझा डालें। 

१८ और इसके पश्चात यह होने को आया, कि गोब में उन पलिश्तिम-वंशजों के साथ पुनः एक युद्ध छिड़ा: तब सिबेकय उस हूशय-वंशज ने सफ को मार डाला जो उस विशालकाय-मानुष के बेटों में से था।

१९ और गोब में उन पलिश्तिम-वंशजों के साथ पुनः एक युद्ध छिड़ा, जहाँ एक बेतलेहम-वाले यारेओरगिम के बेटे एलहनन ने गोलियथ उस गती के भाई को मार डाला, जिसके भाले की छड़ी एक जुलाहे के करघे की शाट समान थी।

२० और पुनः गथ में एक युद्ध छिड़ा, जहाँ एक बहुत ही ऊँचे कद वाला एक आदमी था, जिसके प्रत्येक हाथ पर छह उँगलियाँ थीं, और प्रत्येक पैर पर छह पैरों वाली उँगलियाँ, चौबीस संख्या में; और वो भी उस विशालकाय-मानुष को जन्मा था।

२१ और जब उसने इस्राएल की उपेक्षा कर डाली थी, तो दाऊद के भाई शिमेया के बेटे योनातन ने उसे मार डाला।

२२ यही चार गथ में उस विशालकाय-मानुष को पैदा हुए थे, और दाऊद के हाथ, और उसने सेवकों के हाथ गिरे।



बाईसवाँ अध्याय।


और दाऊद ने प्रभु से इस गीत के शब्द उस दिन बोले जब प्रभु उसका उसके समस्त शत्रुओं के हाथ में से, और शाऊल के हाथ में से बचाव कर चुके थे:

और उसने कहा, प्रभु मेरी चट्टान हैं, और मेरे गढ़, और मेरा उद्धार करने वाले;

मेरी चट्टान के ईश्वर; इन्हीं में ही मैं भरोसा करूँगा: यही मेरी ढाल हैं, और मेरे बचाव का सींघ, मेरी ऊँची मीनार, और मेरा आश्रय, मुझे बचाने-वाले; आप मुझे हिंसा से बचाते हैं जी। 

मैं प्रभु का आह्वान करूँगा, जो प्रशन्सा के सुयोग्य हैं: इस प्रकार मेरा मेरे शत्रुओं से बचाव हो जाएगा।

जब मृत्यु की लहरों ने मुझे घेरा हुआ था, ईश्वरभक्तिहीनो के प्रलयों ने मुझे भयभीत किया हुआ था;

नरक की शोचनीयताओं ने मुझे घेरा हुआ था; मृत्यु के फन्दे मेरे आगे-आगे थे;

अपने कष्ट में मैंने प्रभु को पुकारा, और अपने ईश्वर को रोया: और उन्होंने अपने मन्दिर में से मेरी वाणी सुनी, और मेरी चीख-पुकार उनके कानों में ही घुसी।

तब पृथ्वी हिल उठी और काँप उठी; स्वर्ग की नीवें हिल उठीं और झकझोर उठीं, चूँकि वो आक्रोशित थे।

उनके नथुनों में से बाहर एक धुआँ उठा, और उनके मूँह में से बाहर अग्नी ने भक्षण कर डाला: और कोएले उस से सुलग उठे थे।

१० उन्होंने स्वर्गों को भी झुका डाला, और नीचे गए; और अन्धकार उनके चरणों तले था।

११ और वह एक केरब पर सवारी कर रहे थे, और उड़ रहे थे: और वो वायु की पंखुड़ियों पर दिख रहे थे।

१२ और वह अन्धकार को अपने चारों ओर मण्डप बना रहे थे, अन्धकारमय जल, और गगन के मोटे-मोटे मेघ।

१३ उनके समक्ष उजाले में से अग्नी के कोएले सुलग उठे थे।

१४ प्रभु स्वर्ग से गर्जन मचा रहे थे, और उन अति उच्चतम ने अपनी वाणी अर्णित की।

१५ और वो बाण छोड़ रहे थे, और उन्हें तितर-बितर कर डाला; बिजली, और उन्हें अस्त-व्यस्त कर डाला।

१६ और समुद्र के प्रवाह प्रकट हुए, संसार की नीवें प्रत्यक्ष हो उठीं, प्रभु की डाँट-फटकार पर, उनके नथुनों के श्वास की फूँक पर ही।

१७ उन्होंने ऊपर ने भिजवा दिया, उन्होंने मुझे पकड़ लिया; उन्होंने मुझे कई पानियों में से बाहर खींच लिया;

१८ उन्होंने बचा लिया मुझे मेरे शक्तिशाली शत्रु से, और उनसे जो मुझ से घृणा करते थे: चूँकि वो मेरे लिए बहुत ही शक्तिशाली थे।

१९ वो तो मेरे आगे-आगे ही थे मेरी आपदा के दिन में: परन्तु प्रभु मेरा समर्थन थे।

२० वो मुझे एक विस्तृत स्थान में भी आगे ले आए: उन्होंने मेरा उद्धार कर दिया, क्योंकि वो मुझ में प्रसन्न-चित्त थे।

२१ प्रभु ने मेरी नेकीनुसार मेरे प्रति भुक्तान कर दिया: मेरे हाथों की स्वच्छतानुसार ही उन्होंने मुझे भुक्तान कर दिया।

२२ क्योंकि मैंने प्रभु के पथों को रखे-रखा है, और अपने ईश्वर से दुष्टता से प्रस्थान नहीं किया है।

२३ क्योंकि उनके समस्त न्याय-निर्धारण मेरे सामने थे: और जहाँ तक उनके अध्यादेशों की बात आती है, मैंने उनसे प्रस्थान नहीं किया।

२४ मैं उनके समक्ष निष्कलंक भी था, और अपनी अधर्मता से स्वयं को बचा कर रखा।

२५ इसलिए प्रभु ने मेरी नेकीनुसार मेरे प्रति भुक्तान कर दिया है: मेरी स्वच्छतानुसार ही उनकी दृष्टि में।

२६ दयालु के साथ आप स्वयं को दयाशील प्रदर्शित करेंगे, और निष्कलंक के साथ आप निष्कलंक।

२७ उस शुद्ध के साथ आप स्वयं को शुद्ध प्रदर्शित करेंगे; और विकृत के साथ आप टेढ़े-मेढ़े।

२८ और उन उत्पीड़ित लोगों को आप बचा लेंगे: परन्तु आपकी आँखें उन अभिमानियों पर हैं, ताकि आप उन्हें पदावनत कर दें।

२९ चूँकि आप ही मेरा दीपक हैं, हे प्रभु: और प्रभु ही मेरे अन्धकार को उज्ज्वल बना देंगे।

३० क्योंकि आप ही से मैं एक सैन्य-दल में से आर-पार दौड़ा हूँ: मेरे ईश्वर द्वारा ही मैंने एक दीवार पर से छलाँग लगा ली है।

३१ ईश्वर का पथ परिपूर्ण है; प्रभु का शब्द प्रमाणित है: वह उन सभी के प्रति एक ढाल हैं जो उन पर विश्वास करते हैं।

३२ चूँकि कौन है ईश्वर, सिवाय प्रभु के? और कौन है वो चट्टान, सिवाय हमारे ईश्वर के?

३३ ईश्वर मेरी शक्ती और बल हैं: और वही मेरे पथ को परिपूर्ण बनाते हैं।

३४ वह मेरे पैरों को हिरणी के पैरों जैसा बनाते हैं: और मुझे मेरे ऊँचे स्थानों में स्थित करते हैं।

३५ वह मेरे हाथों को युद्ध करने का प्रशिक्षण देते हैं; ताकि इस्पात का एक धनुष मेरी बाहों से तोड़ दिया जाता हैं।

३६ आपने मुझे अपने बचाव की ढाल भी प्रदान कर दी है: और आपकी कोमलता में मुझे महान बना दिया है।

३७ आपने मेरे तले मेरे पद-चापों को विस्तृत कर दिया है; ताकि मेरे पैर फिसले नहीं।

३८ मैंने अपने शत्रुओं का पीछा किया है, और उन्हें नष्ट कर डाला है; और उनका विध्वंस कर देने तक मैं पुनः नहीं वापस मुड़ा। 

३९ और मैंने उन्हें समाप्त कर डाला है, और उन्हें घायल कर दिया है, ताकि वो उठ नहीं पाए: जी हाँ, वो तो मेरे पैरों तले गिरे हुए हैं। 

४० चूँकि आप ही ने युद्ध के लिए शक्ती सहित मेरी कमर कसी हुई है: उन्हें जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए आपने मेरे तले स्ववश में कर डाला है।

४१ आपने ही मुझे मेरे शत्रुओं की गर्दनें भी प्रदान कर दी हैं जी, ताकि मैं उन्हें नष्ट कर डालूँ जो मुझ से घृणा करते हैं।

४२ वो तो देखते रहे, परन्तु कोई भी बचाने वाला था; प्रभु की ओर भी, परन्तु उन्होंने उन्हें उत्तर नहीं दिया।

४३ तब मैंने उन्हें पृथ्वी की धूल की न्यूनता के समान पीस डाला, गली के कीचड़ के समान ही मैंने उन्हें कूट कर बाहर उड़ा दिया।

४४ आपने मेरा मेरे लोगों के लड़ाई-झगड़ों से उद्धार भी कर दिया है, आपने मुझे काफिरों का शीर्ष बनने के लिए रखा हुआ है: एक गण जिस से मैं परिचित था मेरी सेवा करेगा।

४५ परदेशी मेरे प्रति स्वयं को आधीन कर देंगे: सुन लेते ही, वह मेरे प्रति आज्ञाकारी बन जाएँगे।

४६ परदेशी मुरझाते चले जाएँगे, और वो अपने परिवृत्त स्थानों में भयभीत हो जाएँगे।

४७ प्रभु सजीवित हैं; और धन्य हों मेरी चट्टान; और मेरे बचाव की चट्टान के ईश्वर पदोन्नत हों।

४८ वो ईश्वर ही हैं जो मेरा प्रतिषोध लेते हैं, और जो मेरे तले लोगों को नीचे लाते हैं,

४९ और जो मुझे मेरे शत्रुओं में से आगे निकाल लाते हैं: आपने मुझे उन पर भी जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए थे, ऊँचा उठा दिया है: आपने मेरा उस हिंसक पुरुष से बचाव कर दिया है।

५० इसलिए मैं आपको धन्यवाद प्रदान करूँगा जी, हे प्रभु, अन्यप्रजातियों के बीच ही, और मैं आपके नाम के प्रति प्रशन्साएँ गाऊँगा जी।

५१ वही अपने राजा के लिए बचाव का स्तम्भ हैं: और अपने अभिषिक्त के प्रति, दाऊद के प्रति, और उसके बीज के प्रति सदा के लिए दयालुता प्रदर्शित करते हैं।



तेईसवाँ अध्याय।


तो अब यही दाऊद के अंतिम शब्द हैं। यिशय के बेटे दाऊद ने कहा, और उस पुरुष ने जिसे ऊँचा उठा दिया गया था, याकूब के ईश्वर के अभिषिक्त, और इस्राएल के मधुर भजन-गीतकार ने कहा,

प्रभु के प्राण मेरे द्वारा बोले, और उनका शब्द मेरी जीभ में था।

इस्राएल के ईश्वर ने कहा, इस्राएल के पत्थर बोले मुझ से, वो जो मनुष्यों पर राज करता है, न्यायी होना चाहिए, ईश्वर के भय में राज करता हुआ।

और वो प्रभात के प्रकाश समान होगा, जब सूर्योदय होता है, एक प्रभात बिना मेघों का ही; पृथ्वी में से कोमल वनस्पति समान उभरता हुआ वर्षा पश्चात निर्मल प्रभा से ही।

भले ही मेरा घर ईश्वर के साथ ऐसा हो; तथापि उन्होंने मेरे साथ एक अनन्तकाल का प्रतिज्ञा-पत्र बना दिया है, सभी में व्यास्थित, और अटल: क्योंकि यही मेरा समस्त बचाव है, और समस्त मनोरथ, भले ही वो उसे बढ़ाएँ न।

परन्तु बअलियल के बेटे वह सभी होंगे परे खदेड़े हुए काँटों जैसे, क्योंकि उन्हें हाथों से नहीं पकड़ा जा सकता है:

परन्तु वो पुरुष जो उन्हें छुएगा अवश्य ही लोहे और एक भाले के छड़ से क़िलाबन्द होगा; और वह उसी स्थान में अग्नी के साथ पूर्णतः भस्म कर दिए जाएँगे।

यही उन पराक्रमी पुरुषों के नाम हैं जो दाऊद के पास थे: वह तकमोनी जो आसन में बैठा करता था, कप्तानों के बीच प्रमुख; वही अदीनो था वो एज़नी: उसने अपना भाला आठ सौ के विरुद्ध उठाया था, जिन्हें उसने एक ही बार में मार डाला था।

और उसके बाद था एलाज़र, दोदो अहोही का बेटा, दाऊद के साथ उन तीन पराक्रमी पुरुषों में से एक, जब उन्होंने उन पलिश्तिम-वंशजों को ललकारा था जो वहाँ युद्ध करने एक साथ एकत्रित हो गए थे, और इस्राएल के आदमी चले का चुके थे:

१० तो वो उठ कर उन पलिश्तिम-वंशजों को मारता ही गया जब तक कि उसका हाथ थक गया था, और उसका हाथ तलवार से चिपट चुका था: और प्रभु ने उस दिन एक विशाल विजय क्रियान्वित कर दी थी; और लोग उसके पीछे-पीछे लूट-पाट मचाने ही वापस लौटे।

११ और उसके बाद था शम्मा, अगी हरारी का बेटा। और वो पलिश्तिम-वंशज एक साथ एक सैन्य-दल में एकत्रित थे, जहाँ दालों से भरा धरती का एक खण्ड था: और लोग उन पलिश्तिम-वंशजों से भाग गए थे।

१२ परन्तु उसने उस धरती के बीच में ही खड़ा रहकर, उसकी सुरक्षा की, और उन पलिश्तिम-वंशजों को मार डाला: और प्रभु ने एक विशाल विजय क्रियान्वित कर दी।

१३ और उन तीस प्रमुखों में से तीन नीचे गए, और दाऊद के पास फसल की कटाई के समय अद्युल्लम की गुफा में गए: और उन पलिश्तिम-वंशजों का सैन्य-दल रेफईम में डेरा डाले था।

१४ और दाऊद तब एक दुर्ग में था, और उन पलिश्तिम-वंशजों की चौकी तब बेतलेहम में थी।

१५ और दाऊद ने लालसाहित होकर कहा, काश कि कोई मुझे दरवाज़े के साथ वाले बेतलेहम के उस कूएँ का पानी पीने के लिए दे दे!

१६ और वो तीन शूरवीर पुरुष उन पलिश्तिम-वंशजों की सेना को तोड़-फाड़ कर भेदते हुए दरवाज़े के साथ वाले उस बेतलेहम के कूएँ का पानी बाहर खींचकर उसे लेकर उसे दाऊद के पास ले आए: तथापि उसने उस में से नहीं पिया, बल्कि उसे प्रभु के प्रति बाहर उँडेल दिया।

१७ और उसने कहा, इसे तो मुझ से दूर ही रहने दें, हे प्रभु, कि मैं यह कर दूँ: क्या ये इन पुरुषों का रक्त नहीं है क्या जो अपने जीवनों को संकट में डाल कर गए थे? इसलिए उसने उसे नहीं पिया। यह कार्य इन तीन शूरवीर पुरुषों ने किए थे।

१८ और ज़रुआया का बेटा, अबिशय, योआब का भाई, उन तीनों के बीच प्रमुख था। और उसने अपना भाला उन तीन सौ के विरुद्ध उठा कर, उन्हें मार डाला, और उन तीनों के बीच वो नामी था।

१९ क्या वो उन तीनों में से अति सम्मानित नहीं था क्या? इसलिए वो उनका कप्तान था: तथापि वो उन प्रथम तीनों तक नहीं पहुँच सका।

२० और येहोयदा का बेटा बेनाया, कब्ज़ील के एक पराक्रमी पुरुष का बेटा, जिसने कई कार्य किए थे, उसने मोआब के दो शेर जैसे आदमियों को मार डाला था: उसने नीचे जाकर एक शेर को भी हिम के समय में एक गड्ढे के बीच में मार डाला था:

२१ और उसने एक रूपवान मिस्र-वासी को भी मार डाला था: और उस मिस्र-वासी के पास एक भाला था उसके हाथ में; परन्तु वो उसके पास नीचे एक लट्ठ के साथ गया, और उस मिस्र-वासी के हाथ में से वो भाला छीन लिया, और उसे उसी के अपने ही भाले से मार डाला।

२२ यह कार्य येहोयदा के बेटे बेनाया ने किए, और उन तीन पराक्रमी पुरुषों के बीच उसका नाम था।

२३ वो उन तीस से अधिक आदरणीय था, परन्तु वो उन प्रथम तीनों तक नहीं पहुँच सका। और दाऊद ने उसे उसके रक्षकों पर नियुक्त कर दिया।

२४ योआब का भाई असहेल उन तीस में से एक था; बेतलेहम के दोदो का बेटा एलहनन,

२५ शम्मा वो हरोदी, एलिका वो हरोदी,

२६ हलज़ वो पल्ती, इक्केष उस तेकोई का बेटा आयरा,

२७ अबिएज़र वो अनथोथ-वाला, मबुनाय वो हूशय-वंशज,

२८ ज़ल्मोन वो अहोही, मराय वो नतोफथी,

२९ बअना एक नतोफथी का बेटा हेलब, बिन्यामिन की सन्तानों के गिब्या में से रिबय का बेटा इतई,

३० बनाया वो पिराथुनि, गाश की नदियों का हिदय,

३१ अबियलबन वो अर्बाथी, अज़्मवथ वो बरूमी,

३२ एलिबा वो शलबोनी, येशन के बेटों में से, योनातन,

३३ शम्मा वो हरारी, शरर उस हरारी का बेटा अहियम,

३४ उस मअकथी के बेटे अहसबी का बेटा एलिफलत, गिलो-वाले अहितोफल का बेटा एलीअम,

३५ हज़रय वो करमल-वाला, पअरे वो एअर्बी,

३६ ज़ोबा वाले नेथन का बेटा इगल, बनी वो गाद-वंशज,

३७ ज़लक वो अम्मोन-वंशज, नहरी वो बीरोथ-वाला, ज़रुआया के बेटे योआब का युद्ध-सामग्री ढोने वाला,

३८ आयरा एक इथ्री, गरब एक इथ्री,

३९ ऊरिया वो हित्ती-वंशज: सैंतीस, कुल मिलाकर।



चौबीसवाँ अध्याय।


और पुनः प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध सुलग उठा था, और उन्होंने दाऊद को उनके विरुद्ध यह कह देने के लिए प्रवृत्त किया, जाओ भई, इस्राएल और यहूदा की गिनती कर लो।

क्योंकि राजा ने सेना के कप्तान योआब से कहा, जो उसके साथ था, अभी ही इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से होते हुए, दान से लेकर बेएरशबा तक भी लोगों की गिनती कर लो, ताकि मैं लोगों की संख्या जान लूँ।

और योआब ने राजा से कहा, जी अभी ही प्रभु आपके ईश्वर आपके लोगों को साथ जितने भी सकें जी, सौ गुणा ही, जोड़ दें जी, और कि मेरे प्रभु राजा की आँखें वो देख लें: लेकिन मेरे प्रभु राजा इस बात में आनन्द क्यों लेते हैं जी?

तथापि राजा का शब्द योआब के विरुद्ध, और सेना के कप्तानों के विरुद्ध अभिभावी ठहरा। और योआब और वह सेना के कप्तान राजा की उपस्थिति से इस्राएल के लोगों की गिनती करने हेतु बाहर निकल पड़े।

और वह यर्दन पार चले गए, और अरोर में पड़ाव डाला लिया, उस नगर के दाहिने ओर जो गाद नदी के मध्य में है, और यज़र की ओर।

तब वो गिलद पहुँचे, और तहतिमहोदशी की भूमी तक; और वो दानयान आए, और सिदोन के आस-पास तक,

और वो टाय्र के गढ़, और हिव्वियों और कनानवासियों के समस्त नगरों में पहुँचे: और वो यहूदा के दक्षिण की ओर आगे निकल चले, बेएरशबा तक भी।

तो जब वो समस्त भूमी में से होते हुए चले जा चुके थे, वो यरूशलेम पहुँचे नौ महीनों और बीस दिनो की समाप्ति पर।

और योआब ने राजा को लोगों की संख्या की जनगणना दे दी: और इस्राएल में आठ सौ हज़ार शूरवीर पुरुष थे तलवार खींचने वाले; और यहूदा के पुरुष पाँच सौ हज़ार थे।

१० और दाऊद के मन ने उसके लोगों की गिनती कर लेने के पश्चात उसे विचलित कर दिया। और दाऊद ने प्रभु से कहा, जी मैंने तो घोर पाप कर डाला है उस में जो मैंने कर डाला है! और अब मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ हे प्रभु, अपने सेवक की अधर्मता परे हटा दें जी; क्योंकि मैंने तो बड़ी ही मूर्खता कर डाली है।

११ क्योंकि जब दाऊद प्रातः में उठ गया था, तो प्रभु के शब्द दाऊद के भविष्य-दर्शक, पैगमबर गाद को पहुँचे, कहते हुए, 

१२ जाओ और दाऊद को बता दो, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, मैं तुम्हें तीन प्रस्ताव देता हूँ; इन में से तुम एक को चुन लो भई। ताकि मैं उसे तुम्हारे प्रति कर डालूँ।

१३ तो गाद दाऊद के पास पहुँचा, और उसे बता कर, उस से कहा, क्या सात वर्ष अकाल भूमी में तुम्हारे प्रति आएँ? या फिर तुम अपने शत्रुओं के सामने, जैसे वो तुम्हारा पीछा करते हैं, तीन महीनों तक भागते रहो? या फिर तुम्हारी भूमी में तीन दिनो तक महामारी पड़े? परामर्श दे दें जी और देख लें कि मैं उन्हें क्या उत्तर वापस ले जाऊँ जिन्होंने मुझे भेजा है।

१४ और दाऊद ने गाद से कहा, मैं तो एक बहुत ही बड़े संकट में पड़ गया हूँ: हम अभी ही प्रभु के हाथ में ही गिर पड़ते हैं; क्योंकि उनकी करुणाएँ विशाल हैं: और मुझे आदमी के हाथ में गिर पड़ने दें जी।

१५ तो प्रभु ने इस्राएल पर एक महामारी भेज दी सुबह से लेकर नियुक्त समय तक भी: और दान से लेकर बेएरशबा तक भी सत्तर हज़ार आदमी मर गए।

१६ और जब दूत ने यरूशलेम पर उसे नष्ट कर डालने के लिए अपना हाथ फैलाया, तो प्रभु को उस बुराई के प्रति खेद हुआ, और उन लोगों को नष्ट करने वाले उस दूत से कहा, बस बहुत हो गया: थाम दो अब अपने हाथ को। और प्रभु का वो दूत उस यबूसी वंशज अरोना के खलिहान के साथ था।

१७ और दाऊद प्रभु से बोला जब उसने उस दूत को देखा जो लोगों पर वार कर रहा था, और उसने कहा, देखें, मैंने पाप कर दिया है जी, और मैंने दुष्टता कर डाली है: परन्तु यह भेड़ें, इन्होंने क्या किया है जी? मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, अपने हाथ को मेरे और मेरे पिता के घराने के विरुद्ध पड़ जाने दें। 

१८ और गाद दाऊद के पास उस दिन आया, और उस से कहा, उठ जाओ, उस यबूसी वंशज अरोना के खलिहान में प्रभु के प्रति एक बलिवेदी स्थापित कर दो। 

१९ और दाऊद, गाद के कहनेनुसार, ऊपर चला गया जैसा प्रभु ने आदेश दिया था।

२० और अरोना ने देखा, और राजा और उसके नौकरों को उसकी ओर आते हुए देखा: और अरोना बाहर निकल चला, और राजा के समक्ष स्वयं धरती की ओर अपने चहरे के बल झुक गया।

२१ और अरोना ने कहा, किस कारण वश मेरे प्रभु राजा अपने नौकर के पास पधारें हैं जी? और दाऊद ने कहा, तुम से वो खलिहान खरीदने, प्रभु के प्रति एक बलिवेदी का निर्माण करने हेतु, ताकि लोगों पर से वो विपत्ती थम जाए।

२२ और अरोना ने दाऊद से कहा, प्रभु राजा लेकर चढ़ा दें जो कुछ भी उन्हें भला प्रतीत हो: देखें जी, यह रहे साँड जले-चढ़ावे के लिए, और दाँवनेवाले उपकरण, और सांडों के अन्य उपकरण लकड़ी के लिए।

२३ यह सभी अरोना ने दे दिए, जैसे एक राजा देता है एक राजा को। और अरोना ने राजा से कहा, प्रभु आपके ईश्वर आपको स्वीकृति प्रदान करें।

२४ और राजा ने अरोना से कहा, नहीं; बल्कि मैं अवश्य ही उसे तुम से मोल देकर खरीदूँगा: ही मैं उस से प्रभु अपने ईश्वर को जले-चढ़ावे चढ़ाऊँगा जो मेरे लिए निशुल्क हो। तो दाऊद ने वो खलिहान और साँड चाँदी के पचास शेकलों के लिए खरीद लिए।

२५ और दाऊद ने वहाँ प्रभु के प्रति एक बलिवेदी का निर्माण कर दिया, और जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे चढ़ा दिए। तो इस प्रकार प्रभु ने भूमी के लिए विनय को स्वीकार कर लिया, और वो विपत्ती इस्राएल पर से थम गई।


०९/०३/२०२५: 
































Comments

Popular posts from this blog