भजनों की पुस्तक। भाग २। Book of Psalms. Part 2.


 ग्यारहवाँ भजन।



प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन।


प्रभु ही में मैं भरोसा रखता हूँ: फिर तुम मेरी आत्मा से कैसे कहते हो, एक पंछी के समान अपने पहाड़ पर भाग जा?

चूँकि लो भई, वो दुष्ट तो अपने धनुष पर चढ़ा रहे हैं, वो उस बाण को प्रत्यंचा पर तैयार कर रहे हैं, ताकि वो उस मन में सत्यनिष्ठा वाले पर छुप कर तीर दाग़ दें।

यदि नीवें ही नष्ट हो चुकी हों, तो भई वो नेक क्या कर पाएँगे?

प्रभु तो अपने पवित्र मंदिर में हैं, प्रभु का सिंहासन तो स्वर्ग में है: उनकी आँखें देखती रहती हैं, उनकी पलकें परखती रहती हैं, मनुष्यों की सन्तानों को।

प्रभु उन नेकों को परखते हैं: परन्तु उस दुष्ट को और उसे जो हिंसा से प्रेम करता है उनकी आत्मा घृणा करती है।

वो उस दुष्ट पर फंदों की, अग्नी और गन्धक की, और एक विकराल तूफ़ान की बौछार पड़वा डालेंगे: यही उनके प्याले का भाग होगा।

चूँकि वो सत्यनिष्ठा रखने वाले प्रभु नेकी से प्रेम करते हैं; उनका मुखमण्डल उस सत्यनिष्ठा वाले पर दृष्टि टिकाए रखता है।



बारहवाँ अध्याय।



प्रमुख संगीतकार को शेमिनिथ पर, दाऊद का एक भजन।


बचा लें प्रभु जी; चूँकि वो ईश्वर-भक्त थम रहा है; चूँकि वो विश्वासी मनुष्यों की सन्तानों के बीच विफल हो रहे हैं जी!

वो हर एक अपने साथी से व्यर्थता बोलते रहते हैं: चापलूसी के होटों के साथ और दो-चित्त मन लिए ही वो बोलते हैं।

प्रभु ही सभी चापलूसी वाले होटों को, और अहंकारी बातें बोलने वाली उस जीभ को काट ही डालेंगे:

जो कह चुके हैं, अपनी जीभ से ही हम प्रबल ठहरेंगे भई; हमारे होंट तो हमारे अपने ही हैं: हम पर कौन प्रभु है भई?

  उस दरिद्र पर अत्याचार के लिए, उस ग़रीब की आह के लिए ही, अब मैं उठूँगा, कह रहे हैं प्रभु; मैं उसे सुरक्षा में स्थापित कर दूँगा उस से जो उस पर फूंकें मार रहा है।

प्रभु के शब्द परिशुद्ध शब्द हैं: पृथ्वी की भट्टी में चाँदी के समान परिशोधित, सात बार परिशुद्ध कर दिए गए।

आप ही उन्हें सुरक्षित रखे रहेंगे, हे प्रभु आप ही उन्हें इस पीढ़ी से लेकर सदा के लिए परिरक्षित रखे रहेंगे।

वो दुष्ट चारों ओर चलते फिरते हैं, जब सबसे नीच लोग पदोन्नत किए जाते हैं।



तेरहवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन।


हे प्रभु और कितने समय तक आप मुझे भूले रहेंगे जी? सदा के लिए? और कितने समय तक आप अपने चहरे को मुझ से छुपा कर रखेंगे जी?

और कितने समय तक मैं अपनी ही आत्मा में परामर्श लेता रहूँगा जी, अपने मन में दिन-प्रति-दिन शोक लिया हुआ? और कितने समय तक मेरा शत्रु मुझ पर पदोन्नत रहेगा?

जी विचार करें और सुने मुझे, हे प्रभु मेरे ईश्वर: प्रज्ज्वलित कर दें मेरी आँखें, कहिं मैं मृत्यु की निद्रा ले लूँ;

कहिं मेरा शत्रु कहे, मैं तो उस पर प्रबल ठहर चुका हूँ भई! और मुझे सताने वाले हर्ष मनाएँ जब मैं फिसलने लगूँ!

परन्तु मैंने आपकी करुणा में विश्वास किया है; मेरा हृदय आपके बचाव में हर्ष मनाएगा।

मैं तो प्रभु के प्रति गाऊँगा, चूँकि उन्होंने मेरे साथ आधिकता प्रदान कर दी है।



चौदहवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन।


उस मूर्ख ने अपने मन में कह दिया है, कोई भी ईश्वर नहीं है। ये तो भ्रष्ट हैं, इन्होंने अति-घृणात्मक कार्य कर डाले हैं, कोई भी नहीं है जो भलाई करता हो।

प्रभु ने मनुष्यों की सन्तानों को स्वर्ग में से नीचे देखा, ये देखने के लिए कि यदि कोई भी ऐसा था जिसने सूझ ली, और ईश्वर से पूछ-ताछ की।

वो तो सब के सब परे हट चले हैं, वो तो सब के सब एक साथ ही गंदे-मलिन बन चुके हैं: कोई भी नहीं है जो भलाई करता हो, जी , एक भी नहीं।

क्या अधर्मता के कार्यकर्ताओं के पास कोई भी ज्ञान नहीं है क्या? जो मेरे लोगों को खा जाते हैं मानो कि वो रोटी खा रहे हों, और प्रभु को नहीं पुकारते।

वहीं वो अत्यंत भय में थे: चूँकि ईश्वर उन नेकों की पीढ़ी में हैं।

तुमने तो उस दरिद्र के परामर्श को लज्जित कर दिया है, चूँकि प्रभु ही उसकी शरण हैं।

कि इस्राएल का बचाव सियोन में से उभर आया होता! जब प्रभु अपने गण के बाँधत्व को वापस लौटा लाएँगे, याकूब हर्ष मनाएगा, और इस्राएल आनंदित हो जाएगा।



पन्द्रहवाँ भजन।


दाऊद का एक भजन।


प्रभु जी, कौन आपके शिविर में ठहरा रहेगा? कौन आपके पवित्र पहाड़ पर बसता रहेगा?

वही जो निष्कलंकता से चलता हो, और नेकी क्रियान्वित करता हो, और अपने हृदय में सत्य बोलता हो।

वो जो पीठ-पीछे छुरा भोंकता हो, ही अपने पड़ौसी के साथ बुराई करता हो, ही अपने साथी के विरुद्ध निंदा ढाता हो।

जिसकी आँखों में वो नीच व्यक्ति घिन्नता हो; परन्तु वो प्रभु से डरने वालों को सम्मानित करता हो। वो जो अपनी ही चोट के प्रति शपथ देता हो, और बदलता हो।

वो जो अपना पैसा ब्याज़ पर देता हो, ही उस निर्दोष के विरुद्ध कोई घूस लेता हो। वही जो ये कार्य करता हो कभी भी नहीं फिसलेगा।



सोलहवाँ अध्याय।


दाऊद का मिखतम।


हे ईश्वर, मुझे परिरक्षित रखें: चूँकि आप ही में मैं अपना भरोसा रखता हूँ।

हे मेरी आत्मा, तुम्हीं ने प्रभु से कह दिया है, आप ही मेरे प्रभु हो जी: मेरी अच्छाई आप तक नहीं विस्तृत होती है;

बल्कि उन सन्तों तक जो धरती पर हैं, और सर्वश्रेष्ठ तक, जिन में मेरी समस्त प्रसन्नता है।

उनके दुख तो, जो किसी अन्य ईश्वर के पीछे-पीछे भागते हैं, बहुगुणित हो जाएँगे: उनके लहु के पेय-चढ़ाए मैं नहीं चढ़ाऊँगा, ही अपने होटों में उनके नामों को उठाऊँगा।

प्रभु ही मेरी विरासत और मेरे प्याले का भाग हैं: आप ही मेरी पर्ची को जो डलती है, बनाए रखते हैं।

वो नापने वाली डोरीयाँ मेरे पास ही आनंद वाले स्थानों में गिरीं; हाँ जी, मेरे पास तो एक अच्छी विरासत है।

मैं तो प्रभु को आशीष दूँगा, जिन्होंने मुझे सलाह दी है: मेरा जिगर भी मुझे रात की ऋतुओं में निर्देशित करता है।

मैंने तो प्रभु को सदैव अपने सामने ही रखा है: चूँकि वही मेरे दाएँ हाथ पर हैं, मैं हिलाया नहीं जा पाऊंगा।

इसलिए ही मेरा हृदय प्रसन्न है, और मेरा गौरव हर्ष मना रहा है: मेरा माँस भी आशा में विश्राम करेगा।

१० चूँकि आप मेरे आत्मा को नरक में नहीं छोड़ेंगे, ही आप अपने पवित्र-एक को भ्रष्टता देखने की अनुमती देंगे।

११ आप ही मुझे जीवन के पथ का ज्ञान दिलवाएँगे: आप ही की उपस्थिति में हर्ष की भरपूरता है; आप ही के दाहिने हाथ पर सदा-सदा के लिए आनन्द हैं।



सत्रहवाँ भजन।


दाऊद की एक प्रार्थना।


उस नेक को सुने हे प्रभु, मेरी चीख-पुकार पर ध्यान दें, मेरी प्रार्थना को कर्ण प्रदान कर दें जी, जो कपटी होटों से प्रवृत नहीं हो रही है!

मेरे न्याय-निर्धारण को आपकी ही प्रस्तुति से प्रवृत होने दें जी; अपनी आँखों को आप एक-तुल्य बातों को देखने दें। 

आपने मेरे हृदय को परख लिया है; आपने रात्रि में मेरा निरीक्षण किया है; आपने मेरी परीक्षा ले ली है जी, और कुछ भी नहीं मिलेगा; मैंने ठान लिया है कि मेरा मूँह अतिचार नहीं करेगा।

मनुष्यों के कर्मों के समबन्ध में, आपके होटों के शब्दों द्वारा ही मैंने स्वयं को उस विनाशक के पथों से रखे-रखा है।

मेरे आने-जाने को अपने ही पथों पर उठाए रखें, ताकि मेरे पद-चाप फिसलें न।

मैंने आप पर पुकार मचा दी है, चूँकि आप ही मुझे सुनेंगे हे ईश्वर: अपने कान को मेरी ओर लगा दें, और मेरी वक्तृताओं को सुन लें।

जी दिखला दें अपनी आश्चर्यजनक प्यारी-करुणा को, आप ही जो उन्हें अपने दाहिने हाथ से बचा लेते हैं जो आप में अपना भरोसा रखते हैं, उनसे जो उनके विरुद्ध उठ खड़े हो जाते हैं।

मुझे आँख की पुतली समान सम्भाल कर रखें, मुझे अपने पंखों की छाया तले छुपा लें,

उन दुष्टों से जो मेरा अत्याचार कर रहे हैं, मेरे घातक शत्रुओं से, जो मुझे चारों ओर घेरे हुए हैं।

१० वो तो अपने ही मोटापे में घिरे हुए बँद हैं: अपने मूँह से वो घमण्ड संग बोलते हैं।

११ उन्होंने अब हमें हमारे ही कदमों में घेर लिया है: उन्होंने अपनी आँखें टिका ली हैं धरती तक नीचे झुकते हुए;

१२ एक शेर के समान जो अपने शिकार ले लिए ललचा रहा है, और किसी युवा शेर के समान छुपे हुए स्थानों में लुका-छिपी करता हुआ।

१३ हे प्रभु उठ जाएँ जी, निराश कर दें उसे, नीचे पटक दें उसे: उद्धार कर दें उस दुष्ट से मेरी आत्मा का, जो कि आपकी तलवार है:

१४ उन आदमियों से जो आपका हाथ हैं, हे प्रभु, इस संसार के ही आदमियों से, जिनका भाग इसी जीवन में हैं, और जिनके पेट को आप ही अपने छुपे धन-भण्डार से भरते हैं: वो तो सन्तानों से भरपूर हैं, और अपनी सम्पत्ती के बचे हुए शेष को अपने छोटे-नन्हों के लिए छोड़ जाते हैं।

१५ जहाँ तक मेरी बात आती है, मैं आपके चेहरे को नेकी में देखूँगा जी: मैं संतुष्ट हो जाऊँगा, जब मैं आप ही की समानता में जागूँगा।




अट्ठारहवाँ अध्याय।


प्रमुख संगीतकार को, प्रभु के सेवक दाऊद का एक भजन, जिसने प्रभु से इस गीत के शब्द उस दिन बोले जब प्रभु उसका उसके समस्त शत्रुओं के हाथ में से, और शाऊल के हाथ में से बचाव कर चुके थे: और उसने कहा, 




जी मैं आपसे प्रेम करूँगा हे प्रभु मेरी शक्ती।

मेरी चट्टान हैं प्रभु, और मेरे गढ़, और मेरा उद्धार करने वाले; मेरे ईश्वर, मेरा बल, जिन में ही मैं भरोसा करूँगा: मेरी ढाल हैं, और मेरे बचाव का सींघ, और मेरी ऊँची मीनार। 

मैं प्रभु का आह्वान करूँगा, जो प्रशन्सा के सुयोग्य हैं: इस प्रकार मेरा मेरे शत्रुओं से बचाव हो जाएगा।

मृत्यु के दुखों ने मुझे घेरा हुआ था, और ईश्वरभक्तिहीनो के प्रलयों ने मुझे भयभीत किया हुआ था;

नरक की शोचनीयताओं ने मुझे घेरा हुआ था; मृत्यु के फन्दे मेरे आगे-आगे थे;

अपने कष्ट में मैंने प्रभु को पुकारा, और अपने ईश्वर को रोया: उन्होंने अपने मन्दिर में से मेरी वाणी सुनी, और मेरी चीख-पुकार उनके समक्ष पहुँची, उन्हीं के कानों में ही।

तब पृथ्वी हिल उठी और काँप उठी; उन पहाड़ों की भी नीवें हिल उठीं और झकझोर दी गई थीं, चूँकि वो आक्रोशित थे।

उनके नथुनों में से बाहर एक धुआँ उठा, और उनके मूँह में से बाहर अग्नी ने भक्षण कर डाला: कोएले उस से सुलग उठे थे।

उन्होंने स्वर्गों को भी झुका डाला, और नीचे गए; और अन्धकार उनके चरणों तले था।

१० और वह एक केरब पर सवारी कर रहे थे, और उड़ रहे थे: हाँ भई, उन्होंने तो वायु की पंखुड़ियों पर ही उड़ान भरी।।

११ उन्होंने अन्धकार को अपना गुप्त स्थान बना लिया; उनके चारों ओर अन्धकारमय जल, और गगनों के मोटे-मोटे मेघ उनका मण्डप थे।

१२ उनके समक्ष उस उजाले पर वो उनके घने मेघ चलते जा रहे थे, ओले और अग्नी के कोएले।

१३ प्रभु उन स्वर्गों में भी गर्जन मचा रहे थे, और उन अति उच्चतम ने अपनी वाणी प्रदान की; ओले और अग्नी के कोएले।

१४ हाँ भई, वो अपने बाण छोड़ रहे थे, और उन्हें तितर-बितर कर डाला; उन्होंने बिजलियाँ भी दागीं, और उन्हें अस्त-व्यस्त कर डाला।

१५ तब जलों के प्रवाह प्रकट हुए, और संसार की नीवें प्रत्यक्ष हो उठीं, आप ही की डाँट-फटकार पर, हे प्रभु, आप ही के नथुनों के श्वास की फूँक पर ही।

१६ उन्होंने ऊपर ने भिजवा दिया, उन्होंने मुझे पकड़ लिया; उन्होंने मुझे कई पानियों में से बाहर खींच लिया;

१७ उन्होंने मुझे मेरे शक्तिशाली शत्रु से और उनसे जो मुझ से घृणा करते थे, बचा लिया: चूँकि वो मेरे लिए बहुत ही शक्तिशाली थे।

१८ वो तो मेरे आगे-आगे ही थे मेरी आपदा के दिन में: परन्तु प्रभु मेरा समर्थन थे।

१९ वो तो मुझे एक विस्तृत स्थान में भी आगे ले आए: उन्होंने मेरा उद्धार कर दिया, चूँकि वो मुझ में प्रसन्न-चित्त थे।

२० प्रभु ने मेरी नेकीनुसार मेरे प्रति भुक्तान कर दिया: मेरे हाथों की स्वच्छतानुसार ही उन्होंने मुझे भुक्तान कर दिया।

२१ चूँकि मैंने प्रभु के पथों को रखे-रखा है, और अपने ईश्वर से दुष्टता से प्रस्थान नहीं किया है।

२२ चूँकि उनके समस्त न्याय-निर्धारण मेरे सामने थे: और मैंने उनके अध्यादेशों को अपने से परे नहीं हटाया। 

२३ मैं उनके समक्ष निष्कलंक भी था, और मैंने अपनी अधर्मता से अपने आप को बचा कर रखा।

२४ इसलिए प्रभु ने मेरी नेकीनुसार मुझे भुक्तान कर दिया है: मेरे हाथों की स्वच्छतानुसार ही उनकी दृष्टि में।

२५ दयालु के साथ आप स्वयं को दयाशील प्रदर्शित करेंगे, एक निष्कलंक बन्दे के साथ आप निष्कलंक।

२६ उस शुद्ध के साथ आप स्वयं को शुद्ध प्रदर्शित करेंगे; और उस विकृत के साथ आप विकृत।

२७ चूँकि आप ही उन उत्पीड़ित लोगों को बचा लेंगे: परन्तु आप ऊँची-ऊँची आँखों को नीचे ले आएँगे।

२८ क्योंकि आप ही मेरा दीपक को प्रज्ज्वलित कर देंगे जी: प्रभु मेरे ईश्वर मेरे अन्धकार को उज्ज्वल बना देंगे।

२९ क्योंकि आप ही से मैं एक सैन्य-दल में से आर-पार दौड़ा हूँ: और मेरे ईश्वर द्वारा ही मैंने एक दीवार पर से छलाँग लगा ली है।

३० जहाँ तक ईश्वर की बात आती है, उनका पथ परिपूर्ण है; प्रभु का शब्द प्रमाणित है: वह उन सभी के प्रति एक ढाल हैं जो उन पर भरोसा करते हैं।

३१ चूँकि कौन है ईश्वर, सिवाय प्रभु के? या फिर कौन है वो चट्टान, सिवाय हमारे ईश्वर के?

३२ वो ईश्वर ही हैं जो मेरी कमर शक्ती से कसते हैं: और मेरे पथ को परिपूर्ण बनाते हैं।

३३ वो मेरे पैरों को हिरणी के पैरों जैसा बनाते हैं: और मुझे मेरे ऊँचे स्थानों में स्थित करते हैं।

३४ वो मेरे हाथों को युद्ध करने का प्रशिक्षण देते हैं; ताकि इस्पात का एक धनुष मेरी बाहों से तोड़ दिया जाता हैं।

३५ आप ही ने मुझे अपने बचाव की ढाल भी प्रदान कर दी है: और आपके दाएँ हाथ ने मुझे ऊपर खड़ा रखा है, और आपकी कोमलता में मुझे महान बना दिया है।

३६ आपने मेरे तले मेरे पद-चापों को विस्तृत कर दिया है; ताकि मेरे पैर फिसले नहीं।

३७ मैंने अपने शत्रुओं का पीछा किया है, और उन्हें पार कर दिया है; और ही उनका विध्वंस कर देने तक मैं पुनः वापस मुड़ा। 

३८ मैंने उन्हें घायल कर डाला है ताकि वो उठ ही नहीं पाए: वो तो मेरे पैरों तले गिरे हुए हैं। 

३९ चूँकि आप ही ने युद्ध के लिए शक्ती सहित मेरी कमर कसी हुई है: उन्हें जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए आपने मेरे तले स्ववश में कर डाला है।

४० आपने ही मुझे मेरे शत्रुओं की गर्दनें भी प्रदान कर दी हैं जी, ताकि मैं उन्हें नष्ट कर डालूँ जो मुझ से घृणा करते हैं।

४१ वो तो चीख पड़े, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई भी था; प्रभु की ओर तक ही, परन्तु उन्होंने उन्हें उत्तर नहीं दिया।

४२ तब मैंने उन्हें हवा के सामने धूल के समान ही छोटा-छोटा कूट डाला, गली के कीचड़ के समान ही मैंने उन्हें बाहर पटक दिया।

४३ आपने मेरा मेरे लोगों के लड़ाई-झगड़ों से उद्धार कर दिया है, और आपने मुझे काफिरों का शीर्ष बना दिया है: एक गण जिन से मैं परिचित नहीं हूँ मेरी सेवा करेंगे।

४४ मेरे विषय में सुनते ही, वह मेरे आज्ञाकारी बन जाएँगे: परदेशी मेरे प्रति स्वयं को आधीन कर डालेंगे।

४५ वो परदेशी मुरझाते चले जाएँगे, और अपने परिवृत्त स्थानों में भयभीत हो जाएँगे।

४६ प्रभु सजीवित हैं; और धन्य हों मेरी चट्टान; और मेरे बचाव के पत्थर के ईश्वर पदोन्नत हों।

४७ वो ईश्वर ही हैं जो मेर प्रतिषोध लेते हैं, और जो मेरे तले लोगों को आधीन कर डालते हैं।

४८ वो मेरा मेरे शत्रुओं से उद्धार कर देते हैं: जी हाँ, आप मुझे उन पर उठाते हैं जो मेरे विरुद्ध उठते हैं: आपने मेरा उस हिंसक पुरुष से बचाव कर दिया है।

४९ इसलिए मैं आपको धन्यवाद प्रदान करूँगा जी, हे प्रभु, अन्यप्रजातियों के बीच ही, और मैं आपके नाम के प्रति प्रशन्साएँ गाऊँगा।

५० महान बचाव प्रदान करते हैं वो अपने राजा को: और अपने अभिषिक्त के प्रति, दाऊद के प्रति, और उसके बीज के प्रति, दयालुता प्रदर्शित करते हैं, सदा-सदा के लिए ही।



उन्नीसवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन।


वो स्वर्ग घोषणा करते हैं ईश्वर के गौरव की; और वो विस्तार वर्णन करता है उनकी हस्तक्रिया का।

दिन से दिन तक वक्तृता अर्णित करता है, और रात से रात तक ज्ञान बतलाती है।

ऐसी कोई भी वक्तृता भाषा है, जहाँ इनकी वाणी नहीं सुनी जाती है।

इनका माप-दण्ड बाहर निकल चला है समस्त पृथ्वी के आर-पार, और इनके शब्द संसार के अन्तिम छोर तक। इन्हीं में ही उन्होंने सूर्य के लिए एक शिविर स्थित कर दिया है,

जो कि एक दूल्हे के समान है जो अपने कक्ष में से बाहर निकल रहा हो, और एक दौड़ में भागने वाले उस बलशाली पुरुष के समान हर्ष मनाता है।

उसका उदयाचल स्वर्ग के अन्तिम छोर से लेकर है, और परिभ्रमण उसका उसके सीमान्तों तक है: और कुछ भी उसके ताप से नहीं छुपा हुआ है।

प्रभु का नियम परिशुद्धतापूर्ण है, आत्मा का परिवर्तन करता हुआ: प्रभु का साक्ष्य अमोघ है, उस निर्बुद्ध को बुद्धिमान बनाता हुआ। 

प्रभु के अध्यादेश सही हैं, हृदय को हर्षित करते हुए: प्रभु का आदेश शुद्ध है, नेत्रों को उज्ज्वलित करता हुआ।

प्रभु का भय स्वच्छ है, सदा के लिए स्थिर रहता हुआ: प्रभु के वो न्याय-निर्धारण सभी एक साथ ही सच्चे और नेक हैं।

१० यह तो सोने की तुलना से भी और अधिक वांछित हैं, हाँ भई, बहुत ही महीन सोने की तुलना से भी: शहद और शहद के छत्ते से अधिक मीठे भी। 

११ इसके अतिरिक्त इन्हीं के द्वारा ही आपका सेवक चेतावनित होता है: और इनका पालन करने में है विशाल पुरस्कार।

१२ कौन अपनी त्रुटियों को समझ सकता है? जी आप मुझे छुपे हुए दोषों से स्वच्छ कर दें।

१३ जी अपने सेवक को उन उपधारणा वाले परिकल्पित पापों से भी रोक कर रखें; उन्हें मुझ पर अधिराज्य जमाने दें: तब मैं निष्कलंक हूँगा, और मैं उस विशाल अतिक्रम से निर्दोष हो जाऊँगा।

१४ जी मेरे मूँह के शब्दों को, और मेरे हृदय के मनन-चिन्तन को आपकी दृष्टि में स्वीकृत हो जाने दें, हे प्रभु, मेरे बल और मेरे मुक्ति-भुक्तान दाता।



बीसवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन



संकट के दिवस में प्रभु तुम्हें सुनें; याकूब के ईश्वर का नाम तुम्हारी सुरक्षा करें;

पुण्य-स्थान से तुम्हें सहायता भेज दें, और तुम्हें सियोन में से ही सशक्त कर दें;

तुम्हारी समस्त आहुतियों को स्मरण में रखें, और तुम्हारे जले चढ़ावे को स्वीकार कराएँ; सेला।

तुम्हारे अपने ही मनानुसार तुम्हें प्रदान कर दें, और तुम्हारे ही समस्त परामर्श को पूर्ण कर दें।

हम तो आपके बचाव में हर्ष मनाएँगे जी, और अपने ईश्वर के नाम में हम अपनी ध्वजाओं को फहराएँगे: प्रभु तुम्हारी समस्त याचनाओं को पूर्ण कर दें।

अब मैं जान चुका हूँ कि प्रभु ही अपने अभिषिक्त का बचाव करते हैं; वो तो उसे अपने पवित्र स्वर्ग में से सुन लेंगे उनके दाएँ हाथ की बचाने वाली उस शक्ती संग।

कुछ तो रथों पर विश्वास रखते हैं, और कुछ घोड़ों पर: लेकिन हम तो प्रभु अपने ईश्वर के नाम को स्मरण में रखेंगे।

वो तो नीचे ले आए गए हैं और गिर चुके हैं: लेकिन हम उठ चुके हैं, और निष्कलंक खड़े हैं।

बचा लें जी, प्रभु जी: राजा को हमारा श्रवण कर लेने दें जब हम पुकार मचाएँगे।





इक्कीसवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को, दाऊद का एक भजन।



राजा तो आपकी शक्ती में हर्ष मनाएगा जी, हे प्रभु; और आप ही के बचाव में कितनी ही आधिक्यता से वो हर्ष मनाएगा!

आप ने उसे उसके हृदय की वाँछा प्रदान कर दी है, और उसके होटों की विनती नहीं रोकी। सेला।

चूँकि आप तो पहले से ही अच्छाई के आशीर्वाद उसके आगे ले आते हैं: आप उसके शीर्ष पर कुन्दन के एक मुकुट को स्थित करते हैं।

उसने तो आपसे जीवन माँगा, और अपने उसे वो दे दिया, यहाँ तक कि दीर्घ काल वाले दिन ही सदा सदा के लिए।

उसका गौरव आपके बचाव में विशाल है: सम्मान और राज-प्रताप अपने उस पर रख दिया है।

चूँकि आपने ही उसे सदा के लिए अति-धन्य बना दिया है: आपने तो उसे अपने मुखमण्डल से अत्याधिक प्रसन्न कर दिया है जी।

चूँकि राजा प्रभु में भरोसा रखते हैं, और उन अति-उच्चतम की दया के माध्यम से वो हिलाए नहीं जाएँगे।

आपका हाथ आपके समस्त शत्रुओं का पता लगा लेगा: आपका दायाँ हाथ उनका पता चला लेगा जो आपसे घृणा करते हैं।

आप उन्हें अपने क्रोध के समय में एक भभकती हुई भट्टी के समान बना डालेंगे: प्रभु उन्हें अपने आक्रोश में निगल डालेंगे, और वो आग उनका भक्षण कर डालेगी।

१० उनके फल को आप पृथ्वी पर से, और उनके बीज को मनुष्यों की सन्तानों के बीच में से नष्ट कर डालेंगे।

११ चूँकि उन्होंने आपके विरुद्ध बुराई का आशय रखा: उन्होंने एक बुरी योजना की कल्पना की, जो वो क्रियान्वित ही कर पाए।

१२ इसलिए ही आप उनसे उनकी पीठ मुड़वा देंगे, जब आप अपने डोरों पर अपने बाणों को उनके चेहरों के विरुद्ध तैयार कर डालेंगे।

१३ प्रभु जी आप ही अपनी ही शक्ति में पदोन्नत होएँ: सो हम आपके बल का गुणगान और प्रशन्सा करेंगे।



बाईसवाँ भजन।


प्रमुख संगीतकार को ayleth शहर पर, दाऊद का एक भजन।


मेरे ईश्वर, मेरे ईश्वर, आपने मुझे क्यों त्याग दिया है? आप मेरी सहायता करने से, और मेरी दहाड़ के शब्दों से इतने दूर क्यों हैं जी?

हे मेरे ईश्वर, मैं दिन के समय चीखता-पुकारता हूँ, परन्तु आप सुनते नहीं हैं; और रात के समय में, और मैं चुप नहीं रहता।

परन्तु आप पवित्र हैं जी, आप ही जो इस्राएल की प्रशन्साओं में निवास करते हैं।

हमारे पित्रों ने आप पर भरोसा किया, और आप ने उनका उद्धार कर ही दिया।

उन्होंने आपकी ओर चीख-पुकार मचाई, और वो बच निकले: उन्होंने आप में विश्वास किया, और लज्जित नहीं हुए।

लेकिन मैं तो एक कीड़ा ही हूँ, कोई मनुष्य नहीं; आदमियों का एक धिक्कार, और लोगों द्वारा घृणित।

वो सभी जो मुझे देखते हैं मुझ पर व्यंग की हँसी उड़ाते हैं: वो तो होंट के बाण छोड़ते हैं, वो तो सर हिलाते हैं, कहते हुए,

इसने तो प्रभु पर भरोसा रखा है कि वो इसका उद्धार कर देंगे: तो उन्हें इसे बचा लेने दो भई, देखते हुए कि उन्होंने इस में आनन्द मनाया।

परन्तु आप ही वो हैं जिन्होंने मुझे गर्भ में से बाहर निकाला: जब मैं अपनी माता के स्तनों पर था तो आप ही ने मुझे आशा दिलवाई।

१० मैं तो गर्भ से ही आप पर पटक दिया गया हूँ: मेरे माँ के पेट से लेकर ही आप मेरे ईश्वर हैं।

११ मुझ से दूर रहें जी; चूँकि कष्ट निकट ही है; चूँकि कोई भी सहायता करने वाला नहीं है।

१२ कई साँडों ने मुझे घेर लिया है जी: बशन के तगड़े साँड मेरे चारों ओर घेरा डाले हैं।

१३ उन्होंने अपने मुँहों के साथ मुझे ताड़ा, एक फाड़-खाऊ और एक दहाड़ते हुए शेर के समान ही।

१४ मैं तो पानी के जैसा ही बाहर उँडेल दिया गया हूँ, और मेरी समस्त हड्डियाँ जोड़ों से बाहर निकल आईं हैं: मेरा हृदय तो मोम के समान है; वो तो मेरी आँतों के बीच में ही पिघल चुका है जी।

१५ एक ठीकरे के समान ही मेरा बल सूख चुका है; और मेरी जीभ मेरे जबड़ों से चिपकी हुई है; और आप मुझे मृत्यु की धूल में ही ले आए हैं।

१६ चूँकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है: उन दुष्टों की सभा ने मेरी घेरा-बन्दी कर डाली है: उन्होंने मेरे हाथों को और मेरे पैरों को भेड़ डाला।

१७ मैं तो अपनी सभी अस्थियों को गिन सकता हूँ: वो मुझे देख और घूर रहे हैं।

१८ वो तो मेरे वस्त्रों को अपने ही बीच विभाजित कर रहे हैं, और मेरे कपड़ों पर पर्चियाँ डाल रहे हैं!

१९ लेकिन हे प्रभु मुझ से दूर जाएँ जी: हे मेरी शक्ती, मेरी सहायता करने हेतु आप वेगशील होएँ।

२० मेरी आत्मा को तलवार से बचा लें जी; कुत्ते की शक्ती से ही मेरे एकल।

२१ मुझे सिंह के मूँह से बचा लें: चूँकि आपने मुझे उन इक-सींघों के सींघों से ही सुन लिया है।

२२ मैं तो आपके नाम की घोषणा अपने भाई-जनो से करूँगा: सभा के बीच में ही मैं आपकी प्रशन्सा करूँगा।

२३ तुम जो प्रभु का भय मानते हो, उनकी प्रशन्सा करो; गौरवान्वित कर दो उन्हें, तुम सभी याकूब के बीज; और डरो उनसे, तुम सभी इस्राएल के बीज।

२४ चूँकि उन्होंने उस उत्पीड़ित की उत्पीड़ना से ने ही घृणा की है ही तिरस्कार; ही उन्होंने उस से अपना चेहरा छुपाया; बल्कि जब वो उनकी ओर चीखा, तो उन्होंने सुन लिया।

२५ महा सभा में आपकी ही मेरी प्रशन्सा होगी: मैं उनके समक्ष जो उनका भय मानते हैं अपने प्रणों का भुक्तान कर दूँगा।

२६ वो दीन खाएँगे और सन्तुष्ट हो जाएँगे: वो प्रभु की प्रशन्सा करेंगे जो उन्हें खोजते हैं: तुम्हारा हृदय सदा के लिए जीएगा।

२७ संसार के अन्तिम छोर स्मरण करेंगे और प्रभु की ओर मुड़ जाएँगे: और आपके समक्ष ही राष्ट्रों के समस्त कुल आराधना करेंगे।

२८ चूँकि राज्य प्रभु का ही है: और वही राष्ट्रों के बीच राज्यपाल हैं।

२९ वो सभी जो पृथ्वी पर मोटे हैं खाएँगे और आराधना करेंगे: वो सभी जो नीचे धूल-मिट्टी में नीचे जाएँगे उनके समक्ष झुक जाएँगे: और कोई भी अपनी स्वयं की आत्मा को जीवित नहीं रख सकता है।

३० एक बीज उनकी सेवा करेगा; उसकी गिनती प्रभु के प्रति एक पीढ़ी के लिए कर दी जाएगी।

३१ वह जन आएँगे, और उनकी नेकी की घोषणा एक गण के प्रति करेंगे जिसका जन्म होगा, कि उन्हीं ने ये कर दिया है।



तेईस्वाँ भजन।


दाऊद का एक भजन।


प्रभु मेरे चरवाहे हैं; मुझे आभाव नहीं होगा। 

वो मुझे हरी-भरी चरण-भूमी में लिटवाते हैं: वो मेरा नेतृत्व थमे हुए जलों के साथ-साथ करते हैं।

वो मेरी आत्मा को पुनःस्थापित करते हैं: वो अपने ही नाम के वास्ते मेरा नेतृत्व नेकी के पथों में करते हैं।

हाँ भई, भले ही मैं मृत्यु की छाया की घाटी में से चल रहा हूँ, मैं किसी भी बुराई का भय नहीं मानूँगा: चूँकि आप मेरे साथ ही हैं; आपका लट्ठ और आपका डण्डा मुझे आश्वासन प्रदान करते हैं।

आप मेरे ही समक्ष एक मेज़ तैयार करते हैं मेरे शत्रुओं की उपस्थित में ही: आप मेरे सर का तेल से अभिषेक करते हैं; मेरा प्याला तो उभर कर बहता जा रहा है।

अवश्य ही अच्छाई और दया मेरे जीवन के समस्त दिनो में मेरा अनुसरण करेंगी: और मैं प्रभु के भवन में सदा के लिए निवास करता रहूँगा।







चौबीसवाँ अध्याय।


दाऊद का एक भजन।


पृथ्वी प्रभु जी की ही है, और उसकी भरपूर्ता; ये संसार, और वो जो उस में बसते हैं।

चूँकि समुद्रों पर ही उन्होंने उसे निर्मित कर दिया, और प्रलयों पर ही उसकी स्थापना कर दी।

कौन प्रभु के पहाड़ में आरोहण करेगा? या फिर कौन उनके पवित्र स्थान में खड़ा होगा?

वो जिसके पास स्वच्छ हाथ, और एक शुद्ध हृदय हैं; जिसने अपनी आत्मा को व्यर्थता के प्रति नहीं उठाया है, ही छल-कपट से शपथ खाई है।

वही प्रभु से आशीर्वाद ग्रहण करेगा, और अपने बचाव के ईश्वर से नेकी।  

यही उनकी पीढ़ी है जो उनसे पूछ-ताछ करते हैं, जो आपके चेहरे को खोजते हैं, हे याकूब। सेला।

अपने शीर्षों को उठा लो, अरे तुम दरवाज़ों; और तुम अनंतकालिक द्वारों तुम ऊपर उठ जाओ भई; और महिमा के राजा भीतर प्रवेश करेंगे।

भई कौन हैं ये महिमा के राजा? प्रभु शक्तिशाली और बलशाली, प्रभु ही युद्ध में शक्तिमान। 

अपने शीर्षों को उठा लो, अरे तुम दरवाज़ों; उन्हीं को ही ऊपर उठा लो तुम अनंतकालिक द्वारों; और महिमा के राजा भीतर प्रवेश करेंगे।

१० भई कौन हैं ये महिमा के राजा? सेनाओं के प्रभु ही, वही हैं महिमा के राजा। सेला।



पच्चीसवाँ भजन।


दाऊद का एक भजन।


हे प्रभु जी, आप ही के प्रति ही मैं अपनी आत्मा को उठता हूँ।

हे मेरे ईश्वर, मैं आप में भरोसा रखता हूँ: मुझे लज्जित मत हो जाने दें जी, मेरे शत्रुओं को मुझ पर विजयी हो जाने दें।

हाँ जी, कोई भी जो आप की प्रतीक्षा में रहता है लाजित हो जाए: उन्हीं को लज्जित हो जाने दें जो बिन कारण अतिक्रम करते हैं।

हे प्रभु अपने पथों का ज्ञान दिलवा दें मुझे; अपने पथों की शिक्षा प्रदान कर दें मुझे।

५ अपने सत्य में मेरा नेतृत्व करें, और शिक्षा प्रदान कर दें मुझे: चूकी आप की मेरे बचाव के ईश्वर हैं; आप ही पर सारे दिन आस लगाए बैठता हूँ।

अपनी कोमल दयालुताओं का और अपनी प्यारी करुणाओं का स्मरण करें, हे प्रभु, चूँकि वो तो सदा पुरातन से लेकर रही हैं।

मेरे यौवन के पापों का, ही मेरे अतिक्रमों का स्मरण करें: हे प्रभु, आप अपनी दयानुसार मुझे स्मरण में रखिएगा अपनी अच्छाई के वास्ते ही।

अच्छे और निष्कलंक हैं प्रभु: इसलिए वो पापियों को पथ में शिक्षा प्रदान करेंगे।

उन दीनों का वो न्याय में निर्देशन करेंगे: और उन दीनों को अपने पथ की शिक्षा प्रदान करेंगे।

१० प्रभु के समस्त पथ दया और सत्य हैं ऐसों ही के प्रति जो उनके प्रतिज्ञा-पत्र और उनके साक्षयों का पालन करते हैं।

११ हे प्रभु अपने ही नाम के वास्ते, मेरी अधर्मता को क्षमा कर दें जी; चूँकि वो विशाल है।

१२ वो कौन सा पुरुष है जो प्रभु से डरता है? उसी को ही वो उस पथ में शिक्षा देंगे जो वह चुनेंगे।

१३ उसकी आत्मा चैन से रहेगी; और उसका बीज पृथ्वी को विरासत में ले लेगा।

१४ प्रभु का भेद उनके साथ रहता है जो उनसे डरते हैं; और वह उन्हें अपना प्रतिज्ञा-पत्र समझवा देंगे।

१५ मेरी आँखें निरन्तर प्रभु की ओर ही रहती हैं; चूँकि वही मेरे पैरों को जाल में बाहर छुड़ा देंगे।

१६ आप मेरी ओर मुड़ जाएँ जी, और मुझ पर दया करें; चूँकि मैं उजाड़ और उत्पीड़ित हूँ जी।

१७ मेरे हृदय के कष्ट बढ़ गए हैं: जी मुझे मेरे कष्टों में से बाहर निकाल लें।

१८ मेरी यातना और मेरी पीड़ा को देखें; और मेरे समस्त पापों को क्षमा कर दें।

१९ मेरे शत्रुओं का विचार करें; चूँकि वो तो अनेक हैं; और वह मुझे घृणा करते हैं क्रूर घृणा लिए।

२० आप मेरी आत्मा को सुरक्षित रखें, और बचा लें मुझे: मुझे लज्जित हो जाने दें; चूँकि मैं आप ही में अपना भरोसा रखता हूँ।

२१ सत्य-निष्ठा और निषकलंकता को मुझे परिरक्षित रखने दें; चूँकि मैं आप पर आस लगाएँ बैठा हूँ।

२२ हे ईश्वर, इस्राएल का उसके समस्त कष्टों से मुक्तिभुक्तान कर दें जी।




छब्बीसवाँ भजन।


दाऊद का एक भजन।


हे प्रभु, मुझे आँकें; चूँकि मैं अपनी ही सत्य-निष्ठा में चला हूँ: मैंने तो प्रभु में भी विश्वास किया है; इसलिए मैं फिसलूँगा नहीं।

जाँच कर लें मेरी हे प्रभु, और मुझे परखें; मेरे जिगर और मेरे हृदय की परीक्षा ले लें जी।

चूँकि आपकी प्यारीकरुणा मेरी आँखों के समक्ष है: और मैं आपके सत्य में चला हूँ।

मैं व्यर्थ जनों के साथ नहीं बैठा, ही मैं ढ़ोंगीयों के साथ भीतर जाऊँगा।

मैंने दुष्कर्मियों की सभा से घृणा की है; और दुष्ट के साथ नहीं बैठूँगा।

मैं अपने हाथों को निर्दोषता में धो दूँगा: सो मैं आपकी बलिवेदी को घेर लूँगा जी, हे प्रभु:

ताकि मैं कृतज्ञता की वाणी से घोषणा कर दूँ, और आपके अद्भुत कर देने वाले कार्यों का वर्णन कर दूँ।

प्रभु जी, मैंने आपके भवन के निवास-स्थान से, और उस स्थान से जहाँ आपका सम्मान वास करता है, प्रेम कर लिया है जी। 

मेरी आत्मा को पापियों के साथ, ही मेरे जीवन को खून के प्यासों के साथ एकत्रित करें:

१० जिनके हाथों में अपराध होता है, और उनका दायाँ हाथ घूस से भरा होता है।

११ परन्तु जहाँ तक मेरी बात आती है, मैं तो अपनी ही सत्य-निष्ठा में चलूँगा: मुक्तिभुक्तान कर दें जी मेरा, और मेरे प्रति दयालुशील होएँ।

१२ मेरा पैर एक समतल स्थान में खड़ा है: और सभाओं में मैं प्रभु को आशीष दूँगा।



सत्ताईसवाँ अध्याय।


दाऊद का एक भजन।


प्रभु मेरा प्रकाश और मेरा बचाव हैं; तो मैं किस से डरूँगा भई? प्रभु ही मेरे जीवन की शक्ति हैं; तो मैं किस से भयभीत होऊँगा भई?

जब वो दुष्ट, मेरे शत्रु और मेरे बैरी ही मुझ पर मेरा माँस खा जाने हेतु पड़े थे, तो वो ठोकर खा कर गिर पड़े।

भले ही कोई सेना मेरे विरुद्ध पड़ाव डाल दे, मेरा हृदय डरेगा नहीं: भले ही युद्ध मेरे विरुद्ध उठ खड़ा हो, मैं इसी में ही विश्वसनीय रहूँगा। 

एक ही बात की मैंने प्रभु से वाँछा की है, उसी के ही पीछे पड़ा रहूँगा मैं; ताकि मैं अपने जीवन के समस्त दिनो प्रभु के ही घर में निवास करता रहूँ, प्रभु के सौन्दर्य को देखने हेतु, और उनके मन्दिर में पूछ-ताछ करने हेतु।

चूँकि कष्ट के समय वो मुझे अपने मण्डप में छुपा लेंगे: उनके शिविर के गुप्त-स्थान में वो मुझे छुपा लेंगे; वो मुझे एक चट्टान पर स्थित कर देंगे।

और अब मेरा शीर्ष मेरे शत्रुओं के ऊपर उठा दिया जाएगा जो मेरे चारों ओर हैं: इसलिए मैं हर्ष के बलिदान उनके तम्बू में चढ़ाऊँगा; हाँ जी मैं तो गाऊँगा, मैं तो प्रभु के प्रति प्रशन्साएँ गाऊँगा।

सुन लें जी, हे प्रभु, जब मैं अपनी वाणी से चीखता हूँ: मुझ पर भी दया करें, और मुझे उत्तर दे दें।

जब आप कहते हैं, तुम मेरे चहरे को खोजो; मेरे हृदय ने आपसे कहा, प्रभु जी आप ही के चहरे को में खोजूँगा।

मेरे चहरे को मुझ से दूर छुपाएँ; अपने सेवक को क्रोध में परे हटाएँ: आप ही मेरी सहायता रहे हैं जी; मुझे छोड़ें , ही मेरा त्याग करें, मेरे बचाव के ईश्वर!

१० जब मेरे पिता और मेरी माता मुझे त्यागेंगे, तब प्रभु ही मुझे ऊपर ले लेंगे।

११ हे प्रभु, मुझे अपना पथ सिखा दें जी, और मेरे शत्रुओं के कारण मेरा एक सीधे मार्ग में नेतृत्व कर दें।

१२ जी मुझे मेरे शत्रुओं की इच्छा के प्रति प्रदान कर दें: चूँकि झूठे साक्षी, और क्रूरता की साँसें भरते हुओं जैसे मेरे विरुद्ध उठ खड़े हो गए हैं जी!

१३ मैं तो मूर्छित हो गया होता, यदि मैंने सजीवितों की भूमी में प्रभु की अच्छाई को देखने का विश्वास किया होता।

१४ लगाए रहो आस प्रभु पर: अच्छे साहसी बनो, और वही तुम्हारे हृदय को सशक्त कर देंगे: आस लगाए रखो प्रभु पर, मैं कहता हूँ!



























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