जन-गणना। पुराना अनुबंध। (Numbers)


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पहला अध्याय।


और प्रभु सभा के तम्बू में, मूसा से सीनय के जँगली-क्षेत्र में बोले, दूसरे महीने के पहले दिन पर, उस दूसरे वर्ष में, मिस्र की भूमी में से उनके बाहर निकल जाने के पश्चात, कहते हुए, 

तुम इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा की गणना करो, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानोनुसार, उनके नामों की संख्या के साथ, प्रत्येक पुरुष की गणनानुसार।

बीस वर्ष की आयु से लेकर और उस से अधिक, वह सभी जो इस्राएल में युद्ध पर जाने में सक्षम हैं: तुम और हारुन उन्हें गिन लोगे उनकी सेनाओंनुसार।

और तुम्हारे साथ प्रत्येक प्रजाति का एक पुरुष होगा; प्रत्येक अपने पित्रों के घराने का प्रमुख।

और यह हैं उन पुरुषों के नाम जो तुम्हारे साथ खड़े होंगे: रूबेन की प्रजाति से; शेदेउर का बेटा एलिसुर।

शिमोन से: ज़ुरिशद्दय का बेटा शलुमिएल।

यहूदा से; अम्मीनादाब का बेटा नहशोन।

इस्सकार से; ज़ूअर का बेटा नेतनील।

ज़बूलून से; हेलोन का बेटा एलिआब।

१० यूसुफ़ की सन्तानों से: ईफ्रैम से;  अम्मिहुद का बेटा एलिशामा: मनश्‍शे से; पदासुर का बेटा गमैलियल।

११ बिन्यामिन से; गिदोनी का बेटा अबीदन।

१२ दान से; अमिशद्दय का बेटा अहिएज़र।

१३ आशेर से; ओक्रन का बेटा पगिएल।

१४ गाद से; रूएल का बेटा एलियसाफ।

१५ नफ्ताली से; एनन का बेटा अहीर।

१६ यही सभा के सुख्यात थे, अपने पित्रों की प्रजातियों के मुखिया, इस्राएल में सहस्त्रों के प्रमुख।

१७ और मूसा और हारुन ने इन पुरुषों को लिया जो अपने नामों से स्पष्टता से व्यक्त हैं:

१८ और उन्होंने समस्त सभा को दूसरे महीने के पहले दिन एक साथ एकत्रित कर लिया, और उन्होंने अपनी वंशावलियों को अपने परिवारोंनुसार, अपने पित्रों के घरानो से, अपने नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, उनकी गणना से, घोषित कर दिया।

१९ जैसे प्रभु ने मूसा को आदेश दिया, वैसा उसने उन्हें सीनय के जँगली-क्षेत्र में गिन लिया।

२० और इस्राएल के ज्येष्ठ बेटे, रूबेन की सन्तानें, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, उनके नामों की संख्यानुसार, उनकी गणना से, प्रत्येक नर बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

२१ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, रूबेन की प्रजाति में से ही, छियालीस हज़ार पाँच सौ थे।

२२ शिमोन की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, वह जिनकी उन में गिनती की गई थी, नामों की संख्यानुसार, उनकी गणना से, प्रत्येक नर बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

२३ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, शिमोन की प्रजाति में से ही, उनसठ हज़ार तीन सौ थे।

२४ गाद की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

२५ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, गाद की प्रजाति में से ही, पैंतालीस हज़ार छह सौ पचास थे।

२६ यहूदा की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

२७ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, यहूदा की प्रजाति में से ही, सत्तर हज़ार छह सौ थे।

२८ इस्सकार की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

२९ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, इस्सकार की प्रजाति में से ही, चऊवन हज़ार चार सौ थे।

३० ज़बूलून की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

३१ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, ज़बूलून की प्रजाति में से ही, सत्तावन हज़ार चार सौ थे।

३२ युसुफ की सन्तानों में से, ईफ्रैम की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

३३ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, ईफ्रैम की प्रजाति में से ही, चालीस हज़ार पाँच सौ थे।

३४ मनश्‍शे की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

३५ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, मनश्‍शे की प्रजाति में से ही, बत्तीस हज़ार दो सौ थे।

३६ बिन्यामिन की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

३७ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, बिन्यामिन की प्रजाति में से ही, पैंतीस हज़ार चार सौ थे।

३८ दान की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

३९ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, दान की प्रजाति में से ही, बासठ हज़ार सात सौ थे।

४० आशेर की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

४१ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, आशेर की प्रजाति में से ही, इकतालीस हज़ार पाँच सौ थे।

४२ नफ्ताली की सन्तानों में से, उनकी पीढ़ियोंनुसार, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घरानो से, नामों की संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

४३ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, नफ्ताली की प्रजाति में से ही, तरेपन हज़ार चार सौ थे।

४४ यही हैं वह जिन्हें जिन लिया गया था, जिन्हें मूसा और हारुन ने गिना, और इस्राएल के अध्यक्षों ने, बारह पुरुष होते हुए: प्रत्येक अपने पित्रों के घराने के लिए था।

४५ सो वह सभी थे जिनकी गणना की गई थी इस्राएल की सन्तानों में से, उनके पित्रों के घरानो से, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, सभी जो युद्ध पर जाने में सक्षम थे; 

४६ यह सभी जिनकी गिनती कर ली गई थी छह सौ तीन हज़ार पाँच सौ पचास थे।

४७ परन्तु लेवीवंशजों को उनके पित्रों की प्रजातिनुसार नहीं गिना गया था उनके बीच। 

४८ क्योंकि प्रभु ने मूसा से बोल दिया था, कहते हुए,

४९ तुम केवल लेवी की प्रजाति की जन-गणना नहीं करोगे, ही उनका जोड़ करोगे इस्राएल की सन्तानों के बीच:

५० बल्कि तुम लेवी-वंशजों को साक्ष्य के तम्बू पर, और उसके समस्त पात्रों पर, और उसकी समस्त वस्तुओं पर नियुक्त कर दोगे: वह तम्बू को उठाएँगे, और उसके समस्त पात्रों को; और वह उसके प्रति सेवा करेंगे, और तम्बू की चारों ओर डेरा डालेंगे।

५१ और जब तम्बू यात्रा पर निकलेगा, लेवी-वंशज उसे नीचे ली आएँगे: और जब तम्बू को गाढ़ा जाना होगा, लेवी-वंशज उसे ऊपर खड़ा कर देंगे: और वह परदेशी जो निकट आता है मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

५२ और इस्राएल की सन्तानें अपने तम्बुओं को, प्रत्येक पुरुष स्वयं के तम्बू से, और प्रत्येक पुरुष स्वयं के झण्डे से, उनकी सेनाओं के सर्वत्र में, गाढ़ देंगे।

५३ परन्तु लेवी-वंशज साक्ष्य के तम्बू के चारों ओर डेरा डालेंगे, ताकि इस्राएल की सन्तानों की सभा पर कोई आक्रोश आए: और लेवी-वंशज साक्ष्य के तम्बू का प्रभार रखेंगे।

५४ और इस्राएल की सन्तानों ने उस सभी के अनुसार किया जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, वैसा ही उन्होंने कर दिया। 



दूसरा अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों का प्रत्येक पुरुष अपने ही झण्डे से डेरा डालेगा, अपने पित्रों के घराने के ध्वज के साथ: सभा के तम्बू के चारों ओर दूर, वह डेरा डालेंगे।

और पूर्व की ओर, सूर्य के उदय होने की ओर, यहूदा के शिविर के झण्डे वाले अपनी सेनाओं के सर्वत्र में डेरा डालेंगे: और अम्मीनादाब का बेटा नहशोन यहूदा की सन्तानों का कप्तान होगा।

और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, सत्तर हज़ार छह सौ थे।

और वह जो उसके साथ सट कर डेरा डालते हैं, इस्सकार की प्रजाति के होंगे: और ज़ूअर का बेटा नेतनील इस्सकार की सन्तानों का कप्तान होगा।

और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, चऊवन हज़ार चार सौ थे। 

फिर ज़बूलून की प्रजाति: और हेलोन का बेटा एलिआब ज़बूलून की सन्तानों का कप्तान होगा।

और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, सत्तावन हज़ार चार सौ थे।

और वह सभी जो यहूदा के शिविर में गिने गए थे, एक सौ छियासी हज़ार चार सौ थे, उनकी सेनाओं के सर्वत्र में। यह सर्व प्रथम यात्रा पर निकलेंगे।

१० दक्षिण की ओर रूबेन के शिविर का झण्डा होगा उनकी सेनाओंनुसार: और रूबेन की सन्तानों का कप्तान शेदेउर का बेटा एलिसुर होगा।

११ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, छियालीस हज़ार पाँच सौ थे।

१२ और वह जो उसके साथ सट कर डेरा डालेंगे, शिमोन की प्रजाति के होंगे: और ज़ुरिशद्दय का बेटा शलुमिएल शिमोन की सन्तानों का कप्तान होगा।

१३ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, उनसठ हज़ार तीन सौ थे।

१४ फिर गाद की प्रजाति: और गाद के बेटों का कप्तान रूएल का बेटा एलियसाफ होगा।

१५ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, पैंतालीस हज़ार छह सौ पचास थे।

१६ वह सभी जो रूबेन के शिविर में गिने गए थे, एक सौ इक्यावन हज़ार चार सौ पचास थे, उनकी सेनाओं के सर्वत्र में। और यह दूसरे क्रम में प्रस्थान करेंगे।

१७ फिर सभा का तम्बू यात्रा पर प्रस्थान करेगा लेवी-वंशजों के शिविर के साथ, पड़ाव के बीच में: जिस प्राकार वह डेरा डालते हैं, उसी प्रकार वह प्रस्थान करेंगे, प्रत्येक पुरुष अपने स्थान पर उनके झण्डोंनुसार।

१८ पश्चिम की ओर ईफ्रैम के शिविर का झण्डा होगा उनकी सेनाओंनुसार: और ईफ्रैम के बेटों का कप्तान अम्मिहुद का बेटा एलिशामा होगा।

१९ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, चालीस हज़ार पाँच सौ थे।

२० और उसके साथ मनश्‍शे की प्रजाति होगी: और मनश्‍शे के बेटों का कप्तान पदासुर का बेटा गमैलियल।

२१ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, बत्तीस हज़ार दो सौ थे।

२२ फिर बिन्यामिन की प्रजाति: और बिन्यामिन के बेटों का कप्तान गिदोनी का बेटा अबीदन होगा।

२३ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, पैंतीस हज़ार चार सौ थे।

२४ वह सभी जो ईफ्रैम के शिविर में गिने गए थे, एक सौ आठ हज़ार एक सौ थे, उनकी सेनाओं के सर्वत्र में। और यह तीसरे क्रम में प्रस्थान करेंगे।

२५ दान के शिविर का झण्डा उनकी सेनाओंनुसार उत्तर की ओर होगा: और दान की सन्तानों का कप्तान अमिशद्दय का बेटा अहिएज़र होगा।

२६ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, बासठ हज़ार सात सौ थे।

२७ और वह जो उसके साथ डेरा डालेंगे आशेर की प्रजाति होंगे: और आशेर की सन्तानों का कप्तान ओक्रन का बेटा पगिएल होगा।

२८ और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, इकतालीस हज़ार पाँच सौ थे।

२९ फिर नफ्ताली की प्रजाति: और नफ्ताली की सन्तानों का कप्तान एनन का बेटा अहीर होगा।

३० और उसकी सेना, और वह जो उस में से गिन लिए गए थे, तरेपन हज़ार चार सौ थे।

३१ वह सभी जो दान के शिविर में गिने गए थे, एक सौ सत्तावन हज़ार छह सौ थे। यह अपने झण्डों के साथ सबसे पृष्ठ यात्रा पर प्रस्थान करेंगे।

३२ यही हैं वह इस्राएल की सन्तानों के, जिन्हें उनके पित्रों के घरानोंनुसार गिना गया था: शिविरों के वह सभी जिन्हें उनकी सेनाओं के सर्वत्र में गिन लिया गया था छह सौ तीन हज़ार पाँच सौ पचास थे।

३३ परन्तु लेवी-वंशजों की गिनती इस्राएल की सन्तानों के बीच नहीं की गई थी; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

३४ और इस्राएल की सन्तानों ने उस सभी के अनुसार कर दिया जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था: सो उन्होंने अपने झण्डोंनुसार डेरा डाला, और इस प्रकार वह यात्रा पर अग्रसर हुए, प्रत्येक अपने परिवारोंनुसार, अपने पित्रों के घरानोंनुसार।



तीसरा अध्याय।


हारुन और मूसा की भी यही पीढ़ियाँ हैं उस दिन में जब प्रभु मूसा से बोले सीनय पर्वत में।

और यह हैं हारुन के बेटों के नाम; प्रथम-जन्मा नादब, और अबीहू, और एलाज़र और इथामर।

यही हारुन के बेटों के नाम हैं, वह पुरोहित, जो अभिषिक्त थे, जिन्हें उसने पुरोहित-पद में सेवा करने हेतु स्थापित किया था।

और नादब और अबीहू प्रभु के सम्मुख मर गए, जब उन्होंने प्रभु के समक्ष विचित्र सी अग्नी अर्पित की थी, सीनय के जँगली-क्षेत्र में, और उनकी कोई सन्तानें नहीं थीं: और एलाज़र और इथामर ने पुरोहित-पद में हारुन उनके पिता की दृष्टि में सेवा प्रदान की।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

लेवी की प्रजाति को निकट लाओ, और उन्होंने हारुन पुरोहित के सम्मुख प्रस्तुत कर दो, ताकि वह उसके प्रति सेवा करें।

और वह उसका प्रभार रखेंगे, और सभा के तम्बू के सम्मुख समस्त सभा का उत्तरदायित्व, तम्बू की सेवा करने हेतु।

और वह सभा के तम्बू के समस्त यंत्रों को रखेंगे, और इस्राएल की सन्तानों का प्रभार, तम्बू की सेवा करने हेतु।

और तुम लेवी-वंशजों को हारुन और उसके बेटों को प्रदान कर दोगे: यह पूर्णतः उसे प्रदान हैं, इस्राएल की सन्तानों में से।

१० और तुम हारुन और उसके बेटों को नियुक्त कर दोगे, और वह अपने पुरोहित-पद में सेवारत रहेंगे: और वह परदेशी जो निकट आता है, मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

११ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१२ और मैंने, देखो तो, मैंने लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच में से ले लिया है, उन समस्त प्रथम-जन्मों के स्थान में जो इस्राएल की सन्तानों के बीच गर्भ खोलते हैं: इसलिए लेवी-वंशज मेरे होंगे;

१३ क्योंकि समस्त प्रथम-जन्मे मेरे हैं; क्योंकि उस दिन जब मैंने मिस्र की भूमी में सभी प्रथम-जन्मों का वध कर दिया था, मैंने अपने प्रति इस्राएल के समस्त प्रथम-जन्मों को अपने प्रति पुनीत ठहरा दिया था, दोनो मनुष्य और पशु: मेरे यह होंगे: मैं प्रभु हूँ।

१४ और प्रभु मूसा से सीनय के निर्जन-क्षेत्र में बोले, कहते हुए,

१५ लेवी की सन्तानों की गणना कर लो उनके पित्रों के घरानेनुसार, उनके परिवारोंनुसार: प्रत्येक नर एक महीने की आयु से लेकर और अधिक तुम उन्हें गिनोगे।

१६ और मूसा ने उन्हें प्रभु के शब्दानुसार गिन लिया, जैसा उसे आदेश दिया गया था।

१७ और यह लेवी के बेटे थे उनके नामोंनुसार; गेरशौन, और कहाथ, और मरारी।

१८ और यह गेरशौन के बेटों के नाम हैं उनके परिवार-गणोनुसार; लिबनी और शिमई,

१९ और कहाथ के बेटे उनके परिवार-गणोनुसार; अम्राम, और यिसहार, हेब्रोन, और उज़्ज़ीएल।

२० और मरारी के बेटे; महली और मूशी: यही लेवी-वंशजों के परिवार-गण हैं उनके पित्रों के घरानेनुसार।

२१ गेरशौन से लिबनी-वंशजों का परिवार था, और शिमई-वंशजों का परिवार: यह गेरशौन-वंशजों के परिवार-गण हैं।

२२ वही जिनकी उन में से गिनती की गई थी, सभी नरों की गिनतीनुसार, एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, वही जो उन में से गिन लिए गए थे सात हज़ार पाँच सौ थे।

२३ गेरशौन-वंशजों के परिवार-गण तम्बू की पीछे पश्चिम की ओर डेरा डालेंगे।

२४ और गेरशौन-वंशजों के पित्र के घराने का प्रमुख लाएल का बेटा एलियसाफ होगा।

२५ और सभा के तम्बू में गेरशौन के बेटों का प्रभार, वह तम्बू होगा, और वह शिविर, उसका आवरण, और वह लटकन,  

सभा के तम्बू के द्वार के लिए,

२६ और आँगन की लटकनें, और आँगन के द्वार के लिए वह परदा, जो कि तम्बू के साथ है, और बलिवेदी के साथ चारों ओर है, और उसके रस्से उसकी समस्त सेवा हेतु।

२७ और कहाथ से अम्राम-वंशजों का परिवार-गण था, और यिसहार-वंशजों का परिवार-गण, और हेब्रोन-वंशजों का परिवार-गण, और उज़्ज़ीएल-वंशजों का परिवार-गण: यही कहाथ-वंशजों के परिवार-गण हैं।

२८ उन सभी नरों की गिनती में, एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, आठ हज़ार छह सौ थे, पुण्य-स्थान के प्रभार रखते हुए।

२९ कहाथ के परिवार-गण तम्बू के साथ दक्षिण की ओर डेरा डालेंगे।

३० और कहाथ-वंशजों के परिवार-गणों के पित्र के घराने का प्रमुख उज़्ज़ीएल का बेटा एलीज़फान होगा।

३१ और इनका प्रभार होगा वह संदूक, और वह मेज़, और दीपाधार, और वह बलिवेदियाँ, और पुण्य-स्थान के पात्र जिन से वह सेवा करते हैं, और वह लटकन, और उसकी समस्त सेवा।

३२ और हारुन पुरोहित का बेटा एलाज़र, लेवी-वंशजों के प्रमुख का प्रमुख होगा, और वह उनका नीरीक्षण कराएगा जो पुण्य-स्थान का प्रभार सम्भालते हैं।

३३ मरारी से महली-वंशजों का परिवार-गण था, और मूशी-वंशजों का परिवार-गण: यही मरारी के परिवार-गण हैं।

३४ और वह जिनकी उन में से गिनती की गई थी, सभी नरों की गिनतीनुसार, एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, छह हज़ार दो सौ थे।

३५ और मरारी के परिवार-गणों के पित्र के घराने का प्रमुख अबिहाइल का बेटा ज़ुरिएल था: यह तम्बू के साथ उत्तर की ओर डेरा डालेंग।

३६ और मरारी के बेटों की अधिरक्षा और प्रभार के आधीन होंगे वह तम्बू के पट्टे, और उसके पटरे, और उसके स्तम्भ, और उसकी गर्तिकाएँ, और उसके समस्त पात्र, और वह सब जो उसके प्रति सेवारत है,

३७ और आँगन के चारों ओर के स्तम्भ, और उनकी गर्तिकाएँ, और उनके खूँटे, और उनके रस्से।

३८ परन्तु वह जो तम्बू के सम्मुख पूर्व की ओर डेरा डालते हैं, सभा के तम्बू के समक्ष पूर्व की ओर ही, मूसा और हारुन और उसके बेटे होंगे, पुण्य-स्थान का उत्तरदायित्व रखते हुए इस्राएल की सन्तानों हेतु प्रभार रखते हुए; और वह परदेशी जो निकट आता है मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

३९ लेवी-वंशजों के वह सभी जिनकी गणना कर ली गई थी, जिन्हें मूसा और हारुन ने प्रभु के आदेश पर गिन लिया था, अपने परिवार-गणों के सर्वत्र में, सभी नर एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, बाईस हज़ार थे।

४० और प्रभु मूसा से बोले, इस्राएल की सन्तानों के सभी प्रथम-जन्मे नरों की गिनती कर लो, एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, और उनके नामों की गिनती कर लो।

४१ और तुम मेरे लिए लेवी-वंशजों को, (मैं प्रभु हूँ) इस्राएल की सन्तानों के बीच समस्त प्रथम-जन्मों के स्थान में, ले लोगे; और लेवी-वंशजों के मवेशी को, इस्राएल की सन्तानों के बीच मवेशी के सभी पहलौठों के स्थान में। 

४२ और मूसा ने गणना कर ली, जैसा कि प्रभु ने उसे आदेश दिया था, इस्राएल की सन्तानों के बीच समस्त प्रथम-जन्मे।

४३ और वह समस्त प्रथम-जन्मे नर, नामों की संख्यानुसार, एक महीने की आयु से लेकर और अधिक, जो उन में से गिन लिए गए थे, बाईस हज़ार दो सौ तिहत्तर थे।

४४ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

४५ लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच के समस्त प्रथम-जन्मों के स्थान में ले लो, और लेवी-वंशजों के मवेशी को, उनके मवेशी के स्थान में; और लेवी-वंशज मेरे होंगे: मैं प्रभु हूँ।

४६ और उनके लिए, जिनका मुक्ति-भुक्तान इस्राएल की सन्तानों के उन दो सौ तिहत्तर प्रथम-जन्मों से होना है, जो लेवी-वंशजों से अधिक हैं;

४७ तुम प्रत्येक के लिए पाँच शेक्ल भी संख्यानुसार ले लोगे, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार तुम उन्हें ले लोगे: एक शेक्ल बीस गेरा होता है:

४८ और तुम उस पैसे को हारुन और उसके बेटों को दे दोगे, जिस से उन अधिक जनों का मुक्ति-भुक्तान होना है। 

४९ और मूसा ने उनके मुक्ति-भुक्तान का पैसा ले लिया, जो उन में से अधिक थे, जिनका मुक्ति-भुक्तान लेवी-वंशजों द्वारा कर दिया गया था: 

५० इस्राएल की सन्तानों के प्रथम-जन्मों से उसने वह पैसा ले लिया; एक हज़ार तीन सौ पैंसठ शेक्ल, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार:

५१ और मूसा ने उनका पैसा, जिनका मुक्ति-भुक्तान कर दिया गया था, हारुन और उसके बेटों को प्रदान कर दिया, प्रभु के शब्दानुसार, जैसा कि प्रभु ने मूसा को आदेश दे दिया था।



चौथा अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए,

लेवी के बेटों के बीच में से कहाथ के बेटों का जोड़ कर लो, उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घराने से,

तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक भी, वह सभी जो सेना मी आते हैं, सभा के तम्बू में कार्य करने हेतु।

सभा के तम्बू में, अति-पवित्रतम वस्तुओं के समबन्ध में, कहाथ के बेटों का सेवाकार्य होगा:

और जब शिविर यात्रा पर निकलता है, हारुन और उसके बेटे आएँगे, और वह आवरण के परदे को नीचे ले आएँगे, और साक्ष्य के संदूक को उस से ढक देंगे:

और उस पर उस सूँस की चमड़ियों का आवरण लगा देंगे, और उस पर एक पूर्णतः नील का कपड़ा फैला देंगे, और उसके डण्डों को अन्दर घुसा देंगे।  

और भेंट की रोटी की मेज़ पर तुम एक नील का कपड़ा फैला दोगे, और उस पर उन परातों को, और चम्मचों को, और कटोरों को, और उन सब को ढकने हेतु ढक्कनों को, उस पर रख दोगे: और वह निरन्तर रोटी उस पर होगी:

और वह उन पर एक सुर्ख का कपड़ा फैला देंगे, और इसी को सूँस की चमड़ियों के आवरण से ढक देंगे, और उसके डण्डों को अन्दर घुसा देंगे।

और वह एक नील का कपड़ा लेंगे, और उजाले के दीपाधार को, और उसके दीपकों को, और उसकी चिमटियों को, और उसके अग्नी-पात्रों को, और उसके सभी तेल के बर्तनों को, जिन से वह उसकी सेवा करते हैं, ढक देंगे:

१० और वह उसे और उसके समस्त पात्रों को सूँस की चमड़ियों के एक आवरण में डाल देंगे, और उसे एक छड़ी पर लगा देंगे।

११ और स्वर्ण बलिवेदी पर वह एक नील का कपड़ा फैला देंगे, और उसे सूँस की चमड़ियों के एक आवरण से ढक देंगे, और उसके डण्डे लगा देंगे:

१२ और वह सेवाकार्य के समस्त यंत्रों को ले लेंगे, जिन से वह पुण्य-स्थान में सेवा करते हैं, और उन्हें एक नील के कपड़े में डाल देंगे, और उन्हें सूँस की चमड़ियों के एक आवरण से ढक देंगे, और उन्हें एक छड़ी पर लगा देंगे:

१३ और वह बलिवेदी पर से राखों को परे हटा देंगे, और उस पर एक जामुनी कपड़ा फैला देंगे:

१४ और वह उस पर उसके समस्त पात्र रख देंगे, जिन से वह उसकी सेवा करते हैं, अग्नी-पात्र ही, माँस-काँटे, और वह फावड़े, और कटोर-दान, बलिवेदी के समस्त पात्रादि; और वह उस पर सूँस की चमड़ियों के एक आवरण फैला देंगे, और उसके डण्डों को घुसा देंगे।

१५ और जब हारुन और उसके बेटे पुण्य-स्थान, और पुण्य-स्थान के समस्त पात्रों को ढक देने का अन्त कर चुकते हैं, जैसे कि वह शिविर यात्रा पर निकल पड़ने को है; उसके पश्चात, कहाथ के बेटे उसे उठा लेने हेतु जाएँगे: परन्तु वह किसी भी पवित्र वस्तु को छुएँगे नहीं, कहिं वह मर जाएँ। यह वस्तुएँ, सभा के तम्बू में, कहाथ के बेटों का भार हैं। 

१६ और हारुन पुरोहित के बेटे एलाज़र के पद पर उजाले हेतु तेल आता है, और वह मधुर-सुगंधित-धूप, और दैनिक भोज-चढ़ावा, और अभिषेक-तेल, और समस्त तम्बू का निरीक्षण, और उस सभी का जो उस में है, पुण्य-स्थान में, और उसके पात्रों में।

१७ और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए,

१८ लेवी-वंशजों के बीच में से, कहाथ-वंशजों के परिवार-गणों की प्रजाति को तुम परे मत काट डालना: 

१९ बल्कि इस प्रकार उनके साथ कर देना, ताकि वह जी सकें, और मरें , जब वह अति-पवित्रतम वस्तुओं के निकट आते हैं: हारुन और उसके बेटे भीतर जाएँगे, और उन्हें प्रत्येक को उसकी सेवा पर और उसके भार पर नियुक्त करेंगे:

२० परन्तु वह देखने हेतु भीतर नहीं जाएँगे जब उन पवित्र-वस्तुओं को ढका जाता है, कहिं वह मर जाएँ।

२१ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२२ गेरशौन के बेटों का भी जोड़ कर लो, उनके पित्रों के घरानोंनुसार, उनके परिवार-गणों से; 

२३ तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक तुम उन्हें गिनोगे; उन सभी को जो सभा के तम्बू में उसका काम करने हेतु, सेवा करने के लिए अन्दर प्रवेश करते हैं। 

२४ यह गेरशौन के परिवार-गणों का सेवाकार्य है, सेवा करने हेतु, और भारों को ढोने हेतु:

२५ और वह तम्बू के परदों को ढोएँगे, और सभा के तम्बू को, उसके आवरण को, और उस सूँस की चमड़ियों के आवरण को जो उस पर ऊपर है, और सभा के तम्बू के द्वार के लिए उस लटकन को,

२६ और आँगन के लटकनों को, और आँगन के उस दरवाज़े के द्वार के लिए लटकन को जो तम्बू के साथ है और बलिवेदी के साथ चारों ओर है, और उनके रस्से, और उनकी सेवा के समस्त यंत्र, और वह सभी जो उनके लिए बनाया गया है: इस प्रकार वह सेवा करेंगे। 

२७ हारुन और उसके बेटों के निर्देशानुसार गेरशौन-वंशजों के बेटों की समस्त सेवा होगी, उनके समस्त भारों में, और उनकी समस्त सेवा में: और तुम उनके प्रति उनके समस्त बोझों का प्रभार नियुक्त कर दोगे।

२८ यह सभा के तम्बू में गेरशौन के बेटों के परिवार-गणों की सेवा है: और उनका प्रभार हारुन पुरोहित के बेटे इथामर के हाथ तले होगा।

२९ जहाँ तक मरेरी के बेटों की बात आती है, तुम उनकी गणना उनके परिवारोंनुसार, उनके पित्रों के घराने से करोगे;

३० तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक भी तुम उन्हें गिनोगे; उस प्रत्येक को जो सभा के तम्बू के काम को करने हेतु, उस सेवा में प्रवेश करता है। 

३१ और यह उनके बोझ का प्रभार है, सभा के तम्बू में उनकी समस्त सेवानुसार; तम्बू के पट्टे, और उसके पटरे, और उसके स्तम्भ, और उसकी गर्तिकाएँ,

३२ और आँगन के चारों ओर के स्तम्भ, और उनकी गर्तिकाएँ, और उनके खूँटे, और उनके रस्से, उनके समस्त यंत्रों के साथ, और उनके समस्त सेवाकार्य के साथ: और तुम नाम से उनके भारों के प्रभार के उन यंत्रों का लेखा-जोखा करोगे। 

३३ यह मरेरी के बेटों के परिवारों का सेवाकार्य है, उनके समस्त सेवकार्यानुसार, सभा के तम्बू में, हारुन के बेटे इथामर के हाथ तले।

३४ और मूसा, और हारुन और सभा के प्रमुख ने कहाथ-वंशजों के बेटों की गणना की उनके परिवारोंनुसार, और उनके पित्रों के घराने से,

३५ तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक, वह प्रत्येक जो सेवा में प्रवेश करता है, सभा के तम्बू में काम हेतु,

३६ और वह जिनकी उन में से गणना कर ली गई ती उनके परिवारों से दो हज़ार सात सौ पचास थे।

३७ यह वही थे जो कहाथ-वंशजों के परिवारों में से गिने गए थे, सभी जो सभा के तम्बू में सेवाकार्य करें, जिन्हें मूसा और हारुन ने गिना प्रभु के आदेशानुसार मूसा के हाथ।

३८ और वह जिनकी गेरशौन के बेटों में से गणना कर ली गई थी, उनके परिवारों के सर्वत्र में, और उनके पित्रों के घर से,

३९ तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक, वह प्रत्येक जो सेवा में प्रवेश करता है, सभा के तम्बू में काम हेतु,

४० वही जो उन में से गिन लिए गए थे, उनके परिवारों के सर्वत्र में, और उनके पित्रों के घर से, दो हज़ार छह सौ तीस थे।

४१ यह वही थे जो गेरशौन-वंशजों के बेटों के परिवारों में से गिने गए थे, वह सभी जो सभा के तम्बू में सेवाकार्य करें, जिन्हें मूसा और हारुन ने गिना प्रभु के आदेशानुसार।

४२ और वह जिनकी मरेरी के बेटों के परिवारों में से गणना कर ली गई थी, उनके परिवारों के सर्वत्र में, और उनके पित्रों के घर से,

४३ तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक, वह प्रत्येक जो सेवा में प्रवेश करता है, सभा के तम्बू में काम हेतु,

४४ वही जो उन में से गिन लिए गए थे, उनके परिवारों से, तीन हज़ार दो सौ थे।

४५ यही वह हैं जो मरेरी के बेटों के परिवारों में से गिन लिए गए थे, जिन्हें मूसा और हारुन ने गिना प्रभु के शब्दानुसार, मूसा के हाथ।

४६ वह सभी जो लेवी-वंशजों में से गिने गए थे, जिन्हें मूसा और हारुन और इस्राएल के प्रमुख ने गिना, उनके परिवारोंनुसार, और उनके पित्रों के घरानेनुसार,

४७ तीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, पचास वर्ष की आयु तक, वह प्रत्येक जो सेवा के सेवाकार्य को करने के लिए आया, और सभा के तम्बू में बोझ की सेवा हेतु,

४८ वही जो उन में से गिन लिए गए थे, आठ हज़ार पाँच सौ अस्सी थे।

४९ प्रभु के आदेशानुसार उनकी गणना कर ली गई थी मूसा के हाथ, प्रत्येक की उनकी सेवानुसार, और उसके बोझानुसार: इस प्रकार वह उस से गिन लिए गए थे, जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।



पाँचवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों को आदेश दो, कि वह शिविर से बाहर निकाल दें हर कुष्ठ-रोगी को, और हर एक को जिसे स्त्राव हो रहा हो, और जो कोई भी मृत द्वारा दूषित है:

दोनो नर और नारी तुम बाहर निकाल दोगे, शिविर के बाहर तुम उन्हें भेज दोगे; ताकि वह अपने डेरों को दूषित करें, जिन के बीच में में बसता हूँ।

और इस्राएल की सन्तानों ने ऐसा ही कर दिया, और उन्हें शिविर से बाहर निकाल दिया: जैसा प्रभु ने मूसा से बोला, वैसा इस्राएल की सन्तानों ने कर दिया।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, जब कोई पुरुष या स्त्री कोई भी पाप कर देते हैं जो मनुष्य करते हैं, प्रभु के विरुद्ध कोई उल्लंघन करने में, और वह व्यक्ति दोषी हो;

तब वह अपने पाप को जो उन्होंने कर दिया है, स्वीकार करेंगे: और वह अपने दोष की क्षतिपूर्ति करेगा उसके मूलरूप के साथ, और उस में उसका पाँचवाँ भाग जोड़ देगा, और उसे दे देगा जिसके विरुद्ध उसने उल्लंघन कर दिया है।

परन्तु यदि उस पुरुष के पास कोई कुलवाला हो उस दोष की क्षतिपूर्ति कर देने हेतु, तो उस दोष की प्रभु के प्रति 

क्षतिपूर्ति हो जाने देना, पुरोहित के प्रति ही; उस परिहार के मढ़े के अतिरिक्त, जिसके द्वारा उसके लिए एक परिहार बनाया जाएगा।

और इस्राएल की सन्तानों की समस्त पवित्र वस्तुओं का प्रत्येक चढ़ावा, जिसे वह पुरोहित के पास लाएँगे, उसका होगा।

१० और प्रत्येक पुरुष की पवित्र वस्तुएँ उसकी होंगी: जो कुछ भी कोई पुरुष पुरोहित को देता है, उसका बन जाएगा।

११ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१२ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, यदि किसी भी पुरुष की पत्नी परे जाकर, और उसके विरुद्ध कोई उल्लंघन करती है,

१३ और कोई पुरुष उसके साथ कामुकता से लेटता है, और यह उसके पति की आँखों से छिपा हुआ हो, यह गुप्त रखा हुआ हो, और वह दूषित हो चुकी हो, और उसके विरुद्ध कोई भी साक्षी हो, ही वह पकड़ी गई हो;

१४ और उस पर ईर्षा का भावात्मा पड़े, और वह अपनी पत्नी के प्रति ईर्षालु हो जाए, और वह दूषित हो गई हो: अथ्वा 

यदि उस पर ईर्षा का भावात्मा पड़े, और वह अपनी पत्नी के प्रति ईर्षालु हो जाए, और वह दूषित हुई हो:

१५ तब वह पुरुष अपनी पत्नी को पुरोहित के पास ले आएगा, और वह उसके लिए उसकी आहुति लाएगा, जौ के आटा के एक एफाह का दसवाँ भाग; वह उस पर कोई तेल नहीं उँडेलेगा, ही उस पर लोहबान डालेगा; क्योंकि यह एक ईर्षा-आहुति है, स्मारक हेतु आहुति, अधर्म-पाप को स्मरण में लाती हुई।

१६ और वह पुरोहित उस स्त्री को निकट ले आएगा, और उसे प्रभु के सम्मुख स्थित कर देगा:

१७ और वह पुरोहित मिट्टी के एक बर्तन में पवित्र जल ले लेगा; और तम्बू के फ़र्श की धूल में से वह पुरोहित ले लेगा, और उसे उस जल में डाल देगा:

१८ और वह पुरोहित उस स्त्री को प्रभु के सम्मुख स्थित कर देगा, और उस स्त्री के सर को अनावृत कर देगा, और उसके हाथों में स्मारक-आहुति को रख देगा, जो ईर्षा-आहुति है: और उस पुरोहित के हाथ में वह कड़वा जल होगा जो वह श्राप पड़वाता है: 

१९ और वह पुरोहित उसे एक शपथ से सौगंध दिलवाएगा, और उस स्त्री से कहेगा, यदि कोई भी पुरुष तुम्हारे साथ लेटा हो, और तुम किसी अन्य के साथ अस्वच्छता में परे गई हो अपने पती के सिवा, तुम इस श्राप करवाने वाले कड़वे जल से मुक्त हो जाओ:

२० परन्तु यदि तुम अपने पति के सिवा किसी अन्य के साथ परे जा चुकी हो, और तुम दूषित हो चुकी हो, और कोइ पुरुष तुम्हारे साथ लेट चुका हो तुम्हारे पति के सिवा: 

२१ तब वह पुरोहित उस स्त्री को एक श्राप की शपथ से सौगंध दिलवाएगा, और वह पुरोहित उस स्त्री से कहेगा, प्रभु तुम्हें एक श्राप और एक शपथ बना दें तुम्हारे लोगों के बीच, जब प्रभु तुम्हारी जाँघ को सड़ा दें, और तुम्हारे पेट को सुजा दें:

२२ और यह जल जो श्राप करवाता है तुम्हारी आँतों में चला जाएगा, तुम्हारे पेट को सुजाने हेतु, और तुम्हारी जाँघ को सड़ा देने हेतु: और वह स्त्री कहेगी, तथास्तु, तथास्तु।

२३ और वह पुरोहित इन श्रापों को एक पुस्तक में लिख देगा, और वह उन्हें कड़वे जल से मिटा देगा:

२४ और वह उस स्त्री को वह श्राप करवाने वाला कड़वा जल पिलवा देगा: और वह जल जो श्राप पड़वाता है उस में प्रवेश कर जाएगा, और कड़वा बन जाएगा।

२५ तब वह पुरोहित उस स्त्री के हाथ में से वह ईर्षा-आहुति बाहर निकाल लेगा, और उस आहुति को प्रभु के सम्मुख लहरा देगा, और उसे बलिवेदी पर चढ़ा देगा:

२६ और वह पुरोहित उस आहुति में से एक मुट्ठी भर ले लेगा, उसका स्मारक ही, और उसे बलिवेदी पर जला देगा, और ततपश्चात उस स्त्री को वह जल पिलवा देगा।

२७ और जब वह उसे वह जल पिलवा चुका होगा, तब ऐसा होने को आएगा, कि यदि वह दूषित हो चुकी हो, और अपने पति के विरुद्ध उल्लंघन कर चुकी हो, कि वह श्राप-पड़वाने वाला जल उस में प्रवेश कर लेगा, और कड़वा बन जाएगा, और उसका पेट सूज जाएगा, और उसकी जाँघ सड़ जाएगी: और वह स्त्री अपने लोगों के बीच एक श्राप बन जाएगी।

२८ और यदि वह स्त्री दूषित हुई हो, बल्कि स्वच्छ हो; तब वह मुक्त हो जाएगी, और गर्भवति हो जाएगी। 

२९ यह ईर्षाओं का नियम है, जब कोई पत्नी किसी अन्य के पास, अपने पति के सिवा, परे चली जाती है, और दूषित है;

३० या जब ईर्षा का भावात्मा उस पर पड़ता है, और वह अपनी पत्नी के प्रति ईर्षालु है, और उस स्त्री को प्रभु के सम्मुख स्थित कर देगा, और वह पुरोहित उस पर यह समस्त नियम लागू कर देगा।

३१ तब वह पुरुष अधर्म-पाप से निर्दोष होगा, और यह स्त्री अपने अधर्म-पाप को ढोएगी। 



छटा अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब पुरुष या स्त्री स्वयं को नज़ीर के प्रण का प्रण लेने हेतु पृथक कर लेगा, प्रभु के प्रति स्वयं को पृथक कर देने हेतु:

वह स्वयं को अंगूर-रस और मदिरा, से अलग कर लेगा, और अंगूर-रस का सिरका,या मदिरा का सिरका नहीं पीएगा, ही वह कोई अंगूर का अर्क पीएगा, ही रसीले या सूखे अंगूर खाएगा।

अपने पृथक रहने के समस्त दिन वह अंगूर की लता से बना कुछ भी नहीं खाएगा, बीज से लेकर भूसे तक भी।

अपने पृथककरण के प्रण के समस्त दिन उसके सर पर कोई उस्तरा नहीं फिरेगा: उसके दिनो के परिपूर्ण हो जाने तक, जिन में उसने स्वयं को प्रभु के प्रति पृथक किया है, वह पवित्र होगा, और अपने सर के बालों की लटों को उगने देगा।

उन सभी दिनो में जिन में वह स्वयं को प्रभु के प्रति पृथक करता है, वह किसी भी शव के निकट नहीं आएगा।

वह स्वयं को अपने पिता के लिए, या अपनी माता के लिए, या अपने भाई के लिए, या अपनी बहन के लिए अस्वच्छ नहीं बनाएगा, जब वह मर जाते हैं: क्योंकि उसके ईश्वर का पृथककरण उसके सर पर है।

उसके पृथककरण के समस्त दिन वह प्रभु के प्रति पवित्र है।

और यदि कोई भी पुरुष उसके साथ बहुत अचानक से मर जाए, और उसने अपने पृथककरण के सर को दूषित कर दिया हो; तब वह अपने स्वच्छीकरण के दिवस पर अपने सर पर उस्तरा फिरवा देगा, सातवें दिन वह उस पर उस्तरा फिरवा देगा।

१० और आठवें दिन वह दो पिंडुकों, या दो युवा कबूतरों को पुरोहित के पास ले आएगा, सभा के तम्बू के द्वार पर:

११ और वह पुरोहित एक को पाप-चढ़ावे हेतु चढ़ा देगा, और उस दूसरे को एक जले-चढ़ावे हेतु, और उसके लिए परिहार बना देगा, क्योंकि उसने मृत द्वारा पाप कर दिया है, और वह अपने सर को उसी दिन पवित्र ठहरा देगा।

१२ और वह प्रभु के प्रति अपने पृथककरण के दिन स्थापित कर देगा, और पहले साल का एक मेमना एक दोष-चढ़ावे हेतु लाएगा: परन्तु वह दिन जो पहले थे गिने नहीं जाएँगे, क्योंकि उसका पृथककरण दूषित हो गया था।

१३ और यह नज़ीर का नियम है, जब उसके पृथककरण के दिन पूर्ण हो जाते हैं: वह सभा के तम्बू के द्वार पर ले आया जाएगा:

१४ और वह अपने चढ़ावे को प्रभु के प्रति अर्पित कर देगा, एक पहले साल का निष्कलंक नर-मेमना एक जले-चढ़ावे हेतु, और एक पहले साल की निष्कलंक मादा-मेमना एक पाप-चढ़ावे हेतु, और एक निष्कलंक मेढ़ा शान्ति-चढ़ावों हेतु,

१५ और एक टोकरा बेख़मीरी रोटी, बारीक आटे के तेल से मिश्रित छेद किए पराँठों, और बेख़मीरी रोटी के तेल से लीपे हुए पताशों, और उनके भोज-चढ़ावों, और उनके पेय-चढ़ावों का।  

१६ और वह पुरोहित उन्हें प्रभु के सम्मुख ले आएगा, और उसके पाप-चढ़ावे, और उसके जले-चढ़ावे को चढ़ा देगा:

१७ और वह उस मेढ़े को प्रभु के प्रति शान्ति-चढ़ावों की एक बलि हेतु चढ़ा देगा, बख़मीरी रोटी के टोकरे के साथ: पुरोहित उसके भोज-चढ़ावे को, और उसके पेय-चढ़ावे को भी अर्पित कर देगा।

१८ और वह नज़ीर अपने पृथककरण के सर पर सभा के तम्बू के द्वार पर उस्तरा फिरा देगा, और वह अपने पृथककरण के सर के बालों को लेगा, और उन्हें शान्ति-चढ़ावों की बलि के तले की अग्नी में डाल देगा।

१९ और पुरोहित उस मेढ़े के उबले हुए कन्धे को लेगा, और टोकरे में से एक बेख़मीरी छेद किया हुआ पराँठा, और एक बेख़मीरी पताशा, और उन्हें उस नज़ीर के हाथों में रख देगा, उसके पृथककरण के बालों पर उस्तरा फिर जाने के पश्चात:

२० और वह पुरोहित उन्हें प्रभु के सम्मुख एक लहराए-चढ़ावे हेतु लहरा देगा: यह पुरोहित के लिए पवित्र है, उस लहराई छाती और उठाए कन्धे के साथ: और उसके पश्चात वह नज़ीर अंगूर-रस पी सकता है।

२१ यह उस नज़ीर का नियम है जिसने प्रण ले लिया है, और प्रभु के प्रति उसके चढ़ावे का, उसके अतिरिक्त जो कुछ भी वह अपने हाथ ले आए: उस प्रणानुसार जिसका उसने प्रण ले लिया है, उसे उसी प्रकार अवश्य करना होगा उसके 

पृथककरण के नियमानुसार। 

२२ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

२३ बोलो हारुन से और उसके बेटों से, कहते हुए, इस प्रकार तुम इस्राएल की सन्तानों को आशीष दोगे, उनसे कहते हुए,

२४ प्रभु तुम्हें आशीष दें, और तुम्हें रखें:

२५ प्रभु तुम पर अपना चेहरा प्रज्ज्वलित कर दें, और तुम्हारे प्रति कृपालु होएँ:

२६ प्रभु तुम पर अपना मुखमण्डल उठाएँ, और तुम्हें शान्ति प्रदान करें।

२७ और वह मेरे नाम को इस्राएल की सन्तानों पर लगा देंगे; और मैं उन्हें आशीष दूँगा।





सातवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, उस दिन जब मूसा ने तम्बू को पूर्ण रूप से स्थापित कर दिया था, और उसका अभिषेक कर दिया था, और उसे, और उसके सभी यंत्रों को, दोनो बलिवेदी को और उसके समस्त पात्रों को पुनीत ठहरा दिया था, और उनका अभिषेक कर दिया था, और उन्हें पुनीत ठहरा दिया था;

कि इस्राएल की सन्तानों के मुखियाओं ने, अपने पित्रों के घर के प्रमुख, जो प्रजातियों के मुखिया थे, और उनके ऊपर थे जिनकी गणना कर ली गई थी, अर्पण किया:

और वह प्रभु के सम्मुख अपना चढ़ावा लाए, छह छत-वाली गाड़ियाँ, और बारह बैल; एक गाड़ी दो मुखियाओं के लिए, और प्रत्येक के लिए एक बैल: और वह उन्हें तम्बू के समक्ष ले आए।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

यह उनसे ले लो, ताकि वह सभा के तम्बू के सेवा कर सकें; और तुम इन्हें लेवी-वंशजों को प्रदान कर दोगे, प्रत्येक पुरुष को उसकी सेवानुसार।

और मूसा ने वह गाड़ियाँ और बैल लिए, और उन्हें लेवी-वंशजों को प्रदान कर दिया।

दो गाड़ियाँ और चार बैल उसने गेरशौन के बेटों को प्रदान कर दिए, उनकी सेवानुसार:

और चार गाड़ियाँ और आठ बैल उसने मरेरी के बेटों को प्रदान कर दिए, उनकी सेवानुसार, हारुन पुरोहित के बेटे इथामर के हाथ तले।

परन्तु कहाथ के बेटों को उस ने कुछ भी नहीं प्रदान किया: क्योंकि उनकी पुण्य-स्थान की सेवा वह थी कि वह अपने कंधों पर उठाएँ। 

१० और मुखियाओं ने बलिवेदी के समर्पण हेतु उस दिन चढ़ाया, जब उसका अभिषेक कर दिया गया था, मुखियाओं ने ही अपना चढ़ावा बलिवेदी के समक्ष चढ़ा दिया।

११ और प्रभु ने मूसा से कहा, वह अपना चढ़ावा चढ़ाएँगे, प्रत्येक मुखिया अपने दिवस पर, बलिवेदी के समर्पण हेतु।

१२ और पहले दिन जिसने अपना चढ़ावा चढ़ाया अम्मीनादाब का बेटा नहशोन था, यहूदा की प्रजाति से:

१३ और उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

१४ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

१५ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

१६ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

१७ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह अम्मीनादाब के बेटे नहशोन का चढ़ावा था।

१८ और दूसरे दिन इस्सकार के मुखिया, ज़ूअर के बेटे नेतनील ही ने चढ़ाया:

१९ उसने अपने चढ़ावे हेतु चढ़ाया, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

२० एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

२१ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

२२ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

२३ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह ज़ूअर के बेटे नेतनील का चढ़ावा था।

२४ तीसरे दिन ज़बूलून की संतानों के मुखिया, हेलोन के बेटे एलिआब ने चढ़ाया:

२५ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

२६ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

२७ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

२८ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

२९ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह हेलोन के बेटे एलिआब का चढ़ावा था।

३० चौथे दिन, रूबेन की सन्तानों के मुखिया, शेदेउर के बेटे एलिसुर, ने चढ़ाया:

३१ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

३२ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

३३ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

३४ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

३५ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह शेदेउर के बेटे एलिसुर का चढ़ावा था।

३६ पाँचवें दिन, शिमोन की सन्तानों के मुखिया, ज़ुरिशद्दय के बेटे शलुमिएल ने चढ़ाया: 

३७ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

३८ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

३९ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

४० एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

४१ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह ज़ुरिशद्दय के बेते शलुमिएल का चढ़ावा था।

४२ छटे दिन गाद की सन्तानों के मुखिया, दूएल के बेटे एलियसाफ ने चढ़ाया:

४३ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

४४ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

४५ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

४६एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

४७ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह दूएल के बेटे एलियसाफ का चढ़ावा था।

४८ सातवें दिन ईफ्रैम की सन्तानों के मुखिया, अम्मिहुद के बेटे एलिशामा, ने चढ़ाया:

४९ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

५० एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

५१ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

५२ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

५३ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह अम्मिहुद के बेटे एलिशामा का चढ़ावा था।

५४ आठवें दिन मनश्‍शे की सन्तानों के मुखिया, पदासुर के बेटे गमैलियल ने चढ़ाया:

५५ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

५६ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

५७ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

५८ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

५९ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह पदासुर के बेटे गमैलियल का चढ़ावा था।

६० नौवें दिन बिन्यामिन की सन्तानों के मुखिया, गिदोनी के बेटे अबीदन ने चढ़ाया:

६१ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

६२ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

६३ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

६४ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

६५ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह गिदोनी के बेटे अबीदन का चढ़ावा था।

६६ दसवें दिन दान की सन्तानों के मुखिया, अमिशद्दय के बेटे अहिएज़र ने चढ़ाया:

६७ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

६८ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

६९ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

७० एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

७१ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह अमिशद्दय के बेटे अहिएज़र का चढ़ावा था।

७२ ग्यारहवें दिन आशेर की सन्तानों के मुखिया, ओक्रन के बेटे पगिएल ने चढ़ाया:

७३ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

७४ एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

७५ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

७६ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

७७ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह ओक्रन के बेटे पगिएल का चढ़ावा था।

७८ बारहवें दिन नफ्ताली की सन्तानों के मुखिया, एनन के बेटे अहीर ने चढ़ाया:

७९ उसका चढ़ावा था, एक चाँदी का थाल, जिसका भार एक सौ तीस शेक्ल था, एक सत्तर शेक्लों का चाँदी का कटोरा, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार; वह दोनो एक भोज-चढ़ावे हेतु तेल से मिश्रित बारीक आटे से भरे थे:

८० एक चमचा सोने के दस शेक्लों का, सुगन्धित-धूप से भरा हुआ:

८१ एक युवा सांड, एक मेढ़ा, एक पहले साल का मेमना, एक जले-चढ़ावे हेतु:

८२ एक बकरों में से हलवान, पाप-चढ़ावे हेतु:

८३ और शान्ति-चढ़ावों हेतु बलि के लिए, दो साँड, पाँच मेढ़े, पाँच बकरे, पाँच मेमने पहले साल के: यह एनन के बेटे अहीर का चढ़ावा था।

८४ यह बलिवेदी का समर्पण था, उस दिन जब उसका अभिषेक किया गया था, इस्राएल के मुखियों द्वारा: चाँदी के बारह थाल, बारह चाँदी के काटोरे, बारह सोने के चम्मच:

८५ प्रत्येक चाँदी के थाल का भार एक सौ तीस शेक्ल था, प्रत्येक कटोरा सत्तर: समस्त चाँदी के पात्रों का भार दो हज़ार चार सौ शेक्ल था, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार:

८६ वह सोने के चम्मच बारह थे, प्रत्येक दस शेक्ल भार का, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार: उन चम्मचों के समस्त सोने का भार एक सौ बीस शेक्ल था।

८७ जले-चढ़ावे हेतु सभी साँड बारह साँड थे, मेढ़े बारह, पहले साल के मेमने बारह, उनके भोज-चढ़ावे के साथ: और बकरों में से हलवान पाप-चढ़ावे हेतु बारह थे।

८८ और वह समस्त साँड जो शान्ति-चढ़ावे की बलि के लिए थे, चौबीस साँड थे, मेढ़े साठ, बकरे साठ, पहले साल के मेमने साठ। यह बलिवेदी का समर्पण था, उसका अभिषेक हो जाने के पश्चात।

८९ और जब मूसा सभा के तम्बू में जा चुका था, उनके साथ बोलने हेतु, तब उसने प्रेषण-आसन पर से, एक की वाणी उस से बोलती हुई सुनी, जो साक्ष्य के संदूक पर था, उन दो चेरुबिमों के बीच में से ही: और वह उस से बोले।



आठवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,   

हारुन से बोलो, और उस से कहो, जब तुम दीपकों को जलाते हो, वह सात दीपक उस दीपाधार के सामने प्रकाश देंगे।

और हारुन ने ऐसा ही कर दिया; उसने उन दीपकों को दीपाधार के सामने की ओर जला दिया, जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

और उस दीपाधार की कारीगरी पीटे हुए स्वर्ण की थी, उसके तने तक, और उसके फूलों तक; पीटी हुई कारीगरी की थी:  उस प्रतिरूपानुसार जिसे प्रभु ने मूसा को दिखाया था, उसी अनुसार उसने वह दीपाधार बना दिया।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच में से ले लो, और उन्हें स्वच्छ कर दो।

और उन्हें स्वच्छ करने के लिए, तुम इस प्रकार कर देना: स्वच्छीकरण के जल को उन पर छिड़क देना, और उन्हें अपने सारे शरीर पर उस्तरा फिरवा लेने देना, और उन्हें अपने वस्त्र धो लेने देना, और इस प्रकार स्वयं को स्वच्छ बना लेने देना।

तब उन्हें एक युवा साँड को उसके भोज-चढ़ावे के साथ ले लेने देना, तेल के साथ मिश्रित बारीक आटा ही, और एक अन्य साँड तुम एक पाप-चढ़ावे हेतु ले लोगे।

और तुम लेवी-वंशजों को सभा के तम्बू के सम्मुख ले आओगे: और तुम इस्राएल की सन्तानों की सम्पूर्ण मण्डली को एक साथ एकत्रित कर लोगे:

१० और तुम उन लेवी-वंशजों को प्रभु के सम्मुख ले आओगे: और इस्राएल की सन्तानें अपने हाथों को लेवी-वंशजों पर रख देंगे:

११ और हारुन लेवी-वंशजों को प्रभु के सम्मुख इस्राएल के सन्तानों की एक आहुति हेतु अर्पण कर देगा, ताकि वह प्रभु के सेवा को निष्पादित कर सकें।

१२ और वह लेवी-वंशज अपने हाथों को उन सांडों के सरों पर रखेंगे: और तुम एक को पाप-चढ़ावे हेतु चढ़ा दोगे, और उस दूसरे को एक जले-चढ़ावे हेतु, प्रभु के प्रति, लेवी-वंशजों के लिए एक परिहार बना देने हेतु।

१३ और तुम लेवी-वंशजों को हारुन के सम्मुख, और उसके बेटों के सम्मुख स्थित कर दोगे, और उन्हें प्रभु के प्रति एक चढ़ावे हेतु चढ़ा दोगे। 

१४ इस प्रकार तुम लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच में से पृथक कर दोगे: और लेवी-वंशज मेरे बन जाएँगे।

१५ और उसके पश्चात लेवी-वंशज सभा के तम्बू के सेवाकार्य को करने हेतु अंदर प्रवेश करेंगे: और तुम उन्हें स्वच्छ कर दोगे, और उन्हें एक आहुति हेतु अर्पित कर दोगे।

१६ क्योंकि वह इस्राएल की सन्तानों के बीच में से मुझे पूर्णतः प्रदान कर दिए गए हैं; उनके स्थान में जो प्रत्येक गर्भ को खोलते हैं, इस्राएल की सन्तानों के प्रथम-जन्मों के स्थान में ही, मैंने उन्हें अपने प्रति ले लिया है।

१७ क्योंकि इस्राएल की सन्तानों के समस्त प्रथम-जन्मे मेरे हैं, दोनो मनुष्य और पशु: उस दिन जब मैंने मिस्र की भूमी में प्रत्येक प्रथम-जन्मे का वध कर दिया था मैंने उन्हें अपने लिए पुनीत ठहरा दिया था।

१८ और मैंने लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के समस्त प्रथम-जन्मो के स्थान में ले लिया है।

१९ और मैंने लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच में से हारुन और उसके बेटों को एक उपहार स्वरूप प्रदान कर दिया है, सभा के तम्बू में इस्राएल की सन्तानों का सेवाकार्य करने हेतु, और इस्राएल की सन्तानों के लिए एक परिहार बना देने हेतु: ताकि इस्राएल की सन्तानों के बीच कोई विपत्ती आए, जब इस्राएल की सन्ताने पुण्य-स्थान के निकट आटे हैं।

२० और मूसा, और हारुन, और इस्राएल की समस्त सन्तानों ने लेवी-वंशजों के साथ उस सभी के अनुसार कर दिया जो प्रभु ने मूसा को लेवी-वंशजों के समबन्ध में आदेश दिया था, वैसा ही इस्राएल की सन्तानों ने उनके साथ कर दिया।

२१ और उन लेवी-वंशजों का शुद्धीकरण हो गया, और उन्होंने अपने वस्त्र धो डाले; और हारुन ने उन्हें एक आहुति स्वरूप प्रभु के सम्मुख अर्पित कर दिया; और हारुन ने उनके लिए एक परिहार बनाया उन्हें स्वच्छ कर देने हेतु।

२२ और इसके पश्चात लेवी-वंशज हारुन के सम्मुख, और उसके बेटों के सम्मुख, सभा के तम्बू में अपना सेवाकार्य करने हेतु अंदर चले गए: जैसा प्रभु ने मूसा को लेवी-वंशजों के समबन्ध में आदेश दे दिया था, वैसा ही उन्होंने उनके साथ कर दिया।

२३ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२४ यह वही है जो लेवी-वंशजों का है: पच्चीस वर्ष की आयु से लेकर और उस से अधिक वह सेवाकार्य हेतु सभा के तम्बू की सेवा मी आएँगे:

२५ और पचास वर्ष की आयु से लेकर वह उसके सेवाकार्य की सेवा समाप्त कर देंगे, और अधिक सेवा नहीं करेंगे:

२६ बल्कि वह सभा के तम्बू में अपने भाई-जनो के साथ, दायित्व-पालन रखने हेतु सेवा करेंगे। इस प्रकार तुम लेवी-वंशजों के प्रति उनके उत्तरदायित्व हेतु कर देना।



नौवाँ अध्याय।


और सीनय के जँगली-क्षेत्र में प्रभु मूसा से बोले, दूसरे वर्ष के पहले महीने में उनके मिस्र की भूमी में से बाहर निकल आने के पश्चात, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों को पार-करना रख लेने दो उसके नियुक्त समय पर।

इस महीने के चौदहवें दिन में, संध्या के समय, तुम इसे उसके नियुक्त समय पर रखोगे: उसकी समस्त रीतियोंनुसार, और उसकी समस्त विधियोंनुसार, तुम उसे रखोगे।

और मूसा इस्राएल की सन्तानों से बोला, कि वह पार-करने को रखें।

और उन्होंने सीनय के जँगली-क्षेत्र में ही, पहले महीने के चौदहवें दिन पर पार-करना रख लिया: उस सभी के अनुसार जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, वैसा की इस्राएल की सन्तानों ने कर दिया।

और कुछ जने थे जो एक पुरुष के शव से दूषित हुए हुए थे, कि वह उस दिन पार-करने को नहीं रख सके: और वह मूसा के सम्मुख और हारुन के सम्मुख उस दिन आए:

और उन पुरुषों ने उनसे कहा, हम एक पुरुष के शव से दूषित हो गए हैं: किस कारण वश हमें रोका हुआ है, कि हम प्रभु की आहुति को उसके नियुक्त समय पर अर्पित करें इस्राएल की सन्तानों के बीच?

और मूसा ने उनसे कहा, खड़े रहो तुम, और मैं सुनूँगा कि प्रभु तुम्हारे समबन्ध में क्या आदेश देते हैं।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

१० इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कहते हुए, यदि तुम्हारा कोई भी पुरुष या तुम्हारे वंश में से किसी शव के कारण अस्वच्छ बन गया हो, या किसी दूर की यात्रा पर हो, तथापि वह प्रभु के प्रति पार-करना रखेगा।

११ दूसरे महीने के चौदहवें दिन, संध्या के समय वह उसे रखेंगे, और उसे बेख़मीरी रोटी और कड़वे साग-पात के साथ खाएँगे। 

१२ वह उसका कोई भी अन्श सुबह तक नहीं छोड़ेंगे, ही उसकी कोई भी हड्डी तोड़ेंगे: पार-करने के समस्त अध्यादेशोंनुसार वह उसे रखेंगे।

१३ परन्तु वह पुरुष जो स्वच्छ है, और किसी यात्रा पर नहीं है, और पार-करने को नहीं रखता है, वही आत्मा उसके लोगों के बीच में से काट दी जाएगी: क्योंकि वह प्रभु के चढ़ावे को उसके नियुक्त समय पर नहीं लाया, वह पुरुष अपना पाप ढोएगा।  

१४ और यदि कोई परदेशी तुम्हारे बीच अल्पवास करेगा, और प्रभु के प्रति पार-करना रखेगा; पार-करने के अध्यादेशानुसार, और उसकी रीतिनुसार, वैसा ही वह करेगा: तुम परदेशी के लिए, और उसके लिए जो भूमी में जन्मा था, एक ही अध्यादेश रखोगे।

१५ और उस दिन जब तम्बू को ऊपर खड़ा कर दिया गया था उस मेघ ने तम्बू को ढक लिया, साक्ष्य के तम्बू को: और संध्या के समय तम्बू पर मानो कि अग्नी का स्वरूप था, सुबह तक।

१६ ऐसा निरन्तर था: वह मेघ उसे दिन में ढकता था, और अग्नी का स्वरूप रात्रि में।

१७ और जब तम्बू पर से वह मेघ ऊपर उठा दिया जाता था, तब उसके पश्चात इस्राएल की सन्ताने यात्रा करते थे: और उस स्थान में जहाँ वह मेघ वास करता था, वहीं इस्राएल की सन्ताने अपने तम्बू गाढ़ देते थे।

१८ प्रभु के आदेश पर इस्राएल की सन्ताने यात्रा करते था, और प्रभु के आदेश पर इस्राएल की सन्ताने डेरा गाढ़ देते थे: जब तक भी मेघ तम्बू पर वास करता था वह अपने तम्बुओं में विश्राम करते थे।

१९ और जब वह मेघ तम्बू पर लम्बे समय रहता था कई दिनो तक, तब इस्राएल की सन्ताने प्रभु का उत्तरदायित्व रखते थे, और यात्रा नहीं करते थे।

२० और यह ऐसा ही था, जब मेघ कुछ ही दिन तम्बू रहता था; प्रभु के आदेशानुसार वह अपने तम्बुओं में वास करते थे, और प्रभु के आदेशानुसार वह यात्रा करते थे।

२१ और यह ऐसा ही था, जब वह मेघ संध्या से सुबह तक वास करता था, और वह मेघ सुबह ऊपर उठा दिया जाता था, तब वह यात्रा करते थे: भले ही वह दिन के समय हो या रात्रि के समय कि वह मेघ उठा लिया जाता था, वह यात्रा करते थे।

२२ या भले ही वह दो दिन थे, या एक माह, या एक वारश, कि वह मेघ तम्बू पर वास करता था, उस पर रहता हुआ, 

इस्राएल की सन्ताने अपने तम्बुओं में रहते थे और यात्रा नहीं करते थे: परन्तु जब वह ऊपर उठा ले लिया जाता था, वह यात्रा करते थे।

२३ प्रभु के आदेश पर वह अपने तम्बुओं में विश्राम करते थे, और प्रभु के आदेश पर वह यात्रा करते थे: वह प्रभु का उत्तरदायित्व रखते थे, प्रभु के आदेश पर मूसा के हाथ।



दसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

तुम दो चाँदी के चिंघाड़े बनाओ; एक ही पूर्ण टुकड़े से तुम उन्हें बनाओगे: ताकि तुम उन्हें सभा को बुलाने के लिए, और शिविरों की यात्रा के लिए प्रयोग में ला सको।

और जब वह उनके साथ फूंकेंगे, समस्त सभा तुम्हारे पास सभा के तम्बू के द्वार पर स्वयं को एकत्रित कर लेंगे।

और यदि वह बस एक ही चिंघाड़े से फूंकते हैं, तब वह मुखिया, जो इस्राएल के हज़ारों के प्रमुख हैं, स्वयं को तुम्हारे पास एकत्रित कर लेंगे।

जब तुम कोई संकट-सूचना फूंकते हो, तब वह शिविर जो पूर्वी भागों में हैं अग्रसर होंगे।

जब तुम कोई संकट-सूचना दूसरी बार फूंकते हो, तब वह शिविर जो दक्षिण की ओर हैं अपनी यात्रा लेंगे: वह एक संकट-सूचना अपनी यात्राओं के लिए फूंकेंगे।

परन्तु जब उस सभा को एक साथ एकत्रित करना होगा, तुम फूंकोगे, परन्तु तुम संकट-सूचना की ध्वनि नहीं बनाओगे।

और हारुन के बेटे, वह पुरोहित, उन चिंघाड़ों के साथ फूंकेंगे; और वह तुम्हारे प्रति एक अनन्तता का अध्यादेश होंगे तुम्हारी पीढ़ी-दर-पीढ़े तक।

और यदि तुम अपनी भूमी में उस शत्रु के विरुद्ध युद्ध पर जाते हो जो तुम्हारा अत्याचार करता है, तब तुम चिंघाड़ों के साथ एक संकट-सूचना फूंकोगे; और तुम्हारा प्रभु तुम्हारे ईश्वर के सम्मुख स्मरण कर लिया जाएगा, और तुम्हारा तुम्हारे शत्रुओं से बचाव कर दिया जाएगा।

१० और तुम्हारी हर्षितता के दिवस में भी, और तुम्हारे गम्भीर दिवसों में, और तुम्हारे महीनों के आरम्भों में, तुम चिंघाड़ों के साथ अपने जले-चढ़ावों पर, और अपने शान्ति-चढ़ावों की बलियों पर फूंकोगे; ताकि वह तुम्हारे पति ईश्वर के सम्मुख के स्मारक बन सकें: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर।

११ और यह होने को आया, कि दूसरे वर्ष में, दूसरे महीने के बारहवें दिन पर, साक्ष्य के तम्बू पर से वह मेघ ऊपर ले लिया गया था। 

१२ और इस्राएल की सन्तानों ने सीनय के जँगली-क्षेत्र में से बाहर अपनी यात्राएँ कीं; और उस मेघ ने पारन के जँगली-क्षेत्र में डेरा डाल दिया।

१३ और उन्होंने पहले अपनी यात्रा प्रभु के आदेशानुसार मूसा के हाथ की।

१४ प्रथम स्थान में यहूदा की सन्तानों के शिविर का ध्वज गया, उनकी सेनाओंनुसार: और उसकी सेना पर अम्मीनादाब का बेटा नहशोन था।

१५ और इस्सकार की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर ज़ूअर का बेटा नेतनील था।

१६ और ज़बूलून की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर हेलोन का बेटा एलिआब था।

१७ और उस तम्बू को नीचे कर दिया गया था; और गेरशौन के बेटे और मरेरी के बेटे अग्रसर हुए, तम्बू को ढोते हुए।

१८ और रूबेन की सन्तानों के शिविर का ध्वज अग्रसर हुआ, उनकी सेनाओंनुसार: और उसकी सेना पर शेदेउर का बेटा एलिसुर था।

१९ और शिमोन की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर ज़ुरिशद्दय का बेटा शलुमिएल था।

२० और गाद की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर दूएल का बेटा एलियसाफ था।

२१ और कहाथ-वंशज अग्रसर हुए, पुण्य-स्थान को ढोते हुए: और उन दूसरों ने तम्बू को उनके पहुँचने से पहले खड़ा किया।

२२ और ईफ्रैम की सन्तानों के शिविर का ध्वज अग्रसर हुआ, उनकी सेनाओंनुसार: और उसकी सेना पर अम्मिहुद का बेटा एलिशामा था।

२३ और मनश्‍शे की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर पदासुर का बेटा गमैलियल था।

२४ और बिन्यामिन की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर गिदोनी का बेटा अबीदन था।

२५ और दान की सन्तानों के शिविर का ध्वज अग्रसर हुआ, जो उनके समस्त शिविरों का पृष्ठरक्षक-दल था उनकी सेनाओं के सर्वत्र में: और उसकी सेना पर अमिशद्दय का बेटा अहिएज़र था।

२६ और आशेर की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर ओक्रन का बेटा पगिएल था।

२७ और नफ्ताली की सन्तानों की प्रजाति की सेना पर एनन का बेटा अहीर था।

२८ इस प्रकार इस्राएल की सन्तानों की यात्राएँ थी उनकी सेनाओंनुसार, जब वह अग्रसर होती थीं।

२९ और मूसा ने मिद्यान जनजाति के रुएल, मूसा के ससुर, के बेटे होबाब से कहा, हम उस स्थान तक यात्रा कर रहे हैं जिसके विषय में प्रभु बोले, मैं उसे तुम्हें प्रदान कर दूँगा: तुम हमारे साथ जाओ, और हम तुम्हारे साथ भला करेंगे: क्योंकि प्रभु ने इस्राएल के समबन्ध में अच्छा बोला है।

३० और उसने उस से कहा, मैं नहीं जाऊँगा; बल्कि मैं अपनी स्वयं की भूमी में, और अपने कुल में प्रस्थान करूँगा।

३१ और उसने कहा, हमें मत छोड़ो, मैं तुम से प्रार्थना करता हूँ; क्योंकि तुम जानते हो कि हमें जँगली-क्षेत्र में कैसे पड़ाव डालना चाहिए, और तुम हमारे लिए आँखों के स्थान में हो सकते हो।

३२ और ऐसा होगा, यदि तुम हमारे साथ जाओगे, ऐसा होगा, कि जो भलाई प्रभु हमारे साथ करेंगे, वही हम तुम्हारे साथ कर देंगे।

३३ और उन्होंने प्रभु के पहाड़ से प्रस्थान कर तीन दिनो की यात्रा की: और प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र का संदूक उनके आगे गया उन तीन दिनो की यात्रा में, उनके लिए एक विश्राम का स्थान ढूँढ लेने हेतु।

३४ और प्रभु का मेघ दिन में उनके ऊपर रहता था, जब वह शिविर से प्रस्थान करते थे। 

३५ और यह होने को आया, कि जब वह संदूक अग्रसर होता था, कि मूसा कहता था, प्रभु ऊपर उठ जाएँ, और अपने शत्रुओं को तितर-बितर हो जाने दें; और उन्हें जो आपसे घृणा करते हैं, आपके सम्मुख भाग जाने दें।

३६ और जब वह विश्राम करता था, वह कहता था, लौट आएँ, हे प्रभु, इस्राएल के कई सहस्त्रों के पास।



ग्यारहवाँ अध्याय।


और जब लोगों ने शिकायत की, इस से प्रभु अप्रसन्न हो गए: और प्रभु ने यह सुना; और उनका क्रोध भड़क उठा; और प्रभु की अग्नी उनके बीच जल उठी, और उनका भक्षण कर दिया जो शिविर के सबसे बाहरी भागों में थे।

और लोग मूसा की ओर चीख पड़े; और जब मूसा ने प्रभु से प्रार्थना की, वह अग्नी बुझ गई।

और उसने उस स्थान को तबेराह का नाम दिया: क्योंकि प्रभु की वह अग्नी उनके बीच जली थी।

और उनके बीच वह मिला-जुला जनौघ लालायित हो उठा: और इस्राएल की सन्तानें भी पुनः रो पड़ीं, और कहा, हमें कौन माँस खाने के लिए देगा?

हमें उस मछली का स्मरण है जिसे हम मिस्र में निशुल्क खाते थे; वह खीरे, और खरबूज़े, और वह गंधने, और वह प्याज़, और वह लस्सन:

परन्तु अब हमारी आत्मा सूख चुकी है: कुछ भी नहीं है, इस मन्ना के सिवाय, हमारी आँखों के समक्ष।

और वह मन्ना धनिए के बीज समान था, और उसका रंग गुग्गल के रंग के समान था।

और वह लोग इधर-उधर गए, और उसे एकत्रित किया, और उसे चक्कियों में पीसा, या उसे एक ओखले में कूटा, और उसे तवों पर पकाया, और उस से पराँठे बनाए: और उसका स्वाद ऐसा था मानो कि ताज़े तेल के स्वाद समान।

और रात्रि में जब शिविर पर ओस पड़ती थी, वह मन्ना उस पर गिरता था।

१० तब मूसा ने लोगों को रोते हुए सुना उनके परिवारों के सर्वत्रों में, प्रत्येक पुरुष अपने तम्बू के द्वार पर: और प्रभु का क्रोध अत्यंतता से सुलग उठा था; मूसा भी अप्रसन्न था।

११ और मूसा ने प्रभु से कहा, किस कारण वश आपने आपने नौकर को सताया है? और किस कारण वश मैंने आपकी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया है, कि आप इन सभी लोगों का भार मुझ पर लाद रहे हैं?

१२ क्या मैंने इन सभी लोगों का गर्भाधान किया है? क्या मैंने इन्हें जनना है, कि आप मुझ से कहें, इन्हें अपने गोद में उठा ले जाओ, जैसे एक पोषक-पिता दूध पीते बच्चे को ढोता है, उस भूमी में जिसकी शपथ अपने उनके पित्रों को दी थी?

१३ मैं कहाँ से इन सभी लोगों को माँस प्रदान करूँ? क्योंकि यह मेरी ओर रो रहे हैं, कहते हुए, हमें माँस दे दो, ताकि हम खा सकें।

१४ मैं अकेला इन सभी लोगों को नहीं ढो सकता, क्योंकि यह मेरे लिए बहुत भारी है।

१५ और यदि आप मेरे साथ ऐसे व्यवहार करेंगे, तो मुझे मार दें, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, यदि मैंने आपकी दृष्टि में अनुग्रह पा लिया है; और मुझे अपनी दुर्दशा मत देखने दें।

१६ और प्रभु ने मूसा से कहा, इस्राएल के वृद्ध-गणों के सत्तर पुरुष मेरे पास एकत्रित कर लो, जिनसे तुम परिचित हो कि वह लोगों के वृद्ध-गण हैं, और उन पर अफ़सर हैं; और उन्हें सभा के तम्बू तक ले आओ, ताकि वह वहाँ तुम्हारे साथ खड़े हो सकें। 

१७ और मैं नीचे जाऊँगा और तुम्हारे साथ वहाँ बात करूँगा: और मैं उस भावात्मा में से लेकर जो तुम पर है, और मैं उसे उन पर डाल दूँगा; और तुम्हारे साथ लोगों का बोझ ढोएँगे, ताकि तुम उसे स्वयं अकेले ढो।

१८ और तुम लोगों से बोलो, कल के लिए स्वयं को पुनीत कर दो, और तुम माँस खाओगे: क्योंकि तुम प्रभु के कानो में रो-धो लिए हो, कहते हुए, कौन हमें खाने के लिए माँस देगा? क्योंकि हमारे साथ तो मिस्र में भला था: इसलिए प्रभु तुम्हें माँस प्रदान कर देंगे, और तुम खाओगे।

१९ तुम एक ही दिन नहीं खाओगे, ही दो दिन, ही पाँच दिन, ही दस दिन, ही बीस दिन;

२० बल्कि एक पूरे महीने, जब तक कि वह तुम्हारे नथुनों में से बाहर नहीं निकल आता है, और वह तुम्हारे प्रति घृणात्मक बन जाए: क्योंकि तुमने प्रभु से घृणा की है जो तुम्हारे बीच हैं, और उनके सम्मुख रोए हो, कहते हुए, हम मिस्र में से क्यों बाहर निकल आए?

२१ और मूसा ने कहा, यह लोग जिनके बीच में हूँ, छह सौ हज़ार पैदल-सैनिक हैं; और आपने कहा है, मैं इन्हें माँस दूँगा, ताकि यह एक पूरे महीने खा सकें।

२२ क्या इनके लिए वह झुण्ड और पशु समूह मार दिए जाएँ, इनकी पूर्ती के लिए? या समुद्र की समस्त मछलियाँ इनके लिए एकत्रित कर लीं जाएँ, इनकी पूर्ती के लिए?

२३ और प्रभु ने मूसा से कहा, क्या प्रभु का हाथ घट गया है क्या? अब तुम देखोगे कि यदि मेरा शब्द तुम्हारे प्रति घटने को आएगा या नहीं।

२४ और मूसा बाहर निकल आया, और लोगों को प्रभु के शब्द बता दिए, और लोगों के वृद्धों के सत्तर पुरुष एकत्रित कर लिए, और उन्हें तम्बू के चारों ओर स्थित कर दिया। 

२५ और प्रभु एक मेघ में नीचे गए, और उस से बोले, और उन भावात्मा में से जो उस पर थे, लिया, और उन्हें उन सत्तर वृद्धों को प्रदान कर दिया: और यह होने को आया, कि, जब भावात्मा उन पर ठहर गए थे, उन्होंने प्रेरित-उपदेश दिए, और रुके नहीं। 

२६ परन्तु उन मनुष्यों में से दो शिविर में ही ठहरे रहे, एक का नाम एलदाद था, और दूसरे का नाम मेदाद था: और भावात्मा उन पर ठहर गए: और वह उन में से थे जो लिखे जा चुके थे, परन्तु तम्बू तक वह बाहर नहीं गए: और उन्होंने शिविर में प्रेरित-उपदेश दिए।

२७ और एक युवा पुरुष भागा, और मूसा को बताया, और कहा, एलदाद और मेदाद शिविर में प्रेरित-उपदेश दे रहे हैं।

२८ और मूसा के नौकर, नून के बेटे यहोशुअ ने, उसके युवा पुरुषों में से एक ने उत्तर दिया और कहा, मेरे प्रभु मूसा, उन्हें रोकें!

२९ और मूसा ने उस से कहा, मेरे वास्ते तुम ईर्षा कर रहे हो? भला होता कि प्रभु के समस्त लोग पैग़म्बर होने, और कि प्रभु उन पर अपने भावात्मा को डाल देते!

३० और मूसा स्वयं शिविर में गए, वह और इस्राएल के वह वृद्ध-गण।

३१ और प्रभु से एक वायु निकल चली, और समुद्र से बटेर ले आई, और उन्हें शिविर के साथ गिरा दिया, मानो कि एक दिन की यात्रा इस ओर, और मानो कि एक दिन की यात्रा उस ओर, शिविर के चारों ओर, और मानो कि वह दो हाथ ऊँचे हों पृथ्वी के चहरे पर।

३२ और लोग उस सारे दिन खड़े हुए, और उस सारी रात, और उस सारे अगले दिन, और उन्होंने उन बटेरों को एकत्रित कर लिया: उसने जिसने न्यूनतम एकत्रित किया दस ओमर एकत्रित किए: और उन्होंने उन्हें स्वयं के लिए शिविर के चारों ओर बाहर फैला दिया।

३३ और जैसे वह माँस अभी उनके दाँतों के बीच ही था, उसके चबा लिए जाने से पहले ही, प्रभु का आक्रोश लोगों के विरुद्ध सुलग उठा, और प्रभु ने उन लोगों पर एक बहुत ही बड़ी विपत्ती से प्रहार कर दिया। 

३४ और उसने उस स्थान का नाम किब्रोतहत्तावा पुकारा: क्योंकि वहीं उन्होंने उन लोगों को दफ़नाया जो लालायित हो उठे थे।

३५ और लोगों ने किब्रोतहत्तावा से हसेरोत तक यात्रा की; और हसेरोत में बस गए।



बारहवाँ अध्याय।


और मरियम और हारुन मूसा के विरुद्ध बोल पड़े, उस इथियोपिया की स्त्री के कारण जिस से उसने विवाह कर लिया था: क्योंकि उसने एक इथियोपिया की स्त्री से विवाह कर लिया था।

और उन्होंने कहा, क्या प्रभु वास्तव में केवल मूसा के द्वारा ही बोले हैं? क्या वह हमारे द्वारा भी नहीं बोले क्या? और प्रभु ने यह सुना।

अब वह पुरुष मूसा बहुत ही विनम्र था, उन सभी मनुष्यों से अधिक जो पृथ्वी के चहरे पर थे।

और प्रभु अचानक बोल पड़े मूसा से, और हारुन से, और मरियम से, तुम तीनो बाहर जाओ सभा के तम्बू तक। और वह तीनो बाहर गए।

और प्रभु उस मेघ के स्तम्भ में नीचे गए, और तम्बू के द्वार में खड़े हो गए, और हारुन और मरियम को बुलाया: और वह दोनो आगे गए।

और उन्होंने कहा, मेरे शब्दों को अब सुन लो: यदि तुम्हारे बीच कोई पैग़म्बर हो, मैं प्रभु ही उसे स्वयं से एक दृश्य में परिचय दिलवाऊँगा, और उस से एक स्वप्न में बोलूँगा।

मेरा नौकर मूसा ऐसा नहीं है, जो मेरे समस्त घराने में विश्वसनीय है।

इसके साथ मैं आमने-सामने बोलूँगा, स्पष्टता से ही, और रहस्यमई बातों से नहीं; और प्रभु के स्वरूप को वह देखेगा: किस कारण वश फिर तुम मेरे सेवक मूसा के विरुद्ध बोलने से डरे नहीं?

और प्रभु का क्रोध उनके विरुद्ध सुलग उठा; और वह चले गए।

१० और उस मेघ ने तम्बू पर से प्रस्थान कर लिया; और देखो तो, मरियम हिम के समान एक कुष्ठ-रोगी बन गई: और हारुन ने मरियम को देखा, और देखो, वह कुष्ठ-रोगी बन गई थी।

११ और हारुन ने मूसा से कहा, हाय मेरे प्रभु, मैं आपसे विनती करता हूँ, हम ओर यह पाप मत पड़वाएँ, जिस में हमने मूर्खता कर दी है, और जिस में हमने पाप कर दिया है।

१२ इसे एक मृत समान मत बन जाने दें, जिसका आधा माँस खाया हुआ हो जब वह अपनी माँ की कोख में बाहर निकलता है।

१३ और मूसा प्रभु की ओर चीखा, कहता हुआ, हे ईश्वर, इसे अभी स्वास्थ कर दें, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ।

१४ और प्रभु ने मूसा से कहा, यदि इसके बाप ने बस इसके चहरे पर थूका ही होता, तो क्या यह सात दिन लज्जित होती? इसे शिविर से बाहर सात दिन बँद करके रखो, और उसके पश्चात इसे पुनः भीतर ग्रहण कर लेना।

१५ और मरियम को शिविर के बाहर सात दिन बँद कर दिया गया था: और लोगों ने यात्रा नहीं की जब तक मरियम पुनः अन्दर नहीं ले गई थी।  

१६ और तत्पश्चात लोग हसेरोत से चल दिए, और परान के जँगली-क्षेत्र में डेरा डाल दिया।



तेरहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

तुम आदमी भेज दो ताकि वह कनान की भूमी की छान-बिन कर सकें, जिसे मैं इस्राएल की सन्तानों को दे रहा हूँ: उनके पित्रों की प्रत्येक प्रजाति में से तुम एक आदमी को भेजोगे, प्रत्येक उनके बीच एक अध्यक्ष।

और मूसा ने उन्हें प्रभु के आदेशानुसार परान के जँगली-क्षेत्र से भेज दिया: वह सभी आदमी इस्राएल की सन्तानों के मुखिया थे।

और यह उनके नाम थे: रूबेन की प्रजाति से, ज़कुर का बेटा शम्मुअ।

शिमोन की प्रजाति से, होरी का बेटा शफट।

यहूदा की प्रजाति से, यपुन्ने का बेटा कालेब।

इस्सकार की प्रजाति से, युसुफ का बेटा इगल।

ईफ्रैम की प्रजाति से, नून का बेटा यहोशुअ।

बिन्यामिन की प्रजाति से, रापू का बेटा पलटी।

१० ज़बूलून की प्रजाति से सोदी का बेटा गद्दीअल।

११ युसुफ की प्रजाति से, मनश्‍शे की प्रजाति से, सूसी का बेटा गद्दी।

१२ दान की प्रजाति से, गमल्ली का बेटा अम्मिअल।

१३ आशेर की प्रजाति से, मिखाएल का बेटा सेथर।

१४ नफ्ताली की प्रजाति से, वोफसी का बेटा नहबी।

१५ गाद की प्रजाति से, मकी का बेटा गऊएल।

१६ यह उन व्यक्तियों के नाम हैं जिन्हें मूसा ने भूमी का भेद निकाल लेने के लिए भेजा था। और मूसा ने नून के बेटे ओशेया का नाम यहोशुअ पुकारा।

१७ और मूसा ने उन्हें कनान की भूमी का भेद निकाल लेने के लिए भेज दिया, और उनसे कहा, तुम इस दिशा में दक्षिण की ओर चले जाओ, और ऊपर पर्वत में चले जाओ:

१८ और भूमी को देखो, कि वह कैसी है, और वह लोग जो उस में बसते हैं, यदि बलशाली हैं या निर्बल, थोड़े या बहुत;

१९ और वह कैसी भूमी है जिस में वह बसते हैं, यदि वह अच्छी है या बुरी; और वह कौन से नगर हैं जिन में बसते हैं, यदि तम्बुओं में, या गढ़ों में;

२० और वह भूमी कैसी है, यदि वह मोटी हैं या पतली-दुबली, यदि वहाँ पेड़ हैं या नहीं। और तुम अच्छे साहसी बनो, और उस भूमी का फल ले आना। अब वह ऋतु प्रथम पके अंगूरों की ऋतु का था।

२१ तो वह ऊपर चले गए, और भूमी का भेद ले लिया ज़िन के जँगली-क्षेत्र से लेकर रहोब तक, जैसे लोग हमात जाते हैं।

२२ और उन्होंने दक्षिण की ओर से आरोहण किया, और वह हेब्रोन में गए; जहाँ अहीमन, शेशय, और तलमय, अनक की सन्तानें थीं। (अब हेब्रोन का निर्माण, मिस्र में ज़ोन से, सात वर्ष पूर्व किया गया था।)

२३ और वह एश्कोल की नदिका तक पहुँचे, और वहाँ से अंगूरों के एक गुच्छे की डाल को नीचे काट डाला, और उसे दो जनो के बीच एक डण्डे पर ढो लिया; और वह अनानासों में से, और अंजीरों में में से, ले आए।

२४ वह स्थान एश्कोल की नदिका कहलाया जाता था, उस अंगूरों के गुच्छे के कारण जिसे इस्राएल की सन्तानों ने वहाँ से नीचे काट डाला था।

२५ और वह चालीस दिनो पश्चात भूमी का भेद लेकर वापस लौट आए।

२६ और वह गए और मूसा, और हारुन, और इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा के पास गए, परान के जँगली-क्षेत्र में, कादेश तक; और वह उन्हें शब्द वापस ले आए, और समस्त सभा को, और उन्हें भूमी का फल दिखला दिया।

२७ और उन्होंने उस से बोला, और कहा, हम उस भूमी में पहूँच गए जहाँ तुमने हमें भेजा था, और निश्चितता से वह दूध और मधु से बहती है; और यही उसका फल है।

२८ तथापि भूमी में बसने वाले लोग बलशाली हैं, और वह नगर दीवारों से घिरे हैं, और बहुत बड़े हैं: और इसके अतिरिक्त हमने अनक की सन्तानों को वहाँ देखा।

२९ अमालेकवंशज दक्षिण की भूमी में बसते हैं: और हित्ती-वंशज, और जेबूसी-वंशज, और अमोरी, पर्वतों में बसते हैं: और कनानवासी समुद्र के साथ वास करते हैं, और यर्दन के तट के साथ।

३० और कालेब ने मूसा के सामने लोगों को शान्त किया, और कहा, हम तुरँत ही ऊपर चले जाते हैं, और उस पर अधिकार जमा लेते हैं; क्योंकि हम उसे परास्त कर देने में भले-समर्थ हैं।

३१ परन्तु उन आदमियों ने जो उसके साथ ऊपर गए थे कहा, हम उन लोगों के विरुद्ध ऊपर जाने में सक्षम नहीं हैं; क्योंकि वह हमसे अधिक शक्तिशाली हैं।

३२ और वह उस भूमी का एक बुरा समाचार ले आए जिसका उन्होंने इस्राएल की सन्तानों के प्रति भेद निकाल लिया था, कहते हुए, वह भूमी, जिस में से हम उसका भेद निकालने हेतु चलते गए, ऐसी भूमी है जो उसके वासियों को खा जाती है; और वह सभी लोग जिन्हें हमने उस में देखा बहुत ही ऊँचे क़द के हैं।

३३ और वहीं हमने विशालकायों को भी देखा, अनक के बेटों को, जो विशालकायों से आते हैं: और हम अपनी ही दृष्टि में झिंगुरों समान थे, और ऐसे ही हम उनकी दृष्टि में थे।



चौदहवाँ अध्याय।


और समस्त सभा ने अपनी वाणी उठाई, और चिल्ला पड़े; और वह लोग उस रात रोए।

और इस्राएल की समस्त सन्तानें मूसा के विरुद्ध और हारुन के विरुद्ध बड़बड़ाने लग गईं: और समस्त सभा ने उनसे कहा, भला होता कि हम मिस्र की भूमी में मर गए होते! या भला होता कि हम इस जँगली-क्षेत्र में मर गए होते!

और किस कारण वश प्रभु हमें इस भूमी में ले आए हैं, तलवार से गिर पड़ने हेतु, ताकि हमारी पत्नियाँ और हमारे बच्चे शिकार बन जाएँ? क्या हमारे लिए यह बेहतर हुआ होता कि हम मिस्र में वापस चले जाते?

और उन्होंने एक दूसरे से कहा, हम एक कप्तान बना लेते हैं, और हम मिस्र में वापस चले जाते हैं।

तब मूसा और हारुन इस्राएल की सन्तानों की सभा की समस्त मण्डली के सम्मुख अपने चेहरों के बल गिर पड़े।

और नून के बेटे यहोशुअ, और यपुन्ने के बेटे कालेब ने, जो उन में से थे जिन्होंने भूमी का भेद निकाल लिया था, अपने कपड़े फाड़ डाले:

और वह इस्राएल की सन्तानों की सामंत सभा से बोले, कहते हुए, वह भूमी, जिस में से हम उसका भेद निकाल लेने हेतु चलते गए थे, बहुत ही अच्छी भूमी है।

यदि प्रभु हम में आनंद लेते हैं, तो वह हमें इस भूमी में भीतर ले आएँगे, और इसे हमें प्रदान कर देंगे; एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है।

बस केवल प्रभु के विरुद्ध तुम विद्रोह मत करो, ही तुम भूमी के लोगों से भयभीत हो; क्योंकि वह हमारे लिए रोटी हैं: उनकी रक्षा उनसे प्रस्थान कर चुकी है, और प्रभु हमारे साथ हैं: उनसे मत डरो।

१० परन्तु समस्त सभा उन पर पत्थरों से पथराव कर देने हेतु बोल पड़ी। और प्रभु की महिमा इस्राएल की समस्त सन्तानों के समक्ष सभा के तम्बू में प्रकट हुई। 

११ और प्रभु ने मूसा से कहा, कितने समय तक यह लोग मुझे उकसाएँगे? और मुझ पर विश्वास करने से पहले कितना समय बीतेगा, उन सभी संकेतों हेतु जिन्हें मैंने इनके बीच किए हैं?

१२ मैं इन पर महामारी से प्रहार कर दूँगा, और इन्हें इनके उत्तराधिकार से निष्कासित कर दूँगा, और तुम में से एक बृहत, और उनसे अधिक शक्तिशाली राष्ट्र बना दूँगा।

१३ और मूसा से प्रभु से कहा, तब मिस्रवासी यह सुन लेंगे, (क्योंकि आप इन लोगों को अपने प्रबल से उनके बीच में से ऊपर ले आए;)

१४ और वह यह इस भूमी के निवासियों को बता देंगे: क्योंकि उन्होंने सुन लिया है कि आप प्रभु इन लोगों के बीच हैं, कि आप प्रभु आमने-सामने देखे जाते हैं, और कि आपका मेघ इनके ऊपर खड़ा रहता है, और कि आप इनसे पहले जाते हैं, दिन के समय एक मेघ के स्तम्भ में, और रात्रि के समय एक अग्नी के स्तम्भ में।

१५ अब यदि आप इन सभी लोगों को एक पुरुष समान मार डालेंगे, तब वह राष्ट्र जिन्होंने आपकी कीर्ती सुन ली है, बोलेंगे, कहते हुए,

१६ चूँकि प्रभु इन लोगों को भूमी में भीतर ले आने में असमर्थ थे, जिसका उन्होंने इन्हें वचन दे दिया था, इसलिए उन्होंने इन्हें जँगली-क्षेत्र में मार डाला। 

१७ और अब, मैं आपसे विनती करता हूँ, मेरे प्रभु की शक्ती को बृहत् हो जाने दें, उसके अनुसार जैसा आपने बोला है, कहते हुए,

१८ प्रभु सहनशील हैं, और बृहत् करुणामई हैं, अधर्म-पाप और दोष को क्षमा करते हुए, और किसी भी रीति से दोषी को निर्दोष सिद्ध करते हुए, पित्रों के अधर्म-पापों के दण्ड बच्चों पर तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देता हुआ।

१९ क्षमा कर दें, मैं विनती करता हूँ आपसे, इन लोगों का अधर्म-पाप अपनी करुणा की विशालतानुसार, और जैसे अप्पने इन लोगों को क्षमा कर दिया है, मिस्र से लेकर इस समय तक भी।

२० और प्रभु ने कहा, मैंने तुम्हारे शब्दानुसार क्षमा कर दिया है:

२१ परन्तु जैसा यह सत्य है कि मैं जीता हूँ, समस्त पृथ्वी प्रभु की महिमा से भर जाएगी।

२२ क्योंकि उन सभी व्यक्तियों ने जिन्होंने मेरी महिमा, और मेरे चमत्कार देख लिए हैं, जिन्हें मैंने मिस्र और जँगली-क्षेत्र में कर दिया था, और अब मुझे इन दस बार परखा है, और मेरी वाणी का श्रवण नहीं किया है;

२३ निश्चितता से ही यह उस भूमी को नहीं देखेंगे जिसका वचन मैंने उनके पित्रों को दिया था, ही इन में से कोई भी उसे देखेगा जिसने मुझे उकसाया है:

२४ बल्कि मेरा नौकर कालेब, क्योंकि उसके पास कोई दूसरा भावात्मा था उसके साथ, और वह मेरे पीछे पूर्ण रूप से चला है, उसे मैं उस भूमी में ले आऊँगा जिस में वह गया था; और उसका बीज उस पर अधिकार रखेगा।

२५ (अब अमालेकवंशज और कनानवासी घाटी में बसते थे।) कल तुम मुड़ जाना, और जँगली-क्षेत्र में चले जाना लाल-समुद्र के पथ से।

२६ और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए,

२७ मैं कितने समय इस बुरी सभा को सहूँ जो मेरे विरुद्ध बड़बड़ा रहे हैं? मैंने इस्राएल की सन्तानों की बड़बड़ाहटें सुन लीं हैं, जो वह मेरे विरुद्ध बड़बड़ाते हैं।

२८ उनसे कहो, जैसा यह सत्य है कि मैं जीता हूँ, कहते हैं प्रभु, जैसा तुमने मेरे कानो में बोल दिया है, वैसा ही मैं तुम्हारे साथ करूँगा:

२९ तुम्हारे शव इस जँगली-क्षेत्र में गिर जाएँगे; और वह सभी जो तुम में से गिन लिए गए थे, तुम्हारी सम्पूर्ण संख्यानुसार, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, जो मेरे विरुद्ध बड़बड़ाए हैं,

३० निस्संदेह तुम उस भूमी में नहीं प्रवेश करोगे जिसका मैंने वचन दिया था तुम्हें उस में बसाने का, सिवाय यपुन्ने का बेटा कालेब, और नून का बेटा यहोशुअ।

३१ परन्तु तुम्हारे छोटे-नन्हें, जो तुमने कहा था कि शिकार बन जाएँगे, उन्हें मैं अन्दर ले आऊँगा, और वह उस भूमी से परिचय रखेंगे जिसे तुमने धिक्कार दिया है।

३२ परन्तु जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, तुम्हारे शव इस जँगली-क्षेत्र में गिर जाएँगे।

३३ और तुम्हारी सन्तानें जँगली-क्षेत्र में चालीस साल भटकेंगी, और तुम्हारे वैश्यापने को ढोएँगी, जब तक कि तुम्हारे शव जँगली-क्षेत्र में क्षय नहीं हो जाते।

३४ उन दिनो की संख्यानुसार जिन में तुमने भूमी का भेद निकला था, चालीस दिन ही, प्रत्येक दिन एक वर्ष के लिए, तुम अपने अधर्म-पापों को ढोगे, चालीस वर्ष ही, और तुम मेरी प्रतिज्ञा के भंग को जानोगे।

३५ मैंने प्रभु ने ही कह दिया है, मैं अवश्यता से इसे इस समस्त बुरी मण्डली के प्रति कर दूँगा, जो मेरे विरुद्ध एक साथ एकत्रित हो गई है: इसी जँगली-क्षेत्र में इनका क्षय हो जाएगा, और वहीं यह मर जाएँगे।

३६ और वह आदमी, जिन्हें मूसा ने भूमी का भेद निकालने भेजा था, जो लौट आए थे, और जिन्होंने समस्त सभा से उसके विरुद्ध बड़बड़ करना करवा दिया था, उस भूमी के प्रति झूठा समाचार लाकर,

३७ यहाँ तक कि उन्हीं आदमियों ने जिन्होंने उस भूमी के विषय में बुरा समाचार दिया था, प्रभु के सम्मुख विपत्ती से मर गए। 

३८ परन्तु नून का बेटा यहोशुअ, और यपुन्ने का बेटा कालेब, जो उन आदमियों में से थे जो उस भूमी का भेद निकालने गए थे, जीवित ही रहे।

३९ और मूसा ने इस्राएल की समस्त सन्तानों को यह बातें बताईं: और उन लोगों ने घोर शोक मनाया।

४० और वह सुबह-सुबह उठ गए, और पर्वत की ऊपर चढ़ाई कर रहे थे, कहते हुए, लो, हम तो यहाँ हैं, और हम उस स्थान तक ऊपर चले जाएँगे जिसका प्रभु ने वचन दे दिया है: क्योंकि हमने पाप कर दिया है। 

४१ और मूसा ने कहा, किस कारण वश अब तुम प्रभु के आदेश का उल्लंघन कर रहे हो? यह सफल नहीं होगा।

४२ ऊपर मत जाओ, क्योंकि प्रभु तुम्हारे बीच नहीं हैं; ताकि तुम अपने शत्रुओं के सामने पिट जाओ।

४३ क्योंकि अमालेकवंशज और कनानवासी वहाँ हैं तुम्हारे सामने, और तुम तलवार द्वारा गिर जाओगे: क्योंकि तुम प्रभु से परे मुड़ चले हो, इसलिए प्रभु तुम्हारे साथ नहीं होंगे।

४४ परन्तु उन्होंने पहाड़ी की चोटी तक ऊपर जाने की परिकल्पना कर ली: तथापि प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक ने, और मूसा ने, शिविर से बाहर प्रस्थान नहीं किया।

४५ तब वह अमालेकवंशज नीचे गए, और वह कनानवासी जो इस पहाड़ में बसते थे, और उन्हें पीट दिया, और उन्हें हरा दिया, होरमा तक भी। 




पंद्रहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम अपने बसेरों की भूमी में प्रवेश कर चुकोगे, जो मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ,

और प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी आहुति बनाओगे, एक जला-चढ़ावा, या किसी प्रण की क्रिया हेतु एक बलि, या किसी स्वैच्छिक चढ़ावे में, या तुम्हारे गम्भीर-भोजों में, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता बनाने हेतु, पशु-समूह में से, या झुण्ड में से:  

तब वह जो अपने चढ़ावे को प्रभु के प्रति चढ़ाता है, एक आटे के दसवें भाग का तेल के एक हिन के चौथे भाग के साथ मिश्रित भोज-चढ़ावा लाएगा। 

और अंगूर-रस के एक हिन का चौथा भाग एक पेय-चढ़ावे हेतु तुम उस जले-चढ़ावे या बलि के साथ तैयार कर दोगे, एक मेमने हेतु।

या किसी मेढ़े के लिए, तुम भोज-चढ़ावे हेतु आटे के दो-दसवें भाग तेल के एक हिन के तीसरे भाग के साथ मिश्रित, तैयार कर दोगे।

और एक पेय-चढ़ावे हेतु तुम अंगूर-रस के एक हिन का तीसरा भाग चढ़ा दोगे, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु।

और जब तुम किसी साँड को एक जले-चढ़ावे, या किसी प्रण की क्रिया हेतु एक बलि, या प्रभु के प्रति शान्ति-चढ़ावों हेतु तैयार करते हो: 

तब वह एक साँड के साथ, तेल के आधे हिन के साथ मिश्रित आटे के तीन-दसवें भागों का एक भोज-चढ़ावा ले आएगा।

१० और तुम अंगूर-रस का आधा हिन एक पेय-चढ़ावे हेतु ले आओगे, अग्नी से बनी एक आहुति हेतु, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता की।

११ इस रीति से यह किया जाएगा एक साँड के लिए, या एक मेढ़े के लिए, या एक मेमने के लिए, या एक हलवान के लिए।

१२ उस संख्यानुसार जिसे तुम तैयार करोगे, उसी प्रकार ही तुम प्रत्येक के साथ करोगे उनकी संख्यानुसार।

१३ वह सभी जो देश में जन्मे हैं इन कार्यों को इसी रीतिनुसार करेंगे, अग्नी से बने उस चढ़ावे को चढ़ा देने हेतु, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता से।

१४ और यदि कोई परदेशी तमहरे साथ अल्पवास करता है, या जो कोई भी तुम्हारे बीच हो तुम्हारी पीढ़ियों में, और अग्नी से बने चढ़ावे को चढ़ाता है, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता का; जैसे तुम करते हो, वैसे ही वह करेगा।

१५ एक अध्यादेश होगा तुम्हारे लिए सभा में से, और उस परदेशी के लिए भी जो तुम्हारे साथ अल्पवास करता है, सदैवत्वता के लिए एक अध्यादेश तुम्हारी पीढ़ियों में: जैसे तुम हो, वैसे ही वह परदेशी होगा प्रभु के सम्मुख।

१६ एक नियम और एक रीति तुम्हारे लिए होगी, और उस परदेशी के लिए जो तुम्हारे साथ अल्पवास करता है।

१७ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,  

१८ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम उस भूमी में अन्दर जाते हो जहाँ मैं तुम्हें ला रहा हूँ, 

१९ तब यह होगा, कि, जब तुम भूमी की रोटी में से खाते हो, तुम प्रभु के प्रति एक उठाया-चढ़ावा चढ़ाओगे।

२० तुम अपने गूँथे हुए आटे के प्रथम में से एक छेद किया पराँठा एक उठाए-चढ़ावे हेतु चढ़ाओगे: जिस प्रकार तुम खलिहान का उठाया-चढ़ाव करते हो, उसी प्रकार तुम इसे उठाओगे।

२१ अपने गूँथे हुए आटे के प्रथम में से तुम प्रभु के प्रति प्रदान करोगे एक उठाया-चढ़ावा अपनी पीढ़ियों में।

२२ और यदि तुमने भूल कर दी हो, और उन आदेशों का पालन किया हो, जिन्हें प्रभु ने मूसा को बोल दिया है, 

२३ यहाँ तक कि वह सभी जो प्रभु ने तुम्हें आदेश दे दिया है मूसा के हाथ, उस दिन से जब प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, और तब से लेकर तुम्हारी पीढ़ियों के बीच;

२४ तब यह होगा, यदि कुछ भी अनभिज्ञता से अज्ञानता द्वारा कर दिया गया हो, कि समस्त सभा एक युवा साँड एक जले-चढ़ावे हेतु चढ़ा देगी, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु, उसके भोज-चढ़ावे, और उसके पेय-चढ़ावे के साथ, रीतिनुसार, और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु।

२५ और पुरोहित इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा के लिए एक परिहार बना देगा, और वह उन्हें क्षमा कर दिया जाएगा; क्योंकि यह अनभिज्ञता है: और वह अपने चढ़ावे को ले आएँगे, प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी बली, और उनका पाप-चढ़ावा प्रभु के सम्मुख, उनकी अनभिज्ञता हेतु: 

२६ और वह इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा के लिए क्षमा कर दिया जाएगा, और उस परदेशी के लिए जो उनके बीच अल्पवास करता है; यह देखते हुए कि सभी लोग अनभिज्ञता में थे।

२७ और यदि कोई भी आत्मा अनभिज्ञता द्वारा पाप करता है, तो वह एक प्रथम वर्ष की एक मादा-बकरी को एक पाप-चढ़ावे हेतु ले आएगा। 

२८ और पुरोहित उस आत्मा के लिए एक परिहार बना देगा जो अनभिज्ञता से पाप करता है, जब वह अनभिज्ञता द्वारा प्रभु के सम्मुख पाप करता है, उसके लिए एक परिहार बनाने हेतु; और वह उसे क्षमा कर दिया जाएगा।

२९ तुम्हारे पास एक ही नियम होगा उसके लिए जो अनभिज्ञता द्वारा पाप करता है, दोनो उसके लिए जो इस्राएल की सन्तानों के बीच जन्मा है, और उस परदेशी के लिए जो उनके बीच अल्पवास करता है।

३० परन्तु वह आत्मा जो कुछ जान-बूझकर करता है, भले ही वह भूमी में जन्मा हो, या कोई परदेशी हो, वही प्रभु का उपहास करता है; और वह आत्मा अपने लोगों के बीच में से काट दिया जाएगा।

३१ क्योंकि उसने प्रभु के शब्द से घृणा की है, और उनके आदेश को तोड़ दिया है, वह आत्मा पूर्णता से काट ही दिया जाएगा; उसका अधर्म-पाप उसी पर होगा।

३२ और जैसे इस्राएल की सन्तानें जँगली-क्षेत्र में थीं, उन्होंने एक आदमी को सैबथ के दिन पर लकड़ियाँ इकट्ठा करते हुए पाया।

३३ और जिन्होंने उसे लकड़ी की डंडियों को इकट्ठा करते हुए पाया था, वह उसे मूसा और हारुन के पास, और समस्त सभा के पास ले आए।

३४ और उन्होंने उसे कारावास में डाल दिया, क्योंकि वह घोषित नहीं किया गया था कि उसके साथ क्या कर दिया जाए।

३५ और प्रभु मूसा से बोले, यह आदमी अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: समस्त सभा इस पर शिविर के बाहर पत्थरों से पथराव करेगी।

३६ और वह समस्त सभा उसे शिविर के बाहर ले आई, और उस पर पत्थरों से पथराव कर दिया, और वह मर गया; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दे दिया था।

३७ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

३८ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और कहो उनसे कि वह अपने वस्त्रों के किनारों पर अपनी पीढ़ी-दर-पीढ़ी झालर बना दें, और कि वह उन किनारों के झालर पर एक नीला फीता लगा दें:

३९ और वह तुम्हारे प्रति एक झालर होगा, ताकि तुम उसे देख सको, और प्रभु के समस्त आदेशों को स्मरण में रख सको, और उन्हें करो; और कि तुम अपने स्वयं के हृदय और अपनी ही आँखों के पीछे-पीछे चलते फिरो, जिनके पीछे-पीछे तुम वैश्यापना करते हुए जाते थे:

४० ताकि तुम स्मरण कर सको, और मेरे समस्त आदेशों को कर सको, और अपने ईश्वर के प्रति पवित्र बँ सको।

४१ मैं प्रभु हूँ, तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाया, तुम्हारा ईश्वर बनने हेतु: मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर। 



सोलहवाँ अध्याय।


अब लेवी के बेटे कहाथ के बेटे यिसहार के बेटे कोरह ने, और दतान और अबीरम, एलिआब के बेटे, और ओन, पेलेत का बेटा, रूबेन के बेटों, ने आदमी लिए:

और वह मूसा के समक्ष उठ खड़े हुए, इस्राएल की सन्तानों में कुछों के साथ, मण्डली के दो सौ पचास अध्यक्ष, सभा में प्रसिद्ध, सुख्यात आदमी:

और उन्होंने स्वयं को मूसा के विरुद्ध और हारुन के विरुद्ध एक साथ एकत्रित के लिया, और उनसे कहा, तुम स्वयं का बहुत बढ़ावा करते हो, यह देखते हुए कि समस्त सभा पवित्र हैं, इन में से प्रत्येक एक, और प्रभु इनके बीच हैं: तथापि किस कारण वश तुम स्वयं को प्रभु की सभा पर पदोन्नत कर रहे हो?

और जब मूसा ने यह सुना, वह अपने चहरे के बल गिर पड़ा:

और वह कोरह और उसके समस्त दल से बोला, कहता हुआ, कल ही प्रभु दिखला देंगे, कि कौन उनके हैं, और कौन पवित्र है; और उसे अपने निकट जाने देंगे: उसी को जिसे उन्होंने चुना है वह अपने निकट जाने देंगे।

यह करो; अपने लिए धूप-दान ले लो, कोरह, और उसका समस्त दल;

और उन में अग्नी जला लो, और उन में सुगन्धित-धूप डाल दो कल प्रभु के समक्ष: और यह होगा कि वह पुरुष जिसे प्रभु चुनते हैं, वही पवित्र होगा: तुम स्वयं का बहुत बढ़ावा करते हो, तुम लेवी के बेटों।

और मूसा ने कोरह से कहा, मैं निवेदन करता हूँ तुमसे, सुनो, तुम लेवी के बेटों:

क्या यह तुम्हें छोटी सी ही बात प्रतीत हो रही है, कि इस्राएल के ईश्वर ने तुम्हें इस्राएल की सभा से पृथक कर दिया है, अपने स्वयं के निकट ले आने हेतु प्रभु के तम्बू की सेवा करने के लिए, और सभा के समक्ष उनकी सेवा करने हेतु खड़ा होने के लिए? 

१० और वह तुम्हें अपने निकट ले आए हैं, और तुम्हारे साथ तुम्हारे समस्त भाई-जन, लेवी के बेटे: और तुम पुरोहित-पद भी पा लेना चाहते हो?

११ किस कारण तुम और तुम्हारा दल प्रभु के विरुद्ध एक साथ इकट्ठा हो गए हो: और हारुन क्या है, कि तुम उसके विरुद्ध बड़बड़ा रहे हो?

१२ और मूसा ने एलिआब के बेटों, दतान और अबीरम को बुलवा लेने के लिए भेजा: जिन्होंने कहा, हम नहीं आएँगे:

१३ क्या यह छोटी सी ही बात है कि तुम हमें एक भूमी में से बाहर निकाल लाए हो जो दूध और मधु से बहती है, हमें जँगली-क्षेत्र में मार डालने हेतु, ताकि तुम स्वयं को हम पर पूर्ण रूप से एक शासक बना सको?

१४ इसके अतिरिक्त तुम हमें दूध और मधु से बहती हुई भूमी में नहीं लाए हो, या तुमने हमें खेतों और अंगूर-खेतों की विरासत दी है: क्या तुम इन लोगों की आँखें नोच डालोगे? हम नहीं आएँगे।

१५ और मूसा बहुत क्रोधित था, और उसने प्रभु से कहा, आप उनके चढ़ावे को स्वीकार मत करना: मैंने उनसे एक भी गधा नहीं लिया है, ही मैंने उन में से एक को भी चोट पहुँचाई है।

१६ और मूसा ने कोरह से कहा, कल तुम, और तुम्हारा समस्त दल प्रभु के सम्मुख होना, तुम, और वह, और हारुन:

१७ और प्रत्येक व्यक्ति अपना धूप-दान ले ले, और उन में सुगन्धित-धूप डाल ले, और तुम प्रभु के सम्मुख प्रत्येक व्यक्ति अपना धूप-दान ले आना, ढाई सौ धूप-दान; तुम भी, और हारुन, हर एक अपने धूप-दान के साथ।

१८ और उन्होंने, प्रत्येक आदमी ने, अपना धूप-दान लिया, और उन में अग्नी जला ली, और उस पर सुगन्धित-धूप रख दी, और सभा के तम्बू के द्वार में मूसा और हारुन के साथ खड़ा हो गया।

१९ और कोरह ने सभा के तम्बू के द्वार पर उनके विरुद्ध समस्त सभा को एकत्रित कर लिया: और प्रभु की महिमा समस्त सभा को प्रकट हुई।  

२० और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए,

२१ स्वयं को इस सभा के बीच में से पृथक कर लो, ताकि मैं इन्हें एक ही क्षण में समाप्त कर दूँ।

२२ और वह अपने चेहरों के बल गिर पड़े, और कहा, हे ईश्वर, समस्त माँस की भावात्माओं के ईश्वर, क्या एक आदमी पाप कर दे, और आप समस्त सभा के साथ क्रोधित हो जाएँगे क्या?

२३ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

२४ सभा से बोलो, कहते हुए, कोरह, दतान, और अबीरम के तम्बू के आस-पास से तुम हट जाओ।

२५ और मूसा उठा और दतान और अबीरम के पास गया; और इस्राएल के वृद्ध-गण उसके पीछे-पीछे गए।

२६ और वह सभा से बोला, कहता हुआ, हट जाओ इन दुष्ट आदमियों के तम्बुओं से, मैं विनती करता हूँ तुमसे, और इनका कुछ भी मत छूना, कहिं तुम इनके समस्त पापों में बह जाओ।

२७ तो वह कोरह, दतान, और अबीरम के तम्बू से हट गए, चारों ओर से: और दतान और अबीरम बाहर निकल आए, और अपने तम्बुओं के द्वार पर खड़े हो गए, और उनकी पत्नियाँ, और उनके बेटे, और उनके छोटे नन्हें।

२८ और मूसा ने कहा, इस से तुम जान जाओगे कि प्रभु ने मूझे इन सभी कार्यों को करने हेतु भेजा है; क्योंकि मैंने इन्हें अपने ही मन से नहीं किया है।

२९ यदि यह व्यक्ति समस्त मनुष्यों की सामान्य मृत्यु से मरते हैं, या इनकी सुध समस्त मनुष्यों की सुधानुसार ली जाती है; तो प्रभु ने मुझे नहीं भेजा है। 

३० परन्तु यदि प्रभु कोई नवीन घटना निर्मित कर देते हैं, और धरती अपना मूँह खोल दे, और इन्हें निगल ले, और उन सब को जो इनके हैं, और यह जीवित ही नीचे उस गर्त में चले जाएँ; तब तुम समझ जाओगे कि इन लोगों ने प्रभु को उकसा दिया है।

३१ और यह होने को आया, जब उसने इन सभी शब्दों को बोल देने का अन्त कर दिया था, कि वह धरती दो में फट गई जो उनके तले थी:

३२ और पृथ्वी ने अपना मूँह खोल लिया, और उन्हें निगल लिया, और उनके घरों को, और उन सभी लोगों को जो कोरह के थे, और उनकी समस्त सम्पत्ती।

३३ वह, और वह सभी जो उनका था, उस गर्त में जीवित नीचे चला गया, और पृथ्वी ने उन्हें ढक दिया: और वह सभा के बीच में से नष्ट हो गए।

३४ और समस्त इस्राएल जो उनके आस-पास चारों ओर था उनकी चीख पर भाग खड़ा हुआ: क्योंकि उन्होंने कहा, कहीं पृथ्वी हमें भी निगल ले।

३५ और प्रभु से एक अग्नी बाहर प्रवृत्त हुई, और उसने उन ढाई सौ आदमियों की खपत कर ली जिन्होंने सुगन्धित-धूप अर्पण की थी। 

३६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

३७ एलाज़र से बोलो, हारुन का वह पुरोहित बेटा, कि वह उन धूप-दानों को उस जलने में से बाहर निकाल ले, और तुम उस अग्नी को उधर परे बखेर दो; क्योंकि वह पवित्र हैं।

३८ इन पापियों के धूप-दान इनकी अपनी आत्माओं के विरुद्ध, उन्हें बलिवेदी को ढकने के लिए चौड़े तखते बना लेने दो: क्योंकि उन्होंने इन्हें प्रभु के सम्मुख चढ़ाया था, इसलिए यह पवित्र हैं: और यह इस्राएल की सन्तानों के लिए एक संकेत होंगे।

३९ और पुरोहित एलाज़र ने वह पीतल के धूप-दान लिए, जिन से उन्होंने जो भस्म कर दिए गए थे, अर्पणा की थी; और उन्हें बलिवेदी को ढकने हेतु चौड़े तख्ते बना दिया गया था:

४० इस्राएल की सन्तानों के लिए एक स्मारक बनने हेतु, ताकि कोई भी परदेशी, जो हारुन के बीज में से नहीं है, प्रभु के सम्मुख सुगन्धित-धूप अर्पित करने हेतु निकट आए; ताकि वह कोरह, और उसके दल के समान बन जाए: जैसा कि प्रभु ने उस से कहा था मूसा के हाथ।

४१ परन्तु अगले दिन इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा मूसा और हारुन के विरुद्ध बड़बड़ाने लग गई, कहती हुई, तुमने प्रभु के लोगों को मार डाला है।

४२ और यह होने को आया, जब मूसा के विरुद्ध और हारुन के विरुद्ध वह सभा इकट्ठी हो गई थी, कि उन्होंने सभा के तम्बू की ओर देखा: और देखो, उस मेघ ने उसे ढक लिया था, और प्रभु की महिमा प्रकट हुई। 

४३ और मूसा और हारुन सभा के तम्बू के सम्मुख गए।

४४ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

४५ इस सभा के बीच में से तुम उठ कर हट जाओ, ताकि मैं इन्हें एक ही क्षण में समाप्त कर दूँ। और वह अपने चेहरों के बल गिर पड़े।

४६ और मूसा ने हारुन से कहा, एक धूप-दान ले लो, और उस में बलिवेदी पर से अग्नी जला लो, और उस पर सुगन्धित-धूप डाल दो, और सभा में शीघ्रता से जाओ, और उनके लिए एक परिहार बना दो: क्योंकि प्रभु से क्रोध बाहर निकल चला गया है; विपत्ती आरम्भ हो चुकी है।

४७ और हारुन ने मूसा के आदेशानुसार लिया, और सभा के बीच भागा; और देखो, वह विपत्ती लोगों के बीच आरम्भ हो चुकी थी: और उसने सुगन्धित-धूप डाली, और लोगों के लिए एक परिहार बना दिया।

४८ और वह मृतों और जीवितों के बीच खड़ा हुआ; और वह विपत्ती थम गई।

४९ अब वह जो उस विपत्ती में मर गए थे चौदह हज़ार सात सौ थे, उनके अतिरिक्त जो कोरह के विषय में मर गए थे।

५० और हारुन मूसा के पास सभा के तम्बू के द्वार पर वापस लौट आया: और वह विपत्ती थम गई थी।



सत्रहवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों से बोले, और उन में से प्रत्येक से एक छड़ी ले लो उनके पित्रों के घरानेनुसार, उनके सभी अध्यक्षों से उनके पित्रों के घरानेनुसार बारह छड़ियाँ: प्रत्येक पुरुष का नाम उसकी छड़ी पर लिख लो।

और तुम हारुन का नाम लेवी की छड़ी पर लिख दोगे: क्योंकि एक छड़ी होगी उनके पित्रों के घराने के मुखिया के लिए।

और तुम उन्हें सभा के तम्बू में साक्ष्य के समक्ष रख दोगे, जहाँ मैं तुमसे भेंट करूँगा।

और यह होने को आएगा, कि उस पुरुष की छड़ी, जिसे मैं चुनूँगा, खिल उठेगी: और मैं इस्राएल की सन्तानों की बड़बड़ाहटें अपने से थाम दूँगा, जिन से वह तुम्हारे विरुद्ध बड़बड़ाते हैं।

और मूसा इस्राएल की सन्तानों से बोला, और उनके प्रत्येक अध्यक्ष ने उसे एक-एक छड़ी दे दी, प्रत्येक अध्यक्ष के लिए एक, उनके पित्रों के घरानोंनुसार, बारह छड़ियाँ ही: और हारुन की छड़ी उनकी छड़ियों के बीच थी।

और मूसा ने वह छड़ियाँ प्रभु के सम्मुख साक्ष्य के तम्बू में रख दीं। 

और यह होने को आया, कि अगले दिन मूसा साक्ष्य के तम्बू में गया; और देखो, लेवी के घराने के लिए हारुन की छड़ी खिल उठी थी, और उसने कलियाँ उभार ली थीं, और खिले-पुष्प खिला दिए थे, और बादाम की उपज दे दी थी।

और मूसा प्रभु के सामने से सभी छड़ियों को बाहर ले आया इस्राएल की सन्तानों के पास: और उन्होंने देखा, और प्रत्येक पुरुष ने अपनी छड़ी ले ली।

१० और प्रभु ने मूसा से कहा, हारुन की छड़ी पुनः साक्ष्य के सम्मुख ले आओ, विद्रोहियों के विरुद्ध एक प्रतीक हेतु रखे जाने के लिए; और तुम उनकी बड़बड़ाहटें मुझ से परे ही हटा दोगे, ताकि वह मरें न। 

११ और मूसा ने ऐसा ही कर दिया: जैसा प्रभु ने उसे आदेश दिया, वैसा ही कर दिया उसने।

१२ और इस्राएल की सन्तानें मूसा से बोलीं, कहती हुई, देखो, हम मर रहे हैं, हम नष्ट हो रहे हैं, हम सभी नष्ट हो रहे हैं।

१३ जो कोई भी प्रभु के तम्बू के निकट ही आता है मर जाएगा: क्या हमारा मृत्यु से अन्त हो जाएगा?




अट्ठारहवाँ अध्याय।


और प्रभु ने हारुन से कहा, तुम और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे पित्र का घराना तुम्हारे साथ, पुण्य-स्थान का पाप ढोएँगे: और तुम और तुम्हारे बेटे तुम्हारे साथ तुम्हारे पुरोहित-पद का अधर्म-पाप ढोएँगे।

और लेवी की प्रजाति के भी, तुम्हारे पित्र की प्रजाति के, अपने भाईयों को अपने साथ ले आओ, ताकि वह तुम्हारे साथ संयुक्त हो जाएँ, और तुम्हारे प्रति सेवा करें: परन्तु तुम और तुम्हारे बेटे तुम्हारे साथ साक्ष्य के तम्बू के सम्मुख सेवारत होंगे।

और वह तुम्हारा प्रभार रखेंगे, और सारे तम्बू का प्रभार: बस केवल वह पुण्य-स्थान के पात्रों और बलिवेदी के निकट नहीं आएँगे, ताकि ही वह, ही तुम भी, मर जाओ।

और वह तुम्हारे साथ संयुक्त हो जाएँगे, और सभा के तम्बू का प्रभार रखेंगे, तम्बू की समस्त सेवा हेतु: और कोई परदेशी तुम्हारे निकट नहीं आएगा।

और तुम पुण्य-स्थान का प्रभार रखोगे, और बलिवेदी का प्रभार: ताकि इस्राएल की सन्तानों पर अब और आक्रोश पड़े।

और मैंने, देखो, मैंने तुम्हारे भाई-जनों लेवी-वंशजों को इस्राएल की सन्तानों के बीच में से ले लिया है: तुम्हें यह एक उपहार स्वरूप प्रभु के लिए प्रदान कर दिए गए हैं, सभा के तम्बू की सेवा करने हेतु।

इसलिए तुम और तुम्हारे बेटे तुम्हारे साथ बलिवेदी से, और परदे के भीतर से सम्बन्धित प्रत्येक विषय हेतु अपने पुरोहित-पद का पालन करोगे: और तुम सेवा करोगे: मैंने तुम्हें तुम्हारा पुरोहित-पद एक सेवा-उपहार स्वरूप प्रदान कर दिया है: और वह परदेशी जो निकट आता है, मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

और प्रभु हारुन से बोले, देखो, मैंने तुम्हें इस्राएल की सन्तानों की समस्त पवित्र वस्तुओं के मेरे उठाए-चढ़ावों का भी प्रभार प्रदान कर दिया है; तुम्हें, मैंने उन्हें प्रदान कर दिया है, अभिषेक कारण वश, और तुम्हारे बेटों को, एक सदैवत्वता के अध्यादेश द्वारा।

यह, उन अग्नी से परिरक्षित अति पवित्रतम वस्तुओं में से, तुम्हारा होगा,: उनकी प्रत्येक आहुति, उनका प्रत्येक भोज-चढ़ावा, और उनका प्रत्येक पाप-चढ़ावा, और उनका प्रत्येक दोष-चढ़ावा, जो वह मुझे लौटाएँगे, तुम्हारे लिए अति-पवित्रतम ओहग और तुम्हारे बेटों के लिए।

१० उस अति-पवित्रतम स्थान में तुम उसे खाओगे; प्रत्येक नर उसे खाएगा: यह तुम्हारे प्रति पवित्र होगा।

११ और यह तुम्हारा है; उनके उपहार का उठाया-चढ़ावा, इस्राएल की सन्तानों के समस्त लहराए-चढ़ावों के साथ: मैंने इन्हें तुम्हें प्रदान कर दिया है, और तुम्हारे बेटों को और तुम्हारी बेटियों को तुम्हारे साथ, एक अनन्त अध्यादेश के माध्यम से: वह प्रत्येक जो तमहरे घराने में स्वच्छ है उस में से खाएगा।

१२ तेल में से समस्त श्रेष्ठ, और अंगूर-रस में समस्त श्रेष्ठ, और गेहूँ में से, उनके प्रथम-फल जिन्हें वह प्रभु को चढ़ाते हैं, तुम्हें मैंने प्रदान कर दिए हैं।   

१३ और जो कुछ भी भूमी में सबसे पहले पक जाता है, जिसे वह प्रभु के पास लाते हैं, तुम्हारा होगा; वह प्रत्येक जो तुम्हारे घराने में स्वाच है उस में से खाएगा। 

१४ इस्राएल में प्रत्येक समर्पित वस्तु तुम्हारी होगी।

१५ सभी देहों में वह प्रत्येक जो गर्भ खोलता है, जिसे वह प्रभु के पास लाते हैं, भले ही वह मनुष्यों या पशुओं का हो, तुम्हारा होगा: तथापि मनुष्य के प्रथम जन्मे का तुम अवश्य मुक्तिभुक्तान करोगे, और अस्वच्छ पशुओं के पहलौठों का तुम भुक्तान करोगे।

१६ और जिनका भुक्तान एक महीने की आयु से लेकर किया जाना है, तुम अपने अनुमानानुसार भुक्तान कर दोगे, पाँच शेक्ल पैसे के लिए, पुण्य-स्थान के शेक्लानुसार, जो बीस गेरा होता है।

१७ परन्तु किसी साँड के पहलौठे का, या किसी भेड़ के पहलौठे का, या किसी बकरे के पहलौठे का, तुम भुक्तान नहीं करोगे; यह पवित्र हैं: तुम उनके रक्त को बलिवेदी पर छिड़क दोगे, और उनकी चर्बी को भस्म कर दोगे एक अग्नी से बनी आहुति हेतु, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता के लिए।

१८ और उनका माँस तुम्हारा होगा, जैसे कि लहराई छाती और जैसे कि दायाँ कन्धा तुम्हारे हैं।

१९ पवित्र वस्तुओं के समस्त उठाए-चढ़ावे, जिन्हें इस्राएल की सन्तानें प्रभु के प्रति चढ़ाते हैं, मैंने यह तुम्हें प्रदान कर दिए हैं, और तुम्हारे बेटों को और तुम्हारी बेटियों को तुम्हारे साथ, एक अनन्त अध्यादेश द्वारा: यह अनन्तता पर्यत, प्रभु के सम्मुख तुम्हारे और तुम्हारे साथ तुम्हारे बीज के प्रति, नमक का एक प्रतिज्ञा-पत्र है।

२० और प्रभु हारुन से बोले, तुम्हारे पास उनकी भूमी में कोई विरासत नहीं होगी, ही तुम्हारा उनके बीच कोई भाग होगा: मैं, इस्राएल की सन्तानों के बीच तुम्हारा भाग और तुम्हारी विरासत हूँ।

२१ और देखो, मैंने विरासत के लिए लेवी की सन्तानों को इस्राएल में सारा दसवाँ भाग प्रदान कर दिया है, उनकी सेवा के लिए जिस सेवा को वह करते हैं, सभा के तम्बू की सेवा ही।

२२ ही इस्राएल की सन्तानों को अबसे लेकर सभा के तम्बू के निकट आना चाहिए, कहिं वह पाप ढो लें, और मर जाएँ।

२३ परन्तु लेवी-वंशज सभा के तम्बू की सेवा करेंगे, और वह उनके अधर्म-पाप को ढोएँगे: यह तुम्हारी पीढ़ियों के सर्वत्र में सदैवत्वता का एक अध्यादेश होगा, कि उनके पास इस्राएल की सन्तानों के बीच कोई विरासत नहीं होगी।

२४ परन्तु इस्राएल की सन्तानों के दसवें-भाग, जिन्हें वह प्रभु के प्रति एक उठाए-चढ़ावे के रूप में चढ़ाते हैं, मैंने लेवी-वंशजों को विरासत में लेने हेतु प्रदान कर दिए हैं: इसलिए मैंने उनसे कह दिया है, इस्राएल की सन्तानों के बीच वह कोई विरासत नहीं रखेंगे।

२५ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

२६ इस प्रकार लेवी-वंशजों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम इस्राएल की सन्तानों के दसवें-भाग लेते हो जिन्हें मैंने तुम्हें उनसे तुम्हारी विरासत के लिए प्रदान कर दिए हैं, तब तुम उस में से एक उठाया-चढ़ावा प्रभु के लिए चढ़ा दोगे, दसवें-भाग का दसवाँ ही।

२७ और यह तुम्हारा उठाया-चढ़ावा तुम्हारे प्रति गिन लिया जाएगा, मानो कि वह खलिहान का अनाज हो, और अंगूर-रस के कोल्हू की भरपूर्ता।

२८ तो तुम भी प्रभु के प्रति अपने समस्त दसवें-भागों में से जिन्हें तुम इस्राएल की सन्तानों से ग्रहण करते हो, एक उठाया-चढ़ावा चढ़ाओगे; और तुम प्रभु के उठाए-चढ़ावे में से हारुन पुरोहित को प्रदान कर दोगे।

२९ अपने सभी उपहारों में से तुम प्रभु का प्रत्येक उठाया-चढ़ावा चढ़ाओगे, उसके समस्त श्रेष्ठ में से, उसका पवित्र भाग ही उस में से।

३० इसलिए तुम उनसे कहोगे, जब तुमने उस में से उसका श्रेष्ठ उठा दिया हो, तब वह लेवी-वंशजों के प्रति खलिहान की बढ़ौतरी, और अंगूर-रस के कोल्हू की बढ़ौतरी गिन लिया जाएगा।

३१ और तुम उसे प्रत्येक स्थान में खाओगे, तुम और तुम्हारे घर-बार: क्योंकि यह सभा के तम्बू में तुम्हारी सेवा का वेतन है।

३२ और तुम उसके कारण कोई पाप नहीं ढोगे, जब तुमने उस में से उसका श्रेष्ठ उठा दिया हो: ही तुम इस्राएल की सन्तानों की पवित्र वस्तुओं को प्रदूषित करोगे, कहिं तुम मर जाओ।



उन्नीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से और हारुन से बोले, कहते हुए, 

यह उस नियम का अध्यादेश है जिसका प्रभु ने आदेश दे दिया है, कहते हुए, इस्राएल की सन्तानों से बोलो, कि वह तुम्हें एक लाल निष्कलंक बछिया ले आएँ, जिस पर कोई दाग हो, और जिस पर जुआ कभी आया हो:

और तुम उसे एलाज़र पुरोहित को प्रदान कर दोगे, ताकि वह उसे शिविर के बाहर निकाल लाए, और एक उसे उसके चहरे सम्मुख मार देगा:

और एलाज़र वह पुरोहित अपनी उँगली से उसके रक्त में से लेगा, और उसके रक्त में से सभा के तम्बू समक्ष उसी की ओर सात बार छिड़क देगा:

और कोई उस बछिया को उसकी दृष्टि में भस्म कर देगा; उसकी चमड़ी को, और उसके माँस को, और उसके रक्त को, उसके मल के साथ, वह उसे जला देगा:

और वह पुरोहित देवदार की लकड़ी, और जूफे, और सुर्ख को ले लेगा, और उसे उस जलती हुई बछिया के बीच में फैंक देगा।

तब वह पुरोहित अपने कपड़ों को धो लेगा, और अपने माँस को जल में निल्हा लेगा, और तत्-पश्चात वह शिविर में जाएगा, और वह पुरोहित संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और वह जो उसे जलता है अपने कपड़ों को पाने में धोएगा, और अपने माँस को जल में निल्हा लेगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

और एक स्वच्छ पुरुष उस बछिया की राखों को एकत्रित कर लेगा, और उन्हें शिविर के बाहर एक स्वच्छ स्थान में रख देगा, और वह इस्राएल की सन्तानों की सभा के लिए एक पृथककरण-जल हेतु रख लिया जाएगा: यह पाप का एक शुद्धीकरण है।

१० और वह जो उस बछिया की राखों को एकत्रित करता है अपने कपड़ों को धोएगा, और वह संध्या तक अस्वच्छ रहेगा: और यह इस्राएल की सन्तानों के प्रति, और उस परदेशी के प्रति जो उनके बीच अल्पवास करता है, एक सदैवत्वता का अध्यादेश होगा।

११ वह जो किसी भी मनुष्य के शव को छू देता है सात दिनो के लिए अस्वच्छ रहेगा।

१२ वह स्वयं को उस से तीसरे दिन शुद्ध कर लेगा, और सातवें दिन पर वह स्वच्छ हो जाएगा: परन्तु यदि वह स्वयं को तीसरे दिन शुद्ध नहीं करेगा, तब वह सातवें दिन स्वच्छ नहीं होगा।

१३ जो कोई भी किसी भे मृत मनुष्य के मृत शरीर को छूता है, और स्वयं का शुद्धीकरण नहीं करता है, प्रभु के तम्बू को दूषित करता है; और वह आत्मा इस्राएल से काट दी जाएगी: क्योंकि उस पर पृथककरण-जल नहीं छिड़का गया था, वह अस्वच्छ होगा; उसकी अस्वच्छता उसी पर ही है।

१४ यह नियम है, जब कोई मनुष्य किसी तम्बू में मर जाता है: वह सभी जो उस तम्बू में आते हैं, और वह सभी जो उस तम्बू में है, सात दिनो के लिए अस्वछ रहेगा।

१५ और प्रत्येक अनढका पात्र, जिस पर कोई भी ढक्कन बन्धा हुआ नहीं है, अस्वच्छ है।

१६ और जो कोई भी खुले खेतों में किसी को छूता है जो तलवार से मार दिया गया हो, या किसी शव को, या किसी मनुष्य की हड्डी को, या किसी कब्र को, सात दिनो तक अस्वच्छ रहेगा।

१७ और एक अस्वच्छ व्यक्ति के लिए वह उस पाप के शुद्धीकरण की उस जली हुई बछिया की राखों में से लेंगे, और उस पर एक पात्र में बहता हुआ पानी डाल दिया जाएगा: 

१८ और एक स्वच्छ व्यक्ति जूफा लेगा, और उसे उस पानी में डुबो देगा, और उसे उस तम्बू पर छिड़क देगा, और उन सभी पात्रों पर, और उन लोगों पर जो वहीं थे, और उस पर जिसने किसी हड्डी को, या किसी मारे हुए को, या किसी मृत को, या किसी कब्र को छू दिया हो:

१९ और वह स्वच्छ व्यक्ति उस अस्वच्छ पर तीसरे दिन, और सातवें दिन छिड़क देगा: और सातवें दिन वह स्वयं को शुद्ध कर देगा, और अपने कपड़े धो लेगा, और जल में स्वयं स्नान कर लेगा, और संध्या के समय स्वच्छ हो जाएगा।

२० परन्तु वह आदमी जो अस्वच्छ रहेगा, और स्वयं का शुद्धीकरण नहीं करेगा, वह आत्मा सभा के बीच में से काट दी जाएगी, क्योंकि उसने प्रभु के पुण्य-स्थान को दूषित कर दिया है: उस पर पृथककरण-जल नहीं छिड़का गया है; वह अस्वच्छ है।

२१ और यह एक निरन्तर अध्यादेश होगा उनके प्रति, कि वह जो पृथककरण-जल छिड़कता है अपने कपड़ों को धोएगा; और वह जो पृथककरण-जल को छूता है संध्या तक अस्वच्छ रहेगा।

२२ और जो कुछ भी वह अस्वच्छ व्यक्ति छूता है अस्वच्छ होगा; और वह आत्मा जो उसे छूती है संध्या तक अस्वच्छ रहेगी।


बीसवाँ अध्याय।


तब पहले महीने में, इस्राएल की सन्तानें गईं, वह सम्पूर्ण सभा ही, ज़िन के जँगली-क्षेत्र में: और वह लोग कादेश में बसते थे; और मरियम वहीं मर गई, और वहीं दफ़ना दी गई थी।

और सभा के लिए कोई पानी नहीं था: और उन्होंने स्वयं को मूसा के विरुद्ध और हारुन के विरुद्ध एकत्रित कर लिया।

और वह लोग मूसा से झगड़ पड़े, और बोले, कहते हुए, भला होता कि हम मर गए होते जब हमारे भाई-जन प्रभु के सम्मुख मरे थे!

और तुम क्यों प्रभु की सभा को इस जँगली-क्षेत्र में ले आए हो, कि हम और हमारे मवेशी वहीं मर जाएँ?

और किस कारण वश तुमने हम से मिस्र में से बाहर निष्कासन करवा दिया, हमें इस बुरे स्थान में अन्दर ले आने हेतु? यह तो बीज का, या अंजीरों का, या लताओं का, या अनानासों का स्थान नहीं है; ही पीन के लिए कोई पानी है। 

और मूसा और हारुन उस मण्डली की उपस्थिति से सभा के तम्बू के द्वार पर चले गए, और वह अपने चेहरों के बल गिर पड़े: और प्रभु की महिमा उन्हें प्रकट हुई।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

वह डण्डा ले लो, और तुम उस मण्डली को एक साथ एकत्रित कर लो, तुम, और तुम्हारा भाई हारुन, और उनकी दृष्टि समक्ष तुम उस चट्टान से बोलो; और वह अपना पानी प्रदान कर देगी, और तुम उन्हें उस चट्टान में से पानी बाहर निकाल कर ले आओगे: इस प्रकार तुम सभा को और उनके जानवरों को पेय दोगे।

और मूसा ने प्रभु के सामने से वह छड़ी ली, जैसा उन्होंने उसे आदेश दिया था।

१० और मूसा और हारुन ने वह सभा उस चट्टान के समक्ष एक साथ एकत्रित कर ली, और उसने उनसे कहा, सुन लो अब तुम विद्रोहियों; क्या हम तुम्हारे लिए इस चट्टान में से पानी बाहर निकाल कर लाएँ? 

११ और मूसा से अपना हाथ ऊपर उठाया, और अपने डण्डे से उसने उस चट्टान को दो बार पीटा: और बहुतायतता से पाने बाहर निकल आया, और सभा ने पिया, और उनके जानवरों ने भी।

१२ और प्रभु मूसा और हारुन से बोले, क्योंकि तुमने मुझ पर विश्वास नहीं किया, मुझे इस्राएल की सन्तानों की आँखों में पुनीत ठहरा देने हेतु, इसलिए तुम इस सभा को उस भूमी में नहीं लाओगे जिसे मैंने इन्हें प्रदान कर दिया है।

१३ यही मरीबा का पानी है; क्योंकि इस्राएल की सन्तानें प्रभु के साथ झगड़ पड़ीं, और वह उन में पुनीत ठहरे।

१४ और मूसा ने कादेश से एदोम के राजा के पास दूत भिजवाए, इस प्रकार कहता है इस्राएल तुम्हारा भाई, तुम उस समस्त पीड़ा से परिचित हो जो हम पर पड़ी है:

१५ कैसे हमारे पित्र मिस्र में नीचे चले गए थे, और हमने मिस्र में एक दीर्घ-काल तक वास किया; और मिस्रवासियों ने हमें और हमारे पित्रों को व्यग्रित किया:

१६ और जब हम प्रभु की ओर चीखे, उन्होंने हमारी वाणी सुनी, और एक दूत भेजे, और हमें मिस्र में से बाहर ले आए हैं: और देखो, हम तुम्हारी सीमा के अन्तिम छोर के एक नगर कादेश में हैं: 

१७ हमें अपने राष्ट्र में से गुज़रने दो, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे: हम खेतों में से, या अंगूर-खेतों में से होते हुए नहीं जाएँगे, ही हम कूओं में से पानी पीएँगे: हम राजा के मुख्य-पथ पर से जाएँगे, हम दाएँ हाथ ही बाएँ हाथ की ओर मुड़ेंगे, जब तक हम तुम्हारी सीमाएँ पार नहीं कर लेते।

१८ और एदोम ने उस से कहा, तुम मुझ में से नहीं गुज़रोगे, कहिं मैं तुम्हारे विरुद्ध तलवार के साथ बाहर जाऊँ।

१९ और इस्राएल की सन्तानों ने उस से कहा, हम मुख्य-पथ पर से जाएँगे: और यदि मैं और मेरे मवेशी तुम्हारे पानी में से पीते हैं, तब मैं उसके लिए पैसे दे दूँगा: मैं केवल, बिना कुछ और किए, अपने पैरों पर चलता जाऊँगा।

२० और उसने कहा, तुम यहाँ से होकर नहीं जाओगे। और एदोम प्रबलता के साथ उसके विरुद्ध कई लोगों के साथ बाहर निकल आया। 

२१ तो एदोम ने इस्राएल को अपनी सीमा से होकर जाने की अनुमति नहीं दी: इस कारण वश इस्राएल उस से परे मुड़ चला।

२२ और इस्राएल की सन्तानें, वह पूरी सभा ही, कादेश से यात्रा करते हुए, होर पहाड़ पहूँच गए।

२३ और प्रभु मूसा और हारुन से होर पहाड़ में, एदोम की भूमी की सीमा के साथ, बोले, कहते हुए,

२४ हारुन अपने लोगों के साथ एकत्रित हो जाएगा: क्योंकि वह उस भूमी में प्रवेश नहीं करेगा जिसे मैंने इस्राएल की सन्तानों को प्रदान कर दिया है, क्योंकि तुमने मरीबा के पानी पर मेरे शब्द के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था।

२५ हारुन और उसके बेटे एलाज़र को ले लो, और उन्हें होर पहाड़ पर ऊपर ले आओ:

२६ और हारुन पर से उसके वस्त्रों को उतारो, और उन्हें उसके बेटे एलाज़र को पहनवा दो: और हारुन अपने लोगों के साथ एकत्रित हो जाएगा, और वहीं मर जाएगा।

२७ और मूसा ने जैसा प्रभु ने आदेश दिया, कर दिया: और वह समस्त सभा की दृष्टि में होर पहाड़ पर ऊपर चले गए।

२८ और मूसा ने हारुन पर से उसके वस्त्र उतार दिए, और उन्हें एलाज़र उसके बेटे को पहना दिए; और हारुन वहीं उस पहाड़ की चोटी पर मर गया: और मूसा और एलाज़र उस पहाड़ पर से नीचे गए।

२९ और जब उस समस्त सभा ने देखा कि हारुन मर गया था, उन्होंने हारुन के लिए तीस दिन शोक मनाया, इस्राएल के समस्त घराने ने ही।




इक्कीसवाँ अध्याय।


और जब दक्षिण में बसने वाले कनानवासी राजा अराद ने समाचार सुना कि इस्राएल गुप्तचरों के पथ से होता हुआ आया; तब उसने इस्राएल के विरुद्ध लड़ाई की, और उन में से कुछ बन्दी ले लिए।

और इस्राएल ने प्रभु के प्रति एक प्रण का प्रण लिया, और कहा, यदि आप वास्तव में ही इन लोगों को मेरे हाथों में प्रदान कर देंगे, तब मैं इनके नगरों को बस पूर्णतः नष्ट ही कर दूँगा। 

और प्रभु ने इस्राएल की वाणी का श्रवण कर लिया, और उन कनानवासियों को प्रदान कर दिया: और उन्होंने उन्हें और उनके नगरों को बस पूर्णतः नष्ट ही कर दिया: और उसने उस स्थान का नाम होरमा पुकारा।

और उन्होंने होर पहाड़ से यात्रा की लाल समुद्र के पथ से, एदोम की भूमी के किनारे-कनारे जाते हुए: और लोगों की आत्मा उस पथ के कारण बहुत ही हतोत्साहित थी।

और वह लोग ईश्वर के विरुद्ध, और मूसा के विरुद्ध, बोले, किस कारण वश तुम हमें ऊपर मिस्र में से बाहर निकाल लाए हो जँगली-क्षेत्र में मर जाने के लिए? क्योंकि कोई रोटी नहीं है, ही पानी; और हमारी आत्मा इस पतली सी रोटी से दुखी है।

और प्रभु ने लोगों के बीच जलते हुए सर्प भेज दिए, और उन्होंने लोगों को कटा; और इस्राएल के कई लोग मर गए।

इसलिए लोग मूसा के पास आए, और कहा। हमने पाप कर दिया है, क्योंकि हमने प्रभु के विरुद्ध, और तुम्हारे विरुद्ध, बोला है; प्रभु से प्रार्थना करो, कि वह हमारे पास से इन सर्पों को हटा दें। और मूसा ने लोगों के लिए प्रार्थना की। 

और प्रभु ने मूसा से कहा, एक जलता हुआ सर्प बना लो, और उसे एक खम्बे पर चढ़ा दो: और यह होने को आएगा, कि जो भी काट खाया गया है, जब वह उस को देखता है, जी लेगा।

और मूसा ने पीतल का एक सर्प निर्मित किया, और उसे एक खम्बे पर लगा दिया, और यह होने को आया, कि यदि किसी सर्प ने किसी पुरुष को काट लिया था, जब उसने वह पीतल का सर्प देखा, वह जी लिया।

१० और इस्राएल की सन्तानें अग्रसर हुईं, और ओबोत में डेरा डाला। 

११ और उन्होंने ओबोत से यात्रा की, और इय्याबारिम में डेरा डाला, उस जँगली क्षेत्र में जो मोआब के सामने है, सूर्य के उदय होने की ओर।

१२ और वहाँ से वह हटे, और ज़रेद की घाटी में डेरा डाला।

१३ वह वहाँ से हटे, और अर्नोन की दूसरी ओर डेरा डाल दिया, जो उस जँगली-क्षेत्र में है जो अमोरियों की सीमाओं में से निकलता है: क्योंकि अर्नोन मोआब की सीमा है, मोआब और अमोरियों के बीच।

१४ इसी कारण वश यह प्रभु के युद्धों की पुस्तक में कहा गया है, उन्होंने क्या कर दिया लाल-समुद्र में, और अर्नोन की नदिकाओं में,

१५ और उन धाराओं के बहाव पर जो आर के बसेरे तक नीचे चला जाता है, और मोआब की सीमा पर झुका हुआ है।

१६ और वहाँ से वह बीर चले गए: वही वह कुआँ है जिसके विषय में प्रभु मूसा से बोले थे, लोगों को एक साथ एकत्रित कर लो, और मैं उन्हें पानी प्रदान कर दूँगा।

१७ तब इस्राएल ने यह गीत गाया, कुएँ, फूट पड़; तुम उसके प्रति गाओ:

१८ अध्यक्षों ने उस कुएँ को खोदा, लोगों के ठाकुरों ने उसे खोदा, न्यायदाता के निर्देशन के द्वारा, उनके लट्ठों से। और वह उस जँगली-क्षेत्र से मत्तना चले गए:

१९ और मत्तना से नहलिएल: और नहलिएल से बमोथ:

२० और घाटी में बमोथ से, जो मोआब के राष्ट्र में है, पिस्गा की चोटी तक, जो जशिमोन की ओर देखता है।

२१ और इस्राएल ने अमोरियों के राजा सिहोन को दूत भेजे, कहते हुए,

२२ मुझे अपनी भूमी में से गुज़रने दो: हम खेतों में, या अंगूर-खेतों में नहीं मुड़ेंगे: हम कुएँ के पानियों में से नहीं पीएँगे: बल्कि हम राजा के मुख्य-पथ के साथ-साथ चलते चले जाएँगे, जब तक हम तुम्हारी सीमाओं को पार नहीं कर लेते।

२३ और सिहोन ने इस्राएल को अपनी सीमा के पार जाने की अनुमती नहीं दी: बल्कि सिहोन ने अपने सभी लोगों को एक साथ इकट्ठा किया, और जँगली-क्षेत्र में वह इस्राएल के विरुद्ध बाहर निकल आया: और वह जहज़ गया, और इस्राएल के विरुद्ध लड़ पड़ा।

२४ और इस्राएल ने उसे तलवार की धार से आघातित कर दिया, और उसकी भूमी पर अर्नोन से लेकर यब्बोक तक, अम्मोन की सन्तानों तक भी, अधिकार जमा लिया: क्योंकि अम्मोन की सन्तानों की सीमा प्रबल थी।

२५ और इस्राएल ने यह सभी नगर ले लिए: और इस्राएल अमोरियों के सभी नगरों में बस गया, हेश्बोन में, और उसके समस्त गाँवों में।

२६ क्योंकि हेश्बोन अमोरियों के राजा सिहोन का नगर था, जिसने मोआब के भूतपूर्व राजा के विरुद्ध लड़ाई की थी, और उसके हाथ में से उसकी समस्त भूमी ले ली थी, अर्नोन तक भी।

२७ इस कारण वश वह जो नीति-वचनों में बोलते हैं, कहते हैं, हेश्बोन में जाओ, सिहोन के नगर को निर्मित और उद्यत बन जाने दो:

२८ क्योंकि हेश्बोन में से एक अग्नी बाहर निकल चुकी है, एक अग्नी-लपट सिहोन के नगर में से: उसने मोआब के आर का, और अर्नोन के ऊँचे-स्थानों के प्रभुओं, का भक्षण कर दिया है।

२९ हाय पड़े तुझ पर, मोआब! तू मिट चुका है, हे कमोश की जनता: उसने अपने बेटों को जो बच निकले थे, और अपनी बेटियों को अमोरियों के राजा सिहोन के प्रति बाँधत्व में प्रदान कर दिया है।

३० हमने उन पर बाण छोड़े; हेश्बोन दिबोन तक भी नष्ट हो चुका है, और हमने नोफा तक भी उन्हें उजाड़ बना दिया है, जिसकी पहुँच मिदबा तक है।

३१ इस प्रकार इस्राएल अमोरियों की भूमी में बस गया।

३२ और मूसा ने याज़र का भेद निकाल लाने हेतु भिजवाए, और उन्होंने उसके गाँव ले लिए, और उन अमोरियों को वहाँ से बाहर खदेड़ दिया।

३३ और वह मुड़ गए और बशान के पथ से ऊपर चले गए: और बशान का राजा ओग उनके विरुद्ध बाहर निकल आया, वह, और उसके सभी लोग, एद्रेई में युद्ध करने।

३४ और प्रभु ने मूसा से कहा, इस से मत डरो: क्योंकि मैंने इसे, इसके समस्त लोग, और इसकी भूमी तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिए हैं; और तुम इसके साथ वैसा ही करोगे जैसा तुमने अमोरियों के राजा हेश्बोन के साथ किया था, जो हेश्बोन में बसता था।

३५ तो उन्होंने उस पर, और उसके बेटों पर, और उसके सभी लोगों पर वार कर दिया, जब तक उसका कोई भी जीवित नहीं बचा रहा: और उन्होंने उसकी भूमी पर अधिकार जमा लिया।



बाईसवाँ अध्याय।


और इस्राएल की सन्तानें यात्रा पर अग्रसर हुईं, और यर्दन के इस ओर यरीहो के साथ मोआब के मैदानों में उन्होंने डेरा डाल दिया।

और ज़िपोर के बेटे बलक ने वह सब देखा जो इस्राएल ने अमोरियों के साथ किया था।

और मोआब इन लोगों से घोर भयभीत हो गया था, क्योंकि वह अनेक थे: और मोआब इस्राएल की सन्तानों के कारण तनाव में पड़ गया।

और मोआब ने मिद्यान के वृद्ध-गणों से कहा, अब तो यह मण्डली उन सभी को चाट खाएगी जो हमारे चारों ओर हैं, जैसे एक साँड खेत की घास को चाट लेता है। और ज़िपोर का बेटा बलक उस समय मोआब-वंशजों का राजा था।

इसलिए उसने बओर के बेटे बिलाम को पथोर में दूत भिजवा दिए, जो उसके लोगों की सन्तानों की भूमी की नदी के साथ है, उसे बुलवा लेने के लिए, कहते हुए, देखो, मिस्र में से एक जनता बाहर निकल आई है: देखो, वह धरती के चहरे को ढकी हुई है, और वह मेरे विप्रीत बसी हुई है:

इसलिए अब जाओ, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इन लोगों पर श्राप डाल दो; क्योंकि यह मेरे लिए बहुत ही बलशाली हैं: मान लो कि कहिं मैं विजयी हो जाऊँ, कि मैं इन पर वार कर दूँ, और कि मैं इन्हें भूमी में से बाहर खदेड़ दूँ: क्योंकि मैं जानता हूँ कि जिसे तुम आशीष देते हो धन्य हो जाता है, और जिस पर तुम श्राप डाल देते हो, श्रापित हो जाता है।

और मोआब के वृद्ध-गणों और मिद्यान के वृद्ध-गणों ने अपने हाथ में भविष्यवाणी के वेतन लिए, और प्रस्थान कर लिया; और वह बिलाम के पास पहुँचे, और उस से बलक के शब्द बोल दिए।

और उसने उनसे कहा, इस रात यहीं ठहर जाओ, और जैसा प्रभु मुझ से बोलेंगे, वैसा मैं तुम्हें पुनः शब्द ले आऊँगा: और मोआब के अध्यक्षों ने बिलाम के साथ वास किया।

और ईश्वर बिलाम के पास आए, और कहा, तुम्हारे साथ यह कौन से लोग हैं?  

१० और बिलाम ईश्वर से बोला, मोआब के राजा, ज़िपोर के बेटे बलक ने मूझे भिजवाए हैं, कहते हुए,

११ देखो, मिस्र में से एक जनता बाहर निकल आई है, जो धरती के चहरे को ढकी हुई है: अब जाओ, उन्हें मेरे लिए श्रापित कर दो; मान लो कि कहिं मैं उन्हें परास्त कर सकूँ, और उन्हें बाहर खदेड़ दूँ।

१२ और ईश्वर ने बिलाम से कहा, तुम इनके साथ नहीं जाओगे; तुम जनता पर श्राप नहीं डालोगे: क्योंकि यह आशीषित हैं।

१३ और बिलाम सुबह उठा, और बलक के अध्यक्षों से कहा, चले जाओ अपनी भूमी में: क्योंकि प्रभु मुझे तुम्हारे साथ जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। 

१४ और मोआब के अध्यक्ष उठे, और वह बलक के पास चले गए, और कहा, बिलाम हमारे साथ नहीं रहा है।

१५ और बलक ने पुनः और भी अधिक, और उनसे और भी अधिक प्रतिष्ठित अध्यक्षों को भेजा।

१६ और वह बिलाम के पास गए, और उस से कहा, ज़िपोर का बेटा इस प्रकार कह रहा है, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, कि कुछ भी तुम्हें मेरे पास जाने से रोके:

१७ क्योंकि मैं तुम्हें बहुत ही विशाल सम्मान से पदोन्नत कर दूँगा, और मैं जो कुछ भी तुम मुझ से कहोगे कर दूँगा: इसलिए जाओ मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इस जनता पर मेरे लिए श्राप डाल दो।

१८ और बिलाम ने उत्तर दिया और बलक के सेवकों से कहा, यदि बलक मुझे अपना घर ही चाँदी और सोने से भरा हुआ दे दे, मैं प्रभु अपने ईश्वर के शब्द के पार नहीं जा सकता, कम या अधिक कर देने हेतु।

१९ इसलिए अब, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इस रात भी यहीं ठहर जाओ, ताकि मैं जान सकूँ कि प्रभु मुझ से और क्या कहेंगे।  

२० और रात को ईश्वर बिलाम के पास आए, और उस से कहा, यदो लोग तुम्हें बुलाने आते हैं, उठ जाना, और उनके साथ चले जाना; परन्तु तथापि वह शब्द ही जो मैं तुमसे बोलूँगा, वही तुम करोगे।

२१ और प्रातः बिलाम उठा, और उसने अपनी गधी पर काठी लगाई, और मोआब के अध्यक्षों के साथ चला गया।

२२ और ईश्वर का क्रोध सुलग उठा क्योंकि वह चला गया था: और प्रभु के दूत उसके विरुद्ध पथ में एक विपक्षी स्वरूप खड़े थे। अब वह अपनी गधी पर सवार था, और उसके दो नौकर उसके साथ थे।

२३ और उस गधी ने प्रभु के दूत को पथ में खड़े देखा, और उनकी तलवार उनके हाथ में खींची हुई: और वह गधी पथ पर से परे बाहर मुड़ गई, और खेत में चली गई: और बिलाम ने उस गधी को पीटा, उसे पथ पर मोड़ देने हेतु।

२४ और प्रभु के दूत अंगूर के खेतों के एक पथ में खड़े हो गए, एक दीवार इस ओर होती हुई, और एक दीवार उस ओर।

२५ और जब उस गधी ने प्रभु के दूत को देखा, वह दीवार के साथ टकरा गई, और बिलाम के पैर को दीवार पर कुचल दिया: और उसने उसे पुनः पीटा।

२६ और प्रभु के वह दूत और आगे गए, और एक तंग स्थान में खड़े हो गए, जहाँ तो दाएँ हाथ की ओर मुड़ने का स्थान था, ही बाएँ की ओर।

२७ और जब उस गधी ने प्रभु के दूत को देखा, वह बिलाम के नीचे से नीचे गिर पड़ी: और बिलाम का क्रोध सुलग उठा था, और उसने उस गधी को एक डण्डे से पीटा। 

२८ और प्रभु ने उस गधी का मूँह खोल दिया, और उसने बिलाम से कहा, क्या कर दिया है मैंने तेरे साथ, कि तूने मुझे इन तीन बार पीटा है? 

२९ और बिलाम ने उस गधी से कहा, क्योंकि तूने मेरी हँसी उड़ाई है: यदि मेरे हाथ में कोई तलवार होती, मैंने तुझे अभी ही मार डाल दिया होता।

३० और उस गधी ने बिलाम से कहा, क्या मैं तेरी गधी नहीं हूँ, जिस पर तूने जब से मैं तेरी थी इस दिन तक सवारी की है? क्या मैं तेरे साथ कभी भी इस प्रकार कर देने की आदी थी? और उसने कहा, नहीं।

३१ तब प्रभु ने बिलाम की आँखें खोल दीं, और उसने प्रभु के दूत को पथ में खड़े देखा, और उनकी तलवार उनके हाथ में खींची हुई: और उसने अपना सर झुका लिया, और अपने चहरे के बल समतल गिर पड़ा।

३२ और प्रभु के दूत ने उस से कहा, किस कारण तुमने अपनी गधी को इन तीन बार पीटा है? देखो, मैं तुम्हारा विरोध करने बाहर आया, क्योंकि तुम्हारा पथ मेरे समक्ष विकृत है:  

३३ और इस गधी ने मुझे देखा, और मुझ से इन तीन बार मुड़ गई: यदि यह मुझ से मुड़ी होती, अवश्य ही अभी मैंने तुम्हें मार डाला होता, और इसे जीवित बचा लिया होता।

३४ और बिलाम ने प्रभु के दूत से कहा, मैं पाप कर दिया है; क्योंकि मैं नहीं जानता था कि आप मेरे विप्रीत पथ में खड़े थे: अब इसलिए, यदि यह आपको अप्रसन्न करता है, मैं पुनः वापस चला जाऊँगा। 

३५ और प्रभु के दूत ने बिलाम से कहा, इन लोगों के साथ चले जाओ: परन्तु केवल वही शब्द जो मैं तुमसे बोलूँगा, वही तुम बोलोगे। तो बिलाम बलक के अध्यक्षों के चला गया।

३६ और जब बलक ने सुना कि बिलाम गया था, वह उस से भेंट करने मोआब के एक नगर में बाहर गया, जो अर्नोन की सीमा में है, जो सीमा के अन्तिम छोर में है।

३७ और बलक ने बिलाम से कहा, क्या मैंने तुम्हें बुलवा लेने के लिए तुम्हारे पास भिजवाए नहीं थे क्या? किस कारण वश तुम मेरे पास नहीं आए? क्या मैं वास्तव में तुम्हें सम्मानित और पदोन्नत करने में सक्षम नहीं हूँ?

३८ और बिलाम ने बलक से कहा, लो, मैं तुम्हारे पास गया हूँ: क्या अब मेरे पास कुछ भी बोलने की शक्ती है क्या? ईश्वर जो शब्द मेरे मूँह में डालते हैं, वही मैं बोलूँगा।

३९ और बिलाम बलक के साथ गया, और वह किर्यतहूसोत गए।

४० और बलक ने साँड और भेड़ चढ़ाए, और बिलाम को और उन अध्यक्षों को जो उसके साथ थे, भिजवा दिया।

४१ और अगले दिन यह होने को आया, कि बलक ने बिलाम को लिया, और उसे बअल के ऊँचे-स्थानों में ले आया, ताकि वह वहाँ से उस जनता का दूरतम भाग देख सके।



तेईसवाँ अध्याय।


और बिलाम ने बलक से कहा, मेरे लिए यहाँ सात बलिवेदियों का निर्माण कर दो, और मेरे लिए यहाँ सात साँड और सात मेढ़े तैयार कर दो।

और बलक ने वैसा कर दिया जैसा बिलाम ने बोला था; और बलक और बिलाम ने प्रत्येक बलिवेदी पर एक साँड और एक मेढ़ा चढ़ा दिया।

और बिलाम ने बलक से कहा, अपने जले-चढ़ावे के साथ खड़े हो जाओ, और मैं जाता हूँ: मान लो कहिं प्रभु मुझ से भेंट करने जाएँ: और जो कुछ भी वह मुझे दिखाते हैं मैं तुम्हें बता दूँगा। और वह एक ऊँचे-स्थान चला गया।

और ईश्वर बिलाम से मिले: और उसने उनसे कहा, मैंने साल बलिवेदियाँ तैयार कर दीं हैं, और मैंने प्रत्येक बलिवेदी पर एक साँड और एक मेढ़ा चढ़ा दिया है।

और प्रभु ने बिलाम के मुँह में एक शब्द डाल दिया, और कहा, बलक के पास वापस चले जाओ, और तुम इस प्रकार बोलोगे।

और वह उसके पास वापस गया, और लो, वह अपने जले-चढ़ावे के साथ खड़ा था, वह, और मोआब के सभी अध्यक्ष।

और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, मोआब का राजा बलक मूझे अराम से ले आया, पूर्व के पर्वतों में से बाहर, कहता हुआ, आओ, याकूब को मेरे लिए श्रापित कर दो, और आओ, इस्राएल की उपेक्षा कर दो।

मैंने कैसे श्रापित कर दूँ, जिसे ईश्वर ने श्रापित नहीं किया है? या मैं कैसे उपेक्षा कर दूँ, जिसकी प्रभु ने उपेक्षा नहीं की है?  

क्योंकि चट्टानों के शिखर से मैं उसे देख रहा हूँ, और पहाड़ियों से में उस पर दृष्टि टिका रहा हूँ: लो, यह जनता अकेली बसेगी, और राष्ट्रों के बीच नहीं गिनी जाएगी।

१० याकूब की धूल को कौन गिन सकता है, और इस्राएल के चौथे भाग की गणना कर सकता है? मुझे नेकों की मृत्यु से मर जाने दो, और मेरे अन्तिम अन्त को उसके जैसा हो जाने दो!

११ और बलक ने बिलाम से कहा, तुमने मेरे साथ क्या कर दिया है? मैंने तुम्हें अपने शत्रुओं को श्रापित कर देने के लिए लिया, और, देखो तो, तुम ने तो इन्हें सम्पूर्णता से आशीष दे दिया है।

१२ और उसने उत्तर दिया और कहा, क्या मैं उसका ध्यान रखूँ जो प्रभु ने मेरे मूँह में डाल दिया है? 

१३ और बलक ने उस से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मेरे साथ एक अन्य स्थान में जाओ, जहाँ से तुम उन्हें देख सकोगे: तुम बस केवल उनका दूरतम भाग ही देख पाओगे, और उनकी सम्पूर्णता नहीं देख पाओगे: और उन्हें मेरे लिए वहाँ से श्रापित कर देना।

१४ और वह उसे ज़ोफिम के खेत में ले आया, पिस्गाह के शिखर पर, और सात बलिवेदियों का निर्माण कर दिया, और प्रत्येक बलिवेदी पर एक साँड और एक मेढ़ा चढ़ा दिया।

१५ और उसने बलक से कहा, अपने जले-चढ़ावे के साथ यहाँ खड़े हो जाओ, जैसे मैं प्रभु से उधर भेंट करता हूँ। 

१६ और प्रभु ने बिलाम से भेंट की, और उसने मूँह में एक शब्द डाल दिया, और कहा, बलक के पास पुनः चले जाओ, और इस प्रकार कहो। 

१७ और जब वह उसके पास आया, देखो, वह अपने जले-चढ़ावे के साथ खड़ा था, और मोआब के अध्यक्ष उसके साथ। और बलक ने उस से कहा, प्रभु ने क्या बोला है?

१८ और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, उठ जाओ बलक, और सुनो; मेरा श्रवण कर लो, तुम ज़िपोर के बेटे:

१९ ईश्वर कोई पुरुष नहीं हैं, कि वह झूठ बोलें; ही मनुष्य के बेटे, कि वह मन-परिवर्तन करें: क्या उन्होंने कह दिया है, और वह उसे नहीं करेंगे? या क्या उन्होंने बोल दिया है, और वह उसे पूर्ण करें?

२० देखो, मैंने आशीष दे देने की आज्ञा ग्रहण की है: और उन्होंने आशीष दे दिया है; और मैं उसे पलट नहीं सकता।

२१ उन्होंने याकूब में अधर्म-पाप नहीं देखा है, ही उन्होंने इस्राएल में विकृतता देखी है: प्रभु उसके ईश्वर उसके साथ हैं, और एक सम्राट की चिल्लाहट उनके बीच है।

२२ ईश्वर उन्हें मिस्र में से बाहर ले आए; इसके पास मानो कि इक-सींघे जैसी शक्ती है।

२३ याकूब के विरुद्ध निश्चितता से कोई तन्त्र-जाप नहीं है, ही इस्राएल के विरुद्ध कोई भविष्यवाणी है: इसी समयानुसार याकूब और इस्राएल के विषय में यह कहा जाएगा, ईश्वर ने क्या क्रियान्वित कर दिया है!

२४ देखो, यह लोग एक विशाल सिंह के समान उठ जाएँगे, और स्वयं को एक युवा सिंह के समान उठा लेगा: वह नीचे तब तक नहीं लेटेगा, जब तक वह शिकार में से खा ले, और मारे हुए का लहू पी ले।

२५ और बलक ने बिलाम से कहा, ही उन्हें बिल्कुल भी श्राप दो, ही उन्हें बिल्कुल ही आशीष दो। 

२६ परन्तु बिलाम ने उत्तर दिया और बलक से कहा, बता नहीं दिया मैंने तुम्हें, कहते हुए, वह सभी जो प्रभु बोलते हैं, वही मुझे अवश्य करना है?

२७ और बलक ने बिलाम से कहा, आओ, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मैं तुम्हें एक अन्य स्थान में ली आता हूँ; मान लो कि ईश्वर प्रसन्न हो जाएँ कि तुम उन पर मेरे लिए वहीं से श्राप डाल दो। 

२८ और बलक बिलाम को पओर के शिखर तक ले आया, जो जेशिमोन की ओर देखता है।

२९ और बिलाम ने बलक से कहा, मेरे लिए यहाँ सात बलिवेदियों का निर्माण कर दो, और मेरे लिए यहाँ सात साँड और सात मेढ़े तैयार कर दो।

३० और बलक ने वैसा कर दिया जैसा बिलाम ने बोला था; और प्रत्येक बलिवेदी पर एक साँड और एक मेढ़ा चढ़ा दिया।



चौबीसवाँ अध्याय।


और जब बिलाम ने देखा कि इस से प्रभु प्रसन्न थे कि इस्राएल आशीषित हो, वह अन्य समयों के समान, तन्त्र-जापों को खोजने नहीं गया, बल्कि उसने अपना चेहरा जँगली-क्षेत्र की ओर स्थित किया।   

और बिलाम ने अपनी आँखें उठाईं, और उसने इस्राएल को अपनी प्रजातियोंनुसार उसके तम्बुओं में वास करते हुए देखा; और प्रभु का भावात्मा उस पर छा गया।

और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, बओर के बेटे बिलाम ने कहा है, और उस पुरुष ने कहा है जिसकी आँखें खुली हुई हैं: 

उसने कहा है, जिस ने ईश्वर के शब्दों को सुना है, जिस ने उन सर्वबलशाली का दृश्य देखा, अवचेतन की आविष्टता में पड़ा हुआ, परन्तु अपनी आँखें खुली रखता हुआ:

हे याकूब, कितने अच्छे हैं तुम्हारे शिविर, और तुम्हारे तम्बू, हे इस्राएल!

घाटियों के समान हैं वह फैले हुए, नदी के किनारे पर उद्यानों के समान, अगर की लकड़ी के वृक्षों समान जिन्हें प्रभु ने रोपा है,  और पानियों के किनारे पर देवदार के वृक्षों समान।

वह अपनी बाल्टियों में से पानी को बाहर उँडेल देगा, और उसका बीज कई पानियों में होगा, और उसका राजा अगाग से  भी ऊँचा होगा, और उसका राज्य पदोन्नत कर दिया जाएगा।

ईश्वर उसे मिस्र में से बाहर ले आए; इसके पास मानो कि इक-सींघे जैसी शक्ती है: यह अपने शत्रु-राष्ट्रों को खा जाएगा, और उनकी हड्डियों को तोड़ डालेगा, और उन्हें अपने बाणों से भेद देगा।

वह झुक गया, वह एक सिंह के समान नीचे लेट गया, और एक विशाल सिंह के समान: उसे कौन ऊपर उठाएगा? वह आशीषित है जो तुम्हें आशीष देता है, और श्रापित है वह जो तुम्हें श्राप देता है।

१० और बलक का क्रोध बिलाम के विरुद्ध सुलग उठा था, और उसने अपने हाथों को एक साथ बजाया: और बलक ने बिलाम से कहा, मैंने तुम्हें अपने शत्रुओं को श्रापित करने के लिए बुलाया, और देख लो, तुम ने तो उन्हें इन तीन बार आशीष ही दे दिया है।

११ इसलिए अब अपने स्थान तुम भाग जाओ: मैंने तो तुम्हें बड़े सम्मान से पदोन्नत कर देने की सोची थी; परन्तु, लो, प्रभु ने तुम्हें सम्मान से रोक दिया। 

१२ और बिलाम ने बलक से कहा, मैंने तुम्हारे उन दूतों से भी कहा नहीं था, जिन्हें तुमने मेरे पास भेजा था, कहते हुए, 

१३ यदि बलक मुझे अपना चाँदी और सोने से भरा घर भी दे दे, मैं प्रभु के आदेश के पार नहीं जा सकता, अपनी ही स्वेच्छा से अच्छा या बुरा कर देने हेतु; जो प्रभु कहते हैं, वही मैं बोलूँगा?

१४ और अब, देख लो, मैं अपने लोगों के पास जा रहा हूँ: इसलिए जाओ, और मैं तुम्हें बताता हूँ कि यह लोग तुम्हारे लोगों के साथ अंतिम दिनो में क्या करेंगे।

१५ और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, बओर के बेटे बिलाम ने कहा है, और उस पुरुष ने कहा है जिसकी आँखें खुली हुई हैं:

१६ उसने कहा है, जिस ने ईश्वर के शब्दों को सुना है, और जो उन सर्वोच्चतम के ज्ञान का ज्ञानी था, जिसने उन सर्वबलशाली के दृश्य को देखा, अवचेतन की आविष्टता में पड़ा हुआ, परन्तु अपनी आँखें खुली रखता हुआ:

१७ मैं उसे देखूँगा, परन्तु अभी नहीं: मैं उस पर दृष्टि लगाऊँगा, परन्तु निकट से नहीं: याकूब में से एक सितारा बाहर निकलेगा, और इस्राएल में से एक राज-दण्ड बाहर उठेगा, और मोआब के कोनो पर वार करेगा, और शेथ की समस्त सन्तानों को नष्ट कर देगा।

१८ और एदोम एक अधिकार होगा, सेईर भी उसके शत्रुओं के लिए एक अधिकार होगा; और इस्राएल बहादुरी क्रियान्वित करेगा।

१९ याकूब में से वह बाहर आएगा जिसके पास अधिराज्य होगा, और नगर में उस बचे हुए को नष्ट कर देगा।

२० और जब उसने अमालेक को देखा, और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, अमालेक राष्ट्रों में प्रथम था; परन्तु उसका अन्तिम अन्त होगा कि वह सदैवत्वता के लिए नष्ट हो जाए।

२१ और उसने किनियों को देखा, और अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, तुम्हारा निवास-स्थान शक्तिमान है, और तुम अपना घोंसला एक चट्टान में लगाते हो।

२२ तथापि वह किनी मिटा दिया जाएगा, जब तक असहुर तुम्हें बन्दी उठा ले जाता है।

२३ और उसने अपना दृष्टान्त लिया, और कहा, हाय, कौन जीवित रहेगा जब ईश्वर यह करते हैं!

२४ और कित्तिम के तट से जल-यान आएँगे, और आशर को पीड़ित करेंगे, और एबर को पीड़ित करेंगे, और वह भी सदैवत्वता के लिए नष्ट हो जाएगा।

२५ और बिलाम उठ गया, और चला गया और अपने स्थान वापस गया: और बलक भी अपने पथ पर चलता बना।



पच्चीसवाँ अध्याय।


और इस्राएल शित्तिम में वास कर रहा था, और लोगों ने मोआब की बेटियों के साथ वैश्यापना करना आरम्भ कर दिया।

और उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरों की बलियों पर बुलाया: और लोगों ने खाया भी, और उनके ईश्वरों के प्रति नीचे भी झुके।

और इस्राएल ने स्वयं को बअलपओर के साथ संयुक्त कर दिया: और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध सुलग उठा। 

और प्रभु ने मूसा से कहा, लोगों के समस्त मुखियों को ले लो, और उन्हें प्रभु के समक्ष सूर्य के सामने ऊपर लटका दो, ताकि प्रभु का क्रुद्ध क्रोध इस्राएल से परे मोड़ दिया जाए।

और मूसा ने इस्राएल के न्यायाधीषों से कहा, प्रत्येक अपने जनों को मार डालो जो बअलपओर के साथ संयुक्त थे।

और, देखो, इस्राएल की सन्तानों में से एक आया और अपने भाई-जनो के पास, मूसा की, और इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा की दृष्टि में जो सभा के तम्बू की द्वार के समक्ष रो रहे थे, एक मिद्यानी औरत को ले आया।

और जब हारुन पुरोहित के बेटे, एलाज़र के बेटे, फिनहास ने यह देखा, वह सभा के बीच में से उठ खड़ा हुआ, और अपने हाथ में एक भाला लिया;

और वह उस इस्राएल की आदमी के पीछे तम्बू में गया, और उन दोनो को आर-पार भेद दिया, इस इस्राएल के आदमी को, और उस औरत को उसके पेट के आर-पार। इस प्रकार इस्राएल की सन्तानों से वह विपत्ती रोक दी गई थी।

और वह जो उस विपत्ती में मरे थे चौबीस हज़ार थे।

१० और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

११ हारुन पुरोहित के बेटे, एलाज़र के बेटे, फिनहास ने, इस्राएल की सन्तानों से मेरे आक्रोश को परे मोड़ दिया है, जैसे वह मेरे वास्ते उनके बीच जोशीला था, कि मैंने इस्राएल की सन्तानों को अपनी ईर्ष्या में समाप्त नहीं किया।

१२ इस कारण बोलो, देखो, मैं उसे अपना शान्ति का प्रतिज्ञा-पत्र प्रदान करता हूँ:

१३ और वह उसके, और उसके पश्चात उसके बीज के पास होगा, एक अनन्तकाल के पुरोहित-पद का प्रतिज्ञा-पत्र ही; क्योंकि वह अपने ईश्वर के लिए जोशीला था, और इस्राएल की सन्तानों के लिए एक परिहार बना डाला।

१४ और उस इस्राएली का नाम जिसे मार डाल दिया गया था, वही जिसे उस मिद्यानी औरत के साथ मार डाल दिया गया था, ज़िम्री था, सलू का बेटा, शिमोन-वंशजों के बीच एक प्रमुख घराने का एक अध्यक्ष। 

१५ और उस मिद्यानी औरत का नाम जिसे मार डाल दिया गया था कोज़बी था, ज़ुर की बेटी; वह एक गण पर, और मिद्यान में एक प्रमुख घराने का मुखिया था।

१६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१७ मिद्यान जनजाति वालों को व्यग्रित करो, और उन पर वार कर दो:

१८ क्योंकि वह तुम्हें अपने षड्यंत्रों से व्यग्रित करते हैं, जिनके द्वारा उन्होंने तुम्हें पओर के समबन्ध में, और कोज़बी उस मिद्यान के अध्यक्ष की बेटी, उनकी बहन के समबन्ध में, छलित कर दिया है, जिसे विपत्ती के उस दिन में पओर के वास्ते मार डाल दिया गया था।



छब्बीसवाँ अध्याय।


और उस विपत्ती के उपरान्त यह होने को आया, कि प्रभु मूसा से और हारुन पुरोहित के बेटे एलाज़र से बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा की गणना करो, बीस वर्ष की आयु से लेकर और उस से अधिक, उनके पित्रों के घराने के सर्वत्र में, वह सभी जो इस्राएल में युद्ध पर जाने में सक्षम हैं।

और मूसा और पुरोहित एलाज़र उनसे यरीहो के निकट यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में बोले, कहते हुए,

लोगों की गणना करो, बीस वर्ष की आयु से लेकर और उस से अधिक; जैसा आदेश प्रभु ने मूसा और इस्राएल की सन्तानों को दिया, जो मिस्र की भूमी में से बाहर निकल गए थे।

इस्राएल का ज्येष्ठ बेटा, रूबेन: रूबेन की सन्तानें; हनोक, जिस से हनोक-वंशजों का परिवार आता है: पल्लू से, पल्लू-वंशजों का अपरिवर:

हेज़रोन से, हेज़रोन-वंशजों का परिवार: कर्मी से, कर्मी-वंशजों का परिवार।

यही रूबेन-वंशजों के परिवार हैं: और वह जिनकी उन में से गिनती कर ली गई थी तेंतालीस हज़ार सात सौ तीन थे।

और पल्लू के बेटे; एलिआब।

और एलिआब के बेटे; नमूएल, और दतान, और अबीरम। यही वह दतान, और अबीरम जो सभा में कुख्यात थे, जो कोरह के दल में मूसा और हारुन के विरुद्ध झगड़ पड़े थे, जब वह प्रभु के विरुद्ध झगड़े थे:

१० और पृथ्वी ने अपना मूँह खोल लिया था, और उन्हें निगल लिया था कोरह के साथ ही, जब वह दल मर गया था, जिस समय वह अग्नी ढाई सौ आदमियों को खा गई थी: और वह एक संकेत बन गए थे।

११ तथापि कोरह की सन्तानें मरी नहीं थीं।

१२ शिमोन के बेटे उनके परिवारोंनुसार: नेमुएल से, नेमुएल-वंशजों का परिवार: यामीन से, यामीन-वंशजों का परिवार: याकीन से, याकीन-वंशजों का परिवार:

१३ ज़ेरह से, ज़ेरह-वंशजों का परिवार: शाऊल से, शाऊल-वंशजों का परिवार।

१४ यह शिमोन-वंशजों के परिवार हैं, बाईस हज़ार दो सौ।

१५ गाद की सन्तानें उनके परिवारोंनुसार: ज़िफन से, ज़िफन-वंशजों के परिवार: हग्गी से, हग्गी-वंशजों का परिवार: शुनी से, शुनी-वंशजों का परिवार:

१६ ओज़्नी से, ओज़्नी-वंशजों का परिवार: एरी से, एरी-वंशजों का परिवार।

१७ अरोद से, अरोद-वंशजों का परिवार: अरेली से, अरेली-वंशजों का परिवार।

१८ यह गाद की सन्तानों के परिवार हैं उनके अनुसार जो उन में से गिने गए थे, चालीस हज़ार पाँच सौ।

१९ यहूदा के बेटे थे अर और ओनन: और अर और ओनन कनान की भूमी में मर गए थे।

२० और यहूदा के बेटे उनके परिवारोंनुसार थे, शीलह से, शीलह-वंशज: फैरेज़ से, फैरेज़-वंशजों का परिवार: ज़ेरह से, ज़ेरह-वंशजों का परिवार।

२१ और फैरेज़ के बेटे थे; हेज़रोन से, हेज़रोन-वंशजों का परिवार: हेमल से, हेमल-वंशजों का परिवार।

२२ यह यहूदा के परिवार हैं उनके अनुसार जो उन में से गिने गए थे, छियत्तर हज़ार पाँच सौ।

२३ इस्सकार के बेटे उनके परिवारोंनुसार: टोला से, टोला-वंशजों का परिवार: फूआह से, फूआह-वंशजों का परिवार:

२४ याशूब से, याशूब-वंशजों का परिवार: शीमरोन से, शीमरोन-वंशजों का परिवार।

२५ यह इस्सकार के परिवार हैं उनके अनुसार जो उन में से गिने गए थे, चौंसठ हज़ार तीन सौ।

१६ ज़बूलून के बेटे उनके परिवारोंनुसार: सेरेड से, सेरेड-वंशजों का परिवार: एलोन से, एलोन-वंशजों का परिवार: जेहलील से, जेहलील-वंशजों का परिवार।

२७ यह ज़बूलून-वंशजों के परिवार हैं, उनके अनुसार जो उन में से गिने गए थे, साठ हज़ार पाँच सौ।

२८ युसुफ के बेटे उनके परिवारोंनुसार मनश्‍शे और ईफ्रैम थे।

२९ मनश्‍शे के बेटों से: मेकर से, मेकर-वंशजों का परिवार: और मेकर ने गिलद को जना: और गिलद से गिलद-वंशजों का परिवार आता है।

३० यह गिलद के बेटे हैं: ईज़र से, ईज़र-वंशजों का परिवार: हेलक से, हेलक-वंशजों का परिवार:

३१ और असरिएल से, असरिएल-वंशजों का परिवार: और शकेम से, शकेम-वंशजों का परिवार:

३२ और शमीदा से, शमीदा-वंशजों का परिवार: और हेफर से, हेफर-वंशजों का परिवार।

३३ और हेफर के बेटे ज़्लोफहद के कोई बेटे नहीं थे, बल्कि बेटियाँ थीं: और ज़्लोफहद की बेटियों के नाम थे महला, नूह, होग्ला, मिल्का, और तिर्ज़ा।

३४ यह मनश्‍शे के परिवार हैं, और जिन्हें उन में से गिना गया था, बावन हज़ार सात सौ।

३५ यह ईफ्रैम के बेटे हैं उनके परिवारोंनुसार: शूथला से, शूथला-वंशजों का परिवार: बेकर से, बेकर-वंशजों का परिवार: थहन से, थहन-वंशजों का परिवार।

२६ और यह शूथला के बेटे हैं: एरन से, एरन-वंशजों का परिवार।

३७ यह ईफ्रैम के बेटों के परिवार हैं उनके अनुसार जिन्हें उन में से गिना गया था, बत्तीस हज़ार पाँच सौ। यह युसुफ के बेटे हैं उनके परिवारोंनुसार।

३८ बिन्यामिन के बेटे उनके परिवारोंनुसार: बेला से, बेला-वंशजों का परिवार; एश्बेल से, एश्बेल-वंशजों का परिवार: अहीरम से, अहीरम-वंशजों का परिवार:

३९ शूफम से, शूफम-वंशजों का परिवार: हूफम से, हूफम-वंशजों का परिवार।

४० और बेला के बेटे थे आर्द और नामन: आर्द से, आर्द-वंशजों का परिवार: और नामन से, नामन-वंशजों का परिवार।

४१ यह बिन्यामिन के बेटे हैं अपने परिवारोंनुसार: और वह जो उन में से गिने गए थे पैंतालीस हज़ार छह सौ थे।

४२ यह दान के बेटे हैं उनके परिवारोंनुसार: शूहम से, शूहम-वंशजों का परिवार। यह दान के परिवार हैं उनके परिवारोंनुसार।

४३ शूहम-वंशजों के समस्त परिवार, उनके अनुसार जो उन में से गिने गए थे, चौंसठ हज़ार चार सौ थे।

४४ आशेर की सन्तानों से उनके परिवारोंनुसार: यिम्ना से, यिम्ना-वंशजों का परिवार: यिश्वी से, यिश्वी-वंशजों का परिवार: बरीया से, बरीया-वंशजों का परिवार।

४५ बरीया के बेटों से: हेबर से, हेबर-वंशजों का परिवार: मल्कियल से, मल्कियल-वंशजों का परिवार।

४६ और आशेर की बेटी का नाम सैराह था।

४७ यह आशेर के बेटों के परिवार हैं उनके अनुसार जिन्हें उन में से गिना गया था; जो तरेपन हज़ार चार सौ थे।

४८ नफ्ताली के बेटों से उनके परिवारोंनुसार: यहज़ल से, यहज़ल-वंशजों का परिवार: गूनी से, गूनी-वंशजों का परिवार:

४९ येसर से, येसर-वंशजों का परिवार: शिल्लेम से, शिल्लेम-वंशजों का परिवार।

५० यह नफ्ताली के परिवार हैं उनके परिवारोंनुसार: और वह जो उन में से गिने गए थे पैंतालीस हज़ार चार सौ थे।

५१ यह इस्राएल की सन्तानों में से गिने गए थे, छह सौ एक हज़ार सात सौ तीस।

५२ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

५३ इनके प्रति भूमी एक विरासत के लिए उनके नामों की संख्यानुसार विभाजित कर दी जाएगी।

५४ अनेकों को तुम अधिक विरासत दोगे, और थोड़ों को तुम थोड़ी विरासत दोगे: प्रत्येक को उसकी विरासत उनके अनुसार दे दी जाएगी जिनकी गिनती उस में से कर ली गई थी।

५५ तथापि भूमी पर्चियाँ डाल कर विभाजित की जाएगी; उनके पित्रों की प्रजातियों के नामोंनुसार वह विरासत लेंगे।

५६ पर्चियोंनुसार उसका अधिकार बहुतों और थोड़ों के बीच विभाजित कर दिया जाएगा।

५७ और यह हैं लेवी-वंशजों में से जो उनके परिवारोंनुसार गिने गए थे: गेरशौन से, गेरशौन-वंशजों का परिवार: कहाथ से, कहाथ-वंशजों का परिवार: मरेरी से, मरेरी-वंशजों का परिवार।

५८ यह लेवी-वंशजों के परिवार हैं: लिबनी-वंशजों का परिवार, हेब्रोन-वंशजों का परिवार, महली-वंशजों का परिवार, मूशी-वंशजों का परिवार, कोरह-वंशजों का परिवार। और कहाथ ने जना अम्राम।

५९ और अम्राम की पत्नी का नाम योकेबेद था, लेवी की बेटी, जिसे उनकी माता ने लेवी को मिस्र में जना: और उसने अम्राम को जने हारुन और मूसा, और मरियम उनकी बहन।

६० और हारुन को पैदा हुए थे नादब, अबीहु, एलाज़र, और इथामर।

६१ और नादब और अबीहु मर गए थे, जब उन्होंने प्रभु के सम्मुख विचित्र अग्नी चढ़ाई थी।

६२ और वह जो उन में गिने गए थे तेईस हज़ार थे, सभी नर एक महीने की आयु से और अधिक: क्योंकि इनकी गणना इस्राएल की सन्तानों के बीच नहीं की गई थी, क्योंकि उन्हें कोई भी विरासत इस्राएल की सन्तानों के बीच नहीं प्रदान की गई थी।

६३ यही हैं वह जिनकी गणना मूसा और पुरोहित एलाज़र द्वारा की गई थी, जिन्होंने इस्राएल की सन्तानों को गिना था यरीहो के निकट यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में। 

६४ परन्तु इनके बीच एक भी आदमी उन में से था जिन्हें मूसा और पुरोहित हारुन ने गिना था, जब उन्होंने इस्राएल की सन्तानों की गणना सीनय के जँगली-क्षेत्र में की थी।

६५ क्योंकि प्रभु ने उनके विषय में कहा था, यह अवश्य ही जँगली-क्षेत्र में मर जाएँगे। और उन में से एक भी आदमी नहीं बचा था, सिवाय यपुन्ने का बेटा कालेब, और नून का बेटा यहोशुअ।



सत्ताईसवाँ अध्याय।


तब युसुफ के बेटे मनश्‍शे के परिवारों में से, मनश्‍शे के बेटे मेकर के बेटे गिलद के बेटे हेफर के बेटे ज़्लोफहद की बेटियाँ आईं: और यह उसकी बेटियों के नाम हैं; महला, नूह, और होग्ला,और  मिल्का, और तिर्ज़ा।

और यह मूसा के समक्ष, और पुरोहित एलाज़र के समक्ष, और अध्यक्षों के और समस्त सभा के समक्ष, सभा के तम्बू के द्वार के साथ खड़ी हो गईं, कहती हुईं,

हमारे पिता जँगली-क्षेत्र में ही मर गए, और वह उस दल में नहीं थे, जिसने स्वयं को कोरह के दल में प्रभु के विरुद्ध एक साथ एकत्रित कर लिया था; बल्कि वह अपने ही पाप में मर गए, और उनके पास कोई बेटे नहीं थे।

हमारे पिता का नाम उनके पारिवर के बीच में से क्यों मिटा दिया जाए, क्योंकि उनके पास कोई बेटा नहीं है? इसलिए हमें हमारे पिता के भाई-जनो के बीच एक अधिकार प्रदान कर दें।

और मूसा उनकी परिस्थिति प्रभु के सम्मुख लाया। 

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

ज़्लोफहद की बेटियाँ सही कह रही हैं: तुम अवश्य ही उन्हें उनके पिता के भाई-जनो के बीच एक विरासत का अधिकार प्रदान करोगे; और तुम उनके पिता की विरासत को उनके पास चला जाने दोगे।

और तुम इस्राएल की सन्तानों से बोलोगे, कहते हुए, यदि कोई पुरुष बिना कोई बेटा रखे मर जाता है, तब तुम उसकी विरासत को इसकी बेटी के पास चला जाने दोगे।  

और यदि उसके पास कोई बेटी हो, तब तुम उसकी विरासत को उसके भाई-जनो को प्रदान कर दोगे।

१० और यदि उसके पास कोई भाई-जन हों, तब तुम उसकी विरासत उसके पिता के भाई-जनो को दे दोगे।

११ और यदि उसके पिता के पास कोई भाई-जन हों, तब तुम उसकी विरासत को उसके परिवार के निकटतम कुलवाले को प्रदान कर दोगे, वह उस पर अधिकार कर लेगा: और यह इस्राएल की सन्तानों के लिए एक न्याय का अध्यादेश होगा, जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

१२ और प्रभु ने मूसा से कहा, तुम इस पहाड़ अबरिम में चले जाओ, और उस भूमी को देख लो जिसे मैंने इस्राएल की सन्तानों को प्रदान कर दिया है।

१३ और जब तुम उसे देख लोगे, तुम भी अपने लोगों के साथ एकत्रित हो जाओगे, जैसे तुम्हारा भाई हारुन एकत्रित हो गया था।

१४ क्योंकि तुमने मेरे आदेश के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था ज़िन के निर्जन-क्षेत्र में, सभा के लड़ाई-झगड़े में, उनकी आँखों के समक्ष उस पानी पर मूझे पुनीत ठहरा देने हेतु: वही है कादेश में मरीबा का पानी ज़िन के जँगली-क्षेत्र में।

१५ और मूसा प्रभु से बोला, कहता हुआ, 

१६ प्रभु, समस्त माँस की भावात्माओं के ईश्वर, एक पुरुष को सभा पर निर्देशक बना दें, 

१७ जो उनके सम्मुख बाहर जा सके, और उनके सम्मुख अन्दर सके, और जो उन्हें नेतृत्वता से बाहर ले जा सके, और उन्हें अन्दर ला सके; ताकि प्रभु की सभा बिन चरवाहे के उन भेड़ों समान हो।

१८ और प्रभु ने मूसा से कहा, नून के बेटे यहोशुअ को ले लो, एक पुरुष जिस में भावात्मा है, और अपना हाथ उस पर रख दो;

१९ और उसे एलाज़र पुरोहित के सम्मुख, और समस्त सभा के सम्मुख स्थित कर दो; और उसे उनकी दृष्टि में प्रभार सौंप दो।

२० और तुम उस पर अपने सम्मान में से कुछ लगा दोगे, ताकि इस्राएल की सन्तानों की समस्त सभा आज्ञाकारी हो।

२१ और वह एलाज़र पुरोहित के सम्मुख खड़ा होगा, जो उसके लिए प्रभु के सम्मुख ऊरीम के न्याय-निर्धारणानुसार परामर्श पूछेगा: उसके शब्द पर वह बाहर निकलेंगे, और उसके शब्द पर वह अन्दर आएँगे, दोनो वह और उसके साथ इस्राएल की समस्त सन्तानें, यहाँ तक की समस्त सभा ही।

२२ और मूसा ने जैसा प्रभु ने उसे आदेश दिया था, वैसा कर दिया: और उसने यहोशुअ को लिया, और उसे एलाज़र पुरोहित के सम्मुख, और समस्त सभा के सम्मुख स्थित कर दिया:

२३ और उसने उस पर अपने हाथों को रखा, और उसे प्रभार सौंप दिया, जैसा प्रभु ने आदेश दिया था मूसा के हाथ।



अठाईसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों को आदेश दे दो, और उनसे कहो, मेरा चढ़ावा, और अग्नी से बनी मेरी बलियों हेतु मेरी रोटी, मेरे प्रति एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु, तुम मेरे प्रति उनके निर्धारित समयों में, चढ़ाओगे।

और तुम उनसे कहोगे, यह वह अग्नी से बना चढ़ावा है जिसे तुम प्रभु के प्रति चढ़ाओगे; पहले वर्ष के दो निष्कलंक मेमने दिन-प्रति-दिन, एक निरन्तर जले-चढ़ावे हेतु।

एक मेमना तुम प्रातः में चढ़ाओगे, और दूसरा मेमना तुम संध्या के समय चढ़ाओगे;

और आटे के एक एफाह का दसवाँ भाग, एक हिन के चौथे भाग के कूटे हुए तेल से मिश्रित, एक भोज-चढ़ावे हेतु।

यह एक निरन्तर जला-चढ़ावा है, जो प्रभु के प्रति एक अग्नी से बनी एक मधुर-स्वादिष्टता हेतु बलि, विहित-नियुक्त कर दी गई थी।

और उसका पेय-चढ़ावा एक मेमने हेतु एक हिन का चौथा भाग होगा: पवित्र-स्थान में तुम उस तीक्ष्ण-अंगूर-रस को प्रभु के प्रति उंडलवा दोगे एक पेय-चढ़ावे हेतु।

और उस दूसरे मेमने को तुम संध्या के समय चढ़ाओगे: प्रातः के भोज-चढ़ावे समान, और उसके पेय-चढ़ावे समान, तुम उसे चढ़ादोगे, एक अग्नी से बनी आहुति, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्ट की। 

और सैबथ के दिन पर पहले वर्ष के दो निष्कलंक मेमने, और तेल से मिश्रित आटे का दो-दसवाँ भाग, एक भोज-चढ़ावे हेतु, और उसका पेय-चढ़ावा:

१० यह प्रत्येक सैबथ का जला-चढ़ावा है, उसके निरन्तर जले-चढ़ावे, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

११ और तुम अपने महीनो के आरम्भों में प्रभु के प्रति एक जला-चढ़ावा अर्पित करोगे; दो युवा साँड, और एक मेढ़ा, सात मेमने पहले वर्ष के निष्कलंक;

१२ और एक साँड के लिए एक भोज-चढ़ावे हेतु आटे का तीन-दसवाँ भाग तेल से मिश्रित; और एक मेढ़े के लिए, एक भोज-चढ़ावे हेतु आटे का दो-दसवाँ भाग तेल से मिश्रित;

१३ और एक मेमने हेतु एक अलग आटे का तेल से मिश्रित दसवाँ भाग एक भोज-चढ़ावे हेतु; प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता का एक जला-चढ़ावा, एक अग्नी से बनी आहुति।

१४ और उनके पेय-चढ़ावे होंगे: एक साँड के लिए अंगूर-रस का आधा हिन, और एक मेढ़े के लिए एक हिन का तीसरा भाग, और एक मेमेने के लिए के हिन का चौथा भाग: यह मासिक जला-चढ़ावा है वर्ष के प्रत्येक महीने के लिए।

१५ और बकरों में से एक हलवान प्रभु के प्रति एक पाप-चढ़ावे हेतु चढ़ाया जाएगा, उस निरन्तर जले-चढ़ावे, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त। 

१६ और पहले महीने के चौदहवें दिन में प्रभु का पार-करना है।

१७ और इस महीने के पंद्रहवें दिन भोज है: सात दिन बेख़मीरी रोटी खाई जाएगी।

१८ पहले दिन में एक पवित्र अधिवेशन होगा: तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे:

१९ परन्तु तुम प्रभु के प्रति एक जले-चढ़ावे हेतु एक अग्नी से बनी बलि चढ़ाओगे; दो युवा साँड, और एक मेढ़ा, और पहले वर्ष के सात मेमने: वह तुम्हारे प्रति निष्कलंक होंगे:

२० और उनका भोज-चढ़ावा तेल से मिश्रित आटा होगा: तीन-दसवाँ भाग तुम एक साँड के लिए चढ़ाओगे, और दो-दसवाँ भाग एक मेढ़े के लिए;

२१ एक अलग दसवाँ भाग तुम प्रत्येक मेमने के लिए चढ़ाओगे, उन सातों मेमनों के लिए ही:

२२ और एक बकरा पाप-चढ़ावे हेतु, तुम्हारे लिए एक परिहार बना देने के लिए।

२३ तुम इन्हें उस प्रातः के जले-चढ़ावे के अतिरिक्त चढ़ाओगे, जो एक निरन्तर जले-चढ़ावे हेतु है।

२४ इस रीति से तुम दिन-प्रति-दिन, उन सातों दिनों में चढ़ाओगे, अग्नी से बना उस बलि का भोजन, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु: वह उस जले-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त चढ़ाया जाएगा।

२५ और सातवें दिन तुम एक पवित्र-अधिवेशन रखोगे; तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे।

२६ प्रथम-फलों के दिवस में भी, जब तुम प्रभु के लिए एक नवीन भोज-चढ़ावा लाते हो, तुम्हारे सप्ताहों की बीत जाने के पश्चात, तुम एक पवित्र-अधिवेशन रखोगे; तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे।

२७ बल्कि तुम प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु उस जले-चढ़ावे को चढ़ा दोगे; दो युवा साँड, एक मेढ़ा, पहले वर्ष के सात मेमने;

२८ और तेल से मिश्रित आटे का उनका भोज-चढ़ावा, तीन-दसवें भाग एक साँड के लिए, दो-दसवें भाग एक मेढ़े के लिए,

२९ एक अलग दसवाँ भाग एक मेमने के लिए, उन सातों मेमनों के लिए ही:

३० और बकरों में से एक हलवान, तुम्हारे लिए परिहार बना देने हेतु।

३१ तुम इन्हें उस निरन्तर जले-चढ़ावे, और उसके भोज चढ़ावे, और उनके पेय-चढ़ावों के अतिरिक्त चढ़ाओगे, (वह तुम्हारे प्रति निष्कलंक होंगे)



उन्नतीसवाँ अध्याय।


और सातवें महीने में, महीने के पहले दिन पर, तुम एक पवित्र-अधिवेशन रखोगे; तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे: यह तुम्हारे प्रति एक चिंघाड़ों को चिंघाड़ने का दिवस है।

और तुम प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु एक जला-चढ़ावा चढ़ाओगे; एक युवा साँड, एक मेढ़ा, और पहले वर्ष के सात निष्कलंक मेमने:

और उनका भोज-चढ़ावा तेल से मिश्रित आटे का होगा, तीन-दसवें भाग एक साँड के लिए, और दो-दसवें भाग एक मेढ़े के लिए,

और एक दसवाँ भाग एक मेमने के लिए, उन सातों मेमनों के लिए ही:

और बकरों में से एक हलवान पाप-चढ़ावे हेतु, तुम्हारे लिए एक परिहार बना देने के लिए:

महीने के जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और दैनिक जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उनके पेय-चढ़ावों के अतिरिक्त, उनकी रीतियोंनुसार, प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु, अग्नी से बनी एक आहुति। 

और तुम इस सातवें महीने के दसवें दिन पर एक पवित्र-अधिवेशन रखोगे; और तुम अपनी आत्माओं को पीड़ित करोगे: तुम उस में कोई भी कार्य नहीं करोगे:

बल्कि तुम प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता हेतु, एक जला-चढ़ावा चढ़ा दोगे; एक युवा साँड, एक मेढ़ा, और पहले वर्ष में सात मेमने; यह तुम्हारे प्रति निष्कलंक होंगे:

और उनका भोज-चढ़ावा तेल से मिश्रित आटे का होगा, तीन-दसवें भाग एक साँड के लिए, और दो-दसवें भाग एक मेढ़े के लिए,

१० एक अलग दसवाँ भाग एक मेमने के लिए, उन सातों मेमनों के लिए ही:

११ और बकरों में से एक हलवान पाप-चढ़ावे हेतु; उस परिहार हेतु पाप-चढ़ावे के, और उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उनके पेय-चढ़ावों के अतिरिक्त।

१२ और सातवें महीने के पद्रहवें दिन तुम एक पवित्र-अधिवेशन रखोगे; तुम कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे, और तुम सात दिन प्रभु के प्रति एक भोज रखोगे:

१३ और तुम एक जला-चढ़ावा चढ़ाओगे, अग्नी से बना एक चढ़ावा प्रभु के प्रति एक मधुर स्वादिष्टता का; तेरह युवा साँड, दो मेढ़े, और चौदह मेमने पहले वर्ष के; यह निष्कलंक होंगे:

१४ और उनका भोज-चढ़ावा तेल से मिश्रित आटे का होगा, तीन-दसवें भाग उन तेरह सांडों में से प्रत्येक साँड के लिए, और दो-दसवें भाग उन दो मेढ़ों में से प्रत्येक मेढ़े के लिए,

१५ और एक अलग दसवाँ भाग प्रत्येक मेमने के लिए, उन चौदह मेमनों में से:

१६ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

१७ और दूसरे दिन तुम बारह युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

१८ और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

१९ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

२० और तीसरे दिन तुम ग्यारह युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

२१ और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

२२ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

२३ और चौथे दिन तुम दस युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

२४ और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

२५ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

२६ और पाँचवें दिन तुम नौ युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

२७ और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

२८ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

२९ और छटे दिन तुम आठ युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

३० और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

३१ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

३२ और सातवें दिन तुम सात युवा साँड, दो मेढ़े, चौदह निष्कलंक मेमने पहले वर्ष के:

३३ और उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उन सांडों के लिए, उन मेढ़ों के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

३४ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

३५ और आठवें दिन तुम एक गम्भीर सभा का आयोजन करोगे: तुम उस में कोई भी श्रम-कार्य नहीं करोगे:

३६ परन्तु तुम प्रभु के प्रति एक जले-चढ़ावे हेतु एक अग्नी से बनी बलि, एक मधुर स्वादिष्टता की, चढ़ाओगे; एक साँड, एक मेढ़ा, पहले वर्ष के निष्कलंक सात मेमने:

३७ उनका भोज-चढ़ावा और उनके पेय-चढ़ावे उस सांड के लिए, उस मेढ़े के लिए, और उन मेमनों के लिए, उनकी संख्यानुसार, उनकी रीतिनुसार होगा:

३८ और बकरों में से एक हलवान एक पाप-चढ़ावे हेतु; उस निरन्तर-जले-चढ़ावे के, और उसके भोज-चढ़ावे के, और उसके पेय-चढ़ावे के अतिरिक्त।

३९ यह कार्य तुम प्रभु के प्रति अपने स्थित भोजों में करोगे, तुम्हारे प्रणों, और तुम्हारे स्वेच्छा-चढ़ावों के अतिरिक्त, तुम्हारे जले-चढ़ावों के लिए, और तुम्हारे भोज-चढ़ावों के लिए, और तुम्हारे पेय-चढ़ावों के लिए, और तुम्हारे शान्ति-चढ़ावों के लिए।

४० और मूसा ने इस्राएल की सन्तानों को बता दिया उस सभी के अनुसार जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 




तीसवाँ अध्याय।


और मूसा इस्राएल की सन्तानों के समबन्ध में प्रजातियों के मुखियों से बोला, कहता हुआ, यह है वह बात जो जिसका आदेश प्रभु ने दे दिया है। 

यदि कोई पुरुष प्रभु के प्रति एक प्रण का प्रण लेता है, या अपनी आत्मा को किसी बंधन में बाँध देने की शपथ का वचन देता है; वह अपने शब्द को नहीं तोड़ेगा, वह उस सभी के अनुसार करेगा जो उसके मूँह में से प्रवृत होता है।

यदि कोई स्त्री भी प्रभु के प्रति एक प्रण का प्रण लेती है, और अपनी आत्मा को एक बंधन द्वारा बाँध देती है, अपने यौवन में अपने पिता के घर में होती हुई;

और उसका पिता उसके प्रण को सुन लेता है, और उसके बन्धन को जिस से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया है, और उसका पिता उसके प्रति शान्त रहे: तब उसके समस्त प्रण स्थापित रहेंगे, और प्रत्येक बन्धन जिस से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया है स्थापित रहेगा।

परन्तु यदि उसका पिता उस दिन में जब उसने सुना था उसे अमान्य ठहरा देता है; तो उसके कोई भी प्रण, या उसके बन्धन जिन से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया है स्थापित नहीं रहेंगे: और प्रभु उसे स्त्री को क्षमा कर देंगे, क्योंकि उसके पिता ने उसे अमान्य ठहरा दिया है।

और यदि उसके पास कोई पति हुआ होता, जब उसने प्रण लिया था, या कुछ भी अपने होंटों से बोल दिया था, जिस से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया;

और उसके पति ने उसे सुन लिया, और वह उसके प्रति शान्त रहा उस दिन में जब उसने उसे सुना: तब उस स्त्री के प्रण, और उसके बन्धन जिन से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया है, स्थापित रहेंगे।

परन्तु यदि उसके पति ने उस स्त्री को अमान्य ठहरा दिया था उस दिन में जब उसने उस प्रण को सुना था; तब वह उसके प्रण को जिसका उसने प्रण लिया था, और वह जो उसने अपने होंटों से बोला था, जिस से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया; प्रभावहीन बना देगा: और प्रभु उसे क्षमा कर देंगे।

परन्तु किसी विधवा का, और उस विवाह-विच्छेदित स्त्री का प्रत्येक प्रण, जिस से उन्होंने अपनी आत्माओं को बाँध दिया है, उसके प्रति स्थापित रहेगा।

१० और यदि उसने अपने पति के घर में प्रण लिया था, या अपनी आत्मा को किसी बन्धन से किसी शपथ से बाँध दिया था;

११ और उसके पति ने उसे सुन लिया था, और उसके प्रति शान्त रहा था, और उसे अमान्य नहीं ठहराया था: तब उसके समस्त प्रण स्थापित रहेंगे, और प्रत्येक बन्धन जिस से उसने अपनी आत्मा को बाँध दिया था स्थापित रहेगा।

१२ परन्तु यदि उसके पति ने उन्हें पूर्णतः अमान्य ठहरा दिया था उस दिन जब उसने उन्हें सुना था; तब जो कुछ भी उसके होंटों में उसके प्रणों के समबन्ध में, या उसकी आत्मा के बन्धन के समबन्ध में प्रवृत्त हुआ था, अमान्य ठहरेगा: उसके पति ने उन्हें रद्द कर दिया है; और प्रभु उसे क्षमा कर देंगे।

१३ प्रत्येक प्रण को, और आत्मा को पीड़ित करने हेतु बन्धन की शपथ को, उसका पति स्थापित कर सकता है, या उसका पति उसे रद्द कर सकता है।

१४ परन्तु यदि उसका पति उसके प्रति दिन-प्रति-दिन पूर्णतः शान्त रहे; तब वह उसके सभी प्रणों को, या उसके सभी बन्धनों को, जो उस पर हैं, स्थापित कर देता है: वह उन्हें समर्थन प्रदान करता है, क्योंकि उसने उसके प्रति उस दिन में जब उसने उन्हें सुना था, शान्ति बनाई रखी थी।

१५ परन्तु यदि वह उन्हें किसी भी रूप से उन्हें सुन लेने के पश्चात रद्द करता है; तब वह पति उस पत्नी का अधर्म-पाप ढोएगा।

१६ यह हैं वह अध्यादेश, जिनका प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था, एक पुरुष और उसकी पत्नी के बीच, पिता और उसकी बेटी के बीच, अपने यौवन में ही अपने पिता के घर में होती हुई।


इकत्तीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,

इस्राएल की सन्तानों का मिद्यान-वंशजों से प्रतिषोध ले लो: तत्-पश्चात तुम अपने लोगों के साथ एकत्रित कर दिए जाओगे।

और मूसा लोगों से बोला, कहता हुआ, युद्ध हेतु अपने में से कुछों को सशस्त्रित कर लो, और उन्हें मिद्यान-वंशजों के विरुद्ध जाने दो, और प्रभु का मिद्यान से प्रतिषोध ले लो।

इस्राएल की समस्त प्रजातियों के सर्वत्र में से, प्रत्येक प्रजाति में से एक हज़ार को तुम युद्ध हेतु भेजोगे।

तो इस्राएल के हज़ारों में से, प्रत्येक प्रजाति में से एक हज़ार प्रदान कर दिए गए थे, बारह हज़ार युद्ध हेतु सशस्त्रित।

और मूसा ने उन्हें युद्ध हेतु भेज दिया, प्रत्येक प्रजाति में से एक हज़ार को, उन्हें, और पुरोहित एलाज़र के बेटे फिनहास को, युद्ध हेतु, पवित्र यंत्रों के साथ, और उसके हाथ में चिंघाड़ों को चिंघाड़ने हेतु।

और उन्होंने मिद्यान-वंशजों के विरुद्ध युद्ध कियम जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था; और उन्होंने समस्त नरों को मार डाला।

और उन्होंने मिद्यान के राजाओं को मार डाला, उनके अतिरिक्त जिन्हें मार डाल दिया गया था; एवी, और रकेम, और ज़र, और हर, और रेबा, मिद्यान के पाँच राजा: बओर के बेटे बिलाम को भी उन्होंने तलवार से मार डाला।

और इस्राएल की सन्तानों ने मिद्यान की सभी स्त्रियों को बन्दी ले लिया, और उनके छोटे-बच्चों को, और उनके सभी मवेशी, और उनके सभी झुण्डों को लूट लिया, और उनकी समस्त सम्पत्ती।

१० और उन्होंने उनके सभी नगरों को जिन में वह बसते थे, और उनके सभी अच्छे किलों को अग्नी से जला डाला।

११ और उन्होंने सभी कुछ लूट लिया, और सभी लूट के शिकार को, और मनुष्यों और जानवरों की समस्त लूट-पाट भी।

१२ और वह उन बंदियों को, और उस लूट के शिकार को, और लूट-पाट के माल को, मूसा, और पुरोहित एलाज़र, और इस्राएल की सन्तानों की सभा के पास, उन मोआब के मैदानों में, जो यरीहो के निकट यर्दन के साथ हैं, उस शिविर में ले आए।

१३ और मूसा, और पुरोहित एलाज़र, और सभा के सभी अध्यक्ष उनसे मिलने शिविर के बाहर गए।

१४ और मूसा सेना के अफ़सरों के साथ, हज़ारों पर उन कप्तानों के साथ, और सौ-सौ पर उन कप्तानों के साथ आक्रोशित था, जो संग्राम से आए थे।

१५ और मूसा ने उनसे कहा, क्या तुमने सभी स्त्रियों को जीवित बचा रखा है?

१६ देखो, इन्हीं ने बिलाम के परामर्श द्वारा, पओर के समबन्ध में, इस्राएल की सन्तानों से प्रभु के विरुद्ध उल्लंघन करवाया था, और प्रभु की सभा के बीच एक विपत्ती पड़ी थी।

१७ इसलिए अब प्रत्येक छोटे-बच्चों के बीच प्रत्येक नर को मार डालो, और उस प्रत्येक स्त्री को मार डालो जो आदमी से परिचय रख चुकी है उसके साथ लेट जाने के द्वारा।

१८ परन्तु उन सभी नारी-बच्चियों को, अपने स्वयं के लिए जीवित रख लो, जिन्होंने किसी भी आदमी से परिचय नहीं रखा है उसके साथ लेट जाने से।

१९ और तुम शिविर के बाहर ही सात दिन वास करो: जिस किसी ने भी किसी भी व्यक्ति को मार दिया है, और जिस किसी ने भी किसी भी मारे हुए को छुआ है, दोनो स्वयं को और अपने बन्दियों को तीसरे दिन शुद्ध कर लो, और सातवें दिन पर।  

२० और अपने समस्त वस्त्रों को, और उस सभी को जो चमड़ियों से बने हैं, और सभी बकरों की खाल की कारीगरी को, और लकड़ी से बनी सभी वस्तुओं का शुद्धीकरण कर लो।

२१ और पुरोहित एलाज़र ने उन योद्धाओं से कहा, जो संग्राम पर गए थे, यह उस नियम का अध्यादेश है जिसका आदेश प्रभु ने मूसा को दिया था;  

२२ केवल वह सोना, और चाँदी, पीतल, लोहा, रांगा, और सीसा, 

२३ वह प्रत्येक वस्तु जो अग्नी में बनी रहती है, तुम उसे अग्नी में से पार ले जाओगे, और वह स्वच्छ हो जाएगी: तथापि उसका शुद्धीकरण, पृथककरण के जल के साथ होगा: और जो कुछ भी अग्नी में बना नहीं रहता है, तुम उसे जल में से पार ले जाओगे।

२४ और तुम अपने कपड़ों को सातवें दिन धो दोगे, और तुम स्वच्छ बन जाओगे, और तत्-पश्चात तुम शिविर में जाओगे।

२५ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,  

२६ तुम, और पुरोहित एलाज़र, और सभा के प्रमुख पित्र: उस लूट का जोड़ कर लो जिसे पकड़ लिया गया था, दोनो मनुष्यों का और जानवर का:

२७ और लूट को दो भागों में विभाजित कर दो; उनके बीच जिन्होंने स्वयं पर युद्ध ले लिया, जो बाहर संग्राम पर गए, और समस्त सभा के बीच:

२८ और प्रभु के प्रति उन योद्धाओं पर एक कर की वसूली डाल दो जो संग्राम हेतु बाहर निकले थे: पाँच सौ में से एक आत्मा, दोनो मनुष्यों में से, और गऊओं में से, और गधों में से, और भेड़ों में से:

२९ उसे उनके आधे भाग में से ले लो, और उसे पुरोहित एलाज़र को प्रदान कर दो, प्रभु के एक उठाए-चढ़ावे हेतु।

३० और इस्राएल की सन्तानों के आधे भाग में से, तुम एक भाग पचास में से ले लोगे, मनुष्यों में से, गऊओं में से, गधों में से, और पशु-समूहों में से, सभी प्रकार के जानवरों में से, और उन्हें लेवी-वंशजों को प्रदान कर दोगे, जो प्रभु के तम्बू का प्रभार रखते हैं।

३१ और मूसा और पुरोहित एलाज़र ने वैसा कर दिया जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

३२ और वह लूट, उस लूट-पाट का शेष भाग जिसे योद्धाओं ने पकड़ा था, छह सौ पिछत्तर हज़ार भेड़ थे, 

३३ और इकसठ हज़ार गधे,

३५ और कुल मिला कर बत्तीस हज़ार मनुष्य, वह स्त्रियाँ जिन्होंने पुरुष के साथ लेट जाने से परिचय नहीं किया था।

३६ और वह अर्ध-भाग, जो उनका भाग था जो युद्ध करने निकले थे, संख्या में तीन सौ सैंतीस हज़ार पाँच सौ भेड़ था:

३७ और भेड़ों में से प्रभु का कर छह सौ पिछत्तर था। 

३८ और वह गऊएँ छत्तीस हज़ार थीं; जिन में से प्रभु का कर बहत्तर था।

३९ और तीस हज़ार पाँच सौ गधे थे; जिन में से प्रभु का कर इकसठ था।

४० और वह मनुष्य सोलह हज़ार थे; जिन में से प्रभु का कर बत्तीस था।

४१ और मूसा ने वह कर, जो प्रभु का उठाया-चढ़ावा था, पुरोहित एलाज़र को प्रदान कर दिया, जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।

४२ और इस्राएल की सन्तानों का वह आधा-भाग, जिसे मूसा ने उन योद्धा पुरुषों से विभाजित कर दिया था,

४३ (अब वह अर्ध-भाग जो सभा से सम्बन्धित था तीन सौ सैंतीस हज़ार पाँच सौ भेड़ था,

४४ और छत्तीस हज़ार गऊएँ,

४५ और तीस हज़ार पाँच सौ गधे,

४६ और सोलह हज़ार व्यक्ति;)

४७ इस्राएल की सन्तानों के आधे-भाग में से ही, मूसा ने पचास का एक भाग ले लिया, दोनो मनुष्य में से और जानवर में से, और उन्हें लेवी-वंशजों को प्रदान कर दिया जो प्रभु के तम्बू का प्रभार रखते थे; जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था। 

४८ और वह अफ़सर जो सेना के हज़ारों पर थे, हज़ारों के कप्तान, और सौ-सौ के कप्तान, मूसा के निकट गए: 

४९ और उन्होंने मूसा से कहा, आपके नौकरों ने हमारे प्रभार के आधीन उन योद्धाओं का जोड़ ले लिया है, और हम में से एक भी पुरुष लापता नहीं है।

५० इसलिए प्रभु के समक्ष हमारी आत्माओं के लिए एक परिहार बना देने हेतु, हम प्रभु के लिए एक आहुति लाए हैं, जो प्रत्येक पुरुष ने ले लिया था, सोने के गहनों में से, कड़ियाँ, और कंगने, अँगूठियाँ, बालियाँ, और अलंकरण।

५१ और मूसा और पुरोहित एलाज़र ने उन से सोना ले लिया, समस्त हस्तशिल्पकारी के गहने ही। 

५२ और उस चढ़ावे का वह समस्त सोना जिसे उन्होंने प्रभु के प्रति चढ़ा दिया था, हज़ारों के कप्तानों का, और सौ-सौ के कप्तानों का, सोलह हज़ार सात सौ पचास शेक्ल था।

५३ (क्योंकि उन योद्धाओं ने लूट-पाट प्राप्त कर ली थे, प्रत्येक पुरुष ने स्वयं के लिए।)

५४ और मूसा और पुरोहित एलाज़र ने उन हज़ारों से और सौ-सौ के कप्तानों से सोना ले लिया, और वह उसे सभा के तम्बू में ले आए, प्रभु के समक्ष इस्राएल की सन्तानों के लिए एक स्मारक हेतु। 



बत्तीसवाँ अध्याय।


अब रूबेन की सन्तानों और गाद की सन्तानों के पास मवेशियों का एक बहुत बड़ा जनौघ था: और जब उन्होंने यज़र की भूमी को, और गिलद की भूमी को देखा, कि, देखो, वह स्थान तो मवेशियों के लिए था;

रूबेन की सन्तानें और गाद की सन्तानें आईं और मूसा और पुरोहित एलाज़र, और सभा के अध्यक्षों से बोलीं, कहती हुई,

अटरोथ, और दिबोन, और यज़र, और निम्रा, और हेश्बोन, और एलअले, और शेबम, और नेबो, और बेओन,

वही प्रदेश ही जिसे प्रभु ने इस्राएल की सभा के समक्ष पीट दिया था, मवेशियों के लिए एक भूमी है, और आपके नौकरों के पास मवेशी हैं:

इस कारण वश, उन्होंने कहा, यदि हमने आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है, तो यह भूमी एक अधिकार हेतु आपके सेवकों को प्रदान कर दी जाए, और हमें यर्दन पार ले जाएँ।

और मूसा ने रूबेन की सन्तानों और गाद की सन्तानों से कहा, क्या तुम्हारे भाई-जन युद्ध करने जाएँगे, और तुम यहीं बैठे रहोगे?

और किस कारण तुम इस्राएल की सन्तानों के हृदय को उस पर उस भूमी में जाने से हतोत्साहित कर रहे हो, जिसे प्रभु ने उन्हें प्रदान कर दिया है?

ऐसा ही तुम्हारे पित्रों ने किया था जब मैंने उन्हें कादेशबर्नेय से भेजा था भूमी को देखने हेतु।

क्योंकि जब उन्होंने एश्कोल की घाटी में ऊपर जाकर वह भूमी देखी, उन्होंने इस्राएल की सन्तानों का हृदय हतोत्साहित कर दिया था, कि वह उस भूमी में जाएँ जिसे प्रभु ने उन्हें प्रदान कर दिया था।

१० और प्रभु का क्रोध उसी समय में सुलग उठा था, और उन्होंने शपथ ली, कहते हुए,

११ अवश्य ही उन में से कोई भी मानव जो मिस्र में से ऊपर बाहर आए थे, बीस वर्ष की आयु से लेकर और अधिक, उस भूमी को नहीं देखेंगे जिसकी शपथ मैंने अभ्राहम को, इसहाक को, और यकूब को दी थी; क्योंकि वह मेरे पीछे-पीछे पूर्ण रूप से नहीं चले हैं: 

१२ सिवाय उस केनिज़ी-वंशज यपुन्ने के बेटे कालेब के, और नून के बेटे यहोशुअ के: क्योंकि वह प्रभु के पीछे-पीछे पूर्ण रूप से चले हैं।

१३ और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध सुलग उठा था, और उन्होंने उन्हें जँगली-क्षेत्र में चालीस वर्ष भटकवा दिया, जब तक कि वह समस्त पीढ़ी जिसने प्रभु की दृष्टि में बुराई की थी, समाप्त हो गई थी। 

१४ और, देखो, तुम अपने पित्रों के स्थान में ऊपर उठ गए हो, पापी मनुष्यों की एक बहुतायत, प्रभु के इस्राएल के प्रति क्रुद्ध क्रोध को बढ़ा देने हेतु ही।

१५ क्योंकि यदि तुम उनका अनुसरण करने से परे मुड़ जाओगे, वह पुनः उन्हें जँगली-क्षेत्र में छोड़ देंगे; और तुम इन समस्त लोगों को नष्ट कर दोगे।

१६ और वह उसके निकट गए, और कहा, हम अपने मवेशियों के लिए यहाँ भेड़-शालाएँ, और अपने छोटे-नन्हों के लिए नगरों को बनाएँगे:

१७ परन्तु हम स्वयं इस्राएल की सन्तानों के समक्ष सशस्त्रित-तैयार जाएँगे, जब तक हम उन्हें उनके स्थान में ले आते हैं: और हमारे छोटे-नन्हें उन क़िलेबन्द-नगरों में बसेंगे भूमी के निवासियों के कारण 

१८ हम अपने घरों में तब तक वापस नहीं आएँगे, जब तक इस्राएल की सन्तानों का प्रत्येक पुरुष अपनी विरासत को विरासत में नहीं ले लेता है।

१९ क्योंकि हम उनके साथ यर्दन के उस पार, या आगे, विरासत नहीं लेंगे; क्योंकि हमारी विरासत यर्दन के इस पार पूर्व की ओर पड़ गई है।

२० और मूसा ने उनसे कहा, यदि तुम यह कार्य करोगे, यदि तुम सशस्त्रित हो कर प्रभु के सम्मुख युद्ध करने जाओगे, 

२१ और तुम सभी सशस्त्रित, प्रभु के सम्मुख, यर्दन के उस पार जाओगे, जब तक उन्होंने अपने समस्त शत्रुओं को अपने सामने से खदेड़ दिया है,

२२ और वह भूमी प्रभु के सम्मुख आधीन हो: तब तत्-पश्चात तुम वापस लौट जाओगे, और प्रभु के सम्मुख, और इस्राएल के सम्मुख निर्दोष होगे; और यह भूमि प्रभु के सम्मुख तुम्हारा अधिकार होगी।

२३ परन्तु यदि तुम ऐसा नहीं करोगे, देख लो, तुमने प्रभु के विरुद्ध पाप कर दिया है: और तुम अवश्य जान लो कि तुम्हारा पाप ही तुम्हें ढूँढ निकालेगा।

२४ निर्माण कर लो अपने छोटे-नन्हों के लिए नगरों का, और अपने भेड़ों के लिए भेड़-शालाओं का; और वह कर दो जो तुम्हारे मूँह से बाहर प्रवृत्त हुआ है।

२५ और गाद की सन्तानें और रूबेन की सन्तानें मूसा से बोलीं, कहती हुईं, आपके सेवक वैसा कर देंगे जैसा मेरे प्रभु आदेश दे रहे हैं।

२६ हमारे छोटे-नन्हें, हमारी पत्नियाँ, हमारे झुंड, और हमारे समस्त मवेशी, गिलद के नगरों में होंगे:

२७ परन्तु आपके सेवक पार जाएँगे, प्रत्येक पुरुष युद्ध के लिए सशस्त्रित, प्रभु के सम्मुख संग्राम हेतु, जैसे मेरे प्रभु कहते हैं।

२८ तो उनके समबन्ध में मूसा ने पुरोहित एलाज़र को, और नून के बेटे यहोशुअ को, और इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों के प्रमुख पिताओं को आदेश दिया:

२९ और मूसा ने उनसे कहा, यदि गाद की सन्तानें और रूबेन की सन्तानें तुम्हारे साथ यर्दन को पार कर लेती हैं, प्रत्येक पुरुष संग्राम हेतु सशस्त्रित, प्रभु के सम्मुख, और वह भूमी तुम्हारे सम्मुख आधीन हो जाएगी; तब तुम उन्हें गिलद की भूमी एक अधिकार हेतु प्रदान कर दोगे:

३० परन्तु यदि यह सशस्त्रित तुम्हारे साथ पार नहीं जाएँगे, यह अपने अधिकार तुम्हारे बीच कनान की भूमी में रखेंगे।

३१ और गाद की सन्तानों ने और रूबेन की सन्तानों ने उत्तर दिया, कहते हुए, जैसा प्रभु ने आपके सेवकों को कह दिया है, वैसा ही हम कर देंगे।

३२ हम प्रभु के सम्मुख सशस्त्रित, कनान की भूमी में पार चले जाएँगे, ताकि यर्दन के इस पर हमारी विरासत का अधिकार हमारे बन जाए।

३३ और मूसा ने उन्हें, गाद की सन्तानों को, और रूबेन की सन्तानों को, और युसुफ के बेटे मनश्शे की प्रजाति के अर्ध को ही, अमोरियों के राजा सिहोन का राज्य, और बशान के राजा ओग का राज्य, वह भूमी, उनकी सीमाओं में उनके नगर, प्रदेश के ही नगर चारों ओर, प्रदान कर दिए।

३४ और गाद की सन्तानों ने दिबोन, और अटरोथ, और अरोर, का निर्माण किया,

३५ और अटरोथ-शोफन, और यज़र, और यगबहा,

३६ और बेथनिम्रा, और बेथहरन, क़िलेबन्द नगर: और भेड़ों के लिए शालाएँ।

३७ और रूबेन की सन्तानों ने हेश्बोन, और एलअले, और किरयथाइम,

३८ और नेबो, और बअलमोन, (इनके नाम परिवर्तित कर दिए गए,) और शिबमा का निर्माण किया: और उन नगरों को अन्य नाम दे दिए जिनका उन्होंने निर्माण किया।

३९ और मनश्शे के बेटे मेकर की सन्तानें गिलद चली गईं, और उसे ले लिया, और उस अमोरी को निष्कासित कर दिया जो उस में था।

४० और मूसा ने गिलद को मनश्शे के बेटे मेकर को दे दिया; और वह उस में वहीं बस गया।

४१ और मनश्शे का बेटा याएर गया और उसकी छोटी नगरीयों को ले लिया, और उन्हें हवोथयाएर पुकारा।

४२ और नोबह गया और कनथ को ले लिया, और उसके गाँवों को, और उसे नोबह पुकारा, अपने नाम से ही।



तेंतीसवाँ अध्याय।


यह इस्राएल की सन्तानों की यात्राएँ हैं, जो मिस्र की भूमी में से मूसा और हारुन के हाथ तले बाहर अग्रसर हुए अपनी सेनाओं के साथ।

और प्रभु के अदेश से मूसा ने उनके प्रस्थानों को लिख लिया उनकी यात्राओंनुसार: और यह उनकी यात्राएँ हैं उनके प्रस्थानोंनुसार।

और उन्होंने पहले महीने में रामसेस से प्रस्थान किया, पहले माह के पंद्रहवें दिन में; पार-करने के अगले दिन इस्राएल की सन्तानें समस्त मिस्रवासियों की दृष्टि में एक ऊँचे हाथ से निकल चले। 

क्योंकि उन मिस्रवासियों ने अपने समस्त प्रथम-जन्मों को दफ़ना दिया, जिन पर प्रभु ने उनके बीच वार कर दिया था: उनके ईश्वरों पर भी प्रभु ने न्याय-निर्धारण कर दिया। 

और इस्राएल की सन्तानें रामसेस से हट चलीं, और सुक्कोत में डेरा डाल दिया।

और उन्होंने सुक्कोत से प्रस्थान किया, और एताम में डेरा डाला, जो जँगली-क्षेत्र के सीमांत में है।

और वह एताम से हट चले, और पुनः पिहाहीरोत की ओर मुड़ चले, जो बअलसफोन के समक्ष है: और उन्होंने मिगदोल के सामने डेरा डाला।

और उन्होंने पिहाहीरोत के सामने से प्रस्थान किया, और समुद्र के मध्य में से गुज़र कर जँगली-क्षेत्र में चले गए, और वह तीन दिनो की यात्रा पर एथम के जँगली क्षेत्र में गए, और मारा में डेरा डाला।

और वह मारा से हट चले, और एलीम पहुँचे: और एलीम में पाने के बारह कूएँ थे, और सत्तर खजूर के वृक्ष; और उन्होंने वहाँ डेरा डाल दिया।

१० और वह एलीम से हर चले, और लाल-समुद्र के साथ पड़ाव डाला।

११ और वह लाल-समुद्र से हट चले, और ज़िन के जँगली-क्षेत्र में पड़ाव डाला।

१२ और उन्होंने ज़िन के जँगली-क्षेत्र में से बाहर अपनी यात्रा कीम और दोफकह में पड़ाव डाला।

१३ और उन्होंने दोफकह से प्रस्थान किया, और अलुश में पड़ाव डाला।

१४ और वह अलुश से हट चले, और रफीदीम में पड़ाव डाला, जहाँ लोगों के लिए कोई पानी था पीने के लिए।

१५ और उन्होंने रफीदीम से प्रस्थान किया, और सीनय के जँगली-क्षेत्र में डेरा डाला।

१६ और वह सीनय के निर्जन-क्षेत्र से हट चले, और किब्रोतहत्तावा में डेरा डाला।

१७ और उन्होंने किब्रोतहत्तावा से प्रस्थान किया, और हसेरोत में पड़ाव डाला। 

१८ और उन्होंने हसेरोत से प्रस्थान किया, और रीथमा में डेरा डाला।

१९ और उन्होंने रीथमा से प्रस्थान किया, और रिम्मनपरज़ में डेरा डाला।

२० और उन्होंने रिम्मनपरज़ से प्रस्थान किया, और लिब्ना में डेरा डाला। 

२१ और उन्होंने लिब्ना से हट चले, और रिस्सा में डेरा डाला।

२२ और उन्होंने रिस्सा से यात्रा की, और कहलथा में डेरा डाला।

२३ और वह कहलथा से गए, और शेफर के पहाड़ में डेरा डाला।

२४ और वह शेफर के पहाड़ से हट चले, और हरदा में पड़ाव डाला।

२५ और वह हरदा से हट चले, और मखलोथ में डेरा डाला।

२६ और वह मखलोथ से हट चले, और तहथ में पड़ाव डाला।

२७ और उन्होंने तहथ से प्रस्थान किया, और तराह में डेरा डाला।

२८ और उन्होंने तराह से परस्थान किया, और मिथका में डेरा डाला।

२९ और वह मिथका से चले गए, और हशमोना में डेरा डाला,

३० और उन्होंने हशमोना से प्रस्थान किया, और मज़रोथ में पड़ाव डाला।

३१ और उन्होंने मज़रोथ से प्रस्थान किया, और बनयाकन में डेरा डाला।

३२ और वह बनयाकन से हट चले, और होरहगिदगद में पड़ाव डाला। 

३३ और वह होरहगिदगद से चले गए, और यतबथा में डेरा डाला।

३४ और वह यतबथा से हट चले, और एब्रोना में पड़ाव डाला। 

३५ और उन्होंने एब्रोना से प्रस्थान किया, और एज्यौंगबर में पड़ाव डाला।

३६ और वह एज्यौंगबर से हट चले, और ज़िन के जँगली-क्षेत्र में डेरा डाला, जो कादेश है।

३७ और वह कादेश से हट चले, और होर के पहाड़ में डेरा डाला, एदोम की भूमी के सीमान्त में।

३८ और पुरोहित हारुन प्रभु के आदेश पर होर के पहाड़ में ऊपर चला गया, और वहीं मर गया, इस्राएल की सन्तानों के मिस्र की भूमी में से बाहर निकल आने के पश्चात, चालीसवें साल के पाँचवें महीने के पहले दिन में।

३९ और हारुन एक सौ तेईस वर्ष की आयु का था जब वह होर के पहाड़ में मर गया था।

४० और उस कनानवासी राजा अरद ने जो कनान की भूमी में दक्षिण में बसता था, इस्राएल की सन्तानों के आगमन के विषय में सुना।

४१ और उन्होंने होर के पहाड़ से प्रस्थान किया, और ज़लमोना में डेरा डाला।

४२ और उन्होंने ज़लमोना से प्रस्थान किया, और पुनोन में डेरा डाला।

४३ और उन्होंने पुनोन से प्रस्थान किया, और ओबोत में डेरा डाला।

४४ और उन्होंने ओबोत से प्रस्थान किया, और ईयअबरिम में डेरा डाला, मोआब की सीमा में।

४५ और उन्होंने ईयिम से प्रस्थान किया, और दिबोनगद में डेरा डाला।

४६ और वह दिबोनगद से हट चले, और अल्मोनदिबलथाइम में पड़ाव डाला।

४७ और वह अल्मोनदिबलथाइम से हट चले, और अबरिम के पर्वतों में डेरा डाला, नेबो के सम्मुख।

४८ और उन्होंने अबरिम के पर्वतों से प्रस्थान किया, और यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में डेरा डाला, यरीहो के निकट।

४९ और उन्होंने यर्दन के साथ ही डेरा डाला, बेतयशिमोत से लेकर एबलशित्तम तक भी मोआब के मैदानों में।

५० और प्रभु यरीहो के निकट यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में मूसा से बोले, कहते हुए,

५१ इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम यर्दन को पार कर चुके होगे कनान की भूमी में;

५२ तब तुम अपने सम्मुख उस भूमी के समस्त निवासियों को बाहर खदेड़ दोगे, और उनके समस्त काल्पनिक-चित्रों को नष्ट कर दोगे, और उनकी समस्त ढली हुई प्रतिमाओं को नष्ट कर दोगे, और उनके समस्त उच्च-स्थानों का विध्वंस कर दोगे:

५३ और तुम भूमी के निवासियों को बाहर निकाल दोगे, और उस में बस जाओगे: क्योंकि मैंने तुम्हें वह भूमी प्रदान कर दी है उस पर अधिकार जमा लेने के लिए।

५४ और तुम उस भूमी का विभाजन अपने परिवारों के बीच एक विरासत हेतु पर्चियाँ डाल कर करोगे: और जो अधिक हैं तुम अधिक विरासत दोगे, और जो कम हैं तुम कम विरासत दोगे: प्रत्येक व्यक्ति की विरासत उस स्थान में होगी जहाँ उसकी पर्ची गिरती है; अपने पित्रों की प्रजातियोंनुसार तुम विरासत लोगे।  

५५ परन्तु यदि तुम भूमी के निवासियों को अपने समक्ष नहीं खदेड़ोगे; तब यह होने को आएगा, कि वह जिन्हें तुम रह जाने दोगे, तुम्हारी आँखों में कँटीली-नोकें बन जाएँगे, और तुम्हारे छाती के पाशर्वों में काँटे, और वह तुम्हें उसी भूमी में व्यग्रित करेंगे जिस में तुम बसते हो।

५६ इसके अतिरिक्त यह होने को आएगा, कि मैं तुम्हारे साथ वही कर दूँगा, जो मैंने उनके साथ करने हेतु सोचा था।



चौंतीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,  

इस्राएल की सन्तानों को आदेश दो, और उनसे कह दो, जब तुम कनान की भूमी में जाते हो; (यही है वह भूमी जो तुम्हारे पास एक विरासत हेतु गिर पड़ेगी, कनान की ही भूमी उसकी सीमाओं के साथ:)

तब तुम्हारा दक्षिणी कोना होगा ज़िन के जँगली-क्षेत्र से एदोम की सीमा के साथ-साथ, और तुम्हारी दक्षिणी सीमा पूर्व की ओर नमक समुद्र की सीमा का सीमान्त होगा:

और तुम्हारी सीमा अक्रबिम की चढ़ाई की ओर दक्षिण से मुड़ेगी, और ज़िन तक चलती जाएगी: और वहाँ से आगे जाती हुई वह दक्षिण से कादेशबर्नेय तक होगी, और वह हज़रअदर तक चलती चली जाएगी, और अज़मोन तक पहुँचेगी:

और वह सीमा एक घेरा लेगी अज़मोन से लेकर मिस्र की नदी तक, और उसके बाहर निकलते हुए क्षेत्र समुद्र की ओर होंगे।

और पश्चिमि सीमा हेतु, तुम्हारे पास वह महा-समुद्र ही एक सीमा के लिए होगा: और यही तुम्हारी पश्चिमि सीमा-रेखा होगी।

और यह तुम्हारी उत्तरी सीमा होगी: उस महा-समुद्र से लेकर तुम अपने लिए होर-पहाड़ तक रेखा खींचोगे:

होर-पहाड़ से तुम अपनी सीमा को हमात की प्रविष्टि तक खींचोगे; और सीमा आगे निकलती हुई ज़दद तक जाएगी:

और वह सीमा ज़िफ़्रों तक जाएगी, और वह आगे निकलती हुई हज़रएनन तक जाएगी: यह तुम्हारी उत्तरी सीमा-रेखा होगी।

१० और तुम अपनी पूर्वी सीमा को हज़रएनन से लेकर शफम तक खींचोगे:

११ और वह सीमा शफम से लेकर नीचे रिब्ला तक जाएगी, एइन के पूर्व की ओर; और वह सीमा नीचे जाएगी, और वह किनरथ के समुद्र के पाशर्व तक पहुँचेगी पूर्व की ओर:

१२ और वह सीमा नीचे यर्दन तक जाएगी,  और वह आगे निकलती हुई नमक-समुद्र तक जाएगी: यह तुम्हारी भूमी होगी उसकी सीमाओं के साथ चारों-ओर।

१३ और मूसा ने इस्राएल की सन्तानों को आदेश दिया, कहते हुए, यही है वह भूमी जिसे तुम पर्चियाँ डाल कर विरासत में लोगे, जिसे प्रभु ने उन नौ प्रजातियों, और उस आधी प्रजाति को दे देने का आदेश दिया था:

१४ क्योंकि रूबेन की सन्तानों की प्रजाति ने उनके पित्रों के घरानेनुसार, और गाद की सन्तानों की प्रजाति ने उनके पित्रों के घरानेनुसार, अपनी विरासत ग्रहण कर ली है; और मनश्शे की आधी प्रजाति ने अपनी विरासत ग्रहण कर ली है:

१५ उन दो प्रजातियों और उस आधी प्रजाति ने अपनी विरासत यरीहो के निकट पूर्व की ओर यर्दन के इस पास ग्रहण कर ली है, सूर्योदय की ओर ही।

१६ और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए,  

१७ यह उन पुरुषों के नाम हैं जो तुम्हारे प्रति भूमी का विभाजन करेंगे: पुरोहित एलाज़र, नून का बेटा यहोशुअ।

१८ और तुम प्रत्येक प्रजाति से एक अध्यक्ष को लोगे, भूमी को विरासतानुसार विभाजित कर देने हेतु।

१९ और उन पुरुषों के नाम यह हैं: यहूदा की प्रजाति से, यपुन्ने का बेटा कालेब।

२० और शिमोन की सन्तानों की प्रजाति से, अम्मिहुद का बेटा शमूएल।

२१ बिन्यामिन की प्रजाति से, किसलोन का बेटा एलीदद।

२२ और दान की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, इगली का बेटा बकी।

२३ युसुफ की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, मनश्शे की सन्तानों की प्रजाति के लिए, एफद का बेटा हनिएल।

२४ और ईफ़्रैम की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, शिफतन का बेटा कमूएल।

२५ और ज़बूलून की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, परनक का बेटा एलीज़फान।

२६ और इस्सकार की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, अज़न का बेटा पल्तीएल।

२७ और आशेर की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, शलमी का बेटा अहीयुद।

२८ और नफ़्ताली की सन्तानों की प्रजाति का अध्यक्ष, अम्मिहुद का बेटा पदहेल।

२९ यहीं हैं वो जिन्हें प्रभु ने कनान की भूमी में इस्राएल की सन्तानों के प्रति उस विरासत को विभाजित करने का आदेश दिया था।



पैंतीसवाँ अध्याय।


और प्रभु मूसा से यरीहो के निकट यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में बोले, कहते हुए, 

इस्राएल की सन्तानों को आदेश दे दो, कि वह अपने अधिकार की अपनी विरासत में से लेवी-वंशजों को बसने हेतु नगर प्रदान कर दें; और तुम लेवी-वंशजों को उन नगरों के चारों-ओर आस-पास की सार्वजनिक-भूमियाँ भी दे दोगे।

और उनके पास वह नगर बस जाने हेतु होंगे; और उनकी सार्वजनिक-भूमियाँ उनके मवेशियों के लिए होंगी, और उनकी सम्पत्तियों के लिए, और उनके सभी जानवरों के लिए।

और उन नगरों की सार्वजनिक-भूमियाँ, जिन्हें तुम लेवी-वंशजों को प्रदान करोगे, नगर की दीवार से लेकर चारों-ओर एक हज़ार हाथ बाहर की ओर जाएँगी।

और तुम नगर के बाहर से पूर्व की ओर दो हज़ार हाथ मापोगे, और दक्षिण की ओर दो हज़ार हाथ, और पश्चिम की ओर दो हज़ार हाथ, और उत्तर की ओर दो हज़ार हाथ; और वह नगर मध्य में होगा: यह उनके लिए नगरों की सार्वजनिक-भूमियाँ होंगीं।

और उन नगरों में से जिन्हें तुम लेवी-वंशजों को प्रदान करोगे, छह नगर शरण के लिए होंगे, जिन्हें तुम हत्यारे के लिए नियुक्त करोगे, ताकि वह वहाँ भाग सके: और उनके साथ तुम बयालीस नगर जोड़ दोगे।

तो वह समस्त नगर जिन्हें तुम लेवी-वंशजों को प्रदान करोगे अड़तालीस नगर होंगे: उन्हें तुम उनकी सार्वजनिक-भूमियों के साथ प्रदान कर दोगे।

और वह नगर जिन्हें तुम प्रदान करोगे इस्राएल की सन्तानों के अधिकार में से होंगे: उनसे जिनके पास कई नगर हैं, तुम कई दे दोगे; परन्तु उनसे जिनके पास थोड़े हैं,तुम थोड़े ही दोगे: प्रत्येक अपने नगरों में से लेवी-वंशजों को प्रदान करेगा अपनी विरासतानुसार जिसकी वह विरासत लेता है।

और प्रभु मूसा से बोले, कहते हुए, 

१० इस्राएल की सन्तानों से बोलो, और उनसे कहो, जब तुम यर्दन के पार कनान की भूमी में जाओगे;

११ तब तुम स्वयं के लिए नगरों को नियुक्त करोगे अपने लिए शरण के लिए नगरों को; ताकि वह हत्यारा वहाँ भाग सके, जिसने किसी व्यक्ति को अनभिज्ञता से मार दिया हो।

१२ और वह तुम्हारे लिए उस प्रतिषोधी से शरण हेतु नगर होंगे; ताकि वह हत्यारा मरे , जब तक कि सभा के समक्ष न्याय-निर्धारण में खड़ा हो जाए।

१३ और उन नगरों में से जो तुम दोगे, छह नगर तुम्हारे लिए शरण के लिए होंगे।

१४ तुम छह नगर यर्दन के इस पार प्रदान करोगे, और तीन नगर तुम कनान की भूमी में प्रदान कर दोगे, जो शरण-नगर होंगे।

१५ यह छह नगर एक शरण होंगे, दोनो इस्राएल की सन्तानों के लिए, और उस परदेशी के लिए, और उनके बीच उस अल्पवासी के लिए: ताकि जो कोई भी किसी भी व्यक्ति को अनजाने में मार देता है वहाँ भाग सके,

१६ और यदि वह उस पर किसी लोहे के यंत्र से वार करता है, ताकि वह मर जाए, वह एक नर-हत्यारा है: नर-हत्यारा अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१७ और यदि वह उस पर किसी पत्थर के फेंकने से वार करता है, जिस से वह मर जाए, और वह मर जाता है, वह एक नर-हत्यारा है: नर-हत्यारा अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१८ और यदि वह उस पर किसी लकड़ी के हथियार से वार करता है, जिस से वह मर जाए, और वह मर जाता है, वह एक नर-हत्यारा है: नर-हत्यारा अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

१९ रक्त का प्रतिषोधी स्वयं ही उस नर-हत्यारे की हत्या करेगा: जब वह उस से मिलता है, वह उसकी हत्या कर देगा।

२० और यदि वह उसे घृणा से घोंप दे, या उस पर घात लगा कर कुछ फैंक दे, कि वह मर जाए;

२१ या शत्रुता में उस पर अपने हाथ से वार कर ड़े, कि वह मर जाए: उसने जिसने उस पर वार किया अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा; क्योंकि वह एक नर-हत्यारा है; रक्त का प्रतिषोधी उस नर-हत्यारे की हत्या करेगा: जब वह उस से मिलता है।

२२ परन्तु यदि वह अचानक ही उसे बिना शत्रुता के घोंप दे, या उस पर कुछ बिना घात लगाए फैंक दे,

२३ या किसी भी पत्थर से जिस से कोई व्यक्ति मर जाए, उसे देखते हुए, और उसे उस पर फैंक दे, ताकि वह मर जाए, और वह उसका शत्रु नहीं था, ही उसने उसकी हानी चाही:

२४ तब सभा हत्यारे और रक्त के प्रतिषोधी के बीच इन न्याय-निर्धारणोंनुसार न्याय करेगी:

२५ और सभा उस हत्यारे का उस रक्त के प्रतिषोधी के हाथ से उद्धार कर देगी, और वह सभा उसे उसके शरण-नगर में पुनःस्थापित कर देगी, जहाँ वह भाग गया था: और वह उसी में उच्च पुरोहित की मृत्यु तक वास करेगा, जिसका पवित्र-तेल के साथ अभिषेक कर दिया गया था। 

२६ परन्तु यदि वह हत्यारा किसी भी समय अपने शरण-नगर की सीमा में बाहर निकल आता है, जहाँ वह भाग गया था;

२७ और वह रक्त का प्रतिषोधी उसे उसके शरण-नगर की सीमा में बाहर पा लेता है, और वह रक्त का प्रतिषोधी उस हत्यारे को मार डालता है; वह रक्त का दोषी नहीं होगा:

२८ क्योंकि उसे उच्च पुरोहित की मृत्यु तक अपने शरण-नगर में ही रहना चाहिए था: परन्तु उच्च पुरोहित की मृत्यु पश्चात वह हत्यारा अपने अधिकार की भूमी में वापस लौट जाएगा।

२९ तो यह बातें तुम्हारे लिए तुम्हारी पीढीयों के सर्वत्र में तुम्हारे समस्त बसेरों में न्याय-निर्धारण का एक अध्यादेश होंगी।

३० जो कोई भी किसी भी व्यक्ति को मारता है, वह नर-हत्यारा सक्षियों के मूँह दीर मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: परन्तु एक साक्षी किसी के भी विरुद्ध उसकी मृत्यु करवा देने हेतु साक्ष्य नहीं देगा। 

३१ इसके अतिरकत तुम नर-हत्यारे के जीवन के लिए कोई विमोचन नहीं लोगे, जो मृत्यु-दण्ड का दोषी है: बल्कि वह अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

३२ और तुम उसके लिए कोई विमोचन नहीं लोगे जो अपने शरण-नगर में भाग चुका है, कि वह पुनः अपनी भूमी में बसने जाए, जब तक कि पुरोहित मर जाए।

३३ तुम उस भूमी को प्रदूषित नहीं करोगे जिस में तुम हो: क्योंकि वह रक्त उसे दूषित कर देता है: और वह भूमी उस रक्त से  स्वच्छ नहीं हो सकती है जो उस में बहा है, बल्कि उसके रक्त से ही जिसने उसे बहाया है।

३४ इसलिए उस भूमी को दूषित मत करना जिस में तुम निवास करोगे, जिस में मैं बसता हूँ: क्योंकि मैं प्रभु इस्राएल की सन्तानों के बीच बसता हूँ।




छत्तीसवाँ अध्याय।


और गिलद की सन्तानों के परिवारों के प्रमुख पिता, जो था बेटा मेकर का, जो था बेटा मनश्शे का, जो युसुफ के बेटों के परिवारों में से था, निकट आए, और वह मूसा के सम्मुख, और इस्राएल की सन्तानों के प्रमुख पिताओं, उन अध्यक्षों के सम्मुख बोले:

और उन्होंने कहा, प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों को पर्चियाँ डाल कर भूमी को एक विरासत के लिए प्रदान कर देने हेतु, मेरे प्रभु को आदेश दिया था: और मेरे प्रभु प्रभु द्वारा आदेशित थे, हमारे भाई ज़्लोफहद की विरासत को उसकी बेटियों को प्रदान कर देने हेतु।

और यदि वह इस्राएल की सन्तानों की किसी अन्य प्रजाति के बेटों से विवाहित हो जाएँ, तब उनकी विरासत हमारे पित्रों की विरासत में से ले ली जाएगी, और उस प्रजाति की विरासत में डाल दी जाएगी जिन में उन्हें स्वीकार कर लिया गया है: इस प्रकार वह हमारी विरासत की बँटाई में से ले ली जाएगी।

और जब इस्राएल की सन्तानों का आनन्दोत्सव होगा, तब उनकी विरासत उस प्रजाति की विरासत में डाल दी जाएगी जिन में उन्हें स्वीकार कर लिया गया है: इस प्रकार उनकी विरासत हमारे पित्रों की प्रजाति की विरासत में से ले ली जाएगी।

और मूसा ने प्रभु के शब्दानुसार इस्राएल की सन्तानों को आदेश दिया, कहते हुए, युसुफ के बेटों की प्रजाति ने भला कहा है।

यह है वह बात जिसका आदेश प्रभु ज़्लोफहद की बेटियों के समबन्ध में देते हैं, कहते हुए, उन्हें जिस से भी वह चाहें विवाह कर लेने दो; बस केवल वह अपने पिता की प्रजाति के परिवार से ही विवाह करेंगी।

इस प्रकार इस्राएल की सन्तानों की विरासत प्रजाति-प्रजाति नहीं हटती फिरेगी: क्योंकि इस्राएल की सन्तानों में से प्रत्येक अपने पित्रों की प्रजाति की विरासत में ही स्वयं को रखेगा।

और प्रत्येक बेटी, जो इस्राएल की सन्तानों की किसी भी प्रजाति में किसी विरासत पर अधिकार रखती है, अपने पिता की प्रजाति में से किसी एक परिवार की पत्नी बनेगी, ताकि में से प्रत्येक अपने पित्रों की विरासत का उत्तरअधिकारी बना रह सके।

ही वह विरासत एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति हटती फिरेगी; बल्कि इस्राएल की सन्तानों की प्रजातियों का वह परएक व्यक्ति  अपनी ही विरासत में स्वयं को रखेगा।

१० जैसा ही प्रभु ने मूसा को आदेश दिया, वैसा ही ने किया:

११ क्योंकि महला, तिर्ज़ा, और होग्ला, और मिल्का, और नूह, ज़्लोफहद की बेटियाँ, अपने पित्रों के भाईयों के बेटों से विवाहित थीं:

१२ और उनका विवाह युसुफ के बेटे मनश्शे के बेटों के परिवारों में कर दिया गया था, और उनकी विरासत उनके पिता के पारिवर की प्रजाति में ही रही। 

१३ यह हैं वह आदेश और वह न्याय-निर्धारण, जिन्हें प्रभु ने मूसा के हाथ इस्राएल की सन्तानों को आदेशित किए थे, यरीहो के निकट यर्दन के साथ मोआब के मैदानों में। 




०३/२१/२०२५: 
































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