निर्गमन। पुराना अनुबन्ध। (Exodus)



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पहला अध्याय।


अब यह उन इस्राएल की सन्तानों के नाम हैं, जो मिस्र में आए थे; प्रत्येक पुरुष और उसका घराना याकूब के साथ आया था।

रूबेन, शिमोन, लेवी, और यहूदा,

इस्सकार, ज़बूलून, और बिन्यामिन,

दान, और नफ्ताली, गाद, और आशेर। 

और वह समस्त आत्माएँ जो याकूब की कटी में से बाहर निकली थीं, सत्तर आत्माएँ थीं: क्योंकि यूसुफ़ तो पहले से ही मिस्र में ही था।

और यूसुफ़ की मृत्यु हो गई, और उसके सभी भाई-जनो की भी, और उस समस्त पीढ़ी की भी।

और इस्राएल की संतानें फलदाईं थीं, और उनकी बढ़ौतरी अत्याधिकता से बढ़ी, और वह बहुगुणित हुए, और उनकी वृद्धी हुई कि वह अत्यंत बलपूर्वक बन गए; और वह भूमि उन से भर गई।

अब मिस्र पर एक नया राजा उठा जो यूसुफ़ से अपरिचित था।

और वह अपने लोगों से बोला, देखो भई, इस्राएल की सन्तानों के लोग हमारी तुलना में अधिक हैं, और अधिक शक्तिशाली भी हैं:

१० जाओ अब, हमें समझदारी से उनके साथ व्यवहार करना चाहिए; कहिं वह बहुगुणित हो जाएँ, और ऐसा हो कि जब कोई भी युद्ध छिड़ पड़े, वह हमारे शत्रुओं के साथ जा मिलें, और हमारे ही विरुद्ध लड़ाई कर बैठें, और इस प्रकार वह इस भूमी में से ऊपर बाहर निकल चले जाएँ।

११ इसलिए उन्होंने उन पर उन्हें बेगारी कराने वाले अधिकारी-गिरोहों को उनके बोझों के साथ यातनित कर देने हेतु नियुक्त कर दिया। और उन्होंने फैरो के लिए भण्डार-नगर, पितोम और रामसेस का निर्माण किया।

१२ परन्तु जितनी अधिकता से उन्होंने उन्हें यातनित किया, उतनी ही अधिकता से वह बहुगणित होते और बढ़ते चले गए। और वह इस्राएल की सन्तानों के कारण शोकार्तित हो गए।

१३ और मिस्रवासियों ने इस्राएल की सन्तानों से कठोरता से बेगारी करवाई।

१४ और उन्होंने उनके जीवनों को, गारे और ईंट और खेत की प्रत्येक प्रकार की सेवा की कड़ी बंध्वा-बेगारी के माध्यम से, कड़वा बना दिया: उनकी सम्पूर्ण सेवा जिस में उन्होंने उन्हें सेवारत बनाया, कठोर ही थी।

१५ और मिस्र का राजा इब्रानी प्रसाविकाओं से बोला, जिन में से एक का नाम शिफ्रा था, और उस दूसरी का नाम पूआ था:

१६ और उसने कहा, जब तुम इब्रानी स्त्रियों के लिए प्रसाविका की सेवाई करती हो, और तुम उन्हें प्रसव-आसनों पर देखती हो; यदि वह एक बेटा हो, तो तुम उसे मार डालोगी: परन्तु यदि वह एक बेटी हो, तो वह जीएगी।

१७ परन्तु वह प्रसाविकाएँ ईश्वर से डरती थीं, और उन्होंने मिस्र के राजा के आदेशानुसार नहीं किया, बल्कि उन्होंने उन नर बच्चों को जीवित बचा लिया।

१८ और मिस्र के उस राजा ने उन प्रसाविकाओं को बुलवा भेजा, और उसने उनसे कहा, तुमने यह कार्य क्यों कर दिया है, और नर-बच्चों को जीवित बचा लिया है?

१९ और उन प्रसाविकाओं ने फैरो से कहा, चूँकी इब्रानी स्त्रियाँ मिस्र की स्त्रियों जैसी नहीं हैं; क्योंकि वह तो स्फूर्तीमई हैं, और प्रसाविकाओं के उनके पास अंदर जाने से पहले ही वह प्रसावित हो चुकी होती हैं।

२० इसलिए ईश्वर ने उन प्रसाविकाओं के साथ भला किया: और वह लोग बहुगणित हुए, और उनकी वृद्धी हुई कि वह बहुत ही बलपूर्वक बन गए।

२१ और ऐसा हुआ कि, चूँकि वह प्रसाविकाएँ ईश्वर से डरीं थीं, कि उन्होंने उनके लिए घर बनाए।

२२ और फैरो ने अपने सभी लोगों के यह आदेश दिया, कहते हुए, प्रत्येक बेटा जो जन्म लेता है, तुम उसे नदी में फैंक दोगे, और प्रत्येक बेटी को तुम जीवित बचा लोगे।



दूसरा अध्याय।


और लेवी के घराने का एक पुरुष गया, और उसने लेवी की एक बेटी को पत्नी ले लिया।

और वह स्त्री गर्भवति हो गई, और उसने एक बेटा जना: और जब उसने देखा की वह तो एक अच्छा बच्चा था, उसने उसे तीन महीने छुपा कर रखा।

और जब वह उसे अब और नहीं छुपा सकती थी, उसने उसके लिए एक सरकंडों का संदूक लिया और उसे राल और डामर से पोत दिया, और उस बच्चे को उस के अन्दर डाल दिया; और उसने उसे नदी के किनारे के साथ नरकटों में लिटा दिया।

और उसकी बहन दूर खड़ी हुई थी, यह जानने के लिए कि उसके साथ क्या किया जाएगा।

और फैरो की बेटी स्नान करने नीचे नदी पर आई; और उसकी सेविकाएँ नदी के तीर के साथ चल रहीं थीं; और जब उसने उन नरकटों के बीच वह संदूक देखा, उसने अपनी सेविका को उसे लाने के लिए भेज दिया।

और जब उसने उसे खोल लिया था, उसने उस बच्चे को देखा: और देखो तो, वह शिशु रो पड़ा। और उसे उस पर समवेदना हुई और उसने कहा, यह तो इब्रानियों के बच्चों में से एक है।

तब उसकी बहन ने फैरो की बेटी से कहा, क्या मैं जाकर आपके पास इब्रानी स्त्रियों में से किसी दाई को बुला लाऊँ, ताकि वह आपके लिए इस बच्चे को दूध पिला सके?

और फैरो की बेटी उससे कहा, चली जाओ। और वह किशोरी चली गई और उसने उस बच्चे की माँ को बुलवा लिया।

और फैरो की बेटी ने उससे कहा, ले जाओ इस बच्चे को और इसे मेरे लिए दूध पिलाओ, और मैं तुम्हें तुम्हारा वेतन दे दूँगी। और उस स्त्री ने वह बच्चा लिया और उसे दूध पिलाया।

१० और वह बच्चा बड़ा हुआ। और वह उसे फैरो की बेटी के पास ले आई, और वह उसका बेटा बन गया। और उसने उसका नाम मूसा पुकारा: और उसने कहा, क्योंकि मैंने इसे पाने में से बाहर खींचा।

११ और यह होने को आया, कि उन दिनो में, जब मूसा बड़ा हो चुका था, की वह अपने भाई-जनो के पास गया, और उसने उनके बोझों को देखा: और उसने एक मिस्रवासी आदमी को किसी एक इब्रानी को, उसी के भाई-जनो में से एक को, आघातित करते हुए देखा।  

१२ और मूसा ने इस दिशा में देखा और उस दिशा में, और जब उसने देखा कि कोई भी आदमी नहीं था, तो उसने उस मिस्रवासी की हत्या कर दी, और उसे रेत में छिपा दिया।

१३ और जब वह दूसरे दिन बाहर निकला, देखो, इब्रानियों में से दो पुरुष एक साथ लड़-झगड़ रहे थे: और मूसा ने उससे कहा जिसने त्रुटि की थी, किस कारण तुम अपने साथी को आघातित कर रहे हो भई?

१४ और उसने कहा, तुझे हमारे बीच किसने शासक या न्यायाधीश नियुक्त किया है? क्या तू मुझे भी मारने का विचार कर रहा है, जैसे तूने उस मिस्रवासी को मार डाला था? और मूसा डर गया, और उसने कहा, निश्च्य से ही यह घटना जान ली गई है।

१५ तो अब जब फैरो ने इस घटना के विषय में सुना, वह मूसा की हत्या कर देने हेतु इच्छित था। परन्तु मूसा फैरो के चहरे से भाग-खड़ा हुआ, और वह मिद्यान की भूमि में जा बसा: और वह एक कूएँ के साथ नीचे बैठ गया।

१६ अब मिद्यान के पुरोहित के पास सात बेटियाँ थीं: और वह आईं और उन्होंने पानी खींचा, और उन्होंने उन नाँदों को भरा अपने पिता के झुंड को पानी देने के लिए।

१७ और वह चरवाहे आए और उन्होंने उन्हें भगा दिया: परन्तु मूसा ऊपर उठ खड़ा हुआ और उसने उनकी सहायता की, और उनके झुंड को पानी दिया। 

१८ और जब वह अपने पिता रूएल के पास आईं, उसने कहा, यह कैसे हुआ की आज तुम इतनी शीघ्रता से ही गई हो?

१९ और उन्होंने कहा, एक मिस्रवासी आदमी ने हमारा चरवाहों के हाथों में से बाहर उद्धार कर दिया, और उसने हमारे लिए समुचित पानी भी खींचा, और झुण्ड को पानी दिया।

२० और उसने अपनी बेटियों से कहा, तो कहाँ है वह? तुम ने उस पुरुष को क्यों छोड़ दिया है? बुलवा लाओ उसे, ताकि वह रोटी खा सके।

२१ और मूसा उस पुरुष के साथ बस जाने हेतु प्रसन्न हो गया: और उसने मूसा को अपनी बेटी सिप्पोराह दे दी।

२२ और उसने उसे एक बेटा जना और उसने उसका नाम गेर्शोम पुकारा: क्योंकि उसने कहा, मैं एक परदेशी भूमि में एक परदेशी रहा हूँ।

२३ और समय की प्रक्रिया में यह हुआ की वह मिस्र का राजा मर गया: और इस्राएल की संतानों बंध्वा-बेगारी के कारण आहें भरने लगीं, और वह चीख पड़े, और उनकी दुहाई ऊपर ईश्वर तक पहुँच गई, उस बंध्वा-बेगारी के कारण।

२४ और ईश्वर ने उनका कराहना सुना और ईश्वर ने स्मरण किया अपना प्रतिज्ञा-पत्र अब्राहम के साथ, इसहाक के साथ, और याकूब के साथ।

२५ और ईश्वर ने इस्राएल की सन्तानों पर दृष्टि टिकाई और ईश्वर ने उनकी दशा को बूझा।




तीसरा अध्याय। 


अब मूसा अपने ससुर, मिद्यान के पुरोहित यित्रो के झुंड का चरवाहा था: और वह उस झुंड का नेतृत्व कर उसे निर्जन-क्षेत्र के पिछले भाग तक ले आया, और वह ईश्वर के पर्वत तक पहूँच गया, यहाँ तक की होरेब तक भी। 

और प्रभु के दूत उसे एक झाड़ी के बीच में से ही एक अग्नी की लपट में प्रकट हुए: और उसने देखा और देखो तो, वह झाड़ी अग्नी से जल रही थी, और वह भस्म नहीं हो रही थी।

और मूसा ने कहा, मैं अब परे मुड़ कर, इस महान दृश्य को देखूँगा की भई वो झाड़ी भस्म क्यों नहीं हुई।

और जब प्रभु ने देखा की वह देखने के लिए परे मुड़ गया था, ईश्वर ने उसे झाड़ी के बीच में से पुकारा और कहा, मूसा, मूसा। और उसने कहा, जी मैं यहाँ हूँ।

और उन्होंने कहा, निकट मत आओ यहाँ इधर: अपने पैरों पर से अपने जूते उतार लो, क्योंकि यह स्थान जिस पर तुम खड़े हो पवित्र धरती है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा, मैं तुम्हारे पित्र का ईश्वर हूँ, अब्राहम का ईश्वर, इसहाक का ईश्वर, और याकूब का ईश्वर। और मूसा ने अपना चेहरा छुपा लिया, क्योंकि उसे ईश्वर पर दृष्टि टिकाने से भय था।

और प्रभु ने कहा, निश्चितता से ही मैंने अपने लोगों का संताप देख लिया है जो मिस्र में हैं, और मैंने उनकी दुहाई सुन ली है उनके बेगारी करवाने वाले अधिकारी-गिरोहों के कारण; क्योंकि मैं उनके दुखों से परिचित हूँ;

और मैं नीचे गया हूँ उनका मिस्रवासियों के हाथ से बाहर उद्धार कर देने हेतु, और उन्हें उस भूमि में से ऊपर बाहर ले आने हेतु, एक अच्छी विशाल भूमि के अन्दर, उस भूमि के अंदर जो दूध और मधु से बह रही है; कनानवासियों, हित्ती वंशजों, एमोरवासियों, पेरिज़वासियों, हिव्वीयों और यबूसी वंशजों के ही स्थान में।

अब इसलिए, देखलो भई, इस्राएल की संतानों की दुहाई मुझ तक पहुँची है: और मैंने वह अत्याचारी-दमन भी देख लिया है जिस से वो मिस्रवासी उनका प्रदमन करते हैं।

१० तो इसलिए अब जाओ और मैं तुम्हें फैरो के पास भेज दूँगा ताकि तुम मेरे लोग इस्राएल की संतानों को ही, मिस्र में से बाहर निकाल कर ले आओ।   

११ और मूसा ने ईश्वर से कहा, जी मैं कौन होता हूँ, कि मैं फैरो के पास जाऊँ, और कि मैं इस्राएल की संतानों को मिस्र में से बाहर निकाल लाऊँ।   

१२ और उन्होंने कहा, अवश्य ही मैं तुम्हारे साथ हूँगा भई; और यह तुम्हारे लिए एक प्रतीक होगा कि मैंने ही तुम्हें भेजा है: जब तुम उन लगों को मिस्र में से बाहर ला चुकोगे, तुम ईश्वर की सेवा इस पर्वत पर करोगे।

१३ और मूसा ने ईश्वर से कहा, जी देख लें, जब मैं इस्राएल की संतानों के पास जाऊँगा, और उनसे कहूँगा, तुम्हारे पित्रों के ईश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है; और वो मुझ से कहेंगे, क्या नाम है उनका? तो मैं क्या कहूँगा उनसे?

१४ और ईश्वर ने मूसा से कहा, मैं हूँ वह जो मैं हूँ: और उन्होंने कहा, यही तुम इस्राएल की संतानों से बोलोगे, मैं हूँ ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

१५ और इसके अतिरिक्त ईश्वर ने मूसा से कहा, इसी प्रकार तुम इस्राएल की संतानों से बोलोगे, तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर, अब्राहम के ईश्वर, इसहाक के ईश्वर, और याकूब के ईश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है: यही है मेरा नाम सदैवत्वता पर्यत, और यही है मेरा स्मरण समस्त पीढ़ियों पर्यत।  

१६ चले जाओ और इस्राएल के वृद्धों को एक साथ एकत्रित कर लो और उनसे कहो, तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर, अब्राहम के ईश्वर, इसहाक के ईश्वर, और याकूब के ईश्वर मुझे प्रकट हुए, कहते हुए, मैंने निश्चितता से ही तुम्हारी सुध ले ली है और मैंने वह देख लिया है जो तुम्हारे प्रति मिस्र में किया जाता है:

१७ और मैंने कह दिया है कि मैं तुम्हें मिस्र के संताप में से ऊपर बाहर ले आऊँगा, कनानवासियों और, हित्ती वंशजों और, एमोरवासियों और, पेरिज़वासियों और, हिव्वीयों और यबूसी वंशजों की ही भूमि में, एक भूमि में जो दूध और मधु से बहती है।

१८ और वो तुम्हारी वाणी का श्रवण करेंगे: और तुम जाओगे, तुम और इस्राएल के वृद्ध-गण, मिस्र के राजा के पास, और तुम उस से कहोगे, इब्रानियों के प्रभु ईश्वर हम से मिल चुके हैं: और अब हमें जाने दो हम तुम से विनती करते हैं, तीन दिनो की यात्रा के लिए जँगली-क्षेत्र में, ताकि हम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति बलिदान कर सकें।

१९ और मैं निश्चित हूँ कि मिस्र का राजा तुम्हें नहीं जाने देगा, जी , किसी बलशाली हाथ से भी नहीं।

२० और मैं अपना हाथ फैलाऊँगा और मिस्र को अपने समस्त अद्धभुत चमत्कारों के संग आघातित कर दूँगा जिन्हें मैं उसी के बीच में करूँगा: और उसके पश्चात वह तुम्हें चले जाने देगा।

२१ और मैं इन लोगों को मिस्रवासियों की दृष्टि में अनुग्रह प्रदान कर दूँगा: और ऐसा होने को आएगा, जब तुम जाओगे, तुम खाली हाथ नहीं जाओगे:

२२ बल्कि प्रत्येक स्त्री अपनी पड़ोसन से उधार माँग लेगी, और उस से जो उसके घर में अल्पवास कर रही है, चाँदी के आभूषण, और सोने के आभूषण, और वस्त्र: और तुम उन्हें अपने बेटों पर और अपनी बेटियों पर पहनवा दोगे; और तुम मिस्रवासियों को लूट लोगे। 




चौथा अध्याय।


और मूसा ने उत्तर दिया और कहा, जी किन्तु देखें तो, वो मुझ पर विश्वास नहीं करेंगे, ही वो मेरी वाणी का श्रवण करेंगे: क्योंकि वो तो कहेंगे, प्रभु तो तुम्हें प्रकट ही नहीं हुए।

और प्रभु ने उस से कहा, वह क्या है जो तुम्हारे हाथ में है? और उसने कहा, एक लट्ठ।

और उन्होंने कहा, इसे धरती पर फैंक दो। और उसने उसे धरती पर फैंक दिया और वह एक सर्प बन गया; और मूसा उसके सामने से भाग खड़ा हुआ।

और प्रभु ने मूसा से कहा, अपना हाथ आगे करो, और उसे पूँछ से पकड़ लो। और उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, और उसे पकड़ लिया, और वह उसके हाथ में एक लट्ठ बन गया;

ताकि वह विश्वास कर सकें कि उनके पित्रों के प्रभु ईश्वर, अब्राहम के ईश्वर, इसहाक के ईश्वर, और याकूब के ईश्वर तुम्हें प्रकट हो चुके हैं।

और इसके अतिरिक्त प्रभु ने उस से कहा, अब अपने हाथ को अपनी छाती में डाल दो। और उसने अपना हाथ अपने वक्ष-स्थल में डाल दिया: और उसने उसे बाहर निकाला। और देखो तो, उसका हाथ हिम समान कुष्ठ-रोग ग्रस्त हो गया था।

और उन्होंने कहा, अपने हाथ को अब अपने वक्ष-स्थल में पुनः डाल दो। तो मूसा ने अपना हाथ अपनी छाती में पुनः डाल दिया; और उसने उसे पुनः बाहर निकाला, और देखो तो, वह उसके माँस सदृश परिवर्तित हो गया था।

और ऐसा होने को आएगा कि यदि वो तुम्हारा विश्वास नहीं करेंगे, ही उस पहले संकेत की वाणी सुनेंगे, कि वो इस दूसरे संकेत की वाणी पर विश्वास कर लेंगे।

और ऐसा होने को आएगा कि यदि वह इन दोनो संकेतों पर भी विश्वास नहीं करेंगे, ही तुमारी वाणी का श्रवण करेंगे, तब तुम उस नदी का पानी लोगे, और उसे सूखी भूमि पर उँडेल दोगे: और वह जल जो तुम नदी में से बाहर निकालोगे, वह सूखी धरती पर रक्त बन जाएगा।

१० और मूसा ने प्रभु से कहा, हे मेरे प्रभु जी, मैं कोई सुवक्ता पुरुष नहीं हूँ, ही आज से पहले, ही जब से आप अपने सेवक से बोले हैं: बल्कि मैं तो वक्तृता में धीमा हूँ, और एक धीमी जीभ लिए हूँ। 

११ और प्रभु ने उस से कहा, मनुष्य का मुँह किसने बनाया है? या कौन बनाता है गूँगा, या बधीर, या वह दृष्टि रखने वाला, या वह दृष्टिहीन? क्या मैंने ही प्रभु ने ही नहीं? 

१२ तो अब इसलिए चले जाओ, और मैं तुम्हारे मुँह के साथ रहूँगा, और तुम्हें वह सिखा दूँगा जो तुम कहोगे।

१३ और उसने कहा, हे मेरे प्रभु जी, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, उसी के हाथों भेज दें जिसे आप भेजें।

१४ और प्रभु का क्रोध मूसा के विरुद्ध भभक उठा और उन्होंने कहा, क्या हारुन वो लेवीवंशज तुम्हारा भाई नहीं है क्या? मैं जानता हूँ कि वो अच्छे से बोल सकता है। और देखो भई, वो तुमसे मिलने भी रहा है: और वो तुम्हें देख कर अपने हृदय में प्रसन्न हो जाएगा।

१५ और तुम उस से बोलोगे और उसके मुँह में शब्द डाल दोगे: और मैं तुम्हारे मुँह के साथ और उसके मुँह के साथ रहूँगा, और मैं तुम्हें वह सिखा दूँगा कि तुमने क्या करना है।

१६ और वही तुम्हारा लोगों के प्रति प्रवक्ता होगा: और वही होगा, यहाँ तक कि वही तुम्हारे प्रति एक मूँह के स्थान में होगा, और तुम उसके प्रति ईश्वर के स्थान में होगे।  

१७ और तुम अपने हाथ में इस लट्ठ को ले जाओगे, जिस से तुम संकेत करोगे।

१८ और मूसा गया, और अपने ससुर यित्रो के पास वापस चला गया, और उसने उस से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ जी आपसे कि मुझे वापस चले जाने दें अपने भाई-जनो के पास जो मिस्र में हैं, और मुझे देख लेने दें कि क्या यदि वह अब तक भी जीवित हैं क्या। और यित्रो ने मूसा से कहा, शान्ति से चले जाओ।

१९ और प्रभु ने मिद्यान में मूसा से कहा, जाओ मिस्र में वापस चले जाओ: क्योंकि वो सभी आदमी मर चुके हैं जो तुम्हारे जीवन की तलाश में थे। 

२० और मूसा ने अपनी पत्नी ली और अपने बेटे, और उन्हें एक गधे पर बिठा दिया, और वह मिस्र की भूमि में वापस लौट चला: और मूसा ने ईश्वर का वह लट्ठ अपने हाथ में ले लिया।

२१ और प्रभु ने मूसा से कहा, जब तुम मिस्र में वापसी हेतु जाते हो, देख लेना कि तुम यह समस्त अद्धभुत चमत्कार फैरो के समक्ष कर देना, जिन्हें मैंने तुम्हारे हाथ में डाल दिए हैं: परन्तु मैं उसका हृदय कठोर बना दूँगा ताकि वह लोगों को नहीं जाने देगा।

२२ और तुम फैरो से कहोगे, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, इस्राएल मेरा पुत्र है, यहाँ तक कि मेरा प्रथम जन्मा:

२३ और मैं तुझ से कह रहा हूँ, मेरे बेटे को जाने दे, ताकि वो मेरी सेवा कर सके: और यदि तू उसे जाने से मना कर देगा, देख ले भई, मैं तेरे पुत्र को मार डालूँगा, यहाँ तक कि तेरे ही प्रथम जन्मे को ही।

२४ और यह हुआ कि पथ के साथ सराय में ही, कि प्रभु उस से मिले उसे मार डालने की इच्छा से।

२५ तब सिप्पोराह ने एक तीव्र पत्थर लेकर अपने बेटे की आगे की चमड़ी काट डाली, और उसने उसे उसके पैरों पर फैंक दी, और कहा, निश्च्य से ही एक खूनी पति हो तुम मेरे।

२६ तो उन्होंने उसे छोड़ दिया: तब सिप्पोराह ने कहा, एक खूनी पति हो तुम, ख़तने के कारण।

२७ और प्रभु ने हारुन से कहा, मूसा से मिलने जँगली-क्षेत्र में चले जाओ। और वो चला गया, और वो उस से ईश्वर के पहाड़ में मिला, और उसने उसे चूमा।

२८ और मूसा ने हारुन को प्रभु के समस्त शब्द बतला डाले जिन्होंने उसे भेज दिया था, और वह समस्त संकेत जिनका कि उन्होंने उसे आदेश दे दिया था। 

२९ और मूसा और हारुन चले गए, और उन्होंने इस्राएल की संतानों के सभी वृद्धों को एकत्रित कर लिया:

३० और हारुन ने वह सभी शब्द बोले जिन्हें प्रभु ने मूसा से बोले थे, और उसने लोगों की दृष्टि में वह संकेत कर दिए।

३१ और उन लोगों ने विश्वास कर लिया: और जब उन्होंने सुना कि प्रभु ने इस्राएल की संतानों की सुध ले ली थी, और कि उन्होंने उनकी यातना पर अपनी दृष्टि लगा ली थी, कि उन सभी ने अपने शीर्ष झुका कर आराधना की। 



पाँचवाँ अध्याय।


और इसके पश्चात मूसा और हारुन भीतर गए, और फैरो से बोले, इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कह रहे हैं, मेरे लोगों को जाने दे, ताकि वह मेरे प्रति जँगली-क्षेत्र में एक भोज रख सकें।

और फैरो ने कहा, प्रभु कौन हैं भई की मैं उन की वाणी का अनुपालन करूँ इस्राएल के चले जाने हेतु? मैं प्रभु को नहीं जानता, ही मैं इस्राएल को जाने दूँगा।

और उन्होंने कहा, इब्रानियों के ईश्वर हम से मिल चुके हैं: हम तुम से प्रार्थना करते हैं की तुम हमें तीन दिनो की यात्रा पर्यत निर्जन-क्षेत्र में चले जाने दो, और हम प्रभु हमारे ईश्वर के प्रति बलिदान करेंगे; कहिं वह हम पर महामारी एवं तलवार के साथ टूट पड़ें।

और मिस्र ने राजा ने उन से कहा, मूसा और हारुन तुम इस प्रकार क्यों कर रहे हो, तुम लोगों को उनके काम-काजों से क्यों रोक रहे हो? चले जाओ अपने भारों और बोझों के पास।

और फैरो ने कहा, देखो भूमि के लोग तो अब बहुत से हैं, और तुम उन्हें उनके बोझों से विश्राम करा रहे हो।

और फैरो ने उसी दिन लोगों से बेगारी करवाने वाले अधिकारी-गिरोहों को और उनके अफ़सरों को आदेश दिया कहते हुए,

तुम लगों को ईंट बनाने के लिए अब और भूसा नहीं दोगे, जैसे की पहले दिया करते थे: उन्हें जाकर स्वयं के लिए ही भूसा एकत्रित कर लेने दो।

और जो ईंटों की गिनती जो वह पहले बनाते थे, वही तुम उन पर लादोगे; तुम उस में से कुछ भी नहीं घटाओगे: क्योंकि यह तो कामचोर हैं; इसलिए यह चीख रहे हैं कहते हुए, हमें जाने दो और हमें अपने ईश्वर के लिए बलि दे देने दो।   

उन आदमियों पर और भी अधिक काम लाद दो, ताकि वह उस में श्रम करें; और उन्हें व्यर्थ शब्दों पर ध्यान मत देने दो।

१० और लोगों के वह बेगारी करवाने वाले अधिकारी-गिरोह और उनके अफ़सर बाहर चले गए, और वह लोगों से बोले कहते हुए, फैरो इस प्रकार बोल रहे हैं, मैं तुम्हें भूसा नहीं दूँगा।

११ चले जाओ तुम, और जहाँ तुम उसे पा सको ले आओ भूसा वहीं से: तथापि तुम्हारा काम कतई भर भी कम नहीं किया जाएगा।

१२ तो वह लोग मिस्र के सर्वत्र की समस्त भूमि में बाहर बिखर गए थे, भूसे के स्थान में ठूँठी एकत्रित करने।

१३ और उन बेगारी करवाने वाले अधिकारी-गिरोहों ने उन्हें शीघ्रपरस्त किया कहते हुए, पूरा करो अपने कामों को, तुम्हारे दिन भर का काम, जैसे की जब भूसा था।

१४ और इस्राएल की संतानों के अफ़सरों को, जिन्हें बेगारी करवाने वाले अधिकारी-गिरोहों ने उनके ऊपर नियुक्त किए थे, पीट दिए गए थे, और उन से पूछा गया, किस कारण तुम ने दोनो कल और आज ईंट बनाने का तुम्हारा काम पूरा नहीं किया है, पिछली रीतिनुसार?

१५ तब इस्राएल की संतानों के वह अफ़सर फैरो के पास आए, और चीखे कहते हुए, किस कारण वश आप अपने नौकरों से इस प्रकार व्यवहार कर रहे हैं?

१६ आपके नौकरों को कोई भी भूसा नहीं दिया जा रहा है, और वह हम से कहते हैं, ईंट बनाओ: और देखें, आपके नौकरों को तो पीटा जा रहा है; परन्तु दोष तो आपके अपने ही लोगों में है।

१७ परन्तु उसने कहा, तुम कामचोर हो, तुम कामचोर हो: इसलिए तुम कह रहे हो, हमें जाने दें और प्रभु के प्रति बलि दे देने दें।

१८ इसलिए अब चले जाओ और काम करो; क्योंकि तुम्हें कोई भी भूसा नहीं दिया जाएगा, तथापि तुम ईंटों की वही गिनती दोगे। 

१९ और इस्राएल की संतानों के अफ़सरों ने देख लिया की वह तो एक बुरी स्तिथि में थे, इसके कह दिए जाने के पश्चात, कि तुम अपने दिन प्रीतदिन के कार्य की ईंटों में से कतई भी कम नहीं करोगे।

२० और वह मूसा और हारुन से मिले जो पथ में खड़े थे, जैसे वह फैरो से बाहर निकल आए थे:

२१ और उन्होंने उन से कहा, प्रभु तुम पर देखें और न्याय करें; क्योंकि तुम ने फैरो की दृष्टि में, और उसके नौकरों की दृष्टि में, हमारी स्वादिष्टता को घृणात्मक बनवा दिया है, उनके हाथों में एक तलवार थमा कर हमारी हत्या कर देने हेतु।

२२ और मूसा प्रभु के पास वापस लौटा और उसने कहा, प्रभु, किस कारण वश आपने इन लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया है? यह ऐसा क्यों है की आपने मुझे भेजा?

२३ क्योंकि जब से मैं फैरो के पास आया आपके नाम में बोलने हेतु, उसने इन लोगों के साथ बुराई कर दी है; ही आपने कतई भी अपने लोगों का उद्धार ही किया है।  



छटा अध्याय।


तब प्रभु ने मूसा से कहा, अब तुम देखोगे कि मैं फैरो के साथ क्या करूँगा: क्योंकि एक शक्तिशाली हाथ से वह उन्हें जाने देगा, और एक शक्तिशाली हाथ से वह उन्हें अपनी भूमि में से खदेड़ देगा।

और ईश्वर मूसा से बोले और उन्होंने उससे कहा, मैं प्रभु हूँ:

और मैं अब्राहम को और इसहाक को और याकूब को ईश्वर सर्वबलशाली के नाम से प्रकट हुआ था, परन्तु मेरे नाम यहोवा से मैं उनसे परिचित नहीं था।

और मैंने उनके साथ अपना प्रतिज्ञा-पत्र भी स्थापित कर दिया है, उन्हें कनान की भूमि दे देने हेतु, उनकी तीर्थ यात्रा की भूमि, जिस में की वह परदेशी थे।

और मैंने इस्राएल की संतानों का कराहना भी सुन लिया है, जिन्हें वह मिस्रवासी बँध्वा-दासत्व में रखते हैं; और मैंने अपने प्रतज्ञा-पत्र का स्मरण कर लिया है।

इसी कारण इस्राएल की संतानों से कहो, मैं प्रभु हूँ, और मैं तुम्हें मिस्रवासियों के बोझ-भारों के नीचे से बाहर निकाल लूँगा, और मैं तुम्हें उनके बँध्वा-दासत्व से छुड़वा दूँगा, और मैं तुम्हारा एक फैलाई हुई भुजा के साथ, और बड़े ही न्याय-निर्धारणों के साथ, मुक्तिभुक्तान कर दूँगा:

और मैं तुम्हें अपने प्रति एक ही गण ग्रहण कर लूँगा, और मैं ही तुम्हारे प्रति ईश्वर हूँगा: और तुम यह जान जाओगे कि मैं ही वह प्रभु तुम्हारा ईश्वर हूँ, जो तुम्हें मिस्रवासियों के बोझ-भारों के नीचे से बाहर निकाल कर ला रहा हूँ।

और मैं तुम्हें भूमि के भीतर अन्दर ले आऊँगा, जिसके विषय में मैंने वचन दिया था की मैं उसे अब्राहम को, और इसहाक को, और याकूब को दे दूँगा; और मैं उसे तुम्हें एक उत्तराधिकार हेतु दे दूँगा।

और मूसा ने इस्राएल की संतानों से एसा बोला: परन्तु उन्होंने मूसा का श्रवण नहीं किया भावात्मा की व्यथा के कारण और उस क्रूर बँध्वा-दासत्व के कारण।

१० और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

११ अन्दर चले जाओ, मिस्र के राजा फैरो से बोलो, की वह इस्राएल की संतानों को अपनी भूमि में से बाहर निकल जाने दे।

१२ और मूसा प्रभु के समक्ष बोला, कहते हुए, देखें, इस्राएल की संतानों ने मेरा श्रवण नहीं किया है; तो फिर फैरो मुझे कैसे सुनेगा, मैं जो बेख़तनित होंट लिए हूँ?

१३ और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, और उन्होंने उन्हें इस्राएल की संतानों के प्रति, और मिस्र के राजा फैरो के प्रति यह प्रभार प्रदान कर दिया, मिस्र की भूमि में से इस्राएल की संतानों को बाहर निकाल लाने हेतु। 

१४ यही हैं उनके पित्रों के घरानों के प्रमुख: इस्राएल के प्रथम जन्मे रूबेन के बेटे; हनोक और पल्लू, हेज़रोन, और कर्मी: यही रूबेन के परिवार-गण हैं।

१५ और शिमोन के बेटे: यमुएल, और यामीन, और ओहद, याकीन, सोहर, और शाऊल एक कनानवासण स्त्री का बेटा: यही शिमोन के परिवार-गण हैं।

१६ और यही लेवी के बेटों के नाम हैं उन्हीं की पीढ़ियोंनुसार; गेरशौन, कहाथ, और मरारी: और लेवी के जीवन के वर्ष एक सौ और सैंतीस साल थे। 

१७ गेरशौन के बेटे; लिबनी और शिमई, उनके परिवार-गणोनुसार। 

१८ और कहाथ के बेटे; अम्राम, यिसहार, हेब्रोन, और उज़्ज़ीएल: और कहाथ के जीवन के वर्ष एक सौ और तैंतीस वर्ष थे।

१९  और मरारी के बेटे; महली और मूशी: यही लेवी के परिवार-गण हैं उनकी पीढ़ियोंनुसार।

२० और अम्राम ने अपने पिता की बहन योकेबेद को पत्नी स्वरूप ले लिया; और उसने उसे हारुन और मूसा जने: और अम्राम के जीवन के वर्ष एक सौ और सैंतीस वर्ष थे। 

२१ और यह यिसहार के बेटे हैं; कोरह, और नेफेग, और ज़िक्री।

२२ और उज़्ज़ीएल के बेटे: मिशाएल, और एलज़ेफन, और ज़िथ्री।

२३ और हारुन ने अम्मीनादाब की बेटी, नहशोन की बहन एलीशेबा को पत्नी स्वरूप ले लिया; और उसने उसे नादब, और अबीहू, और एलाज़र और इथामर जने।

२४ और कोरह के बेटे; अस्सीर, एलकना, और अबीयासफ: यही कोरहवंशजों के परिवार-गण हैं।

२५ और हारुन के बेटे एलाज़र ने पुटीएल की बेटियों में से एक को पत्नी स्वरूप ले लिया; और उसने उसे फिनहास जना: यही लेवीवंशजों के पित्रों के प्रमुख हैं उन्हीं के परिवार-गणोनुसार।

२६ यही वह हारुन और मूसा हैं जिन से प्रभु ने कहा, इस्राएल की संतानों को उन्हीं की सेनाओंनुसार मिस्र की भूमि में से बाहर निकाल लाओ।

२७ यही वह हैं जो मिस्र के राजा फैरो से बोले थे, इस्राएल की संतानों को मिस्र में से बाहर निकाल लाने हेतु: यह वही मूसा और हारुन हैं।

२८ और यह होने को आया कि उस दिन जब प्रभु मूसा से मिस्र की भूमि में बोले थे,

२९ कि प्रभु मूसा से बोले कहते हुए, मैं प्रभु हूँ: मिस्र के राजा फैरों से वह सभी बोल दो जो भी मैं तुम से कहता हूँ।

३० और मूसा ने प्रभु के समक्ष कहा, देखें, मैं तो बेख़तनित होंट लिए हूँ, और फैरों मेरा श्रवण कैसे करेगा?



सातवाँ अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, देखो, मैंने तुम्हें फैरो के प्रति एक ईश्वर बना दिया है: और हारुन तुम्हारा भाई तुम्हारा पैग़म्बर होगा। 

वह सभी कुछ जिसका मैं तुम्हें आदेश दूँगा तुम बोलोगे: और हारुन तुम्हारा भाई फैरो से बोलेगा, कि वह इस्राएल की संतानों को अपनी भूमि में से बाहर भेज दे।

और मैं फैरो का हृदय कठोर बना दूँगा, और मैं मिस्र की भूमि में अपने संकेतों और अपने अद्धभुत चमत्कारों को बहुगुणित कर दूँगा।

परन्तु फैरो तुम्हारा श्रवण नहीं करेगा, ताकि मैं अपना हाथ मिस्र पर रख सकूँ, और अपनी सेनाओं को और अपने लोगों इस्राएल की संतानों को मिस्र की भूमि में से महा न्याय-निर्धारणों के माध्यम से बाहर निकाल ले आऊँ,

और वह मिस्रवासी जान जाएँगे की मैं ही प्रभु हूँ, जब मैं अपना हाथ मिस्र पर फैलाता हूँ, और उनके बीच में से इस्राएल की संतानों को बाहर निकाल लाता हूँ।

और मूसा और हारुन ने वैसा ही किया जैसी प्रभु ने उन्हें आज्ञा दे दी थी, उसी के ही प्रकार किया उन्होंने।

और मूसा अस्सी वर्ष की आयु का था, और हारुन तिरास्सी वर्ष की आयु का था, जब वह फैरो से बोले थे।

और प्रभु मूसा और हारुन से बोले, कहते हुए,

जब फैरो तुम से बोलेगा, कहता हुआ, तुम कोई चमत्कार दिखाओ: तब तुम हारुन से कहोगे, अपना लट्ठ ले लो और उसे फैरो के समक्ष फैंक दो, और वह एक सर्प बन जाएगा।

१० और मूसा और हारुन फैरो के पास भीतर चले गए और उन्होंने वैसा ही किया जैसा प्रभु ने उन्हें आदेश दे दिया था: और हारुन ने अपना लट्ठ फैरो के समक्ष और उसके नौकरों के समक्ष नीचे फैंक दिया, और वह एक सर्प बन गया।

११ तब फैरो ने भी अपने विद्वान पुरुषों और जादू-तन्त्र करने वालों को बुला लिया: और उन मिस्र के जादूगरों ने भी अपने इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों से इसी प्रकार कर डाला।     

१२ क्योंकि उन्हीं प्रत्येक आदमी ने भी अपने ही लट्ठ को नीचे फैंक दिया, और वह साँप बन गए: परन्तु हारुन के लट्ठ ने उनके लट्ठों को निगल डाला। 

१३ और उन्होंने फैरो के हृदय को कठोर कर दिया, कि उसने उन्हें नहीं सुना; जैसा कि प्रभु ने कहा था। 

१४ और प्रभु ने मूसा से कहा, फैरो का हृदय कठोर हो गया है, वह लोगों को जाने से मना कर रहा है।

१५ सुबह तुम फैरो के पास चले जाओ; लो, वह पानी की ओर बाहर जाता है; और तुम नदी के किनारे उसके आने के विपरीत खड़े हो जाओगे; और वह लट्ठ जो एक सर्प में परिवर्तित हो गया था तुम अपने हाथ में ले लोगे,

१६ और तुम उस से कहोगे, इब्रानियों के प्रभु ईश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है कहते हुए, मेरे लोगों को जाने दे ताकि वह जँगली-क्षेत्र में मेरी सेवा कर सकें: और देख ले, अभी तक भी तू नहीं सुन रहा है।

१७ इस प्रकार कह रहे हैं प्रभु , इस बात में तू जान जाएगा कि मैं प्रभु हूँ; देख ले, मैं इस लट्ठ से जो मेरे हाथ में है उन पानीयों पर प्रहार कर दूँगा जो नदी में हैं, और वह रक्त में परिवर्तित हो जाएँगे।

१८ और वह मछली जो नदी में है वह मर जाएगी, और यह नदी दुर्गंधमय बन जाएगी; और मिस्रवासी नदी के पानी को पीने से घृणा करेंगे।

१९  और प्रभु मूसा से बोले, हारुन से बोलो, अपना लट्ठ लो और अपने हाथ को मिस्र के जलस्त्रोतों पर, उनकी नदिकाओं पर, उनकी नदियों पर, और उनकी झीलों पर, और पानी के उनके समस्त कुण्डों पर, फैला दो, ताकि वह रक्त बन जाएँ; और ताकि मिस्र के सर्वत्र की भूमि में रक्त हो, दोनो लकड़ी के पात्रों में, और पत्थर के पात्रों में।

२० और मूसा और हारुन ने ऐसा ही कर दिया, जैसी प्रभु ने आज्ञा दे दी थी; और उसने फैरो की दृष्टि में और उसके नौकरों की दृष्टि में, उस लट्ठ को ऊपर उठाया और उन पानियों पर प्रहार कर दिया जो नदी में थे; और वह समस्त पानी जो नदी में थे रक्त में परिवर्तित हो गए। 

२१ और वह मछली जो नदी में थी मर गई; और उस नदी में से दुर्गंध आई, और वह मिस्रवासी नदी का पानी ही नहीं पी पाए; और मिस्र के सर्वत्र की भूमि में रक्त था।

२२ और मिस्र के उन जादूगरों ने अपने इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों से ऐसा ही कर दिया: और फैरो का हृदय कठोर हो गया था, ही उसने उनका श्रवण किया जैसा कि प्रभु ने कह दिया था।      

२३ और फैरो मुड़ चला और अपने घर में चला गया, ही उसने इस घटना पर भी अपना मन ठहराया।

२४ और पीने के पानी के लिए, सभी मिस्रवासियों ने उस नदी के आस-पास खुदाई की; क्योंकि वह नदी के पानी में से नहीं पी सक रहे थे।

२५ और सात दिन पूर्ण हो चुके थे, उसके पश्चात कि प्रभु ने नदी को आघातित कर दिया था।





आठवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, फैरो के पास चेल जाओ और उस से बोलो, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, मेरे लगों को जाने दे ताकि वह मेरी सेवा कर सकें।

और यदि तू उन्हें जाने से इनकार करेगा, देख ले भई, मैं तेरी समस्त सीमाओं पर मेंढकों से प्रहार कर डालूँगा:

और उस नदी में से मेंढक प्रचूरता से उभरते आएँगे, जो ऊपर चढ़ते हुए तेरे घर में, और तेरे शय्यन-कक्ष में, और तेरी शेय्या पर, और तेरे नौकरों के घर में, और तेरे लोगों पर, और तेरे चूल्हों-तन्दूरों में, और तेरे आटा गूँधने के पात्रों में घुस चले आएँगे:

और वह मेंढक दोनो तुझ पर और तेरे लोगों पर और तेरे सभी नौकरों के ऊपर चढ़ आएँगे।

और प्रभु मूसा से बोले, हारुन से बोलो, अपने हाथ को अपने लट्ठ के साथ नदिकाओं पर, और नदियों पर, और कुण्डों पर फैला दो, और मेंढकों की मिस्र की भूमि के ऊपर चढ़ाई करवा दो।

और हारुन ने अपना हाथ मिस्र के पानियों पर फैला डाला: और वह मेंढक ऊपर गए, और उन्होंने मिस्र की भूमि को ढक दिया।

और उन जादूगरों ने भी अपने इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों से ऐसा ही कर दिया, और वह मिस्र की भूमि पर मेंढक ले आए।

तब फैरो ने मूसा और हारुन को बुला भेजा, और कहा, प्रभु से विनती करो ताकि वह उन मेंढकों को मुझ से, और मेरे लोगों से, परे ले जाए; और मैं लोगों को चले जाने दूँगा ताकि वह प्रभु के प्रति बलि चढ़ा सकें।

और मूसा ने फैरो से कहा, अरे मेरा क्या सौभाग्य! तो मैं कब तुम्हारे लिए और तुम्हारे नौकरों के लिए, और तुम्हारे लोगों के लिए विनती करूँ, तुम से और तुम्हारे घरों में से उन मेंढकों के नष्ट कर देने हेतु, ताकि वह केवल नदी में ही रहें?

१० और उसने कहा, कल। तो उसने कहा, तुम्हारे ही शब्दानुसार हो जाए: ताकि तुम यह जान सको कि और कोई भी अन्य प्रभु हमारे ईश्वर जैसा नहीं है।

११ और वह मेंढक तुम से, और तुम्हारे घरों से, और तुम्हारे नौकरों से, और तुम्हारे लोगों से चले जाएँगे; वह केवल नदी में ही रहेंगे।

१२ और मूसा और हारुन फैरो के पास से बाहर निकल आए: और मूसा प्रभु के प्रति चीखा उन मेंढकों के कारण जिन्हें वह फैरो के विरुद्ध लाए थे। 

१३ और प्रभु ने मूसा के शब्दानुसार ही कर दिया; और वह मेंढक घरों में से और गाँवों में से और खेतों में से मर गए।

१४ और उन्होंने उन्हें एक साथ ढेरों पर ढेर एकत्रित कर लिया: और वह भूमि दुर्गंधमई बन गई।

१५ परन्तु जब फैरो ने देखा कि राहत मिल चुकी थी, उसने अपना हृदय कठोर कर लिया, और उसने उनका श्रवण नहीं किया; जैसा कि प्रभु ने कहा था।

१६ और प्रभु ने मूसा से कहा, हारुन से कह दो, अपना लट्ठ फैला दो और भूमी की धूल पर प्रहार कर दो ताकि वह मिस्र के सर्वत्र की भूमि में जुएँ बन जाए। 

१७ और उन्होंने ऐसा ही कर दिया; क्योंकि हारुन ने अपने हाथ को अपने लट्ठ के साथ फैला दिया, और धरती की धूल पर प्रहार कर दिया, और वह मनुष्य में और जानवर में जुएँ बन गई;  भूमि की सारी धूल मिस्र के सर्वत्र की भूमि में जुएँ बन गई।

१८ और उन जादूगरों ने भी जुओं को उतपन्न करने हेतु अपने इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों के माध्यम से ऐसा करा, परन्तु वह यह नहीं कर पाए: तो मनुष्य पर और जानवर पर जुएँ थीं।

१९ तब उन जादूगरों ने फैरो से कहा, यह तो ईश्वर की उँगली है: और फैरो का हृदय कठोर हो गया था, और उसने उन का श्रवण नहीं किया, जैसा कि प्रभु ने कह दिया था। 

२० और प्रभु ने मूसा से कहा, सुबह-सुबह ही उठ जाना और फैरो के समक्ष खड़े हो जाना; लो, वह पानी तक बाहर रहा है; और उस से कहना, प्रभु ऐसा कह रहे हैं, मेरे लोगों को जाने दे ताकि वह मेरी सेवा कर सकें।

२१ अन्यथा यदि तू मेरे लोगों को नहीं जाने देगा, देख ले, मैं तुझ पर, और तेरे नौकरों पर, और तेरे लोगों पर, और तेरे घरों के भीतर, मक्खियों के झुण्ड भेज दूँगा: और मिस्रवासियों के घर और वह धरती भी जिस पर वह हैं, मक्खियों के झुण्डों से भर जाएँगे।

२२ और मैं उस दिन गोशेन की भूमि को पृथक कर दूँगा, जिस में मेरे लोग बसते हैं, ताकि वहाँ मक्खियों के कोई भी झुण्ड हों: इस उद्देश्य से कि तू यह जान सके कि मैं ही पृथ्वी के बीच प्रभु हूँ।

२३ और मैं अपने लोगों और तेरे लोगों के बीच एक विभाजन कर दूँगा: यह संकेत कल घट जाएगा।

२४ और प्रभु ने ऐसा ही कर दिया; और फैरो के घर में, और उसके नौकरों के घरों में, और मिस्र की समस्त भूमि में एक मक्खियों का कष्टमई झुण्ड गया: उस मक्खियों के झुण्ड के कारण वह भूमि भ्रष्ट बन गई।

२५ और फैरो ने मूसा और हारुन को बुलवा भेजा और कहा, चले जाओ तुम, अपने ईश्वर के प्रति भूमि में बलिदान कर लो।

२६ और मूसा ने कहा, इसे इस रीति से करना सुयोग्य नहीं है, क्योंकि हम प्रभु हमारे ईश्वर के प्रति मिस्रवासियों की अतिघ्रणितता का बलिदान चढ़ा डालेंगे: लो भई, तो क्या हम मिस्रवासियों की अतिघ्रणितता का बलिदान उनकी आँखों समक्ष चढ़ा दें, और क्या वह हम पर पथराव नहीं कर देंगे क्या? 

२७ हम जँगली-क्षेत्र में तीन दिन की यात्रा करते हुए जाएँगे, और हम प्रभु हमारे ईश्वर के प्रति बलि चढ़ाएँगे, जैसा वह हमें आदेश देंगे।

२८ और फैरो ने कहा, मैं तुम्हें चले जाने दूँगा ताकि तुम प्रभु तुम्हारे ईश्वर के प्रति जँगली-क्षेत्र में बलि चढ़ा सको; बस तुम केवल बहुत दूर नहीं जाओगे: विनती कर दो मेरे लिए।

२९ और मूसा ने कहा, देखो मैं तुम्हारे पास से जा रहा हूँ, और कल मैं तुम्हारे लिए प्रभु से विनती करूँगा कि वह मक्खियों के झुण्ड फैरो के पास से, उसके नौकरों के पास से, और उसके लोगों के पास से, चले जाएँ: परन्तु फैरो धोखाधड़ी से अब और व्यवहार करे, लोगों को प्रभु के प्रति बलि चढ़ाने हेतु भेज कर।

३० और मूसा फैरो से बाहर चला गया, और उसने प्रभु से विनती कर दी।

३१ और प्रभु ने मूसा के शब्दानुसार कर दिया; और उन्होंने मक्खियों के वह झुण्ड फैरो के पास से, उसके नौकरों के पास से, और उसके लोगों के पास से, हटा दिए; एक भी मक्खी बची नहीं रही।

३२ और फैरो ने इस समय भी अपना हृदय कठोर कर लिया, ही उसने लोगों को जाने दिया।



नौवाँ अध्याय।


तब प्रभु ने मूसा से कहा, फैरो के पास भीतर चले जाओ और उस से बोलो, इब्रानियों के प्रभु ईश्वर ऐसा कह रहे हैं, मेरे लोगों को चले जाने दे, ताकि वह मेरी सेवा कर सकें।

क्योंकि यदि तू उन्हें नहीं चले जाने देगा और तथापि उन्हें पकड़े रखेगा,

देख ले, प्रभु का हाथ खेत में जो तेरे मवेशी हैं उन पर, और घोड़ों पर, और गधों पर, और ऊँटों पर, और बैलों पर, और भेड़ों पर, पड़ा है: अति कष्टमई महामारी पड़ेगी।

और प्रभु इस्राएल के मवेशी को मिस्र के मवेशी से पृथक कर देंगे: और उस सब में से जो इस्राएल की संतानों का है उस में से कुछ भी नहीं मरेगा।

और प्रभु ने एक निश्चित समय नियुक्त किया, कहते हुए, कल प्रभु भूमि में यह घटना कर देंगे।

और अगले ही दिन प्रभु ने वह घटना करवा दी, और मिस्र के समस्त मवेशी मर गए: परन्तु इस्राएल की संतानों के मवेशी में से एक भी नहीं मरा।

और फैरो ने भिजवाया और देखो तो इस्राएल की संतानों के मवेशी में से एक भी नहीं मरा था। और फैरो का हृदय कठोर हो गया और उसने लोगों को नहीं जाने दिया।

और प्रभु ने मूसा से और हारुन से कहा, भट्टी की राखों को मुट्ठियाँ भर कर ले लो, और मूसा को उसे फैरो की दृष्टि में स्वर्ग की ओर छिड़क देने दो।

और वह मिस्र की समस्त भूमि में सूक्ष्म धूल बन जाएगी, और वह मिस्र की समस्त भूमि में मनुष्यों पर और जानवरों पर एक फुंसियों के साथ फूटता हुआ फोड़ा बन जाएगी।

१० और उन्होंने भट्टी की राखों को ले लिया, और वह फैरो के समक्ष खड़े हो गए; और मूसा ने उसे स्वर्ग की ओर ऊपर छिड़क दिया, और वह मनुष्य पर, और पशु पर, एक फुंसियों के साथ फूटता हुआ फोड़ा बन गई।

११ और वह जादूगर मूसा के समक्ष खड़े ही नहीं हो पाए उन फोड़ों के कारण; क्योंकि वह फोड़ा उन जादूगरों पर, और सभी मिस्रवासियों पर था।

१२ और प्रभु ने फैरो का हृदय कठोर बना दिया, और उसने उन सब का श्रवण नहीं किया, जैसा कि प्रभु ने मूसा से बोला था।

१३ और प्रभु मूसा से बोले, सुबह-सुबह उठ कर, फैरो के समक्ष खड़े हो जाना, और उस से कहना, इब्रानियों के प्रभु ईश्वर ऐसा कह रहे हैं, मेरे लोगों को चले जाने दे, ताकि वह मेरी सेवा कर सकें।

१४ क्योंकि मैं इसी समय में तेरे हृदय पर, और तेरे नौकरों पर, और तेरे लोगों पर, अपनी समस्त विपत्तियाँ भेजूँगा; ताकि तू यह जान सके कि इस समस्त पृथ्वी में मेरे समान और कोई भी नहीं है।

१५ क्योंकि अभी ही मैं अपना हाथ बाहर फैला दूँगा, ताकि मैं तुझ पर, और तेरे लोगों पर, महामारी से प्रहार कर दूँ; और तू पृथ्वी पर से काट दिया जाएगा।

१६ और वास्तव में ही इसी कारण वश मैंने तुझे ऊपर उठा दिया है, तुझी में अपनी शक्ति प्रदर्शित कर देने हेतु, और कि मेरा नाम इस समस्त पृथ्वी के सर्वत्र में घोषित कर दिया जा सके। 

१७ तथापि तू अब तक भी स्वयं को मेरे लोगों के विरुद्ध पदोन्नत कर रहा है कि तू उन्हें नहीं जाने दे रहा है?

१८ देख ले भई, मैं कल लग-भग इस समय एक ऐसी अति-शोचनीय ओलों की बौछार करवाऊँगा, ऐसी जैसी मिस्र में कभी नहीं गिरी उसकी नीव-स्थापना से लेकर अभी तक भी।

१९ इसलिए अब भिजवाकर अपने मवेशी एकत्रित कर ले, और वह सभी जो तेरे पास खेत में है; क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति पर और पशु पर जो खेत में पाया जाएगा, और जो घर में नहीं ले आया जाएगा, वह ओले उन पर नीचे पड़ेंगे, और वह मर जाएँगे,

२० वह जो फैरो के नौकरों के बीच प्रभु के शब्द से भयभीत हो गया, उसने अपने नौकरों और मवेशी को घरों में भगवा दिया: 

२१ और उसने जिसने प्रभु के शब्द को नहीं माना, उसी ने अपने नौकरों को और अपने मवेशी को खेत में ही छोड़े रखा।

२२ और प्रभु मूसा से बोले, अपने हाथ को स्वर्ग की ओर फैला दो ताकि मिस्र की समस्त भूमि में, मनुष्य पर, और जानवर पर, और खेत की प्रत्येक वनस्पति पर ओले गिरें, मिस्र की भूमि के सर्वत्र में।

२३ और मूसा ने अपने लट्ठ को स्वर्ग की ओर तान दिया: और प्रभु ने गर्जन और ओले भेज दिए, और धरती पर अग्नी दौड़ी; और प्रभु ने मिस्र की भूमि पर ओलों की बौछार पड़वा दी।

२४ तो अति कष्टमई थे वह ओले, और ओलों के संग अग्नी मिश्रित थी, भई ऐसे, कि इन के जैसे कभी थे मिस्र की सर्वत्र भूमि में, जब से वह एक राष्ट्र बना था।

२५ और उन ओलों ने मिस्र की सर्वत्र की भूमि में आघात मचा दिया उस सभी पर जो खेत में था, दोनो पुरुषों पर और पशुओं पर; और उन ओलों ने प्रत्येक खेत की वनस्पति पर वार कर दिया, और खेत के प्रत्येक पेड़ को तोड़ डाला। 

२६ बस केवल गोशेन की भूमि में जहाँ इस्राएल की संतानें थीं, कोई भी ओले नहीं थे।

२७ और फैरो ने भिजवाया, और मूसा और हारुन को बुलवा भेजा, और उन से कहा, मैंने इस बार पाप कर दिया है: प्रभु नेक हैं, और मैं और मेरे लोग दुष्ट हैं।

२८ प्रभु से विनती करो (क्योंकि यह समुचित है) कि अब और कोई भी प्रबल गर्जनें और ओले हों; और मैं तुम्हें चले जाने दूँगा, और तुम अब और रुके नहीं रहोगे।

२९ और मूसा ने उस से कहा, मेरे नगर से बाहर निकास करते ही मैं अपने हाथ प्रभु के प्रति बाहर फैला दूँगा; और वह गर्जन थम जाएगी, ही कोई भी और ओले होंगे; ताकि तुम जान सको कि कैसे यह पृथ्वी प्रभु की ही है। 

३० परन्तु जहाँ तक तुम्हारी और तुम्हारे नौकरों की बात आती है, मैं जानता हूँ कि तुम प्रभु ईश्वर से तब भी नहीं भयभीत होगे।

३१ और वह पटसन और वह जौ, आघातित हो गए थे: क्योंकि वह जौ बाली में थी, और उस पटसन के अंकुर खिल चुके थे।

३२ परन्तु गेहूँ और राई आघातित नहीं हुए: क्योंकि वह उगे नहीं थे।

३३ और मूसा फैरो से नगर के बाहर चला गया, और उसने अपने हाथ प्रभु के प्रति बाहर फैला दिए: और वह गर्जनें और ओले थम गए, और वह वर्षा धरती पर नहीं उँडेली गई। 

३४ और जब फैरो ने देखा कि वर्षा, और वह ओले, और वह गर्जनें, थम गई थीं, उसने तब भी और अधिक पाप किया, और अपना हृदय कठोर बना दिया, उसने और उसके नौकरों ने भी।

३५ और फैरो का हृदय कठोर बन गया था, ही उस ने इस्राएल की संतानों को जाने दिया; जैसा कि प्रभु ने मूसा के द्वारा बोला था। 



दसवाँ अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, फैरो के पास भीतर चले जाओ: क्योंकि मैंने उसका हृदय, और उसके नौकरों का हृदय, कठोर कर दिया है, ताकि मैं अपने यह संकेत उसके सामने दिखला सकूँ:

और कि तुम अपने बेटे के कानो में, और अपने बेटे के बेटे के कानो में बता सको, वह बातें जो मैंने मिस्र में कार्यान्वित की हैं, और मेरे संकेत, जिन्हें मैंने उनके बीच करे हैं; ताकि तुम यह जान सको कि कैसे मैं ही प्रभु हूँ।

और मूसा और हारुन फैरो के पास भीतर गए, और उन्होंने उस से कहा, ऐसा कह रहें हैं इब्रानियों के प्रभु ईश्वर, और कितनी देर तू मेरे समक्ष स्वयं को विनम्र बनाने से इनकार करता रहेगा? मेरे लोगों को जाने दे, ताकि वह मेरी सेवा कर सकें।

नहीं तो, यदि तू मेरे लोगों को जाने से इनकार करेगा, देख ले, मैं कल तेरी सीमा-रेखा में टिड्डियों को ले आऊँगा:

और वह धरती के चहरे को ढक देंगी, कि कोई भी धरती को देख नहीं पाएगा: और वह उस बचे-कुचे का शेष भाग खा जाएँगी, जो तेरे पास ओलों से बचा-कुचा रह गया है, और वह प्रत्येक पेड़ को खा जाएँगी, जो तेरे लिए खेत में उग रहा है:

और वह तेरे घरों को, और तेरे सभी नौकरों के घरों को, और समस्त मिस्रवासियों के घरों को भर देंगी; जो कि ही तेरे पित्रों ने, ही तेरे पित्रों के पित्रों ने देखा है, उस दिन से जब से वह इस पृथ्वी पर थे, इस दिन तक। और उसने स्वयं को मोड़ा, और फैरो से बाहर चला गया।

और फैरो के नौकरों ने उस से कहा, और कितने समय तक यह पुरुष हमारे लिए एक फंदा बना रहेगा? आदमियों को जाने दें ताकि वह प्रभु अपने ईश्वर की सेवा कर सकें: क्या आप अभी तक भी नहीं जानते हैं कि मिस्र नष्ट हो चुका है?

और मूसा और हारुन को पुनः फैरो के पास ले आया गया: और उसने उनसे कहा, चले जाओ, प्रभु अपने ईश्वर की सेवा कर लो: परन्तु वह कौन हैं जो जाएँगे?

और मूसा ने कहा, हम जाएँगे, अपने युवकों और अपने वृद्धों के साथ, अपने बेटों और अपनी बेटियों के साथ, अपने झुण्डों और अपने पशु-समूहों के साथ हम जाएँगे; क्योंकि हमें प्रभु के प्रति निश्च्य से ही एक भोज रखना है।

१० और फैरो ने उनसे कहा, प्रभु इस प्रकार तुम्हारे साथ रहें, क्योंकि मैं तुम्हें जाने दूँगा, और तुम्हारे छोटे नन्हों को: देख लेना; क्योंकि बुराई तुम्हारे आगे है।

११ ऐसे नहीं: अब चले जाओ तुम जो पुरुष हो, और प्रभु की सेवा कर लो; क्योंकि इसी की ही तुमने इच्छा की थी। और उन्हें फैरो की उपस्थिति से खदेड़ दिया गया था।

१२ और प्रभु मूसा से बोले, टिड्डियों के लिए अपने हाथ को मिस्र की भूमि पर फैला दो, ताकि वह मिस्र की भूमि पर ऊपर जाएँ, और वह भूमि की प्रत्येक वनस्पति को खा जाएँ, यहाँ तक की उस सभी को जिसे ओलों ने रख छोड़ा है।

१३ और मूसा ने अपने लट्ठ को मिस्र की भूमि पर फैला दिया, और प्रभु ने भूमि पर एक पूर्वी वायु चलवाई, उस पूरे दिन और उस पूरी रात; और जब सुबह हो गई थी, वह पूर्वी वायु टिड्डियों को ले आई।

१४ और वह टिड्डियाँ मिस्र के सर्वत्र की भूमि पर ऊपर चलीं गईं, और वह मिस्र की समस्त सीमाओं मे बैठ गईं: अति कष्टमई थीं वह; इन से पूर्व इनके जैसी टिड्डियाँ कभी भी नहीं थीं, ही इनके पश्चात ऐसी होंगी।

१५ क्योंकि उन्होंने समस्त धरती का चेहरा ढक दिया था, कि वह भूमि कजला गई थी; और उन्होंने भूमि की प्रत्येक वनस्पति को, और ओलों से छोड़ दिए गए पेड़ों के सभी फलों को खा लिया: और वृक्षों में, अथ्वा खेत की वनस्पति में, मिस्र की समस्त भूमि के सर्वत्र में, कोई भी हरी वस्तु बची नहीं रही थी।

१६ तब फैरो ने मूसा और हारुन को शीघ्रता से बुलवाया; और उसने कहा, मैंने प्रभु तुम्हारे ईश्वर के विरुद्ध, और तुम्हारे विरुद्ध पाप कर दिया है।

१७ इसलिए अब मेरा पाप क्षमा कर दो, मैं तुम से प्रार्थना करता हूँ, बस केवल इसी बार, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर से विनती कर दो, ताकि वह मुझ से केवल इस मृत्यु को परे हटा ले जा सकें।

१८ और वह फैरो से बाहर निकल चला गया, और उसने प्रभु से विनती की। 

१९ और प्रभु ने एक प्रबल शक्तिशाली पश्चिमी वायु मोड़ी, जिसने उन टिड्डियों को परे हटा दिया, और उन्हें लाल समुद्र में फैंक डाला; एक भी टिड्डी नहीं बची रही मिस्र की समस्त सीमाओं में।

२० परन्तु प्रभु ने फैरो का हृदय कठोर कर दिया, कि उसने इस्राएल की संतानों को नहीं जाने दिया।

२१ और प्रभु मूसा से बोले, स्वर्ग की ओर अपना हाथ बाहर फैला दो ताकि मिस्र की भूमि पर अन्धकार छा जाए, यहाँ तक कि अन्धेरा जो स्पर्श किया जा सके।

२२ और मूसा ने अपना हाथ स्वर्ग की ओर फैला दिया; और तीन दिन मिस्र की समस्त भूमि में एक घना अन्धकार छा गया। 

२३ वह एक दूसरे को देख नहीं पाए, ही कोई भी अपने स्थान पर से तीन दिनो तक उठा: परन्तु इस्राएल की समस्त सन्तानों के पास उनके बसेरों में प्रकाश था। 

२४ और फैरो ने मूसा को बुलवाया, और कहा, चले जाओ तुम, प्रभु की सेवा कर लो; केवल अपने झुण्डों और पशु-समूहों को रह जाने दो: अपने छोटे नन्हों को भी अपने साथ चले जाने दो।

२५ और मूसा ने कहा, तुम्हें अवश्य ही हमें आहुतियाँ और जले चढ़ावे भी प्रदान करने होंगे, ताकि हम प्रभु हमारे ईश्वर के प्रति बलिदान कर सकें। 

२६ हमारे मवेशी भी हमारे साथ जाएँगे; एक भी खुर पीछे नहीं छोड़ा जाएगा; क्योंकि इन्हीं में से ही हमें प्रभु हमारे ईश्वर की सेवा करने हेतु लेना है; और हमें यह ज्ञान नहीं है कि किस के साथ हमें प्रभु की सेवा करनी है, जब तक कि हम वहाँ पहुँच नहीं जाते।

२७ परन्तु प्रभु ने फैरो का हृदय कठोर कर दिया, और उसने उन्हें नहीं जाने दिया।

२८ और फैरो ने उस से कहा, चले जाओ तुम मेरे पास से, ध्यान रख लो अपना, मेरा चेहरा अब और कभी मत देखना; क्योंकि उस दिन में जिस में तुम मेरा चेहरा देखोगे, तुम मर जाओगे।

२९ और मूसा ने कहा, तुम ने भला कहा है, मैं तुम्हारा चेहरा पुनः कभी नहीं देखूँगा।




ग्यारहवाँ अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, तथापि मैं एक और विपत्ती फैरो पर, और मिस्र पर लाऊँगा; तत्-पश्चात वह तुम्हें यहाँ से चले जाने देगा: जब वह तुम्हें चले जाने देगा, वह निश्चितता से ही पूर्णतः तुम्हें यहाँ से खदेड़ देगा। 

लोगों के कानो में अब बोल दो, और प्रत्येक पुरुष को अपने पड़ौसी से, और प्रत्येक स्त्री को अपनी पड़ौसन से चाँदी के आभूषण और सोने के आभूषण, उधार ले लेने दो।

और प्रभु ने लोगों को मिस्रवासियों की दृष्टि में अनुग्रह प्रदान करवा दिया। इसके अतिरिक्त वह पुरुष मूसा, मिस्र की भूमि में अति महान था, फैरो के नौकरों की दृष्टि में, और लोगों की दृष्टि में।

और मूसा ने कहा, यह कह रहे हैं प्रभु, लग-भग मध्य-रात्रि के समय मैं बाहर मिस्र के बीच चला जाऊँगा:

और मिस्र की भूमि में समस्त प्रथम-जन्मे मर जाएँगे, फैरो के प्रथम-जन्मे से लेकर, जो अपने सिंहासन पर बैठता है, दासी-नौकरानी के प्रथम-जन्मे तक भी, जो चक्की के पत्थरों के पीछे है; और जानवरों के समस्त प्रथम-जन्मे भी।

  और मिस्र की समस्त भूमि के सर्वत्र में एक ऐसी बड़ी चीख मचेगी, जैसी कभी मची थी, और ही कभी मचेगी।

परन्तु किसी भी इस्राएल की संतानों के विरुद्ध कोई कुत्ता भी अपनी जीभ नहीं हिलाएगा, ही पुरुष के विरुद्ध, और ही पशु के विरुद्ध: ताकि तुम यह जान सको कि प्रभु मिस्रवासियों और इस्राएल के बीच विभेद करते हैं।

और तुम्हारे यह सभी नौकर नीचे मेरे पास आएँगे, और स्वयं को मेरे प्रति नीचे झुका देंगे, कहते हुए, तुम बाहर निकल चले जाओ, और वह सभी लोग जो तुम्हारा अनुसरण करते हैं: और उसके पश्चात मैं बाहर चला जाऊँगा। और वह फैरो के पास से बहुत क्रोधित हो कर बाहर चला गया।

और प्रभु ने मूसा से कहा, फैरो तुम्हारा श्रवण नहीं करेगा; ताकि मेरे अद्धभुत चमत्कार मिस्र की भूमि में बहुगणित हो सकें।

१० और मूसा और हारुन ने यह सभी अद्धभुत चमत्कार फैरो के समक्ष किए: और प्रभु ने फैरो का हृदय कठोर कर दिया, कि उसने इस्राएल की संतानों को अपनी भूमि में से बाहर नहीं निकल जाने दिया।



बारहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा और हारुन से मिस्र की भूमि में बोले, कहते हुए,

यही महीना तुम्हारे लिए महीनों का आरम्भ होगा: यही तुम्हारे लिए वर्ष का प्रथम महीना होगा। 

तुम इस्राएल की समस्त सभा से बोलो, कहते हुए, इस महीने के दसवें दिन यह अपने प्रति, प्रत्येक पुरुष एक मेमना ले लेगा, अपने पित्रों के घरानोंनुसार, एक मेमना एक घर के लिए:

और यदि वह घरबार उस मेमने के लिए बहुत छोटा हो, उसे और उसके घर के साथ उसके पड़ौसी को उस मेमने को उन प्राणों की संख्यानुसार ले लेने दो; प्रत्येक पुरुष अपने खाने के अनुसार उस मेमने के लिए गिना जाएगा।  

तुम्हारा मेमना निष्कलंक होगा, एक नर पहले वर्ष का: तुम उसे भेड़ों या फिर बकरों में से लोगे:

और तुम उसकी इसी महीने के चौदहवें दिन तक निगरानी करोगे: और इस्राएल की मंडली की सम्पूर्ण सभा उसे संध्या के समय मार देगी।

और वह उस रक्त में से लेकर, उसे उन घरों की उन दो बाजू की चौखटों पर, और द्वार के ऊपर के सरदल पर थपेड़ देंगे, जिन में वह उसे खाएँगे। 

और वह उस माँस को उस रात्रि में खाएँगे, अग्नी से भुना हुआ, और बेख़मीरी रोटी; और कड़वे साग-पात के साथ वह उसे खाएँगे।

उस में से कच्चा, या कतई भी पानी से उबाला हुआ मत खा लेना, बल्कि अग्नी से भुना हुआ; उसका सर उसकी टांगों के साथ, और उसके आंतरिक भागों के साथ।

१० और तुम उसका कोई भी अन्श सुबह तक बचा नहीं रहने दोगे; और उसका वह अन्श जो सुबह तक बचा रह गया है, तुम उसे अग्नी के साथ भस्म कर दोगे।

११ और इस रीति से तुम उसे खाओगे; अपनी कटियों को कसे हुए, अपने पैरों पर तुम्हारे जूते चढ़े हुए, और तुम्हारा लट्ठ तुम्हारे हाथ में: और तुम उसे फुर्ती से खाओगे: यह प्रभु का पार-करना है। 

१२ क्योंकि मैं इस रात्रि मिस्र की भूमि में से पार होता हुआ जाऊँगा, और मैं मिस्र की भूमि में समस्त प्रथम-जन्मों को आघातित कर दूँगा, दोनो मनुष्यों को और जानवरों को; और मिस्र के समस्त ईश्वर-गणों के विरुद्ध मैं न्याय-निर्धारण कार्यान्वित कर डालूँगा: मैं प्रभु हूँ। 

१३ और वह रक्त तुम्हारे प्रति एक प्रतीक होगा, उन घरों पर जहाँ तुम हो: और जब मैं उस रक्त को देखूँगा, मैं तुम पर से पार होता हुआ चला जाऊँगा, और वह विपत्ती तुम्हें नष्ट कर देने हेतु तुम पर नहीं पड़ेगी, जब मैं मिस्र की भूमि को आघातित करूँगा।

१४ और यही दिवस तुम्हारे प्रति एक स्मारक के रूप में होगा; और तुम इसे अपनी पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों तक प्रभु के प्रति एक भोज स्वरूप रखोगे; तुम इसे एक अध्यादेश द्वारा सदैवत्वता के लिए एक भोज रखोगे।

१५ सात दिन तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे; प्रथम दिवस में ही तुम अपने घरों में से खमीर को बाहर हटा दोगे: क्योंकि जो कोई भी प्रथम दिवस से लेकर सातवें दिवस तक खमीरदार रोटी खाएगा, वही प्राण इस्राएल में से काट दिया जाएगा। 

१६ और प्रथम दिवस में एक पवित्र अधिवेशन होगा, और सातवें दिवस में तुम्हारे प्रति एक पवित्र अधिवेशन होगा; किसी भी प्रकार का कार्य उन में नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि प्रत्येक पुरुष अवश्य ही खाए, बस केवल वही तुम्हारे द्वारा किया जाए। 

१७ और तुम बेख़मीरी रोटी के भोज का पालन करोगे; क्योंकि ठीक इसी ही दिन मैं तुम्हारी सेनाओं को मिस्र की भूमि में से बाहर ला चुका हूँ: इसलिए तुम अपनी पीढ़ियों में एक अध्यादेश द्वारा सदैवत्वता के लिए इस दिवस का पालन करोगे।

१८ प्रथम महीने में, महीने के चौदहवें दिवस पर संध्या के समय, तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे, महीने के इक्कीसवें दिवस की संध्या तक।

१९ सात दिन कोई भी खमीर तुम्हारे घरों में नहीं पाया जाएगा: क्योंकि जो कोई भी उसे जो खमीरदर है, खाता है, यहाँ तक कि वही प्राण इस्राएल की सभा में से काट दिया जाएगा, यदि वह कोई परदेशी हो या भूमि में जन्मा।

२० तुम कुछ भी खमीरदर नहीं खाओगे; अपने सभी बसेरों में तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे।

२१ तब मूसा ने इस्राएल के समस्त वृद्ध-गणों को बुलवा भेजा, और उसने उनसे कहा, अपने परिवारोंनुसार एक मेमना बाहर खींच कर अपने लिए ले लो, और उस पार-करने को मार दो।

२२ और तुम एक जूफे के गुच्छे को लेकर, उसे उस रक्त में डुबो दोगे जो उस पात्र में है, और तुम उस ऊपर के सरदल को, और उन दो बाजू की चौखटों को, उस रक्त से थपेड़ दोगे जो उस पात्र में है; और तुम में से कोई भी सुबह तक अपने घर के द्वार में से बाहर नहीं निकलेगा।

२३ क्योंकि प्रभु मिस्रवासियों को आघातित कर देने हेतु पार होते हुए जाएँगे; और जब वह उस रक्त को उस ऊपर के सरदल पर, और उन दो बाजू की चौखटों पर देखते हैं, प्रभु उस द्वार पर से पार हो कर चले जाएँगे, और उस विनाशक को तुम्हारे घरों के भीतर तुम्हें आघातित कर देने हेतु, आने की अनुमति नहीं देंगे।

२४ और तुम इस बात का अनुपालन, अपने स्वयं के और अपने बेटों के प्रति, एक अध्यादेश स्वरूप सदैवत्वता तक करोगे। 

२५ और यह होने को आएगा, कि जब तुम उस भूमि में जाओगे, जिसे प्रभु तुम्हें प्रदान कर देंगे, उन्हीं की प्रतिज्ञानुसार, कि तुम इस सेवा का पालन करोगे।

२६ और यह होने को आएगा, कि जब तुम्हारी सन्तानें तुम से कहेंगी, इस सेवा से आपका क्या अर्थ है? 

२७ तब तुम बोलोगे, यह प्रभु के पार करने की बली है, जो मिस्र में इस्राएल की संतानों के घरों को पार कर गए, जब उन्होंने मिस्रवासियों का वध कर दिया, और हमारे घरों का उद्धार कर दिया। और लोगों ने शीर्ष झुका कर आराधना की।

२८ और इस्राएल की संतानें परे चली गईं, और उन्होंने वैसा ही किया जैसा प्रभु ने मूसा और हारुन को आदेश दिया था, वैसा ही उन्होंने कर दिया। 

२९ और ऐसा हुआ कि मध्य-रात्रि के समय पर, प्रभु ने मिस्र की भूमि में समस्त प्रथम-जन्मों का वध कर डाला, फैरो के प्रथम-जन्मे से लेकर, जो अपने सिंहासन पर बैठा था, उस बन्दी के प्रथम-जन्मे तक, जो कालकोठरी में था; और समस्त मवेशी के प्रथम-जन्मे।

३० और फैरो रात्रि में जाग उठा, वह और उसके सभी नौकर, और सभी मिस्रवासी; और मिस्र में एक बड़ी चीख-पुकार मच गई थी; क्योंकि ऐसा कोई भी एक घर नहीं था, जहाँ कोई एक मरा नहीं था।

३१ और उसने रात्रि में ही मूसा और हारुन को बुलवा भेजा, और कहा, उठो और मेरे लोगों के बीच में से अपने आप को ले चले जाओ, दोनो तुम और इस्राएल की संतानों को; और जाओ, प्रभु की सेवा कर लो, जैसा कि तुम ने कहा है। 

३२ अपने झुण्डों और पशु-समूहों को भी ले जाओ, जैसा तुम ने कहा है, और निकल जाओ; और मुझे आशीष भी दे दो।

३३ और उन मिस्रवासियों ने लोगों के प्रति अविलंबता प्रकट की, ताकि वह उन्हें भूमि में से शीघ्रता से बाहर निकाल भेजें; क्योंकि उन्होंने कहा, हम तो सभी मृत लोग हैं।

३४ और उन लगों ने अपना गूँधा हुआ आटा उसके खमीरदार हो जाने से पहले ही ले लिया, उनके गूँधने के पात्र उनके कपड़ों में बंधे हुए, उनके कंधों पर।

३५ और इस्राएल की संतानों ने मूसा के शब्दानुसार कर दिया; और उन्होंने मिस्रवासियों से चाँदी के आभूषण और सोने के आभूषण, और वस्र उधार ले लिए:

३६ और प्रभु ने लोगों को मिस्रवासियों की दृष्टि में अनुग्रह प्रदान कर दिया, ताकि उन वस्तुओं को जिनकी उन्हें आवश्यकता थी, उन्होंने वह उन्हें उधार पर दे दिए। और उन्होंने मिस्रवासियों को लूट लिया।

३७ और इस्राएल की संतानों ने रामसेस से सुक्कोत तक यात्रा की, लगभग छह लाख पैदल, जो पुरुष थे, बच्चों के अतिरिक्त।

३८ और एक मिला-जुला जनौघ भी उनके साथ ऊपर चला गया; और झुण्ड, और पशु-समुह, और बहुत सारे मवेशी भी।

३९ और उन्होंने उस आटे से बेख़मीरी पराँठे पकाए, जिसे वह मिस्र में से बाहर ले आए थे, क्योंकि वह खमीरदार नहीं हुआ था; क्योंकि उन्हें मिस्र में से बाहर खदेड़ दिया गया था, और वह रुक नहीं सके, ही उन्होंने अपने स्वयं के लिए कोई भी खाद्य पदार्थ तैयार किया था।  

४० अब मिस्र में बसी हुई उन इस्राएल की संतानों का अल्पवास, चार सौ तीस वर्ष था।

४१ और यह हुआ कि उन चार सौ तीस वर्षों की समाप्ति पर, ठीक उसी ही दिन ऐसा होने को आया, कि प्रभु की समस्त सेनाएँ, मिस्र की भूमि में से बाहर निकल चलीं। 

४२ यही एक रात्रि है जो प्रभु के प्रति पालन करने योग्य है, उन्हें मिस्र की भूमि में से बाहर निकाल लाने हेतु: यही प्रभु की वह रात्रि है जिसका इस्राएल की समस्त सन्तानें अपनी पीढ़ियों में पालन करें।

४३ और प्रभु ने मूसा और हारुन से कहा, यही पार-करने का अध्यादेश है: उस में से कोई भी परदेशी नहीं खाएगा:

४४ परन्तु प्रत्येक पुरुष का नौकर जो पैसे से खरीदा हुआ है, जब तुमने उसका ख़तना कर दिया हो, तब वह उस में से खाएगा।

४५ कोई अन्यदेशी, और कोई किराए का नौकर उस में से नहीं खाएगा।

४६ एक ही घर में उसे खाया जाएगा; उस माँस में से कोई भी मात्रा तुम घर में से उठा कर बाहर नहीं ले जाओगे; ही तुम उसकी एक भी हड्डी तोड़ोगे।

४७ इस्राएल की समस्त सभा उसे रखेगी।

४८ और जब कोई परदेशी तुम्हारे साथ अल्पवास करेगा, और प्रभु के प्रति पार-करने को रखेगा, उसके सभी नरों को ख़तनित हो जाने देना, और तब उसे निकट आकर उसका पालन कर लेने देना; और वह एक भूमि में ही जन्मे जैसा होगा: क्योंकि कोई भी बेख़तनित व्यक्ति उस में से नहीं खाएगा।

४९ एक ही नियम होगा, उसके प्रति जो देश में जन्मा हो, और उस परदेशी के प्रति, जो तुम्हारे बीच अल्पवास कर रहा हो।

५० इसी प्रकार ही इस्राएल की समस्त सन्तानों ने किया; जैसा प्रभु ने मूसा और हारुन को आदेश दिया, वैसा ही कर दिया उन्होंने। 

५१ और यह होने को आया, कि ठीक उसी ही दिन, प्रभु इस्राएल की संतानों को उनकी सेनाओं से, मिस्र की भूमि में से बाहर निकाल कर ले ही आए।





तेरहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

मेरे प्रति समस्त प्रथम-जन्मों को पुनीत ठहरा दो, जो कोई भी इस्राएल की संतानों के बीच गर्भ को खोलता है, दोनो मनुष्य का और जानवर का: वही मेरा है। 

और मूसा ने लोगों से कहा, इस दिन को स्मरण में रखना जिस में तुम मिस्र में से बाहर निकल आए थे, बंध्वा-बेगारी के घर में से बाहर; क्योंकि हाथ के बल द्वारा प्रभु तुम्हें इस स्थान में से बाहर निकाल लाए: कोई भी बेख़मीरी रोटी नहीं खाई जाएगी।

इसी दिन तुम बाहर निकल आए, अबीब के महीने में।

और यह ऐसा होगा, कि जब प्रभु तुम्हें कनानवासियों, और हित्ती वंशजों, और एमोरवासियों, और हिव्वीयों, और यबूसी वंशजों की भूमि के भीतर ले आएँगे, जिसका उन्होंने तुम्हें प्रदान कर देने का वचन तुम्हारे पित्रों को दे दिया था, एक भूमि जो दूध और मधु से बहती है, कि तुम इसी महीने में इस सेवा का पालन करोगे।

सात दिन तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे, और सातवें दिन में प्रभु के प्रति एक भोज होगा।

बेख़मीरी रोटी सात दिन खाई जाएगी; और कोई भी खमीरदार रोटी तुम्हारे साथ नहीं देखी जाएगी, ही तुम्हारी समस्त सीमाओं में तुम्हारे साथ खमीर देखा जाएगा।

और उस दिन में तुम अपने बेटे को बता दोगे, कहते हुए, यह इसलिए किया गया है, उस कारण वश जो कि प्रभु ने मेरे प्रति किया था, जब मैं मिस्र में से बाहर निकल आया था।   

और यह तुम्हारे प्रति तुम्हारे हाथ पर एक संकेत हेतु होगा, और यह तुम्हारी आँखों के बीच एक स्मारक हेतु होगा, ताकि प्रभु का नियम तुम्हारे मूँह में हो सके: क्योंकि एक बलशाली हाथ के साथ प्रभु तुम्हें मिस्र में से बाहर निकाल लाए हैं।

१० इसलिए तुम इस अध्यादेश को इसकी ऋतु में साल-दर-साल रखोगे।

११ और ऐसा होने को आएगा, कि जब प्रभु तुम्हें कनानवासियों की भूमि के भीतर ले आएँगे, जैसा कि उन्होंने तुम्हें और तुम्हारे पित्रों को वचन दे दिया था, और वह तुम्हें इसे प्रदान कर देंगे,

१२ कि तुम प्रभु के प्रति उन सभी को परे पृथक कर दोगे जो गर्भ को खोलते हैं, और प्रत्येक पहलौठा जो किसी जानवर में से आता है जो तुम्हारे पास है; वह नर प्रभु के होंगे।

१३ और गधे के प्रत्येक पहलौठे का तुम एक मेमने से मुक्तिभुक्तान करोगे; और यदि तुम उसका मुक्तिभुक्तान नहीं करोगे, तो तुम उसकी गर्दन तोड़ दोगे: और मनुष्य के समस्त प्रथम जन्मों का तुम्हारी सन्तानों के बीच तुम मुक्तिभुक्तान करोगे। 

१४ और यह ऐसा होगा, कि जब तुम्हारा बेटा आगामी समय में तुम से पूछता है, कहता हुआ, यह क्या है? कि तुम उस से कहोगे, प्रभु अपने बाहुबल से हमें मिस्र में से बाहर ले आए, बंध्वा-बेगारी के घराने में से:

१५ और यह ऐसा होने को आया, कि जब फैरो ने हमें कठिनाई से ही जाने दिया, कि प्रभु ने मिस्र की भूमि में समस्त प्रथम-जन्मों की हत्या कर दी, दोनो मनुष्य के प्रथम जन्मों की, और जानवर के प्रथम जन्मों की: इसलिए मैं प्रभु के प्रति उन सभी की बलि चढ़ाता हूँ जो गर्भ खोलते हैं, नर होते हुए; परन्तु मेरे बच्चों में से सभी प्रथम जन्मों का में मुक्तिभुक्तान कर देता हूँ।

१६ और यह तुम्हारे हाथ पर एक प्रतीक के लिए होगा, और तुम्हारी आँखों के बीच एक मस्तक-बन्ध: क्योंकि बाहुबल के द्वारा प्रभु हमें मिस्र में से बाहर ले आए।

१७ और यह होने को आया, कि जब फैरो ने लोगों को चले जाने दिया था, कि ईश्वर उन्हें पलिश्तिमवासियों की भूमि के पथ में से नहीं लेकर गए, यद्यपि वह निकट था; क्योंकि ईश्वर ने कहा, कहिं मान लो यह लोग युद्ध देख कर पछतावा कर लें, और मिस्र में वापस लौट चले जाएँ: 

१८ परन्तु ईश्वर उन लोगों को लाल समुद्र के जँगली क्षेत्र के पथ में से उन्हें ले चले: और इस्राएल की संतानें मिस्र की भूमि में से पाँच-पाँच के युद्ध-व्यूह में ऊपर बाहर निकल चलीं। 

१९ और मूसा ने यूसुफ़ की अस्थियाँ अपने साथ ले लीं: क्योंकि उसने इस्राएल की संतानों से सौगन्ध ले कर शपथ ली थी, कहते हुए, ईश्वर निश्चितता से ही तुम्हारी सुध लेंगे; और तुम यहाँ से मेरी अस्थियाँ उठा कर अपने साथ ले चले जाओगे। 

२० और उन्होंने अपनी यात्रा सुक्कोत से ली, और एताम में जँगली-क्षेत्र के छोर में पड़ाव डाल दिया।

२१ और प्रभु उनका पथ पर नेतृत्व करने हेतु, उनके आगे-आगे दिन-दिन रहते-रहते, एक मेघ के स्तम्भ में जाते थे; और रात-रात में एक अग्नी के स्तम्भ में उन्हें प्रकाश प्रदान करने हेतु; जिस से कि वह दिन-रात यात्रा कर सकें: 

२२ वह उन लोगों के सामने से, उस मेघ के स्तम्भ को ही दिन-दिन के रहते-रहते, ही वह उस अग्नी के स्तम्भ को रात-रात के रहते-रहते, परे हटाते थे।




चौदहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की संतानों से बोलो कि वह मुड़ कर, मिगदोल और समुद्र के बीच, बअलसफोन के विपरीत, पिहाहीरोत के सामने पड़ाव डाल दें: उसी के समक्ष तुम समुद्र के साथ पड़ाव डालोगे।

क्योंकि फैरो इस्राएल की संतानों के विषय में बोलेगा, वह तो भूमी में हक्के-बक्के रह गए हैं, जँगली-क्षेत्र ने तो उन्हें बंदी बना दिया है।

और मैं फैरो का हृदय कठोर कर दूँगा, ताकि वह उनके पीछे-पीछे उनका पीछा करने लग जाए; और मैं फैरो पर, और उसकी सारी सेना में गौरवान्वित हो जाऊँगा; ताकि मिस्रवासी यह जान सकें कि मैं ही प्रभु हूँ। और उन सभी ने ऐसा ही किया। 

और यह मिस्र के राजा को बता दिया गया था कि वह लोग तो भाग गए थे: और फैरो का, और उसके नौकरों का हृदय लोगों के विरुद्ध मोड़ दिया गया था, और उन्होंने कहा, हम ने ऐसा क्यों कर दिया है, कि हम ने इस्राएल को हमारी सेवा करने से चले जाने दिया?

और उसने अपना रथ तैयार किया, और अपने लोग अपने साथ ले लिए:

और उसने छह सौ चुने हुए रथ, और मिस्र के समस्त रथ, और उन में से प्रत्येक पर नियुक्त कप्तान, ले लिए।

और प्रभु ने मिस्र के राजा फैरो का हृदय कठोर कर दिया, और वह इस्राएल की संतानों का पीछा करने लग गया: और इस्राएल की संतानें एक ऊँचे हाथ से बाहर चली गईं।

परन्तु वह मिस्रवासी उनके पीछे-पीछे लग गए, फैरो के सभी घोड़े और रथ, और उसके घुड़सवार, और उसकी सेना, और वह उन तक समुद्र के तट पर जा पहूँचे, जहाँ वह पड़ाव डाले हुए थे, पिहाहीरोत के साथ, बअलसफोन के सामने।

१० और जब फैरो निकट रहा था, इस्राएल की संतानों ने अपनी आँखें ऊपर उठाईं, और देखो तो, वह मिस्रवासी उनका कदम-ताल करते हुए पीछा कर रहे थे; और वह घरोता से डर गए: और इस्राएल की संतानें प्रभु के प्रति चीख पड़ीं।

११ और उन्होंने मूसा से कहा, चूँकी मिस्र में क़ब्रें ही नहीं थीं, तुम हमें जँगली-क्षेत्र में मर जाने के लिए परे ले आए हो? किस कारण वश तुम ने हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया है, हमें मिस्र में से बाहर उठा कर ले आना?

१२ क्या यही वह शब्द नहीं है, जो हमने तुम्हें मिस्र में ही बता दिया था, कहते हुए, कि हमें अकेला छोड़ दो, ताकि हम मिस्रवासियों की सेवा कर सकें? क्योंकि हमारे लिए यह बेहतर हुआ होता कि हम मिस्रवासियों की सेवा करते, इसकी अपेक्षा कि हम जँगली-क्षेत्र में मर जाएँ। 

१३ और मूसा ने लोगों से कहा, तुम डरो मत, स्थिर खड़े रहो, और प्रभु का बचाव देखो, जिसे वह तुम्हें इस दिन प्रदर्शित करेंगे: क्योंकि वह मिस्रवासी जिन्हें तुमने आज देखा है, तुम उन्हें फिर कभी भी नहीं देखोगे, सदैवत्वता तक।

१४ प्रभु तुम्हारे लिए लड़ाई करेंगे, और तुम शान्ती धरे रहोगे।

१५ और प्रभु ने मूसा से कहा, किस कारण वश तुम मेरी ओर चीख रहे हो? इस्राएल की संतानों से बोलो, कि वह आगे बढ़ें: 

१६ परन्तु तुम अपने लट्ठ को ऊपर उठा लो, और अपने हाथ को समुद्र के ऊपर बाहर फैला दो, और उसे विभाजित कर दो: और इस्राएल की सन्तानें समुद्र के बीच में से सूखी धरती पर से होती हुई जाएँगी।

१७ और मैं, देख लो, मैं ही मिस्रवासियों के हृदयों को कठोर कर दूँगा, और वह उनका पीछा करेंगे: और मैं स्वयं के प्रति फैरो पर, और उसकी समस्त सेना पर, उसके रथों पर, और उसके घुड़सवारों पर गौरव प्राप्त करूँगा। 

१८ और वह मिस्रवासी यह जान जाएँगे कि मैं ही प्रभु हूँ, जब मैं फैरो पर और उसकी समस्त सेना पर, उसके रथों पर, और उसके घुड़सवारों पर गौरव प्राप्त कर चुकूँगा।

१९ और वह ईश्वर का दूत जो इस्राएल की छावनी के आगे-आगे जा रहा था, हट कर उनके पीछे चला गया; और उस मेघ का वह स्तम्भ उन सब के चहरे के सामने से जाकर, उन सभी के पीछे खड़ा हो गया:

२० और वह मिस्रवासियों की छावनी और इस्राएल की छावनी के बीच गया; और वह उनके प्रति तो एक मेघ और अन्धकार था, परन्तु इन्हें उसने रात-रात होते हुए प्रकाश प्रदान किया: ताकि वह एक, उस दूसरे के निकट, सारी रात नहीं आया।

२१ और मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर फैला दिया; और प्रभु ने उस सारी रात एक शक्तिशाली पूर्वी वायु द्वारा समुद्र को पीछे हटवा दिया, और उन्होंने समुद्र को सूखी धरती बना दिया, और वह पानी विभाजित हो गए थे।

२२ और इस्राएल की संतानें समुद्र में उसके बीचों-बीच सूखी धरती पर चली गईं: और वह पानी उनके प्रति एक दीवार थे, उनके बाएँ हाथ पर और उनके दाएँ पर।  

२३ और मिस्रवासियों ने पीछा किया, और वह उनके पीछे-पीछे अन्दर चले गए, समुद्र के बीचों-बीच ही, यहाँ तक कि फैरो के समस्त घोड़े, उसके रथ, और उसके घुड़सवार।

२४ और यह होने को आया, कि प्रातः के पहर में, प्रभु ने उस अग्नी और उस मेघ के उस स्तम्भ में से मिस्रवासियों की सेना को देखा, और उन्होंने मिस्रवासियों की सेना को भंग कर दिया,

२५ और उनके रथों के पहियों को उतार दिया, कि वह उन्हें भार-बोझलता से ही चला पाए: कि उन मिस्रवासियों ने कहा, हम इस्राएल के चहरे से भाग जाते हैं; क्योंकि प्रभु ही उनके लिए मिस्रवासियों के विरुद्ध लड़ाई कर रहे हैं।

२६ और प्रभु ने मूसा से कहा, अपने हाथ को समुद्र के ऊपर फैला दो, ताकि वह पानी इन मिस्रवासियों के ऊपर दोबारा से जाएँ, उनके रथों के ऊपर और उनके घुड़सवारों के ऊपर।

२७ और मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर आगे फैला दिया, और वह समुद्र अपनी शक्ती में वापस लौट आया, जब भोर प्रकट हुई; और प्रभु ने मिस्रवासियों को समुद्र के बीचों-बीच ही झाड़ डाला।

२८ और वह पानी वापस लौट आए, और उन्होंने रथों को, और घुड़सवारों को, और फैरो की समस्त सेना को ढक दिया, जो उनके पीछे-पीछे समुद्र में गए थे; भई उन में से तो एक भी कैसा होता है, बचा नहीं रहा।

२९ परन्तु इस्राएल की संतानें समुद्र के बीच सूखी धरती पर चलती गईं; और वह पानी उनके प्रति एक दीवार थे, उनके बाएँ हाथ पर, और उनके दाएँ पर।  

३० इस प्रकार प्रभु ने उस दिन इस्राएल को मिस्रवसियों के हाथ में से बाहर बचा लिया; और इस्राएल ने उन मिस्रवसियों को समुद्र तट पर मरा हुआ देखा।

३१ और इस्राएल ने उस महान कार्य को देखा, जो प्रभु ने मिस्रवसियों पर कर दिया था: और उन लोगों ने प्रभु का भय माना, और प्रभु पर विश्वास किया, और उनके सेवक मूसा पर। 



पन्द्रहवाँ अध्याय।


तब मूसा और इस्राएल की संतानों ने प्रभु के प्रति यह गीत गाया, और वह बोले कहते हुए, मैं प्रभु के प्रति गाऊँगा, क्योंकि वह महिमा से विजयी हो गए हैं: वह घोड़ा और वह उसका सवार उन्होंने समुद्र में फैंक दिया है।

प्रभु मेरी शक्ती और गीत हैं, और वह मेरा बचाव बन गए हैं: वह मेरे ईश्वर हैं, और मैं उनके लिए एक बसेरा तैयार करूँगा; मेरे पिता के ईश्वर, और मैं उन्हें पदोन्नत करूँगा।

प्रभु एक योद्धा पुरुष हैं: प्रभु उनका नाम है।  

फैरो के रथों को, और उसकी सेना को उन्होंने समुद्र में फैंक डाला है: उसके चुनिंदा कप्तान भी लाल समुद्र में डूबे हुए हैं।

उन गहराईयों ने उन्हें ढक दिया है: वह तो एक पत्थर समान तले में डूब गए।

हे प्रभु, आपका दायाँ हाथ शक्ती में महिमामई बन गया है: हे प्रभु, आपके दाएँ हाथ ने शत्रु को टुकड़ों-टुकड़ों में चकनाचूर कर दिया है।

और आपकी परमश्रेठता की महानता में आपने उन्हें धराशायी कर दिया है, जो आपके विरुद्ध उठ खड़े हुए: आपने अपने आक्रोश को आगे भेजा, जिस ने उनका भूसे के समान भक्षण कर लिया।

और आपके नथुनों के विस्फोट के साथ वह पानी एक साथ एकत्रित हो गए, वह प्रलय एक ढेर समान सीधे खड़े हो गए, और वह गहराईयाँ समुद्र के हृदय में जम गईं।

उस शत्रु ने कहा, मैं पीछा करूँगा, मैं पार कर लूँगा, मैं लूट का विभाजन कर लूँगा; मेरी वासना उन पर तृप्त हो जाएगी; मैं अपनी तलवार खींचूँगा, मेरा हाथ उन्हें नष्ट कर देगा।

१० आपने ही अपनी वायु के साथ फूंक मारी, समुद्र ने उन्हें ढक लिया; वह सीसे के समान उन बलशाली पानियों में डूब गए।

११ ईश्वरों के बीच, कौन है आपकी समानता में, हे प्रभु? वह कौन है आपके जैसा, पवित्रता में महिमामई, प्रशन्साओं में भयावह, अद्धभुत चमत्कारों के कर्ता?

१२ आपने अपना दायाँ हाथ बाहर फैला दिया, पृथ्वी ने उन्हें निगल लिया।

१३ आपने अपनी करुणा में उन लोगों का आगे नेतृत्व कर दिया है, जिनका आपने मुक्तिभुक्तान कर दिया है: आपने उनका अपने पवित्र बसेरे पर्यत अपनी शक्ती में मार्गदर्शन कर दिया है।

१४ लोग सुनेंगे और भयभीत हो जाएँगे: शोक पलिश्तीन के निवासियों को पकड़ लेगा।

१५ तब एदोम के नवाब आतंकित हो जाएँगे; मोआब के बलशाली पुरुषों पर कम्पन की पकड़ पड़ेगी: कनान के समस्त निवासी पिघलते चले जाएँगे।

१६ उन पर भय और आतंक गिर पड़ेगा; आपकी भुजा की विशालता के द्वारा वह एक पत्थर के समान मूक हो जाएँगे; जब तक कि आपके लोग पार नहीं चले जाते, हे प्रभु, जब तक कि वह लोग पार नहीं चले जाते जिन्हें आपने खरीद लिया है।

१७ आप उन्हें भीतर ले आएँगे, और उन्हें अपनी विरासत के पर्वत में रोप देंगे, उस स्थान में हे प्रभु, जिसे आपने अपने भीतर बसने के लिए बना दिया है, उस पुण्य-स्थान में, हे प्रभु, जिसे आपके हाथों ने स्थापित कर दिया है।

१८ प्रभु राज करेंगे, सदैवत्वता से लेकर सदैवत्वता तक।

१९ क्योंकि फैरो का घोड़ा अंदर गया, उसके रथों और उसके घुड़सवारों के साथ समुद्र के भीतर, और प्रभु फिर से समुद्र के पानियों को उन पर ले आए; परन्तु इस्राएल की संतानें समुद्र के मध्य में से सूखी धरती पर गईं।

२० और हारुन की बहन, पैग़म्बरिका मरियम ने एक ढपली अपने हाथ में ली; और सभी स्त्रियाँ उसके पीछे-पीछे बाहर गईं, ढपलियों और नृत्यों के साथ।

२१ और मरियम ने उन्हें उत्तर दिया, प्रभु के प्रति तुम गान गाओ, क्योंकि वह महिमा से विजयी हो गए हैं; वह घोड़ा और उसका सवार उन्होंने समुद्र में फैंक डाला है।

२२ तो मूसा इस्राएल को लाल समुद्र से ले आया, और वह बाहर शूर के जँगली-क्षेत्र में चले गए; और वह तीन दिन जँगली-क्षेत्र में चलते गए, और उन्होंने कोई पानी नहीं पाया।

२३ और जब वह मारा पहूँच गए थे, वह मारा के पानियों को नहीं पी सके, क्योंकि वह कड़वे थे: इसलिए उसका नाम मारा कहलाया गया था।

२४ और वह लोग मूसा के विरुद्ध बड़बड़ा पड़े, कहते हुए, हम क्या पीएँ?

२५ और वह प्रभु के प्रति चीखा; और प्रभु ने उसे एक पेड़ दिखला दिया, जिसे जब उसने पानियों में फैंक दिया था, वह पानी मधुर बना दिया गया: वहीं उन्होंने उनके लिए एक संविधि, और एक अध्यादेश बनाया, और वहीं उन्होंने उन्हें परखा,

२६ और कहा, यदि तुम लगन के साथ प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण करोगे, और वही करोगे जो उनकी दृष्टि में सही है, और तुम उनके आदेशों पर अपने कान लगाओगे, और उनकी समस्त संविधियों का पालन करोगे, मैं इन रोगों में से कोई भी तुम पर नहीं लगाऊँगा, जिन्हें मैंने मिस्रवासियों पर लगा दिया है: क्योंकि मैं वह प्रभु हूँ जो तुम्हें निरोग करता है। 

२७ और वह एलीम पहुँचे, जहाँ पानी के बारह कूएँ थे, और सत्तर खजूर के वृक्ष: और उन्होंने उन पानियों के साथ पड़ाव डाल दिया।



सोलहवाँ अध्याय।


और उन्होंने एलीम से अपनी यात्रा करी, और इस्राएल की संतानों की समस्त सभा, दूसरे महीने के पन्द्रहवें दिन, मिस्र की भूमि में से बाहर प्रस्थान कर लेने के पश्चात, सीन के जँगली-क्षेत्र तक पहुँचे, जो की एलीम और सीनय के बीच है।

और इस्राएल की संतानों की समस्त सभा जँगली क्षेत्र में, मूसा और हारुन के विरुद्ध बड़बड़ाए:

और इस्राएल की संतानों ने उन से कहा, काश कि हम प्रभु के हाथों मिस्र की भूमि में ही मर गए होते, जब हम माँस की कढ़ाईयों के साथ बैठते थे, और जब हम ने तृप्ति-भर रोटी भी खाई; क्योंकि तुम हमें बाहर इस जँगली-क्षेत्र में ले आए हो, इस समस्त मंडली को भूख से मार डालने हेतु।

तब प्रभु ने मूसा से कहा, देखो मैं तुम्हारे लिए स्वर्ग में से रोटी की वर्षा करवाऊँगा: और लोग बाहर जाएँगे और प्रत्येक दिन एक निश्चित मात्रा एकत्रित करेंगे, ताकि मैं इन्हें परख सकूँ की यदि यह मेरे नियम में चलेंगे या नहीं। 

और ऐसा होने को आएगा की छटे दिन वह उसे तैयार करेंगे जिसे वह अंदर ले आए हैं; और वह उससे जो वह दिन-प्रतिदिन एकत्रित करते हैं, दुगुना होगा।

और मूसा और हारुन ने इस्राएल की समस्त सन्तान से कहा, संध्या के समय, तब तुम जान जाओगे की प्रभु तुम्हें मिस्र की भूमि से बाहर निकाल कर ले आए हैं: 

और सुबह के समय, तब तुम प्रभु की महिमा देख लोगे; क्योंकि वह तुम्हारी प्रभु के विरुद्ध बड़बड़ाहटें सुन रहे हैं: और हम क्या हैं की तुम हमारे विरुद्ध बड़बड़ा रहे हो?

और मूसा ने कहा, यह होगा जब प्रभु तुम्हें सन्ध्या में माँस खाने के लिए देंगे, और सुबह तृप्ति-भर रोटी; क्योंकि प्रभु तुम्हारी बड़बड़ाहटें सुन रहे हैं जो तुम उनके विरुद्ध बड़बड़ा रहे हो: और हम क्या हैं? तुम्हारी बड़बड़ाहटें हमारे विरुद्ध नहीं हैं बल्कि प्रभु के विरुद्ध हैं।

और मूसा ने हारुन से कहा,  इस्राएल की संतानों की समस्त सभा से कहो, प्रभु के समक्ष निकट जाओ: क्योंकि उन्होंने तुम्हारी बड़बड़ाहटें सुन लीं हैं।

१० और यह होने को आया, जैसे हारुन इस्राएल की संतानों की सम्पूर्ण सभा से बोल रहा था, की उन्होंने जँगली-क्षेत्र की ओर देखा और देखो तो, प्रभु की महिमा एक मेघ में प्रकट हुई। 

११ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

१२ मैंने इस्राएल की संतानों की बड़बड़ाहटें सुन लीं हैं: उन से बोलो कहते हुए, संध्या में तुम माँस खाओगे और सुबह तुम रोटी से तृप्त हो जाओगे; और तुम जान जाओगे की मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर।

१३ और यह होने को आया की संध्या को बटेरें ऊपर गईं, और उन्होंने डेरे को ढक दिया: और सुबह सेना के चारों ओर आस पास ओस पड़ी थी।

१४ और जब वह ओस जो पड़ी थी ऊपर चली गई थी, देखो तो, जँगली-क्षेत्र के चहरे पर एक छोटी गोल वस्तु पड़ी थी, धरती पर जमे हुए पाले जितनी छोटी। 

१५ और जब इस्राएल की संतानों ने उसे देखा, उन्होंने एक ने दूसरे से कहा, यह मन्ना है: क्योंकि वह यह जानते नहीं थे कि वह क्या थी? और मूसा ने उन से कहा, यह वह रोटी है जिसे प्रभु ने तुम्हें खाने के लिए दी है।   

१६ यह है वह बात जिसका प्रभु ने आदेश दिया है, इस में से प्रत्येक पुरुष अपने खाने के अनुसार बटोर लो, एक ओमर प्रत्येक पुरुष के लिए, तुम्हारे लोगों की संख्यानुसार, तुम प्रत्येक पुरुष उनके लिए ले लो जो उसके तम्बुओं में हैं।

१७ और इस्राएल की संतानों ने ऐसा ही किया और बटोर लिया, कुछों ने अधिक, कुछों ने कम।

१८ और जब उन्होंने उसे एक ओमर से मापा, उसने जिसने अधिकता से बटोरा आधिक्यहीन रहा; और उसने जिसने अल्पता से बटोरा, अल्पहीन रहा; और उन्होंने प्रत्येक पुरुष ने अपने खाने के अनुसार बटोर लिया।

१९ और मूसा ने कहा, कोई भी पुरुष उसे सुबह तक बचाकर नहीं रखेगा।

२० तथापि उन्होंने मूसा के प्रति श्रवण नहीं किया; परन्तु उन में से कुछों ने उस में से सुबह तक बचा छोड़ा, और उस में कीड़े पड़ गए और वह दुर्गंधमई हो गया: और मूसा उनके साथ क्रोधित हो गया।

२१ और उन्होंने उसे प्रत्येक सुबह बटोरा, प्रत्येक पुरुष ने उस के खाने के अनुसार: और जब सूर्य तपने लगता, वह पिघल जाता।

२२ और यह होने को आया, की छटे दिन उन्होंने उससे दुगुनी रोटी बटोरी, दो ओमर एक पुरुष के लिए: और सभी सभा के अध्यक्षों ने आकर मूसा को बताया।

२३ और उसने उनसे कहा, यही है वह जो प्रभु ने कह दिया है, कल प्रभु के प्रति पवित्र सैबथ का विश्राम है: आज ही वह पका लो जो तुम पकाओगे, और उबाल लो वह जो तुम उबालोगे; और वह जो बचा रह जाता है उसे अपने लिए सुबह तक रख लो।

२४ और उन्होंने उसे सुबह तक रख छोड़ा, जैसा कि मूसा ने आदेश दिया था: और उस में से दुर्गंध नहीं आई, ही उस में कोई भी कीड़ा था।

२५ और मूसा ने कहा, इसे आज खालो; क्योंकि आज प्रभु के प्रति एक सैबथ है: आज तुम उसे खेत में नहीं पाओगे।

२६ छह दिन तुम उसे बटोरोगे; परन्तु सातवें दिन, जो की सैबथ है, उस में कुछ नहीं पाओगे।

२७ और यह होने को आया की लोगों में से कुछ, सातवें दिन बाहर बटोरने चले गए, और उन्होंने कुछ भी नहीं पाया। 

२८ और प्रभु ने मूसा से कहा, तुम कितने समय से मेरे आदेशों और मेरे नियमों का पालन करने से इनकार करते हो? 

२९ देखो, क्योंकि प्रभु ने तुम्हें सैबथ दे दिया है, इसलिए वह तुम्हें छटे दिन दो दिन की रोटी दे रहे हैं; प्रत्येक पुरुष अपने स्थान में वास करे, किसी भी पुरुष को सातवें दिन अपने स्थान में से मत बाहर जाने देना।

३० तो लोगों ने सातवें दिन विश्राम किया।

३१ और इस्राएल के घराने ने उसका नाम मन्ना पुकारा: और वह धनिए के बीज समान था, श्वेत; और उसका स्वाद मधु के साथ बने पताशों समान था।

३२ और मूसा ने कहा, यही है वह बात जिसका प्रभु आदेश दे रहे हैं, इसका एक ओमर भर कर रख लो तुम्हारी पीढ़ियों के लिए; ताकि वह इस रोटी को देख सकें जिस के साथ मैंने तुम्हें जँगली-क्षेत्र में खिलाया है, जब मैं तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर ले आया था।

३३ और मूसा ने हारुन से कहा, एक कलश ले लो, और उस में एक ओमर भर मन्ना डाल दो, और उसे प्रभु के समक्ष ठहरा दो, तुम्हारी पीढ़ियों हेतु रख लेने के लिए।

३४ जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया, वैसे ही हारुन ने उसे अनुबन्ध के समक्ष ठहरा दिया, उसे रख लेने हेतु।

३५ और इस्राएल की संतानों ने मन्ना चालीस वर्ष खाया, जब तक की वह एक बसी हुई भूमि तक पहुँचे; उन्होंने मन्ना खाया, जब तक की वह कनान की भूमि की सीमाओं तक पहुँच गए।

३६ तो अब एक ओमर, एक एफाह का दसवाँ भाग है।



सत्रहवाँ अध्याय।


और इस्राएल की संतानों की समस्त सभा ने सीन के जँगली-क्षेत्र से यात्रा की, अपनी यात्राओं के पश्चात, प्रभु के आदेशानुसार, और उन्होंने रफीदीम में डेरा डाल दिया: और लगों के पीने के लिए कोई भी पानी नहीं था।

इसी कारण लोग मूसा से झिड़क पड़े, और उन्होंने कहा, पानी दे दो ताकि हम पी सकें। और मूसा ने उनसे कहा, तुम मेरे साथ क्यों झिड़क रहे हो? तुम प्रभु को किस कारण परीक्षित कर रहे हो?

और लोग वहाँ पानी के लिए प्यासे थे; और लोग मूसा के विरुद्ध बड़बड़ाए और कहा, यह किस कारण वह है की तुम हमें मिस्र में से बाहर ऊपर ले आए हो, हमें और हमारे बच्चों को और हमारे मवेशी को प्यास से मार डालने के लिए?

और मूसा प्रभु के प्रति चीखा, कहता हुआ, मैं इन लोगों के प्रति क्या करूँ? यह तो मुझ पर पथराव कर देने के लिए लगभग तैयार ही हैं।

और प्रभु ने मूसा से कहा, लोगों के समक्ष चले जाओ, और अपने साथ इस्राएल के वृद्धों में से ले लो; और अपना लट्ठ जिस से तुमने नदी पर प्रहार किया था, उसे अपने हाथ में ले लो, और चले जाओ।

देखो, मैं तुम्हारे समक्ष उस शिला पर होरेब में खड़ा हो जाऊँगा; और तुम उस शिला पर प्रहार करोगे, और उस में बाहर जल निकल आएगा ताकि लोग पी सकें। और मूसा ने इस्राएल के वृद्धों की दृष्टि में ऐसा ही कर दिया।

और उसने उस स्थान का नाम मेस्सा और मरीबा पुकारा, इस्राएल की संतानों के झिड़कने के कारण, और क्योंकि उन्होंने प्रभु की परीक्षा ली कहते हुए, क्या प्रभु हमारे बीच हैं भी या नहीं? 

तब अमालेक आया और इस्राएल के साथ रफीदीम में लड़ा।

और मूसा ने यहोशुआ से कहा, हमारे लिए पुरुषों को चुन लो, और बाहर जाओ, और अमालेक से लड़ो: कल मैं पहाड़ी की चोटी के ऊपर अपने हाथ में ईश्वर के लट्ठ के साथ खड़ा हूँगा।

१० तो यहोशुआ ने वैसा किया जैसा उसे मूसा ने कहा था, और वह अमालेक से लड़ा: और मूसा, हारुन, और हूर पहाड़ी की चोटी पर ऊपर चले गए।

११ और यह होने को आया की जब मूसा ने अपना हाथ ऊपर ठहराया, की इस्राएल अभिभावी रहा: और जब उसने अपना हाथ नीचे किया, अमालेक अभिभावी रहा।

१२ परन्तु मूसा के हाथों का भार बढ़ रहा था, और उन्होंने एक पत्थर लिया और उसे उसके नीचे स्थित कर दिया, और वह उन पर बैठ गया; और हारुन और हूर ने उसके हाथों को ऊपर रोके रखा, एक एक ओर, और वह दूसरा दूसरी ओर; और सूर्य की नीचे चले जाने तक उसके हाथ स्थिर थे।

१३ और यहोशुआ ने अमालेक और उसके लोगों को तलवार की धार से परास्त कर दिया। 

१४ और प्रभु ने मूसा से कहा, इसे एक पुस्तक में एक स्मृति हेतु लिखो, और इसे यहोशुआ के कानो में डाल दो: क्योंकि मैं स्वर्ग के नीचे से अमालेक की स्मृति को सरासर मिटा डालूँगा।

१५ और मूसा ने एक बलिवेदी का निर्माण किया, और उसका नाम जेहोवाहनिस्सी पुकारा:

१६ क्योंकि उसने कहा, क्योंकि प्रभु ने सौगन्ध खा ली है की प्रभु अमालेक के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी युद्ध करेंगे।





अट्ठारहवाँ अध्याय।


जब मिद्यान के पुरोहित यित्रो, मूसा के ससुर ने उस सब के विषय में सुना जो ईश्वर ने मूसा के लिए और इस्राएल उनके लोगों के लिए किया था, और की प्रभु इस्राएल को मिस्र में से बाहर निकाल कर ले आए थे;   

तब मूसा के ससुर यित्रो ने मूसा की पत्नी सिप्पोराह को लिया, उसके उसे वापस भेज देने के पश्चात,

और सिप्पोराह के दो बेटों को; जिन में से एक का नाम गेर्शोम था; क्योंकि उसने कहा, मैं एक परदेशी भूमि में एक परदेशी रहा हूँ:

और उस दूसरे का नाम था एलीएज़र; क्योंकि मेरे पिता के ईश्वर, कहा उसने, मेरी सहायता थे, और फैरो की तलवार से मेरा उद्धार कर दिया:

और मूसा का ससुर यित्रो, मूसा के बेटों और उसकी पत्नी के साथ, मूसा के पास जँगली-क्षेत्र में गया, जहाँ उसने ईश्वर के पहाड़ पर पड़ाव डाला हुआ था:

और उसने मूसा से कहा, मैं यित्रो तुम्हारा ससुर तुम्हारे पास गया हूँ, और तुम्हारी पत्नी, और उसके दो बेटे उसके साथ।

और मूसा अपने ससुर से मिलने बाहर चला गया, और उसने अभिवादन किया, और उसे चूमा; और उन दोनो ने एक दूसरे के कल्याण के विषय में पूछ-ताछ की; और वह तम्बू के अंदर गए।

और मूसा ने अपने ससुर को वह सब कुछ बता दिया जो प्रभु ने फैरो के प्रति, और मिस्रवासियों के प्रति, इस्राएल के वास्ते कर दिया था, और वह समस्त पीड़ा जो उन पर पथ पर पड़ी थी, और कि कैसे प्रभु ने उनका उद्धार कर दिया था। 

और यित्रो ने उस समस्त भलाई के लिए हर्ष मनाया जो प्रभु ने इस्राएल के लिए की थी, जिसे उन्होंने मिस्रवासियों के हाथ में से बाहर उद्धारित कर दिया था।

१० और यित्रो ने कहा, धन्य हों प्रभु, जिन्होंने तुम्हें मिस्रवासियों के हाथ में से, और फैरो के हाथ में से बाहर उद्धारित कर दिया है, जिन्होंने लोगों का मिस्रवासियों के हाथ के नीचे से उद्धार कर दिया है।

११ अब मैं जानता हूँ की प्रभु समस्त ईश्वरों से बृहत्तर हैं: क्योंकि उस बात में जिस में उन्होंने अभिमान से व्यवहार किया, वह उन से ऊपर थे।

१२ और मूसा के ससुर यित्रो ने ईश्वर के लिए एक जला चढ़ावा और आहुतियाँ लीं: और हारुन आया, और इस्राएल के समस्त वृद्ध, मूसा के ससुर के साथ, ईश्वर समक्ष रोटी खाने हेतु।

१३ और यह होने को आया की अगले दिन, मूसा लोगों का न्याय करने हेतु बैठा: और लोग मूसा के साथ सुबह से लेकर संध्या तक खड़े थे।

१४ और जब मूसा के ससुर ने वह सब देखा जो वह लोगों के प्रति करता था, उसने कहा, यह क्या बात है जो तुम लोगों के प्रति कर रहे हो? तुम अकेले ही क्यों बैठते हो, और सभी लोग तुमारे साथ खड़े हो जाते हैं, सुबह से लेकर साँझ तक भी?  

१५ और मूसा ने अपने ससुर से कहा, क्योंकि लोग मेरे पास ईश्वर से पूछने आते हैं:

१६ जब इनके पास कोई विषय उठता है, वह मेरे पास जाते हैं; और मैं एक-दूसरे के बीच न्याय करता हूँ, और मैं उन्हें ईश्वर की विधियों का, और उनके नियमों का ज्ञान दिलवा देता हूँ। 

१७ और मूसा के ससुर ने उससे कहा, यह कार्य जो तुम कर रहे हो अच्छा नहीं है।

१८ तुम अवश्य ही घिस जाओगे, दोनो तुम, और यह लोग जो तुम्हारे साथ हैं: क्योंकि यह बात तुम्हारे लिए बहुत ही भारवत है; तुम इसे अकेले करने में सक्षम नहीं हो।

१९ मेरी वाणी पर अब श्रवण कर लो, मैं तुम्हें परामर्श दूँगा, और ईश्वर तुम्हारे साथ होंगे: तुम लोगों के लिए ईश्वर के प्रति रहो, ताकि तुम ईश्वर के प्रति उनके मुद्दे ला सको:

२० और तुम उन्हें अध्यादेश और नियम सिखाओगे, और उन्हें उस पथ से अवगत कराओगे जिस में इन्हें अवश्य चलना है, और वह कार्य जो इन्होंने अवश्य करना है।

२१ इसके अतिरिक्त तुम समस्त लोगों में से सक्षम पुरुष चुन लो, ऐसे जो ईश्वर का भय मानते हैं, सत्य के पुरुष, लोलुप्ता से घृणा करते हुए; और ऐसों को उन पर स्थित कर दो, हज़ारों के शासक, और सौ-सौ के शासक, और पचास-पचास के शासक, और दस-दस के शासक:

२२ और उन्हें सभी समयों में लोगों का न्याय कर देने दो: और यह ऐसा होगा की, प्रत्येक बड़ा मुद्दा वह तुम्हारे पास ले आएँगे, परन्तु प्रत्येक छोटा मसला वह आँक लेंगे: तो इस प्रकार तुम्हारे लिए यह सरल हो जाएगा, और वह तुम्हारे साथ भार का बोझ ढो लेंगे।

२३ यदि तुम इस बात को कर लोगे, और ईश्वर तुम्हें ऐसा आदेश दे देते हैं, तब तुम सहन करने में सक्षम होगे, और यह सभी लोग भी अपने स्थानों में शान्ति में चले जाएँगे।

२४ तो मूसा ने अपने ससुर की वाणी का श्रवण कर लिया, और वह सब कुछ कर डाला जो उसने कहा था।

२५ और मूसा ने समस्त इस्राएल में सक्षम पुरुष चुन लिए, और उसने उन्हें लोगों पर मुखिया बना दिए, हज़ारों के शासक, और सौ-सौ के शासक, और पचास-पचास के शासक, और दस-दस के शासक।

२६ और उन्होंने समस्त समयों में लोगों का न्याय किया: कठिन विषय वह मूसा के पास ले आते थे, परन्तु प्रत्येक छोटा मुद्दा वह स्वयं ही आँक लेते थे।

२७ और मूसा ने अपने ससुर को प्रस्थान कर लेने दिया; और वह अपने पथ पर अपने स्वयं की भूमी में चला गया।




उन्नीसवाँ अध्याय।


तीसरे महीने में, जब इस्राएल की संतानें मिस्र की भूमि में से बाहर चली जा चुकी थीं, उसी दिन वह सीनय के जँगली-क्षेत्र के अन्दर गए।

क्योंकि उन्होंने रफीदीम से प्रस्थान कर लिया था, और वह सीनय के निर्जन-क्षेत्र तक गए थे, और उन्होंने जँगली-क्षेत्र में डेरा डाल दिया था; और वहाँ इस्राएल ने पहाड़ के समक्ष डेरा डाल दिया।

और मूसा ऊपर ईश्वर के पास चला गया, और प्रभु ने उसे पर्वत में से बाहर पुकारा, कहते हुए, इस प्रकार तुम याकूब के घराने से कहोगे, और इस्राएल की संतानों को बताओगे;

तुम ने देख लिया है, की मैंने क्या किया मिस्रवासियों के साथ, और कैसे कैसे मैंने तुम्हें गिद्धों के पंखों पर ढोया, और तुम्हें अपने स्वयं के पास ले आया।

अब इसलिए, यदि तुम वास्तव में ही मेरी वाणी का पालन करोगे, और मेरे प्रतिज्ञा-पत्र को रखोगे, तब तुम मेरे प्रति समस्त लोगों से ऊपर एक विचित्र निधि बन जाओगे: क्योंकि समस्त पृथ्वी मेरी है। 

और तुम मेरे प्रति एक पुरोहितों का राज्य, और एक पवित्र राष्ट्र बन जाओगे। यही हैं वह शब्द जो तुम इस्राएल की संतानों से बोलोगे।

और मूसा आया, और उसने लोगों के वृद्धों को बुलवा भेजा, और उसने उनके चेहरों के समक्ष यह समस्त शब्द रख दिए जिनका प्रभु ने उसे आदेश दिया था।

और समस्त लोगों ने एक साथ उत्तर दिया, और कहा, जो कुछ भी प्रभु ने बोला है हम उसे करेंगे। और मूसा लोगों के शब्दों को प्रभु को लौटा लाया। 

और प्रभु ने मूसा से कहा, लो, मैं तुम्हारे पास एक घने मेघ में आऊँगा, ताकि लोग सुन सकें जब मैं तुम्हारे साथ बोलता हूँ, और तुम्हारा सदैवत्वता तक विश्वास करें। और मूसा ने लोगों के शब्दों को प्रभु को बता दिए।  

१० और प्रभु ने मूसा से कहा, अपने लोगों के पास चले जाओ, और उन्हें आज और कल पुनीत कर दो, और उन्हें अपने कपड़े धो लेने दो,

११ और वह तीसरे दिन के प्रति उद्यत रहें: क्योंकि तीसरे दिन प्रभु सभी लोगों की दृष्टि में सीनय के पहाड़ पर नीचे जाएँगे।

१२ और तुम लोगों के प्रति चारों ओर सीमाएँ बाँध दोगे, कहते हुए, अपने स्वयं का ध्यान रख लेना, की तुम ऊपर पहाड़ पर मत चले जाना, या उसकी सीमा को छू देना: जो कोई भी पहाड़ को छूता है, अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा:

१३ कोई भी हाथ उसे नहीं छुएगा, बल्कि उस पर अवश्य ही पथराव कर दिया जाएगा, या वह भेद दिया जाएगा; भले ही वह जानवर हो या पुरुष, वह जीवित नहीं रहेगा: जब वह चिंघाड़ा दीर्घ काल के लिए चिंघाड़ेगा, वह ऊपर पहाड़ पर जाएँगे।

१४ और मूसा पहाड़ पर से नीचे लोगों के पास चला गया, और उसने लोगों को पुनीत कर दिया; और उन्होंने अपने कपड़े धो दिए।

१५ और उसने लोगों से कहा, तीसरे दिन के प्रति उद्यत रहना: अपनी पत्नियों के पास मत आना।

१६ और यह होने को आया, तीसरे दिन सुबह, की गर्जनें और बिजलियाँ कड़कीं, और एक घना मेघ पहाड़ पर, और उस चिंघाड़े की चिंघाड़ अत्याधिक प्रबल थी; की वह सभी लोग जो शिविर में थे थर-थरा गए।

१७ और मूसा लोगों को ईश्वर से मिलने के लिए शिविर में से बाहर आगे ले आया; और वह पहाड़ के निचले भाग पर खड़े हो गए।

१८ और सीनय पर्वत सम्पूर्णता से ही धुएँधार हो गया, क्योंकि प्रभु  ने उस पर अग्नी में अवरोहण किया: और उसके धुएँ ने एक भट्टी के धुएँ के समान आरोहण किया, और वह सम्पूर्ण पहाड़ अत्याधिकता से काँप उठा।

१९ और जब उस चिंघाड़े की चिंघाड़ दीर्घ काल तक चिंघाड़ी, और ज़ोरदार से ज़ोरदार होती चली गई, तो मूसा बोला, और ईश्वर ने उसे एक वाणी के द्वारा उत्तर दिया।

२० और प्रभु सीनय पर्वत पर नीचे गए, उस पहाड़ की चोटी पर: और प्रभु ने मूसा को पहाड़ की चोटी तक बुलवा लिया; और मूसा ऊपर चला गया।

२१ और प्रभु ने मूसा से कहा, नीचे चले जाओ, आदेश दे दो लोगों को, कहिं वह प्रभु के प्रति ताकने के लिए टूट पड़ें, और उन में से कई नष्ट हो जाएँ।

२२ और उन पुरोहितों को भी, जो प्रभु के निकट आते हैं, स्वयं को पुनीत कर लेने दो, कहिं प्रभु उन पर टूट पड़ें। 

२३ और मूसा ने प्रभु से कहा, लोग सीनय पर्वत तक ऊपर नहीं सकते: क्योंकि आपने हमें आदेश दे दिया है कहते हुए, सीमाएँ बाँध दो पर्वत के चारों ओर, और उसे पुनीत कर दो।

२४ और प्रभु ने उससे कहा, दूर, चले जाओ तुम नीचे, और तुम ऊपर आओगे, तुम और हारुन तुम्हारे साथ: परन्तु उन पुरोहितों और लोगों को मत टूट पड़ने देना, प्रभु के पास ऊपर जाने हेतु, कहिं वह उन पर टूट पड़ें।

२५ तो मूसा लोगों के पास नीचे चला गया, और वह उनसे बोला।



बीसवाँ अध्याय।


और ईश्वर ने यह सभी शब्द बोले कहते हुए,

मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर लाया, दासत्व के घराने में से बाहर।   

तुम मेरे समक्ष कोई भी अन्य ईश्वरों को नहीं रखोगे। 

तुम अपने लिए कोई भी उत्कीर्ण की गई प्रतिमा नहीं बनाओगे, या कोई भी समानता किसी भी वस्तु की जो ऊपर स्वर्ग में है, या जो नीचे पृथ्वी में है, या जो पृथ्वी के तले पानी में है:

तुम स्वयं को उनके प्रति नीचे नहीं झुकाओगे, ही उनकी सेवा करोगे: क्योंकि मैं प्रभु तुम्हारा ईश्वर एक ईर्षालू ईश्वर हूँ, पित्रों की अधर्मताओं का दण्ड बच्चों पर तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देता हुआ, उनके जो मुझ से घृणा करते हैं; 

और उन सहस्त्रों के प्रति दया दिखलाता हुआ जो मुझ से प्रेम करते हैं, और मेरे आदेशों का पालन करते हैं।

तुम प्रभु अपने ईश्वर का नाम व्यर्थता में नहीं लोगे; क्योंकि प्रभु उसे निर्दोष नहीं ठहराएँगे जो उनका नाम व्यर्थता से लेता है।

सैबथ के दिन को स्मरण में रखना उसे पवित्र रखने के लिए।

छह दिन तुम श्रम करोगे, और अपना सारा कार्य करोगे:

१० परन्तु सातवाँ दिन प्रभु तुम्हारे ईश्वर का सैबथ है: उस में तुम कोई भी काम नहीं करोगे, तुम, ही तुम्हारा बेटा, ही तुम्हारी बेटी, ही नौकर, ही तुम्हारी नौकरानी, ही तुम्हारे मवेशी, ही तुम्हारा परदेशी जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है:

११ क्योंकि छह दिनो में प्रभु ने स्वर्ग और पृथ्वी बनाए, समुद्र, और वह सभी कुछ जो उन में है, और सातवें दिन उन्होंने विश्राम किया: इसी कारण वश प्रभु ने सैबथ के दिन को आशीर्वाद दिया और उसे पुनीत ठहरा दिया। 

१२ अपने पिता और अपनी माता का सम्मान करो: ताकि तुम्हारे दिन दीर्घ काल के हो सकें, उस भूमी में जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें दे रहे हैं। 

१३ तुम हत्या नहीं करोगे।

१४ तुम व्यभिचार नहीं करोगे।

१५ तुम चोरी नहीं करोगे।

१६ तुम अपने पड़ौसी के विरुद्ध झूठा साक्ष्य नहीं दोगे।

१७ तुम अपने पड़ौसी के घर के प्रति लोलुप नहीं होगे, तुम अपने पड़ौसी की पत्नी के प्रति लोलुप नहीं होगे, ही उसके नौकर के प्रति, ही उसकी नौकरानी के प्रति, ही उसके बैल के प्रति, ही उसके गधे के प्रति, ही किसी भी वस्तु के प्रति जो तुम्हारे पड़ौसी की है।

१८ और सभी लोगों ने उन गर्जनों को, और उन बिजलियों के कड़ाकों को, और उस चिंघाड़े के शोर को, और उस पर्वत से धुएँ को उगलते हुए देखा: और जब उन लोगों ने उसे देखा, वह परे हट गए, और दूर जाकर खड़े हो गए।

१९ और उन्होंने मूसा से कहा, तुम हमसे बोलो, और हम सुनेंगे: परन्तु ईश्वर को हमसे मत बोलने डो, कहिं हम मर जाएँ।

२० और मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत: क्योंकि ईश्वर तुम्हें सिद्ध करने आएँ हैं, और की उनका भय तुम्हारे चेहरों के समक्ष हो, ताकि तुम पाप करो।

२१ और वह लोग दूर खड़े हो गए, और मूसा उस घने अन्धकार पर्यत निकट जाता रहा जहाँ ईश्वर थे।

२२ और प्रभु ने मूसा से कहा, इस प्रकार तुम इस्राएल की संतानों से कहोगे, तुम ने देख लिया है की मैंने तुम्हारे साथ स्वर्ग से बात की है।

२३ तुम मेरे साथ रजत के ईश्वरों को नहीं बनाओगे, ही तुम अपने प्रति स्वर्ण के ईश्वरों को बनाओगे।

२४ मिट्टी की एक बलिवेदी तुम मेरे प्रति बना लोगे, और तुम उस पर अपनी जली आहुतियों का, और तुम्हारी शान्ति की आहुतियों का, तुम्हारे भेड़ों का, और तुम्हारे बैलों का बलिदान करोगे: उन सभी स्थानो में जहाँ मैं अपना नाम स्मरण में लाऊँगा मैं तुम्हारे पास आऊँगा, और तुम्हें आशीष दूँगा।

२५ और यदि तुम मेरे लिए पत्थर की एक बलिवेदी बनाओगे, तुम उसे तराशे हुए पत्थर से नहीं बनाओगे: क्योंकि यदि तुम उस पर अपनी छेनी उठाओगे, तुम ने उसे दूषित कर दिया है।

२६ ही तुम मेरी बलिवेदी तक सीढ़ियों पर से ऊपर जाओगे, ताकि तुम्हारी नग्नता उस पर अनावृत हो जाए।




इक्कीसवाँ अध्याय।


अब यह हैं वह न्याय-सिद्धांत जिन्हें तुम उनके समक्ष स्थित करोगे।

यदि तुम एक इब्रानी नौकर को खरीदते हो: छह वर्ष वह तुम्हारी सेवा करेगा: और सातवें वर्ष में वह स्वतंत्र बाहर चला जाएगा, बिन मूल्य के। 

यदि वह अपने स्वयं से ही आया हो, वह अपने स्वयं से ही बाहर चला जाएगा: यदि वह विवाहित हो, तो उसकी पत्नी उसके साथ बाहर चली जाएगी।

यदि उसके मालिक ने उसे एक पत्नी दी हो, और उसने उसे बेटे या बेटियाँ जने हों; वह पत्नी और उसके बच्चे उसके मालिक के होंगे, और वह अपने स्वयं से ही अकेला बाहर चला जाएगा। 

और यदि वह नौकर स्पष्टता से कहे, मैं अपने मालिक से, अपनी पत्नी से, और अपने बच्चों से प्रेम करता हूँ; मैं स्वतंत्र नहीं जाऊँगा बाहर:

तब उसका मालिक उसे नयायाधीशों के पास ले आएगा; वह उसे द्वार तक भी ले आएगा, या द्वार की चौखट तक; और उसका मालिक उसके कान को एक सूए से छेद देगा; और वह उसके सेवा सदैवत्वता तक करेगा।

और यदि एक पुरुष अपनी बेटी को एक नौकरानी बनने के लिए बेच देता है, वह नर-नौकरों के समान बाहर नहीं जाएगी।

यदि वह अपने मालिक को प्रसन्न नहीं करती हो, जिसने उसकी मंगनी अपने स्वयं के साथ कर ली हो, तो वह उस नौकरानी का मुक्तिभुक्तान हो जाने देगा: उसे किसी परदेशी राष्ट्र को बेच देने की उसके पास कोई शक्ती नहीं है, यह देखते हुए की उसने उस नौकरानी के साथ छल-कपटता की है। 

और यदि उसने उसकी अपने बेटे के साथ मंगनी कर दी है, तो वह उसके साथ बेटियों की रीतिनुसार व्यवहार करेगा।

१० यदि वह अपने लिए एक अन्य पत्नी लेगा; तो उसका भोजन, उसके वस्त्र, और उसका विवाहित कर्तव्य, वह कम नहीं करेगा। 

११ और यदि वह इन तीन को उसके साथ नहीं करता है, तब वह स्वतंत्र बाहर चली जाएगी, बिना पैसे के। 

१२ वह जो किसी पुरुष पर वार करता है की वह मर जाए, वह अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१३ और यदि कोई पुरुष प्रतीक्षा में हो, बल्कि ईश्वर उसे उसके हाथ में प्रदान कर दें; तब मैं तुम्हें एक स्थान नियुक्त करूँगा जहाँ वह भाग जाएगा।

१४ परन्तु यदि कोई पुरुष अपने पड़ौसी पर अपनी ही उपधारणा से पड़ता है, उसे छल-कपटता से मार डालने हेतु; तुम उसे मेरी बलिवेदी से ले जाओगे, ताकि वह मर जाए।

१५ और वह जो अपने पिता या अपनी माता पर प्रहार करता है, अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१६ और वह जो किसी पुरुष को चुरा लेता है, और उसे बेच देता है, या फिर यदि वह उसके कब्ज़े में पाया जाता है, वह अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१७ और वह जो अपने पिता को, या अपनी माँ को श्राप देता है, अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१८ और यदि पुरुष आपस में लड़ाई कर रहे हों, और एक दूसरे पर पत्थर से वार कर दे, या अपनी मुट्ठी से, और वह मरे , बल्कि अपना बिस्तर पकड़े रहे:

१९ यदि वह फिर से उठ जाता है, तो वह जिसने उस पर वार किया था निर्दोष ठहरेगा: वह बस केवल उसके समय की क्षति-पूर्ती करेगा, और वह उसकी पूर्ण आरोग्यता करवाएगा। 

२० और यदि कोई पुरुष अपने नौकर, या अपनी नौकरानी को डण्डे से मारे, और वह उसके हाथ तले मर जाए; तो उसे अवश्य ही दण्ड दिया जाएगा।

२१ तथापि यदि वह एक या दो दिन जीवित रहे, उसे दण्ड नहीं दिया जाएगा: क्योंकि वह तो उसी का घन है।

२२ यदि पुरुष लड़ाई कर रहे हों, और किसी गर्भवती स्त्री को चोट पहुँचती है, की उसका फल उससे प्रस्थान कर लेता है, और तथापि कोई हानि नहीं होती: उसे अवश्य ही दण्ड दिया जाएगा, उसके अनुसार जो उस स्त्री का पति उस पर आरोप लगाएगा, और वह नयायाधीशों के निर्णयानुसार भुक्तान भर देगा। 

२३ और यदि कोई भी हानि होती है, तब तुम जीवन के लिए जीवन दोगे,

२४ आँख के लिए आँख, दाँत के लिए दाँत, हाथ के लिए हाथ, पैर के लिए पैर,

२५ जलने के लिए जलना, घाव के लिए घाव, नील के लिए नील।

२६ और यदि कोई पुरुष अपने नौकर की आँख पर प्रहार करता है, या अपनी नौकरानी की आँख पर, की वह नष्ट हो जाए, तो वह उसे उसकी आँख के वास्ते स्वतंत्र छोड़ देगा।

२७ और यदि वह अपने नौकर के दाँत को, या अपनी नौकरानी के दाँत को मार कर बाहर गिरा दे; तो वह उसे उसके दाँत के वास्ते स्वतंत्र छोड़ देगा।

२८ यदि कोई बैल किसी पुरुष, या किसी स्त्री को सींघ से भेद डाले, की उनकी मृत्यु हो जाए: तो उस बैल पर अवश्य ही पथराव कर दिया जाएगा, और उसका माँस नहीं खाया जाएगा; परन्तु उस बैल का मालिक निर्दोष ठहरेगा।

२९ परन्तु यदि बैल की सींघ से भेदने की क्रिया की जानकारी भूतपूर्वता से हो, और इस बात का साक्ष्य उसके मालिक को दे दिया जा चुका हो, और उसने उसे अन्दर नहीं रखा हो, बल्कि उसने किसी पुरुष या स्त्री को मार दिया हो; तो उस बैल पर पथराव कर दिया जाएगा, और उसके मालिक को भी मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

३० यदि उस पर पैसे की कोई मात्रा लगा दी गई हो, तब वह अपने जीवन की फिरौती की मात्रा भरेगा, जो कुछ भी उस पर लागू किया जाएगा। 

३१ भले ही उसने किसी बेटे को सींघ से भेद दिया हो, या किसी बेटी को सींघ से भेद दिया हो, इसी न्याय-सिधांतानुसार उसके प्रति किया जाएगा।

३२ यदि बैल किसी नौकर या नौकरानी को भेदेगा; वह उनके मालिक को चाँदी के तीस शेक्ल देगा, और उस बैल पर पथराव कर दिया जाएगा।

३३ और यदि कोई पुरुष कोई गड्ढा खोले, या फिर यदि कोई पुरुष कोई गर्त खोदे, और उसे ढके, और कोई बैल, या कोई गधा, उस में गिर जाए;

३४ तो उस गर्त का मालिक क्षतिपूर्ती करेगा, और उनके मालिक को पैसा चुका देगा; और वह मरा हुआ जानवर उसका हो जाएगा।

३५ और यदि किसी एक पुरुष का बैल किसी दूसरे के बैल को चोट पहुँचता है, की वह मर जाए; तो वह उस जीवित बैल को बेच कर, उसके मूल्य को बाँट लेंगे; और उस मृत बैल को भी वह बाँट लेंगे।

३६ या फिर यह ज्ञात हुआ हुआ हो, की वह बैल तो भूतपूर्वता से ही सींघ से भेदता था, और उसके मालिक ने उसे अन्दर नहीं रखा; वह अवश्य ही बैल के लिए भरपाई करेगा; और वह मृत बैल उसका अपना होगा।



बाईसवां अध्याय।


यदि कोई पुरुष कोई बैल, या कोई भेड़ चुरा लेता है, और उसे मार देता है, या उसे बेच देता है; वह एक बैल के स्थान में पाँच बैल  चुकाएगा, और चार भेड़ एक भेड़ के स्थान में।

यदि कोई चोर तोड़ता हुआ पाया जाए, और वह प्रहार से मर जाए, उसके लिए कोई भी रक्त नहीं बहेगा।

यदि सूर्य उस पर उदय हो चुका हो, उसके लिए रक्त बहाया जाएगा; क्योंकि उसे पूरी क्षतिपूर्ती करनी चाहिए; यदि उसके पास कुछ भी हो, तब उसे उसके चौर्य के लिए बेच दिया जाएगा।

यदि  वह चौर्य निश्चितता से उसके हाथ में जीवित पा लिया जाए, भले ही वह बैल, या गधा, या भेड़ हो; वह दुगुनी क्षतिपूर्ती करेगा।

यदि कोई पुरुष किसी खेत या अंगूर-खेत को चरवादे, और अपने जानवर को अन्दर डाल दे, और वह किसी दूसरे व्यक्ति के खेत में चर ले; अपने ही सर्वोत्तम खेत में से, और अपने ही सर्वोत्तम अंगूर-खेत में से वह क्षतिपूर्ती करेगा।

यदि अग्नी भड़क उठे, और काँटों को पकड़ ले, की अनाज के ढेर, या खड़ा अनाज, या खेत उसके साथ भभक उठें; वह जो अग्नी सुलगानेवाला है अवश्य ही क्षतिपूर्ती करेगा।

यदि कोई पुरुष अपने पड़ौसी को पैसा या सामान रखने के लिए प्रदान कर देगा, और वह उस व्यक्ति के घर में से चोरी हो जाए; यदि चोर पा लिया जाता है, उसे दुगुनी भरपाई कर देने दो।

यदि चोर पाया जाए, तब उस घर के मालिक को न्यायाधीशों के समक्ष ले आया जाएगा, यह देखने के लिए कि यदि उसने अपने पड़ौसी के सामान पर अपना हाथ डाला है।

क्योंकि हर प्रकार का अतिचार, भले ही वह बैल के लिए हो, या गधे के लिए, या भेड़ के लिए, या वस्त्र के लिए, या किसी भी प्रकार की खोई हुए वस्तु के लिए, जिस पर कोई अपना होने का दावा करता है, उन दोनो दलों की कहनी न्यायाधीशों के समक्ष आएगी; और जिसे न्यायाधीश दण्डाज्ञा दे देंगे, वही अपने पड़ौसी को दुगुनी भरपाई कर देगा।

१० यदि कोई पुरुष अपने पड़ौसी को एक गधा, या एक बैल, या एक भेड़, या कोई भी पशु रखने के लिए प्रदान करता है; और वह मर जाता है, या उसे चोट लग जाती है, या वह दौड़ चला जाता है, बिना किसी के देखे:

११ तब उन दोनो के बीच, प्रभु की एक शपथ होगी, की उसने अपने पड़ौसी के सामान पर अपना हाथ नहीं डाला है; और उसका मालिक यह स्वीकार कर लेगा, और वह उसके लिए कोई भरपाई नहीं करेगा।

१२ और यदि वह उससे चुरा लिया गया हो, वह उसके मालिक को क्षतिपूर्ती करेगा।

१३ यदि वह टुकड़ों-टुकड़ों में फाड़ दिया गया हो, तो उसे इसे एक साक्ष्य के लिए ले आने दो, और वह उसके लिए कोई भरपाई नहीं करेगा, जो की फाड़ दिया गया था।

१४ और यदि कोई पुरुष अपने पड़ौसी से कुछ भी उधार पर लेता है, और उसे चोट लग जाए, या वह मर जाए, उसका मालिक उसके साथ होते हुए, वह अवश्य उसकी भरपाई करेगा।

१५ परन्तु यदि उसका मालिक उसके साथ हो, वह उसके लिए भरपाई नहीं करेगा: यदि वह उधार पर ली गई वस्तु हो, वह उसी की उधारी के लिए था। 

१६ और यदि कोई पुरुष किसी कुँवारी को लुभा ले जिसकी मंगनी नहीं हुई हो, और वह उस कुँवारी के साथ लेट जाए, वह अवश्य ही उसे दहेज भरकर उसे पत्नी बनाएगा।

१७ यदि कन्या का पिता उसे उसे देने से सरासर मना कर देगा, तो वह पैसे का भुक्तान करेगा, कुँवारियों के दहेजानुसार।

१८ तुम किसी चुड़ैल को नहीं जीने दोगे।

१९ जो कोई भी किसी जानवर के साथ लेटता है, अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

२० वह जो किसी भी अन्य ईश्वर को बलिदान चढ़ता है, सिवाय केवल प्रभु के, वह सरासर विनष्ट कर दिया जाएगा। 

२१ तुम ही किसी परदेशी को व्यग्रित करोगे, ही उसका अत्याचार करोगे: क्योंकि तुम मिस्र की भूमि में परदेशी थे।

२२ तुम किसी भी विधवा, या अनाथ बच्चे पर विपदा नहीं डालोगे।

२३ यदि तुम उन पर किसी भी प्रकार से विपदा डालोगे, और वह कतई भी मुझे चीखें-पुकारें, मैं अवश्य ही उनकी चीख-पुकार सुन लूँगा;

२४ और मेरे आक्रोश की क्रोधाग्नि भड़क उठेगी, और मैं तुम्हें तलवार से मार डालूँगा; और तुम्हारी पत्नियाँ विधवाएँ बन जाएँगी, और तुम्हारे बच्चे अनाथ।

२५ यदि तुम मेरे लोगों में से किसी भी दरिद्र को, जो तुम्हारे साथ हो, पैसा उधार पर दोगे, तो तुम उसके प्रति सूद-खोर नहीं बनोगे, ही तुम उस पर सूद डालोगे।

२६ यदि तुम कतई भी अपने पड़ौसी का वस्त्र रेहन के लिए रखते हो, तो तुम उसे उसके पास सूर्य के ढलने तक पहुँचा दोगे:   

२७ क्योंकि वही उसकी एकमात्र ओढ़नी है, वह उसका वस्त्र है उसकी चर्म के लिए: वह किस में सोएगा? और ऐसा होने को आएगा, की जब वह मुझे चीखता-पुकारता है, तब मैं उसे सुनूँगा; क्योंके मैं कृपालु हूँ।

२८ तुम उन ईश्वरों को नहीं धिक्कारोगे, ही अपने लोगों के शासक को श्राप दोगे।

२९ तुम अपने पके हुए फलों के, और अपने फल-रसों के पहलौठों के चढ़ावे में विलम्ब नहीं करोगे: तुम्हारे बेटों में प्रथमजन्मा तुम मुझे प्रदान कर दोगे।

३० इसी प्रकार तुम अपने बैलों के साथ, और अपने भेड़ों के साथ करोगे: सात दिन वह अपनी मादा के साथ होगा; आठवें दिन तुम उसे मुझे प्रदान कर दोगे।

३१ और तुम मेरे प्रति पवित्र मनुष्य होगे: ही तुम कोई भी माँस खाओगे जो जानवरों से खेत में फाड़ दिया गया है; तुम उसे कुत्तों को फैंक दोगे।



तेईस्वाँ अध्याय।


तुम असत्य समाचार नहीं फैलाओगे: एक अनैतिक साक्षी बनने हेतु अपना हाथ किसी दुष्ट के साथ मत मिला लेना।

तुम किसी जनौघ के पीछे-पीछे मत लग जाना बुराई करने हेतु; ही तुम कईयों के पीछे-पीछे किसी कहनी में परिवर्तन कर कर बोलोगे, न्याय-निर्धारण को विकृत कर देने हेतु:

ही तुम किसी दरिद्र व्यक्ति के प्रति पक्षपात करोगे, उसके कहने में।

यदि तुम अपने शत्रु के बैल या उसके गधे को भटका हुआ पाते हो, तुम अवश्य ही उसे उसके पास वापस दोबारा ले आओगे।

यदि तुम उसका गधा अपने बोझ तले पड़ा हुआ देखते हो, जो तुम से घृणा करता है, और तुम उसकी सहायता करने से विरत होते हो, तुम अवश्य ही उसके साथ सहायता करोगे।

तुम अपने दरिद्र के न्याय को उसके अभियोग में विकृत नहीं करोगे।

स्वयं को असत्य बात से दूर रखना; और तुम निर्दोष और नेक की हत्या नहीं करोगे: क्योंकि मैं दुष्ट को न्यायी-प्रमाणित नहीं करूँगा।

और तुम कोई भी घूस नहीं लोगे: क्योंकि घूस विद्वान को नेत्र-हीन बना देती है, और नेकों के शब्दों को विकृत कर देती है।

तुम किसी परदेशी पर अत्याचार नहीं करोगे: क्योंकि तुम परदेशी के हृदय से परिचित हो, यह देखते हुए की तुम मिस्र की भूमि में परदेशी थे।

१० और छह वर्ष तुम अपनी भूमी में बोआई करोगे, और उसके फल एकत्रित करोगे:

११ परन्तु सातवें वर्ष तुम उसे छोड़ दोगे और वह परती पड़ी रहेगी; ताकि तुम्हारे लोगों के दरिद्र खा सकें: और जो वह छोड़ दें, खेत के पशु खाएँगे। ठीक इसी प्रकार तुम अपने अंगूर के खेत के साथ, और अपने जैतून के खेत के साथ व्यवहार करोगे।

१२ छह दिन तुम अपना काम करोगे, और सातवें दिन तुम विश्राम करोगे: ताकि तुम्हारा बैल, और तुम्हारा गधा विश्राम कर सके, और तुम्हारी दासी का बेटा, और वह परदेशी, पुनश्चरयित हो सके।

१३ और उन सभी बातों में जो मैंने तुम से कहीं हैं, तुम सचेत रहोगे; और तुम अन्य ईश्वरों के नाम का कोई ज़िक्र नहीं करोगे, ही उसे अपने मूँह से बाहर आते हुए सुनवा देना।

१४ वर्ष में तीन बार तुम मेरे प्रति एक भोज रखोगे।

१५ तुम बेख़मीरी रोटी के भोज को रखोगे: (तुम बेख़मीरी रोटी सात दिन खाओगे, जैसा मैंने तुम्हें आदेश दिया था, अबीब के महीने में नियुक्त समय पर; क्योंकि उसी में तुम मिस्र में से बाहर निकल आए थे: और कोई भी मेरे समक्ष ख़ाली हाथ नहीं आएगा:)

१६ और फसल-कटाई का भोज, तुम्हारे श्रमों के प्रथम-फल, जिसकी तुमने खेत में बोआई की है: और फसल-एकत्रण का भोज, जो वर्ष के अन्त में है, जब तुमने अपने श्रमों का खेत में से बाहर एकत्रण कर लिया है।

१७ साल में तीन बार तुम्हारे सभी नर प्रभु ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत होएँगे।

१८ तुम मेरी अहुति के रक्त को खमीरी रोटी के साथ नहीं चढ़ाओगे; ही मेरी आहुति की चर्बी सुबह तक बची रहेगी।

१९ तुम्हारी भूमी के प्रथम-फलों के पहलौठों को तुम प्रभु अपने ईश्वर के घर में ले आओगे। तुम किसी हलवान को उसकी माँ के दूध में नहीं उबालोगे।

२० देखो, मैं एक दूत को तुम्हारे समक्ष भेज रहा हूँ, तुम्हें पथ पर रखने हेतु, और तुम्हें उस स्थान में ले आने हेतु जिसे मैंने उद्यत किया है।

२१ उससे सावधान रहना, और उसकी वाणी का पालन करना, और उसे उत्तेजित मत करना; क्योंकि वह तुम्हारे उल्लंघनों को क्षमा नहीं करेगा: क्योंकि मेरा नाम उस में है।

२२ परन्तु यदि तुम वास्तव में ही उसकी वाणी का अनुपालन करोगे, और, वह सब कुछ करोगे जो मैं बोलता हूँ; तब मैं तुम्हारे शत्रुओं के प्रति एक शत्रु हूँगा, और तुम्हारे विरोधियों के प्रति एक विरोधी।

२३ क्योंकि मेरा दूत तुम्हारे समक्ष जाएगा, और तुम्हें एमोरवासियों, और हित्ती वंशजों, और पेरिज़वासियों, और कनानवासियों, और हिव्वीयों, और यबूसी वंशजों तक अन्दर ले आएगा: और मैं उन्हें काट डालूँगा।

२४ तुम उनके ईश्वरों के प्रति नहीं झुकोगे, ही उनकी सेवा करोगे, ही उनके कर्मोंनुसार करोगे: बल्कि तुम उन्हें सरासर ध्वस्त कर दोगे, और उनकी प्रतिमाओं को तोड़ डालोगे।

२५ और तुम प्रभु अपने ईश्वर की सेवा करोगे, और वह तुम्हारी रोटी को आशीष देंगे, और तुम्हारे जल को; और मैं तुम्हारे बीच में से बीमारी को परे हटा दूँगा।।

२६ तुम्हारी भूमी में किसी का भी गर्भपात नहीं होगा, ही कोई भी बाँझ होगी: तुम्हारे दिनो की संख्या मैं पूर्ण करूँगा।

२७ मैं अपना आतंक तुम्हारे समक्ष भेज दूँगा, और उन सभी लोगों का विनाश कर दूँगा जिनके पास तुम आओगे, और मैं तुम्हारे समस्त शत्रुओं की पीठें तुम्हारी ओर मुड़वा दूँगा।

२८ और मैं ततईयों को तुम्हारे समक्ष भेजूँगा, जो हिव्वी को, कनानवासी को, और हित्ती वंशज को तुम्हारे सामने से बाहर खदेड़ देंगे।

२९ मैं उन्हें तुम्हारे सामने से एक ही वर्ष में बाहर नहीं खदेड़ूँगा; कहिं भूमी उजाड़ बन जाए, और खेत का जानवर तुम्हारे विरुद्ध बहुगुणित हो जाए।

३० थोड़ा थोड़ा करके मैं उन्हें तुम्हारे सामने से बाहर खदेड़ दूँगा, जब तक तुम्हारी वृद्धी हो जाती है, और तुम भूमी को विरासत में ले लेते हो।

३१ और मैं तुम्हारी सीमा-रेखाओं को लाल समुद्र से लकर, पलिश्तिमवासियों के समुद्र तक भी स्थित कर दूँगा: क्योंकि मैं तुम्हारे हाथ में भूमी के वासियों को प्रदान कर दूँगा; और तुम उन्हें अपने सामने से खदेड़ दोगे।

३२ तुम उनके साथ, ही उनके ईश्वरों के साथ, कोई भी प्रतिज्ञापत्र बनाओगे।

३३ वह तुम्हारी भूमी में नहीं रहेंगे, कहिं वह तुम्हें मेरे विरुद्ध पाप करवा दें: क्योंकि यदि तुम उनके ईश्वरों की सेवा करोगे, वह अवश्य ही तुम्हारे लिए एक फंदा बन जाएगा।



चौबीसवाँ अध्याय।


और उन्होंने मूसा से कहा, ऊपर जाओ प्रभु के पास, तुम, और हारुन, नादब और अबीहु, और सत्तर इस्राएल के वृद्धमानों में से; और आराधना करो तुम दूर से।

और मूसा अकेला ही प्रभु के निकट आएगा, परन्तु यह सब निकट नहीं आएँगे; ही वह लोग उसके साथ ऊपर आएँगे।

और मूसा आया और उसने लोगों को प्रभु के सभी शब्द, और सभी न्याय-निर्धारण बता दिए: और सभी लोगों ने एक ही वाणी से ऊत्तर दिया, और कहा, सभी शब्द जो प्रभु ने कहे हैं, हम करेंगे।

और मूसा ने प्रभु के सभी शब्द लिख दिए, और वह सुबह-सुबह उठा, और उसने एक बलिवेदी का उस पहाड़ी के नीचे निर्माण किया, और बारह स्तम्भ, इस्राएल की बारह प्रजातियोंनुसार।

और उसने इस्राएल की संतानों के युवा पुरुषों को भेजा, जिन्होंने प्रभु के प्रति, जले चढ़ावे चढ़ाए, और शान्ति के चढ़ावों के बैलों का बलिदान किया।

और मूसा ने रक्त का अर्ध भाग लिया, और उसे पात्रों में डाल दिया; और रक्त के अर्ध भाग को उसने बलिवेदी पर छिड़क दिया।

और उसने उस प्रतिज्ञा-पत्र की पुस्तक को लिया, और उसे लोगों की सुनवाई में पढ़ा: और उन्होंने कहा, जो कुछ भी प्रभु ने कह दिया है हम करेंगे, और हम आज्ञाकारी होंगे।

और मूसा ने उस रक्त को लिया, और उसे लोगों पर छिड़क दिया, और कहा, देखलो उस प्रतिज्ञा-पत्र का रक्त, जिसे प्रभु ने तुम्हारे साथ बनाया है इन सभी शब्दों के समबन्ध में।

तब मूसा और हारुन, नादब, और अबीहु ऊपर चले गए, और सत्तर इस्राएल के वृद्धमानों में से:

१० और उन्होंने इस्राएल के ईश्वर को देखा: और उनके चरणों तले मानो एक नीलम पत्थर का खपरैल का काम था, और मानो कि वह स्वर्ग का देह हो उसकी शुद्धता में।

११ और इस्राएल की संतानों के कुलीन व्यक्तियों पर उन्होंने अपना हाथ नहीं डाला: उन्होंने ईश्वर को भी देखा, और खाया और पीया भी।

१२ और प्रभु ने मूसा से कहा, मेरे पास ऊपर पहाड़ में जाओ, और वहीं रहो: और मैं तुम्हें पत्थर की पट्टियाँ दूँगा, और एक नियम, और आदेश जिन्हें मैंने लिखा है; ताकि तुम उन्हें सिखा सको।

१३ और मूसा ऊपर उठा, और उसका सेवक यहोशुआ: और मूसा ईश्वर के पहाड़ में ऊपर चला गया।

१४ और उसने उन वृद्धों से कहा, हमारे लिए यहीं ठहरे रहो, जब तक हम तुम्हारे पास दोबारा नहीं जाते: और देखो, हारुन और हूर तुम्हारे साथ हैं: यदि किसी भी व्यक्ति के पास कोई भी मसला हो, उसे उनके पास चले जाने देना।  

१५ और मूसा पहाड़ में ऊपर चला गया, और एक मेघ ने उस पहाड़ को ढक दिया।

१६ और प्रभु की महिमा ने सीनय पर्वत पर वास किया, और उस मेघ ने उसे छह दिन ढके रखा: और सातवें दिन उन्होंने मूसा को उस मेघ के बीच में से पुकारा।

१७ और इस्राएल की संतानों की आँखों में, उस पर्वत की चोटी पर प्रभु की महिमा का वह दृश्य, एक भुख-भक्षण कर देने वाली अग्नी के समान था।

१८ और मूसा उस मेघ के मध्य में अंदर चला गया, और वह उस पर्वत पर ऊपर अंदर चला गया: और मूसा उस पर्वत में चालीस दिन और चालीस रात था।



पच्चीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की संतानों से बोलना, की वह मुझे एक आहुति ले आएँ: प्रत्येक पुरुष से जो उसे अपने हृदय की स्वेच्छा से देता है, तुम मेरा चढ़ावा ले लोगे।

और यह है वह चढ़ावा जो तुम उन से लोगे; सोना और चाँदी और पीतल,

और नीला, और जामुनी, और सुर्ख, और महीन छालटी, और बकरों के बाल,

और मेड़ों की चमड़ियाँ लाल रंगी हुई, और सूँस की चमड़ियाँ, और बबूल की लकड़ी,

उजाले के लिए तेल, सुगन्धित-द्रव्य अभिषेक-तेल के लिए, और मधुर-सुगंधित-धूप के लिए,

गोमेद पत्थर, और एफद में, और छाती-वस्त्र में जड़ने हेतु पत्थर।

और उन्हें मेरे लिए एक पुण्य-स्थान बना लेने दो; ताकि मैं उनके बीच बस सकूँ।

उस सभी के अनुसार जो मैं तुम्हें दिखाता हूँ, तम्बू के प्रतिरूपानुसार, और उसके समस्त उपकरणों के प्रतिरूपानुसार, उसी प्रकार ही तुम उसे बनाओगे।

१० और वह बबूल की लकड़ी का एक संदूक बनाएँगे: ढाई हाथ उसकी लम्बाई होगी, और डेढ़ हाथ उसकी चौड़ाई होगी, और एक हाथ उसकी ऊँचाई होगी।

११ और तुम उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दोगे, भीतर और बाहर से तुम उसे मढ़ोगे, और उस पर तुम एक चारों ओर सोने का छोटा घेरा बनाओगे।

१२ और तुम उसके लिए सोने के चार कड़े ढालोगे, और उन्हें उसके चारों कोनों में लगा दोगे; दो कड़े उसके एक ओर, और दो कड़े उसके दूसरे ओर।

१३ और तुम बबूल की लकड़ी से डण्डे बनाओगे, और तुम उन्हें सोने से मढ़ दोगे।

१४ और तुम उन डंडों को उस संदूक के दोनो ओर के कड़ों में डाल दोगे, ताकि वह संदूक उनके साथ उठा लिया जा सके।

१५ वह डण्डे उस संदूक के कड़ों में होंगे: वह उस में से निकाले नहीं जाएँगे।

१६ और तुम उस संदूक में वह साक्ष्य रख दोगे, जो मैं तुम्हें प्रदान करूँगा।

१७ और तुम शुद्ध स्वर्ण का एक प्रेषण-आसन बनाओगे: ढाई हाथ उसकी लम्बाई होगी, और डेढ़ हाथ उसके चौड़ाई होगी।

१८ और तुम सोने के दो चेरबीमों को बनाओगे, पीटे हुए काम से तुम उसे बनाओगे, उस प्रेषण-आसन के दो छोरों में।

१९ और एक चेरब को एक छोर पर बनाना, और दूसरे चेरब को दूसरे छोर पर: उसी प्रेषण-आसन में से ही तुम उन चेरुबीमों को उन दोनो छोरों पर बनाओगे। 

२० और वह चेरुबिम अपने पंखों को ऊपर आगे फैला देंगे, उस प्रेषण-आसन को अपने पंखों से ढकते हुए, और उनके चहरे एक दूसरे को देखेंगे; प्रेषण-आसन की ओर उन चेरुबीमों के चहरे होंगे।

२१ और तुम उस प्रेषण-आसन को उस संदूक के ऊपर रख दोगे; और उस संदूक में तुम उस साक्ष्य को रख दोगे जो मैं तुम्हें प्रदान करूँगा।

२२ और वहीं मैं तुम से भेंट करूँगा, और मैं तुम्हारे साथ गोष्ठी करूँगा प्रेषण-आसन के ऊपर, उन दो चेरूबिमों के बीच में जो उस साक्ष्य के संदूक पर हैं, उन सभी बातों समबन्धी जो मैं तुम्हें आदेश में दूँगा इस्राएल की संतानों के प्रति।

२३ तुम बबूल की लकड़ी की एक मेज़ भी बनाओगे: दो हाथ उसकी लम्बाई होगी, और एक हाथ उसकी चौड़ाई होगी, और डेढ़ हाथ उसकी ऊँचाई होगी।

२४ और तुम उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ोगे, और उसके चारों ओर एक सोने का छोटा घेरा बनाओगे।

२५ और तुम उस पर एक चार ऊँगल चौड़ा किनारा चारों ओर बनाओगे, और तुम उसके किनारे पर एक सोने का छोटा घेरा उसके चारों ओर बनाओगे।  

२६ और तुम उसके लिए सोने के चार कड़े बनाओगे, और उन कड़ों को चारों कोनो में डाल दोगे जो उसके चार पैरों पर हैं।

२७ उस किनारे के साथ सटे वह कड़े वह स्थान होंगे उन डण्डों द्वारा उस मेज़ को ढोने के लिए।

२८ और तुम बबूल की लकड़ी से डण्डे बनाओगे, और तुम उन्हें सोने से मढ़ दोगे, ताकि वह मेज़ उनके साथ उठा ली जाए।

२९ और तुम उसके परात, और चम्मच, और उसके ढकने, और उसके कटोरे, ढकने हेतु: शुद्ध स्वर्ण के तुम उन्हें बनाओगे।

३० और तुम उस मेज़ पर मेरे सम्मुख भेंट की रोटी सदैव स्थित रखोगे।

३१ और तुम एक दीपाधार शुद्ध स्वर्ण का बनाओगे: पीटे हुए काम से वह दीपाधार निर्मित किया जाएगा: उसका तना, और उसकी डालियाँ, उसके कटोरे, उसके कोंपल, और उसके पुष्प, उसी से होंगे।

३२ और छह डालियाँ उस में से उभर के बाहर निकलेंगी; उस दीपाधार की तीन डालियाँ एक ओर से बाहर निकलेंगी, और दीपाधार की तीन डालियाँ उसकी दूसरी ओर से उभरेंगी।

३३ बादामों के समान तीन कटोरे बने हुए, एक कोंपल और एक पुष्प एक डाली में; और बादामों के समान बने तीन कटोरे दूसरी डाली में, एक कोंपल और एक पुष्प के साथ: इस प्रकार उन छह डालियों में जो उस दीपाधार में से बाहर उभरती हैं।

३४ और उस दीपाधार में चार काटोरे होंगे, बादामों समान बने हुए, उनके कोंपलों और उनके पुष्पों के साथ।

३५ और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे होगा, और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे होगा, और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे होगा, उन्हीं छह डालियोंनुसार जो दीपाधार में से बाहर उभरती हैं।

३६ उनके कोंपल और उनकी डालियाँ उसी से होंगे: वह सम्पूर्णता से शुद्ध स्वर्ण का एक ही पीटा हुआ काम होगा।

३७ और तुम उस के सात दीपक बनाओगे: और वह उसके दीपों को प्रज्ज्वलित कर देंगे, ताकि वह उस पर उजाला प्रदान कर सकें।

३८ और उसकी चिमटियाँ, और उसके अग्नी-पात्र, शुद्ध स्वर्ण के होंगे।

३९ शुद्ध स्वर्ण के एक तलनतन-भार से वह उसे बनाएगा, इन सभी पात्रों के साथ।

४० और देख लेना कि तुम उन्हें उनके प्रतिरूपानुसार बनाना, जो तुम्हें पहाड़ में दिखला दिया गया था।



छब्बीसवाँ अध्याय।


इसके अतिरिक्त तुम उस तम्बू को बटी हुई महीन छालटी के दस परदों, और नीले, और जामुनी, और सुर्ख, के साथ बनाओगे: कुशल कारीगरी द्वारा तुम उन्हें चेरूबिमों के साथ बनाओगे।

एक परदे की लम्बाई अट्ठाईस हाथ होगी, और एक परदे की चौड़ाई चार हाथ होगी: और प्रत्येक परदे का एक ही माप होगा।

पाँच परदे एक साथ जोड़ दिए जाएँगे एक दूसरे के साथ: और वह अन्य पाँच परदे एक दूसरे के साथ जोड़ दिए जाएँगे।

और तुम एक परदे के किनारे पर जोड़ के छोर से नीले फंदे बनाओगे; और इसी प्रकार उस दूसरे परदे के जोड़ में, तुम उस अन्य परदे के किनारे के छोर में बना दोगे।

पचास फंदे तुम एक परदे में बनाओगे, और पचास फंदे तुम उस परदे के किनारे में बनाओगे जो की उस दूसरे से जुड़ा हुआ है; ताकि वह फंदे एक दूसरे को पकड़ सकें। 

और तुम सोने के पचास अंकड़े बनाओगे, और उन परदों को एक साथ उन अंकड़ों के साथ जोड़ दोगे: और वह एक तम्बू बन जाएगा।

और तुम बकरे के बालों के परदे बनाओगे उस तम्बू पर एक ढकना बन जाने हेतु: ग्यारह परदे तुम बनाओगे।

एक परदे की लम्बाई तीस हाथ होगी, और एक परदे की चौड़ाई चार हाथ होगी: और वह ग्यारह परदे सभी एक ही माप के होंगे।

और तुम पाँच परदों को उनके स्वयं के साथ जोड़ दोगे, और छह परदों को स्वयं के साथ, और तुम उस छटे परदे को तम्बू के सम्मुख दोहराकर मोड़ देना।

१० और तुम पचास फंदे उस एक परदे के किनारे पर बनाओगे जो की जोड़ के सबसे बाहरी छोर पर है, और पचास फंदे उस परदे के किनारे पर जो उस दूसरे से जुड़ा हुआ है। 

११ और तुम पीतल के पचास अंकड़े बनाओगे, और उन अंकड़ों को उन फंदों में डाल दोगे, और उस शिविर को एक साथ जोड़ दोगे, ताकि वह एक बन जाए।

१२ और उस शिविर के परदों का जो बचा हुआ शेष भाग है, वह जो अर्ध परदा जो बचा रह गया है, वह उस तम्बू की पिछली ओर लटकेगा।

१३ और शिविर के परदों की लम्बाई में जो बचा रह गया है, एक हाथ एक ओर, और एक हाथ दूसरी ओर, लटक जाएगा, उस तम्बू के अगल-बगल, इस ओर, ओर दूसरी ओर, उसे ढक देने हेतु।

१४ और तुम शिविर के लिए एक मेढ़े की लाल रंगी हुई चमड़ी का आवरण बनाओगे, और ऊपर एक सूँस की चमड़ियों का एक आवरण।

१५ और तुम तम्बू के लिए पट्टे बनाओगे, बबूल की लकड़ी के, सीधे खड़े हुए।

१६ दस हाथ एक पट्टे की लम्बाई होगी, और डेढ़ हाथ एक पट्टे की चौड़ाई होगी।

१७ दो चूलें एक पट्टे में होंगे, जो एक दूसरे के आमने-सामने विधिवत स्थित होंगे: इसी प्रकार तुम तम्बू के सभी पट्टों के लिए बनाओगे। 

१८ और तुम तम्बू के लिए उन पट्टों को बनाओगे, बीस पट्टे दक्षिण के पाशर्व के लिए दक्षिण की ओर।

१९ और तुम चाँदी की चालीस गर्तिकाएँ उन बीस पट्टों के नीचे बनाओगे; दो गर्तिकाएँ एक पट्टे के नीचे उसके दो चूलों के लिए, और दो गर्तिकाएँ दूसरे पट्टे के नीचे उसके दो चूलों के लिए।

२० और तम्बू की दूसरी ओर, उत्तर की ओर, बीस पट्टे होंगे: 

२१ और उनकी चाँदी की गर्तिकाएँ; दो गर्तिकाएँ एक पट्टे के नीचे, दो गर्तिकाएँ दूसरे पट्टे के नीचे।

२२ और तम्बू के पाशर्वों के लिए पश्चिम की ओर तुम छह पट्टे बनाओगे।

२३ और दो पट्टे तुम तम्बू के कोनों के लिए उसके दो पाशर्वों में बनाओगे।

२४ और वह नीचे एक साथ जोस दिए जाएँगे, और वह एक साथ उसके सिरे के ऊपर एक कड़े में जोड़ दिए जाएँगे: इसी प्रकार उन दोनो के लिए किया जाएगा; वह उन दोनो कोनों के लिए होंगे।

२५ और आठ पट्टे होंगे, और उनकी चाँदी की गर्तिकाएँ, सोलह गर्तिकाएँ; दो गर्तिकाएँ एक पट्टे के नीचे, और दो गर्तिकाएँ दूसरे पट्टे के नीचे।

२६  और तुम बबूल की लकड़ी के पटरे भी बनाओगे; पाँच तम्बू के एक पाशर्व के पट्टों के लिए,

२७ और पाँच पटरे तम्बू की दूसरी ओर के पट्टों के लिए, और पाँच पटरे तम्बू की दूसरी ओर के पट्टों के लिए, उन दो पश्चिमी पाशर्वों के लिए।

२८ और पट्टों के बीच में वह बीच का पटरा एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचेगा।

२९ और तुम उन पट्टों को सोने से मढ़ोगे, और उनके कड़ों को सोने से बनाओगे उन पटरों के स्थानों के लिए: और तुम पटरों को सोने से मढ़ दोगे।

३० और तुम उस तम्बू को उस प्रतिरूपानुसार ऊपर खड़ा कर दोगे, जो तुम्हें पहाड़ में दिखला दिया गया था। 

३१ और तुम एक पर्दा बनाओगे, नीले, और जामुनी, और सुर्ख के साथ, और कुशल कारीगरी की बटी हुई महीन छालटी के साथ: चेरूबिमों के साथ वह बनाया जाएगा:

३२ और तुम उसे सोने से मढ़े हुए बबूल की लकड़ी के चार स्तम्भों पर लटकाओगे: उनके अंकुड़े सोने के होंगे, चाँदी की उन चार गर्तिकाओं पर।

३३ और तुम उस परदे को उन कुंडलों की तले, ऊपर टांग दोगे, ताकि तुम वहीं उस परदे के भीतर उस साक्ष्य के संदूक को ला सको: और यह परदा तुम्हारे लिए पवित्र स्थान और अति पवित्रतम स्थान के बीच विभाजन कर देगा।

३४ और तुम उस अति पवित्रतम स्थान में उस साक्ष्य के संदूक पर वह प्रेषण-आसन लगा दोगे।

३५ और तुम उस मेज़ को परदे के बाहर स्थित करोगे, और उस दीपाधार को उस मेज़ के विपरीत तम्बू की दक्षिणी ओर के पाशर्व में: और तुम उस मेज़ को उत्तरी ओर रख दोगे।

३६ और तुम तम्बू के द्वार के लिए एक नीले, जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी की, सुई से कढ़ी हुई कारीगरी की एक लटकन बनाओगे।

३७ और तुम उस लटकन के लिए बबूल की लकड़ी के पाँच स्तम्भ बनाओगे, और उन्हें सोने से मढ़ोगे, और उनके अंकुड़े सोने के होंगे: और तुम उनके लिए पीतल की पाँच गर्तिकाएँ ढालोगे।




सत्ताईसवाँ अध्याय।


और तुम एक बबूल की लकड़ी की बलिवेदी बनाओगे, पाँच हाथ लम्बी, और पाँच हाथ चौड़ी; वह बलिवेदी चौकोनी होगी: और उसकी ऊँचाई तीन हाथ होगी।

और तुम उसके चार सींघ उसके चारों कोनो पर बनाओगे: उसके सींघ उसी से होंगे: और तुम उसे पीतल से मढ़ोगे।

और तुम उसके पात्र उसकी राख को ले जाने के लिए बनाओगे, और उसके फावड़े, और उसके कटोरदान, और उसके माँस-काँटे, और उसके अग्निपात्र: उसके सभी बर्तन तुम पीतल के बनाओगे। 

और तुम उसके लिए एक पीतल के काम की जाली बनाओगे; और उस जाले पर तुम चार कड़े उसी के चार कोनों में बनाओगे।

और तुम उसे उस बलिवेदी के घेरे के नीचे लगाओगे, ताकि वह जाली उस बलिवेदी के मध्य तक पहूँच जाए।

और तुम बलिवेदी के लिए डण्डे बनाओगे, बबूल की लकड़ी के डण्डे, और उन्हें पीतल से मढ़ोगे।

और वह डण्डे उन कड़ों में डाल दिए जाएँगे, और वह डण्डे उस बलिवेदी के दोनो ओर होंगे, उसे ढोने हेतु।

पट्टों के साथ तुम उसे खोखला बनाओगे: जैसा कि वह तुम्हें पहाड़ पर दिखला दिया गया था, वैसा ही वह उसे बनाएँगे।

और तुम तम्बू का आँगन बनाओगे: दक्षिण के पाशर्व के लिए दक्षिण की ओर आँगन के लिए लटकनें होंगी, एक सौ हाथों लम्बी, एक ओर के लिए, बटी हुई महीन छालटी की। 

१० और उसके बीस स्तम्भ और उनकी बीस गर्तिकाएँ पीतल की होंगी; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के होंगे।

११ और इसी प्रकार उत्तरी ओर के लिए उसकी लम्बाई में, एक सौ हाथ लम्बी लटकनें होंगी, और उसके बीस स्तम्भ और उनकी बीस गर्तिकाएँ पीतल की होंगी; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के।

१२ और आँगन के पश्चिम की ओर की चौड़ाई के लिए पचास हाथों की लटकनें होंगी: उनके स्तम्भ दस, और उनकी गर्तिकाएँ दस।

१३ और आँगन की पूर्वी चौड़ाई, पूर्व की ओर पचास हाथ होगी।

१४ द्वार के एक ओर की लटकनें पन्द्रह हाथ होंगी: उनके स्तम्भ तीन, और उनकी गर्तिकाएँ तीन।

१५ और दूसरी ओर पन्द्रह हाथ की लटकनें होंगी: उनके स्तम्भ तीन, और उनकी गर्तिकाएँ तीन।

१६ और आँगन के द्वार हेतु एक लटकन होगी बीस हाथों की, नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी की, सुई से कढ़ी हुई कारीगरी की: और उनके स्तम्भ चार होंगे, और उनकी गर्तिकाएँ चार।

१७ आँगन के चारों ओर सभी स्तम्भ चाँदी से जोड़े जाएँगे; उनके अंकुड़े चाँदी के होंगे, और उनकी गर्तिकाएँ पीतल की।

१८ आँगन की लम्बाई सौ हाथ होगी, और चौड़ाई पचास सभी स्थानों में, और ऊँचाई पाँच हाथ बटी हुई महीन छालटी की, और उनकी गर्तिकाएँ पीतल की।

१९ तम्बू के सभी पात्र उसकी समस्त सेवा में, और उसके सभी खूँटे, और आँगन की सभी खूँटियाँ, पीतल की होंगी।

२० और तुम इस्राएल की संतानों को आदेश दोगे, कि वह तुम्हें उजाले के लिए कूटे हुए शुद्ध जैतून का तेल लाएँ, ताकि दीपाधार सदैव जलाता रहे।

२१ सभा के तम्बू में परदे के बाहर, जो साक्ष्य के सम्मुख है, हारुन और उसके बेटे उसे संवारेंगे संध्या से लेकर सुबह तक, प्रभु के सम्मुख: यह सदैवत्वता के लिए एक अध्यादेश होगा उनकी पीढ़ियों के प्रति इस्राएल की संतानों की ओर से।





अठाईसवां अध्याय।


और अपने पास अपने भाई हारुन को, और उसके बेटों को उसके साथ ले लो, इस्राएल की संतानों के बीच में से, ताकि वह पुरोहित-पद पर मेरे प्रति सेवा कर सके, यहाँ तक कि हारुन, नादब और अबीहु, एलाज़र और इथामर, हारुन के बेटे।

और तुम हारुन अपने भाई के लिए पवित्र वस्त्र बनाओगे, महिमा हेतु, और सौंदर्य हेतु।

और तुम उन सभी से बोलोगे जो हृदय में विद्वान हैं, जिन्हें मैंने विद्या की भावात्मा से भर दिया है, कि वह हारुन के वस्त्र बना सकें उसे पवित्र ठहरने हेतु, ताकि वह मेरे प्रति सेवा कर सके पुरोहित-पद में।

और यह हैं वह वस्त्र जो वह बनाएँगे; एक छाती-वस्त्र, और एक एफद, और एक लबादा, और एक कढ़ा हुआ अंगरखा, एक पगड़ी, और एक कमरबँद: और वह हारुन तुम्हारे भाई के लिए, और उसके बेटों के लिए, पवित्र वस्त्र बनाएँगे ताकि वह मेरे प्रति पुरोहित-पद में सेवा कर सके।

और वह सोना, और नील, और जामुनी, और सुर्ख, और महीन छालटी ले लेंगे।

और वह कुशल कारीगरी द्वारा उस एफद को सोने से, और नीले से, और जामुनी से, और सुर्ख से, और बटी हुई महीन छालटी से बनाएँगे।

इसके दोनों कंधों के टुकड़े उसके किनारों पर जुड़े हुए होंगे, और इस प्रकार यह एक साथ जोड़ दिया जाएगा।

और उस एफद का वह निपुण कमरबँध, जो उस पर है, उसी का बना होगा, उसी की कारीगरीनुसार; सोने का, और नीले का, और जामुनी का, और सुर्ख का, और बटी हुई महीन छालटी का।

और तुम दो गोमेद के पत्थर लोगे, और तुम उन पर इस्राएल की संतानों के नामों को उत्कीर्ण करोगे:

१० उनके नामों में से छह एक पत्थर पर, और अन्य छह नाम शेष के, दूसरे पत्थर पर, उनके जन्मानुसार।

११ पत्थर में उत्कीर्ण करने के कारीगर की कारीगरी से, किसी मुहर में उत्कीर्ण कारीगरी के समान, तुम उन दो पत्थरों को इस्राएल की संतानों के नामों से उत्कीर्ण करोगे: तुम उन्हें सोने के खाँचों में जड़ने हेतु बनाओगे।

१२ और तुम उन दोनो पत्थरों को एफद के कंधों पर लगा दोगे इस्राएल की संतानों के प्रति स्मारक पत्थरों हेतु: और हारुन अपने कंधों पर, प्रभु के सम्मुख, उनके नामों को ढोएगा, एक स्मारक हेतु।

१३ और तुम सोने के खाँचे बनाओगे;

१४ और शुद्ध सोने की दो कड़ियाँ सिरों पर; तुम उन्हें बुनाई के काम से बनाओगे, और उन बुनाई वाली कड़ियाँ को उन खाँचों से जोड़ देना।

१५ और तुम न्याय-निर्धारण के छाती-वस्त्र को कुशल कारीगरी से बनाओगे; तुम उसे एफद के कामानुसार ही तुम उसे बनाना; सोने से, और नीले से, और जामुनी से, और सुर्ख से, और बटी हुई महीन छालटी से तुम उसे बनाओगे।

१६ वह चौकोर होगा दोहरा बना हुआ; एक बित्ता उसकी लम्बाई होगी, और एक बित्ता उसकी चौड़ाई होगी।

१७ और तुम उस में पत्थरों को जड़ दोगे, पत्थरों की ही चार पंक्तियाँ: पहली पंक्ति होगी एक चुन्नी की, एक पुखराज की, और एक लालड़ी की: यह पहली पंक्ति होगी।

१८ और दूसरी पंक्ति होगी एक पन्ने की, एक नीलम की, और एक हीरे की। 

१९ और तीसरी पंक्ति एक धूम्रकांत की, और शेबू की, और बिल्लौर की।

२० और चौथी पंक्ति एक फ़िरोज़ा की, और एक गोमेद की, और एक सूर्यकान्त की: यह सोने में अपने खाँचों में जड़ दिए जाएँगे।

२१ और वह पत्थर इस्राएल की संतानों के नामों के साथ होंगे, बारह, उनके नामोंनुसार, किसी मुहर में उत्कीर्ण कारीगरी के समान; वह प्रत्येक उसके नाम के साथ होंगे, उन बारह प्रजातियोंनुसार। 

२२ और तुम उस छाती-वस्त्र पर कड़ियाँ सिरों पर, शुद्ध स्वर्ण की बुनाई के काम से बनाओगे।

२३ और तुम छाती-वस्त्र पर सोने के दो कड़े बनाओगे, और तुम उन दो कड़ों को छाती-वस्त्र के दो सिरों पर लगा दोगे।

२४ और तुम उन दोनो सोने की बुनी हुई कड़ियों को उन दो कड़ों में डाल दोगे जो छाती-वस्त्र के सिरों पर हैं।

२५ और उन दो बुनी हुई कड़ियों के उन अन्य दो सिरों को तुम दो खाँचों में जोड़ दोगे, और तुम उन्हें उसके आगे के एफद के कंधों के टुकड़ों में लगा दोगे।

२६ और तुम सोने के दो कड़े बनाओगे, और तुम उन्हें छाती-वस्त्र के दो सिरों पर उसके किनारे पर लगा दोगे, जो कि भीतरी ओर एफद के पाशर्व में है।

२७ और तुम दो अन्य कड़े बनाओगे, और तुम उन्हें एफद की दोनो ओर नीचे लगा दोगे, उसी के सामने के भाग की ओर, उसके दूसरे जोड़ के विपरीत ही, एफद के निपुण कमरबँध के ऊपर ही।

२८ और वह उस छाती-वस्त्र को उसके कड़ों से, एफद के कड़ों के साथ बाँध देंगे, एक नीले फीते से, ताकि वह एफद के निपुण कमरबँध के ऊपर हो, और की वह छाती-वस्त्र एफद से ढीला रह जाए।

२९ और हारुन इस्राएल की संतानों के नामों को न्याय-निर्धारण के छाती-वस्त्र में अपने हृदय पर ढोएगा, जब वह पवित्र स्थान में भीतर प्रवेश करता है, प्रभु के सम्मुख एक स्मारक हेतु निरन्तर।

३० और तुम न्याय-निर्धारण के छाती-वस्त्र में ऊरीम और थुमीम डाल दोगे; और यह हारुन के हृदय पर होंगे, जब वह प्रभु के सम्मुख भीतर जाता है: और हारुन निरंतरता से इस्राएल की संतानों का न्याय-निर्धारण प्रभु के सम्मुख, अपने हृदय पर ढोएगा।

३१ और तुम उस एफद का अंगरखा सम्पूर्णता से नीले से बनाओगे। 

३२ और उसके ऊपर मध्य में एक छेद होगा: उस छेद के चारों ओर बुने हुए काम का किनारा होगा, मानो की वह किसी जिरह-बख्तर का छेद हो, ताकि वह फटे न।

३३ और नीचे उसके घेरे में तुम नीले, और जामुनी, और सुर्ख से अनार बनोगे, उसके चारों ओर उसके घेरे में; और सोने की घंटियाँ उनके बीच चारों ओर:

३४ एक सोने की घंटी और एक अनार, एक सोने की घंटी और एक अनार, उस अंगरखे के घेरे पर उसके चारों ओर।

३५ और वह हारुन पर होगा सेवा करने हेतु: और उसकी ध्वनि सुनी जाएगी जब वह पवित्र स्थान में भीतर जाता है प्रभु के सम्मुख, और जब वह बाहर निक आता है, ताकि वह मरे न। 

३६ और तुम शुद्ध स्वर्ण की एक तख़्ती बनाओगे, और उस उत्कीर्ण करोगे, किसी मुहर में उत्कीर्ण कारीगरी के समान, प्रभु के प्रति पवित्रता।

३७ और तुम उसे एक नीले फीते पर लगाओगे, ताकि वह उस पगड़ी पर हो; पगड़ी के सामने के भाग पर वह होगी।

३८ और वह हारुन के माथे पर होगी, ताकि हारुन उन पवित्र वस्तुओं की अधर्मता को ढोए, जिन्हें इस्राएल की संतानें अपने समस्त पवित्र उपहारों में पुनीत ठहराएँगी; और वह सदैव उसके माथे पर होगी, ताकि वह प्रभु सम्मुख स्वीकृत हो सकें। 

३९ और तुम उस महीन छालटी के अंगरखे को कढ़ोगे, और तुम उस पगड़ी को महीन छालटी से बनाओगे, और तुम उस कमरबंद को सुई की कारीगरी से बनाओगे।

४० और हारुन के बेटों के लिए तुम अंगरखे बनाओगे, और तुम उनके लिए कमरबंद बनाओगे, और टोपियाँ तुम उनके लिए बनाओगे, महिमा हेतु और सौंदर्य हेतु।

४१ और तुम उन्हें अपने भाई हारुन पर, और उसके बेटों पर उसके साथ, पहनवा दोगे; और उनका अभिषेक कर दोगे, और उन्हें स्थापित कर दोगे, और उन्हें पुनीत ठहरा दोगे, ताकि वह मेरी सेवा पुरोहित-पद पर कर सकें।

४२ और तुम उनके लिए उनकी नग्नता को ढकने के लिए छालटी के जाँघिये बनाओगे; कटियों से लेकर जाँघों तक भी उनकी पहुँच होगी:

४३ और उन्हें हारुन और उसके बेटे पहेनेंगे, जब वह सभा के तम्बू में अन्दर आते हैं, अथ्वा जब वह सेवा करने हेतु पवित्र स्थान में बलिवेदी के निकट आते हैं; ताकि वह अधर्मता का भार ढो लें, और मर जाएँ: यह एक अध्यादेश उसके और उसके पश्चात उसके बीज के प्रति अनन्तता तक होगा।




उन्नतीसवाँ अध्याय।


और यह है वह कार्य जो तुम उनके प्रति करोगे उन्हें पुनीत ठहरा देने हेतु, पुरोहित-पद में मेरी सेवा करने हेतु: एक युवा सांड, और दो मेढ़े, निष्कलंक, ले लेना,

और बेख़मीरी रोटी, और बेख़मीरी छेद किए पराँठे तेल सम्मिश्रित, और बेख़मीरी पताशे तेल से लिपे हुए: गेहूँ के आते से तुम इन्हें बनाओगे।

और तुम उन्हें एक टोकरे में डालोगे, और तुम उन्हें उस टोकरे में लाओगे, उस सांड और उन दो मेढ़ों के साथ।

और हारुन को और उसके बेटों को तुम सभे का तम्बू के द्वार तक ले आओगे, और तुम उन्हें पानी से धो दोगे।

और तुम उन वस्त्रों को लोगे, और हारुन को वह अंगरखा, और वह एफद, और वह छाती-वस्त्र, पहनवा दोगे, और उसे उस एफद के निपुण कमरबँध से कस दोगे:

और तुम उस पगड़ी को उसके सर पर पहना दोगे, और उस पवित्र मुकुट को उस पगड़ी पर लगा दोगे।

तब तुम उस अभिषेक-तेल को लोगे, और उसे उसके सर पर उँडेल दोगे, और उसका अभिषेक कर दोगे।

और तुम उसके बेटों को लाओगे, और उन्हें वह अंगरखे पहनवा दोगे।

और तुम उन्हें कमरबँधों से कस दोगे, हारुन और उसके बेटों को, और तुम उन पर उन टोपियों को लगा दोगे: और पुरोहित-पद उन्हीं का होगा एक निरंतर अध्यादेश हेतु: और तुम हारुन और उसके बेटों को स्थापित कर दोगे।

१० और तुम एक सांड को सभा के तम्बू में समक्ष ले आओगे: और हारुन और उसके बेटे उस सांड के सर पर अपने हाथ रखेंगे।

११ और तुम उस सांड को प्रभु के सम्मुख मार दोगे, सभा के तम्बू के दवर के साथ ही। 

१२ और तुम उस सांड के रक्त में से लोगे, और उसे अपनी उँगली से बलिवेदी के सींघों पर लगा दोगे, और उस सारे रक्त को बलिवेदी के तले के साथ उँडेल दोगे।

१३ और तुम उस सारी चर्बी को, जो भीतरी अंगों को ढकती है, और उस जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली को, और उन दोनो गुर्दों को, और उन पर उस चर्बी को ले लोगे, और उन्हें बलिवेदी पर जला दोगे।

१४ परन्तु उस सांड के माँस को, और उसकी चमड़ी को, और उसके मल को तुम अग्नी के साथ शिविर के बाहर जलाओगे: यह एक पाप-चढ़ावा है।

१५ तुम एक मेढ़े को भी लोगे; और हारुन और उसके बेटे उस मेढ़े के सर पर अपने हाथ रखेंगे।

१६ और तुम उस मेढ़े की हत्या कर दोगे, और तुम उसके रक्त लेकर, उसे बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क दोगे।

१७ और तुम उस मेढ़े को टुकड़ों-टुकड़ों में काट दोगे, और उसके भीतरी अंगों को, और उसकी टांगों को धो डालोगे, और उन्हें उसके टुकड़ों और उसके सर के साथ रख दोगे।

१८ और तुम उस सम्पूर्ण मेढ़े को बेलिवेदी पर जला दोगे: यह एक जला चढ़ावा है प्रभु के लिए: यह एक स्वादिष्ट मिठास है, एक आहुति प्रभु के प्रति अग्नी से बनाई हुई।

१९ और तुम उस दूसरे मेढ़े को लोगे; और हारुन और उसके बेटे उस मेढ़े के सर पर अपने हाथ रखेंगे।

२० फिर तुम उस मेढ़े को मार डालोगे, और उसके रक्त में से लेकर, उसे हारुन के दाहिने कान की नोक पर, और उसके बेटों के दाहिने कान की नोक पर, और उनके दाहिने हाथ के अँगूठे पर, और उनके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर लगा दोगे, और उस रक्त को उस बलिवेदी के चारों ओर छिड़क दोगे।

२१ और उस रक्त में से जो बलिवेदी पर है, और अभिषेक-तेल में से तुम लोगे, और उसे हारुन पर, और उसके वस्त्रों पर, और उसके बेटों पर, और उसके बेटों के वस्त्रों पर उसके साथ, छिड़क दोगे: और वह, और उसके वस्त्र, और उसके बेटे, और उसके बेटों के वस्त्र उसके साथ, पवित्र ठहरा दिए जाएँगे।

२२ और तुम लोगे उस मेढ़े की चर्बी से और चर्बीली पूँछ, और वह चर्बी जो अन्दरूनी अंगों को ढकती है, और जिगर के ऊपर की चर्बीली झिल्ली, और वह दोनो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, और दायाँ कन्धा; क्योंकि यह स्थापना का मेढ़ा है:

२३ और उस बेख़मीरी रोटी के टोकरे में से, जो प्रभु के समक्ष है, एक रोटी का मोटा पाव, और एक छेद किया पराँठा तेल की रोटी का, और एक पताशा:

२४ और तुम सभी हारुन के और उसके बेटों के हाथों में रख दोगे; और तुम उन्हें प्रभु के सम्मुख लहरा दोगे एक लहराए चढ़ावे हेतु।

२५ और तुम उन्हें उनके हाथों से ग्रहण करोगे, और उन्हें बलिवेदी पर जला दोगे, एक जले चढ़ावे हेतु, प्रभु के सम्मुख एक स्वादिष्ट मिठास हेतु: यह एक आहुति प्रभु के प्रति अग्नी से बनाई हुई है।

२६ और तुम हारुन की स्थापना के मेढ़े की छाती लोगे, और उसे प्रभु के सम्मुख लहरा दोगे एक लहराए चढ़ावे हेतु: और यह तुम्हारा भाग होगा।

२७ और तुम पुनीत ठहरा दोगे उस लहराए-चढ़ावे की छाती को, और उठाए-चढ़ावे के कंधे को जो लहराया है, और जो ऊपर उठाया गया है, उस स्थापना के मेढ़े से, उसी में से ही जो हारुन के लिए है, और उस में से जो उसके बेटों के लिए है:

२८ और यह इस्राएल की संतानों की ओर से, हारुन और उसके बेटों का होगा, एक अनन्तता के अध्यादेश द्वारा: क्योंकि यह एक उठाया-चढ़ावा है: और यह इस्राएल की संतानों की ओर से एक उठाया-चढ़ावा होगा, उनकी शान्ति-चढ़ावों का चढ़ावा, यहाँ तक की उनका उठाया-चढ़ावा प्रभु के प्रति। 

२९ और हारुन के पवित्र वस्त्र उसके बेटों के होंगे उसके पश्चात, उन्हीं में अभिषिक्त होने हेतु, और उन में स्थापित हो जाने हेतु।

३० और वह बेटा जो उसके स्थान में पुरोहित है, उन्हें सात दिन पहने रहेगा, जब वह सभा के तम्बू में भीतर आता है पवित्र स्थान में सेवा करने हेतु।

३१ और तुम उस स्थापना के मेढ़े को लोगे, और उसके मास को पवित्र स्थान में उबालोगे।

३२ और हारुन और उसके बेटे उस मेढ़े के माँस को, और उस रोटी को जो टोकरे में है, सभा के तम्बू के द्वार के साथ खाएँगे।

३३ और वह उन वस्तुओं को खाएँगे जिन से पापमोचन कर दिया गया था, उन्हें स्थापित और उन्हें पुनीत ठहरा देने हेतु: परन्तु कोई परदेशी उस में से नहीं खाएँगा, क्योंकि वह पवित्र हैं।

३४ और यदि उन स्थापनाओं के माँस में से, या उस रोटी में से कोई अन्श, सुबह तक बचा रह जाता है, तब तुम उस शेष को अग्नी से जला दोगे: वह खाया नहीं जाएगा, क्योंकि वह पवित्र है।

३५ और इस प्रकार तुम हारुन के प्रति, और उसके बेटों के प्रति करोगे, उन सभी बातों के अनुसार जिन का मैंने तुम्हें आदेश दे दिया है: सात दिन तुम उनकी स्थापना करोगे।

३६ और तुम प्रत्येक दिन पापमोचन हेतु एक पाप-चढ़ावे हेतु एक सांड को चढ़ाओगे: और तुम बलिवेदी को स्वच्छ करोगे, जब तुमने उसके लिए पापमोचन कर दिया है, और तुम उसे पुनीत ठहरा देने हेतु उसका विलेपन कर दोगे।

३७ सात दिन तुम उस बलिवेदी के लिए एक पापमोचन करोगे, और उसे पुनीत ठहराओगे; और वह एक अति पवित्रतम बलिवेदी होगी: जो कुछ भी उस बलिवेदी का स्पर्श करेगा पवित्र होगा।

३८ अब यह वह है जिसे तुम बलिवेदी पर चढ़ाओगे; पहले साल के दो मेमने दिन प्रति दिन निरन्तर।

३९ एक मेमने को तुम सुबह चढ़ाओगे; और दूसरे मेमने को तुम संध्या के समय चढ़ाओगे;

४० और उस एक मेमने के साथ एक-दसवाँ भाग आटे का, कूटे हुए तेल के एक हिन के चौथे भाग के साथ सम्मिश्रित; और एक पेय-चढ़ावे हेतु अंगूर-रस के एक हिन का चौथा भाग।

४१ और उस दूसरे मेमने को तुम संध्या के समय चढ़ाओगे, और उसके साथ तुम सुबह के उस भोज-चढ़ावेनुसार करोगे, और उसके पेय-चढ़ावेनुसार, एक स्वादिष्ट महक हेतु, प्रभु हेतु एक अग्नी द्वारा बनाया गया एक चढ़ावा।

४२ यह एक निरन्तर जला-चढ़ावा होगा तुम्हारी पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों तक, प्रभु के सम्मुख सभा के तम्बू के द्वार पर: जहाँ मैं तुम से भेंट करूँगा, तुम से वहाँ बोलने हेतु।

४३ और वहाँ मैं इस्राएल की संतानों से भेंट करूँगा, और वह तम्बू मेरे गौरव के माध्यम से पुनीत हो जाएगा।

४४ और मैं सभा के उस तम्बू को, और उस बलिवेदी को पुनीत करूँगा: मैं दोनो हारुन को भी और उसके बेटों को पुनीत कर दूँगा, पुरोहित-पद में मेरी सेवा करने हेतु।

४५ और मैं इस्राएल की संतानों के बीच बसूँगा, और उनका ईश्वर हूँगा।

४६ और वह जान जाएँगे कि मैं प्रभु उनका ईश्वर हूँ, जो उन्हें मिस्र की भूमि में से बाहर ले आया, ताकि मैं उनके बीच बस सकूँ: मैं प्रभु उनका ईश्वर हूँ।



तीसवाँ अध्याय।


और तुम एक बलिवेदी बनाओगे जिस पर सुगन्धित धूप जलेगी: बबूल की लकड़ी से तुम उसे बनाओगे।

एक हाथ उसकी लम्बाई होगी, और एक हाथ उनकी चौड़ाई होगी; वह चौकोर होगी: और उसकी ऊँचाई दो हाथ होगी: उसके सींघ उसी में से होंगे।

और तुम उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ोगे, उसका ऊपर का भाग, और चारों ओर उसके पाशर्व, और उसके सींघ; और तुम उसके लिए एक चारों ओर सोने का छोटा घेरा बनाओगे।

और दो स्वर्ण कड़े तुम उसके लिए बनाओगे उसके घेरे के नीचे, उसके दो कोनो के साथ, उसके दो पाशर्वों पर तुम उसे बनाओगे; और वह डंडों के लिए स्थान होंगे उसे ढोने के लिए।

और तुम उन डंडों को बबूल की लकड़ी से बनाओगे, और तुम उन्हें सोने से मढ़ दोगे।

और तुम उसे उस परदे के सम्मुख रख दोगे जो साक्ष्य के संदूक के साथ है, उस प्रेषण-आसन के सम्मुख जो उस साक्ष्य के ऊपर है, जहाँ मैं तुम से भेंट करूँगा।

और हारुन उस पर प्रत्येक सुबह मधुर-सुगंधित-धूप जलाएगा: जब वह उन दीपकों को तैयार करता है, वह उस पर सुगन्धित-धूप जलाएगा।

और जब हारुन संध्या के समय उन दीपों को जलाता है, वह उस पर सुगन्धित-धूप जला देगा, प्रभु के सम्मुख एक निरन्तर सुगन्धित-धूप तुम्हारी पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों तक।

तुम उस पर कोई भी विचित्र सुगन्धित-धूप, ही जला-चढ़ावा, ही भोज-चढ़ावा चढ़ाओगे; ही तुम उस पर पेय-चढ़ावा उँडेलोगे।

१० और हारुन उसके सींघों पर वर्ष में एक बार पापमोचन करेगा पापमोचनों के पाप-चढ़ावे के रक्त से: वर्ष में एक बार वह उस पर पापमोचन करेगा, तुम्हारी पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों तक: यह अति पवित्रतम है, प्रभु के प्रति।

११ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

१२ जब तुम इस्राएल की संतानों को उनकी संख्यानुसार गिनोगे, तब प्रत्येक पुरुष प्रभु को अपनी आत्मा हेतु एक फिरौती देगा, जब तुम उन्हें गिनोगे; ताकि उनके बीच कोई महामारी हो, जब टन उन्हें गिनोगे।

१३ वह यह देंगे, प्रत्येक जो उनके बीच गिने गए हैं, आधा शेक्ल पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार: (एक शेक्ल बीस गेरा होता है:) आधा शेक्ल प्रभु के लिए चढ़ावा होगा।

१४ प्रत्येक जो उनके बीच गिने गए हैं, बीस वर्ष की आयु से और ऊपर, प्रभु को एक चढ़ावा देंगे।

१५ धनवान अधिक नहीं देंगे, और दरिद्र कम नहीं देंगे, आधे शेक्ल से, जब वह प्रभु के प्रति एक चढ़ावा देते हैं, तुम्हारी आत्माओं का पापमोचन करने हेतु।

१६ और तुम इस्राएल की संतानों से पापमोचन का वह पैसा लोगे, और तुम उसे सभा के तम्बू के सेवा हेतु नियुक्त कर दोगे; ताकि वह एक प्रभु के सम्मुख इस्राएल की संतानों के प्रति एक स्मारक हो सके, तुम्हारी आत्माओं का पापमोचन करने हेतु।

१७ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१८ तुम एक पीतल का कुण्ड भी बनाओगे, और उसका पाँव भी पीतल का, सब धोने हेतु: और तुम उसे सभा के तम्बू और बलिवेदी के बेच रख दोगे, और तुम उस में पानी डाल दोगे।

१९ क्योंकि हारुन और उसके बेटे उस पर अपने हाथों और पैरों को धोएँगे:

२० जब वह सभा के तम्बू में भीतर जाते हैं, वह पाने से धोएँगे, ताकि वह मरें ; अथ्वा जब वह बलिवेदी के निकट सेवा करने आते हैं, प्रभु के प्रति अग्नी से बनाए हुए चढ़ावे को जलाने हेतु:

२१ तो वह अपने हाथों को और पैरों को धोएँगे, ताकि वह मरें : और यह उनके प्रति एक अनन्तता तक अध्यादेश होगा, यहाँ तक कि उसके प्रति और उसके बीज के प्रति उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक।

२२ इसके अतिरिक्त प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,   

२३ तुम अपने पास उत्तम  सुगन्धित-द्रव्य भी ले लो, शुद्ध लोहबान से पाँच सौ शेक्ल, और मधुर दालचीनी से उसका आधा, यहाँ तक कि ढाई सौ पचास शेक्ल, और मधुर वच से ढाई सौ शेक्ल,

२४ और तेजपत्र से पाँच सौ शेक्ल, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार, और एक हिन जैतून का तेल:

२५ और तुम उसे पवित्र मरहम का तेल बना दोगे, इत्रों की कलानुसार एक मरहम मिश्रण: यह एक पवित्र अभिषेक-तेल होगा।

२६ और तुम अभिषेक करोगे इस से सभा के तम्बू का, और साक्ष्य के संदूक का,

२७ और मेज़ और उसके समस्त पात्रों का, और दीपाधार का और उसके पात्रों का, और सुगन्धित-धूप की बलिवेदी का,

२८ और जले चढ़ावे की बलिवेदी का उसके समस्त पात्रों के साथ, और उस कुण्ड का उसके पाँव का।

२९ और तुम उन्हें पुनीत ठहरा दोगे, ताकि वह अति पवित्रतम हो सकें: जो कुछ भी उन्हें छूता है पवित्र होगा।

३० और तुम हारुन और उसके बेटों का अभिषेक करोगे, और उन्हें स्थापि करोगे, ताकि वह पुरोहित-पद में मेरी सेवा कर सकें।

३१ और तुम इस्राएल की संतानों से बोलोगे, यह मेरे प्रति एक पवित्र अभिषेक-तेल होगा तुम्हारे पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक।

३२ मनुष्य के देह पर यह नहीं उंडेला जाएगा, ही तुम इसके समान कोई अन्य बनाओगे, इसके संयोजनानुसार: यह पवित्र है, और यह तुम्हारे प्रति पवित्र होगा।

३३ जो कोई भी इसके सदृश सम्मिश्रण करेगा, या जो कोई भी इस में से कुछ भी किसी परदेशी पर लगाएगा, अपने लोगों में से काट दिया जाएगा।

३४ और प्रभु ने मूसा से कहा, अपने पास मधुर  सुगन्धित-द्रव्य, नक़्फ, और शहतीरा, और गलबानुम ले लो; यही मधुर सुगन्धित-द्रव्य शुद्ध गंधरस के साथ: प्रत्येक एक समान तोल का होगा:

३५ और तुम इसे एक इत्र बनाओगे, एक मिश्रण इत्रों की कलानुसार, एक ही साथ समिश्रित, शुद्ध और पवित्र:

३६ और तुम उस में से कुछ की अति-सूक्ष्म कुटाई कर दोगे, और उसे सभा के तम्बू में साक्ष्य के सम्मुख रख दोगे, जहाँ मैं तुम से भेंट करूँगा: यह तुम्हारे प्रति अति पवित्रतम होगा।

३७ और उस इत्र के विषय में जिसे तुम बनाओगे, तुम अपने स्वयं के लिए उसके संयोजनानुसार नहीं बनाओगे: यह तुम्हारे प्रति प्रभु के लिए पवित्र होगा।

३८ जो कोई भी इसके सदृश बनाएगा, उसे सूंघने हेतु, अपने लोगों में से काट दिया जाएगा।




इकत्तीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

देखो, मैंने नाम से यहूदा की प्रजाति के बज़लेअल, ऊरी के बेटे, हूर के बेटे को बुलाया है: 

और मैंने उसे ईश्वर के भावात्मा से भर दिया है, विद्या में, और समझदारी में, और ज्ञान में, और समस्त प्रकार की कारीगरी में,

कुशलता से कारीगरी करने हेतु, सोने की कारीगरी, और रजत की, और पीतल की,

और पत्थरों को काटने की, उन्हें जड़ने हेतु, और लकड़ी को तराशने की, समस्त कारीगरी में काम करने हेतु।

और मैंने, देखो, मैंने उसे दान की प्रजाति का अहोलियाब, अहिसमाक का बेटा, दे दिया है: और उन सभी के हृदयों में जो विद्या का हृदय रखते हैं मैंने विद्या डाल दी है, ताकि वह, वो सब कुछ निर्मित कर दें जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है;

सभा का तम्बू, और साक्ष्य का संदूक, और प्रेषण-आसन जो उस पर है, और तम्बू का समस्त फर्नीचर,

और वह मेज़ और उसका फर्नीचर, और वह शुद्ध दीपाधार उसके समस्त फर्नीचर के साथ, और सुगन्धित-धूप की बलिवेदी,

और जले-चढ़ावे की बलिवेदी उसके समस्त फर्नीचर के साथ, और वह कुंड और उसका पाँव,

१० और सेवा के कपड़े, और हारुन पुरोहित के लिए वह पवित्र वस्त्र, और उसके बेटों के वस्त्र, पुरोहित-पद पर सेवा करने हेतु,

११ और अभिषेक-तेल, और मधुर-सुगंधित-धूप पवित्र स्थान के लिए: उस सभी के अनुसार जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है यह कर देंगे।

१२ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१३ इस्राएल की संतानों से भी बोलो, कहते हुए, सच में मेरे सैबथों का तुम पालन करोगे: क्योंकि यह मेरे और तुम्हारी पीढ़ी दर पीढ़ी के बीच एक संकेत हैं; ताकि तुम जान सको कि मैं प्रभु हूँ जो तुम्हें पुनीत ठहरता हूँ।

१४ इसलिए तुम सैबथ को रखोगे; क्योंकि यह तुम्हारे प्रति पवित्र है: जो कोई भी इसे दूषित करेगा मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: क्योंकि जो कोई भी इस में कोई भी काम करेगा, वह आत्मा उसके लोगों में से काट दी जाएगी।

१५ छह दिन काम किया जा सकता है; परन्तु उस सातवें में विश्राम का सैबथ है, प्रभु के प्रति पवित्र: जो कोई भी सैबथ में कोई भी काम करेगा, वह अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१६ इसी कारण वश इस्राएल की संतानें सैबथ को रखेंगी, सैबथ का अनुपालन करने हेतु उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक, एक अन्तहीन प्रतिज्ञापत्र के लिए।

१७ यह मेरे और इस्राएल की संतानों के बीच एक सदैवत्वता के लिए संकेत है: क्योंकि छह दिनो में प्रभु ने स्वर्ग और पृथ्वी बनाए, और सातवें दिन पर उन्होंने विश्राम किया, और वह पुनश्चरयित हुए थे।

१८ और जब उन्होंने सीनय पर्वत पर उसके साथ सम्वाद करने का अन्त कर दिया था, उन्होंने मूसा को दो साक्ष्य की पट्टियाँ दे दीं, पत्थर की पट्टियाँ, ईश्वर की उँगली से लिखी हुईं।



बत्तीसवाँ अध्याय।


और जब उन लोगों ने देखा कि मूसा पर्वत में से बाहर नीचे जाने में विलंबन कर रहा था, उन लोगों ने स्वयं को हारुन के पास एकत्रित कर लिया, और उससे कहा, उठो, हमारे लिए ईश्वरों को बना दो, जो हमारे सम्मुख जाएँगे; क्योंकि जहाँ तक मूसा की बात आती है, वह आदमी जो हमें मिस्र की भूमि में से बाहर ऊपर लाया था, हम जानते नहीं हैं कि उसका क्या बन गया है।

और हारुन ने उनसे कहा, तोड़ दो वह सोने की बालियाँ, जो तुम्हारी पत्नियों के कानों में हैं, और तुम्हारे बेटों के, और तुम्हारी बेटियों के, और उन्हें मेरे पास ले आओ।

और उन सभी लोगों ने उन सोने की बलियों को तोड़ लिया जो उनके कानों में थीं, और वह उन्हें हारुन के पास ले आए। 

और उसने उन्हें उनके हाथों ग्रहण कर लिया, और उसने उसे एक उत्कीर्ण करने के उपकरण से रचाया, उसे एक ढलवाँ बछड़ा बना देने के पश्चात: और उन्होंने कहा, यह होंगे तुम्हारे ईश्वर-गण, हे इस्राएल, जो तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर ऊपर ले आए थे।

और जब हारुन ने उसे देखा, उसने उसके सम्मुख एक बलिवेदी का निर्माण किया; और हारुन ने यह घोषणा की और कहा, कल प्रभु के प्रति एक भोज है।

और वह अगले दिन सुबह-सुबह उठ गए, और जले चढ़ावे चढ़ाए, और शान्ति चढ़ावे लाए; और वह लोग खाने और पीने के लिए नीचे बैठ गए, और वह हँसी उड़ाने के लिए ऊपर उठ गए।

और प्रभु ने मूसा से कहा, चले जाओ, तुम नीचे चले जाओ; क्योंकि तुम्हारे लोगों ने, जिन्हें तुम मिस्र की भूमि में से बाहर लाए हो, स्वयं को भ्रष्ट कर दिया है:

वह तो उस पथ पर से, जिसका मैंने उन्हें आदेश दिया था, शीघ्रता से ही परे मुड़ कर बाहर चले गए हैं: उन्होंने स्वयं के प्रति एक ढलवाँ बछड़ा बना दिया है, और उन्होंने उसकी आराधना भी कर ली हाँ, और उसके प्रति बलिदान भी किया है, और कह दिया है, यह तुम्हारे ईश्वर-गण होंगे, हे इस्राएल, जो तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर ऊपर ले आए हैं।

और प्रभु ने मूसा से कहा, मैंने इन लोगों को देख लिया है, और देख लो, यह तो एक ऐंठी गर्दन वाले लोग हैं:  

१० अब इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो, ताकि मेरे आक्रोश की क्रोधाग्नि इनके विरुद्ध भड़क उठे, और कि मैं इनका विध्वंस कर दूँ: और मैं तुम में से एक महा-राष्ट्र बना दूँगा।

११ और मूसा ने प्रभु अपने ईश्वर से याचना की, और कहा, प्रभु, आपके आक्रोश की क्रोधाग्नि आपके लोगों के विरुद्ध क्यों भड़क रही है, जिन्हें आप मिस्र की भूमि में से महा शक्ती के साथ, और एक बलशाली हाथ के साथ, बाहर लाए हैं?

१२ किस कारण वह मिस्रवासी बोलें, और कहें, कि अनिष्टता हेतु वह उन्हें बाहर ले आए, उन्हें पर्वतों में मार डालने हेतु, और उनका पृथ्वी के चहरे पर से विध्वंस कर देने के लिए? अपने क्रुद्ध आक्रोश से मुड़ जाएँ, और अपने लोगों के विरुद्द इस बुराई का खेद मना लें।

१३ अब्राहम, इसहाक अपने सेवकों का स्मरण करें, जिन से अपने अपने स्वयं से ही वशन दे दिया था, और उनसे कह दिया था, मैं तुम्हारे बीज को स्वर्ग के सितारों समान गुणा कर दूँगा, और यह समस्त भूमी जिसके विषय में मैंने बोल दिया है मैं तुम्हारे बीज को दे दूँगा, और वह सदैवत्वता के लिए इसकी विरासत ले लेंगे।

१४ और प्रभु ने उस बुराई का खेद मनाया जिसे उन्होंने सोचा थे वह अपने लोगों के साथ कर देंगे।

१५ और मूसा मुड़, और वह पर्वत से नीचे चला गया, और वह साक्ष्य की दो पट्टियाँ उसके हाथ में थीं: वह पट्टियाँ उनकी दोनो ओर लिखित थीं; एक ओर पर और दूसरी ओर पर वह लिखित थीं।

१६ और वह पट्टियाँ ईश्वर की कृति थीं, और वह लेख ईश्वर का लेख था, उन पट्टियों पर उत्कीर्ण किया हुआ।

१७ और जब यहोशुआ ने लोगों का शोर सुना जैसे वह चिल्ला रहे थे, उसने मूसा से कहा, शिविर में युद्ध का शोर मच रहा है।

१८ और उसने कहा, यह उनका शोर नहीं है जो विजय चिल्ला रहे हैं, ही यह उनकी चीख है जो परास्त हो चुके हैं: परन्तु वह जो गा रहे हैं उनका शोर मैं सुन रहा हूँ।

१९ और यह होने को आया, कि जैसे ही वह शिविर के निकट आया, कि उसने उस बछड़े को देखा, और वह नाचना: और मूसा के क्रोध की क्रोधाग्नि उनके विरुद्ध भड़क उठी, और उसने वह पट्टियाँ अपने हाथों में से बाहर फैंक दीं, और उन्हें पर्वत के तले तोड़ दिया।

२० और उसने वह बछड़ा लिया जिसे उन्होंने बनाया था, और उसे अग्नी में भस्म कर दिया, और उसे चूरण में पीस दिया, और उसे पानी पर छितरा दिया, और इस्राएल की संतानों को उस में से पिलवा दिया।

२१ और मूसा ने हारुन से कहा, इन लोगों ने क्या कर दिया हैं तुम्हारे साथ, कि तुम इन पर एक इतना विशाल पाप ले आए हो?

२२ और हारुन ने कहा, मेरे प्रभु के क्रोध की क्रोधाग्नि को भड़क उठने दें: आप इन लोगों से परिचित हैं, कि यह तो अनिष्टता पर सवार हैं।

२३ क्योंकि इन्होंने मुझ से कहा, हमारे लिए ईश्वर-गणों को बना दो, जो हमारे सम्मुख जाएँगे; क्योंकि जहाँ तक मूसा की बात आती है, वह आदमी जो हमें मिस्र की भूमि में से बाहर ऊपर लाया था, हम जानते नहीं हैं कि उसका क्या बन गया है।

२४ और मैंने उनसे कहा, जिस किसी के पास कोई भी सोना हो, उन्हें उसे तोड़ लेने दो। तो इन्होंने उसे मुझे दे दिया: तब मैंने उसे अग्नी में फैंक दिया, और यह बछड़ा बाहर निकल आया। 

२५ और जब मूसा ने देखा कि वह लोग नग्न थे; (क्योंकि हारुन ने उन्हें नग्न बना दिया था, उनकी लाज को उनके शत्रुओं के बीच खोल देने हेतु:)

२६ तब मूसा शिविर के दरवाज़े में खड़ा हो गया, और उसने कहा, प्रभु के पक्ष में कौन है? उसे मेरे पास जाने दो। और लेवी के समस्त बेटों ने उसके पास स्वयं का एकत्रण कर लिया।

२७ और उसने उनसे कहा, इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, प्रत्येक पुरुष अपनी तलवार को अपनी जांघ पर लगा ले, और शिविर के सर्वत्व में दरवाज़े-दरवाज़े से अंदर-बाहर चले जाओ, और प्रत्येक पुरुष अपने भाई को, और प्रत्येक पुरुष अपने साथी को, को प्रत्येक पुरुष अपने पड़ौसी को मार डाले।

२८ और लेवी की सन्तान ने मूसा के शब्दानुसार कर डाला: और उन लोगों में से उस दिन लग भग तीन हज़ार आदमी गिर गए।

२९ क्योंकि मूसा ने कह दिया था, प्रभु के प्रति स्वयं को इस दिन स्थापित कर दो, यहाँ तक कि प्रत्येक पुरुष अपने पुत्र के प्रति, और अपने भाई के प्रति; ताकि वह तुम पर इस दिन एक आशीर्वाद प्रदान कर दें।

३० और अगले दिन ऐसा होने को आया, कि मूसा ने लोगों से कहा, तुमने एक महा पाप का पाप कर डाला है: और अब मैं प्रभु के पास ऊपर जाऊँगा; मान लो कि मैं तुम्हारे पाप के लिए पापमोचन कर सकूँ।

३१ और मूसा प्रभु के पास वापस लौटा, और उसने कहा, हाय, इन लोगों ने एक महा पाप का पाप कर डाला है, और इन्होंने सोने के ईश्वरों को बना दिया है।

३२ तथापि अब, यदि उनका पाप क्षमा कर दें--; और यदि नहीं, मुझे मिटा दें, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, अपनी पुस्तक में से बाहर जिसे अपने लिखा है।

३३ और प्रभु ने मूसा से कहा, जिस किसी ने भी मेरे विरुद्ध पाप किया है, उसी को मैं अपनी पुस्तक में से मिटा दूँगा।

३४ इसलिए अब चले जाओ, लोगों का उस स्थान पर्यत नेतृत्व करो जिसके विषय में मैंने तुमसे बोल दिया है: देखो, मेरा दूत तुम्हारे सम्मुख जाएगा: तथापि उस दिन जब मैं सुध लूँगा मैं सुध ले लूँगा उनके प्रति उनके पाप की।

३५ और प्रभु ने लोगों को विपत्रित कर दिया, क्योंकि उन्होंने वह बछड़ा बनाया था, जिसे हारुन ने बनाया था।



तेंतिस्वां अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, प्रस्थान कर लो, और यहाँ से ऊपर चल दो, तुम और यह लोग जिन्हें तुम मिस्र की भूमि में से बाहर ऊपर ले आए हो, उस भूमि में जिसका मैंने अब्राहम को, इसहाक को, और याकूब को वचन दे दिया था, कहते हुए, तुम्हारे बीज को मैं इसे प्रदान करूँगा:

और मैं तुम्हारे सम्मुख एक दूत भेजूँगा; और मैं कनानवासी को, एमोरवासी को, और हित्ती वंशज को, और पेरिज़वासी को, और हिव्वी को, और यबूसी वंशज को बाहर खदेड़ दूँगा:

उस भूमि में जो दूध और मधु के साथ बहती है: क्योंकि मैं तुम्हारे बीच ऊपर नहीं जाऊँगा; क्योंकि तुम तो एक ऐंठी गर्दन वाले लोग हो: कहिं मैं तुम्हारा पथ में विध्वंस कर दूँ।

और जब लोगों ने यह बुरे समाचार सुने, उन्होंने शोक मनाया: और किसी भी पुरुष ने अपने आभूषण नहीं पहने। 

क्योंकि प्रभु ने मूसा से कह दिया था, इस्राएल की संतानों से कहना, तुम तो एक ऐंठी गर्दन वाले लोग हो: मैं एक ही क्षण में तुम्हारे बीच में ऊपर जाऊँगा, और तुम्हारा विध्वंस कर डालूँगा: इसलिए अब अपने आभूषणों को अपने पर से उतार लो, ताकि मैं जान सकूँ कि मैं क्या करूँ तुम्हारे साथ।

और इस्राएल की संतानों ने स्वयं पर से अपने आभूषणों को उतार फैंका, होरेब पर्वत के साथ ही।

और मूसा ने वह तम्बू लिया, और उसे शिविर के बाहर गाढ़ दिया, शिविर से दूर, और उसने उसे सभा का तम्बू पुकारा। और यह होने को आया, कि प्रत्येक जो प्रभु को ढूँढता था बाहर उस सभा के तम्बू तक जाता था, जो शिविर के बाहर था।

और यह होने को आया, जब मूसा बाहर तम्बू में जाता था, कि सभी लोग उठ खड़े हो जाते थे, और प्रत्येक पुरुष अपने तम्बू के द्वार पर खड़ा हो जाता था, और वह मूसा को देखता रहता था, जब तक कि वह तम्बू में चला जाता था।

और यह होने को आया, जैसे मूसा तम्बू में प्रवेश करता था, वह मेघ स्तम्भ अवरोहण करता था, और वह तम्बू के द्वार पर खड़ा हो जाता था, और प्रभु मूसा से बात-चीत करते थे।

१० और समस्त लोगों ने वह मेघ स्तम्भ तम्बू के द्वार पर खड़े देखा: और सभी लोग ऊपर उठते थे और आराधना करते थे, प्रत्येक पुरुष अपने तम्बू के द्वार में।

११ और प्रभु मूसा के साथ आमने-सामने बोलते थे, जैसे कोई पुरुष अपने मित्र के साथ बोलता हो। और वह पुनः शिविर में मुड़ गया: परन्तु उसके सेवक यहोशुआ ने, नून का बेटा, एक युवा पुरुष, उस ने तम्बू में से बाहर प्रस्थान नहीं किया।

१२ और मूसा ने प्रभु से कहा, देखें, आप कहते हैं मुझ से, इन लोगों को ऊपर ले आओ: और आप ने मुझे यह जानकारी नहीं दी है कि आप किसे मेरे साथ भेजेंगे। तथापि आपने कहा है, मैं तुम्हें नाम से जानता हूँ, और तुम ने मेरी दृष्टि में कृपा भी पा ली है।

१३ अब इसलिए, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, यदि मैंने आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है, दिखा दें अब मुझे आपका पथ, ताकि मैं आपको जान सकूँ, ताकि मैं आपकी दृष्टि में कृपा पा सकूँ: और विचार करें कि यह राष्ट्र आपके लोग हैं।

१४ और उन्होंने कहा, मेरे उपस्थिति तुम्हारे साथ जाएगी, और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।

१५ और उसने उनसे कहा, यदि आपकी उपस्थिति मेरे साथ नहीं जाएगी, हमें यहाँ से ऊपर मत उठा लें जाएँ।

१६ क्योंकि किस रीति से यह जाना जाएगा यहाँ कि मैंने और आपके लोगों ने आपकी दृष्टि में कृपा पाई है? क्या इसी में नहीं कि आप हमारे साथ जाते हैं? इस प्रकार ही हम पृथक होंगे, मैं और आपके लोग, उन समस्त लोगों से जो इस पृथ्वी के चहरे के ऊपर हैं।

१७ और प्रभु ने मूसा से कहा, मैं यह बात भी कर दूँगा जो कि तुमने बोल दी है: क्योंकि तुमने मेरी दृष्टि में कृपा पा ली है, और मैं तुम्हें नाम से जानता हूँ.

१८ और उसने कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, अपनी महिमा मुझे दिखा दें।

१९ और उन्होंने कहा, मैं अपनी समस्त अच्छाई को तुम्हारे सामने से चलवाऊँगा, और मैं तुम्हारे समक्ष प्रभु के नाम को घोषित करूँगा; और मैं उसके प्रति कृपालु हूँगा जिसके भी प्रति मैं कृपालु हूँगा, और मैं उस पर दया दिखाऊँगा जिस पर भी मैं दया दिखलाऊँगा।

२० और उन्होंने कहा, तुम मेरा चेहरा नहीं देख सकते: क्योंकि कोई भी व्यक्ति मुझे देख कर, जिएगा नहीं।

२१ और प्रभु ने कहा, देखो, मेरे साथ एक स्थान है, और तुम एक पत्थर पर खड़े हो जाओगे:

२२ और ऐसा होने को आएगा, कि जैसे मेरी महिमा चलती जाती है, कि मैं तुम्हें पत्थर की एक दरार में डाल दूँगा, और तुम्हें अपने हाथ से ढक दूँगा जैसे मैं चलता जाता हूँ:

२३ और मैं अपना हाथ हटा लूँगा, और तुम मेरे पृष्ठ-भागों को देखोगे: परन्तु मेरा चेहरा नहीं देखा जाएगा। 



चौन्तीसवाँ अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, पहले जैसी पत्थर की दो पट्टियाँ उत्कीर्ण करो: और मैं इन पट्टियों पर उन शब्दों को लिखूँगा जो उन पहली पट्टियों में थे, जिन्हें तुमने तोड़ डाला।

और तुम सुबह उद्यत रहना, और सुबह ऊपर जाना सीनय पर्वत तक, और स्वयं को मेरे प्रति प्रस्तुत कर देना पर्वत की चोटी पर।

और कोई भी पुरुष तुम्हारे साथ ऊपर नहीं आएगा, ही किसी भी पुरुष को देखे जाने देना समस्त पर्वत के सर्वत्र में; ही झुण्डों को ही पशु-समूहों को उस पर्वत के समक्ष चरने देना।

और उसने पहले के समान दो पत्थर की पट्टियों को उत्तकीर्ण किया; और मूसा सुबह-सुबह उठ गया, और वह सीनय पर्वत पर ऊपर चला गया, जैसा प्रभु ने उसे आदेश दिया था, और उसने अपने हाथ में वह दो पत्थर की पट्टियाँ ले लीं।

और प्रभु ने एक मेघ में अवरोहण किया, और वह उसके साथ वहाँ खड़े हो गए, और प्रभु के नाम की घोषणा की। 

और प्रभु उसके सम्मुख चलते चले गए, और घोषणा की, प्रभु, प्रभु ईश्वर, दयालु, और कृपालु, सहनशील, और अच्छाई और सत्य में प्रचूर,

सहस्त्रों के प्रति कृपा रखते हुए, अधर्मताओं और उल्लंघनों और पाप को क्षमा करते हुए, और जो किसी भी प्रकार से दोषी को निर्दोष नहीं सिद्ध करेंगे; पित्रों की अधर्मताओं के दण्ड बच्चों पर, और बच्चों के बच्चों पर, तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देते हुए। 

और मूसा ने फुर्ती से अपना सर धरती की ओर झुका लिया, और आराधना की।

और उसने कहा, यदि अब मैंने आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है, हे प्रभु, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मेरे प्रभु को हमारे बीच जाने दें; क्योंकि यह तो ऐंठी हुई गर्दनों वाले लोग हैं; और हमारी अधर्मता और पाप को क्षमा कर दें, और हमें आपकी विरासत हेतु ले लें।

१० और उन्होंने कहा, देखो, मैं एक प्रतज्ञापत्र बनाता हूँ: तुम्हारे समस्त लोगों के सम्मुख मैं अचम्भे करूँगा, ऐसे जैसे ही इस समस्त पृथ्वी में, ही किसी भी राष्ट्र में किए गए हैं: और वह समस्त लोग जिनके बीच तुम हो प्रभु का कार्य देखेंगे: क्योंकि वह एक भयानक कार्य है जो मैं तेरे साथ करूँगा।

११ अनुपालन करो उसका जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश देता हूँ: देखो, मैं तुम्हारे समक्ष एमोरवासी को, और कनानवासी को, और हित्ती वंशज को, और पेरिज़वासी को, और हिव्वी को, और यबूसी वंशज को बाहर खदेड़ता हूँ। 

१२ अपने स्वयं का ध्यान रखना, कहिं तुम उस भूमी के निवासियों के साथ कोई प्रतिज्ञापत्र बना लो जहाँ तुम जा रहे हो, कहिं वह तुम्हारे प्रति एक फंदा बन जाए तुम्हारे बेचों-बीच:

१३ परन्तु तुम उनकी बलिवेदियों को नष्ट कर दोगे, उनकी प्रतिमाओं को तोड़ दोगे, और उनके उपवनों को काट डालोगे:

१४ क्योंकि तुम किसी भी अन्य ईश्वर की आराधना नहीं करोगे: क्योंकि प्रभु, जिनका नाम ईर्षालू है, एक ईर्षालू ईश्वर हैं:

१५ कहिं तुम उस भूमी के निवासियों के साथ एक प्रतिज्ञापत्र बना लो, और वह उनके ईश्वरों के पीछे-पीछे राँडपना करते चले जाएँ, और उनके ईश्वरों के प्रति बलिदान करें, और कोई तुम्हें बुलाए, और तुम उसकी बलि में से खा लो;

१६ और तुम उनकी बेटियों को अपने बेटों के लिए ले लो, और उनकी बेटियाँ उनके ईश्वरों के पीछे-पीछे राँडपना करती चली जाएँ, और तुम्हारे बेटों को उनके ईश्वरों के पीछे-पीछे राँडपना करना करवा दें।

१७ तुम स्वयं के लिए कोई भी ढलवाँ ईश्वरों को नहीं बनाओगे।

१८ बेख़मीरी रोटी के भोज को तुम रखोगे। सात दिन तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे, जैसा मैंने तुम्हें आदेश दे दिया था, अबीब में महीने के समय में: क्योंकि अबीब के महीने में तुम मिस्र में से बाहर आए थे।

१९ जो कुछ भी गर्भ खोलता है मेरा है; और प्रत्येक पहलौठा तुम्हारे मवेशी के बीच, चाहे वह बैल हो या भेड़, जो नर है।

२० परन्तु गधे के पहलौठे का तुम एक मेमने से मुक्तिभुक्तान करोगे; और यदि तुम उसका मुक्तिभुक्तान नहीं करोगे, तो तुम उसकी गर्दन तोड़ दोगे: और अपने बेटों के समस्त प्रथम जन्मों का तुम मुक्तिभुक्तान करोगे। और कोई भी मेरे समक्ष ख़ाली हाथ नहीं आएगा।

२१ छह दिन तुम काम करोगे, परन्तु सातवें दिन तुम विश्राम करोगे: हल चलाने के समय और फसल-कटाई के समय तुम विश्राम करोगे।

२२ और तुम सप्ताहों के भोज का पालन करोगे, गेहूँ की फसल-कटाई के प्रथमफलों का, और फसल-एकत्रण का भोज वर्ष के अन्त में।

२३ वर्ष में तीन बार तुम्हारे समस्त नर सन्तान प्रभु ईश्वर सम्मुख उपस्थित होंगे, इस्राएल के ईश्वर।

२४ क्योंकि मैं तुम्हारे सम्मुख राष्ट्रों को बाहर फैंक डालूँगा, और तुम्हारी सीमाओं का विस्तार कर दूँगा: ही कोई भी पुरुष तुम्हारी भूमी के लिए वांछा करेगा, जब तुम प्रभु तुम्हारे ईश्वर सम्मुख उपस्थित होने ऊपर जाओगे, वर्ष में तीन बार। 

२५ तुम मेरे बलिदान के रक्त को खमीर के साथ नहीं चढ़ाओगे; ही पार करने के भोज की बलि सुबह तक बची रहेगी।

२६ अपनी भूमि के पहलौठों के पहलों को तुम प्रभु अपने ईश्वर के घर में ले आओगे। तुम किसी हलवान को उसकी मादा के दूध में नहीं उबालोगे।

२७ और प्रभु ने मूसा से कहा, उन शब्दों को तुम लिख लो: क्योंकि इन शब्दों के सारानुसार ही मैंने तुम्हारे साथ और इस्राएल के साथ एक प्रतिज्ञापत्र बना दिया है।

२८ और वह प्रभु के साथ वहाँ चालीस दिन और चालीस रात था; ही उसने रोटी खाई, ही पानी पिया। और उसने उन पट्टियों पर उस प्रतिज्ञापत्र के शब्द लिख दिए, वह दस आदेश।

२९ और यह होने को आया, कि जब मूसा सीनय पर्वत पर से नीचे गया था उन दो साक्ष्य की पट्टियों के साथ मूसा के हाथ में, जब वह पार्वत पर से नीचे गया था, कि मूसा यह नहीं जानता था कि उसके चहरे की त्वचा चमक रही थी जैसे वह उसके साथ बात कर रहे थे।

३० और जब हारुन और इराएल की समस्त सन्तान ने मूसा को देखा, देखो, उसके चहरे की त्वचा चाक रही थी; और वह उसके समीप आने से डर रहे थे।

३१ और मूसा ने उन्हें बुलाया; और हारुन और सभा के समस्त अध्यक्ष उसके पास वापस लौट आए: और मूसा ने उनसे बात की।

३२ और इसके उपरान्त इस्राएल की समस्त सन्तान निकट गए: और उसने उन्हें आदेश में वह सब कुछ प्रदान कर दिया जो प्रभु ने उसके साथ बोला था सीनय पर्वत में। 

३३ और मूसा ने उनसे बोल लेने की समाप्ति तक, अपने चहरे पर एक परदा लगाए रखा। 

३४ परन्तु जब मूसा भीतर गया प्रभु के सम्मुख उनके साथ बोलने हेतु, उसने वह परदा हटा दिया, जब तक कि वह बाहर आया। और वह बाहर आया, और इस्राएल की संतानों के साथ बोला जो उसे आदेश दिया गया था।

३५ और इस्राएल की संतानों ने मूसा के चहरे को देखा, कि मूसा के चहरे की त्वचा चमक रही थी: और मूसा ने डोंबर अपने चहरे पर परदा लगाया, जब तक वह भीतर गया उनसे बोलने के लिए।




पैंतीसवाँ अध्याय।


और मूसा ने इस्राएल की संतानों की समस्त सभा को एक साथ एकत्रित कर लिया, और उनसे कहा, यह हैं वह शब्द जो प्रभु ने आदेश दिए हैं कि तुम इन्हें करो। 

छह दिन काम किया जाएगा; परन्तु उस सातवें दिन पर तुम्हारे प्रति एक पवित्र दिवस होगा, एक विश्राम का सैबथ प्रभु के प्रति: जो कोई भी उस में काम करेगा मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

तुम अपने बसेरों के सर्वत्र में सैबथ के दिवस पर कोई भी अग्नी नहीं सुलगाओगे।

और मूसा ने इस्राएल की संतानों की समस्त सभा से बोला, कहते हुए, यह है वह बात जिसका प्रभु ने आदेश दिया, कहते हुए, 

अपनो के बीच से तुम एक चढ़ावा प्रभु के प्रति ले लो: जो कोई भी इच्छुक हृदय रखता है, उसे ले आने दो उसे, एक प्रभु का चढ़ावा; सोना, और रजत, और पीतल,

और नीला, और जामुनी, और सुर्ख, और महीन छालटी, और बकरों के बाल,

और मेड़ों की चमड़ियाँ लाल रंगी हुई, और सूँस की चमड़ियाँ, और बबूल की लकड़ी,

उजाले के लिए तेल,  सुगन्धित-द्रव्य अभिषेक-तेल के लिए, और मधुर-सुगंधित-धूप के लिए,

गोमेद के पत्थर, और एफद में, और छाती-वस्त्र में जड़ने हेतु पत्थर।

१० और तुम्हारे बीच में से प्रत्येक विद्वान हृदय वाला आएगा, और वह सभी कुछ निर्मित करेगा जिसका प्रभु ने आदेश दे दिया है;

११ वह तम्बू, उसका शिविर, उसका आवरण, उसके अंकड़े, और उसके पट्टे, उसके पटरे, उसके स्तम्भ, और उसकी गर्तिकाएँ,

१२ वह संदूक, और उसके डण्डे, प्रेषण-आसन सहित, आवरण का वह परदा,

१३ वह मेज़, और उसके डण्डे, और उसके समस्त पात्र, और वह भेंट की रोटी,

१४ वह दीपाधार भी उजाले के लिए, और उसका फ़र्निचर, और उसके दीपक, उजाले हेतु तेल सहित, 

१५ और वह सुगन्धित-धूप की बलिवेदी, और उसके डण्डे, और अभिषेक-तेल, और मधुर-सुगंधित-धूप, और तम्बू के प्रवेश के द्वार हेतु वह लटकन,

१६ जले चढ़ावे की बलिवेदी, उसकी पीतल की जाली, उसके डण्डे, और उसके समस्त पात्र, वह कुण्ड और उसका पाँव,

१७ उस आँगन की लटकने, उसके स्तम्भ, और उनकी गर्तिकाएँ, और आँगन के द्वार के लिए लटकन,

१८ तम्बू की खूँटे, और आँगन के खूँटे, और उनके रस्से,

१९ सेवा के कपड़े, पवित्र स्थान में सेवा करने हेतु, हारुन पुरोहित के लिए पवित्र वस्त्र, और उसके पुत्रों के पवित्र वस्त्र, पुरोहित-पद में सेवा करने हेतु। 

२० और इस्राएल की संतानों की समस्त सभा ने मूसा की उपस्थिति से प्रस्थान कर लिया।

२१ और वह आए, प्रत्येक जिसके हृदय ने उसे सक्रीय कर दिया था, और प्रत्येक जिसे उसके भावात्मा ने इच्छुक बना दिया था, और वह प्रभु के चढ़ावों को ले आए उनकी सभा के तम्बू के कार्य प्रति, और उनकी समस्त सेवा हेतु, और पवित्र वस्त्रों हेतु।

२२ और वह गए, दोनो पुरुष और स्त्रियाँ, जितनों के भी इच्छुक हृदय थे, और वह कंगने, और कानो की बालियाँ, और अँगूठियाँ, और अलंकरण, और सोने के समस्त गहने: और प्रत्येक पुरुष जिसने प्रभु के प्रति एक सोने का चढ़ावा चढ़ाया।

२३ और प्रत्येक पुरुष, जिसके पास नीला पाया गया था, और जामुनी, और सुर्ख, और महीन छालटी, और बकरों के बाल, और मेड़ों की लाल चमड़ियाँ, और सूँस की चमड़ियाँ, उन्हें ले आए। 

२४ प्रत्येक जिसने रजत और पीतल चढ़ाया प्रभु का चढ़ावा ले आया: और प्रत्येक पुरुष, जिसके पास किसी भी सेवाकार्य हेतु बबूल लकड़ी पाई गई थी, उसे ले आया। 

२५ और सभी स्त्रियाँ जिनके हृदय विद्वान थे उन्होंने अपने हाथों से काता, और वह ले आईं जो उन्होंने काता था, नीले का, और जामुनी का, और सुर्ख का, और महीन छालटी का।

२६ और उन सभी स्त्रियों ने जिनके हृदयों ने उन्हें विद्या में सक्रीय कर दिया था, उन्होंने बकरों के बालों को काता।

२७ और शासक गोमेद के पत्थरों को, और एफद के लिए, और छाती-वस्त्र में जड़ने हेतु पत्थरों को ले आए;

२८ और  सुगन्धित-द्रव्य, और उजाले के लिए तेल, और अभिषेक-तेल के लिए, और मधुर-सुगंधित-धूप के लिए।

२९ इस्राएल की संतानें प्रभु के प्रति एक स्वेच्छा से चढ़ावा लाईं, प्रत्येक पुरुष और स्त्री, जिनके हृदय ने उन्हें प्रत्येक प्रकार के कार्य हेतु लाने का इच्छुक बना दिया था, जिसका आदेश प्रभु ने मूसा के हाथ बना देने का आदेश दे दिया था। 

३० और मूसा ने इस्राएल की सन्तानों से कहा, देखो, प्रभु ने नाम से ऊरी के बेटे, हूर के बेटे, यहूदा की प्रजाति के बज़लेअल को बुला लिया है:

३१ और उन्होंने इसे ईश्वर के भावात्मा से भर दिया है, विद्या में, प्रज्ञा में, और ज्ञान में, और प्रत्येक प्रकार की कारीगरी में;

३२ निपुणता से कारीगरी करने हेतु, सोने की कारीगरी, और रजत की, और पीतल की,

३३ और पत्थरों को तराशने की, उन्हें जड़ देने की, और लकड़ी को उत्कीर्ण कर देने की, किसी भी प्रकार के कुशल कार्य को निर्मित कर देने की।

३४ और उन्होंने इसके में हृदय में यह डाल दिया है कि यह सिखा सके, दोनो यह, और अहोलियाब, अहिसमाक का बेटा, दान की प्रजाति का।

३५ इन्हें उन्होंने हृदय की विद्या से भर दिया है, समस्त प्रकार की कारीगरी को कार्यान्वित करने हेतु, तक्षणकार की, और कुशल कामगार की, और कढ़ाईकार की, नीले में, और जामुनी में, सुर्ख में, और महीन छालटी में, और जुलाहे की, उन्हीं की ही जो कोइ भी कारीगरी करते हैं, और उनकी जो कुशल कारीगरी करते हैं।



छत्तीसवाँ अध्याय।


तब बज़लेअल और अहोलियाब, और प्रत्येक विद्या पूर्ण पुरुष ने काम किया, जिन में प्रभु ने विद्या और प्रज्ञा डाल दी थी यह जान लेने के लिए की कैसे पुण्य-स्थान की सेवा हेतु समस्त प्रकार के कार्य को कार्यान्वित किया जाए, उस सभीके अनुसार जो प्रभु ने आदेश दे दिया था।  

और मूसा ने बुला लिया बज़लेअल और अहोलियाब को, और प्रत्येक विद्या पूर्ण पुरुष को, जिसके हृदय में प्रभु ने विद्या डाल दी थी, यहाँ तक कि वही प्रत्येक जिसके हृदय ने उसे उस कार्य के प्रति उसे करने हेतु सक्रीय कर दिया था:

और उन्होंने मूसा से वह समस्त आहुति ग्रहण कर ली, जिसे इस्राएल की सन्तानें पुण्य-स्थान के सेवाकार्य हेतु ले आए थे, उसे बना देने हेतु। और तब भी वह उसके पास प्रत्येक प्रातः स्वेच्छा से चढ़ावे लाए।

और समस्त विद्वान पुरुष, जिन्होंने पुण्य-स्थान के समस्त कार्य को किया, प्रत्येक पुरुष अपें काम से आया जिसे उसने बनाया था;

और वह मूसा से बोले, कहते हुए, कार्यसेवा हेतु लोग तो पर्याप्तता से भी और अधिक ला रहे हैं, जिसे प्रभु ने बनाने हेतु आदेश दिया था। 

और मूसा ने आदेश दिया, और उन्होंने शिविर के सर्वत्र में यह घोषणा करवाई, कहते हुए, ही पुरुष ही स्त्री पुण्य-स्थान के  चढ़ावे हेतु कोई भी और काम करे। तो लोगों को लाने से रोक दिया गया था।

क्योंकि वह समान जो उनके पास था, समस्त कार्य को बनाने हेतु पर्याप्त था, और अत्याधिक!

और प्रत्येक विद्या-पूर्ण पुरुष ने उनके बीच जो तम्बू के काम को कर रहा था, दस परदे बटी हुई महीन छालटी, और नीले, और जामुनी, और सुर्ख से बनाए: कुशल कारीगरी के चेरुबिमों के साथ उसने उन्हें बनाए।

एक परदे की लम्बाई अट्ठाईस हाथ थी, और एक परदे की चौड़ाई चार हाथ थी: वह सभी परदे एक ही नाप के थे।

१० और उसने उन पाँच परदों को एक के साथ एक जोड़ दिए: और उन अन्य पाँच परदों को उसने एक के साथ एक जोड़ दिए।

११ और उसने एक परदे के किनारे पर जोड़ के छोर से नीले फंदे बना दिए; इसी प्रकार उसने दूसरे परदे के जोड़ में, उस अन्य परदे के किनारे के छोर में बना दिए।

१२ पचास फंदे उसने एक परदे में बना दिए, और पचास फंदे उसने उस परदे के किनारे में बना दिए जो उस दूसरे से जुड़ा हुआ है; वह फंदे एक परदे को दूसरे के साथ पकड़े रहे।

१३ और उसने सोने के पचास अंकड़े बनाए, और उन परदों को एक साथ उन अंकड़ों के साथ जोड़ दिए: ताकि वह एक तम्बू बन गया।

१४ और उसने बकरे के बालों के परदे बनाए उस तम्बू पर एक तम्बू हेतु: ग्यारह परदे उसने बना दिए।

१५ एक परदे की लम्बाई तीस हाथ थी, और एक परदे की चौड़ाई चार हाथ: वह ग्यारह परदे एक ही नाप के थे।

१६ और उसने पाँच परदों को उनके स्वयं के साथ जोड़ दिए, और छह परदों को स्वयं के साथ।

१७ और उसने पचास फंदे उस एक परदे के किनारे पर बनाए जो जोड़ के सबसे बाहरी छोर पर है, और पचास फंदे उसने उस परदे के किनारे पर बनाए जो उस दूसरे से जुड़ा हुआ है। 

१८ और उसने पीतल के पचास अंकड़े बनाए, उस शिविर को एक साथ जोड़ देने हेतु, ताकि वह एक बन जाए।

१९ और उसने शिविर के लिए एक मेढ़े की लाल रंगी हुई चमड़ी का आवरण बनाया, और उसके ऊपर एक सूँस की चमड़ियों का एक आवरण।

२० और उसने तम्बू के लिए पट्टे बनाए, बबूल की लकड़ी के, सीधे खड़े हुए।

२१ एक पट्टे की लम्बाई दस हाथ थी, और एक पट्टे की चौड़ाई डेढ़ हाथ थी।

२२ एक पट्टे में दो चूलें थीं, एक दूसरे से एक समान दूरी पर: इसी प्रकार उसने तम्बू के सभी पट्टों के लिए बना दिया।

२३ और उसने तम्बू के लिए वह पट्टे बना दिए; बीस पट्टे दक्षिण के पाशर्व के लिए दक्षिण की ओर:

२४ और उसने चाँदी की चालीस गर्तिकाएँ उन बीस पट्टों के नीचे बना दीं; दो गर्तिकाएँ एक पट्टे के नीचे उसके दो चूलों के लिए, और दो गर्तिकाएँ दूसरे पट्टे के नीचे उसके दो चूलों के लिए।

२५ और तम्बू की दूसरी ओर, जो उत्तर के कोने की ओर है, उसने बीस पट्टे बना दिए,

२६ और उनकी चाँदी की गर्तिकाएँ; दो गर्तिकाएँ एक पट्टे के नीचे, और दो गर्तिकाएँ दूसरे पट्टे के नीचे।

२७ और तम्बू के पाशर्वों के लिए पश्चिम की ओर उसने छह पट्टे बनाए।

२८ और दो पट्टे उसने तम्बू के कोनों के लिए उसके दो पाशर्वों में बना दिए।

२९ और वह नीचे एक साथ जोड़ दिए गए थे, और वह एक साथ उसके सिरे के ऊपर एक कड़े में जोड़ दिए गए थे: इसी प्रकार उसने उन दोनो के लिए कर दिया उन दोनो कोनों में।

३० और आठ पट्टे थे; और उनकी गर्तिकाएँ सोलह चाँदी की गर्तिकाएँ थीं; प्रत्येक पट्टे के नीचे दो गर्तिकाएँ।

३१ और उसने बबूल की लकड़ी के पटरे भी बनाए; पाँच तम्बू के एक पाशर्व के पट्टों के लिए,

३२ और पाँच पटरे तम्बू की दूसरी ओर के पट्टों के लिए, और पाँच पटरे तम्बू के पट्टों के लिए पश्चिमी पाशर्वों के लिए।

३३ और उसने पट्टों के बीच में वह बीच का पटरा एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचा दिया।

३४ और उसने उन पट्टों को सोने से मढ़ दिया, और उनके कड़ों को सोने से बनाया उन पटरों के स्थानों के लिए: और उन पटरों को सोने से मढ़ दिया।

३५ और उसने एक परदा बनाया, नीले, और जामुनी, और सुर्ख का, और बटी हुई महीन छालटी का: चेरूबिमों के साथ उसने उसे कुशल कारीगरी से बना दिया:

३६ और उसने वहीं बबूल की लकड़ी के चार स्तम्भ बना दिए, और उन्हें सोने से मढ़ दिया: उनके अंकुड़े सोने के थे, और उसने उनके लिए चाँदी की चार गर्तिकाएँ ढाल दीं।

३७ और उसने तम्बू के द्वार के लिए एक नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी की, सुई से कढ़ी हुई एक लटकन बना दी।

३८ और उसके पाँच स्तम्भ उनके अंकुडों के साथ: और उसने उनके स्तम्भशीर्षों को, और उनके जोड़ों को सोने से मढ़ दिया: परन्तु उनकी पाँच गर्तिकाएँ पीतल की थीं।



सैंतीसवाँ अध्याय।


और बज़लेअल ने उस संदूक को बबूल की लकड़ी से बनाया: ढाई हाथ उसकी लम्बाई थी, और डेढ़ हाथ उसकी चौड़ाई थी, और एक हाथ उसकी ऊँचाई थी:

और उसने उसे शुद्ध स्वर्ण से भीतर और बाहर मढ़ दिया, और उसके लिए एक चारों ओर सोने का छोटा घेरा बना दिया।

और उसने उसके चारों कोनों में लगा देने हेतु, सोने के चार कड़े ढाले; दो कड़े उसके एक ओर, और दो कड़े उसके दूसरे ओर।

और उसने बबूल की लकड़ी के डण्डे बनाए, और उन्हें सोने से मढ़ दिया।

और उसने संदूक को ढोने हेतु, उन डण्डों को उन कड़ों के अंदर संदूक के पाशर्वों में डाल दिया।

और उसने शुद्ध स्वर्ण का एक प्रेषण-आसन बनाया: ढाई हाथ उसकी लम्बाई थी, और डेढ़ हाथ उसके चौड़ाई।

और उसने सोने के दो चेरबीमों को बना दिया, उसने उन्हें एक ही टुकड़े में से पीट कर बनाया, उस प्रेषण-आसन के दो छोरों पर;

एक चेरब इस ओर के एक छोर पर, और दूसरा चेरब दूसरी ओर के उस छोर पर: प्रेषण-आसन में से ही उसने उन चेरुबीमों को उन दोनो छोरों पर बना दिया। 

और उन चेरुबिमों ने अपने पंखों को ऊपर ऊँचा फैला दिया, और उस प्रेषण-आसन को अपने पंखों से ऊपर ढक दिया, उनके चहरे एक दूसरे की ओर; प्रेषण-आसन की ओर ही उन चेरुबीमों के चहरे थे।

१० और उसने बबूल की लकड़ी की एक मेज़ बनाई: दो हाथ उसकी लम्बाई थी, और एक हाथ उसकी चौड़ाई थी, और डेढ़ हाथ उसकी ऊँचाई थी।

११ और उसने उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दिया, और उसके चारों ओर एक सोने का छोटा घेरा बना दिया।

१२ और उसने उस पर एक चार ऊँगल चौड़ा किनारा चारों ओर बना दिया, और उसने उसके किनारे पर एक सोने का छोटा घेरा उसके चारों ओर बना दिया।  

१३ और उसने उसके लिए सोने के चार कड़े ढाले, और उन कड़ों को चारों कोनो में लगा दिए जो उसके चार पैरों पर थे।

१४ उस किनारे के साथ सटे वह कड़े थे, वह स्थान उन डण्डों द्वारा उस मेज़ को ढोने के लिए।

१५ और उसने बबूल की लकड़ी से डण्डे बनाए, और उन्हें सोने से मढ़ दिया, उस मेज़ को ढोने हेतु।

१६ और उसने शुद्ध स्वर्ण के वह पात्र बनाए जो मेज़ पर थे, उसके परात, और उसके चम्मच, और उसके कटोरे, और उसके ढक्कन ढकने हेतु।

१७ और उसने एक दीपाधार शुद्ध स्वर्ण का बनाया: पीटे हुए काम से उसने उस दीपाधार को बना दिया: उसका तना, और उसकी डाली, उसके कटोरे, उसके कोंपल, और उसके पुष्प, उसी से बने थे।

१८ और छह डालियाँ उस में से उभर कर बाहर निकलतीं हुईं; उस दीपाधार की तीन डालियाँ एक ओर से बाहर निकलतीं हुईं, और दीपाधार की तीन डालियाँ उसकी दूसरी ओर से उभरतीं हुईं।

१९ बादामों के समान तीन कटोरे बने हुए एक डाल में, एक कोंपल और एक पुष्प; और बादामों के समान बने तीन कटोरे दूसरी डाली में, एक कोंपल और एक पुष्प: इसी प्रकार उन छह डालियों में से जो उस दीपाधार में से बाहर उभरती हुईं।

२० और उस दीपाधार में चार काटोरे थे, बादामों समान बने हुए, उसके कोंपल, और उसके पुष्प:

२१ और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे, और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे, और एक कोंपल उसी की दो डालियों के नीचे, उन्हीं छह डालियोंनुसार जो दीपाधार में से बाहर उभरती हुईं।

२२ उनके कोंपल और उनकी डालियाँ उसी से थीं: वह सम्पूर्णता से शुद्ध स्वर्ण का एक ही पीटा हुआ काम था।

२३ और उसने उस के सात दीपक बनाए: और उसकी चिमटियाँ, और उसके अग्नी-पात्र, शुद्ध स्वर्ण के।

२४ शुद्ध स्वर्ण के एक तलनतन-भार से उसने उसे बनाया, और उसके सभी पात्र।

२५ और उसने एक सुगन्धित-धूप की बलिवेदी बबूल की लकड़ी से बनाई: उसकी लम्बाई एक हाथ थी, और उसकी चौड़ाई एक हाथ थी; वह चौकोर थी: और दो हाथ उसकी ऊँचाई थी: उसके सींघ उसी में से थे।

२६ और उसने उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दिया, दोनो उसका ऊपर का भाग, और चारों ओर उसके पाशर्व, और उसके सींघ; और उसने उसके लिए एक चारों ओर सोने का छोटा घेरा भी बना दिया।

२७ और उसने उसके लिए दो स्वर्ण के कड़े बनाए उसके घेरे के नीचे, उसके दो कोनो के साथ, उसके दो पाशर्वों पर; डंडों के लिए स्थान हेतु, उसे ढोने के लिए।

२८ और उसने उन डंडों को बबूल की लकड़ी से बनाया, और उन्हें सोने से मढ़ दिया।

२९ और उसने वह पवित्र अभिषेक-तेल बनाया, और वह शुद्ध सुगन्धित-धूप मधुर सुगन्धित-द्रव्य की, इत्रों के मिश्रण के कार्यानुसार।




अड़तीसवाँ अध्याय।


और उसने एक बबूल की लकड़ी की जले चढ़ावे की बलिवेदी बनाई, पाँच हाथ उसकी लम्बाई थी, और पाँच हाथ उसकी चौड़ाई; वह चौकोनी थी: और उसकी ऊँचाई तीन हाथ थी।

और उसने उसके चारों कोनो पर उसके सींघ बनाए: उसके सींघ उसी में से थे: और उसने उसे पीतल से मढ़ दिया।

और उसने बलिवेदी के समस्त पात्र, कढ़ाईयाँ, और फावड़े, और कटोरदान, और माँस-काँटे, और अग्निपात्र बना दिए: उसके सभी बर्तन उसने पीतल के बना दिए। 

और उसने उस बलिवेदी के लिए एक पीतल के काम की जाली बनाई उसके घेरे के नीचे उसके मध्य तक पहूँचती हुई।

और उसने चार उस पीतल की जाली के चार कोनों के लिए चार कड़े ढाले, डण्डों के स्थानों हेतु।

और उसने वह डण्डे बबूल की लकड़ी से बनाए, और उन्हें पीतल से मढ़ दिया।

और उसने उन डण्डों को उन कड़ों में डाल दिया उस बलिवेदी के पाशर्वों पर, उसे ढोने हेतु; उसने वह बलिवेदी पट्टों के साथ खोखला बना दी। 

और उसने उस कुण्ड को पीतल का बनाया, और उसका पाँव पीतल का, एकत्रित होती हुईं स्त्रियों के दर्पणों से, जो सभा के तम्बू के दवर पर एकत्रित होतीं थीं।

और उसने वह आँगन बनाया: दक्षिण के पाशर्व में दक्षिण की ओर, आँगन की लटकने बटी हुई महीन छालटी की थीं, एक सौ हाथों की:

१० उनके स्तम्भ बीस थे, और उनकी बीस गर्तिकाएँ पीतल की; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के थे।

११ और उत्तरी ओर के लिए वह लटकने एक सौ हाथ लम्बी थीं,  उनके बीस स्तम्भ थे, और उनकी बीस गर्तिकाएँ पीतल की थीं; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के।

१२ और पश्चिम की ओर के लिए पचास हाथों की लटकनें थीं: उनके स्तम्भ दस, और उनकी गर्तिकाएँ दस; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के।

१३ और पूर्वी पाशर्व के लिए पूर्व की ओर पचास हाथ।

१४ द्वार के एक ओर की लटकनें पन्द्रह हाथ थीं: उनके स्तम्भ तीन, और उनकी गर्तिकाएँ तीन।

१५ और आँगन के द्वार की दूसरी ओर, इस हाथ पर और उस हाथ पर, पन्द्रह हाथों की लटकनें थीं: उनके स्तम्भ तीन, और उनकी गर्तिकाएँ तीन।

१६ आँगन की सभी लटकने चारों ओर बटी हुई महीन छालटी की थीं।

१७ और स्तम्भों की गर्तिकाएँ पीतल की थीं; स्तम्भों के अंकुड़े और उनके जोड़े चाँदी के; और उनके स्तम्भशीर्षों पर चाँदी चढ़ी हुई थी; और आँगन के सभी स्तम्भ चाँदी से जुड़े हुए थे।

१८ और आँगन के द्वार के लिए वह लटकन सुई की कारीगरी से नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी की थी: और बीस हाथ लम्बाई थी, और चौड़ाई में ऊँचाई पाँच हाथ थी, आँगन की लटकनो के अनुरूप होती हुईं।

१९ और उनके स्तम्भ चार थे, और उनकी गर्तिकाएँ पीतल की चार थीं; उनके अंकुड़े चाँदी के, और उनके स्तम्भशीर्षों और उनके जोड़ों पर चाँदी चढ़ी हुई थी।

२० और उस तम्बू के, और उस आँगन के चारों ओर के सभी खूँटे, पीतल के थे।

२१ यह तम्बू का लेखा-जोखा है, यहाँ तक कि साक्ष्य के तम्बू का ही, जैसे कि उसे गिना गया था, मूसा के आदेशानुसार, लेवी-वंशजों की सेवा हेतु, हारुन के बेटे इथामर के हाथ द्वारा।

२२ और ऊरी के बेटे, हूर के बेटे, यहूदा की प्रजाति के बज़लेअल ने वह सभी निर्मित कर दिया जिसका प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।  

२३ और उसके साथ था अहोलियाब, अहिसमाक का बेटा, दान की प्रजाति का, एक तक्षणकार, और एक कुशल कारीगर, और एक कढ़ाईकार नीले में, और जामुनी में, सुर्ख में, और महीन छालटी में।

२४ वह समस्त सोना जिसका प्रयोग उस कार्य हेतु उस पवित्र स्थान के समस्त कार्य में हुआ था, यहाँ तक कि चढ़ावे का सोना भी, उन्नत्तीस तलनतन, और सात सौ तीस शक्ल था, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार।

२५ और उनकी चाँदी जिनकी गिनती सभा में की गई थी, थी एक सौ तलनतन, और एक हज़ार सात सौ पिछत्तर शेक्ल, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार।

२६ एक बेका प्रत्येक व्यक्ति के लिए, जो कि अर्ध शक्ल है, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार, उन सभी के लिए जो जनगणना हेतु गए थे, बीस वर्ष की आयु से और ऊपर, छह लाख तीन हज़ार पाँच सौ पचास पुरुषों के लिए।

२७ और उन चाँदी के सौ तलनतनो से पुण्य-स्थान की गर्तिकाएँ ढाली गईं थीं, और परदे की गर्तिकाएँ; एक सौ गर्तिकाएँ उन एक सौ तलनतनो से, एक तलनतन एक गर्तिका से।

२८ और उन एक हज़ार सात सौ पिछत्तर शेक्लों से उसने उन स्तम्भों के लिए अंकुड़े बनाए, और उनके स्तम्भशीर्षों को मढ़ दिया, और उन्हें जोड़ दिया।

२९ और चढ़ावे का पीतल सत्तर तलनतन था, और दो हज़ार और चार सौ शेक्ल।

३० और उससे उसने सभा के तम्बू के दवर हेतु गर्तिकाएँ बनाईं, और वह पीतल की बलिवेदी, और उसके लिए वह पीतल की जाली, और बलिवेदी के सभी पात्र,

३१ और उस आँगन के चारों ओर की गर्तिकाएँ, और आँगन-द्वार की गर्तिकाएँ, और तम्बू के समस्त खूँटे, और आँगन के चारों ओर के खूँटे। 





उनतालिसवाँ अध्याय।


और नीले, और जामुनी, और सुर्ख से, उन्होंने सेवा के कपड़े, पुण्य-स्थान में सेवा करने हेतु, और हारुन के लिए वह पवित्र वस्त्र, बना दिए; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

और उसने एफद को सोने से, और नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी से बना दिए।

और उन्होंने उस सोने को पतली पत्तियों में कूट दिया, और उसे तारों में काट दिया, उसे उस नीले में, और जामुनी में, और सुर्ख में, और उस बटी हुई महीन छालटी में, कुशल कारीगरी से पिरो देने हेतु। 

उन्होंने उसके लिए कंधों के टुकड़े बनाए, उसे जोड़ देने के लिए: दो किनारों से वह एक साथ जोड़ दिया गया था।

और उसके एफद का वह निपुण कमरबँध, जो उस पर था, उसी में से बना था, उसी की कारीगरीनुसार; सोने, और नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और बटी हुई महीन छालटी का; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

और उन्होंने गोमेद के पत्थरों पर काम किया सोने के खाँचों में समाहित, उत्कीर्ण किए हुए, जैसे मुहरें उत्कीर्ण की जाती हैं, इस्राएल की संतानों के नामों के साथ।

और उसने उन्हें एफद के कंधों पर लगा दिए, ताकि वह इस्राएल की संतानों के प्रति स्मारक पत्थरों हेतु हों; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

और उसने वह छाती-वस्त्र कुशल कारीगरी से बना दिया, एफ़ौड की कारीगरी के समान; सोने से, और नीले से, और जामुनी से, और सुर्ख से, और बटी हुई महीन छालटी से।

वह चौकोर था; उन्होंने उसे दोहरा बनाया: एक बित्ता उसकी लम्बाई थी, और एक बित्ता उसकी चौड़ाई थी, दोहरा किया हुआ।

१० और उन्होंने उस में पत्थरों की चार पंक्तियाँ जड़ दीं: पहली पंक्ति थी एक चुन्नी की, एक पुखराज की, और एक लालड़ी की: यह पहली पंक्ति थी।

११ और दूसरी पंक्ति, एक पन्ने की, एक नीलम की, और एक हीरे की। 

१२ और तीसरी पंक्ति, एक धूम्रकांत की, और एक शेबू की, और एक बिल्लौर की।

१३ और चौथी पंक्ति, एक फ़िरोज़ा की, और एक गोमेद की, और एक सूर्यकान्त की: यह सोने के खाँचों में जड़ दिए गए थे अपने ही खाँचों में।

१४ और वह पत्थर इस्राएल की संतानों के नामोंनुसार थे, बारह, उनके नामोंनुसार, किसी मुहर में उत्कीर्ण कारीगरी समान; प्रत्येक उसके नाम संग, उन बारह प्रजातियोंनुसार। 

१५ और उन्होंने उस छाती-वस्त्र पर कड़ियाँ बनाईं सिरों पर, शुद्ध स्वर्ण की बुनाई के काम से।

१६ और उन्होंने सोने के दो खाँचे, और सोने के दो कड़े बनाए;  और उन्होंने उन दो कड़ों को छाती-वस्त्र के दो सिरों पर लगा दिए।

१७ और उन्होंने उन दोनो सोने की बुनी हुई कड़ियों को उन दो कड़ों में डाल दिया जो छाती-वस्त्र के सिरों पर हैं।

१८ और उन दो बुनी हुई कड़ियों के उन दो सिरों को उन्होंने उन दो खाँचों में जोड़ दिया, और उन्होंने उन्हें उसके आगे के एफद के कंधों के टुकड़ों में लगा दिया।

१९ और उन्होंने सोने के दो कड़े बनाए, और उन्होंने उन्हें छाती-वस्त्र के दो सिरों पर लगा दिया, उसके किनारे पर, जो भीतरी ओर एफद के पाशर्व में था।

२० और उन्होंने दो अन्य कड़े बनाए, और उन्हें एफद की दोनो ओर नीचे लगा दोगे, उसी के सामने के भाग की ओर, उसके दूसरे जोड़ के विपरीत ही, एफद के निपुण कमरबँध के ऊपर ही।

२१ और उन्होंने उस छाती-वस्त्र को उसके कड़ों से, एफद के कड़ों के साथ एक नीले फीते से बाँध दिए, ताकि वह एफद के निपुण कमरबँध के ऊपर हो, और कि वह छाती-वस्त्र एफद से ढीला रह जाए; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

२२ और उसने उस एफद का अंगरखा बुनाई की कारीगरी का सम्पूर्णता से नीले से बना दिया।

२३ और  उस अंगरखे के मध्य में एक छेद था, किसी जिरह-बख्तर के छेद के समान, उस छेद के चारों ओर बुने हुए काम का एक किनारा था, ताकि वह फट जाए।

२४ और उन्होंने उस अंगरखे के घेरों पर नीले से, और जामुनी से, और सुर्ख से, और बटी हुई महीन छालटी से, अनार बना दिए। 

२५ और उन्होंने शुद्ध स्वर्ण की घंटियाँ बनाईं, और उन घंटियों को उन अनारों के बीच लगा दिया उस अंगरखे के घेरे पर, उसके चारों ओर उन अनारों के बीच;

२६ एक घंटी और एक अनार, एक घंटी और एक अनार, उस अंगरखे के घेरे पर उसके चारों ओर उस में सेवा करने हेतु: जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

२७ और उन्होंने महीन छालटी के बुने हुए कारीगरी के अंगरखे बनाए, हारुन, और उसके बेटों के लिए,

२८ और एक महीन छालटी की पगड़ी, और महीन छालटी की अच्छी टोपियाँ, और छालटी के जाँघिये बटी हुई महीन छालटी के,

२९ और एक कमरबंद बटी हुई महीन छालटी का, और सुई की कारीगरी का, नीले से, और जामुनी से, और सुर्ख से; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

३० और उन्होंने उस पवित्र मुकुट की वह तख़्ती शुद्ध स्वर्ण की बना दी, और उस पर एक आलेख लिख दिया, किसी मुहर में उत्कीर्ण कारीगरियों समान, प्रभु के प्रति पवित्रता।

३१ और उन्होंने उस पर एक नीला फ़ीता बाँध दिया, उसे उस पगड़ी पर ऊपर लगा देने हेतु; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

३२ इस प्रकार से सभा के शिविर के तम्बू का सम्पूर्ण कार्य समाप्त कर दिया गया था: और इस्राएल की सन्तानों ने उस सभीनुसार कर दिया जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, सो उन्होंने कर दिया। 

३३ और वह मूसा के पास वह तम्बू ले आए, वह शिविर, और उसका समस्त फ़र्नीचर, उसके अंकड़े, उसके पट्टे, उसके पटरे, उसके स्तम्भ, उसकी गर्तिकाएँ,

३४ और मेढ़े की चमड़ियों का ढकना लाल रंगी हुईं, और सूँस की चमड़ियों का ढकना, और ढकने के वह परदा,

३५ साक्ष्य का वह संदूक, और उसके डण्डे, और वह प्रेषण-आसन,

३६ वह मेज़, और उसके सभी पात्र, और वह भेंट की रोटी, 

३७ और वह शुद्ध दीपाधार, उसे दीपों सहित, वह दीप व्यवस्थानुसार लगाए जाने हेतु, और उसके सभी पात्र, और उजाले हेतु वह तेल,

३८ और वह स्वर्ण बलिवेदी, और वह अभिषेक-तेल, और वह मधुर-सुगन्धित-धूप, और उस तम्बू के द्वार हेतु वह लटकन,

३९ वह पीतल की बलिवेदी, और उसकी पीतल की जाली, उसके डण्डे, और उसके समस्त पात्र, वह पीतल का कुण्ड और उसका पाँव, 

४० उस आँगन की लटकने, उसके स्तम्भ, और उसकी गर्तिकाएँ, और आँगन के द्वार की लटकन, उसके रस्से, और उसके खूँटे, और सभा के शिविर हेतु, तम्बू की सेवा के समस्त पात्र,

४१ पवित्र स्थान में सेवा करने हेतु सेवा के कपड़े, और हारुन पुरोहित के लिए पवित्र वस्त्र, और उसके बेटों के वस्त्र, पुरोहित-पद में सेवा करने हेतु।

४२ उस सभी के अनुसार जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, सो इस्राएल की सन्तानों ने वह समस्त कार्य कर दिया।  

४३ और मूसा ने उस समस्त कार्य को देखा, और, देखो, उन्होंने उसे कर दिया था जैसा प्रभु ने आदेश दिया था, उसी ही प्रकार से उन्होंने उसे कर दिया था: और मूसा ने उन्हें आशीष दे दिया।



चालीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

प्रथम मास के प्रथम दिन पर तुम सभा के शिविर के तम्बू को ऊपर खड़ा करोगे।

और तुम उस में साक्ष्य के संदूक को रख दोगे, और उस संदूक को उस परदे से ढक दोगे।

और तुम उस मेज़ को अंदर ले आओगे, और उस पर उन वस्तुओं को व्यवस्थित कर दोगे जिन्हें व्यवस्थित किया जाना है; और तुम उस दीपाधार को भीतर ले आओगे, और उसके दीपों को उज्ज्वलित कर दोगे।

और तुम सुगन्धित-धूप हेतु उस सोने की बलिवेदी को साक्ष्य के संदूक के सामने स्थित करोगे, और उस लटकन को तम्बू के द्वार पर लगा दोगे।

और तुम जले चढ़ावे की बलिवेदी को सभा के शिविर के तम्बू के द्वार के सामने स्थित करोगे।

और तुम उस कुण्ड को सभा के शिविर के और उस बलिवेदी के बीच स्थित कर दोगे, और उस में जल डाल दोगे।

और तुम उस आँगन को चारों ओर व्यवस्थित कर दोगे, और आँगन-द्वार पर उस लटकन को लटका दोगे।

और तुम उस अभिषेक-तेल को लोगे, और उस तम्बू का अभिषेक कर दोगे, और उस सभी का जो उसके अंदर है, और उसे पुनीत ठहरा दोगे, और उसके समस्त पात्रों को: और वह पवित्र हो जाएगा।

१० और तुम जले-चढ़ावे की बलिवेदी का अभिषेक करोगे, और उसके समस्त पात्रों का, और उस बलिवेदी को पुनीत ठहरा दोगे: और वह एल अति पवित्र बलिवेदी होगी।

११ और तुम उस कुण्ड और उसके पाँव का अभिषेक करोगे, और उसे पुनीत कर दोगे।

१२ और तुम हारुन और उसके बेटों को सभा के तम्बू के द्वार तक ले आओगे, और उन्हें जल से धो दोगे।

१३ और तुम हारुन को वह पवित्र वस्त्र पहनवा दोगे, और उसका अभिषेक कर दोगे, और उसे पुनीत कर दोगे; ताकि वह मेरे प्रति पुरोहित-पद में सेवा कर सके।

१४ और तुम उसके बेटों को ले आओगे, और उन्हें अंगरखे पहनवा दोगे:

१५ और तुम उनका अभिषेक कर दोगे, जैसे तुमने उनके पिता का अभिषेक कर दिया था, ताकि वह मेरे प्रति पुरोहित-पद में सेवा कर सकें: क्योंकि उनका अभिषेक अवश्य ही एक अनंतकालिक पुरोहित-पद उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक होगा।

१६ इसी प्रकार ही मूसा ने कर दिया: उस सभी के अनुसार जैसा कि प्रभु ने उसे आदेश दिया था, वैसा ही उसने कर दिया।

१७ और यह होने को आया, कि उस दूसरे वर्ष के प्रथम महीने में, महीने के प्रथम दिवस पर, वह तम्बू ऊपर खड़ा कर दिया गया था। 

१८ और मूसा ने उस तम्बू को ऊपर खड़ा किया, और उसकी गर्तिकाओं को बाँधा, और उसके पट्टों को खड़ा किया, और उसके पटरों को अंदर लगाया, और उसके स्तम्भों को ऊपर खड़ा किया। 

१९ और उसने उस शिविर को उस तम्बू के ऊपर बाहर फैला दिया, और उस पर उस शिविर के ढकनों को लगा दिया; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२० और उसने वह साक्ष्य लिया और उसे संदूक में रख दिया, और वह डण्डे संदूक में स्थित कर दिए, और वह प्रेषण-आसन संदूक पर ऊपर लगा दिया:

२१ और वह उस संदूक को तम्बू में भीतर ले आया, और उसने उस ढकने के परदे को लगा दिया, और साक्ष्य के संदूक को ढक दिया; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२२ और उसने वह मेज़ सभा के शिविर में लगा दी, तम्बू के पाशर्व पर उत्तर की ओर, परदे से बाहर।

२३ और उसने प्रभु के सम्मुख उस पर वह रोटी व्यवस्थानुसार रख दी ; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२४ और उसने उस दीपाधार को सभा के शिविर में रख दिया, मेज़ के विपरीत, तम्बू के पाशर्व पर दक्षिण की ओर।

२५ और उसने प्रभु के सम्मुख उन दीपकों को उज्ज्वलित कर दिया; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२६ और उसने सभा के शिविर में उस स्वर्ण बलिवेदी को रख दिया, परदे के सम्मुख:

२७ और उसने उस पर मधुर-सुगन्धित-धूप जलाई; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

२८ और उसने तम्बू के द्वार पर उस लटकन को लगा दिया।

२९ और उसने सभा के शिविर के तम्बू के दवर के साथ जले-चढ़ावे की बलिवेदी रख दी, और उस पर जला-चढ़ावा और  भोज-चढ़ावा चढ़ाया; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

३० और उसने उस कुण्ड को सभा के शिविर और उस बलिवेदी के बीच स्थित किया, और वहाँ पानी डाल दिया, उस से धोने हेतु।

३१ और मूसा और हारुन और उसके बेटों ने अपने हाथों और पैरों को वहीं धोया:

३२ जब वह सभा के शिविर में भीतर जाते थे, और जब वह बलिवेदी के पास तक निकट आते थे, वह धोते थे; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

३३ और उसने उस आँगन को उस तम्बू और उस बलिवेदी के चारों को ऊपर खड़ा कर दिया, और उसने उस आँगन के दरवाज़े की लटकन को स्थित कर दिया। तो मूसा ने वह कार्य समाप्त कर दिया।

३४ तब एक मेघ ने सभा के शिविर को ढक दिया, और प्रभु की महिमा ने तम्बू को भर दिया।

३५ और मूसा सभे के शिविर में प्रवेश करने हेतु असक्षम था, क्योंकि उस पर वह मेघ ठहरा हुआ था, और प्रभु की महिमा ने तम्बू को भर दिया था।

३६ और जब उस मेघ को तम्बू पर से ऊपर ले लिया जाता था, इस्राएल की सन्ताने अपनी समस्त यात्राओं पर अग्रसर होतीं थीं:

३७ परन्तु यदि वह मेघ ऊपर नहीं लिया जाता था, तब वह यात्रा नहीं करते थे जब तक वह ऊपर नहीं ले लिया जाता था।

३८ क्योंकि प्रभु का वह मेघ दिन-दिन रहते-रहते उस तम्बू के ऊपर होता था, और  रात-रात रहते-रहते अग्नी उसके ऊपर होती थी, इस्राएल के समस्त घराने के दृष्टि में, उनकी समस्त यात्राओं में।



१०/१२/२०२४: 

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