राजाओं की प्रथम पुस्तक। (First Kings)



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पहला अध्याय।


अब राजा दाऊद वृद्ध हो चला था और दीर्घायु से ग्रस्त था; और वो उसे कपड़ों से ढका करते थे, परन्तु उसे कोई ताप प्राप्त नहीं होता था।

इस कारण वश उसके सेवकों ने उस से कहा, मेरे प्रभु राजा के लिए एक युवती कुँवारी ढूँढी जाए जी: और उसे राजा के समक्ष खड़ा रहने दें, और उसे उनकी सेवा करने दें, और उसे आपकी छाती में लेटने दें, ताकि मेरे प्रभु राजा ताप प्राप्त कर लें।  

तो उन्होंने इस्राएल की सीमाओं के सर्वत्र में एक सुन्दर कन्या ढूँढी, और अबिशग एक शुनमवाली ढूँढ निकाली, और उसे राजा के पास ले आए।

और वो कन्या अति सुन्दर थी, और उसने राजा की देख-रेख की, और उसकी सेवा की: परन्तु राजा ने उसे जाना नहीं।

तब हगिथ के बेटे अदोनीया ने स्वयं को पदोन्नत कर डाला, कहते हुए, मैं राजा बनूँगा भई: और उसने अपने लिए रथ और घुड़सवार, और पचास आदमी उसके आगे-आगे दौड़ने के लिए तैयार कर दिए।

और उसके पिता ने उसे किसी भी समय अप्रसन्न नहीं किया था, यह कहने में, भई तुमने ऐसा क्यों किया है? और वो भी अति रूपवान था; और उसकी माँ ने उसे अब्सलोम के पश्चात जना था।

और उसने ज़रुआया के बेटे योआब के साथ, और पुरोहित अबिथर के साथ विचार-गोष्ठी की: और उन्होंने अदोनीया का अनुसरण करते करते उसकी सहायता की।

परन्तु पुरोहित ज़दोक, और येहोयदा का बेटा बेनाया, और पैग़म्बर नेथन, और शिमई, और रेइ, और वो पराक्रमी पुरुष जो दाऊद के थे, अदोनीया के साथ नहीं थे।

और अदोनीया ने एनरोगल के साथ ज़ोहलथ वाले उस पत्थर के साथ सांडों और मोटे-मोटे मवेशियों को मार डाला, और राजा के बेटों अपने समस्त भाईयों, और यहूदा के समस्त आदमियों राजा के सवकों को आमन्त्रित किया:

१० परन्तु पैग़म्बर नेथन को, और बेनाया को, और उन पराक्रमी पुरुषों को, और सुलेमान अपने भाई को उसने आमन्त्रित नहीं किया।

११ इस कारण वश नेथन सुलेमान की माँ बथशेबा से बोला, कहता हुआ, क्या आपने सुना नहीं है कि हगिथ का बेटा अदोनीया राज कर रहा है, और हमारे प्रभु दाऊद यह जानते ही नहीं हैं?

१२ मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, इसलिए अब जाएँ और मुझे आपको परामर्श दे देने दें ताकि आप अपने स्वयं का जीवन, और अपने बेटे सुलेमान का जीवन बचा लें।

१३ जाकर राजा दाऊद के पास ही भीतर प्रवेश कर लें और उनसे कहें, मेरे प्रभु, क्या आपने ही ने, हे राजा अपनी दासी को शपथ नहीं दी थी क्या कहते हुए, अवश्य ही तुम्हारा बेटा सुलेमान मेरे पश्चात राज करेगा, और वो मेरे सिंहासन पर बैठेगा? तो फिर अदोनीया क्यों राज कर रहा है जी?  

१४ देखें, जैसे आप वहाँ राजा से वार्तालाप कर ही रही होंगी, मैं भी आपके पीछे-पीछे भीतर प्रवेश कर लूँगा, और आपके शब्दों की पुष्टि कर दूँगा।

१५ और बथशेबा कक्ष में राजा के पास चली गई: और राजा बहुत ही वृद्ध था; और अबिशग वो शुनमवाली राजा की सेवा कर रही थी।

१६ और बथशेबा ने झुक कर राजा कि अभिवादन किया। और राजा ने कहा, भई क्या चाहती हो तुम?

१७ और उसने उस से कहा, मेरे प्रभु, आपने अपनी दासी को प्रभु आपके ईश्वर से शपथ दी थी, कहते हुए, अवश्य ही तुम्हारा बेटा सुलेमान मेरे पश्चात राज करेगा, और वो मेरे सिंहासन पर बैठेगा।

१८ और अब देखें जी, अदोनीया राज कर रहा है जी; और अब मेरे प्रभु राजा, आप यह नहीं जानते हैं:

१९ और उसने तो बहुतायत से साँड और मोटे मवेशी और भेड़ मार डाले हैं, और राजा के सभी बेटों को, और पुरोहित अबिथर को, और सेना के कप्तान योआब को आमन्त्रित कर दिया है: परन्तु आपके सेवक सुलेमान को उसने आमन्त्रित नहीं किया है जी।

२० और आप मेरे प्रभु, हे राजा, समस्त इस्राएल की आँखें आप पर ही टिकी हैं जी, ताकि आप उन्हें बता दें कि कौन मेरे प्रभु के सिंहासन पर उनके पश्चात बैठेगा।

२१ अन्यथा ऐसा होने को आएगा, जब मेरे प्रभु राजा अपने पित्रों के साथ निद्रा ले लेंगे, तब मैं और मेरा बेटा सुलेमान अपराधी जिन लिए जाएँगे।

२२ और लो, जैसे वो राजा के साथ वार्तालाप कर ही रही थी कि पैग़म्बर नेथन ने भी प्रवेश कर लिया।

२३ और उन्होंने राजा को बताया, देखें जी पैग़म्बर नेथन। और जब वो राजा के समक्ष पहुँचा था, तो उसने राजा के समक्ष स्वयं को झुकाया धरती की ओर चेहरा किए हुए।

२४ और नेथन ने कहा, मेरे प्रभु, हे राजा, क्या आपने कहा है क्या कि अदोनीया मेरे पश्चात राज करेगा, और वही मेरे सिंहासन पर बैठेगा?

२५ क्योंकि उसने तो नीचे जाकर बहुतायत से साँड और मोटे मवेशी और भेड़ मार डाले हैं जी, और राजा के सभी बेटों को, और सेना के कप्तानों को, और पुरोहित अबिथर को, और को आमन्त्रित कर दिया है; और देखें जी, वो तो उसके समक्ष खा पी रहे हैं, और कह रहे हैं राजा अदोनीया जीवित रहें।

२६ परन्तु मुझे, मुझे ही आपके सेवक को, और पुरोहित ज़दोक, और येहोयदा के बेटे बेनाया को, और अपने सेवक सुलेमान को उसने आमन्त्रित नहीं किया है जी!

२७ क्या यह कार्य मेरे प्रभु राजा द्वारा किया गया है, और आपने यह अपने सेवक को नहीं परिचित करवाया, कि कौन मेरे प्रभु राजा के पश्चात सिंहासन पर बैठेगा?

२८ तब राजा दाऊद ने उत्तर दिया और कहा, बथशेबा को मेरे पास बुलवाओ। और वो राजा की उपस्थिति में गई, और राजा के समक्ष खड़ी हो गई।

२९ और राजा ने शपथ दी, और कहा,  प्रभु के जीते जी, जिन्होंने मेरी आत्मा का समस्त कष्ट से मुक्तिभक्तान कर दिया है,

३० जैसे मैंने तुम्हें भी प्रभु इस्राएल के ईश्वर से शपथ दे दी थी, कहते हुए, अवश्य ही तुम्हारा बेटा सुलेमान मेरे पश्चात राज करेगा, और वो मेरे सिंहासन पर मेरे स्थान में बैठेगा; उसी प्रकार ही मैं इस दिन कर डालूँगा।

३१ तब बथशेबा अपने चहरे को धरती की ओर करते हुए झुक गई, और राजा की श्रद्धा की, और कहा, मेरे प्रभु राजा अनन्तता के लिए जीएँ।

३२ और राजा ने कहा, मेरे पास पुरोहित ज़दोक, और पैग़म्बर नेथन, और येहोयदा के बेटे बेनाया को बुला लो। और वह राजा के समक्ष गए।

३३ राजा ने उनसे भी कहा, अपने साथ अपने प्रभु के सेवकों को लेकर, मेरे बेटे सुलेमान को मेरे अपने ही खच्चर पर बिठा कर, उसे गिहोन नीचे ले आऊँ:

३४ और पुरोहित ज़दोक, और पैग़म्बर नेथन को उसका वहाँ इस्राएल पर राजा बनने हेतु अभिषेक कर दो: और तुम चिंघाड़ा बजा देना और कहना, राजा सुलेमान जीविर रहें।

३५ तब तुम उसके पीछे-पीछे जाओगे, ताकि वो जाए और मेरे सिंहासन पर बैठ जाए; क्योंकि वही राजा होगा मेरे स्थान में: और मैंने उसे इस्राएल पर और यहूदा पर शासक नियुक्त कर दिया है।

३६ और येहोयदा के बेटे बेनाया ने राजा को उत्तर दिया, और कहा, तथास्तु: मेरे प्रभु राजा के प्रभु ईश्वर ऐसा ही बोलें जी। 

३७ जैसे प्रभु मेरे प्रभु राजा के साथ रहे हैं, वैसे ही वो सुलेमान के साथ रहें, और उनका सिंहासन मेरे प्रभु राजा दाऊद के सिंहासन से भी महानतम बनाएँ।

३८ तो पुरोहित ज़दोक, और पैग़म्बर नेथन और येहोयदा का बेटा बेनाया, और वो केरेथी, और वो पेलेथी नीचे चले गए, और सुलेमान को राजा दाऊद के खच्चर पर सवार कर दिया, और उसे गिहोन ले आए।

३९ और पुरोहित ज़दोक ने तम्बू में से तेल का एक सींघ निकाल कर, सुलेमान का अभिषेक कर दिया। और उन्होंने चिंघाड़ा बजा दिया; और सभी लोगों ने कहा राजा सुलेमान जीवित रहें।

४० और सभी लोग उसके पीछे-पीछे जा रहे थे, और लोग बाँसुरियों से बाँसुरी बजा रहे थे, और अत्यंत हर्ष सहित उल्लास मना रहे थे, कि पृथ्वी उनकी ध्वनि से फट गई।

४१ और अदोनीया और उसके साथ सभी आमंत्रितों ने यह सुना जैसे वह खाना समाप्त कर चुके थे। और जब योआब ने चिंघाड़े की ध्वनि सुनी, तो उसने कहा, नगर के इस कोलाहल के शोर का क्या कारण है भई?

४२ और जैसे वो बोल ही रहा था, देखो, पुरोहित अबिथर का बेटा योनातन पहुँचा: और अदोनीया ने उस से कहा, अन्दर जाओ; क्योंकि तुम तो एक शूरवीर हो, और भला समाचार लाए हो।

४३ और योनातन ने उत्तर दिया और अदोनीया से कहा, सच में हमारे प्रभु राजा दाऊद ने सुलेमान को राजा बना दिया है।

४४ और राजा ने उस के साथ पुरोहित ज़दोक, और पैग़म्बर नेथन और येहोयदा का बेटा बेनाया, और वो केरेथी, और वो पेलेथी, भेज दिए हैं, और उन्होंने उसे राजा के खच्चर पर सवार कर दिया है:

४५ और पुरोहित ज़दोक और पैगमबर नेथन ने उसे गिहोन में राजा अभिषिक्त कर दिया है: और वो वहाँ से हर्ष मनाते हुए ऊपर रहे हैं, तो नगर पुनः गूँज उठा। यही है वो शोर जो आपने सुना है।

४६ और सुलेमान राज्य के सिंहासन पर भी बैठा हुआ है।

४७ और इसके अतिरिक्त राजा के सेवक हमारे प्रभु राजा दाऊद को आशीष देने आए, कहते हुए, कि ईश्वर सुलेमान का नाम आपके नाम से भी बेहतर बनाएँ, और उसका सिंगासन आपके सिंहासन से भी महान बनाएँ। और राजा स्वयं बिस्तर पर झुक गया।

४८ और राजा ने इस प्रकार भी कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर धन्य हों, जिन्होंने इस दिन मेरे सिंहासन पर बैठने हेतु एक प्रदान कर दिया है, मेरी आँखें भी यह देखती हुईं।

४९ और अदोनीया के साथ वो समस्त अतिथि डर गए, और उठ कर, प्रत्येक पुरुष अपने-अपने पथ पर चला गया।

५० और अदोनीया सुलेमान के कारण डर गया, और उठा, और जाकर बलिवेदी के सींघों को पकड़ लिया।

५१ और यह सुलेमान को बताया गया, कहते हुए, देखें जी, अदोनीया राजा सुलेमान से डरता है: क्योंकि लो भई, उसने तो  

बलिवेदी के सींघों को पकड़ लिया है, कहता हुआ, राजा सुलेमान को आज मुझे शपथ दे देने दो कि वो अपने नौकर का तलवार से वध नहीं करेंगे।

५२ और सुलेमान ने कहा, यदि दो स्वयं को एक सुयोग्य पुरुष प्रदर्शित करेगा, तो उसका एक भी बाल धरती पर नहीं गिरेगा: परन्तु यदि उस में दुष्टता पाई जाएगी, वो मर जाएगा।

५३ तो राजा सुलेमान ने भिजवाया, और वह उसे बलिवेदी पर से नीचे उतार लाए। और वो राजा सुलेमान के पास आकर स्वयं झुक गया: और सुलेमान ने उस से कहा, अपने घर चले जाओ।



दूसरा अध्याय।


अब दाऊद के देहान्त के निकट रहे थे; और उसने अपने बेटे सुलेमान को निर्देश दिया, कहते हुए,

मैं तो समस्त पृथ्वी की रीति से चला जा रहा हूँ: इसलिए तुम शक्तिशाली बनो, और स्वयं का पुरुषार्थ प्रदर्शित करो;

और प्रभु अपने ईश्वर का प्रभार रखो, उनके पथों पर चलने हेतु, उनके अध्यादेशों, और उनके आदेशों, और उनके न्याय-निर्धारणों, और उनके साक्ष्य का पालन करने हेतु, जैसा मूसा के नियम में लिखा हुआ है, ताकि तुम उस सभी में उन्नत बनो जो तुम करो, और जहाँ कहिं तुम स्वयं को मोड़ो:

ताकि प्रभु अपना शब्द दृढ़ रखें जो उन्होंने मेरे विषय में बोला था, कहते हुए, यदि तुम्हारी सन्तानें अपने पथ का ध्यान  रखेंगे, मेरे सम्मुख अपने सम्पूर्ण हृदय के साथ और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ सच्चाई में चलने हेतु, तो तुम्हारे प्रति इस्राएल के सिंहासन पर से एक भी पुरुष कटेगा नहीं। 

इसके अतिरिक्त तुम यह भी जानते हो जो ज़रुआया के बेटे योआब ने मेरे साथ किया था, और उसने इस्राएल की सेनाओं के उन दोनो कप्तानों के साथ क्या-क्या कर डाला था, नर के बेटे अबनर के साथ, और यथर के बेटे अमसा के साथ, जिनका उसने वध कर डाला, और युद्ध का रक्त शान्ति में बहा डाला, और युद्ध का रक्त, अपनी कमर-पेटी पर जो उसकी कटि कसे हुए थी, और अपने पैरों पर चढ़े जूतों पर पोत डाला।

इसलिए अपनी विद्यानुसार करो, और उसके श्वेत सर को नीचे कब्र में शान्ति से मत चले जाने देना।

परन्तु उस गिलद-वंशज बर्ज़िलाय के बेटों के प्रति करुणा दिखाना, और उन में से उन्हें वो होने देना जो तुम्हारी मेज़ पर खाते हैं: चूँकि इस प्रकार वो मेरे पास आए थे जब मैं तुम्हारे भाई अब्सलोम के कारण भाग निकला था।

और देखो भई, तुम्हारे साथ बहुरिम वाला एक बिन्यामिन-वंशज है, गेरा का बेटा शिमई, जिसने मुझे उस दिन घोरता से गाली देकर गाली दी थी जब मैं महानैम जा रहा था: लेकिन वो नीचे मुझ से मिलने यर्दन आया था, और मैंने उसे प्रभु से शपथ दे दी थी, कहते हुए, मैं तुम्हें तलवार से मृत्यु के घाट नहीं उतारूँगा।

इसलिए अब उसे निर्दोष मत छोड़ना: क्योंकि तुम एक विद्वान पुरुष हो, और जानते हो कि तुम्हें उसके साथ क्या-क्या करना चाहिए; बल्कि उसके श्वेत सर को तुम रक्त के साथ नीचे कब्र में ले जाना।

१० तो दाऊद ने अपने पित्रों के साथ निद्रा ले ली, और दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था।

११ और जो दिन थे जिन में दाऊद ने इस्राएल पर राज किया था चालीस साल थे: सात साल उसने हेब्रोन में राज किया था, और तैंतीस साल उसने यरूशलेम में राज किया था।

१२ तब सुलेमान अपने पिता दाऊद के सिंहासन पर बैठ गया; और उसका राज्य बृहत्ता से संस्थापित हुआ।

१३ और हगिथ का बेटा अदोनीया सुलेमान की माँ के बथशेबा के पास पहुँचा। और उसने कहा, भई शान्ति से आए हो तुम क्या? और उसने कहा शान्ति से। 

१४ इसके अतिरिक्त उसने कहा, मुझे आपसे कुछ कहना है। और उसने कहा, बोलो भई।

१५ और उसने कहा, आप तो जानती ही हैं कि राज्य तो मेरा ही था जी, और समस्त इस्राएल ने मुझ ही पर अपने चहरे टिका रखे थे, कि मैं ही राज करूँ: लेकिन राज्य तो मुड़-फिर-कर मेरे भाई का बन गया है: क्योंकि वो तो उसी का ही था प्रभु से।

१६ और मैं अब आपसे एक याचना करता हूँ जी, मना मत करिएगा। और उसने उस से कहा, बोलो।

१७ और उसने कहा, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ जी, कि आप राजा सुलेमान से बोलें, क्योंकि वो आपको मना नहीं करेगा, कि वो मुझे वो शुनमवाली अबिशग पत्नी के रूप में प्रदान कर दे जी।

१८ और बथशेबा ने कहा, ठीक है भई; मैं तुम्हारे लिए राजा से बात करूँगी।

१९ इसलिए बथशेबा राजा सुलेमान के पास आई, उस से अदोनीया के लिए बात-चीत करने। और राजा उस से भेंट करने ऊपर उठा, और उसके प्रति स्वयं झुका, और अपने सिंहासन पर बैठ गया, और राजा-माता के लिए एक आसान स्थित करवाया; और वो उसके दाहिने हाथ पर बैठ गई।

२० तब उसने कहा, मेरी आपसे एक छोटी सी याचना है; मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ, मुझे मना मत करना। और राजा ने उस से कहा, बोलें आप मेरी माता जी: क्योंकि मैं आपको मना नहीं करूँगा।

२१ और उसने कहा, अबिशग उस शुनमवाली को आपके भाई अदोनीया को पत्नी के रूप में प्रदान कर दिया जाए।

२२ और राजा सुलेमान ने उत्तर दिया और अपनी माता से कहा, जी और आप क्यों अबिशग उस शुनमवाली को अदोनीया के लिए माँग रही हैं जी? उसके लिए राज्य भी माँग लें; क्योंकि वो तो मेरे अग्रज भाई है; उस के लिए, और पुरोहित अबिथर के लिए, और ज़रुआया के बेटे योआब के लिए।

२३ तब राजा सुलेमान ने प्रभु से शपथ ली, कहते हुए, ईश्वर तो ये मेरे साथ कर ही दें, और इस से भी और अधिक, यदि अदोनीया ने यह शब्द अपने ही स्वयं के जीवन के विरुद्ध नहीं बोल दिया है।

२४ इसलिए अब प्रभु के जीते जी, जिन्होंने मुझे स्थापित कर दिया है, और मुझे मेरे पिता दाऊद के सिंहासन पर स्थित कर दिया है, और जिन्होंने मेरे लिए एक घर निर्मित कर दिया है उनकी प्रतिज्ञानुसार, अदोनीया इस दिन मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।

२५ और राजा सुलेमान ने येहोयदा के बेटे बेनाया के हाथ भिजवा दिया; और वो उस पर कूद पड़ा कि वो मर गया।

२६ और पुरोहित अबिथर से राजा ने कहा, भई आप तो अनथोथ चले जाएँ, अपने ही खेतों को; क्योंकि आप तो मृत्यु के योग्य हैं: परन्तु मैं इस समय आपको मृत्यु के घाट नहीं उतारूँगा, क्योंकि अपने मेरे पिता के समक्ष प्रभु ईश्वर का संदूक ढोया था, और क्योंकि आप उन सभी उत्पीड़नाओं से उत्पीड़ित हुए थे जिन में मेरे पिता उत्पीड़ित हुए थे।

२७ तो सुलेमान ने अबिथर को प्रभु के प्रति पुरोहित बने रहने से बाहर खदेड़ दिया; ताकि वो प्रभु के शब्द को पूर्ण कर दे, जो उन्होंने शिलो में एली के घराने-समबन्धी बोल दिया था।

२८ तो समाचार योआब के पास पहुँचा; क्योंकि योआब अदोनीया के पीछे-पीछे मुड़ चला था, भले ही वो अब्सलोम के पीछे-पीछे नहीं मुड़ा था। और योआब प्रभु के तम्बू की ओर भाग-खड़ा हुआ, और उसने बलिवेदी के सींघों को पकड़ लिया।

२९ और यह राजा सुलेमान को बताया गया कि योआब तो प्रभु के तम्बू भाग गया है; और देखें जी, वो तो बलिवेदी के साथ है। तब सुलेमान ने येहोयदा के बेटे बेनाया को भिजवा दिया, कहते हुए, भई जा कर, उस पर कूद पड़ें।

३० और बेनाया प्रभु के तम्बू पहुँचा, और उस से कहा, इस प्रकार कहते हैं राजा, बाहर निकल आओ। और उसने कहा, नहीं; बल्कि मैं तो यहीं मरूँगा। और बेनाया राजा को पुनः शब्द ले आया, कहता हुआ, याओब इस प्रकार कह रहा है जी, और इस प्रकार उसने मुझे उत्तर दिया।

३१ और राजा ने उस से कहा, जैसा उसने कहा है कर दें जी, और कूद पड़ें उस पर, और दफ़ना दें उसे; ताकि आप उस निर्दोष रक्त को जो योआब ने बहाया है, मुझ पर से और मेरे पिता के घराने पर से परे हटा दें।

३२ और प्रभु उसी का रक्त उसी के सर पर वापस लौटा डालेंगे, जो उस से अधिक नेक और उस से बेहतर दो पुरुषों पर पड़ा था, और उसने उनका तलवार से वध कर डाला, मेरे पिता के जानते हुए, नर के बेटे अबनर इस्राएल की सेना के कप्तान, और यथर के बटे अमसा, यहूदा की सेना के कप्तान।  

३३ उनका रक्त इसलिए योआब के सर पर ही वापस लौट आएगा, और उसके बीज के सर पर सदा के लिए ही: परन्तु दाऊद पर और उनके बीज पर, और उनके घराने पर, और उनके सिंहासन पर, प्रभु की ओर से सदा के लिए शान्ति रहेगी।

३४ तो येहोयदा का बेटा बेनाया ऊपर चला गया, और उस पर कूद पड़ा, और उसे मार डाला: और उसे जँगली-क्षेत्र में उसी के अपने घर में दफ़ना दिया गया था।

३५ और राजा ने येहोयदा के बेटे बेनाया को उसके स्थान में सेना पर नियुक्त कर दिया: और पुरोहित ज़दोक को राजा ने अबिथर के पद पर नियुक्त कर दिया।

३६ और राजा ने भिजवाकर शिमई को बुलवा लिया, और उस से कहा, भई अपने लिए यरूशलेम में एक घर बना लो, और वहाँ बस जाओ, और वहाँ से कहीं भी इधर-उधर मत जाना।

३७ क्योंकि यह ऐसा होगा, कि जिस दिन तुम बाहर निकलोगे, और किद्रोन नदी के पार चले जाओगे, तुम अवश्य ही जान जाओगे कि तुम निश्चितता से मर जाओगे: तुम्हारा रक्त तुम्हारे ही अपने सर पर पड़ेगा।

३८ और शिमई ने राजा से कहा, यह कथन अच्छा है जी: जैसा मेरे प्रभु राजा ने कह दिया है, वैसा ही आपका नौकर करेगा। और शिमई कई दिन यरूशलेम में बसता रहा।

३९ और यह होने को आया तीन वर्षों की समाप्ति पर, कि शिमई के नौकरों में से दो भाग गए गथ के राजा मअकाह के बेटे अकिश के पास। और वो शिमई से बोले, कहते हुए, देखो भई, तुम्हारे नौकर तो गथ में हैं।

४० और शिमई उठा, और उसने अपने गधे पर काठी कसी, और अपने नौकरों को ढूँढने अकिश के पास गथ चलता बना: और शिमई जाकर, अपने नौकरों को गथ से ले आया।

४१ और यह सुलेमान को बताया गया कि शिमई यरूशलेम से गथ चला गया था, और वापस लौट गया था।

४२ और राजा ने भिजवाकर शिमई को बुलवाया, और उस से कहा, भई क्या मैंने तुम्हें प्रभु की शपथ नहीं दे दी थी क्या और तुम से सौगन्ध खाई थी, कहते हुए, अवश्य ही जान लो, जिस दिन तुम बाहर निकल कर, कहीं भी बाहर चलते-फिरोगे, कि तुम निश्चितता से ही मर जाओगे? और तुमने मुझ से कहा था,वो शब्द जो मैंने सुन लिया है अच्छा है जी।

४३ तो फिर तुमने प्रभु का वो वचन, और वो आदेश जिस से मैंने तुम्हें आदेशित किया था, क्यों नहीं रखा भई?

४४ इसके अतिरिक्त राजा ने शिमई से कहा, तुम उस समस्त दुष्टता से परिचित हो जो तुम्हारा मन जानता है, वो जो तुमने मेरे पिता दाऊद के साथ किया था: इसलिए प्रभु तुम्हारी दुष्टता तुम्हारे ही अपने सर पर वापस लौटा देंगे;

४५ और राजा सुलेमान धन्य होगा, और दाऊद का सिंहासन प्रभु के सम्मुख सदा के लिए संस्थापित होगा।

४६ तो राजा ने येहोयदा के बेटे बेनाया को आदेश दिया; जो बाहर निकल चला, और उस पर कूद पड़ा, कि वो मर गया। और वह राज्य सुलेमान के हाथ में संस्थापित हो गया।






तीसरा अध्याय।


और सुलेमान ने मिस्र के राजा फैरो के साथ नाता जोड़ा, और फैरो की बेटी को ले लिया, और उसे दाऊद के नगर में ले आया, जब तक कि उसने अपने घर का, और प्रभु के घर का, और यरूशलेम के चारों ओर वाली दीवार का निर्माण नहीं समाप्त कर दिया था।

बस केवल लोग उच्च स्थानों में बलि चढ़ाते थे, क्योंकि प्रभु के नाम के प्रति, उन दिनो तक किसी भी घर का निर्माण नहीं हुआ था।

और सुलेमान प्रभु से प्रेम करता था, अपने पिता दाऊद के अध्यादेशों में चलता हुआ: बस वो केवल उच्च स्थानों में बलि-चढ़ाता और सुगन्धित-धूप जलाता था।

और राजा गिब्यन गया, वहीं बलि चढ़ाने; क्योंकि वही वो महा-उच्च-स्थान था: एक हज़ार जले-चढ़ावे सुलेमान ने उस बलिवेदी पर चढ़ाए।

गिब्यन में ही प्रभु सुलेमान को रात्रि में एक स्वप्न में प्रकट हुए: और ईश्वर ने कहा, माँगो भई, क्या दूँ मैं तुम्हें।  

और सुलेमान ने कहा, आपने अपने सेवक दाऊद मेरे पिता को बहुत करुणा प्रदर्शित की, उसी के अनुसार जैसे वह आपके समक्ष आपके साथ सच्चाई में, और नेकी में, और हृदय की शुचिता में चले थे; और आपने उनके लिए यह विशाल करुणा रखी हुई है जी, और आपने उन्हें उनके सिंहासन पर बैठने हेतु एक बेटा प्रदान किया है, जैसा कि यह इस दिन है।

और अब, हे प्रभु जी मेरे ईश्वर, आपने अपने सेवक को राजा बना दिया है मेरे पिता दाऊद के स्थान में: और मैं तो जी बस केवल एक नन्हा सा ही बच्चा हूँ: मैं जानता नहीं कि मैं कैसे बाहर जाऊँ या अन्दर आऊँ।

और आपका सेवक आपके लोगों के बीच है जिन्हें आपने चुन लिया है, एक महान गण, जिसकी गिनती नहीं की जा सकती है ही जनौघ हेतु गणना की जा सकती है।

इसलिए अपने लोगों का न्याय करने हेतु, अपने सेवक को एक समझदार हृदय प्रदान कर दें, ताकि मैं अच्छे और बुरे के बीच प्रभेद कर सकूँ: चूँकि कौन आपके इस इतने विशाल गण का न्याय करने में सक्षम है जी? 

१० और इस वक्तृता ने प्रभु को प्रसन्न कर दिया, कि सुलेमान ने इस बात की माँग की थी।

११ और ईश्वर ने उस से कहा, चूँकि तुमने यह बात माँगी है, और अपने लिए लम्बे जीवन की माँग नहीं की; ही अपने लिए धन-धान्यों की माँग की, ही अपने शत्रुओं के जीवन की माँग की; बल्कि अपने लिए न्याय-निर्धारण का प्रभेद करने हेतु समझदारी की माँग की है;

१२ देखो, मैंने तुम्हारे ही शब्दोंनुसार कर दिया है: लो भई, मैंने तुम्हें एक विद्वान और प्रज्ञावान हृदय प्रदान कर दिया है; ताकि ही तुमसे पूर्व कोई तुम्हारे जैसा था, ही तुम्हारे पश्चात कोई भी तुम्हारे जैसा कोई उठेगा।

१३ और मैंने तुम्हें वो भी प्रदान कर दिया है जिसकी तुमने माँग नहीं की, दोनो धन-धान्य, और सम्मान: ताकि राजाओं के बीच तुम्हारे जैसा और कोई भी नहीं होगा तुम्हारे समस्त दिनो में।

१४ और यदि तुम मेरे पथों पर चलते रहोगे, मेरे अध्यादेशों और मेरे आदेशों का पालन करने हेतु, जैसे तुम्हारा पिता दाऊद चला था, तब मैं तुम्हारे दिनो को वृद्धी प्रदान कर दूँगा।

१५ और सुलेमान जाग गया; और देखो, वो तो एक स्वप्न था। और वो यरूशलेम गया, और प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक के समक्ष खड़ा हो गया, और जले-चढ़ावे चढ़ा दिए, और शान्ति-चढ़ावे चढ़ा दिए, और अपने समस्त सेवकों के लिए के भोज रचा दिया।

१६ तब दो औरतें राजा के पास आईं, जो वैशाएँ थीं, और उसके समक्ष खड़ी हो गईं।

१७ और एक औरत ने कहा, हे मेरे प्रभु, मैं और ये औरत एक ही घर में बस्ती हैं जी; और मैंने इसके साथ घर में बच्चे को जन्म दे दिया।

१८ और मेरे जन्म दे देने के तीन दिनों पश्चात यह होने को आया, कि इस औरत ने भी जन्म दे दिया: और हम दोनो एक ही साथ थीं; घर में हमारे साथ कोई भी परदेशी नहीं था, सिवाय घर में हम दोनो के।

१९ और रात को इस औरत का बच्चा मर गया; क्योंकि यह उस पर लेट गई।

२० और इसने बीच रात में उठकर, मेरे पास से मेरा बेटा ले लिया, जैसे आपकी दासी सो रही थी, और उसे अपनी छाती से लगा लिया, और अपना मरा हुआ बच्चा मेरी छाती में लिटा दिया।

२१ और जब मैं अपने बच्चे को सुबह दूध पिलाने उठी, देखें जी, वो तो मर चुका था: परन्तु कब मैंने सुबाह इस पर विचार कर लिया था, देखें जी, वो तो मेरा बेटा नहीं था, जिसे मैं जना था।

२२ और उस दूसरी औरत ने कहा, नहीं भई; बल्कि वो जीवित मेरा बेटा है, और वो मरा हुआ तेरा बेटा है। और इसने कहा, नहीं भई; बलि वो मरा हुआ तो तेरा बेटा है, और वो जीवित मेरा बेटा है। तो इस प्रकर वो राजा के सम्मुख बोलीं।

२३ तब राजा ने कहा, भई एक तो कहती है, यही मेरा बेटा है जो जीवित है, और तेरा बेटा वो मरा हुआ है: और दूसरी कहती है, नहीं; बल्कि वो मरा हुआ तेरा बेटा है, और मेरा बेटा यह जीता हुआ है।

२४ और राजा ने कहा, मुझे एक तलवार ले आओ। और वो राजा के समक्ष एक तलवार ले आए।

२५ और राजा ने कहा, उस जीवित बच्चे को दो में काट डालो, और आधा एक को दे दो, और आधा दूसरी को।

२६ तब वो औरत जिसका वो जीवित बच्चा था राजा से बोल पड़ी, क्योंकि उसकी आँतें उसके बेटे पर समवेदना से हुड़क उठीं, और उसने कहा, हे मेरे प्रभु जी, उसे ही दे दें वो जीवित बच्चा, और किसी भी प्रकार से उसकी हत्या करें जी। परन्तु उस दूसरी ने कहा, इसे तो मेरा ही तेरा होने दो, बल्कि इसे काट डालो।

२७ तब राजा ने उत्तर दिया और कहा, इसे दे दो वो जीवित बच्चा, और किसी भी प्रकार से उसे मत मारो भई: यही इसकी माँ है।

२८ और समस्त इस्राएल ने इस न्याय-निर्धारण के विषय में सुना जो राजा ने न्याय किया था; और उन्होंने राजा का भय माना: क्योंकि उन्होंने देखा कि ईश्वर की विद्या उस में थी, न्याय-निर्धारण कर देने हेतु।



चौथा अध्याय।


तो राजा सुलेमान समस्त इस्राएल पर राजा था।

और यह वो प्रमुख थे जो उसके पास थे; पुरोहित ज़दोक का बेटा अज़रिया,

शिशा के बेटे, एलीहोरेफ और अहिया, लिपिक; अहिलुद का बेटा यहोशाफट अभिलेखक था।

येहोयदा का बेटा बेनाया सेना पर नियुक्त था: और ज़दोक और अबिथर पुरोहित थे:

और नेथन का बेता अज़रिया अफ़सरों पर नियुक्त था: और नेथन का बेटा ज़बद मुख्य अफ़सर था, और राजा का मित्र:

और अहिशर घराने पर था: और अब्दा का बेटा अदोनिराम कर भरने वाले बेगारी-नौकरों पर था।

और सुलेमान के पास समस्त इस्राएल पर बारह अफ़सर थे, जो राजा के और उसके घर-बार के लिए खाद्य-सामग्री उपलब्ध करवाते थे: साल में प्रत्येक पुरुष अपने ही माह में पोषण उपलब्ध करवाता था।

और यह हैं उनके नाम: एफ्रैम पहाड़ में, हूर का बेटा:

देकर का बेटा, मकज़ में, और शलबिम में, और बेतशमश, और एलोनबेतहनन:

१० और हसद का बेटा, अरुबोथ में; जिसके क्षेत्राधिकार में था सोको, और हेफर की समस्त भूमी:

११ अबिनादब का बेटा, दोर के समस्त क्षेत्र में; जिसके पास सुलेमान की बेटी तफथ पत्नी के लिए थी:

१२ अहिलुद का बेटा बअना; जिसके क्षेत्राधिकार में थे थनक और मगिद्दो, और समस्त बेतशान जो यज़रील के तले ज़रतना के साथ हाए, बेतशान से लेकर एबलमहोला तक, उस स्थान तक भी जो कि योकनयम के पार है:

१३ गेबर का बेटा, रमोथगिलद में; जिसके क्षेत्राधिकार में थे मनश्शे के बेटे याएर के नगर, जो कि गिलद में हैं; उसके क्षेत्राधिकार में अरगब का क्षेत्र भी था, जो कि बशान में है, दीवारों और पीतल के पटरों वाले साठ बड़े नगर:

१४ अहिनदाब, इदो के बेटे के पास था महानैम:

१५ अहिमाज़ नफ़्तली में था; उसने सुलेमान की बेटी बसमथ को भी पत्नी-स्वरूप ले लिया:

१६ हूशय का बेटा बअना आशेर में और अलोथ में था:

१७ परुआ का बेटा यहोशाफट, इस्सकार में:

१८ एला का बेटा शिमई, बिन्यामिन में:

१९ ऊरी का बेटा गेबर गिलद के देश में था, उन एमोरवासियों के राजा सिहोन और बशान के राजा ओग के देश में; और वो ही केवल एक अफ़सर था उस भूमी का।

२० यहूदा और इस्राएल अनेक थे, समुद्र के साथ उस रेत के समान जनौघ में, खाते और पीते हुए, और आनंद मनाते हुए।

२१ और सुलेमान ने नदी से लेकर, पलिश्तिम-वंशजों की भूमी तक, और मिस्र की सीमा तक समस्त राज्यों पर शासन किया: वह उपहार लाए, और सुलेमान की सेवा उसके जीवन के समस्त दिनों की।

२२ और सुलेमान की एक दिन की भोजन-सामग्री थी, महीन आटे के तीस माप, आटे के साठ माप,

२३ दस मोटे-ताज़े साँड, बीस साँड चरणभूमियों में से, सौ भेड़, मृगों और चिकारों, और लाल-हिरण, और मोटे-ताज़े पक्षियों के अतिरित।

२४ क्योंकि उसके पास नदी के इस पार से लेकर समस्त क्षेत्र पर अधिराज्य था, तिफ़सा से लेकर अज़्ज़ा तक भी, उन सभी राजाओं पर नदी के इस ओर; और वो अपने चारों-ओर आस-पास शान्ति बनाए रखता था। 

२५ और यहूदा और इस्राएल सुरक्षा से रहते थे, प्रत्येक पुरुष अपनी लता के तले और अपने ही अंजीर के पेड़ के तले, दान से लेकर बेएरशबा तक भी, सुलेमान के समस्त दिन।

२६ और सुलेमान के पास उसके रथों के लिए घोड़ों के चालीस हज़ार घुड़साल थे, और बारह हज़ार घुड़सवार।

२७ और वो अफ़सर, हर आदमी अपने महीने में राजा सुलेमान के लिए, और उन सभी के लिए जो राजा सुलेमान की मेज़ पर आते थे, खाद्य-सामग्री उपलब्ध कराते थे: उन्हें किसी भी वस्तु का अभाव नहीं था।

२८ जौ भी और घोड़ों और फुर्तीले पशुओं के लिए भूसा वो उस स्थान में ले आते थे जहाँ अफ़सर थे, प्रत्येक आदमी अपने-अपने प्रभारानुसार।

२९ और ईश्वर ने सुलेमान को अत्याधिकता से विद्या और प्रज्ञा, हृदय की बृहत्ता प्रदान कर दी, उसी रेत के समान जो समुद्र तट पर है।

३० और सुलेमान की विद्या पूर्व देश के समस्त सन्तानों की विद्या से, और मिस्र की समस्त विद्या से उत्कृष्ट थी।

३१ क्योंकि वो समस्त मानवता से अधिक विद्वान था; उस एज़रई एथन से, और महोल के बेटों, हेमन, और कलकोल, और दरदा से: और वह चारों-ओर के समस्त राष्ट्रों में कीर्तीमान था।

३२ और वो तीन हज़ार नीति-वचन बोलता था: और उसके गीत एक हज़ार पाँच थे।

३३ और वह वृक्षों के विषय में बोलता था, लेबनोन के देवदार से लेकर उस जूफे तक भी जो दीवार में से उग जाता है: वह पशुओं, और पक्षियों, और रेंगते हुए जन्तुओं के, और मछलियों के विषय में भी बोलता था।

३४ और सुलेमान की विद्या सुनने, समस्त गणों में से आते थे, पृथ्वी के समस्त राजाओं से लेकर, जिन्होंने उसकी विद्या के विषय में सुना था।



पाँचवाँ अध्याय।


और टाय्र के राजा हिरम ने सुलेमान के पास अपने नौकर भेजे; क्योंकि उसने सुन लिया था कि उन्होंने उसे उसके पिता के स्थान में राजा अभिषिक्त कर दिया था: क्योंकि हिरम तो सदा ही दाऊद से प्रेम किया करता था।

और सुलेमान ने हिरम को भिजवाया, कहते हुए, 

आप तो जानते ही हैं कि मेरे पिता अपने ईश्वर प्रभु के नाम के प्रति एक घर का निर्माण नहीं कर पाए, उन युद्धों के कारण जो उनके चारों-ओर थे प्रत्येक दिशा में ही, जब तक कि प्रभु ने उन्हें उनके तलवों के तले नहीं डाल दिया था।

परन्तु अब प्रभु मेरे ईश्वर ने मुझे प्रत्येक दिशा में विश्राम प्रदान कर दिया है, तो ही कोई प्रतिद्वंदी है ही कोई बुराई। 

और देखें, मैं प्रभु अपने ईश्वर के नाम के प्रति एक घर का निर्माण करना चाहता हूँ, जैसे प्रभु मेरे पिता दाऊद से बोले थे, कहते हुए, तुम्हारा बेटा, जिसे मैं तुम्हारे सठन में तुम्हारे सिंहासन पर स्थित करूँगा, वही मेरे नाम के प्रति एक घर का निर्माण करेगा।

अब इसलिए आप आदेश दे दें कि वो लेबनोन में से मेरे लिए देवदार वृक्ष काट डालें; और मेरे नौकर आपके नौकरों के साथ होंगे: और मैं अपको आपके नौकरों के लिए वेतन प्रदान करूँगा उस सभी के अनुसार जो कुछ भी आप नियुक्त करेंगे: क्योंकि आप तो जानते ही हैं कि हमारे बीच तो कोई नहीं है जो सिदोन-वासियों के समान लकड़ी काटने का चातुर्य रखता हो।

और यह होने को आया, जब हिरम ने सुलेमान के शब्द सुने, तो उसने बहुत ही हर्ष मनाया, और कहा, धन्य हों प्रभु इस दिन, जिंहोने दाऊद को एक विद्वान बेटा इस विशाल गण पर प्रदान कर दिया है।

और हिरम ने सुलेमान को भिजवाया, कहते हुए, मैंने उन विषयों पर विचार कर लिया है जिन्हें आपने मुझे भिजवाया: और मैं आपकी समस्त इच्छा को देवदार की लकड़ी समबन्धी, और सनोवर की लकड़ी समबन्धी क्रियान्वित कर दूँगा।

मेरे नौकर उन्हें लेबनोन से नीचे समुद्र तक ले आएँगे: और मैं उन्हें बेड़े बनाकर समुद्र पर से उस स्थान पहुँचा दूँगा जो आप मुझे नियुक्त करेंगे, और मैं उन्हें वहीं पहूँचवा दूँगा, और आप उन्हें प्राप्त कर लेंगे: और आप मेरी इच्छा पूर्ण कर देंगे, मेरे घर-बार हेतु भोजन प्रदान कर देने में।

१० तो हिरम ने सुलेमान को देवदार और सनोवर के पेड़ प्रदान कर दिए उसकी समस्त इच्छानुसार।

११ और सुलेमान ने हिरम को उसके घर-बार हेतु गेहूँ के बीस हज़ार माप, और शुद्ध तेल के बीस हज़ार माप दे दिए: इस प्रकार सुलेमान हिरम को वर्ष-प्रति-वर्ष देता रहा।

१२ और प्रभु ने सुलेमान को विद्या प्रदान कर दी, जैसा उन्होंने उसे वचन दिया था: और हिरम और सुलेमान के बीच शान्ति थी; और उन दोनो ने एक साथ एक संघठन बना लिया।

१३ और राजा सुलेमान ने समस्त इस्राएल पर कर भरने वाली बेगारी-नौकरी की सेवा स्थापित की; और वो कर भरने वाले बेगारी-नौकर तीस हज़ार थे।

१४ और वो उन्हें लेबनोन भेज देता था, हर माह दस हज़ार बारी-बारी कर-कर के: एक माह वो लेबनोन में रहते थे, और दो माह घर पर: और अदोनिरम उन कर भरने वाले बेगारी-नौकरों पर नियुक्त था।

१५ और सुलेमान के पास सत्तर हज़ार थे जो भार ढोते थे, और अस्सी हज़ार कटाई करने वाले पर्वतों में; 

१६ सुलेमान के अफ़सरों के प्रमुखों के अतिरिक्त, जो कार्य पर नियुक्त थे, तीन हज़ार और तीन सौ, जो उन लोगों पर शासन करते थे जो काम के कामगार थे।

१७ और राजा ने आदेश दिया, और वह बड़े-बड़े पत्थर ले आए, बहुमूल्य पत्थर, और कटे हुए पत्थर ही, घर की नीव बिछाने हेतु।

१८ और सुलेमान के राजगीरों ने और हिरम के राजगीरों ने उन्हें काटा, और उन पत्थरों को चौकोर काटने वालों ने: तो इस प्रकार उन्होंने घर ही निर्माण हेतु लकड़ी और पत्थर उद्यत किया।



छटा अध्याय।


और इस्राएल की सन्तानों के मिस्र की भूमी में से बाहर निकल जाने के पश्चात, चार सौ अस्सीवें वर्ष में यह होने को आया कि, इस्राएल पर सुलेमान के राज के चौथे वर्ष में, ज़िफ के महीने में, जो कि दूसरा महीना है, कि उसने प्रभु के घर का निर्माण करना आरम्भ किया। 

और वो घर जो राजा सुलेमान ने प्रभु के लिए निर्मित किया, उसकी लम्बाई साठ हाथ थी, और उसकी चौड़ाई बीस हाथ थी, और उसकी ऊँचाई तीस हाथ थी।

और वो आँगन घर के मन्दिर के सामने, उसकी लम्बाई बीस हाथ थी, घर की चौड़ाई के ही अनुसार; और दस हाथ उसकी चौड़ाई थी घर के सामने।

और घर के लिए उसने चौखट वाली जालीदार खिड़कियाँ बनाईं।

और घर की दीवार से सट कर उसने कक्षों का चारों-ओर निर्माण किया, घर की दीवारों से सटे हुए ही चारों-ओर, दोनो मन्दिर की और ईश्वरीय-वाणी की: और उसने चारों-ओर कक्ष बनाए:

सबसे निचला कक्ष पाँच हाथ चौड़ा था, और बीच वाला छह हाथ चौड़ा था, और वो तीसरे वाला सात हाथ चौड़ा था: चूँकि घर की दीवार में बाहर की ओर ही उसने संकरी कोटरिकाएँ चारों-ओर बनाईं थीं, ताकि वो लट्ठ घर की दीवारों को पकड़े हुए हों।

और वो घर, जब उसका निर्माण हो रहा था, उस पत्थर से निर्मित हो रहा था जो उसके वहाँ लाए जाने से पहले ही तैयार कर दिया गया था: ताकि ही हथौड़ा  ही कोई कुल्हाड़ा ही कोई अन्य लोहे का यंत्र घर में सुना गया था, जैसे-जैसे उसका निर्माण हो रहा था। 

मध्य कक्ष का द्वार घर के दाहिने पाशर्व में था: और वो मध्य कक्ष में ऊपर घुमावदार सीढ़ियों से जाते थे, और मध्य में से तीसरे के भीतर।

तो उसने घर का निर्माण कर दिया, और उसे समाप्त कर दिया; और उस घर को देवदार के लट्ठों से और पटरों से ढक दिया।

१० और फिर उसने समस्त घर से सट कर कक्ष बनाए, पाँच हाथ ऊँचे: और वह देवदार की लकड़ी के साथ घर पर टिके हुए थे।

११ और प्रभु का शब्द सुलेमान को आया, कहते हुए,  

१२ इस घर के समबन्ध में जिसका तुम निर्माण कर रहे हो, यदि तुम मेरे अध्यादेशों में चलोगे, और मेरे न्याय-निर्धारणों को क्रियान्वित करोगे, और मेरे समस्त आदेशों का पालन करोगे उन में चलने हेतु; तब मैं वो शब्द तुम्हारे संग क्रियान्वित कर दूँगा, जो मैं दाऊद तुम्हारे पिता के साथ बोला था:

१३ और मैं इस्राएल की सन्तानों के बीच बसूँगा, और अपने गण इस्राएल का त्याग नहीं करूँगा।

१४ तो सुलेमान ने घर का निर्माण कर कर उसे समाप्त कर दिया।

१५ और उसने घर की दीवारों को भीतर से देवदार के पटरों से निर्मित किया, दोनो घर का फ़र्श, और छत की दीवार्रें: और उसने उन्हें भीतर से लकड़ी से ढक दिया, और घर के फ़र्श को सनोवर के पट्टों से ढक दिया।

१६ और उसने घर के पाशर्वों पर बीस हाथ बनाए, दोनो फ़र्श और दीवारें देवदार के पटरों से: उसने उन्हें उसके लिए भीतर भी बना दिया, ईश्वरीय-वाणी हेतु, अति पवित्रतम स्थान के लिए ही।

१७ और वो घर, जो कि, वो उसके सामने वाला मंदिर है, चालीस हाथ लम्बा था।

१८ और भीतर से उस घर का देवदार कोंपलों और खिले हुए पुष्पों से उत्कीर्ण किया गया था: वह सभी देवदार ही था; कोई भी पत्थर नहीं दिखाई देता था।

१९ और उसने घर में भीतर ही वह ईश्वर-वाणी उद्यत की, वहीं प्रभु की प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक की स्थापना कर देने हेतु। 

२० और वह ईश्वर-वाणी उसके अग्र भाग में बीस हाथ थी लम्बाई में, और बीस हाथ थी चौड़ाई में, और बीस हाथ थी ऊँचाई में उसकी: और उसने उसे शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दिया; और इसी ही प्रकार से उस बलिवेदी को ढक दिया जो देवदार की थी।

२१ तो सुलेमान ने घर को भीतर से शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दिया: और उसने ईश्वर-वाणी के समक्ष स्वर्ण कड़ियों से एक विभाजन बना दिया; और उसने उसे स्वर्ण से मढ़ दिया।

२२ और उसने उस समस्त घर को सोने से मढ़ दिया, जब तक कि उसने उस समस्त घर को समाप्त नहीं कर दिया था: वो समस्त बलिवेदी भी जो ईश्वर-वाणी के साथ थी, उसने स्वर्ण से मढ़ दी।

२३ और ईश्वर-वाणी के भीतर उसने जैतून के पेड़ के दो केरूबिम बनाए, प्रत्येक दस हाथ ऊँचा।

२४ और उस केरूब का एक पँख पाँच हाथ का था, और पाँच हाथ का वो दूसरा पँख था उस केरूब का: एक पँख के दूरतम भाग से लेकर दूसरे के दूरतम भाग तक दस हाथ थे।

२५ और वो दूसरा केरूब दस हाथ था: वो दोनो केरूबिम एक ही माप के और एक ही नाप के थे।

२६ एक केरूब की ऊँचाई दस हाथ थी, और ऐसी ही उस दूसरे केरूब की थी।

२७ और उसने उन केरूबिमों को भीतरी घर में स्थित कर दिया: और उन्होंने उन केरूबिमों के पंखों को फैला दिया, ताकि एक के पँख ने एक दीवार को छू दिया, और उस दूसरे केरूब के पँख ने उस दूसरी दीवार को छू दिया; और उनके पंखों ने एक दूसरे को घर के बीच में छू लिया।

२८ और उसने उन केरूबिमों को स्वर्ण से मढ़ दिया।

२९ और उसने घर की समस्त दीवारों को चारों-ओर से केरूबिमों और खजूर के पेड़ों और खिले हुए पुष्पों की उत्कीर्णकारी से भीतर और बाहर से, उत्कीर्ण कर दिया।

३० और उस घर के फ़र्श को उसने स्वर्ण से मढ़ दिया, भीतर और बाहर से।

३१ और ईश्वर-वाणी के प्रवेश हेतु उसने जैतून के पेड़ के द्वार बनाए: वो सरदल और चौखटें दीवार का पाँचवाँ भाग थे।

३२ वो दो द्वार भी जैतून के पेड़ के थे; और उसने उन पर केरूबिमों और खजूर के पेड़ों और खिले हुए पुष्पों की उत्कीर्णकारी से उत्कीर्ण कर दिया, और उन्हें सोने से मढ़ दिया, और उन केरूबिमों पर सोना चढ़ा दिया, और उन खजूर के पेड़ों पर।

३३ इसी प्रकार ही उसने मंदिर के द्वार की चौखटों के लिए जैतून के पेड़ से बनाया, दीवार का चौथा भाग।

३४ और वो दोनो द्वार सनोवर के थे: एक द्वार के दो पल्ले पलट कर दुहर जाते थे, और उस दूसरे द्वार के दो पल्ले पलट कर दुहर जाते थे।

३५ और उसने उन पर केरूबिमों और खजूर के पेड़ों और खिले हुए पुष्पों को उत्कीर्ण कर दिया, और उन्हें स्वर्ण से ढक दिया उस उत्कीर्णकारी पर अच्छे से बिछा कर।

३६ और उसने काटे हुए पत्थर की तीन पंक्तियों से, और देवदार के पटरों की एक पंक्ति से, वो भीतरी आँगन निर्मित कर दिया।

३७ चौथे वर्ष में प्रभु के घर की नीव बिछाई गई, ज़िफ के महीने में:

३८ और ग्यारहवें वर्ष में, बुल के महीने में, जो कि आठवाँ महीना है, उस घर की उसके समस्त भागों के सर्वत्र में, और उसके समस्त भूषाचारानुसार समापन हो गया। तो इस प्रकार वो उसके निर्माण में सात वर्ष लगा रहा था।



सातवाँ अध्याय।


परन्तु सुलेमान अपने स्वयं के घर के निर्माण में तेरह वर्ष लगा रहा था, और उसने अपने समस्त घर का समापन कर दिया।

उसने लेबनोन के वन के घर का भी निर्माण किया; जिसकी लम्बाई एक सौ हाथ थी, और उसकी चौड़ाई पचास हाथ, और उसकी ऊँचाई तीस हाथ, देवदार के स्तम्भों की चार पंक्तियों पर, उन स्तम्भों पर देवदार के लट्ठों के साथ ही।

और वो उन लट्ठों के ऊपर देवदार से ढका हुआ था, जो उन पैंतालीस स्तम्भों पर लेटे हुए थे, एक पंक्ति में पंद्रह।

और तीन पंक्तियों में खिड़कियाँ थीं, और तीन स्त्ररों में उजाला उजाले के विपरीत था।

और सभी द्वार और चौखटें चौकोर थीं, उन खिड़कियों के आठ: और तीन स्त्ररों में उजाला उजाले के विपरीत था।

और उसने स्तम्भों का एक बराम्दा बनाया; लम्बाई उसकी पचास हाथ थी, और चौड़ाई उसकी तीस हाथ थी: और वो बराम्दा उनके समक्ष था: और वो अन्य स्तम्भ और वो मोटा बल्ला उनके सम्मुख था।

फिर उसने उस सिंहासन के लिए एक बराम्दा बनाया जहाँ वो न्याय करे, न्याय-निर्धारण वाला बराम्दा ही: और वो फ़र्श के एक ओर से लेकर दूसरे तक देवदार से ही ढका हुआ था।

और उसके निवास-स्थान वाले घर में बराम्दे में ही एक अन्य आँगन था, जो इसी समरूप कारीगरी का था। सुलेमान ने फैरों की बेटी के लिए भी एक घर बनाया, जिसे उसने पत्नी ले लिया था, इसी बराम्दे के समान ही।

यह सभी मूल्यवान पत्थरों के थे, काटे हुए पत्थरों के मापोंनुसार ही, आरों से चीरे हुए, भीतर और बाहर से, नीव से लेकर परछती तक भी, और इसी प्रकार बाहर बड़े आँगन की ओर।

१० और वह नीव अनमोल पत्थरों की थी, विशाल पत्थर ही, दस हाथ वाले पत्थर, और आठ हाथ वाले पत्थर।

११ और ऊपर अनमोल पत्थर थे, काटे हुए पत्थरों और देवदारों के मापोंनुसार ही।

१२ और वो बड़ा आँगन चारों-ओर काटे हुए पत्थरों की तीन पंक्तियों से घिरा हुआ था, और देवदार के लट्ठों की एक पंक्ति से, दोनो प्रभु के घर के भीतरी आँगन के लिए, और घर के आँगन के लिए।  

१३ और राजा सुलेमान ने भिजवाया और टाय्र में से हिरम को ले लिया।

१४ वो नफ़्तली की प्रजाति की एक विधवा का बेटा था, और उसका पिता टाय्र का एक आदमी था, पीतल का कारीगर: और वो विद्या और प्रज्ञा से पूर्ण था, और पीतल की समस्त कारीगरी के काम में चतुर था। और उसने राजा सुलेमान के पास पहुँच कर उसका समस्त कार्य किया।

१५ क्योंकि उसने पीतल के दो स्तम्भ ढाले, प्रत्येक अट्टारह हाथों का ही: और बारह हाथों की रेखा उन दोनो को चारों-ओर घेरे हुए थी।

१६ और उसने पिघले हुए पीतल के दो स्तम्भशीर्ष बनाए, उन स्तम्भों की चोटियों पर स्थित कर देने हेतु: एक स्तम्भशीर्ष की ऊँचाई पाँच हाथ थी, और दूसरे स्तम्भशीर्ष की ऊँचाई पाँच हाथ थी:

१७ और जालीदार कारीगरी वाले जाल, और कड़ी-दार कारीगरी वाली कड़ियाँ, उन स्तम्भशीर्षों के लिए ही जो उन स्तम्भों की चोटी पर थे; एक स्तम्भशीर्ष के लिए सात, और दूसरे स्तम्भशीर्ष के लिए सात।

१८ और उसने उन स्तम्भों का निर्माण किया, और दो पंक्तियाँ उस एक जाली के चारों-ओर, उन स्तम्भशीर्षों को ढकने के लिए जो चोटी पर थे, अनानासों के साथ: और ऐसा ही उसने उस दूसरे स्तम्भशीर्ष के लिए किया।

१९ और वो स्तम्भशीर्ष जो उन स्तम्भों की चोटी पर थे सोसन-फूल वाली कारीगरी के थे बराम्दे में, चार हाथ।

२० और वो स्तम्भशीर्ष जो उन दोनो स्तम्भों पर थे अनानासों के साथ थे ऊपर भी, उसकी गोलाई के सामने ही जो उस जाली के साथ थी: और वो अनानास उस दूसरे स्तम्भशीर्ष पर चारों ओर पंक्तियों में दो सौ थे।

२१ और उसने उन स्तम्भों को मंदिर के बराम्दे में स्थित कर दिया: और उसने उस दाहिने वाले स्तम्भ को खड़ा कर कर, उसे याकीन का नाम दे दिया: और उसने बाएँ वाले उस स्तम्भ कि खड़ा किया, और उसे बोआज़ का नाम दे दिया।

२२ और उन स्तम्भों की चोटियों पर सोसनों के फूलों की कारीगरी थी: तो इस प्रकार उन स्तम्भों के कार्य का समापन हुआ।

२३ और उसने एक ढाला हुआ समुद्र बनाया, छोर से लेकर छोर तक दस हाथ ही: वो चारों-ओर से गोलाई में था, और उसकी ऊँचाई पाँच हाथ थी: और तीस हाथों की एक नापने वाली डोरी उसे चारों ओर घेरती थी।

२४ और उसके ऊपरी किनारे तले चारों-ओर कोंपल घेरे हुए थे उसे, दस-दस एक हाथ में, उस समुद्र को घेरे हुए चारों-ओर: वो कोंपल दो पंक्तियों में ढाले गए थे, जब उसे ढाला गया था।

२५ वो बारह सांडों पर खड़ा था, तीन उत्तर की ओर देखते हुए, और तीन पश्चिम की ओर देखते हुए, और तीन दक्षिण की ओर देखते हुए, और तीन पूर्व की ओर देखते हुए: और वो समुद्र उनके ऊपर स्थित था, और उनके सभी पृष्ठ भाग भीतर की ओर थे।

२६ और उसकी मोटाई एक हथेली-भर थी, और उसका ऊपरी किनारा एक प्याले के ऊपरी किनारे समान ही श्रमित था, सोसनों के पुष्पों के साथ: उस में दो हज़ार बथ समा जाते थे।

२७ और उसने पीतल की दस गाड़ियाँ बनाईं; चार हाथ एक गाड़ी की लम्बाई थी, और चार हाथ उसकी चौड़ाई, और तीन हाथ उसकी ऊँचाई।

२८ और उन गाड़ियों की कारीगरी इस रीती की थी: उन पर पटिकाएँ थीं, और वो पटिकाएँ जोड़ बनाने वाली सलाख़ों के बीच थीं:

२९ और उन पटिकाओं पर जो उन जोड़ बनाने वाली सलाख़ों के बीच थीं, शेर, साँड, और केरूबिम थे: और उन जोड़ बनाने वाली सलाख़ों के ऊपर एक तला था ऊपर: और उन शेरों और सांडों के तले झालर-लटकनें बनी हुई थीं।

३० और प्रत्येक गाड़ी में चार पीतल के पहिए थे, और पीतल की पटरियाँ: और उनके चारों कोनों पर कंधे-नुमा खाँचे थे: कुण्ड के तले ढाले गए कंधे-नुमा खाँचे थे, प्रत्येक झालर-लटकन के साथ-साथ।

३१ और उस स्तम्भशीर्ष के अन्दर ही उसका मूँह और उस से ऊपर एक हाथ था: परन्तु उसका मूँह गोलाकार था, तले की कारीगरीनुसार ही, डेड़ हाथ: और उसके उस मूँह पर भी उत्कीर्ण-कारी थी उनकी पटिकाओं के साथ, चौकोर, गोलाकार नहीं। 

३२ और उन पटिकाओं के तले चार पहिए थे; और उन पहियों की धुरियाँ गाड़ी के साथ जुड़ी हुई थीं: और एक पहिए की ऊँचाई डेड़ हाथ थी।

३३ और उन पहियों की कारीगरी एक रथ के पहिए के समरूप थी: उनकी धुरियाँ, और उनके चक्रधार घेरे, और उनके आरे, और उनकी नाभें, सभी ढली हुई थीं।

३४ और एक गाड़ी के चार कोनो पर चार कंधे-नुमा खाँचे थे: और वो कंधे-नुमा खाँचे उसी ही गाड़ी में से ही थे।

३५ और गाड़ी के सिरे में एक गोलाकार घेरा था आधे हाथ ऊँचा: और उस गाड़ी के सिरे पर वो उसकी जोड़ बनाने वाली सलाखें और उसकी पाटिकाएँ उसी में से ही थीं।

३६ क्योंकि उसकी उन जोड़ बनाने वाली सलाख़ों की पट्टियों पर, और उसके किनारों पर, उसने केरूबिम, शेर, और खजूर के पेड़ उत्कीर्ण कर दिए, प्रत्येक के अनुपातानुसार ही, और चारों-ओर झालर-लटकनें।

३७ इस रीतीनुसार ही उसने वो दस गाड़ियाँ बनाईं: उन सभी का एक ही ढलवाँ-साँचा था, एक ही माप, और एक ही नाप।

३८ तब उसने पीतल के दस कुण्ड बनाए: एक कुण्ड में चालीस बथ समा जाते थे: और प्रत्येक कुण्ड चार हाथ था: और उन गाड़ियों में से प्रत्येक पर एक कुण्ड।

३९ और उसने पाँच गाड़ियाँ घर के दाएँ ओर लगा दीं, और पाँच घर के बाएँ ओर: और उसने उस समुद्र को घर के दाएँ ओर पूर्व दिशा में दक्षिण के विपरीत स्थित कर दिया।

४० और हिरम ने इन कुण्डों, और उन फावड़ों, और उन कटोरदानों को बना दिया। तो हिरम ने उस समस्त कार्य की क्रिया का समापन कर दिया जो उसने राजा सुलेमान के लिए प्रभु के घर हेतु किया था:
४१ वो दो स्तम्भ, और उन स्तम्भशीर्षों के वो दो गोलाकार कटोरे जो कि उन दोनो स्तम्भों के सिरों पर थे; और को दो जालियाँ; उन स्तम्भशीर्षों के उन दो गोलाकार कटोरों को ढकने हेतु जो उन दोनो स्तम्भों के सिरों पर थे;

४२ और चार सौ अनानास उन दोनो जालियों के लिए, एक जाली के लिए ही दो अनानास वाली पंक्तियाँ ही, उन दोनो गोलाकार कटोरों को ढकने हेतु ही जो उन स्तम्भों पर थे;

४३ और वो दस गाड़ियाँ, और उन गाड़ियों पर दस कुण्ड;

४४ और एक समुद्र। और बारह साँड उस समुद्र तले;

४५ और वह पात्र, और वह फावड़े, और वह कटोरदान: और यही समस्त बर्तन, जिन्हें हिरम ने राजा सुलेमान के प्रति प्रभु के घर के लिए बनाया, चमकदार पीतल के थे।

४६ यर्दन के मैदान में राजा ने उन्हें ढाला, सुक्कोत और ज़रथन के बीच मिट्टी वाली धरती में।

४७ और सुलेमान ने उन समस्त पात्रों को बिना तोले ही छोड़ दिया, क्योंकि वो अति अत्याधिक थे: ही उस पीतल के भार पता चार पाया था भई।

४८ और सुलेमान ने प्रभु के घर के लिए उन समस्त पात्रों को निर्मित कर दिया: वह स्वर्ण बलिवेदी, और वह स्वर्ण मेज़, जिस पर वह भेंट की रोटी थी,

४९ और वह शुद्ध स्वर्ण वाले दीपाधार, दाएँ हाथ पर पाँच, और बाएँ हाथ पर पाँच, ईश्वर-वाणी के समक्ष ही, उन पुष्पों के साथ, और वह दीपक, और वह स्वर्ण चिमटियाँ, 

५० और वह पात्र, और वो कैंचियाँ, और वो कटोरे, और वह चम्मच, और वह अग्नी-पात्र, शुद्ध स्वर्ण के; और वो चूलें स्वर्ण के, दोनो भीतर वाले घर के, अति-पवित्रतम स्थान वाले द्वारों के लिए, और घर के द्वारों के लिए, मन्दिर वाले ही।

५१ तो इस प्रकार उस समस्त कार्य का समापन हो गया जो राजा सुलेमान ने प्रभु के घर के लिए निर्मित किया था। और सुलेमान उन वस्तुओं को भीतर ले आया जिन्हें दाऊद उसके पिता ने समर्पित किया था; वो चाँदी, और वो सोना, और वह पात्र, उसने प्रभु के घर के धन-कोषों के बीच ही रख दिए।



आठवाँ अध्याय।


तब सुलेमान ने इस्राएल के वृद्ध-गणों को एकत्रित कर लिया, और प्रजातियों के समस्त मुखियों को, इस्राएल की सन्तानों के पित्रों के प्रमुख, यरूशलेम में राजा सुलेमान के पास, ताकि वह प्रभु की प्रतिज्ञा-पात्र के संदूक को ऊपर ले आएँ दाऊद के नगर में से बाहर, जो कि ज़ियोन है।

और इस्राएल के समस्त पुरुषों ने स्वयं को राजा सुलेमान के पास एकत्रित कर लिया उस भोज पर एथनिम के महीने में, जो कि सातवाँ महीना है।

और इस्राएल के समस्त वृद्ध-गण आए, और उन पुरोहितों ने उस संदूक को उठा लिया।

और वो प्रभु के उस संदूक को, और सभा के तम्बू को, और उन समस्त पवित्र पात्रों को जो तम्बू में थे ऊपर ले आए, उन्हीं को ही वो पुरोहित और वो लेवी-वंशज ऊपर ले आए।

और राजा सुलेमान, और वो समस्त इस्राएल की सभा, जो उसके पास एकत्रित थे, उसके संग थे उस संदूक के सम्मुख, भेड़ों और सांडों की बलियाँ चढ़ाते हुए जिनकी गिनती या संख्या नहीं की जा सकती थी जनौघ के कारण।

और वो पुरोहित प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को भीतर उसके स्थान में ले आए, घर की ईश्वर-वाणी में ही, उस अति-पवित्रतम स्थान में ही, केरूबिमों के पंखों तले। 

क्योंकि उन केरूबिमों ने अपने दोनो पँख संदूक के उस स्थान पर फैलाए हुए थे, और उन केरूबिमों ने उस संदूक को और उसके डण्डों को ऊपर ढका हुआ था।

और उन्होंने उन डण्डों को बाहर खींचा हुआ था, ताकि उन डण्डों के सिरे ईश्वर-वाणी के समक्ष पवित्र स्थान में दिखते रहें, और वो बाहर नहीं दिखते थे: और वो वहीं हैं इसी दिन तक भी।

संदूक में और कुछ भी नहीं था सिवाय पत्थर की उन दोनो पट्टियों के, जिन्हें मूसा ने होरेब में वहीं रख दिया था, जब प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया था, जब वह मिस्र की भूमी में से बाहर निकल आए थे।

१० और यह होने को आया, कि जब वो पुरोहित उस पवित्र स्थान में से बाहर निकल आए थे, कि मेघ ने प्रभु के घर को भर दिया था। 

११ कि वो पुरोहित खड़े होकर सेवा ही नहीं कर पाए उस मेघ के कारण: चूँकि प्रभु की महिमा ने प्रभु के घर को भर दिया था।

१२ तब सुलेमान बोला, प्रभु ने कहा कि वो तो घने श्यामतव में निवास करेंगे।

१३ मैंने अवश्य ही आपके निवास करने हेतु एक घर का निर्माण कर दिया है जी, एक स्थित स्थान आपके लिए सदा तक निवास करने हेतु।

१४ और राजा ने अपना चेहरा घुमाकर मोड़ा, और इस्राएल की समस्त सभा को आशीष दिया; (और इस्राएल की समस्त सभा खड़ी हुई थी;)

१५ और उसने कहा, धन्य हों इस्राएल के प्रभु ईश्वर, जो मेरे पिता दाऊद से अपने मूँह से बोले थे, और अपने हाथ से उसे पूर्ण कर दिया है, कहते हुए,

१६ उस दिन से जब से मैं अपने लोगों इस्राएल को मिस्र में से बाहर ले आया, मैंने इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से किसी घर का निर्माण करने हेतु, कोई भी नगर नहीं चुना, कि मेरा नाम उस में वहाँ होए; परन्तु मैंने दाऊद को अपने गण इस्राएल पर नियुक्त बनने हेतु चुन लिया।

१७ और यह मेरे पिता दाऊद के हृदय में था इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नाम के लिए एक घर का निर्माण कर देना।

१८ और प्रभु ने मेरे पिता दाऊद से कहा, जबकि तुम्हारे हृदय में यह था मेरे नाम के लिए एक घर का निर्माण करना, तुमने भला किया कि यह तुम्हारे हृदय में था।

१९ तथापि तुम उस घर का निर्माण नहीं करोगे; बल्कि तुम्हारा बेटा जो तुम्हारी कटि में से बाहर निकल कर आएगा, वही मेरे नाम के प्रति उस घर का निर्माण करेगा।

२० और प्रभु ने अपने शब्द को क्रियान्वित कर दिया है जो उन्होंने बोला, और मैं दाऊद अपने पिता के स्थान में उठ गया हूँ, और इस्राएल के सिंहासन पर बैठता हूँ, जैसा कि प्रभु ने वचन दे दिया था, और इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नाम के लिए एक घर का निर्माण कर दिया है।

२१ और मैंने वहीं उस संदूक के लिए एक स्थान स्थित कर दिया है, जिस में कि प्रभु का प्रतिज्ञा-पत्र है, जो उन्होंने हमारे पित्रों के साथ बनाया था, जब वह उन्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाए थे।

२२ और सुलेमान प्रभु की बलिवेदी के समक्ष खड़ा था इस्राएल की समस्त सभा की प्रस्तुति में, और अपने हाथों को स्वर्ग की ओर फैला दिया:

२३ और उसने कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर, आपके समान ऊपर स्वर्ग में, या नीचे पृथ्वी पर कोई भी ईश्वर नहीं है जी, जो अपने सेवकों के साथ प्रतिज्ञा-पत्र और दया बनाए रखते हैं जो अपने सम्पूर्ण हृदय से आपके समक्ष चलते है:

२४ जिन्होंने आपके सेवक दाऊद मेरे पिता के साथ बनाए रखा है जो आपने उन्हें वचन दे दिया था: आप अपने ही मूँह से भी बोले, और उसे पूर्ण कर चुके हैं अपने हाथ से ही, जैसा कि इस दिन है।

२५ इसलिए अब, इस्राएल के प्रभु ईश्वर, अपने सेवक मेरे पिता दाऊद के साथ उसे बनाए रखें जो आपने उन्हें वचन दिया था, कहते हुए, तुम्हारे प्रति मेरी दृष्टि में इस्राएल के सिंहासन पर बैठने हेतु एक भी पुरुष परे नहीं कटेगा; ताकि तुम्हारी सन्तानें अपने पथ पर ध्यान दें, कि वो मेरे समक्ष चलें जैसे कि तुम मेरे समक्ष चले हो।

२६ और अब हे इस्राएल के ईश्वर, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ जी, कि आपका शब्द सत्यापित हो जाए, जो आपने अपने सेवक मेरे पिता दाऊद से बोला था।

२७ परन्तु क्या ईश्वर वास्तव में ही पृथ्वी पर बसेंगे क्या? देखें जी, स्वर्ग और स्वर्गों का स्वर्ग आपको सीमित नहीं कर सकता है जी; तो फिर और कितना कम यह घर जो मैंने निर्मित किया है?

२८ तथापि अपने सेवक की प्रार्थना और उसके अनुनय की ओर अपने चेहरा कर दें जी, हे प्रभु मेरे ईश्वर, इस चीख और इस प्रार्थना को सुनवाई दे देने हेतु, जो आपका सेवक इस दिन आपके सम्मुख प्रार्थना कर रहा है:

२९ ताकि आपकी आँखें इस घर की ओर रात-दिन खुली रहें, उसी स्थान की ओर जिसके विषय में आप बोल चुके हैं, मेरा नाम वहीं होगा: ताकि आप उस प्रार्थना का श्रवण कर लें जो आपका सेवक इस स्थान की ओर करेगा।

३० और आप अपने सेवक और अपने गण इस्राएल के अनुनय का श्रवण करें, जब वो इस स्थान की ओर प्रार्थना करेंगे: और आप स्वर्ग अपने निवास-स्थान में सुन लें: और जब आप सुन लेंगे, तो क्षमा कर दें जी। 

३१ यदि कोई भी पुरुष अपने पड़ौसी के विरुद्ध पाप कर देता है, और उसे सौगन्ध खा लेने की शपथ दिलवा दी जाए, और वो शपथ आपकी बलिवेदी के समक्ष इस घर में जाए: 

३२ तब आप स्वर्ग से सुन लें, और कर दें, और अपने सेवकों का न्याय कर दें, दुष्ट को दण्डनीय घोषित करते हुए, उसके पथ को उसी के सर पर लाते हुए; और नेक को न्यायी-प्रमाणित करते हुए, उसे उसकी नेकीनुसार प्रदान करते हुए।

३३ जब आपके लोग इस्राएल शत्रु के समक्ष नीचे पिट चुके हों, क्योंकि उन्होंने आपके विरुद्ध पाप कर दिया है, और पुनः आपकी ओर मुड़ जाएँ, और आपके नाम को स्वीकार करें, और प्रार्थना करें, और आपके प्रति इस घर में अनुनय करें:

३४ तो आप स्वर्ग में से सुन लीजिएगा, और अपने लोगों इस्राएल के पाप को क्षमा कर दीजिएगा, और उन्हें पुनः उस भूमी में ले आईएगा जो आपने उनके पित्रों को प्रदान कर दी थी।

३५ जब स्वर्ग बन्द हो गया हो, और कोई भी वर्षा हो रही हो, क्योंकि उन्होंने आपके विरुद्ध पाप कर दिया हो; तो यदि वो इस स्थान की ओर प्रार्थना करते हैं, और आपके नाम को स्वीकार करते हैं, और अपने पाप से मुड़ जाते हैं, जब आप उन्हें उत्पीड़ित करते हैं:

३६ तब आप स्वर्ग से सुन लीजिएगा, और अपने सेवकों के और अपने लोगों इस्राएल के पाप को क्षमा कर दीजिएगा, ताकि आप उन्हें वह भला पथ सिखा दें जिस में उन्हें चलना चाहिए, और भूमी पर वर्षा प्रदान कर दें, जिसे आपने अपने लोगों को एक विरासत हेतु प्रदान कर दिया है।

३७ यदि भूमी में अकाल पड़ गया हो, यदि महामारी पड़ी हो, फसल की अंगमारी, फफूँदी, टिड्डी, या फिर इल्ली; यदि उनका शत्रु उनके नगरों की भूमी में उनकी घेराबन्दी कर दे; जो कोई भी विपत्ती, जो कोई भी रोग वहाँ हो;

३८ जो कोई भी प्रार्थना और अनुनय किसी भी पुरुष द्वारा की जाए, या फिर आपके समस्त गण इस्राएल द्वारा, जो प्रत्येक पुरुष जानता हो अपने ही मन की विपत्ती, और अपने हाथों को इस घर की ओर आगे फैला दे:

३९ तब आप स्वर्ग अपने निवास स्थान में से सुन लीजिएगा, और क्षमा कर दीजिएगा, और कर दीजिएगा, और प्रत्येक पुरुष को उसी के पथोंनुसार प्रदान कर दीजिएगा, जिसके हृदय से आप परिचित हैं; चूँकि आप ही, यहाँ तक कि केवल आप ही, मनुष्यों की समस्त सन्तानों के हृदयों से परिचित हैं;

४० ताकि वो उन समस्त दिनो तक आपका भय मानते रहें जिन में वो इस भूमी में बसते हैं जो आपने हमारे पित्रों को प्रदान कर दी है।

४१ इसके अतिरिक्त एक परदेशी के समबन्ध में, जो आपके लोगों इस्राएल में से नहीं है, बल्कि आपके नाम के वास्ते किसी एक दूर के देश से आता है;

४२ क्योंकि वो आपके महान नाम, और आपके शक्तिशाली हाथ, और आपकी फैलाई हुई भुजा के विषय में सुनेंगे; जब वो जाएगा और इस घर की ओर प्रार्थना करेगा; 

४३ तब आप स्वर्ग में अपने निवास स्थान में से सुन लीजिएगा, और उस सभी के अनुसार कर दीजिएगा जिसके विषय में वो परदेशी आपको पुकार रहा है: ताकि पृथ्वी के समस्त लोग आपके नाम को जान जाएँ, आपका भय मानने के लिए, आपके लोगों इस्राएल के समान; और कि वो जान जाएँ कि यही घर, जो मैंने बनाया है, आप ही के नाम से कहलाया जाता है।

४४ यदि आपके लोग अपने शत्रु के विरुद्ध युद्ध करने बाहर निकल पड़ते हैं, जहाँ कहीं भी आप उन्हें भेजेंगे, और प्रभु के प्रति प्रार्थना करेंगे उस नगर की ओर जिसे आपने चुन लिया है, और इस घर की ओर जिसका मैंने आपके नाम के लिए निर्माण कर दिया है:

४५ तब स्वर्ग में उनकी प्रार्थना को और उनके अनुनय को सुन कर उनका न्याय कर दीजिएगा।

४६ यदि वो आपके विरुद्ध पाप कर बैठते है, चूँकि ऐसा कोई भी मानुष नहीं है जो पाप नहीं करता है, और आप उनके साथ क्रोधित हों, और उन्हें शत्रु को प्रदान कर दें, ताकि वो उन्हें बन्दी उठा कर शत्रु की भूमी में ले जाएँ, दूर या निकट;

४७ तथापि यदि वो उस भूमी में स्वयं आत्म-विचार कर लें जहाँ उन्हें बन्दी ले जाया गया है, और मन-परिवर्तन कर लें, और आपके प्रति अनुनय करें उनकी भूमी में जो उन्हें बन्दी बना कर ले गए, कहते हुए, हमने तो पाप कर दिया है, और विकृतता कर डाली है, हम ने तो दुष्टता कर डाली है;

४८ और इस प्रकार आपके पास वापस मुड़ जाएँ अपने सम्पूर्ण हृदय के साथ, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ, अपने शत्रुओं की उस भूमी में, जो उन्हें बन्दी ले चले थे, और आपसे प्रार्थना करें अपनी भूमी की ओर, जो आपने उनके पित्रों को प्रदान कर दी थी, वो नगर जिसे अपने चुन लिया है, और उस घर की ओर जिसका निर्माण मैंने आपके नाम हेतु कर दिया है:

४९ तब आप स्वर्ग में अपने निवास स्थान में से उनकी प्रार्थना को और उनके अनुनय को सुन लीजिएगा, और उनका न्याय कर दीजिएगा,

५० और अपने लोगों को क्षमा कर दीजिएगा जो आपके विरुद्ध पाप कर बैठे हैं, और उनके समस्त उल्लंघनों को जिन में उन्होंने आपके विरुद्ध उल्लंघन कर दिया है, और उन्हें उनके समक्ष संवेदना प्रदान कर दीजिएगा जो उन्हें बन्दी बनाकर ले गए हैं, ताकि वो उनके प्रति संवेदनशील हों:

५१ चूँकि वह आप ही के लोग हैं, और आप ही की विरासत, जिन्हें आप मिस्र में से बाहर निकाल लाए, लोहे की भट्टी के बीच में से ही:

५२ ताकि आपकी आँखें आपके सेवक के अनुनय के प्रति, और आपके गण इस्राएल के अनुनय के प्रति खुल जाएँ, उनका श्रवण कर देने हेतु उस सभी के विषय में जिसके लिए वो आपका आह्वान कररते हैं।

५३ क्योंकि आपने ही उन्हें पृथ्वी के समस्त लोगों के बीच में से पृथक कर दिया है, आपकी विरासत बन जाने हेतु, जैसा आपने अपने सेवक मूसा के हाथ बोल दिया था, जब आप हमारे पित्रों को मिस्र में से बाहर निकाल लाए थे, हे प्रभु ईश्वर

५४ और यह ऐसा हुआ, कि जब सुलेमान ने प्रभु के प्रति इस समस्त प्रार्थना और अनुनय का करना समाप्त कर दिया था, तो वो अपने टेके हुए घुटनों पर से उसके हाथ स्वर्ग कि ओर फैलाए हुए, प्रभु की बलिवेदी के सामने से उठ गया।

५५ और वो खड़ा हो गया, और इस्राएल की समस्त सभा को एक उच्च वाणी से आशीष दिया, कहते हुए,

५६ धन्य हों प्रभु, जिन्होंने अपने लोगों इस्राएल को विश्राम प्रदान कर दिया है, उस सभी के अनुसार जो उन्होंने वचन दिया था: उनके समस्त अच्छे वचन का एक भी शब्द विफल नहीं हुआ है, जिसका उन्होंने मूसा उनके सेवक के हाथ वचन दिया था।

५७ प्रभु हमारे ईश्वर हमारे साथ रहें, जिस प्रकार वो हमारे पित्रों के साथ थे: उन्हें हमें छोड़ देने दें, ही हमारा त्याग कर देने दें:

५८ ताकि वो हमारे हृदयों को उनकी ओर झुका दें, उनके समस्त पथों पर चलने हेतु, और उनके आदेशों का, और उनके अध्यादेशों का, और उनके न्याय-निर्धारणों का पालन करने हेतु, जो उन्होंने हमारे पित्रों को आदेश दिए थे।

५९ और मेरे यह शब्द जिन से मैंने प्रभु के समक्ष अनुनय किया है, दिन-रात हमारे ईश्वर प्रभु के निकट ही रहें, ताकि वो हर समय अपने नौकर का न्याय, और अपने गण इस्राएल का न्याय करते रहें, जैसी भी मसले की आवश्यकता हो:

६० ताकि पृथ्वी के सभी लोग जान जाएँ कि प्रभु ही ईश्वर हैं, और दूसरा कोई भी नहीं है।

६१ इसलिए अपने हृदय को प्रभु हमारे ईश्वर के साथ परिपूर्ण बन जाने दो, उनके अध्यादेशों में चलने हेतु, और उनके आदेशों का पालन करने हेतु, जैसा कि इस दिन है।

६२ और राजा ने, और उसके संग समस्त इस्राएल ने, प्रभु के समक्ष बलि चढ़ाई।

६३ और सुलेमान ने शान्ति-चढ़ावों की एक बलि चढ़ाई, जिसे उसने प्रभु के प्रति चढ़ाई, बाईस हज़ार साँड, और एक लाख बीस हज़ार भेड़ें। तो इस प्रकार राजा और इस्राएल की समस्त सन्तानों ने प्रभु के घर को समर्पित कर दिया।

६४ उसी ही दिन राजा ने आँगन के बीच के क्षेत्र को जो कि प्रभु के घर के सामने था पवित्र ठहरा दिया: क्योंकि वहीं उसने जले-चढ़ावे, और भोज-चढ़ावे, और शान्ति-चढ़ावों की चर्बी चढ़ाईं: क्योंकि वह पीतल की बलिवेदी जो प्रभु के समक्ष थी बहुत छोटी थी उन जले-चढ़ावों को, और भोज-चढ़ावों को, और शान्ति-चढ़ावों की चर्बी को ग्रहण करने हेतु।

६५ और उस समय सुलेमान ने एक भोज रखा, और समस्त इस्राएल उसके साथ, एक विशाल सभा, हमात की प्रविष्टि से लेकर मिस्र की नदी तक, प्रभु हमारे ईश्वर के समक्ष, सात और सात दिन, चौदह दिन ही। 

६६ आठवें दिन उसने लोगों को विदा कर दिया: और उन्होंने राजा को आशीष दिया, और हर्ष मनाते हुए और मन की प्रसन्नता सहित, उस समस्त भलाई के लिए जो प्रभु ने दाऊद अपने सेवक और इस्राएल उनके लोगों के लिए कर दी थी, अपने-अपने तम्बुओं में विदा हो चले।



नौवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब सुलेमान समापन कर चुका था निर्माण कर देना का प्रभु के घर का, और राजा के घर का, और सुलेमान की समस्त इच्छा का जो कुछ भी करने की उसने अभिलाषा की थी,

कि प्रभु सुलेमान को दूसरी बार प्रकट हुए, जैसे वो उसे गिब्यन में प्रकट हुए थे।

और प्रभु ने उस से कहा, मैंने तुम्हारी प्रार्थना और तुम्हारा अनुनय सुन लिया है, जो तुमने मेरे समक्ष किया है: मैंने इस घर को पवित्र ठहरा दिया है, जिसका तुमने निर्माण किया है, मेरे नाम को वहाँ सदा के लिए स्थित कर देने हेतु; और मेरी आँखें और मेरा हृदय वहाँ निरन्तरता तक रहेगा।

और यदि तुम मेरे सम्मुख वैसे चलोगे, जैसे दाऊद तुम्हारा पिता चला था, हृदय की सत्यनिष्ठा में, और शुचिता में, उस सभी के अनुसार कर देने के लिए जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है, और मेरे अध्यादेशों का और मेरे न्याय-निर्धारणों का पालन करोगे:

तब मैं इस्राएल पर तुम्हारे राज्य का सिंहासन सदा के लिए स्थापित कर दूँगा, जैसा कि मैंने तुम्हारे पिता दाऊद को वचन दे दिया था, कहते हुए, कि तुम्हारे प्रति इस्राएल के सिंहासन पर से एक भी पुरुष कटेगा नहीं। 

परन्तु यदि तुम कतई भी मेरा अनुसरण करने से परे मुड़ोगे, तुम या तुम्हारी सन्तानें, और मेरे आदेशों और मेरे अध्यादेशों का पालन नहीं करोगे जिन्हें मैंने तुम्हारे समक्ष स्थित कर दिया है, बल्कि जाकर अन्य ईश्वरों की सेवा करोगे, और उनकी पूजा करोगे:

तब मैं इस्राएल को उस भूमी में से काट डालूँगा जिसे मैंने उन्हें प्रदान कर दिया है; और यह घर, जिसे मैंने अपने नाम के लिए पुनीत ठहरा दिया है, मैं अपनी दृष्टि से बाहर फैंक डालूँगा; और इस्राएल समस्त गणों के बीच एक नीति-वचन और एक कहावत ही बन कर रह जाएगा:

और इसी घर पर जो ऊँचा है, प्रत्येक जो इसके पास से गुज़रेगा भौंचक्का रह जाएगा, और सी-सी करेगा; और वो कहेंगे, भई प्रभु जी ने ऐसा इस भूमी के साथ और इस घर के साथ क्यों कर दिया है?  

और वो उत्तर देंगे, क्योंकि उन्होंने प्रभु अपने ईश्वर का त्याग कर दिया, जो उनके पित्रों को मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाए थे, और अन्य ईश्वरों को पकड़ कर उनकी पूजा कर डाली है, और उनकी सेवा कर दी है: इसलिए प्रभु ने इन पर यह समस्त बुराई डाल दी है।

१० और यह होने को आया कि बीस वर्षों के अंत में, जब सुलेमान ने उन दोनो घरों का निर्माण कर दिया था, प्रभु के घर का, और राजा के घर का, 

११ ( अब टाय्र के राजा हिरम ने सुलेमान को देवदार के वृक्ष और सनोवर के वृक्ष, और स्वर्ण उपलब्ध करवा दिए थे, उसकी समस्त अभिलाषानुसार,) कि तब राजा सुलेमान ने हिरम को गलील की भूमी में बीस नगर प्रदान कर दिए।

१२ और हिरम टाय्र से बाहर निकल कर उन नगरों को देखने पहुँचा जो सुलेमान ने उसे प्रदान किए थे; और वो उनसे अप्रसन्न हो गाय।

१३ और उसने कहा, भई कैसे नगर हैं ये जो तुमने मुझे दे दिए है मेरे भाई? और उसने उन्हें इस दिन तक भी काबुल की भूमी पुकारा।

१४ और हिरम ने राजा को सोने के एक सौ बीस तलनतन-भार भिजवाए।

१५ और यही वो उस कर भरने वाली बेगारी-नौकरी की सेवा का कारण है जो सुलेमान ने स्थापित की; प्रभु के निवास-स्थान का, और उसके अपने स्वयं के निवास-स्थान का, और मिलो का, और यरूशलेम की दीवार का, और हज़ोर, और मगिद्दो, और गेज़र का निर्माण कर देने हेतु।

१६ क्योंकि मिस्र के राजा फैरो ने ऊपर जाकर, गेज़र को हथिया लिया था, और उसे अग्नी से भस्म कर डाला था, और कनान-वासियों को मार डाला था जो उस नगर में बसते थे, और उसे अपनी बेटी, सुलेमान की पत्नी को एक उपहार स्वरूप प्रदान कर दिया था।

१७ और सुलेमान ने निर्माण किया गेज़र का, और निचले बेतहोरोन का, 

१८ और बअलथ का, और जँगली-क्षेत्र में तदमोर का, भूमी में,

१९ और भण्डार-घरों वाले समस्त नगरों का जो सुलेमान के पास थे, और उसके रथों के लिए नगरों का, और उसके घुड़सवारों के लिए नगरों का, और उसका जो सुलेमान यरूशलेम में, और लेबनोन में, और उसके अधिराज्य वाली उस समस्त भूमी में निर्माण करना चाहता था।

२० और वो सभी लोग जो उन एमोरवासियों, हित्ती-वंशजों, पेरिज़्ज़-वंशजों, हिव्वियों, और यबूसी-वंशजों में से बचे रह गए थे, जो कि इस्राएल की सन्तानों में से नहीं थे,

२१ उन्हीं की सन्तानें जो भूमी में उनके पश्चात बची रह गई थीं, जिनका पूर्णतः विनाश इस्राएल की सन्तानें करने में सक्षम थीं, उन्हीं पर ही सुलेमान ने इसी दिन तक ही कर भरने वाली वो बेगारी-नौकरी की सेवा लगा दी थी।

२२ परन्तु इस्राएल की सन्तानों में से सुलेमान ने कोई भी बंध्वा-दास नहीं बनाए: बल्कि वो योद्धा-पुरुष थे, और उसके सेवक, और उसके अध्यक्ष, और उसके कप्तान, और उसके रथों के, और उसके घुड़सवारों के मुखिया।

२३ यही उन अफ़सरों के प्रमुख थे जो सुलेमान के कार्य पर नियुक्त थे, पाँच सौ पचास, जिन्होंने उन लोगों पर अधिकार रखा जो उस कार्य में कार्यरत थे।

२४ परन्तु फैरो की बेटी दाऊद के नगर में से बाहर ऊपर अपने ही घर निकल चली जिसका सुलेमान ने उसके लिए निर्माण किया था: तब उसने मिलो का निर्माण किया।

२५ और वर्ष में तीन बार सुलेमान ने उस बलिवेदी पर जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे चढ़ाए जिसका उसने प्रभु के प्रति निर्माण कर दिया था, और वो सुगन्धित-धूप उस बलिवेदी पर जलाता था जो प्रभु के समक्ष थी। तो इस प्रकार उसने निवास-स्थान का समापन कर दिया।

२६ और राजा सुलेमान ने एज़्योंगेबर में एक जलयानों की नौ-सेना बनाई, जो कि एलोथ के साथ ही है, लाल समुद्र के तट पर, एदोम की भूमी में।

२७ और हिरम में उस नौ-सेना में अपने सेवकों को भेजा, नाविकों को ही जिन्हें समुद्र का ज्ञान था, सुलेमान के सेवकों के साथ।

२८ और वो ओफर पहुँच कर, वहाँ से चार सौ बीस तलनतन-भार सोना ले जाते थे, और उसे राजा सुलेमान के पास ले आते थे।




दसवाँ अध्याय।


और जब शबा की रानी ने सुलेमान की कीर्ती के विषय में सुना प्रभु के नाम के समबन्ध में, तो वो उसे कठिन प्रश्नों से परखने पहुँची।

और वो यरूशलेम एक बहुत ही विशाल कफ़िले के साथ गई, ऊँटों के साथ जो मसाले ढोए हुए थे, और बहुत सारा सोना, और अनमोल रत्न: और जब वो सुलेमान के पास पहुँची थी, उसने उसके साथ उस सभी के विषय में विचार-गोष्ठी की जो कुछ भी उसके मन में था।

और सुलेमान ने उसे उसके समस्त प्रश्न बता दिए: ऐसा कुछ भी राजा से छुपा था, जो उसने उसे नहीं बताया।

और जब शबा की रानी ने सुलेमान की समस्त विद्या देख ली थी, और वो निवास-स्थान जिसका उसने निर्माण किया था,

और उसकी मेज़ पर वो भोजन, और उसके सेवकों की बैठक, और उसके नौकरों का सेवाकार्य, और उनके वस्त्र, और उसके प्याले-उठाने-वाले, और उसका आरोहण जिस से वो प्रभु के निवास-स्थान तक जाता था; तो उस में तो भई और कोई भावात्मा ही नहीं बची रही!

और उसने राजा से कहा, यह सूचना सच्ची थी जो मैंने अपनी स्वयं की भूमी में सुनी थी आपके कारनामों और आपकी विद्या के विषय में।

तथापि मैंने उन शब्दों पर विश्वास नहीं किया था, जब तक कि मैं आई, और मेरे नयनों में उसे देख लिया है: और देखें जी, मुझे तो आधा भी नहीं बताया गया था जी: आपकी विद्या और उन्नति उस कीर्ती से अधिक्तम है जो मैंने सुनी थी।

आपके पुरुष खुश हैं, आपके यह सेवक जो आपके समक्ष निरन्तर खड़े रहते हैं, और आपकी विद्या सुनते हैं, खुश हैं यह।

धन्य हों प्रभु आपके ईश्वर, जिन्होंने आप में आनन्द मनाया, आपको इस्राएल के सिंहासन पर बिठा देने के लिए: क्योंकि प्रभु ने इस्राएल के साथ सदैवत्वता के लिए प्रेम रखा, इसलिए उन्होंने आपको राजा बनाया, इन्साफ़ और न्याय करने हेतु।

१० और उसने राजा को एक सौ बीस तलनतन भार का सोना, और सुगन्धित-द्रव्यों का एक बहुतेरा भण्डार, और अनमोल रत्न प्रदान कर दिए: इनके जैसी और कोई भी सुगन्धित-द्रव्यों की बहुतायतता नहीं आई थी जैसी शबा की रानी ने राजा सुलेमान को प्रदान की थी।

११ और हिरम की नौ-सेना भी जो ओफर से सोना लाती थी, ओफर से ही बहुतेरे अल्मग के पेड़ और बहुमूल्य रत्न ले आती थी।

१२ और राजा ने उन अल्मग के पेड़ों से प्रभु के निवास-स्थान के लिए स्तम्भ बनाए, और राजा के घर के लिए भी, गायकों के लिए वीणाएँ भी और सारंगियाँ: ऐसे अल्मग के पेड़ तो कभी आए थे, ही इस दिन तक भी देखे गए थे।

१३ और राजा सुलेमान ने शबा की रानी को उसकी समस्त अभिलाषा प्रदान कर दी, जो कुछ भी उसने माँगा, उसके अतिरिक्त जो सुलेमान ने उसे अपने राजसी वैभव में से दे दिया था। तो वो मुड़ कर अपने ही देश विदा हो चली, वो और उसके सेवक।

१४ अब उस सोने का भार जो सुलेमान के पास एक वर्ष में आता था छह सौ छियासठ सोने के तलनतन भार था,

१५ उसके अतिरिक्त जो उसके पास व्यापारियों से था, और सुगन्धित-द्रव्यों के उन व्यापारियों के व्यापार वाला जो था, और अरब-देश के राजाओं का जो था, और देश के राजपालों का जो था।

१६ और राजा सुलेमान ने कूटे हुए सोने की दो सौ बड़ी ढालें बनाईं: सोने के छह सौ शेक्ल गए थे एक ढाल में।

१७ और उसने कूटे हुए सोने वालीं तीन सौ छोटी ढालें बनाईं; सोने के तीन मानेह एक ढाल में गए थे: और राजा ने उन्हें लेबनोन के वन के घर में रख दिया।

१८ इसके अतिरिक्त राजा ने हाथी-दाँत का एक विशाल सिंहासन निर्मित किया, और उसे उच्चतम स्वर्ण से ऊपर मढ़ दिया।

१९ उस सिंहासन की छह सीढ़ियाँ थीं, सिंहासन का उच्चतम भाग पीछे से गोलाकार था: और आसान के स्थान के दोनो ओर सहारे वाले टेक थे, और दो शेर उन सहारा लेने वाले टेकों के साथ खड़े थे।

२० और बारह शेर वहाँ खड़े थे एक ओर और दूसरी ओर उन छह सीढ़ियों पर: इसके समान किसी भी अन्य राज्य में नहीं बनाया गया था।

२१ और राजा सुलेमान के समस्त पीने के लिए पात्र सोने के थे, और लेबनोन के वन के घर के समस्त पात्र शुद्ध स्वर्ण के थे; कोई भी चाँदी का था: सुलेमान के दिनो में तो उसका कोई मोल ही था।

२२ क्योंकि राजा के पास समुद्र में हिरम की नौ-सेना के साथ थरशीश की एक नौ-सेना थी: तीन वर्षों में एक बार थरशीश की सेना आया करती थी, सोना और चाँदी, हाथी-दाँत, और बन्दर-वानर, और मोर लाती हुई।

२३ तो राजा सुलेमान पृथ्वी के समस्त राजाओं से धन-धान्यों में और विद्या में अत्याधिकता से आगे बढ़ चला।

२४ और समस्त पृथ्वी सुलेमान को ढूँढ़ा करती थी, उसकी विद्या सुनने, जिसे ईश्वर ने उसके हृदय में डाल दी थी। 

२५ और प्रत्येक पुरुष अपना उपहार ले आता था, रजत के पात्र, स्वर्ण के पात्र, और वस्त्र, और कवच, और सुगन्धित-द्रव्य, घोड़े, और खच्चर, वर्ष प्रति वर्ष एक निश्चित मात्रानुसार ही।

२६ और सुलेमान ने रथ और घुड़सवार एक साथ एकत्रित किए: और उसके पास एक हज़ार चार सौ रथ थे, और बारह हज़ार घुड़वार, जिन्हें उसने रथों वाले नगरों में, और यरूशलेम में राजा के साथ, रखे रखा।

२७ और राजा ने बृहत्ता के समबन्ध में, यरूशलेम में चाँदी को पत्थरों के समान, और देवदारों को उसने घाटी वाले गूलर के पेड़ों समान बना दिया।

२८ और सुलेमान के पास मिस्र में से बाहर लाए गए घोड़े थे, और छालटी का धागा: राजा के व्यापारी उस छालटी के धागे का एक मूल्य पर प्राप्त किया करते थे।

२९ और एक रथ मिस्र में से चाँदी के छह सौ शेक्लों के लिए बाहर निकल कर ऊपर आया करता था, और एक घोड़ा डेड़ सौ के लिए: और इसी प्रकार ही हित्ती-वंशजों के राजाओं के लिए, और सिरीया के राजाओं के लिए वो उन्हें बाहर निकाल लाते थे अपने माध्यमों से।



ग्यारहवाँ अध्याय।


परन्तु राजा सुलेमान कई परदेशी स्त्रियों से प्रेम किया करता था, फैरो की ही बेटी, मोआब-वंशजों, अम्मोन-वंशजों, एदोम-वंशजों, सिदोनियों, और हित्ती-वंशजों की स्त्रियों के साथ;

उन राष्ट्रों वालियों से जिनके विषय में प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों से कहा था, भई तुम उनके पास नहीं जाओगे, ही वो तुम्हारे पास आएँगी: क्योंकि अवश्य ही वो तुम्हारे हृदय को उनके इश्वरों की ओर परे मोड़ डालेंगी: सुलेमान उनके साथ प्रेम में चिपटा हुआ था।

और उसके पास सात सौ पत्नियाँ थीं, राजकुमारियाँ, और तीन सौ रखैलें: और उसकी पत्नियों ने उसके हृदय को परे हटा दिया।

क्योंकि यह होने को आया, जब सुलेमान बूढ़ा हो चुका था, कि उसकी पत्नियों ने उसके हृदय को अन्य इश्वरों की ओर मोड़ डाला: और उसका हृदय प्रभु उसके ईश्वर के साथ परिपूर्ण नहीं था, जैसे दाऊद उसके पिता का हृदय था। 

क्योंकि सुलेमान सिदोनियों की देवी अश्तरोत के पीछे-पीछे चल दिया, और अम्मोन-वंशजों की अति-घृणितता मिल्कोम के पीछे-पीछे।

और सुलेमान ने प्रभु की दृष्टि में बुराई कर डाली, और वो प्रभु के पीछे-पीछे परिपूर्णता से नहीं चला, जैसे कि दाऊद उसका पिता था।

तब सुलेमान ने मोआब की अति-घृणितता कमोश के लिए यरूशलेम के सामने ही एक पहाड़ी में एक उच्च-स्थान बना दिया, और अम्मोन की सन्तानों की अति-घृणितता मोलेक के लिए।

और इसी ही प्रकार उसने अपनी समस्त परदेशी पत्नियों के लिए किया, जो अपने इश्वरों के प्रति सुगन्धित-धूप जलाया करती थीं और बलि चढ़ती थीं।

और प्रभु सुलेमान के साथ क्रोधित हो उठे, क्योंकि उसका हृदय इस्राएल के प्रभु ईश्वर से मुड़ चला था, जो उसे दो बार प्रकट हुए थे,

१० और उसे इस बात के विषय में आदेश दिया था, कि उसे अन्य इश्वरों के पीछे-पीछे नहीं जाना चाहिए: परन्तु उसने उसका पालन नहीं किया जो प्रभु ने उसे आदेश दिया था।

११ इस कारण वश प्रभु सुलेमान ने बोले, भई चूँकि यह तुमसे कर दिया गया है, और तुमने मेरे प्रतिज्ञा-पत्र और मेरे अध्यादेश को नहीं रखा है, जो मैंने तुम्हें आदेश दे दिया है, मैं अवश्य ही तुमसे राज्य को नोच-फाड़ डालूँगा, और उसे तुम्हारे नौकर को दे दूँगा।

१२ तथापि तुम्हारे पिता दाऊद के वास्ते मैं इसे तुम्हारे दिनो में नहीं करूँगा: बल्कि मैं इसे तुम्हारे बेटे के हाथ में नोच-फाड़ डालूँगा।

१३ फिर भी मैं समस्त राज्य को परे नोच-फाड़ नहीं डालूँगा; परन्तु दाऊद अपने सेवक के वास्ते, और यरूशलेम के वास्ते जिसका मैंने चुनाव कर लिया है, मैं एक प्रजाती तुम्हारे बेटे को प्रदान कर दूँगा।

१४ और प्रभु ने सुलेमान के प्रति एक विपक्षी को सक्रिय कर दिया, हदद एदोम-वंशज: वो एदोम के राजा के बीज में से था।

१५ क्योंकि यह होने को आया, जब दाऊद एदोम में था, और सेना का कप्तान योआब मरे हुओं को दफ़्न करने गया हुआ था, उसके एदोम में हर नर का संहार कर देने के पश्चात;

१६ क्योंकि योआब छह महीनों तक समस्त इस्राएल के साथ वहीं रहा था, जब तक कि उसने एदोम में हर नर को नहीं काट डाला था:

१७ कि हदद भाग खड़ा हुआ था, वो और उसके साथ उसके पिता के नौकरों में से कुछ एदोम-वंशज, मिस्र में प्रवेश कर लेने हेतु; हदद तभी-तभी एक छोटा लड़का ही होता हुआ।

१८ और वो मिद्यान में से उठ कर, और परान पहुँचे, और उन्होंने परान में से अपने साथ आदमी ले लिए, और वो मिस्र में गए, मिस्र के राजा फैरो के पास ही; जिसने उसे एक निवास-स्थान प्रदान कर दिया, और उसे खाद्य-पदार्थ नियुक्त कर दिए, और उसे भूमी प्रदान कर दी।

१९ और हदद ने फैरो की दृष्टि में बहुत अनुग्रह पाया, कि उसने अपनी स्वयं की पत्नी की बहन को ही, रानी तहपनिस की बहन, उसे पत्नी के रूप में प्रदान कर दी।

२० और तहपनिस की बहन ने उसे उसका बेटा गनुबथ जना, जिसका दूध तहपनिस ने फैरो के घर में छुड़वाया: और गनुबथ फैरो के घर-बार में ही था, फैरो के बेटों के बीच।

२१ और जब हदद ने मिस्र में सुना कि दाऊद अपने पित्रों के साथ निद्रा ले चुका था, और कि सेना का कप्तान योआब मार चुका था, हदद ने फैरो से कहा, मुझे विदा हो लेने दें जी, ताकि मैं अपने ही स्वयं के देश में चला जाऊँ।

२२ तब फैरो ने उस से कहा, परन्तु मेरे साथ तुम्हें क्या कमी पड़ी है भई, कि देखो भई, तुम तो अपने स्वयं के ही देश चले जाना चाहते हो? और उसने उत्तर दिया, कुछ भी नहीं जी: तथापि मुझे विदा ही हो लेने दें जी।

२३ और ईश्वर ने उसके प्रति एक अन्य विपक्षी सक्रिय कर दिया, रेज़न एलीअदाह का बेटा, जो कि अपने प्रभु ज़ोबा के राजा हददेज़र से भाग खड़ा हुआ था: 

२४ और उसने अपने पास आदमी इकट्ठा कर लिए, और एक सैन्य-डाल पर कप्तान बन बैठा, जब दाऊद ज़ोबा वालों का संहार कर चुका था: और वो दमिश्क चले गए, और वहीं बस गए, और दमिश्क में राज किया।

२५ और वो इस्राएल के प्रति सुलेमान के समस्त दिन एक विपक्षी था, हदद द्वारा की गई उस हानी के अतिरिक्त: और वो इस्राएल से घृणा करता था, और सिरीया पर राज करता था।

२६ और ज़ेरेदा वाले एक एफरथी, नेबत का बेटा यरोबोम, सुलेमान का सेवक, जिसकी माता का नाम ज़रूआ था, एक विधवा स्त्री, यहाँ तक कि उसने अपना हाथ राजा के विरुद्ध उठा दिया।

२७ और यह वो कारण था कि उसने अपना हाथ राजा के विरुद्ध उठा दिया था: सुलेमान ने मिलो का निर्माण किया, और दाऊद अपने पिता के नगर की टूटी-फूटी दरारों की मरम्मत की।   

२८ और वो पुरुष यरोबोम एक पराक्रमी शूरवीर था: और सुलेमान यह देखते हुए कि वो युवा पुरुष एक परिश्रमी था, उसने उसे युसुफ के घराने के समस्त प्रभार का शासक बना दिया। 

२९ और उस समय यह होने को आया जब यरोबोम यरूशलेम से बाहर निकास कर रहा था, कि पैग़म्बर अहिया उस शिलोवासी ने उसे पथ पर पा लिया; और उसने स्वयं को एक नए वस्त्र से आवृत करा हुआ था; और वो दोनो खेत में अकेले थे:

३० और अहिया ने उस पर उस नए वस्त्र को पकड़ लिया, और उसे बारह टुकड़ों में नोच-फाड़ डाला:

३१ और उसने यरोबोम से कहा, तुम दस टुकड़े ले लो: चूँकि इस प्रकार कहते हैं प्रभु इस्राएल के ईश्वर, देखो, मैं सुलेमान के हाथ में से बाहर राज्य को नोच-फाड़ डालूँगा, और तुम्हें दस प्रजातियाँ दे दूँगा:

३२ परन्तु वो, मेरे सेवक दाऊद के वास्ते, और यरूशलेम के वास्ते, वो नगर जिसका चुनाव मैंने इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से कर लिया है, एक प्रजाती रखे रहेगा:

३३ क्योंकि उन्होंने मुझे त्याग दिया है, और सिदोनियों की देवी अश्तरोत को, और मोआब-वंशजों के ईश्वर कमोश को, और अम्मोन की सन्तानों के ईश्वर मिल्कोम को पूज लिया है, और मेरे पथों पर नहीं चले हैं वो कर देने हेतु जो मेरी दृष्टि में उचित है, और मेरे अध्यादेशों और मेरे न्याय-निर्धारणों का पालन करने हेतु जैसा दाऊद उसके पिता ने किया था।

३४ तथापि मैं उसके हाथ में से सम्पूर्ण राज्य बाहर नहीं निकालूँगा: बल्कि मैं दाऊद अपने सेवक के वास्ते जिसे मैंने चुना था, चूँकि उसने मेरे आदेशों और अध्यादेशों का पालन किया था, उसे उसके जीवन के समस्त दिन प्रमुख बनाए रखूँगा:

३५ परन्तु मैं वो राज्य उसके बेटे के हाथ में से बाहर निकाल लूँगा, और उसे तुम्हें प्रदान कर दूँगा, दस प्रजातियाँ ही।

३६ और उसके बेटे को मैं एक प्रजाती प्रदान कर दूँगा, ताकि दाऊद मेरे सेवक के पास मेरे समक्ष सदा एक उजाला रहे, यरूशलेम में, वो नगर जिसे मैंने अपने लिए चुन लिया है अपने नाम को वहीं स्थित कर देने हेतु।

३७ और मैं तुम्हें ले लूँगा, और तुम अपनी आत्मा की समस्त इच्छानुसार राज करोगे, और इस्राएल पर राजा बन जाओगे।

३८ और यह होने को आएगा, यदि तुम उस सभी का श्रवण करोगे जो मैं तुम्हें आदेश दूँगा, और मेरे पथों पर चलोगे, और वो करोगे जो मेरी दृष्टि में उचित है, मेरे अध्यादेशों और मेरे आदेशों का पालन करने हेतु, जैसा मेरे सेवक दाऊद ने किया था; कि मैं तुम्हारे साथ रहूँगा, और तुम्हारे लिए एक निश्चित निवास निर्मित कर दूँगा, जैसा कि मैंने दाऊद के लिए निर्मित किया था, और इस्राएल को तुम्हें प्रदान कर दूँगा।

३९ और मैं इसके कारण दाऊद के बीज को उत्पीड़ित करता रहूँगा, परन्तु सदा के लिए नहीं।

४० सुलेमान इसलिए यरोबोम को मार डालने की वाँछा करने लगा। और यरोबूम उठ कर, मिस्र में भाग खड़ा हुआ, मिस्र के राजा शिशक के पास ही, और मिस्र में ही रहा सुलेमान की मृत्यु तक।

४१ और सुलेमान के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, और उसकी विद्या, क्या वो सुलेमान के कार्यों की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

४२ और समस्त इस्राएल पर यरुशलेम में सुलेमान के राज करने की वो अवधि चालीस वर्ष थी।

४३ और सुलेमान ने अपने पित्रों के साथ निद्रा ले ली, और दाऊद उसके पिता के नगर में दफ़ना दिया गया था: और उसके बेटे रहोबोम ने उसके स्थान में राज किया।



बारहवाँ अध्याय।


और रहोबोम शकेम चला गया: चूँकि समस्त इस्राएल शकेम पहुँचे थे उसे राजा बना देने हेतु।

और यह होने को आया, जब नेबत के बेटे यरोबोम ने, जो अभी भी मिस्र में ही था, इसके विषय में सुना, क्योंकि वो सुलेमान की उपस्थिति से भाग खड़ा हुआ था, और यरोबोम मिस्र में ही बसता था;

कि उन्होंने उसे बुलवा भेजा। और यरोबोम और इस्राएल का समस्त सभा-गण पहुँचा, और रहोबोम से बोला, कहता हुआ,

आपके पिता ने तो हमारा जुआ कठिन बना दिया: इसलिए अब आप अपने पिता की कठिन सेवा को, और उनके भारी जुए को, जो उन्होंने हम पर लाद दिया था, हल्का कर दें, और हम आपकी सेवा करेंगे।

और उसने उन से कहा, अभी तीन दिनो के लिए विदा हो लो, तब पुनः मेरे पास लौट आना। और उन लोगों ने विदाई ले ली।

और राजा रहोबोम ने उन वृद्ध पुरुषों से परामर्श लिया, जो उसके पिता सुलेमान के समक्ष खड़े रहते थे उसके जीते जी, और कहा, आप क्या परामर्श देते हैं कि मैं इन लोगों को उत्तर दे सकूँ?

और वो उस से बोले, कहते हुए, यदि आप इस दिन इस गण के प्रति एक सेवक बन जाएँगे, और इनकी सेवा करेंगे, और उत्तर देकर उन्हें अच्छे शब्द बोलेंगे, तो वो सदा के लिए आपके सेवक बन जाएँगे।

परन्तु उसने इन वृद्ध पुरुषों के परामर्श का त्याग कर दिया, जो उन्होंने उसे दिया था, और उन युवा पुरुषों के साथ परामर्श किया जो उसके साथ ही पले-बड़े थे, और जो उसके समक्ष खड़े होते थे:

और उसने उनसे कहा, तुम क्या परामर्श देते हो कि मैं इस गण को उत्तर दूँ, जो मुझ से बोले, कहते हुए, उस जुए को जो आपके पिता ने हम पर लाद दिया है हल्का कर दें?

१० और उसके साथ पले-बड़े उन युवा पुरुषों ने उस से बोला, कहते हुए, इस प्रकार आप इस गण के साथ बोलेंगे जो आपसे बोले थे, कहते हुए, आपके पिता ने तो हमारा जुआ भारी कर दिया था, परन्तु आप उसे हमारे लिए हल्का कर दें; इस प्रकार आप उनसे कहेंगे, मेरी छोटी उँगली मेरे पिता की कटि से भी मोटी होगी।

११ और जबकि मेरे पिता ने तुम पर एक भारी जुआ लाद दिया था, मैं तुम्हारे जुए में और जोड़ दूँगा: मेरे पिता ने तो तुम्हें कोडों से अनुशंसित किया, परन्तु मैं तुम्हें बिच्छुओं से अनुशंसित करूँगा।

१२ तो यरोबोम और वो समस्त गण तीसरे दिन रहोबोम के पास पहुँचे, जैसा की राजा ने नियुक्त किया था, कहते हुए, मेरे पास पुनः तीसरे दिन जाना।

१३ और राजा ने उन लोगों को कर्कशता से उत्तर दिया, और उन वृद्ध पुरुषों के परामर्श को त्याग दिया जो उन्होंने उसे दी थी;

१४ और उनके साथ उन युवा-पुरुषों के परामर्श के अनुसार बोला, कहता हुआ, मेरे पिता ने तुम्हारा जुआ भारी बना दिया था, और मैं तुम्हारे जुए में और जोड़ दूँगा: मेरे पिता ने तुम्हें कोडों से अनुशंसित किया, परन्तु मैं तुम्हें बिच्छुओं से अनुशंसित करूँगा।

१५ तो राजा ने लोगों का श्रवण नहीं किया; क्योंकि कारण प्रभु की ओर से था, ताकि वह अपनी कहनी को क्रियान्वित कर दें, जो प्रभु उस शिलोवसी अहिया के द्वारा नेबत के बेटे यरोबोम से बोले थे। 

१६ तो जब समस्त इस्राएल ने देखा कि राजा ने उनका श्रवण नहीं किया था, तो लोगों ने राजा को उत्तर दिया, कहते हुए, भई दाऊद में हमारे पास क्या भाग है? ही यिशय के बेटे में हमारे पास कोई भी विरासत है: अपने-अपने तम्बुओं में चले जाओ भई, हे इस्राएल: अब अपने स्वयं के ही घर-बार को देख लो दाऊद! तो इस्राएल अपने-अपने तम्बुओं की ओर विदा हो लिया।

१७ परन्तु उन इस्राएल की सन्तानों पर जो यहूदा के नगरों में निवास करते थे, रहोबोम ने उन पर राज किया। 

१८ तब राजा रहोबोम ने अदोरम को भेजा, जो राजकर पर नियुक्त था; और समस्त इस्राएल ने उस पर पत्थरों से पथराव कर दिया, कि वो मर गया। इसलिए राजा रहोबोम वेगता से स्वयं अपने रथ में जा चढ़ा, यरूशलेम भाग जाने के लिए।

१९ तो इस्राएल ने इस दिन तक दाऊद के घराने के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।

२० और यह होने को आया, जब समस्त इस्राएल ने सुन लिया था कि यरोबोम पुनः वापस लौट आया था, तो उन्होंने भिजवाकर उसे सभा-गण में बुलवा भेजा, और उसे समस्त इस्राएल पर राजा बना दिया: किसी ने भी दाऊद के घराने का अनुसरण नहीं किया, बस केवल यहूदा की प्रजाति ने ही।

२१ और जब रहोबोम यरूशलेम पहुँचा था, तो उसने यहूदा के समस्त घराने को बिन्यामिन की प्रजाती के साथ एकत्रित कर लिया, एक लाख अस्सी हज़ार चुने हुए आदमी, जो योद्धा थे, इस्राएल के घराने के विरुद्ध लड़ाई करने हेतु, राज्य को पुनः सुलेमान के बेटे रहोबोम के पास वापस ले आने हेतु।

२२ परन्तु ईश्वर के शब्द उस ईश्वर के बन्दे शेमाया के पास पहुँचे, कहते हुए,

२३ भई यहूदा के राजा, सुलेमान के बेटे रहोबोम से, और यहूदा के समस्त घराने से और बिन्यामिन से, और लोगों के शेष-गण से बोलो, कहते हुए, 

२४ इस प्रकार कहते हैं प्रभु, तुम चढ़ाई नहीं करोगे, ही अपने भाई-जनो इस्राएल की सन्तानों के विरुद्ध लड़ाई करोगे: हर आदमी वापस अपने ही अपने घर चला जाए; क्योंकि यह बात मुझ से प्रवृत हुई है। इसलिए वह प्रभु के शब्द का श्रवण कर, प्रस्थान कर लेने हेतु वापस मुड़ चले, प्रभु के शब्दानुसार ही। 

 २५ तब यरोबोम ने एफ्रैम पहाड़ पर शेकम का निर्माण किया, और उस में बस गया; और वहाँ से बाहर निकल कर, पेनुएल का निर्माण किया।

२६ और यरोबोम ने अपने मन में कहा, भई अब तो राज्य दाऊद के घराने के पास वापस चला जाएगा:

२७ यदि यह लोग यरूशलेम में प्रभु के घर में बलि चढ़ाने हेतु ऊपर जाएँगे, तो इन लोगों का मन तो पुनः अपने प्रभु की ओर मुड़ जाएगा, यहूदा के राजा रहोबोम की ओर ही, और वो तो मुझे मार कर पुनः ही यहूदा के राजा रहोबोम के पास चले जाएँगे।

२८ अतः राजा ने परामर्श लिया, और दो सोने के बछड़े बना दिए, और उनसे कहा, भई ऊपर यरूशलेम जाना तो तुम्हारे लिए बहुत ही बड़ी बात है: हे इस्राएल, अपने इश्वरों को देख लो जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ऊपर ले आए थे।

२९ और उसने एक को बेतएल में स्थित कर दिया, और उस दूसरे को उसने दान में स्थित कर दिया।

३० और यह बात एक पाप बन गई: क्योंकि लोग एक के समक्ष पूजा करने दान तक भी जाया करते थे।

३१ और उसने उच्च-स्थानों का एक घर बनाया, और लोगों में से सबसे नीचतम को पुरोहित बना दिया, जो कि लेवी के बेटों में से नहीं थे।

३२ और यरोबोम ने आठवें महीने में, महीने के पन्द्रहवें दिन पर एक भोज विहित-नियुक्त किया, उसी भोज के जैसा जो यहूदा में है, और उसने बलिवेदी पर चढ़ा दिया। ऐसा ही उसने बेतएल में कर दिया, उन बछड़ों के प्रति बालि चढ़ाना जो उसने बना दिए थे: और उसने बेतएल में उसके द्वारा बनाए गए उच्च-स्थानों के पुरोहितों को नियुक्त कर दिया।

३३ तो उसने उस बलिवेदी पर जो उसने बेतएल में बनाई थी आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन चढ़ावा चढ़ा दिया, उसी महीने में जो उसने अपने ही हृदय की कल्पना से ठहरा दिया था; और इस्राएल की सन्तानों के प्रति एक भोज विहित नियुक्त कर दिया: और उसने बलिवेदी पर चढ़ावा चढ़ाया, सुगन्धित-धूप जला दी।



तेरहवाँ अध्याय।


और देखो तो, प्रभु के शब्द द्वारा यहूदा में से बाहर निकल कर ईश्वर का एक बन्दा बेतएल पहुँचा: और यरोबोम बलिवेदी के साथ खड़ा था सुगन्धित-धूप जलाने हेतु।

और वो प्रभु के शब्द में उस बलिवेदी के विरुद्ध चीख पड़ा, और कहा, हे बलिवेदी, बलिवेदी, प्रभु इस प्रकार कहते हैं; देख ले, दाऊद के घराने में एक योशियाह नामक बच्चे का जन्म होगा; और तुझी पर वो उन उच्च-स्थानों के पुरोहितों का चढ़ावा चढ़ाएगा जो तुझ पर सुगन्धित-धूप जलाते हैं, और आदमियों की हड्डियाँ तुझ पर जलाई जाएँगी।

और उसने उसी दिन एक संकेत दिया, कहते हुए, यही है वो संकेत जो प्रभु ने बोला है; देख ले, ये बलिवेदी फट जाएगी, और उस पर वो राखें बाहर उँडेल दी जाएँगी।

और यह होने को आया, जब राजा यरोबोम ने ईश्वर के उस बन्दे के कथन सुना, जो बेतएल में उस बलिवेदी के विरुद्ध चीख पड़ा था, कि उसने बलिवेदी से अपना हाथ आगे बढ़ाया, कहते हुए, भई पकड़ लो इसे! और उसका हाथ, जो उसने उसके विरुद्ध बढ़ाया था, सूख गया, कि वो उसे भीतर पुनः अपने पास खींच ही नहीं पाया।

वो बलिवेदी भी फट गई थी, और बलिवेदी में से वो राखें उँडेल दी गई थीं, उसी संकेतानुसार जो ईश्वर के बन्दे ने प्रभु के शब्द के द्वारा दे दिया था।

और राजा ने उत्तर दिया और ईश्वर के बन्दे से कहा, अपने ईश्वर प्रभु के चहरे से याचना कर दें, और मेरे लिए प्रार्थना करें, कि मेरा हाथ मुझे पुनः वापस पुनःस्थापित कर दिया जाए। और ईश्वर के बन्दे ने प्रभु से विनती की, और राजा का हाथ उसे पुनःस्थापित हो गया, और पहले जैसा ही बन गया। 

और राजा ने ईश्वर के बन्दे से कहा, मेरे साथ घर पधार जाएँ, और स्वयं सम्बल हो लें, और मैं आपको एक पुरस्कार दूँगा।

और ईश्वर के बन्दे ने राजा से कहा, यदि आप मुझे अपना आधा घर भी दे देंगे, मैं आपके साथ भीतर नहीं जाऊँगा, ही मैं रोटी खाऊँगा ही इस स्थान में पानी पीयूँगा:

क्योंकि ऐसा ही मुझे निर्देश दे दिया गया था प्रभु के शब्द द्वारा, कहते हुए, कोई भी रोटी मत कहना, ही पानी पीना, ही पुनः उसी पथ पर मुड़ जाना जिस पर तुम आए थे। 

१० तो वो किसी अन्य पथ पर चला गया, और उस पथ पर से वापस नहीं गया जिस पर से वह बेतएल आया था।

११ अब बेतएल में एक बूढ़ा पैग़म्बर बसता था; और उसके बेटों ने आकर उसे उस ईश्वर के बन्दे के समस्त कार्य बतला दिए  जो उसने बेतएल में उस दिन कर दिए थे: वो शब्द जो उसने राजा से बोले थे, वो भी उन्होंने अपने पिता को बता दिए।

१२ और उनके पिता ने उनसे कहा, किस ओर गया वो? क्योंकि उसके बेटों ने देख लिया था किस ओर वो ईश्वर का बन्दा गया था, जो यहूदा से आया था।

१३ और उसने अपने बेटों से कहा, गधे पर काठी बिठा दी। तो उन्होंने गधे पर काठी बिठा दी: और वो उस पर सवारी कर चला,

१४ और उस ईश्वर के बन्दे के पीछे-पीछे चला गया, और उसे एक बाँज के तले बैठा हुआ पाया: और उसने उस से कहा, क्या तुम वो ईश्वर के बन्दे हो जो यहूदा से आया हाँ? और उसने कहा, मैं हूँ।

१५ तब उसने उस से कहा, मेरे साथ घर जाओ, और रोटी खा लो।

१६ और उसने कहा, मैं तुम्हारे साथ वापस नहीं जाऊँगा, ही तुम्हारे साथ अन्दर जाऊँगा: ही मैं तुम्हारे साथ इस स्थान में रोटी खाऊँगा या पानी पीयूँगा:

१७ क्योंकि मुझ से प्रभु के शब्द द्वारा यह कह दिया गया था, तुम वहाँ कोई भी रोटी नहीं खाओगे ही पानी पीयोगे, ही पुनः उसी पथ पर से जाओगे जिस पर से तुम आए थे।

१८ उसने उस से कहा, भई मैं भी तो एक तुम्हारे जैसा ही पैग़म्बर हूँ; और एक दूत मुझ से प्रभु के शब्द द्वारा बोला था, कहता हुआ, उसे अपने साथ अपने घर में वापस ले आओ, ताकि वो रोटी खा ले और पानी पी ले। परन्तु उस ने उस से झूठ बोला।

१९ तो वो उसके साथ वापस चला गया, और उसके घर में रोटी खा ली, और पानी पी लिया।

२० और यह होने को आया, कि जैसे वो मेज़ पर बैठे हुए थे, कि प्रभु का शब्द उस पैगमबर को आया जो उसे वापस लाया था:

२१ और वो ईश्वर के उस बन्दे की ओर चीख पड़ा जो यहूदा से आया था, कहता हुआ, प्रभु इस प्रकार कहते हैं, भई चूँकि तूने प्रभु के मूँह की अवज्ञा कर डाली है, और उस आदेश का आज्ञापालन नहीं किया जो प्रभु तेरे ईश्वर ने तुझे आज्ञा दी थी,

२२ बल्कि वापस लौट आया, और रोटी खा ली, और पानी पी लिया इस स्थान में, जिसके विषय में तुझ से कहा गया था, कोई रोटी मत खाना, और कोई पानी मत पीना; तेरा कंकाल तेरे पित्रों के मक़बरों तक नहीं पहुँचेगा।

२३ और यह होने को आया, उसके रोटी खा लेने के पश्चात, और उसके पी लेने के पश्चात, कि उसने उसके लिए गधे पर काठी कस दी, उसी पैग़म्बर के लिए ही जिसे वो वापस ले आया था।

२४ और जब वो चला गया था, एक शेर ने उस से पथ पर भेंट कर के उसे मार डाला: और उसका कंकाल पथ पर फैंका हुआ था, और वो गधा उसके साथ ही खड़ा रहा, वो शेर भी कंकाल के साथ ही खड़ा रहा।

२५ और देखो तो, लोग गुज़रते जा रहे थे, और उस कंकाल को पथ पर फैंका हुआ देखा, और वो शेर उस कंकाल के साथ ही खड़ा: और उन्होंने आकर उसे नगर में बताया जहाँ वो बूढ़ा पैगमबर बसता था।

२६ और जब उस पैग़म्बर ने, जो उसे पथ पर से वापस लाया था, इसके विषय में सुना, तो उसने कहा, भई ये तो वो ईश्वर वाला बन्दा है, जो प्रभु के शब्द के प्रति अवज्ञाकारी था: इसलिए प्रभु ने उसे उस शेर को प्रदान कर डाला, जिसने उसे फाड़  कर उसे मार डाला, प्रभु के शब्दानुसार ही जो उसने उस से बोला था।

२७ और वो अपने बेटों से बोला, कहता हुआ, मेरे लिए गधे पर काठी लगा लो, और उन्होंने काठी लगा दी।

२८ और उसने जाकर उसके कंकाल को पथ पर ही फैंका हुआ पाया, और वो गधा और वो शेर कंकाल के साथ ही खड़े हुए: उस शेर ने उस कंकाल को खाया नहीं था, ही उस गधे को फाड़ डाला था।

२९ और उस पैग़म्बर ने उस ईश्वर के बन्दे के कंकाल को ऊपर लेकर उसे गधे पर लिटा दिया, और उसे वापस ले आया: और वो बूढ़ा पैग़म्बर नगर में गया, उसके प्रति शोक मनाने और उसे दफ़नाने।

३० और उसने उसके कंकाल को अपनी ही कब्र में लिया दिया; और उन्होंने उस पर शोक मनाया, कहते हुए, हाय, मेरे भाई! 

३१ और यह होने को आया, कि उसके उसे दफ़नाने के पश्चात, वो अपने बेटों से बोला, कहता हुआ, जब मैं मर जाऊँगा, तब मुझे उस मक़बरे में दफ़ना देना जिस में वो ईश्वर का बन्दा दफ़न है; और मेरी अस्थियों को उसकी अस्थियों के साथ ही लिटा देना:

३२ क्योंकि वो कहनी, जो वो प्रभु के शब्द के माध्यम से चीखा था बेतएल में उस बलिवेदी के विरुद्ध, और उन उच्च-स्थानों के समस्त घरों के विरुद्ध जो समैरिया के नगरों में हैं, अवश्य ही घाट कर रहेगी।

३३ इस बात के पश्चात यरोबोम अपने बुरे पथ पर से वापस नहीं लौटा, बल्कि पुनः लोगों में से अति नीचतम में से उन उच्च-स्थानों के पुरोहित बना दिए: जिस किसी को भी उसने चाहा, वो उसे स्थापित कर देता था, और वो उच्च-स्थानों के पुरोहितों में से एक बन जाता था।

३४ और यह बात यरोबोम के घर के प्रति पाप बन गई, उसे काट डालने हेतु ही, और उसका पृथ्वी के चहरे पर से विध्वंस कर देने हेतु।



चौदहवाँ अध्याय।


उस समय यरोबोम का बेटा अबिया रोग ग्रस्त हो गया।

और यरोबोम ने अपनी पत्नी से कहा, उठो भई, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, और स्वयं का भेष बदल लो, ताकि तुम यरोबोम की पत्नी पहचानी जाओ; और तुम शिलो चली जाओ: देखो, वहीं पैग़म्बर अहिया हैं, जिन्होंने मुझे बताया था कि मैं इन लोगों पर राजा बन जाऊँगा।

और अपने साथ दस रोटियाँ, और टिक्कियाँ, और एक मधु का कुप्पा ले जाना, और उनके पास चली जाओ: वही तुम्हें बता देंगे कि इस बच्चे का क्या बनेगा।

और यरोबोम की पत्नी ने ऐसा ही कर दिया, और उठ कर शिलो चली गई, और अहिया के घर पहुँची। परन्तु अहिया देख नहीं सकता था; क्योंकि उसकी आँखे उसकी वृद्धावस्था के कारण धुँधली हो गईं थीं।

  और प्रभु ने अहिया से कहा, देख लो भई, यरोबोम की पत्नी अपने बेटे के लिए तुमसे कुछ माँगने के लिए रही है; क्योंकि वह अस्वस्थ है: ऐसा-वैसा तुम उसे बता दोगे: क्योंकि यह होगा, कि जब वो भीतर जाती है, तब वो स्वयं को कोई और होने का ढोंग करेगी।

और यह ऐसा ही था, जब अहिया ने उसके पैरों की आहट सुनी, जैसे वो द्वार मिस्टर प्रवेश कर रही थी, कि उसने कहा, भई अन्दर जाओ, तुम यरोबोम की पत्नी: तुम कोई और होने का ढोंग क्यों कर रही हो भई? क्योंकि मुझे तुम्हारे पास कठोर सूचना हेतु भेजा गया है।

जाकर यरोबोम को बता दो, प्रभु इस्राएल के ईश्वर इस प्रकार कह रहे हैं, यद्यपि मैंने तुम्हें लोगों के बीच में से पदोन्नत किया था, और तुम्हें अपने गण इस्राएल पर अध्यक्ष बना दिया था, 

और दाऊद के घराने के पास से उस राज्य को परे फाड़ कर, तुम्हें प्रदान कर दिया था: और तद्यपि भी तुम मेरे सेवक दाऊद के समान नहीं रहे हो, जिसने मेरी आज्ञाओं का अनुपालन किया था, और जिसने अपने सम्पूर्ण हृदय से मेरा अनुसरण किया था, बस केवल वही करने हेतु जो मेरी दृष्टि में उचित था;

बल्कि तुमसे उन सभी से बढ़कर जो तुम्हारे पूर्व थे बुराई कर डाली है: क्योंकि तुमने जाकर अन्य ईश्वर, और ढलवाँ प्रतिमाएँ बना डाली हैं, मुझे क्रोध से उत्तेजित कर देने हेतु, और मुझे अपनी पीठ के पीछे पटक डाला है:

१० इसलिए देख लो भई, मैं यरोबोम के घराने पर बुराई डाल दूँगा, और यरोबोम के पास से उसे जो दीवार पर मूतता है, और उसे जो इस्राएल में बन्धा हुआ है, और जो छूटा हुआ है, काट डालूँगा, और यरोबोम के घराने के शेष बचे कुचे को परे हटा डालूँगा, जैसे कोई आदमी लीद को परे हटा देता है, जब तक कि वो सारा सफ़ाचट नहीं हो जाता है।

११ यरोबोम वाला वो जो नगर में मरता है उसे कुत्ते खाएँगे; और वो जो खेत में मरता है उसे पवन के पंछी खाएँगे: क्योंकि प्रभु ने बोल दिया है।

१२ उठ जाओ तुम इसलिए, चली जाओ अपने स्वयं के घर: और जब तुम्हारे पैर नगर में प्रवेश करेंगे, वो बच्चा मर जाएगा।

१३ और समस्त इस्राएल उसके लिए शोक मनाएगा, और उसे दफ़ना देगा: क्योंकि यरोबोम वाला बस केवल वही कब्र तक पहुँचेगा, क्योंकि यरोबोम के घराने में से इस में प्रभु इस्राएल के ईश्वर की ओर कुछ अच्छा पा लिया गया है।

१४ इसके अतिरिक्त प्रभु इस्राएल पर अपने लिए एक राजा को उठा देंगे, जो उस दिन यरोबोम के घराने को काट डालेगा: परन्तु कब भई? अभी ही!

१५ चूँकि प्रभु इस्राएल को पीट डालेंगे, जैसे एक सरकंडा पानी में झकझोर दिया जाता है, और वो इस्राएल को इस अच्छी भूमी में से बाहर जड़ से उखाड़ देंगे, जिसे उन्होंने उनके पित्रों को प्रदान कर दी थी, और इन्हें नदी पार छिड़क देंगे, क्योंकि इन्होंने अपने उपवन बना लिए हैं, प्रभु को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु।

१६ और वो इस्राएल का, यरोबोम के पापों के कारण, जिसने पाप कर दिया था, और जिसने इस्राएल से पाप करवा दिया था, त्याग कर देंगे।

१७ और यरोबोम की पत्नी उठी, और विदा हो ली, और तिर्ज़ा पहुँची: और जब वो द्वार की दहलीज़ पर पहुँची थी, वो बच्चा मर गया;

१८ और उन्होंने उसे दफ़ना दिया; और समस्त इस्राएल ने उसके लिए शोक मनाया, प्रभु के शब्दानुसार ही, जो वो अपने सेवक अहिया उस पैग़म्बर के हाथ से बोले थे।

१९ और यरोबोम के शेष कार्य, कैसे-कैसे उसने युद्ध लड़े, और कैसे-कैसे उसने राज किया, देखो, वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हुए हैं।

२० और यरोबोम के राज करने वाले उन दिनो की अवधि बाईस वर्ष थी। और वो अपने पित्रों के साथ सो गया, और नादब उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।

२१ और सुलेमान के बेटे रहोबोम  ने यहूदा में राज किया। रहोबोम इकतालीस वर्ष कि आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम उस नगर में, जिसका चुनाव प्रभु ने अपने नाम को वहाँ स्थापित करने हेतु, इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से किया था, सत्रह वर्ष राज किया। और उसकी माता का नाम नमा था एक अम्मोन-वंशज स्त्री।

२२ और यहूदा ने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और उन्होंने अपने पापों से उन्हें ईर्षा के प्रति उत्तेजित कर दिया, उनके पित्रों द्वारा कर दिए गए उन सभी से अधिक, जो उन्होंने कर दिए थे।

२३ क्योंकि उन्होंने अपने लिए उच्च-स्थानों का भी, और प्रतिमाओं का, और उपवनों का निर्माण कर दिया, प्रत्येक ऊँची पहाड़ी पर, और प्रत्येक हरे वृक्ष तले।

२४ और भूमी में समलैंगिक भी थे: और उन्होंने उन राष्ट्रों की समस्त अति-घृणितताओंनुसार किया जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने से बाहर खदेड़ डाला था।

२५ और राजा रहोबोम के पाँचवें वर्ष में यह होने को आया कि, मिस्र के राजा शिशक ने यरूशलेम के विरुद्ध चढ़ाई कर डाली:

२६ और वो प्रभु के घर के धन-कोषों को ले गया, और राजा के धन-कोषों को; वो तो सभी कुछ ही ले गया: और वो सोने की वो सारी ढालें भी ले गया जो सुलेमान ने बनाई थीं।

२७ और राजा रहोबोम ने उनके स्थान में पीतल की ढालें बनाईं, और उन्हें रक्षक-गण के प्रमुख के हाथों में सौंप दीं, जो राजा के घर के द्वार का रक्षक था।

२८ और ये ऐसा होता था, कि जब राजा प्रभु के घर में भीतर जाता था, तो वो रक्षक-गण उन्हें ढोता था, और उन्हें रक्षक-गण के कक्ष में वापस ले आया करता था।

२९ अब रहोबोम के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

३० और रहोबोम और यरोबोम के समस्त दिनो उनके बीच युद्ध छिड़ा रहा।

३१ और रहोबोम अपने पित्रों के साथ सो गया, और उसे दाऊद के नगर में उसके पित्रों के साथ दफ़ना दिया गया था। और उसकी माता का नाम नमा था एक अम्मोन-वंशज स्त्री। और उसके बेटे अबियम ने उसके स्थान में राज किया।



पंद्रहवाँ अध्याय।


अब नेबत के बेटे राजा यरोबोम के अट्ठारहवें वर्ष में यहूदा पर अबियम ने राज किया।

उसने यरूशलेम में तीन वर्ष राज किया। और उसकी माता का नाम मअकाह था, अबिशलोम।

और वो अपने पिता के समस्त पापों में जो उसने उस से पूर्व कर दिए थे, चलता था: और उसका हृदय प्रभु उसके ईश्वर के साथ परिपूर्ण था, जैसा उसके पिता दाऊद का हृदय था।

तो भी दाऊद के वास्ते प्रभु उसके ईश्वर ने उसे यरूशलेम में एक दीपक प्रदान कर दिया था, उसके पश्चात उसके बेटे को स्थित कर देने हेतु, और यरूशलेम को स्थापित कर देने हेतु:

क्योंकि दाऊद ने वो किया था जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, और अपने जीवन के समस्त दिनों में वो किसी भी बात से परे नहीं मुड़ा जो उन्होंने उसे आदेश दिया था, सिवाय केवल ऊरिया उस हित्ती-वंशज की बात में।

और उसके जीवन के समस्त दिनो, रहोबोम और यरोबोम के बीच युद्ध छिड़ा रहा।

अब अबियम के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या? और अबियम और यरोबोम के बीच युद्ध-आवस्था थी।

और अबियम अपने पित्रों के साथ सो गया; और उन्होंने उसे दाऊद के नगर में दफ़ना दिया: और उसके बेटे आसा ने उसके स्थान में राज किया।

और इस्राएल के राजा यरोबोम के बीसवें वर्ष में आसा ने यहूदा पर राज किया।

१० और उसने इकतालीस वर्ष यरूशलेम में राज किया। और उसकी माता का नाम मअकाह था, अबिशलोम की बेटी।

११ और आसा ने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित थे, जैसा दाऊद उसके पिता ने किया था।

१२ और उसने भूमी में से उन समलैंगिकों को भूमी में से बाहर परे हटा डाला, और उस समस्त मूर्तीयों को हटा दिया जो उसके पित्रों ने बनाई थीं।

१३ और अपनी माता मअकाह को भी, उसने रानी कर पद पर से हटा डाला, क्योंकि उसने एक उपवन में एक मूर्ति बना दी थी; और आसा ने उसकी मूर्ति को नष्ट कर डाला, और उसे किद्रोन नदी के साथ भस्म कर डाला।

१४ परन्तु वो उच्च-स्थान नहीं हटाए गए थे: तथापि आसा का हृदय प्रभु के साथ उसके समस्त दिन परिपूर्ण था।

१५ और वह प्रभु के घर में उन वस्तुओं को भीतर ले आया जिन्हें उसके पिता ने समर्पित किया था, और उन वस्तुओं को जिन्हें उसने स्वयं समर्पित किया था, चाँदी, और सोना, और पात्र।

१६ और आसा और इस्राएल के राजा बशा के समस्त दिनो उनके बीच युद्ध छिड़ा रहा।

१७ और इस्राएल के राजा बशा ने यहूदा के विरुद्ध जाकर, रमा का निर्माण किया, ताकि वो किसी को भी यहूदा के राजा आसा के पास बाहर निकल कर जाने की या भीतर जाने की अनुमति दे।

१८ तब आसा ने वो सारी प्रभु के घर के धन-कोषों में बची हुई चाँदी और वो सोना, और राजा के घर के धन-कोषों को लेकर अपने नौकरों के हाथ में प्रदान कर दिया: और राजा आसा ने उन्हें दमिश्क में बसने वाले सिरीया के राजा, हेज़ियों के बेटे तबरिमोन के बेटे बनहदद को भिजवा दिया, कहते हुए,

१९ मेरे और आपके बीच, और मेरे पिता और आपके पिता के बीच एक संगठन है: देखें जी, मैंने आपको चाँदी और सोने का एक उपहार भेज दिया है; जाएँ और इस्राएल के राजा बशा के साथ अपना संगठन तोड़ डालें, ताकि वो मुझ से प्रस्थान कर ले।

२० तो बनहदद ने राजा आसा का श्रवण कर लिया, और सेनाओं के कप्तानों को जो उसके पास थे इस्राएल के नगरों के विरुद्ध भेज कर, इयोन, और दान, और एबलबेतमअकाह, और सारा किनरोत, नफ़्तली की समस्त भूमी के साथ, पीट डाला।

२१ और यह होने को आया, जब बशा ने इसके विषय में सुना, तो उसने रमा के निर्माण का त्याग कर दिया, और तिर्ज़ा में बस गया।

२२ तब राजा आसा ने समस्त यहूदा के सर्वत्र में एक घोषणा की; किसी को भी छूट नहीं मिली: और उन्होंने रमा के पत्थरों को, और उसकी लकड़ी को परे हटा लिया, जिन से बशा ने निर्माण किया था; और राजा आसा ने उन से बिन्यामिन के गेबा, और मिज़पाह का निर्माण कर दिया।

२३ अब आसा के शेष कार्य, और उसकी समस्त शक्ती, और वो सब कुछ जो उसने किया था, और वो नगर जिनका उसने निर्माण किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या? तथापि उसकी वृद्ध आयु के समय में उसके पैरों में रोग लगा हुआ था।

२४ और आसा अपने पित्रों के साथ सो गया, और उसे दाऊद उसके पिता के नगर में उसके पित्रों के साथ दफ़ना दिया गया था। और उसके बेटे यहोशाफट ने उसके स्थान में राज किया।

२५ और यरोबोम के बेटे नादब ने इस्राएल पर यहूदा के राजा आसा के दूसरे वर्ष में राज करना आरम्भ किया, और उसने इस्राएल पर दो वर्ष राज किया।

२६ और उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और अपने पिता के पथ में चला, और उसके पाप में जिस से कि उसने इस्राएल से पाप करवाया। 

२७ और इस्सकार के घराने के अहिया के बेटे बशा ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचाया; और बशा ने उसे गिबथोन में, जो कि पलिश्तिम-वंशजों का था, परास्त कर डाला; क्योंकि नादब और समस्त इस्राएल ने गिबथोन में घेराबन्दी की हुई थी।

२८ यहूदा के राजा आसा के तीसरे वर्ष में ही बशा ने उसे मार डाला, और उसके स्थान में राज किया।

२९ और यह होने को आया, जब उसने राज किया, कि उसने यरोबोम के समस्त घराने को पीट डाला; उसने यरोबोम को कोई भी श्वास लेता हुए नहीं छोड़ा, जब तक कि उसने उसका विध्वंस नहीं कर डाला था, प्रभु के कथननुसार ही, जो वो अपने सेवक अहिया उस शिलोवासी द्वारा बोले थे:  

३० यरोबोम के पापों के कारण ही जो उसने पाप किए थे, और जो पाप उसने इस्राएल से करवाए थे, उसकी उत्तेजना-क्रिया द्वारा जिस से उस ने प्रभु इस्राएल के ईश्वर को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया था।

३१ अब नादब के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

३२ और आसा और इस्राएल के राजा बशा के समस्त दिनो उनके बीच युद्ध छिड़ा रहा।

३३ यहूदा के राजा आसा के तीसरे वर्ष में अहिया के बेटे बशा ने तिर्ज़ा में समस्त इस्राएल पर राज करना आरम्भ किया, चौबीस वर्ष।

३४ और उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और वो यरोबोम के पथ में, और उसके पाप में जिस से उसने इस्राएल से पाप करवाया, चला।




सोलहवाँ अध्याय।


तब प्रभु के शब्द बशा के विरुद्ध हननी के बेटे येहू के पास आए, कहते हुए,

भई अब जितना भी मैंने  तुम्हें धूल में से बाहर पदोन्नत किया, और तुम्हें मेरे गण इस्राएल पर शासक बना दिया; और तुम यरोबोम के पथ पर चलते गए, और मेरे गण इस्राएल से पाप करवाया, मुझे उनके पापों से क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु;

देख लो, मैं बशा के वंश को, और उसके घर के वंश को परे हटा डालूँगा; और तुम्हारे घर को नेबत के बेटे यरोबोम के घर जैसा बना दूँगा।

जो बशा-वंश्धर नगर में मरता है उसे कुत्ते खा जाएँगे; और वो जो उसका खेतों में मरता है पवन के पक्षी खा जाएँगे।

अब बशा के शेष कार्य, और जो उसने किया था, और उसकी शक्ती, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

तो बशा अपने पित्रों के साथ सो गया, और तिर्ज़ा में दफ़ना दिया गया था: और एला उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।

और हननी के बेटे पैग़म्बर येहू के हाथ द्वारा भी प्रभु के शब्द बशा के विरुद्ध, और उसके घराने के विरुद्ध आए, यहाँ तक कि उस सभी बुराई हेतु जो उसने प्रभु की दृष्टि में कर डाली थी, उन्हें अपने हाथों के कर्मों द्वारा, क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु, यरोबोम के घराने के जैसा बन जाने में; और चूँकि उसने उसे मार डाला था।

यहूदा के राजा आसा के छब्बीसवें वर्ष में बशा के बेटे एला ने तिर्ज़ा में इस्राएल पर राज करना आरम्भ किया, दो वर्ष।

और उसके आधे रथों के कप्तान, उसके नौकर ज़िम्री ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचाया, जैसे वह तिर्ज़ा में था, पीता-पीता स्वयं को धुत करता हुआ तिर्ज़ा में अर्ज़ा के घर में, उसके घराने का प्रबन्धक।  

१० और ज़िम्री ने भीतर जाकर उस पर वार कर कर उसे मार डाला, यहूदा के राजा आसा के सत्ताईसवें वर्ष में, और उसके स्थान में राज किया।

११ और यह होने को आया, जब उसने राज करना आरम्भ किया, उसके सिंहासन पर बैठते ही, कि उसने बशा के सभी घराने वालों को मार डाला: और उसने उसे एक भी छोड़ा जो किसी दीवार पर मूतता हो, ही उसके कुलवालों में से, उसके मित्रों में से।

१२ इस प्रकार ज़िम्री ने बशा के समस्त घराने का विध्वंस कर डाला, प्रभु के शब्दानुसार ही, जो वो बशा के विरुद्ध पैग़म्बर येहू के द्वारा बोले थे,

१३ बशा के समस्त पापों के, और उसके बेटे एला के पापों के कारण, जिनके द्वारा उन्होंने पाप किए थे, और जिनके द्वारा उन्होंने इस्राएल से पाप करवाया था, प्रभु इस्राएल के ईश्वर को उनकी व्यर्थताओं के माध्यम से क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु।

१४ अब एला के शेष कार्य, और जो सब कुछ उसने किया था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

१५ यहूदा के राजा आसा के सत्ताईसवें वर्ष में, तिर्ज़ा में ज़िम्री ने सात दिन राज किया। और लोगों ने गिबथोन के विरुद्ध, जो कि पलिश्तिम-वंशजों का था, पड़ाव डाल रखा था।

१६ और उन लोगों ने जिन्होंने पड़ाव डाल रखा था बात सुनी, कि भई ज़िम्री ने तो षड्यंत्र रचा कर, और राजा को तो मार भी डाला है: इस कारण वश समस्त इस्राएल ने शिविर में उस दिन ओम्री को सेना का कप्तान, इस्राएल पर राजा बना डाला।

१७ और ओम्री और उसके साथ समस्त इस्राएल ने गिबथोन से चढ़ाई कर, तिर्ज़ा पर घेराबन्दी कर डाली।

१८ और यह होने को आया, जब ज़िम्री ने देखा कि नगर पकड़ में चुका था, तो उसने राजा के घर के महल में जाकर, अपने ऊपर राजा के घर को अग्नी से जला दिया, और मर गया,

१९ उसके पापों के कारण जो पाप उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई कर कर, कर डाले थे, यरोबोम के पथ में चल कर, और उसके पाप में जो उसने किए थे, इस्राएल से पाप करवा डालने हेतु।

२० अब ज़िम्री के शेष कार्य, और जो राज-द्रोह उसने क्रियान्वित किया था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

२१ तब इस्राएल के लोग दो गुटों में विभाजित हो गए थे: आधी जनता गिनथ के बेटे तिब्नी के पीछे-पीछे लग गई, उसे राजा बना देने हेतु; और आधी जनता ओम्री के पीछे-पीछे।

२२ परन्तु ओम्री के पीछे लगे हुए लोगों ने गिनथ के बेटे तिब्नी के पीछे लगी हुई जनता को परास्त कर दिया: तो तिब्नी मर गया, और ओम्री ने राज किया।

२३ यहूदा के राजा आसा के इकत्तीसवें वर्ष में, ओम्री ने इस्राएल पर राज करना आरम्भ किया: छह वर्ष उसने तिर्ज़ा में राज किया।

२४ और उसने शमेर से समैरिया की पहाड़ी चाँदी के दो तलंतन भारों से खरीद ली, और उस पहाड़ी पर निर्माण किया, और उस नगर को जिसका उसने निर्माण किया था, उस पहाड़ी के मालिक के नाम शमेर पर आधारित, समैरिया का नाम दे दिया। 

२५ परन्तु ओम्री ने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और उन सभी से जो उस से पूर्व थे और भी अधिक भत्तर किया।

२६ क्योंकि वो नेबत के बेटे यरोबोम के समस्त पथ में चलता रहा, और उसके पाप में जिस से उसने इस्राएल से पाप करवाया था, प्रभु इस्राएल के ईश्वर को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु उनकी व्यर्थताओं से। 

२७ अब ओम्री के शेष कार्य जो उसने किए थे, और उसकी शक्ती का प्रदर्शन, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

२८ तो ओम्री अपने पित्रों के साथ सो गया, और उसे समैरिया में दफ़ना दिया गया था: और उसके बेटे अहाब ने उसके स्थान में राज किया।

२९ यहूदा के राजा आसा के अड़तीसवें वर्ष में ओम्री के बेटे अहाब ने इस्राएल पर राज करना आरम्भ किया: और ओम्री के बेटे अहाब ने समैरिया में इस्राएल पर बाईस वर्ष राज किया।

३० और ओम्री के बेटे अहाब ने प्रभु की दृष्टि में उस सभी से पूर्व वालों से अधिक बुराई कर डाली।

३१ और यह होने को आया कि भई ये तो कोई हल्की सी ही बात थी उसके लिए नेबत के बेटे यरोबोम के पापों के पथ पर चलना, कि भई उसने तो सिदोनियों के राजा एथबअल की बेटी इज़्बल को पत्नी ले लिया, और जाकर बअल की सेवा की, और उसकी पूजा की।

३२ और उसने बअल के लिए बअल के घर में एक बलिवेदी खड़ी कर दी, जिसका निर्माण उसने समैरिया में किया था।

३३ और अहाब ने एक उपवन बनाया; और अहाब ने, इस्राएल के उन समस्त राजाओं की तुलना में जो उस से पूर्व थे, प्रभु इस्राएल के ईश्वर को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु, अधिक कर डाला।

३४ उसी के दिनो में उस बेतएलवासी हिएल ने यरीहो का निर्माण किया: उसने उसकी नीव अबिरम उसके प्रथम जन्मे में बिछाई, और उसके दरवाज़ों को अपने सबसे छोटे बेटे सेगब में स्थापित किया, प्रभु के शब्दानुसार ही, जो वो नून के बेटे यहोशुआ द्वारा बोले थे।



सत्रहवाँ अध्याय।


और उस तिश्बी वाले एलिया ने, जो गिलद के निवासियों में से था, अहाब से कहा, प्रभु इस्राएल के ईश्वर के जीते जी, जिनके सम्मुख मैं खड़ा हूँ, इन वर्षों में ही ओस ही वर्षा गिरेगी, सिवाय मेरे शब्दानुसार।

और प्रभु के शब्द उसके पास आए, कहते हुए, 

भई यहाँ से तुम चलते बनो, और तुम पूर्व की ओर मुड़ चलो, और स्वयं को केरिथ नदी के साथ ही, जो यर्दन के सम्मुख है, छुपा लो। 

और यह होने को आएगा, कि तुम उस नदी में से पीयोगे; और मैंने उन बड़े-क़व्वों को तुम्हें वहीं पोषण प्रदान करने हेतु आदेश दे दिया है।

तो उसने जाकर प्रभु की शब्दानुसारिता के प्रति ही कर डाला: चूँकि उसने जाकर केरिथ नदी के साथ ही जो यर्दन के सम्मुख है, वास किया।

और वो बड़े-क़व्वे उसके लिए रोटी और माँस प्रातः में, और रोटी और माँस संध्या के समय ले आते थे; और वो नदी में से पीता था।

और कुछ समय पश्चात यह होने को आया कि वो नदी सूख गई, क्योंकि भूमी पर कोई वर्षा नहीं गिरी थी।

और प्रभु के शब्द उसके पास पहुँचे, कहते हुए, 

भई उठ जाओ, तुम ज़रफथ चले चलो, जो सिदोन का है, और वहीं बस जाओ: देखो, मैंने एक विधवा स्त्री को वहीं तुम्हारा पोषण करने हेतु आदेश दे दिया है। 

१० तो वो उठ गया और ज़रफथ की ओर चलता गया। और जब वो उस नगर के दरवाज़े तक पहुँचा था, देखो तो, वो विधवा स्त्री डण्डियाँ एकत्रित कर रही थी: और उसने उसे पुकार कर कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, मेरे लिए एक पात्र में थोड़ा सा पानी ले आओ, ताकि मैं पी सकूँ।

११ और जैसे वो उसे लाने जा रही थी, उसने उसे पुकारा और कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, मेरे लिए रोटी का एक निवाला अपने हाथ में ले आओ भई।

१२ और उसने कहा, प्रभु आपके ईश्वर के जीते जी, मेरे पास कोई पराँठा-वराँठा नहीं है जी, बल्कि एक घड़े में मुट्ठी भर आटा, और एक कुप्पी में थोड़ा सा ही तेल: और देखें, मैं दो डण्डियाँ इकट्ठा कर रही हूँ, ताकि मैं भीतर जाकर उसे अपने और अपने बेटे के लिए तैयार कर दूँ, ताकि हम उसे खा कर मर जाएँ।

१३ और एलिया ने उस से कहा, भई डरो मत; जा कर अपने कहने के अनुसार ही कर लो: परन्तु पहले मेरे लिए उस में से एक छोटा सा पराँठा बना कर, उसे मेरे पास ले आओ, और उसके पश्चात अपने लिए और अपने बेटे के लिए बना लेना।

१४ चूँकि इस प्रकार कहते हैं प्रभु इस्राएल के ईश्वर, आटे वाला वो घड़ा समाप्त नहीं होगा, ही वो तेल वाली कुप्पी विफल होगी, उस दिन तक जब प्रभु धरती पर वर्षा भेज देते हैं।

१५ और उसने जाकर एलिया के कथनानुसार ही कर दिया: और उस स्त्री ने, और उस ने, और उसके घराने ने कई दिनो तक खाया।

१६ और आटे वाला वो घड़ा समाप्त नहीं हुआ, ही वो तेल वाली कुप्पी विफल हुई, प्रभु के शब्दानुसार ही जो उन्होंने एलिया द्वारा बोल दिया था।  

१७ और इन बातों के पश्चात यह होने को आया, कि इस स्त्री का, उस घर की माल्किन का बेटा बीमार पड़ गया; और उसकी बीमारी इतनी गम्भीर थी, कि उस में तो कोई श्वास ही नहीं बचा रहा।

१८ और उसने एलिया से कहा, मुझे आपसे क्या करना-धरना जी, अरे आप ईश्वर के बन्दे? क्या आप मेरे पास मेरे पाप का स्मरण करवाने, और मेरे बेटे को मार डालने हेतु पधारें हैं क्या?

१९ और उसने उस से कहा, मुझे अपना बेटा दे दो। और उसने उसे उसकी छाती में से बाहर निकाल लिया, और उसे एक ऊपर वाले कक्ष में उठा ले गया, जहाँ वो निवास करता था, और उसे अपने ही बिस्तर पर लिटा दिया।

२० और उसने प्रभु के प्रति चीख कर कहा,  हे प्रभु जी मेरे ईश्वर, क्या आप इस विधवा पर बुराई ले आए हैं क्या जिसके साथ मैं अल्पवास कर रहा हूँ, उसके बेटे को मार डालने से?

२१ और उसने स्वयं को उस लड़के पर तीन बार फैलाते हुए, प्रभु के प्रति चीख मचाई और कहा, हे प्रभु जी मेरे ईश्वर, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, इस लड़के की आत्मा को इस में पुनः जाने दें जी।

२२ और प्रभु ने एलिया की वाणी सुनी ली; और उस लड़के की आत्मा उस ने पुनः गई, और वो सजीवित हो उठा।

२३ और एलिया ने उस लड़के को लिया, और उसे उस कक्ष में से बाहर नीचे घर में ले आया, और उसे उसकी माँ को प्रदान कर दिया: और एलिया ने कहा, देख लो भई, तुम्हारा बेटा जी रहा है।

२४ और उस स्त्री ने एलिया से कहा, जी अब इस से मैं जान चुकी हूँ कि आप ईश्वर के बन्दे हैं, और कि प्रभु का वो शब्द आपके मूँह में सत्य है।



अट्ठारहवाँ अध्याय।


और कई दिनो के पश्चात यह होने को आया, कि प्रभु के शब्द तीसरे वर्ष में एलिया के पास पहुँचे, कहते हुए, भई जाकर स्वयं को अहाब को दिखवा लो; और मैं धरती पर वर्षा भेज दूँगा।

और एलिया स्वयं को अहाब के प्रति प्रस्तुत करने हेतु चल दिया। और समैरिया में तो एक घोर अकाल पड़ा हुआ था।

और अहाब ने ओबदिया को जो उसके घराने का राज्यपाल था बुलाया। अब ओबदिया प्रभु का भय भीषणता से मानता था:  

क्योंकि ऐसा हुआ था कि जब इज़्बल ने प्रभु के पैग़म्बरों को काट दिया था, कि ओबदिया ने एक सौ पैग़म्बरों को लेकर उन्हें पचास-पचास एक गुफा में छुपा कर उनका पोषण रोटी और पानी से किया था।

और अहाब ने ओबदिया से कहा, भूमी में चले जाओ, समस्त जल-स्त्रोतों के पास, और समस्त नदियों के पास: मान लो कि कहिं हम घास पा लें घोड़ों और खच्चरों को जीवित बचा लेने हेतु, ताकि हम सभी जानवरों को खो दें।

तो उन्होंने अपने बीच उस भूमी को विभाजित कर दिया उसके सर्वत्र में से पार चलते जाने हेतु: अहाब स्वयं से एक पथ पर चलता बना, और ओबदिया एक दूसरे पर से स्वयं चलता बना।

और जैसे ओबदिया पथ पर ही था, देखो तो, एलिया उस से मिला: और उसने उसे पहचान लिया, और अपने चहरे के बल गिर कर कहा, क्या आप मेरे प्रभु एलिया हैं जी?

और उसने उसे उत्तर दिया, मैं हूँ: जाकर अपने प्रभु को बता दो, देखो एलिया यहाँ है।

और उसने कहा, जी क्या पाप कर डाला है मैंने, कि आप अपने सेवक को अहाब के हाथ में प्रदान कर देंगे, मुझे मरवा डालने हेतु जी?

१० प्रभु आपके ईश्वर के जीते जी, भई कोई भी राष्ट्र नहीं है ही राज्य, जहाँ मेरे प्रभु ने आपको ढूँढ निकाल लेने हेतु नहीं भिजवा दिए हैं: और जब उन्होंने कहा, वो तो यहाँ नहीं है; तो उन्होंने उस राज्य और राष्ट्र से शपथ दिलवाई, कि वह आपको नहीं ढूँढ निकाल पाए थे।

११ और अब आप कह रहे हैं, जाकर अपने प्रभु को बता दो भई, देखो एलिया यहाँ है!

१२ और जी यह ऐसे होने को आएगा, कि मेरी आपसे विदाई लेते ही प्रभु के भावात्मा आपको उठा ले जाएँगे मैं जानू कहाँ; और तो जब मैं आकर अहाब को बताऊँगा, और वो आपको नहीं पाएगा, वो तो मुझे मार ही डालेगा जी: परन्तु मैं आपका सेवक अपने युवाकाल से लेकर ही प्रभु का भय मानता हूँ जी।
१३ क्या यह मेरे प्रभु को नहीं बताया गया था कि मैंने क्या किया था जब इज़्बल ने प्रभु के पैग़म्बरों को मार डाला था, कि मैंने कैसे प्रभु के पैग़म्बरों में से एक सौ पुरुषों को पचास-पचास एक गुफा में छुपा कर उनका पोषण रोटी और पानी से किया था?

१४ और अब आप कह रहे हैं, जाकर अपने प्रभु को बता दो भई, देखो एलिया यहाँ है: और वो तो मुझे मार ही डालेगा जी!

१५ और एलिया ने कहा, सेनाओं के प्रभु के जीते जी, जिनके सम्मुख मैं खड़ा हूँ, मैं अवश्य ही इस दिन स्वयं को उसे दिखलाऊँगा।

१६ तो ओबदिया अहाब से भेंट करने चला गया, और उसे बता दिया: और अहाब एलिया से भेंट करने चल दिया।

१७ और यह होने को आया, जब अहाब ने एलिया को देखा, तो अहाब ने उस से कहा, भई क्या तुम वही हो जो इस्राएल को विचलित कर रहा है?

१८ और उसने उत्तर दिया, मैंने इस्राएल को विचलित नहीं किया है; बल्कि तुमने, और तुम्हारे पिता के घराने ने, कि तुमने प्रभु के आदेशों को त्याग दिया है, और तुम बअलिम के पीछे-पीछे लग चले हो। 

१९ इसलिए अब भिजवाकर समस्त इस्राएल को, और बअल के चार सौ पचास पैग़म्बरों को, और उपवनों के चार सौ पैग़म्बरों को, जो इज़्बल की मेज़ पर खाते हैं, मेरे पास करमल पहाड़ तक एकत्रित कर दो।

२० तो अहाब ने इस्राएल के समस्त सन्तानों के पास भिजवाकर, करमल पहाड़ तक एक साथ पैग़म्बरों को एकत्रित कर दिया।

२१ और एलिया ने उन समस्त लोगों के पास पहूँच कर कहा, दो मान्यताओं के बीच तुम कब तक लंगड़ाते रहोगे भई? यदि प्रभु ईश्वर हैं, तो उन्हीं का अनुसरण करो: परन्तु यदि बअल, तो उसका अनुसरण कर लो। और उन लोगों ने तो भई उसे एक भी शब्द कैसा होता है, उत्तर में नहीं दिया। 

२२ तब एलिया ने लोगों से कहा, मैं, यहाँ तक कि केवल मैं ही प्रभु का एक पैग़म्बर बचा रह गया हूँ; परन्तु बअल के पैग़म्बर तो चार सौ पचास आदमी हैं!

२३ इसलिए उन्हें हमें दो साँड दे देने दो; और उन्हें अपने लिए एक साँड चुन लेने दो, और उसे टुकड़ों-टुकड़ों में काट कर, और उसे लकड़ी पर लिटा देने दो, और उसके नीचे कोई आग मत लगाना: और भई मैं उस दूसरे साँड को तैयार कर कर, उसे लकड़ी पर लिटाऊँगा, और कोई आग नीचे नहीं लगाऊँगा:

२४ और तुम अपने इश्वरों के नाम का आह्वान करना, और मैं प्रभु के नाम का आह्वान करूँगा: और वो ईश्वर जो अग्नी से उत्तर देता है, उन्हीं को ही ईश्वर रहने देना। और सभी लोगों ने उत्तर दिया और कहा, ये तो भई भली बात बनी।

२५ और एलिया ने बअल के पैग़म्बरों से कहा, अपने स्वयं के लिए एक साँड चुन लो, और उसे पहले तैयार कर दो; क्योंकि तुम तो बहुत सारे हो; और अपने इश्वरों के नाम का आह्वान करलो, लेकिन नीचे कोई आग मत लगाना।

२६ और उन्होंने उस साँड को लेकर जो उन्हें दिया गया था तैयार किया, और प्रातः से लेकर दोपहर तक भी बअल के नाम का आह्वान करते रहे, कहते हुए, बअल, सुन लो हमें। परन्तु कोई भी वाणी नहीं थी, ही किसी ने भी उत्तर दिया। और उन्होंने उस बनाई गई बलिवेदी पर छलाँगें मारी।

२७ और दोपहर के समय यह होने को आया कि एलिया ने उनका व्यंग किया और कहा, तीव्रता से चीखो भई: क्योंकि वो तो कोई ईश्वर है: भई या तो वो बात-चीत कर रहा होगा, या वो पीछा कर रहा होगा, या वो किसी यात्रा पर होगा, या मान को कि भई कहिं वो सो रहा होगा, और उसे अवश्य ही जगाना पड़ेगा!

२८ और वो तीव्रता से चीखते रहे, और अपनी रीतियोंनुसार स्वयं को चाकुओं और छुरियों से चीरते-काटते रहे, जब तक कि उन पर लहू बहता चला गया।

२९ और यह होने को आया कि जब दोपहर बीत चुकी थी, और वो संध्या की बलि के समय तक प्रेरित-उपदेश देते रहे, कि तो ही कोई वाणी आई, ही उत्तर देने वाला कोई, ही कोई परवाह करने वाला। 

३० और एलिया ने सभी लोगों से कहा, मेरे पास निकट जाओ। और सभी लोग उसके पास निकट पहुँचे। और उसने प्रभु की उस बलिवेदी की मरम्मत की जो तोड़ दी गई थी।

३१ और एलिया ने याकूब के बेटों की प्रजातियोंनुसार बारह पत्थर लिए, जिसके पास प्रभु के शब्द आए थे, कहते हुए, तुम्हारा नाम इस्राएल होगा:  

३२ और उन पत्थरों से उसने प्रभु के नाम में एक बलिवेदी का निर्माण कर दिया: और उसने उस बलिवेदी के चारों ओर इतना बड़ा एक गड्ढा खोद दिया जिस में बीज के दो माप समा जाएँ।

३३ और उसने उस लकड़ी को व्यवस्थित कर दिया, और उस साँड को टुकड़ों में काट कर उसे उस लकड़ी पर लिटा दिया, और कहा, पानी से चार घड़े भर कर इस जले-चढ़ावे पर और इस लकड़ी पर उँडेल दो।

३४ और उसने कहा, यह दोबारा कर दो। और उन्होंने वो दोबारा कर दिया। और उसने कहा, यही तीसरी बार कर दो। और उन्होंने यह तीसरी बार कर दिया।

३५ और उस पानी ने उस बलिवेदी के चारों ओर बह कर उस गड्ढे को भी पानी से भर दिया।

३६ और संध्या की बली के चढ़ावे के समय यह होने को आया, कि पैग़म्बर एलिया ने निकट आकर कहा, अब्राहम, इसहाक, और इस्राएल के प्रभु ईश्वर, यह आज ही के दिन जानकारी प्राप्त हो जाए कि आप ही इस्राएल में ईश्वर हैं, और कि मैं आपका सेवक हूँ, और कि मैंने आप ही के शब्द पर यह समस्त कार्य कर दिए हैं जी।

३७ हे प्रभु, श्रवण कर लें मेरा जी, ताकि यह लोग जान जाएँ कि आप ही प्रभु ईश्वर हैं, और कि आप ही ने इनके हृदय को पुनः वापस मोड़ दिया है।

३८ तब प्रभु की अग्नी ने गिर कर उस जले-चढ़ावे का, और उस लकड़ी का, और उन पत्थरों का, और धूल का भक्षण कर डाला, और उस पानी को चाट डाला जो उस गड्ढे में था।

३९ और जब उन सभी लोगों ने यह देखा, तो वो अपने चेहरों के बल गिर पड़े: और उन्होंने कहा, प्रभु ही, वही ईश्वर हैं; प्रभु ही, वही ईश्वर हैं।

४० और एलिया ने उनसे कहा, बअल के पैग़म्बरों को पकड़ लो; उन में से एक भी भाग पाए। और वो उन्हें ले आए: और एलिया उन्हें नीचे किशोन बड़ी तक ले आया, और उन्हें वहीं मार डाला।

४१ और एलिया ने अहाब से कहा, तुम उठ जाओ भई, खा लो और पी लो; क्योंकि वर्षा की आधिक्यता की ध्वनि मच रही है।

४२ तो अहाब खाने-पीने ऊपर चल दिया। और एलिया ने करमल की चोटी तक ऊपर चढ़ाई कर ली; और धरती पर स्वयं को पटक कर, अपने चहरे को अपने घुटनों के बीच रख कर,

४३ अपने सेवक से कहा, अभी ही ऊपर जाकर, समुद्र की ओर देखते रहो। और वो ऊपर चला गया, और देखता रहा, और कहा, कुछ भी नहीं हो रहा है जी। और उसने कहा, पुनः सात बार जाते रहो।

४४ और यह होने को आया कि सातवीं बार उसने कहा, देखें जी, समुद्र में से एक छोटा सा मेघ एक पुरुष की हथेली समान बाहर उठ रहा है। और उसने कहा, ऊपर जाकर, अहाब से कह दो, अपने रथ को तैयार कर लें जी, और आप नीचे जाएँ, ताकि वर्षा आपको रोके।

४५ और इसी बीच यह होने को आया, कि आकाश मेघों और वायु से काला हो उठा, और बहुत ही भारी वर्षा गिरी। और अहाब सवारी करता-करता यज़रील चला गया।

४६ और प्रभु का हाथ एलिया पर था; और उसने अपनी कमर कसी, और अहाब के सामने-सामने यज़रील के प्रवेश तक भागता चला गया।



उन्नीसवाँ अध्याय।


और अहाब ने इज़्बल को वो सब कुछ बता दिया जो एलिया ने किया था, और कि उसने कैसे-कैसे तलवार से सभी पैग़म्बरों को मार डाला था।

तब इज़्बल ने एलिया के पास एक दूत भेजा, कहता हुआ, इश्वरों को मेरे साथ ये, और और भी अधिक कर डालने दो भई, यदि मैं तेरे जीवन को उन में से एक के जीवन जैसा नहीं बना देती कल लगभग इसी समय तक ही।

और जब उसने ये देखा, तो वो उठ कर अपने जीवन के वास्ते चला गया, और बेएरशबा पहुँचा जो यहूदा का है, और अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया।

परन्तु वो स्वयं एक दिन की यात्रा करता-करता जँगली-क्षेत्र में चला गया, और एक झाऊ के पेड़ तले आकर नीचे बैठ गया: और उसने अपने स्वयं के लिए यह अनुरोध किया कि वो मर जाए; और कहा, जी बहुत हो गया; अब हे प्रभु, मेरा जीवन ले लें; चूँकि मैं अपने पित्रों से बेहतर नहीं हूँ।

और जैसे वो एक झाऊ के पेड़ तले लेट कर सोता ही रहा, देखो तो, तब एक दूत ने उसका स्पर्श किया और उस से कहा, भई उठ जाओ और खा लो।

और उसने देखा, और देखो तो, कोयलों पर पका हुआ एक पराँठा, और पानी की एक सुराही उसके सर के सिरहाने। और उसने खाया और पीया, और स्वयं पुनः नीचे लेट गया।

और प्रभु-दूत ने पुनः दूसरी बार आकर उसका स्पर्श किया और कहा, भई उठ जाओ और खा लो, क्योंकि तुम्हारे लिए यात्रा बहुत ही लम्बी है।

और उसने उठ कर खाया और पीया, और उस भोजन की शक्ती में चालीस दिन और चालीस रात ईश्वर के पहाड़ होरेब तक चलता गया।

और वो वहीं एक गुफा में पहुँचा, और वहीं बस गया; और देखो तो, प्रभु के शब्द उसके पास आए, और उन्होंने उस से कहा, एलिया तुम यहाँ क्या कर रहे हो भई? 

१० और उसने कहा, मैं सेनाओं के प्रभु ईश्वर के प्रति बहुत ही जोश भरा रहा हूँ: क्योंकि इस्राएल की सन्तानों ने आपके प्रतिज्ञा-पत्र का त्याग कर दिया है, आपकी बलिवेदियों को नीचे गिरा डाला है, और आपके पैग़म्बरों को तलवार से मार डाला है; और मैं, केवल मैं ही बचा रह गया हूँ जी; और वो मेरे जीवन के पीछे पड़े हुए हैं, उसे ले लेने हेतु।

११ और उन्होंने कहा, आगे जाकर प्रभु के समक्ष पहाड़ पर खड़े हो जाओ। और देखो तो, प्रभु पास से ही चलते चले गए, और एक विशाल और शक्तिशाली वायु ने उन पर्वतों को फाड़ डाला, और चट्टानों को टुकड़ों-टुकड़ों में प्रभु के समक्ष तोड़ डाला; परन्तु प्रभु उस वायु में नहीं थे: और उस वायु के पश्चात एक भूकम्प; परन्तु प्रभु उस भूकम्प में नहीं थे:

१२ और उस भूकम्प के पश्चात एक अग्नी; परन्तु प्रभु उस अग्नी में नहीं थे: और उस अग्नी के पश्चात एक शान्त-धीमी सी वाणी।

१३ और यह ऐसा हुआ कि जब एलिया ने उसे सुना, कि उसने अपने चहरे को अपने चौगे में लपेटा, और बाहर चला गया, और उस गुफा के प्रवेश में खड़ा हो गया। और देखो तो, उसके पास एक वाणी आई, और कहा, एलिया तुम यहाँ क्या कर रहे हो भई? 

१४ और उसने कहा, मैं सेनाओं के प्रभु ईश्वर के प्रति बहुत ही जोश भरा रहा हूँ: क्योंकि इस्राएल की सन्तानों ने आपके प्रतिज्ञा-पत्र का त्याग कर दिया है, आपकी बलिवेदियों को नीचे गिरा डाला है, और आपके पैग़म्बरों को तलवार से मार डाला है; और मैं, केवल मैं ही बचा रह गया हूँ जी; और वो मेरे जीवन के पीछे पड़े हुए हैं, उसे ले लेने हेतु।

१५ और प्रभु ने उस से कहा, चले जाओ, अपने पथ पर दमिश्क के जँगली-क्षेत्र वापस चले जाओ: और जब तुम पहुँचोगे, हज़ेल को सिरीया पर राजा अभिषिक्त कर दोगे:

१६ और निम्शी के बेटे येहू को तुम इस्राएल के ऊपर राजा अभिषिक्त कर दोगे: और एबलमहोला वाले शफट के बेटे एलीशा को तुम अपने स्थान में पैग़म्बर अभिषिक्त कर दोगे।

१७ और यह होने को आएगा, कि उसे जो हज़ेल की तलवार से बच निकलेगा येहू मार डालेगा: और उसे जो येहू की तलवार से बच निकलेगा एलीशा मार डाल देगा।

१८ तथापी मैंने स्वयं के लिए इस्राएल में सात हज़ार बचाए हुए हैं, वो सभी घुटने जो बअल के प्रति नहीं टिके हैं, और वो प्रत्येक मूँह जिस ने उसे चूमा नहीं है।

१९ तो उसने वहाँ से प्रस्थान कर लिया, और शफट के बेटे एलीशा को पाया, जो अपने आगे-आगे सांडों के बारह जुओं से जुताई कर रहा था, और वो उस बारहवें के साथ था: और एलिया उसके पास से चलता गया, और उस पर अपना चौगा पटक दिया।

२० और वो उन सांडों को छोड़ कर एलिया के पीछे-पीछे भाग पड़ा, और कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे जी, मुझे मेरे पिता और मेरी माता को चूम लेने दें, और मैं आपके पीछे-पीछे लग जाऊँगा। और उसने उस से कहा, पुनः वापस चले जाओ: चूँकि भई मैंने क्या कर दिया है है तुम्हारे साथ?

२१ और वह उस से वापस लौट आया, और सांडों के एक जुए को लेकर उन्हें मार डाला, और उनके माँस को सांडों के उपकरणों से उबाल दिया, और लोगों को दे दिया, और उन्होंने खा लिया। तब वो उठ के एलिया के पीछे-पीछे लग गया, और उसकी सेवा की।




बीसवाँ अध्याय।


और सिरीया के राज बेनहदद ने अपनी समस्त सेना एक साथ एकत्रित कर ली: और उसके साथ बत्तीस राजा, और घोड़े, और रथ थे: और उसने ऊपर जाकर समैरिया पर घेराबन्दी डाल दी, और उसके विरुद्ध लड़ाई की।

और उसने इस्राएल के राजा अहाब के पास नगर में दूत भेजे, और उस से कहा, इस प्रकार कहते हैं बेनहदद,

तुम्हारी चाँदी और तुम्हारा सोना मेरा है; तुम्हारी पत्नियाँ भी और तुम्हारे बच्चे, सबसे अच्छे ही, मेरे हैं।

और इस्राएल के राजा ने उत्तर दिया और कहा, मेरे प्रभु, हे राजा, तुम्हारे ही कथनानुसार मैं तुम्हारा ही हूँ जी, और वो सब कुछ जो मेरे पास है।

और वो दूत पुनः पहुँचे, और कहा, इस प्रकार कहते हैं बेनहदद, कहते हुए, यद्यपि मैंने तुम्हारे पास भिजवाए, कहते हुए, तुम मुझे अपनी चाँदी, और अपना सोना, और अपनी पत्नियाँ, और अपने बच्चे प्रदान कर दोगे;

तद्यपि मैं अपने कर्मचारियों को तुम्हारे पास कल लगभग इस समय भेजूँगा, और वो तुम्हारे घर की खोज-बीन करेंगे, और तुम्हारे कर्मचारियों के घरों की; और यह होने को आएगा, कि जो कुछ भी तुम्हारी आँखों को सुहावना है, वो उसे अपने हाथों में रख कर उसे ले लेंगे।

तब इस्राएल के राजा ने भूमी के समस्त वृद्ध-गणों को बुलाकर कहा, भई ध्यान दे लो, मैं तुम से प्रार्थना करता हूँ, और देख लो कि यह आदमी कैसे हानी की अभिलाषा कर रहा है: क्योंकि इस ने मेरी पत्नियों के लिए, और मेरे बच्चों के लिए, और मेरी चाँदी के लिए, और मेरे सोने के लिए मेरे पास भिजवाए; और मैंने उसे अस्वीकार नहीं किया।

और समस्त वृद्धों और समस्त लोगों ने उस से कहा, सुनवाई मत दें उसे, ही सम्मति दें।

इस कारण उसने बनहदद के दूतों से कहा, भई मेरे प्रभु राजा को बता दो, वो सभी कुछ जिसके विषय में पहले आपने अपने नौकर को भिजवाया था मैं कर दूँगा जी: परन्तु ये कार्य मैं नहीं कर पाऊँगा। और उन दूतों ने प्रस्थान कर लिया, और उसे पुनः शब्द ले आए।

१० और बेनहदद ने उसके पास भिजवाए, और कहा, इश्वर-गण मेरे साथ ऐसा-वैसा, और और भी अधिक कर दें, यदि समैरिया की धूल-मिट्टी से भरी मुट्ठियाँ भी उन सभी के लिए पर्याप्त रह जाएँ जो मेरा अनुसरण करते हैं।

११ और इस्राएल के राजा ने उत्तर दिया और कहा, बता दो उसे, वो जो अपना कवच कसता है वैसे डींगें मारे जैसे वो जो उसे ढीला करता है।

१२ और यह होने को आया, जब उसने यह संदेश सुना, जैसे वो पी-पा रहा था, वो और वो राजा मण्डपों में ही, कि उसने अपने कर्मचारियों से कहा, स्वयं को व्यूह में रचा लो भई। और उन्होंने स्वयं को नगर के विरुद्ध व्यूह में रचा लिया।

१३ और देखो तो, इस्राएल के राजा अहाब के पास एक पैग़म्बर आया कहता हुआ, प्रभु इस प्रकार कह रहें हैं, भई क्या तुमने इस समस्त विशाल जनौघ को देख लिया है क्या? देख लो, मैं इसे तुम्हारे हाथ में इसी दिन प्रदान कर दूँगा; और तुम जान जाओगे कि मैं ही प्रभु हूँ।

१४ और अहाब ने कहा, किसके हाथों? और उसने कहा, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, प्रान्तों के मुखियाओं के युवकों ही के हाथों। तब उसने कहा, रण का आदेश कौन देगा जी? और उसने कहा, तुम।

१५ तब उसने प्रान्तों के मुखियाओं के युवकों की गिनती की, और वो दो सौ बत्तीस थे: और उनके पश्चात उसने सभी लोगों की गिनती की, इस्राएल के समस्त सन्तानों की ही, सात हज़ार होते हुए।

१६ और वो दोपहर के समय आगे बाहर निकल पड़े। परन्तु बेनहदद मण्डपों में स्वयं को पीता-पाता धुत कर रहा था, वो और वो राजा, वही बत्तीस राजा जो उसकी सहायता कर रहे थे।

१७ और उन प्रान्तों के मुखियाओं के युवक पहले बाहर निकल पड़े; और बेनहदद ने बाहर भेजे, और उन्होंने उसे बताया, कहते हुए, समैरिया में से बाहर आदमी निकल आए हैं।

१८ और उसने कहा, भले वो बाहर शान्ति के लिए निकले हैं, उन्हें जीवित पकड़ लो; या भले ही वो बाहर युद्ध करने निकल पड़े हैं, उन्हें जीवित ही पकड़ लो।

१९ तो प्रान्तों के मुखियाओं के ये युवक नगर में से बाहर निकल आए, और वो सेना जो उनके पीछे-पीछे रही थी।

२० और उन्होंने हर एक ने अपने आदमी को मार डाला: और वो सिरीयावासी भग लिए; और इस्राएल उनके पीछे पड़ गया: और सिरीया का राजा बेनहदद अपने घुड़सवारों के साथ ही एक घोड़े पर भग लिया।

२१ और इस्राएल का राजा बाहर निकल पड़ा, और उन घोड़ों और रथों को आघातित कर डाला, और उन सिरीयावासियों को एक महा संहार से मार डाला।

२२ और वो पैग़म्बर इस्राएल के राजा के पास आया, और उस से कहा, जाओ और स्वयं को सशक्त कर लो भई, और ध्यान से देख लो कि तुम क्या कर रहे हो: क्योंकि साल की वापसी पर ही सिरीया का राजा तुम्हारे विरुद्ध चढ़ाई कर बैठेगा। 

२३ और सिरीया के राजा के सेवकों ने उस से कहा, जी उनके ईश्वर तो पहाड़ियों के ईश्वर हैं; इसलिए वो हम से अधिक शक्तिशाली थे; परन्तु हम उनके विरुद्ध समतल मैदान में लड़ाई करेंगे, और अवश्य ही हम उनसे अधिक शक्तिशाली ठहरेंगे।

२४ और यह कार्य करें जी, उन राजाओं को तो हटा दें, हर आदमी को उसके पद से, और उनके स्थानों पर कप्तानों को लगा दें: 

२५ और आप एक सेना को गिन लें, उसी सेना के जैसी जो आप खो चुके हैं, घोड़े के लिए घोड़ा, और रथ के लिए रथ: और हम उनके विरुद्ध समतल मैदान में लड़ाई करेंगे, और हम अवश्य ही उनसे अधिक शक्तिशाली ठहरेंगे। और उसने उनकी वाणी का श्रवण कर लिया, और वैसा ही कर दिया।

२६ और साल की वापसी पर यह होने को आया, कि बेनहदद ने उन सिरीयावासियों की गिनती की, और इस्राएल के विरुद्ध लड़ाई करने हेतु अफक तक चढ़ाई कर दी।

२७ और इस्राएल की सन्तानों की गिनती कर ली गई थी, और वो सभी प्रस्तुत थे, और उनके विरुद्ध चल पड़े: और इस्राएल की सन्तानों ने उनके समक्ष हलवानों के दो छोटे-छोटे झुण्डों के समान पड़ाव डाल दिया; परन्तु उन सिरीयावासियों ने तो धरती ही भर दी थी!

२८ और ईश्वर के एक बन्दे ने आकर इस्राएल के राजा से बोलकर कहा, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, चूँकि इन सिरियावासियों ने कहा है कि भई प्रभु तो पहाड़ियों के ईश्वर हैं, लेकिन घाटियों के ईश्वर नहीं हैं, इसलिए मैं तुम्हारे हाथ में यह सारा विशाल जनौघ प्रदान कर दूँगा, और तुम जान लोगे कि मैं ही प्रभु हूँ।  

२९ और उन्होंने सात दिनो तक एक ने दूसरे के विपरीत पड़ाव डाले रखा। और तो भई ये ऐसा था, कि सातवें दिन में वो संग्राम भिड़ गया: और इस्राएल की सन्तानों ने एक ही दिन में उन सिरियावासियों में से एक लाख पैदल-सैनिकों का वध कर डाला।

३० परन्तु वो शेष बचे-कुचे अफक तक भग लिए, नगर के अन्दर ही; और वहीं एक दीवार उन शेष बचे-कुचे सत्ताईस हज़ार आदमियों पर गिर पड़ी। और बेनहदद भग लिया भई, और नगर में घुस गया, एक भीतरी कक्ष में ही।

३१ और उसके कर्मचारियों ने उस से कहा, अब देख लें जी, हमने तो सुना है कि इस्राएल के घराने के राजा दयालु राजा होते हैं जी: मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे कि हम अपनी कटियों पर टाट-वस्त्र, और अपने सरों पर रस्से कस लें, और इस्राएल के राजा के पास बाहर निकल चलें: मान लें कि वो आपका जीवन बचा ले।

३२ तो भई उन्होंने अपनी कमरों पर टाट-वस्त्र कस लिया, और अपने सरों पर रस्से, और इस्राएल के राजा के पास गए और कहा, जी आपका नौकर बेनहदद काह रहा है, मैं जी प्रार्थना करता हूँ आपसे, मुझे जीवित रह लेने दें जी। और उसने कहा, क्या वो अभी तक भी जीवित है क्या? भई वो तो मेरा भाई है!

३३ अब उन लोगों ने इसे एक संकेत समझ कर शीघ्रता से ही उस से ये बात पकड़ ली: और उन्होंने कहा, जी आपका ही भाई बेनहदद! तब उसने कहा, तुम जाकर ले आओ उसे भई। तब बेनहदद उसके पास आगे गया; और उसने उसे ऊपर रथ में चढ़वा दिया।

३४ और बेनहदद ने उस से कहा, जी वो नगर जो मेरे पिता ने आपके पिता से ले लिए थे मैं वापस कर दूँगा; और आप अपने लिए ही दमिश्क में सड़कें बना लें, जैसे मेरे पिता ने समैरिया में बनाईं थीं जी। तब उसने कहा, मैं तुम्हें इसी प्रतिज्ञा-पत्र से छोड़ूँगा भई। तो उसने उसके साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र स्थापित कर दिया, और उसे छोड़ दिया।

३५ और पैग़म्बरों के बेटों में से किसी एक आदमी ने अपने साथी से प्रभु के शब्द में कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे कि पीट दो मुझे। और उस आदमी ने उसे पीट डालना अस्वीकार कर दिया।

३६ तब उसने उस से कहा, क्योंकि तुमने प्रभु की वाणी का आज्ञा पालन नहीं किया है, देख लो भई, मुझ से प्रस्थान करते ही एक शेर तुम्हें मार डालेगा। और उसके उस के पास से प्रस्थान करते ही एक शेर ने उसे पाकर उसे मार डाला।

३७ तब उसने किसी अन्य पुरुष को पाकर कहा, भई मुझे पीट डालो, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे। और भई उस आदमी ने उसे पीट डाला, कि उसकी पिटाई करते-करते उसने उसे घायल कर दिया।

३८ तो उस पैग़म्बर ने प्रस्थान कर लिया, और स्वयं का अपने चहरे पर राखें मल कर भेष परिवर्तित कर, पथ के साथ ही राजा की प्रतीक्ष करने लगा।

३९ और जैसे-जैसे राजा चलता चला जा रहा था, वो राजा को चीखा: और उसने कहा, जी आपका नौकर संग्राम के बीच में ही आगे निकल पड़ा; और देखें एक आदमी परे मुड़ कर मेरे पास एक आदमी को ले अया और कहा, इस आदमी को सुरक्षित रख लो: यदि किसी भी प्रकार ही यह खो जाए, तब तुम्हारा जीवन इसके जीवन के बदले होगा, अन्यथा तुम चाँदी का एक तलनतन भार भर दोगे।

४० और जैसे आपका नौकर इधर-उधर व्यस्त था, वो तो जा चुका था जी। और इस्राएल के राजा ने उस से कहा, इसी प्रकार ही तेरा न्याय किया जाएगा; तूने ही निर्णय कर दिया है भई।

४१ और उसने फुर्ती से अपने चहरे पर से वो राखें हटा दीं; और इस्राएल के राजा ने उसे पहचान लिया कि भई वो तो पैग़म्बरों में से ही था!

४२ और उसने उस से कहा, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, चूँकि तूने अपने ही हाथ से उस आदमी को छोड़ दिया जिसे मैंने पूर्णता से ही विनाश के लिए नियुक्त कर डाला था, इसलिए तेरा ही जीवन उसके जीवन के बदले चला जाएगा, और तेरे ही लोग उसके लोगों के बदले।

४३ और इस्राएल का राजा अपने ही घर दुखी रूठा हुआ चलता चला गया, और समैरिया पहुँचा। 





इक्कीसवाँ अध्याय।


और इन घटनाओं के पश्चात ये होने को आया, कि उस यज़रीलवासी नबोत के पास एक अंगूर-खेत था जो यज़रील में ही था, समैरिया के राजा अहाब के महल के साथ ही सटा हुआ। 

और अहाब नबोत से बोला, कहता हुआ, भई अपना अंगूर का खेत मुझे दे दे, ताकि मैं उसे अपने पास हरी-भरी वनस्पति हेतु एक उद्यान रख लूँ, क्योंकि वो मेरे घर के निकट ही तो है: और मैं तुझे उसके लिए उस से भी बेहतर एक अंगूर-खेत दे दूँगा; या फिर यदि तुझे भला लगे, मैं तुझे उसका मोल पैसे में भर दूँगा।

और नबोत ने अहाब से कहा, प्रभु मुझ से ये होने से रोक दें, कि मैं अपने पित्रों की विरासत आपको प्रदान कर दूँ।

और अहाब उस शब्द के कारण जो उस यज़रीलवासी नबोत ने उस से बोल दिया था अपने घर दुखी और रूठा हुआ पधारा: क्योंकि उसने कह दिया था, मैं आपको अपने पित्रों की विरासत नहीं दूँगा। और उसने अपने बिस्तर पर स्वयं नीचे लेट कर अपना चेहरा परे मोड़ लिया, और कोई रोटी नहीं खाई।

परन्तु इज़्बल उसकी पत्नी उसके पास आई और उस से कहा, आपकी भावात्मा इतनी दुखी क्यों है जी कि आप कोई रोटी ही नहीं खा रहे हैं?

और वो उस से बोला, क्योंकि मैंने उस यज़रीलवासी नबोत से बोल कर उस से कहा था, मुझे अपना अंगूर-खेत पैसे के लिए दे दे; अथ्वा यदि तुझे ये प्रसन्न करे, मैं तुझे इसके स्थान में कोई और अंगूर-खेत दे दूँगा: और उसने उत्तर दिया, मैं आपको अपना अंगूर-खेत नहीं दूँगा।

और इज़्बल उसकी पत्नी ने उस से कहा, जी क्या आप अभी इस्राएल के राज्य पर राजा हैं क्या? उठें और रोटी खा लें, और मन-प्रसन्न हो जाएँ: मैं ही आपको उस यज़रीलवासी नबोत का अंगूर-खेत प्रदान कर दूँगी।

तो उसने अहाब के नाम से पत्र लिख कर उन्हें उसकी मुहर से मुहरबंद कर दिया, और उन पत्रों को उन वृद्धों और उन ठाकुरों को भेज दिया जो उसके नगर में थे, नबोत के साथ निवास करते हुए।

और उसने उन पत्रों में लिखा, कहती हुई, एक उपवास की घोषणा कर दो, और नबोत को लोगों के बीच सर पर बैठा दो:

१० और दो आदमियों को, बलियल के बेटों को ही उसके समक्ष स्थित कर देना, उसके विरुद्ध साक्ष्य देने हेतु, कहते हुए, भई तूने तो ईश्वर की और राजा की निंदा कर दी है। और तब उसे उठाकर बाहर ले जाना और उस पर पथराव कर देना ताकि वो मर जाए।

११ और नगर के उन जनों ने, उन वृद्धों और ठाकुरों ने ही जो उसके नगर के निवासी थे, वैसा कर दिया जैसा इज़्बल ने उन्हें भिजवाया था, और जैसा उन पत्रों में लिखा हुआ था जो उसने उन्हें भेजे थे।

१२ उन्होंने एक उपवास की घोषणा की, और नबोत को लोगों के बीच सर पर बिठा दिया।

१३ और भीतर दो आदमी आए, बलियल की सन्तानें ही और उसके समक्ष जा बैठे: और उन बलियल के आदमियों ने उसके विरुद्ध साक्ष्य दिया, नबोत के विरुद्ध ही, लोगों की उपस्थिति में, कहते हुए, भई नबोत ने तो ईश्वर की और राजा की निंदा कर दी है। तब वो उसे उठाकर नगर के बाहर ले गए, और उस पर पत्थरों से पथराव कर डाला, कि वो मर गया।

१४ तब उन्होंने इज़्बल को भिजवा दिया, कहते हुए, नबोत पर पथराव कर दिया जा चुका है, और वो मर गया है।

१५ और यह होने को आया, जब इज़्बल ने सुना की नबोत पर पथराव कर दिया जा चुका था, और कि वो मर चुका था, कि इज़्बल ने अहाब से कहा, उठें जी, उस यज़रीलवासी नबोत के अंगूर-खेत पर अधिकार जमा लें, जिसे उसने पैसे के लिए आपको दे देने हेतु अस्वीकार कर दिया था: क्योंकि नबोत जीवित नहीं है, बल्कि मर चुका है।

१६ और यह होने को अया, जब अहाब ने सुना कि नबोत मर चुका था, कि अहाब उठा उस यज़रीलवासी नबोत के अंगूर-खेत तक जाने हेतु, उस पर अधिकार जमाने के लिए।

१७ और प्रभु के शब्द एलिया उस तिश्बी के पास पहुँचे, कहते हुए,

१८ उठो, नीचे चले जाओ इस्राएल के राजा अहाब से मिलने, जो समैरिया में है: देखो तो, वो नबोत के अंगूर-खेत में है, जहाँ वो उस पर अधिकार जमाने गया हुआ है।

१९ और तुम उस से बोलोगे, कहते हुए, प्रभु इस प्रकार कहते हैं, क्या तूने मार डाल दिया है और अधिकार भी जमा लिया है भई? और तुम उस से बोलोगे, कहते हुए, इस प्रकार प्रभु कहते हैं, उस स्थान में जहाँ कुत्तों ने नबोत के रक्त को चाटा, कुत्ते तेरा रक्त चाटेंगे, तेरा ही।

२० और अहाब ने एलिया से कहा, अरे मेरे शत्रु, क्या तुमने ढूँढ लिया है मुझे? और उसने उत्तर दिया, मैंने ढूँढ लिया है तुझे: क्योंकि तू प्रभु की दृष्टि में बुराई कर डालने के लिए स्वयं को बेच खा गया है। 

२१ देख ले, मैं तुझ पर बुराई ले आऊँगा, और तेरे वंश को परे हटा डालूँगा, और अहाब से उसे परे काट डालूँगा जो दीवार पर मूतता है, और उसे जो इस्राएल में बन्धा हुआ है, और जो छूटा हुआ है,

२२ और तेरे घराने को नेबत के बेटे यरोबोम के घराने समान बना डालूँगा, और अहिया के बेटे बशा के घराने समान ही, उस उत्तेजना के कारण जिस से तूने मुझे क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया है, और इस्राएल से पाप करवा डाला है।

२३ और इज़्बल के विषय में प्रभु बोले, कहते हुए, यज़रील की दीवार पर ही कुत्ते इज़्बल को खा जाएँगे।

२४ वो अहाब वाला जो नगर में मरता है कुत्ते उसे खा जाएँगे; और वो जो खेत में मर जाता है पवन के पंछी खा जाएँगे।

२५ परन्तु ऐसा कोई भी अहाब जैसा थे, जिस ने प्रभु की दृष्टि में दुष्टता क्रियान्वित कर देने हेतु स्वयं को बेच खाया था, जिसे इज़्बल उसकी पत्नी उत्तेजित किया करती थी। 

२६ और वो बहुत ही अति-घृणितता किया करता था मूर्तीयों के पीछे-पीछे पड़ा हुआ, उन सभी कार्योंनुसार जो वो एमोरवासी किया करते थे, जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष बाहर खदेड़ डाला था।

२७ और यह होने को आया, जब अहाब ने यह शब्द सुने, तो उसने अपने कपड़े फाड़ डाले, और अपने देह पर टाट-वस्त्र धारण कर लिया, और उपवास रखा, और टाट-वस्त्र में लेटता था, और धीमे-धीमे चलता था।

२८ और प्रभु के शब्द एलिया उस तिश्बी के पास पहुँचे, कहते हुए,

२९ भई देख रहे हो तुम कि अहाब मेरे सामने कैसे स्वयं को विनम्र बना रहा है? चूँकि वो स्वयं को मेरे सामने विनम्र कर रहा है, मैं उस बुराई को इसके दिनो में नहीं लाऊँगा: बल्कि इसके बेटे के दिनो में में इसके घराने पर बुराई डाल दूँगा।



बाईसवाँ अध्याय।


और वो तीन वर्ष सिरिया और इस्राएल के बीच बिना युद्ध-रण के रहते रहे।

और यह तीसरे वर्ष में होने को आया, कि यहूदा का राजा यहोशाफट इस्राएल के राजा के पास नीचे पहुँचा।

और इस्राएल के राजा ने अपने नौकरों से कहा, तुम जानते हो क्या कि गिलद में रमोथ हमारा है, और हम तो चुप-चाप ही हैं, और उसे सिरिया के राजा के हाथ में से बाहर नहीं निकाल रहे हैं भई?

और उसने यहोशाफट से कहा, क्या तुम मेरे साथ रमोथगिलद का युद्ध करने जाओगे क्या? और यहोशाफट ने इस्राएल के राजा से कहा, जैसे तुम हो मैं वैसा ही हूँ, मेरे लोग तुम्हारे लोगों जैसे, मेरे घोड़े तुम्हारे घोड़ों जैसे।

और यहोशाफट ने इस्राएल के राजा से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से कि आज प्रभु के शब्द पर पूछ-ताछ कर लो।

तब इस्राएल के राजा ने पैग़म्बरों को एक साथ एकत्रित कर लिया, लगभग चार सौ आदमी, और उनसे कहा, क्या मैं रमोथगिलद के विरुद्ध युद्ध करने जाऊँ या मैं रुका रहूँ? और उन्होंने कहा, चढ़ाई कर लें जी; क्योंकि प्रभु उसे आपके हाथ में प्रदान कर देंगे।

और यहोशाफट ने कहा, इनके अतिरिक्त क्या यहाँ कोई प्रभु का एक पैग़म्बर नहीं है क्या, ताकि हम उस से पूछ-ताछ कर लें?

और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, एक आदमी अभी भी है भई, इम्ला का बेटा मिकाया, जिस से कि हम प्रभु से पूछ-ताछ कर सकते हैं: परन्तु मैं तो उस से घृणा करता हूँ; क्योंकि वो मेरे समबन्ध में अच्छाई वाला प्रेरित-उपदेश नहीं देता है, बल्कि बुराई वाला। और यहोशाफट ने कहा, राजा को ऐसे नहीं बोलना चाहिए।

तब इस्राएल के राजा ने एक अफ्सर को बुलवाया, और कहा, फुर्ती से इम्ला के बेटे मिकाया को यहाँ ले लाओ भई।

१० और इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशाफट अपने-अपने सिंहासन पर बैठे थे, अपने चौग़े धारण किए हुए, समैरिया के दरवाज़े के प्रवेश पर एक रिक्त स्थान में; और सभी पैग़म्बर उनके सामने प्रेरित-उपदेश दे रहे थे।

११ और कनेना के बेटे ज़देकिया ने अपने लिए लोहे के सींघ बना लिए थे: और उसने कहा, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, इन्हीं के साथ ही आप सिरिया-वालों को घोंप डालेंगे जब तक कि आप उन्हें समाप्त नहीं कर देते।

१२ और सभी पैग़म्बरों ने ऐसे ही प्रेरित-उपदेश दिए, कहते हुए, रमोथगिलद पर कर लें चढ़ाई और उन्नत हो जाएँ: चूँकि प्रभु उसे राजा के हाथ में प्रदान कर देंगे।

१३ और वो दूत जो मिकाया को बुलाने चला गया था उस से बोला, कहता हुआ, भई देख लो अब, पैग़म्बरों के शब्द एक ही मूँह से राजा के प्रती अच्छाई घोषित कर रहे हैं: मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, अपने शब्द को उन्हीं में से एक के जैसा ही बन जाने दो, और वो बोलो जो अच्छाई है।

१४ और मिकाया ने कहा, प्रभु के जीते जी, जो प्रभु मुझ से कहते हैं, वही मैं बोलूँगा।

१५ तो वो राजा के पास पहुँचा। और राजा ने उस से कहा, मिकाया, क्या हम रमोथगिलद के विरुद्ध युद्ध करने जाएँ क्या, या हम रुके रहें? और उसने उसे उत्तर दिया, जाओ भई और उन्नत हो जाओ: चूँकि प्रभु उसे राजा के हाथ में प्रदान कर देंगे।

१६ और राजा ने उस से कहा, भई कितनी बार मैं तुम्हें शपथ दिलवाऊँ कि तुम मुझे प्रभु के नाम में सत्य के सिवा और कुछ भी मत बताओ? 

१७ और उसने कहा, मैंने समस्त इस्राएल को पहाड़ियों पर तितर-बितर देखा, बिन चरवाहे के भेड़ों समान: और प्रभु ने कहा, इनके पास तो कोई भी मालिक नहीं है: इन्हें हर आदमी को अपने ही घर शांति से वापस लौट जाने दो। 

१८ और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, बोला नहीं था क्या मैंने तुम से कि ये मेरे समबन्ध में कोई भी अच्छाई का प्रेरित-उपदेश नहीं देगा, बल्कि बुराई का?

१९ और उसने कहा, इसलिए सुन लो प्रभु के शब्द को: मैंने प्रभु को उनके सिंहासन पर विराजमान देखा, और स्वर्ग की समस्त सेना उनके साथ खड़ी हुई उनके दाएँ हाथ पर और उनके बाएँ हाथ पर।

२० और प्रभु ने कहा, अहाब को कौन विश्वस्त कराएगा, ताकि वो रमोथगिलद पर चढ़ाई कर कर गिर जाए? और भई एक इस रीती से बोला, और कोई दूसरा किसी दूसरी रीती से बोला।

२१ और एक भावात्मा आगे बढ़ आया, और प्रभु के समक्ष खड़ा हो गया, और कहा, मैं उसे विश्वस्त कर दूँगा जी।

२२ और प्रभु ने उस से कहा, किस से भई? और उसने कहा, मैं आगे जाकर उसके सभी पैग़म्बरों के मूँह में एक झूठा-भावात्मा बन जाऊँगा। और उन्होंने कहा, तुम उसे विश्वस्त कर दोगे, और प्रबल भी ठहरोगे: चले जाओ, और ऐसा ही कर दो।

२३ अब इसलिए, देख लो भई, प्रभु ने तुम्हारे इन सभी पैग़म्बरों के मूँह में एक झूठा-भावात्मा डाल दिया है, और प्रभु ने तुम्हारे समबन्ध में बुराई बोल दी है।

२४ परन्तु कनेना के बेटे ज़देकिया ने निकट जाकर, मिकाया को गाल पर पीट डाला, और कहा, भई प्रभु का वो भावात्मा मुझ में से किस ओर गया तेरे साथ बोलने के लिए?

२५ और मिकाया ने कहा, देख ले, तू उस दिन देखेगा, जब तू छुप जाने के लिए एक भीतर-वाले कक्ष में चला जाएगा।

२६ और इस्राएल के राजा ने कहा, मिकाया को लेकर, इसे उठाकर वापस नगर के राज्यपाल अमोन के पास, और राजा के बेटे योअश के पास ले जाओ;

२७ और कहना, राजा इस प्रकार कह रहे हैं, इसे कारावास में डाल दो, और इसे व्यथा की रोटी से और व्यथा के पानी से खिलाना-पिलाना, जब तक कि मैं शान्ति से जाऊँ। 

२८ और मिकाया ने कहा, यदि तुम शान्ति से कतई भी वापस लौटते हो, तो प्रभु मुझ से नहीं बोले हैं। और उसने कहा, अरे लोगों सुन लो भई, तुम में से हर एक!

२९ तो इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशाफट रमोथगिलद पर चढ़ाई करने निकल पड़े।

३० और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, मैं स्वयं का भेष बदल लूँगा, और रण में घुस जाऊँगा; परन्तु तुम अपने ही वस्त्रों को धारण कर लो। और इस्राएल के राजा ने स्वयं का भेष बदल लिया, और रण में घुस गया।

३१ परन्तु सिरिया के राजा ने अपने रथों पर राज करने वाले उन बत्तीस कप्तानों को आदेश दिया, कहते हुए, छोटे के साथ ही बड़े के साथ लड़ाई करना, सिवाय इस्राएल के राजा के साथ ही।

३२ और यह होने को आया, जब उन रथों के कप्तानों ने यहोशाफट को देखा, तो उन्होंने कहा, भई ये तो अवश्य ही इस्राएल का राजा है। और वो उसकी ओर उसके विरुद्ध लड़ाई करने मुड़ गए: और यहोशाफट चीख पड़ा!

३३ और यह होने को आया, कि जब उन रथों के कप्तानों ने आभास किया कि वो तो इस्राएल का राजा नहीं था, तो वो उसका पीछा करने से वापस मुड़ चले।

३४ और किसी एक आदमी ने संयोग से एक धनुष खींच कर, इस्राएल के राजा पर उसके कवच के जोड़ों के बीचों-बीच ही वार कर डाला: इस कारण वश उसने अपने रथ के सारथी से कहा, अपना हाथ मोड़ कर मुझे सेना में से बाहर उठा ले जाओ; क्योंकि मैं तो घायल हो गया हूँ!

३५ और उस दिन युद्ध बढ़ता चला गया: और वो राजा अपने रथ में सिरियावासियों के विरुद्ध खड़ा रहा, और संध्या के समय मर गया: और घाव में से रक्त बाहर बहता चला गया रथ के बीचों-बीच ही।

३६ और सूर्यास्त के समय सेना के सर्वत्र में से ही एक घोषणा निकलती गई, कहती हुई, हर आदमी अपने नगर की ओर, और हर आदमी अपने देश की ओर।

३७ तो वो राजा मर गया, और समैरिया ले आया गया; और उन्होंने राजा को समैरिया में दफ़ना दिया।

३८ और एक ने उस रथ को समैरिया के कुण्ड में धोया; और कुत्तों ने उसका रक्त चाट डाला; और उन्होंने उसके कवच को धो दिया प्रभु के शब्दानुसार ही जो वो बोले थे।  

३९ अब अहाब के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, और वो हाथी-दाँत वाला घर जो उसने बनाया था, और वो सभी नगर जिनका उसने निर्माण किया था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

४० तो अहाब अपने पित्रों के साथ लेट गया; और अहज़िया उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।

४१ आसा के बेटे यहोशाफट ने यहूदा पर इस्राएल के राजा अहाब के चौथे वर्ष में राज करना आरम्भ किया।

४२ और यहोशाफट पैंतीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया; और उसने यरूशलेम में पच्चीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम अज़ुबा था, शिल्ही की बेटी।

४३ और वह अपने पिता आसा के सभी पथों पर चला; वो उस से परे नहीं मुड़ा, प्रभु की दृष्टि में वो जो उचित था करता हुआ: तथापि वह उच्च-स्थान परे नहीं हटाए गए थे; क्योंकि लोग तब भी उन उच्च-स्थानों में चढ़ाते और सुगन्धित-धूप जलाते थे।

४४ और यहोशाफट ने इस्राएल के राजा के साथ शान्ति बनाई।

४५ अब यहोशाफट के वो शेष कार्य, और उसका बल जो उसने प्रदर्शित किया, और उसने कैसे युद्ध किया, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?

४६ और उसके पिता आसा के दिनो में बचे रह गए उन समलैंगिकों का शेष भाग, उसने भूमी में से बाहर खदेड़ डाला।

४७ तब एदोम में कोई भी राजा था: एक अध्यक्ष ही राजा था।

४८ यहोशाफट ने तरशीश के जलयान सोने के लिए ओफर जाने हेतु बनववाए: परन्तु वो नहीं जा सके; क्योंकि वो जलयान एज़्योंगेबर में टूट गए थे।

४९ तब अहाब के बेटे अहज़िया ने यहोशाफट से कहा, मेरे नौकरों को आपके नौकरों के साथ जलयानों में जाने दें। परन्तु यहोशाफट ने अस्वीकार कर दिया।

५० और यहोशाफट अपने पित्रों के साथ लेट गया, और अपने पिता दाऊद के नगर में अपने पित्रों के साथ दफ़ना दिया गया था: और यहोरम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।

५१ अहाब के बेटे अहज़िया ने समैरिया में इस्राएल पर यहूदा के राजा यहोशाफट के सत्रहवें वर्ष में राज करना आरम्भ किया, और इस्राएल पर दो वर्ष राज किया।

५२ और उसने प्रभु की दृष्टि में दुष्टता की, और अपने पिता के पथ पर, और अपनी माता के पथ पर, और नेबत के बेटे यरोबोम के पथ पर, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था, चलता गया:

५३ क्योंकि उसने बअल की सेवा की, और उसे पूजा, और प्रभु इस्राएल के ईश्वर को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर डाला, उस सभी के अनुसार जो उसके पिता ने कर डाला था।



१०/०८/२०२५: 













































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