द्वितीय-विधान। पुराना अनुबंध। (Deutoronomy)
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पहला अध्याय।
१ यह हैं वह शब्द जिन्हें मूसा ने समस्त इस्राएल से जँगली-क्षेत्र में यर्दन के इस पार बोले थे, लाल-समुद्र के विपरीत उस मैदान में, परान, और तोफल, और लाबान, और हसेरोत, और दिज़हब के बीच।
२ (होरेब से लेकर, सेईर पहाड़ के पथ से होकर कादेशबर्नेय तक ग्यारह दिन की यात्रा है।)
३ और चालीसवें वर्ष में, ग्यारहवें महीने में, महीने के पहले दिन में, यह होने को आया, कि मूसा इस्राएल की सन्तानों से, उस सभी के अनुसार बोला, जो प्रभु ने उनके प्रति उसे आदेश में प्रदान कर दिया था;
४ उसके पश्चात जब उसने हेश्बोन में बसने वाले एमोरवासियों के राजा सिहोन का, और एद्रेई में अष्ट्रोथ में बसने वाले बशान के राजा ओग का, वध कर दिया था:
५ यर्दन के इस पार, मोआब की भूमी में, मूसा इस नियम की घोषणा करने लगा, कहता हुआ,
६ प्रभु हमारे ईश्वर हमसे होरेब में बोले, कहते हुए, तुम इस पहाड़ में बहुत समय बस लिए हो:
७ तुम मुड़ जाओ, और अपनी यात्रा ले लो, और एमोरवासियों के पहाड़ की ओर चले जाओ, और उन सभी स्थानों की ओर जो उसके निकट हैं, मैदान में, पहाड़ियों में, घाटी में, और दक्षिण में, और समुद्र के किनारे, कनान वासियों की भूमी की ओर, और लबानोन तक, उस महा-नदी तक, नदी फरात तक।
८ देखो, मैंने तुम्हारे सम्मुख भूमी स्थित कर दी है: भीतर चले जाओ और उस भूमी पर अधिकार कर लो जिसकी शपथ प्रभु ने तुम्हारे पित्रों, अब्राहम, इसहाक, और याकूब को दे दी थी, उन्हें और उनके पश्चात उनके बीज को प्रदान कर देने हेतु।
९ और मैं तुम्हारे साथ उस समय बोला था, कहता हुआ, मैं तुम्हें स्वयं अकेला नहीं ढो सकता:
१० प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें गुणा कर दिया है, और देखो, तुम इस दिन स्वर्ग के सितारों जैसे हो एक जनौघ के लिए।
११ (तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर तुम्हें हज़ार गुणा और अधिक बनाएँ जैसे तुम हो, और तुम्हें आशीष दें, जैसा उन्होंने तुम्हें वचन दे दिया है!)
१२ मैं अकेला कैसे तुम्हारा भार उठा सकता हूँ, और तुम्हारा बोझ, और तुम्हारे लड़ाई-झगड़े?
१३ विद्वान पुरुषों, और प्रज्ञावानों को, और अपनी प्रजातियों के बीच सुख्यतों को ले लो, और मैं उन्हें तुम पर अध्यक्ष बना दूँगा।
१४ और तुमने मुझे उत्तर दिया था, और कहा, वह बात जो अपने बोली है भली है हमारे करने के लिए।
१५ तो मैंने ले लिए तुम्हारी प्रजातियों के प्रमुख, विद्वान पुरुष, और सुख्यात, और उन्हें तुम पर मुखिया बना दिया, हज़ारों पर कप्तान, और सौ-सौ पर कप्तान, और पचास-पचास पर कप्तान, और दस-दस पर कप्तान, और तुम्हारी प्रजातियों के बीच अफ़सर।
१६ और मैंने तुम्हारे न्यायाधीषों को उस समय निर्देश दिया, कहते हुए, अपने भाई-जनो के बीच उन मुद्दों को सुनो, और प्रत्येक पुरुष और उसके भाई के, और उस परदेशी के बीच, जो उसके साथ है, नेक-न्याय करो।
१७ तुम न्याय-निर्धारण में लोगों का पक्षपात नहीं करोगे; बल्कि तुम छोटे को उस महान का समान ही सुनोगे; तुम आदमी के चहरे से डरोगे नहीं; क्योंकि वह न्याय-निर्धारण ईश्वर का है: और वह मुद्दा जो तुम्हारे लिए बहुत कठिन है, उसे मेरे पास ले आना, और मैं उसे सुनूँगा।
१८ और मैंने तुम्हें उन सभी बातों का उस समय आदेश दे दिया था जो तुम्हें करनी चाहिएँ।
१९ और जब हमने होरेब से परस्थान किया, हम उस विशाल और भयानक जँगली-क्षेत्र में से चलते गए, जिसे तुमने एमोरवासियों के पर्वत के पथ के साथ देखा था, जैसा प्रभु हमारे ईश्वर ने हमें आदेश दिया था; और हम कादेशबर्नेय पहुँच गए।
२० और मैंने तुमसे कहा, तुम एमोरवासियों के पर्वत तक आ गए हो, जिसे प्रभु हमारे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं।
२१ देखो, प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने भूमी को तुम्हारे सम्मुख स्थित कर दिया है: ऊपर चले जाओ और उस पर अधिकार कर लो, जैसा प्रभु तुम्हारे पित्रों के ईश्वर ने तुमसे कहा है; डरो मत, न ही हतोत्साहित हो।
२२ और तुम मेरे निकट आए तुम में से प्रत्येक एक, और तुमने कहा, हम अपने आगे पुरुषों को भेजेंगे, और वह हमारे लिए उस भूमी का भेद निकाल लेंगे, और हमें पुनः शब्द ले आएँगे कि किस पथ पर से हमें ऊपर जाना होगा, और किन-किन नगरों में हम आएँगे।
२३ और इस कथन ने मुझे भला प्रसन्न कर दिया: और मैंने तुम में से बारह पुरुषों को ले लिया, हर प्रजाति से एक:
२४ और वह मुड़े और उस पर्वत में ऊपर चले गए, और वह एश्कोल की घाटी में आ गए, और उसका भेद निकाल लिया।
२५ और उन्होंने उस भूमी के फल में से अपने हाथों में ले लिया, और उसे हमारे पास नीचे ले आए, और हमें पुनः शब्द ले आए, और कहा, यह एक अच्छी भूमी है जिसे प्रभु हमारे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं।
२६ तथापि तुमने ऊपर चढ़ाई नहीं की, बल्कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर के आदेश के विरुद्ध विद्रोह कर दिया:
२७ और तुम अपने शिविरों में बड़बड़ाए, और कहा, चूँकि प्रभु ने हम से घृणा की, वह हमें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल कर ले आए हैं, हमें एमोरवासियों के हाथ में प्रदान कर देने हेतु, हमारा विध्वंस कर देने हेतु।
२८ कहाँ जाएँ हम ऊपर? हमारे भाई-जनों ने हमारे हृदय को हतोत्साहित कर दिया है, कहते हुए, यह जनता तो हमारी अपेक्षा बड़ी और ऊँची है; यह नगर विशाल हैं और ऊपर स्वर्ग तक दीवार-बन्द हैं; और इसके अतिरिक्त हमने अनकिमों के बेटों को वहाँ देखा।
२९ तब मैंने तुमसे कहा, आतंकित मत हो, न ही उनसे डरो।
३० प्रभु तुम्हारे ईश्वर जो तुम्हारे सामने जाते हैं, वही तुम्हारे लिए लड़ेंगे, उस सभी के अनुसार जो उन्होंने तुम्हारे लिए मिस्र में किया तुम्हारे आँखो के सामने;
३१ और उस जँगली-क्षेत्र में, जहाँ तुम ने देख लिया है कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने कैसे तुम्हें उठाया, उस समस्त पथ में जिस पर तुम चलते गए, जब तक कि तुम इस स्थान में आ पहुँचे।
३२ तथापि इस बात में तुमने प्रभु अपने ईश्वर का विश्वास नहीं किया,
३३ जो पथ में तुम्हारे सामने गए, तुम्हारे लिए एक स्थान को ढूँढ निकालने, तुम्हारे तम्बुओं को गाढ़ देने के लिए, रात-रात रहते-रहते अग्नी में, तुम्हें दिखला देने के लिए कि किस पथ पर से तुम्हें जाना चाहिए, और एक मेघ में दिन-दिन के रहते-रहते।
३४ और प्रभु ने तुम्हारे शब्दों की वाणी सुनी, और आक्रोशित थे, और शपथ ली, कहते हुए,
३५ अवश्य ही इस बुरी पीढ़ी से इन आदमियों में से एक भी उस अच्छी भूमी को नहीं देखेगा, जिसको तुम्हारे पित्रों को प्रदान कर देने की शपथ मैंने ले ली थी,
३६ सिवाय यपुन्ने के बेटे कालेब के; वह उसे देखेगा, और उसे, और उसकी सन्तानों को मैं वह भूमी प्रदान कर दूँगा जिसे उसने रौंदा है, क्योंकि उसने प्रभु का पूर्णतः अनुसरण किया है।
३७ और प्रभु तुम्हारे वास्ते मेरे साथ क्रोधित थे, कहते हुए, तुम भी वहाँ भीतर नहीं जाओगे।
३८ बल्कि नून का बेटा यहोशुआ, जो तुमारे सम्मुख खड़ा रहता है, वो वहाँ भीतर जाएगा: उसे प्रोत्साहित करो: क्योंकि वही इस्राएल को उसका उत्तराधिकार प्राप्त करवाएगा।
३९ इसके अतिरिक्त तुम्हारे छोटे-नन्हें, जो तुमने कहा था कि शिकार बन जाएँगे, और तुम्हारी सन्तानें, जिन्हें उस दिन में अच्छाई और बुराई के बीच कोई ज्ञान न था, वही भीतर जाएँगे वहाँ, और उन्हीं को मैं उसे प्रदान कर दूँगा, और वही उस पर अधिकार करेंगे।
४० परन्तु जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, तुम तो परे मुड़ जाओ, और जँगली-क्षेत्र में अपनी यात्रा ले लो लाल-समुद्र के पथ से।
४१ तब तुमने उत्तर दिया और मुझ से कहा, हमने तो प्रभु के विरुद्ध पाप कर दिया है, हम ऊपर जाएँगे और लड़ाई करेंगे, उस सभी के अनुसार जो प्रभु हमारे ईश्वर ने हमें आदेश दिया है। और जब तुमने कस लिए थे प्रत्येक पुरुष ने अपने युद्ध के हथियार, तुम उस पहाड़ी पर ऊपर चले जाने के लिए तैयार थे।
४२ और प्रभु ने मुझ से कहा, इनसे बोले, ऊपर मत जाओ, न ही लड़ाई करो; क्योंकि मैं तुम्हारे बीच नहीं हूँ; कहिं तुम अपने शत्रुओं के सम्मुख मार न खा लो।
४३ तो मैं तुम से बोला; और तुमने मेरा श्रवण नहीं किया, बल्कि तुमने प्रभु के आदेश के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, और पहाड़ी पर अपनी ही परिकल्पना से ऊपर चले गए।
४४ और उस पर्वत पर बसने वाले एमोरवासी तुम्हारे विरुद्ध बाहर निकल आए, और उन्होंने मधु-मक्खियों के समान तुम्हारा पीछा किया, और तुम्हें सेईर में नष्ट कर दिया, होरमा तक भी।
४५ और तुम वापस लौट आए और प्रभु के सम्मुख रो पड़े; परन्तु प्रभु ने तुम्हारी वाणी का श्रवण नहीं किया, न ही तुम्हारे साथ अपने कान लगाए।
४६ तो तुम कादेश में कई दिनों के लिए बस गए, उन दिनो के अनुसार जब तक तुम वहीं बसे रहे।
दूसरा अध्याय।
१ तब हम मुड़ गए, और लाल-समुद्र के पथ से हमने जँगली-क्षेत्र में अपनी यात्रा की, जैसा प्रभु ने मुझ से बोला था: और हम सेईर पहाड़ के चारों-ओर कई दिनो तक घूमते रहे।
२ और प्रभु मुझ से बोले, कहते हुए,
३ बहुत समय से तुम इस पर्वत के चारों-ओर घूम लिए हो: पूर्व की ओर मुड़ जाओ।
४ और तुम लोगों को आदेश दो, कहते हुए, तुम्हें सेईर में बसने वाले अपने भाई-जनो एसाव की सन्तानों की सीमा को पार करना है; और वह तुम से डर जाएँगे: इसलिए तुम सावधान रहना:
५ उनके साथ छेड़-छाड़ मत करना; क्योंकि मैं तुम्हें उनकी भूमी में से कुछ भी नहीं दूँगा, न जी न, एक पैर भर भी नहीं; क्योंकि मैंने सेईर का पहाड़ एसाव को एक अधिकार हेतु दे दिया है।
६ तुम उनसे पैसे से भोजन खरीद लोगे, ताकि तुम खा सको; और तुम उनसे पैसे से पानी भी ख़रीदोगे, ताकी तुम पी सको।
७ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें तुम्हारे हाथ के समस्त कार्यों में आशीष दे दिया है: उन्हें इस विशाल जँगली-क्षेत्र में तुम्हारा चलना-फिरना पता है: इन चालीस वर्षों में प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे साथ रहे हैं; तुम्हें कोई कमी नहीं पड़ी।
८ और जब हम सेईर में बसने वाले हमारे भाई-जनों एसाव की सन्तानों से गुज़रते चले गए, एलथ के मैदान के पथ पर से, और एज़्यौंगबर से, हम मुड़ गए और मोआब के जँगली-क्षेत्र के पथ से गुज़रते चले गए।
९ और प्रभु ने मुझ से कहा, मोआब-वंशजों को मत सताना, न ही उनके साथ युद्ध में लड़ पड़ना: क्योंकि मैं उनकी भूमी में से तुम्हें अधिकार नहीं दूँगा; क्योंकि मैंने अर लोट की सन्तानों को एक अधिकार के लिए दे दिया है।
१० भूतकाल में एमिम वहीं बसते थे, एक बहुतेरा गण, और अनेक, और क़द में ऊँचे अनक-वंशजों के समान;
११ जो विशालकाय-मानवों में गिने जाते थे, अनक-वंशजों के समान; परन्तु मोआब-वंशज उन्हें एमिम बुलाते हैं।
१२ भूतकाल में होरी भी सेईर में बसते थे; परन्तु एसाव की सन्तानों ने उन्हें बाहर धकेल दिया, जब उन्होंने उनका अपने सम्मुख विध्वंस कर दिया था, और उनके स्थान में बस गए थे; जिस प्रकार इस्राएल ने अपने अधिकार की भूमी के प्रति कर दिया था, जिसे प्रभु ने उन्हें प्रदान कर दिया था।
१३ अब उठ जाओ, मैंने कहा, और ज़रद की नदी को पार कर लो। और हम ज़रद नदी के पार चले गए।
१४ और वह समय जिस में हम कादेशबर्नेय से आकर, ज़रद नदी को पार कर चले थे, अड़तीस वर्षों का था; जब तक योद्धा पुरुषों की वह समस्त पीढ़ी सेना के बीच में से समाप्त हो चुकी थी, जैसी प्रभु ने उन्हें शपथ दे दी थी।
१५ क्योंकि वास्तव में ही प्रभु का हाथ उनके विरुद्ध था, उन्हें सेना के बीच में से नष्ट कर देने हेतु, जब तक उनका अन्त हो गया था।
१६ तो यह होने को आया, जब समस्त योद्धा पुरुष समाप्त हो चुके थे और लोगों के बीच में से मर चुके थे,
१७ कि प्रभु मुझ से बोले, कहते हुए,
१८ तुम्हें इस दिन, मोआब की सीमा अर में से होते हुए पार जाना है:
१९ और जब तुम अम्मोन की सन्तानों के सामने निकट आते हो, उन्हें मत सताना, न ही उनके साथ छेड़-छाड़ करना: क्योंकि मैं तुम्हें अम्मोन की सन्तानों की भूमी में से कोई अधिकार नहीं दूँगा; क्योंकि मैंने उसे लोट की सन्तानों को एक अधिकार के लिए प्रदान कर दिया है।
२० (वह भी विशालकाय-मानवों की एक भूमी में गिनी जाती थी: भूतकाल में उस में विशालकाय-मानव बसते थे; और अम्मोन-वंशज उन्हें ज़मज़मिम बुलाते हैं;
२१ एक विशाल-गण, और अनेक, और ऊँचे क़द वाले, अनक-वंशजों के समान; किन्तु प्रभु ने उनका उनके सम्मुख विध्वंस कर दिया; और अम्मोन-वंशजों ने उन्हें बाहर धकेल दिया, और उनके स्थान में बस गए:
२२ जैसा उन्होंने एसाव की सन्तानों के प्रति किया था, जो सेईर में बसते थे, जब उन्होंने उनके सम्मुख होरियों का विध्वंस कर दिया था; और उन्होंने उन्हें बाहर धकेल दिया था, और उनके स्थान में इस दिन तक बस गए:
२३ और अव्वी जो हज़रिम में बसते थे, आज़्ज़ा तक भी, कफ़तोरिम, जो कफ़तोर में से बाहर निकले थे, उन्होंने उनका विध्वंस कर दिया था, और उनके स्थान में बस गए थे।)
२४ उठ जाओ तुम, अपनी यात्रा पर निकल पड़ो, और अर्नोन नदी के पार चले जाओ: देखो, मैंने तुम्हारे हाथ में हेश्बोन का राजा, वह एमोरवासी सिहोन, और उसकी भूमी प्रदान कर दिए हैं: उस पर अधिकार करना आरम्भ कर दो, और संग्राम में उसके साथ भिड़ जाओ।
२५ इसी दिन मैं तुम्हारे भय और तुम्हारे डर को समस्त स्वर्ग-तले उन राष्ट्रों पर डालना आरम्भ कर दूँगा, जो तुम्हारा समाचार सुनेंगे, और काँपने लग जाएँगे, और तुम्हारे कारण संतापित हो जाएँगे।
२६ और मैंने कदमोथ के जँगली-क्षेत्र में से दूतों को बाहर हेश्बोन के राजा सिहोन के पास शान्ति भरे शब्दों के साथ भेजा, कहते हुए,
२७ मुझे अपनी भूमी में से पार गुज़र जाने दो: मैं मुख्य-पथ के साथ-साथ चलता हुआ जाऊँगा, मैं न ही दाएँ हाथ की ओर, न ही बाएँ की ओर मुड़ूँगा।
२८ तुम मुझे पैसे के लिए भोजन बेचोगे, ताकि मैं खा सकूँ; और मुझे पैसे के लिए पानी दोगे, ताकि मैं पी सकूँ: मैं बस केवल अपने पैरों पर पार चलता चला जाऊँगा;
२९ (उसी प्रकार जैसे सेईर में बसने वाली एसाव की सन्तानों ने, और अर में बसने वाले मोआब-वंशजों ने, मेरे साथ किया था;) जब तक कि मैं यर्दन पार कर उस भूमी में प्रवेश कर लूँ जिसे प्रभु हमारे ईश्वर हमें प्रदान कर रहे हैं।
३० परन्तु हेश्बोन के राजा सिहोन ने हमें अपने पास से पार गुज़र-जाने नहीं दिया: चूँकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उसका प्राण कठोर, और उसका हृदय हठीला बना दिया था, ताकि वो उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर सकें, जैसा कि इस दिन प्रतीत हो रहा है।
३१ और प्रभु ने मुझ से कहा, देखो, मैंने तुम्हारे सम्मुख सिहोन और उसकी भूमी प्रदान करना आरम्भ कर दिया है: अधिकार करना आरम्भ करो, ताकि तुम उसकी भूमी विरासत में ले सको।
३२ तब सिहोन हमारे विरुद्ध बाहर निकल आया, वह और उसके सभी लोग, यहज़ में लड़ाई करने।
३३ और प्रभु हमारे ईश्वर ने उस हमारे समक्ष प्रदान कर दिया; और हम ने उसे, और उसके बेटों को, और उसके सभी लोगों को पीट दिया।
३४ और हमने उस समय उसके समस्त नगर हथिया लिए, और उन पुरुषों, और उन स्त्रियों, और उन छोटे-नन्हों का पूर्णतः विनाश ही कर दिया, प्रत्येक नगर में से, भई हम ने तो कोई भी जीवित नहीं छोड़ा:
३५ बस केवल उन मवेशियों की लूट, और उन हथिया लिए गए नगरों की लूट-पाट को, हमने अपने लिए रख लिया।
३६ अरोर से लेकर, जो कि अर्नोन नदी के तट के साथ है, और उस नगर से लेकर जो नदी के साथ है, गिलद तक भी, कोई भी ऐसा नगर न था जो हमारे लिए अभेद्य हो: प्रभु हमारे ईश्वर ने सभी कुछ हमें सौंप दिया:
३७ बस केवल अम्मोन की सन्तानों की भूमी के, न ही यबक नदी के किसी भी स्थान के, न ही पर्वतों में उन नगरों के, न ही हमारे प्रति प्रभु हमारे ईश्वर द्वारा वर्जित कर दिए गए किसी भी स्थान के निकट तुम गए।
तीसरा अध्याय।
१ तब हम मुड़ चले, और पथ पर ऊपर बशान चले गए; और बशान का राजा ओग हमारे विरुद्ध बाहर निकल आया, वह और उसके सभी लोग, एद्रेई में संग्राम करने।
२ और प्रभु ने मुझ से कहा, उस से मत डरो: क्योंकि मैं उसे, और उसके सभी लोगों को, और उसकी भूमी को, तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा; और तुम उसके साथ वैसा ही कर देना जैसा तुमने हेश्बोन में बसने वाले एमोरवासियों के राजा सिहोन के साथ किया था।
३ तो प्रभु हमारे ईश्वर ने हमारे हाथों में बशान का राजा भी, और उसके सभी लोग, प्रदान कर दिए: और हम उसे पीटते रहे जब तक उसके पास कोई भी बचा नहीं रहा।
४ और हमने उसके सभी नगर उस समय हथिया लिए, ऐसा एक भी नगर न था जिसे हमने उनसे नहीं लिया, साठ नगर, अरगब का समस्त क्षेत्र, बशान में ओग का राज्य।
५ यह सभी नगर ऊँची दीवारों, और दरवाज़ों, और पटरों से क़िलेबन्द थे; अनेक दीवार-हीन नगिरयों के अतिरिक्त।
६ और हमने उनका पूर्णतः विनाश कर दिया, जैसा हमने हेश्बोन के राजा सिहोन के साथ कर दिया था, प्रत्येक नगर के पुरुषों, स्त्रियों, और बच्चों का पूर्णतः विनाश करते हुए।
७ परन्तु सभी मवेशी, और नगरों की लूट-पाट को हमने अपने स्वयं के लिए लूट लिया।
८ और हम ने उस समय, एमोरवासियों के दोनो राजाओं के हाथ में से बाहर, यर्दन के इस पार, अर्नोन नदी से लेकर हरमन पहाड़ तक की वह भूमी ले ली;
९ (जिस हरमन को सिदोन-वासी सिरयन पुकारते हैं; और एमोरवासी उसे शनिर पुकारते हैं;)
१० मैदान के समस्त नगर, और समस्त गिलद, और समस्त बशान, सलका तक, और एद्रेई, बशान में ओग के राज्य के नगर।
११ क्योंकि विशालकाय-मनुष्यों के शेष भाग में से केवल बशान का राजा ओग ही बचा रह गया था; देखो, उसका पलंग लोहे का एक पलंग था; क्या वह अम्मोन की सन्तानों के रबथ में नहीं है क्या? नौ हाथ उसकी लम्बाई थी, और चार हाथ उसकी चौड़ाई, एक आदमी के हाथानुसार ही।
१२ और यह भूमि, जिस पर हमने उस समय अधिकार कर लिया था, अरोर से लेकर, जो अर्नोन नदी के साथ है, और गिलद पहाड़ का अर्ध, और उसके नगर, मैंने रूबेन-वंशजों और गाद-वंशजों को प्रदान कर दिए थे।
१३ और मनश्शे की आधी प्रजाति को, गिलद का शेष भाग, और समस्त बशान ओग के राजा का राज्य होते हुए, मैंने प्रदान कर दिए; अरगब का समस्त क्षेत्र, समस्त बशान के साथ, जो विशालकाय-मनुष्यों की भूमी कहलाई जाती थी।
१४ मनश्शे के बेटे याएर ने अरगब का समस्त प्रदेश गशुरी और मअकथी की सीमाओं तक ले लिया; और उन्हें अपने ही नाम से बशानहवोथयाएर, इस दिन तक पुकारा।
१५ और मैंने मेकर को गिलद प्रदान कर दिया।
१६ और रूबेन-वंशजों और गाद-वंशजों को मैंने गिलद से लेकर अर्नोन नदी तक भी घाटी का अर्ध, और वह सीमा यबक नदी तक ही, जो कि अम्मोन की सन्तानों की सीमा है, प्रदान कर दिए;
१७ वह मैदान भी, और यर्दन, और उसकी सीमा, किनरथ से लेकर मैदान के सागर तक भी, नमक-समुद्र ही, पूर्व की ओर अशदोथपिस्गा के तले।
१८ और मैंने उस समय तुम्हें आदेश दिया, कहते हुए, प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें यह भूमी अधिकार में ले लेने हेतु प्रदान कर दी है: तुम अपने भाइयों, इस्राएल की सन्तानों के सम्मुख सशस्त्रित पार जाओगे, वह सभी जो युद्ध के योग्य हैं।
१९ परन्तु तुम्हारी पत्नियाँ, और तुम्हारे छोटे नन्हें, और तुम्हारे मवेशी, (क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पास बहुत मवेशी हैं,) तुम्हारे नगरों में ही वास करेंगे जिन्हें मैंने तुम्हें प्रदान कर दिया है;
२० जब तक कि प्रभु तुम्हारे भाई-जनो को, और तुम्हें भी विश्राम प्रदान कर देंगे, और जब तक वह उस भूमी पर भी अधिकार कर लेते हैं जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उन्हें यर्दन पार प्रदान कर दी है।
२१ और उसी समय मैंने यहोशुआ को आदेश दिया, कहते हुए, तुम्हारी आँखों ने वह सभी कुछ देख लिया है जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उन दोनो राजाओं के साथ कर दिया है: वैसा ही प्रभु इन सभी राज्यों के साथ कर देंगे जहाँ तम चलते जा रहे हो।
२२ तुम उनसे डरोगे नहीं: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर वही तुम्हारे लिए लड़ाई करेंगे।
२३ और मैंने प्रभु से उस समय याचना की, कहते हुए,
२४ हे प्रभु ईश्वर, आपने अपने सेवक को अपनी महानता, और अपना बाहुबल दिखाना आरम्भ कर दिया है: क्योंकि स्वर्ग में या पृथ्वी में वह कौन सा ईश्वर है, जो आपके कार्योंनुसार, और आपकी शक्तिनुसार कर सके?
२५ मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, मुझे पार चले जाने दें, और यर्दन पार उस अच्छी भूमी को देख लेने दें, वही अच्छा पर्वत, और लबानोन।
२६ परन्तु प्रभु मेरे साथ तुम्हारे वास्ते आक्रोशित थे, और उन्होंने मेरी बात नहीं मानी: और प्रभु ने मुझ से कहा, इसी को पर्याप्त रहने दो अपने लिए; इस विषय में मेरे साथ और अधिक मत बोलो।
२७ पिस्गा की चोटी पर ऊपर चढ़ाई कर लो, और अपनी आँखों को पश्चिम की ओर, और उत्तर की ओर, और दक्षिण की ओर, और पूर्व की ओर उठा लो, और उसे देख लो अपनी आँखों से: क्योंकि तुम इस यर्दन पार नहीं जाओगे।
२८ बल्कि यहोशुआ को निर्देश दो, और उसे उत्साहित करो, और सशक्त करो: क्योंकि वही इन लोगों के आगे पार जाएगा, और यही इन्हें उस भूमी को विरासत में दिलवाएगा जिसे तुम देखोगे।
२९ तो हम बेतपओर के विपरीत घाटी में बसते रहे।
चौथा अध्याय।
१ अब इसलिए श्रवण कर लो हे इस्राएल, उन अध्यादेशों का, और उन न्याय-निर्धारणों का, जिन्हें मैं तुम्हें सिखाता हूँ, उन्हें करने के लिए, ताकि तुम जी सको, और अन्दर जाकर उस भूमी पर अधिकार कर लो जिसे तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर तुम्हें प्रदान कर रहे हैं।
२ तुम उस शब्द में जोड़ोगे नहीं जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, न ही तुम उस में से कुछ भी घटाओगे, ताकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का पालन कर सको जिनका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ।
३ तुम्हारी आँखों ने वह देख लिया है जो प्रभु ने बअलपओर के कारण कर दिया था: कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारे बीच में से उन सभी पुरुषों का विध्वंस कर दिया था जो बअलपओर के अनुयायी थे।
४ परन्तु तुम जो प्रभु अपने ईश्वर के साथ चिपटे ही रहे, इस दिन जीवित हो, तुम में से प्रत्येक।
५ देखो, मैंने तुम्हें अध्यादेश और न्याय-निर्धारण सिखा दिए हैं, उसी प्रकार जैसे प्रभु मेरे ईश्वर ने मुझे आदेश दिया, कि तुम उस भूमी में ऐसा ही करो जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
६ इसलिए उन्हें रखो और करो; क्योंकि यही राष्ट्रों की दृष्टि में तुम्हारी विद्वता और तुम्हारी प्रज्ञा है, जो इन समस्त अध्यादेशों को सुन कर कहेंगे, अवश्य ही यह महान राष्ट्र एक विद्वान और प्रज्ञाशील गण है।
७ क्योंकि कौन सा राष्ट्र इतना महान है, जिसके इतने निकट ईश्वर हैं उनके, जितने प्रभु हमारे ईश्वर हैं उन सभी बातों में जिनके प्रति हम उनका आह्वान करते हैं?
८ और कौन सा राष्ट्र इतना महान है, जिसके पास इतने नेक अध्यादेश और न्याय-निर्धारण हैं इस नियम के समान, जिसे मैं तुम्हारे सम्मुख इस दिन स्थापित कर रहा हूँ?
९ बस केवल स्वयं के प्रति सावधान रहना, और अपनी आत्मा को कर्मठता से रखे रहना, कहिं तुम उन बातों को भूल जाओ जो तुम्हारी आँखों ने देख ली हैं, और कहिं वह तुम्हारे हृदय से तुम्हारे जीवन के समस्त दिन परस्थान कर लें: बल्कि उन्हें अपने बेटों को, और अपने बेटों के बेटों को सिखाओ;
१० विशेष रूप से वह दिन जब तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख होरब में खड़े थे, जब प्रभु ने मुझ से कहा, मेरे लिए लोगों को एक साथ एकत्रित कर लो, और मैं उन्हें अपने शब्द सुनवाऊँगा, ताकि वह पृथ्वी पर अपने जीवन के उन समस्त दिनों मेरा भय मानना सीख लें, और कि वह अपनी सन्तानों को सिखाएँ।
११ और तुम निकट आ गए और उस पर्वत के तले खड़े हो गए; और वह पर्वत स्वर्ग की बीच तक भी अग्नी से जल उठा, अन्धकार, मेघों, और घने श्यामतव के साथ।
१२ और प्रभु उस अग्नी के बीच में से तुम्हारे साथ बोले: तुमने शब्दों की वाणी सुनी, परन्तु कोई प्रतिरूप नहीं देखा; बस केवल तुमने एक वाणी सुनी।
१३ और उन्होंने तुम्हें अपना प्रतिज्ञा-पत्र घोषित कर दिया, जिसे करने का उन्होंने तुम्हें आदेश दे दिया, दस आदेश ही। और उन्होंने उन्हें पत्थर की दो पट्टियों पर लिख दिया।
१४ और प्रभु ने मुझे उस समय आदेश दिया तुम्हें अध्यादेश और न्याय-निर्धारण सिखाने का, ताकि तुम उन्हें उस भूमी में कर सको जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
१५ इसलिए अपने प्रति सावधानी रखना; क्योंकि तुमने उस दिन किसी भी प्रकार का प्रतिरूप नहीं देखा जब प्रभु तुम से होरब में बोले अग्नी के बीच में से ही:
१६ कहिं तुम स्वयं को भ्रष्ट कर लो, और अपने लिए तुम एक उत्कीर्ण प्रतिमा बना लो, किसी भी आकृति का प्रतिरूप, नर या नारी की समानता,
१७ पृथ्वी पर किसी भी जानवर की समानता, वायु में उड़ने वाले किसी भी पँख लिए पक्षी की समानता,
१८ किसी भी जन्तु की समानता जो धरती पर रेंगता है, किसी भी मछली की समानता जो पृथ्वी के नीचे पानियों में है:
१९ और कहिं तुम स्वर्ग की ओर अपनी आँखों को उठा कर, जब तुम सूर्य को देखते हो, और चंद्रमा को, और सितारों को, स्वर्ग की समस्त सेना को ही, तुम उनकी पूजा करने, और सेवा करने न खिंचे चले जाओ, जिन्हें प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने समस्त स्वर्ग तले सभी राष्ट्रों के प्रति विभाजित कर दिया है।
२० बल्कि प्रभु ने तुम्हें लिया है, और तुम्हें उस लोहे की भट्टी में से, मिस्र में से ही बाहर निकाल लिया है, उनके प्रति एक विरासत-गण बन जाने हेतु, जैसे तुम इस दिन हो।
२१ इसके अतिरिक्त प्रभु मेरे साथ तुम्हारे वास्ते क्रोधित थे, और शपथ दी कि मैं यर्दन पार न जाऊँ, और कि मै उस अच्छी भूमी में प्रवेश न करूँ, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत के लिए दे रहे हैं:
२२ बल्कि मैं इसी भूमी में मर जाऊँ, मुझे यर्दन पार नहीं जाना चाहिए: परन्तु तुम पार जाओगे, और उस अच्छी भूमी पर अधिकार करोगे।
२३ इसलिए अपने प्रति सावधानी रखना, कहिं तुम प्रभु अपने ईश्वर का प्रतिज्ञा-पत्र भूल न जाना, जो उन्होंने तुम्हारे साथ बनाया था, और तुम कोई उत्कीर्ण प्रतिमा बना लो, या किसी भी वस्तु की समानता, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें वर्जित कर दिया है।
२४ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर एक भस्म कर देने वाली अग्नि हैं।
२५ जब तुम सन्तानें जनोगे, और सन्तानों की सन्तानें, और तुम भूमी में दीर्घ काल रह चुके होगे, और स्वयं को भ्रष्ट कर लोगे, और कोई उत्कीर्ण प्रतिमा बना लोगे, या किसी भी वस्तु की समानता, और प्रभु अपने ईश्वर की दृष्टि में बुराई करोगे, उन्हें क्रोध की ओर उकसा देने हेतु:
२६ मैं इस दिन स्वर्ग और पृथ्वी का आह्वान करता हूँ तुम्हारे विरुद्ध साक्ष्य देने हेतु, कि तुम पूर्णतः शीघ्र ही उस भूमी पर से नष्ट हो जाओगे जहाँ तुम यर्दन पार जा रहे हो उस पर अधिकार करने; तुम उस भूमी पर अपने दिनों की वृद्धी नहीं कर पाओगे, बल्कि पूर्णतः नष्ट कर दिए जाओगे।
२७ और प्रभु तुम्हें राष्ट्रों के बीच बखेर देंगे, और तुम संख्या में कम रह जाओगे अन्यप्रजातियों के बीच, जहाँ प्रभु तुम्हारा नेतृत्व कर देंगे।
२८ और वहाँ तुम ईश्वरों की सेवा करोगे, आदमियों के हाथों का काम, लकड़ी और पत्थर, जो न ही देखते हैं, न ही सुनते हैं, न ही खाते हैं, न ही सूंघते हैं।
२९ परन्तु यदि तुम वहाँ से प्रभु अपने ईश्वर को ढूँढोगे, तुम उन्हें पा लोगे, यदि तुम उन्हें अपने समस्त हृदय से और अपनी समस्त आत्मा से ढूँढोगे।
३० जब तुम आपत्तियों में पड़े होगे, और यह सभी बातें तुम पर आ पड़ेंगी, अंतिम दिनो में भी, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की ओर मुड़ जाओगे, और उनकी वाणी के प्रति आज्ञाकारी बन जाओगे;
३१ (क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर एक दयालु ईश्वर हैं;) वह तुम्हें त्यागेंगे नहीं, न ही तुम्हें नष्ट करेंगे, न ही तुम्हारे पित्रों का वह प्रतिज्ञा-पत्र भूलेंगे जिसका उन्होंने उन्हें वचन दे दिया था।
३२ इसलिए अब पूछो उन दिनो के विशय में जो बीत चुके हैं, जो तुमसे पहले थे, उस दिन से लेकर जब ईश्वर ने पृथ्वी पर मनुष्य का सृजन किया था, और स्वर्ग के एक छोर से लेकर दूसरे तक भी पूछो, कि यदि कभी भी इस महान घटना जैसी कोई अन्य घटना कभी घटी है क्या, या इसके जैसी सुनी गई है क्या?
३३ क्या कभी भी लोगों ने ईश्वर की वाणी अग्नी के बीच में से बोलती हुई सुनी है क्या, जैसे तुमने सुनी ली है, और जीवित हो?
३४ या क्या ईश्वर ने प्रयत्न किया है कि जाकर अपने लिए किसी अन्य राष्ट्र के बीच में से एक राष्ट्र ले लें, परीक्षाओं द्वारा, संकेतों द्वारा, और अद्धभुत चमत्कारों के द्वारा, और युद्ध के द्वारा, और एक बलशाली हाथ द्वारा, और एक फैलाई हुई भुजा द्वारा, और बड़े आतंकों द्वारा, उस सभी के अनुसार जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारी दृष्टि के समक्ष मिस्र में तुम्हारे लिए कर दिया था?
३५ तुम्हें ही यह दिखला दिया गया था, ताकि तुम यह जान सको कि प्रभु ही ईश्वर हैं; उनके सिवा और कोई भी नहीं है।
३६ स्वर्ग में से उन्होंने तुम्हें अपनी वाणी सुनवाई, ताकि वह तुम्हें निर्देशित कर सकें: और पृथ्वी पर उन्होंने तुम्हें अपने विशाल अग्नी दिखला दी; और तुमने उनके शब्द अग्नी के बीच में से सुने।
३७ और क्योंकि उन्होंने तुम्हारे पित्रों से प्रेम किया, इसलिए उन्होंने उनका बीज उनके पश्चात चुन लिया, और तुम्हें मिस्र में से अपनी दृष्टि में अपनी बलशाली शक्ति के साथ बाहर निकाल लाए;
३८ तुम्हारे सामने से राष्ट्रों को खदेड़ देने हेतु जो तुम से बड़े और शक्तिशाली हैं, तुम्हें भीतर ले आने हेतु, तुम्हें उनकी भूमी एक विरासत के लिए प्रदान कर देने हेतु, जैसा कि इस दिन है।
३९ इस दिन जान लो इसलिए, और यह अपने हृदय में विचार कर लो, कि प्रभु ऊपर स्वर्ग में ईश्वर हैं, और नीचे पृथ्वी पर: और कोई भी और नहीं है।
४० तुम इसलिए उनके अध्यादेशों, और उनके आदेशों का पालन करोगे, जिनका मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, ताकि तुम्हारे साथ, और तुम्हारे पश्चात तुम्हारी सन्तानों के साथ भला होता रहे, और कि तुम पृथ्वी पर अपने दिनो की वृद्धी कर सको, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर प्रदान करते हैं, अनन्तता के लिए।
४१ तब मूसा ने यर्दन के इस पार तीन नगर पृथक कर दिए सूर्योदय की ओर;
४२ ताकि वह हत्यारा वहाँ भाग सके, जो अपने पड़ौसी को अनभिज्ञता से मार दे, और बीते हुए समय में उस से घृणा न करता हो; और कि उन नगरों में से एक में भाग जाने पर वह जीवित रह सके:
४३ रूबेन-वंशजों के मैदानी राष्ट्र में जँगली-क्षेत्र में बज़र; गाद-वंशजों के गिलद में रमोथ; और मनश्शे-वंशजों के बशान में गोलन।
४४ और यही है वह नियम जिसे मूसा ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष स्थापित किया:
४५ यही हैं वह साक्ष्य, और वह अध्यादेश, और वह न्याय-निर्धारण, जिन्हें मूसा इस्राएल की सन्तानों से बोला, उनके मिस्र में से बाहर निकल आने के पश्चात,
४६ यर्दन के इस पार, बेतपओर के विपरीत घाटी में, एमोरवासियों की राजा सिहोन की भूमी में, जो हेश्बोन में बसता था, जिसे मूसा और इस्राएल की सन्तानों ने पीट दिया, उनके मिस्र में से बाहर निकल आने के पश्चात:
४७ और उन्होंने उसकी भूमी पर अधिकार कर लिया, और बशान के राजा ओग की भूमी पर, एमोरवासियों के दो राजा, जो यर्दन के इस पार सूर्योदय की ओर थे;
४८ अरोर से लेकर, जो अर्नोन नदी के साथ है, सियोन पहाड़ तक भी, जो हरमन है,
४९ और यर्दन के इस पार पूर्व की ओर समस्त मैदान, मैदान के समुद्र तक भी, पिस्गा के जल-स्त्रोतों के तले।
पाँचवाँ अध्याय।
१ और मूसा ने समस्त इस्राएल को पुकार कर उनसे कहा, इस्राएल, तुम सुन लो उन अध्यादेशों और न्याय-निर्धारणों को जिन्हें मैं तुम्हारे कानों में इस दिन बोल रहा हूँ, ताकि तुम उन्हें सीख सको, और रख सको, और उन्हें कर सको।
२ प्रभु हमारे ईश्वर ने हमारे साथ होरब में एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया था।
३ प्रभु ने यह प्रतिज्ञा-पत्र हमारे पित्रों के साथ नहीं, बल्कि हमारे साथ, हमारे ही साथ बनाया, जो हम सभी इस दिन जीवित हैं।
४ प्रभु ने उस पहाड़ में उस अग्नी के बीच में से तुम्हारे साथ आमने-सामने बात-चीत की,
५ (उस समय मैं प्रभु के और तुम्हारे बीच खड़ा था, तुम्हें प्रभु का शब्द बता देने हेतु: क्योंकि तुम उस अग्नी के कारण भयभीत थे, और उस पहाड़ पर ऊपर नहीं गए;) कहते हुए,
६ मैं हूँ प्रभु तुम्हारा ईश्वर, जो तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर लाया, बंध्वा-बेगारी के घराने में से।
७ तुम मेरे समक्ष कोई भी अन्य ईश्वरों को नहीं रखोगे।
८ तुम अपने लिए कोई भी उत्कीर्ण की गई प्रतिमा नहीं बनाओगे, या कोई भी समानता किसी भी वस्तु की जो ऊपर स्वर्ग में है, या जो नीचे पृथ्वी में है, या जो पृथ्वी के तले पानियों में है:
९ तुम स्वयं को उनके प्रति नीचे नहीं झुकाओगे, न ही उनकी सेवा करोगे: क्योंकि मैं प्रभु तुम्हारा ईश्वर एक ईर्षालू ईश्वर हूँ, पित्रों की अधर्मताओं के दण्ड बच्चों पर तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देता हुआ, उनके जो मुझ से घृणा करते हैं;
१० और उन सहस्त्रों के प्रति दया दिखलाता हुआ जो मुझ से प्रेम करते हैं, और मेरे आदेशों का पालन करते हैं।
११ तुम प्रभु अपने ईश्वर का नाम व्यर्थता में नहीं लोगे; क्योंकि प्रभु उसे निर्दोष नहीं ठहराएँगे जो उनका नाम व्यर्थता से लेता है।
१२ सैबथ के दिन का पालन करना उसे पुनीत ठहरा देने के लिए, जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है।
१३ छह दिन तुम श्रम करोगे, और अपना सारा कार्य करोगे:
१४ परन्तु सातवाँ दिन प्रभु तुम्हारे ईश्वर का सैबथ है: उस में तुम कोई भी काम नहीं करोगे, तुम, न ही तुम्हारा बेटा, न ही तुम्हारी बेटी, न ही तुम्हारा नौकर, न ही तुम्हारी नौकरानी, न ही तुम्हारा बैल, न ही तुम्हारा गधा, न ही तुम्हारा कोई भी मवेशी, न ही तुम्हारा परदेशी जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है; ताकि तुम्हारा नौकर और तुम्हारी नौकरानी विश्राम कर सकें, जैसे कि तुम।
१५ और स्मरण में रखना कि तुम मिस्र की भूमी में एक सेवक थे, और कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें वहाँ से एक बलशाली हाथ और एक फैली हुई भुजा से बाहर निकाल लाए: इसलिए प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें सैबथ का दिवस रखने का आदेश दिया था।
१६ अपने पिता और अपनी माता का सम्मान करो, जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है; ताकि तुम्हारे दिनों की वृद्धी हो जाए, और कि तुम्हारे साथ उस भूमी में भला होता रहे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें दे रहे हैं।
१७ तुम हत्या नहीं करोगे।
१८ न ही तुम व्यभिचार करोगे।
१९ न ही तुम चोरी करोगे।
२० न ही तुम अपने पड़ौसी के विरुद्ध झूठा साक्ष्य दोगे।
२१ न ही तुम अपने पड़ौसी की पत्नी का लालच करोगे, न ही तुम अपने पड़ौसी के घर का, उसके खेत का, या उसके नौकर का, या उसकी नौकरानी का, उसके बैल का, या उसके गधे का, या अपने पड़ौसी की किसी भी वस्तु का लोभ करोगे।
२२ यही शब्द प्रभु ने तुम्हारी समस्त सभा के साथ एक प्रचण्ड वाणी के साथ उस पहाड़ में, उस अग्नी के, उस मेघ के, और उस घने श्यामतव के बीच में से बोले: और अधिक शब्द उन्होंने नहीं जोड़े। और उन्होंने उन्हें पत्थर की दो पट्टियों में लिख दिए, और उन्हें मूझे प्रदान कर दीं।
२३ और यह होने को आया, कि जब तुमने उस अन्धकार के बीच में से उस वाणी को सुना, (क्योंकि वह पर्वत अग्नी से ही जल उठा था,) कि तुम मेरे निकट आए, यहाँ तक कि तुम्हारी प्रजातियों के सभी प्रमुख, और तुम्हारे वृद्ध-गण;
२४ और तुमने कहा, देखो, प्रभु हमारे ईश्वर ने हमें अपना गौरव और अपनी महानता दिखला दीं हैं, और हमने उनकी वाणी अग्नी में बीच में से बाहर सुन ली है: हमने इस दिन देख लिया है कि ईश्वर मनुष्य से बात-चीत करते ही हैं, और वह जीवित रहता है।
२५ इसलिए अब हम क्यों मर जाएँ? क्योंकि यह विशाल अग्नी हमारा भक्षण कर देगी: यदि हम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी और अधिक सुनेंगे, तो हम मर जाएँगे।
२६ क्योंकि कौन है वह समस्त माँस में से, जिसने हमारे समान, उन जीवन्त ईश्वर की वाणी को उस अग्नी के बीच में से बाहर बोलते हुए सुन लिया है, और जीवित रहा है?
२७ तुम चले जाओ निकट, और वह सभी कुछ सुन लो जो प्रभु हमारे ईश्वर बोलेंगे: और तुम हमें वह सभी कुछ बता देना जो प्रभु हमारे ईश्वर तुम्हारे साथ बोलेंगे; और हम श्रवण कर लेंगे, और उसे कर देंगे।
२८ और प्रभु ने तुम्हारे शब्दों की वाणी सुनी, जब तुम मेरे साथ बोले थे; और प्रभु ने मुझ से कहा, मैंने इन लोगों के शब्दों की वाणी सुन ली है, जो इन्होंने तुम्हारे साथ बोले हैं: इन्होंने वह सभी कुछ भला बोला है जो इन्होंने बोल दिया है।
२९ काश कि इनके अन्दर ऐसा हृदय होता, कि यह मेरा भय मानते, और सदैव मेरे सभी आदेशों को रखते, ताकि इनके साथ, और इनकी सन्तानों के साथ अनंतता तक भला रह सके!
३० जाओ कह दो इनसे, पुनः अपने तम्बुओं में तुम घुस जाओ।
३१ परन्तु तुम, खड़े हो जाओ तुम यहाँ मेरे साथ, और मैं तुम्हारे साथ वह सभी आदेश, और वह अध्यादेश, और वह न्याय-निर्धारण बोल दूँगा, जिन्हें तुम उन्हें सिखा दोगे, ताकि वह उन्हें उस भूमी में कर सकें जिसे मैं इन्हें उस पर अधिकार कर देने हेतु प्रदान करता हूँ।
३२ इसलिए जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है तुम ध्यान से कर दोगे: तुम दाएँ हाथ की ओर परे नहीं मुड़ोगे न ही बाएँ की ओर।
३३ तुम उन सभी पथों पर चलोगे जिनका आदेश प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें दे दिया है, ताकि तुम जी सको, और कि तुम्हारे साथ भला रह सके, और कि तुम उस भूमी में अपने दिनो की वृद्धी कर सको जिस पर तुम अधिकार करोगे।
छटा अध्याय।
१ अब यही हैं वह आदेश, वह अध्यादेश, और वह न्याय-निर्धारण, जिन्हें प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें सिखाने का आदेश दिया था, ताकि तुम इन्हें उस भूमी में करो जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो:
२ ताकि तुम प्रभु अपने ईश्वर का भय मान सको, उनके सभी अध्यादेशों और उनके आदेशों का पालन करने हेतु, जिनका आदेश मैं तुम्हें देता हूँ, तुम्हें, और तुम्हारे बेटे को, और तुम्हारे बेटे के बेटे को, तुम्हारे जीवन के समस्त दिन; और ताकि तुम्हारे दिनों की वृद्धी हो सके।
३ इसलिए सुन लो इस्राएल, और उसे करने का ध्यान रखो; ताकि उस दूध और मधु से बहती हुई भूमी में तुम्हारे साथ भला रह सके, और कि तुम अत्याधिकता से बृहत् हो सको, जैसी तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर ने तुम्हें प्रतिज्ञा दे दी है।
४ सुन लो ओ इस्राएल: प्रभु हमारे ईश्वर एक ही प्रभु हैं:
५ और तुम प्रभु अपने ईश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय से, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से, और अपनी सम्पूर्ण शक्ति से प्रेम करोगे।
६ और यही शब्द, जिनका मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, तुम्हारे हृदय में होंगे:
७ और तुम इन्हें अपनी सन्तानों को कर्मठता से सिखाओगे, और इनके विषय में बात-चीत करोगे जब तुम अपने घर में बैठते हो, और जब तुम पथ पर चलते जाते हो, और जब तुम नीचे लेटते हो, और जब तुम ऊपर उठते हो।
८ और तुम इन्हें अपने हाथ पर एक प्रतीक हेतु बाँध दोगे, और यह तुम्हारी आँखों के बीच मस्तक-बन्ध जैसे होंगे।
९ और तुम इन्हें अपने घर की बाजू की चौखटों पर, और अपने द्वारों पर लिख दोगे।
१० और यह होगा, जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस भूमी में ला चुके होंगे जिसका वचन उन्होंने तुम्हारे पित्रों, अब्राहम को, इसहाक को, और याकूब को दे दिया था, तुम्हें विशाल और अच्छे नगर दे देने हेतु, जिनका तुमने निर्माण नहीं किया,
११ और अच्छी वस्तुओं से भरे घर, जिन्हें तुमने भरा नहीं, और खुदे हुए कूँएँ, जिन्हें तुमने खोदा नहीं, अंगूर-खेत और जैतून के पेड़, जिन्हें तुमने रोपा नहीं; जब तुम खा कर संतुष्ट हो चुके होगे;
१२ तब सावधान हो जाना कहिं तुम प्रभु को भूल जाओ, जो तुम्हें मिस्र की भूमि में से बाहर ले आए, बंध्वा-बेगारी के घराने में से ही।
१३ तुम प्रभु अपने ईश्वर से डरोगे, और उनकी सेवा करोगे, और उनके नाम से शपथ लोगे।
१४ तुम अन्य ईश्वरों के पीछे नहीं जाओगे, तुम्हारे आस-पास चारों-ओर के ईश्वरों के पीछे;
१५ (क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे बीच एक ईर्षालू ईश्वर हैं) कहिं प्रभु तुम्हारे ईश्वर का क्रोध तुम्हारे विरुद्ध सुलग उठे, और तुम्हें पृथ्वी के चहरे पर से नष्ट कर दे।
१६ तुम प्रभु अपने ईश्वर की परीक्षा नहीं लोगे, जिस प्रकार तुमने मेस्सा में उनकी परीक्षा ली थी।
१७ तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों काम और उनके साक्षयों का, और उनके अध्यादेशों का कर्मठता से पालन करोगे, जिनका उन्होंने तुम्हें आदेश दे दिया है।
१८ और तुम वो जो प्रभु की दृष्टि में सही और अच्छा है उसे करोगे: ताकि तुम्हारे साथ भला रह सके, और कि तुम उस अच्छी भूमी में अंदर जाकर अधिकार जमा सको जिसकी शपथ प्रभु ने तुम्हारे पित्रों को दे दी थी,
१९ तुम्हारे सम्मुख तुम्हारे समस्त शत्रुओं को बाहर खदेड़ देने हेतु, जैसा प्रभु ने बोल दिया है।
२० और जब तुम्हारा बेटा तुम से आने वाले समय में पूछता है, कहता हुआ, इन साक्षयों का, और इन अध्यादेशों का, और इन न्याय-निर्धारणों का क्या अर्थ है, जिनका प्रभु हमारे ईश्वर ने आपको आदेश दिया है?
२१ तब तुम अपने बेटे से कहोगे, हम मिस्र में फैरो के बँधवा-नौकर थे; और प्रभु हमें एक बलशाली हाथ के साथ मिस्र में से बाहर निकाल लाए:
२२ और प्रभु ने मिस्र पर, और फैरो पर, और उसके समस्त घराने पर, हमारी आँखों के सामने ही, बड़े और आतंकमय संकेत और अद्धभुत चमत्कार दिखलाए:
२३ और वह हमें वहीं से बाहर निकाल लाए, ताकि वह हमें भीतर ले आएँ, हमें वह भूमी दे देने हेतु जिसका उन्होंने हमारे पित्रों को वचन दे दिया था।
२४ और प्रभु ने हमें इन सभी अध्यादेशों को कर देने का आदेश दे दिया, प्रभु हमारे ईश्वर से डरने का, हमारी भलाई के लिए ही सदैव, ताकि वह हमें जीवित परिरक्षित रख सकें, जैसा कि इसी दिन।
२५ और यही हमारी नेकी होगी, यदि हम प्रभु हमारे ईश्वर सम्मुख इन सभी आदेशों को करने का ध्यान रखें, जैसा उन्होंने हमें आदेश दे दिया है।
सातवाँ अध्याय।
१ जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस भूमी में अंदर ले आएँगे जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो, और अपने सम्मुख अनेक राष्ट्रों को बाहर निष्कासित कर देंगे, हित्ती-वंशज, और गिरगश-वंशज, और एमोरवासी, और कनानवासी, और पेरिज़वासी, और हिव्वी-वंशज, और यबूसी-वंशज, सात राष्ट्र तुमसे अधिक विशाल और शक्तिशाली;
२ और जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन्हें तुम्हारे समक्ष प्रदान कर देंगे; तो तुम उन पर वार कर दोगे, और उन्हें पूर्णतः नष्ट कर दोगे; तुम उनके साथ कोई भी प्रतिज्ञा-पत्र नहीं बनाओगे, न ही उन्हें करुणा दिखाओगे:
३ म ही तुम उनके साथ विवाह रचाओगे; अपनी बेटी को तुम उसके बेटे को नहीं दोगे, न ही उसकी बेटी को तुम अपने बेटे के लिए लोगे।
४ क्योंकि वह तुम्हारे बेटे को मेरे पीछे चलने से परे मोड़ देंगी, ताकि वह अन्य ईश्वरों की सेवा करें: इस प्रकार प्रभु का क्रोध तुम्हारे विरुद्ध सुलग उठेगा, और तुम्हें अचानक नष्ट कर देगा।
५ बल्कि इस प्रकार तुम उनके साथ करोगे; तुम उनकी बलिवेदियों को तोड़ डालोगे, और उनकी प्रतिमाओं को नष्ट कर डालोगे, और उनके उपवनों को काट डालोगे, और उनकी उत्कीर्ण प्रतिमाओं को अग्नी से भस्म कर डालोगे।
६ क्योंकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति एक पवित्र गण हो: प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें अपने ही प्रति एक विशेष-गण बन जाने हेतु चुन लिया है, उन सभी गणों के ऊपर जो पृथ्वी के चहरे पर हैं।
७ प्रभु ने अपना लगाव तुम्हारे साथ स्थापित नहीं किया, न ही तुम्हें चुना, क्योंकि तुम्हारी संख्या अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक थी; क्योंकि तुम तो सभी लोगों में सबसे कम थे:
८ बल्कि इसलिए कि प्रभु तुम से प्रेम करते थे, और चूँकि वह उस शपथ को रखते जिसका वचन उन्होंने तुम्हारे पित्रों को दे दिया था, प्रभु तुम्हें एक बलशाली हाथ के साथ बाहर निकाल लाए, और बँधवा-नौकरों के घराने में से तुम्हारा मुक्तिभुक्तान कर दिया, मिस्र के राजा फैरो के हाथ से ही।
९ जान लो इसलिए कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर, यही ईश्वर हैं, वही विश्वसनीय ईश्वर, जो उनके साथ अपना प्रतिज्ञा-पत्र और करुणा बनाए रखते हैं जो उनसे प्रेम करते हैं और उनके आदेशों का पालन करते हैं, हज़ार पीढ़ियों तक भी;
१० और उन्हें उनके चेहरे पर भुक्तान लौटा देते हैं जो उनसे घृणा करते हैं, उन्हें नष्ट कर देने हेतु: वह उनसे घृणा करनेवाले के प्रति विलंबन नहीं करेंगे, वह उसे उसके चहरे पर ही भुक्तान लौटा देंगे।
११ इसलिए तुम उन आदेशों को, और उन अध्यादेशों को, और उन न्याय-निर्धारणों को रखोगे, उन्हें कर देने हेतु, जिनका मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ।
१२ इस कारण वश यह होने को आएगा, यदि तुम इन न्याय-निर्धारणों का श्रवण करोगे, और इन्हें रखोगे, और करोगे, कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे प्रति उस प्रतिज्ञा-पत्र और उस करुणा को रख लेंगे जो वचन उन्होंने तुम्हारे पित्रों को दे दिया था:
१३ और वह तुम्हें प्रेम करेंगे, और आशीष देंगे तुम्हें, और गुणा करेंगे तुम्हें: वह तुम्हारे गर्भ के फल को भी आशीष देंगे, और तुम्हारी भूमी के फल को, तुम्हारे अनाज को, तुम्हारे अंगूर-रस को, और तुम्हारे तेल को, तुम्हारे मवेशियों की वृद्धी को, और तुम्हारे भेड़ों के झुण्डों को, उस भूमी में जिसका वचन उन्होंने तुम्हारे पित्रों को तुम्हें प्रदान कर देने हेतु दे दिया था।
१४ तुम सभी लोगों से बढ़कर धन्य होगे: तुम्हारे बीच या तुम्हारे मवेशी के बीच कोई भी नर या मादा बाँझ नहीं होंगे।
१५ और प्रभु तुम्हारे पास से सभी बीमारी परे ले जाएँगे, और तुम पर मिस्र के कोई भी बुरे रोग नहीं डालेंगे, जिन से तुम परिचित हो; बल्कि वह उन्हें उन पर डाल देंगे जो तुमसे घृणा करते हैं।
१६ और तुम उन सभी लोगों का भक्षण कर डालोगे जिन्हें प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करेंगे; तुम्हारी आँख उन पर कोई तरस नहीं खाएगी: न ही तुम उनके ईश्वरों की सेवा करोगे; क्योंकि वह तुम्हारे लिए एक फन्दा बन जाएगा।
१७ यदि तुम अपने हृदय में बोलोगे, यह राष्ट्र तो मुझ से अधिक हैं; मैं इन्हें कैसे बाहर निकालूँगा?
१८ तुम उनसे डरोगे नहीं: बल्कि भली-भाँति स्मरण करोगे कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने फैरो के साथ, और समस्त मिस्र के साथ क्या कर डाला था;
१९ तुम्हारी आँखों ने जो वह विशाल परीक्षाएँ देखीं, और वह संकेत, और वह अद्धभुत चमत्कार, और वह बलशाली हाथ, और फैली हुई भुजा, जिनके द्वारा प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें बाहर निकाल लाए: इसी प्रकार प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन सभी लोगों के साथ कर देंगे जिनसे तुम डरते हो।
२० इसके अतिरिक्त प्रभु तुम्हारे ईश्वर उनके बीच ततईए को भेज देंगे, जब तक कि वह जो बचे रह गए हैं, और स्वयं को तुम से छुपाते हैं, नष्ट हो जाएँ।
२१ तुम उनसे आतंकित नहीं होगे: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे बीच हैं, एक बलशाली और आतंकमय ईश्वर।
२२ और प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन राष्ट्रों को तुम्हारे समक्ष थोड़ा-थोड़ा करके बाहर निकाल देंगे: तुम उन्हें शीघ्रता से समाप्त नहीं करोगे, कहिं खेत के जानवर तुम पर बढ़ चलें।
२३ परन्तु प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन्हें तुम्हें प्रदान कर देंगे, और उन्हें एक शक्तिशाली विद्वंस से नष्ट कर देंगे, उनका विनाश हो जाने तक।
२४ और वह उनके राजाओं को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर देंगे, और तुम उनका नाम स्वर्ग तले नष्ट कर दोगे: जब तक तुम उनका नाश नहीं कर चुकोगे, तब तक तुम्हारे समक्ष कोई भी आदमी खड़ा नहीं रह सकेगा।
२५ उनके ईश्वरों की उत्कीर्ण प्रतिमाओं को तुम अग्नी से भस्म कर डालोगे: तुम उन पर चढ़े हुए चाँदी या सोने का लालच नहीं करोगे, न ही उसे अपने पास रखोगे, कहिं तुम उनके फंदे में फँस जाओ; क्योंकि यह प्रभु तुम्हारे ईश्वर के लिए अति-घृणात्मक हैं।
२६ न ही तुम कोई अति-घृणितता अपने घर में लाओगे, कहिं तुम उसी के सदृश एक शापित वस्तु बन जाओ: बल्कि तुम उस से पूर्णतः द्वेष करोगे, और तुम उस से पूर्णतः घृणा करोगे; क्योंकि वह एक श्रापित वस्तु है।
आठवाँ अध्याय।
१ उन सभी आदेशों को जिनकी मैं तुम्हें इस दिन आज्ञा देता हूँ तुम सावधानी से करोगे, ताकि तुम जी सको, और गुणा हो जाओ, और अन्दर जाकर उस भूमी पर अधिकार कर सको जिसकी शपथ प्रभु ने तुम्हारे पित्रों को दे दी थी।
२ और तुम उस समस्त पथ को स्मरण में रखोगे जिस पर प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने जँगली-क्षेत्र में इन चालीस वर्षों तक तुम्हारा नेतृत्व किया है, तुम्हें विनम्र बना देने हेतु, और तुम्हें सिद्ध कर देने हेतु, यह जान लेने हेतु कि तुम्हारे मन में क्या था, कि यदि तुम उनके आदेशों का पालन करोगे, या नहीं।
३ और उन्होंने तुम्हें विनम्र बनाया, और तुम्हें भूख भुगतवाई, और तुम्हें मन्ना से खिलवाया, जिसे तुमने नहीं जाना, न ही तुम्हारे पित्र जानते थे; ताकि वह तुम्हें यह परिचय दिलवा सकें कि मनुष्य केवल रोटी से ही नहीं जीता है, बल्कि वह उस प्रत्येक शब्द से जीता है, जो प्रभु के मुँह से प्रवृत्त होता है।
४ इन चालीस वर्षों तुम्हारे वस्त्र तुम पर घिस कर फटे नहीं, न ही तुम्हारा पैर सूजा।
५ तुम अपने हृदय में यह विचार भी करोगे, कि, जिस प्रकार एक पुरुष अपने बेटे को लताड़ता है, उसी प्रकार ही प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें लताड़ते हैं।
६ इसलिए तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का पालन करोगे, उनके पथों पर चलने हेतु, और उनसे डरने हेतु।
७ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक अच्छी भूमी में ला रहे हैं, एक भूमी नदियों की, जल-स्त्रोतों की, और गहराईयों की जो घाटियों और पहाड़ियों में से उभरती हैं;
८ गेहूँ, और जौं, और लताओं, और अंजीर के वृक्षों की, और अनानासों की एक भूमी; जैतून के तेल की, और मधु की एक भूमी;
९ एक भूमी जिस में तुम बिना किसी लघुता से रोटी खाओगे, तुम्हें उस में किसी भी वस्तु का आभाव नहीं होगा; एक भूमी जिसके पत्थर लोहे के हैं, और जिसकी पहाड़ियों में से तुम पीतल खोद कर निकालोगे।
१० जब तुम खा चुकोगे और संतुष्ट हो चुकोगे, तब तुम प्रभु अपने ईश्वर को आशीष दोगे उस अच्छी भूमी के लिए जो उन्होंने तुम्हें प्रदान की है।
११ सावधान रहना कि तुम प्रभु अपने ईश्वर को भूल मत जाना, उनके आदेशों का, और उनके न्याय-निर्धारणों का, और उनके अध्यादेशों का पालन न करने हेतु, जिनका मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ:
१२ कहिं जब तुम खा चुकोगे और संतुष्ट हो, और अच्छे घर निर्मित कर चुकोगे, और उन में बसे होगे;
१३ और जब तुम्हारे झुण्ड और तुम्हारे पशु-समूह गुणा हों, और तुम्हारा रजत और तुम्हारा स्वर्ण गुणा हो गया हो, और वह सभी जो तुम्हारे पास है गुणा हो चुका को;
१४ तब तुम्हारा हृदय ऊपर उठ गया हो, और तुम प्रभु अपने ईश्वर को भूल जाओ, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाए, बंध्वा-बेगारी के घराने में से ही;
१५ जो तुम्हें उस विशाल और भयानक जँगली-क्षेत्र में से लाए, जहाँ जलते हुए सर्प, और बिच्छू थे, और अकाल था, जहाँ पानी नहीं था; जो तुम्हारे लिए चकमक की चट्टान में से पानी बाहर निकाल लाए;
१६ जिन्होंने तुम्हें जँगली-क्षेत्र में मन्ना खिलवाया, जिस से तुम्हारे पित्र परिचित नहीं थे, ताकि वह तुम्हें विनम्र कर सकें, और कि वह तुम्हें सिद्ध कर सकें, तुम्हारे अन्त में तुम्हारे साथ भलाई करने हेतु;
१७ और तुम अपने हृदय में बोलो, मेरी शक्ती और मेरे हाथ के बल ने ही मुझे यह घन-सम्पत्ती दिलवाई है।
१८ बल्कि तुम प्रभु अपने ईश्वर का स्मरण करोगे: क्योंकि यह वही हैं जो तुम्हें धन-सम्पत्ती प्राप्त करने की शक्ती प्रदान करते हैं, ताकि वह अपना प्रतिज्ञा-पत्र स्थापित कर सकें जिसकी शपथ उन्होंने तुम्हारे पित्रों को दे दी थी, जैसा कि इस दिन है।
१९ और यह होगा, कि यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर को कतई भी भूल जाते हो, और अन्य ईश्वरों के पीछे-पीछे चल पड़ते हो, और उनकी सेवा करते हो, और उन्हें पूजते हो, मैं तुम्हारे विरुद्ध इस दिन साक्ष्य देता हूँ कि तुम अवश्य ही नष्ट हो जाओगे।
२० उन राष्ट्रों के समान जिन्हें प्रभु तुम्हारे चहरे के सामने नष्ट करते हैं, वैसे ही तुम नष्ट हो जाओगे; क्योंकि तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी के आज्ञाकारी नहीं बने।
नौवाँ अध्याय।
१ इस्राएल सुन लो: तुम इस दिन यर्दन को पार करने वाले हो, अन्दर जाकर अपने से बड़े और अधिक शक्तिशाली राष्ट्रों पर अधिकार करने हेतु, विशाल और स्वर्ग तक क़िलेबन्द नगरों पर,
२ एक गण विशाल और ऊँचे कद लिए, अनकिमों की सन्तानें, जिन्हें तुम जानते हो, और जिनके विषय में तुमने सुना है, कौन अनक की सन्तानों के सामने खड़ा रह सकता है!
३ समझ लो इसलिए इस दिन, कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर वही हैं जो तुम्हारे आगे पार जा रहे हैं; एक भक्षण कर देने वाली अग्नी समान ही वह उन्हें नष्ट कर डालेंगे, और वह उन्हें तुम्हारे चहरे के सामने नीचा कर देंगे: इस प्रकार तुम उन्हें बाहर खदेड़ दोगे, और उन्हें शीघ्रता से नष्ट कर दोगे, जैसा प्रभु ने तुम से कहा है।
४ अपने हृदय में मत बोलना, जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन्हें तुम्हारे समक्ष बाहर निकाल चुकेंगे, कहते हुए, मेरी नेकी के कारण प्रभु मुझे भीतर लाए हैं इस भूमी पर अधिकार करने के लिए: बल्कि इन राष्ट्रों की दुष्टता के कारण प्रभु इन्हें तुम्हारे समक्ष बाहर खदेड़ रहे हैं।
५ तुम्हारी नेकी, या तुम्हारे हृदय की शुचिता के कारण तुम उनकी भूमी पर अधिकार जमाने नहीं जा रहे हो: बल्कि इन राष्ट्रों की दुष्टता के कारण प्रभु इन्हें तुम्हारे समक्ष बाहर खदेड़ रहे हैं, और ताकि वह उस शब्द को क्रियान्वित कर सकें जिसका वचन प्रभु ने तुम्हारे पित्रों, अब्राहम, इसहाक, और याकूब को दे दिया था।
६ इसलिए समझ लो, कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें इस अच्छी भूमी पर तुम्हारी नेकी के कारण अधिकार नहीं दे रहे हैं; क्योंकि तुम तो एक ऐंठी गर्दन वाले लोग हो।
७ स्मरण में रखना, और भूलना मत, कि कैसे तुमने जँगली-क्षेत्र में प्रभु अपने ईश्वर को आक्रोश के प्रति उकसा दिया था: उस दिन से लेकर जब तुमने मिस्र की भूमी में से बाहर प्रस्थान कर लिया था, जब तक तुम इस स्थान में आ पहुँचे हो, तुम प्रभु के विरुद्ध विद्रोही रहे हो।
८ होरेब में भी तुमने प्रभु को आक्रोश के प्रति उत्तेजित कर दिया था, कि प्रभु तुम्हारे साथ क्रोधित थे कि वह तुम्हें नष्ट कर देते।
९ जब मैं उन पत्थर की पट्टियों को ग्रहण करने हेतु उस पहाड़ पर ऊपर चला गया था, उसी प्रतिज्ञा-पत्र की पट्टियाँ जिसे प्रभु ने तुम्हारे साथ बनाया था, तब मैं उस पहाड़ पर चालीस दिन और चालीस रात रहा था, मैंने न ही रोटी खाई न ही पानी पिया:
१० और प्रभु ने मुझे ईश्वर की उँगली से लिखी पत्थर की दो पट्टियाँ प्रदान कर दीं; और उन पर उन सभी शब्दोंनुसार लिखा हुआ था, जो प्रभु ने उस पहाड़ पर सभा के दिवस पर अग्नी के बीच में से तुम्हारे साथ बोले थे।
११ और चालीस दिनों और चालीस रातों के अंत में यह होने को आया, कि प्रभु ने मुझे वह दोनो पत्थर की पट्टियाँ प्रदान कर दीं, प्रतिज्ञा-पत्र की ही पट्टियाँ।
१२ और प्रभु ने मुझ से कहा, उठो, यहाँ से शीघ्रता से नीचे चले जाओ; क्योंकि तुम्हारे लोगों ने, जिन्हें तुम मिस्र में से बाहर निकाल लाए हो, स्वयं को भ्रष्ट कर दिया है: वह तो उस पथ पर से, जो मैंने उन्हें आदेश दिया था, शीघ्रता से ही परे मुड़ कर बाहर चले गए हैं: उन्होंने अपने लिए एक ढलवाँ मूर्ति बना ली है।
१३ इसके अतिरिक्त प्रभु मुझ से बोले, कहते हुए, मैंने देख लिया है इन लोगों को, और, देखो, यह एक ऐंठी गर्दन वाले लोग हैं:
१४ मुझे अकेला छोड़ दो, ताकि मैं इन्हें नष्ट कर दूँ, और स्वर्ग तले इनका नाम मिटा दूँ: और मैं तुम में से इनकी तुलना में एक अधिक शक्तिशाली और अधिक महान राष्ट्र बना दूँगा।
१५ तो मैं मुड़ गया और पहाड़ पर से नीचे उतर आया, और वह पहाड़ अग्नी से जल रहा था: और उस प्रतिज्ञा-पत्र की वह दो पट्टियाँ मेरे दोनो हाथों में थीं।
१६ और मैंने देखा, और देखो, तुम ने प्रभु अपने ईश्वर के विरुद्ध पाप कर दिया था, और तुम ने एक ढलवाँ-बछड़ा बना दिया था: तुम शीघ्र ही उस पथ पर से परे मुड़ गए जो प्रभु ने तुम्हें आदेश दिया था।
१७ और मैंने उन दोनो पट्टियों को लेकर उन्हें अपने दोनो हाथों में से बाहर पटक कर उन्हें तुम्हारी आँखों के समक्ष तोड़ दिया।
१८ और मैं पहले के समान, चालीस दिन और चालीस रात, प्रभु के समक्ष नीचे गिर पड़ा: न ही मैंने रोटी खाई, न ही पानी पिया, तुम्हारे समस्त पापों के कारण जो पाप तुमने कर दिए थे, प्रभु की दृष्टि में दुष्टता करने में, उन्हें क्रोध के प्रति उकसा देने में।
१९ क्योंकि मैं उस क्रोध और ग्रीष्म-रोष से भयभीत था, जिस से प्रभु तुम्हारे विरुद्ध आक्रोशित थे तुम्हें नष्ट कर देने हेतु। परन्तु प्रभु ने उस समय भी मेरा श्रवण कर लिया।
२० और प्रभु हारुन से बहुत क्रोधित थे उसका विध्वंस कर देने तक भी: और मैंने हारुन के लिए भी उसी समय प्रार्थना की।
२१ और मैंने तुम्हारा पाप लेकर, वही बछड़ा जो तुमने बना दिया था, उसे अग्नी से जला डाला, और उसे कूट डाला, और उसे बहुत ही बारीक पीस दिया, जब तक वह धूल समान बन गया था: और मैंने उसकी धूल को उस नदी में पटक डाला जो पहाड़ में से बाहर नीचे आती है।
२२ और तबेराह में, और मेस्सा में, और किब्रोतहत्तावा में, तुमने प्रभु को आक्रोश के प्रति उत्तेजित कर दिया था।
२३ इसी प्रकार जब प्रभु ने तुम्हें कादेशबर्नेय से भेजा, कहते हुए, ऊपर चले जाओ और उस भूमी पर अधिकार कर लो जिसे मैंने तुम्हें प्रदान कर दिया है; तब तुमने प्रभु अपने ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, और तुमने उनका विश्वास नहीं किया, न ही उनकी वाणी का श्रवण किया।
२४ जिस दिन से मैंने तुम्हें जाना है तुम प्रभु के विरुद्ध विद्रोही रहे हो।
२५ तो मैं चालीस दिन और चालीस रात प्रभु के सम्मुख नीचे गिर पड़ा, जैसे मैं पहली बार गिर पड़ा था; क्योंकि प्रभु ने कहा था कि वह तुम्हें नष्ट कर देंगे।
२६ मैंने इसलिए प्रभु से प्रार्थना की, और कहा, हे प्रभु ईश्वर, अपने लोगों और अपनी विरासत को नष्ट न करें, जिसका आपने अपनी महानता द्वारा मुक्तिभुक्तान कर दिया है, जिन्हें आप एक बलशाली हाथ से मिस्र में से बाहर ले आए हैं।
२७ अपने सेवकों अब्राहम, इसहाक, और याकूब का स्मरण करें; इन लोगों के हठीलेपन को न देखें, न ही इनकी दुष्टता को, न ही इनके पाप को:
२८ कहिं वह भूमी जहाँ से आप हमें बाहर ले आए हैं बोले, क्योंकि प्रभु इन्हें उस भूमी में भीतर लाने में असक्षम थे जिसकी उन्होंने उन्हें प्रतिज्ञा दी थी, और क्योंकि वह उनसे घृणा करते थे, वह उन्हें मार डालने के लिए जँगली-क्षेत्र में बाहर निकाल लाए हैं।
२९ तथापि यह आपके लोग और आपकी विरासत हैं, जिन्हें आप अपनी बलशाली शक्ति से और अपनी फैली हुई भुजा से बाहर ले आए हैं।
दसवाँ अध्याय।
१ उस समय प्रभु ने मुझ से कहा, पहले जैसी पत्थर की दो पट्टियाँ उत्कीर्ण कर लो, और मेरे पास पहाड़ पर ऊपर आ जाओ, और तुम एक लकड़ी का संदूक बना लो।
२ और मैं इन पट्टियों पर उन शब्दों को लिखूँगा जो उन पहली पट्टियों में थे, जिन्हें तुमने तोड़ डाला, और तुम इन्हें उस संदूक में रख दोगे।
३ और मैंने बबूल की लकड़ी का एक संदूक बनाया, और पहले जैसी पत्थर की दो पट्टियाँ उत्कीर्ण कर दीं, और ऊपर पहाड़ पर चला गया, उन दोनो पट्टियों को अपने हाथ में रखता हुआ।
४ और उन्होंने उन पट्टियों पर वह दस आदेश लिख दिए, उस पहले लेखानुसार, जो प्रभु ने तुम्हारे साथ पहाड़ में बोले थे उस अग्नी के बीच में से सभा के दिवस पर: और प्रभु ने उन्हें मुझे प्रदान कर दिया।
५ और मैं मुड़ा और पहाड़ पर से नीचे आ गया, और उन पट्टियों को उस संदूक में रख दिया जिसे मैंने बना दिया था; और वहीं वह हैं, जैसा प्रभु ने मुझे आदेश दे दिया था।
६ और इस्राएल की सन्तानों ने यकन की सन्तानों के बीरोथ से अपनी यात्रा ली मोसेरा तक: वहीं हारुन मर गया, और वहीं उसे दफ़ना दिया गया था; और उसके बेटे एलाज़र ने पुरोहित-पद पर उसके स्थान में सेवा की।
७ वहाँ से उन्होंने गदगोदा तक यात्रा की; और गदगोदा से यतबथ तक, पानी की नदियों की एक भूमी।
८ उस समय प्रभु ने लेवी प्रजाति को प्रभु के संदूक को ढोने हेतु पृथक कर दिया, प्रभु के समक्ष सेवा करने हेतु खड़ा होने के लिए, और इस दिन तक उनके नाम में आशीष देने के लिए।
९ इस कारण वश लेवी के पास अपने भाई-जनो के साथ कोई भी भाग, न ही विरासत है; प्रभु ही उसकी विरासत हैं, उसके अनुसार जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उसे प्रतिज्ञा दे दी थी।
१० और मैं पहली बार के अनुसार पहाड़ पर चालीस दिन और चालीस रात रहा; और प्रभु ने मेरा उस समय भी श्रवण किया, और प्रभु ने तुम्हें नष्ट करना नहीं चाहा।
११ और प्रभु ने मुझ से कहा, उठो, लोगों के सामने अपनी यात्रा कर लो, ताकि वह अंदर जाकर उस भूमी पर अधिकार कर सकें, जिसको उन्हें प्रदान कर देने की शपथ मैंने उनके पित्रों को दी थी।
१२ और अब, इस्राएल, प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम से क्या माँग रहे हैं, बस कि तुम प्रभु अपने ईश्वर का भय मानो, उनके सभी पथों पर चलो, और उनसे प्रेम करो, और प्रभु अपने ईश्वर की अपने सम्पूर्ण हृदय से और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से सेवा करो,
१३ प्रभु के आदेशों और उनके अध्यादेशों का पालन करो, जो तुम्हारे भले के लिए ही मैं इस दिन तुम्हें आदेश देता हूँ?
१४ देखो, वह स्वर्ग, और स्वर्गों का वह स्वर्ग प्रभु तुम्हारे ईश्वर का ही है, पृथ्वी भी, उस सभी के साथ जो उस में है।
१५ बस केवल प्रभु को तुम्हारे पित्रों से उनसे प्रेम करने हेतु लगाव था, और उन्होंने उनके बीज को उनके पश्चात चुन लिया, तुम्हें ही, समस्त लोगों के ऊपर, जैसा यह इस दिन है।
१६ इसलिए अपने हृदय के आगे की चमड़ी का ख़तना कर दो, और एक ऐंठी गर्दन और मत लिए रहो।
१७ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ईश्वरों के ईश्वर हैं, और प्रभुओं के प्रभु, एक महान ईश्वर, बलशाली, और आतंकमय, जो किसी भी व्यक्ति के प्रति पक्षपात नहीं करते हैं, न ही घूस लेते हैं:
१८ वह सन्तानहीनों और विधवा का न्याय क्रियान्वित करते हैं, और परदेशी से प्रेम करते हैं, उसे रोटी और कपड़ा प्रदान करने में।
१९ इसलिए तुम परदेशी से प्रेम करो: क्योंकि तुम मिस्र की भूमी में परदेशी थे।
२० तुम प्रभु अपने ईश्वर से डरोगे; और उनकी सेवा करोगे, तुम उनके साथ चिपटे रहोगे, और उनके नाम से शपथ लोगे।
२१ वही तुम्हारी प्रशन्सा हैं, और वही तुम्हारे ईश्वर हैं, जिन्होंने तुम्हारे लिए यह महान और आतंकमय कार्य किए हैं, जिन्हें तुम्हारी आँखों ने देख लिया है।
२२ तुम्हारे पित्र नीचे मिस्र में सत्तर व्यक्तियों के साथ चले गए थे; और अब प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें स्वर्ग के सितारों समान एक जनौघ बना दिया है।
ग्यारहवाँ अध्याय।
१ इसलिए तुम प्रभु अपने ईश्वर के साथ प्रेम करोगे, और उनका उत्तराधिकार, और उनके अध्यादेशों को, और उनके न्याय-निर्धारणों को, और उनके आदेशों को रखोगे, सदैव।
२ और तुम इस दिन जान जाओ: क्योंकि मैं तुम्हारी सन्तानों के साथ नहीं बोल रहा हूँ जिन्होंने जाना नहीं है, और जिन्होंने प्रभु तुम्हारे ईश्वर का लताड़ना नहीं देखा है, न ही उनकी महानता, उनका बलशाली हाथ, और उनकी फैली हुई भुजा,
३ और उनके चमत्कार, और उनके कार्य, जो उन्होंने मिस्र के बीच मिस्र के राजा फैरो के साथ, और उसकी समस्त भूमी के साथ किए थे;
४ और उन्होंने मिस्र की सेना के साथ, उनको घोड़ों के साथ, और उनके रथों के साथ, क्या कर दिया था; कैसे उन्होंने लाल-समुद्र के पानी को उनके ऊपर बहा दिया था जैसे वह तुम्हारा पीछा कर रहे थे, और कैसे प्रभु ने उन्हें इस दिन तक नष्ट कर दिया है;
५ और तुम्हारे साथ उन्होंने जँगली-क्षेत्र में क्या किया था, जब तक तुम इस स्थान में पहुँचे;
६ और उन्होंने रूबेन के बेटे, एलिआब के बेटों, दतान और अबीरम, के साथ क्या कर दिया था: कैसे पृथ्वी ने अपना मूँह खोल कर उन्हें, और उनके घरबरों को, और उनके तम्बुओं को, और उनके समस्त पदार्थ को जो उनके अधिकार में था, इस्राएल के बीचों-बीच, निगल लिया था:
७ परन्तु तुम्हारी आँखों ने प्रभु के वह समस्त कार्य देख लिए हैं जो उन्होंने किए थे।
८ इसलिए तुम उन सभी आदेशों का पालन करोगे जो मैं तुम्हें इस दिन दे रहा हूँ, ताकि तुम बलवान बन सको, और अंदर जाओ और भूमी पर अधिकार कर लो, जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो;
९ और कि तुम भूमी में अपने दिनो की वृद्धी कर सको, जिसकी शपथ प्रभु ने तुम्हारे पित्रों को दी थी उन्हें और उनके बीज को प्रदान कर देने हेतु, एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है।
१० क्योंकि वह भूमी, जहाँ तुम उस पर अधिकार करने भीतर जा रहे हो, मिस्र की भूमी के जैसी नहीं है, जहाँ से तुम बाहर निकले हो, जहाँ तुमने अपना बीज बोया, और उसे अपने पैर से पानी दिया, एक साग-पात के उद्यान समान:
११ परन्तु वह भूमी जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो, पहाड़ियों और घाटियों की एक भूमी है, और वह स्वर्ग की वर्षा का पानी पीती है:
१२ एक भूमी जिसका प्रभु ध्यान रखते हैं: प्रभु तुम्हारे ईश्वर की आँखें सैदाव उस पर रहती हैं, वर्ष के आरम्भ से लेकर वर्ष के अन्त तक भी।
१३ और यह होने को आएगा, यदि तुम उन आदेशों का कर्मठता से श्रवण करोगे जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, प्रभु अपने ईश्वर से प्रेम करने का, और अपने सम्पूर्ण हृदय और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से उनकी सेवा करने का,
१४ कि मैं तुम्हें तुम्हारी भूमी की वर्षा ऋतुनुसार प्रदान कर दूँगा, वो पहली वर्षा और वो पिछली वर्षा, ताकि तुम अपने अनाज को, और अपने अंगूर-रस को, और अपने तेल को एकत्रित कर लो।
१५ और मैं तुम्हारे मवेशी के लिए तुम्हारे खेतों में घास भेज दूँगा, ताकि तुम खा सको और तृप्त हो जाओ।
१६ स्वयं के प्रति सावधान रहना, कि तुम्हारा हृदय धोखे में न पड़ जाए, और तुम परे मुड़ कर, अन्य ईश्वरों के सेवा करो, और उन्हें पूजो;
१७ और तब प्रभु का आक्रोश तुम्हारे विरुद्ध सुलग उठेगा, और वह स्वर्ग को बँद कर देंगे, ताकि कोई वर्षा न हो, और कि वह भूमी अपना फल न उपजाए; और कहिं तुम उस अच्छी भूमी पर से शीघ्रता से ही नष्ट हो जाओ जो प्रभु तुम्हें देते हैं।
१८ इसलिए तुम इन मेरे शब्दों को अपने हृदय में और अपनी आत्मा में रख लोगे, और उन्हें एक प्रतीक के लिए अपने हाथ पर बांध दोगे, ताकि वह तुम्हारी आँखों के बीच मस्तक-बन्ध बन जाएँ।
१९ और तुम उन्हें अपनी सन्तानों को सिखाओगे, उन्हें बोलते हुए जब तुम अपने घर में बैठते हो, और जब तुम पथ पर चलते जाते हो, जब तुम नीचे लेटते हो, और जब तुम ऊपर उठते हो।
२० और तुम इन्हें अपने घर की बाजू की चौखटों पर, और अपने द्वारों पर लिख दोगे:
२१ ताकि तुम्हारे दिन, और तुम्हारी सन्तानों के दिन, पृथ्वी पर स्वर्ग के दिनो समान उस भूमी में बहुगुणित हो सकें, जिसकी शपथ प्रभु ने तुम्हारे पित्रों को प्रदान करने की दी थी।
२२ क्योंकि यदि तुम इन सभी आदेशों का कर्मठता से पालन करोगे जिनका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, उन्हें करने हेतु, प्रभु अपने ईश्वर से प्रेम करने का, उनके सभी पथों में चलने का, और उनके साथ चिपटे रहने का;
२३ तब प्रभु इन सभी राष्ट्रों को तुम्हारे समक्ष बाहर खदेड़ देंगे, और तुम अपने से अधिक विशाल और शक्तिशाली राष्ट्रों पर अधिकार जमा लोगे।
२४ वह प्रत्येक स्थान जिसे तुम्हारे पैरों के तलवे रौंदेंगे तुम्हारा बन जाएगा: जँगली-क्षेत्र और लेबानोन से लेकर, उस नदी से, फरात नदी से लेकर, उस दूरतम सागर तक भी तुम्हारी सीमा होगी।
२५ तुम्हारे सामने कोई भी आदमी खड़ा नहीं रह पाएगा: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर उस समस्त भूमी पर जिसको तुम रौंदोगे, तुम्हारे प्रति भय को और तुम्हारे प्रति आतंक को डाल देंगे, जैसा उन्होंने तुम से कह दिया है।
२६ देखो, मैं तुम्हारे समक्ष इस दिन एक आशीर्वाद और एक श्राप स्थापित कर रहा हूँ;
२७ एक आशीर्वाद, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का आज्ञा पालन करोगे, जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश देता हूँ:
२८ और एक श्राप, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का आज्ञा पालन नहीं करोगे, बल्कि उस पथ पर से परे हट जाते हो जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश देता हूँ, अन्य ईश्वरों के पीछे जाने के लिए, जिन से तुम परिचित नहीं हो।
२९ और यह होने को आएगा, जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस भूमी में ला चुके होंगे जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो, कि तुम इस आशीर्वाद को गरज़िम पहाड़ पर डाल दोगे, और उस श्राप को आयबल पहाड़ पर।
३० क्या वह यर्दन के उस पार नहीं हैं क्या, उस पथ के साथ जहाँ सूर्य ढलता है, कनान-वासियों की भूमी में, जो मोरे के मैदानों के साथ, गिलगल के विपरीत उस खुले समतल क्षेत्र में बसते हैं?
३१ क्योंकि तुम यर्दन को पार कर अन्दर जाओगे उस भूमी पर अधिकार करने जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं, और तुम उस पर अधिकार जमा लोगे, और उस में बस जाओगे।
३२ और तुम उन सभी अध्यादेशों और न्याय-निर्धारणों को करने की सावधानी बरतोगे जिन्हें मैं तुम्हारे सामने इस दिन स्थापित कर रहा हूँ।
बारहवाँ अध्याय।
१ यही हैं वह अध्यादेश और न्याय-निर्धारण, जिन्हें करने की सावधानी तुम उस भूमी में बरतोगे, जिसे तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर तुम्हें अधिकार कर लेने हेतु प्रदान कर रहे हैं, उन समस्त दिन जो तुम पृथ्वी पर जीते हो।
२ तुम पूर्णतः से उन सभी स्थानो को नष्ट कर दोगे, जिन में वह राष्ट्र जिन पर तुम अधिकार करोगे अपने ईश्वरों की सेवा करते थे, ऊँचे पर्वतों पर, और पहाड़ियों पर, और प्रत्येक हरे वृक्ष के तले:
३ और तुम उनकी बलिवेदियों को नीचे तोड़ डालोगे, और उनके स्तम्भों को तोड़ डालोगे, और उनके उपवनो को अग्नी से भस्म कर डालोगे; और तुम उनके ईश्वरों की उत्कीर्ण प्रतिमाओं को नीचे काट डालोगे, और उनके नामों को उस स्थान में से नष्ट कर डालोगे।
४ तुम इस रीति से प्रभु अपने ईश्वर के साथ नहीं करोगे।
५ बल्कि तुम उस स्थान पर जिसका प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारी समस्त प्रजातियों में से चयन करेंगे अपने नाम को रखने हेतु, उन्हीं के निवास स्थान की ही तुम खोज करना, और वहीं तुम आया करना:
६ और वहीं तुम अपने जले-चढ़ावों को, और अपनी बलियों को, और अपने दसवें भागों को, और अपने हाथ के उठाए-चढ़ावों को, और अपने प्रणों को, और अपनी स्वेच्छा-आहुतियों को, और अपने झुण्डों और अपने पशु-समूहों के पहलौठों को, ले आओगे:
७ और वहीं तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख खाओगे, और तुम उस सभी में हर्ष मनाओगे जिस में तुम अपने हाथ डालते हो, तुम और तुम्हारे घर-बार, जिन में प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आशीष दे दिया है।
८ इन रीतियोंनुसार तुम नहीं करोगे जो हम यहाँ इस दिन करते रहते हैं, प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ भी उसी की दृष्टि में उचित है।
९ क्योंकि तुम अभी तक उस विश्राम और उस विरासत तक नहीं पहुँचे हो, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान कर रहे हैं।
१० परन्तु जब तुम यर्दन पार जाओगे, और उस भूमी में बस जाओगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें विरासत में ले लेने हेतु प्रदान कर रहे हैं, और जब वह तुम्हें तुम्हारे आस-पास चारों-ओर तुम्हारे शत्रुओं से विश्राम प्रदान कर देंगे, ताकि तुम सुरक्षा में बस जाओ;
११ तब एक स्थान होगा जिसका चयन प्रभु तुम्हारे ईश्वर करेंगे अपने नाम को वहाँ निवासित कर देने हेतु; वहीं तुम वह सब कुछ ले आना जो मैं तुम्हें आदेश देता हूँ; अपने जले-चढ़ावे, और तुम्हारी बालियाँ, तुम्हारे दसवें भाग, और तुम्हारे हाथ का उठाया-चढ़ावा, और तुम्हारे सभी चुने हुए प्रण जिनका तुम प्रभु के प्रति प्रण लेते हो:
१२ और तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख हर्ष मनाओगे, तुम, और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारी बेटियाँ, और तुम्हारे नौकर, और तुम्हारी नौकरानियाँ, और वह लेवी-वंशज जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है; क्योंकि उसके पास तुम्हारे साथ कोई भी भाग या विरासत नहीं है।
१३ अपने प्रति सावधान रहना कि तुम जो भी स्थान देखो उस में अपने जले-चढ़ावों को मत चढ़ाना:
१४ बल्कि उस स्थान में जो प्रभु तुम्हारी प्रजातियों में से एक में चुनेंगे, वहीं तुम अपने जले-चढ़ावों को चढ़ाओगे, और वहीं तुम वह सभी करोगे जो मैं तुम्हें आदेश देता हूँ।
१५ फिर भी तुम अपने सभी दरवाज़ों में मार कर खा सकते हो, जो कुछ तुम्हारी लालसा हो, प्रभु तुम्हारे ईश्वर के आशीर्वदानुसार जो उन्होंने तुम्हें प्रदान किया है: अस्वच्छ और स्वच्छ उस में से खा सकते हैं, चिकारे को, और मृग को भी।
१६ बस केवल तुम रक्त को नहीं खाओगे; तुम उसे धरती पर पानी समान उँडेल दोगे।
१७ तुम अपने अनाज का, या अपने अंगूर-रस का, या अपने तेल का, या अपने झुण्डों और पशु-समूहों के पहलौठों का दसवाँ भाग, न ही अपने प्रणों में से कोई भी जिसका तुम प्रण लेते हो, न ही अपनी स्वेच्छा-आहुतियाँ, या अपने हाथ के उठाए-चढ़ावे को अपने दरवाज़ों के भीतर खाओगे:
१८ बल्कि तुम इन्हें अवश्य ही प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख उस स्थान में जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर चुनेंगे, तुम, और तुम्हारा बेटा, और तुम्हारी बेटी, और तुम्हारा नौकर, और तुम्हारी नौकरानी, और वह लेवी-वंशज जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है, खाओगे; और तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख उस सभी में हर्ष मनाओगे जिस में भी तुम अपने हाथ डालते हो।
१९ अपने प्रति सावधान रहना कि तुम लेवी-वंशज का त्याग मत कर देना जितने भी समय तुम पृथ्वी पर जीते हो।
२० जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर अपनी प्रतिज्ञानुसार तुम्हारी सीमा का विस्तार करेंगे, और तुम कहोगे, मैं माँस खाऊँगा क्योंकि मेरी आत्मा माँस खाने के लिए लालसाहित है; तुम माँस खा सकते हो, जो कुछ भी तुम्हारी आत्मा लालसा कर रही हो।
२१ यदि वह स्थान जिसका चयन प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने किया है तुम से बहुत दूरी पर हो, तब तुम अपने झुण्ड में से और अपने पशु-समूह में से जो प्रभु ने तुम्हें दिया है, जैसा मैंने तुम्हें आदेश दिया है, मार कर खा लोगे, और तुम अपने दरवाज़ों में वह खाओगे जो कुछ भी तुम्हारी आत्मा लालसा करती हो।
२२ जैसे वह चिकारा और वह मृग खाया जाता है, वैसे ही तुम उन्हें खा लोगे: अस्वच्छ और स्वच्छ एक ही समान उन्हें खा लेंगे।
२३ बस केवल निश्चित रहना कि तुम रक्त को मत खा लेना: क्योंकि रक्त ही जीवन है; और तुम जीवन को माँस के साथ नहीं खाओगे।
२४ तुम उसे नहीं खाओगे; तुम उसे धरती पर पानी समान उँडेल दोगे।
२५ तुम उसे नहीं खाओगे; ताकि तुम्हारे साथ, और तुम्हारे पश्चात तुम्हारी सन्तानों के साथ भला रह सके, जब तुम वही करोगे जो प्रभु की दृष्टि में उचित है।
२६ बस केवल उन पवित्र वस्तुओं को जो तुम्हारे पास हैं, और अपने प्रणों को, तुम लेकर उस स्थान में चले जाओगे जिसका चयन प्रभु करेंगे:
२७ और तुम प्रभु अपने ईश्वर की बलिवेदी पर अपने जले-चढ़ावों का माँस और रक्त चढ़ा दोगे: और तुम्हारी बलियों का रक्त प्रभु तुम्हारे ईश्वर की बलिवेदी पर उँडेल दिया जाएगा, और तुम उस माँस को खा लोगे।
२८ इन सभी शब्दों को ध्यान से सुन लो जो मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, ताकि तुम्हारे साथ, और तुम्हारे पश्चात तुम्हारी सन्तानों के साथ भला रह सके, जब तुम वही करोगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर की दृष्टि में अच्छा और उचित है।
२९ जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे समक्ष राष्ट्रों को काट डालेंगे, जहाँ तुम उन पर अधिकार करने जा रहे हो, और तुम उन्हें निकाल कर, उनकी भूमी में बस जाते हो;
३० अपने प्रति सावधान रहना कि तुम्हारे समक्ष उनका नाश हो जाने के पश्चात, तुम उनका अनुसरण करते हुए फँस न जाओ; और कि तुम उनके ईश्वरों की पूछ-ताछ करो, कहते हुए, इन राष्ट्रों ने अपने ईश्वरों की कैसे सेवा की थी? मैं तो उसी प्रकार करूँगा।
३१ तुम इस प्रकार प्रभु अपने ईश्वर के साथ नहीं करोगे: क्योंकि प्रभु के प्रति वह प्रत्येक अति-घृणिता, जिस से वह घृणा करते हैं, उन्होंने अपने ईश्वरों के साथ कर डाली है; यहाँ तक कि अपने बेटों और अपनी बेटियों को भी उन्होंने अपने ईश्वरों के प्रति अग्नी में भस्म कर डाला है।
३२ वह जो कोई भी बात मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, करने का ध्यान रखना: तुम उस में जोड़ोगे नहीं, न ही उस में से घटाओगे।
तेरहवाँ अध्याय।
१ यदि तुम्हारे बीच कोई पैग़म्बर, या सपनों का स्वप्नदर्शक उठ खड़ा होता है, और तुम्हें कोई संकेत या चमत्कार देता है,
२ और वह संकेत या चमत्कार घट जाता है, जिसके विषय में वह तुम से बोला था, कहता हुआ, चलो हम दूसरे ईश्वरों का अनुसरण करते हैं, जिन्हें तुम नहीं जानते, और हम उनकी सेवा करें;
३ तो तुम उस पैग़म्बर, या सपनों के स्वप्नदर्शक के शब्दों का श्रवण नहीं करोगे: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारी परीक्षा ले रहे हैं, यह जान लेने के लिए कि यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय से और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से प्रेम करते हो?
४ तुम प्रभु अपने ईश्वर के पीछे चलोगे, और उनसे डरोगे, और उनके आदेशों को रखोगे, और उनकी वाणी का आज्ञापालन करोगे, और तुम उनकी सेवा करोगे, और उनके साथ चिपटे रहोगे।
५ और वह पैग़म्बर, या वह सपनों का स्वप्नदर्शक मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा; क्योंकि उसने तुम्हें उन प्रभु तुम्हारे ईश्वर से परे मोड़ने के लिए बोला है, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ले आए, और तुम्हारा उस बंध्वा-बेगारी के घराने में से बाहर मुक्तिभुक्तान कर दिया, तुम्हें उस पथ पर से परे खदेड़ने के लिए जिस में चलने का प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आदेश दे दिया था।
६ यदि तुम्हारा भाई, तुम्हारी माँ का बेटा, या तुम्हारा बेटा, या तुम्हारी बेटी, या तुम्हारे गले से लगी पत्नी, या तुम्हारा मित्र जो तुम्हारी ही अपनी आत्मा समान है, तुम्हें चुपके से बहकाए, कहते हुए, चलो हम दूसरे ईश्वरों की जाकर सेवा करते हैं, जिन्हें तुम नहीं जानते, तुम, न ही तुम्हारे पित्र;
७ उन लोगों के ईश्वर जो तुम्हारे चारों-ओर हैं, तुम्हारे निकट, या तुम से बहुत दूरी पर, पृथ्वी के एक छोर से लेकर पृथ्वी के दूसरे छोर तक भी;
८ तुम उसे स्वीकृति नहीं दोगे, न ही उसका श्रवण करोगे; न ही तुम्हारी आँख उस पर तरस खाएगी, न ही तुम उसे बक्शोगे, न ही तुम उसे छुपाओगे:
९ बल्कि तुम उसे अवश्य ही मार डालोगे; तुम्हारा हाथ उस पर पहले होगा उसे मृत्यु के घाट उतार देने के लिए, और बाद में सभी लोगों का हाथ।
१० और तुम उस पर पत्थरों से पथराव कर दोगे ताकि वह मर जाए; क्योंकि उसने तुम्हें उन प्रभु तुम्हारे ईश्वर से परे खदेड़ देने की इच्छा की है, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ले आए, उस बंध्वा-बेगारी के घराने में से ही।
११ और समस्त इस्राएल सुनेगा, और डरेगा, और ऐसी कोई भी दुष्टता अब और नहीं करेगा जैसी यह तुम्हारे बीच है।
१२ यदि तुम अपने नगरों में से किसी एक में यह सुनोगे, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें वहाँ निवास करने हेतु प्रदान कर दिया है, कहते हुए,
१३ कुछ लोग, बलियल की सन्तानें तुम्हारे बीच में से बाहर निकल चली हैं, और उन्होंने अपने नगर के निवासियों को वापस खींच लिया है, कहते हुए, चलो हम दूसरे ईश्वरों की जाकर सेवा करते हैं, जिन्हें तुम नहीं जानते;
१४ तब तुम पूछ-ताछ करोगे, और जाँच करोगे, और कर्मठता से पूछोगे; और देखो, यदि यह सच हो, और यह बात निश्चित, कि ऐसी अति-घृणितता तुम्हारे बीच की गई है;
१५ तुम अवश्य ही उस नगर के निवासियों पर तलवार की धार से वार कर दोगे, उसे पूर्णतः नष्ट करते हुए, और उस सभी को जो उस में है, और उसके मवेशी को, तलवार की धार से।
१८ और तुम उसकी समस्त लूट को उसकी सड़क के बीच में एकत्रित कर लोगे, और उस नगर को, और उसकी समस्त लूट के प्रत्येक अंश को अग्नी से जला डालोगे, प्रभु अपने ईश्वर के लिए ही: और वह अनन्तता के लिए एक ढेर रहेगा; उसका निर्माण पुनः नहीं किया जाएगा।
१७ और उस शापित वस्तु का कोई भी अन्श तुम्हारे हाथ के साथ नहीं चिपटेगा: ताकि प्रभु अपने क्रोध की क्रूर्ता से मुड़ जाएँ, और तुम्हें करुणा प्रदान करें, और तुम्हारे प्रति सम्वेदना व्यक्त करें, और तुम्हें बहुगुणित कर दें, जैसा उन्होंने तुम्हारे पित्रों को वचन दे दिया है;
१८ जब तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण करोगे, उनके समस्त आदेशों का पालन करने के लिए जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, उसे करने हेतु जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर की दृष्टि में उचित है।
चौदहवाँ अध्याय।
१ तुम प्रभु अपने ईश्वर की सन्तानें हो: तुम स्वयं पर चीरे नहीं काटोगे, न ही मृतकों के लिए अपनी आँखों के बीच कोई भी गंजापन बनाओगे।
२ क्योंकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति एक पवित्र गण हो: और प्रभु ने तुम्हें अपने ही प्रति एक विशेष-गण बन जाने हेतु चुन लिया है, उन सभी गणों के ऊपर जो पृथ्वी के चहरे पर हैं।
३ तुम कोई भी अति-घृणित वस्तु नहीं खाओगे।
४ यही वह जानवर हैं जिन्हें तुम खाओगे: साँड, भेड़, और बकरा,
५ मृग, और चिकारा, और लाल-हिरन, और जँगली-बकरा, और श्वेत-चिकारा, जँगली-साँड, और पहाड़ी-भेड़।
६ और प्रत्येक जानवर जो खुर को विभाजित करता है, और चीरे को दो खुरों में चीरता है, और जो जुगाली करता है जानवरों के बीच, उसे तुम खाओगे।
७ तथापि इन्हें तुम उन में से नहीं खाओगे जो जुगाली करते हैं, या उन में से जो खुर को विभाजित करते हैं: जैसे कि ऊँट, और ख़रगोश, और चट्टानी-बिज्जू: क्योंकि यह जुगाली तो करते हैं, परन्तु खुर विभाजित नहीं करते हैं; यह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं।
८ और वह सूअर, यद्यपि वह खुर विभाजित करता है, तद्यपि वह जुगाली नहीं करता है; वह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ है: तुम उनके माँस में से नहीं खाओगे, न ही उनके शव को छुओगे।
९ उन सभी में से जो पानियों में हैं तुम खाओगे: वह सभी जिनके पास मछली-पँख और शल्क हों तुम खाओगे:
१० और वह सभी जिनके पास मछली-पँख और शल्क नहीं हैं, तुम उन्हें नहीं खाओगे; यह तुम्हारे प्रति अस्वच्छ हैं।
११ सभी स्वच्छ पंछियों में से तुम खाओगे।
१२ परन्तु यह वह हैं जिन में से तुम नहीं खाओगे: गरुड़, और बाज़, और कुरर,
१३ बाज़, और चील, और गिद्ध अपने प्रकार का,
१४ और प्रत्येक बड़ा-कऊआ अपने प्रकार का;
१५ और उल्लू, और रात-शिकरा, और जल-कुक्कुट, और शिकरा अपने प्रकार का,
१६ और छोटा-उल्लू, और बड़ा-उल्लू, और हंस,
१७ और जलकाग, और गरुड़-गिद्ध, और बुज्जा,
१८ और सारस, और बगुला अपने प्रकार का, और टिटहरी, और चमगादड़।
१९ और प्रत्येक रेंगता हुआ जन्तु जो उड़ता है, तुम्हारे प्रति अस्वच्छ होगा: उन्हें खाया नहीं जाएगा।
२० परन्तु समस्त स्वच्छ उड़ने वालों में से तुम खा सकते हो।
२१ जो भी जन्तु स्वयं से ही मर जाता है, तुम उस में से नहीं खाओगे: तुम उसे उस परदेशी को दे दोगे जो तुम्हारे द्वारों में है, ताकि वह उसे खा सके; या तुम उसे किसी विदेशी को बेच दोगे: क्योंकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति एक पवित्र-गण हो। तुम किसी हलवान को उसकी माँ के दूध में नहीं उबालोगे।
२२ तुम अपने बीज की समस्त बढ़ौतरी का जो खेत साल-दर-साल उपजाता है, दसवाँ भाग सच में भरोगे।
२३ और तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख, उस स्थान में जिसका वह चयन करेंगे अपने नाम को रखने हेतु, अपने अनाज का, अपने अंगूर-रस का, अपने तेल का, अपने झुण्डों और पशु-समूहों के पहलौठों का दसवाँ भाग खाओगे; ताकि तुम सदैव प्रभु अपने ईश्वर का भय मानना सीख सको।
२४ और यदि वह पथ तुम्हारे लिए बहुत ही लम्बा हो, कि तुम उसे उठा कर नहीं ले जा सकते हो; या वह स्थान तुम से बहुत ही दूर हो, जिसका प्रभु तुम्हारे ईश्वर चयन करेंगे अपने नाम को वहाँ रखने हेतु, जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आशीष दे दिया होगा:
२५ तब तुम उसे पैसे में परिवर्तित कर दोगे, और उस पैसे को अपने हाथ में बाँध लोगे, और उस स्थान चले जाओगे जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर चुनेंगे:
२६ और तुम उस पैसे को प्रदान कर दोगे जिस किसी भी वस्तु के लिए तुम्हारी आत्मा लालसा करेगी, साँड के लिए, या भेड़ के लिए, या अंगूर-रस के लिए, या तीक्ष्ण-अंगूर-रस, या जिस किसी भी वस्तु की इच्छा तुम्हारी आत्मा करेगी: और तुम वहीं प्रभु अपने ईश्वर के समक्ष खाओगे, और तुम हर्ष मनाओगे, तुम और तुम्हारा घर-बार,
२७ और वह लेवी-वंशज जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है; तुम उसका त्याग नहीं करोगे; क्योंकि उसके पास तुम्हारे साथ कोई भी भाग या विरासत नहीं है।
२८ तीन वर्षों के अन्त में तुम उस वर्ष की अपनी वृद्धी का समस्त दसवाँ भाग ले आओगे, और उसे अपने दरवाज़ों के भीतर रख दोगे:
२९ और वह लेवी-वंशज, (क्योंकि उसके पास तुम्हारे साथ कोई भी भाग या विरासत नहीं है,) और वह परदेशी, और अनाथ, और वह विधवा जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर हैं, आएँगे, और खाएँगे और तृप्त हो जाएँगे; ताकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें तुम्हारे हाथ के उस सभी कार्य में जो तुम करते हो, आशीष दे सकें।
पंद्रहवाँ अध्याय।
१ प्रत्येक सात वर्षों के अन्त में तुम एक ऋण-भुक्तान बनाओगे।
२ और यह उस ऋण-भुक्तान की रीति है: प्रत्येल ऋण-दाता जो अपने पड़ौसी को कोई भी ऋण देता है उसका ऋण-भुक्तान कर देगा; वह उसकी अपने पड़ौसी से या अपने भाई से वसूली नहीं करेगा; क्योंकि यह प्रभु का ऋण-भुक्तान कहलाया जाता है।
३ किसी विदेशी से तुम उसकी पुनः वसूली कर सकते हो: परन्तु वह तुम्हारा जो तुम्हारे भाई भाई के पास है तुम्हारा हाथ उसका भुक्तान करेगा;
४ सिवाय जब तुम्हारे भी कोई भी दरिद्र नहीं होगा; क्योंकि प्रभु तुम्हें उस भूमी में विशालता से आशीष देंगे जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत हेतु अधिकार करने हेतु प्रदान करते हैं:
५ केवल यदि तुम सावधानी से प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण करोगे, इन सभी आदेशों को करने का ध्यान देने हेतु जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ।
६ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें आशीष देते हैं, जैसा उन्होंने तुम्हें वचन दिया था: और तुम कई राष्ट्रों को उधार दोगे, परन्तु तुम उधार नहीं लोगे; और तुम कई राष्ट्रों पर राज्य करोगे, परन्तु वह तुम पर राज्य नहीं करेंगे।
७ यदि तुम्हारे बीच उस भूमी में जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं तुम्हारे दरवाज़ों में तुम्हारे भाई जनो में से कोई एक दरिद्र व्यक्ति हो, तो तुम अपने हृदय को कठोर नहीं बनाओगे, न ही अपने दरिद्र भाई के प्रति अपनी मुट्ठी बँद करोगे:
८ बल्कि तुम उसके प्रति अपनी मुट्ठी पूरी खोल दोगे, और तुम उसे उसकी आवशक्तानुसार अवश्य ही समुचित उधार दे दोगे, जो कुछ भी उसे आभाव हो।
९ सावधान रहना कि तुम्हारे दुष्ट हृदय में कोई विचार न हो, कहता हुआ, वह सातवाँ वर्ष, मुक्ति-भुक्तान का ही वर्ष तो निकट ही है; और तुम्हारी नज़र तुम्हारे दरिद्र भाई के विरुद्ध बुरी बन जाए, और तुम उसे कुछ भी न दो; और वह प्रभु से तुम्हारे विरुद्ध रो पड़े, और यह तुम्हारे प्रति पाप बन जाए।
१० तुम अवश्य ही उसे दोगे, और तुम्हारा हृदय दुखी नहीं होएगा जब तुम उसे देते हो: क्योंकि इसी ही बात के लिए प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें तुम्हारे समस्त कार्यों में आशीष दे देंगे, और उस सभी में जिस में तुम अपना हाथ डालते हो।
११ क्योंकि दरिद्र भूमी पर से कभी समाप्त नहीं होंगे: इसलिए मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, कहता हुआ, अपना हाथ तुम पूरा खोल दोगे अपने भाई के प्रति, दरिद्र के प्रति, और गरीब के प्रति, अपनी भूमी में।
१२ और यदि तुम्हारा भाई, कोई इब्रानी पुरुष, या कोई इब्रानी स्त्री, तुम्हें बेच दिए गए हों, और छह साल तुम्हारे सेवा करे; तब सातवें साल में तुम उसे अपने पास से स्वतंत्र चला जाने दोगे।
१३ और जब तुम उसे अपने पास से स्वतंत्र बाहर भेजते हो, तो तुम उसे ख़ाली हाथ नहीं जाने दोगे:
१४ तुम उसे अपने पशु-समूह में से, और अपने खलिहान में से, और अपने अंगूर-रस के कोल्हू में से उदारता से सुसज्जित कर दोगे: उसी में से जिस से प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आशीष दिया है तुम उसे प्रदान कर दोगे।
१५ और तुम स्मरण में रखोगे कि तुम मिस्र की भूमी में एक बंध्वा-दास से, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारा मुक्ति-भुक्तान किया था: इसलिए मैं तुम्हें इस दिन इस बात का आदेश दे रहा हूँ।
१६ और यह होगा, यदि वह तुमसे कहे, मैं आपसे दूर नहीं जाऊँगा; क्योंकि वह तुमसे और तुम्हारे घराने से प्रेम करता है, क्योंकि उसके साथ तुम्हारे साथ भला रहा;
१७ तब तुम एक सूआ लोगे, और उसे उसके कान में से अपने द्वार पर भेद दोगे, और वह सदैवत्वता के लिए तुम्हारा नौकर बन जाएगा। और अपनी दासी के लिए भी तुम इसी ही प्रकार करोगे।
१८ यह तुम्हारे लिए कठिन नहीं प्रतीत होगा, जब तुम उसे अपने पास से स्वतंत्र भेज देते हो; क्योंकि छह साल तुम्हारी सेवा करने से उसका मोल तुम्हारे प्रति एक दुगुने भाड़े के नौकर जितना रहा है: और प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस सभी में आशीष दे देंगे जो तुम करते हो।
१९ तुम अपने झुण्ड में से और अपने पशु-समूह में से बाहर आने वाले सभी पहलौठे नरों को प्रभु अपने ईश्वर के प्रति पुनीत ठहरा दोगे: और तुम अपने साँड के पहलौठे के साथ कोई भी काम नहीं करोगे, न ही अपने भेड़ों के पहलौठे को तुम कतरोगे।
२० तुम उसे प्रति-वर्ष प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख खाओगे उस स्थान में जिसे प्रभु चुनेंगे, तुम और तुम्हारा घर-बार।
२१ और यदि उस में कोई भी खोट हो, मानो कि वह लंगड़ा हो, या अन्धा, या कोई भी अन्य बुरा खोट हो उसमें, तो तुम उसकी प्रभु अपने ईश्वर के प्रति बलि नहीं चढ़ाओगे।
२२ तुम उसे अपने दरवाज़ों के भीतर खा लोगे: अस्वच्छ और स्वच्छ व्यक्ति उन्हें एक ही समान खाएँगे, चिकारे और मृग के समान ही।
२३ बस केवल तुम उसके रक्त को नहीं खाओगे; तुम उसे धरती पर पानी के समान उँडेल दोगे।
सोलहवाँ अध्याय।
१ अबीब के महीने को मानना, और पार-करने को रख लेना प्रभु अपने ईश्वर के प्रति: क्योंकि अबीब के महीने में प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें रात्रि में मिस्र में से बाहर ले आए।
२ इसलिए तुम अपने पशु-समूह और झुण्ड में से, प्रभु अपने ईश्वर के प्रति पार-करने की बलि चढ़ाओगे, उस स्थान में जिसका चयन प्रभु अपने नाम को रखने हेतु करेंगे।
३ तुम उसके साथ कोई भी खमीरदार रोटी नहीं खाओगे; सात दिन उसके साथ तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे, व्यथा की रोटी ही; क्योंकि तुम हड़बड़ी में ही मिस्र मी भूमी में से बाहर निकले थे: ताकि तुम अपने जीवन के समस्त दिन उस दिन का स्मरण कर सको जब तुम मिस्र की भूमी में से बाहर आए थे।
४ और कोई भी खमीरदर रोटी सात दिनो तक तुम्हारी सीमाओं में नहीं देखी जाएगी; न ही उस माँस का कोई भी अन्श जिसकी तुमने उस प्रथम दिन संध्या के समय बलि चढ़ाई थी सारी रात सुबह तक रहेगा।
५ तुम अपने किसी भी दरवाज़े के भीतर जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं, पार-करने की बलि नहि चढ़ाओगे:
६ परन्तु उस स्थान में जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर अपने नाम को रखने के लिए चुनेंगे, वहीं तुम संध्या के समय, सूर्य के ढलने पर, उस ऋतु में जब तुम मिस्र से बाहर निकल आए थे, पार-करना चढ़ा दोगे।
७ और तुम उसे भून कर उस स्थान में खाओगे जिसका चुनाव प्रभु तुम्हारे ईश्वर करेंगे: और सुबह तुम मुड़कर अपने तम्बुओं में चले जाओगे।
८ छह दिन तुम बेख़मीरी रोटी खाओगे: और सातवें दिन पर प्रभु तुम्हारे ईश्वर के प्रति एक गम्भीर सभा आयोजित होगी: तुम उस में कोई भी काम नहीं करोगे।
९ सात सप्ताह तुम अपने लिए गिन लोगे: उन सात सप्ताहों की गिनती तुम उस समय से आरम्भ करोगे जब तुम अनाज पर हँसिया चलाने लगते हो।
१० और तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति सप्ताहों का भोज रखोगे अपने हाथ की एक स्वेच्छा आहुति की भेंट के साथ, जिसे तुम दे दोगे, जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आशीष दिया है:
११ और तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख हर्ष मनाओगे, तुम, और तुम्हारा बेटा, और तुम्हारी बेटी, और तुम्हारा नौकर, और तुम्हारी नौकरानी, और वह लेवी-वंशज जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर है, और वह परदेशी, और वह अनाथ, और वह विधवा, जो तुम्हारे बीच हैं, उस स्थान में जिसका प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने अपना नाम रखने हेतु चयन कर लिया है।
१२ और तुम स्मरण में रखोगे कि तुम मिस्र में एक बंध्वा-दास थे: और तुम इन अध्यादेशों का पालन करोगे और इन्हें करोगे।
१३ तुम तम्बुओं के भोज को सात दिन मनाओगे, जब तुमने अपने खलिहान और अपने अंगूर-रस-कोल्हू की उपज को अन्दर एकत्रित कर लिया होगा:
१४ और तुम अपने भोज में हर्ष मनाओगे, तुम, और तुम्हारा बेटा, और तुम्हारी बेटी, और तुम्हारा नौकर, और तुम्हारी नौकरानी, और वह लेवी-वंशज, वह परदेशी, और वह अनाथ, और वह विधवा, जो तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर हैं।
१५ सात दिन तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति उस स्थान में जो प्रभु चुनेंगे एक गम्भीर-भोज रखोगे: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें तुम्हारी समस्त वृद्धी में, और तुम्हारे हाथों के समस्त कार्यों में आशीष देंगे, इसलिए तुम अवश्य हर्ष मनाओगे।
१६ साल में तीन बार सभी नर प्रभु तुम्हारे ईश्वर के सम्मुख प्रस्तुत होंगे, उस स्थान में जिसे वह चुनेंगे; बेख़मीरी रोटी के भोज पर, और सप्ताहों के भोज पर, और तम्बुओं के भोज पर: और वह प्रभु के समक्ष ख़ाली हाथ नहीं प्रस्तुत होंगे:
१७ प्रत्येक व्यक्ति अपने सामर्थ्यानुसार देगा, प्रभु तुम्हारे ईश्वर के उस आशीर्वदानुसार जो उन्होंने तुम्हें दिया है।
१८ अपने सभी दरवाज़ों पर तुम न्यायाधीष और अफ़सरों को नियुक्त करोगे, जिन्हें प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं, अपनी प्रजातियों के सर्वत्र में: और वह लोगों का न्याय करेंगे न्यायपूर्ण न्याय-निर्धारणों के साथ।
१९ तुम न्याय-निर्धारण को विकृत नहीं करोगे; तुम लोगों के प्रति पक्षपात नहीं करोगे, न ही घूस खाओगे: क्योंकि घूस विद्वानों की आँखों को अन्धा बना देती है, और नेकों के शब्दों को विकृत कर देती है।
२० तुम उसी का अनुसरण करोगे जो पूर्णता से न्यायपूर्ण है, ताकि तुम जी सको, और उस भूमी को विरासत में ले सको जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं।
२१ तुम प्रभु अपने ईश्वर की बलिवेदी के निकट, जिसे तुम बनाओगे, अपने लिए कोइ भी वृक्षों का उपवन नहीं रोपोगे।
२२ न ही तुम अपने लिए कोई भी प्रतिमा खड़ी करोगे; जिस से प्रभु तुम्हारे ईश्वर घृणा करते हैं।
सत्रहवाँ अध्याय।
१ तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति किसी भी कलंकित या खोट लिए साँड या भेड़ की बली नहीं चढ़ाओगे: क्योंकि वह प्रभु तुम्हारे ईश्वर के लिए एक अति-घृणितता है।
२ यदि तुम्हारे बीच तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं, कोई पुरुष या स्त्री पाई जाती है, जिसने प्रभु तुम्हारे ईश्वर की दृष्टि में दुष्टता कर दी है, उनके प्रतिज्ञा-पत्र का उल्लंघन कर देने में,
३ और उसने जाकर अन्य ईश्वरों की सेवा की है, और उनकी पूजा की है, सूर्य की, या चंद्रमा की, या स्वर्ग की सेना में से किसी की भी, जो मैंने आदेश नहीं दिया;
४ और यह तुम्हें बता दिया गया हो, और तुमने उसे सुन लिया हो, और कर्मठता से छान-बिन कर ली हो, और देखो, वह सत्य हो, और यह बात निश्चित हो, कि ऐसी अति-घृणितता इस्राएल में कर दी गई है:
५ तब तुम उस पुरुष या उस स्त्री को अपने दरवाज़ों पर आगे ले आओगे, जिसने यह दुष्ट बात कर दी है, उसी पुरुष या उस स्त्री को ही, और उन पर पत्थरों से पथराव कर दोगे, उनके मर जाने तक।
६ दो गवाहों या तीन गवाहों के मूँह से उसे मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा जो मृत्यु के योग्य है; परन्तु एक गवाह के मूँह से वह मृत्यु के घाट नहीं उतारा जाएगा।
७ गवाहों के ही हाथ सबसे पहले उस पर रखे जाएँगे उसे मृत्यु के घाट उतार देने हेतु, और उसके पश्चात सभी लोगों के हाथ। इस प्रकार तुम बुराई को अपने बीच में से हटा दोगे।
८ यदि तुम्हारे लिए न्याय-निर्धारण में कोई बहुत ही कठिन मसला उठता है, रक्त और रक्त के बीच, दलील और दलील के बीच, और चोट और चोट के बीच, तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर मतभेद के मसले ही: तब तुम उठ कर, उस स्थान में तुम ऊपर चले जाओगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर चुनेंगे;
९ और तुम उन पुरोहितों उन लेवी-वंशजों, और उस न्यायाधीष के पास आ जाओगे, जो उन दिनो में होगा, और पूछ-ताछ करोगे; और वह तुम्हें न्याय-निर्धारण का शब्द बता देंगे:
१० और तुम उसी शब्दानुसार करोगे, जो वह तुम्हें बताएँगे जो उस स्थान के हैं जो प्रभु चुनेंगे; और तुम ध्यान से उस सभी के अनुसार करोगे जो वह तुम्हें निर्देश देंगे:
११ नियम के निर्णयानुसार ही जो वह तुम्हें सिखाएँगे, और उस न्याय-निर्धारणानुसार ही जो वह तुम्हें बताएँगे, तुम करोगे: तुम उस शब्द से परे नहीं मुड़ोगे जो वह तुम्हें बताएँगे, दाएँ हाथ की ओर, या बाएँ की ओर।
१२ और वह पुरुष जो अपनी ही उपधारणा से करेगा, और उस पुरोहित का श्रवण नहीं करेगा जो वहाँ प्रभु तुम्हारे ईश्वर के सम्मुख सेवा करने हेतु खड़ा है, या उस न्यायाधीष का, वही पुरुष मर जाएगा: और तुम बुराई को इस्राएल से परे हटा दोगे।
१३ और सभी लोग सुनेंगे, और डरेंगे, और अब और अधिक अपनी ही उपधारणा से नहीं करेंगे।
१४ जब तुम उस भूमी में प्रवेश कर चुकोगे जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान कर रहे हैं, और उस पर अधिकार कर लोगे, और उस में वहाँ बस जाओगे, और कहोगे, मैं अपने ऊपर एक राजा को स्थापित करूँगा, उन सभी राष्ट्रों के जैसा जो मेरे आस-पास हैं;
१५ तुम निश्च्य से उसे ही अपने ऊपर राजा स्थापित करोगे जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर चुनेंगे: अपने ही भाई-जनो में से अपने ऊपर तुम एक राजा स्थापित करोगे: अपने ऊपर तुम किसी परदेशी को जो तुम्हारा भाई नहीं है, स्थापित नहीं करोगे।
१६ परन्तु वह अपने लिए घोड़ों को बहुगुणित नहीं करेगा, न ही लोगों को मिस्र में वापस जाने के लिए भेजेगा, ताकि वह घोड़ों को बहुगुणित करे: चूँकि प्रभु ने तुम से कहा है, तुम अब से लेकर उस पथ पर वापस फिर कभी नहीं लौटोगे।
१७ न ही वह अपने लिए पत्नियों को बहुगुणित करेगा, ताकि उसका हृदय परे न मुड़ जाए: न ही वह अपने लिए चाँदी और सोने को अति-बहुगुणित करेगा।
१८ और यह होगा, कि जब वह अपने राज्य के सिंहासन पर बैठता है, कि वह अपने लिए इस नियम की एक प्रतिलिपि एक पुस्तक में लिख लेगा, उस में से जो उन पुरोहितों उन लेवी-वंशजों के समक्ष है:
१९ और वह उसके साथ रहेगी, और वह उस में से अपने जीवन के समस्त दिन पढ़ाई करेगा: ताकि वह प्रभु अपने ईश्वर का भय मानना सीख सके, इस नियम के समस्त शब्दों और इन अध्यादेशों का पालन करने हेतु, इन्हें करने के लिए:
२० ताकि उसका हृदय उसके भाई-जनो के ऊपर न उठ जाए, और कि वह आदेश से परे न मुड़ जाए, दाएँ हाथ की ओर, या बाएँ की ओर: इस उद्देश्य से कि वह अपने राज्य में अपने, और अपनी सन्तानों के दिनो की वृद्धी कर सके, इस्राएल के बीच।
अट्ठारहवाँ अध्याय।
१ इस्राएल के साथ पुरोहितों उन लेवी-वंशजों, और लेवी की समस्त प्रजाति का कोई भाग या विरासत नहीं होंगे: वह प्रभु की अग्नी से बनी आहुतियों को, और उनकी विरासत को खाएँगे।
२ इसलिए उनके पास उनके भाई-जनो के बीच कोइ भी विरासत नहीं होगी: प्रभु ही उनकी विरासत हैं, जैसा उन्होंने उनसे कहा है।
३ और यह लोगों की ओर से पुरोहित का भाग होगा, उनकी ओर से एक बलि चढ़ाते हैं, भले ही वह साँड हो या भेड़; और वह पुरोहित को वह कंधा, और दो गाल, और पेट की थैली देंगे।
४ अपने अनाज का, और अपने अंगूर-रस का, और अपने तेल का प्रथम-फल, और अपनी भेड़ की पहली ऊन, तुम उसे दे दोगे।
५ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उसे तुम्हारी समस्त प्रजातियों में से बाहर चुन लिया है, प्रभु के में सेवा करने के लिए खड़ा रहने हेतु, उसे और उसके बेटों को सदैवत्वता के लिए।
६ और यदि कोई लेवी-वंशज समस्त इस्राएल में से तुम्हारे किसी भी दरवाज़े में से बाहर निकल आता है, जहाँ उसने अल्पवास किया था, और अपने मन की सम्पूर्ण इच्छा से उस स्थान में आ जाता है जो प्रभु चुनेंगे;
७ तब वह प्रभु अपने ईश्वर के नाम में सेवा करेगा, अपने सभी भाई-जनो उन लेवी-वंशजों के समान, जो वहाँ प्रभु के समक्ष खड़े रहते हैं।
८ उनके पास खाने के लिए एक समान भाग होंगे, उसकी पैतृक-सम्पत्ती की बिकरी के मोल के अतिरिक्त।
९ जब तुम उस भूमी में आ जाते हो जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें प्रदान करते हैं, तुम उन राष्ट्रों की रीतियोंनुसार करना नहीं सीखोगे।
१० तुम्हारे बीच कोई भी नहीं पाया जाएगा जो अपने बेटे को या अपनी बेटी को अग्नी में से पार भिजवाता हो, या जो ज्योतिष-ज्ञान का प्रयोग करता हो, जादू-टोना करने वाला, या कोई इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों वाला, या चुड़ैल,
११ या सम्मोहनी-विद्या वाला, या प्रेत-प्राणों का ओझा, या कोई तांत्रिक, या मृतकों को जगाने वाला।
१२ चूँकि वो सभी जो यह कार्य करते हैं प्रभु के प्रति एक अति-घृणितता हैं: और इन्हीं अति-घृणितताओं के कारण ही प्रभु तुम्हारे ईश्वर इन्हें तुम्हारे सामने से बाहर खदेड़ रहे हैं।
१३ तुम प्रभु अपने ईश्वर के साथ परिपूर्ण बनोगे।
१४ क्योंकि इन्हीं राष्ट्रों ने, जिन पर तुम अधिकार करोगे, जादू-टोना करने वालों, और ज्योतिषियों का श्रवण किया था: परन्तु जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें ऐसा करने की अनुमती नहीं दी है।
१५ प्रभु तुम्हारे ईश्वर मेरे समान तुम्हारे लिए तुम्हारे बीच में से तुम्हारे भाई-जनो में से एक पैग़म्बर को उठ खड़ा कर देंगे; उन्हीं का तुम श्रवण करोगे;
१६ उस सभी के अनुसार जो तुमने होरेब में प्रभु अपने ईश्वर से माँग की थी, कहते हुए, मुझे प्रभु मेरे ईश्वर की वाणी और अधिक मत सुनने दो, न ही मुझे इस विशाल अग्नी को और अधिक देखने दो, ताकि मैं न मरूँ।
१७ और प्रभु ने मुझ से कहा, इन्होंने भला बोला है जो इन्होंने बोला है।
१८ मैं तुम्हारे समान इनके लिए इनके भाई-जनो के बीच में से एक पैग़म्बर उठाऊँगा, और अपने शब्दों को उसके मूँह में डाल दूँगा; और वह उनसे वह सभी जो मैं उसे आदेश दूँगा बोल देगा।
१९ और यह होने को आएगा, कि जो कोई भी मेरे शब्दों का श्रवण नहीं करेगा जो वह मेरे नाम में बोलेगा, मैं उस से पूछ-ताछ करूँगा।
२० परन्तु वह पैगमबर, जो मेरे नाम में एक शब्द बोलने की परिकल्पना करेगा, जो मैंने उसे बोलने के लिए आदेश नहीं दिया है, या वह अन्य ईश्वरों के नामों में बोलेगा, वही पैग़म्बर मर जाएगा।
२१ और यदि तुम अपने हृदय में बोलते हो, हम यह कैसे जानेंगे वह शब्द जो प्रभु ने नहीं बोला है?
२२ जब कोई पैग़म्बर प्रभु के नाम में बोलता है, यदि उसकी होने नहीं घटती है, न ही होने को आती है, वही है वह बात जो प्रभु ने नहीं बोली है, बल्कि उस पैग़म्बर ने परिकल्पना से उसे बोला है: तुम उस से नहीं डरोगे।
उन्नीसवाँ अध्याय।
१ जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उन राष्ट्रों को काट डाला होगा, जिनकी भूमी प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, और तुम उन्हें निष्कासित कर देते हो, और उनके नगरों में और उनके घरों में बस जाते हो;
२ तुम भूमी के बीच अपने लिए तीन नगरों को पृथक कर दोगे, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें अधिकार करने हेतु देते हैं।
३ तुम अपने लिए एक पथ उद्यत करोगे, और उस भूमी की सीमाओं को, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, तीन भागों में विभाजित कर दोगे, ताकि प्रत्येक हत्यारा वहाँ भाग सके।
४ और यह उस हत्यारे की स्थिति है, जो वहाँ भागेगा, ताकि वह जी सके: जो कोई भी अपने पड़ौसी को अनभिज्ञता से मार देता है, जिस से उसने पूर्व समय में घृणा नहीं की थी;
५ जैसे जब कोई आदमी अपने साथी के साथ वन में लकड़ी काटने जाता है, और उसका हाथ पेड़ को नीचे काट डालने के लिए कुल्हाड़े से वार करता है, और कुल्हाड़ा का सर उस पर से फिसल कर उसके साथी के सर पर जा पड़ता है कि वह मर जाए; तो वह उन नगरों में से एक में भाग जाएगा, और जीएगा:
६ कहिं वह रक्त का प्रतिषोधी उस हत्यारे का पीछा करे, जब उसका हृदय गरम ही हो, और वह उस तक पहुँच जाए क्योंकि वह पथ लम्बा है, और उसे मार डाले; जब कि वह मृत्यु का दोषी नहीं था, चूँकि उसने उसके साथ बीते समय में घृणा नहीं की थी।
७ इस कारण वश मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, तुम अपने लिए तीन नगर पृथक कर दोगे।
८ और जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारी सीमा को बढ़ाते हैं, जैसा कि उन्होंने तुम्हारे पित्रों को वचन दिया था,और तुम्हें वह समस्त भूमी प्रदान कर दें जो उन्होंने तुम्हारे पित्रों को दे देने की प्रतिज्ञा ली थी;
९ यदि तुम इन समस्त आदेशों का पालन करोगे इन्हें करने हेतु, जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, प्रभु अपने ईश्वर से प्रेम करने का, और सदैव उनके पथों पर चलने का; तब तुम तीन और नगरों को अपने लिए जोड़ लोगे, इन तीनों के अतिरिक्त:
१० ताकि निर्दोष रक्त तुम्हारी भूमी में न बहे, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत के लिए दे रहे हैं, और तो रक्त तुम पर आ पड़े।
११ परन्तु यदि कोई भी आदमी अपने पड़ौसी से घृणा करता हो, और उसके लिए घाट लगाए बैठा हो, और उसके विरुद्ध उठ खड़ा हो जाए, और उस पर घातक वार कर दे कि वह मर जाए, और इन में से किसी एक नगर में भाग जाए:
१२ तब उसके नगर के वृद्ध भिजवाएँगे और उसे वहाँ से निकाल लाएँगे, और उसे रक्त के प्रतिषोधी के हाथ में प्रदान कर देंगे, ताकि वह मर जाए।
१३ तुम्हारी आँख उस पर तरस नहीं खाएगी, बल्कि तुम निर्दोष रक्त का दोष इस्राएल से परे हटा दोगे, ताकि तुम्हारे साथ भला रह सके।
१४ तुम अपने पड़ौसी का सीमा-चिंन्ह नहीं हटाओगे, जिसे उन बीते समय वालों ने तुम्हारी विरासत में स्थापित कर दिया है, जिसकी तुम उस भूमी में विरासत लोगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें अधिकार करने के लिए दे रहे हैं।
१५ एक गवाह किसी आदमी के विरुद्ध किसी भी अधर्मता, या किसी भी पाप के लिए, उस पाप में जो वह पाप करता है, नहीं उठ खड़ा होगा: दो गवाहों के मूँह से, या तीन गवाहों के मूँह से, वह बात स्थापित की जाएगी।
१६ यदि कोई झूठा गवाह किसी आदमी के विरुद्ध उठ कर उस पर दोष लगाता है;
१७ तब वह दोनो, जिनके बीच अनबन है, प्रभु के सम्मुख, उन दिनो के पुरोहितों और न्यायाधीषों के सम्मुख खड़े हो जाएँगे;
१८ और वह न्यायाधीष कर्मठता से छान-बिन करेंगे: और, देखो, यदो वह गवाह एक झूठा गवाह हो, और उसने अपने भाई के विरुद्ध झूठी गवाही दी है;
१९ तब तुम उसके साथ वही कर दोगे, जो उसने अपने भाई के प्रति करवा देने का विचार किया था: इस प्रकार तुम अपने बीच में से बुराई को हटा दोगे।
२० और शेष लोग सुनेंगे, और डरेंगे, और आगे से ऐसी कोई और बुराई तुम्हारे बीच नहीं करेंगे।
२१ और तुम्हारी आँख तरस नहीं खाएगी; बल्कि जान जान के लिए जाएगी, आँख आँख के लिए, दाँत दाँत के लिए, हाथ हाथ के लिए, पाँव पाँव के लिए।
बीसवाँ अध्याय।
१ जब तुम अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध करने बाहर निकलते हो, और तुम घोड़े, और रथ, और अपने से अधिक लोग देखते हो, तो तुम उनसे भयभीत मत होना: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे साथ हैं, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ऊपर ले आए।
२ और यह होगा, जब तुम संग्राम के निकट आ गए हो, वह पुरोहित लोगों के निकट आकर बोलेगा,
३ और उनसे कहेगा, सुनो ओ इस्राएल, तुम इस दिन अपने शत्रुओं के विरुद्ध संग्राम के लिए आ गए हो: अपने हृदयों को शिथिल मत होने डो, डरो मत, और काँपो मत, न ही उनके कारण आतंकित को;
४ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर वही हैं तो तुम्हारे साथ जाते हैं, तुम्हारे शुआतरुओं के विरुद्ध तुम्हारे लिए लड़ाई करने, तुम्हें बचा लेने हेतु।
५ और वह अफ़सर लोगों से बोलेंगे, कहते हुए, वह कौन है यहाँ जिसने एक नए घर का निर्माण किया है, और उसे समर्पित नहीं किया है? उसे वापस अपने घर चले जाने दो, कहिं वह युद्ध में मर जाए, और कोई अन्य पुरुष उसे समर्पित करे।
६ और वह कौन सा पुरुष है जिसने कोई अंगूर-खेत रोपा हो, और उस में से अभी तक खाया न हो? उसे भी वापस अपने घर चले जाने दो, कहिं वह युद्ध में मर जाए, और कोई अन्य पुरुष उस में से खा ले।
७ और वह कौन सा पुरुष है जिसने किसी स्त्री से मंगनी कर ली हो, और उसने उसे लिया न हो? उसे वापस अपने घर चले जाने दो, कहिं वह युद्ध में मर जाए, और कोई अन्य पुरुष उसे ले ले।
८ और वह अफ़सर इसके अतिरिक्त लोगों से बोलेंगे, और वह कहेंगे, वह कौन सा पुरुष है जो डरपोक और कायर है? उसे वापस अपने घर चले जाने दो, कहिं उसके भाई-जनो का हृदय भी उसके हृदय के जैसे पिघल न जाए।
९ और यह होगा, जब उन अफ़सरों ने लोगों से बोलने का अन्त कर दिया होगा, कि वह लोगों का नेतृत्व करने हेतु सेनाओं के कप्तान बनाएँगे।
१० जब तुम किसी नगर के निकट उसके विरुद्ध युद्ध करने निकट आते हो, तब उसके प्रति शान्ति की घोषणा करना।
११ और यह होगा, कि यदि वह तुम्हें शान्ति का उत्तर देता है, और तुम्हारे प्रति खुल जाता है, तब यह होगा, कि उस नगर में पाए जाने वाले वह सभी लोग तुम्हारे करदाता बन जाएँगे, और वह तुम्हारी सेवा करेंगे।
१२ और यदि वह तुम्हारे साथ शान्ति नहीं बनाता है, बल्कि तुम्हारे विरुद्ध युद्ध करता है, तब तुम उसकी घेराबन्दी कर दोगे:
१३ और जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर उसे तुम्हारे हाथों में प्रदान कर देंगे, तब तुम उसके प्रत्येक आदमी को तलवार की धार से मार डालोगे:
१४ परन्तु स्त्रियों, और छोटे-नन्हों को, और मवेशियों को, और उस सब को जो नगर में है, उसी की समस्त लूट को, तुम अपने स्वयं के लिए रख लोगे; और तुम अपने शत्रुओं की लूट को खाओगे, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रदान की है।
१५ इस प्रकार तुम उन सभी नगरों के साथ करोगे जो तुम से बहुत दूरी पर हैं, जो इन राष्ट्रों के नगरों में से नहीं हैं।
१६ बल्कि इन लोगों के नगरों में से, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत हेतु प्रदान करते हैं, तुम श्वास लेता हुआ कुछ भी जीवित नहीं छोड़ोगे:
१७ बल्कि तुम इन्हें अत्यंतता से नष्ट कर दोगे; हित्ती-वंशज, और एमोरवासी, कनान-वासी, और पेरिज़वासी, हिव्वी-वंशज, और यबूसी-वंशज; जैसा प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है:
१८ ताकि वह तुम्हें उनकी अति-घृणितताओं जैसा करना न सिखाएँ, जो इन्होंने अपने ईश्वरों के प्रति कर दीं हैं; तो इस प्रकार तुम प्रभु अपने ईश्वर के विरुद्ध पाप न कर बैठो।
१९ जब तुम किसी नगर की दीर्घ-काल के लिए घेराबन्दी कर लोगे, उसे ले लेने के लिए उसके विरुद्ध युद्ध करते हुए, तुम उसके पेड़ों पर कुल्हाड़ा चला कर उन्हें नष्ट नहीं करोगे: क्योंकि तुम उन में से खा सकते हो, और तुम उन्हें नीचे नहीं काट डालोगे (क्योंकि खेत का वह पेड़ मनुष्य का जीवन है) घेराबन्दी में प्रयोग करने हेतु:
२० बस केवल उन्हीं पेड़ों को तुम नष्ट करोगे और नीचे काट डालोगे जो तुम जानते हो कि भोजन वाले पेड़ नहीं हैं; और तुम उस नगर के विरुद्ध जो तुम्हारे साथ युद्ध कर रहा है, उसका दमन हो जाने तक, प्राचीरों का निर्माण करोगे।
इक्कीसवाँ अध्याय।
१ यदि कोई हत्या कर दिया गया खेत में पड़ा हुआ उस भूमी में पाया जाए जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें अधिकार करने के लिए प्रदान करते हैं, और यह पता न हो कि किसने उसकी हत्या कर दी है:
२ तब तुम्हारे वृद्ध-गण, और तुम्हारे न्यायाधीष आगे आएँगे, और वह उन सभी नगरों तक मापेंगे जो उस हत्या कर दिए गए के चारों-ओर हैं:
३ और यह होगा, कि वह नगर जो उस हत्या कर दिए गए के साथ ही है, उसी नगर के वृद्ध-गण एक बछिया लेंगे, जिसके साथ कोई भी काम नहीं किया गया हो, और जिसने जुआ न खींचा हो;
४ और उस नगर के वृद्ध-गण उस बछिया को एक बीहड़ घाटी में नीचे ले आएँगे, जिस में न ही हल चला हो न ही बुआई की गई हो, और उस घाटी में उस बछिया की गर्दन को उड़ा दिया जाएगा:
५ और वह पुरोहित लेवी के बेटे, निकट आएँगे; क्योंकि उन्हीं को प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने उनके प्रति सेवा हेतु, और प्रभु के नाम में आशीष देने हेतु चुन लिया है; और उनके शब्द से ही प्रत्येक वाद-विवाद और प्रत्येक चोट का निर्णय किया जाएगा:
६ और उस नगर के समस्त वृद्ध-गण, जो उस हत्या कर दिए गए के साथ हैं, अपने हाथों को उस बछिया के ऊपर धो लेंगे जिसका सर उस घाटी में बेधड़ कर दिया गया था:
७ और वह उत्तर देंगे और कहेंगे, हमारे हाथों ने यह रक्त नहीं बहाया है, न ही हमारी आँखों ने यह देखा है।
८ अपने लोगों के प्रति, जिनका आपने मुक्तिभुक्तान कर दिया है, करुणामई बन जाएँ हे प्रभु, और इस्राएल के अपने लोगों पर निर्दोष-रक्त का दोष न लगाएँ। और वह रक्त उनके प्रति क्षमा कर दिया जाएगा।
९ इस रीति से तुम अपने बीच में से निर्दोष-रक्त के दोष को परे हटा दोगे, जब तुम वह करोगे जो प्रभु की दृष्टि में उचित है।
१० जब तुम अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध करने निकलते हो, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर उन्हें तुम्हारे हाथों में प्रदान कर देते हैं, और तुम उन्हें बन्दी पकड़ लेते हो,
११ और उन बंदियों के बीच एक सुन्दर स्त्री को देखते हो, और उसके प्रति तुम्हें लगाव हो, और तुम उसे अपनी पत्नी बना लेना चाहते हो;
१२ तो तुम उसे घर ले आओगे, अपने ही घर; और वह अपने सर पर उस्तरा फेर लेगी, और अपने नाखूनों को काट लेगी;
१३ और वह अपनी बन्दी की पोशाक अपने पर से उतार लेगी, और तुम्हारे घर में रहेगी, और अपने पिता और अपनी माता का विलाप एक पूरे महीने मनाएगी: और उसके पश्चात तुम उसके पास जाओगे, और उसके पति बन जाओगे, और वह तुम्हारी पत्नी बन जाएगी।
१४ और यह होगा, यदि तुम्हें उसके प्रति कोई सुख न हो, तब तुम उसे जहाँ वह चाहे चले जाने दोगे; परन्तु तुम उसे पैसे के लिए कतई भी नहीं बेचोगे, तुम उसे वाणिज्य की वस्तु नहीं बनाओगे, क्योंकि तुमने उसे नीचा दिखला दिया है।
१५ यदि किसी पुरुष के पास दो पत्नियाँ हों, एक अतिप्रीय, और दूसरी घृणात्मक, और उन दोनो ने उसे सन्तानें जन्मी हों, दोनो उस अतिप्रीय ने और उस घृणात्मक ने; और यदि प्रथम-जन्मा बेटा उसका हो जो घृणात्मक थी:
१६ तब यह होगा, जब वह अपने बेटों को अपनी सम्पत्ती विरासत में देगा, तब वह उस अतिप्रीय के बेटे को उस घृणात्मक के बेटे से पहले प्रथम-जन्मा नहीं बनाएगा, जो कि वास्तव में ही प्रथम-जन्मा है:
१७ बल्कि वह उस घृणात्मक के बेटे को प्रथम-जन्मे की स्वीकृति देगा, उसे अपनी समस्त सम्पत्ती का दुगुना भाग दे देने से: क्योंकि वही उसकी शक्ती का प्रारम्भ है; उसी का प्रथम-जन्मे का अधिकार है।
१८ यदि किसी पुरुष का बेटा हठीला और विद्रोही हो, जो न ही अपने पिता की वाणी का, या अपनी माता की वाणी का आज्ञापालन करता हो, और जो उस पर उनकी अनुशासन-क्रिया के पश्चात, उनका श्रवण नहीं करेगा:
१९ तब उसका पिता और उसकी माता उसे पकड़ कर उसे उसके नगर के वृद्ध-गणों के पास और उसके स्थान में दरवाज़े पर बाहर ले आएँगे;
२० और वह उसके नगर के वृद्ध-गणों से कहेंगे, यह हमारा बेटा हठीला और विद्रोही है, यह हमारी वाणी का आज्ञापालन नहीं करता है; यह तो भई एक पेटू, और मदिरा-खोर है।
२१ और उसके नगर के समस्त लोग उस पर पत्थरों से पथराव कर देंगे, कि वह मर जाए: इस प्रकार तुम अपने बीच में से बुराई को परे हटा दोगे; और समस्त इस्राएल सुनेगा, और डरेगा।
२२ और यदि किसी पुरुष ने मृत्यु-दण्ड योग्य कोई पाप कर दिया हो, और वह मृत्यु के घाट उतार दिया गया हो, और तुम उसे किसी पेड़ पर टांग देते हो:
२३ उसका शव पेड़ पर सारी रात नहीं रहेगा, बल्कि तुम अवश्य ही उसे उसी दिन दफ़ना दोगे; (क्योंकि वह जो टांगा गया है ईश्वर का श्रापित है;) ताकि तुम्हारी भूमी दूषित न हो, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत हेतु देते हैं।
बाईसवाँ अध्याय।
१ तुम अपने भाई के साँड को या उसके भेड़ को भटकता हुआ देख कर, उन्हें अनदेखा नहीं करोगे: तुम अवश्य ही उन्हें पुनः अपने भाई के पास ले आओगे।
२ और यदि तुम्हारा भाई तुम्हारे निकट न हो, या तुम उस से परिचित न हो, तब तुम उसे अपने स्वयं के घर में ले आओगे, और वह तुम्हारे साथ रहेगा जब तक तुम्हारा भाई उसे ढूँढता हुआ आता है, और तुम वह उसे पुनःस्थापित कर दोगे।
३ इसी प्रकार तुम उसके गधे के साथ करोगे; और इसी प्रकार से तुम उसके वस्त्र के साथ करोगे; और अपने भाई की प्रत्येक खोई हुई वस्तु के साथ, जो उसने खो दी है, और जिसे तुम ने पा ली है, तुम इसी रीती से करोगे: तुम उसे अनदेखा नहीं करोगे।
४ तुम अपने भाई के गधे या उसके साँड को पथ के किनारे नीचे गिरा हुआ देख कर उसे अनदेखा नहीं करोगे: तुम अवश्य ही उन्हें ऊपर उठा देने में उसकी सहायता करोगे।
५ स्त्री पुरुष के वस्त्र को नहीं पहनेगी, न ही पुरुष स्त्री के वस्त्र को पहनेगा: क्योंकि वह सभी जो ऐसा करते हैं प्रभु तुम्हारे ईश्वर के प्रति अति-घृणितता हैं।
६ यदि संयोग से किसी पक्षी का घौंसला तुम्हारे सामने पथ पर किसी पेड़ में हो, या धरती पर, भले ही वह बच्चे ही हों, या अण्डे, और मादा बच्चे पर या अण्डों पर बैठी हो, तो तुम उस मादा को उस बच्चे के साथ नहीं लोगे:
७ बल्कि तुम अवश्य ही उस मादा को छोड़ दोगे, और उस बच्चे को अपने पास रख लोगे; ताकि तुम्हारे साथ भला रह सके, और कि तुम अपने दिनो की वृद्धी कर सको।
८ जब तुम एक नए घर का निर्माण करते हो, तब तुम अपनी छत के लिए एक मुँडेर बनाओगे, ताकि तुम अपने घर पर रक्त न ले आओ, यदि कोई वहाँ से गिर जाए।
९ तुम अपने अंगूर-खेत में भिन्न-भिन्न बीज नहीं बोगे: कहिं तुम्हारे बीज का फल जो तुमने बोया है, और तुम्हारे अंगूर-खेत का फल, दूषित न हो जाए।
१० तुम एक साथ साँड और गधे के साथ जुताई मत करना।
११ तुम भिन्न-भिन्न प्रकार का कोई वस्त्र नहीं पहनोगे, जैसे कि ऊनी और छालटी का एक साथ।
१२ तुम अपने लिए अपने वस्त्र के चारों कोनों पर झालर बनाओगे, जिसे तुम ओढ़ते हो।
१३ यदि कोई भी पुरुष एक पत्नी लेकर उसके पास चला जाए, और उस से घृणा कर ले,
१४ और उसके विरुद्ध दोष-भरे शब्द बोले, और उसके नाम को कलंकित कर दे, और कहे, मैंने इस स्त्री को लिया, और जब मैं इसके पास आया तो मैंने इसे कुँवारी नहीं पाया:
१५ तब उस कुँवारी का पिता और माता, उस कुँवारी के कुँवारेपन के प्रतीकों को दरवाज़े पर नगर के वृद्ध-गणों के पास बाहर ले आएँगे:
१६ और उस कुँवारी का पिता वृद्ध-गणों से बोलेगा, मैंने अपनी बेटी को इस आदमी को पत्नी के लिए दिया, और यह इस से घृणा करता है;
१७ और लो भई, इसने तो इसके विरुद्ध दोष-भरे शब्द बोल दिए हैं, कहता हुआ, मैंने तो तुम्हारी बेटी को कुँवारी नहीं पाया; और तथापि यह मेरी बेटी के कुँवारेपन के प्रतीक हैं। और वह उस कपड़े को नगर के वृद्ध-गणों के समक्ष फैला देंगे।
१८ और नगर के वृद्ध-गण उस आदमी को लेकर उसे अनुशासित कर देंगे;
१९ और वह उस पर एक सौ शेक्लों का अर्थदण्ड लगा देंगे, और उन्हें उस कुँवारी के पिता को दे देंगे, क्योंकि उसने इस्राएल की एक कुँवारी के नाम को कलंकित कर दिया है: और वह उसकी पत्नी रहेगी; वह उसे आजीवन त्याग नहीं सकता है।
२० परन्तु यदि यह बात सच्ची हो, और उस किशोरी के कुँवारेपन के प्रतीक न पाए गए हों:
२१ तब वह उस किशोरी को उसके पिता के घर के द्वार तक बाहर ले आएँगे, और उसके नगर के लोग उस पर पत्थरों से पथराव कर देंगे कि वह मर जाए: क्योंकि उसने इस्राएल में अवनति भरा काम कर दिया है, अपने पिता के घर में वैश्यापने का खेल खेलकर: इस प्रकार तुम अपने बीच में से बुराई को परे हटा दोगे।
२२ यदि कोई आदमी किसी पति से विवाहित औरत के साथ लेटता हुआ पाया जाए, तो वह दोनो ही मर जाएँगे, दोनो, वह आदमी जो उस औरत के साथ लेटा था, और वह औरत: इस प्रकार तुम अपने बीच में से बुराई को परे हटा दोगे।
२३ यदि किसी युवती की, जो एक कुँवारी हो, किसी पति के साथ मंगनी हो चुकी हो, और कोई आदमी उसे नगर में पाकर उसके साथ लेट जाए;
२४ तब तुम उन दोनो को उस नगर के दरवाज़े के बाहर लाकर उन पर पत्थरों से पथराव कर दोगे ताकि वह मर जाएँ; क्योंकि वो युवती नगर में होती हुई चिल्लाई नहीं; और वो आदमी, क्योंकि उसने अपने पड़ौसी की पत्नी को नीचा दिखला दिया है: इस प्रकार तुम अपने बीच में से बुराई को परे हटा दोगे।
२५ परन्तु यदि कोई आदमी किसी मंगेतर युवती को खेत में पाकर उस पर बल डाल कर उसके साथ लेट जाता है: तब केवल वह आदमी ही जो उसके साथ लेटा था मरेगा:
२६ परन्तु उस युवती के साथ तुम कुछ भी नहीं करोगे; उस युवती में मृत्युदण्ड के योग्य कुछ भी नहीं है: क्योंकि जिस प्रकार जब कोई आदमी अपने पड़ौसी के विरुद्ध उठकर उसकी हत्या कर देता है, उसी प्रकार का यह मसला भी है:
२७ क्योंकि उसने उसे खेत में पाया, और वह मंगेतर युवती चिल्लाई, और वहाँ उसे बचाने वाला कोई न था।
२८ यदि कोई आदमी किसी कुँवारी युवती को, जिसकी मंगनी न हुई हो, पकड़ कर उसके साथ लेट जाता है, और वह पा लिए जाते हैं;
२९ तब वो आदमी जो उसके साथ लेटा था उस युवती के पिता को चाँदी के पचास शेक्ल दे देगा, और वो उसकी पत्नी बन जाएगी; क्योंकि उसने उसे नीचा दिखला दिया है, वो उसका आजीवन त्याग नहीं करेगा।
३० आदमी अपने पिता की पत्नी को नहीं लेगा, न ही अपने पिता के वस्त्र के किनारे को अनावृत करेगा।
तेईसवाँ अध्याय।
१ वह जिसके अण्डकोष कुचले हुए हों, या जिसका गुप्तांग कटा हुआ हो, प्रभु की सभा में प्रवेश नहीं करेगा।
२ कोई अवैध-सन्तान प्रभु की सभा में प्रवेश नहीं करेगा; अपनी दसवीं पीढ़ी तक भी वह प्रभु की सभा में प्रवेश नहीं करेगा।
३ कोई अम्मोन-वंशज या मोआब-वंशज प्रभु की सभा में प्रवेश नहीं करेगा, उनकी दसवीं पीढ़ी तक भी वह प्रभु की सभा में प्रवेश नहीं करेंगे सदैवत्वता के लिए:
४ क्योंकि जब तुम मिस्र में से बाहर निकले थे, उन्होंने तुम्हारे साथ पथ पर रोटी और पानी लेकर भेंट नहीं की; और क्योंकि उन्होंने तुम्हारे विरुद्ध मेसोपोतामिया के पथोर के बओर के बेटे बिलाम को तुम्हें श्राप दे देने हेतु भाड़े पर लिया।
५ तथापि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने बिलाम का श्रवण नहीं किया; बल्कि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारे प्रति उस श्राप को एक आशीर्वाद में परिवर्तित कर दिया, क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम से प्रेम करते थे।
६ तुम आजीवन न ही उनकी शान्ति, न ही उनकी उन्नति की कामना करोगे।
७ तुम किसी एदोम-वंशज से घृणा नहीं करोगे; क्योंकि वह तुम्हारा भाई है: तुम किसी मिस्र-वासी से घृणा नहीं करोगे; क्योंकि तुम उसकी भूमी में एक परदेशी थे।
८ उनके द्वारा जनने बच्चे प्रभु की सभा में अपनी तीसरी पीढ़ी में प्रवेश करेंगे।
९ जब तुम्हारे शत्रुओं के विरुद्ध सेना बाहर निकल पड़ती है, तो स्वयं को प्रत्येक दुष्ट वस्तु से बचा कर रखना।
१० यदि तुम्हारे बीच कोई भी आदमी हो जो अस्वच्छता के कारण स्वच्छ न हो जो उस पर संयोग से रात को आ पड़े, तो वह शिविर के बाहर चला जाएगा, वह शिविर के भीतर नहीं आएगा:
११ परन्तु यह होगा कि जब संध्या हो जाती है, वह स्वयं को पानी के साथ धो लेगा: और जब सूर्यास्त हो जाता है, वह पुनः शिविर में आ जाएगा।
१२ तुम्हारे पास शिविर के बाहर ही एक स्थान होगा, जहाँ तुम बाहर जाओगे:
१३ और तुम अपने शस्त्र पर एक फावड़ा रखोगे; और ऐसा होगा, जब तुम बाहर जाकर बैठोगे, तो तुम उस से खोदोगे, और तुम उसे जो तुम में से बाहर निकलता है, ढक दोगे:
१४ क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे शिविर के बीच चलते हैं, तुम्हारा उद्धार कर देने हेतु, और तुम्हारे शत्रुओं को तुम्हारे समक्ष प्रदान कर देने हेतु; इसलिए तुम्हारा शिविर पवित्र होगा: ताकि वह तुम में कोई भी अस्वच्छ वस्तु न देखें, और तुम से परे न मुड़ जाएँ।
१५ तुम उस नौकर को उसके मालिक को प्रदान नहीं करोगे जो तुम्हारे पास अपने मालिक से भाग आ गया है:
१६ वो तुम्हारे साथ बसेगा, तुम्हारे ही बीच, उसी स्थान में जिसे वो तुम्हारे दरवाज़ों में से एक में से चुनेगा, जहाँ उसे उच्चतम लगे: तुम उसका अत्याचार नहीं करोगे।
१७ इस्राएल की बेटियों में से कोई भी कोई वैश्या नहीं होगी, न ही इस्राएल के बेटों में से कोई भी समलैंगिक होगा।
१८ तुम किसी भी प्रण के लिए वैश्या की कमाई, या किसी कुत्ते का मूल्य प्रभु अपने ईश्वर के घर में नहीं लाओगे: चूँकि यह दोनो ही प्रभु तुम्हारे ईश्वर के लिए अति-घृणितता हैं।
१९ तुम अपने भाई को सूद पर उधार नहीं दोगे; पैसे का सूद, खाद्य-पदार्थ का सूद, या किसी भी वस्तु का सूद जो सूद पर उधार दिया जाता है:
२० किसी परदेशी को तुम सूद लगा कर उधार दे सकते हो; परन्तु अपने भाई को तुम सूद लगा कर उधार नहीं दोगे: ताकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें, उस भूमी में जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो, उस सभी में आशीष दें जिस पर तुम अपना हाथ रखते हो।
२१ जब तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति किसी प्रण का प्रण लोगे, तो तुम उसे चुकाने में विलम्ब नहीं करोगे: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर अवश्य ही उसकी तुम से पूछ-ताछ करेंगे; और वो तुम में पाप ठहरेगा।
२२ परन्तु यदि तुम प्रण नहीं लेते हो, तो वो तुम पर पाप नहीं ठहराया जाएगा।
२३ वो जो तुम्हारे होठों में से बाहर निकल चुका है तुम उसका पालन करोगे और उसे क्रियान्वित करोगे; एक स्वेच्छा का चढ़ावा ही, उसी के अनुसार जिसका तुमने प्रभु अपने ईश्वर को प्रण दे दिया है, जो तुम अपने मूँह से वचन दे चुके हो।
२४ जब तुम अपने पड़ौसी के अंगूर-खेत में आते हो, तब तुम भर-पेट अपनी इच्छानुसार अंगूरों को खा सकते हो; लेकिन तुम उन्हें अपने पात्र में नहीं डालोगे।
२५ जब तुम अपने पड़ौसी के खड़े अनाज में आ जाते हो, तब तुम बालियों को अपने हाथों से तोड़ सकते हो; लेकिन तुम अपने पड़ौसी की खड़ी फसल पर हँसिया नहीं चलाओगे।
चौबीसवाँ अध्याय।
१ जब किसी पुरुष ने एक पत्नी ले ली हो, और उस से विवाह कर लिया हो, और यह होने को आए कि वो उसकी आँखों में कोई भी अनुग्रह न पाए, क्योंकि उसने उस स्त्री में कोई अस्वच्छता पा ली है: तब उसे उसके लिए एक विवाह-विच्छेद पत्र लिख लेने दो, और उसे उसके हाथ में थमा कर अपने घर में से बाहर निकाल लेने दो।
२ और जब वो स्त्री उसके घर से चली जाती है, तो वो जाकर किसी अन्य पुरुष की पत्नी बन सकती है।
३ और यदि वो दूसरा प्रति उस से घृणा करता हो, और उसे विवाह-विच्छेद पत्र लिख दे, और उसे उसके हाथ में थमा कर अपने घर में से बाहर निकाल दे; या फिर वो दूसरा पति मर जाए, जिसने उसे उसकी पत्नी बनने के लिए ले लिया था;
४ तो उसका पहला पति, जिस ने उसे परे भेज दिया था, उसे अपनी पत्नी बनने के लिए पुनः नहीं ले सकता है, उसके प्रदूषित हो जाने के पश्चात; क्योंकि वो प्रभु के समक्ष अति-घृणितता है: और तुम उस भूमी से पाप नहीं करवाओगे, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत में प्रदान करते हैं।
५ जब कोई पुरुष कोई नई पत्नी लेगा, तो वो युद्ध करने बाहर नहीं निकलेगा, न ही उसे कोई उत्तरदायित्व दिया जाएगा: बल्कि वो एक वर्ष घर पर रहेगा, और अपनी पत्नी को आनन्द प्रदान करेगा जिसे उसने ले लिया है।
६ कोई भी न ही निचे वाला चक्की का पत्थर या ऊपर वाला गिरवी लेगा: चूँकि वो उसका जीवन गिरवी ले रहा है।
७ यदि कोई आदमी इस्राएल की सन्तानों में से अपने किसी भी भाई-जन को चुराता हुआ पकड़ा जाए, और उसका वाणिज्य बना दे, या उसे बेचे; तो वो चोर मर जाएगा; और तुम अपने बीच में से बुराई को परे हटा दोगे।
८ कुष्ठ-रोग की विपत्ती में सावधान रहना, कि तुम कर्मठता से ध्यान देना, और उस सभी के अनुसार करना जो वो पुरोहित वो लेवी-वंशज तुम्हें निर्देश देंगे: जिस प्रकार मैंने उन्हें आदेश दिया है, उसी प्रकार तुम ध्यान से करोगे।
९ स्मरण में रखना कि पथ पर प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने मरियम के साथ क्या कर दिया था, तुम्हारे मिस्र में से बाहर निकल आने के पश्चात।
१० जब तुम अपने भाई को कुछ भी उधर पर देते हो, तो तुम उसके घर में उसकी गिरवी रखी हुई वस्तु को छीनने हेतु प्रवेश नहीं करोगे।
११ तुम बाहर ही खड़े रहोगे, और वो पुरुष जिसे तुमने उधार दिया है वो गिरवी रखी हुई वस्तु तुम्हारे पास बाहर ले आएगा।
१२ और यदि वो पुरुष दरिद्र हो, तो तुम उसकी गिरवी रखी हुई वस्तु के साथ लेटोगे नहीं:
१३ हर परिस्थिति में तुम उसे उसकी गिरवी रखी हुई वस्तु सूर्यास्त के समय पुनः प्रदान कर दोगे, ताकि वो अपने ही वस्त्र में सो सके, और तुम्हें आशीष दे: और यह तुम्हारे प्रति प्रभु तुम्हारे ईश्वर के समक्ष नेकी ठहरेगी।
१४ तुम किसी भाड़े के नौकर का अत्याचार नहीं करोगे जो दरिद्र और निर्धन है, भले ही वो तुम्हारे भाई-जनो में से हो, या उन परदेशियों में से जो तुम्हारी भूमी में तुम्हारे दरवाज़ों के भीतर हैं:
१५ उसके दिन पर ही तुम उसे उसकी दिहाड़ी दे दोगे, न ही उस पर सूर्यास्त होगा; क्योंकि वो दरिद्र है, और उस पर उसका मन लगा हुआ है: कहिं वो तुम्हारे विरुद्ध प्रभु की ओर चीख पड़े, और यह तुम्हारे प्रति पाप ठहर जाए।
१६ बेटों के लिए पिताओं को मृत्यु के घाट नहीं उतारा जाएगा, न ही पिताओं के लिए बेटों को मृत्यु के घाट उतारा जाएगा: प्रत्येक व्यक्ति को उसके अपने ही पाप के लिए मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।
१७ तुम परदेशी के न्याय-निर्धारण को विकृत नहीं करोगे, न ही किसी अनाथ के; न ही किसी विधवा के वस्त्रों को गिरवी रखोगे:
१८ बल्कि तुम स्मरण करोगे कि तुम मिस्र में एक बंध्वा-दास थे, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हारा वहाँ से मुक्तिभुक्तान कर दिया था: इसलिए मैं तुम्हें यह करने का आदेश दे रहा हूँ।
१९ जब तुम अपने खेत में अपनी फसल की कटाई करते हो, और खेत में कोई गंठल भूल जाते हो, तो तुम उसे पुनः उठाने के लिए वापस नहीं जाओगे: वो परदेशी और अनाथ और विधवा के लिए होगा: ताकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें तुम्हारे हाथों के समस्त श्रम में आशीष दे दें।
२० जब तुम अपने जैतून के पेड़ को झाड़ते-पीटते हो, तो तुम उन डालों पर पुनः नहीं जाओगे: वो परदेशी और अनाथ और विधवा के लिए होगा।
२१ जब तुम अपने अंगूर-खेत के अंगूरों को तोड़ते हो, तो तुम उन्हें दोबारा नहीं बीनोगे: वो परदेशी और अनाथ और विधवा के लिए होगा।
२२ और तुम स्मरण करोगे कि तुम मिस्र की भूमी में एक बंध्वा-दास थे: इसलिए मैं तुम्हें यह करने का आदेश दे रहा हूँ।
पच्चीसवाँ अध्याय।
१ यदि दो व्यक्तियों के बीच कोई मसला उठता है, और वो न्याय-निर्धारण हेतु आते हैं, ताकि न्यायाधीष उनके बीच न्याय करें; तब वो उस नेक को न्याय-प्रमाणित कर देंगे, और उस दुष्ट को दण्डनीय।
२ और यह होगा, कि यदि वो दुष्ट आदमी पिटाई के योग्य हो, तो वो न्यायाधीष उसे नीचे लिटवा कर उसे अपने चहरे के समक्ष उसके दोषानुसार, एक निश्चित संख्या से पिटवा देगा।
३ चालीस बार वो उसे पिटवा सकता है, इस से अधिक नहीं: कहिं वो हद पार कर उसे इन से भी अधिक बार पीटवा दे, तो तुम्हारा भाई तुम्हें नीच प्रतीत हो जाए।
४ तुम अनाज को दाँवनेवाले उस साँड का मूँह नहीं बाँधोगे।
५ यदि भाई एक साथ वास करते हों, और उन में से एक निःसन्तान ही मर जाए, तो उस मृत की पत्नी बाहर किसी परदेशी से विवाह नहीं करेगी: उसके पति का भाई उसके पास जाएगा, और उसे अपनी पत्नी के लिए ले लेगा, और एक पति के भाई का कर्तव्य उसके प्रति क्रियान्वित करेगा।
६ और यह होगा, कि वो प्रथम-जन्मा जो वो जनेगी उसके भाई के नाम में उठेगा जो मर गया है, ताकि इस्राएल से उसका नाम न मिटा दिया जाए।
७ और यदि कोई पुरुष अपने भाई की पत्नी को न लेना चाहे, तब उसके भाई की पत्नी को दरवाज़े पर वृद्ध-गणों के पास जाकर कह लेने देना, मेरे पति का भाई तो इस्राएल में अपने भाई के लिए एक नाम उठाने से मना कर रहा है जी, वो मेरे पति के भाई का कर्तव्यपालन नहीं करना चाह रहा है।
८ तब उसके नगर के वृद्ध-गण उसे बुलाएँगे, और उस से वार्तालाप करेंगे: और यदि वो दृढ़ ही खड़ा रहता है, और कहता है, भई मैं इसे नहीं लेना चाहता;
९ तब उसके भाई की पत्नी वृद्ध-गणों की उपस्थिति में उसके पास आएगी, और उसके पैर पर से उसके जूते को उतार लेगी, और उसके चहरे पर थूकेगी, और उत्तर देगी और कहेगी, इस प्रकार यह उस आदमी के साथ किया जाएगा जो अपने भाई के घर का निर्माण करना नहीं चाहेगा।
१० और इस्राएल में उसका नाम पुकारा जाएगा, उसका घर जिसका जूता उतार दिया गया था!
११ जब आदमी एक दूसरे के साथ झगड़ रहे हों, और एक की पत्नी उस पीटने वाले के हाथ में से अपने पति के बचाव हेतु निकट आ जाती है, और अपना हाथ बढ़ा कर, उसे गुप्तांगों से पकड़ लेती है:
१२ तो तुम उसके हाथ को काट डालोगे, तुम उस स्त्री को दया नहीं दिखाओगे।
१३ तुम अपने थैले में भिन्न-भिन्न भार नहीं रखोगे, कोई बड़ा और कोई छोटा।
१४ तुम अपने घर में भिन्न-भिन्न माप नहीं रखोगे, कोई बड़ा और कोई छोटा।
१५ बल्कि तुम एक परिपूर्ण और सच्चा भार रखोगे, एक परिपूर्ण और सच्चा माप तुम रखोगे: ताकि तुम्हारे दिनों की उस भूमी में वृद्धी हो सके जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं।
१६ चूँकि वो सभी जो ऐसे कार्य करते हैं, और वो सभी जो अनैतिकता करते हैं, प्रभु तुम्हारे ईश्वर के प्रति एक अति-घृणितता हैं।
१७ वो स्मरण में रखना जो अमालेक ने तुम्हारे साथ पथ पर किया था, जब तुम मिस्र में से बाहर निकल आए थे;
१८ कि उसने कैसे पथ पर तुम से मिल कर तुम्हारे सबसे पृष्ठ वालों पर प्रहार कर डाला था, वो सभी जो दुर्बल थे तुम्हारे पीछे, जब तुम शिथिल और थके-माँदे थे; और उसने ईश्वर का भय नहीं माना।
१९ इसलिए यह होगा, जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें चारों ओर तुम्हारे समस्त शत्रुओं से विश्राम प्रदान कर दिया होगा, उस भूमी में जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस पर एक अधिकार हेतु प्रदान करते हैं, कि तुम अमालेक का स्मरण स्वर्ग के तले मिटा डालोगे; तुम यह भूलोगे नहीं।
छब्बीसवाँ अध्याय।
१ और यह होगा, कि जब तुम उस भूमी में प्रवेश कर चुकोगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एक विरासत के लिए देते हैं, और तुम उस पर अधिकार कर लेते हो, और उस में वहाँ बस जाते हो;
२ कि तुम धरती के समस्त फल के प्रथम को लेकर, जो तुम अपनी भूमी से लाओगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, और उसे एक टोकरे में डाल कर, उस स्थान चले जाओगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर अपने नाम को वहाँ स्थापित करने हेतु चुनेंगे।
३ और तुम उस पुरोहित के पास चले जाओगे जो उन दिनो में होगा, और उस से कहोगे, मैं इस दिन प्रभु तुम्हारे ईश्वर को घोषित करता हूँ, कि मैं उस देश में आ गया हूँ, जिसे हमें प्रदान कर देने की शपथ प्रभु ने हमारे पित्रों को दी थी।
४ और वो पुरोहित तुम्हारे हाथ में से उस टोकरे को लेकर उसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर की बलिवेदी के समक्ष नीचे रख देगा।
५ और तुम प्रभु अपने ईश्वर के समक्ष बोलोगे और कहोगे, मेरे पिता एक सिरियावासी नष्ट हो जाने के लिए तैयार थे, और उन्होंने नीचे मिस्र में जाकर वहाँ कुछों के साथ ही अल्पवास किया, और वहीं बन गए एक महान, बलशाली, और बहुसंख्यक राष्ट्र:
६ और मिस्रवासियों ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया, और हमारा अत्याचार किया, और हम पर कठिन बेगारी लाद दी:
७ और जब हम अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर की ओर चीखे, तो प्रभु ने हमारी वाणी सुन ली, और हमारे अत्याचार, और हमारे श्रम, और हमारे दमन को देखा:
८ और प्रभु हमें एक शक्तिशाली हाथ के साथ, और एक फैली हुई भुजा के साथ, और बहुत ही आतंक के साथ, और संकेतों के साथ, और अद्धभुत चमत्कारों के साथ, मिस्र में से बाहर ले आए:
९ और वो हमें इस स्थान में ले आए हैं, और हमें यह भूमी प्रदान कर दी है, एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है।
१० और अब, देखें, मैं भूमी का प्रथमफल ले आया हूँ, जो आपने मूझे प्रदान किया है हे प्रभु। और तुम उसे प्रभु अपने ईश्वर के समक्ष स्थित कर दोगे, और प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख आराधना करोगे:
११ और तुम उस समस्त अच्छी वस्तु में हर्ष मनाओगे, जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें दे दी है, और तुम्हारे घराने को, तुम, और वो लेवी-वंशज, और वो परदेशी जो तुम्हारे बीच है।
१२ जब तुमने तीसरे वर्ष में, जो कि दसवें-भाग की भरपाई का वर्ष है, अपनी बढ़ौतरी के दसवें-भाग की भरपाई का अन्त कर दिया होगा, और उसे लेवी-वंशज, परदेशी, अनाथ, और विधवा को दे दिया होगा, ताकि वो तुम्हारे दरवाज़ों में खा सकें, और संतुष्ट हो सकें;
१३ तब तुम प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख बोलोगे, मैं अपने घर में से उन पवित्र वस्तुओं को बाहर परे ले आया हूँ, और मैंने उन्हें उस लेवी-वंशज, परदेशी, अनाथ, और विधवा को भी दे दिया है, उन सभी आदेशोंनुसार जो आपने मुझे आदेश दिए हैं: मैंने आपके आदेशों के प्रति अतिक्रमण नहीं किया है, न ही मैं उन्हें भूला हूँ;
१४ मैंने उस में से अपने शोक में नहीं खाया है, न ही मैंने उस में से कुछ भी किसी अस्वच्छ प्रयोग के लिए लिया है, न ही उसका कुछ भी मृतकों के लिए दिया है: बल्कि मैंने प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण किया है, और उस सभी के अनुसार कर दिया है जो आपने मुझे आदेश दिया है।
१५ अपने पवित्र निवास-स्थान से नीचे देख लें, स्वर्ग से ही, और अपने गण इस्राएल को, और आशीष दे दें उस भूमी को जो आपने हमें प्रदान कर दी है, एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है, जैसी आपने हमारे पित्रों को शपथ दे दी थी।
१६ इस दिन प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें इन अध्यादेशों और न्याय-निर्धारणों को कर देने का आदेश दे दिया है: इसलिए तुम अपने सम्पूर्ण हृदय से, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से इनका पालन करोगे और इन्हें करोगे।
१७ तुम ने इस दिन प्रभु को तुम्हारा ईश्वर बन जाने की, और उनके पथों में चलने की, और उनके अध्यादेशों, और उनके आदेशों, और उनके न्याय-निर्धारणों को रखने की, और उनकी वाणी को सुनने की, अभिपुष्टि कर दी है:
१८ और प्रभु ने तुम्हें इस दिन उनका विशिष्ट गण बन जाने की अभिपुष्टि दे दी है, जैसी उन्होंने तुम्हें प्रतिज्ञा दे दी थी, और कि तुम उनके समस्त आदेशों का पालन करोगे;
१९ और तुम्हें समस्त राष्ट्रों पर ऊँचा बना देने की जो उन्होंने बनाए हैं, प्रशन्सा में, और नाम में, और सम्मान में; और कि तुम प्रभु अपने ईश्वर के प्रति एक पवित्र-गण बन सको, जैसा वो बोल चुके हैं।
सत्ताईसवाँ अध्याय।
१ और मूसा ने इस्राएल के वृद्ध-गणों के साथ लोगों को आदेश दिया, कहते हुए, उन सभी आदेशों का पालन करना जो मैं तुम्हें इस दिन दे रहा हूँ।
२ और उस दिन ये होगा जब तुम उस भूमी में यर्दन पार कर चले जाओगे जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, कि तुम बड़े पत्थरों को स्थित कर दोगे, और उन पर चूने से चूना-पोती कर दोगे:
३ और तुम उन पर इस नियम के समस्त शर्ब्दों को लिख दोगे, जब तुम पार चले जा चुकोगे, ताकि तुम उस भूमी में अन्दर प्रवेश कर सको जो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, एक भूमी जो दूध और मधु से बहती है; जैसा कि तुम्हारे पित्रों के प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें प्रतिज्ञा दे दी है।
४ इसलिए यह होगा जब तुम यर्दन को पार कर चुकोगे, कि तुम इन पत्थरों को आयबल पहाड़ पर स्थित कर दोगे, जैसा मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, और तुम उन पर चूने से चूना-पोती कर दोगे।
५ और वहीं तुम प्रभु अपने ईश्वर के लिए एक बलिवेदी का निर्माण कर दोगे, पत्थरों की एक बलिवेदी: तुम उन पर कोई भी लोहे का यन्त्र नहीं चलाओगे।
६ तुम प्रभु अपने ईश्वर की बलिवेदी का निर्माण पूर्ण पत्थरों से करोगे: और तुम उस पर प्रभु अपने ईश्वर के प्रति जले-चढ़ावों को चढ़ाओगे:
७ और तुम शान्ति-चढ़ावे चढ़ाओगे, और वहीं खाओगे, और प्रभु अपने ईश्वर के समक्ष हर्ष मनाओगे।
८ और तुम उन पत्थरों पर इस नियम के समस्त शब्दों को बहुत ही स्पष्टता से लिख दोगे।
९ और मूसा और वह लेवी-वंशज पुरोहित समस्त इस्राएल से बोले, कहते हुए, ध्यान रख लो और श्रवण कर लो, ओ इस्राएल; इस दिन तुम प्रभु अपने ईश्वर के गण बन गए हो।
१० इसलिए तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का आज्ञापालन करोगे, और उनके आदेशों और उनके अध्यादेशों को करोगे, जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ।
११ और मूसा ने उन लोगों को उसी दिन निर्देश दिया, कहते हुए,
१२ जब तुम यर्दन पार कर चुकोगे तो यह गरज़िम पहाड़ पर लोगों को आशीष देने हेतु खड़े होंगे; शिमोन, और लेवी, और यहूदा, और इस्सकार, और युसुफ, और बिन्यामिन:
१३ और यह श्रापित कर देने हेतु आयबल पहाड़ पर खड़े होंगे; रूबेन, गाद, और आशेर, और ज़बूलून, दान, और नफ्ताली।
१४ और लेवी-वंशज, इस्राएल के समस्त पुरुषों से एक ऊँची वाणी से बोलेंगे, और कहेंगे,
१५ श्रापित हो वो आदमी जो कोई भी उत्कीर्ण या ढली हुई प्रतिमा बनाता है, प्रभु के प्रति एक अति-घृणितता, कारीगर के हाथों की एक कारीगरी, और उसे किसी छुपे हुए स्थान में रखता है। और सभी लोग उत्तर देंगे और कहेंगे, तथास्तु।
१६ श्रापित हो वो जो अपने पिता या माता का तिरस्कार करता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
१७ श्रापित हो वो जो अपने पड़ौसी का सीमा-चिन्ह हटाता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
१८ श्रापित हो वो जो नेत्रहीन को पथ पर से परे भटकवाता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
१९ श्रापित हो वो जो परदेशी, अनाथ, और विधवा के न्याय-निर्धारण को विकृत करता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२० श्रापित हो वो जो अपने पिता की पत्नी के साथ लेटता है; क्योंकि वो अपने पिता के वस्त्र के किनारे को अनावृत करता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२१ श्रापित हो वो जो किसी भी प्रकार के जानवर के साथ लेटता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२२ श्रापित हो वो जो अपनी बहन, अपने पिता की बेटी, या अपनी माता की बेटी के साथ लेटता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२३ श्रापित हो वो जो अपनी सास के साथ लेटता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२४ श्रापित हो वो जो अपने पड़ौसी पर छुप कर वार करता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२५ श्रापित हो वो जो किसी निर्दोष व्यक्ति की हत्या करने हेतु घूस लेता है। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
२६ श्रापित हो वो जो इस नियम के सभी शब्दों को दृढ़ न रखे उन्हें कर देने हेतु। और सभी लोग कहेंगे, तथास्तु।
अट्ठाईसवाँ अध्याय।
१ और यह होने को आएगा, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का कर्मठता से श्रवण करोगे, उनके सभी आदेशों को ध्यान में रख कर उन्हें करते हुए जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश देता हूँ, तो प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें पृथ्वी के समस्त राष्ट्रों पर ऊपर ऊँचा स्थित कर देंगे:
२ और यह सभी आशीर्वाद तुम पर आ जाएँगे, और तुम्हें पार करते जाएँगे, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण करोगे।
३ तुम नगर में धन्य होगे, और खेत में धन्य होगे।
४ तुम्हारे शरीर का फल, और तुम्हारी धरती का फल, और तुम्हारे मवेशी का फल, तुम्हारे पालतू पशुओं की बढ़ौतरी, और तुम्हारे भेड़ों के समूह धन्य होंगे।
५ धन्य होगा तुम्हारा टोकरा और तुम्हारा आटा-गूँधने वाला पात्र।
६ धन्य होगे तुम जब तुम अन्दर आते हो, और धन्य तुम होगे जब तुम बाहर निकलते हो।
७ प्रभु तुम्हारे शत्रुओं को जो तुम्हारे विरुद्ध उठते हैं, तुम्हारे चहरे के समक्ष पराजित करवा देंगे: वो तुम्हारे विरुद्ध बाहर एक पथ पर निकलेंगे, और तुम्हारे समक्ष सात पथों पर भाग खड़े होंगे।
८ प्रभु तुम पर तुम्हारे भंडार-घरों में, और उस सभी पर जिसे करने हेतु तुम अपना हाथ बढ़ाते हो, आशीर्वाद को आदेश दे देंगे; और वो तुम्हें उस भूमी में, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें देते हैं, आशीष दे देंगे।
९ प्रभु तुम्हें अपने प्रति एक पवित्र-गण स्थापित कर देंगे, जैसे उन्होंने तुम्हें शपथ दे दी है, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का पालन करोगे, और उनके पथों पर चलोगे।
१० और पृथ्वी के समस्त लोग देखेंगे कि तुम प्रभु के नाम से पुकारे जाते हो; और वह तुम से डरेंगे।
११ और प्रभु तुम्हें वस्तुओं में विपुल बनाएँगे, तुम्हारे शरीर के फल में, और तुम्हारे मवेशी के फल में, और तुम्हारी धरती के फल में, उस भूमी में जिसे तुम्हें प्रदान कर देने हेतु प्रभु ने तुम्हारे पित्रों को शपथ दी थी।
१२ प्रभु तुम्हारे प्रति अपने अच्छे धन-कोष को खोल देंगे, तुम्हारी धरती को उसकी ऋतु में स्वर्ग से वर्षा प्रदान करना, और तुम्हारे हाथ के समस्त श्रम को आशीष देना: और तुम कई राष्ट्रों को उधार दोगे, और तुम उधार नहीं लोगे।
१३ और प्रभु तुम्हें सिरा बनाएँगे, पूँछ नहीं; और तुम ऊँचे ही होगे, और तुम नीचे नहीं होगे; यदि कि तुम प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का श्रवण कर लोगे, जो मैं तुम्हें इस दिन देता हूँ, ध्यान रखने का और उन्हें करने का:
१४ और तुम उन शब्दों में से किसी से भी परे नहीं जाओगे जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, दाएँ हाथ की ओर, या बाएँ की ओर, अन्य ईश्वरों के पीछे जाने हेतु उनकी सेवा करने के लिए।
१५ परन्तु यह होने को आएगा, यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण नहीं करोगे, ध्यान रख कर उनके सभी आदेशों और अध्यादेशों को करने हेतु जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ; कि यह सभी श्राप तुम पर आ पड़ेंगे, और तुम्हें पार कर जाएँगे:
१६ श्रापित होगे तुम नगर में, और श्रापित होगे तुम खेत में।
१७ श्रापित होगा तुम्हारा टोकरा और तुम्हारा आटा-गूँधने वाला पात्र।
१८ तुम्हारे शरीर का फल, और तुम्हारी धरती का फल, तुम्हारे पालतू पशुओं की बढ़ौतरी, और तुम्हारे भेड़ों के समूह श्रापित होंगे।
१९ श्रापित होगे तुम जब तुम अन्दर आते हो, और श्रापित तुम होगे जब तुम बाहर निकलते हो।
२० प्रभु तुम पर श्राप, उत्पीड़ना, और निंदा भेजेंगे, उस सभी में जिसे करने हेतु तुम अपना हाथ बढ़ाते हो, जब तक तुम्हारा विध्वंस नहीं हो जाता, और जब तक तुम शीघ्रता से नष्ट नहीं हो जाते; तुम्हारी करनीयों की दुष्टताओं के कारण, जिनके द्वारा तुमने मेरा त्याग कर डाला है।
२१ प्रभु तुम पर महामारी चिपटवा देंगे, जब तक कि वह तुम्हें उस भूमी पर से समाप्त नहीं कर डालते हैं, जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
२२ प्रभु तुम पर एक क्षय-रोग के साथ, एक ज्वर के साथ, और एक प्रदाह के साथ, और एक अत्यंत जलन के साथ, और तलवार के साथ, और फसल की अंगमारी के साथ, और फफूँदी के साथ प्रहार कर डालेंगे; और यह तुम्हारा पीछा तुम्हारे नष्ट हो जाने तक करते रहेंगे।
२३ और तुम्हारा स्वर्ग जो तुम्हारे सर के ऊपर है पीतल बन जाएगा, और वो पृथ्वी जो तुम्हारे नीचे है लोहा।
२४ प्रभु तुम्हारी भूमी की वर्षा को चूरा और धूल बना डालेंगे: स्वर्ग में से वो तुम पर नीचे आ पड़ेगी, जब तक तुम्हारा विध्वंस नहीं हो जाता है।
२५ प्रभु तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं के समक्ष पिटवा देंगे: तुम उनके विरुद्ध एक पथ पर से जाओगे, और उनके समक्ष सात पथों पर से भाग खड़े होगे: और पृथ्वी के समस्त राज्यों में हटवा दिए जाओगे।
२६ और तुम्हारी लाश वायु के समस्त उड़ने वालों के लिए, और पृथ्वी के जानवरों के लिए, भोजन होगी, और उन्हें कोई भी डरा कर नहीं भगाएगा।
२७ प्रभु तुम पर मिस्र के फोड़े के साथ, और बवासीर के साथ, और पपड़ी के साथ, और खुजली के साथ, जिन से तुम स्वस्थ नहीं हो सकते हो, वार कर डालेंगे।
२८ प्रभु तुम पर पागलपन के साथ, और अंधेपन, और मन के भ्रम से वार कर डालेंगे:
२९ और तुम दोपहर में टटोलते फिरोगे, जैसे कोई अन्धा अन्धकार में टटोलता फिरता है, और तुम अपने पथों पर उन्नत नहीं होगे: और तुम केवल अत्याचारित रहोगे और सदैव लूटे जाओगे, और कोई भी तुम्हें नहीं बचाएगा।
३० तुम एक पत्नी से मंगनी तो करोगे, और कोई और आदमी उसके साथ लेटेगा: तुम किसी घर का निर्माण तो करोगे, और तुम उस में बसोगे नहीं: तुम एक अंगूर-खेत तो रोपोगे, और उसके अंगूरों को एकत्रित नहीं करोगे।
३१ तुम्हारा साँड तुम्हारी आँखों के सामने मार दिया जाएगा, और तुम उस में से नहीं खाओगे: तुम्हारा गधा तुम्हारे चहरे के सामने से हिंसापूर्वक छीन लिया जाएगा, और तुम्हें वापस नहीं लौटाया जाएगा: तुम्हारे भेड़ तुम्हारे शत्रुओं को दे दिए जाएँगे, और उन्हें बचाने के लिए तुम्हारे पास कोई भी नहीं होगा।
३२ तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियाँ दूसरे लोगों को दे दिए जाएँगे, और तुम्हारी आँखें सारे दिन भर देखती-देखती उनकी आस लगाती हुई थक जाएँगी: और तुम्हारे हाथ में कोई बल नहीं रहेगा।
३३ तुम्हारी भूमी का, और तुम्हारे सभी कर्मों का फल, एक राष्ट्र जिस से तुम परिचित नहीं हो, खा जाएगा; और तुम सदैव अत्याचारित और कुचले हुए ही रहोगे:
३४ ताकि तुम अपनी आँखों की दृष्टि के कारण जो तुम देखोगे, पगला जाओगे।
३५ प्रभु तुम्हें घुटनों पर, और टाँगों पर एक घोर फोड़े से चोट मारेंगे जो स्वस्थ नहीं हो सकेगा, तुम्हारे पैर के तलवे से लेकर तुम्हारे सर की चोटी तक।
३६ प्रभु तुम्हें, और तुम्हारे राजा को जिसे तुम अपने ऊपर स्थापित करोगे एक राष्ट्र में ले आएँगे जिस से न ही तुम न ही तुम्हारे पित्र परिचित थे; और वहाँ तुम सेवा करोगे अन्य ईश्वरों की, लकड़ी और पत्थर।
३७ और तुम उन सभी राष्ट्रों के बीच जहाँ प्रभु तुम्हारा नेतृत्व करेंगे, एक आश्चर्य, एक कहावत, और एक खिल्ली ही बन कर रह जाओगे।
३८ तुम खेत में बहुत सारा बीज बाहर ले जाओगे, और बस थोड़ा सा ही एकत्रित करोगे; चूँकि वो टिड्डी उसे खा जाएगी।
३९ तुम अंगूर-खेतों को रोपोगे, और उनका रख-रखाव करोगे, परन्तु तुम उनके अंगूर-रस में से नहीं पीयोगे, न ही अंगूरों को एकत्रित करोगे; चूँकि वो कीड़े उन्हें खा जाएँगे।
४० तुम्हारे पास तुम्हारी सीमाओं के सर्वत्र में जैतून के पेड़ होंगे, परन्तु तुम स्वयं पर उस तेल से मालिश नहीं करोगे; क्योंकि तुम्हारा जैतून अपने फल को फैंक डालेगा।
४१ तुम बेटे और बेटियों को जनोगे, परन्तु तुम उनका आनंद नहीं लोगे; चूँकि वो बाँधत्व में चले जाएँगे।
४२ टिड्डी तुम्हारे सभी पेड़ों को और तुम्हारी भूमी के फल को खा जाएगी।
४३ तुम्हारे बीच जो वो परदेशी है तुम्हारे ऊपर बहुत ऊँचा बन जाएगा; और तुम बहुत ही नीचे आ जाओगे।
४४ वो तुम्हें उधार देगा, और तुम उसे उधार नहीं दोगे: वो सर बनेगा, और तुम पूँछ बनोगे।
४५ इसके अतिरिक्त यह सभी श्राप तुम पर आ पड़ेंगे, और तुम्हारा पीछा करेंगे, और तुम्हें पार कर जाएँगे, जब तक तुम्हारा विध्वंस नहीं हो जाता है; चूँकि तुमने प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण नहीं किया उनके आदेशों और अध्यादेशों को रखने हेतु जो उन्होंने तुम्हें आदेश दिए थे:
४६ और वो तुम पर, और तुम्हारे बीज पर सदा के लिए एक संकेत के रूप में और एक अचरज के रूप में होंगे।
४७ चूँकि तुमने प्रभु अपने ईश्वर की हर्षितता के साथ, और हृदय की प्रसन्नता के साथ, सभी वस्तुओं की बहुतायत हेतु, सेवा नहीं की;
४८ इसलिए तुम भूखे, और प्यासे, और नंगे, और सभी वस्तुओं के आभाव में अपने शत्रुओं की सेवा करोगे जिन्हें प्रभु तुम्हारे विरुद्ध भेजेंगे: और वो तुम्हारी गर्दन पर एक लोहे का जुआ डाल देंगे, जब तक वो तुम्हारा विध्वंस नहीं कर डालते हैं।
४९ प्रभु तुम्हारे विरुद्ध दूर से एक राष्ट्र को लाएँगे, पृथ्वी के सीमान्त से ही, गरुड़ की उड़ान के वेग के ही समान; एक राष्ट्र जिसकी जीभ तुम नहीं समझोगे;
५० क्रुद्ध मुखाकृति लिए एक राष्ट्र, जो वृद्ध का सम्मान नहीं करेगा, न ही युवक के प्रति अनुग्रह दिखाएगा:
५१ और वो तुम्हारे मवेशी के फल को, और तुम्हारी भूमी के फल को खाएगा, जब तक तुम्हारा विध्वंस नहीं हो जाता है: जो तुम्हारे लिए अनाज, या अंगूर-रस, या तेल, या तुम्हारे पालतू पशुओं की वृद्धी, या तुम्हारे भेड़ों के झुण्डों को नहीं छोड़ेगा, जब तक वो तुम्हें नष्ट नहीं कर डालता है।
५२ और वो तुम्हारी तुम्हारे सभी दरवाज़ों के भीतर घेराबन्दी कर देगा, जब तक तुम्हारी ऊँची और क़िलेबन्द दीवारें नीचे नहीं गिर जाती हैं, जिन पर तुम भरोसा करते थे, तुम्हारी समस्त भूमी के सर्वत्र में: और वो तुम्हारी तुम्हारे सभी दरवाज़ों के भीतर तुम्हारी समस्त भूमी के सर्वत्र में घेराबन्दी कर देगा, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें दे दिया है।
५३ और तुम उस घेराबन्दी में, और उस आभाव में, जिस से तुम्हारे शत्रु तुम्हें पीड़ित करेंगे, अपने ही शरीर के फल को खाओगे, अपने बेटों के और अपनी बेटियों के माँस को ही, जिन्हें प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें दे दिए हैं:
५४ ताकि वो आदमी जो तुम्हारे बीच कोमल, और अति-सुकुमार है, उसकी आँख उसके भाई की ओर, और उस से आलिंगित पत्नी की ओर, और उसकी सन्तानों के शेष भाग की ओर, जो बचे रह गए हैं, बुरी होगी:
५५ कि वो उन में से किसी को भी अपनी सन्तानों के माँस में से नहीं देगा जिसे वो खाएगा: चूँकि उसके पास उस घेराबन्दी में कुछ भी बचा नहीं रहा है, और उस आभाव में, जिस के साथ तुम्हारे शत्रु तुम्हें तुम्हारे सभी दरवाज़ों में पीड़ित करेंगे।
५६ तुम्हारे बीच वो कोमल और सुकुमारी स्त्री, जो कोमलता और सुकुमारिता के कारण धरती पर अपने पैर को भी रखने का प्रयत्न नहीं करती है, उसकी आँख बुरी होगी उस से आलिंगित पति की ओर, और उसके बेटे की ओर, और उसकी बेटी की ओर,
५७ और अपनी गर्भनाल की ओर जो उसके पैरों के बीच में से बाहर निकलती है, और उसकी सन्तानों की ओर जिन्हें वो जनेगी: चूँकि वो उन्हें चुपके से खाएगी सभी वस्तुओं के आभाव के कारण उस घेराबन्दी और आभाव में, जिस के साथ तुम्हारा शत्रु तुम्हें तुम्हारे सभी दरवाज़ों में पीड़ित करेगा।
५८ यदि तुम इस नियम के समस्त शब्दों को ध्यानपूरवक्ता से नहीं करोगे जो इस पुस्तक में लिखे हुए हैं, ताकि तुम इस गौरवशाली और भयानक नाम का भय मान सको, प्रभु तुम्हारे ईश्वर;
५९ तब प्रभु तुम्हारी विपत्तियों को अचरज-भरा बना डालेंगे, और तुम्हारे बीज की विपत्तियों को बहुत ही विशाल आपत्तियाँ, और निरन्तर-काल की, और घोर बीमारियाँ, निरन्तर-काल की।
६० इसके अतिरिक्त वह तुम पर मिस्र के समस्त रोगों को ले आएँगे, जिन से तुम डरते थे; और वह रोग तुम्हारे साथ चिपट जाएँगे।
६१ और प्रत्येक बीमारी, और प्रत्येक विपत्ती, जो इस नियम की पुस्तक में नहीं लिखी हुई है, उन्हीं को प्रभु तुम पर ले आएँगे, जब तक तुम्हारा विध्वंस नहीं हो जाता है।
६२ और तुम अल्पसंख्यक रह जाओगे, जब कि तुम स्वर्ग के सितारों समान एक जनौघ थे; चूँकि तुमने प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का अनुपालन नहीं किया।
६३ और यह होने को आएगा, कि जैसे प्रभु ने तुम पर तुम्हारे प्रति अच्छाई करने पर हर्ष मनाया, और तुम्हें गुणा करने हेतु; वैसे ही प्रभु तुम्हें नष्ट कर देने पर हर्ष मनाएँगे, और तुम्हारा विध्वंस कर देने पर; और तुम भूमी पर से उखाड़ दिए जाओगे जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
६४ और प्रभु तुम्हें समस्त लोगों के बीच बिखेर देंगे, पृथ्वी के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक भी; और वहीं तुम अन्य ईश्वरों की सेवा करोगे, जिन से न ही तुम न ही तुम्हारे पित्र परिचित हुए हो, लकड़ी और पत्थर ही।
६५ और इन्हीं राष्ट्रों के बीच तुम कोई भी विश्राम नहीं पाओगे, न ही तुम्हारे पैर का तलवा विश्राम करेगा: बल्कि प्रभु तुम्हें वहाँ एक काँपता हुआ हृदय देंगे, और विफल आँखें, और आत्मा की व्यथा:
६६ और तुम्हारा जीवन तुम्हारे समक्ष एक शंका में लटकेगा; और तुम दिन और रात डरते रहोगे, और तुम्हारे जीवन का तुम्हारे पास कोई भी आश्वासन नहीं रहेगा:
६७ सुबह तुम कहोगे, काश कि वह संध्या ले आते! और संध्या के समय तुम कहोगे, काश कि वह सुबह ले आते! तुम्हारे हृदय के उस भय के कारण जिस से तुम डरोगे, और तुम्हारी आँखों की दृष्टि के कारण जो तुम देखोगे।
६८ और प्रभु तुम्हें मिस्र में जलयानों के साथ पुनः ले आएँगे, उस पथ पर से जिसके विषय में मैं तुम से बोला था, तुम उसे फिर कभी नहीं देखोगे: और वहीं तुम बंध्वा-दासों और बंध्वा-दासियों जैसे अपने शत्रुओं को बेचे जाओगे, और कोई भी तुम्हें ख़रीदेगा नहीं।
उन्नतीसवाँ अध्याय।
१ यही उस प्रतिज्ञा-पत्र के शब्द हैं, जिन्हें प्रभु ने मूसा को आदेश दिए थे मोआब की भूमी में इस्राएल की सन्तानों के साथ बनाने हेतु, उस प्रतिज्ञा-पत्र के अतिरिक्त जो उन्होंने उनके साथ होरेब में बनाया था।
२ और मूसा ने समस्त इस्राएल को बुलाया, और उनसे कहा, तुम ने वो सभी कुछ देख लिया है, जो प्रभु ने तुम्हारी आँखों के सामने मिस्र की भूमी में फैरो के साथ, और उसके सभी नौकरों के साथ, और उसकी समस्त भूमी के साथ, किया था;
३ वह बड़ी परीक्षाएँ जो तुम्हारी आँखों ने देख ली हैं, वो संकेत, और वो बड़े चमत्कार:
४ तथापि प्रभु ने तुम्हें इस दिन तक भी आभास करने हेतु हृदय, और देखने हेतु आँखें, और सुनने हेतु कान प्रदान नहीं किए हैं।
५ और मैंने चालीस वर्ष जँगली-क्षेत्र में तुम्हारा नेतृत्व किया: तुम्हारे कपड़े घिस कर तुम पर फटे नहीं, और तुम्हारा जूता तुम्हारे पैर पर घिस कर फटा नहीं।
६ तुम ने रोटी नहीं खाई, न ही अंगूर-रस या मदिरा पी है: ताकि तुम जान सको कि मैं प्रभु हूँ तुम्हारा ईश्वर।
७ और जब तुम इस स्थान पहूँच गए थे, हेश्बोन का राजा सिहोन, और बशान का राजा ओग, हमारे विरुद्ध संग्राम करने बाहर निकल आए, और हमने उन्हें पीट दिया:
८ और हमने उनकी भूमी लेकर उसे एक विरासत हेतु रूबेन-वंशजों को, और गाद-वंशजों को, और मनश्शे की आधी प्रजाति को प्रदान कर दी।
९ इसलिए इस प्रतिज्ञा-पत्र के शब्दों को रखना, और उन्हें करना, ताकि तुम अपनी सभी करनियों में समृद्ध हो जाओ।
१० तुम इस दिन तुम सभी प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख खड़े हो; तुम्हारी प्रजातियों के कप्तान, तुम्हारे वृद्ध-गण, और तुम्हारे अफ़सर, इस्राएल के सभी पुरुषों के साथ,
११ तुम्हारे छोटे-नन्हे, तुम्हारी पत्नियाँ, और वो परदेशी जो तुम्हारे शिविर में है, लकड़हारे से लेकर तुम्हारा पानी खींचने वाले तक:
१२ ताकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के साथ प्रतिज्ञा-पत्र में सम्मिलित हो जाओ, और उनकी शपथ में, जिसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे साथ इस दिन बना रहे हैं:
१३ ताकि वह तुम्हें इस दिन अपने प्रति एक गण स्थापित कर दें, और कि वो तुम्हारे प्रति ईश्वर बन जाएँ, जैसा उन्होंने तुम से कह दिया है, और जैसा उन्होंने तुम्हारे पित्रों को, अब्राहम को, इसहाक को, और याकूब को, वचन दे दिया है।
१४ न ही मैं केवल तुम्हारे साथ ही यह प्रतिज्ञा-पत्र और यह शपथ स्थापित कर रहा हूँ;
१५ बल्कि उसके साथ जो यहाँ प्रभु हमारे ईश्वर के समक्ष हमारे साथ खड़ा है, और उसके साथ भी जो हमारे साथ यहाँ इस दिन नहीं है:
१६ (चूँकि तुम जानते हो कि हम कैसे मिस्र की भूमी में निवास कर चुके हैं; और हम कैसे उन राष्ट्रों में से होते हुए आए जिनके तुम पार गए;
१७ और तुमने देख ली हैं उनकी अति-घृणितताएँ, और उनकी मूर्तियाँ, लकड़ी और पत्थर, चाँदी और सोना, जो उनके बीच थे:)
१८ कहिं तुम्हारे बीच पुरुष, या स्त्री, या परिवर, या प्रजाति हो, जिसका हृदय इस दिन प्रभु हमारे ईश्वर से परे मुड़ रहा हो, जाकर इन राष्ट्रों के ईश्वरों की सेवा करने हेतु; कहिं तुम्हारे बीच कोई जड़ हो जो पित्त और नागदौना लिए;
१९ और यह होने को आए, कि जब वो इस श्राप के शब्दों को सुनता है, कि वो अपने हृदय में स्वयं को आशीष दे, कहता हुआ, मेरे पास शान्ति रहेगी, भले ही मैं अपने हृदय की कल्पना में चलता हूँ, मादकता में प्यास मिलाता हुआ:
२० प्रभु उसे बक्शेंगे नहीं, बल्कि तब प्रभु का क्रोध और उनकी ईर्ष्या उस आदमी के विरुद्ध भभक जाएगी, और वह सभी श्राप जो इस पुस्तक में लिखे हुए हैं उस पर पड़ जाएँगे, और प्रभु उसका नाम स्वर्ग के तले से मिटा डालेंगे।
२१ और प्रभु उसे इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से बुराई के प्रति पृथक कर देंगे, उस प्रतिज्ञा-पत्र के सभी श्रापोंनुसार जो नियम की इस पुस्तक में लिखे हुए हैं:
२२ ताकि तुम्हारी सन्तानों की आने वाली पीढ़ी जो तुम्हारे पश्चात उठ खड़ी होगी, और वो परदेशी जो किसी दूर की भूमी से आएगा, कहेंगे, जब वो उस भूमी की उन विपत्तियों को देखेंगे, और उन बीमारियों को जिन्हें प्रभु ने उस पर डाल दी हैं;
२३ और वहाँ की वो सम्पूर्ण भूमी ही गंधक, और नमक, और जलना है, जो बोई हुई नहीं है, न ही फल देती है, न ही उस में कोई घास उगती है, सदोम, और गमोरा, आदमाह, और ज़ेबोइम की उलट-पलट के समान, जिन्हें प्रभु ने अपने क्रोध, और अपने आक्रोश में उलट-पलट कर दिया था:
२४ सभी राष्ट्र भी कहेंगे, किस कारण वश प्रभु ने इस भूमी के साथ ऐसा कर डाला है? इस बड़े क्रोध की गर्मी का क्या अर्थ है भई?
२५ तब लोग कहेंगे, चूँकि इन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर की प्रतिज्ञा-पत्र का त्याग कर डाला है, जिसे उन्होंने इनके साथ बनाया था जब वह इन्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ले आए थे:
२६ क्योंकि ये चले गए और अन्य ईश्वरों की सेवा की, और उनकी पूजा की, ईश्वर-गण जिन से वो परिचित न थे, और जिन्हें उन्होंने इन्हें प्रदान नहीं किया था:
२७ और प्रभु का क्रोध इस भूमी के विरुद्ध सुलग उठा था, इस पर उन सभी श्रापों को लाने हेतु जो इस पुस्तक में लिखे हुए हैं;
२८ और प्रभु ने इन्हें क्रोध में, और आक्रोश में, और बड़े ही रोष में, इनकी भूमी में से उखाड़ डाला, और इन्हें एक अन्य भूमी में पटक डाला, जैसा कि इस दिन है।
२९ गोपनीय बातें प्रभु हमारे ईश्वर की हैं: परन्तु वो बातें जो प्रत्यक्ष हैं सदा के लिए हमारी, और हमारी सन्तानों की हैं, ताकि हम इस नियम के सभी शब्दों का पालन करें।
तीसवाँ अध्याय।
१ और यह होने को आएगा, जब यह समस्त बातें तुम बीत चुकेंगी, वह आशीष, और वह श्राप, जो मैंने तुम्हारे समक्ष रख दिया है, और तुम उनका स्मरण उन सभी राष्ट्रों के बीच करोगे, जहाँ प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें खदेड़ दिया है,
२ और प्रभु अपने ईश्वर के पास वापस आ जाओगे, और उनकी वाणी का पालन करोगे उस सभी के अनुसार जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, तुम और तुम्हारी सन्तानें, अपने सम्पूर्ण हृदय से, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से;
३ तब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे बाँधत्व को मोड़ देंगे, और तुम्हारे साथ समवेदना दिखाएँगे, और तुम्हें उन सभी राष्ट्रों से वापस लाकर एकत्रित कर लेंगे, जहाँ प्रभु तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें बिखेर दिया है।
४ यदि तुम्हारा कोई भी स्वर्ग के सीमान्त तक खदेड़ दिया गया हो, वहीं से ही प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें एकत्रित कर लेंगे, और वहीं से वह तुम्हें ले आएँगे:
५ और प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस भूमी में ले आएँगे जिस पर तुम्हारे पित्रों ने अधिकार कर लिया था, और तुम उस पर अधिकार कर लोगे; और वह तुम्हारे साथ भला करेंगे, और तुम्हें तुम्हारे पित्रों से भी अधिक गुणा कर देंगे।
६ और प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे हृदय का, और तुम्हारे बीज के हृदय का ख़तना कर देंगे, तुम्हारे सम्पूर्ण हृदय के साथ, और तुम्हारी सम्पूर्ण आत्मा के साथ प्रभु तुम्हारे ईश्वर के साथ प्रेम करने हेतु, ताकि तुम जी सको।
७ और प्रभु तुम्हारे ईश्वर इन सभी श्रापों को तुम्हारे शत्रुओं पर, और तुम से घृणा करने वालों पर, जो तुम्हारा अत्याचार करते हैं, डाल देंगे।
८ और तुम वापस लौट आओगे और प्रभु की वाणी का आज्ञापालन करोगे, और उनके सभी आदेशों को करोगे जो मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ।
९ और प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें तुम्हारे हाथ के प्रत्येक कार्य में बहुतायत बना देंगे, तुम्हारे शरीर के फल में, और तुम्हारे मवेशी के फल में, और तुम्हारी भूमी के फल में, भलाई हेतु: क्योंकि प्रभु तुम पर भलाई हेतु पुनः हर्ष मनाएँगे, जैसे वह तुम्हारे पित्रों पर हर्ष मानते थे:
१० यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का श्रवण करोगे, उनके आदेशों और उनके अध्यादेशों को रखने हेतु जो नियम की इस पुस्तक में लिखे हुए हैं, और यदि तुम प्रभु अपने ईश्वर की ओर अपने सम्पूर्ण हृदय के साथ, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ मुड़ जाओगे।
११ क्योंकि यह आदेश जिसका मैं तुम्हें इस दिन आदेश दे रहा हूँ, यह तुम से छुपा हुआ नहीं है, न ही बहुत दूर है।
१२ यह स्वर्ग में नहीं है, कि तुम कहो, हमारे लिए कौन ऊपर स्वर्ग तक जाकर उसे हमारे पास ले आए, ताकि हम उसे सुन सकें, और उसे कर सकें?
१३ न ही यह समुद्र के पार है, कि तुम कहो, हमारे लिए कौन समुद्र पर से जाकर उसे हमारे पास ले आए, ताकि हम उसे सुन सकें, और उसे कर सकें?
१४ बल्कि वह शब्द तुम्हारे बहुत ही निकट है, तुम्हारे मुँह में, और तुम्हारे हृदय में, ताकि तुम उसे करो।
१५ देखो, मैंने इस दिन तुम्हारे समक्ष जीवन और भलाई, और मृत्यु और बुराई स्थित कर दिए हैं;
१६ कि इस दिन मैं तुम्हें आदेश दूँ प्रभु तुम्हारे ईश्वर से प्रेम करने का, उनके पथों पर चलने का, और उनके आदेशों और उनके अध्यादेशों और उनके न्याय-निर्धारणों का पालन करने का, ताकि तुम जीयो और गुणा हो जाओ: और प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हें उस भूमी में आशीष दे देंगे जहाँ तुम उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
१७ परन्तु यदि तुम्हारा हृदय परे मुड़ जाएगा, कि तुम नहीं सुनोगे, बल्कि परे खिंच कर अन्य ईश्वरों को पूजोगे, और उनकी सेवा करोगे;
१८ मैं इस दिन तुम्हें यह घोषित करता हूँ, कि तुम अवश्य ही नष्ट हो जाओगे, और तुम भूमी पर अपने दिनो की वृद्धी नहीं कर पाओगे, जहाँ तुम यर्दन पार उस पर अधिकार करने जा रहे हो।
१९ मैं इस दिन स्वर्ग और पृथ्वी का आह्वान करता हूँ तुम्हारे विरुद्ध साक्ष्य देने हेतु, कि मैंने तुम्हारे समक्ष जीवन और मृत्यु, आशीर्वाद और श्राप स्थित कर दिए हैं: इसलिए जीवन को चुनो, ताकि दोनो तुम और तुम्हारा बीज जी लें;
२० ताकि तुम प्रभु अपने ईश्वर के साथ प्रेम करो, और कि तुम उनकी वाणी का आज्ञापालन करो, और कि तुम उनके साथ चिपटे रहो: क्योंकि वही तुम्हारा जीवन हैं, और तुम्हारे दिनो की लम्बाई: ताकि तुम उस भूमी में निवास कर सको जो प्रभु ने तुम्हारे पित्रों, अब्राहम को, इसहाक को, और याकूब को, प्रदान कर देने की शपथ दी थी।
इक्कत्तीसवाँ अध्याय।
१ और मूसा ने जाकर यह सभी शब्द समस्त इस्राएल को बोल दिए।
२ और उसने उनसे कहा, मैं इस दिन एक सौ बीस वर्ष की आयु का हूँ; मैं अब और बाहर-अन्दर नहीं जा सकता; और प्रभु ने मुझ से कह भी दिया है, तुम इस यर्दन के पार नहीं जाओगे।
३ प्रभु तुम्हारे ईश्वर, वही तुम्हारे समक्ष पार जाएँगे, और वह इन राष्ट्रों का तुम्हारे समक्ष ही विध्वंस कर देंगे, और तुम उन पर अधिकार कर लोगे: और यहोशुआ, वही तुम्हारे समक्ष पार जाएगा, जैसा प्रभु ने कह दिया है।
४ और प्रभु उनके साथ वैसा ही कर देंगे जैसा उन्होंने सिहोन और ओग, एमोरवासियों के राजाओं के साथ, और उनकी भूमी के साथ किया था, जिनका उन्होंने विध्वंस कर दिया।
५ और प्रभु उन्हें तुम्हारे चहरे के सामने प्रदान कर देंगे, ताकि तुम उनके साथ उन समस्त आदेशोंनुसार कर दो जो मैंने तुम्हें आदेश दिए हैं।
६ दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो, डरो मत, न ही उनसे भयभीत हो: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर ही वह हैं जो तुम्हारे साथ जा रहे हैं; वह तुम्हें विफल नहीं करेंगे, न ही तुम्हारा त्याग करेंगे।
७ और मूसा ने यहोशुआ को बुलाया, और उसने समस्त इस्राएल की दृष्टि में उस से कहा, दृढ़ता और अच्छे शौर्य वाले बनो: क्योंकि तुम्हें इन लोगों के साथ उस भूमी में जाना है, जिसकी शपथ प्रभु ने इनके पित्रों को दी है इसे उन्हें प्रदान कर देने के लिए; और तुम इसकी उन्हें विरासत दिलवाओगे।
८ और प्रभु ही वह हैं जो तुम्हारे समक्ष जाते हैं; वही तुम्हारे साथ होंगे, वह तुम्हें विफल नहीं करेंगे, न ही तुम्हारा त्याग करेंगे: डरो मत, न ही निराश बनो।
९ और मूसा ने यह नियम लिखा, और उसे उन पुरोहितों लेवी के बेटों को प्रदान कर दिया, जो प्रभु की प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोते हैं, और इस्राएल के समस्त वृद्ध-गणों को।
१० और मूसा ने उन्हें आदेश दिया, कहते हुए, प्रत्येक सात वर्षों के अन्त में, ऋण-भुक्तान के वर्ष के नियुक्त समय पर, तम्बुओं के भोज के अवसर पर,
११ जब समस्त इस्राएल प्रभु तुम्हारे ईश्वर के समक्ष उस स्थान में जिसे वह चुनेंगे, प्रस्तुत होने हेतु आ गया हो, तो तुम समस्त इस्राएल के समक्ष उनकी सुनवाई में इस नियम को पढ़ोगे।
१२ लोगों को एक साथ एकत्रित कर लेना, पुरुषों को, और स्त्रियों को, और बच्चों को, और तुम्हारे परदेशी को जो तुम्हारे दरवाज़ों में है, ताकि वह सुनें, और कि वह सीखें, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर का भय मानें, और इस नियम के सभी शब्दों को ध्यान से करें:
१३ और ताकि उनकी सन्तानें जिन्होंने कुछ भी नहीं जाना है, सुनें, और प्रभु तुम्हारे ईश्वर से डरना सीख लें, जितने समय तक भी तुम उस भूमी में जीते हो जहाँ तुम यर्दन पार उस पर अधिकार करने जाओगे।
१४ और प्रभु ने मूसा से कहा, देखो, तुम्हारे दिन निकट आ रहे हैं कि तुम मर जाओ: यहोशुआ को बुलाओ, और सभा के तम्बू में स्वयं को उपस्थित करो, ताकि मैं उसे एक प्रभार दे सकूँ। और मूसा और यहोशुआ गए, और स्वयं को सभा के तम्बू में उपस्थित कर दिया।
१५ और प्रभु तम्बू में एक मेघ के एक स्तम्भ में प्रकट हुए: और वह मेघ का स्तम्भ तम्बू के द्वार के ऊपर खड़ा था।
१६ और प्रभु ने मूसा से कहा, देखो, तुम अपने पित्रों के साथ सो जाओगे; और यह लोग उठ कर भूमी के परदेशियों के ईश्वरों के पीछे-पीछे वैश्यापना करते हुए चले जयेंगे, जहाँ वह उनके बीच होने जा रहे हैं, और मेरा त्याग कर देंगे, और मेरी प्रतिज्ञा-पत्र को भंग कर देंगे जो मैंने इनके साथ बनाई है।
१७ तब मेरा क्रोध उस दिन में इनके विरुद्ध सुलग उठेगा, और मैं इनका त्याग कर दूँगा, और मैं उनसे अपने चेहरा छुपा लूँगा, और उनका भक्षण हो जाएगा, और कई बुराईयाँ और कष्ट उन पर आ पड़ेंगे; ताकि वह उस दिन में बोलेंगे, यह बुराईयाँ क्या हम आ नहीं पड़ी हैं क्या, क्योंकि ईश्वर हमारे बीच नहीं हैं?
१८ और मैं अवश्य ही उस दिन अपना चेहरा छुपा लूँगा उन सभी बुराईयों के लिए जो इन्होंने की हैं, कि वह अन्य ईश्वरों की ओर मुड़ गए हैं।
१९ अब इसलिए अपने लिए यह गीत लिख लो, और इसे इस्राएल की सन्तानों को सिखा दो: इसे उन्हें मुँहों में डाल दो, ताकि यह गीत मेरे लिए इस्राएल की सन्तानों के विरुद्ध एक साक्ष्य बन जाए।
२० क्योंकि जब मैं इन्हें उस भूमी में भीतर ले आ चुकूँगा जो मैंने इनके पित्रों को शपथ दी थी, जो दूध और मधु से बहती है; और यह खाकर स्वयं को संतुष्ट कर चुकेंगे, और मोटे हो चुकेंगे; तब यह अन्य ईश्वरों की ओर मुड़ जाएँगे, और उनकी सेवा करेंगे, और मुझे उकसा देंगे, और मेरी प्रतिज्ञा-पत्र को भंग कर देंगे।
२१ और यह होने को आएगा, जब कई बुराईयाँ और व्यथाएँ इन पर आ पड़ेंगी, कि यह गीत उनके विरुद्ध एक साक्षी के समान साक्ष्य देगा; क्योंकि यह इनके बीज के मुँहों में से भुलाया नहीं जाएगा: क्योंकि मैं इनकी कल्पना की करनीयों से परिचित हूँ, इसी वर्तमान में ही, इन्हें मेरी उस शपथ वाली भूमी में मेरे इन्हें लाने से पहले ही।
२२ इसलिए मूसा ने यह गीत उसी दिन लिख लिया, और उसे इस्राएल की सन्तानों को सिखा दिया।
२३ और उन्होंने नून के बेटे यहोशुआ को प्रभार सौंप दिया, और कहा, सुदृढ़ता और शौर्य वाले बनो: क्योंकि तुम इस्राएल की सन्तानों को उस भूमी में लाओगे जिसकी मैंने उन्हें शपथ दी थी: और मैं तुम्हारे साथ हूँगा।
२४ और यह होने को आया, जब मूसा ने एक पुस्तक में इस नियम के शब्दों को लिख देने का अन्त कर दिया था, जब तक कि उनका समापन हो चुका था,
२५ कि मूसा ने लेवी-वंशजों को, जो प्रभु की प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ढोते हैं, आदेश दिया, कहते हुए,
२६ इस नियम की पुस्तक को लेकर इसे प्रभु तुम्हारे ईश्वर की प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक के पाशर्व में रख दो, ताकि यह वहाँ तुम्हारे विरुद्ध एक साक्ष्य हेतु रह सके।
२७ क्योंकि मैं तुम्हारे विद्रोह और तुम्हारी ऐंठी गर्दन से परिचित हूँ: देखो, मेरे इस दिन तुम्हारे साथ जीते-जी ही, तुम प्रभु के विरुद्ध विद्रोही रहे हो; और मेरी मृत्यु के पश्चात और भी कितने भई?
२८ मेरे पास अपनी प्रजातियों के सभी वृद्ध-गणों को, और अफ़सरों को एकत्रित कर लो, ताकि मैं यह शब्द इनके कानों में बोल सकूँ, और स्वर्ग और पृथ्वी का इनके विरुद्ध आह्वान कर दूँ साक्ष्य देने हेतु।
२९ क्योंकि मैं जानता हूँ कि मेरी मृत्यु के पश्चात तुम स्वयं को भ्रष्ट ही कर लोगे, और उस पथ पर से परे मुड़ जाओगे जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है; और उन अंतिम दिनो में तुम पर बुराई आ पड़ेगी; क्योंकि तुम प्रभु की दृष्टि में बुराई कर दोगे, उन्हें तुम्हारे हाथों के कार्य द्वारा क्रोध के प्रति उकसा देने से।
३० और मूसा ने इस्राएल की समस्त सभा के कानो में इस गीत के शब्द बोल दिए, जब तक कि समाप्त नहीं हो गए थे।
बत्तीसवाँ अध्याय।
१ ओ तुम स्वर्गों, कान लगा कर सुन लो, और मैं बोलूँगा; और ओ पृथ्वी मेरे मूँह के शब्दों का श्रवण कर लो।
२ मेरा सिद्धान्त वर्षा के समान टपकेगा, मेरा कथन तुषार समान गिरेगा, कोमल वनस्पति पर रिमझिम वर्षा के समान, और घास पर बौछारों के समान:
३ क्योंकि मैं प्रभु के नाम की घोषणा करूँगा: हमारे ईश्वर को महान मान लो।
४ वही चट्टान हैं, उनका कार्य परिपूर्ण है: क्योंकि सभी उनके पथ न्याय-निर्धारण हैं: सत्य के ईश्वर और अधर्मता-हीन, न्यायपूर्ण और सही हैं वह।
५ इन्होंने स्वयं को भ्रष्ट कर दिया है, इनका कलंक उनकी सन्तानों का कलंक नहीं है: वह तो एक विकृत और टेढ़ी-मेढ़ी पीढ़ी हैं।
६ क्या तुम इस प्रकार प्रभु का भुक्तान करोगे, ओ मूर्ख और निर्बोध गण? क्या वही तुम्हारे पितश्री नहीं हैं क्या जिन्होंने तुम्हें खरीद लिया है? क्या इन्हीं ने तुम्हें नर्मित और स्थापित नहीं किया है क्या?
७ बीते युगों के दिनो का स्मरण करो, कई पीढ़ियों के वर्षों का विचार करो: अपने पिता से पूछो, और वह तुम्हें बता देगा; अपने वृद्धों से, और वह तुम्हें बतला देंगे।
८ जब उन सर्वोच्चतम ने राष्ट्रों को उनकी विरासत विभाजित की थी, जब उन्होंने आदम के बेटों को पृथक कर दिया था, उन्होंने लोगों की सीमा-रेखाओं को स्थापित कर दिया था इस्राएल की सन्तानों की संख्यानुसार।
९ क्योंकि प्रभु का भाग उनके लोग हैं; याकूब उनकी विरासत की पर्ची है।
१० उन्होंने उसे एक जँगली भूमी में पाया, और एक उजाड़ चीखते हुए मरुस्थल में; उन्होंने उसका इधर-उधर नेतृत्व किया, उन्होंने उसका निर्देशन किया, उन्होंने उसे अपनी आँख के सितारे समान रखा।
११ जैसे एक गरुड़ अपने घोंसले को जगाता है, अपने नन्हों के ऊपर फड़फड़ाता है, अपने पंखों को बाहर फैला कर, उन्हें लेकर, अपने पंखो पर उठा लेता है:
१२ इसी प्रकार ही प्रभु ने अकेले ही उसका नेतृत्व किया, और उसके साथ कोई भी विचित्र ईश्वर नहीं था।
१३ उन्होंने उसे पृथ्वी के उच्च स्थानो पर सवारी करवाई, ताकि वह खेतों की उपज खा सके; और उन्होंने उसे उस चट्टान में से बाहर मधु, और उस चकमक की चट्टान में से बाहर तेल को चुसवाया;
१४ गऊओं का मक्खन, और भेड़ों का दूध, मेमनों की चर्बी के साथ, और बशान की नस्ल के मेढ़े, और बकरे, गेहूँ के गुर्दों की चर्बी के साथ; और तुमने अंगूर का शुद्ध रक्त पीया भी।
१५ परन्तु जशरन मोटा होता गया, और उसने लात मारी: तुम मोटे हो चले हो, तुम चौड़े बन गए हो, तुम चर्बीपने से ढक गए हो; तब उसने ईश्वर को त्याग दिया जिन्होंने उसे निर्मित किया था, और अपने बचाव की शिला का निरादर कर दिया।
१६ उन्होंने उन्हें परदेशी ईश्वरों से ईर्ष्या हेतु उकसाया, अति-घृणितताओं से उन्होंने उन्हें क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया।
१७ उन्होंने दानवों के प्रति बलि चढ़ाई, ईश्वर के प्रति नहीं; उन ईश्वरों के प्रति जिनसे वह परिचित न थे, नए ईश्वरों के प्रति जो नए उभर आए, जिनका भय तुम्हारे पित्रों ने नहीं माना।
१८ तुम्हें जनने वाली उस चट्टान के प्रति तुम विस्मृत हो, और तुम ईश्वर को भूल गए हो जिन्होंने तुम्हें रचा।
१९ और जब प्रभु ने यह देखा, उन्होंने उनसे घृणा की, उनके बेटों, और उनकी बेटियों के उत्तेजना-करण के कारण।
२० और उन्होंने कहा, मैं अपने चेहरा उनसे छिपा दूँगा, मैं देखूँगा की उनका अन्त कैसा होगा: क्योंकि यह तो एक बहुत ही टेढ़ी-मेढ़ी पीढ़ी है, विश्वासहीन सन्तानें।
२१ इन्होंने मुझे उसके साथ ईर्षालू बना दिया है जो ईश्वर नहीं है; इन्होंने मुझे अपनी व्यर्थताओं से क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया है: और मैं इन्हें उनके साथ ईर्षालू बना दूँगा जो कोई गण नहीं हैं; मैं इन्हें एक मूर्ख राष्ट्र के साथ क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दूँगा।
२२ क्योंकि मेरे क्रोध में एक अग्नी सुलग उठी है, और वह सबसे निचले नरक तक भी जलेगी, और पृथ्वी का उसकी वृद्धी के साथ भक्षण कर देगी, और पर्वतों की नीवों पर आग लगा देगी।
२३ मैं उन पर आपत्तियों का ढेर लगा दूँगा; मैं उन पर अपने बाणों की खपत कर दूँगा।
२४ वह भूख से जल जाएँगे, और जलती हुए ताप से और कड़े विनाश के साथ उनका भक्षण हो जाएगा: मैं उन पर जानवरों के दाँतों को धूल के साँपों के विष के साथ भेज दूँगा।
२५ बाहर तलवार, और भीतर आतंक, दोनो उस युवा पुरुष का और उस कुँवारी का, दूध पीते हुए का भी, श्वेत बाल लिए उस आदमी के साथ विनाश कर देंगे।
२६ मैंने कहा, मैं इन्हें दूर कोनों में तितर-बितर कर दूँगा, मैं लोगों के बीच में से उनके स्मरण को मिटा दूँगा:
२७ ऐसा न था कि मुझे शत्रु की चिढ़ का भय था, कहिं उनके प्रतिद्वंदी अटपटा व्यवहार करें, और कहिं वह कहें कि भई हमारा हाथ ऊँचा रहा है, और प्रभु ने तो यह सब कुछ नहीं किया है।
२८ क्योंकि वह तो एक परामर्श-हीन राष्ट्र हैं, न ही इन में कोई भी प्रज्ञा है।
२९ हाय कि यह विद्वान होते, कि इन्होंने यह समझा होता, कि इन्होंने अपने अंतिम अन्त का विचार कर लिया होता!
३० कोई एक कैसे एक हज़ार का पीछा करे, और दो दस हज़ारों को भगा डालें, सिवाय कि उनकी शिला ने उन्हें बेच दिया हो, और प्रभु ने उन्हें बँद कर दिया हो?
३१ क्योंकि उनका पत्थर हमारी शिला समान नहीं है, हमारे शत्रु भी स्वयं न्याय करने वाले हैं।
३२ क्योंकि उनकी लता सदोम की, और गमोरा के खेतों की लता है: उनके अंगूर पित्त के अंगूर हैं, उन्हें गुच्छे कड़वे हैं:
३३ उनका अंगूर-रस अजगरों का विष है, और फनदार-विषैले नागों का क्रूर विष।
३४ क्या यह मेरे पास इकट्ठा एकत्रित नहीं है क्या, और मेरे धन-कोषों के बीच मुहर-बँद?
३५ मेरा है प्रतिषोध, और भुक्तान; उचित समय पर फिसल जाएगा उनका पैर: क्योंकि उनकी आपदा का दिन निकट ही है, और वह घटनाएँ जो उन पर आ पड़ेंगी फुर्तीली हैं।
३६ क्योंकि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेंगे, और अपने सेवकों के लिए स्वयं परिवर्तित हो जाएँगे, जब वह देखते हैं कि उनकी शक्ती जा चुकी हैम और कोई भी बँद नहीं रहा है, या बचा हुआ।
३७ और वह कहेंगे, कहाँ हैं उनके ईश्वर, उनका पत्थर जिस में उन्होंने भरोसा किया था,
३८ जिन्होंने उनकी बलियों की चर्बी में से खाया, और उनके पेय-चढ़ावों के अंगूर-रस में से पिया? उठ जाने दो उन्हें और तुम्हारी सहायता कर लेने दो, और तुम्हारी सुरक्षा बन जाने दो।
३९ अब देख लो कि मैं, मैं ही वही हूँ, और मेरे साथ कोई अन्य ईश्वर नहीं है: मैं ही मारता हूँ, और मैं ही जीवित करता हूँ; मैं ही घायल करता हूँ, और मैं ही आरोग्य करता हूँ: न ही कोई भी ऐसा है जो मेरे हाथ में से बाहर बचाव कर सकता है।
४० क्योंकि मैं मैं ही अपना हाथ स्वर्ग की ओर उठता हूँ, और कहता हूँ, मैं अनन्तता तक जीता हूँ।
४१ यदि मैं अपनी चमचमाती तलवार को तेज़ करूँ, और मेरा हाथ न्याय को पकड़ ले; मैं अपने शत्रुओं पर प्रतिषोध लौटा डालूँगा, और उन्हें जो मुझ से घृणा करते हैं पुनःभुक्तान कर दूँगा।
४२ मैं अपने बाणों को रक्त से धुत कर दूँगा, और मेरी तलवार माँस को खा जाएगी; मरे हुओ के और बंदियों के रक्त के ही साथ, शत्रुओं पर प्रतिशोधों के आरम्भ से लेकर ही।
४३ हर्ष मना लो, ओ तुम राष्ट्रों, उनके लोगों के साथ ही: क्योंकि वह अपने सेवकों के रक्त का प्रतिषोध लेंगे, और अपने प्रतिद्वंदियों पर प्रतिषोध का भुक्तान कर देंगे, और अपनी भूमी के प्रति, और अपने लोगों के प्रति दयालु होंगे।
४४ और मूसा आया और इस गीत के समस्त शब्द लोगों के कानों में बोल दिए, उसने, और नून के बेटे होशेअ ने।
४५ और मूसा ने समस्त इस्राएल से इन सभी शब्दों को बोलने का अन्त कर दिया:
४६ और उसने उनसे कहा, अपने मनो को इन सभी शब्दों पर लगा लो जिनका मैं तुम्हारे बीच इस दिन साक्ष्य दे रहा हूँ, जिन्हें तुम करने हेतु अपनी सन्तानों को आदेश दोगे, इस नियम के समस्त शब्द ही।
४७ क्योंकि यह तुम्हारे लिए कोई व्यर्थ बात नहीं है; क्योंकि यह तुम्हारा जीवन है: और इस बात के माध्यम से तुम उस भूमी में, जहाँ तुम यर्दन पार उस पर अधिकार करने जा रहे हो, अपने दिनो की वृद्धी करोगे।
४८ और प्रभु मूसा से उसी ही दिन बोले, कहते हुए,
४९ तुम इस पर्वत अबरिम पर ऊपर चले जाओ, नेबो पहाड़ तक, जो यरीहो के विपरीत मोअब की भूमी में है; और कनान की भूमी को देखो, जिसे मैं इस्राएल की सन्तानों को एक अधिकार हेतु देता हूँ:
५० और उस पहाड़ में जहाँ तुम ऊपर जा रहे हो मर जाओ, और अपने लोगों के साथ एकत्रित हो जाओ; जैसे तुम्हारा भाई हारुन होर के पहाड़ पर मर गया था, और अपने लोगों के साथ एकत्रित हो गया था:
५१ चूँकी तुमने मेरे विरुद्ध इस्राएल की सन्तानों के बीच मरीबा-कादेश के पानियों पर ज़िन के जँगली-क्षेत्र में उल्लंघन कर दिया था; चूँकी तुमने मुझे इस्राएल की सन्तानों के बीच पुनीत नहीं ठहराया।
५२ तथापि तुम अपने समक्ष उस भूमी को देखोगे; परन्तु तुम वहाँ उस भूमी तक नहीं जाओगे जिसे मैं इस्राएल की सन्तानों को प्रदान करता हूँ।
तैंतीसवाँ अध्याय।
१ और यही है वह आशीर्वाद, जिस से ईश्वर के बन्दे मूसा ने इस्राएल की सन्तानों को अपनी मृत्यु से पहले आशीष दिया।
२ और उसने कहा, सीनय से प्रभु आए, और सेईर से उनके पास तक उठ गए; परान के पहाड़ से वह उज्ज्वलित हुए, और वह दस हज़ारों संतों के साथ आए: उनके दाहिने हाथ से उनके लिए एक ज्वालामई नियम गया।
३ हाँ भई, उन्होंने लोगों से प्रेम किया; उनके समस्त संत आपके हाथ में हैं: और वह आपके चरणों में नीचे बैठ गए; सभी अपने शब्दों में से ग्रहण करेंगे।
४ मूसा ने हमें एक नियम का आदेश दिया, याकूब की सभा की विरासत ही।
५ और वह जशरन में राजा था, जब लोगों और इस्राएल की प्रजातियों के प्रमुख एक साथ एकत्रित थे।
६ रूबेन को जीने दो, मरने नहीं; और उसके लोगों को कम मत होने दो।
७ और यह यहूदा का आशीर्वाद है: और उसने कहा, सुन लें प्रभु, यहूदा की वाणी, और उसे उसके लोगों के पास ले आएँ: उसके हाथों को उसके लिए पर्याप्त रहने दें; और आप उसके प्रति उसके शत्रुओं से एक सहायता बन जाएँ।
८ और लेवी के विषय में उसने कहा, अपने थुमीम और ऊरीम को अपने पवित्र एक के साथ रहने दो, जिनकी तुमने मेस्सा में परीक्षा ली, और जिनके साथ तुमने मरीबा के पानियों में संघर्ष किया;
९ जिसने अपने पिता और अपनी माता से कहा, मैंने उसे नहीं देखा; न ही उसने अपने भाई-जनो को अभिस्वीकृति दी, न ही अपनी ही सन्तानों से परिचय रखा: क्योंकि उन्होंने आपके शब्द का ध्यान रखा है, और आपके प्रतिज्ञा-पत्र का पालन किया है।
१० वह याकूब को आपके न्याय-निर्धारण, और इस्राएल को अपना नियम सिखाएँगे: वह आपके सम्मुख सुगन्धित-धूप रखेंगे, और आपकी बलिवेदी पर पूर्ण जली-आहुति।
११ प्रभु उसकी सम्पत्ती को आशीष डें, और उसके हाथों के कर्म को स्वीकार करें: उनकी कटियों के आर-पार वार कर दें जो उसके विरुद्ध उठते हैं, और जो उस से घृणा करते हैं, ताकि वह पुनः न उठ जाएँ।
१२ और बिन्यामिन के विषय में उसने कहा, प्रभु का अतिप्रीय उनके साथ सुरक्षित बसेगा; और प्रभु उसे सारे दिन ढका रखेंगे, और वह उनके कन्धों के बीच बसेगा।
१३ और युसुफ के विषय में उसने कहा, प्रभु द्वारा धन्य हो उसकी भूमी, स्वर्ग की बहुमूल्य वस्तुओं के लिए, उस ओस के लिए, और उस गहराई के लिए जो नीचे लेटी है,
१४ और सूर्य द्वारा उत्पन्न किए गए उन मूल्यवान फलों के लिए, और चंद्रमा द्वारा उतपन्न की गई बहुमूल्य वस्तुओं के लिए,
१५ और उन प्राचीन पर्वतों की उच्च वस्तुओं के लिए, और उन शाश्वत पहाड़ियों की मूल्यवान वस्तुओं के लिए,
१६ और पृथ्वी और उसकी भरपूर्ता की बहुमूल्य वस्तुओं के लिए, और उसकी भलाई के लिए जो झाड़ी में बसा था: आशीर्वाद को युसुफ के शीर्ष पर आ जाने दें, और उसके शीर्ष की चोटी पर जो अपने भाईयों से पृथक हो गया था।
१७ उसकी महिमा उसके साँड के पहलौठे जैसी है, और उसके सींघ इक-सींघों के सींघों जैसे हैं: उनके साथ वह लोगों को एक साथ पृथ्वी के अंतिम छोरों तक भी धकेल देगा: और वही एफ्रैम के दसियों हज़ार हैं, और वही मनश्शे के हज़ारों हैं।
१८ और ज़बूलून के विषय में उसने कहा, हर्ष मना लो, ज़बूलून, अपने परस्थान करने में; और इस्सकार, अपने शिविरों में।
१९ वह लोगों को पर्वत तक बुला लेंगे; वहीं वह नेकी की आहुतियों को अर्पित करेंगे: क्योंकि वह समुद्रों की, और रेत में छिपे धन-भण्डारों की आधिक्यता में से पी लेंगे।
२० और गाद के विषय में उसने कहा, धन्य हो वो जो गाद का विस्तार करता है: वह एक सिंह के समान बसता है, और भुजा को खोपड़ी की खाल के साथ फाड़ डालता है।
२१ और उसने स्वयं के लिए प्रथम भाग उपलब्ध करवाया, क्योंकि वहीं, न्याय-दाता के एक भाग में, वह बैठा था; और वह लोगों के प्रमुखों के साथ आया, उसने प्रभु के न्याय को, और इस्राएल के साथ उनके न्याय-निर्धारणों को निष्पादित किया।
२२ और दान के विषय में वह बोला, दान एक सिंह का शावक है, वह बशान से छलांग लगाएगा।
२३ और नफ़्तालि के विषय में उसने कहा, ओ नफ़्तालि, अनुग्रह से तृप्त, और प्रभु के आशीर्वाद से भरपूर: पश्चिम और दक्षिण पर अधिकार कर लो।
२४ और आशेर के विषय में उसने कहा, आशेर को बच्चों से धन्य हो; उसे अपने भाई-जनो के प्रति स्वीकृत हो जाने दो, और उसे अपने पैर को तेल में डुबो लेने दो।
२५ तुम्हारे जूते लोहे और पीतल के होंगे; और जैसे तुम्हारे दिन, वैसे ही तुम्हारी शक्ती होगी।
२६ जशरन के ईश्वर समान कोई भी नहीं है, जो तुम्हारी सहायता में स्वर्ग पर सवारी करते हैं, और अपनी सर्वश्रेष्ठता में आकाश के ऊपर।
२७ अनन्त ईश्वर तुम्हारी शरण हैं, और नीचे हैं वह अनंतकाल की भुजाएँ: और वह तुम्हारे सम्मुख शत्रु को बाहर खदेड़ देंगे; और कहेंगे, विध्वंस कर दो इनका।
२८ तब इस्राएल अकेला सुरक्षित बस जाएगा: याकूब का जल-स्त्रोत अनाज और अंगूर-रस की भूमी पर होगा; उसके स्वर्ग भी नीचे ओस गिराएँगे।
२९ ओ इस्राएल प्रसन्न हो तुम: तुम्हारे समान कौन है, प्रभु द्वारा बचाए हुए ओ गण, तुम्हारी सहायता की ढाल, और जो तुम्हारी सर्वश्रेष्ठता की तलवार हैं! और तुम्हारे शत्रु तुम्हारे प्रति झूठे पाए जाएँगे; और तुम उनके उच्च स्थानो को रौंद डालोगे।
चौंतीसवाँ अध्याय।
१ और मूसा मोआब के मैदानों से ऊपर नेबो पर्वत तक चला गया, पिस्गा की चोटी तक, जो यरीहो के विपरीत है। और प्रभु ने उसे गिलद की सम्पूर्ण भूमी, दान तक, दिखला दी,
२ और समस्त नफ़्तालि, और एफ्रैम की भूमी, और मनश्शे, और यहूदा की समस्त भूमी, दूरतम समुद्र तक,
३ और दक्षिण, और यरीहो की घाटी का मैदान, खजूर के पेड़ों का वह नगर, ज़ोअर तक।
४ और प्रभु ने उस से कहा, यही है वह भूमी जिसकी शपथ मैंने अब्राहम को, इसहाक को, और याकूब को दी थी, कहते हुए, मैं इसे तुम्हारे बीज को दे दूँगा: मैंने तुम्हें यह तुम्हारी आँखों द्वारा दिखला दी है, परन्तु तुम उधर पार नहीं जाओगे।
५ तो प्रभु का सेवक मूसा वहीं मोआब की भूमी में मर गया, प्रभु के शब्दानुसार ही।
६ और उन्होंने उसे मोआब की भूमी में एक घाटी में दफ़ना दिया, बेतपओर के विपरीत: परन्तु कोई भी पुरुष इस दिन तक उसके मक़बरे को नहीं जानता है।
७ और मूसा एक सौ बीस वर्ष की आयु का था जब वह मर गया था: उसकी आँख धुँधली न थी, न ही उसकी शारीरिक स्फूर्ति कम हुई थी।
८ और इस्राएल की सन्तानों ने मोआब के मैदानों में मूसा के लिए तीस दिन विलाप मनाया: तो मूसा के विलाप और शोक मनाने के दिन समाप्त हुए।
९ और नून का बेटा यहोशुआ विद्या के प्राण से भरपूर था; क्योंकि मूसा ने उस पर अपने हाथ रख दिए थे: और इस्राएल की सन्तानों ने उसका श्रवण किया, और वैसा ही किया जैसा प्रभु ने मूसा को आदेश दिया था।
१० और तब से लेकर मूसा के समान इस्राएल में कोई अन्य पैग़म्बर नहीं उठा, जिस से कि प्रभु आमने-सामने परिचित थे।
११ उन समस्त संकेतों और अचरजों में, जिन्हें प्रभु ने उसे करने के लिए भेजा था मिस्र की भूमी में फैरो के पास, और उसके सभी सेवकों के पास, और उसकी समस्त भूमी के पास,
१२ और उस सर्वबलशाली हाथ में, और उस समस्त विशाल आतंक में जो मूसा ने समस्त इस्राएल की दृष्टि में दिखलाया।
०४/३०/२०२५:
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