लेवी व्यवस्था। (Leviticus)


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पहला अध्याय।


और प्रभु ने मूसा को बुलाया, और वह उस से सभा के तम्बू में से बोले, कहते हुए,  

इस्राएल की सन्तानो से बोलो, और उनसे कहो, यदि तुम में से कोई भी पुरुष प्रभु के लिए एक चढ़ावा लाता है, तुम अपना चढ़ावा मवेशी में से लाओगे, यहाँ तक कि पशु समूह का ही, और झुण्ड का ही।

यदि उसका चढ़ावा पशु समूह का एक जला-चढ़ावा हो, उसे एक निष्कलंक नर चढ़ा देने दो; वह उसे अपनी ही स्वयं की स्वेच्छा से प्रभु के सम्मुख सभा के तम्बू के द्वार पर चढ़ाएगा।

और वह अपने हाथ को उस जले-चढ़ावे के सर पर रखेगा; और वह उसके प्रति स्वीकार कर लिया जाएगा उसके लिए पापमोचन कर देने हेतु।

और वह उस सांड को प्रभु और पुरोहितों के सम्मुख मार देगा: और वह पुरोहित, हारुन के बेटे, उस रक्त को लाएँगे, और उस रक्त को उस बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देंगे जो सभा के तम्बू के द्वार के साथ है।

और वह उस जले-चढ़ावे की खाल उतारेगा, और वह उसे उसके टुकड़ों में काट देगा।

और हारुन पुरोहित के बेटे बलिवेदी पर अग्नी जला देंगे, और वह उस अग्नी पर लकड़ी को व्यवस्थानुसार लिटा देंगे:

और वह पुरोहित, हारुन के बेटे, उन भागों को लिटा देंगे, सर, और चर्बी, लकड़ी पर व्यवस्थानुसार जो उस अग्नी पर है जो उस बलिवेदी पर है:

परन्तु उसके भीतरी अँग और उसकी टाँगे वह पानी में धोएगा: और वह पुरोहित उस सभी को बलिवेदी पर जला देगा, एक जला-चढ़ाव बन जाने हेतु, एक आहुति अग्नी से बनी हुई, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता की।

१० और यदि उसका चढ़ावा झुण्डों का हो, भेड़ों का, या बकरों का, जले-चढ़ावे हेतु; वह उसे एक निष्कलंक नर लाएगा।

११ और वह उसे उत्तर की ओर बलिवेदी के पाशर्व में प्रभु के सम्मुख मार देगा: और वह पुरोहित, हारुन के बेटे, उसके रक्त को उस बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देंगे।

१२ और वह उसे उसके टुकड़ों में काट देगा, उसके सर और उसकी चर्बी के साथ: और वह पुरोहित उन्हें उस लकड़ी पर व्यवस्थानुसार लिटा देगा, जो उस अग्नी पर है जो उस बलिवेदी पर है:

१३ परन्तु वह भीतरी अँगों को और टाँगों को पानी के साथ धो देगा: और वह पुरोहित उस सभी को ले आएगा, और उसे बलिवेदी पर जला देगा: यह एक जला-बलिदान है, एक आहुति अग्नी से बनी हुई, प्रभु के प्रति एक स्वादिष्ट मिठास की।

१४ और यदि प्रभु के प्रति वह जला-बलिदान उसके चढ़ावे हेतु पक्षियों का हो, तब वह पिंडुकों की अपनी आहुति लाएगा, या युवा कबूतरों की।

१५ और वह पुरोहित उसे बलिवेदी तक ले आएगा, और उसके सर को मरोड़ कर पृथक कर देगा, और उसे बलिवेदी पर जला देगा; और उसका रक्त बलिवेदी के पाशर्व के साथ निचोड़ दिया जाएगा:

१६ और वह उसकी अन्न-थैली को उसके पंखों सहित चूँटेगा, और उसे बलिवेदी के साथ पूर्वी भाग में फैंक देगा, राखों के साथ के साथ:

१७ और वह उसे उसके पंखों के साथ काट देगा, परन्तु वह उसे पृथक नहीं करेगा: और वह पुरोहित उसे बलिवेदी पर जला देगा, उस लकड़ी पर जो अग्नी पर है: यह एक जला-बलिदान है, एक आहुति अग्नी से बनी हुई, प्रभु के प्रति एक स्वादिष्ट मिठास की।



दूसरा अध्याय।


और जब कोई भी एक भोज-चढ़ावा प्रभु के प्रति चढ़ाएगा, उसका चढ़ावा बारीक आटे का होगा; और वह उस पर तेल उँडेलेगा, और उस पर लोहबान डालेगा:

और वह उसे हारुन के बेटों उन पुरोहितों के पास ले आएगा: और वह वहाँ अपनी मुट्ठी भर उस आटे में से बाहर निकल लेगा, और उसके तेल को, उसके समस्त लोहबान के साथ; और वह पुरोहित उसका स्मारक-मात्र बलिवेदी पर जला देगा, एक आहुति अग्नी से बन जाने हेतु, प्रभु के प्रति एक मीठी स्वादिष्टता की।

और उस भोज-चढ़ावे का बचा हुआ अन्श हारुन और उसके बेटों का होगा: यह बात प्रभु के अग्नी द्वारा बनाए गए चढ़ावों में से अति पवित्रतम है।   

और यदि तुम कोई भोज-चढ़ावे की आहुति लाते हो जो चूल्हे में पकी हो, तो वह तेल से मिश्रित बारीक आटे की बेख़मीरी छेद किए पराँठों की होगी, अथ्वा तेल से लीपे हुए बेख़मीरी पताशों।

और यदि तुम्हारी आहुति तवे पर पका हुआ भोज-चढ़ावा हो, वह बारीक बख़मीरी आटे की होगी, तेल से मिश्रित।

तुम उसे टुकड़ों में अलग कर दोगे, और उस पर तेल उँडेल दोगे: यह एक भोज-चढ़ावा है।

और यदि तुम्हारी आहुति कढ़ाई में तली हुआ भोज-चढ़ावा हो, वह तेल के साथ बारीक आटे से बनाया जाएगा।

और तुम प्रभु के प्रति उस भोज-चढ़ावे को लाओगे जो इन वस्तुओं से बना है: और जब वह पुरोहित को प्रस्तुत किया जाता है, वह उसे बलिवेदी तक ले आएगा।

और वह पुरोहित उस भोज-चढ़ावे में से उसका एक स्मारक-मात्र लेगा, और वह उसे बलिवेदी पर जला देगा: यह एक अग्नी से बनी हुई आहुति है, प्रभु के प्रति एक स्वादिष्ट मिठास की।

१० और वह जो भोज-चढ़ावे में से बच गया है, हारुन और उसके बेटों का होगा: यह बात प्रभु के अग्नी द्वारा बनाए गए चढ़ावों में से अति पवित्रतम है। 

११ कोई भी भोज-चढ़ावा, जिसे तुम प्रभु के लिए लाओगे, खमीर से नहीं बना होगा: क्योंकि तुम कोई भी खमीर नहीं जलाओगे, ही मधु, प्रभु की किसी भी अग्नी से बनी हुई आहुति में।

१२ प्रथमफलों की आहुति के विषय में, तुम उन्हें प्रभु के प्रति चढ़ा दोगे: परन्तु वह बलिवेदी पर नहीं जलाएजाएँगे एक मधुर स्वादिष्टता हेतु।

१३ और तुम्हारे भोज-चढ़ावे की प्रत्येक आहुति में तुम नमक डालोगे; ही तुम अपने ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्र के नमक को अपने भोज-चढ़ावे से विहीन छोड़ोगे: अपने समस्त चढ़ावों के साथ तुम नमक चढ़ाओगे। 

१४ और यदि तुम प्रभु के प्रति अपने प्रथमफलों का एक भोज-चढ़ावा चढ़ाते हो, तुम अपने प्रथमफलों के भोज-चढ़ावे के लिए अग्नी से सुखाई हुई अनाज की हरी बालियाँ चढ़ाओगे, भरी हुई बालियों में से कूटा हुआ अन्न ही।

१५ और तुम उस पर तेल लगाओगे, और उस पर लोहबान लिटा दोगे: यह एक भोज-चढ़ावा है। 

१६ और वह पुरोहित उसके स्मारक-मात्र को जला देगा, उसके कूटे हुए अन्न का भाग, और उसके तेल का भाग, उसके समस्त लोहबान सहित: यह प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी हुई आहुति है। 




तीसरा अध्याय।


और यदि उसकी आहुति एक शान्ति-चढ़ावे का बलिदान हो, यदि वह उसे पशु-समूह में से चढ़ाता है; चाहे वह एक नर हो या नारी, वह उसे प्रभु के सम्मुख निष्कलन चढ़ा देगा।

और वह अपने हाथ को अपने चढ़ावे के सर पर रखेगा, और उसे सभा के तम्बू के द्वार पर मार देगा: और वह पुरोहित, हारुन के बेटे, उस रक्त को बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देंगे।

और वह शान्ति-चढ़ावे के बलिदान से प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी हुई आहुति चढ़ाएगा; वह चर्बी जो भीतरी अंगों को ढकी है, और वह समस्त चर्बी जो भीतरी अंगों पर है,

और वह दो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, जो उन कटियों के साथ है, और जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली, गुर्दों के साथ, वह उसे परे हटा देगा।

और हारुन के बेटे उसे बलिवेदी पर उस जले बलिदान पर जला देंगे, जो उस लकड़ी पर है जो उस अग्नी पर है: यह प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी हुई, मधुर स्वादिष्टता की एक आहुति है।

और यदि उसका प्रभु के प्रति शान्ति-चढ़ावे के बलिदान का चढ़ावा झुण्ड में से हो; नर या मादा, वह उसे निष्कलंक चढ़ाएगा।

यदि वह अपने चढ़ावे हेतु एक मेमना चढ़ाता है, तो वह उसे प्रभु के सम्मुख चढ़ाएगा।

और वह अपना हाथ अपने चढ़ावे के सर पर रखेगा; और वह उसे सभा के तम्बू सम्मुख मार देगा: और हारुन के बेटे उसके रक्त को बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देंगे।

और वह शान्ति-चढ़ावे के बलिदान से प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी हुई आहुति चढ़ाएगा; उसकी चर्बी, और सारी चर्बीली पूँछ, उसे वह रीढ़ की हड्डी पर से कड़ाई से उतार लेगा; और वह चर्बी जो भीतरी अंगों को ढकी है, और वह समस्त चर्बी जो भीतरी अंगों पर है,

१० और वह दो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, जो उन कटियों के साथ है, और जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली, गुर्दों के साथ, वह उसे परे हटा देगा।

११ और वह पुरोहित उसे बलिवेदी पर जला देगा: यह भोजन है आहुति का जो प्रभु के प्रति अग्नी से बनी है। 

१२ और यदि उसका चढ़ावा एक बकरा हो, तो वह उसे प्रभु के सम्मुख चढ़ाएगा।

१३ और वह अपना हाथ अपने चढ़ावे के सर पर रखेगा, और वह उसे सभा के तम्बू सम्मुख मार देगा: और हारुन के बेटे उसके रक्त को बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देंगे।

१४ और वह उस से चढ़ाएगा अपना चढ़ावा, यहाँ तक कि प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी हुई आहुति; वह चर्बी जो भीतरी अंगों को ढकी है, और वह समस्त चर्बी जो भीतरी अंगों पर है,

१५ और वह दो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, जो उन कटियों के साथ है, और जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली, गुर्दों के साथ, वह उसे परे हटा देगा।

१६ और वह पुरोहित उन्हें बलिवेदी पर जला देगा: यह भोजन है आहुति का जो प्रभु के प्रति अग्नी से बनी है मधुर स्वादिष्टता हेतु; सारी चर्बी प्रभु की है। 

१७ यह तुम्हारी पीढ़ियों के लिए एक निरंतर अध्यादेश होगा तुम्हारे समस्त बसेरों के सर्वत्र में, कि तुम ही चर्बी खाओगे ही रक्त।




चौथा अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, यदि कोई आत्मा अनभिज्ञतावश पाप कर बैठे, प्रभु के किसी भी आदेशों के विरुद्ध उन बातों के सम्बंध में जो नहीं की जानी चाहिएँ, और उन में से किसी के भी विरुद्ध कर दे:

यदि वह पुरोहित जो अभिषिक्त है लोगों के पापानुसार पाप कर दे: तो उसे अपने पाप के लिए, जो पाप उसने कर दिया है, प्रभु के प्रति एक निष्कलंक युवा सांड ले आने दो एक पाप-चढ़ावे हेतु।

और वह प्रभु के सम्मुख उस सांड को सभा के तम्बू के द्वार तक ले आएगा; और वह अपना हाथ उस सांड के सर पर रखेगा, और उसे प्रभु के समक्ष मार देगा।

और वह पुरोहित जो अभिषिक्त है उस सांड के रक्त में से लेगा, और वह उसे सभा के तम्बू तक ले आएगा:

और वह पुरोहित अपनी उँगली को उस रक्त में डुबोएगा, और वह उस रक्त में से प्रभु के सम्मुख सात बार छिड़केगा, पुण्य-स्थान के परदे समक्ष।

और वह पुरोहित उस रक्त में से कुछ प्रभु के सम्मुख उस मधुर-सुगन्धित-धूप की बलिवेदी के सींघों पर लगाएगा, जो सभा के तम्बू में है; और सारे उस सांड के रक्त को जले-चढ़ावे की बलिवेदी के तले उँडेल देगा, जो सभा के तम्बू के द्वार पर है।

और वह उस पर से उस सांड की सारी चर्बी उतार लेगा पाप-चढ़ावे हेतु; वह चर्बी जो भीतरी भागों को ढके है, और वह सारी चर्बी जो भीतरी भागों पर है,

और वह दो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, जो उन कटियों के साथ है, और जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली, गुर्दों के साथ, वह उसे परे हटा देगा,

१० जिस प्रकार वह शान्ति-चढ़ावे के बलिदान के सांड पर से उतार लिया गया था: और वह पुरोहित उन्हें जले-चढ़ावे की बलिवेदी पर जला देगा।

११ और उस सांड की चमड़ी, और उसका सारा माँस, उसके सर के साथ, और उसकी टांगों के साथ, और उसके भीतरी भाग, और उसका गोबर,

१२ यहाँ तक कि वह सम्पूर्ण सांड वह शिविर के बाहर एक स्वच्छ स्थान तक उठा ले जाएगा, जहाँ राखें उँडेल दी जातीं हैं, और उसे अग्नी के साथ लकड़ी पर जला देगा: जहाँ राखें उँडेली जातीं हैं वहीं उसे जला दिया जाएगा।

१३ और यदि इस्राएल की सम्पूर्ण सभा अनभिज्ञतावश पाप कर दे, और यह बात सभा की आँखों से छिपी हो, और उन्होंने प्रभु के आदेशों के विरुद्ध कुछ कर दिया हो, उन बातों के सम्बंध में जो नहीं की जानी चाहिएँ, और दोषी हो; 

१४ जब वह पाप, जो उन्होंने उसके विरुद्ध कर दिया है, ज्ञात होता है, तब सभा उस पाप के लिए एक युवा सांड चढ़ा देगी, और उसे सभा के तम्बू के समक्ष ले आएगी।

१५ और सभा के वृद्ध अपने हाथों को प्रभु के समक्ष सांड के सर पर रख देंगे: और वह सांड प्रभु के समक्ष मार दिया जाएगा।

१६ और वह पुरोहित जो अभिषिक्त है उस सांड के रक्त में से सभा के तम्बू में ले आएगा: 

१७ और वह पुरोहित अपनी उँगली को उस रक्त में डुबोइग, और उसे प्रभु के समक्ष सात बार छिड़का देगा, परदे के समक्ष ही।

१८ और वह उस रक्त में से कुछ उस बलिवेदी के सींघों पर लगाएगा, जो प्रभु के समक्ष है, जो सभा के तम्बू में है, और सारे उस रक्त को जले-चढ़ावे की बलिवेदी के तले उँडेल देगा, जो सभा के तम्बू के द्वार पर है।

१९ और वह उस पर से उसकी सारी चर्बी उतार लेगा, और उसे बलिवेदी पर जला देगा।

२० और वह उस सांड के साथ वैसा ही करेगा जैसा उसने पाप-चढ़ावे के सांड के साथ किया था, उसी प्रकार ही वह इसके साथ करेगा: और वह पुरोहित उनके लिए एक पाप-परिहार बना देगा, और वह उनके प्रति क्षमा कर दिया जाएगा।

२१ और वह उस सांड को शिविर के बाहर उठा ले जाएगा, और उसे जला देगा जिस प्रकार उसने वह पहला सांड जलाया था: यह सभा के लिए एक पाप-चढ़ावा है।

२२ जब किसी अध्यक्ष ने पाप कर दिया हो, और अनभिज्ञतावश प्रभु के किन्ही भी आदेशों के विरुद्ध कुछ कर दिया हो, उन बातों के सम्बंध में जो नहीं की जानी चाहिएँ, और दोषी हो;

२३ या फिर उसका पाप, जो पाप उसने कर दिया है, उसकी जानकारी में जाए; वह अपना चढ़ावा ले आएगा, बकरों में से एक हलवान, एक निष्कलंक नर:

२४ और वह अपना हाथ उस बकरे के सर पर रखेगा, और उसे उस स्थान में मार देगा जहाँ वह प्रभु के समक्ष उस जले-चढ़ावे को मारते हैं: यह एक पाप-चढ़ावा है।

२५ और वह पुरोहित अपनी उँगली से उस पाप-चढ़ावे के रक्त में से लेगा, और उसे जले-चढ़ावे की बलिवेदी के सींघों पर लगा देगा, और उसके रक्त को जले-चढ़ावे की बलिवेदी के तले उँडेल देगा। 

२६ और वह उसकी सारी चर्बी को बलिवेदी पर जला देगा, शान्ति-चढ़ावे के बलिदान की चर्बी समान: और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बनाएगा उसके पाप के समबन्ध में, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

२७ और यदि सामान्य लोगों में से कोई एक अनभिज्ञता द्वारा पाप कर दे, जैसे वह प्रभु के आदेशों में से किसी के भी विरुद्ध कुछ कर रहा हो उन बातों के सम्बंध में जो नहीं की जानी चाहिएँ, और वह दोषी हो; 

२८ या फिर उसका पाप, जो उसने पाप कर दिया है, उसकी जानकारी में जाए: तब वह अपनी आहुति लाएगा, बकरों में से एक हलवान, एक बकरी, उसके पाप के लिए जिस पाप को उसने कर दिया है।

२९ और वह अपना हाथ उसके पाप-चढ़ावे के सर पर रखेगा, और वह उस पाप-चढ़ावे को जले-चढ़ावे के स्थान में मार देगा।

३० और वह पुरोहित उसके रक्त में से अपनी उँगली से लेगा, और उसे जले-चढ़ावे की बलिवेदी के सींघों पर लगा देगा, और उसके सम्पूर्ण रक्त को जले-चढ़ावे की बलिवेदी के तले उँडेल देगा।

३१ और वह उसकी समस्त चर्बी को हटा देगा, जैसे कि शान्ति-चढ़ावों के बलिदान पर से चर्बी हटाई जाती है; और वह पुरोहित उसे बलिवेदी पर जला देगा प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु; और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बनाएगा, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

३२ और यदि वह पाप-चढ़ावे के लिए एक मेमना लाता है, वह उसे एक निष्कलंक मादा लाएगा।

३३ और वह अपना हाथ उस पाप-चढ़ावे के सर पर रखेगा, और वह उसे एक पाप-चढ़ावे हेतु उस स्थान में मार देगा जहाँ वह जले-चढ़ावे को मारते हैं।

३४ और वह पुरोहित अपनी उँगली से उस पाप-चढ़ावे के रक्त में से लेगा, और उसे जले-चढ़ावे की बलिवेदी के सींघों पर लगा देगा, और उसके रक्त को जले-चढ़ावे की बलिवेदी के तले उँडेल देगा:

३५ और वह उसकी समस्त चर्बी को हटा देगा, जैसे कि शान्ति-चढ़ावों के बलिदान के मेमने की चर्बी हटाई जाती है; और वह पुरोहित उन्हें बलिवेदी पर जला देगा, प्रभु के प्रति उन आहुतियोंनुसार जो अग्नी से बनाई जाती हैं: और वह पुरोहित उसके पाप हेतु जो उसने कर दिया है एक पाप-परिहार बनाएगा, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।



पाँचवाँ अध्याय।


और यदि कोई आत्मा पाप करे, और शपथ की वाणी सुने, और एक साक्षी हो, भले ही उसने देखा हो या उसके विषय में जानकारी रखता हो; यदि वह उसे नहीं बताएगा, तो वह अपनी अधर्मता को ढोएगा।

अथ्वा यदि कोई आत्मा किसी अस्वच्छ वस्तु को छू ले, चाहे वह किसी अस्वच्छ जानवर का शव ही क्यों हो, या किसी अस्वछ मवेशी का शव, या अस्वच्छ रेंगते जन्तुओं का शव, या फिर वह उस से छिपा हुआ हो; वह भी अस्वच्छ बन जाएगा, और दोषी।

अथ्वा यदि वह मनुष्य की अस्वच्छता को छू ले, जो कोई भी अस्वच्छता वह हो जिस से कोई व्यक्ति दूषित हो गया हो, और यह उस से छिपा हुआ हो; जब उसे उसके विषय में पता चल जाएगा, तब वह दोषी बन जाएगा। 

अथ्वा यदि कोई आत्मा शपथ देता है, अपने होठों से बुराई करने की, या अच्छाई करने की घोषणा करता हुआ, वह जो कुछ भी हो जो कोई व्यक्ति किसी शपथ से घोषित कर दे, और वह उस से छिप जाए; जब वह उस से परिचित हो जाएगा, तब वह उन में से एक में दोषी ठहर जाएगा।

और ऐसा होगा, जब वह इन बातों में से एक में दोषी होगा, कि वह स्वीकार करेगा कि उसने उस बात में पाप कर दिया है:

और वह प्रभु के प्रति अपने पाप हेतु जो पाप उसने कर दिया है अपना दोष-चढ़ावा ले आएगा, झुण्ड में से एक मादा, एक मादा मेमना या बकरीयों में से एक हलवान, एक पाप-चढ़ावे हेतु; और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बनाएगा उसके पाप के समबन्ध में। 

और यदि वह एक मेमने को लाने में असमर्थ हो, तो वह अपने अतिचार के लिए जो उसने कर दिया है, प्रभु के प्रति, दो पिंडुकों को, या दो युवा कबूतरों को ले आएगा; एक एक पाप-चढ़ावे हेतु, और वह दूसरा एक जले-चढ़ावे हेतु।

और वह उन्हें पुरोहित के पास ले आएगा, जो उसे जो पाप-चढ़ावे हेतु है पहले चढ़ाएगा, और वह उसके सर को उसकी गर्दन पर से मरोड़ देगा, परन्तु वह उसे विभाजित नहीं करेगा:

और वह उस पाप-चढ़ावे के रक्त में से बलिवेदी के पाशर्व पर छिड़क देगा; और बचा हुआ शेष रक्त बलिवेदी के तले पर निचोड़ दिया जाएगा: यह एक पाप-चढ़ावा है।

१० और वह उस दूसरे को एक जले-चढ़ावे हेतु अर्पित कर देगा, रीतिनुसार: और वह पुरोहित उसके पाप के लिए जो उसने कर दिया है एक पाप-परिहार बना देगा, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

११ परन्तु यदि वह दो पिंडुकों को, या दो युवा कबूतरों को लाने में असमर्थ हो, तब वो जिसने पाप कर दिया है अपने चढ़ावे हेतु बारीक आटे के एफाह का दसवाँ अन्श एल पाप-चढ़ावे हेतु ले आएगा; वह उस पर कोई तेल नहीं डालेगा, ही वह उस पर कोई लोहबान रखेगा: क्योंकि यह एक पाप-चढ़ावा है।

१२ तब वह उसे पुरोहित के पास ले आएगा, और वह पुरोहित उस में से अपनी मुट्ठी-भर ले लेगा, एक स्मारक-मात्र ही उसका, और उसे बलिवेदी पर भस्म कर देगा, प्रभु के प्रति उन आहुतियोंनुसार जो अग्नी से बनाई जाती हैं: यह एक पाप-चढ़ावा है।

१३ और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बना देगा उसके पाप के समबन्ध में जो उसने इन बातों में से एक में पाप कर दिया है, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा: और वह एक भोज-चढ़ावे समान, वह शेष भाग पुरोहित का होगा।

१४ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१५ यदि कोई आत्मा कोई अतिचार करता है, और अनभिज्ञता में पाप कर देता है, प्रभु की पवित्र बातों में; तब वह प्रभु के प्रति अपने अतिचार हेतु एक झुण्डों में से निष्कलंक मेढ़ा ले आएगा, चाँदी के शेकेलों में तुम्हारे अनुमान द्वारा, पुण्य-स्थान के शेकेलानुसार, एक दोष-चढ़ावे हेतु:

१६ और वह उस हानि के लिए जो उसने उस पवित्र बात में कर दी है संशोधन कर देगा, और वह उस में उसका पाँचवाँ अन्श जोड़ देगा, और वह उसे पुरोहित को दे देगा: और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बना देगा दोष-चढ़ावे के मेढ़े के साथ, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

१७ और यदि कोई आत्मा पाप करता है, और वह इन में से किसी भी बात को कर देता है जिनका प्रभु के आदेशों द्वारा करना मना है; भले ही वह यह नहीं जानता था, तथापि वह दोषी है, और वह अपनी अधर्मता ढ़ोएगा। 

१८ और वह झुंड में से एक निष्कलंक मेढ़ा ले आएगा, तुम्हारे मूल्यांकन से, एक दोष-चढ़ावे हेतु, पुरोहित के पास: और वह पुरोहित उसके लिए एक पाप-परिहार बना देगा उसकी अनभिज्ञता के समबन्ध में जिस में उसने त्रुटि कर ड़ी है और वह उसे जानता नहीं था, और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

१९ यह एक दोष-चढ़ावा है: उसने निश्चितता से ही प्रभु में विरुद्ध अतिचार कर दिया है। 




छटा अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

यदि कोई आत्मा पाप कर दे, और प्रभु के विरुद्ध कोई अतिचार कर दे, और अपने पड़ौसी से उसके समबन्ध में झूठ बोल दे जो उसे रखने के लिए प्रदान कर दिया गया था, या साहचर्य में, या किसी वस्तु में जो हिंसा से ले ली गई हो, या उसने अपने पड़ौसी को धोखा दे दिया हो;

या वह पा लिया हो जो खो गया था, और उसके समबन्ध में झूठ बोलता हो, और असत्य शपथ देता हो; इन सभी में से किसी को भी जो कोई व्यक्ति करता है, इन में पाप करता हुआ:

तब ऐसा होगा कि, क्योंकि उसने पाप कर दिया है, और वह दोषी है, कि वह उसे पुनःस्थापित कर देगा जो उसने हिंसा से ले लिया था, या वह वस्तु जो उसने धोखे से ले ली थी, या वह जो उसे रखने के लिए दे दी गई थी, या वह खोई हुई वस्तु जो उसने पा ली थी, 

या वह सभी जिसके विषय में उसने झूठी शपथ दी है; वह उसे मूलरूप में ही पुनःस्थापित कर देगा, और उसके साथ उसका पाँचवाँ भाग भी जोड़ देगा, और उसे अपने दोष-चढ़ावे की तिथि पर उसे दे देगा जिसको वह देय है।

और वह प्रभु के प्रति, पुरोहित के पास, अपना दोष-चढ़ावा ले आएगा, एक निष्कलंक मेढ़ा झुंड में से, तुम्हारे अनुमान से, एक दोष-चढ़ावे हेतु:

और वह पुरोहित उसके लिए प्रभु के समक्ष एक पाप-परिहार बना देगा: और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा सभी में से किसी भी बात के समबन्ध में जो उसने उस में अतिचार कर दिया है।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

हारुन और उसके बेटों को आदेश दे दो, कहते हुए, यह जले-चढ़ावे का नियम है: यह जला-चढ़ावा है, बलिवेदी पर सारी रात सुबह तक जलने के कारण, और बलिवेदी की अग्नी उस में जलेगी।

१० और वह पुरोहित अपना छालटी का वस्त्र धारण कर लेगा, और अपने छालटी के जाँघिये अपने माँस पर पहन लेगा, और वह उन राखों को उठा लेगा जिसकी उस अग्नी ने खपथ कर ली है उस जले-चढ़ावे के साथ बलिवेदी पर, और वह उन्हें बलिवेदी के साथ रख देगा।

११ और वह अपने वस्त्रों को उतार लेगा, और अन्य वस्त्रों को पहन लेगा, और वह उन राखों को शिविर के बाहर एक स्वच्छ स्थान में उठा ले जाएगा।

१२ और बलिवेदी पर वह अग्नी उस में जलती रहेगी; वह बुझाई नहीं जाएगी: और वह पुरोहित उस पर प्रत्येक प्रातः लकड़ी जला देगा, और व्यवस्थानुसार उस पर उस जले-चढ़ावे को लिटा देगा; और वह उस पर वहाँ शान्ति-चढ़ावों की चर्बी को जलाएगा।

१३ बलिवेदी पर वह अग्नी सदैव जलती ही रहेगी; वह कतई भी बुझाई नहीं जाएगी।

१४ और यह भोज-चढ़ावे का नियम है: हारुन के बेटे उसे प्रभु के समक्ष, बलिवेदी के समक्ष चढ़ाएँगे।

१५ और वह उस में से उस भोज-चढ़ावे के आटे में से अपनी मुट्ठी-भर ले लेगा, और उसका तेल, और वह समस्त लोहबान जो उस भोज-चढ़ावे पर है, और उसे उस बलिवेदी पर जला देगा एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु, उसका स्मारक ही, प्रभु के प्रति। 

१६ और उसका बचा हुआ भाग हारुन और उसके बेटे खाएँगे: बेख़मीरी रोटी के साथ उसे पवित्र-स्थान में खाया जाएगा; सभा के तम्बू के आँगन में वह उसे खाएँगे।

१७ वह खमीर के साथ नहीं पकाया जाएगा। मैंने इसे अपनी अग्नी से बनाई हुई आहुतियों के उनके भाग हेतु उन्हें प्रदान कर दिया है; यह अति-पवित्रतम है, जैसे कि वह पाप-चढ़ावा, और जैसे कि वह दोष-चढ़ावा।

१८ हारुन की सन्तानों के बीच सभी नर उस में से खाएँगे। यह तुम्हारी पीढ़ियों में अन्तहीनता तक एक निरंतर अध्यादेश होगा अग्नी से प्रभु के प्रति बनाई गई आहुतियों के समबन्ध में: वह प्रत्येक जो उन्हें  छूता है पवित्र होगा।

१९ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२० यह हारुन और उसके बेटों का चढ़ावा है, जिसे वह प्रभु के प्रति उस दिन चढ़ाएँगे जब उसका अभिषेक होता है; एक निरन्तर भोज-चढ़ावे हेतु बारीक आटे के एक एफाह का दसवाँ भाग, उसका अर्ध सुबह, और उसका अर्ध रात्रि को।

२१ एक तवे पर उसे तेल संग बनाया जाएगा; और जब वह पक जाता है, तुम उसे भीतर ले आओगे: और उस भोज-चढ़ावे के पके हुए टुकड़ों को तुम प्रभु के प्रति एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु अर्पित कर दोगे।

२२ और उसके बेटों में से वह पुरोहित जो उसके स्थान में अभिषिक्त है उसे चढ़ाएगा: यह प्रभु के प्रति एक अनन्तता का अध्यादेश है; उसे पूर्णतया भस्म कर दिया जाएगा।

२३ क्योंकि पुरोहित के लिए प्रत्येक भोज-चढ़ावा पूर्णतया भस्म कर दिया जाएगा: उसे कहया नहीं जाएगा।

२४ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२५ हारुन और उसके बेटों से बोलो, कहते हुए, यह पाप-चढ़ावे का नियम है: उस स्थान में जहाँ जला-चढ़ावा मारा जाता है, पाप-चढ़ावा मारा जाएगा प्रभु के सम्मुख: यह अति-पवित्रतम है। 

२६ वह पुरोहित जो उसे पाप हेतु चढ़ाएगा उसे खाएगा: पवित्र-स्थान में उसे खाया जाएगा, सभे के तम्बू के आँगन में।

२७ जो कुछ भी उसके माँस को छुएगा पवित्र होगा: और जब किसी भी वस्त्र पर उसका रक्त छिड़क जाता है, तुम उसे पवित्र-स्थान में धो दोगे जिस पर वह छिड़क गया था।

२८ परन्तु वह मिट्टी का बर्तन जिस में उसे उबाला जाता है तोड़ दिया जाएगा: और यदि वह किसी पीतल के पतीले में उबाला जाता है, तो उसे माँज दिया जाएगा, और पानी में धो दिया जाएगा।

२९ पुरोहितों के बीच सभी नर उस में से खाएँगे: यह अति-पवित्रतम है।

३० और कोई भी पाप-चढ़ावा, जिसका रक्त सभा के तम्बू में लाया जाता है सामंजस्य हेतु पवित्र-स्थान में, नहीं खाया जाएगा: वह अग्नी से भस्म कर दिया जाएगा।



सातवाँ अध्याय।


इसी प्रकार यह दोष-चढ़ावे का नियम है: यह अति-पवित्रतम है।

उसी स्थान में जहाँ वह जला-चढ़ावा मारते हैं, वह पाप-चढ़ावे को मारेंगे: और उसका रक्त वह बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क देगा। 

और वह उसकी समस्त चर्बी को चढ़ा देगा; वह चर्बीली पूँछ, और वह चर्बी जो अन्दरूनी अंगों को ढकती है,

और वह दो गुर्दे, और वह चर्बी जो उन पर है, जो उन कटियों के साथ है, और जिगर के ऊपर की चरबीली-झिल्ली, गुर्दों के साथ, वह उसे परे हटा देगा:

और वह पुरोहित उन्हें बलिवेदी पर जला देगा, प्रभु के प्रति उन आहुतियोंनुसार जो अग्नी से बनाई जाती हैं: यह एक दोष-चढ़ावा है।

पुरोहितों के बीच प्रत्येक नर उस में से खाएगा: यह पवित्र-स्थान में खाया जाएगा: यह अति-पवित्रतम है।

जैसे पाप-चढ़ावा है, वैसे ही दोष-चढ़ावा है: इनके लिए एक नियम है: वह पुरोहित जो इस से पाप-परिहार बनाता है इसे रख लेगा।

और वह पुरोहित जो किसी भी आदमी का जला-चढ़ावा चढ़ाता है, वही पुरोहित उस जले-चढ़ावे की चमड़ी जिसे उसने चढ़ाया है, स्वयं के प्रति रख लेगा।

और वह भोज-चढ़ावा जो चूल्हे में पकाया गया है, और वह सभी कुछ जो कढ़ाई में और तवे पर तैयार होता है, उस पुरोहित का होगा जो उसे चढ़ाता है।

१० और प्रत्येक भोज-चढ़ावा, तेल से मिश्रित, और सूखा हुआ, हारुन के सभी बेटों का होगा, एक के पास दूसरे जितना।

११ और यह है शान्ति-चढ़ावे की बलि का, जिसे वह प्रभु के प्रति चढ़ाएगा। 

१२ यदि वह किसी कृतज्ञता हेतु उसे चढ़ाए, तब वह कृतज्ञता के बलिदान के साथ बेख़मीरी छेद किए पराँठे तेल से मिश्रित, और बेख़मीरी पताशे तेल से विलेपित, और छेद किए पराँठे तेल से मिश्रित, बारीक आटे के, और तले हुए, चढ़ा देगा। 

१३ उन छेद किए पराँठों के अतिरिक्त, वह अपनी आहुति के लिए खमीरी रोटी चढ़ाएगा कृतज्ञता की बलि के साथ उसके शान्ति-चढ़ावे  की।

१४ और उस में से वह उस सम्पूर्ण चढ़ावे में से एक चढ़ा देगा एक उठाए-चढ़ावे हेतु प्रभु के प्रति, और वह उस पुरोहित का होगा जो शान्ति-चढ़ावों का रक्त छिड़कता है।

१५ और कृतज्ञता हेतु उसके शान्ति-चढ़ावों के बलिदान का माँस उसी दिन खा लिया जाएगा जब वह चढ़ाया जाता है; वह उस में से कुछ भी सुबह तक नहीं छोड़ेगा।

१६ परन्तु यदि उसके चढ़ावे का बलिदान कोई शपथ, या कोई स्वैच्छिक आहुति हो, वह उसी दिन खा ली जाएगी जिस में वह  अपनी बलि चढ़ाता है: और उसके अगले दिन भी उसका बचा हुआ अन्श खा लिया जाएगा:

१७ परन्तु उस बलि का बचा हुआ माँस तीसरे दिन अग्नी से भस्म कर दिया जाएगा।

१८ और यदि उसकी शान्ति-आहुति की बलि का कोई भी माँस तीसरे दिन खा लिया जाएगा, तो वह स्वीकृत नहीं होगा, ही वह उसके प्रति गिना जाएगा जो उसे चढ़ाता है: वह एक अतिघ्रणितता होगी, और वह आत्मा जो उस में से खाएगा अपनी अधर्मता ढोएगा।

१९ और वह माँस जो कोई भी अस्वच्छ वस्तु छूता है नहीं कहया जाएगा; वह अग्नी से भस्म कर दिया जाएगा: और उस माँस हेतु, वह सभी जो स्वच्छ हैं उस में से भोग लेंगे।

२० परन्तु वह आत्मा जो उन शान्ति-चढ़ावों के बलिदान के माँस में से खाती है, जो प्रभु से सम्बंधित हैं, अपनी अस्वच्छता अपने पर लिए हुए, यहाँ तक कि वही आत्मा ही उसके लोगों से काट दी जाएगी। 

२१ इसके अतिरिक्त वह आत्मा जो कोई भी अस्वच्छ वस्तु छू कर, मान लो किसी व्यक्ति की अस्वच्छता, अथ्वा कोई अस्वच्छ जानवर, अथ्वा कोई घृणात्मक अस्वच्छ वस्तु, और उन शान्ति-चढ़ावों के बलिदान के माँस में से खाती है, जो प्रभु से सम्बंधित हैं, यहाँ तक कि वही आत्मा ही उसके लोगों से काट दी जाएगी। 

२२ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२३ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, तुम किसी भी प्रकार की चर्बी नहीं खाओगे, बैल की, या भेड़ की, या बकरी की।

२४ और उस जानवर की चर्बी जो स्वयं से ही मर जाता है, और उसकी चर्बी जो जानवरों द्वारा फाड़ दिया गया है, किसी अन्य प्रयोग हेतु प्रयोग में लाया जा सकता है: परन्तु तुम उस में से किसी भी प्रकार से खाओगे नहीं।

२५ क्योंकि जो कोई भी जानवर की चर्बी खाता है, जिस से कि लोग प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनाई हुई आहुति अर्पित करते हैं, यहाँ तक कि वही आत्मा जो उसे खाती है उसके लोगों से काट दी जाएगी।

२६ इसके अतिरिक्त तुम अपने किन्ही भी बसेरों में, किसी भी प्रकार का रक्त नहीं खाओगे, भले ही वह पक्षियों का हो या जानवर का।

२७ वह जो कोई भी आत्मा हो जो किसी भी प्रकार के रक्त को खाए, यहाँ तक कि वही आत्मा ही उसके लोगों से काट दी जाएगी। 

२८ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२९ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, वह जो अपने शान्ति-चढ़ावों का बलिदान प्रभु के प्रति चढ़ाता है प्रभु के पास अपने शान्ति-चढ़ावों के बलिदान में से अपनी आहुति ले आएगा।

३० उसके स्वयं के ही हाथ अग्नी से बने प्रभु के चढ़ावों को लाएगा, वह चर्बी छाती के साथ, उसे वह ले आएगा, ताकि वह छाती लहरा दी जा सके एक लहराए-चढ़ावे हेतु प्रभु के समक्ष। 

३१ और वह पुरोहित उस चर्बी को बलिवेदी पर जला देगा: परन्तु वह छाती हारुन और उसके बेटों की होगी।

३२ और वह दायाँ कन्धा तुम पुरोहित को एक उठाए-चढ़ावे हेतु दे दोगे तुम्हारे शान्ति-चढ़ावों के बलिदानों में से।

३३ हारुन के बेटों में से जो शान्ति-चढ़ावों के रक्त को चढ़ाता है, और उस चर्बी को, अपने भाग के लिए उस दाएँ कन्धे को रख लेगा।

३४ क्योंकि वह लहराई-छाती और वह उठाया-कन्धा मैंने इस्राएल की सन्तानों में से ले लिया है उनके शान्ति-चढ़ावों के बलिदानों पर से, और उन्हें हारुन पुरोहित और उसके बेटों को प्रदान कर दिया है एक अनन्तता के अध्यादेश द्वारा इस्राएल की सन्तानों के बीच में से।

३५ यही हारुन के अभिषेक का, और उसके बेटों के अभिषेक का भाग है, अग्नी से बनाए हुए प्रभु के चढ़ावों में से, उस दिवस पर जब उसने उन्हें प्रभु के प्रति सेवा करने हेतु पुरोहित-पद पर प्रस्तुत किया था; 

३६ जिसका प्रभु ने उन्हें प्रदान कर देने का आदेश दिया था इस्राएल की सन्तानों में से, उस दिन जब उसने उनका अभिषेक किया था, एक अन्तहीन अध्यादेश द्वारा उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक।

३७ यही जले-चढ़ावे का, भोज-चढ़ावे का, और पाप-चढ़ावे का, और दोष-चढ़ावे का, और उन स्थापनाओं का, और शान्ति -चढ़ावों के बलिदान का नियम है;

३८ जिसका प्रभु ने मूसा को सिनय पर्वत में आदेश दिया था, उस दिन जब उन्होंने इस्राएल की सन्तानों को प्रभु के प्रति उनकी आहुतियों को चढ़ाने का आदेश दिया था, सीनय के जँगली-क्षेत्र में।




आठवाँ अध्याय।



और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

ले लो हारुन और उसके बेटों को उसके साथ, और उन वस्त्रों को, और अभिषेक के तेल को, और एक सांड को पाप-चढ़ावे हेतु, और दो मेढ़ों को, और बेख़मीरी रोटी के एक टोकरे को;

और समस्त सभा को एक साथ सभा के तम्बू के द्वार पर एकत्रित कर लो। 

और मूसा ने वैसा ही किया जैसा प्रभु ने उसे आदेश दिया; और वह मण्डली सभा के तम्बू के द्वार पर एक साथ एकत्रित हो गई थी।

और मूसा ने उस सभा से कहा, यही है वह बात जो प्रभु ने कर देने की आज्ञा दी है।

और मूसा हारुन और उसके बेटों को ले आया, और उन्हें पानी से धो दिया।

और उसने उस पर अंगरखा पहना दिया, और उसे उस कमर-पेटी से कस दिया, और उसे उस लबादे से आवृत कर दिया, और उस पर वह एफद पहना दिया, और उसे उस एफद के निपुण कमरबँध से कस दिया, और उसे उसी से उस पर बाँध दिया।

और उसने वह छाती-वस्त्र उस पर पहना दिया: उसने छाती-वस्त्र में ऊरीम और थुमीम भी डाल दिए। 

और उसने वह पगड़ी उसके सर पर लगा दी; और उस पगड़ी पर, उसी के सामने के भाग पर ही, उसने वह सुनहरी तख़्ती लगा दी, वह पवित्र मुकुट; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

१० और मूसा ने वह अभिषेक-तेल लिया, और उस तम्बू का और उस सभी का जो उस में था, अभिषेक कर दिया, और उन्हें पुनीत ठहरा दिया।

११ और उसने उस में से बलिवेदी पर सात बार छिड़काव कर दिया, और उस बलिवेदी का और उसके समस्त पात्रों का अभिषेक कर दिया, दोनो उस उस कुण्ड और उसके पाँव का, उन्हें पुनीत ठहरा देने हेतु।

१२ और उसने उस अभिषेक-तेल से हारुन के सर पर उँडेल दिया, और उसका अभिषेक कर दिया, उसे पुनीत ठहरा देने हेतु।

१३ और मूसा हारुन के बेटों को ले आया, और उन पर अंगरखे पहना दिए, और उन्हें कमर-पेटियों से कस दिया, और उन पर टोपे लगा दिए; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

१४ और वह पाप-चढ़ावे हेतु उस सांड को ले आया: और हारुन और उसके बेटों ने उस पाप-चढ़ावे हेतु सांड के सर पर अपने हाथ रख दिए।

१५ और उसने उसे मार डाला; और मूसा ने वह रक्त लिया, और अपनी उँगली से उसे उस बलिवेदी के सींघों पर चारों ओर लगा दिया, और उस बलिवेदी को शुद्ध कर दिया, और उस रक्त को उस बलिवेदी के तले पर उँडेल दिया, और उसे पुनीत ठहरा दिया, उस पर सामंजस्यत्व बनाने हेतु। 

१६ और उसने वह सारी चर्बी ले ली जो भीतरी अंगों पर थी, और जिगर के ऊपर वह चरबीली-झिल्ली, और वह दोनो गुर्दे, और उनकी चर्बी, और मूसा ने उसे बलिवेदी पर जला दिया।

१७ परन्तु उस सांड को, और उसकी चमड़ी को, उसके माँस को, और उसके गोबर को, उसने अग्नी से शिविर के बाहर भस्म कर दिया; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

१८ और वह जले-चढ़ावे हेतु उस मेढ़े को ले आया: और हारुन और उसके बेटों ने उस मेढ़े के सर पर अपने हाथ रख दिए।

१९ और उसने उसे मार डाला; और मूसा ने उस रक्त को बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क दिया।

२० और उसने उस मेढ़े को टुकड़ों में काट दिया; और मूसा ने उस सर को, और उन टुकड़ों को, और चर्बी को जला दिया।

२१ और उसने उन भीतरी अंगों को और टांगों को पाने में धो दिया; और मूसा ने उस सारे मेढ़े को बलिवेदी पर जला दिया: वह एक मधु-स्वादिष्टता हेतु एक जला-चढ़ावा था, और एक अग्नी से बनाया गया चढ़ावा प्रभु के प्रति; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

२२ और वह उस दूसरे मेढ़े को ले आया, स्थापना के मेढ़े को: और हारुन और उसके बेटों ने अपने हाथ उस मेढ़े के सर पर रख दिए।

२३ और उसने उसे मार दिया; और मूसा ने उसके रक्त में से लिया, और उसे हारुन के दाहिने कान की नोक पर, और उसके दाहिने हाथ के अँगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर लगा दिया।

२४ और वह हारुन के बेटों को लाया, और मूसा ने उस रक्त में से उनके दाहिने कान की नोक पर, और उनके दाहिने हाथों के अँगूठों पर, और उनके दाहिने पैरों के पादांगुष्ठों पर लगा दिया, और मूसा ने उस रक्त को उस बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क दिया।

२५ और उसने वह चर्बी ली, और वह चर्बीली पूँछ, और वह समस्त चर्बी जो अन्दरूनी अंगों पर थी, और जिगर के ऊपर वह चर्बीली झिल्ली, और वह दोनो गुर्दे, और उनकी चर्बी, और दायाँ कन्धा:

२६ और उस बेख़मीरी रोटी के टोकरे में से, जो प्रभु के समक्ष था, उसने एक बेख़मीरी छेद किया पराँठा लिया, और एक छेद किया पराँठा तेल की रोटी का, और एक पताशा: और उसने उन्हें चर्बी पर रख दिया, और उस दाएँ कन्धे पर:

२७ और उसने वह सब हारुन के हाथों पर, और उसके बेटों के हाथों पर रख दिया, और उन्हें प्रभु के सम्मुख एक लहराए-चढ़ावे हेतु लहरा दिया। 

२८ और मूसा ने उन्हें उनके हाथों पर से लेकर, और उन्हें बलिवेदी पर उस जले-चढ़ावे पर जला दिया: यह एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु स्थापना-आहुतियाँ थीं: यह प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी आहुति है। 

२९ और मूसा ने वह छाती ली, और उसे प्रभु के समक्ष एक लहराए-चढ़ावे हेतु लहरा दिया: क्योंकि यह स्थापना के मेढ़े में से मूसा का भाग था; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

३० और मूसा ने अभिषेक-तेल में से लिया, और उस रक्त में से जो बलिवेदी पर था, और उसे हारुन पर, और उसके वस्त्रों पर, और उसके बेटों पर, और उसके बेटों के वस्त्रों पर उसके साथ, छिड़क दिया; और हारुन को, और उसके वस्त्रों को, और उसके बेटों को, और उसके बेटों के वस्त्रों को उसके साथ, पुनीत ठहरा दिया।

३१ और मूसा ने हारुन और उसके बेटों से कहा, सभा के तम्बू के द्वार पर उस माँस को उबाल लो: और वहीं उसे उस रोटी के साथ खा लो जो स्थापना-आहुतियों के टोकरे में है, जैसा मैंने आदेश दिया, कहते हुए, हारुन और उसके बेटे उसे खाएँगे।

३२ और वह जो उस माँस और उस रोटी में से बचा रह गया है तुम अग्नी से भस्म कर दोगे।

३३ और तुम सात दिनो तक सभा के तम्बू के द्वार में से बाहर नहीं जाओगे, जब तक कि तुम्हारी स्थापना के दिवस समाप्त नहीं हो जाते: क्योंकि सात दिनो तक वह तुम्हारी स्थापना करेंगे।

३४ जिस प्रकार उन्होंने इस दिन कर दिया है, इसी प्रकार ही प्रभु ने करने हेतु आदेश दिया है, तुम्हारे लिए एक परिहार कर देने हेतु। 

३५ इसलिए तुम सभा के तम्बू के द्वार पर सात दिन, रात दिन वास करोगे, और प्रभु के आदेश का पालन करोगे, ताकि तुम मरो : क्योंकि इसी ही प्रकार मैं आदेशित हूँ।

३६ सो हारुन और उसके बेटों ने वह सभी कार्य कर दिए जिन्हें प्रभु ने मूसा के हाथ आदेशित कर दिया था। 



नौवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, कि आठवें दिन, मूसा ने हारुन, और उसके बेटों को, और इस्राएल के वृद्ध-गणों को बुलाया;

और उसने हारुन से कहा, तुम एक युवा बछड़ा एक पाप-चढ़ावे हेतु ले लो, और एक जले-चढ़ावे हेतु एक मेढ़ा, निष्कलंक, और उन्हें प्रभु के समक्ष चढ़ा दो।

और इस्राएल की सन्तानों से तुम बोलोगे, कहते हुए, एक पाप-चढ़ावे हेतु बकरों में से एक हलवान ले लो; और एक बछड़ा और एक मेमना, दोनो एक वर्ष के ही, निष्कलंक, एक जले-चढ़ावे हेतु;

एक साँड़ और एक मेढ़ा भी शान्ति-चढ़ावों हेतु, प्रभु के सम्मुख बलि चढ़ाने हेतु; और एक तेल से मिश्रित भोज-चढ़ावा: क्योंकि आज ही प्रभु तुम्हें प्रकट होंगे। 

और वह जो मूसा ने आदेश दिया था वह सभा के तम्बू के समक्ष ले आए: और समस्त सभा निकट गई और प्रभु के सम्मुख खड़ी थी।

और मूसा ने कहा, यही है वह बात जो प्रभु ने आदेशित की, कि तुम करो: और प्रभु की महिमा तुम्हें प्रकट हो जाएगी।

और मूसा ने हारुन से कहा, बलिवेदी तक चले जाए, और अपने पाप-चढ़ावे को चढ़ा दो, और अपने जले-चढ़ावे को, और अपने स्वयं के लिए, और लोगों के लिए एक परिहार बना दो: और लोगों के चढ़ावे को चढ़ा दो, और उनके लिए एक परिहार बना दो; जैसा कि प्रभु ने आदेश दिया। 

हारुन इसलिए बलिवेदी तक गया, और उसने पाप-चढ़ावे के बछड़े को मार दिया, जो उसके स्वयं के लिए था।

और हारुन के बेटे वह रक्त उसके पास ले आए: और उसने अपनी उँगली को उस रक्त में डुबोया, और उसे बलिवेदी के सींघों पर लगा दिया, और उस रक्त को बलिवेदी के तले उँडेल दिया:

१० परन्तु वह चर्बी, और वह गुर्दे, और पाप-चढ़ावे के जिगर के ऊपर वह चर्बीली झिल्ली, उसने बलिवेदी पर जला दी; जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दिया।

११ और उस माँस और उस चमड़ी को उसने शिविर के बाहर अग्नी के साथ भस्म कर दिया।

१२ और उसने उस जले-चढ़ावे को जला दिया; और हारुन के बेटों ने उसे वह रक्त प्रस्तुत किया, जिसे उसने बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क दिया।

१३ और उन्होंने वह जला-चढ़ावा उसे प्रस्तुत किया, उसके टुकड़ों के साथ, और वह सर: और उसने उन्हें बलिवेदी पर जला दिया।

१४ और उसने उन भीतरी अंगों को और टाँगों को धोया, और उन्हें उस बलिवेदी पर उस जले-चढ़ावे पर जला दिया।

१५ और वह जनता के चढ़ावे को ले आया, और उसने वह बकरा लिया जो जनता के लिए पाप-चढ़ावा था, और उसे मार दिया, और उसे पाप के लिए अर्पित कर दिया, पहले समान।

१६ और वह उस जले-चढ़ावे को ले आया, और उसे रीतिनुसार चढ़ा दिया।

१७ और वह भोज-चढ़ावा लाया, और उस से एक मुट्ठी भर लिया, और उसे बलिवेदी पर जला दिया, प्रातः के जले-चढ़ावे के अतिरिक्त।

१८ उसने शान्ति-चढ़ावों की बलि के साँड़ और मेढ़े को भी मार दिया, जो लोगों के लिए था: और हारुन के बेटों ने उसे वह रक्त प्रस्तुत किया, जिसे उसने बलिवेदी पर चारों ओर छिड़क दिया,

१९ और उस साँड़ और उस मेढ़े की चर्बी, वह चर्बीली पूँछ, और वह जो अन्दरूनी अंगों को ढकती है, और वह गुर्दे, और जिगर के ऊपर वह चर्बीली झिल्ली:

२० और उन्होंने उस चर्बी को छातियों पर लगा दिया, और उसने उस चर्बी को बलिवेदी पर जला दिया:

२१ और उन छातियों को और उस दाएँ कन्धे को हारुन ने एक लहराए-चढ़ावे हेतु लहरा दिया प्रभु के समक्ष; जैसा मूसा ने आदेश दिया।  

२२ और हारुन ने अपने हाथ लोगों की ओर उठाए, और उन्हें आशीष दिया, और वह उस पाप-चढ़ावे, और उस जले-चढ़ावे, और शान्ति-चढ़ावों को चढ़ा कर नीचे गया।

२३ और मूसा और हारुन सभा के तम्बू में भीतर चले गए, और बाहर गए, और जनता को आशीष दिया: और प्रभु की महिमा उन सभी लोगों को प्रकट हुई। 

२४ और प्रभु के सामने से एक अग्नी बाहर निकली, और बलिवेदी पर उस जले-चढ़ावे का और उस चर्बी का भक्षण कर दिया: जिसे जब सभी लोगों ने देखा, वह जय-जयकार कर उठे, और अपने चेहरों पर गिर पड़े। 



दसवाँ अध्याय।


और हारुन के बेटों, नादब और अबीहु ने, अपना-अपना अग्नी-पात्र लिया, और उस में अग्नी डाली, और उस पर सुगन्धित-धूप रखी, और प्रभु के समक्ष विचित्र सी अग्नी अर्पित कर दी, जिसका उन्होंने आदेश नहीं दिया था।

और प्रभु से अग्नी बाहर निकल चली, और उनका भक्षण कर डाला, और वह प्रभु के सम्मुख मर गए। 

तब मूसा ने हारुन से कहा, यह है वह जो प्रभु ने बोला था, कहते हुए, मैं उन में पुनीत ठहरा दिया जाऊँगा जो मेरे निकट आते हैं, और समस्त लोगों के समक्ष मुझे गौरवान्वित किया जाएगा। और हारुन चुप रहा। 

और मूसा ने मिशाएल और एलज़ेफन, हारुन के चाचा उज़्ज़ीएल के बेटों को बुलाया, और उनसे कहा, निकट जाओ, अपने भाईयों को पुण्य-स्थान के सामने से शिविर के बाहर उठा ले जाओ।

तो वह निकट गए, और वह उन्हें उनके अंगरखों में उठाकर शिविर के बाहर ले गए; जैसा मूसा ने कहा था। 

और मूसा ने हारुन से, और उसके बेटों एलाज़र से और इथामर से कहा, अपने सरों को अनढका मत करो, ही अपने कपड़ों को फाड़ डालो; कहिं तुम मर जाओ, और कहिं समस्त जनता पर आक्रोश पड़े: बल्कि अपने भाई-जनो को, इस्राएल के सम्पूर्ण घराने को इस दहन का विलाप मना लेने दो जिसे प्रभु ने सुलगाया है।

और तुम सभा के तम्बू के द्वार से बाहर नहीं जाओगे, कहिं तुम मर जाओ: क्योंकि प्रभु का अभिषेक-तेल तुम पर लगा हुआ है। और उन्होंने मूसा के शब्दानुसार कर दिया।

और प्रभु हारुन से बोले, कहते हुए, 

अंगूर-रस ही मदिरा पीना, तुम, ही तुम्हारे बेटे तुम्हारे साथ, जब तुम सभा के तम्बू में जाते हो, कहिं तुम मर जाओ: यह एक अध्यादेश अनन्तता तक होगा तुम्हारी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक:

१० ताकि तुम पवित्र और अपवित्र के बीच भेद कर सको, और अस्वच्छ और स्वच्छ के बीच;

११ और कि तुम इस्राएल की सन्तानों को वह सभी अध्यादेश सिखा सको जो प्रभु ने उनसे मूसा के हाथ बोल दिए हैं। 

१२ और मूसा ने हारुन से, और उसके बचे हुए बेटों एलाज़र से और इथामर से कहा, अग्नी से बनी उन प्रभु की आहुतियों में से बची वह भोज-आहुति ले लो, और उसे बलिवेदी के साथ बिना खमीर के खा लो: क्योंकि यह अति पवित्रतम है: 

१३ और तुम उसे पवित्र-स्थान में खाओगे, क्योंकि यह तुम्हारा देय भाग है, और तुम्हारे बेटों का देय, प्रभु की अग्नी से बनी आहुतियों में से: क्योंकि ऐसा ही मुझे आदेश दिया गया है। 

१४ और वह लहराई छाती और उठाया-कन्धा तुम एक स्वच्छ स्थान में खाओगे; तुम, और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारी बेटियाँ तुम्हारे साथ: क्योंकि यह तुम्हारे देय हैं, और तुम्हारे बेटों के देय, जो इस्राएल की सन्तानों के शान्ति-चढ़ावों की बलियों में से दे दी गईं हैं।

१५ वह उठाया कन्धा और लहराई छाती वह उन अग्नी से बनी चर्बी की आहुतियों के साथ लाएँगे, उसे प्रभु के समक्ष एक लहराए-चढ़ावे हेतु लहरा देने के लिए; और वह तुम्हारा होगा, और तुम्हारे साथ तुम्हारे बेटों का, एक अन्तहीन अध्यादेश द्वारा; जैसा कि प्रभु ने आदेश दे दिया है। 

१६ और मूसा से कर्मठता से उस पाप-चढ़ावे के बकरे को ढूँढा, और, देखो तो, वह जल गया था: और वह हारुन के जीवित बचे हुए बेटों, एलाज़र और इथामर से क्रोधित था, कहता हुआ, 

१७ किस कारण वश तुमने पवित्र-स्थान में उस पाप-चढ़ावे को नहीं खाया, यह देखते हुए कि वह अति-पवित्रतम है, और ईश्वर ने उसे तुम्हें दे दिया है सभा की अधर्मता को ढोने हेतु, उनके लिए प्रभु के समक्ष परिहार बनाने के लिए? 

१८ देखो तो, उसका रक्त पवित्र-स्थान में भीतर नहीं लाया गया था: तुम्हें वास्तव में ही उसे पवित्र-स्थान में खा लेना चाहिए था, जैसा मैंने आदेश दिया था।

१९ और हारुन ने मूसा से कहा, देखो तो, इस दिन उन्होंने अपना पाप-चढ़ावा और अपना जला-चढ़ावा प्रभु के समक्ष चढ़ा डाला है; और ऐसी बातें मुझ पर पड़ी हैं: और यदि मैंने आज वह पाप-चढ़ावा खा लिया होता, तो क्या वह प्रभु के दृष्टि में स्वीकार कर लिया गया होता?

२० और जब मूसा ने यह सुना, वह सान्त्वनित था।



ग्यारहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, उनसे कहते हुए,

इस्राएल की संतानों से बोलो, कहते हुए, यह हैं वह जानवर जो पृथ्वी पर सभी जानवरों के बीच हैं जिन्हें तुम खाओगे।

जो कोई भी जानवरों के बीच खुर को विभाजित करता है, और चीरे हुए पैर लिए है, और जो जुगाली करता है, उसे तुम खाओगे।

तथापि इन्हें तुम उन में से नहीं खाओगे जो जुगाली करते हैं, या उन में से जो खुर को विभाजित करते हैं: जैसे कि ऊँट, क्योंकि वह जुगाली करता है, परन्तु खुर विभाजित नहीं करता है; यह तुमारे प्रति अस्वच्छ है। 

और चट्टानी-बिज्जू, क्योंकि वह जुगाली करता है, परन्तु खुर विभाजित नहीं करता है; वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ है।

और ख़रगोश, क्योंकि वह जुगाली करता है, परन्तु खुर विभाजित नहीं करता है; वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ है।

और वह सूअर, यद्यपि वह खुर विभाजित करता है, और चीरे हुए पैर लिए है, तद्यपि वह जुगाली नहीं करता है; वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ है।

उनके माँस में से तुम नहीं खाओगे, और उनके शव को तुम नहीं छुओगे; वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं।

वह सभी जो पानियों में हैं उन में से इन्हें तुम खाओगे: जिस किसी के पास भी पानियों में, समुद्रों में, और नदियों में, मछली-पँख और शल्क हों, उन्हें तुम खाओगे।

१० और वह सभी जिनके पास मछली-पँख और शल्क नहीं हैं समुद्रों में, और नदियों में, उन सभी में से जो पानियों में चलते-फिरते हैं, और उस किसी भी जीवित प्राणी से जो पानियों में है, वह तुम्हारे प्रति अति-घ्रणितता होंगे:

११ यहाँ तक कि वह तुम्हारे प्रति अति-घ्रणितता होंगे; तुम उनके माँस में से नहीं खाओगे, बल्कि तुम उनके शवों से अति-घ्रणितता रखोगे।

१२ जिस किसी के पास भी पानियों में मछली-पँख हों ही शल्क, वह तुम्हारे प्रति अति-घ्रणितता होगा।

१३ और पक्षियों के बीच यह हैं वह जिनके प्रति तुम अति-घ्रणितता रखोगे; यह नहीं खाए जाएँगे, यह एक अति-घ्रणितता हैं: गरुड़, और बाज़, और कुरर,

१४ और गिद्ध, और चील अपने प्रकार का;

१५ प्रत्येक बड़ा-कौव्वा अपने प्रकार का;

१६ और उल्लू, और रात-शिकरा, और जल-कुक्कुट, और शिकरा अपने प्रकार का,

१७ और छोटा-उल्लू, और बुज्जा, और बड़ा-उल्लू,

१८ और हंस, और जलकाग, और गरुड़-गिद्ध,

१९ सारस, बगुला अपने प्रकार का, और टिटहरी, और चमगादड़।

२० सभी उड़ने वाले जो रेंगते हैं चार पैरों पर, तुम्हारे प्रति अति-घ्रणितता होंगे।

२१ तथापि इन्हें तुम खा सकते हो उन में से जो प्रत्येक उड़ता-रेंगता जन्तु जो चार-पैरों पर चलता है, जिनके पास उनके पैरों के ऊपर टांगें हैं, धरती पर उनसे छलाँगें लगाने हेतु; 

२२ उन में से इन्हें ही तुम खा सकते हो; टिड्डी अपने प्रकार का, और गंजी-टिड्डी अपने प्रकार की, और झींगुर अपने प्रकार का, और टिड्डा अपने प्रकार का। 

२३ परन्तु अन्य सभी उड़ने वाले रेंगते जन्तु, जिनके पास चार पैर हैं, तुम्हारे प्रति एक अति-घ्रणितता होंगे।

२४ और इनके हेतु तुम अस्वच्छ होगे: जो कोई भी इनके शव को छूता है संध्या तक अस्वच्छ होगा।

२५ और जो कोई भी इनके शव का कोई भी भाग ढोता है अपने कपड़ों को धोएगा, और संध्या तक अस्वच्छ होगा।

२६ उस प्रत्येक जानवर के शव जो खुर विभाजित करता है, और जो चीरे हुए पैर लिए नहीं है, ही जुगाली करता है, तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं: वह प्रत्येक जो उन्हें छूता है अस्वच्छ होगा।

२७ और जो कोई भी अपने पंजों पर चलता है, प्रत्येक प्रकार के जानवरों में से, वह अस्वच्छ हैं हैं तुम्हारे प्रति: को कोई भी उनका शव छूता है सांध्य तक अस्वच्छ होगा।

२८ और वह जो इनके शव ढोता है अपने वस्त्रों को धोएगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ होगा: वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं।

२९ यह भी उन रेंगने वालों के बीच तुम्हारे प्रति अस्वच्छ होंगे जो पृथ्वी पर रेंगते हैं; नेवला, चूहा, और कछुआ अपने प्रकार का,

३० और छिपकली, और मगर, और सांडा, और घोंघा, और गिरगिट। 

३१ यह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं उन सभी के बीच जो रेंगते हैं: जो कोई भी इन्हें छूता है, इनके मर जाने पर, संध्या तक अस्वच्छ होगा।

३२ और जिस किसी भी पर इन में से कोई भी, जब यह मर जाते हैं, गिरता है, वह अस्वच्छ होगा; भले ही वह कोई लकड़ी का बर्तन हो, या वस्त्र, या चमड़ी, या टाट-वस्त्र, जिस में कोई भी कार्य किया जाता हो, उसे अवश्य ही पानी में डाला जाना चाहिए, और वह संध्या तक अस्वच्छ होगा; इस प्रकार वह स्वच्छ के दिया जाएगा।

३३ और प्रत्येक मिट्टी से बना पात्र, जिस में इन में से कोई भी गिर जाता है, जो कुछ भी उस में होगा अस्वच्छ बन जाएगा; और तुम उसे तोड़ दोगे।

३४ उस सभी भोजन में से जो खाया जा सकता है, उस पर जिस पर ऐसा पानी जाता है अस्वच्छ बन जाएगा: और समस्त पेय जो पीया जा सकता है उस प्रत्येक ऐसे पात्र में अस्वच्छ होगा।

३५ और वह प्रत्येक वस्तु जिस पर उनके शव का कोई भी भाग गिरता है अस्वच्छ होगा; भले ही वह तन्दूर हो, या पात्रों हेतु चूल्हे, उन्हें तोड़ गिरा दिया जाएगा: क्योंकि वह अस्वच्छ हैं, और तुम्हारे प्रति अस्वच्छ होंगे।

३६ तथापि कोई झरना या कूआँ, जहाँ जल की बहुतायत है, स्वच्छ रहेगा: परन्तु वह जो उनके शवों को छूता है अस्वच्छ होगा।

३७ और यदि उनके शव का कोई भी भाग बुआई के बीज पर गिरता है जिसे बोया जाना है, वह स्वच्छ होगा।

३८ परन्तु यदि कोई भी पानी बीज पर डाला जाए, और उनके शव का कोई भी भाग उस पर गिरता है, वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ होगा।

३९ और यदि कोई भी जानवर, जिस में से तुम खा सकते हो, मर जाए; वह जो उसके शव को छुएगा संध्या तक अस्वच्छ होगा।

४० और वह जो उसके शव में से खाता है अपने कपड़े धोएगा, और संध्या तक अस्वच्छ होगा: वह भी जो उसके शव को ढोता है अपने वस्त्रों को धोएगा, और संध्या तक अस्वच्छ होगा।

४१ और प्रत्येक रेंगता हुआ जन्तु जो धरती पर रेंगता है एक अति-घ्रणितता होगा; वह नहीं खाया जाएगा। 

४२ जो कुछ भी अपने पेट के बल चलता है, और जो कुछ भी सभी चारों पैरों पर चलता है, या जिस किसी के पास भी कई पैर हैं उन सभी रेंगते जन्तुओं के बीच जो धरती पर रेंगते हैं, तुम उन्हें नहीं खाओगे; क्योंकि वह एक अति-घ्रणितता हैं।

४३ तुम स्वयं को किसी भी रेंगते जन्तु से अति-घ्रणात्मक नहीं बनाओगे जो रेंगता है, ही तुम स्वयं को उनके साथ अस्वछ बनाओगे, कि तुम इस से दूषित बन जाओ।

४४ क्योंकि मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर: इसलिए तुम स्वयं को पुनीत करोगे, और तुम पवित्र बनोगे; क्योंकि मैं पवित्र हूँ: ही तुम स्वयं को किसी भी प्रकार के रेंगते जन्तु से दूषित करोगे जो धरती पर रेंगता है।

४५ क्योंकि मैं हूँ वह प्रभु जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से ऊपर बाहर लाता हूँ, तुम्हारा ईश्वर बनने हेतु: इसलिए तुम पवित्र होगे, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।

४६ यही है नियम जानवरों का, और उड़ने वालों का, और प्रत्येक जीवित जन्तु का जो पानियों में चलता है, और प्रत्येक जन्तु का जो धरती पर रेंगता है:

४७ एक अन्तर बनाने हेतु अस्वच्छ और स्वच्छ के बीच, और उस जानवर के बीच जो खाया जा सकता है और जो जानवर नहीं खाया जा सकता है।




बारहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, उनसे कहते हुए,

इस्राएल की संतानों से बोलो, कहते हुए, यदि कोई स्त्री बीज से गर्भवति है, और उसने एक नर बच्चे को जन्म दे दिया है: तब वह सात दिन अस्वच्छ होगी; उसके दौर्बल्य के पृथक्करण के दिनोनुसार वह अस्वच्छ होगी। 

और आठवें दिन में उसके आगे की चमड़ी के माँस का ख़तना कर दिया जाएगा।

और तब वह अपने शुद्धिकरण के रक्त में तैंतीस दिन रहेगी; वह किसी भी पवित्र वस्तु को नहीं छुएगी, ही वह पुण्य-स्थान में आएगी, जब तक उसके शुद्धिकरण के दिन सम्पूर्ण नहीं हो जाते हैं।

और यदि वह एक नारी बच्चे को जनती है, तब वह दो सप्ताह अस्वछ रहेगी, उसके पृथक्करण समान: और वह अपने शुद्धिकरण के रक्त में छियासठ दिन रहेगी।

और जब उसके शुद्धिकरण के दिन सम्पूर्ण हो जाते हैं, एक बेटे के लिए, या एक बेटी के लिए, वह एक पहले वर्ष का मेमना लाएगी एक जले-चढ़ावे हेतु, और एक युवा कबूतर, या एक पिंडुक, एक पाप-चढ़ावे हेतु, सभा के तम्बू के द्वार पर, पुरोहित के पास:

जो उसे प्रभु के सम्मुख अर्पित करेगा, और उसके लिए एक परिहार बनाएगा; और वह अपने रक्त-स्त्राव से स्वच्छ बना दी जाएगी। यही है वह नियम उसके लिए है जिसने एक नर या नारी को जन्म दिया है।

और यदि वह एक मेमना लाने में असमर्थ हो, तब वह दो पिंडुक ले आएगी, या दो युवा कबूतर; एक जले-चढ़ावे हेतु, और वह दूसरा एक पाप-चढ़ावे हेतु: और पुरोहित उसके लिए एक परिहार बनाएगा, और वह स्वच्छ बन जाएगी।



तेरहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, उनसे कहते हुए,

जब किसी पुरुष के शरीर की त्वचा में कोई उठाव हो,  कोई पपड़ी, या स्पष्ट-दाग हो, और वह उसके शरीर की त्वचा में हो कुष्ठरोग की विपत्ती समान; तब उसे पुरोहित हारुन के पास, या उसके पुरोहित बेटों में से एक के पास लाया जाएगा:

और वह पुरोहित उसके शरीर की त्वचा में उस विपत्ती को देखेगा: और जब उस विपत्ती में बाल श्वेत बन जाता है, और वह विपत्ती शरीर की त्वचा से गहरी दिखाई देती हो, वह कुष्ठरोग की विपत्ती है: और पुरोहित उसे देख कर, उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा।

यदि वह स्पष्ट-दाग उसके शरीर की त्वचा में श्वेत हो, और वह त्वचा से गहरा दिखता हो, और उसका बाल श्वेत बन गया हो; तब वह पुरोहित उसे जिसे वह विपत्ती है, सात दिन तक बँद रखेगा:

और वह पुरोहित उसे सातवें दिन देखेगा: और देखो, यदि वह विपत्ती उसकी दृष्टि में रुकी हुई हो, और वह विपत्ती त्वचा में फैली हो; तब वह पुरोहित उसे सात और दिन तक बँद रखेगा:

और वह पुरोहित उसे पुनः सातवें दिन देखेगा: और देखो, यदि वह विपत्ती थोड़ी काली हो गई हो, और वह विपत्ती त्वचा में फैली हो, वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा: वह केवल एक पपड़ी है: और वह अपने कपड़े धो लेगा, और स्वच्छ बन जाएगा।

परन्तु यदि वह पपड़ी त्वचा में बहुत फैल गई हो, उसके पश्चात कि वह पुरोहित द्वारा स्पनी स्वच्छता हेतु देख लिया गया हाँ, वह पुरोहित द्वारा पुनः देखा जाएगा:

और यदि पुरोहित देखता है कि, देखो, वह पपड़ी त्वचा में फैल रही है, तब वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह एक कुष्ठ-रोग है।

जब कुष्ठ-रोग की विपत्ती किसी पुरुष में हो, तब उसे पुरोहित के पास ले आया जाएगा;

१० और वह पुरोहित उसे देखेगा: और देखो, यदि वह त्वचा में उठाव श्वेत हो, और उसने बाल को श्वेत कर दिया हो, और उस उठाव में त्वचा-हीन माँस हो; 

११ वह उसके शरीर की त्वचा में एक पुराना कुष्ठ-रोग है, और वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा, और उसे बँद नहीं करेगा: क्योंकि वह अस्वच्छ है।

१२ और यदि कोई कुष्ठ-रोग त्वचा में फैलता जाए, और वह कुष्ठ-रोग उसकी समस्त त्वचा को ढक दे जिसे वह विपत्ती है उसके सर से लेकर पैर तक भी, जहाँ कहीं भी वह पुरोहित देखता है;

१३ तब वह पुरोहित विचार करेगा: और देखो, यदि उस कुष्ठ-रोग ने उसकी समस्त त्वचा को ढक दिया हो, वह उसे स्वच्छ घोषित कर देगा जिसे वह विपत्ती है: वह सारा श्वेत बँ गया है: वह स्वच्छ है। 

१४ परन्तु जब उस में त्वचा-हीन माँस प्रकट होता है, वह अस्वच्छ होगा।

१५ और वह पुरोहित उस त्वचा-हीन माँस को देखेगा, और उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: क्योंकि वह त्वचा-हीन माँस अस्वच्छ है: यह एक कुष्ठ-रोग है।

१६ या फिर यदि वह त्वचा-हीन माँस पुनः परिवर्तित हो जाए, और श्वेत में बदल जाए, वह पुरोहित के पास जाएगा;

१७ और वह पुरोहित उसे देखेगा: और देखो, यदि वह विपत्ती श्वेत में परिवर्तित हो गई हो; तब वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा जिसे वह विपत्ती है: वह स्वच्छ है।

१८ उस माँस में भी, उसकी त्वचा में, कोई फोड़ा हो, और वह ठीक हो गया हो,

१९ और उस फोड़े के स्थान में श्वेत उठाव हो, या एक स्पष्ट-दाग, श्वेत, और थोड़ा सा लाल, और वह पुरोहित को दिखला दिया गया हो;

२० और यदि, जब वह पुरोहित उसे देखता है, देखी, वह दिखने में त्वचा से गहरा हो, और उसका बास श्वेत हो; वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह फोड़े में फूटी एक कुष्ठ-रोग की विपत्ती है।

२१ परन्तु यदि पुरोहित उसे देखता है, और देखो, उस में कोई श्वेत बाल हों, और यदि वह त्वचा से गहरी हो, बल्कि थोड़ी सी काली हो; तब वह पुरोहित उसे सात दिन तक बँद रखेगा:

२२ और यदि वह त्वचा में बहुत फैल गई हो, तब वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह कुष्ठ-रोग है।

२३ परन्तु यदि वह स्पष्ट-दाग अपने ही स्थान में रुका रहे, और फैले , वह एक प्रदाहित फोड़ा है; और वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा।

२४ या फिर यदि किसी भी माँस की त्वचा में ग्रीष्म जलन हो, और वह त्वचा-हीन माँस जिस में जलन हो रही है एक श्वेत स्पष्ट-दाग लिए हो, थोड़ा सा लाल सा, या श्वेत;

२५ तब पुरोहित उस को देखेगा: और देखो, यदि बाल उस स्पष्ट-दाग में श्वेत परिवर्तित हो, और वह दिखने में त्वचा से गहरा हो; यह एक कुष्ठ-रोग है जो उस जलन में फूट पड़ा है: इस कारण वश वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह कुष्ठ-रोग की विपत्ती है।

२६ परन्तु यदि पुरोहित उसे देखता है, और देखो, उस में कोई कोई श्वेत बाल हो स्पष्ट-दाग में, और वह त्वचा से गहरा हो, बल्कि थोड़ा सा काला हो; तब वह पुरोहित उसे सात दिन तक बँद रखेगा:

२७ और वह पुरोहित उसे सातवें दिन देखेगा: और यदि वह त्वचा में बहुत फैल चुका हो, तब पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह कुष्ठ-रोग की विपत्ती है।

२८ और यदि वह स्पष्ट-दाग अपने ही स्थान में ठहरा हुआ हो, और त्वचा में फैला हो, बल्कि वह थोड़ा सा काला हो; यह उस जलन में उठाव है, और वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा: क्योंकि यह उस जलन का प्रदाह है।

२९ यदि किसी पुरुष या स्त्री सर पर या दाढ़ी में कोई विपत्ती लिए हो,

३० तब पुरोहित उसको देखेगा: और देखो, यदि वह दिखने में त्वचा से गहरा हो; और उस में वहाँ एक बारीक पीला बाल हो; तब वह पुरोहित उसे अस्वच्छ घोषित कर देगा: यह एक सूखा चर्म-रोग है, एक कुष्ठ-रोग सर पर या दाढ़ी पर।

३१ और यदि पुरोहित उस चर्म-रोग की विपत्ती को देखता है, और देखो, वह दिखने में त्वचा से गहरा हो; और उस में वहाँ कोई काला बाल हो; तब वह पुरोहित उसे जिसे यह चर्म-रोग की विपत्ती है सात दिन बँद कर देगा:

३२ और सातवें दिन वह पुरोहित उस विपत्ती को देखेगा: और देखो, यदि वह चर्म-रोग फैला हो, और उस में वहाँ कोई भी पीला बाल हो, और दिखने में वह चर्म-रोग त्वचा से गहरा हो;

३३ उस पर उस्तरा फिर दिया जाएगा, परन्तु उस चर्म-रोग पर वह उस्तरा नहीं फिराएगा; और वह पुरोहित उसे जिसे यह चर्म-रोग है सात दिन और बँद रखेगा: 

३४ और सातवें दिन में वह पुरोहित उस चर्म-रोग को देखेगा: और देखो, यदि वह चर्म-रोग त्वचा में फैला हो, ही दिखने में वह चर्म-रोग त्वचा से गहरा हो; तब वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा: और वह अपने कपड़े धो लेगा, और स्वच्छ बन जाएगा।

३५ परन्तु यदि वह चर्म-रोग उसके स्वच्छिकरण पश्चात त्वचा में बहुत फैल गया हो;

३६ तब वह पुरोहित उसे देखेगा: और देखो, यदि वह चर्म-रोग त्वचा में फैल गया हो, पुरोहित पीले बाल को नहीं ढूँढेगा; वह अस्वच्छ है।

३७ परन्तु यदि वह चर्म-रोग उसकी दृष्टि में रुका हुआ हो, और उस में काले बाल उग गए हों; वह चर्म-रोग स्वस्थ हो गया है, वह स्वच्छ है: और वह पुरोहित उसे स्वच्छ घोषित कर देगा।

३८ यदि कोई पुरुष भी या कोई स्त्री अपने माँस की त्वचा में स्पष्ट-दाग, श्वेत स्पष्ट-दाग ही लिए हो;

३९ तब वह पुरोहित देखेगा: और देखो, यदि उनके माँस की त्वचा में वह स्पष्ट-दाग हल्के-श्वेत हों; यह एक झाई-दाग है जो त्वचा में उग रहा है; वह स्वच्छ है।

४० और वह पुरुष जिसके बाल उसके सर पर से झड़ चुके हैं, वह गंजा है; तथापि वह स्वच्छ है।

४१ और उसके जिसके बाल उसके सर के उस भाग पर से झड़ गए हैं जो उसके चहरे की ओर है, उसका गंजापन माथे वाला गंजापन है: तथापि वह स्वच्छ है।

४२ और यदि उस गंजे सर में, या गंजे माथे में, एक श्वेत-लाल सा घाव हो; यह एक कुष्ठ-रोग है जो उसके गंजे सर, या उसके गंजे माथे में फूट पड़ा है।

४३ तब वह पुरोहित उसे देखेगा: और देखो, यदि उस घाव का उठाव उसके गंजे सर में, या गंजे माथे में, श्वेत-लाल सा हो, माँस की त्वचा में प्रकट होने वाले कुष्ठ-रोग के समान; 

४४ वह एक कुष्ठ-रोगी पुरुष है, वह अस्वच्छ है: पुरोहित उसे निरा-अस्वछ घोषित कर देगा; उसकी विपत्ती उसके सर में है।

४५ और वह कुष्ठ-रोगी जिस में वह विपत्ती है, उसके कपड़े फाड़ दिए जाएँगे, और उसक सर निरावृत होगा, और वह अपने ऊपरी होंठ पर एक ढकना लगाएगा, और चीखेगा, अस्वच्छ, अस्वच्छ।

४६ उन सभी दिनो में जिन में वह विपत्ती उस में होगी वह दूषित होगा; वह अस्वच्छ है: वह अकेला ही रहेगा; शिविर के बाहर उसका बसेरा होगा।

४७ वह वस्त्र भी जिस में कुष्ठ-रोग की विपत्ती है, भले ही वह ऊनी वस्त्र हो, या कोई छालटी का वस्त्र हो;

४८ भले ही वह ताने-बाने में हो; छालटी का, या ऊन का; भले ही किसी चमड़े में, या चमड़े से बनी किसी भी वस्तु में; 

४९ और यदि उस चमड़े में, या ताने में, या बाने में, या चमड़े की किसी भी वस्तु में, उस वस्त्र में वह विपत्ती हरी सी या लाल सी हो' वह एक कुष्ठ-रोग की विपत्ती है, और पुरोहित को दिखवाई जाएगी:

५० और पुरोहित उस विपत्ती को देखेगा, और उसे सात दिन बँद रखेगा जिसे वह विपत्ती है:

५१ और वह सातवें दिन उस विपत्ती को देखेगा: यदि वह विपत्ती वस्त्र में फैली हो, या ताने में, या बाने में, या किसी चमड़े में, या चमड़े से बनी किसी भी वस्तु में; वह विपत्ती एक कँटीला-कुष्ठ-रोग है; वह अस्वच्छ है।

५२ इसलिए वह उस वस्त्र को, चाहे ताना या बाना, ऊन से बने में या छालटी में, या चमड़े की किसी भी वस्तु में, जिस में वह विपत्ती है, भस्म कर देगा: क्योंकि वह एक कँटीला-कुष्ठ-रोग है; वह अग्नी में भस्म कर दिया जाएगा।

५३ और यदि वह पुरोहित देखेगा, और देखो तो, वह विपत्ती उस वस्त्र में फैली हो, या ताने में, या बाने में, या चमड़े की किसी भी वस्तु में;

५४ तब पुरोहित आदेश देगा कि वह उस वस्तु को धो दें जिस में वह विपत्ती है, और वह उसे सात दिन और बँद रख देगा:

५५ और वह पुरोहित उस विपत्ती को देखेगा, उसके धुल जाने के पश्चात: और देखो तो, यदि उस विपत्ती ने अपना रंग बदला हो, और वह विपत्ती फैली हो; वह अस्वच्छ है; तुम उसे अग्नी में भस्म कर दोगे; वह भीतर की ओर कटाव कर चुकी है, भले ही वह भीतर हो या बाहर।

५६ और यदि वह पुरोहित देखे, और देखो, वह विपत्ती कुछ काली हो गई हो उसके धुल जाने के पश्चात; तब वह उसे उस वस्त्र में से बाहर काट निकालेगा, या चमड़े में से बाहर, या ताने में से बाहर, या बाने में से बाहर:

५७ और यदि वह तथापि वस्त्र में दिखता हो, या ताने में, या बाने में, या चमड़े की किसी भी वस्तु में; यह एक फैलती हुई विपत्ती है: तुम उसे अग्नी के साथ भस्म कर दोगे जिस में वह विपत्ती है।

५८ और वह वस्त्र, या ताना, या बाना, या चमड़े की जो कोई भी वस्तु हो, जिसे तुम धो डालोगे, यदि उन से वह विपत्ती दूर हो जाए, तब वह दूसरी बार धोया जाएगा, और वह स्वच्छ होगा।

५९ यही उस कुष्ठ-रोग की विपत्ती का नियम है जो किसी ऊनी या छालटी के वस्त्र में हो, या ताने, या बाने में, या चमड़ियों की किसी वस्तु में, उसे स्वच्छ घोषित कर देने हेतु, या उसे अस्वच्छ घोषित कर देने हेतु। 




चौदहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

यह नियम होगा उस कुष्ठ-रोगी का उसकी स्वच्छता के दिवस पर: वह पुरोहित के पास ले आया जाएगा:

और वह पुरोहित शिविर के बाहर चला जाएगा; और वह देखेगा, और देखो तो, यदि उस कुष्ठ-रोगी में वह कुष्ठ-रोग की विपत्ती स्वास्थ हो चुकी हो;

तब वह पुरोहित आदेश देगा कि उसके लिए जिसका स्वच्छिकरण होना है, दो जीवित और स्वच्छ पक्षी ले लिए जाएँ, और देवदार-लकड़ी, और सुर्ख, और जूफा:

और पुरोहित आदेश देगा कि पक्षियों में से एक को मिट्टी के एक पात्र में बहते हुए पानी में मार दिया जाए:

  और जीवित पक्षी को, वह लेगा, और उस देवदार-लकड़ी को, और सुर्ख को, और उस जूफे को, और उन्हें और उस जीवित पक्षी को उस पक्षी के रक्त में डुबो देगा जिसे बहते हुए पानी में मार दिया गया था:

और वह उस पर जिसे उस कुष्ठ-रोग से स्वच्छ कर दिया जाना है सात बार छिड़क देगा, और उसे स्वच्छ घोषित कर देगा,  और उस जीवित पक्षी को खुले खेत में खुला छोड़ देगा।

और वह जिसे स्वच्छ कर दिया जाना है अपने कपड़ों को धो देगा, और अपने समस्त बालों पर उस्तरा फिराएगा, और स्वयं को पानी में धो लेगा, ताकि वह स्वच्छ बन सके: और इसके पश्चात वह शिविर में जाएगा, और अपने तम्बू के बाहर सात दिन ठहरेगा।

परन्तु सातवें दिन ऐसा होगा, कि वह अपने सर पर से और दाढ़ी पर से और भौहों पर से अपने सारे बालों पर उस्तरा फेर देगा, यहाँ तक कि अपने सभी बालों पर वह उस्तरा फिरा देगा: और वह अपने कपड़े धो देगा, वह अपना माँस भी धो देगा, और वह स्वच्छ बन जाएगा।

१० और आठवें दिन वह दो निष्कलंक नर मेमने लेगा, और एक वर्ष की एक निष्कलंक मादा-मेमना, और भोज-चढ़ावे हेतु बारीक आटे के तीन-दसवें भाग, तेल के साथ मिश्रित, और तेल का एक लोह्ग।

११ और वह पुरोहित जो उसे स्वच्छ बनाता है, उस आदमी को, जिसे स्वच्छ बना दिया जाना है, और उन वस्तुओं को, सभा के तम्बू के द्वार पर प्रभु के समक्ष प्रस्तुत कर देगा:

१२ और वह पुरोहित उस एक नर मेमने को लेगा, और उसे एक दोष-चढ़ावे हेतु चढ़ा देगा, और उस तेल के लोह्ग को, और उन्हें एक लहराए-चढ़ावे हेतु प्रभु के समक्ष लहरा देगा: 

१३ और वह उस मेमने को उस स्थान में मार देगा जहाँ वह उस पाप-चढ़ावे और उस जले-चढ़ावे को मारेगा, पवित्र-स्थान में: क्योंकि जिस प्रकार वह पाप-चढ़ावा पुरोहित का है, उसी प्रकार दोष-चढ़ावा है: वह अति-पवित्रतम है:

१४ और वह पुरोहित उस दोष-चढ़ावे का कुछ रक्त लेगा, और वह पुरोहित उसे उसके दाहिने कान की नोक पर लगा देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर:

१५ और वह पुरोहित उस तेल के लोह्ग में से कुछ लेकर, उसे अपने स्वयं के बाएँ हाथ की हथेली में उँडेल देगा: 

१६ और वह पुरोहित अपनी दाईं उँगली उस तेल में डुबोएगा जो उसके बाएँ हाथ में है, और उस तेल को अपने उँगली से प्रभु के समक्ष सात बार छिड़क देगा: 

१७ और उस शेष तेल में से जो उसके हाथ में है वह पुरोहित उसके दाहिने कान की नोक पर लगा देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर, उस दोष-चढ़ावे के रक्त के ऊपर:

१८ और उस तेल का बचा हुआ भाग जो उस पुरोहित के हाथ में है वह उसे उसके सर पर उँडेल देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है: और वह पुरोहित उसके लिए प्रभु के समक्ष एक परिहार बना देगा। 

१९ और वह पुरोहित उस पाप-चढ़ावे को चढ़ा देगा, और उसके लिए एक परिहार बनाएगा जिसका उसकी अस्वच्छता से स्वच्छिकरण होना है; और तत्पश्चात वह उस जले-चढ़ावे को मार देगा:

२० और वह पुरोहित उस जले-चढ़ावे को और उस भोज-चढ़ावे को बलिवेदी पर चढ़ा देगा: और वह पुरोहित उसके लिए एक परिहार बना देगा, और वह स्वच्छ बन जाएगा।

२१ और यदि वह दरिद्र हो, और इतना सब कुछ नहीं ला सकता हो; तब वह एक मेमना दोष-चढ़ावे के लिए लेगा लहरा देने हेतु, उसके लिए एक परिहार बना देने के लिए, और बारीक आटे का एक-दसवाँ भाग तेल से मिश्रित एक भोज-चढ़ावे हेतु, और एक तेल का लोह्ग;

२२ और दो पिंडुक, या दो युवा कबूतर, ऐसे, जसे वह ला सकता है; और वह एक पाप-चढ़ावा होगा, और दूसरा एक जला-चढ़ावा।

२३ और वह उन्हें पुरोहित के पास अपने स्वच्छिकरण हेतु आठवें दिन ले आएगा, प्रभु के समक्ष, सभा के तम्बू के द्वार पर। 

२४ और वह पुरोहित उस दोष-चढ़ावे के मेमने को, और उस तेल के लोह्ग को लेगा, और वह पुरोहित उन्हें एक लहराए-चढ़ावे हेतु प्रभु के समक्ष लहरा देगा: 

२५ और वह उस दोष-चढ़ावे के मेमने को मार देगा, और वह पुरोहित उस दोष-चढ़ावे का थोड़ा सा रक्त लेगा, और उसे उसके दाहिने कान की नोक पर लगा देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर:

२६ और वह पुरोहित उस तेल में से अपने स्वयं के बाएँ हाथ की हथेली में उँडेल देगा: 

२७ और वह पुरोहित अपनी दाईं उँगली से उस तेल में से कुछ जो उसके बाएँ हाथ में है, प्रभु के समक्ष सात बार छिड़क देगा:

२८ और वह पुरोहित उस तेल में से जो उसके हाथ में है उसके दाहिने कान की नोक पर लगा देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के पादांगुष्ठ पर, दोष-चढ़ावे के रक्त के स्थान के ऊपर:

२९ और उस पुरोहित के हाथ में जो उस तेल का बचा हुआ भाग है वह उसे उसके सर पर लगा देगा जिसका स्वच्छिकरण होना है: उसके लिए प्रभु के समक्ष एक परिहार बनाने हेतु।

३० और वह उन पिंडुकों में से एक को, या उन युवा कबूतरों में से चढ़ा देगा, जैसा वह ला सके;

३१ यहाँ तक कि वैसा जैसे वह लाने में सक्षम है, एक पाप-चढ़ावे हेतु, और वह दूसरा एक जले-चढ़ावे हेतु, उस भोजचढ़ावे के साथ: और वह पुरोहित उसके लिए जिसका स्वच्छिकरण होना है, प्रभु के समक्ष एक परिहार बना देगा। 

३२ यह उसका नियम है जिस में कुष्ठ-रोग की विपत्ती है, जिसका हाथ वह लाने में असक्षम है जो उसके स्वच्छिकरण से सम्बन्धित है। 

३३ और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, उनसे कहते हुए,

३४ जब तुम कनान की भूमी में जाते हो, जिसे मैं तुम्हें एक अधिकार हेतु देता हूँ, और मैं तुम्हारे अधिकार की भूमी में किसी घर में कुष्ठ-रोग की विपत्ती लगा देता हूँ; 

३५ और वह जो उस घर का मालिक है आएगा और पुरोहित को बताएगा, कहता हुआ, मुझे प्रतीत हो रहा कि मानो घर में कोई विपत्ती है:

३६ तब वह पुरोहित आदेश देगा कि वह उस पुरोहित के उस विपत्ती को देखने हेतु अन्दर जाने से पहले, उस घर को रिक्त कर दें, ताकि वह सभी जो उस घर में है अस्वच्छ बना दिए जाएँ: और तत्पश्चात वह पुरोहित उस घर को देखने अन्दर जाएगा:

३७ और वह उस विपत्ती को देखेगा, और देखो तो, यदि वह विपत्ती हरी-हरी या लाल सी खोखली लकीरें हों उस घर की दीवारों में, जो दिखने में दीवार से गहरी हों;

३८ तब वह पुरोहित उस घर के बाहर उस घर के द्वार तक चला जाएगा, और उस घर को सात दिनो तक बँद कर देगा: 

३९ और वह पुरोहित पुनः सातवें दिन आएगा, और देखेगा: और देखो, यदि वह विपत्ती उस घर की दीवारों में फैल गई हो;

४० तब वह पुरोहित आदेश देगा कि वह उन पत्थरों को परे हटा दें जिन में वह विपत्ती है, और वह उन्हें नगर के बाहर एक अस्वच्छ स्थान में फैंक देंगे:

४१ और वह उस घर को भीतर चारों ओर खुरचवा देगा, और वह उस खुरची हुई धूल को नगर के बाहर एक अस्वच्छ स्थान में बाहर उँडेल देंगे:

४२ और वह अन्य पत्थर लेंगे, और उन्हें उन पत्थरों के स्थान में लगा देंगे; और वह दूसरा गारा लेगा, और उस घर पर पलस्तर लगा देगा।

४३ और यदि वह विपत्ती पुनः जाती है, और उस घर में फूट पड़ती है, उन पत्थरों के उसके परे हटा देने के पश्चात, और उसके उस घर को खुरच देने के पश्चात, और उसके पलस्तर हो जाने के पश्चात;

४४ तब वह पुरोहित आएगा और देखेगा, और देखो, यदि वह विपत्ती उस घर में फैल गई हो, वह उस घर में एक कँटीला-कुष्ठ-रोग है: वह अस्वच्छ है। 

४५ और वह उस घर को तोड़ देगा, उसके पत्थरों को, और उसकी लकड़ी को, और उस घर के सम्पूर्ण गारे को; और वह उन्हें नगर के बाहर एक अस्वच्छ स्थान में उठा ले जाएगा।

४६ इसके अतिरिक्त वह जो उस घर में प्रवेश करता है, उस समस्त समय जब वह बँद रखा हुआ है, संध्या तक अस्वच्छ रहेगा। 

४७ और वह जो घर में लेटता है अपने कपड़ों को धोएगा; और वह जो घर में खाता है अपने कपड़ों को धोएगा।

४८ और यदि वह पुरोहित भीतर आएगा, और उसे देखेगा, और देखो, वह विपत्ती घर में नहीं फैली है, उस घर पर पलस्तर लग जाने के पश्चात: तब पुरोहित उस घर को स्वच्छ घोषित कर देगा, क्योंकि वह विपत्ती ठीक हो चुकी है।

४९ और वह उस घर को स्वच्छ करने हेतु दो पक्षियों को लेगा, और देवदार की लकड़ी, और सुर्ख, और जूफा:

५० और वह उन पक्षियों में से एक को एक मिट्टी के पात्र में बहते हुए पाने में मार देगा:

५१ और वह उस देवदार की लकड़ी को, और जूफे को, और उस सुर्ख को, और उस जीवित पक्षी को लेगा, और उन्हें बहते हुए पाने में उस मार दिए गए पक्षी के रक्त में डुबो देगा, और उस घर को सात बार छिड़क देगा: 

५२ और वह उस घर को उस पक्षी के रक्त से, और उस बहते हुए पानी से, और उस जीवित पक्षी से, और उस देवदार की लकड़ी से, और उस जूफे से, और उस सुर्ख से, स्वच्छ कर देगा: 

५३ परन्तु वह उस जीवित पक्षी को नगर के बाहर खुले खेतों में चले जाने देगा, और उस घर के लिए एक परिहार बना देगा: और वह स्वच्छ बन जाएगा। 

५४ यही नियम है प्रत्येक प्रकार के कुष्ठ-रोग की विपत्ती का, और चर्म-रोग का,

५५ और वस्त्र के कुष्ठ-रोग का, और घर का,

५६ और उठाव के लिए, और एक पपड़ी के लिए, और एक स्पष्ट-दाग के लिए:

५७ सिखाने के लिए कि वह कब अस्वच्छ है, और वह कब स्वच्छ है: यही कुष्ठ-रोग का नियम है। 




पन्द्रहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, उनसे कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब किसी भी पुरुष के माँस में से बाहर कोई बहता हुआ स्त्राव हो, उसके स्त्राव के कारण वह अस्वच्छ है।

और यह उसके स्त्राव में उसकी अस्वच्छता होगी: यदि उसके शरीर से स्त्राव बहता रहे, या उसके शरीर से स्त्राव रुक जाए, वह उसकी अस्वच्छता है।

प्रत्येक बिस्तर, जिस पर वह लेटता है जिसे वह स्त्राव है, अस्वच्छ है: और प्रत्येक वस्तु, जिस पर बैठता है, अस्वच्छ होगी। 

और जो कोई भी उसका बिस्तर छूता है अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और वह जो किसी भी वस्तु पर बैठता है जिस पर वह वह बैठा था जिसे वह स्त्राव है, अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और वह जो उसका माँस छूता है जिसे वह स्त्राव है, अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और यदि वह जिसे वह स्त्राव है उस पर थूकता है जो स्वच्छ है; तब वह अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और जिस किसी भी काठी पर वह सवारी करता है जिसे वह स्त्राव है अस्वच्छ होगी।

१० और जो कोई भी किसी भी वस्तु को छूता है जो उसके नीचे थी, संध्या तक अस्वच्छ रहेगा: और वह जो उन में से कोई भी वस्तुओं को ढोता है, अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

११ और जिस किसी को भी वह छूता है जिसे वह स्त्राव है, और उसने अपने हाथों को पानी में नहीं धोया है, वह अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

१२ और वह मिट्टी का पात्र, जिसे वह छूता है जिसे वह स्त्राव है, तोड़ दिया जाएगा: और लकड़ी का प्रत्येक पात्र पानी में धो दिया जाएगा।

१३ और जब वह जिसे वह स्त्राव है अपने स्त्राव से स्वच्छ हो चुका हो; तब वह अपने स्वयं के प्रति सात दिन गिन लेगा अपने स्वच्छीकरण के लिए, और अपने कपड़ों को धो लेगा, और बहते हुए पाने में नहा लेगा, और स्वच्छ बन जाएगा।

१४ और आठवें दिन पर वह स्वयं के लिए दो पिंडुक ले लेगा, या दो युवा कबूतर, और सभा के तम्बू के द्वार पर प्रभु के समक्ष जाएगा, और उन्हें पुरोहित को दे देगा:

१५ और वह पुरोहित उन्हें चढ़ा देगा, एक पाप-चढ़ावे हेतु, और वह दूसरा एक जले-चढ़ावे हेतु; और वह पुरोहित उसके लिए प्रभु के सम्मुख उसके स्त्राव के लिए एक परिहार बना देगा।

१६ और यदि किसी भी पुरुष का वीर्य उस में से बाहर निकल आता है, तब वह अपना समस्त देह पानी में धोएगा, और संध्या तक अस्वछ रहेगा।

१७ और प्रत्येक वस्त्र, और प्रत्येक चर्म, जिस पर वह वीर्य है, पानी के साथ धो दिया जाएगा, और संध्या तक अस्वछ रहेगा।

१८ वह स्त्री भी जिसके साथ पुरुष वीर्य के साथ लेटेता है, वह दोनो स्वयं पानी में नहा लेंगे, और संध्या तक अस्वछ रहेंगे। 

१९ और यदि किसी स्त्री का स्त्राव बहे, और उसके शरीर में वह स्त्राव रक्त हो, वह सात दिन पृथक कर दी जाएगी: और जो कोई भी उसे छूता है संध्या तक अस्वछ रहेगा।

२० और वह प्रत्येक वस्तु जिस पर वह लेटती है अपने पृथक्करण-ऋतुकाल में, अस्वच्छ होगा: प्रत्येक वस्तु भी जिस पर वह बैठती है अस्वच्छ होगी।

२१ और जो कोई भी उसका बिस्तर छूता है अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

२२ और जो कोई भी किसी भी वस्तु को छूता है जिस पर वह बैठी थी अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

२३ और यदि वह उसके बिस्तर पर हो, या किसी भी वस्तु पर जिस पर वह बैठती है, जब वह उसे छूता है, वह संध्या तक अस्वच्छ होगा।

२४ और यदि कोई भी पुरुष उसके साथ लेटता भी है, और उसका अशुद्ध रक्त उस पर लग जाए, वह सात दिन अस्वच्छ रहेगा; और वह पूरा बिस्तर जिस पर वह लेटता है अस्वच्छ होगा।

२५ और यदि किसी स्त्री का उसके पृथक्करण-ऋतुकाल से भिन्न कई दिन रक्त स्त्राव बहे, या फिर वह उसके पृथक्करण-ऋतुकाल से अधिक दिन तक बहे; वह सभी दिन उसके अस्वच्छता के स्त्राव के उसके पृथक्करण-ऋतुकाल के दिनो के समान होंगे: वह अस्वच्छ होगी।

२६ प्रत्येक बिस्तर जिस पर वह लेटती है अपने स्त्राव के समस्त दिन उसके प्रति उसके पृथक्करण-ऋतुकाल के बिस्तर समान होंगे: और जिस किसी पर भी वह बैठती है अस्वच्छ होगा, उसके पृथक्करण-ऋतुकाल की अस्वच्छता समान।

२७ और जो कोई भी उन वस्तुओं छूता है अस्वच्छ होगा, और वह अपने कपड़ों को धोएगा, और स्वयं पानी में नहा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

२८ परन्तु यदि वह अपने स्त्राव से स्वच्छ हो चुकी हो, तब वह अपने स्वयं के प्रति सात दिन गिन लेगी, और उसके पश्चात वह स्वच्छ होगी।

२९ और आठवें दिन वह अपने लिए दो पिंडूकों को, या दो युवा कबूतरों को ले लेगी, और उन्हें पुरोहित के पास ले आएगी, सभा के तम्बू के द्वार तक।

३० और वह पुरोहित उस एक को एक पाप-चढ़ावे हेतु चढ़ा देगा, और उस दूसरे को एक जले-चढ़ावे हेतु; और वह पुरोहित उसके लिए प्रभु के सम्मुख एक परिहार बनाएगा उसकी अस्वच्छता के स्त्राव के लिए। 

३१ इस प्रकार तुम इस्राएल की सन्तानों को उनकी अस्वच्छता से पृथक कर दोगे; ताकि वह अपनी अस्वच्छता में मरें , जब वह मेरे तम्बू को प्रदूषित कर देते हैं जो उनके बीच है।

३२ यही उसका नियम है जिसे स्त्राव हो रहा है, और उसका जिसका बीज उस में से निकल जाता है, और उस से दूषित हो जाता है;

३३ और उसका जो अपने पृथक्करण-ऋतुकाल से अस्वस्थ है, और उसका जिसे स्त्राव है, पुरुष का, और स्त्री का, और उसका जो उसके साथ लेटता है जो अस्वच्छ है।



सोलहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, हारुन के दोनो बेटों की मृत्यु के पश्चात, जब वह प्रभु के सम्मुख चढ़ावा कर, मर गए थे; 

और प्रभु ने मूसा से कहा, हारुन अपने भाई से बोलो, कि वह प्रेषण-आसन के सम्मुख, जो संदूक पर है; पवित्र-स्थान में परदे के भीतर, हर समय आता रहे; ताकि वह मरे : क्योंकि मैं मेघ में प्रेषण-आसन पर प्रकट हूँगा।

इस प्रकार हारुन पवित्र-स्थान में प्रवेश करेगा: पाप-चढ़ावे हेतु एक युवा साँड़ के, और जले-चढ़ावे हेतु एक मेढ़े के साथ। 

वह उस पवित्र छालटी के अंगरखे को धारण कर लेगा, और अपने शरीर पर छालटी के जाँघियों को चढ़ा लेगा, और वह एक छालटी की कमरपेटी से कसा होगा, और वह उस छालटी की पगड़ी को पहने होगा: यही पवित्र वस्त्र हैं; इसलिए वह अपने शरीर को पानी में धोएगा, और इस प्रकार इन्हें पहन लेगा।

और वह इस्राएल की सन्तानों की सभा से बकरों के दो हलवानों के एक पाप-चढ़ावे हेतु लेगा, और जले-चढ़ावे हेतु एक मेढ़े को।

और हारुन पाप-चढ़ावे के अपने साँड का अर्पण करेगा, जो उसके स्वयं के लिए है, और अपने स्वयं के लिए एक परिहार बना देगा, और अपने घराने के लिए।

और वह उन दोनो बकरों को लेगा, और उन्हें सभा के तम्बू के द्वार पर प्रभु के समक्ष प्रस्तुत करेगा। 

और हारुन उन दोनो बकरों पर पर्चियाँ डालेगा; एक पर्ची प्रभु के लिए, और दूसरी पर्ची रिहाई-बकरे के लिए।

और हारुन उस बकरे को लाएगा जिस पर प्रभु की पर्ची पड़ी थी, और वह उसे एक पाप-चढ़ावे हेतु अर्पित कर देगा।

१० परन्तु उस बकरे पर जिस पर रिहाई-बकरा बनने की पर्ची पड़ी थी, उसे प्रभु के समक्ष जीवित प्रस्तुत किया जाएगा,  उस से एक परिहार बना देने हेतु, और उसे जँगली-क्षेत्र में एक रिहा-बकरे हेतु रिहा कर देने के लिए।

११ और हारुन पाप-चढ़ावे के साँड को लाएगा, जो उसके स्वयं हेतु है, और वह अपने स्वयं और अपने घराने के लिए एक परिहार बना देगा, और उस पाप-चढ़ावे के साँड को मार देगा जो उसके स्वयं के लिए है:

१२ और वह प्रभु के सामने से बलिवेदी पर से अग्नी से जलते हुए कोयलों से भरा एक धूप-दान लेगा, और उसके हाथ छोटी कूटी हुई मधुर-सुगन्धित-धूप से भरे होंगे, और उसे परदे के भीतर ले आएगा: 

१३ और वह उस सुगन्धित-धूप को प्रभु के समक्ष अग्नी पर डाल देगा, ताकि उस सुगन्धित-धूप का धूआँ उस प्रेषण-आसन को ढक दे जो उस साक्ष्य पर है, ताकि वह मरे :

१४ और वह उस साँड के रक्त में से लेगा, और उसे अपनी उँगली से उस प्रेषण-आसन पर पूर्व की ओर छिड़क देगा; और प्रेषण-आसन के समक्ष वह उस रक्त में से अपनी उँगली से सात बार छिड़क देगा। 

१५ तब वह उस पाप-चढ़ावे के बकरे को मार देगा, जो कि लोगों के लिए है, और उसके रक्त को परदे के भीतर  ले आएगा, और उस रक्त के साथ वही करेगा जिस प्रकार उसने उस साँड के रक्त के साथ किया था, और उसे उस प्रेषण-आसन पर छिड़क देगा, और प्रेषण-आसन के समक्ष:

१६ और वह उस पवित्र स्थान के लिए एक परिहार बनाएगा, इस्राएल की सन्तानों की अस्वच्छता के कारण, और उनके उल्लंघनों के कारण उनके समस्त पापों में: और इसी प्रकार ही वह उस सभा के तम्बू के लिए करेगा, जो उनके बीच रहता है उनकी अस्वच्छता के बीच।

१७ और सभा के तम्बू में कोई भी पुरुष नहीं होगा जब वह पवित्र स्थान में एक परिहार बनाने हेतु जाता है, जब तक कि वह बाहर नहीं जाता है, और स्वयं के लिए, और अपने घराने के लिए, और इस्राएल की समास्त सभा के लिए एक परिहार नहीं बना चुकता है।

१८ और वह बाहर उस बलिवेदी के पास चला जाएगा जो प्रभु के समक्ष है, और उसके लिए एक परिहार बना देगा; और वह उस साँड के रक्त में से ले लेगा, और उस बकरे के रक्त में से, और उसे बलिवेदी के सींघों पर लगा देगा चारों ओर।

१९ और वह उस रक्त में से अपने उँगली से सात बार छिड़क देगा, और उसे स्वच्छ कर देगा, और उसे इस्राएल की सनातनों की अस्वच्छता से पवित्र बना देगा।

२० और जब उसने उस पवित्र स्थान के, और सभा के तम्बू के, और उस बलिवेदी के सामंजस्य-स्थापना का अन्त कर दिया हो, वह उस जीवित बकरे को ले आएगा:

२१ और हारुन अपने दोनो हाथों को उस जीवित बकरे के सर पर रख देगा, और उस पर इस्राएल की सन्तानों की समस्त अधर्मताओं को, और उनके समस्त पापों में उनके समस्त दोषों को स्वीकार करेगा, उन्हें उस बकरे के सर पर लादते हुए, और उसे एक इच्छुक पुरुष के हाथ जँगली-क्षेत्र में भेज देगा:

२२ और वह बकरा उनकी समस्त अधर्मताओं को एक निर्जन भूमि के प्रति स्वयं पर ढो लेगा: और वह उस बकरे को जँगली-क्षेत्र में चले जाने के लिए रिहा कर देगा।

२३ और हारुन सभा के तम्बू में जाएगा, और उन छालटी के वस्त्रों को उतार लेगा, जिन्हें उसने धारण किया था जब वह पवित्र स्थान में गया था, और उन्हें वहीं छोड़ देगा:

२४ और वह अपने शरीर को पवित्र स्थान में पानी से धो लेगा, और अपने वस्त्र पहन लेगा, और आगे कर अपने जले-चढ़ावे को और लोगों के जले-चढ़ावे को चढ़ा देगा, और अपने लिए, और लोगों के लिए एक परिहार बना देगा।

२५ और पाप-चढ़ावे की चर्बी को वह बलिवेदी पर जला देगा।

२६ और वह जिसने उस बकरे को रिहाई-बकरा हेतु रिहा किया था, अपने कपड़े धोएगा, और अपने शरीर को पानी में स्नान करवाएगा, और तत्-पश्चात शिविर में जाएगा। 

२७ और पाप-चढ़ावे के साँड को, और पाप-चढ़ावे के बकरे को, जिसका रक्त परिहार बनाने हेतु पवित्र स्थान में भीतर ले आया गया था, कोई एक छावनी के बाहर उठा ले जाएगा; और वह अग्नी में उनकी चमड़ियों को, और उनके माँस को, और उनके मल को भस्म कर देंगे।

२८ और वह जो उन्हें जलाता है अपने कपड़ों को धो देगा, और अपने शरीर को पानी में स्नान करवा लेगा, और तत्-पश्चात वह शिविर में जाएगा।

२९ और यह तुम्हारे प्रति एक अन्तहीन अध्यादेश होगा: कि सातवें महीने में, महीने के दसवें दिन में, तुम अपनी आत्माओं को पीड़ित करोगे, और कतई भी कोई भी कार्य नहीं करोगे, भले ही वह कोई तुम्हारे स्वयं के ही देश का हो, या कोई परदेशी तुम्हारे बीच अल्पवास करता हुआ:

३० क्योंकि उस दिन वह पुरोहित तुम्हें स्वच्छ करने हेतु, तुम्हारे लिए एक परिहार बनाएगा, ताकि तुम प्रभु के समक्ष अपने समस्त पापों से स्वच्छ बन सको। 

३१ यह तुम्हारे प्रति एक विश्राम का सैबथ होगा, और तुम अपनी आत्माओं को पीड़ित करोगे, एक अन्तहीन अध्यादेश द्वारा।

३२ और वह पुरोहित, जिसका वह अभिषेक करेगा, और जिसे वह अपने पिता के स्थान में पुरोहित-पद पर सेवा हेतु स्थापित करेगा, परिहार बनाएगा, और उन छालटी के कपड़ों को धारण कर लेगा, उन्हीं पवित्र वस्त्रों को ही:

३३ और वह उस पवित्र पुण्य-स्थान के लिए एक परिहार बनाएगा, और वह सभा के तम्बू के लिए, और बलिवेदी के लिए एक परिहार बनाएगा, और वह पुरोहितों के लिए, और सभा के सभी लोगों के लिए एक परिहार बनाएगा।

३४ और यह तुम्हारे प्रति एक अनन्तकालिक-अध्यादेश होगा, प्रत्येक वर्ष में एक बार इस्राएल की सन्तानों के समस्त पापों के लिए एक परिहार बना देने हेतु। और उसने कर दिया जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।  





सत्रहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

हारुन, और उसके बेटों, और इस्राएल की समस्त सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो; यह है वह बात जिसका प्रभु ने आदेश दिया है, कहते हुए, 

इस्राएल के घराने का वह जो कोई भी पुरुष हो, जो किसी बैल, या मेमने, या बकरे को छावनी में मारता है, या जो उसे छावनी के बाहर मारता है,

और उसे सभा के तम्बू के द्वार पर नहीं लाता है, प्रभु के तम्बू के समक्ष प्रभु के प्रति एक चढ़ावे को चढ़ा देने हेतु; उस पुरुष पर रक्त का दोष ठहरा दिया जाएगा; उसने रक्त बहाया है; और वह पुरुष अपने लोगों के बीच से काट दिया जाएगा:

इस उद्देश्य हेतु कि इस्राएल की सन्तानें अपने चढ़ावों को, जिन्हें वह फैले खेतों पर चढ़ाते हैं, यहाँ तक कि उसे भी वह उन्हें प्रभु के पास ले आएँ, सभा के तम्बू के द्वार पर, पुरोहित के पास, और उन्हें प्रभु के प्रति शान्ति-चढ़ावों हेतु चढ़ा दें।

और वह पुरोहित प्रभु की बलिवेदी पर सभा के तम्बू के द्वार पर उस रक्त को छिड़क देगा, और उस चर्बी को प्रभु के प्रति एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु जला देगा।

और वह दानवों के प्रति अब और अपनी आहुतियों को नहीं चढ़ाएँगे, जिनके पीछे-पीछे वह राण्डपना करते चले गए हैं। यह उनके प्रति एक सदैवत्वता के लिए अध्यादेश होगा उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ियों तक। 

और तुम उनसे कहोगे, इस्राएल के घराने का जो कोई भी पुरुष हो, या उन परदेशियों में से जो तुम्हारे बीच अल्पवास कर रहे हैं, जो एक जला-चढ़ावा या बलिदान चढ़ाता है,

और उसे सभा के तम्बू के द्वार पर नहीं लाता है, उसे प्रभु के प्रति चढ़ाने हेतु; यहाँ तक कि वही पुरुष अपने लोगों के बीच में से काट दिया जाएगा।

१० और इस्राएल के घराने का जो कोई भी पुरुष, या उन परदेशियों में से जो तुम्हारे बीच अल्पवास कर रहे हैं, जो किसी भी प्रकार का रक्तपान करता है; मैं उसी आत्मा के विरुद्ध जो रक्तपान करता है विमुख हो जाऊँगा, और उसे उसके लोगों के बीच में से काट डालूँगा।

११ क्योंकि माँस का वह जीवन रक्त में है: और मैंने उसे तुम्हें प्रदान कर दिया है तुम्हारी आत्माओं के लिए एक परिहार बनाने हेतु: क्योंकि वह रक्त ही है जो आत्मा के लिए परिहार करता है।

१२ इसलिए मैंने इस्राएल की सन्तानों से कहा, तुम में से कोई भी आत्मा रक्तपान नहीं करेगी, ही कोई भी परदेशी जो तुम्हारे बीच अल्पवास करता है रक्तपान करेगा।

१३ और इस्राएल की सन्तानों का वह जो कोई भी पुरुष हो, या उन परदेशियों का जो तुम्हारे बीच अल्पवास करते हैं, जो खाए जाने वाले किसी भी जानवर या पक्षी का शिकार करके पकड़ लेता है; वह उसी का रक्त बाहर उँडेल देगा, और उसे धूल से ढक देगा। 

१४ क्योंकि वह समस्त माँस का जीवन है; उसका रक्त उसी के जीवन हेतु है: इसलिए मैंने इस्राएल की सन्तानों से कहा, तुम किसी भी प्रकार के माँस का रक्तपान नहीं करोगे: क्योंकि समस्त माँस का जीवन उसी का रक्त है: जो कोई भी उसे खाएगा काट दिया जाएगा।

१५ और प्रत्येक आत्मा जो जो उसे खाती है जो स्वयं से ही मार जाता है, या वह जो जानवरों द्वारा फाड़ दिया गया हो, भले ही वह तुम्हारे अपने ही देश का कोई हो, या कोई परदेशी, वह दोनो अपने कपड़ों को धो देंगे, और स्वयं को पानी में निल्हा देंगे, और संध्या तक अस्वच्छ रहेंगे: तब वह स्वच्छ बन जाएँगे।

१६ परन्तु यदि वह उन्हें नहीं धोते हैं, ही अपने शरीर को स्नान करवाते हैं; तब वह अपनी अधर्मता को ढोएँगे।




अट्ठारहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर।

मिस्र की भूमि की करनीयोंनुसार, जहाँ तुम बसते थे, तुम नहीं करोगे: और कनान की भूमी की करनीयोंनुसार, जहाँ मैं तुम्हें ला रहा हूँ, तुम नहीं करोगे: ही तुम उनके अध्यादेशों में चलोगे।

तुम मेरे न्याय-सिद्धांतों को करोगे, और मेरे अध्यादेशों को रखोगे, उन में चलने हेतु: मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर।

इसलिए तुम मेरे अधिनियमों को रखोगे, और मेरे न्याय-सिद्धांतों को: जिन्हें यदि कोई पुरुष करे, वही उन्हीं में जी लेगा: मैं हूँ प्रभु

तुम में से कोई भी किसी के भी निकट नहीं आएगा जो उसके निकटवर्ती कुल से है, उनकी नग्नता को अनावृत करने हेतु: मैं हूँ प्रभु

तुम्हारे पिता की नग्नता, या तुम्हारी माता की नग्नता, तुम नहीं अनावृत करोगे: वह तुम्हारी माँ है; तुम उसकी नग्नता को अनावृत नहीं करोगे। 

तुम्हारे पिता की पत्नी की नग्नता तुम नहीं अनावृत करोगे: यह तुम्हारे पिता की नग्नता है।

तुम्हारी बहन की नग्नता, तुम्हारे पिता की बेटी, या तुम्हारी माता की बेटी, भले ही वह घर पर जन्मी हो, या प्रदेश में जन्मी हो, यहाँ तक कि इन्हीं की नग्नता तुम अनावृत नहीं करोगे। 

१० तुम्हारे बेटे की बेटी की नग्नता, या तुम्हारी बेटी की बेटी की नग्नता, यहाँ तक कि इन्हीं की नग्नता तुम अनावृत नहीं करोगे: क्योंकि उनकी नग्नता तुम्हारी स्वयं की ही नग्नता है।

११ तुम्हारे पिता की पत्नी की बेटी की नग्नता, तुम्हारे पिता से जननी हुई, वह तुम्हारी बहन है, तुम उसकी नग्नता को अनावृत नहीं करोगे।

१२ तुम अपने पिता की बहन की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे: वह तुम्हारे पिता की निकटवर्ती कुलवाली है।

१३ तुम अपनी माता की बहन की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे: क्योंकि वह तुम्हारी माँ की निकटवर्ती कुलवाली है।

१४ तुम अपने पिता के भाई की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे: तुम उसकी पत्नी के पास नहीं जाओगे: वह तुम्हारी चाची-ताई है।

१५ तुम अपनी पुत्र-वधु की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे: वह तुम्हारे बेटे की पत्नी है;  तुम उसकी नग्नता को अनावृत नहीं करोगे।

१६ तुम अपने भाई की पत्नी की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे: यह तुम्हारे भाई की नाग्नता है। 

१७ तुम एक स्त्री और उसकी बेटी की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे, ही तुम उसके बेटे की बेटी, या उसकी बेटी की बेटी को लोगे, उसकी नग्नता को अनावृत कर देने हेतु; क्योंकि वह उसकी निकटवर्ती कुलवलियाँ हैं: यह दुष्टता है। 

१८ ही तुम एक पत्नी की बहन को लोगे, उसे दुखी करने के लिए, उसकी नग्नता को अनावृत कर देने हेतु, उस दूसरी के अतिरिक्त उसके जीवनकाल में।

१९ तुम एक स्त्री के निकट नहीं आओगे उसकी नग्नता को अनावृत कर देने हेतु, जब तक वह अपनी अस्वच्छता के लिए प्रथक है। 

२० इसके अतिरिक्त तुम अपने पड़ौसी की पत्नी के साथ कामुकता हेतु नहीं लेटोगे, स्वयं को उसके साथ प्रदूषित कर देने हेतु।

२१ और तुम अपने किसी भी बीज में से, मोलेक के प्रति अग्नी में से पार नहीं भेजोगे, ही तुम अपने ईश्वर के नाम को कलुषित करोगे: मैं प्रभु हूँ। 

२२ तुम पुरुष के साथ नहीं लेटोगे, जैसे कि स्त्री के साथ: यह अति-घ्रणितता है।

२३ ही तुम किसी जानवर के साथ लेटोगे स्वयं को उसके साथ दूषित कर देने हेतु: ही कोई भी स्त्री किसी जानवर के सम्मुख खड़ी होगी उसके साथ लेट जाने हेतु: यह विभ्रांति है।

२४ स्वयं को इन में से किसी भी बात में प्रदूषित मत करना: क्योंकि इन्हीं सब में वह राष्ट्र प्रदूषित हैं जिन्हें मैं तुम्हारे सामने से निष्कासित कर रहा हूँ: 

२५ और यह भूमि प्रदूषित है: इसलिए मैं इसकी अधर्मता की इस पर सुध ले रहा हूँ, और यह भूमि स्वयं ही इसके निवासियों का वमन कर रही है। 

२६ इसलिए तुम मेरे अध्यादेशों और न्याय-सिद्धांतों को रखोगे, और इन में से कोई भी अति घ्रणितता नहीं करोगे; ही तुम्हारे अपने राष्ट्र में से कोई, ही कोई परदेशी जो तमहरे बीच अल्पवास करता है:

२७ क्योंकि यह सभी अति घ्रणितताएँ भूमी के व्यक्तियों ने कर लीं हैं, जो तुमसे पहले थे, और भूमी प्रदूषित है;

२८ ताकि भूमी तुम्हें भी बाहर उगल दे, जैसे उसने उन राष्ट्रों को बाहर उगल दिया जो तुमसे पहले थे।

२९ क्योंकि जो कोई भी इन अति घ्रणितताओं में से कोई भी करेगा, वही आत्माएँ ही जो उन्हें करती हैं अपने लोगों के बीच में से काट दी जाएँगी। 

३० इसलिए तुम मेरी आज्ञप्ति का पालन करोगे, ताकि तुम इन अति-घ्रणास्पद रीतियों में से किसी को भी करो, जो तुमसे पहले कर दी गईं थीं, और ताकि तुम स्वयं को उन में प्रदूषित कर दो: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर। 



उन्नीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा से बोलो, और उनसे कहो, तुम पवित्र बनोगे: क्योंकि मैं प्रभु तुम्हारा ईश्वर पवित्र हूँ।

तुम में से प्रत्येक पुरुष अपनी माता, और अपने पिता का भय मानेगा, और मेरे सैबथों को रखेगा: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर। 

मूर्तियों की ओर मत मुड़ जाना, ही स्वयं के लिए ढले हुए ईश्वरों को बनाना: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर। 

और यदि तुम प्रभु के प्रति एक शान्ति-चढ़ावे को अर्पित करते हो, तुम उसे अपनी ही स्वेच्छा से अर्पित करोगे। 

वह उसी दिन खा लिया जाएगा जब तुम उसे अर्पित करते हो: और यदि उसका कोई भी अन्श तीसरे दिन तक बचा रह जाता है, वह अग्नी में भस्म कर दिया जाएगा।

और यदि वह कतई भी तीसरे दिन खाया जाएगा, यह अति-घ्रणास्पद है; यह स्वीकृत नहीं होगा।

इसलिए जो कोई भी उसे खाता है अपनी अधर्मता ढोएगा, क्योंकि उसने प्रभु की पवित्र वस्तु को प्रदूषित कर दिया है: और वह आत्मा उसके लोगों के बीच में से काट दी जाएगी।

और जब तुम अपनी भूमी की फसल काटते हो, तो तुम अपने खेत के कोनों को सम्पूर्णता से नहीं काटोगे, ही तुम अपनी फसल-कटाई के सिल्लों को बीनोगे।

१० और तुम अपने अंगूर-खेत को पूर्णतः से नहीं बीनोगे, ही तुम अपने अंगूर-खेत के प्रत्येक अंगूर को बीनोगे; तुम उन्हें दरिद्र और परदेशी के लिए छोड़ दोगे: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर।

११ तुम चोरी नहीं करोगे, ही घोखाधड़ी करोगे, ही एक दूसरे से झूठ बोलोगे।

१२ और तुम मेरे नाम से झूठी शपथ नहीं लोगे, ही तुम अपने ईश्वर के नाम को प्रदूषित करोगे: मैं प्रभु हूँ।

१३ तुम अपने पड़ौसी को ठगोगे नहीं, ही उसे लूटोगे: उसका वेतन जो भाड़े पर लिया हुआ है तुम्हारे साथ सारी रात सुबह तक नहीं रहेगा।

१४ तुम बधीर को गाली नहीं दोगे, ही नेत्रहीन के सामने कोई ठोकर खा जाने का पत्थर रखोगे, बल्कि तुम अपने ईश्वर का भय मानोगे: मैं प्रभु हूँ।

१५ तुम न्याय करने में कोई भी अनैतिकता नहीं करोगे: तुम दरिद्रों के चेहरों की मान्यता नहीं करोगे, ही महान व्यक्तियों का मान करोगे: बल्कि नेकी में तुम अपने पड़ौसी का न्याय करना।

१६ तुम अपने लोगों के बीच एक भेदिए के समान इधर उधर नहीं फिरोगे: ही तुम अपने पड़ौसी के रक्त के विरुद्ध खड़े होगे: मैं प्रभु हूँ।

१७ तुम अपने भाई से अपने हृदय में घृणा नहीं करोगे: तुम अपने पड़ौसी की किसी प्रकार से निंदा करोगे, और तुम उस पर पाप नहीं ढोगे।  

१८ तुम प्रतिषोध नहीं लोगे, ही अपने लोगों की सन्तानों के विरुद्ध कोई भी विद्वेष रखो, बल्कि तुम अपने पड़ौसी से स्वयं समान प्रेम करोगे: मैं प्रभु हूँ।

१९ तुम मेरे अध्यादेशों का पालन करोगे। तुम अपने मवेशी को किसी भिन्न प्रकार के साथ मैथुन नहीं करने दोगे: तुम अपने खेत में दो प्रकार के बीज नहीं बोगे: ही कोई वस्त्र छालटी और ऊँन से मिला हुआ तुम्हारे ऊपर आएगा।

२० और जो कोई भी उस स्त्री के साथ कामुकता से लेटता है, जो कि एक बंध्वादासी है, एक पति की मंगेतर, और जिसका मुक्तिभुक्तान नहीं हुआ हो, ही उसे स्वतंत्रता प्रदान की गई हो; इसका कशाताड़न कर दिया जाएगा; इन्हें मृत्युदण्ड नहीं दिया जाएगा, क्योंकि वह स्वतंत्र नहीं थी।

२१ और वह प्रभु के प्रति अपना दोष-चढ़ावा ले आएगा, सभा के तम्बू के द्वार पर, एक मेढ़ा ही एक दोष-चढ़ावे हेतु।   

२२ और वह पुरोहित उसके लिए प्रभु के समक्ष उस मेढ़े के साथ उस दोष-चढ़ावे हेतु एक परिहार बना देगा, उसके पाप के लिए जो उसने कर दिया है: और वह पाप जो उसने कर दिया है उसके प्रति क्षमा कर दिया जाएगा। 

२३ और जब तुम भूमी के अन्दर जाओगे, और भोजन हेतु सभी प्रकार के वृक्ष लगा चुकोगे, तब तुम उनका फल बेख़तनित जैसा गिन लोगे: तीन वर्ष वह तुम्हारे प्रति बेख़तनित जैसा होगा: वह खाया नहीं जाएगा।

२४ परन्तु चौथे वर्ष में उनका समस्त फल प्रभु की प्रशन्सा हेतु पवित्र बन जाएगा।

२५ और पाँचवे वर्ष में तुम उनके फल में से खाओगे, ताकि वह तुम्हारे प्रति उसकी बढ़ौतरी की पैदावार प्रदान कर सके: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर।

२६ तुम कुछ भी रक्त के साथ नहीं खाओगे: ही तुम इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों का उपयोग करोगे, ही तुम जादू-टोना करोगे।

२७ तुम अपने सरों के कोनों को गोल नहीं बनाओगे, ही तुम अपनी दाढ़ी के कोनों को विकृत करोगे।

२८ तुम मृतकों के लिए अपने माँस में कोई भी चीरे नहीं काटोगे, ही अपने पर कोई भी चिंन्ह छपवाना: मैं प्रभु हूँ। 

२९ अपनी बेटी को वैश्या मत बनाना, उसे एक राँड बनवा कर; कहिं भूमी राँडपने में पड़ जाए, और भूमी दुष्टता से भर जाए।

३० तुम मेरे सैबथों का पालन करोगे, और मेरे पुण्य-स्थान का भय मानोगे: मैं प्रभु हूँ।

३१ जिनके पास प्रेतभावात्माएँ हैं उनके अन्मुख मत होना, ही तांत्रिकों के पीछे-पीछे लग, उनके द्वारा दूषित हो जाने हेतु: मैं प्रभु हूँ।  

३२ तुम श्वेत-बाल लिए सर के समक्ष उठोगे, और वृद्ध पुरुष के चहरे का सम्मान करोगे, और अपने ईश्वर से डरोगे: मैं प्रभु हूँ।

३३ और यदि कोइ परदेशी तुम्हारे साथ तुम्हारी भूमी में अल्पवास कर रहा हो, तुम उसका अत्याचार नहीं करोगे।

३४ बल्कि वह परदेशी जो तुम्हारे साथ बसता है तुम्हारे प्रति तुम्हारे बीच ही जन्मे समान होगा, और तुम उस से अपने समान ही प्रेम करोगे; क्योंकि तुम मिस्र की भूमी में परदेशी थे: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 

३५ तुम न्याय-निर्धारण में, मापने में, वज़न में, या नापने में, कोई भी अनैतिकता नहीं करोगे।

३६ न्यायी तराज़ूएँ, न्यायी वज़न, एक न्यायी एफाह, और एक न्यायी हिन, तुम रखोगे: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ले आया।

३७ इसलिए तुम मेरे समस्त अध्यादेशों का, और मेरे समस्त न्याय-निर्धारणों का पालन करोगे, और उन्हें करोगे: मैं प्रभु हूँ। 



बीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

पुनः, तुम इस्राएल की सन्तानों से कहोगे, वह जो कोई भी इस्राएल की सन्तानों में से हो, या उन परदेशियों में से हो जो इस्राएल में अल्पवास कर रहे हैं, जो अपने बीज में से किसी को भी मोलेक के प्रति प्रदान करता है; वह निश्चितता से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: भूमी के लोग उस पर पत्थरों से पथराव करेंगे।

और मैं उस आदमी के विरुद्ध विमुख हो जाऊँगा, और उसे उसके लोगों के बीच में से काट डालूँगा; क्योंकि उसने अपने बीज में से मोलेक को दे दिया है, मेरे पुण्य-स्थान को दूषित करने हेतु, और मेरे पवित्र नाम को प्रदूषित कर देने हेतु।

और यदि भूमी के लोग तनिक भी उस आदमी से अपनी आँखें छुपा लेते हैं, जब वह अपने बीज को मोलेक को प्रदान कर रहा हो, और उसे मारें:

तब मैं उस आदमी के विरुद्ध विमुख हो जाऊँगा, और उसके परिवार के विरुद्ध, और उसे काट डालूँगा, और उन सभी को जो उसके पीछे-पीछे वैश्यापना करने चल दिए हैं, मोलेक के साथ राँडपना कर देने के लिए, उनके लोगों के बीच में से। 

और वह आत्मा जो उनके पीछे-पीछे मुड़ जाती है जिनके पास प्रेतभावात्माएँ हैं, और तांत्रिकों के पीछे-पीछे, उनके पीछे-पीछे वैश्यापना कर देने हेतु, मैं ही उस आत्मा के विरुद्ध विमुख हो जाऊँगा, और उसे उसके लोगों के बीच में से काट डालूँगा। 

इसलिए पुनीत कर लो स्वयं को, और तुम पवित्र बन जाओ: क्योंकि मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर। 

और तुम मेरे अध्यादेशों का पालन करोगे, और उन्हें करोगे: मैं हूँ वह प्रभु जो तुम्हें पुनीत करता हूँ। 

वह प्रत्येक एक जो अपने पिता या अपनी माता को श्राप देता है मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: इसने अपने पिता या माता को श्राप दे दिया है; इसका रक्त इसी पर ही पड़ेगा। 

१० और वह पुरुष जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी के साथ व्यभिचार करता है, वही जो अपने पड़ौसी की पत्नी के साथ व्यभिचार करता है, वह व्यभिचारक और वह व्यभिचारिका मृत्यु के घाट उतार दिए जाएँगे। 

११ और उस पुरुष ने जो अपने पिता की पत्नी के साथ लेटता है, अपने पिता की नग्नता अनावृत कर दी है: इन दोनो को निश्चित रूप से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा; इनका रक्त इन्हीं पर ही पड़ेगा।

१२ और यदि कोई पुरुष अपनी पुत्र-वधु के साथ लेटता है, इन दोनो को निश्चित रूप से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: इन्होंने विभ्रांति कार्यरत कर दी है; इनका रक्त इन्हीं पर ही पड़ेगा।

१३ यदि कोई पुरुष आदमी के साथ भी लेटता है, जिस प्रकार वह किसी स्त्री के साथ लेटता है, इन दोनो ने एक अति-घ्रणितता कर दी है: इन्हें निश्चित रूप से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा; इनका रक्त इन्हीं पर ही पड़ेगा।

१४ और यदि कोई पुरुष किसी पत्नी को लेता है और उसकी माता को, यह दुष्टता है: इन्हें अग्नी से भस्म कर दिया जाएगा,  दोनो उसे और उन्हें; ताकि तुम्हारे बीच कोई दुष्टता हो।

१५ और यदो कोई आदमी किसी जानवर के साथ लेटता है, वह निश्चित रूप से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: और तुम उस जानवर को मार डालोगे।

१६ और यदि कोई औरत किसी भी जानवर के पास आती है, और उसके साथ नीचे लेट जाती है, तुम उस औरत को मार डालोगे, और उस जानवर को: इन्हें निश्चित रूप से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा; इनका रक्त इन्हीं पर ही पड़ेगा।

१७ और यदि कोई पुरुष अपनी बहन को लेगा, उसके पिता की बेटी, या उसकी माता की बेटी, और उसकी नग्नता को देखेगा, और वह उनकी नग्नता को देख ले; यह एक दुष्ट बात है; और इन्हें इनके लोगों की दृष्टि में काट दिया जाएगा: इसने अपनी बहन की नग्नता को अनावृत कर डाला है; यह अपनी अधर्मता को ढोएगा। 

१८ और यदि कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ उसकी पृथक्करण-ऋतुकाल की अस्वस्थता में लेटेगा, और उसकी नग्नता को अनावृत करेगा; उसने उसके स्त्रोत को उघाड़ दिया है, और उसने अपने रक्त के स्त्रोत को अनावृत कर दिया है: और इन दोनो को उनके लोगों के बीच में से काट दिया जाएगा। 

१९ और तुम अपनी माता की बहन की नग्नता को अनावृत नहीं करोगे, ही अपने पिता की बहन की: क्योंकि वह अपनी निकटवर्ती कुलवालियों को अनावृत करता है: वह अपनी अधर्मता को ढोएँगे।

२० और यदि कोई पुरुष अपने चाचे-मामे की पत्नी के साथ लेटेगा, उसने अपने चाचे-मामे की नग्नता को अनावृत कर दिया है: वह अपने पाप को ढोएँगे; वह सन्तानहीन मर जाएँगे। 

२१ और यदि कोई पुरुष अपने भाई की पत्नी को लेगा, यह एक अस्वच्छ बात है: उसने अपने भाई की नग्नता को अनावृत कर दिया है; वह सन्तानहीन होंगे।

२२ इसलिए तुम मेरे समस्त अध्यादेशों का, और मेरे समस्त न्याय-निर्धारणों का पालन करोगे, और उन्हें करोगे: ताकि वह भूमी जहाँ मैं तुम्हें उस में बस जाने के लिए ला रहा हूँ, तुम्हें बाहर उगल दे। 

२३ और तुम उस राष्ट्र की रीतियों में नहीं चलोगे, जिसे मैं तुम्हारे समक्ष बाहर फैंक रहा हूँ: क्योंकि इन्होंने यह सभी बातें कर डाली हैं, और इसलिए मैंने इनसे घृणा की है।

२४ परन्तु मैंने तुमसे कह दिया है, तुम इनकी भूमी विरासत में लोगे, और मैं इसे तुम्हें प्रदान कर दूँगा इस पर अधिकार कर लेते हेतु, एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है: मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर, जिसने तुम्हें अन्य लोगों से पृथक कर दिया है।

२५ इसलिए तुम स्वच्छ जानवरों और अस्वच्छ के बीच अन्तर करोगे, और अस्वच्छ पक्षीयों और स्वच्छ के बीच: और तुम अपनी आत्माओं को, जानवर द्वारा, या पक्षी द्वारा, या उस किसी भी प्रकार के जीवित जन्तु से जो धरती पर रेंगता है, जिसे मैंने तुम से अस्वछ मान कर पृथक कर दिया है, घृणा-योग्य नहीं बनाओगे।

२६ और तुम मेरे प्रति पवित्र होगे: क्योंकि मैं प्रभु पवित्र हूँ, और तुम्हें अन्य लोगों से विभक्त कर दिया है, ताकि तुम मेरे बन सको। 

२७ वह आदमी या औरत जिसके पास कोई प्रेतभावात्मा हो, या जो एक तांत्रिक हो, निश्चितता से ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: वह उन पर पत्थरों से पथराव कर देंगे: इनका रक्त इन्हीं पर ही पड़ेगा।






इक्कीसवाँ अध्याय।


और प्रभु ने मूसा से कहा, हारुन के बेटों उन पुरोहितों से बोलो, और उनसे कहो, कोई भी उसके लोगों के बीच मृतकों के लिए दूषित नहीं होगा: 

केवल उसके कुलवालों के लिए, जो उसके निकट हैं, अर्थात्, उसकी माँ के लिए, और उसके पिता के लिए, और उसके बेटे के लिए, और उसकी बेटी के लिए, और उसके भाई के लिए, 

और उसकी बहन एक कुँवारी के लिए, जो उसके निकट है, जिसके पास कोई पति नहीं है; उसके लिए वह दूषित हो सकता है। 

परन्तु वह स्वयं को दूषित नहीं करेगा, अपने लोगों के बीच एक प्रमुख पुरुष होते हुए, स्वयं को अशुद्ध कर देने हेतु। 

वह अपने सर पर गंजापन नहीं बनाएँगे, ही वह अपनी दाढ़ी के कोने पर उस्तरा फेरेंगे, ही अपने माँस में चीरे काटेंगे। 

वह अपने ईश्वर के प्रति पवित्र होंगे, और अपने ईश्वर का नाम दूषित नहीं करेंगे: क्योंकि अग्नी से बनी प्रभु की आहुतियाँ, और अपने ईश्वर की रोटी, वह अर्पित करते हैं: इसलिए वह पवित्र होंगे।

वह उसे पत्नी नहीं लेंगे जो एक वैश्या हो, या अशुद्ध हो; ही वह कोई स्त्री लेंगे जो अपने पति द्वारा त्याग दी गई हो: क्योंकि वह अपने ईश्वर के प्रति पवित्र है।

इसलिए तुम उसे पुनीत कर दोगे; क्योंकि वह तुम्हारे ईश्वर की रोटी को अर्पित करता है: वह तुम्हारे प्रति पवित्र होगा: क्योंकि मैं प्रभु, जो तुम्हें पुनीत करता हूँ, पवित्र हूँ।

और किसी भी पुरोहित की बेटी, यदि वह स्वयं को वैश्यापने का खेल खेल कर दूषित कर दे, वह अपने पिता को दूषित करती है: वह अग्नी से भस्म कर दी जाएगी। 

१० और वह जो अपने भाई-जनो के बीच उच्च-पुरोहित है, जिसके सर पर अभिषेक-तेल उँडेल दिया गया था, और जो उन वस्त्रों को धारण करने हेतु स्थापित है, अपने सर को अनावृत नहीं करेगा, ही अपने कपड़ों को फाड़ेगा;   

११ ही वह किसी भी मृत शव के पास भीतर जाएगा, ही स्वयं को अपने पिता, या अपनी माँ के लिए दूषित करेगा;

१२ ही वह पुण्य-स्थान से बाहर जाएगा, ही अपने ईश्वर के पुण्य-स्थान को दूषित करेगा; क्योंकि उसके ईश्वर के अभिषेक-तेल का मुकुट उस पर है: मैं प्रभु हूँ। 

१३ और वह एक पत्नी उसकी कुँवारेपन की स्थिति में लेगा।

१४ कोई विधवा, या विवाह-विच्छेदित स्त्री, या अशुद्ध, या कोई राँड, इन्हें वह नहीं लेगा; बल्कि वह अपने ही लोगों में से पत्नी हेतु एक कुँवारी को ले लेगा। 

१५ ही वह अपने बीज को अपने लोगों के बीच दूषित करेगा: क्योंकि मैं प्रभु उसे पुनीत ठहराता हूँ। 

१६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१७ हारुन से बोलो, कहते हुए, तुम्हारे बीज में से जो कोई भी हो उनकी पीढ़ियों में जिस में कोई भी विकृति हो, उसे उसके ईश्वर की रोटी चढ़ाने हेतु निकट मत आने देना। 

१८ क्योंकि वह जो कोई भी पुरुष हो जिस में कोई विकृति हो, वह निकट नहीं आएगा: कोई नेत्रहीन पुरुष, या लंगड़ा, कुरूपित चहरे वाला, अथ्वा कुछ भी सामान्यता से अधिक लिए, 

१९ या कोई पुरुष जिसका पैर टूटा हुआ हो, या हाथ टूटा हुआ हो,

२० या कुबड़ा, या बौना, या जिसकी आँख में कोई विकृति हो, खाज-खुजली वाला, या पपड़ी-चर्म-रोग लिए, या जिसके अण्डकोष कुचले हुए हों; 

२१ हारुन पुरोहित के बीज में से कोई भी पुरुष जिस में विकृति हो, अग्नी से बनी प्रभु की आहुतियों को अर्पित करने हेतु निकट नहीं आएगा: इस में विकृति है; यह अपने ईश्वर की रोटी को चढ़ाने हेतु निकट नहीं आएगा।

२२ यह अपने ईश्वर की रोटी खाएगा, दोनो अति-पवित्रतम में से, और पवित्र में से।

२३ बस केवल वह परदे तक भीतर नहीं जाएगा, ही बलिवेदी के निकट आएगा, क्योंकि इस में विकृति है; ताकि यह मेरे पुण्य-स्थानो को दूषित करे: क्योंकि मैं प्रभु इन्हें पुनीत ठहरता हूँ।  

२४ और मूसा ने यह हारुन, और उसके बेटों, और इस्राएल की समस्त सन्तानों को बता दिया। 



बाईसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

हारुन और उसके बेटों से बोलो, कि वह इस्राएल की सन्तानों की पवित्र वस्तुओं से स्वयं को पृथक कर लें, और कि वह मेरे पवित्र नाम को उन वस्तुओं में दूषित करें जिन्हें वह मेरे प्रति पुनीत ठहराते हैं: मैं प्रभु हूँ।

उनसे कहो, तुम्हारी पीढ़ियों के बीच तुम्हारे बीज का वह जो कोई भी हो, जो उन पवित्र वस्तुओं के पास अपने पर अपनी अस्वच्छता लिए जाता है, जिन्हें इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु के प्रति पुनीत ठहरा दिया है, वह आत्मा मेरी उपस्थिति से काट दी जाएगी: मैं प्रभु हूँ। 

हारुन के बीज का वह कोई भी पुरुष जो कुष्ठ-रोगी हो, या जिसे कोई बहता हुआ स्त्राव हो; वह पवित्र वस्तुओं में से नहीं खाएगा,  उसके स्वच्छ हो जाने तक। और जो कोई भी किसी भी वस्तु को छूता है जो मृत से अस्वच्छ हो, या कोई पुरुष जिसका वीर्य उस में से निकल आता है;

या जो कोई भी किसी रेंगते जन्तु को छूता है, जिसके द्वारा वह अस्वच्छ बन जाए, या कोई पुरुष जिस से वह अस्वछता ले ले, जैसी भी अस्वच्छता उस में हो;

वह आत्मा जिसने ऐसा कुछ भी छूआ हो संध्या के समय तक अस्वच्छ रहेगा, और उन पवित्र वस्तुओं में से नहीं खाएगा, सिवाय कि वह अपने माँस को पानी से धो ले।

और जब सूर्यास्त हो जाता है, वह स्वच्छ बन जाएगा, और तत्-पश्चात उन पवित्र वस्तुओं में से खाएगा; क्योंकि यह उसका भोजन है। 

वह जो स्वयं से मरा हुआ हो, या जानवरों से फाड़ दिया गया हो, वह नहीं खाएगा स्वयं को उस से दूषित कर देने हेतु: मैं प्रभु हूँ। 

वह इसलिए मेरा अध्यादेश रखेंगे, कहिं वह उसके लिए पाप ढो लें, और इसलिए मर जाएँ, यदि वह उसे दूषित करते हैं: मैं प्रभु उन्हें पुनीत करता हूँ। 

१० कोई भी परदेशी उस पवित्र वस्तु में से नहीं खाएगा: पुरोहित के पास ठहरा अल्पवासी, या कोई भाड़े का नौकर, पवित्र वस्तु में से नहीं खाएगा।

११ परन्तु यदि पुरोहित किसी भी आत्मा को अपने पैसे से खरीद लेता है, वह उस में से खाएगा, और वह जो उसके घराने में जन्मा हो: वह उसके भोजन में से खाएँगे।

१२ यदि पुरोहित की बेटी भी किसी परदेशी से विवाहित हो, वह उन पवित्र वस्तुओं के चढ़ावे से नहीं खाएगी।

१३ परन्तु यदि पुरोहित की बेटी विधवा हो, या विवाह-विच्छेदित हो, और सन्तानहीन हो, और अपने पिता के घर में लौट गई हो, अपनी युवा स्थिति समान, वह अपने पिता के भोजन में से खाएगी: परन्तु कोई भी परदेशी उस में से नहीं खाएगा।

१४ और यदि कोई पुरुष अनभिज्ञता से पवित्र वस्तु में से खा लेता है, तब वह उसका पाँचवाँ भाग उसके साथ जोड़ देगा, और उसे पुरोहित को उस पवित्र वस्तु के साथ दे देगा।

१५ और वह इस्राएल की सन्तानों की पवित्र वस्तुओं को, जो वह प्रभु के प्रति अर्पित करते हैं, दूषित नहीं करेंगे; 

१६ या उन्हें दोष की अधर्मता का वहन करवाएँ, जब वह उनकी पवित्र वस्तुएँ खाते हैं: क्योंकि मैं प्रभु उन्हें पुनीत करता हूँ।

१७ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

१८ हारुन, और उसके बेटों से, और इस्राएल की समस्त सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, वह जो कोई भी इस्राएल के घराने का हो, अथ्वा इस्राएल में परदेशियों का, जो अपने समस्त प्रणों के लिए, और अपने समस्त स्वैच्छिक चढ़ावों के लिए अपनी आहुति चढ़ाता है, जिसे वह प्रभु के प्रति एक जले-चढ़ावे हेती चढ़ाएँगे;

१९ तुम अपनी ही स्वेच्छा से गऊओं में से, भेड़ में से, या बकरों में से, एक निष्कलंक नर चढ़ाओगे।

२० परन्तु जिस किसी में भी कोई कलंक हो, उसे तुम नहीं चढ़ाओगे: क्योंकि वह तुम्हारे प्रति स्वीकार नहीं किया जाएगा।

२१ और जो कोई भी प्रभु के प्रति अपने प्रण को सम्पूर्ण करने हेतु, अथ्वा कोई स्वैच्छिक आहुति गऊओं या भेड़ों में, शान्ति-चढ़ावों की एक बलि को चढ़ाता है, वह स्वीकृत होने के लिए परिपूर्ण होगी; उस में कोई भी दोष नहीं होगा।

२२ नेत्रहीन, या टूटी हड्डी लिए, या अपंग, या सड़ा हुआ घाव लिए, या खाज-खुजली लिए, या या पपड़ी-चर्म-रोग लिए, तुम इन्हें प्रभु के प्रति नहीं चढ़ाओगे, ही इनका अग्नी से चढ़ावा प्रभु के प्रति बलिवेदी पर बनाओगे। 

२३ या कोई साँड या कोई मेमना जिस में उसके अंगों में कुछ भी सामान्यता से अधिक या कम हो, उसे तुम एक स्वैच्छिक चढ़ावे हेतु चढ़ा सकते हो; परन्तु एक प्रण हेतु वह स्वीकार नहीं किया जाएगा।

२४ तुम प्रभु के प्रति वह जिस पर नील पड़ा हो, या जो कुचला हुआ हो, या टूटा हुआ हो, या कटा हुआ हो, नहीं चढ़ाओगे; ही तुम इन से अपने भूमी में कोई भी चढ़ावा बनाओगे।

२५ ही किसी परदेशी के हाथ तुम अपने ईश्वर की रोटी चढ़ाओगे, इन में से किसी की भी; क्योंकि इसकी भ्रष्टता इन्हीं में ही है, और इन में दोष है: यह तुम्हारे लिए स्वीकृत नहीं होंगे।

२६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२७ जब कोई साँड, अथ्वा भेड़, अथ्वा कोई बकरा, लाया जाता है, तो वह अपनी माँ के नीचे सात दिन रहेगा; और आठवें दिन से लेकर और उसके पश्चात, वह एक प्रभु के प्रति अग्नी द्वारा बनाई गई आहुति हेतु स्वीकार कर लिया जाएगा।

२८ और भले ही वह गाय हो या मादा-भेड़, तुम दोनो उसे और उसके नन्हे को एक ही दिन में नहीं मारोगे। 

२९ और जब तुम प्रभु के प्रति एक कृतज्ञता की बलि चढ़ाओगे, उसे अपनी ही स्वेच्छा से चढ़ाना।

३० उसी ही दिन में वह खा ली जाएगी; तुम उस में से कुछ भी आगामी दिन तक बचा कर नहीं रखोगे: मैं प्रभु हूँ। 

३१ इसलिए तुम मेरे आदेशों का पालन करोगे, और उन्हें करोगे: मैं प्रभु हूँ।

३२ ही तुम मेरे पवित्र नाम को कलंकित करोगे; बल्कि मैं इस्राएल की सन्तानों के बीच पवित्र ठहरा दिया जाऊँगा: मैं प्रभु हूँ जो तुम्हें पवित्र ठहराताहूँ, 

३३ जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाया, तुम्हारा ईश्वर बनने हेतु: मैं प्रभु हूँ। 








तेईसवां अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, प्रभु के भोजों के समबन्ध में, जिन्हें तुम पवित्र अधिवेशन घोषित करोगे, यही मेरे भोज हैं।

छह दिन काम किया जाएगा: परन्तु सातवें दिन विश्राम का सैबथ है, एक पवित्र अधिवेशन; तुम उस में कोई भी काम नहीं करोगे: यह तुम्हारे प्रभु का सैबथ है तुम्हारे सभी बसेरों में। 

यह प्रभु के भोज हैं, पवित्र अधिवेशन ही, जिन्हें तुम उनकी ऋतुओं में घोषित करोगे। 

पहले महीने के चौदहवें दिन में संध्या के समय प्रभु का पार-करना है। 

और पंद्रहवें दिन में उसी महीने में प्रभु के प्रति बेख़मीरी रोटी का भोज है: सात दिन तुम अवश्य ही बेख़मीरी रोटी खाओगे।

पहले दिन में तुम एक पवित्र अधिवेशन रखोगे: तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे।

परन्तु तुम सात दिन प्रभु के प्रति एक अग्नी से बना चढ़ावा चढ़ाओगे: सातवें दिन में एक पवित्र अधिवेशन है: तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१० इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम उस भूमी में प्रवेश कर लोगे जिसे मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ, और तुम उसकी फसल की कटाई कर लोगे, तब तुम अपनी फसल-कटाई के प्रथम-फलों का एक गंठल पुरोहित के पास ले आओगे:   

११ और वह उस गंठल को प्रभु के समक्ष लहरा देगा, तुम्हारे प्रति स्वीकृत हो जाने हेतु: सैबथ के अगले दिन वह पुरोहित उसे लहरा देगा।
१२ और तुम उस दिन, जब तुम उस गंठल को लहराते हो, एक प्रथम वर्ष के निष्कलंक नर ममने को चढ़ाओगे, प्रभु के प्रति एक जले-चढ़ावे हेतु। 

१३ और उसका भोज-चढ़ावा तेल से मिश्रित बारीक आटे के दो-दसवें भाग होगा, एक अग्नी से बनी आहुति प्रभु के प्रति एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु: और पेय चढ़ावा उसका अंगूर-रस का होगा, एक हिन का चौथा भाग।

१४ और तुम ही रोटी, ही भुना हुआ अनाज, ही हरी बालियाँ खाओगे, उसी दिन तक जब तक तुम अपने ईश्वर के प्रति एक चढ़ावा नहीं ले आते हो: यह एक सदैवत्वता पर्यत अध्यादेश रहेगा तुम्हारी पीढ़ी-दर-पीढ़ी तक तुम्हारे समस्त बसेरों में।

१५ और तुम गिन लोगे अपने प्रति सैबथ के अगले दिन से, उसी दिन से जब तुम उस लहराए-चढ़ावे के गंठल को लाए थे; सात सैबथ पूर्ण होंगे:

१६ सातवें सैबथ के अगले दिन तक भी तुम पचास दिनों को गिनोगे; और तुम प्रभु के प्रति एक नया भोज-चढ़ावा चढ़ाओगे। 

१७ तुम अपने बसेरों में से बाहर दो लहराई रोटियों के मोटे पाव दो-दसवें भागों के लाओगे: वह बारीक आटे की बनी होंगी; वह खमीर से पकी होंगी; यह प्रभु के प्रति प्रथम-फल हैं। 

१८ और तुम रोटी के साथ प्रथम वर्ष के निष्कलंक सात मेमने, और एक युवा साँड, और दो मेढ़े चढ़ाओगे: यह प्रभु के प्रति एक जला-चढ़ावा होंगे, उनके भोज-चढ़ावे के साथ, और उनके पेय-चढ़ावों के साथ, एक अग्नी से बनी आहुति ही, प्रभु के प्रति एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु।

१९ तब तुम बकरों में से एक हलवान की बलि चढ़ाओगे एक पाप-चढ़ावे हेतु, और प्रथम वर्ष के दो मेमने शान्ति-चढ़ावों की बलि हेतु।

२० और वह पुरोहित उन्हें प्रभु के समक्ष एक लहराए-चढ़ावे हेतु प्रथम-फलों की रोटी के साथ लहरा देगा, उन दो मेमनों के साथ: वह प्रभु के प्रति पुरोहित के लिए पवित्र होंगे।

२१ और तुम उसी दिन घोषणा करोगे, कि यह तुम्हारे प्रति एक पवित्र सम्मेलन हो: तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे: यह सदैवत्वता पर्यत एक अध्यादेश रहेगा तुम्हारे समस्त बसेरों में तुम्हारी पीढ़ी-दर-पीढ़ी तक।

२२ और जब तुम अपनी भूमी की फसल काटोगे, तो तुम अपने खेत के कोनो को सफ़ा-चट मत कर डालना जब तुम फसल की कटाई करते हो, ही तुम अपनी फसल-कटाई के किसी भी सिल्ले को बीनोगे: तुम उन्हें दरिद्र, और परदेशी के लिए छोड़ दोगे: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 

२३ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

२४ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, सातवें महीने में, महीने के पहले दिन, तुम एक सैबथ को रखोगे, एक चिंघाड़ों के बजाने का स्मारक, एक पवित्र अधिवेशन। 

२५ तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे: बल्कि तुम अग्नी से बनी एक आहुति प्रभु के प्रति अर्पित करोगे। 

२६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

२७ और इस सातवें महीने के दसवें दिन पर एक परिहार-दिवस होगा: यह एक पवित्र अधिवेशन होगा तुम्हारे प्रति; और तुम अपनी आत्माओं को पीड़ित करोगे, और प्रभु के प्रति एक अग्नी से बने चढ़ावे को चढ़ाओगे। 

२८ और तुम उसी दिन में कोई भी काम नहीं करोगे: क्योंकि यह एक परिहार का दिवस है, प्रभु तुम्हारे ईश्वर के समक्ष तुम्हारे लिए एक परिहार बना देने हेतु। 

२९ क्योंकि वह जो कोई भी आत्मा हो जो इसी दिन पीड़ित नहीं होगा, वह उसके लोगों के बीच में से काट दिया जाएगा।

३० और वह जो कोई भी आत्मा हो जो इसी दिन कोई भी काम करे, उसी आत्मा को मैं उसके लोगों के बीच में से नष्ट कर दूँगा।

३१ तुम किसी भी प्रकार का काम नहीं करोगे: यह एक सदैवत्वता पर्यत अध्यादेश रहेगा तुम्हारी पीढ़ी-दर-पीढ़ी तक, तुम्हारे समस्त बसेरों में।

३२ यह तुम्हारे प्रति एक विश्राम का सैबथ होगा, और तुम अपनी आत्माओं को पीड़ित करोगे: महीने के नौवें दिन संध्या के समय, संध्या से लेकर संध्या तक, तुम अपने सैबथ को मनाओगे।

३३ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

३४ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, इस सातवें महीने का पंद्रहवाँ दिन प्रभु के प्रति एक सात दिनों के लिए तम्बूओं का भोज होगा। 

३५ पहले दिन पर एक पवित्र सम्मेलन होगा: तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे उस में।

३६ सात दिन तुम प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी आहुति अर्पित करोगे: आठवें दिन तुम्हारे प्रति एक पवित्र सम्मेलन होगा; और तुम प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी आहुति अर्पित करोगे: यह एक गम्भीर सभा है; और तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे उस में।

३७ यह प्रभु के वह भोज हैं, जिन्हें तुम पवित्र अधिवेशन घोषित करोगे, प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी आहुति अर्पित कर देने हेतु। एक जला-चढ़ावा, और एक भोज-चढ़ावा, एक बलि, और पेय-चढ़ावे, सभी कुछ उसके दिवस पर:

३८ प्रभु के सैबथों के अतिरिक्त, और तुम्हारे उपहारों के अतिरिक्त, और तुम्हारे समस्त प्रणों के अतिरिक्त, और तुम्हारे समस्त स्वैच्छिक चढ़ावों के अतिरिक्त, जिन्हें तुम प्रभु के प्रति अर्पित करते हो। 

३९ अवश्य ही सातवें महीने के पंद्रहवें दिन में, जब तुमने भूमी के फल को एकत्रित कर लिया है, तुम प्रभु के प्रति सात दिन एक भोज रखोगे: पहले दिन एक सैबथ होगा, और आठवें दिन एक सैबथ होगा।

४० और तुम पहले दिन स्वयं के लिए अच्छे वृक्षों की शाखाओं को ले लोगे, खजूर के पेड़ों की डालियाँ, और घने वृक्षों की शाखाएँ, और नदी के नम्रा पेड़; और तुम प्रभु के समक्ष सात दिन हर्ष मनाओगे।

४१ और तुम इसे प्रभु के प्रति एक भोज रखोगे सात दिन साल में। यह तुम्हारे लिए सदैवत्वता के लिए एक अध्यादेश होगा तुम्हारी पीढ़ियों में: तुम इसे सातवें महीने में मनाओगे।

४२ तुम सात दिन मण्डपों में वास करोगे; वह सभी जो जन्म से इस्राएल के हैं मण्डपों में वास करेंगे:

४३ ताकि तुम्हारी पीढ़ियाँ जान सकें कि मैंने इस्राएल की सन्तानों को मण्डपों में वास करवाया था, जब मैं उन्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ले आया था: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 

४४ और मूसा ने इस्राएल की सन्तानों को प्रभु के भोज वर्णित कर दिए। 




चौबीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों को आदेश दो, कि वह तुम्हारे पास उजाले हेतु कूटा हुआ शुद्ध जैतून का तेल ले आएँ, उन दीपकों को लगातार जलवाने के लिए।

साक्ष्य के परदे के बाहर, सभा के तम्बू में, हारुन उसे संध्या से लेकर प्रातः तक प्रभु के समक्ष लगातार व्यवस्थित करेगा: यह सदैवत्वता के लिए एक अध्यादेश होगा तुम्हारी पीढ़ियों में। 

वह प्रभु के समक्ष उन दीपकों को उस शुद्ध दीपाधार पर निरन्तर व्यवस्थित करेगा।

और तुम बारीक आटा लोगे, और उस से बारह छेद किए पराँठे पका लोगे: एक छेद किए पराँठे में दो-दसवें भाग होंगे। 

और तुम उन्हें दो पंक्तियों में स्थित करोगे, एक पंक्ति में छह, प्रभु के समक्ष उस शुद्ध मेज़ पर। 

और तुम प्रत्येक पंक्ति पर शुद्ध लोहबान रखोगे, ताकि वह एक स्मारक हेतु रोटी पर हो, एक अग्नी से निर्मित अहुती ही, प्रभु के प्रति। 

प्रत्येक सैबथ वह उसे निरन्तर प्रभु के समक्ष व्यवस्थित करेगा, इस्राएल की सन्तानों से लिया हुआ एक अनन्त प्रतिज्ञापत्र द्वारा।

और वह हारुन और उसके बेटों का होगा; और वह उसे पवित्र स्थान में खाएँगे: क्योंकि वह उसके प्रति अग्नी से निर्मित प्रभु की आहुतियों में से एक नित्य अध्यादेश द्वारा अति पवित्रतम है। 

१० और एक इस्राएली स्त्री का बेटा, जिसका पुत्र एक मिस्रवासी था, इस्राएल की सन्तानों के बीच बाहर निकला: और इस इस्राएली स्त्री का बेटा और इस्राएल का एक पुरुष, एक साथ झगड़ पड़े शिविर में; 

११ और उस इस्राएली स्त्री के बेटे ने प्रभु के नाम की निन्दा कर दी, और गाली दे दी। और वह उसे मूसा के पास ले आए: (और उसकी माँ का नाम शेलोमीत था, दान की प्रजाति के, डिबरी की बेटी:)

१२ और उन्होंने उसे कारावास में डाल दिया, ताकि प्रभु का मन उन्हें बतला दिया जाए। 

१३ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१४ उसे शिविर के बाहर निकाल लाओ जिसने गाली दी है; और उन सभी को जिन्होंने उसे सुना अपने हाथों को उसके सर पर रख लेने दो, और समस्त मण्डली को उस पर पथराव कर देने दो।

१५ और तुम इस्राएल की सन्तानों से बोलोगे, कहते हुए, जो कोई भी अपने ईश्वर को गाली देता है, अपना पाप ढोएगा।

१६ और वह जो प्रभु के नाम की निन्दा करता है, वह अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा, और समस्त मण्डली अवश्य ही उस पर पथराव करेगी: वह परदेशी भी, और वह जो भूमी में जन्मा है, जब वह प्रभु के नाम की निन्दा करता है, मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा। 

१७ और वह आदमी जो किसी भी व्यक्ति को मार डालता है मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१८ और वह जो किसी जानवर को मार देता है उसका भुक्तान कर देगा; जानवर के लिए जानवर।

१९ और यदि कोई पुरुष अपने पड़ौसी को कोई चोट पहुँचा देता है; जैसा उसने कर दिया है, वैसा ही उसके साथ कर दिया जाएगा;

२० अस्थि तोड़ देने के लिए उसका तोड़ना, आँख के लिए आँख, दाँत के लिए दाँत: जिस प्रकार उसने एक मनुष्य को चोट पहुँचाई है, उसी प्रकार उसके साथ पुनः कर दिया जाएगा।

२१ और वह जो किसी जानवर को मार देता है, उसे वापस लौटा देगा: और वह जो किसी मनुष्य की हत्या कर देता है, वह मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

२२ तुम एक ही रीती का नियम रखोगे, परदेशी के लिए भी, जिस प्रकार तुम्हारे अपने ही देश वासी के लिए: क्योंकि मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 

२३ और मूसा इस्राएल की सन्तानों से बोला, कि वह उसे शिविर से बाहर निकाल लाएँ जिसने गाली दे दी थी, और उस पर पत्थरों से पथराव कर दें। और इस्राएल की सन्तानों ने वैसा ही कर दिया जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दे दिया था। 



पच्चीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से सीनय पर्वत में बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम उस भूमी में जाओगे जिसे मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ, तब वह भूमी प्रभु के प्रति एक सैबथ रखेगी। 

छह साल तुम अपने खेत में बुआई करोगे, और छह साल तुम अपने अंगूर-खेत की छँटाई करोगे, और उसका फल एकत्रित करोगे;

परन्तु सातवें साल में भूमी के प्रति एक विश्राम का सैबथ होगा, प्रभु के लिए एक सैबथ: तुम ही अपने खेत में बुआई करोगे, ही अपने अंगूर-खेत की छँटाई।

वह जो अपने स्वयं से ही तुम्हारी फसल-कटाई से उगता है तुम नहीं काटोगे, ही अपनी लता के अंगूरों को अनछँटा एकत्रित करोगे: क्योंकि वह भूमी के प्रति एक विश्राम का वर्ष है।  

और भूमी का सैबथ तुम्हारे लिए भोजन होगा; तुम्हारे लिए, और तुम्हारे नौकर के लिए, और तुम्हारी नौकरानी के लिए, और तुम्हारे भाड़े के नौकर के लिए, और तुम्हारे परदेशी के लिए जो तुम्हारे संग अल्पवास करता है,

और तुम्हारे मवेशी के लिए, और उस जानवर के लिए जो तुम्हारी भूमी में हैं, उसकी समस्त उपज भोजन होगी। 

और तुम अपने लिए वर्षों के सात सैबथ गिनोगे, सात गुणा सात वर्ष; उन सात सैबथों के वर्षों का समय तुम्हारे लिए उनचास वर्ष होंगे।

तब तुम सातवें महीने के दसवें दिवस पर आनन्दोत्सव के चिंघाड़े को बजवाओगे, परिहार के दिवस पर तुम उस चिंघाड़े को अपनी समस्त भूमी के सर्वत्र में बजवादोगे। 

१० और तुम पचासवें वर्ष को पवित्र ठहराओगे, और तुम समस्त भूमी के सर्वत्र में उसके समस्त निवासियों को स्वतंत्रता घोषित कर दोगे: यह तुम्हारे प्रति एक आनन्दोत्सव होगा; और तुम प्रत्येक  पुरुष को उसके अपने अधिकार में वापस लौटा दोगे, और तुम प्रत्येक पुरुष को उसके परिवार में वापस लौटा दोगे। 

११ तुम्हारे प्रति वह पचासवाँ वर्ष एक आनन्दोत्सव होगा: तुम बोगे नहीं, ही उसकी कटाई करोगे जो स्वयं से उस में उगता है, ही उस में तुम अपनी लता के अंगूरों को अनछँटा एकत्रित करोगे।

१२ क्योंकि यह वह आनन्दोत्सव है; यह तुम्हारे प्रति पवित्र होगा: तुम खेत में से उसकी उपज में से खाओगे। 

१३ इस आनन्दोत्सव के वर्ष में तुम प्रत्येक पुरुष को उसके अधिकार में वापस लौटा दोगे।

१४ और यदि तुम अपने पड़ौसी को कुछ भी बेचते हो, या अपने पड़ौसी के हाथ से कुछ भी खरीदते हो, तुम एक दूसरे का दमन नहीं करोगे:

१५ आनन्दोत्सव के पश्चात के वर्षों की संख्यानुसार तुम अपने पड़ौसी से ख़रीदोगे, और फलों के वर्षों की संख्यानुसार वह तुम्हें बेचेगा:

१६ वर्षों की बहुगुणिततानुसार तुम उसके मूल्य को बढ़ाओगे, और वर्षों की लघुतानुसार तुम उसका मूल्य घटा दोगे: क्योंकि फलों के वर्षों की संख्यानुसार ही वह तुम्हें बेचता है।

१७ इसलिए तुम एक दूसरे का दमन नहीं करोगे; बल्कि तुम अपने ईश्वर के भय मानोगे: क्योंकि मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर।

१८ इसी कारण तुम मेरे अध्यादेशों को करोगे, और मेरे न्यायों को रखोगे, और उन्हें करोगे; और तुम भूमी में सुरक्षित बसोगे।

१९ और भूमी अपना फल उपजाएगी, और तुम संतुष्टि से खाओगे, और उस में सुरक्षित रहोगे।

२० और यदि तुम कहोगे, हम सातवें साल में क्या खाएँगे? देखो, हम तो बोएँगे ही नहीं, ही अपनी उपज को एकत्रित करेंगे: 

२१ तब मैं अपने आशीर्वाद को तुम्हारे प्रति छटे सात में आदेश दे दूँगा, और वह तीन सालों का फल उतपन्न कर देगी।

२२ और तुम आठवें साल में बोगे, और तथापि पुराने फल में से नौवें साल तक खाओगे; जब तक कि उसके फल नहीं उग जाते तुम पुराने भण्डार में से खाओगे।

२३ भूमी सदैवत्वता के लिए नहीं बेची जाएगी: क्योंकि भूमी मेरी है; क्योंकि तुम मेरे साथ परदेशी और अल्पवासी हो।

२४ और तुम्हारे अधिकार की समस्त भूमि में तुम भूमी के लिए एक मुक्तिभुक्तान प्रदान करोगे।

२५ यदि तुम्हारा भाई दरिद्र हो चुका हो, और उसने अपने अधिकार में से कुछ बेच डाला हो, और यदि उसके कुल में से कोई भी उसके मुक्तिभुक्तान हेतु आता है, तब वह उसका मुक्तिभुक्तान कर लेगा जो उसके भाई ने बेचा था। 

२६ और यदि उस पुरुष के पास कोई भी हो उसका मुक्तिभुक्तान कर देने हेतु, और स्वयं ही उसका मुक्तिभुक्तान कर सकता है;

२७ तब उसकी बिकरी के वर्षों को उसे गिन लेने दो, और उसका अधिकतर भाग उस पुरुष को पुनःस्थापित कर देने दो जिसे उसने बेचा था; ताकि वह अपने अधिकार में वापस लौट सके। 

२८ परन्तु यदि वह उसे उसके प्रति पुनःस्थापित नहीं कर सकता हो, तब वह जो बेच दिया गया था उसी के हाथ में आनन्दोत्सव के वर्ष तक रहेगा जिसने उसे खरीद लिया था: और आनन्दोत्सव में वह बाहर चला जाएगा, और वह अपने अधिकार में वापस लौट जाएगा।

२९ और यदि कोई पुरुष एक बसने वाला घर किसी दीवार-बँद-नगर में बेचता है, तब वह उसका 

मुक्तिभुक्तान एक सम्पूर्ण साल में कर सकता है उसकी बिकरी के पश्चात; एक पूरे साल में वह उसका मुक्तिभुक्तान कर सकता है। 

३० और यदि उसका एक पूर्ण वर्ष के समय में मुक्तिभुक्तान किया गया हो, तब वह घर जो उस

दीवार-बँद-नगर में है उसके प्रति सदैवत्वता के लिए स्थापित कर दिया जाएगा जिसने उसे खरीदा था उसकी पीढ़ी-दर-पीढ़ी तक: वह आनन्दोत्सव में बाहर नहीं निकलेगा।

३१ परन्तु उन गाँवों के वह घर जिन्हें कोई भी दीवार घेरे नहीं है, प्रदेश के खेतों समान ही गिन लिए जाएँगे: उनका मुक्तिभुक्तान किया जा सकता है, और वह आनन्दोत्सव में बाहर चले जाएँगे। 

३२ तथापि लेवी-वंशजों के नगर, और उनके अधिकार के नगरों के घरों का मुक्तिभुक्तान लेवी-वंशज किसी भी समय कर सकते हैं।

३३ और यदि कोई पुरुष लेवी-वंशजों से खरीदता है, तो वह घर जो बेचा गया था, और उसके अधिकार का नगर, आनन्दोत्सव में बाहर निकल जाएँगे: क्योंकि लेवी-वंशजों के नगरों के घर, इस्राएल की सन्तानों के बीच, उनके अधिकार के हैं।

३४ परन्तु उनके नगरों की सार्वजनिक भूमियों का खेत नहीं बेचा जाएगा; क्योंकि वह उनका अन्तहीन अधिकार है।

३५ और यदि तुम्हारा भाई दरिद्र हो चुका हो, और तुम्हारे साथ उसका हाथ फिसल जाए; तब तुम उसे सम्भालोगे: हाँ भई, भले ही वह कोई परदेशी हो, या कोई अल्पवासी; ताकि वह तुम्हारे संग जी सके।

३६ उस से कोई भी सूद, या उपार्जित-सूद मत लेना: बल्कि अपने ईश्वर का भय मानना; ताकि तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ जी सके।

३७ तुम उसे अपना पैसा सूद पर नहीं दोगे, ही अपनी खाद्य-सामग्री को उसे उपार्जित-सूद पर उधार दोगे। 

३८ मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल ले आया, तुम्हें कनान की भूमी प्रदान कर देने हेतु, और तुम्हारा ईश्वर बन जाने हेतु।

३९ और यदि तुम्हारा भाई जो तुम्हारे साथ बसता है दरिद्र हो चुका हो, और तुम्हें बेच दिया गया हो;  तुम उसे किसी बँधवा-नौकर समान सेवा करने हेतु विवश नहीं करोगे:

४० बल्कि एक भाड़े के नौकर समान, और एक अल्पवासी के समान, वह तुम्हारे साथ रहेगा, और तुम्हारी सेवा आनन्दोत्सव के वर्ष तक करेगा:

४१ और तब वह तुम से विदा ले लेगा, दोनो वह और उसकी सन्तानें उसके साथ, और अपने स्वयं के ही परिवार के पास वह वापस लौट जाएगा, और अपने पित्रों के अधिकार के पास वह वापस लौट जाएगा। 

४२ क्योंकि वह मेरे नौकर हैं, जिन्हें मैं मिस्र की भूमी में बाहर निकाल कर ले आया: वह बँधवा-नौकरों समान नहीं बेचे जाएँगे।

४३ तुम उस पर कठोरता से शासन नहीं करोगे; बल्कि अपने ईश्वर से डरोगे।

४४ दोनो तुम्हारे बँधवा-नौकर, और तुम्हारी बँधवा-नौकरानियाँ, जो तुम्हारे पास होंगे, उन अन्यप्रजातियों के होंगे जो तुम्हारे आस पास चारों ओर हैं; उन में से तुम बँधवा-नौकर और बँधवा-नौकरानियाँ ख़रीदोगे।

४५ इसके अतिरिक्त उन परदेशियों की सन्तानों में से जो तुम्हारे बीच अल्पवासी हैं, उन में से तुम ख़रीदोगे, और उनके परिवारों में सो जो तुम्हारे साथ हैं, जिन्हें उन्होंने जनना तुम्हारी भूमी में: और वह तुम्हारे अधिकार में होंगे।

४६ और तुम उन्हें अपनी सन्तानों के लिए तुम्हारे पश्चात एक विरासत के रूप में ले लोगे, उन्हें एक अधिकार के लिए विरासत में ले लेने हेतु; वह सदैवत्वता के लिए तुम्हारे बँधवा-नौकर होंगे: परन्तु अपने भाई-जनो इस्राएल की सन्तानों पर, तुम एक दूसरे पर कठोरता से शासन नहीं करोगे।

४७ और यदि कोई अल्पवासी अथ्वा परदेशी तुम्हारे साथ समृद्ध बन जाए, और तुम्हारा भाई जो उसके साथ बसता हो दरिद्र बन चुका हो, और स्वयं को उस परदेशी अथ्वा अल्पवासी को बेच दे तुम्हारे साथ, या उस परदेशी के परिवार के किसी सदस्य को:

४८ उसके बेचे जाने के पश्चात उसका पुनः मुक्तिभुक्तान किया जा सकता है; उसके भाई-जनो में से एक उसका मुक्तिभुक्तान कर सकता है:

४९ या उसका चाचा-मामा, या उसके चाचे-मामे का बेटा, उसका मुक्तिभुक्तान कर सकता है, या कोई भी जो उसके परिवार में से उसका निकट कुलवाला हो उसका मुक्तिभुक्तान कर सकता हैं; या यदि वह समर्थ हो, वह अपने स्वयं का मुक्तिभुक्तान कर सकता है।

५० और वह उसके साथ संगणन करेगा जिसने उसे खरीदा था, उस साल से लेकर जब उसे उसको बेचा गया था, आनन्दोत्सव के वर्ष तक: और उसकी बिकरी का मूल्य उन सालों के अनुसार होगा, एक भाड़े के नौकर के समयानुसार वह उसके साथ होगा। 

५१ यदि कई साल अभी बचे हुए हों, उनके अनुसार ही वह उसके मुक्तिभुक्तान का मूल्य पुनः दे देगा उस पैसे में से जिस से कि वह खरीदा गया था। 

५२ और यदि बस थोड़े से ही साल अभी बचे हुए हों आनन्दोत्सव के वर्ष तक, तब वह उसके साथ संगणन करेगा, और उसके सालोंनुसार वह उसे उसके मुक्तिभुक्तान का मूल्य पुनः दे देगा।

५३ और एक वार्षिक भाड़े के नौकर समान ही वह उसके साथ होगा: और वह दूसरा उस पर कठोरता से शासन नहीं करेगा तुम्हारी दृष्टि में। 

५४ और यदि उसका इन सालों में मुक्तिभुक्तान हुआ हो, तब वह आनन्दोत्सव के वर्ष में बाहर निकल जाएगा, दोनो वह, और उसकी सन्ताने उसके साथ।

५५ क्योंकि मेरे प्रति ही इस्राएल की सन्ताने नौकर हैं; वह मेर्रे नौकर हैं जिन्हें मैं मिस्र की भूमी में से बाहर ले आया: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 



छब्बीसवाँ अध्याय।


तुम अपने लिए तो कोई मूर्तियाँ बनाओगे, उत्कीर्ण प्रतिमा, ही तुम कोई खड़ी हुई प्रतिमा स्थापित करोगे, ही तुम अपनी भूमी में कोई भी पत्थर की प्रतिमा स्थापित करोगे, उसके प्रति झुक जाने हेतु; क्योंकि मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 

तुम मेरे सब्बाथों को रखोगे, और मेरे पुण्य-स्थान का भय मानोगे: मैं प्रभु हूँ।

यदि तुम मेरे अध्यादेशों में चलोगे, और मेरे आदेशों का पालन करोगे, और उन्हें करोगे;

तब मैं तुम्हें ऋतुनुसार वर्षा प्रदान करूँगा, और भूमी अपनी उपज की वृद्धी करेगी, और खेत के पेड़ अपना फल उपजाएँगे। 

और तुम्हारा दंवरीकाल अंगूर के संचयकाल तक पहुँच जाएगा, और अंगूर का संचयकाल बुआई के समय तक पहूँच जाएगा: और तुम अपनी रोटी संतुष्टि से खाओगे, और अपनी भूमी में सुरक्षित निवास करोगे।

और मैं भूमी में शान्ति प्रदान करूँगा, और तुम नीचे लेटोगे, और कोई भी तुम्हें नहीं डराएगा: और मैं भूमी में से बुरे जानवरों को बाहर हटा दूँगा, ही तुम्हारी भूमी को तलवार पार करती हुई जाएगी।

और तुम अपने शत्रुओं का पीछा करोगे, और वह तुम्हारे सम्मुख तलवार से गिर पड़ेंगे।

और तुम में से पाँच, सौ का पीछा करेंगे, और तुम में से सौ दस हज़ार का पीछा करेंगे: और तुम्हारे शत्रु तुम्हारे सम्मुख तलवार से गिर पड़ेंगे।

क्योंकि मैं तुम्हारी ओर अन्मुख हो जाऊँगा, और तुम्हें फलदायी बनाऊँगा, और तुम्हें बहुगणित करूँगा, और तुम्हारे साथ अपना प्रतिज्ञा-पत्र स्थापित कर दूँगा।  

१० और तुम पुराने भण्डार को खाओगे, और नए के कारण तुम उस पुराने को हटा दोगे।

११ और मैं अपने तम्बू को तुम्हारे बीच स्थापित कर दूँगा: और मेरा आत्मा तुमसे घृणा नहीं करेगा।

१२ और मैं तुम्हारे बीच चलूँगा, और तुम्हारा ईश्वर बन जाऊँगा, और तुम मेरा गण बन जाओगे।  

१३ मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल कर ले आया, ताकि तुम उनके बँधवा-नौकर बनो; और मैंने तुम्हारे जुए के बन्धनों को तोड़ डाला है, और तुम्हें सीधा खड़ा कर चलाया है;

१४ परन्तु यदि तुम मेरा श्रवण नहीं करोगे, और इन समस्त आदेशों को नहीं करोगे;

१५ और यदि तुम मेरे अध्यादेशों का तिरस्कार करोगे, या यदि तुम्हारी आत्मा मेरे न्याय-सिद्धांतों से घृणा कर बैठे, ताकि तुम मेरे समस्त आदेशों को नहीं करोगे, बल्कि तुम मेरे प्रतिज्ञा-पत्र को तोड़ देते हो: 

१६ तो मैं भी यही तुम्हारे प्रति कर डालूँगा; मैं तुम पर आतंक नियुक्त कर दूँगा, क्षय-रोग, और जलती हुई ज्वरग्रस्ती, जो आँखों की खपत कर बैठेगी, और मन मुरझा देगी: और तुम व्यर्थता में अपना बीज बोगे, क्योंकि तुम्हारे शत्रु उसे खा जाएँगे।

१७ और मैं तुमसे विमुख हो जाऊँगा, और तुम अपने शत्रुओं के सम्मुख मार डाल दिए जाओगे: वह जो तुमसे घृणा करते हैं तुम पर राज करेंगे; और तुम भाग-खड़े होगे जब कोई भी तुम्हारा पीछा नहीं करेगा।

१८ और यदि तुम तब भी इन सब के कारण मेरा श्रवण नहीं करोगे, तब मैं तुम्हें सात गुणा और दण्ड दूँगा तुम्हारे पापों हेतु। 

१९ और मैं तुम्हारी शक्ती का अहंकार तोड़ डालूँगा; और मैं तुम्हारे स्वर्ग को लोह समान, और तुम्हारी धरती को पीतल समान बना डालूँगा:

२० और तुम्हारा बल व्यर्थ ही खर्च हो जाएगा: क्योंकि तुम्हारी भूमी अपनी उपज की वृद्धी नहीं देगी, ही भूमी के वृक्ष अपने फलों को उपजाएँगे।

२१ और यदि तुम मेरे विपरीत चलोगे, और मेरा श्रवण नहीं करोगे; मैं तुम पर सात गुणा और महामारियाँ ले आऊँगा तुम्हारे पापोनुसार। 

२२ मैं तुम्हारे बीच जँगली जानवर भी भेज दूँगा, जो तुमसे तुम्हारे बच्चों को उठा ले जाएँगे, और तुम्हारे मवेशी का विनाश कर डालेंगे, और तुम्हारी संख्या घटा देंगे; और तुम्हारे पथ वीरान रह जाएँगे।

२३ और यदि तुम मेरे द्वारा इन बातों से नहीं सुधरोगे, बल्कि मेरे प्रति विपरीतता से चलोगे;

२४ तब मैं भे तुम्हारे प्रती विपरीतता से चलूँगा, और तुम्हें सात गुणा और दण्ड दूँगा तुम्हारे पापों के लिए।

२५ और मैं तुम पर एक तलवार ले आऊँगा, जो मेरे प्रतिज्ञा-पत्र के कलह का प्रतिषोध लेगी: और जब तुम एक साथ अपने नगरों में एकत्रित होगे, मैं तुम्हारे बीच महामारी भेज दूँगा; और तुम शत्रु के हाथ में प्रदान कर दिए जाओगे।

२६ और जब मैं तुम्हारी रोटी का लट्ठ तोड़ चुकूँगा, दस स्त्रियाँ तुम्हारी रोटी एक चूल्हे में पकाएँगी, और वह तुम्हें तुम्हारी रोटी दोबारा भारानुसार वितरित करेंगी: और तुम खाओगे, और तृप्त नहीं होगे।

२७ और यदि तुम इस सब के कारण मेरा श्रवण नहीं करोगे, बल्कि मेरे विपरीत चलोगे;

२८ तब मैं भी तुम्हारे विपरीत आक्रोश में चलूँगा; और मैं, यहाँ तक कि मैं ही, तुम्हारा सात गुणा और, तुम्हारे पापों के लिए कशाताड़न करूँगा।

२९ और तुम अपने बेटों का माँस खाओगे, और अपनी बेटियों का माँस तुम खाओगे।

३० और मैं तुम्हारे उच्च स्थानों का विध्वंस कर डालूँगा, और तुम्हारी प्रतिमाओं को नीचे काट डालूँगा, और तुम्हारे शवों को तुम्हारी मूर्तियों के शवों पर फैंक डोंगा, और मेरा आत्मा तुमसे घृणा करेगा।

३१ और मैं तुम्हारे नगरों को उजाड़ बना दूँगा, और पुण्य-स्थानों को निर्जन कर दूँगा, और मैं तुम्हारी मधुर सुगन्धों की स्वादिष्टता को नहीं सूँघूँगा।

३२ और मैं भूमी को निर्जनता में ले आऊँगा: और तुम्हारे शत्रु जो उस में बसते हैं इस पर आश्चर्यचकित रह जाएँगे।

३३ और मैं तुम्हें अन्यप्रजातियों के बीच बिखेर दूँगा, और तुम्हारे पीछे एक तलवार खींच लूँगा: और तुम्हारी भूमी उजाड़ बन जाएगी, और तुम्हारे नगर निर्जन।

३४ तब भूमी अपने सैबथों का आनन्द उठाएगी, जब तक वह उजाड़ पड़ी रहती है, और तुम अपने शत्रुओं की भूमी में होगे; तब भूमी विश्राम करेगी, और अपने सैबथों का आनन्द उठाएगी।

३५ जब तक वह उजाड़ पड़ी रहती है; क्योंकि उसने तुम्हारे सैबथों में विश्राम नहीं किया, जब तुम उस पर बसते थे।

३६ और उन पर जो तुम में से जीवित बचे रह गए हैं, मैं एक कायरता भेज दूँगा उनके उनके हृदयों में उनके शत्रुओं की भूमी में; और एक हिलते हुए पत्ते की ध्वनि उनका पीछा करेगी; और वह भाग-खड़े होंगे, मानो कि किसी तलवार से भागते हुए; और वह गिर पड़ेंगे जब कोई भी उनका पीछा नहीं कर रहा होगा।

३७ और वह एक दूसरे पर गिर पड़ेंगे, मानो कि किसी तलवार के सम्मुख, जब कोई भी पीछा नहीं कर रहा होता है: और तुम्हारे पास तुम्हारे शत्रुओं के समक्ष खड़े रहने की कोई भी शक्ती नहीं होगी। 

३८ और तुम अन्यप्रजातियों के बीच मिट जाओगे, और तुम्हारे शत्रुओं की भूमी तुम्हें खा जाएगी। 

३९ और तुम में से जो बचे रह गए हैं, अपनी अधर्मताओं में तड़पते हुए क्षीण होते चले जाएँगे तुम्हारे शत्रुओं की भूमियों में; और उनके पित्रों के अधर्मताों में भी वह उनके साथ तड़पते हुए क्षीण होते चले जाएँगे।

४० यदि वह स्वीकार कर लेंगे अपनी अधर्मता, और अपने पित्रों की अधर्मता, अपने उल्लंघन के साथ जो उल्लंघन उन्होंने मेरे विरुद्ध कर दिया है, और कि वह मेरे विपरीत भी चल लिए हैं; 

४१ और कि मैं भी उनके प्रति विपरीत चल लिया था, और उन्हें उनके शत्रुओं की भूमी में ले आया था; यदि तब उनके बेख़तनित हृदय विनम्र बन जाएँ, और वह तब अपनी अधर्मता का दण्ड स्वीकार कर लें:

४२ तब मैं याकूब के साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र का स्मरण करूँगा, और इसहाक के साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र का भी, और अब्राहम के साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र को भी मैं स्मरण में लाऊँगा; और मैं भूमी का स्मरण करूँगा। 

४३ वह भूमी भी उनसे छोड़ दी जा चुकी होगी, और अपने सैबथों का आनन्द उठाएगी, बंजरपने में उनके बिना पड़े-पड़े: और वह अपनी अधर्मता के दण्ड को स्वीकार करेंगे: क्योंकि, यहाँ तक कि चूँकि ही, उन्होंने मेरे न्याय-सिद्धांतों का तिरस्कार किया, और चूँकि उनकी आत्मा ने मेरे अध्यादेशों से घृणा की।

४४ और तब भी इस सभी के होते-होते, जब वह अपने शत्रुओं की भूमी में होंगे, मैं उन्हें दूर नहीं फेंकूँगा, ही मैं उनसे घृणा करूँगा, उन्हें सरासर नष्ट कर देने हेतु, और उनके साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र को तोड़ देने हेतु: क्योंकि मैं प्रभु हूँ उनका ईश्वर। 

४५ परन्तु मैं उनके वास्ते उनके पूर्वजों के प्रतिज्ञा-पत्र का स्मरण करूँगा, जिन्हें मैं मिस्र की भूमी में से काफिरों की दृष्टि में बाहर निकाल लाया, ताकि मैं उनका ईश्वर बन सकूँ: मैं प्रभु हूँ।

४६ यही हैं वह अध्यादेश और न्याय-सिद्धान्त और नियम, जिन्हें प्रभु ने अपने और इस्राएल की सन्तानों के बीच मूसा के हाथ सीनय पर्वत में बनाए। 



सत्ताईसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब कोई पुरुष कोई विशेष प्रण लेता है, वह लोग प्रभु के लिए होंगे तुम्हारे मूल्यांकनानुसार।

और नर के लिए तुम्हारा मूल्यांकन बीस वर्ष की आयु से लेकर साठ वर्ष की आयु तक, तुम्हारा मूल्यांकन ही चाँदी के पचास शेक्ल होगा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार।

और यदि वह एक नारी हो, तब तुम्हारा मूल्यांकन तीस शेक्ल होगा।

और यदि वह पाँच वर्ष की आयु से लेकर बीस वर्ष की आयु तक भी हो, तब तुम्हारा मूल्यांकन नर के लिए बीस शेक्ल होगा, और नारी के लिए दस शेक्ल।

और यदि वह एक महीने की आयु से लेकर पाँच वर्ष की आयु तक भी हो, तब तुम्हारा मूल्यांकन नर के लिए पाँच शेक्ल होगा, और नारी के लिए तुम्हारा मूल्यांकन तीन शेक्ल होगा।

और यदि वह साठ वर्ष की आयु से लेकर और ऊपर हो; यदि वह कोई नर हो, तब तुम्हारा मूल्यांकन पन्द्रह शेक्ल होगा, और नारी के लिए दस शेक्ल होगा।

परन्तु यदि वह तुम्हारे मूल्यांकन से दरिद्र हो, तब वह स्वयं को पुरोहित के समक्ष प्रस्तुत करेगा, और वह पुरोहित उसका मूल्यांकन करेगा; उसी के सामर्थ्यानुसार जिसने प्रण लिया था वह पुरोहित उसका मूल्यांकन कर देगा।

और यदि वह कोई जानवर हो, जिसका कि लोग प्रभु के प्रति एक चढ़ावा लाते हैं, इन में से वह सभी कुछ जो कोई भी प्रभु के प्रति प्रदान करता है, पवित्र होगा। 

१० वह उसे बदलेगा नहीं, ही उसे अदल-बदल करेगा, एक अच्छा बुरे के लिए, या एक बुरा अच्छे के लिए: और यदि वह जानवर के लिए जानवर की अदली-बदली करता भी है, तब वह और उसका अदल-बदल पवित्र होगा।

११ और यदि वह कोई भी अस्वच्छ जानवर हो, जिसका कि वह प्रभु के प्रति चढ़ावा नहीं चढ़ाते हैं, तब वह उस जानवर को पुरोहित के सम्मुख प्रस्तुत करेगा: 

१२ और वह पुरोहित उसका मूल्यांकन करेगा, कि यदि वह अच्छा है या बुरा: जिस प्रकार तुम उसका मूल्यांकन कर दोगे, जो पुरोहित हो, वैसा ही वह होगा।

१३ परन्तु यदि वह उसका कतई भी मुक्तिभक्तान करेगा, तब वह उसका एक पाँचवाँ भाग तुम्हारे मूल्यांकन में जोड़ देगा।

१४ और जब कोई पुरुष अपने घर को पुनीत ठहराएगा प्रभु के प्रति पवित्र हो जाने हेतु, तब वह पुरोहित उसका मूल्यांकन करेगा, कि यदि वह अच्छा है या बुरा: जैसा भी वह पुरोहित उसका मूल्यांकन करेगा, वैसा ही वह माना जाएगा।

१५ और यदि अपने घर को पुनीत ठहरा देने वाला अपने घर का मुक्तिभुक्तान करेगा, तब वह तुम्हारे मूल्यांकन के पैसे का पाँचवाँ भाग उस में जोड़ देगा, और वह उसका बन जाएगा।

१६ और यदि कोई पुरुष प्रभु के प्रति अपने अधिकार के खेत का कोई भाग पुनीत ठहराएगा, तब तुम्हारा मूल्यांकन उसके बीजानुसार होगा: जौ के बीज के एक होमर का मूल्य चाँदी के पचास शेक्ल होगा।

१७ यदि वह अपने खेत को आनन्दोत्सव के वर्ष से पुनीत ठहराता है, तुम्हारे ही मूल्यांकनानुसार ही वह माना जाएगा। 

१८ परन्तु यदि वह अपने खेत को आनन्दोत्सव के वर्ष के पश्चात पुनीत ठहराता है, तब वह पुरोहित उसके प्रति उन वर्षोंनुसार उस पैसे को गिन लेगा जो बचे रह गए हैं, आनन्दोत्सव के वर्ष के साल तक ही, और वह तुम्हारे मूल्यांकन में से घटा दिया जाएगा। 

१९ और यदि उस खेत को पुनीत ठहराने वाला किसी भी प्रकार से उसका मुक्तिभुक्तान करता है, तब वह तुम्हारे मूल्यांकन के पैसे का पाँचवाँ भाग उस में जोड़ देगा, और वह उसका हो जाएगा।

२० और यदि वह उस खेत का मुक्तिभुक्तान नहीं करता है, या उसने उस खेत को किसी अन्य पुरुष को बेच दिया हो, उसका अब और मुक्तिभुक्तान नहीं किया जाएगा।

२१ परन्तु वह खेत, जब वह आनन्दोत्सव के वर्ष में बाहर जाता है, प्रभु के प्रति पवित्र होगा, एक समर्पित खेत समान; उस पर अधिकार पुरोहित का होगा। 

२२ और यदि कोई पुरुष प्रभु के प्रति उस खेत को पुनीत ठहरता है, जिसे उसने खरीदा हुआ है, जो उसके अधिकार के खेतों में से नहीं है;

२३ तब वह पुरोहित उसके प्रति तुम्हारे मूल्यांकन के मोल को गिन लेगा, आनन्दोत्सव के वर्ष के साल तक भी: और वह तुम्हारे मूल्यांकन को उस दिवस पर दे देगा, एक पवित्र वस्तु समान प्रभु के प्रति।

२४ आनन्दोत्सव के वर्ष के साल में वह खेत उसे वापस लौट जाएगा जिस से कि वह खरीदा गया था, उसी को ही जिसके पास उस भूमी का अधिकार था।

२५ और तुम्हारे समस्त मूल्यांकन पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार होंगे: बीस गीरे वह शेक्ल होगा।

२६ बस केवल जानवरों का पहलौठा, जो प्रभु का पहलौठा होना चाहिए, कोई भी पुरुष उसे पुनीत नहीं ठहराएगा: भले ही साँड, या भेड़ हो: वह प्रभु का है। 

२७ और यदि वह किसी अस्वच्छ जानवर का हो, तब वह उसका मुक्तिभुक्तान तुम्हारे मूल्यांकनानुसार करेगा, और उसका पाँचवाँ भाग उसे जोड़ देगा: या यदि उसका मुक्तिभुक्तान हुआ हो, तब वह बेच दिया जाएगा तुम्हारे मूल्यांकनानुसार।

२८ तथापि किसी भी समर्पित वस्तु को, जिसे कोई पुरुष, प्रभु के प्रति समर्पित करेगा, उस सब में से जो उसके पास है, दोनो मनुष्य और जानवर में से, और उसके अधिकार के खेत में से, बेचा, या मुक्ति नहीं किया जाएगा: प्रत्येक समर्पित वस्तु प्रभु के प्रति अति-पवित्रतम है। 

२९ कोई भी समर्पित, जो मनुष्यों में से समर्पित किया जाएगा, मुक्त नहीं छुड़ाया जाएगा; बल्कि अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा। 

३० और भूमी का समास्त दसवाँ भाग, भले ही भूमी के बीज का, या वृक्ष के फल का, प्रभु का है: वह प्रभु के प्रति पवित्र है।

३१ और यदि कोई पुरुष कतई भी अपने दसवें भाग में से कुछ भी मुक्त छुड़वाता है, वह उस में उसका पाँचवाँ भाग जोड़ देगा।

३२ और झुण्ड, या पशु-समूह के दसवें भाग के समबन्ध में, जो कुछ भी छड़ी के नीचे से जाता, दसवाँ भाग प्रभु के प्रति पवित्र होगा। 

३३ वह नहीं ढूँढेगा यदि वह अच्छा हो या बुरा, ही वह उसकी अदल-बदल करेगा: और यदि वह उसे कतई भी अदलता-बदलता है, तब दोनो वह, और उसकी अदली-बदली पवित्र होंगे; उसका मुक्तिभक्तान नहीं किया जाएगा।

३४ यही वह आदेश हैं, जिन्हें प्रभु ने मूसा को आदेशित किए थे सीनय पर्वत में, इस्राएल की सन्तानों के लिए। 


०२/२०/२०२५: 

















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