राजाओं की दूसरी पुस्तक। (Second Kings)
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पहला अध्याय।
१ तब मोआब ने अहाब की मृत्यु के पश्चात इस्राएल के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
२ और अहज़िया अपने ऊपरी कक्ष की एक जाली में से नीचे गिर पड़ा जो कि समैरिया में था, और घायल हो गया: और उसने दूत भेजे, और उनसे कहा, भई जाकर एक्रोन के ईश्वर बअलज़बब से पूछ-ताछ कर लो कि भला मेरा इस रोग से निवारण होगा क्या?
३ परन्तु प्रभु के दूत ने एलिया उस तिश्बी से कहा, उठ जाओ भई, समैरिया के राजा के दूतों से मिलने ऊपर चले जाओ, और उनसे कहो, क्या ये इसलिए नहीं है क्योंकि इस्राएल में कोई ईश्वर नहीं है, कि तुम एक्रोन के ईश्वर बअलज़बब से पूछ-ताछ करने चल दिए हो?
४ अब इसलिए प्रभु इस प्रकार कहते हैं, तू उस बिस्तर से नीचे नहीं उतरेगा जिस पर तू ऊपर चढ़ चुका है, बल्कि तू तो अवश्य ही मर जाएगा। और एलिया ने प्रस्थान कर लिया।
५ और जब वह दूत उसके पास वापस मुड़ चले थे, उसने उन से कहा, भई अब तुम वापस क्यों मुड़ आए हो?
६ और उन्होंने उस से कहा, जी एक आदमी ने हमसे मिलने ऊपर आकर, हम से कहा, भई चले जाओ, पुनः मुड़ जाओ उस राजा की ओर जिसने तुम्हें भेजा है, और उस से कहो, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, क्या ये इसलिए नहीं है क्योंकि इस्राएल में कोई ईश्वर नहीं है, कि तू एक्रोन के ईश्वर बअलज़बब से पूछ-ताछ करने भिजवा रहा है? इसलिए तू उस बिस्तर से नीचे नहीं उतरेगा जिस पर तू ऊपर चढ़ चुका है, बल्कि तू तो अवश्य ही मर जाएगा।
७ और उसने उनसे कहा, किस प्रकार का आदमी था वो जो तुमसे मिलने ऊपर आया था, और तुम्हें ये शब्द बताए?
८ और उन्होंने उसे उत्तर दिया, वो तो एक बाल-दार आदमी था, और एक चमड़े के कमर-पट्टे से अपनी कमर कसे हुए था। और उसने कहा, यह तो वो तिश्बी एलिया है।
९ तब उस राजा ने उसके पास पचासों के एक कप्तान को उसके पचासों के साथ भेजा। और उसने उसके पास तक ऊपर चढ़ाई की: और देखो, वो एक पहाड़ी की चोटी पर बैठा हुआ था। और वो उस से बोला, तुम ईश्वर के बन्दे, राजा ने कह दिया है, भई नीचे उतर आओ।
१० और एलिया ने उत्तर दिया और पचासों के उस कप्तान से कहा, यदि मैं ईश्वर का एक बन्दा हूँ, तो स्वर्ग में से अग्नी को नीचे उतर आने दो, और तुम्हारा और तुम्हारे पचासों का भक्षण कर देने दो। और स्वर्ग में से अग्नी नीचे उतर आई, और उसका और उसके पचासों का भक्षण कर डाला।
११ पुनः भी उसने एक दूसरा पचासों का एक कप्तान उसके पचासों के साथ भेजा। और उसने उत्तर दिया और उस से कहा, ओ ईश्वर के बन्दे, राजा ने इस प्रकार से कह दिया है, भई फुर्ती से नीचे उतर आओ।
१२ और एलिया ने उत्तर दिया और उन से कहा, यदि मैं ईश्वर का एक बन्दा हूँ, तो स्वर्ग में से अग्नी को नीचे उतर आने दो, और तुम्हारा और तुम्हारे पचासों का भक्षण कर देने दो। और ईश्वर की अग्नी स्वर्ग से नीचे उतर आई, और उसका और उसके पचासों का भक्षण कर डाला।
१३ और उसने पुनः एक पचासों का एक कप्तान उसके पचासों के साथ भेजा। और इस तीसरे पचास के कप्तान ने ऊपर चढ़ाई कर ली, और आकर एलिया के समक्ष अपने घुटनो के बल गिर पड़ा, और उस से विनती की, और उस से कहा, हे ईश्वर के बन्दे, जी मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, मेरा जीवन, और इन पचासों आपके सेवकों के जीवन को अपनी दृष्टि में अनमोल मान लें जी।
१४ देख लें, स्वर्ग से अग्नी नीचे उतर आई थी, और उन पिछले पचासों के दोनो कप्तानों को उनके पचासों के साथ भस्म कर डाला: इसलिए अब मेरे जीवन को अपनी दृष्टि में अनमोल मान लें जी।
१५ और प्रभु के दूत ने एलिया से कहा, चले जाओ नीचे इसके साथ ही: इस से मत डरना। और वो उठ कर उसके साथ राजा के पास नीचे चला गया।
१६ और उसने उस से कहा, क्योंकि तूने एक्रोन के ईश्वर बअलज़बब से पूछ-ताछ करने दूतों को भिजवाया, क्या ये इसलिए नहीं है क्योंकि इस्राएल में कोई ईश्वर नहीं हैं उनके शब्द की पूछ-ताछ करने हेतु? इसलिए तू उस बिस्तर पर से नीचे नहीं उतरेगा जिस पर तू ऊपर चढ़ चुका है, बल्कि अवश्य ही मर जाएगा।
१७ तो वो मर गया प्रभु के ही शब्दानुसार जो एलिया ने बोल दिया था। और यहूदा के राजा यहोशाफट के बेटे यहोरम के दूसरे वर्ष में यहोरम ने उसके स्थान में राज किया; क्योंकि उसके पास कोई बेटा नहीं था।
१८ तो अब अहज़िया के शेष कार्य, जो उसने किए थे, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
दूसरा अध्याय।
१ और यह होने को आया, कि जब प्रभु एलिया को स्वर्ग में ऊपर एक तूफ़ानी आँधी से पकड़ कर ले लेना चाहते थे, कि एलिया एलीशा के साथ गिलगल से चल पड़ा।
२ और एलिया ने एलीशा से कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से यहीं ठहर जाओ; चूँकि प्रभु ने मुझे बेतएल भेज दिया है। और एलीशा ने उस से कहा, प्रभु के जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, मैं आपको नहीं छोड़ूँगा जी। तो वो नीचे बेतएल चले गए।
३ और वो पैग़म्बरों के बेटे जो बेतएल में थे एलीशा के पास आगे आए, और उस से कहा, भई तुम जानते हो क्या कि प्रभु तुम्हारे मालिक को तुम्हारे सर पर से आज ही ले लेंगे? और उसने कहा, हाँ, मैं ये जानता हूँ भई; चुप कर जाओ तुम!
४ और एलिया ने उस से कहा, एलीशा मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से भई यहीं ठहर जाओ; चूँकि प्रभु ने मुझे यरीहो भेज दिया है। और उसने कहा, प्रभु के जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, मैं आपको नहीं छोड़ूँगा जी। तो वो यरीहो आ पहुँचे।
५ और वो पैग़म्बरों के बेटे जो यरीहो में थे एलीशा के पास आए, और उस से कहा, भई तुम जानते हो कि प्रभु तुम्हारे मालिक को तुम्हारे सर पर से आज ही ले लेंगे? और उसने उत्तर दिया, हाँ, मैं ये जानता हूँ भई; चुप कर जाओ तुम!
६ और एलिया ने उस से कहा, भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, यहीं ठहर जाओ; चूँकि प्रभु ने मुझे यर्दन भेज दिया है। और उसने कहा, प्रभु के जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, मैं आपको नहीं छोड़ूँगा जी। और वो दोनो चलते चले गए।
७ और पैग़म्बरों के बेटों में से पचास आदमी जाकर दूर खड़े हो गए देखने के लिए: और वो दोनो यर्दन के साथ खड़े थे।
८ और एलिया ने अपना चौगा लेकर उसे एक साथ तह लगाकर कर पानियों को पीट डाला, और वो इधर-उधर पृथक हो गए, ताकि वो दोनो सूखी धरती पर ही पार चले गए।
९ और यह होने को आया, जब वो पार चले जा चुके थे, कि एलिया ने एलीशा से कहा, मुझे तुम्हारे पास से ले जाए जाने से पहले ही पूछ लो कि मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ। और एलीशा ने कहा, जी मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, कि मुझ पर आपके भावात्मा का एक दुगुना भाग आ जाए।
१० और उसने कहा, भई तुमने तो एक कठिन बात की माँग कर दी है: तथापि यदि तुम मुझे अपने पास से ले जाया जाता हुआ देख लोगे, तो वैसा ही तुम्हारे साथ घट जाएगा; परन्तु यदि नहीं, तो ऐसा नहीं घटेगा।
११ और यह होने को आया, जैसे वो बात-चीत करते-करते चलते ही जाते रहे, कि देखो तो, अग्नी वाले एक रथ ने, और अग्नी वाले अश्वों ने प्रकट होकर, उन दोनो को बीच में से पृथक कर डाला; और एलिया एक तूफ़ानी-आँधी से स्वर्ग में ऊपर चढ़ाई कर चला।
१२ और एलीशा ने ये देखा, और वो चीख पड़ा, मेरे पिता जी, मेरे पिता जी, इस्राएल के रथ, और उसके घुड़सवार। और उसने उसे और अधिक नहीं देखा: और उसने अपने स्वयं के वस्त्रों को कस कर पकड़ कर उन्हें दो टुकड़ों में फाड़ डाला।
१३ उसने उस चौग़े को भी उठा लिया जो एलिया पर से गिर गया था, और वापस लौट चला, और यर्दन के किनारे खड़ा रहा;
१४ और उसने एलिया का वो चौगा लेकर जो उस पर से गिर गया था, उन पानियों को पीट डाला, और कहा, कहाँ हैं एलिया के प्रभु ईश्वर? और जब उसने भी उन पानियों को पीट डाला था, वो इधर और उधर पृथक हो गए: और एलीशा पार चला गया।
१५ और जब यरीहो में देखने वाले उन पैग़म्बरों के बेटों ने उसे देखा, तो उन्होंने कहा, भई एलिया का भावात्मा तो एलीशा पर ही ठहरा हुआ है! और वह उस से भेंट करने आए, और उसके समक्ष स्वयं को धरती की ओर झुका लिया।
१६ और उन्होंने उस से कहा, अब देख लें जी, आपके नौकरों के साथ पचास बलशाली आदमी हैं; हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि इन्हें चले जाने दें आपके मालिक को ढूँढ लेने हेतु: कहिं मान लें कि प्रभु के भावात्मा ने उन्हें ऊपर उठाकर, उन्हें किसी पर्वत पर, या किसी घाटी में न पटक दिया हो। और उसने कहा, तुम नहीं भेजोगे।
१७ और जब वो उस से उसके लज्जित हो जाने तक भी अनुरोध करते रहे, तो उसने कहा, भेज दो भई। इसलिए उन्होंने पचास आदमी भेज दिए; और वो तीन दिनो तक ढूँढते रहे परन्तु उसे नहीं ढूँढ पाए।
१८ और जब वह उसके पास पुनः आ पहुँचे थे, (क्योंकि वह यरीहो में ही ठहरा हुआ था,) तो उसने उनसे कहा, कहा नहीं क्या मैंने तुमसे, भई मत जाओ?
१९ और नगर के जनो ने एलीशा से कहा, देखें जी, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, इस नगर की परिस्थिति भली है, कैसे मेरे प्रभु देख ही रहे हैं: परन्तु पानी ठीक नहीं है, और धरती बंजर है।
२० और उसने कहा, मेरे पास एक नई सुराही ले आओ, और उस में नमक डाल दो। और वह उसे उसके पास ले आए।
२१ और वो एक पानियों के स्त्रोत तक आगे चला गया, और उस नमक को उस में फैंक दिया, और कहा, इस प्रकार कह रहे हैं प्रभु, मैंने इन पानियों को स्वस्थ कर दिया है; और वहाँ से अब और कोई मृत्य या बंजरपना नहीं होगा।
२२ तो वह पानी इस दिन तक निरोग कर दिए गए थे, एलीशा के कहनेनुसार ही जो वो बोला था।
२३ और वह वहाँ से ऊपर बेतएल चला गया: और जैसे वह पथ पर ऊपर चलता जा रहा था, छोटे बच्चे नगर में से बाहर निकल पड़े, और उसकी हँसी उड़ाने लग गए, और उस से कहा, जाता रह ऊपर अरे टकले; जाता रह ऊपर अरे टकले!
२४ और उसने अपने पीछे मुड़ कर उन्हें देखते हुए उन्हें प्रभु के नाम में श्राप दे डाला। और जंगल में से दो मादा भालू बाहर निकल आईं, और उन में से बयालीस बच्चों को फाड़ डाला।
२५ और वो वहाँ से करमल पहाड़ चला गया, और वहाँ से समैरिया वापस लौट आया।
तीसरा अध्याय।
१ अब अहाब के बेटे यहोरम ने समैरिया में इस्राएल पर यहूदा के राजा यहोशाफट के अट्ठारहवें वर्ष में राज करना आरम्भ कर दिया।
२ और उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई क्रियान्वित की; परन्तु अपने पिता के समान नहीं, न ही अपनी माता के समान: क्योंकि उसने बअल की उस प्रतिमा को परे हटा दिया जो उसके पिता ने बनाई थी।
३ तथापि वह नेबत के बेटे यरोबोम के पापों के साथ ही चिपटा रहा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था; वह उनसे परे नहीं हटा।
४ और मोआब का राजा मेशा एक गवाला था, और इस्राएल के राजा को एक लाख मेमनों का, और एक लाख मेढ़ों का, ऊँन के साथ ही, भुक्तान किया करता था।
५ परन्तु यह होने को आया, कि जब अहाब मर चुका था, तो मोआब के राजा ने इस्राएल के राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
६ और राजा यरोहम ने उसी समय समैरिया से बाहर निकल कर, समस्त इस्राएल की गिनती की।
७ और उसने जाकर और यहूदा के राजा यहोशाफट को भिजवाया, कहते हुए, मोआब के राजा ने मेरे विरुद्ध विद्रोह कर दिया है: क्या आप मेरे साथ मोआब के विरुद्ध युद्ध करने जाएँगे? और उसने कहा, मैं चढ़ाई करूँगा: मैं जैसे तुम हो वैसा ही हूँ, मेरे लोग तुम्हारे लोगों जैसे ही हैं, और मेरे घोड़े तुम्हारे ही घोड़ों जैसे।
८ और उसने कहा, किस पथ पर से हम चढ़ाई करें? और उसने उत्तर दिया, एदोम के जँगली क्षेत्र में से जाता हुआ वो पथ।
९ और इस्राएल का राजा चल दिया, और यहूदा का राजा, और एदोम का राजा: और उन्होंने सात दिनो वाली यात्रा वाला एक घेरा लिया: और सेना के लिए कोई भी पानी नहीं था, और उन मवेशी के लिए को उनके पीछे-पीछे आ रहे थे।
१० और इस्राएल के राजा ने कहा, हाय! कि प्रभु ने इन तीनों राजाओं को एक साथ बुला लिया है, उन्हें माओब के हाथ में प्रदान कर देने हेतु!
११ परन्तु यहोशाफट ने कहा, क्या यहाँ प्रभु का कोई पैग़म्बर नहीं है क्या, जिस से कि हम प्रभु के समबन्ध में पूछ-ताछ कर सकें? और इस्राएल के राजा के नौकरों में से एक ने उत्तर दिया और कहा, यहाँ शफट का बेटा एलीशा है जी, जिस ने एलिया के हाथों पर पानी उंडेला था।
१२ और यहोशाफट ने कहा, प्रभु के शब्द उनके साथ हैं। तो इस्राएल का राजा और यहोशाफट और एदोम का राजा उसके पास नीचे चल दिए।
१३ और एलीशा ने इस्राएल के राजा से कहा, भई मुझे तुमसे क्या करना-धरना? चले जाओ तुम अपने पिता के पैग़म्बरों के पास, और अपनी माँ के पैग़म्बरों के पास। और इस्राएल के राजा ने उस से कहा, नहीं जी: क्योंकि प्रभु ने इन तीनों राजाओं को एक साथ बुला लिया है, उन्हें माओब के हाथ में प्रदान कर देने हेतु।
१४ और एलीशा ने कहा,सेनाओं के प्रभु के जीते जी जिनके समक्ष मैं खड़ा हूँ, अवश्य ही यदि ऐसा होता कि मैं यहूदा के राजा यहोशाफट की उपस्थिति का आदर-मान न रखता, तो मैं तेरी ओर देखता ही नहीं, न ही दृष्टि टिकाता।
१५ लेकिन अब मेरे पास एक वाद्य-यंत्र-वादक ले आओ। और यह होने को आया, जब उस वाद्य-यंत्र-वादक ने वादन किया, तो प्रभु का हाथ उस पर छा गया।
१६ और उसने कहा, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, इस घाटी को गड्ढों से भर दो।
१७ क्योंकि इस प्रकार प्रभु कह रहे हैं, तुम वायु नहीं देखोगे, न ही वर्षा देखोगे; तथापि वो घाटी पाने से भर उठेगी, ताकि तुम पी सको, दोनो तुम, और तुम्हारे मवेशी, और तुम्हारे पशु।
१८ और भई ये तो एक तुच्छ सी ही बात है प्रभु की दृष्टि में: वो मोआब-वंशजों को भी तुम्हारे हाथ में प्रदान कर देंगे।
१९ और तुम प्रत्येक क़िलेबन्द-नगर को, और प्रत्येक श्रेष्ठ नगर को पीट डालोगे, और प्रत्येक अच्छे पेड़ को गिरा डालोगे, और सभी ज़ल-स्त्रोतों को रोक दोगे, और भूमी के प्रत्येक अच्छे खण्ड को पत्थरों से विकृत कर डालोगे।
२० और सुबह यह होने को आया, जब भोज-चढ़ावा चढ़ाया जा रहा था, कि, देखो भई, एदोम के पथ पर से पानी आ रहा था, और वह धरती पानी से भरती गई।
२१ और जब सभी मोआब-वंशजों ने सुना कि उन राजाओं ने उनके विरुद्ध लड़ाई करने हेतु चढ़ाई कर दी थी, उन्होंने उन सभी को इकट्ठा कर लिया जो कवच धारण करने में सक्षम थे, और ऊपर की ओर, और सीमा-रेखा पर खड़े हो गए।
२२ और वो सुबह-सुबह उठ गए, और सूर्य पानी पर चमक रहा था, और उन मोआब-वंशजों ने उस पानी को दूसरी ओर से लहू समान लाल देखा:
२३ और उन्होंने कहा, भई यह तो रक्त है: वो राजा तो अवश्य ही मारे जा चुके हैं, और उन्होंने एक दूसरे को ही पीट डाला है: अब इसलिए मोआब, लूटने चल दो!
२४ और जब वह इस्राएल के शिविर में पधारे, वो इस्राएल-वंशज उठ गए, और उन माओब-वंशजों को पीट डाला, ताकि वो उनके सामने-सामने से भाग खड़े हुए: परन्तु वह उन मोआब-वंशजों को पीटते हुए आगे ही आगे बढ़ते चले गए, यहाँ तक कि उन्हीं के देश में भी।
२५ और उन्होंने उन नगरों को नष्ट कर डाला, और भूमी के प्रत्येक अच्छे भू-खँड पर प्रत्येक पुरुष ने अपना पत्थर फैंक कर उसे भर डाला; और उन्होंने पानी के समस्त स्त्रोतों को रोक दिया, और सभी अच्छे पेड़ों को गिरा डाला: बस केवल किरहरसेथ में ही उन्होंने उसके पत्थर छोड़े रखे; परन्तु गोफन चलाने वालों ने उसे घेर कर उसे पीट डाला।
२६ और जब मोआब के राजा ने देखा कि भई वो युद्ध तो उसके लिए बहुत ही भीषण था, तो उसने अपने साथ सात सौ तलवार खींचने वाले आदमी लिए, एदोम के राजा तक चीरकर पहूँच जाने हेतु: परन्तु वो ये नहीं कर पाए।
२७ तब उसने अपने सबसे अग्रज बेटे को लिया जिसने उसके स्थान में राज करना था, और उसे दीवार पर ही एक जले-चढ़ावे हेतु चढ़ा डाला। और इस्राएल के विरुद्ध अत्यंत आक्रोश हो रहा था: और उन्होंने उस से प्रस्थान कर लिया, और अपनी भूमी वापस लौट चले।
चौथा अध्याय।
१ अब एलीशा की ओर पैग़म्बरों के बेटों की पत्नियों में से कोई एक स्त्री चीख पड़ी, कहती हुई, आपके सेवक मेरे पति मर चुके हैं; और आप जानते हैं कि आपके सेवक प्रभु का भय मानते ही थे: और साहूकार आ गया है मेरे दोनो बेटों को अपने पास बँध्वा-दास बनाने के लिए।
२ और एलीशा ने उस से कहा, मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ? बताओ मुझे, तुम्हारे पास घर में क्या-क्या है? और उसने कहा, आपकी दासी के पास तो घर में एक तेल की हाँडी के सिवा और कुछ भी नहीं है।
३ तब उसने कहा, चली जाओ, बाहर अपने सभी पड़ौसियों से बर्तन उधार ले लो, रिक्त पात्र ही; बस थोड़े ही न माँगना।
४ और जब तुम अन्दर आ जाओगी, तुम अपने पर और अपने बेटों पर द्वार बंद कर दोगी, और उन सभी बर्तनों में उँडेल दोगी, और तुम उसे परे रख देना जो भर गया है।
५ तो वो उस से विदा हो ली, और अपने पर और अपने बेटों पर द्वार बंद कर दिया, जो उसके पास वो बर्तन ले आए थे; और वो उँडेलती गई।
६ और यह होने को आया, जब वो बर्तन भर चुके थे, कि उसने अपने बेटे से कहा, एक और बर्तन मेरे पास ले आओ भई! और उसने उस से कहा, जी कोई और बर्तन नहीं बचा है। और वो तेल ठहरा रहा।
७ तब उसने आकर ईश्वर के बन्दे को बता दिया। और उसने कहा, जाकर यह तेल बेच दो, और अपना ऋण चुका दो, और शेष बचे-कुचे से तुम और तुम्हारी सन्ताने जीवन व्यतीत कर लो।
८ और एक दिन ऐसी घटी, कि एलीशा शुनम चलता चला गया, जहाँ एक धनवति स्त्री थी; और उसने उसे रोटी खाने हेतु विवश कर दिया। और भई तो ऐसा होता था, कि जब-जब भी वो चलता जाता था, तब-तब वो वहीं रोटी खाने हेतु मुड़ जाया करता था।
९ और उसने अपने पति से कहा, देखें अब, जी मैं यह आभास कर रही हूँ कि यह तो ईश्वर के एक पवित्र पुरुष हैं, जो हमारे पास से लगातार चलते चले जाते हैं।
१० मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ जी कि हम छोटा सा ही एक कक्ष दीवार पर बना देते हैं; और हम वहीं उनके लिए एक बिस्तर, और एक मेज़, और एक कुर्सी, और एक दीपाधार रख देते हैं: और ऐसा होगा, कि जब वो हमारे पास आएँगे, तो वो वहीं चले जाएँगे।
११ और एक दिन ऐसी घटी, कि वो वहीं आ पहुँचा, और वो उस कक्ष में अन्दर चला गया, और वहीं लेट गया।
१२ और उसने अपने नौकर गेहज़ी से कहा, इस शुनम-वाली को बुला लो। और जब उसने उसे बुला लिया था, वो उसके सामने खड़ी हो गई।
१३ और उसने उस से कहा, इस से अब कहो, देखो भई, तुमने हमारा इस सभी ध्यान से ध्यान रखा है; तुम्हारे लिया क्या किया जाए? क्या तुम्हारी चर्चा राजा से कर दी जाए, या सेना के कप्तान से? और उसने उत्तर दिया, जी मैं तो अपने ही लोगों में बीच निवास करती हूँ।
१४ और उसने कहा, तो फिर भई इसके लिए क्या किया जाना चाहिए? और गेहज़ी ने उत्तर दिया, सच-मुच इसके पास तो कोई भी बच्चा नहीं है, और इसका पति बूढ़ा है।
१५ और उसने कहा, बुलाओ उसे। और जब उसने उसे बुला लिया था, वो द्वार पर खड़ी थी।
१६ और उसने कहा, लगभग इस ऋतु में, जीवन के समयानुसार ही, तुम एक बेटे को गले लगाओगी। और उसने कहा, नहीं जी मेरे प्रभु, आप ईश्वर के बन्दे, अपनी दासी से झूठ न बोलिए!
१७ और वह स्त्री गर्भवति हो गयी, और उसी ऋतु में एक बेटा जना जो एलीशा ने उस से कहा था, जीवन के ही समयानुसार।
१८ और जब वो लड़का बड़ा हो चला था, तो एक दिन ऐसी घटी, कि वो बाहर अपने पिता के पास फसल-कातनेवालों के पास गया।
१९ और उसने अपने पिता से कहा, मेरा सर, मेरा सर। और उसने किसी लौंडे से कहा, इसे इसकी माँ के पास उठा ले जाओ भई।
२० और वह उसे उठा कर उसे उसकी माँ के पास ले आया, तो वो उसके घुटनों पर दोपहर तक बैठा रहा, और मर गया।
२१ और उसने ऊपर जाकर उसे उस ईश्वर के बन्दे के बिस्तर पर लिटा दिया, और उस पर द्वार बंद कर दिया, और बाहर निकल चली।
२२ और उसने अपने पति को पुकार कर कहा, जी मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि मेरे पास उन युवकों में से एक को, और गधियों में से एक को भेज दें, ताकि मैं उन ईश्वर के बन्दे के पास दौड़ कर चली जाऊँ, और मैं वापस लौट आऊँगी।
२३ और उसने कहा, भई किस कारण वश तुम उनके पास आज जाओगी? न ही नया चन्द्रमा है, न ही सैबथ! और उसने कहा, जी कुशल रहेगा।
२४ तब उसने एक गधी पर काठी बाँधी, और अपने नौकर से कहा, हाँक दे, और आगे बढ़ता चल भई; अपने हाँकने को ढीला मत करियो, सिवाय जब मैं तुझ से कहूँ।
२५ तो वो चलती गई और करमल पहाड़ ईश्वर के बन्दे के पास आ पहुँची, और यह होने को आया, कि जब ईश्वर के बन्दे ने उसे दूर से देखा, तो उसने गेहज़ी अपने नौकर से कहा, देखो भई, दूर वो शुनम-वाली है:
२६ भई मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, अभी ही भाग कर उस से मिलने चले जाओ, और उस से कहो, क्या तुम्हारे साथ कुशल है? क्या तुम्हारे पति के साथ कुशल है? क्या तुम्हारे बच्चे के साथ कुशल है? और उसने उत्तर दिया, कुशल है।
२७ और जब वो ईश्वर के बन्दे के पास पहाड़ी तक आ पहुँची थी, तो उसने उसे उसके पैरों से पकड़ लिया: परन्तु गेहज़ी उसे परे खदेड़ देने के लिए निकल आया। और ईश्वर के बन्दे ने कहा, भई इसे अकेला छोड़ दो; क्योंकि इसकी आत्मा इस में व्यग्रित है: और प्रभु ने यह मुझ से छुपाया हुआ है, और मुझे नहीं बताया है!
२८ तब उसने कहा, जी क्या मैंने अपने प्रभु से एक बेटा माँगा था क्या? कहा नहीं था क्या मैंने, कि मुझे धोखा न दें?
२९ तब उसने गेहज़ी से कहा, अपनी कमर कस लो, और मेरे लट्ठ को अपने हाथ में ले लो, और अपने पथ पर चले जाओ: यदि तुम किसी भी आदमी से मिलते हो, तो उसका अभिवादन मत करना; और यदि कोई भी तुम्हारा अभिवादन करे, तो उसे पुनः उत्तर मत देना: और मेरे लट्ठ को उस बच्चे के चहरे पर रख देना।
३० और उस बच्चे की माता ने कहा, मेरे प्रभु के जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, मैं आपको नहीं छोड़ूँगी जी। और वो उठ कर उसके पीछे-पीछे चल दिया।
३१ और गेहज़ी उनके सामने से पार चलता चला गया, और उस बच्चे के चहरे पर वह लट्ठ रख दिया; परन्तु न ही कोई वाणी थी, न ही सुनवाई। इस कारण वश वह पुनः उस से मिलने चला गया, और उसे बताया, कहते हुए, वो बच्चा तो नहीं जागा!
३२ और जब एलीशा घर में आ पहुँचा था, देखो भई, वो बच्चा तो मृत था, और उसके बिस्तर पर लेटा हुआ था।
३३ इसलिए उसने प्रवेश किया, और उन दोनो पर वह द्वार बँद कर दिया, और प्रभु से प्रार्थना की।
३४ और वह ऊपर चढ़कर, उस बच्चे पर लेट गया, और अपने मूँह को उसके मूँह पर रखा, और अपनी आँखों को उसकी आँखों पर, और अपने हाथों को उसके हाथों पर: और उसने स्वयं को उस बच्चे पर फैला दिया; और उस बच्चे का देह गरम होता चला गया।
३५ तब वो उस से परे हट कर, घर में इधर-उधर चलता-फिरा; और ऊपर चढ़कर, स्वयं को उस पर फैला दिया: और उस बच्चे ने सात बार छींकें मारी, और उस बच्चे ने अपनी आँखें खोल लीं।
३६ और उसने गेहज़ी को पुकार कर कहा, इस शुनम-वाली को बुला लो। तो उसने उसे बुला लिया। और जब वह उसके पास आ गई थी, उसने कहा, अपने बेटे को उठा लो भई।
३७ तब उसने प्रवेश कर लिया, और उसके पैरों पर गिर पड़ी, और स्वयं को धरती की ओर झुका कर, अपने बेटे को उठा लिया, और बाहर चली गई।
३८ और एलीशा पुनः गिलगल आ पहुँचा: और भूमी में तो भई एक अकाल पड़ा हुआ था; और पैग़म्बरों के बेटे उसके सामने बैठे हुए थे: और उसने अपने सेवक से कहा, भई वो बड़ा पतीला चढ़ा कर पैग़म्बरों के बेटों के लिए भोजन उबाल लो।
३९ और एक बाहर खेत में चला गया तरकारी इकट्ठा करने, और एक जँगली-लता पा कर, उस पर से चौग़ा-भर जँगली-घीये तोड़ लिए, और आया और उन्हें उस भोजन वाले पतीले में काट-छील दिया: अब वो उनसे परिचित नहीं थे।
४० तो उन्होंने पुरुषों के खाने के लिए परोस दिया। और यह होने को आया, कि जैसे वो उस भोजन का सेवन कर रहे थे, कि वो चीख पड़े, और कहा, अरे भई आप ईश्वर के बन्दे, पतीले में तो भई मृत्यु है! और वह उस में से खा ही नहीं पाए।
४१ परन्तु उसने कहा, तो भई आटा ले आओ। और उसने उसे पतीले में पटक डाला; और उसने कहा, लोगों के लिए परोस दो, ताकि वो खा सकें। और पतीले में तो कोई हानी नहीं थी।
४२ और बअलशलशा से एक आदमी पधारा, और ईश्वर के बन्दे के लिए पहलौठे फलों की रोटी, जौ की बीस रोटियाँ, और अनाज की भरी बालियाँ उसी के छिलकों में ले आया। और उसने कहा, लोगों को दे दो भई, ताकि वो खा लें।
४३ और उसके सेवादार ने कहा, जी क्या? क्या मैं इसे एक सौ आदमियों के सामने रखूँ? उसने पुनः कहा, लोगों को दे दो भई, ताकि वो खा लें: क्योंकि इस प्रकार प्रभु कहते हैं, वो तो खाएँगे, और उस में से बचा भी देंगे।
४४ तो उसने उसे उनके चेहरों समक्ष रख दिया, और उन्होंने खाया, और उस में से बचा भी दिया, प्रभु के शब्दानुसार ही।
पाँचवाँ अध्याय।
१ भई अब सिरिया के राजा की सेना का कप्तान, नामन, अपने मालिक के साथ-साथ एक महान पुरुष था, और सम्मानित, चूँकि उसी के द्वारा प्रभु ने सिरिया को उद्धार प्रदान किया था: वो वीरता में एक शूरवीर भी था, एक कुष्ठ-रोगी।
२ और वो सिरियावासी सैनिकों की टुकड़ियों में जाकर इस्राएल की भूमी में से एक छोटी लड़की को बंदी बनाकर बाहर ले आए थे।
३ और उसने अपनी मालकिन से कहा, ईश्वर करें कि मेरे प्रभु समैरिया में उन पैग़म्बर के साथ होते जी! क्योंकि वो उन्हें उनके कुष्ठ-रोग से निवारण प्रदान कर देते।
४ और एक ने जाकर अपने प्रभु को बता दिया, कहते हुए, जी इस्राएल की भूमी वाली वो छोरी ऐसा-ऐसा कह रही है।
५ और सिरिया के राजा ने कहा, भई जाओ, चले जाओ, और मैं इस्राएल के राजा को एक पत्र भेजूँगा। और उसने प्रस्थान कर लिया, और अपने साथ-साथ चाँदी के दस तलनतन भार, और सोने की छह हज़ार मुद्राएँ, और वस्त्र के दस जोड़े ले लिए।
६ और वो उस पत्र को इस्राएल के राजा के पास ले आया, कहता हुआ, जी अब जब यह पत्र तुम्हारे पास आ पहुँचेगा, देखो, मैंने उसी के साथ अपने नौकर नामन तुम्हारे पास भेज दिया है, ताकि तुम उसे उसके कुष्ठ-रोग से निवारण दिलवा दो।
७ और यह होने को आया, कि जब इस्राएल के राजा ने उस पत्र को पढ़ लिया था, कि उसने अपने कपड़े फाड़ डाले, और कहा, भई क्या मैं ईश्वर हूँ, मार डालने और सजीवित कर देने वाला, कि इस आदमी ने मेरे पास भिजवा दिया है एक आदमी को उसके कुष्ठ-रोग से निवारण प्रदान कर देने हेतु? इसलिए विचार कर लो, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, और देख लो कि ये कैसे मेरे साथ एक झगड़ा मोल लेना चाहता है!
८ और यह ऐसा हुआ, जब ईश्वर के बन्दे एलिश ने सुन लिया था कि इस्राएल के राजा ने अपने कपड़े फाड़ डाले थे, कि उसने राजा को भिजवाया, कहते हुए, भई तुमने अपने कपड़े क्यों फाड़ डाले? उसे अभी ही मेरे पास आ जाने दो, और वो जान जाएगा कि इस्राएल में एक पैग़म्बर है।
९ तो नामन अपने घोड़ों और अपने रथ के साथ आ पहुँचा, और एलिशा के घर के द्वार पर खड़ा हो गया।
१० और एलीशा ने उसके पास एक दूत को भेजा, कहता हुआ, भई जाकर यर्दन में स्नान कर लो, और तुम्हारा देह तुम्हें पुनः स्थापित हो जाएगा, और तुम स्वच्छ बन जाओगे।
११ परन्तु नामन तो अक्रिश से भर उठा, और चला गया, और कहा, देखो, मैंने तो सोचा था कि, वो तो अवश्य ही मेरे पास बाहर आ कर, खड़ा होकर, प्रभु अपने ईश्वर के नाम का आह्वान करेगा, और क्षेत्र पर अपना हाथ लहरा देगा, और कुष्ठ-रोग के संक्रमण का निवारण कर देगा!
१२ भई क्या दमिश्क की नदियाँ अबना और फरपर इस्राएल के समस्त पानियों से श्रेष्ठ नहीं हैं क्या? क्या मैं उन में स्नान कर कर स्वच्छ न बन जाऊँ क्या? तो वो रोष में मुड़ कर चला गया।
१३ और उसके सेवक उसके निकट आए, और उस से बोले, और कहा, मेरे पिता जी, यदि पैग़म्बर ने आपसे कोई महान कार्य कर देने के लिए कहा होता, तो क्या आप वो कर नहीं देते? तो फिर उसकी अपेक्षा, जब वो आप से कह रहे हैं, स्नान कर लो, और स्वच्छ बन जाओ?
१४ तब उसने नीचे जाकर स्वयं यर्दन में सात बार डुपकियाँ लगा लीं, ईश्वर के बन्दे के ही कथनानुसार: और उसका माँस पुनः स्थापित हो गया एक छोटे से ही बच्चे के देह समान, और वो स्वच्छ बन गया।
१५ और वो ईश्वर के बन्दे के पास वापस लौट आया, वो और उसकी समस्त टोली, और वो आकर उसके समक्ष खड़ा हो गया: और उसने कहा, देख लें जी, मैं अब जान चुका हूँ कि समस्त पृथ्वी कोई भी ईश्वर नहीं है, बल्कि इस्राएल में ही: इसलिए अब मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ जी, अपने सेवक से एक आशीर्वाद ले लें।
१६ परन्तु उसने कहा, प्रभु के जीते जी, जिनके समक्ष मैं खड़ा हूँ, मैं कुछ भी नहीं ग्रहण करूँगा। और उसने उसे लेने हेतु आग्रह किया; परन्तु उसने अस्वीकार कर दिया।
१७ और नामन ने कहा, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि तो फिर क्या अपने सेवक को दो खच्चरों के भार की मिट्टी नहीं दे दी जाए क्या? क्योंकि अब से लेकर आपका सेवक न ही जला-चढ़ावा न ही बलि दूसरे इश्वरों को चढ़ाएगा, बल्कि प्रभु के प्रति ही।
१८ इस बात में प्रभु आपके सेवक को क्षमा कर दें, कि जब मेरे मालिक रिम्मन के घर में वहाँ पूजा करने जाते हैं, और वो मेरे हाथ पर झुक जाते हैं, और मैं स्वयं को रिम्मन के घर में झुकाता हूँ: जब मैं स्वयं को रिम्मन के घर में झुकाता हूँ, तो प्रभु आपके सेवक को उस बात में क्षमा कर दें जी।
१९ और उन्होंने उस से कहा, शान्ति से चलते जाओ। तो वो थोड़ी ही दूरी तक विदा हो चला।
२० परन्तु ईश्वर के बन्दे एलीशा के नौकर गेहज़ी ने कहा, देखो भई मेरे मालिक ने तो इस सिरियावासी नामन को छोड़ दिया है, उसके हाथों से वो नहीं ग्रहण करने में जो वो लाया था: परन्तु, प्रभु के जीते जी, मैं उसके पीछे भागूँगा, और उस से कुछ न कुछ तो ले ही लूँगा।
२१ तो गेहज़ी नामन के पीछे-पीछे लग गया। और जब नामन ने उसे उसके पीछे-पीछे दौड़ते हुए देखा, तो वो रथ पर से नीचे उतर आया उस से मिलने, और कहा, क्या सब कुछ कुशल है?
२२ और उसने कहा, सभी कुछ कुशल है। मेरे मालिक ने मुझे भेजा है, कहते हुए, देखो, भई अभी ही मेरे पास एफ्रैम पहाड़ से पैग़ामबरों के बेटों में से दो युवा पुरुष पधारे हैं: मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, उन्हें चाँदी का एक तलनतन भार, और वस्त्रों के दो जोड़े दे दो।
२३ और नामन ने कहा, प्रसन्न हो जाओ, दो तलनतन भार ले लो भई। और उसने उस से अनुरोध किया, और चाँदी के दो तलनतन भार दो थैलों में बाँध दिए, वस्त्रों के दो जोड़ों के साथ, और उन्हें अपने नौकरों में से दो पर लाद दिए; और वो उसके सामने-सामने ढोते चले गए।
२४ और जब वो मीनार के पास आ पहुँचा था, उसने उन्हें उनके हाथ से लेकर उन्हें घर में रख लिया: और उसने उन आदमियों को चले जाने दिया, और उन्होंने प्रस्थान कर लिया।
२५ परन्तु उसने भीतर प्रवेश किया, और अपने मालिक के सामने खड़ा हो गया। और एलीशा ने उस से कहा, भई कहाँ से पधारे हो तुम गेहज़ी? और उसने कहा, जी आपका नौकर तो कहिं भी नहीं गया था जी।
२६ और उसने उस से कहा, क्या मेरा हृदय तुम्हारे साथ नहीं गया था क्या, जब वो आदमी पुनः अपने रथ से मुड़ा था तुमसे मिलने? क्या ये कोई समय है पैसे ग्रहण करने का, और वस्त्र, और जैतून-खेत, और अंगूर-खेत, और भेड़ें, और साँड, और नौकर, और नौकरानियाँ ग्रहण करने का?
२७ नामन का कुष्ठ-रोग इसलिए तुम्हारे साथ चिपट जाएगा, और तुम्हारे बीज के साथ सदैवता के लिए ही। और वो उसकी उपस्थिति से एक हिम जैसा ही श्वेत एक कुष्ठ-रोगी बाहर निकल चला।
छटा अध्याय।
१ और पैग़म्बरों के बेटों ने एलीशा से कहा, जी देखें अब, वो स्थान जहाँ हम निवास करते हैं आपके साथ हमारे लिए बहुत ही संकीर्ण है।
२ हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हम यर्दन तक चले जाएँ, और वहाँ से प्रत्येक पुरुष एक बल्ला ले लेगा, और हम वहाँ एक स्थान अपने लिए बना ले लेते हैं जहाँ हम निवास कर लें। और उसने उत्तर दिया, भई चले जाओ तुम।
३ और एक ने कहा, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, प्रसन्नता से अपने नौकरों के साथ चले जाएँ। और उसने उत्तर दिया, मैं चला जाऊँगा।
४ तो वो उनके साथ चला गया। और जब वो यर्दन आ पहुँचे थे, तो वो लकड़ी काटने लग गए।
५ परन्तु जैसे कोई एक बल्ला गिरा रहा था, कुल्हाड़े का सिरा पानी में जा गिरा: और उसने चीख कर कहा, हाय मेरे मालिक! वो तो उधार लिया हुआ था।
६ और ईश्वर के बन्दे बे कहा, भई कहाँ गिरा वो? और उसने उसे वो स्थान दिखा दिया। और उसने एक छड़ी काटी और उसे उसे वहीं फैंक दिया; और वो लोहा तैरने लग गया।
७ इसलिए उसने कहा, ऊपर उठा लो उसे। और उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसे ले लिया।
८ तब सिरिया का राजा इस्राएल के विरुद्ध लड़ाई कर रहा था, और उसने अपने नौकरों से परामर्श लिया, कहते हुए, ऐसे-ऐसे स्थान में मेरा शिविर होगा।
९ और ईश्वर के बन्दे ने इस्राएल के राजा को भिजवाया, कहते हुए, सावधान हो जाओ भई कि तुम इस स्थान से मत निकलना; चूँकि वहीं वो सिरियावासी उतर आए हैं!
१० और इस्राएल के राजा ने उसी स्थान भिजवाए जिसके विषय में ईश्वर के बन्दे ने उसे बताकर चेतावनी दे दी थी, और स्वयं वहीं का बचाव कर लिया, एक ही नहीं, न ही दो बार।
११ इसलिए इस विषय में सिरिया के राजा का मन घोरता से विचलित हो उठा; और उसने अपने नौकरों को बुलाकर उनसे कहा, भई तुम क्या मुझे बताओगे नहीं कि हम में से कौन इस्राएल के राजा के साथ है?
१२ और उसके नौकरों में से एक ने कहा, कोई भी नहीं जी मेरे प्रभु, हे राजा: बल्कि वो पैग़म्बर एलीशा जो इस्राएल में है, इस्राएल के राजा को वो शब्द बता देता है जो आप अपने शयन-कक्ष में बोलते हैं!
१३ और उसने कहा, जाकर देखो कि वो कहाँ है, ताकि मैं भेज कर उसे पकड़ लूँ। और उसे ये बता दिया गया था, कहते हुए, देखें जी, वो तो डोथन में है।
१४ इसलिए उसने वहीं घोड़े और रथ और एक बड़ी सेना भेज दी: और उन्होंने रात्रि के समय पहूँच कर उस नगर को चारों ओर से घेर लिया।
१५ और जब ईश्वर के बन्दे का नौकर सुबह-सुबह उठ गया था, और निकल चला था, देखो तो, एक सेना ने नगर को घेरा हुआ था दोनो घोड़ों और रथों से। और उसके नौकर ने उस से कहा, हाय मेरे मालिक! जी हम क्या करेंगे?
१६ और उसने उत्तर दिया, डरो मत: क्योंकि वो जो हमारे साथ हैं उनसे अधिक हैं जो उनके साथ हैं।
१७ और एलीशा ने प्रार्थना की और कहा, प्रभु जी मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, इसकी आँखें खोल दें ताकि ये देख सके। और प्रभु ने उस युवा पुरुष की आँखें खोल दीं; और उसने देखा: और देखो तो, वो पर्वत एलीशा के चारों ओर अग्नी के घोड़ों और रथों से भरा हुआ था।
१८ और जब वह उसके पास नीचे उतर आए थे, एलीशा ने प्रभु से प्रार्थना की और कहा, जी मैं आपसे प्रथना करता हूँ कि इन लोगों को नेत्रहीनता से आघातित कर दें। और उन्होंने उन्हें नेत्रहीनता से आघातित कर दिया एलीशा के शब्दानुसार ही।
१९ और एलीशा ने उन से कहा, भई ये पथ नहीं है, न ही ये वो नगर है: मेरे पीछे-पीछे आ जाओ और मैं तुम्हें उस आदमी के पास ले आऊँगा जिसे तुम ढूँढ रहे हो। परन्तु वो उन्हें समैरिया की ओर ले चला।
२० और यह होने को आया, जब वह समैरिया आ पहुँचे थे, कि एलीशा ने कहा, प्रभु जी इन आदमियों की आँखें खोल दें ताकि ये देख सकें। और प्रभु ने उनकी आँखें खोल दीं और उन्होंने देखा; और देखो तो, वो तो समैरिया के बीचों-बीच थे।
२१ और इस्राएल के राजा ने एलीशा से कहा, जब उसने उन्हें देखा, मेरे पिता जी, क्या मैं इन्हें मार डालूँ? क्या मैं इन्हें मार डालूँ जी?
२२ और उसने उत्तर दिया, तुम इन्हें नहीं मारोगे: क्या तुम उन्हें मार डालोगे जिन्हें तुमने अपनी तलवार से और अपने धनुष से बन्दी ले लिया है? इनके सामने रोटी और पानी रख दो ताकि ये खा-पी सकें, और अपने मालिक के पास चले जाएँ।
२३ और उसने उनके लिए एक बहुत ही बड़ा भोज रखा: और जब उन्होंने खा-पी लिया था, उसने उन्हें विदा कर दिया, और वो अपने मालिक के पास चले गए। तो सिरिया के सैन्य-दल अब और इस्राएल की भूमी में घुसते हुए नहीं आए।
२४ और इसके पश्चात यह होने को आया कि सिरिया के राजा बेनहदद ने अपनी समस्त सेना एकत्रित की, और चढ़ाई कर कर समैरिया पर घेरा-बन्दी लगा दी।
२५ और समैरिया में एक बड़ा अकाल पड़ा हुआ था: और देखो तो, उन्होंने उस पर घेरा-बन्दी लगाई हुई थी, जब तक कि एक गधे का सर चाँदी के अस्सी टुकड़ों के लिए, और कपोत की बीट के एक कब का चौथा भाग चाँदी के पाँच टुकड़ों के लिए नहीं बेच जा रहा था!
२६ और जैसे इस्राएल का राजा दीवार पर चलता चला जा रहा था, एक स्त्री उसकी ओर चीख पड़ी, कहती हुई, मेरे प्रभु, हे राजा, सहायता करें जी!
२७ और उसने कहा, यदि प्रभु तेरी सहायता नहीं कर रहे हैं, तो भई मैं कहाँ से तेरी सहायता करूँ? खेत के खलिहान में से या अंगूर-रस वाले कोल्हू में से?
२८ और राजा ने उस से कहा, क्या सता रहा है तुम्हें? और उसने उत्तर दिया, इस औरत ने मुझ से कहा, अपना बेटा दे दे, ताकि हम उसे आज खा लें, और हम मेरे बेटे को कल खा लेंगी।
२९ तो हमने मेरे बेटे को उबाल कर उसे खा लिया: और मैंने उस से अगले दिन कहा, अपना बेटा दे दे ताकि हम उसे खा लें: और इसने अपना बेटा छुपा दिया।
३० और यह होने को आया, जब राजा ने उस स्त्री के शब्द सुने, तो उसने अपने कपड़े फाड़ डाले; और वो दीवार पर चलता चला गया, और लोगों ने उसे देखा, और देखो तो, भीतर उसके माँस पर टाट-वस्त्र था।
३१ तब उसने कहा, ईश्वर तो ये मेरे साथ कर ही दें, और इस से भी और अधिक, यदि शफट के बेटे एलीशा का सर उस पर इस दिन खड़ा रहेगा।
३२ परन्तु एलीशा अपने घर में बैठा हुआ था, और वृद्ध-गण उसके साथ बैठे हुए थे: और राजा ने एक आदमी को अपने सामने से भेजा: परन्तु उस दूत के उस के पास आ पहूँच जाने से पूर्व, उसने वृद्ध-गणों से कहा, तुम देख रहे हो कि कैसे इस एक हत्यारे के बेटे ने मेरा सर परे हटा देने हेतु भेज दिया है? देखो, जब वो दूत आ पहूँचता है, द्वार बंद कर देना, और उसे द्वार पर ही कस कर रोके रखना: क्या उसके मालिक के पैरों की ध्वनि उसके पीछे-पीछे नहीं है क्या?
३३ और उसके उनके साथ बोलते-बोलते ही, देखो तो, वो दूत उसके पास उतर आया: और उसने कहा, देखो, ये बुराई तो प्रभु की ओर से है; क्या भई क्या मैं प्रभु के लिए अब और अधिक प्रतीक्षा करूँ क्या?
सातवाँ अध्याय।
१ तब एलीशा ने कहा, सुन लो तुम प्रभु का शब्द; इस प्रकार कहते हैं प्रभु, समैरिया के दरवाज़े पर कल ही लगभग इसी समय बारीक आटे का एक माप एक शेक्ल के लिए बेचा जाएगा, और जौ के दो माप एक शेक्ल के लिए।
२ तब एक अधिकारी ने जिसके हाथ पर राजा सहारा लिया करता था, ईश्वर के बन्दे को उत्तर दिया और कहा, देखो, यदि प्रभु स्वर्ग में खिड़कियाँ बना दें, तो क्या यह घटना घट जाएगी क्या? और उसने कहा, देख ले, तू इसे अपनी आँखों से तो देख लेगा, परन्तु उस में से खाएगा नहीं।
३ और चार कुष्ठ-रागी आदमी दरवाज़े के प्रवेश पर थे, और उन्होंने एक ने दूसरे से कहा, हम यहाँ मर जाने तक क्यों बैठे हुए हैं भई?
४ यदि हम कहते हैं, भई हम तो नगर में प्रवेश करेंगे, तब तो नगर में अकाल पड़ा हुआ है, और हम वहीं मर जाएँगे: और यदि हम यहीं बैठे रहें, तो हम भी मर ही जाएँगे। इसलिए अब आओ, और हम सिरियावासियों की सेना के हाथ में जा पड़ते हैं: यदि वो हमें जीवित बचा लेंगे, तो हम जी लेंगे; और यदि वो हमें मार डालेंगे, तो भई हम मर ही तो जाएँगे!
५ और वो साँझ के समय उठ गए, सिरियावासियों के शिविर में चले जाने हेतु: और जब वो सिरिया के शिविर के दूरतम छोर तक आ पहुँचे थे, देखो तो, वहाँ कोई भी आदमी न था।
६ क्योंकि प्रभु ने उन सिरियावासियों की सेना को रथों का शोर, और घोड़ों का शोर, और एक विशाल सेना का शोर सुनववा दिया था: और उन्होंने एक ने दूसरे से कहा, लो भई, इस्राएल के राजा ने तो हमारे विरुद्ध हित्ती-वंशजों के राजाओं को, मिस्रवासियों के राजाओं को भाड़े पर ले लिया है, हम पर आ पड़ने हेतु।
७ इस कारण वश वह उठकर साँझ के समय भाग-खड़े हुए, और अपने तम्बुओं को, और अपने घोड़ों को, और अपने गधों को, और शिविर को ही जैसा-तैसा वो था, छोड़ चले और अपने जीवन के लिए भाग खड़े हुए।
८ और जब वो कुष्ठ-रोगी शिविर के दूरतम छोर तक आ पहुँचे थे, तो वो एक तम्बू में घुसे, और खाया और पीया, और वहाँ से चाँदी और सोना, और वस्त्र उठा ले गए, और जाकर उसे छुपा दिया; और पुनः आए, और किसी अन्य तम्बू में प्रवेश किया, और वहाँ से भी उठाया, और जाकर उसे छुपा दिया।
९ तब उन्होंने एक ने दूसरे से कहा, भई हम भलाई नहीं कर रहे हैं! यह दिन तो एक शुभ-समाचार वाला दिन है, और हम शान्ति धरे हुए हैं: यदि हम प्रातः के प्रकाश तक ठहरे रहेंगे तो कोई विपत्ती हम पर आ पड़ेगी: अब इसलिए आओ भई, ताकि हम जाकर राजा के घराने को बता दें।
१० तो उन्होंने आकर नगर के द्वारपाल को पुकारा: और उन्होंने उन्हें बताया, कहते हुए, हम तो उन सिरियावासियों के शिविर आ पहुँचे थे, और देखो तो, वहाँ तो कोई भी आदमी नहीं था, न ही आदमी की वाणी, बल्कि घोड़े बन्धे हुए, और गधे बन्धे हुए, और वो शिविर जैसे वो थे।
११ और उसने द्वारपालों को बुला लिया; और उन्होंने यह भीतर राजा के घराने को बता दिया।
१२ और राजा रात्रि में उठ गया, और अपने नौकरों से बोला, अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि उन सिरियावासियों ने हमारे साथ क्या कर दिया है। वो ये जानते हैं कि भई हम भूखे हैं; इसलिए वो स्वयं खेत में छुप जाने के लिए शिविर में से बाहर निकल चले हैं, कहते हुए, जब वो नगर में से बाहर निकल आएँगे, तब हम उन्हें जीवित पकड़ लेंगे, और नगर में घुस जाएँगे।
१३ और उसके नौकरों में से एक ने उत्तर दिया और कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे कि कोई वो पाँच घोड़े ले ले जो बचे हुए हैं, जो नगर में बचे रह गए हैं, (देखें, वो तो इस्राएल के समस्त जनौघ समान ही हैं जो उस में बचे रह गए हैं: देखें जी, मैं कहता हूँ, यहाँ तक कि वो तो उन इसराएलियों के उस जनौघ के समान ही हैं जो सफ़ाचट हो चुके हैं:) और हम उन्हें भेज कर और देख लें।
१४ इसलिए उन्होंने रथों वाले दो घोड़े लिए; और राजा ने उन सिरियावासियों की सेना के पीछे-पीछे भेज दिए, कहते हुए, भई जाकर देख लो।
१५ और वो उनके पीछे-पीछे यर्दन तक चल दिए: और लो भई, समस्त पथ तो वस्त्रों और बर्तनों से भरा पड़ा था, जिन्हें उन सिरियावासियों ने अपनी शीघ्रता में पटक डाला था। और वह दूत वापस लौट आए, और राजा को बता दिया।
१६ और लोग बाहर चले गए और उन सिरियावासियों के शिविरों में लूट-पाट मचा दी। तो बारीक आटे का एक माप एक शेक्ल के लिए, और जौ के दो माप एक शेक्ल के लिए बेचे गए, प्रभु के शब्दानुसार ही।
१७ और राजा ने उस अधिकारी को, जिसके हाथ पर वो सहारा लिया करता था, दरवाज़े के प्रभार के लिए नियुक्त किया: और दरवाज़े में ही उस जनता ने उसे रौंद डाला, और वो मर गया, जैसा कि ईश्वर के बन्दे ने बोल दिया था, जो बोला था जब राजा उसके पार नीचे उतर आया था।
१८ और यह होने को आया जैसा कि ईश्वर के उस बन्दे ने राजा से बोल दिया था, कहते हुए, जौ के दो माप एक शेक्ल के लिए, और बारीक आटे का एक माप एक शेक्ल के लिए समैरिया के दरवाज़े पर कल ही लगभग इसी समय होंगे:
१९ और उस अधिकारी ने ईश्वर के बन्दे को उत्तर देकर कहा था, देखो अब, यदि प्रभु स्वर्ग में खिड़कियाँ बना दें, तो क्या यह घटना घट जाएगी क्या? और उसने कहा, देख ले, तू इसे अपनी आँखों से तो देख लेगा, परन्तु उस में से खाएगा नहीं।
२० और तो यही उसी पर ही आ पड़ा: क्योंकि जनता ने उसे दरवाज़े में ही रौंद डाला, और वो मर गया।
आठवाँ अध्याय।
१ तब एलीशा उस स्त्री से बोला, जिसके बेटे को उसने जीवित पुनःस्थापित कर दिया था, कहता हुआ, उठ जाओ, और तुम और तुम्हारा घर-बार जाकर अल्पवास कर लो जहाँ कहिं भी तुम अल्पवास कर सकती हो: क्योंकि प्रभु ने एक अकाल का आह्वान कर दिया है; और वो भूमी पर सात वर्षों के लिए भी आ पड़ेगा।
२ और उस स्त्री ने उठ कर और ईश्वर के बन्दे के कथनानुसार ही कर दिया: और उसने अपने घर-बार के तह जाकर पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में सात वर्ष अल्पवास किया।
३ और सात वर्षों के अन्त के पश्चात ये होने को आया, कि वो स्त्री उन पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में से भाहर वापस लौट आई: और वो राजा के पास अपने घर और अपनी भूमी के लिए चीख-पुकार मचाने चली गई।
४ और राजा ने ईश्वर के बन्दे के नौकर गेहज़ी से बात-चीत की, कहते हुए, भई मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ मुझे बताओ वो सभी महान कार्य जो एलीशा ने किए हैं।
५ और ये होने को आया, कि जैसे वो राजा को बता ही रहा था कि उसने कैसे एक मृत को सजीवित कर दिया था कि देखो तो, वो स्त्री जिसके बेटे को उसने सजीवित कर दिया था राजा की ओर अपने घर और अपनी भूमी के लिए चीख पड़ी। और गेहज़ी ने कहा, मेरे प्रभु हे राजा, यही वो स्त्री है, और यही उसका वो बेटा है जिसे एलीशा ने सजीवित कर दिया था!
६ और जब राजा ने उस स्त्री से पूछा, तो उसने उसे बता दिया। तो राजा ने उसे कोई एक अफ्सर नियुक्त कर दिया, कहते हुए, वह सभी कुछ जो इसका था, और उसके खेत के समस्त फल इसे पुनः स्थापित कर दो उस दिन से लेकर जब वो भूमी छोड़ चली थी, अभी तक ही।
७ और एलीशा दमिश्क आ पहुँचा; और सिरिया का राजा बेनहदद बीमार था; और उसे ये बता दिया गया था, कहते हुए, ईश्वर के बन्दे यहाँ आ पहुँचे हैं जी।
८ और राजा ने हज़एल से कहा, भई अपने हाथ में एक उपहार लेकर, और चले जाओ, ईश्वर के बन्दे से भेंट कर लो और उनके द्वारा प्रभु से पूछ-ताछ कर लो, कहते हुए, क्या मैं इस रोग से निवारण प्राप्त करूँगा क्या?
९ तो हज़एल उस से मिलने चल पड़ा, अपने साथ एक उपहार लेकर, दमिश्क की प्रत्येक अच्छी वस्तु में से ही, चालीस ऊँट लदे हुए, और आकर उसके सामने खड़ा हो गया, और कहा, जी सिरिया के राजा आपके बेटे बेनहदद ने मुझे आपके पास भेजा है, कहते हुए, क्या मैं इस रोग से निवारण प्राप्त करूँगा क्या?
१० और एलीशा ने उस से कहा, जाकर उस से कह दो, तुम अवश्य ही निवारण प्राप्त कर सकते हो: परन्तु प्रभु ने मुझे दिखा दिया है कि तुम तो अवश्य ही मर जाओगे।
११ और उसने अपना मुखमण्डल दृढ़ता से टिकाए रखा, जब तक कि वो लज्जित हो उठा: और ईश्वर का बन्दा रो पड़ा।
१२ और हज़एल ने कहा, मेरे प्रभु रो क्यूँ रहे हैं जी? और उसने उत्तर दिया, क्योंकि मैं वो बुराई जानता हूँ जो तू इस्राएल की सन्तानों के साथ कर बैठेगा: उनके दुर्गों को तू अग्नी से जला डालेगा, और उनके युवा पुरुषों को तू तलवार से मार डालेगा, और उनके छोटे बच्चों को फोड़ डालेगा, और उनकी गर्भवति स्त्रियों को तू फाड़ डालेगा।
१३ और हज़एल ने कहा, भई क्या, आपका नौकर क्या कोई कुत्ता है जी, कि वो यह बड़ा काम कर डालेगा? और एलिश ने उत्तर दिया, प्रभु ने मुझे दिखला दिया है कि तू सिरिया पर राजा बनेगा।
१४ तो उसने एलीशा से प्रस्थान कर लिया, और अपने मालिक के पास आ गया; जिसने उस से कहा, एलीशा ने तुम से क्या कहा? और उसने उत्तर दिया, जी उन्होंने मुझे बताया कि आप तो अवश्य ही ठीक हो जाएँगे!
१५ और यह होने को आया कि अगले दिन, उसने एक मोटा कपड़ा लेकर उसे पानी में डुबो कर, उसे उसके चेहरे पर फैला दिया, तो वो मर गया: और हज़एल ने उसके स्थान में राज किया।
१६ और इस्राएल के राजा अहाब के बेटे योराम के पाँचवे वर्ष में, यहोशाफट तब यहूदा का राजा होता हुआ, यहूदा के राजा यहोशाफट के बेटे यहोरम ने राज करना आरम्भ किया।
१७ बत्तीस वर्ष की आयु का था वो जब उसने राज करना आरम्भ किया; और उसने यरूशलेम में आठ वर्ष राज किया।
१८ और वो इस्राएल के राजाओं के पथ पर चलता था, जैसा कि अहाब के घराने ने किया: क्योंकि अहाब की बेटी उसकी पत्नी थी: और उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई की।
१९ तथापि प्रभु ने यहूदा को नष्ट नहीं किया अपने सेवक दाऊद के वास्ते, क्योंकि उन्होंने उसे यह वचन दे दिया था, सदा उसे और उसकी सन्तानों को एक उजाला प्रदान कर देने का।
२० उसके दिनो में एदोम ने यहूदा के हाथ के तले से विद्रोह कर दिया, और अपने ऊपर एक राजा नियुक्त कर दिया।
२१ तो योराम ज़ैर की ओर चल पड़ा, और समस्त रथ उसके साथ: और वो रात्रि को उठा, और उन एदोम-वंशजों को और उन रथों के कप्तानों को पीट डाला जिन्होंने उसे घेर लिया था, और लोग अपने तम्बुओं में भाग खड़े हुए।
२२ तथापि एदोम ने यहूदा के हाथ के तले से इन दिन तक भी विद्रोह किए रखा। तब लिब्ना ने उसी समय विद्रोह कर दिया।
२३ और योरम के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लखे हुए हैं क्या?
२४ और योरम अपने पित्रों के साथ सो गया, और अपने पित्रों के साथ दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था: और उसके बेटे अहज़िया ने उसके स्थान में राज किया।
२५ और इस्राएल के राजा अहाब के बेटे योरम के बारहवें वर्ष में यहूदा के राजा यहोरम के बेटे अहज़िया ने राज करना आरम्भ किया।
२६ अहज़िया बाईस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में एक वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम अथलिया था, इस्राएल के राजा ओम्री की बेटी।
२७ और वो अहाब के घराने के पथ में चला, और प्रभु की दृष्टि में बुराई की, जैसे कि अहाब के घराने ने की: क्योंकि वो अहाब के घराने का दामाद था।
२८ और वो अहाब के बेटे योरम के साथ सिरिया के राजा हज़एल के विरुद्ध युद्ध करने रमोथगिलद जा पहुँचा; और सिरियावासियों ने योरम को घायल कर दिया।
२९ और राजा योरम, जब वो सिरिया के राजा हज़एल के विरुद्ध लड़ा था, रमा में सिरियावासियों द्वारा दे दिए गए उन घावों से स्वस्थ होने के लिए यज़रील वापस चला गया। और यहूदा के राजा यहोरम का बेटा अहज़िया अहाब के बेटे योरम को देखने नीचे यज़रील चला गया, क्योंकि वो घायल था।
नौवाँ अध्याय।
१ और पैग़म्बर एलीशा ने पैग़म्बरों की सन्तानों में से एक को बुलाकर उस से कहा, अपनी कमर कस लो, और अपने हाथ में तेल का यह बक्सा ले लो, और रमोथगिलद चले जाओ:
२ और जब तुम वहाँ आ पहुँचते हो, वहीं निमशी के बेटे यहोशाफट के बेटे येहू को देख लेना, और भीतर जाकर, उसे अपने भाई-जनो के बीच में से उठवा देना, और उसे एक भीतरी कक्ष में ले जाना;
३ तब तेल के उस बक्से को लेकर, उसे उसके सर पर उँडेल देना, और कहना, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, मैंने तुम्हें इस्राएल के ऊपर राजा अभिषिक्त कर दिया है। तब द्वार खोल कर, भाग जाना, और ठहरना मत।
४ तो वो युवा पुरुष, वही युवा पुरुष वो पैग़म्बर ही, रमोथगिलद चला गया।
५ और जब वो पहुँच रहा था, देखो, सेना के कप्तान बैठे हुए थे; और उसने कहा, हे कप्तान मूझे आपसे कुछ काम है। और येहू ने कहा, हम सभी में से किसके साथ? और उसने कहा, आपके साथ हे कप्तान।
६ और वो उठ गया, और घर में प्रवेश कर लिया; और उसने वो तेल उसके सर पर उँडेल दिया, और उस से कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, मैंने तुम्हें प्रभु के लोगों पर राजा अभिषिक्त कर दिया है, इस्राएल के ऊपर ही।
७ और तुम अपने मालिक अहाब के घराने को पीट डालोगे, ताकि मैं अपने सेवकों उन पैग़म्बरों के रक्त का, और प्रभु के समस्त सेवकों के रक्त का, इज़्बल के हाथ पर से प्रतिषोध ले लूँ।
८ क्योंकि अहाब का समस्त घराना नष्ट हो जाएगा: और मैं अहाब से उसे जो दीवार पर मूतता है, और उसे जो इस्राएल में बन्धा हुआ है, और जो छूटा हुआ है, काट डालूँगा:
९ और मैं अहाब के घराने को नेबत के बेटे यरोबोम के जैसा, और अहिया के बेटे बशा के घराने जैसा बना डालूँगा:
१० और कुत्ते इज़्बेल को यज़रील के भाग में खाएँगे, और कोई भी उसे दफ़नाने वाला नहीं होगा। और वो द्वार खोलकर भाग खड़ा हुआ।
११ और येहू अपने मालिक के नौकरों के पास निकल आया: और एक ने उस से कहा, क्या सब कुछ कुशल है? ये पागल आदमी तुम्हारे पास किस कारण आया? और वो उनसे बोला, भई तुम तो उस आदमी को जानते हो, और उसके संचार को।
१२ और उन्होंने कहा, ये असत्य है; हमें बता दो अभी ही। और उसने कहा, ऐसे-ऐसे वो मुझ से बोला, कहता हुआ, प्रभु ने इस प्रकार कहा है, मैंने तुम्हें इस्राएल पर राजा अभिषिक्त कर दिया है।
१३ तब उन्होंने फुर्ती से, प्रत्येक पुरुष ने अपना वस्त्र लेकर सीढ़ियों के शिखर पर उसे उसके नीचे रख कर, चिंघाड़े बजा कर, कहा, येहू राजा हैं।
१४ तो निमशी के बेटे यहोशाफट के बेटे येहू ने योरम के विरुद्ध षड्यंत्र रचा दिया। अब योरम ने रमोथगिलद को सुरक्षित रख रखा था, उसने और समस्त इस्राएल ने, सिरिया के राजा हज़एल के कारण।
१५ परन्तु राजा योरम जब वो सिरिया के राजा हज़एल के विरुद्ध लड़ा था, सिरियावासियों द्वारा दे दिए गए उन घावों से स्वस्थ होने के लिए यज़रील वापस चला जा चुका था। और येहू ने कहा, यदि तुम्हारे मन ऐसे हों, तो भई किसी को भी नगर में से बाहर आगे जाने या बच निकल जाने मत देना यह यज़रील में जाकर बता देने हेतु।
१६ तो येहू एक रथ में सवारी करता हुआ यज़रील चला गया; चूँकि योरम वहीं पड़ा हुआ था। और यहूदा का राजा अहज़िया योरम को देखने नीचे आया हुआ था।
१७ और यज़रील में मीनार पर एक पहरेदार खड़ा था, और उसने येहू की टोली को देखा उसके आते-आते, और कहा, मैं एक टोली देख रहा हूँ। और योरम ने कहा, एक घुड़सवार को लेकर उसे उनसे मिलने भेज दो, और उसे काह लेने दो, शान्ति है क्या?
१८ तो एक घोड़े पर सवार उस से मिलने चल दिया, और कहा, राजा इस प्रकार कह रहे हैं, शान्ति है क्या? और येहू ने कहा, तुम्हें शान्ति से क्या करना-धरना भई? मुड़ चलो मेरे पीछे। और उस पहरेदार ने बताया कहते हुए, वो दूत तो उनके पास जा पहुँचा, परन्तु वो तो वापस नहीं आ रहा है।
१९ तब उसने एक दूसरे को घोड़े पर सवार भेजा, जो उनके पास जा पहुँचा, और कहा, राजा इस प्रकार कह रहे हैं, शान्ति है क्या? और येहू ने उत्तर दिया, तुम्हें शान्ति से क्या करना-धरना भई? मुड़ चलो मेरे पीछे।
२० और उस पहरेदार ने बताया कहते हुए, वो तो उनके पास तक जा ही पहुँचा, और वापस नहीं आ रहा है: और वो हाँकने वाली क्रिया तो निमशी के बेटे येहू के जैसी है; क्योंकि वो तो पागलों जैसे हाँकता है।
२१ और योरम ने कहा, तैयार करो। और उसके रथ को तैयार कर दिया गया था। और इस्राएल का राजा योरम और यहूदा का राजा अहज़िया बाहर निकल पड़े, प्रत्येक अपने रथ में, और वह येहू के विरुद्ध बाहर निकल पड़े, और उस से उस यज़रील-वासी नबोत के खण्ड में जा मिले।
२२ और यह होने को आया, जब योरम ने येहू को देखा, तो उसने कहा, येहू शान्ति है क्या? और उसने उत्तर दिया, कैसी शान्ति भई, जब तक कि तेरी माँ इज़्बल के वैश्यापने और चुड़ैलपने इतने सारे हैं?
२३ और योरम ने अपने हाथ मोड़ दिए, और भाग-खड़ा हुआ, और अहज़िया से कहा, अरे अहज़िया ये तो भई विश्वासघात है!
२४ और येहू ने अपने सम्पूर्ण बल से एक धनुष खींचा, और यहोरम पर उसकी बाँहों के बीच प्राहार कर डाला, और वो तीर उसके हृदय में से बाहर निकल आया, और वो अपने रथ में नीचे झुक गया।
२५ तब उसने अपने कप्तान बिदकर से कहा, इसे उठाकर उस यज़रील-वासी नबोत के खेत के खण्ड में पटक डालो: क्योंकि स्मरण करो कि कैसे, जब मैं और तुम एक साथ इसके बाप अहाब के पीछे-पीछे सवारी करते थे, प्रभु ने ही ये बोझ उस पर लाद दिया था;
२६ अवश्य ही मैंने कल देख लिया है नबोत का रक्त, और उसके बेटों का रक्त, कहते हैं प्रभु; और मैं तेरा भुक्तान इसी भू-खण्ड में भरूँगा, कहते हैं प्रभु। इसलिए अब इसे लेकर इस भू-खण्ड में पटक डालो, प्रभु के ही शब्दानुसार।
२७ परन्तु जब यहूदा के राजा अहज़िया ने ये देखा, तो वो उद्यान-ग्रह के पथ पर से भाग-खड़ा हुआ। और येहू ने उसका पीछा किया, और कहा, मार डालो इसे भी रथ में ही। और उन्होंने वैसा ही इब्लेम के साथ वाली, गुर की उस चढ़ाई पर कर डाला। और वो मगिद्दो भाग चला, और वहीं मर गया।
२८ और उसके नौकर उसे एक रथ में यरूशलेम उठा ले गए, और उसे दाऊद के नगर में उसके पित्रों के साथ उसके मक़बरे में दफ़ना दिया।
२९ और अहाब के बेटे योरम के ग्यारहवें वर्ष में यहूदा पर अहज़िया ने राज करना आरम्भ किया।
३० और जब येहू यज़रील आ रहा था, इज़्बल ने इसके विषय में सुना; और वो अपना चहरा रंग-श्रिंगार से पोत रही थी, और अपना सर सँवार रही थी, एक खिड़की में से बाहर झाँकती हुई।
३१ और जैसे येहू दरवाज़े में से प्रवेश कर रहा था, उसने कहा, क्या ज़िम्री को शान्ति मिली थी क्या, जिसने अपने मालिक को मार डाला था?
३२ और येहू ने अपना चेहरा उस खिड़की की ओर उठाकर कहा, मेरे पक्ष में कौन है? कौन? और उसकी ओर दो या तीन नपुंसकों ने बाहर झाँका।
३३ और उसने कहा, इसे नीचे फैंक दो। तो उन्होंने उसे नीचे फैंक दिया: और उसका कुछ रक्त दीवार पर छिड़क गया, और घोड़ों पर: और उसने उसे पैरों तले कुचल डाला।
३४ और उसने प्रवेश कर लिया था, उसने खाया-पीया, और कहा, भई जाकर देख लो उस श्रापित स्त्री को, और दफ़ना दो उसे: क्योंकि वो एक राजा की बेटी है।
३५ और वो उसे दफ़नाने चल दिए: परन्तु उन्होंने उसे उसकी खोपड़ी और पैरों, और उसके हाथों की हथेलियों के सिवा पाया ही नहीं!
३६ इस कारण वश वो पुनः आए, और उसे बताया। और उसने कहा, यही प्रभु का शब्द है जो वो अपने सेवक एलिया उन तिश्बी-वाले द्वारा बोले थे, कहते हुए, यज़रील के ही खण्ड में कुत्ते इज़्बल का माँस खाएँगे:
३७ और इज़्बल का शव यज़रील के खण्ड में खेत के चहरे पर मल के जैसा होगा; ताकि वो यह नहीं कहेंगे, यही इज़्बल है।
दसवाँ अध्याय।
१ और समैरिया में अहाब के पास सत्तर बेटे थे। औ येहू ने पत्र लिख कर समैरिया भिजवा दिए, यज़रील के अध्यक्षों को, वृद्ध-गणो को, और उन्हें जिन्होंने अहाब के बच्चों को पाला-पोसा था, कहते हुए,
२ अब तुम्हारे पास इस पत्र के पहूँच जाते ही, ये देखते हुए कि तुम्हारे मालिक के बेटे तुम्हारे साथ ही हैं, और तुम्हारे पास रथ और घोड़े हैं, और एक क़िलेबन्द नगर भी, और अस्त्र-शस्त्रादि;
३ अपने मालिक के बेटों में से श्रेठतम और सुग्योग्यतम को देख लो, और उसे उसके पिता के सिंहासन पर स्थित कर दो, और अपने मालिक के घराने के लिए लड़ाई करो।
४ परन्तु वो तो अति भयभीत हो उठे, और कहा, देखो भई, दो राजा इसके समक्ष खड़े नहीं रह सके: तो फिर हम कैसे खड़े रह पाएँगे?
५ और वो जो घराने पर नियुक्त था, और जो नगर पर नियुक्त था, वृद्ध-गणों ने भी, और बच्चों को बड़ा करने वालों ने, येहू को भिजवाया कहते हुए, जी हम तो आपके नौकर हैं, और वो सभी कुछ कर देंगे जो आप हम से कहेंगे; हम कोई भी राजा नियुक्त नहीं करेंगे; जी वही कर दें जो कुछ भी आपकी दृष्टि में कुशल हो।
६ तब उसने उन्हें दूसरी बार एक पत्र लिखा, कहते हुए, यदि तुम मेरे हो, और यदि तुम मेरी वाणी का श्रवण करोगे, तो अपने मालिक के बेटों के सरों को लेकर मेरे पास कल यज़रील इस समय आ पहुँचो। अब राजा के बेटे, सत्तर होते हुए, नगर के महान आदमियों के साथ थे, जिन्होंने उन्हें पाला-पोसा था।
७ और यह होने को आया, जब वो पत्र उनके पास पहुँचा, कि उन्होंने राजा के बेटों को ले लिया, और सत्तर व्यक्तियों को मार डाला, और उनके सरों को टोकरों में डाल कर, उन्हें उसके पास यज़रील भिजवाया दिया।
८ और एक दूत ने आकर उसे बताया कहते हुए, जी वो राजा के बेटों के सरों को ले आए हैं। और उसने कहा, उन्हें प्रातः तक दो ढेरों में दरवाज़े के प्रवेश पर लिटा दो।
९ और यह होने को आया प्रातः में, कि वो बाहर निकला, और खड़े होकर सभी लोगों से कहा, तुम नेक बनो: देखो, मैंने अपने मालिक के विरुद्ध षड्यंत्र रचा, और उसे मार डाला: लेकिन इन सभी को किसने मार डाला?
१० अब जान लो कि प्रभु के शब्द में से कुछ भी धरती पर नहीं गिरेगा, जो प्रभु ने अहाब के घराने के समबन्ध में बोल दिया था: क्योंकि प्रभु ने वो कर डाला है जो वो अपने सेवक एलिया द्वारा बोले थे।
११ तो येहू ने उन सभी की हत्या कर डाली जो यज़रील में अहाब के घराने से थे, और उसके समस्त महान व्यक्तियों की, और उसके नातेदारों की, और उसके पुरोहितों की, जब तक कि उसने उसके पास कुछ भी नहीं रख छोड़ा था।
१२ और वो उठा और प्रस्थान कर चला, और समैरिया आ पहुँचा। और जैसे वो पथ पर भेड़ों को कतरने वाले घर पहुँचा,
१३ तो येहू यहूदा के राजा अहज़िया के भाई-जनो से मिला, और कहा, भई कौन हो तुम? और उन्होंने उत्तर दिया, हम तो अहज़िया के भाई-जन हैं; और हम नीचे जा रहे हैं राजा की सन्तानों को और रानी की सन्तानों का अभिवादन करने।
१४ और उसने कहा, जीवित पकड़ लो इन्हें। और उन्होंने उन्हें जीवित पकड़ लिया, और उन्हें भेड़ों को कतरने वाले घर वाले गड्ढे पर मार डाला, बयालिस आदमी ही; न ही उसने उन में किसी को भी छोड़ा।
१५ और जब उसने वहाँ से प्रस्थान कर लिया था, उसने रेकब के बेटे येहोनादब को पाया उस से भेंट करने आता हुआ: और उसने उसे प्रणाम किया, और उस से कहा, क्या तुम्हारा हृदय सच्चा है, जैसे मेरा हृदय तुम्हारे हृदय के साथ है? और
येहोनादब ने उत्तर दिया, हाँ जी। तो यदि ऐसा ही है तो अपना हाथ मुझे दे दो। और उसने उसे अपना हाथ दे दिया; और उसने उसे रथ में अपने पास ऊपर चढ़ा लिया।
१६ और उसने कहा, मेरे साथ चले चलो, और प्रभु के लिए मेरा जोश देखो। तो उन्होंने उसे उसके साथ ही रथ में सवारी करवा दी।
१७ और जब वह समैरिया आ पहुँचा था, उसने समैरिया में उन सभी को मार डाला जो अहाब वाले बचे रह गए थे, जब तक कि उसने उनका विध्वंस नहीं कर डाला था, प्रभु की कहनीनुसार जो वो एलिया से बोले थे।
१८ और येहू ने सभी लोगों को एक साथ एकत्रित कर लिया, और उनसे कहा, अहाब ने तो बअल की थोड़ी सी ही सेवा की थी; परन्तु येहू तो उसकी बहुतेरी सेवा करेगा भई।
१९ इसलिए अब मेरे पास बअल के समस्त पैग़म्बरों को बुलवा लो, उसके समस्त सेवक, और उसके समस्त पुरोहित; कोई भी कम न पड़े: क्योंकि मुझे बअल ही के प्रति एक विशाल बलि चढ़ानी है; जो कोई भी कम पड़ जाएगा, वो जीवित नहीं रहेगा। परन्तु येहू ने यह कुटिलता से किया, इस उद्देश्य से कि वो बअल को पूजने वालों को नष्ट कर डाले।
२० और येहू ने कहा, बअल के लिए एक गम्भीर सभा की घोषणा कर दो। और उन्होंने उसकी घोषणा कर दी।
२१ और येहू ने समस्त इस्राएल में से भिजवा दिए: और बअल के समस्त पूजने वाले आ पहुँचे, ताकि एक भी आदमी बचा नहीं रहा जो आया नहीं था। और वह बअल के घर में आ गए; और बअल का घर एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक भर गया था।
२२ और उसने उस से कहा जो वस्त्रों पर अधिकारी था, बअल के समस्त पूजने वालों के लिए वस्त्र निकाल कर ले आओ भई। और वो उनके लिए वस्त्र निकाल लाया।
२३ और येहू चला गया, और रेकब का बेटा येहोनादब, बअल के घर में ही, और बअल की पूजा करने वालों से कहा, भई ढूँढ कर देख लो कि तुम्हारे साथ यहाँ प्रभु के सेवकों में से कोई भी न हो, बल्कि केवल बअल की पूजा करने वाले ही।
२४ और जब उन्होंने बलियाँ चढ़ाने और जले-चढ़ावों को चढ़ाने हेतु अन्दर प्रवेश किया, तो येहू ने बाहर अस्सी आदमियों को नियुक्त कर कर कहा, यदि इन आदमियों से कोई भी जो मैं तुम्हारे हाथों में ले आया हूँ बच निकलेगा, वो जो उसे बच कर निकल जाने देगा, उसका जीवन उसी के जीवन के बदले होगा।
२५ और यह होने को आया, जैसे ही उसने जले-चढ़ावे को चढ़ा देने का अन्त कर दिया था, कि येहू ने रक्षक और कप्तानों से कहा, अन्दर चले जाओ और उन्हें मार डालो; किसी को भी बाहर मत निकलने देना। और उन्होंने उन्हें तलवार की धार से मार डाला; और रक्षक और कप्तानों ने उन्हें बाहर फैंक दिया, और बअल के घर के नगर में चले गए।
२६ और वह बअल के घर में से प्रतिमाओं को बाहर निकाल लाए, और उन्हें भस्म कर डाला।
२७ और उन्होंने बअल की प्रतिमा को तोड़ डाला, और बअल के घर को तोड़ डाला, और उसे इस दिन तक एक शौचालय बना दिया।
२८ इस प्रकार येहू ने बअल का इस्राएल में से विध्वंस कर डाला।
२९ परन्तु नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से, जिस ने इस्राएल से पाप करवाया था, येहू ने प्रस्थान नहीं किया उनका पीछा करने से, उन सोने के बछड़ों से जो बेतएल में थे, और जो दान में थे।
३० और प्रभु ने येहू से कहा, चूँकि तुमने भलाई की है उसे क्रियान्वित कर देने में जो मेरी दृष्टि में उचित है, और अहाब के घराने के साथ वो कर डाला है उस सभी के अनुसार जो मेरे मन में था, तुम्हारी सन्तानें चौथी पीढ़ी तक भी इस्राएल के सिंहासन पर बैठेंगी।
३१ परन्तु येहू ने इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नियम में अपने सम्पूर्ण हृदय से चलने की सावधानी नहीं बरती: क्योंकि उसने यरोबोम के पापों से प्रस्थान नहीं किया, जिस ने इस्राएल से पाप करवाया था।
३२ उन दिनो में प्रभु इस्राएल को काट कर घटाने लग गए: और हज़एल उन्हें इस्राएल की समस्त सीमाओं में पीटता रहा;
३३ पूर्व की ओर यर्दन से लेकर, गिलद की समस्त भूमी, गाद-वंशज, और रूबेन-वंशज, और मनश्शे-वंशज, अरोर से लेकर जो अर्नोन नदी के साथ है, यहाँ तक कि गिलद और बशान।
३४ अब येहू के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, और उसकी समस्त शक्ती, क्या वह इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
३५ येहू अपने पित्रों के साथ सो गया: और उन्होंने उसे समैरिया में दफ़ना दिया। और येहोअहज़ उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
३६ और वो समय जो येहू ने समैरिया में इस्राएल पर राज किया था अट्ठाईस वर्षों का था।
ग्यारहवाँ अध्याय।
१ और जब अहज़िया की माँ अथलिया ने देखा कि उसका बेटा मर चुका था, तो उसने उठ कर समस्त राजसी बीज को नष्ट कर डाला।
२ परन्तु राजा योरम की बेटी, अहज़िया की बहन येहोशबा ने अहज़िया के बेटे योअश को लेकर, उसे राजा के मार डाल दिए गए बेटों के बीच में से चुरा लिया; और उन्होंने उसे अथलिया से छुपा दिया, उसी को ही और उसकी दाई को शय्यन-कक्ष में ही, तो उसे नहीं मारा डाला गया था।
३ और वो उसके साथ था प्रभु के घर में छह वर्ष छुपा हुआ। और अथलिया ने भूमी पर राज किया।
४ और सातवें वर्ष में येहोयदा ने भिजवाकर सौ-सौ पर मुखियों को, कप्तानों और रक्षक के साथ लिया, और उन्हें अपने पास प्रभु के घर में बुला लिया, और उनके साथ प्रभु के घर में ही एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, और उनसे एक शपथ ली, और उन्हें राजा का बेटा दिखा दिया।
५ और उसने उन्हें आदेश दिया, कहते हुए, यही है वो कार्य जो तुम करोगे; तुम्हारा एक तिहाई भाग जो सैबथ पर प्रवेश करता है राजा के घर के पहरेदार ही होंगे;
६ और एक तिहाई भाग सुर के दरवाज़े पर होंगे; और एक तिहाई भाग रक्षक के पीछे वाले दरवाज़े पर ही: इस प्रकार तुम घर पर पहरेदारी करोगे, ताकि वो तोड़ न दिया जाए।
७ और तुम सभी के दो भाग जो सैबथ पर जा निकलते हो, वही प्रभु के घर की पहरेदारी करेंगे राजा के आस-पास ही।
८ और तुम राजा को चारों ओर से घेरे रहोगे, प्रत्येक पुरुष अपने हाथ में अपने शत्रों के साथ ही: और वो जो पंक्तियों के भीतर आता है, उसकी हत्या हो जाने देना: और तुम राजा के साथ ही रहना जैसे वो बाहर निकलते हैं और जैसे वो भीतर आते हैं।
९ और सौ-सौ पर उन कप्तानों ने उन सभी बातोंनुसार कर दिया जो पुरोहित येहोयदा ने आदेश दे दिए थे: और उन्होंने प्रत्येक पुरुष ने अपने आदमी ले लिए जिन्हें सैबथ पर भीतर प्रवेश करना था, उन्हीं के साथ जिन्हें सैबथ पर बाहर निष्कास करना था, और पुरोहित येहोयदा के पास आ गए।
१० और सौ-सौ पर उन कप्तानों को पुरोहित ने राजा दाऊद के ही भाले और ढालें दे दीं, जो प्रभु के मंदिर में थीं।
११ और वह रक्षक खड़े थे, प्रत्येक पुरुष अपने हाथ में अपने शास्त्रों ही के साथ, राजा के चारों ओर, मंदिर के दाहिने कोने से लेकर मंदिर के बाएँ कोने तक, बलिवेदी और मंदिर के साथ-साथ ही।
१२ और वो राजा के बेटे को बाहर निकाल लाया, और उस पर मुकुट लगा दिया, और उसे वो साक्ष्य दे दिया; और उन्होंने उसे राजा बना दिया, और उसका अभिषेक कर दिया; और अपने हाथों से ताली बजा बजा कर कहा, राजा जीवित रहें!
१३ और जब अथलिया से रक्षक और लोगों का शोर सुना, तो वो प्रभु के मंदिर में ही लोगों के पास आ पहुँची।
१४ और जब उसने देखा, देखो तो, राजा एक स्तम्भ के साथ खड़ा था, रीतिनुसार ही, और प्रधान और चिंघाड़े बजाने वाले राजा के साथ ही, और भूमी के सभी लोग हर्ष मनाते हुए, और चिंघाड़े बजाते हुए: और अथलिया ने अपने कपड़े फाड़ डाले, और चीख पड़ी, राजद्रोह, राजद्रोह!
१५ परन्तु पुरोहित येहोयदा ने सौ-सौ के कप्तानों, सेना के अफ़सरों को आदेश दिया, और उनसे कहा, इसे पंक्तियों में से बाहर निकाल ले जाओ: और वो जो इसके पीछे-पीछे लगता है तलवार से मार डालो। क्योंकि पुरोहित ने कह दिया था, इसकी हत्या प्रभु के घर में मत होने देना भई।
१६ और उन्होंने उस पर हाथ डाल दिए; और वो उस पथ पर चलती गई जिस पर से घोड़े राजा के घर में प्रवेश करते थे: और वहीं उसे मार डाल दिया गया।
१७ और येहोयदा ने प्रभु और राजा और लोगों के बीच एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, कि वह प्रभु के ही गण हों; राजा के बीच भी और लोगों के।
१८ और भूमी के समस्त लोगों ने बअल के घर में घुस कर उसे नीचे तोड़ डाला: उसकी बलिवेदियाँ और उसकी प्रतिमाओं को उन्होंने पूर्णतः टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और बअल के पुरोहित मत्तन को बलिवेदियों के सामने ही मार डाला। और पुरोहित ने अफ़सरों को प्रभु के घर पर नियुक्त कर दिया।
१९ और उसने उन सौ-सौ पर मुखियों को, और कप्तानों को, और रक्षक को, और भूमी के समस्त लोगों को ले लिया; और वह राजा को प्रभु के घर से नीचे ले आए, और वह रक्षक के द्वार के पथ पर से राजा के घर आ गए। और वह राजाओं के सिंहासन पर बैठ गया।
२० और भूमी के समस्त लोगों ने हर्ष मनाया, और नगर चुप-चाप था: और उन्होंने अथलिया को तलवार से राजा के घर के साथ ही मार डाला।
२१ सात वर्ष की आयु का था योअश जब उसने राज करना आरम्भ किया था।
बारहवाँ अध्याय।
१ येहू के सातवें वर्ष में येहोअश ने राज करना आरम्भ किया; और उसने यरूशलेम में चालीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम बेएरशबा की ज़िबिया था।
२ और येहोअश ने अपने सारे दिनो में जिन में पुरोहित येहोयदा ने उसे निर्देश दिए वही किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था।
३ परन्तु वो उच्च स्थान हटाए नहीं गए थे: लोग अभी भी उन उच्च स्थानों में बलियाँ चढ़ाते थे और सुगन्धित धूप जलाते थे।
४ और येहोअश ने पुरोहितों से कहा, उन समर्पित वस्तुओं का सम्पूर्ण मोल जो प्रभु के घर में लाया जाता है, उसी प्रत्येक का ही मोल जिसे गिना जाता है, वो मोल जो प्रत्येक व्यक्ति पर भरने हेतु लगाया जाता है, और वो समस्त पैसा जो किसी भी पुरुष के मन में है प्रभु के घर में लाने हेतु,
५ उसे पुरोहित अपने पास ले लें, प्रत्येक पुरुष अपने परिचित से ही: और उन्हें घर की तोड़-फोड़ का सुधार कर देने दें, जहाँ कहिं भी कोई तोड़-फोड़ पाई जाए।
६ परन्तु ये ऐसा था कि राजा येहोअश के तेईसवें वर्ष में उन पुरोहितों ने घर की तोड़-फोड़ की मरम्मत नहीं की थी।
७ तब राजा येहोअश ने पुरोहित येहोयदा को और अन्य पुरोहितों को बुलवाया, और उनसे कहा, तुम घर के टूटे-फूटे भागों का सुधार क्यों नहीं कर रहे हो? इसलिए अब अपने परिचितों से अब और पैसा मत ग्रहण करना, बल्कि उसे घर की तोड़-फोड़ के लिए प्रदान करना।
८ और उन पुरोहितों ने सम्मति दी लोगों से अब और पैसा न लेने की, न ही घर की तोड़-फोड़ को सुधारने की।
९ परन्तु पुरोहित येहोयदा ने एक संदूक लेकर, उसके ढक्कन में एक छेद बना दिया, और उसे बलिवेदी के साथ ही स्थित कर दिया, दाहिने हाथ की ओर ही जैसे कोई प्रभु के घर में प्रवेश करता है: और वो पुरोहित जो द्वारपाल थे उस में वो सारा पैसा डाल दिया करते थे जो प्रभु के घर में लाया जाता था।
१० और यह ऐसा था, जब वो देखते थे कि भई संदूक में तो बहुत सारा पैसा था, तो राजा का लिपिक और उच्च पुरोहित आकर , बोरों में डाल कर उस पैसा को गिन लिया करते थे जो प्रभु के घर में पाया जाता था।
११ और वो गिना हुआ पैसा उनके हाथों सुपुर्द कर दिया करते थे जो कार्यरत थे, जो प्रभु के घर पर निरीक्षक थे: और वो उसे उन बढ़ईयों और राजगीरों को दे दिया करते थे जो प्रभु के घर का निर्माण करते थे,
१२ और मिस्त्रियों को, और पत्थर काटने वालों को, और प्रभु के घर की तोड़-फोड़ की मरम्मत करने हेतु लक्कड़ और कटे हुए पत्थर की ख़रीदारी के लिए, और उस सभी के लिए जो घर के सुधार के लिए किया जाना था।
१३ परन्तु उस पैसे से जो प्रभु के घर में लाया गया था, चाँदी के पात्र, कैंचियाँ, काटोरे, चिंघाड़े, कोई भी सोने के बर्तन, या चाँदी के बर्तन प्रभु के घर के लिए नहीं बनाए गए थे:
१४ परन्तु उन्होंने उसे कर्मचारियों को प्रदान कर दिया, और उनके द्वारा प्रभु के घर की मरम्मत की।
१५ इसके अतिरिक्त उन्होंने उन पुरुषों के साथ लेखा-जोखा नहीं किया, जिनके हाथों में उन्होंने वो पैसा प्रदान कर दिया था उन कर्मचारियों को दे देने हेतु: क्योंकि वह विश्वसनीयता से कार्य करते थे।
१६ वो दोष-चढ़ावे का पैसा और पाप-चढ़ावे का पैसा प्रभु के घर में नहीं लाया जाता था: वो पुरोहितों का ही था।
१७ तब सिरिया के राजा हज़ेल ने चढ़ाई की, और गथ के विरुद्ध लड़ पड़ा, और उस पर अधिकार जमा लिया: और हज़ेल ने अपना चेहरा यरूशलेम की ओर चढ़ाई कर देने हेतु कर दिया।
१८ और यहूदा के राजा येहोअश ने उन सभी पवित्र वस्तुओं को, जिन्हें यहूदा के राजाओं यहोशाफट, और यहोरम, और अहज़िया उसके पित्रों ने समर्पित किया था, और अपनी स्वयं की समर्पित वस्तुओं को, और उस समस्त सोने को जो प्रभु के घर के घन-कोषों में पाया गया था, लेकर उसे सिरिया के राजा हज़ेल को भिजवा दिया: और वो यरिशलेम से विदा हो लिया।
१९ और योअश के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वह यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२० और उसके नौकर ने उठ कर एक षड्यंत्र रचाया, और योअश को मिल्लो के घर में मार डाला, जो सिल्ला तक नीचे उतरता है।
२१ चूँकि शिमेथ के बेटे योज़बद, और शोमर के बेटे यहोज़ाबद, उसने सेवकों ने उसे पीट डाला, और वो मर गया; और उन्होंने उसे उसके पित्रों के साथ दाऊद के नगर में दफ़ना दिया: और अमज़िया उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
तेरहवाँ अध्याय।
१ और यहूदा के राजा अहज़िया के बेटे योअश के तेईसवें वर्ष में येहू के बेटे येहोअहज़ ने इस्राएल पर समैरिया में राज करना आरम्भ किया, सत्रह वर्षों तक।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, और नेबत के बेटे यरोबोम के पापों के पीछे-पीछे लगा रहा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था; उसने उन्हें छोड़ा नहीं।
३ और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध सुलग उठा था, और उन्होंने उन्हें सिरिया के राजा हज़ेल को प्रदान कर दिया, और हज़ेल के बेटे बेनहदद के हाथ में, उनके समस्त दिन।
४ और येहोअहज़ ने प्रभु से विनती की, और प्रभु ने उसका श्रवण कर लिया: चूँकि उन्होंने इस्राएल की उत्पीड़ना को देखा, क्योंकि सिरिया के राजा ने उन्हें उत्पीड़ित किया था।
५ और प्रभु ने इस्राएल को एक बचावक प्रदान किया, ताकि वह उन सिरियावासियों के हाथों तले बाहर निकल आए: और इस्राएल की सन्तानें अपने तम्बुओं में निवास करने लगे, बीते समय के समान ही।
६ तथापि वो यरोबोम के घराने के पापों से परे नहीं हटे, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था, बल्कि उन्हीं में ही चलते रहे: और समैरिया में एक उपवन भी रहता रहा।
७ न ही उसने येहोअहज़ के पास लोग छोड़े बस केवल पचास घुड़सवार, और दस रथ, और दस हज़ार पैदल-सैनिक; क्योंकि सिरिया के राजा ने उन्हें नष्ट कर दिया था, और उन्हें रौंद कर धूल-मिट्टी बना डाला था।
८ अब येहोअहज़ के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, और उसकी शक्ती, क्या वह इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
९ और येहोअहज़ अपने पित्रों के साथ लेट गया; और उन्होंने उसे समैरिया में दफ़ना दिया: और योअश उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
१० यहूदा के राजा योअश के सैंतीसवें वर्ष में येहोअहज़ के बेटे येहोअश ने इस्राएल पर समैरिया में राज करना आरम्भ किया, सोलह वर्ष।
११ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था; वो नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था: बल्कि वह उन्हीं में ही चलता रहा।
१२ और योअश के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, और उसकी शक्ती जिस से वो यहूदा के राजा
अमज़िया के विरुद्ध लड़ा था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
१३ और योअश अपने पित्रों के साथ लेट गया; और यरोबोम उसके सिंहासन पर बैठ गया: और योअश समैरिया में दफ़ना दिया गया था इस्राएल के राजाओं के साथ ही।
१४ अब एलीशा अपने रोग से रोगग्रस्त था जिस से उसकी मृत्यु हो गई थी। और इस्राएल का राजा योअश उसके पास नीचे आ पहुँचा, और उसके चेहरे पर रो पड़ा, और कहा, हे मेरे पिता जी, मेरे पिता जी, इस्राएल के साथ, और उसके घुड़सवार।
१५ और एलीशा ने उस से कहा, धनुष और बाण ले लो। और उसने अपने पास धनुष और बाण ले लिए।
१६ और उसने इस्राएल के राजा से कहा, अपना हाथ धनुष पर रखो। और उसने अपना हाथ उस पर रख दिया: और एलीशा ने अपने हाथ राजा के हाथों पर रख दिए।
१७ और उसने कहा, पूर्व दिशा की ओर खिड़की खोल दो। और उसने खोल दी। तब एलीशा ने कहा, चला दो। और उसने चला दिया। और उसने कहा, प्रभु के बचाव का बाण, और सिरिया से बचाव का बाण! क्योंकि तुम उन सिरियावासियों को अफक में पीट डालोगे, जब तक कि तुम उन्हें समाप्त नहीं कर डालोगे।
१८ और उसने कहा, उन बाणों को ले लो। और उसने उन्हें ले लिया। और उसने इस्राएल के राजा को कहा, धरती पर पीट डालो। और वो तीन बार पीट कर रुक गया।
१९ और ईश्वर का वो बन्दा उसके प्रति आक्रोश से भर उठा, और कहा, तुम्हें पाँच या छह बार पीट डालना चाहिए थे; तब तुम सिरिया को पीट डालते जब तक कि तुम उसे समाप्त कर डालते: परन्तु अब तुम सिरिया को तीन ही बार पीटोगे।
२० और एलीशा का देहान्त हो गया, और उन्होंने उसे दफ़ना दिया। और मोआब-वंशजों के सैन्य-दल वर्ष के आगमन पर भूमी पर आक्रमण कर घुस आते थे।
२१ और यह होने को आया, कि जैसे वो एक आदमी को दफ़ना रहे थे, कि देखो, उन्होंने एक सैन्य-दल देखा; और उन्होंने उस आदमी को एलीशा के मक़बरे में पटक दिया: और जब उस आदमी ने नीचे जाकर एलीशा की अस्थियों को छुआ, तो वो सजीवित हो उठा, और अपने पैरों पर खड़ा हो गया।
२२ परन्तु सिरिया के राजा हज़ेल ने इस्राएल को येहोअहज़ के समस्त दिन उत्पीड़ित किया।
२३ और प्रभु उनके प्रति कृपालु थे, और उनके प्रति समवेदनशील थे, और उनका सम्मान किया, अब्राहम, इसहाक, और याकूब के साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र के कारण, और उनको नष्ट नहीं किया, न ही उन्हें अभी तक अपनी उपस्थिति से पटका।
२४ तो सिरिया का राजा हज़ेल मर गया; और उसके बेटे बेनहदद ने उसके स्थान में राज किया।
२५ और येहोअहज़ के बेटे येहोअश ने हज़ेल के बेटे बेनहदद के हाथ में से उन नगरों को पुनः बाहर निकाल लिया, जिन्हें उसने उसके पिता येहोअहज़ के हाथ में से रण-क्रिया द्वारा बाहर निकाल लिया था। तीन बार योअश ने उसे परास्त किया, और इस्राएल के नगरों को पुनःस्थापित किया।
चौदहवाँ अध्याय।
१ इस्राएल के राजा येहोअहज़ के बेटे योअश के दूसरे वर्ष में यहूदा के राजा योअश के बेटे अमज़िया ने राज किया।
२ वो पच्चीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और यरूशलेम में उन्नतीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम येहोअदन था जो यरूशलेम से थी।
३ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, तथापि उसके पिता दाऊद के समान नहीं: उसने उन सभी कार्योंनुसार किया जैसे योअश उसके पिता ने किया था।
४ तथापि वो उच्च-स्थान नहीं हटाए गए थे: चूँकी अभी भी लोग उच्च स्थानों में बलि चढ़ाते थे और सुगन्धित-धूपत जलाते थे।
५ और यह होने को आया, कि जैसे ही राज्य उसके हाथ में स्थापित हुआ, कि उसने अपने नौकरों को मार डाला जिन्होंने उसके पिता की हत्या कर डाली थी।
६ परन्तु उन हत्यारों की सन्तानों को उसने नहीं मारा: उसके अनुसार जो मूसा के नियम की पुस्तक में लिखा हुआ है, जिस में प्रभु ने आदेश दिया, कहते हुए, बेटों के लिए पिताओं को मृत्यु के घाट नहीं उतारा जाएगा, न ही पिताओं के लिए बेटों को मृत्यु के घाट उतारा जाएगा: प्रत्येक व्यक्ति को उसके अपने ही पाप के लिए मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।
७ उसने नमक की घाटी में एदोमियों के दस हज़ार मार डाले, और युद्ध कर के सेला को पकड़ में ले लिया, और उसे योकथील का नाम इस दिन तक दे दिया।
८ तब अमज़िया ने इस्राएल के राजा, येहू के बेटे येहोअहज़ के बेटे येहोअश को दूत भजे, कहते हुए, भई आ जाओ, हम एक दूसरे का आमना-सामना करें।
९ और इस्राएल के राजा जेहोअश ने यहूदा के राजा अमज़िया को भेजा, कहते हुए, लेबनोन में एक काँटे वाली झाड़ी ने लेबनोन के एक देवदार को भेजा, कहते हुए, अपनी बेटी को मेरे बेटे की पत्नी बनने के लिए दे दो: और एक लेबनोन में एक जँगली जानवर चलता गया, और उस काँटे वाली झाड़ी को रौंद डाला।
१० भई तुमने तो वास्तव में ही एदोम को पीट डाला है, और तुम्हारे हृदय ने तुम्हें उठा दिया है: इसका गर्व मनालो और घर पे रहो: चूँकि तुम अपनी ही हाने के लिए हस्तक्षेप क्यों करो, कि तुम गिर पड़ो, तुम ही, और यहूदा तुम्हारे साथ?
११ परन्तु अमज़िया ने नहीं सुना। इसलिए इस्राएल के राजा येहोअश ने चढ़ाई कर दी; और वो और यहूदा का राजा अमज़िया एक दूसरे का चेहरा आमने-सामने ताक रहे थे बेतशमश में, जो कि यहूदा के अधिकार में था।
१२ और यहूदा इस्राएल के सामने परास्त हो रहा था; और वो भाग-खड़े हुए हर एक अपने ही तम्बुओं में।
१३ और इस्राएल के राजा येहोअश ने यहूदा के राजा अमज़िया को पकड़ में ले लिया, बेटा येहोअश का बेटा अहज़िया का, बेतशमश में, और यरूशलेम आ पहुँचा, और यरूशलेम की दीवार को तोड़ डाला एफ्रैम के दरवाज़े से लेकर कोने के दरवाज़े तक, चार सौ हाथ।
१४ और उसने प्रभु के घर में और राजा के घर के धन-कोषों में पाए गए समस्त सोने और चाँदी, और समस्त पात्रों को, और बन्धकों को लिया, और वापस समैरिया चला गया।
१५ और येहोअश के शेष कार्य जो उसने किए, और उसकी शक्ती, और कि वो कैसे यहूदा के राजा अमज़िया के विरुद्ध लड़ा था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
१६ और येहोअश अपने पित्रों के साथ सो गया, और समैरिया में इस्राएल के राजाओं के साथ दफ़ना दिया गया था; और यरोबोम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
१७ और यहूदा के राजा योअश का बेटा अमज़िया इस्राएल के राजा येहोअहज़ के बेटे येहोअश की मृत्यु के पश्चात पन्द्रह वर्ष जिया।
१८ और अमज़िया के शेष कार्य, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
१९ अब उन्होंने उसके विरुद्ध यरूशलेम में षड्यंत्र रचा: और बो लेकिश भाग गया; परन्तु उन्होंने उसके पीछे-पीछे लेकिश भिजवा कर उसे वहीं मार डाला।
२० और वो उसे घोड़ों पर ले आए: और वो यरूशलेम में अपने पित्रों के साथ दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था।
२१ और यहूदा के समस्त लोगों ने अज़रिया को लिया, जो कि सोलह वर्ष की आयु का था, और उसे उसके पिता अमज़िया के स्थान में राजा बना दिया।
२२ उसने एलथ का निर्माण कर के उसे यहूदा के प्रति पुनःस्थापित कर दिया, राजा के अपने पित्रों के साथ लेट जाने के पश्चात।
२३ यहूदा के रहा योअश के बेटे अमज़िया के पन्द्रहवें वर्ष में इस्राएल के राजा योअश के बेटे यरोबोम ने समैरिया पर राज करना आरम्भ किया, इकतालीस वर्ष।
२४ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था: वो नेबत के बेटे यरोबोम के समस्त पापों से परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था।
२५ उसने इस्राएल की सीमा को हमात की प्रविष्टि से लेकर मैदान के सागर तक पुनःस्थापित किया, इस्राएल के प्रभु ईश्वर के शब्दानुसार, जो वो गथहेफर वाले पैग़म्बर, अमित्ते के बेटे योना अपने नौकर के हाथ से बोले थे।
२६ क्योंकि प्रभु ने इस्राएल की उत्पीड़ना देखी, कि वो तो बहुत ही कड़वी थी: क्योंकि कोई भी बन्धा हुआ, न ही छूटा हुआ, न ही कोई सहायक था इस्राएल के लिए।
२७ और प्रभु ने नहीं बोला था कि वो स्वर्ग के तले से इस्राएल के नाम को मिटा डालेंगे: बल्कि उन्होंने योअश के बेटे यरोबोम के हाथ से उनका बचाव कर दिया।
२८ अब यरोबोम के शेष कार्य, और वो सभी कुछ जो उसने किया, और उसकी शक्ती, कि उसने कैसे युद्ध किया था, और कि कैसे उसने इस्राएल के लिए दमिश्क को, और यहूदा के अधिकार वाले हमात को पुनःस्थापित कर दिया था, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२९ और यरोबोम अपने पित्रों के साथ सो गया, इस्राएल के राजाओं के साथ ही; और ज़कर्याह उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
पन्द्रहवाँ अध्याय।
१ इस्राएल के राजा यरोबोम के सत्ताईसवें वर्ष में यहूदा के राजा अमज़िया के बेटे अज़रिया ने राज करना आरम्भ किया।
२ वो सोलह वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने बावन वर्ष यरूशलेम में राज किया। और उसकी माँ का नाम यकोलिया था जो यरूशलेम से थी।
३ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, उस सभी के अनुसार जो उसके पिता अमज़िया ने किया था;
४ सिवाय कि वह उच्च-स्थान हटाए नहीं गए थे: लोग अभी भी उच्च-स्थानो में बलियाँ चढ़ाते थे और सुगन्धित-धूप जलाते थे।
५ और प्रभु ने उस राजा पर वार कर डाला, ताकि वो अपनी मृत्यु के दिवस तक एक कुष्ठ-रोगी था, और एक पृथक किए हुए घर में निवास करता था। और राजा का बेटा योथम घराने पर नियुक्त था, भूमी के लोगों का न्याय करता हुआ।
६ और अज़रिया के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
७ तो अज़रिया अपने पित्रों के साथ सो गया; और उन्होंने उसे उसके पित्रों के साथ दाऊद के नगर में दफ़ना दिया; और योथम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
८ यहूदा के राजा अज़रिया के अड़तीसवें वर्ष में यरोबोम के बेटे ज़कर्याह ने समैरिया में इस्राएल पर छह महीने राज किया।
९ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उसके पित्रों की करनीयोंनुसार: वो नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था।
१० और यबश के बेटे शल्लुम ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचाया, और उसे लोगों के समक्ष मार डाला, और उसकी हत्या कर डाली, और उसके स्थान में राज किया।
११ और ज़कर्याह के शेष कार्य, देखो भई, वो तो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हुए हैं।
१२ यही प्रभु का वो शब्द था जो वो येहू से बोले थे, कहते हुए, तुम्हारे बेटे इस्राएल के सिंहासन पर चौथी पीढ़ी तक बैठेंगे।और तो यह ऐसा ही होने को आया।
१३ यबेश के बेटे शल्लुम ने यहूदा के राजा उज़्ज़िया के उनतालीसवें वर्ष में राज करना आरम्भ किया; और उसने समैरिया में एक पूरे माह राज किया।
१४ क्योंकि गदी के बेटे मेनहेम ने तिर्ज़ा से चढ़ाई की, और समैरिया आ पहुँचा, और समैरिया में यबेश के बेटे शल्लुम को पीट कर मार डाला, और उसके स्थान में राज किया।
१५ और शल्लुम के शेष कार्य, और उसका षड्यंत्र जो उसने रचाया, देखो, वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित हैं।
१६ तब मेनाहेम ने तिर्ज़ा से तिफसा को पीट डाला, और उन सभी को जो उस में थे, और उसकी सीमाओं को: चूँकि उन्होंने उसके लिए खोले नहीं, इस कारण उसने उसे पीट डाला; और उस में उन समस्त स्त्रियों को जो बच्चे से थीं उसने फाड़ डाला।
१७ यहूदा के राजा अज़रिया के उनतालीसवें वर्ष में गदी के बेटे मेनहेम ने इस्राएल पर राज करना आरम्भ किया, और दस वर्ष समैरिया में राज किया।
१८ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था: वो नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से अपने समस्त दिन परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था।
१९ और असिरिया का राजा पुल भूमी के विरुद्ध आ पहुँचा: और मेनहेम ने पुल को चाँदी के एक हज़ार तलनतन भार प्रदान कर दिए, ताकि उसका हाथ उसके साथ ही रहे, राज्य को उसके हाथ में संस्थापित कर देने हेतु।
२० और मेनहेम ने इस्राएल से वो पैसा निकाला, सभी धनवान शक्तिशालियों से ही, प्रत्येक आदमी से चाँदी के पचास-पचास शेक्ल, असिरिया के राजा को प्रदान कर देने हेतु ही। तो असिरिया का राजा वापस मुड़ चला, और भूमी में नहीं ठहरा।
२१ और मेनहेम के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, क्या वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित नहीं हैं क्या?
२२ और मेनहेम अपने पित्रों के साथ सो गया; और उसके बेटे पेकहिया ने उसके स्थान में राज किया।
२३ यहूदा के राजा अज़रिया के पचासवें वर्ष में मेनहेम के बेटे पेकहिया ने इस्राएल पर समैरिया में राज करना आरम्भ किया, दो वर्ष।
२४ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था: वो नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था।
२५ परन्तु रेमलिया के बेटे पेका उसके एक कप्तान ने, उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचाया, और उसे समैरिया में पीट डाला, राजा के घराने के महल में ही, अर्गोब और अरिए के साथ, और उसके साथ गिलद-वंशजों के पचास आदमियों के साथ: और उसने उसे मार डाला, और उसके स्थान में राज किया।
२६ और पेकहिया के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, देखो तो, वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित हैं।
२७ और यहूदा के राजा अज़रिया के बावनवें वर्ष में रेमलिया के बेटे पेका ने इस्राएल पर समैरिया में राज करना आरम्भ किया, बीस वर्ष।
२८ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था: वो नेबत के बेटे यरोबोम के पापों से परे नहीं हटा, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था।
२९ इस्राएल के राजा पेका के दिनो में असिरिया के राजा तिगलथपिलेसर ने आकर, इयोन, और एबलबेतमअकाह, और यनोआ, और केदेश, और हज़ोर, और गिलद, और गलील, नफ़्तली की समस्त भूमी को पकड़ में लेकर, उन्हें बन्दी बनाकर असिरिया उठा ले गया।
३० और एला के बेटे होशेअ ने रेमलिया के बेटे पेका के विरुद्ध एक षड्यंत्र रचा कर उसे पीट डाला और मार डाला, और उसके स्थान में राज किया, उज़्ज़िया के बेटे योथम के बीसवें वर्ष में ही।
३१ और पेका के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, देखो तो, वो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित हैं।
३२ इस्राएल के राजा रेमलिया के बेटे पेका के दूसरे वर्ष में यहूदा के राजा उज़्ज़िया के बेटे योथम ने राज करना आरम्भ किया।
३३ पच्चीस वर्ष की आयु का था वो जब उसने राज करना आरम्भ किया और उसने यरूशलेम में सोलह वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम येरूशा था, ज़दोक की बेटी।
३४ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था: उसने अपने पिता उज़्ज़िया की समस्त करनीयोंनुसार ही किया।
३५ परन्तु वो उच्च-स्थान नहीं हटाए गए थे: लोग उच्च-स्थानों में बलियाँ चढ़ाते रहे और सुगन्धित-धूप अभी भी जलाते रहे। उसने प्रभु के घर का वो ऊँचा वाला दरवाज़ा निर्मित किया।
३६ अब योथम के शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित नहीं हैं क्या।
३७ उन दिनो में प्रभु यहूदा के विरुद्ध सिरिया के राजा रेज़िन को और रेमलिया के बेटे पेका को भेजने लगे।
३८ और योथम अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उसके पिता दाऊद के नगर में अपने पित्रों के साथ दफ़ना दिया गया था: और उसके बेटे अहज़ ने उसके स्थान में राज करना आरम्भ किया।
सोलहवाँ अध्याय।
१ रेमलिया के बेटे पेका के सत्रहवें वर्ष में यहूदा के राजा योथम के बेटे अहज़ ने राज करना आरम्भ किया।
२ अहज़ बीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और यरूशलेम में सोलह वर्ष राज किया, और वो नहीं किया जो प्रभु उसके ईश्वर की दृष्टि में उचित था, उसके पिता दाऊद के समान।
३ परन्तु वो इस्राएल के राजाओं के पथ पर चलता गया, हाँ भई, और अपने बेटे को अग्नी में से चलवाया, उन अन्यप्रजातियों की ही अतिघृणितताओंनुसार, जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने से निष्कासित कर डाला था।
४ और उसने उन उच्च-स्थानों में, और उन पहाड़ियों पर, और प्रत्येक हरे वृक्ष के तले बलि चढ़ाई और सुगन्धित धूप जलाई।
५ तब सिरिया का राजा रेज़िन और इस्राएल का राजा रेमलिया ने यरूशलेम तक चढ़ाई कर दी युद्ध करने हेतु: और उन्होंने अहज़ को घेर लिया, परन्तु उसे परास्त नहीं कर पाए।
६ उस समय सिरिया के राजा रेज़िन ने सिरिया को एलथ पुनःस्थापित कर दिया, और यहूदियों को एलथ से खदेड़ डाला: और सिरियावासी एलथ आ पहुँचे, और इस दिन तक वहीं बस गए।
७ तो अहज़ ने असिरिया के राजा तिगलथपिलेसर को भिजवाया, कहते हुए, जी मैं आपका नौकर और आपका बेटा हूँ: आ जाएँ ऊपर, और सिरिया के राजा के हाथ में से, और इस्राएल के राजा के हाथ में से मेरा बचाव कर दें, जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हो गए हैं।
८ और अहज़ ने प्रभु के घर में और राजा के घर के धन-कोषों में पाए गए उस चाँदी और सोने को लेकर, उसे असिरिया के राजा को एक भेंट के लिए भिजवा दिया।
९ और असिरिया के राजा ने उसका श्रवण कर लिया: क्योंकि असिरिया के राजा ने दमिश्क के विरुद्ध चढ़ाई कर दी, और उसे पकड़ में ले लिया, और लोगों को किर बंदी बनाकर उठा ले गया, और रेज़िन को मार डाला।
१० और राजा अहज़ दमिश्क चला गया असिरिया के राजा तिगलथपिलेसर से भेंट करने, और एक बलिवेदी को देखा जो दमिश्क में थी: और राजा अहज़ ने पुरोहित ऊरिया को उस बलिवेदी का भूषाचार और प्रतिरूप भिजवा दिया, उसकी समस्त कारीगरी के अनुसार ही।
११ और पुरोहित ऊरिया ने एक बलिवेदी का निर्माण कर दिया उस सभी के अनुसार जो राजा अहज़ ने दमिश्क से भिजवाया था: तो पुरोहित ऊरिया ने उसका राजा अहज़ के दमिश्क से आते-आते निर्माण कर दिया।
१२ और जब राजा दमिश्क से आ पहुँचा था, तो राजा ने वो बलिवेदी देखी: और राजा ने उस बलिवेदी के निकट आकर उस पर चढ़ा दिया।
१३ और उसने अपने जले-चढ़ावे को और अपने भोज-चढ़ावे को जलाया, और अपने पेय-चढ़ावे को उँडेला, और अपने शान्ति-चढ़ावों के रक्त को उस बलिवेदी पर छिड़का।
१४ और वो उस पीतल की बलिवेदी को भी ले आया, जो प्रभु के समक्ष थी, घर के सामने से ही, बलिवेदी और प्रभु के घर के बीच में से ही, और उसे बलिवेदी के उत्तर की ओर रख दिया।
१५ और राजा अहज़ ने पुरोहित ऊरिया को आदेश दिया, कहते हुए, बड़ी बलिवेदी पर प्रातः वाला जला-चढ़ावा, और संध्या वाला भोज-चढ़ावा, और राजा की जली-बलि, और उसका भोज-चढ़ावा, भूमी के समस्त लोगों के जले-चढ़ावे और उनके भोज-चढ़ावे, और उनके पेय-चढ़ावों के साथ जला देना; और उस पर जले-चढ़ावे का सारा रक्त, और बलि का सारा रक्त छिड़क देना: और वो पीतल वाली बलिवेदी मेरे लिए पूछ-ताछ करने हेतु होगी।
१६ इस प्रकार पुरोहित ऊरिया ने किया, उस सभी के अनुसार जो राजा अहज़ ने आदेश दिया था।
१७ और राजा अहज़ ने उन गाड़ियों के किनारों को काट डाला, और उस कुण्ड को उन पर से उतार दिया; और उसने वह समुद्र उन पीतल के सांडों पर से नीचे उतार दिया जो उसके नीचे थे, और उसे एक पत्थरों की पटरी पर रख दिया।
१८ और सैबथ के लिए जो छत लिए था जिसका उन्होंने घर में निर्माण किया था, और बाहर राजा का वो प्रवेश-द्वार, उसने प्रभु के घर से असिरिया के राजा के लिए मोड़ दिया।
१९ अब अहज़ के शेष कार्य, जो उसने किए, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखित नहीं हैं क्या?
२० और अहज़ अपने पित्रों के साथ सो गया, और अपने पित्रों के साथ दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था: और हेज़ेकिया उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
सत्रहवाँ अध्याय।
१ यहूदा के राजा अहज़ के बारहवें वर्ष में एला के बेटे होशेअ ने इस्राएल पर समैरिया में नौ वर्ष राज करना आरम्भ किया।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, परन्तु इस्राएल के उन राजाओं की भाँति नहीं जो उस से पहले थे।
३ उसके विरुद्ध असिरिया के राजा शलमनसर ने चढ़ाई की; और होशेअ उसका नौकर बन गया, और उसे उपहार दिए।
४ और असिरिया के राजा ने होशेअ में षड्यंत्र ढूँढ निकाला: चूँकि उसने मिस्र के राजा सो को दूत भिजवा दिए थे, और असिरिया के राजा को कोई उपहार नहीं लाया, जैसे वो वर्ष प्रति वर्ष किया करता था: इसलिए असिरिया के राजा ने उसे बँद कर दिया, और उसे कारावास में बाँध दिया।
५ तब असिरिया के राजा ने समस्त भूमी के सर्वत्र पर चढ़ाई कर दी, और समैरिया तक आ चढ़ा, और उस पर तीन वर्ष घेराबन्दी कर दी।
६ होशेअ के नौवें वर्ष में असिरिया के राजा ने समैरिया पर अधिकार जमा लिया, और इस्राएल के असिरिया परे उठा ले चला, और उन्हें हला में और हबोर में गोज़न नदी के साथ, और मदयवासियों के नगरों में निर्वासित कर दिया।
७ तो भई यह ऐसा ही था, कि इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु उनके ईश्वर के विरुद्ध पाप कर डाला था, जो उन्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाए थे, मिस्र के राजा फैरो के हाथ के नीचे से ही, और अन्य ईश्वरों का भय मान लिया था,
८ और अन्यप्रजातियों के, (जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने से बाहर निष्कासित कर डाला था,) और इस्राएल के राजाओं के, (जिन्हें उन लोगों ने बनाया था,) अध्यादेशों में चलते रहे।
९ और इस्राएल की सन्तानों ने छुप-छुप कर वो कार्य किए जो प्रभु उनके ईश्वर के सामने उचित नहीं थे, और उन्होंने अपने लिए अपने समस्त नगरों में उच्च-स्थान बना लिए थे, पहरेदारों की मीनार से लेकर क़िलेबन्द नगर तक भी।
१० और उन्होंने अपने लिए प्रत्येक ऊँची पहाड़ी पर और हर हरे वृक्ष तले, प्रतिमाएँ और उपवन स्थापित कर लिए थे:
११ और वहीं वो उन समस्त उच्च-स्थानों में सुगन्धित-धूप जलाया करते थे, जैसे कि वो अन्यप्रजाति-वाले किया करते जिन्हें प्रभु उनके सामने से उठा ले गए; और दुष्ट क्रियाएँ क्रियान्वित कीं प्रभु को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु।
१२ क्योंकि वो मूर्तीयों की सेवा करते थे, जिनके विषय में प्रभु ने उनसे कह दिया था, तुम यह कार्य नहीं करोगे!
१३ तब भी प्रभु ने इस्राएल के विरुद्ध, और यहूदा के विरुद्ध, समस्त पैग़ामबरों द्वारा, और समस्त भविष्यदर्शकों द्वारा साक्ष्य दिया, कहते हुए, अपने बुरे पथों पर से मुड़ जाओ भई, और मेरे आदेशों और मेरे अध्यादेशों को रखो, उस समस्त नियमानुसार ही जो मैंने तुम्हारे पित्रों को आदेश दिया था, और जिन्हें मैंने तुम्हें अपने सेवकों उन पैग़म्बरों द्वारा भेज़े थे।
१४ किन्तु उन्होंने नहीं सुना, बल्कि अपनी गरदनें ऐंठ लीं, उनके पित्रों की गरदन के समान ही, जिन्होंने प्रभु अपने ईश्वर पर विश्वास नहीं किया था।
१५ और उन्होंने उनके अध्यादेशों को, और उनके प्रतिज्ञा-पत्र को जो उन्होंने उनके पित्रों के साथ बनाया था, और उनके साक्षयों को जिनका साक्ष्य उन्होंने उन्हें दिया था, अस्वीकार कर दिया; और वो व्यर्थता के पीछे लग गए, और व्यर्थ बन गए, और उन अन्यप्रजातियों के पीछे-पीछे चल दिए जो उनके चारों ओर आस-पास थे, जिनके समबन्ध में प्रभु ने उन्हें निर्देश दिया था, कि वह उनके जैसे न करें।
१६ और उन्होंने प्रभु अपने ईश्वर के समस्त आदेश त्याग दिए, और अपने लिए ढली हुई प्रतिमाएँ बना डालीं, दो बछड़े ही, और एक उपवन बना लिया, और स्वर्ग की समस्त सेना को पूजा, और बअल की सेवा की।
१७ और उन्होंने अपने बेटों और अपनी बेटियों को अग्नी में से चलवाया, और ज्योतिष-ज्ञान और इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों का प्रयोग किया, और प्रभु की दृष्टि में बुराई कर डालने हेतु बेच खाया, उन्हें क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु।
१८ इसलिए प्रभु इस्राएल के साथ बहुत क्रोधित थे, और उन्हें अपनी दृष्टि में से परे हटा डाला: कोई भी बचा नहीं राजा बस केवल यहूदा की प्रजाती ही।
१९ यहूदा ने भी प्रभु अपने ईश्वर के आदेशों का पालन नहीं किया, बल्कि इस्राएल के अध्यादेशों में चलते रहे जो उन्होंने बनाए था।
२० और प्रभु ने इस्राएल के समस्त बीज को अस्वीकार कर दिया, और उन्हें उत्पीड़ित कर दिया, और उन्हें लुटेरों के हाथ में प्रदान कर दिया, जब तक कि उन्होंने उन्हें अपनी दृष्टि से बाहर फैंक डाला था।
२१ क्योंकि उन्होंने इस्राएल को दाऊद के घराने से फाड़ डाला; और उन लोगों ने नेबत के बेटे यरोबोम को राजा बना दिया: और यरोबोम ने इस्राएल को प्रभु का अनुसरण करने से परे खदेड़ डाला, और उनसे एक विशाल पाप का पाप करवा दिया।
२२ क्योंकि इस्राएल की सन्तानें यरोबोम के समस्त पापों में चलते रहे जो उसने किए थे; उन्होंने उनसे प्रस्थान नहीं किया;
२३ जब तक कि प्रभु ने इस्राएल को अपनी दृष्टि से परे नहीं हटा दिया था, जैसा कि वो अपने समस्त नौकरों उन पैग़म्बरों द्वारा बोल चुके थे। तो इस्राएल अपनी स्वयं की ही भूमी से बाहर इसी दिन तक असिरिया में निर्वासित कर दिया गया था।
२४ और असिरिया का राजा बेबिलोन से, और कुथा से, और अवा से, और हमथ से, और सेफरवेम से ले आया, और इस्राएल की सन्तानों के स्थान में इन्हें समैरिया के नगरों में प्रवासित कर दिया: और उन्होंने समैरिया पर अधिकार जमा लिया, और उसके नगरों में बस गए।
२५ तो भई यह ऐसा ही था कि वहीं उनके आवास के आरम्भ में, कि उन्होंने प्रभु का भय नहीं माना: इसलिए प्रभु ने उनके बीच शेर भेज दिए, जिन्होंने उन में से कुछों को मार डाला।
२६ इस कारण वश वो असिरिया के राजा से बोले, कहते हुए, जिन राष्ट्रों को आपने हटाकर समैरिया के नगरों में निर्वासित कर दिया है, भूमी के ईश्वर की रीति से परिचित नहीं हैं: इसलिए उन्होंने उनके बीच शेर भेज दिए हैं, और देखें, वो तो उन्हें मार डाल रहे हैं, क्योंकि वो भूमी के ईश्वर की रीति से परिचित नहीं हैं।
२७ तब असिरिया के राजा ने आदेश दिया कहते हुए, भई वहाँ उन पुरोहितों में से एक को ले जाओ जिन्हें तुम वहाँ से लाए थे; और उन्हें जाकर वहीं बस जाने दो, और उसे उन्हें उस भूमी के ईश्वर की रीति सिखा देने दो।
२८ तब उन पुरोहितों में से एक ने, जिन्हें उन्होंने समैरिया से निर्वासित कर दिया था, आकर और बेतएल में निवास किया, और उन्हें सिखाया कि उन्हें कैसे प्रभु का भय मानना चाहिए।
२९ तथापि प्रत्येक राष्ट्र ने अपने स्वयं के ईश्वर बना लिए, और उन्हें उन उच्च-स्थानों के घरों में रख दिया जिन्हें समैरियावासियों ने बनाया था, प्रत्येक राष्ट्र ने अपने ही नगरों में जिन में वो निवास करते थे।
३० और बेबिलोन के लोगों ने सकथबेनोथ बना लिया, और कुथ के लोगों ने नरगल बना लिया, और हमात के लोगों ने अशिमा बना लिया,
३१ और अवावासियों ने निबहज़ और तरतक बना लिए, और सेफरवासियों ने अपने बच्चों को सेफरवेम के ईश्वरों अद्रामलक और अनामलक के प्रति अग्नी में भस्म कर डाला।
३२ तो उन्होंने प्रभु का भय माना, और अपने स्वयं के लिए उन में से नीचतमों में से उन उच्च-स्थानों के लिए पुरोहित बना लिए, जिन्होंने उनके लिए उन उच्च-स्थानों में बलियाँ चढ़ाईं।
३३ उन्होंने प्रभु का भय माना, और अपने ही ईश्वरों की सेवा की, उन राष्ट्रों की रीतिनुसार जिन्हें उन्होंने वहाँ से निर्वासित कर दिया था।
३४ इसी दिन तक वो अपनी पहली रीतियोंनुसार ही करते रहते हैं: वो प्रभु का भय नहीं मानते, न ही उनके अध्यादेशोंनुसार, या उनकी आज्ञाओंनुसार, या नियमानुसार और आदेशानुसार करते हैं जो प्रभु ने याकूब की सन्तानों को आदेश दिया था, जिन्हें उन्होंने इस्राएल का नाम दिया था।
३५ जिनके साथ प्रभु ने एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया था, और उन्हें निर्देश दिया था, कहते हुए, तुम अन्य ईश्वरों का भय नहीं मानोगे, न ही स्वयं उनके प्रति झुकोगे, न ही उनकी सेवा करोगे, न ही उनके प्रति बलि चढ़ाओगे:
३६ बल्कि उन प्रभु का, जो तुम्हें मिस्र की भूमी में से बाहर ऊपर निकाल लाए महा-शक्ती और एक फैली हुई भुजा से, उनका तुम भय मानोगे, और उन को तुम पूजोगे, और उनके प्रति तुम बलि चढ़ाओगे।
३७ और उन अध्यादेशों का, और उन आज्ञाओं का, और नियम का, और आदेश का, जो उन्होंने तुम्हारे लिए लिखे थे, तुम करने हेतु सदा के लिए ध्यान दोगे; और तुम अन्य ईश्वरों से नहीं डरोगे।
३८ और वो प्रतिज्ञा-पत्र जो मैंने तुम्हारे साथ बना दिया है तुम भूलोगे नहीं; न ही तुम अन्य ईश्वरों का भय मानोगे।
३९ परन्तु प्रभु अपने ईश्वर से तुम डरोगे; और वो तुम्हारा तुम्हारे समस्त शत्रुओं के हाथ से उद्धार कर देंगे।
४० तथापि उन्होंने श्रवण नहीं किया, बल्कि अपनी पहली रीतिनुसार ही करते रहे।
४१ तो इन राष्ट्रों ने प्रभु का भय माना, और अपनी ढली हुई प्रतिमाओं की सेवा की, दोनो उनकी सन्तानों ने, और उनकी सन्तानों की सन्तानों ने: जैसा उनके पित्र किया करते थे, वैसा ही यह इस दिन तक भी करते जा रहे हैं।
अट्ठारहवाँ अध्याय।
१ अब ये होने को आया इस्राएल के राजा एला के बेटे होशेअ के तीसरे वर्ष में, कि यहूदा के राजा अहज़ के बेटे हेज़ेकियाने राज करना आरम्भ किया।
२ पच्चीस वर्ष की आयु का था वो जब उसने राज करना आम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में उन्नत्तीस वर्ष राज किया। उसकी माँ का नाम भी अबी था, ज़कर्या की बेटी।
३ और उसने वह किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, उस सभी के अनुसार जो दाऊद उसके पिता ने किया था।
४ उसने उच्च-स्थानों को हटा दिया, और उन प्रतिमाओं को तोड़ डाला, और उपवनों को काट डाला, और उस पीतल के सर्प को टुकड़ों-टुकड़ों में कूट डाला जो मूसा ने बनाया था: क्योंकि उन्हीं दिनो तक इस्राएल की सन्तानों उसके प्रति सुगन्धित-धूप जलाया करती थीं: और उसने उसे नेहुशतन नाम दिया।
५ उसने इस्राएल के प्रभु ईश्वर पर भरोसा किया; ताकि उसके पश्चात यहूदा के समस्त राजाओं के बीच कोई भी उसके जैसा न था, न ही कोई उस से पूर्व।
६ क्योंकि वो प्रभु से चिपट कर रहा, और उनका अनुसरण करने से परे नहीं हटा, बल्कि उनके आदेशों का पालन करता रहा, जो प्रभु ने मूसा को आदेश दिए था।
७ और प्रभु उसके साथ थे; और जहाँ कहिं भी वो जाता था वो उन्नत होता था: और उसने असिरिया के राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, और उसकी सेवा नहीं की।
८ उसने पलिश्तिम-वंशजों को पीट डाला, गाज़ा तक भी, और उसकी सीमाओं तक, पहरेदारों की मीनार से लेकर क़िलेबन्द नगर तक भी।
९ और राजा हेज़ेकिया के चौथे वर्ष में यह होने को आया, जो कि इस्राएल के राजा एला के बेटे होशेअ का सातवाँ वर्ष था, कि असिरिया का राजा शलमनसर समैरिया के विरुद्ध चढ़ाई कर बैठा, और उस पर घेराबन्दी कर दी।
१० और तीन वर्षों के अन्त में उन्होंने उस पर अधिकार जमा लिया: हेज़ेकिया के छटे वर्ष में ही, जो कि इस्राएल के राजा होशेअ का नौवाँ है, समैरिया पर अधिकार जमा लिया गया था।
११ और असिरिया के राजा ने इस्राएल को असिरिया तक निर्वासित कर दिया, और उन्हें हला में और हबोर में गोज़न नदी के साथ, और मदयवासियों के नगरों में भेज दिया:
१२ चूँकि उन्होंने प्रभु अपने ईश्वर की वाणी का आज्ञापालन नहीं किया, बल्कि उनके प्रतिज्ञा-पत्र का उल्लंघन कर डाला, और उस सभी का जो प्रभु के सेवक मूसा ने आदेश दिया था, और उनका श्रवण नहीं किया, न ही क्रियान्वित किया।
१३ अब राजा हेज़ेकिया के चौदहवें वर्ष में असिरिया का राजा सेनखरिब यहूदा के समस्त क़िलेबन्द नगरों के विरुद्ध चढ़ आया, और उन पर अधिकार जमा लिया।
१४ और यहूदा के राजा हेज़ेकिया ने असिरिया के राजा को लकिश भिजवाया, कहते हुए, जी मैंने अपराध कर दिया है; मुझ से वापस मुड़ जाएँ: जो आप मुझ पर लगा देंगे मैं ढो लूँगा जी! और असिरिया के राजा ने यहूदा के राजा हेज़ेकिया पर तीन सौ तलनतन भार चाँदी के और सोने के तीस तलनतन भार लगा दिए।
१५ और हेज़ेकिया ने उसे वह सारी चाँदी दे दी जो प्रभु के घर में मिली, और राजा के घर के धन-कोषों में।
१६ उस समय हेज़ेकिया ने प्रभु के मन्दिर के द्वारों पर से, और उन स्तम्भों पर से जिन्हें यहूदा के राजा हेज़ेकिया ने मढ़ा था, सोना काट कर, असिरिया के राजा को प्रदान कर दिया।
१७ और असिरिया के राजा ने लकिश से तरतन और रबसरिस और रबशके को एक यरूशलेम के विरुद्ध विशाल सेना के साथ राजा हेज़ेकिया के पास भिजवा दिया। और वह चढ़ाई कर यरूशलेम आ पहुँचे। और जब वह ऊपर आ पहुँचे थे, वो आकर ऊपर वाले कुण्ड के नाले संग खड़े हो गए, जो कि धोबी के खेत के पथ में है।
१८ और जब वो राजा को पुकार मचा रहे थे, उनके पास हिल्किया का बेटा एलयाकिम जो घर-बार पर नियुक्त था, और वो लिपिक शेबना, और असफ का बेटा योआ वो अभिलेखक, बाहर निकल आए।
१९ रबशके ने उनसे कहा, अभी ही हेज़ेकिया से बोलो, इस प्रकार कहते हैं वो महान राजा, असिरिया के राजा, भई ये क्या विश्वस्तता है जिस में की तुम विश्वस्तता रखते हो?
२० तुम तो कहते हो, लेकिन यह तो बस केवल व्यर्थ शब्द ही हैं, भई मेरे पास तो युद्ध के लिए परामर्श और शक्ती हैं। तो भई अब तुम किस पर भरोसा कर रहे हो, कि तुम मेरे विरुद्ध विद्रोह कर रहे हो?
२१ अब देखो, तुम तो उस घायल सरकण्डे की लाठी पर ही भरोसा कर रहे हो, मिस्र पर ही, जिस पर यदि कोई आदमी सहारा ले, वो तो उसकी हथेली में ही घुस कर उसे भेद देगा! ऐसा ही मिस्र का राजा फैरो है उन सभी के प्रति जो उस पर भरोसा रखते हैं।
२२ परन्तु यदि तुम मुझ से कहोगे, भई हम तो प्रभु अपने ईश्वर पर भरोसा रखते हैं: क्या वो वही नहीं है, जिस के उच्च-स्थानों को और जिस की बलिवेदियों को हेज़ेकिया ने परे हटा डाला है, और यहूदा और यरूशलेम से कहा है, तुम यरूशलेम में इसी बलिवेदी के समक्ष ही पूजा करोगे?
२३ तो अब इसलिए मैं निवेदन करता हूँ तुमसे, कि मेरे प्रभु असिरिया के राजा को प्रतिभू दे दो, और मैं तुम्हें दो हज़ार घोड़े प्रदान कर दूँगा, यदि तुम स्वयं से उन पर सवारी करने वाले बिठा देने में सक्षम हो।
२४ तो फिर तुम कैसे मेरे मालिक के नौकरों में से सबसे निचले के एक कप्तान का चेहरा परे हटाकर, और अपना भरोसा मिस्र पर रथों और घुड़सवारों हेतु टिका पाओगे?
२५ क्या मैं अब प्रभु के बिना ही इस स्थान के विरुद्ध इसे नष्ट कर देने हेतु चढ़ आया हूँ क्या? प्रभु ने मुझ से कहा था, चढ़ाई कर दे भई इस भूमी के विरुद्ध, और इसका विनाश कर डाल।
२६ तब हिल्किया के बेटे एलयाकिम, और शेबना, और योआ ने रबशके से कहा, जी हम निवेदन करते हैं आपसे कि आप अपने नौकरों के साथ सिरिया की भाषा में वार्तालाप करें; क्योंकि हम उसे समझते हैं: और हमारे साथ यहूदियों की भाषा में न वार्तालाप करें उन लोगों के कानों में जो दीवार पर हैं।
२७ परन्तु रबशके ने उनसे कहा, क्या मेरे मालिक ने मुझे तुम्हारे मालिक के पास, और तुम्हारे पास, यह शब्द बोलने भेजा है क्या? उन्होंने क्या मुझे उन जनो के पास नहीं भेजा जो दीवार पर बैठे हैं, ताकि वो अपना ही मल खाएँ, और अपना ही मूत तुम्हारे साथ पीयें?
२८ तब रबशके खड़े-खड़े एक बलिष्ठ वाणी से यहूदियों की भाषा में चिल्लाया, और बोला, कहता हुआ, सुन लो उन महान राजा, असिरिया के राजा का शब्द:
२९ राजा इस प्रकार कहते हैं, हेज़ेकिया को तुम्हें धोखा मत दे देने दो भई: क्योंकि वो तुम्हें उनके हाथ में से बाहर नहीं बचा पाएगा:
३० न ही हेज़ेकिया को तुम्हें प्रभु में विश्वस्तता रखने दो, कहते हुए, प्रभु हमें अवश्य ही बचा लेंगे, और ये नगर असिरिया के राजा के हाथ में नहीं प्रदान किया जाएगा।
३१ हेज़ेकिया का श्रवण मत करो: चूँकि असिरिया के राजा इस प्रकार कह रहे हैं, मेरे साथ एक उपहार संग सन्धी कर लो, और मेरे पास बाहर निकल आओ, और तब तुम हर आदमी अपनी ही लता से, और हर एक अपने ही अंजीर के पेड़ में से खा ले, और अपनी ही सुराही में से पानियों को पी ले:
३२ जब तक मैं आकर तुम्हें एक भूमी में परे ले जाऊँ तुम्हारी ही भूमी जैसी, अनाज और अंगूर-रस की एक भूमी, रोटी और अंगूर के खेतों की भूमी, मधु और जैतून के तेल की एक भूमी, ताकि तुम जी सको, और मरो न: और भई हेज़ेकिया का श्रवण मत करो, जब वो तुम्हें सहमत करवाता है, कहता हुआ, प्रभु हमारा बचाव कर देंगे।
३३ क्या राष्ट्रों के किन्ही भी ईश्वरों ने अपनी भूमी असिरिया के राजा के हाथ से कतई भी बचाई है क्या?
३४ भई कहाँ हैं हमात के ईश्वर, और अरपद के? कहाँ हैं सेफरवेम, हेना, और ईवा के ईश्वर? क्या उन्होंने समैरिया को मेरे हाथ से बचा निकाला है क्या?
३५ कौन हैं वो देशों के समस्त इश्वरों के बीच, कि उन्होंने अपने राष्ट्र को मेरे मेरे हाथ से बाहर बचा निकाला है, कि प्रभु यरूशलेम को मेरे हाथ से बाहर बचा निकालेगा?
३६ परन्तु लोग शान्त ही रहे, और उसे एक भी शब्द उत्तर में नहीं दिया: चूँकि राजा का आदेश था, कहता हुआ, उसे उत्तर मत देना।
३७ तब हिल्किया का बेटा एलयाकिम जो घर-बार पर नियुक्त था, और वो लिपिक शेबना, और असफ का बेटा योआ वो अभिलेखक, हेज़ेकिया के पास आ पहुँचे अपने फटे हुए वस्त्रों के साथ, और उसे रबशके के शब्द सुना दिए।
उन्नीसवाँ अध्याय।
१ और यह होने को आया, जब हेज़ेकिया ने उसे सुना तो उसने अपने वस्त्र फाड़ डाले, और स्वयं को टाट-वस्त्र से ढक कर, प्रभु के घर में चला गया।
२ और उसने एलयाकिम को जो घर-बार पर नियुक्त था, और उस लिपिक शेबना को, और पुरोहितों के वृद्ध-गणों को, टाट-वस्त्र से ढके हुए, अमोज़ के बेटे यशाया उस पैग़म्बर के पास भेज दिया।
३ और उन्होंने उस से कहा, हेज़ेकिया इस प्रकार कह रहे हैं जी, ये दिन एक संकट का दिन है, और डाँट-फटकार का, और निन्दा का: चूँकि बच्चे तो जन्म लेने आ पहुँचे हैं, और जन्म दे देने की तो शक्ती ही नहीं है।
४ सम्भवतः प्रभु आपके ईश्वर रबशके के समस्त शब्द सुन लेंगे, जिसे उसके मालिक असिरिया के राजा ने जीवन्त ईश्वर को धिक्कारने भेजा है; और उन शब्दों की निन्दा करें जो प्रभु आपके ईश्वर ने सुने हैं: इस कारण उनके लिए जो शेष बचे-कुचे रह गए हैं अपनी प्रार्थना उठा दें जी।
५ तो राजा हेज़ेकिया के सेवक यशाया के पास आ पहुँचे।
६ और यशाया ने उनसे कहा, इस प्रकार तुम अपने मालिक से कहोगे, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं, उन शब्दों से मत भयभीत हो जो तुमने सुन लिए हैं, जिन से असिरिया के राजा ने मेरी निन्दा कर दी है।
७ देखो, मैं उस पर एक विस्फोट भेजूँगा, और वो एक भ्रांति सुनेगा, और अपनी ही भूमी में वापस लौट जाएगा; और मैं उसे उसी की ही भूमी में तलवार से गिरवा डालूँगा।
८ तो रबशके ने वापस लौटकर, असिरिया के राजा को लिब्ना के विरुद्ध युद्ध करता हुआ पाया: चूँकि उसने सुन लिया था कि उसने लकिश से प्रस्थान कर चुका था।
९ और जब उसने इथियोपिया के राजा तिरहका के विषय में सुना, भई देखो तो, वो आपके साथ लड़ाई करने बाहर निकल पड़ा है: तो उसने हेज़ेकिया के पास पुनः संदेशवाहक भेजे, कहते हुए,
१० इस प्रकार तुम यहूदा के राजा हेज़ेकिया से बोलोगे, कहते हुए, अपने ईश्वर को जिस में तुम भरोसा रखते हो तुम्हें धोखा मत दे देने दो, कहते हुए, यरूशलेम असिरिया के राजा के हाथ में नहीं प्रदान किया जाएगा।
११ देख लो, तुम ने सुन लिया है कि असिरिया के राजाओं ने समस्त भूमियों में क्या-क्या कर डाला है, उनका पूर्णतः से विनाश कर डालने में: और क्या तुम बच जाओगे?
१२ क्या राष्ट्रों के ईश्वरों ने उन्हें बचाया जिन्हें मेरे पित्रों ने नष्ट कर डाला; गोज़न, और हारान, और रेज़ेफ, और अदन की सन्तानें जो थेलासर में थीं?
१३ कहाँ है हमात का राजा, और अरपद का राजा, और सेफरवेम के नगर का राजा, और हेना का, और ईवा का?
१४ और हेज़ेकिया ने उन दूतों के हाथ से वो पत्र ग्रहण किया, और उसे पढ़ा: और हेज़ेकिया प्रभु के घर ऊपर चला गया, और उसे प्रभु के समक्ष फैला दिया।
१५ और हेज़ेकिया ने प्रभु के समक्ष प्रार्थना की, और कहा, हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, जो चेरूबीमों के बीच बसते हैं, आप ही ईश्वर हैं, आप अकेले ही, पृथ्वी के समस्त राज्यों के ही; आप ही ने स्वर्ग और पृथ्वी बनाए हैं।
१६ प्रभु जी, झुका लें नीचे अपने कान को और सुन लें: प्रभु जी अपनी आँखें खोल लें और देख लें: और सेनखरिब के शब्दों को सुन लें, जिसने उसे जीवन्त ईश्वर को धिक्कारने हेतु भेज दिया है।
१७ सच-मुच प्रभु, असिरिया के राजाओं ने राष्ट्रों को और उनकी भूमियों को नष्ट कर डाला है,
१८ और उनके इश्वरों को अग्नी में पटक डाला है: क्योंकि वह ईश्वर नहीं थे, बल्कि मनुष्यों के हाथों का श्रम, लकड़ी और पत्थर: इसलिए उन्होंने उन्हें नष्ट कर डाला।
१९ अब इसलिए हे प्रभु हमारे ईश्वर, मैं आपसे विनती करता हूँ जी, आप हमें उसके हाथ से बचा लें, ताकि पृथ्वी के समस्त राज्य जान जाएँ कि आप ही प्रभु ईश्वर हैं, केवल आप ही।
२० तब अमोज़ के बेटे यशाया ने हेज़ेकिया को भिजवाया, कहते हुए, इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, वो जो तुमने मुझ से सिरिया के राजा सेनखरिब के विरुद्ध प्रार्थना की है मैंने सुन ली है।
२१ यही वो शब्द है जो प्रभु ने उसके समबन्ध में बोला है; ज़ियोन की कुँवारी बेटी ने तुझ से घृणा कर दी है, और तेरी हँसी उड़ा दी है; यरूशलेम की बेटी तुझ पर अपना सर हिला रही है।
२२ तूने किसे धिक्कारा और निन्दित किया है भई? और किसके विरुद्ध तूने अपनी वाणी पदोन्नत कर दी है, और अपनी आँखों को ऊँचाई तक उठा दिया है? इस्राएल के उन पवित्र एक ही के विरुद्ध।
२३ अपने दूतों के द्वारा तूने प्रभु को धिक्कार दिया है, और कह दिया है, अपने रथों के जनौघ के साथ मैं पर्वतों के ऊँचाई तक चढ़ आया हूँ, लेबनोन के साथ ही, और उसके ऊँचे देवदार के पेड़ों को नीचे काट डालूँगा, और उसके चुनिंदा सनोवर के पेड़ों को: और मैं उसकी सीमाओं के निवासों में घुस जाऊँगा, और उसके करमल के वन में।
२४ मैंने खोद कर विचित्र पानी पी लिए हैं, और अपने पैरों के तलवे से मैंने घेराबंद स्थानों की समस्त नदियाँ सूखा दी हैं।
२५ भई क्या तूने प्राचीन काल से नहीं सुना है कि ये मैंने कैसे किया है, और पुरातन के दिनो से कि मैंने इसे रूपाकार दिया है? अब मैंने ही इसकी होनी घटवायी है, कि तू क़िलेबन्द नगरों का बर्बाद ढेरों में विध्वंस करने वाला बने।
२६ इसलिए उनके निवासियों का बल थोड़ा सा ही था, वो निराश और लज्जित थे; वो खेत की घास के समान थे, और हरी वनस्पति के समान, छत पर घास समान, और उसके उगने से पहले अंगमारी से ग्रस्त अनाज के समान।
२७ परन्तु मैं तेरी बैठक जानता हूँ, और तेरा बाहर जाना, और तेरा अन्दर आ जाना, और तेरा रोष मेरे विरुद्ध।
२८ चूँकि मेरे विरुद्ध तेरा रोष और तेरा कोलाहल मेरे कानो तक चढ़ आया है, इसलिए मैं तेरी नाक में अपना नकेल घुसेड़ दूँगा, और तेरे होंटों में अपनी लगाम, और मैं तुझे उस पथ पर वापस मोड़ दूँगा जिस पर तू आया है।
२९ और यह एक संकेत होगा तुम्हारे लिए, इस वर्ष तुम वो खाओगे जो स्वयं ही उग जाता है, और दूसरे वर्ष में जो उसी से उग जाता है; और तीसरे वर्ष में तुम बुआई कर देना, और फसल-कटाई, और अंगूर-खेत रोप देना, और उसके फलों को खा लेना।
३० और वो शेष अन्श जो यहूदा के घराने से बच निकला है तथापि पुनः नीचे जड़ पकड़ लेगा, और ऊपर फल प्रदान कर देगा।
३१ क्योंकि यरूशलेम से एक शेष अन्श बाहर निकल पड़ेगा, और वो जो ज़ियोन पहाड़ से बच निकलते हैं: सेनाओं के प्रभु का जोश यही कर डालेगा।
३२ इसलिए इस प्रकार कहते हैं प्रभु असिरिया के राजा के समबन्ध में, वो नगर में प्रवेश नहीं करेगा, न ही एक भी तीर छोड़ेगा वहाँ, न ही उसके सामने ढाल लिए आएगा, न ही उसके विरुद्ध युद्ध-टीला खड़ा कर पाएगा।
३३ जिस पथ से वो आया था, उसी से ही वो वापस लौट जाएगा, और इस नगर में नहीं भीतर घुसेगा, कहते हैं प्रभु।
३४ क्योंकि मैं इस नगर की सुरक्षा करूँगा, इसे बचाने हेतु, मेरे अपने वास्ते, और मेरे सेवक दाऊद के वास्ते।
३५ और यह होने को आया उस रात, कि प्रभु-दूत ने बाहर जाकर असिरिया-वासियों के शिविर में एक लाख पिच्चासी हज़ारों को मार डाला: और जब वह सुबह-सुबह उठे, देखो तो, वो तो सभी मृत शव थे!
३६ तो असिरिया का राजा सेनखरिब विदा हो लिया, और वापस लौट चला, और निनवे में बस गया।
३७ और यह होने को आया, कि जैसे वो अपने ईश्वर निसरोक के घर में पूजा कर रहा था, कि उसके बेटों अद्रामलक और शरेज़र ने उसे तलवार से मार डाला: और वो अरमेनिया की भूमी में बच कर भाग निकले। और एसरहदोन उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
बीसवाँ अध्याय।
१ उन दिनो में हेज़ेकिया मृत्यु पर्यत ही रोगग्रस्त था। और अमोज़ के बेटे यशाया ने उसके पास आकर, और उस से कहा, प्रभु ऐसा कह रहे हैं, अपने घर को व्यवस्थित कर लें; क्योंकि आप मर जाओगे, और जीयोगे नहीं।
२ तब उसने अपने चहरे को दीवार की ओर मोड़ लिया, और प्रभु से प्रार्थना की, कहते हुए,
३ हे प्रभु, मैं आपसे विनती करता हूँ जी, अभी ही स्मरण कर लें कि मैं आपके समक्ष सत्य में और एक परिपूर्ण हृदय के साथ कैसे-कैसे चला हूँ, और वो किया जो आपकी दृष्टि में उचित है। और हेज़ेकिया घोरता से रोया।
४ और यह होने को आया, कि यशाया के बीच वाले आँगन में से बाहर निकल जाने से पहले ही, प्रभु के शब्द उसे आए, कहते हुए,
५ पुनः मुड़ जाओ, और मेरे गण के कप्तान हेज़ेकिया को बता दो, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, दाऊद तुम्हारे पिता के ईश्वर ही, मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली है, मैंने तुम्हारे आँसू देख लिए हैं: देखो मैं तुम्हें स्वस्थ कर दूँगा: तीसरे दिन तुम प्रभु के घर में चढ़ आओगे।
६ और मैं तुम्हारे दिनो में पन्द्रह वर्ष जोड़ दूँगा; और मैं तुम्हारा और इस नगर का बचाव असिरिया के राजा के हाथ से कर दूँगा; और मैं इस नगर की सुरक्षा करूँगा, मेरे अपने वास्ते, और मेरे सेवक दाऊद के वास्ते।
७ और यशाया ने कहा, अंजीरों का एक गुच्छा ले लो। और उन्होंने उसे लेकर उस फोड़े पर रख दिया, और वो स्वस्थ हो गया।
८ और हेज़ेकिया ने यशाया से कहा, जी वो संकेत क्या होगा कि प्रभु मुझे स्वस्थ बना देंगे, और कि मैं तीसरे दिन प्रभु के घर में ऊपर चढ़ आऊँगा।
९ और यशाया ने कहा, यह संकेत तुम प्रभु से प्राप्त करोगे, कि प्रभु वो कार्य कर देंगे जो उन्होंने बोला है: परछाई क्या आगे दस अन्श जाएगी, या दस अन्श पीछे?
१० और हेज़ेकिया ने उत्तर दिया, ये तो एक हल्की सी ही बात है कि परछाई दस अन्श नीचे जाए: न जी, बल्कि परछाई को दस अन्श वापस पीछे आ जाने दें जी।
११ और पैग़म्बर यशाया प्रभु की ओर चीखा: और वो परछाई को दस अन्श पीछे ले आए, जिस से कि वो अहज़ की धूप-घड़ी में नीचे जा चुकी थी।
१२ उस समय बेबिलोन के राजा, बलदन के बेटे बरोदकबलदन ने हेज़ेकिया को पत्र भेजे और एक उपहार: क्योंकि उसने सुना था कि हेज़ेकिया रागग्रस्त हुआ था।
१३ और हेज़ेकिया ने उनका श्रवण कर लिया, और उन्हें अपनी अनमोल वस्तुओं का समस्त भवन, चाँदी, और सोना, और सुगन्धित-द्रव्य, और बहुमूल्य मरहम, और अपने अस्त्र-शस्त्रों का समस्त भवन, और वो सभी कुछ जो उसके धन-कोषों में पाया गया था, दिखला दिया: उसके घर में कुछ भी न था, न ही उसके समस्त अधिराज्य में, जो हेज़ेकिया ने उन्हें नहीं दिखाया।
१४ तब पैग़म्बर यशाया राजा हेज़ेकिया के पास आ पहुँचा, और उस से कहा, क्या कहा इन लोगों ने? और यह कहाँ से आए हैं आपके पास? और हेज़ेकिया ने कहा, यह तो एक दूर-देश से पधारे हैं, बेबिलोन से ही।
१५ और उसने कहा, क्या देख लिया हैं इन्होंने आपके घर में? और हेज़ेकिया ने उत्तर दिया, सभी वस्तुएँ जो मेरे घर में हैं इन्होंने देख लीं हैं: मेरे धन-कोषों में कुछ भी नहीं है जो मैंने इन्हें नहीं दिखलाया है।
१६ और यशाया ने हेज़ेकिया से कहा, प्रभु का शब्द सुन लें।
१७ देख लो, वो दिन पधार रहे हैं, कि वो सभी कुछ जो तुम्हारे घर में है, और जिसे तुम्हारे पित्रों ने इस दिन तक भण्डार एकत्रित कर रख है, बेबिलोन में उठा ले जाया जाएगा: कुछ भी छोड़ा नहीं जाएगा, कहते हैं प्रभु।
१८ और तुम्हारे बेटों में से जो तुम में से उतपन्न होकर निकलेंगे, जिन्हें तुम जनोगे, वो परे हटा ले जाएँगे; और वो बेबिलोन के राजा के महल में नपुंसक होंगे।
१९ तब हेज़ेकिया ने यशाया से कहा, जी प्रभु का शब्द भला है जो आपने बोल दिया है। और उसने कहा, क्या यह भला नहीं है, कि यदि शान्ति और सत्य मेरे दिनो में रहें?
२० और हेज़ेकिया के वो शेष कार्य, और उसका सम्पूर्ण बल, और कि कैसे उसने एक कुण्ड बनाया था, और एक नाला, और नगर में पानी ले आया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२१ और हेज़ेकिया अपने पित्रों के साथ सो गया: और मनश्शे उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
इक्कीसवाँ अध्याय।
१ मनश्शे बारह वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और यरूशलेम में पचपन वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम हेफज़िबा था।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, अन्यप्रजातियों की अतिघृणितताओं के अनुसार ही, जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने से बाहर निष्कासित कर डाला था।
३ क्योंकि उसने पुनः उन उच्च-स्थानों का निर्माण कर दिया जिन्हें उसके पिता हेज़ेकिया ने नष्ट कर डाला था; और उसने बअल के लिए बलिवादियाँ खड़ी कर दीं, और एक उपवन बनाया, जैसा कि इस्राएल के राजा अहाब ने किया था; और स्वर्ग की समस्त सेना की अर्चना की, और उनकी सेवा की।
४ और उसने प्रभु के घर में बलिवेदियों का निर्माण किया, जिस घर के विषय में प्रभु बोले थे, यरूशलेम में मैं अपना नाम रखूँगा।
५ और उसने प्रभु के घर के दोनो आँगनों में स्वर्ग की समस्त सेना के लिए बलिवेदियाँ बनाईं।
६ और उसने अपने बेटे को अग्नी में से पार भिजवाया, और जादू-टोना किया, और इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों का उपयोग किया, और प्रेतभावात्माओं और तांत्रिकों से सम्पर्क बनाया: उसने प्रभु की दृष्टि में उन्हें क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु बहुत दुष्टता क्रियान्वित की।
७ और उसने उस उपवन की, जो उसने घर में बनाया था, एक ढली हुई प्रतिमा स्थित कर दी, जिसके विषय में प्रभु ने दाऊद और सुलेमान उसके बेटे से कहा था, इसी घर में, और यरूशलेम में, जिसे मैंने इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से चुन लिया है, मैं अपना नाम सदा के लिए स्थित कर दूँगा:
८ न ही मैं इस्राएल के पैरों को इस भूमी में से अब और बाहर भटकवाऊँगा जिसे मैंने इनके पित्रों को प्रदान कर दिया था; बस केवल यदि वो उस सभी के अनुसार कर देने का ध्यान देते रहेंगे जो मैंने इन्हें आदेश दे दिया है, और उस समस्त नियमानुसार जो मेरे सेवक मूसा ने उन्हें आदेश दिया था।
९ परन्तु उन्होंने श्रवण नहीं किया: और मनश्शे ने उन्हें उन राष्ट्रों से और भी अधिक बुराई कर देने हेतु बहका दिया जिनका विध्वंस प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष कर डाला था।
१० और प्रभु अपने सेवकों उन पैग़म्बरों द्वारा बोले, कहते हुए,
११ क्योंकि यहूदा के राजा मनश्शे ने ये अतिघृणितताएँ कर डाली हैं, और उन एमोरवासियों द्वारा क्रियान्वित उस सभी से भी अधिक दुष्टता कर डाली है, जो उसके सम्मुख थे, और यहूदा से भी अपनी मूर्तीयों के साथ पाप करवा डाला है:
१२ इसलिए इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, देखो, मैं यरूशलेम और यहूदा पर ऐसी बुराई ला रहा हूँ, कि जो कोई भी उसके विषय में सुनता है, उसके दोनो ही कान झनझना जाएँगे!
१३ और मैं यरूशलेम के ऊपर समैरिया की नापने वाली डोरी, और अहाब के घराने का साहुल खींच डालूँगा: और मैं यरूशलेम को पोंछ डालूँगा जैसे एक आदमी एक तवे को पोंछ डालता है, उसे पोंछता हुआ, और उसे पूरा पलटता हुआ।
१४ और मैं अपनी विरासत के शेष अन्श को त्याग दूँगा, और उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में प्रदान कर दूँगा; और वो एक शिकार बन कर रह जाएँगे और एक लूट-पाट उनके समस्त शत्रुओं के लिए;
१५ क्योंकि इन्होंने वो कर डाला है जो मेरी दृष्टि में बुरा था, और मुझे क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया है, उसी दिन से लेकर जब उनके पित्र मिस्र में से बाहर निकल आए थे, इसी दिन तक भी।
१६ इसके अतिरिक्त मनश्शे ने अत्याधिक निर्दोष रक्त बहाया, जब तक कि उसने यरूशलेम को एक छोर से लेकर दूसरे तक भर डाला था; उसके पाप के अतिरिक्त जिस से उसने यहूदा से पाप करवाया था, वो कर डालने में जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था।
१७ अब मनश्शे के वो शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया, और उसका पाप जो पाप उसने किया, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
१८ और मनश्शे अपने पित्रों के साथ लेट गया, और अपने ही घर के उद्यान में दफ़ना दिया गया था, अज़्ज़ा के उद्यान में: और अमोन उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
१९ अमोन बाईस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में दो वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम मशुल्लेमेथ था, योतबा के हरुज़ की बेटी।
२० और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, जैसा उसके पिता मनश्शे ने किया था।
२१ और वो उस समस्त पथ में चला जिस में उसका पिता चला था, और उन मूर्तियों की सेवा की जिनकी उसके पिता ने सेवा की थी, और उनकी अर्चना की:
२२ और उसने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर को त्याग दिया, और प्रभु के पथ में नहीं चला।
२३ और अमोन के नौकरों ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा कर राजा को उसके स्वयं के ही घर में मार डाला।
२४ और भूमी के लोगों ने उन सभी को मार डाला जिन्होंने राजा अमोन के विरुद्ध षड्यंत्र रचाया था; और भूमी के लोगों ने उसके बेटे योशियाह को उसके स्थान में राजा बना दिया।
२५ अब अमोन के वो शेष कार्य, जो उसने किए थे, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२६ और उसे अज़्ज़ा के उद्यान में उसके मक़बरे में दफ़ना दिया गया था: और योशियाह उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
बाईसवाँ अध्याय।
१ योशियाह आठ वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में इकत्तीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम येदिदा था, बोसकथ के अदाया की बेटी।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में भला था, दाऊद अपने पिता के समस्त पथ में चलता हुआ, और परे नहीं मुड़ा दाएँ हाथ की ओर या बाएँ की ओर।
३ और राजा योशियाह के अठ्ठारहवें वर्ष में ये होने को आया, कि राजा ने मशुल्लम के बेटे अज़लिया के बेटे शफन, उस लिपक को, प्रभु के घर में भेजा, कहते हुए,
४ उच्च पुरोहित हिल्किया के पास ऊपर चले जाओ, ताकि वो उस चाँदी को गिन ले जो प्रभु के घर में लाई जाती है, जिसे द्वार-पालों ने लोगों से एकत्रित कर लिया है:
५ और उन्हें उसे काम करने वालों के हाथ में प्रदान कर देने दो, जिनके पास प्रभु के घर का निरीक्षण-कार्य है: और उन्हें उन काम करने वालों को उसे दे देने दो जो प्रभु के घर में है, घर की दरारों के सुधार हेतु,
६ बढ़ईयों, और राजगीरों, और मिस्त्रियों को, और लकड़ी और कटे हुए पत्थर को खरीदने हेतु घर की मरम्मत करने के लिए।
७ तथापि उनके साथ पैसे का कोई भी लेखा-जोखा नहीं किया गया था जो उनके हाथ में प्रदान कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने विश्वसनीयता से कार्य करते थे
८ और उच्च पुरोहित हिल्किया ने लिपिक शफन से कहा, मुझे प्रभु के घर में नियम की पुस्तक मिल गई है भई। और हिल्किया ने शफन को वो पुस्तक प्रदान कर दी और उसने उसे पढ़ा।
९ और लिपिक शफन राजा के पास आया, और पुनः राजा को शब्द ले आया और कहा, जी आपके नौकरों ने वो पैसा एकत्रित कर लिया है जो घर में पाया गया था, और उसे कार्य करने वालों के हाथ में प्रदान कर दिया है, जिनके पास प्रभु के घर का निरीक्षण-कार्य है।
१० और लिपिक शफन ने राजा को दिखाया, कहते हुए, जी पुरोहित हिल्किया ने मुझे एक पुस्तक दे दी है। और शफन ने उसे राजा के समक्ष पढ़ा।
११ और यह होने को आया, जब राजा ने नियम की पुस्तक के शब्दों को सुन लिया था, तो उसने अपने कपड़े फाड़ डाले।
१२ और राजा ने पुरोहित हिल्किया, और शफन के बेटे अहिकम, और मिकायाह के बेटे अकबोर, और लिपिक शफन, और राजा के एक सेवक असाहिया को आदेश दिया, कहते हुए,
१३ चले जाओ तुम, मेरे लिए, और लोगों के लिए, और समस्त यहूदा के लिए, इस पाई गई पुस्तक के शब्दों के समबन्ध में प्रभु से पूछ-ताछ करो: क्योंकि प्रभु का आक्रोश विशाल है जो हमारे विरुद्ध सुलग उठा है, चूँकि हमारे पित्रों ने इस पुस्तक के शब्दों का श्रवण नहीं किया है, उस सभी के अनुसार क्रियान्वित कर देने हेतु जो हमारे समबन्ध में लिखा हुआ है।
१४ तो पुरोहित हिल्किया, और अहिकम, और अकबोर, और शफन, और असाहिया, वस्त्रागार का रख-रखाव रखने वाले हरहस के बेटे, थिकवाह के बेटे शल्लुम की पत्नी पैग़म्बरिका हुल्दा के पास चले गए; अब वो यरूशलेम के दूसरे भाग में निवास करती थी और उन्होंने उसके साथ वार्तालाप किया।
१५ और उसने उनसे कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, उस आदमी को बता दो जिसने तुम्हें मेरे पास भेजा है,
१६ प्रभु इस प्रकार कहते हैं, देखो लो भई, मैं इस स्थान पर, और इसके निवासियों पर बुराई लाऊँगा, उस पुस्तक के ही सभी शब्दों को जो यहूदा के राजा ने पढ़ लिए हैं:
१७ क्योंकि इन्होंने मुझे त्याग दिया है, और दूसरे इश्वरों के प्रति सुगन्धित-धूप जला डाली है, ताकि वो मुझे क्रोध के प्रति भड़का दें उनके हाथों से किए समस्त कार्यों द्वारा ही; इसलिए मेरा आक्रोश इस स्थान के विरुद्ध सुलग उठेगा, और बुझेगा नहीं।
१८ परन्तु यहूदा के राजा से जिसने तुम्हें प्रभु से पूछ-ताछ करने हेतु भेजा है, इस प्रकार तुम उस से कहोगे, इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, उन शब्दों के सन्दर्भ में जो तुमने सुन लिए हैं;
१९ चूँकि तुम्हारा हृदय कोमल था, और तुमने प्रभु के सम्मुख स्वयं को विनम्र बना दिया, जब तुमने सुना वो जो मैंने इस स्थान के विरुद्ध, और इसके निवासियों के विरुद्ध बोल दिया था, कि ये एक उजाड़ता और एक श्राप बन जाएँगे, और तुमने अपने कपड़े फाड़ डाले, और मेरे सम्मुख रोए हो; मैंने भी तुम्हें सुन लिया है, कहते हैं प्रभु।
२० इसलिए देख लो, मैं तुम्हें तुम्हारे पित्रों के पास एकत्रित कर दूँगा, और तुम अपनी कब्र में शान्ति से एकत्रित हो जाओगे; और तुम्हारी आँखें वो समस्त बुराई नहीं देखेंगी जो मैं इस स्थान पर ले आऊँगा। और वो राजा के पास शब्द वापस ले आए।
तेईसवाँ अध्याय।
१ और राजा ने भिजवा दिए, और उन्होंने उसके पास यहूदा और यरूशलेम के समस्त वृद्ध-गण एकत्रित कर दिए।
२ और राजा ने प्रभु के घर में ऊपर जाकर प्रवेश किया, और यहूदा के समस्त पुरुष और यरूशलेम के समस्त निवासी उसके साथ, और वो पुरोहित-गण, और पैग़म्बर, और समस्त लोग, दोनो छोटे और बड़े: और उसने उनके कानों में पढ़ दिए उस प्रतिज्ञा-पत्र के पुस्तक के समस्त शब्द जो प्रभु के घर में मिल गई थी।
३ और राजा एक स्तम्भ के साथ ही खड़ा था, और प्रभु के समक्ष एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, प्रभु के पीछे-पीछे चलने का, और उनके आदेशों और उनके साक्ष्यों और उनके अध्यादेशों को रखने का उनके सम्पूर्ण हृदय के साथ और उनकी सम्पूर्ण आत्मा के साथ, इस प्रतिज्ञा-पत्र के शब्दों को क्रियान्वित कर देने हेतु जो इस पुस्तक में लिखे गए थे। और समस्त लोग इस प्रतिज्ञा-पत्र के प्रति खड़े हो गए।
४ और राजा ने उच्च पुरोहित हिल्किया को, और द्वितीय-वर्ग के पुरोहितों को, और द्वार के रखवालों को आदेश दिया, प्रभु के मंदिर में से बअल, और उपवन, और स्वर्ग की समस्त सेना के लिए बना दिए गए समस्त पात्रों को बाहर निकाल लाने का: और उसने उन्हें यरूशलेम से बाहर किद्रोन के खेतों में भस्म कर डाला, और उनकी राखों को बेतएल तक ले गया।
५ और उसने उन बुतपरस्त पुजारियों को ख़त्म कर डाला, जिन्हें यहूदा के राजाओं ने यहूदा के नगरों के उच्च-स्थानो में, और यरूशलेम के चारों-ओर के स्थानों में सुगन्धित-धूप जला देने के लिए स्थित किया था; उन्हें भी जो बअल के प्रति, सूर्य के प्रति, और चन्द्रमा के प्रति, और ग्रहों के प्रति, और स्वर्ग की समस्त सेना के प्रति सुगन्धित-धूप जलाते थे।
६ और वो प्रभु के घर में से उस उपवन को बाहर ले आया, यरूशलेम के बाहर ही, किद्रोन नदी तक, और उसे किद्रोन नदी पर भस्म कर डाला, और उसे चूरे-चूरे में कूट डाला, और उसके चूरे को लोगों की सन्तानों की क़ब्रों पर फैंक डाला।
७ और उसने समलैंगिकों के घरों को नीचे तोड़ डाला, जो प्रभु के घर से सटे हुए थे, जहाँ स्त्रियाँ उस उपवन के लिए लटकनें बुनती थीं।
८ और वो सभी पुरोहितों को यहूदा के नगरों में से बाहर ले आया, और उन उच्च-स्थानों को प्रदूषित कर डाला जहाँ उन पुरोहितों ने सुगन्धित-धूप जलाया करते थे, गेबा से लेकर बेएरशबा तक, और उन दरवाज़ों के उच्च-स्थानों को जो नगर के राज्यपाल यहोशुआ के दरवाज़े के प्रवेश में थे नीचे तोड़ डाला, जो किसी आदमी के दाहिने हाथ पर थे नगर के दरवाज़े पर।
९ तथापि उन उच्च स्थानों के पुरोहित यरूशलेम में प्रभु की बलिवेदी तक ऊपर नहीं आए, बल्कि उन्होंने बेख़मीरी रोटी में से अपने भाई-जनो के बीच खाया।
१० और उसने तोफथ को प्रदूषित कर डाला, जो हिनम की सन्तानों की घाटी में है, ताकि कोई भी आदमी अपने बेटे या अपनी बेटी को मोलेक के प्रति अग्नी में से पार न करवाए।
११ और उसने उन घोड़ों को परे हटा दिया जिन्हें यहूदा के राजाओं ने सूर्य को प्रदान कर दिया था, प्रभु के घर के प्रवेश स्थान पर ही, नेथनमेलेक उस अफ्सर के कक्ष के साथ ही, जो उपक्षेत्रों में था, और उन सूर्य के रथों को अग्नी से भस्म कर डाला।
१२ और उन बलिवेदियों को जो अहज़ के ऊपरी कक्ष के ऊपर थीं, जिन्हें यहूदा के राजाओं ने बनाया था, और उन बलिवेदियों को जिन्हें मनश्शे ने प्रभु के घर के दोनो आँगनों में बनाया था, राजा ने नीचे तोड़ डाला, और वहाँ से नीचे तोड़-गिराया, और उनकी धूल को किद्रोन नदी में फैंक डाला।
१३ और उन उच्च स्थानों को जो यरूशलेम के समक्ष थे, जो कि भ्रष्टता के पहाड़ के दाएँ हाथ पर थे, जिन्हें इस्राएल के राजा सुलेमान ने सिदोनियों की अतिघृणितता अश्तरोत के लिए, और मोआब-वंशजों की अतिघृणितता कमोश के लिए, और अम्मोन की सन्तानों की अतिघृणितता मिल्कोम के लिए बनाया था, राजा ने दूषित कर डाला।
१४ और उसने उन प्रतिमाओं को टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और उन उपवनों को नीचे काट डाला, और उनके स्थानों को मनुष्यों की हड्डियों से भर दिया।
१५ इसके अतिरिक्त बेतएल में वो जो बलिवेदी, और वो उच्च-स्थान जो नेबत के बेटे यरोबोम ने बनाए थे, जिसने इस्राएल से पाप करवाया था, दोनो उस बलिवेदी को और उस उच्च-स्थान को उसने नीचे तोड़ डाला, और उस उच्च-स्थान को भस्म करके, और उसे चूरे-चूरे में छोटा कूट डाला, और उस उपवन को भस्म कर डाला।
१६ और जैसे योशियाह ने स्वयं को मोड़ा, उसने उन मक़बरों को देखा जो वहाँ पहाड़ पर थे, और भिजवाकर, और उन मक़बरों में से उन हड्डियों को निकाल कर, और उन्हें बलिवेदी पर भस्म कर डाला, और उसे प्रदूषित कर दिया, प्रभु के शब्दानुसार ही जिसे ईश्वर के बन्दे ने घोषित किया था, जिस ने इन शब्दों की घोषणा की थी।
१७ तब उसने कहा, भई ये शीर्षक क्या है जो मैं देख रहा हूँ? और उस नगर के लोगों ने उसे बताया, जी ये तो उस ईश्वर के बन्दे का मक़बरा है जिस ने यहूदा से आकर इन बातों की घोषणा की थी जिन्हें अपने बेतएल की उस बलिवेदी के विरुद्ध कर डाला है।
१८ और उसने कहा, उन बन्दे को रहने दो; कोई भी आदमी उनकी अस्थियों को न हिलाए। तो उन्होंने उसकी अस्थियों को अकेला छोड़ दिया, उस पैग़म्बर की अस्थियों के साथ ही जो समैरिया ने निकला था।
१९ और उन उच्च-स्थानों के समस्त घरों को भी जो समैरिया के नगरों में थे, जिन्हें इस्राएल के राजाओं ने प्रभु को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु बनाया था, योशियाह ने हटा दिया, और उनके साथ वही क्रियाएँ कीं उन समस्त क्रीयाओंनुसार जो उसने बेतएल में की थीं।
२० और उसने उन उच्च-स्थानों के समस्त पुरोहितों को मार डाला जो उन बलिवेदियों पर थे, और उन पर लोगों की हड्डियाँ जला डालीं, और यरूशलेम वापस लौट चला।
२१ और राजा ने सभी लोगों को आदेश दिया, कहते हुए, प्रभु अपने ईश्वर के प्रति पार-करना रखो, जैसा की इस प्रतिज्ञा-पत्र की पुस्तक में लिखा है।
२२ अवश्य ही इस्राएल का न्याय करने वाले उन न्यायाधीषों के दिनो से लेकर ऐसा पार-करना नहीं मनाया गया था, न ही इस्राएल के राजाओं के, न ही यहूदा के राजाओं के समस्त दिनो में;
२३ बल्कि राजा योशियाह के अट्ठारहवें वर्ष में यरूशलेम में प्रभु के प्रति ये पार-करना रखा गया था।
२४ इसके अतिरिक्त प्रेतभावात्माओं-वालों और तांत्रिकों को, और प्रतिमाओं को, और मूर्तीयों को, और उन समस्त अति-घृणितताओं को जो यहूदा की भूमी में और यरूशलेम में देखीं गई थीं, योशियाह ने परे हटा दिया, ताकि वो नियम के उन शब्दों को क्रियान्वित कर दे जो उस पुस्तक में लिखे थे जिसे पुरोहित हिल्किया ने प्रभु के घर में पाया था।
२५ और उसके जैसा कोई भी राजा उस से पहले न था, जो प्रभु की ओर अपने सम्पूर्ण हृदय से, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा से, और अपने सम्पूर्ण बल से मुड़ा, मूसा के समस्त नियमानुसार; न ही उसके पश्चात कोई अन्य उसके जैसा उठा।
२६ तथापि प्रभु अपने महा-आक्रोश की क्रूरता से परे नहीं मुड़े, जिस से कि उनका क्रोध यहूदा के विरुद्ध सुलग उठा था, उन समस्त उत्तेजनाओं के कारण जिन से मनश्शे ने उन्हें उत्तेजित कर दिया था।
२७ और प्रभु ने कहा, मैं यहूदा को भी अपनी दृष्टि से बाहर परे हटा दूँगा, जैसे मैंने इस्राएल को परे हटा दिया है, और मैं इस नगर यरूशलेम को परे कर दूँगा जिसे मैंने चुना है, और उस घर को जिसके विषय में मैंने बोला था, मेरा नाम वहाँ होगा।
२८ अब योशियाह के वो शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२९ उसके दिनो में मिस्र के राजा फैरोनेको ने असिरिया के राजा के विरुद्ध फरात नदी तक चढ़ाई कर दी: और राजा योशियाह उसके विरुद्ध चढ़ाई कर बैठा; और उसने उसे मगिद्दो में मार डाला, जब उसने उसे देख लिया था।
३० और उसके नौकर उसे मगिद्दो से एक रथ में मृत उठाकर यरूशलेम ले आए, और उसे उसके स्वयं के मक़बरे में दफ़ना दिया। और भूमी के लोगों ने योशियाह के बेटे येहोअहज़ को लिया, और उसका अभिषेक कर दिया, और उसे उसके पिता के स्थान में राजा बना दिया।
३१ येहोअहज़ तेईस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में तीन माह राज किया। और उसकी माँ का नाम हमुतल था, लिब्ना के यिर्मियाह की बेटी।
३२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उस सभी के अनुसार जो उसके पित्रों ने किया था।
३३ और फैरोनेको ने उसे हमात की भूमी में रिब्ला में बन्दी बना दिया, ताकि वो यरूशलेम में राज न कर सके; और उसने भूमी पर चाँदी के सौ तलनतन भारों का और सोने के एक तलनतन भार का एक कर लागू कर दिया।
३४ और फैरोनेको ने योशियाह के बेटे एलियाकिम को योशियाह उसके पिता के स्थान में राजा बना दिया, और उसने नाम को येहोयकिम में परिवर्तित कर दिया, और येहोअहज़ को परे ले गया: और वो मिस्र आ पहुँचा, और वहीं मर गया।
३५ और येहोयकिम ने वो चाँदी और वो सोना फैरो को दिया; परन्तु उसने भूमी पर कर चढ़ा दिया फैरो के आदेशानुसार उस पैसे की भरपाई करने के लिए: उसने वो चाँदी और वो सोना भूमी के लोगों में से निकाला, हर एक से उसके करानुसार ही, उसे फैरोनेको को दे देने हेतु।
३६ येहोयकिम पच्चीस वर्ष कि आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में ग्यारह वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम ज़ेबुदा था, रुमाह के पेदायाह की बेटी।
३७ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उस सभी के अनुसार जो उसके पित्रों ने किया था।
चौबीसवाँ अध्याय।
१ उसके दिनो में बेबिलोन के राजा नबूकदनेज़्ज़र ने चढ़ाई कर दी, और येहोयकिम तीन वर्षों तक उसका नौकर बना रहा: तब उसने मुड़कर उसके विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
२ और प्रभु ने उसके विरुद्ध भेज दिए कसदियों के सैन्य-दल, और सिरियावासियों के सैन्य-दल, और मोआब-वंशजों के सैन्य-दल, और अम्मोन की सन्तानों के सैन्य-दल, और उन्हें यहूदा के विरुद्ध उसे नष्ट कर देने हेतु भेज दिए, प्रभु के शब्दानुसार ही, जो वो अपने नौकरों उन पैग़म्बरों द्वारा बोले थे।
३ अवश्य ही प्रभु के ही आदेश पर ही यह यहूदा पर आ पड़ा था, उन्हें उनकी दृष्टि से बाहर हटा डालने हेतु ही, मनश्शे के पापों के कारण, उस सभी के अनुसार जो उसने किया था;
४ और उस निर्दोष रक्त के लिए भी जो उसने बहाया था: क्योंकि उसने यरूशलेम को निर्दोष रक्त से भर दिया था; जो प्रभु क्षमा करने वाले नहीं थे।
५ अब येहोयकिम के वो शेष कार्य, और वो सब कुछ जो उसने किया था, क्या वो यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
६ तो येहोयकिम अपने पित्रों के साथ सो गया: और येहोयकिन उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
७ और मिस्र का राजा अब और पुनः अपनी भूमी में से बाहर निकल कर नहीं आया: चूँकि बेबिलोन के राजा ने मिस्र की नदी से लेकर फरात नदी तक वो सभी कुछ ले लिया था जो मिस्र के राजा का था।
८ येहोयकिन अठ्ठारह वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में तीन माह राज किया। और उसकी माँ का नाम नहुश्ता था, यरूशलेम के एलनेथन की बेटी।
९ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उस सभी के अनुसार जो उसके पित्रों ने किया था।
१० उस समय बेबिलोन के राजा नबूकदनेज़्ज़र के नौकर यरूशलेम के विरुद्ध चढ़ आए, और नगर की घेराबन्दी कर दी गई थी।
११ और बेबिलोन का राजा नबूकदनेज़्ज़र नगर के विरुद्ध चढ़ाई कर बैठा, और उसके नौकरों ने उसकी घेराबन्दी कर ही दी।
१२ और यहूदा का राजा येहोयकिन बेबिलोन के राजा के पास बाहर निकल चला, वो, और उसकी माता, और उसके नौकर, और उसके मुखिया, और उसके अफ्सर: और बेबिलोन के राजा ने उसे उसके राज के आठवें साल में ले लिया।
१३ और उसने वहाँ से प्रभु के घर के समस्त धन-कोषों, और राजा के घर के धन-कोषों को बाहर निकाल लिया, और सोने के उन समस्त पत्रों को टुकड़ों-टुकड़ों में काट डाला जिन्हें इस्राएल के राजा सुलेमान ने प्रभु के मन्दिर में बनाया था, जैसा कि प्रभु ने कहा था।
१४ और उसने समस्त यरूशलेम को परे निर्वासित कर दिया, और समस्त मुखियों को, और समस्त शूरवीरों को, यहाँ तक कि दस हज़ार बंदियों को ही, और समस्त कारीगरों को और लुहारों को: कोई भी बचा नहीं रहा, सिवाय भूमी के अति-दरिद्रों जैसे लोगों के सिवा।
१५ और वो येहोयकिन को बेबिलोन में निर्वासित-उठा ले गया, और राजा की माता को, और राजा की पत्नियों को, और उसके अफ़सरों को, और भूमी के शक्तिमानों को, वो यरूशलेम से बेबिलोन निर्वासित-उठा ले गया।
१६ और समस्त बलशाली-शूरवीर, सात हज़ार ही, और कारीगर और लुहार एक हज़ार, वो सभी जो बलशाली थे और युद्ध करने के योग्य, उन्हीं को ही बेबिलोन का राजा बेबिलोन बन्दी ले आया।
१७ और बेबिलोन के राजा ने उसके पिता के भाई मत्तनियाह को उसके स्थान में राजा बना दिया, और उसके नाम को ज़देकिया में प्रवर्तित कर दिया।
१८ ज़देकिया इक्कीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में ग्यारह वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम हमुतल था, लिब्ना के यिर्मियाह की बेटी।
१९ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उस सभी के अनुसार जो येहोयकिम ने किया था।
२० चूँकि प्रभु के क्रोध के माध्यम से यरूशलेम और यहूदा में यह होने को आया, जब तक कि उन्होंने उन्हें अपनी उपस्थिति से बाहर नहीं निकाल दिया था, कि ज़देकिया ने बेबिलोन के राजा के विरुद्ध विद्रोह कर डाला।
पच्चीसवाँ अध्याय।
१ और उसके राज के नौवें वर्ष में, दसवें महीने में, महीने के दसवें दिन में, ये होने को आया कि बेबिलोन का राजा नबूकदनेज़्ज़र आ पहुँचा, वो, और उसकी समस्त सेना, यरूशलेम के विरुद्ध, और उसके विरुद्ध पड़ाव डाल दिया; और उसके विरुद्ध चारों ओर किलों और गढ़ों का निर्माण कर दिया।
२ और उस नगर की घेराबन्दी राजा ज़देकिया के ग्यारहवें साल तक रही।
३ और चौथे महीने के नौवें दिन में नगर में भुख-मरी पड़ गई, और भूमी के लोगों के लिए कोई भी रोटी न थी।
४ और वो नगर तोड़ दिया गया था, और रात-रात में ही सभी योद्धा पुरुष दो दीवारों के बीच वाले दरवाज़े के पथ पर से भाग-खड़े हुए, जो कि राजा के उद्यान के साथ है: अब वो कसदी नगर के विरुद्ध थे चारों ओर ही: और राजा पथ पर चला गया मैदान की ओर ही।
५ और उन कसदियों की सेना ने राजा का पीछा किया, और उसे यरीहो के मैदानों में पार कर लिया: और उसकी समस्त सेना उस से तितर-बितर हो गई थी।
६ तो उन्होंने राजा को पकड़ लिया, और उसे बेबिलोन के राजा के पास ऊपर रिब्ला ले आए; और उन्होंने उसका न्याय-निर्धारण कर डाला।
७ और उन्होंने ज़देकिया के बेटों को उसकी आँखों के सामने ही मार डाला, और ज़देकिया की आँखों को फोड़ डाला, और उसे पीतल की बेड़ियों से बाँध दिया, और उसे बेबिलोन उठा ले गए।
८ और पाँचवें महीने में, महीन के सातवें दिन, जो कि बेबिलोन के राजा राजा नबूकदनेज़्ज़र का उन्नीसवाँ साल है, नबूज़रदन रक्षकों का कप्तान आ पहुँचा, बेबिलोन के राजा का एक नौकर, यरूशलेम में ही:
९ और उसने प्रभु के घर को भस्म कर डाला, और राजा के घर को, और यरूशलेम के समस्त घरों को, और प्रत्येक महान पुरुष के घर को उसने अग्नी से भस्म कर डाला।
१० और कसदियों के समस्त सेना ने, जो रक्षकों के कप्तान के साथ थीं, यरूशलेम के दीवारों को नीचे तोड़ डाला चारों ओर से ही।
११ अब उन शेष लोगों को जो नगर में बचे रह गए थे, और वो भगौडे जो बेबिलोन के राजा के पास गिर आए थे, जनौघ के शेष भाग के साथ, रक्षकों के कप्तान नेबुज़रदन ने परे निर्वासित कर दिए।
१२ परन्तु रक्षकों के कप्तान ने भूमी के दरिद्रों को अंगूर-के उद्यानों और खेतों के कर्मचारी बने रहने दिया।
१३ और पीतल के उन स्तम्भों को जो प्रभु के घर में थे, और उन गाड़ियों को, और उस पीतल वाले समुद्र को जो प्रभु के घर में था, उन कसदियों ने टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और उनके पीतल को बेबिलोन उठा ले गए।
१४ और वो हाँडियाँ, और वो फावड़े, और वो कैंचियाँ, और चमचे, और पीतल के उन सभी बर्तनों को जिन से वो सेवा किया करते थे, वो ले गए।
१५ और वो अग्निपात्र, और वो काटोरे, और ऐसी वस्तुएँ जो सोने की थीं, सोने में, और जो चाँदी की थीं, चाँदी में, रक्षकों का कप्तान ले गया।
१६ वो दो स्तम्भ, एक समुद्र, और वो गाड़ियाँ जो सुलेमान ने प्रभु के घर के लिए निर्मित की थीं; इन समस्त पात्रों के पीतल का भार तो भी पता ही नहीं लग पाया था।
१७ एक स्तम्भ की ऊँचाई अठ्ठारह हाथ थी, और उस पर वो स्तम्भशीर्ष पीतल का था: और उस स्तम्भशीर्ष की ऊँचाई तीन हाथ थी; और वो बुनाई का काम, और उस स्तम्भशीर्ष पर वो अनानास चारों ओर, सभी पीतल के: और इन्हीं के समान उस दूसरे स्तम्भ पर भी थे बुनाई के काम से बने।
१८ और रक्षकों के कप्तान ने ले लिया उच्च पुरोहित सेरिया को, और दूसरे पुरोहित जेफ़निया को, और उन द्वार के तीन द्वारपालों को:
१९ और उस नगर में से उसने एक अफ्सर को ले लिया जो योद्धाओं पर नियुक्त था, और उन में से पाँच आदमियों को जो राजा की उपस्थिति में थे, जो नगर में पाए गए थे, और सेना के मुख्य लिपिक को, जो भूमी के लोगों को जुटाता था, और भूमी के लोगों में से साठ आदमियों को जो नगर में पाए गए थे:
२० और रक्षकों का कप्तान नेबुज़रदन इन्हें लेकर, बेबिलोन के राजा के पास रिब्ला ले आया:
२१ और बेबिलोन के राजा ने उन्हें पीट डाला, और उन्हें हमात की भूमी में रिब्ला में मार डाला। तो यहूदा अपनी ही भूमी में से बाहर निर्वासित उठा ले लिया गया था।
२२ और वो लोग जो यहूदा की भूमी में बचे रह गए थे, जिन्हें बेबिलोन के राजा नबूकदनेज़्ज़र ने छोड़ दिया था, उन्हीं पर ही उसने शफन के बेटे अहिकम के बेटे गेदलिया को निर्देशक बना दिया।
२३ और जब सेनाओं के समस्त कप्तानों ने, उन्होंने और उनके आदमियों ने, सुन लिया था कि बेबिलोन के राजा ने गेदलिया को राज्यपाल बना दिया था, गेदलिया के पास ही आ पहुँचे मिज़पा में, नेथनिया का बेटा इश्माएल, और करेयाह का बेटा योहनन, और उस नतोफथी तनहुमेथ का बेटा सेरिया, और एक मअकथी का बेटा येअज़निया, यह और उनके आदमी ही।
२४ और गेदलिया ने उन्हें, और उनके आदमियों को वचन दे दिया, और उनसे कहा, कसदियों के नौकर बन जाने से मत डरो भई: भूमी में बस जाओ, और बेबिलोन के राजा की सेवा करो; और तुम्हारे साथ भला रहेगा।
२५ परन्तु सातवें महीने में ये होने को आया, कि एलिशमा के बेटे नेथनिया के बेटे इश्माएल ने, जो कि राजसी बीज में से था, आकर, दस आदमी अपने साथ लिए हुए, गेदलिया को पीट डाला, कि वो मर गया, और यहूदियों को और उन कसदियों को जो उसके साथ मिज़्पाह में थे।
२६ और सभी लोग, दोनो छोटे और बड़े, और सेनाओं के कप्तान, उठे, और मिस्र में आ गए: क्योंकि वो कसदियों से डर रहे थे।
२७ और यहूदा के राजा येहोयकिन के बन्धन के सैंतीसवें साल के, बारहवें महीने में, महीने के सत्ताईसवें दिन पर यह होने को आया, कि, बेबिलोन के राजा एयिलमरोदक ने उसी वर्ष में जिस में उसने राज करना आरम्भ किया था यहूदा के राजा येहोयकिन के सर को कारावास में से ऊपर उठा दिया;
२८ और उसने उसके साथ दयालुता से बात-चीत की, और उसके सिंहासन को उन राजाओं के सिंहासन के ऊपर स्थित कर दिया जो उसके साथ बेबिलोन में थे;
२९ और उसके कारावास वाले कपड़ों को बदल दिया: और उसने लगातार उसके सामने रोटी खाई उसके जीवन के समस्त दिन।
३० और उसके भोजन का भाग एक निरन्तर भोजन का भाग था राजा द्वारा प्रदान किया हुआ, प्रत्येक दिन के लिए एक दिन-प्रति-दिन का भाग, उसके जीवन के समस्त दिन।
११/०९/२०२५:
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