इतिहास की दूसरी पुस्तक। (Second Chronicles)
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पहला अध्याय।
१ और दाऊद का बेटा सुलेमान अपने राज्य में सुदृढ़ हो गया था, और प्रभु उसके ईश्वर उसके साथ थे, और उसे अत्याधिकता से आवर्धित किया।
२ तब सुलेमान समस्त इस्राएल से बोला, हज़ारों और सौ-सौ के कप्तानों से, और न्यायाधीषों से, और समस्त इस्राएल में प्रत्येक राज्यपाल से, पित्रों के प्रमुखों से।
३ तो सुलेमान, और समस्त सभा उसके साथ, उस उच्च स्थान चले गए जो गिब्यन में था; चूँकि वहीं ईश्वर की सभा का तम्बू था, जिसे प्रभु के के नौकर मूसा ने जँगली-क्षेत्र में बनाया था।
४ परन्तु ईश्वर के संदूक को दाऊद किरयथयरिम से उस स्थान ले आया था जो दाऊद ने उसके लिए उद्यत किया था: क्योंकि उसने उसके लिए एक यरूशलेम में शिविर गाढ़ दिया था।
५ इसके अतिरिक्त वो पीतल की बलिवेदी, जिसे बज़लेअल, ऊरी के बेटे, हूर के बेटे, ने बनाई थी, उसने प्रभु के तम्बू में रख दी थी: और सुलेमान और वो सभा उस से पूछ-ताछ किया करते थे।
६ और सुलेमान वहाँ ऊपर उस पीतल की बलिवेदी तक चला गया प्रभु के समक्ष ही, जो सभा के तम्बू में थी, और उस पर एक हज़ार जले-चढ़ावे चढ़ा दिए।
७ उसी रात्रि को ईश्वर सुलेमान को प्रकट हुए, और उस से कहा, माँगो भई, क्या दूँ मैं तुम्हें।
८ और सुलेमान ने ईश्वर से कहा, आप ने मेरे पिता दाऊद को विशाल करुणा प्रदर्शित की, और मुझे उनके स्थान में राज करने हेतु बना दिया है।
९ और अब, हे प्रभु जी मेरे ईश्वर, मेरे पिता दाऊद के प्रति अपने वचन को स्थापित कर दें: चूँकि आपने मुझे पृथ्वी की धूल के समान जनौघ में एक लोग-गण पर राजा बना दिया है।
१० इसलिए मुझे विद्या और ज्ञान प्रदान कर दें जी, ताकि मैं बाहर और अंदर आ-जा सकूँ इस गण के समक्ष: चूँकि कौन आपके इस गण का न्याय करने में सक्षम है जी, जो इतना विशाल है?
११ और ईश्वर ने सुलेमान से कहा, चूँकि यह बात तुम्हारे हृदय में थी, और तुमने धन-धान्यों की, या सम्पत्ती की, या आदर-सम्मान की, न ही अपने शत्रुओं के जीवन की माँग की, न ही तुमने लम्बे जीवन की माँग की; बल्कि तुमने स्वयं के लिए विद्या और ज्ञान की माँग की है, ताकि तुम मेरे गण का न्याय कर सको, जिस पर मैंने तुम्हें राजा बना दिया है:
१२ विद्या और ज्ञान तुम्हें प्रदान कर दिए जाते हैं; और मैं तुम्हें धन-धान्य, और सम्पत्तियाँ, और सम्मान प्रदान करूँगा, ऐसे जैसे तुम से पूर्व किन्ही भी राजाओं के पास न थे, न ही तुम्हारे पश्चात किसी के पास भी इस प्रकार होंगे।
१३ तब सुलेमान उस उच्च स्थान से जो कि गिब्यन में था यरूशलेम आ पहुँचा, सभे के तम्बू के सम्मुख से ही, और इस्राएल पर राज किया।
१४ और सुलेमान ने रथ और घुड़सवार एकत्रित किए: और उसके पास एक हज़ार चार सौ रथ, और बारह हज़ार घुड़सवार थे, जिन्हें उसने रथ-नगरों में और राजा के साथ यरूशलेम में रखा हुआ था।
१५ और राजा ने यरूशलेम में चाँदी और सोना पत्थरों समान बहुतायत में बना दिए, और देवदार के पेड़ों को उसने घाटी में गूलर के पेड़ों समान अत्याधिक बना दिए।
१६ और सुलेमान के पास मिस्र में से बाहर लाए गए घोड़े थे, और छालटी का धागा: राजा के व्यापारी उस छालटी के धागे का एक मूल्य पर प्राप्त किया करते थे।
१७ और वो ऊपर लाया करते थे, और मिस्र में से एक रथ को बाहर निकाला करते थे चाँदी के छह सौ शेक्लों का, और एक घोड़ा डेड़ सौ के लिए: और इसी प्रकार ही वो हित्ती-वंशजों के राजाओं के लिए, और सिरीया के राजाओं के लिए उन्हें बाहर निकाल लाते थे अपने माध्यमों से।
दूसरा अध्याय।
१ और सुलेमान ने प्रभु के नाम के लिए एक घर का, और अपने राज्य के लिए एक घर का निर्माण करने का निश्चय किया।
२ और सुलेमान ने सत्तर हज़ार आदमियों को गिना भार ढोने हेतु, और अस्सी हज़ार पर्वतों में कटाई करने वालों को, और तीन हज़ार और छह सौ को उन पर निर्देशन करने हेतु।
३ और सुलेमान ने टाय्र के राजा हुरम को भिजवाए, कहते हुए, जिस प्रकार आपने मेरे पिता दाऊद के साथ व्यवहार किया था, और उन्हें देवदार भेजे थे उनके लिए एक घर के निर्माण हेतु उस में निवास करने के लिए, उसी प्रकार मेरे साथ व्यवहार करें।
४ देखें, मैं अपने ईश्वर प्रभु के नाम के प्रति के घर का निर्माण कर रहा हूँ जी, उसे उनके प्रति समर्पित करने हेतु, और उनके सम्मुख मधुर-सुगन्धित धूप जलाने हेतु, और उस निरन्तर भेंट की रोटी हेतु, और उन जले चढ़ावों हेतु प्रातः और संध्या के समय, सैबथों पर, और नए चंद्रमाओं पर, और हमारे ईश्वर प्रभु के गम्भीर भोजों के अवसरों पर। यही इस्राएल के प्रति एक अनन्तता पर्यत अध्यादेश है।
५ और वो घर जिसका में निर्माण कर रहा हूँ महान है: चूँकि हमारे ईश्वर महान हैं सभी इश्वरों से अधिक।
६ परन्तु कौन उनके लिए एक घर का निर्माण करने का सामर्थ्य रखता है, यह देखते हुए कि स्वर्ग और स्वर्गों का स्वर्ग उन्हें सीमित नहीं कर सकता है जी? तो फिर मैं कौन हूँ, कि मैं उनके लिए एक घर का निर्माण करूँ, सिवाय केवल उनके सम्मुख बलि जलन देने हेतु?
७ इसलिए मेरे पास अब एक कुशल पुरुष को भेज दें, सोने की, और चाँदी की, और पीतल की, और लोहे की, और जामुनी की, और सुर्ख की, और नीले की कारीगरी करने हेतु, और जो उत्कीर्ण करने का कौशल्य रखता हो उन कुशल पुरुषों के साथ जो मेरे साथ यहूदा और यरूशलेम में हैं, जिन्हें मेरे पिता दाऊद ने उपलब्ध करवा दिया है।
८ मुझे लेबनोन में से देवदार के वृक्ष, और सनोवर के वृक्ष, और अलगुम के वृक्ष भी भजवा दें: चूँकि मैं जानता हूँ कि अपने नौकर चतुराई से लेबनोन में लकड़ी काट सकते हैं; और, देखें, मेरे नौकर आपके नौकरों के साथ ही होंगे,
९ मेरे लिए बहुतायत से लकड़ी तैयार कर देने हेतु: क्योंकि वो घर जिसका में निर्माण करने ही वाला हूँ अद्भुत-भव्य होगा।
१० और देखें, मैं आपके नौकरों को, उन काटने वालों को जो लकड़ी काटते हैं, कूटे हुए गेहूँ के बीस हज़ार माप, और जौ के बीस हज़ार माप, और अंगूर-रस के बीस-हज़ार बथ, और तेल के बीस हज़ार बथ प्रदान कर दूँगा।
११ तब टाय्र के राजा हुरम ने लिखित उत्तर दिया, जिसे उसने सुलेमान को भिजवा दिया, क्योंकि प्रभु ने अपने लोगों से प्रेम किया है, उन्होंने आपको उन पर राजा बना दिया है।
१२ इसके अतिरिक्त हुरम ने कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर धन्य हों, जिन्होंने स्वर्ग और पृथ्वी को सृजनाया है, जिन्होंने राजा दाऊद को एक विद्वान बेटा दिया है, प्रज्ञा और समझदारी संग, जो प्रभु के लिए एक घर का, और अपने राज्य के लिए एक घर का निर्माण कर दे।
१३ और अब मैंने एक चतुर पुरुष को भेज दिया है, समझदारी रखता हुआ, मेरे पिता हुरम से,
१४ दान की बेटियों में से एक स्त्री का बेटा, और उसका पिता टाय्र का ही एक पुरुष था, सोने की, और चाँदी की, और पीतल की, और लोहे की, और पत्थर की, और लकड़ी की, जामुनी की, नीले की, महीन छालटी की, और सुर्ख की कारीगरी का कौशल रखता हुआ; और जो किसी भी प्रकार की उत्कीनर्णना को उत्कीर्ण करने हेतु, और उस प्रत्येक रचना का ज्ञाता जो उसे प्रदान कर दी जाएगी, आप ही के कुशल पुरुषों के साथ ही, और आपके पिता दाऊद मेरे प्रभु के उन कुशल पुरुषों के साथ ही।
१५ अब इसलिए वो गेहूँ, और वो जौ, वो तेल, और वो अंगूर-रस, जो मेरे प्रभु बल चुके हैं, वह अपने नौकरों को भेज दें:
१६ और हम लेबनोन में से बाहर लकड़ी काट डालेंगे, जितनी भी आपको आवश्यकता हो: और हम उसे समुद्र के साथ-साथ बेड़ों में आपके पास योप्पा ले आएँगे; और आप उसे ऊपर यरूशलेम उठा कर ले जाईएगा।
१७ और सुलेमान ने उन सभी परदेशियों की गिनती की जो इस्राएल की भूमी में थे, उस गणना के पश्चात जिस से कि दाऊद उसके पिता ने उन्हें गिना था; और एक लाख तरेपन हज़ार छह सौ पाए गए थे।
१८ और उसने उन में से सत्तर हज़ार भारों को ढोने हेतु, अस्सी हज़ार को पर्वतों में कटाई करने हेतु नियुक्त कर दिया और छह सौ निर्देशकों को लोगों से काम करवाने हेतु।
तीसरा अध्याय।
१ तब सुलेमान ने यरूशलेम में मोरीया पर्वत में प्रभु के घर का निर्माण करना आरम्भ किया, जहाँ प्रभु दाऊद उसके पिता को प्रकट हुए थे, उसी स्थान में जहाँ दाऊद ने ओरनन उस यबूसी के खलिहान में तैयारी की थी।
२ और उसने अपने राज्य-काल के चौथे वर्ष के दूसरे महीने के दूसरे दिन पर निर्माण करना आरम्भ किया।
३ अब यही वो बातें हैं जिन में कि सुलेमान ईश्वर के घर के निर्माण हेतु निर्देशित किया गया था। पहल वाले मापानुसार ही हाथोंनुसार लम्बाई साठ हाथ थी, और चौड़ाई बीस हाथ।
४ और वो आँगन जो सामने था उसकी लम्बाई घर की चौड़ाईनुसार थी, बीस हाथ, और ऊँचाई एक सौ बीस: और उसने उसे भीतर से शुद्ध स्वर्ण से मढ़ दिया।
५ और उस बृहत्तर घर को उसने सनोवर की लकड़ी से पाट दिया, जिसे उसने महीन स्वर्ण से मढ़ा, और उस पर खजूर के पेड़ और ज़नजीरें स्थित कर दीं।
६ और उसने उस घर को अनमोल रत्नों से सौन्दर्यता हेतु सजा-धजा दिया: और वो सोना परवैम से था।
७ उसने स्वर्ण से ही वो घर भी, और वो बल्ले, वो चौखटें, और उसकी दीवारें, और उसके द्वारों को मढ़ दिया; और उन दीवारों पर चेरुबिमों को उत्कीर्ण कर दिया।
८ और उसने उस अति-पवित्रतम गृह का निर्माण किया, जिसकी लम्बाई घर की चौड़ाईनुसार थी, बीस हाथ, और उसकी चौड़ाई बीस हाथ: और उसने उसे अच्छे सोने से मढ़ दिया, छह सौ तलनतन भार तक भी।
९ और उन कीलों का भार सोने के पचास शेक्ल था। और उसने उन ऊपरी कक्षों को सोने से मढ़ दिया।
१० और उस अति-पवित्रतम गृह में उसने दो केरुबिमों को शिल्पकारी के कार्य से बनाया, और उन्हें सोने से मढ़ दिया।
११ और उन केरुबिमों के पँख बीस हाथ लम्बे थे: एक चेरुब पाँच हाथ था, गृह की दीवार तक पहुँचता हुआ: और दूसरा पँख पाँच हाथ था, उस दूसरे केरुब तक पहुँचता हुआ।
१२ और उस दूसरे केरुब का पँख पाँच हाथ था, गृह की दीवार तक पहुँचता हुआ: और वो दूसरा पँख पाँच हाथ था, उस दूसरे केरुब के पँख के साथ लगा हुआ।
१३ इन केरुबिमों के पँखों ने स्वयं को बीस हाथ फैला रख था: और वो अपने पैरों पर खड़े थे, और उनके चेहरे भीतर की ओर थे।
१४ और उसने वो परदा नीले, और जामुनी, और सुर्ख, और महीन छालटी का बनाया, और उन पर केरूबिमों की कारीगरी कर दी।
१५ उसने घर में सम्मुख पैंतीस हाथ ऊँचे दो स्तम्भ भी बनाए, और वो स्तम्भशीर्ष जो कि उन में से प्रत्येक की चोटी पर था पाँच हाथ था।
१६ और उसने ज़नजीरें बनाईं, ईश्वरीय-वाणी के समान ही, और उन्हें उन स्तम्भों के शीर्षों पर लगा दिया; और एक सौ अनानास बना कर उन्हें उन ज़नजीरों पर लगा दिया।
१७ और उसने उन स्तम्भों को मंदिर के सम्मुख ही खड़ा कर दिया, एक दाएँ हाथ पर, और वो दूसरा बाएँ हाथ पर; उसका नाम जो दाएँ हाथ पर था याकीन रख दिया, और उसका नाम जो बाएँ हाथ पर था बोआज़।
चौथा अध्याय।
१ इसके अतिरिक्त उसने पीतल की एक बलिवेदी बनाई, जिसकी लम्बाई बीस हाथ थी, और बीस हाथ उसकी चौड़ाई, और दस हाथ उसकी ऊँचाई।
२ उसने एक दस हाथ वाला ढाला हुआ समुद्र भी बनाया, छोर से लेकर छोर तक: घेराई में गोल, और पाँच हाथ थी उसकी ऊँचाई: और तीस हाथों की एक नापने वाली डोरी उसे चारों ओर घेरती थी।
३ और उसके नीचे साँडों की समानता थी, जिन्होंने उसे चारों ओर घेरा हुआ था: एक हाथ में दस, उस समुद्र को चारों ओर घेरे हुए। साँडों की दो पंक्तियाँ ढली गई थीं, जब उसे ढाला गया था।
४ वो बारह सांडों पर खड़ा था, तीन उत्तर की ओर देखते हुए, और तीन पश्चिम की ओर देखते हुए, और तीन दक्षिण की ओर देखते हुए, और तीन पूर्व की ओर देखते हुए: और वो समुद्र उनके ऊपर स्थित था, और उनके सभी पृष्ठ भाग भीतर की ओर थे।
५ और उसकी मोटाई एक हथेली-भर थी, और उसका ऊपरी किनारा एक प्याले के ऊपरी किनारे समान ही श्रमित था, सोसनों के पुष्पों के साथ: और वो प्राप्त कर कर तीन हज़ार बथ पकड़े रखता था।
६ उसने दस कुण्ड भी बनाए, और पाँच को दाएँ हाथ पर रख दिया, और पाँच को बाएँ हाथ पर, उन में धोने-धुलवाने के लिए: ऐसी वस्तुएँ जो वो जले-चढ़ावों हेतु चढ़ाते थे वो उन में धोया करते थे; परन्तु वो समुद्र उन पुरोहितों के उस में धोने-धुलवाने के लिए था।
७ और उसने दस सोने के दीपाधार बनाए उनके रूपानुसार, और उन्हें मन्दिर में स्थित कर दिया, पाँच दाएँ हाथ पर, और पाँच बाएँ पर।
८ उसने दस मेज़ें भी बनाईं, और उन्हें मन्दिर में स्थित कर दिया, पाँच दाएँ हाथ पर, और पाँच बाएँ पर। और उसने सोने के एक सौ कटोरदान भी बनाए।
९ इसके अतिरिक्त उसने पुरोहितों का आँगन, और वो बड़ा आँगन, और आँगन के लिए द्वार बनाए, और उनके द्वारों को पीतल से मढ़ दिया।
१० और उसने उस समुद्र को पूर्वी छोर के दाहिने पाशर्व पर दक्षिण के विपरीत स्थित कर दिया।
११ और हुरम ने उन पात्रों, और उन फावड़ों, और उन कटोरदानों को बना दिया। और हुरम ने उस कार्य को समाप्त कर दिया जो उसने राजा सुलेमान हेतु ईश्वर के घर हेतु करना था;
१२ वो दो स्तम्भ, और वो गोले, और वो स्तम्भ-शीर्ष जो उन दो स्तम्भों के ऊपर थे, और वो दो कड़ियाँ उन स्तम्भ-शीर्षों के दोनो गोलों को ढकने हेतु जो उन स्तम्भों के ऊपर थे;
१३ और चार सौ अनानास उन दोनो कड़ियों पर; प्रत्येक कड़ी पर अनानासों की दो पंक्तियाँ, उन स्तम्भों के ऊपर उन स्तम्भ-शीर्षों के दोनो गोलों को ढकने हेतु।
१४ उसने गाड़ियाँ भी बनाईं, और कुण्ड उसने उन गाड़ियों के ऊपर बना दिए;
१५ एक समुद्र, और बारह साँड उसके नीचे।
१६ वो पात्र भी, और वो फावड़े, और माँस-काँटे, और उनके समस्त उपकरण, हुरम उसके पिता ने राजा सुलेमान के लिए प्रभु के घर के लिए उज्ज्वल पीतल के निर्मित कर दिए।
१७ यर्दन के मैदान में राजा ने उन्हें मढ़ा, उस कीचड़ वाली धरती में जो सुक्कोत और ज़ेरेदथा के बीच है।
१८ इस प्रकार सुलेमान ने यह सभी बर्तन अति बहुतायतता में बना दिए: चूँकि उस पीतल का भार पता ही नहीं लग पाया था।
१९ और सुलेमान ने वो सभी पात्र बना दिए जो ईश्वर के घर के लिए थे, वो स्वर्ण बलिवेदी भी, और वो मेज़ें जिन पर वो भेंट की रोटी स्थित की जाती थी;
२० इसके अतिरिक्त उन दीपों के साथ वो दीपाधार, जिन्हें उन्होंने रीतिनुसार जलाना होता था ईश्वरीय-वाणी ने सम्मुख ही, शुद्ध सोने के ही;
२१ और वह पुष्प, और वह दीपक, और वह चिमटियाँ, सोने के, उस परिशुद्ध सोने के;
२२ और वो कैंचियाँ, और कटोर-दान, और वो चम्मच, और वह अग्नी-पात्र, शुद्ध स्वर्ण के: और घर की प्रविष्टि, अति पवित्रतम के लिए उसके वो भीतर वाले द्वार, और उस मन्दिर के गृह के द्वार, स्वर्ण के ही थे।
पाँचवाँ अध्याय।
१ इस प्रकार वो समस्त कार्य जो सुलेमान ने प्रभु के घर के लिए बनाया था समाप्त हो गया था: और सुलेमान उन समस्त वस्तुओं को भीतर ले आया जिन्हें दाऊद उसके पिता ने समर्पित कर दी थीं; और वो चाँदी, और वो सोना, और वह समस्त यन्त्र, उसने ईश्वर के घर के धन-कोषों में रख दिए।
२ तब सुलेमान ने इस्राएल के वृद्ध-गणों को, और प्रजातियों के समस्त प्रमुखों को, इस्राएल की सन्तानों के पित्रों के प्रमुख, यरूशलेम में एकत्रित कर लिए, प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को दाऊद के नगर से, जो कि ज़ियोन है, ऊपर ले आने हेतु।
३ इस कारण इस्राएल के समस्त पुरुषों ने स्वयं को राजा के पास एकत्रित कर लिया उस भोज पर जो कि सातवें महीने में था।
४ और इस्राएल के समस्त वृद्ध-गण आ गए; और उन लेवी-वंशजों ने उस संदूक को ऊपर उठा लिया।
५ और वो उस संदूक को ऊपर ले आए, और सभा के उस तम्बू को, और उन समस्त पवित्र बरतनों को जो तम्बू में थे, इन्हीं को ही वो पुरोहित और वो लेवी-वंशज ऊपर ले आए।
६ राजा सुलेमान ने भी, और इस्राएल की समस्त सभा ने जो उसके पास संदूक के सम्मुख एकत्रित थे, भेड़ों और सांडों की बलि चढ़ाई, जिनकी न ही गणना न ही गिनती की जा सकती थी जनौघ के कारण।
७ और वो पुरोहित प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के उस संदूक को उसके स्थान तक ले आए, घर की ईश्वर-वाणी तक, उस अति-पवित्रतम स्थान में ही, केरूबिमों के पंखों के तले ही:
८ चूँकि वह केरूबिम अपने पंखों को उस संदूक के स्थान के ऊपर फैलाया करते थे, और वह केरूबिम उस संदूक और उसके डण्डों को ऊपर से ढक दिया करते थे।
९ और उन्होंने उन डण्डों को खींचे रखा, कि उन डण्डों के छोर संदूक से दिखा करते थे ईश्वर-वाणी के सम्मुख ही; परन्तु वो बाहर से नहीं दिखा करते थे। और वो वहीं है इस दिन तक भी।
१० उस संदूक में और कुछ भी नहीं था केवल उन दो पट्टियों के सिवा जिन्हें मूसा ने होरेब में वहीं अंदर रख दिया था, जब प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया था, जब वह मिस्र में से बाहर निकल आए थे।
११ और यह होने को आया, जब वो पुरोहित उस पवित्र-स्थान में से बाहर निकल आए थे: क्योंकि वो समस्त उपस्थित पुरोहित पुनीत थे, और तब कार्यकालानुसार सेवा नहीं की:
१२ वो लेवी-वंशज भी जो गायक थे, असफ, हेमन, यदुतुन वाले सभी ही, अपने बेटों और भाई-जनों के साथ, श्वेत छालटी में आवृत, झाँझ और सारंगियाँ और वीणाएँ लिए हुए, बलिवेदी के पूर्वी छोर पर खड़े हुए, और उनके साथ एक सौ बीस पुरोहित चिंघाड़े फूँकते हुए:
१३ यहाँ तक कि यही होने को आया, जैसे-जैसे वह चिंघाड़े फूंकने वाले और गायक एक थे, एक ही ध्वनी बनाने हेतु प्रभु की प्रशन्सा और उन्हें धन्यवाद देने में सुनने हेतु; और जब उन्होंने अपनी वाणी ऊपर उठाई चिंघाड़ों और झाँझों और संगीत-यंत्रों के साथ ही, और प्रभु की प्रशन्सा की, कहते हुए, चूँकि वो अच्छे हैं; चूँकि उनकी करुणा सदा के लिए बनी रहती है: कि तभी वो घर एक मेघ से भर उठा, प्रभु का घर ही;
१४ कि वो पुरोहित खड़े होकर सेवा ही नहीं कर पाए उस मेघ के कारण: चूँकि प्रभु की महिमा ने ईश्वर के घर को भर दिया था।
छटा अध्याय।
१ तब सुलेमान ने कहा, प्रभु ने कह दिया है कि वो तो घने श्यामतव में निवास करेंगे।
२ परन्तु मैंने आपके लिए एक निवास करने हेतु एक घर का निर्माण कर दिया है जी, आपके निवास के लिए एक स्थान सदा के लिए।
३ और राजा ने अपना चेहरा मोड़ दिया, और इस्राएल की समस्त सभा को आशीष दिया; और इस्राएल की समस्त सभा खड़ी हुई थी;
४ और उसने कहा, धन्य हों इस्राएल के प्रभु ईश्वर, जिन्होंने अपने हाथों से उसे पूर्ण कर दिया है जो उन्होंने अपने मूँह से मेरे पिता दाऊद से बोला था, कहते हुए,
५ उस दिन से जब से मैं अपने लोगों इस्राएल को मिस्र की भूमी में से बाहर ले आया, मैंने इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से किसी भी नगर में एक घर का निर्माण करने हेतु, चुनाव नहीं किया, कि मेरा नाम वहाँ होए; न ही मैंने किसी भी आदमी को अपने गण इस्राएल के ऊपर शासक बनने हेतु चुना:
६ परन्तु मैंने यरूशलेम को चुन लिया है, ताकि मेरा नाम वहीं रहे; और मैंने दाऊद को अपने गण इस्राएल पर रहने हेतु चुन लिया है।
७ और यह मेरे पिता दाऊद के हृदय में था इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नाम के लिए एक घर का निर्माण कर देना।
८ परन्तु प्रभु ने मेरे पिता दाऊद से कहा, जबकि तुम्हारे हृदय में यह था मेरे नाम के लिए एक घर का निर्माण करना, तुमने भला किया कि यह तुम्हारे हृदय में था।
९ तथापि तुम उस घर का निर्माण नहीं करोगे; बल्कि तुम्हारा बेटा जो तुम्हारी कटि में से बाहर निकल कर आएगा, वही मेरे नाम के प्रति उस घर का निर्माण करेगा।
१० इसलिए प्रभु ने अपने शब्द को क्रियान्वित कर दिया है जो उन्होंने बोल दिया है, क्योंकि मैं दाऊद अपने पिता के स्थान में उठ गया हूँ, और इस्राएल के सिंहासन पर बैठता हूँ, जैसा कि प्रभु ने वचन दे दिया था, और इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नाम के लिए एक घर का निर्माण कर दिया है।
११ और उसी में मैंने वो संदूक रख दिया है, जिस में कि प्रभु का प्रतिज्ञा-पत्र है, जो उन्होंने इस्राएल की सन्तानों के साथ बनाया था।
१२ और वो प्रभु की बलिवेदी के समक्ष खड़ा था इस्राएल की समस्त सभा की प्रस्तुति में, और अपने हाथों को फैला दिया:
१३ क्योंकि सुलेमान ने एक पीतल का चबूतरा बना दिया था, पाँच हाथ लम्बा, और पाँच हाथ चौड़ा, और तीन हाथ ऊँचा, और उसे आँगन के बीच में ही स्थित कर दिया था: और उसी के ऊपर वो खड़ा था, और अपने घुटनों के बल वो नीचे अपने घुटने टेके था इस्राएल की समस्त सभा के समक्ष ही, और अपने हाथ स्वर्ग की ओर फैलाए हुए था,
१४ और कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर, आपके समान स्वर्ग में, या पृथ्वी पर कोई भी ईश्वर नहीं है जी, जो अपने सेवकों के साथ प्रतिज्ञा-पत्र और दया बनाए रखते हैं, जो अपने सम्पूर्ण हृदय से आपके समक्ष चलते है:
१५ वो जो आपने आपके ही सेवक दाऊद मेरे पिता के साथ बनाए रखा है जो आपने उन्हें वचन दे दिया था: और आप अपने ही मूँह से भी बोले थे, और उसे अपने हाथ से ही पूर्ण कर चुके हैं, जैसा कि इस दिन है।
१६ इसलिए अब, इस्राएल के प्रभु ईश्वर, अपने सेवक मेरे पिता दाऊद के साथ उसे बनाए रखें जो आपने उन्हें वचन दिया था, कहते हुए, तुम्हारे प्रति मेरी दृष्टि में इस्राएल के सिंहासन पर बैठने हेतु एक भी पुरुष परे नहीं कटेगा; तथापि ताकि तुम्हारी सन्तानें मेरे नियम में चलने हेतु अपने पथ का ध्यान दें, जैसे कि तुम मेरे समक्ष चले हो।
१७ तो अब हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, आपका शब्द को सत्यापित हो जाने दें, जो आपने अपने सेवक दाऊद से बोला था।
१८ परन्तु क्या ईश्वर वास्तव में ही पृथ्वी पर बसेंगे क्या पुरुषों के साथ-साथ? देखें जी, स्वर्ग और स्वर्गों का स्वर्ग आपको सीमित नहीं कर सकता है जी; तो फिर और कितना कम यह घर जो मैंने निर्मित किया है!
१९ इसलिए अपने सेवक की प्रार्थना और उसके अनुनय की ओर अपना चेहरा कर दें जी, हे प्रभु मेरे ईश्वर, इस चीख और इस प्रार्थना को सुनवाई दे देने हेतु, जो आपका सेवक आपके सम्मुख प्रार्थना कर रहा है:
२० ताकि आपकी आँखें इस घर की ओर रात-दिन खुली रहें, उसी स्थान पर जिसके विषय में आप बोल चुके हैं, कि आप ही अपना नाम वहाँ ठहरा देंगे: उस प्रार्थना का श्रवण कर लेने हेतु जो आपका सेवक इस स्थान की ओर करता है जी।
२१ इसलिए अपने सेवक और अपने गण इस्राएल के अनुनयों का श्रवण करें, जिन्हें वो इस स्थान की ओर करेंगे: आप अपने निवास-स्थान से ही सुन लीजिएगा, स्वर्ग से ही; और जब आप सुन लेंगे, तो क्षमा कर दीजिएगा।
२२ यदि कोई भी पुरुष अपने पड़ौसी के विरुद्ध पाप कर देता है, और उसे सौगन्ध खा लेने की शपथ दिलवा दी जाए, और वो शपथ आपकी बलिवेदी के समक्ष इस घर में आ जाए:
२३ तब आप स्वर्ग में से सुन लें, और कर दें, और अपने सेवकों का न्याय कर दें, उस दुष्ट को भुक्तान करते हुए, उसी के पथ को उसी के स्वयं के ही सर पर लाते हुए; और नेक को न्यायी-प्रमाणित करते हुए, उसे उसी की नेकीनुसार प्रदान करते हुए।
२४ और यदि आपके लोग इस्राएल शत्रु के समक्ष पिट चुके हों, क्योंकि उन्होंने आपके विरुद्ध पाप कर दिया है, और वापस लौट जाएँ और आपके नाम की स्तुति करें, और आपके सम्मुख इस घर में प्रार्थना और अनुनय करें:
२५ तब आप स्वर्गों में से सुन लीजिएगा, और अपने लोगों इस्राएल के पाप को क्षमा कर दीजिएगा, और उन्हें पुनः उस भूमी में ले आईएगा जो आपने उन्हें और उनके पित्रों को प्रदान कर दी थी।
२६ जब स्वर्ग बन्द हो गया हो, और कोई भी वर्षा न गिर रही हो, क्योंकि उन्होंने आपके विरुद्ध पाप कर दिया है; तथापि यदि वो इस स्थान की ओर प्रार्थना करते हैं, और आपके नाम को स्वीकार करते हैं, और अपने पाप से मुड़ जाते हैं, जब आप उन्हें उत्पीड़ित करते हैं:
२७ तब आप स्वर्ग में से सुन लीजिएगा, और अपने सेवकों के और अपने लोगों इस्राएल के पाप को क्षमा कर दीजिएगा, जब आपने उन्हें वह भला पथ सिखा दिया होगा, जिस में कि उन्हें चलना चाहिए, और अपनी भूमी पर वर्षा भेज दें, जिसे आपने अपने लोगों को एक विरासत हेतु प्रदान कर दिया है।
२८ यदि भूमी में अकाल पड़ गया हो, यदि महामारी आ पड़ी हो, फसल की अंगमारी आ पड़ी हो, या फफूँदी, या टिड्डी, या फिर इल्ली; यदि उनके शत्रु उनके नगरों की भूमी में उनकी घेराबन्दी कर दे; जो कोई भी छुआ-छूत, या जो कोई भी रोग वहाँ हो;
२९ तो जो कोई भी प्रार्थना या जो कोई भी अनुनय किसी भी पुरुष द्वारा की जाए, या फिर आपके समस्त गण इस्राएल द्वारा, जब प्रत्येक पुरुष अपने स्वयं की ही छुआ-छूत और अपने ही शोक से परिचित हो जाएगा, और अपने हाथों को इस घर में आगे फैला देगा:
३० तब आप स्वर्ग अपने निवास स्थान में से सुन लीजिएगा, और क्षमा कर दीजिएगा, और प्रत्येक पुरुष को उसी के समस्त पथोंनुसार प्रदान कर दीजिएगा, जिसके हृदय से आप परिचित हैं; चूँकि बस केवल आप ही, मनुष्यों की सन्तानों के हृदयों से परिचित हैं;
३१ ताकि वो आपका भय मानते रहें, अपने पथों पर चलने हेतु, जितने समय तक भी वो इस भूमी में बसते हैं जिसे आपने हमारे पित्रों को प्रदान कर दी थी।
३२ इसके अतिरिक्त उस परदेशी के समबन्ध में, जो आपके गण इस्राएल में से नहीं है, बल्कि जो आपके महान नाम के, और आपके बलशाली हाथ के, और आपकी फैली हुई भुजा के वास्ते, किसी एक दूर-देश से पधारा है; यदि वो आकर और इस घर में प्रार्थना करेंगे;
३३ तब आप स्वर्गों में से, अपने निवास स्थान में से ही सुन लीजिएगा, और उस सभी के अनुसार कर दीजिएगा जिसके विषय में वो परदेशी आपको पुकार रहा है: ताकि पृथ्वी के समस्त लोग आपके नाम को जान जाएँ, और आपका भय माने, जैसा आपका गण इस्राएल करता है; और कि वो जान जाएँ कि यही घर, जो मैंने बनाया है, आप ही के नाम से कहलाया जाता है।
३४ यदि आपके लोग अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध करने बाहर निकल पड़ते हैं, उस पथ पर ही जिस पर आप उन्हें भेजेंगे, और वो आप के प्रति प्रार्थना करते हैं इस नगर की ओर ही जिसे आपने चुन लिया है, और इस घर की ओर जिसका मैंने आपके नाम के लिए निर्माण कर दिया है:
३५ तब आप स्वर्गों में से उनकी प्रार्थना को और उनके अनुनय को सुन लीजिएगा और उनका न्याय कर दीजिएगा।
३६ यदि वो आपके विरुद्ध पाप कर बैठते है, चूँकि ऐसा कोई भी मानुष नहीं है जो पाप नहीं करता है, और आप उनके साथ क्रोधित हों, और उन्हें उनके शत्रुओं को प्रदान कर देते हैं, ताकि वो उन्हें बन्दी बनाकर किसी दूर वाली या निकट वाली भूमी में उठा ले जाते हैं;
३७ तथापि यदि वो उस भूमी में स्वयं आत्म-विचार कर लेते हैं जहाँ उन्हें बन्दी ले जाया गया है, और मुड़ जाते हैं और आपके प्रति अपनी बाँधत्व वाली भूमी में प्रार्थना करते हैं, कहते हुए, हमने तो पाप कर डाला है, और विकृतता कर डाली है, और दुष्टता कर डाली है;
३८ यदि वो अपने सम्पूर्ण हृदय के साथ, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ, आपके पास वापस मुड़ जाते हैं, अपने बाँधत्व की उस भूमी में, जहाँ वो उन्हें बन्दी बनाकर ले चले थे, और अपनी भूमी की ओर प्रार्थना करते हैं, जिसे आपने उनके पित्रों को प्रदान कर दी थी, और उस नगर की ओर जिसे अपने चुन लिया है, और उस घर की ओर जिसका मैंने आपके नाम हेतु निर्माण कर दिया है:
३९ तब आप स्वर्गों से अपने निवास स्थान में से ही उनकी प्रार्थना को और उनके अनुनयों को सुन लीजिएगा, और उनका न्याय कर दीजिएगा, और अपने लोगों को क्षमा कर दीजिएगा जो आपके विरुद्ध पाप कर बैठे हैं।
४० अब मेरे ईश्वर जी, मैं विनती करता हूँ जी आपसे, आपकी आँखें खुल जाएँ, और आपके कान इस स्थान में की जाने वाली प्रार्थना के प्रति ध्यान दें।
४१ इसलिए अब हे प्रभु ईश्वर, उठ जाएँ, अपने विश्राम के स्थान में ही, आप, और आपकी शक्ती का संदूक: आपके पुरोहित हे प्रभु ईश्वर, बचाव के संग आवृत हों, और अपने सन्तों को भलाई में हर्ष माना लेने दें।
४२ हे प्रभु ईश्वर, अपने अभिषिक्त के चहरे को परे न मोड़ें: अपने सेवक दाऊद की दयाओं को स्मरण में रखें जी।
सातवाँ अध्याय।
१ अब जब सुलेमान ने प्रार्थना करने का अन्त कर दिया था, स्वर्ग में से उस अग्नी ने नीचे आकर, उस जले-चढ़ावे और उन बलियों का भुख-भक्षण कर डाला; और प्रभु की महिमा में उस घर को भर दिया।
२ और वो पुरोहित प्रभु के घर में प्रवेश ही नहीं कर पाए, चूँकि प्रभु की महिमा ने प्रभु के घर को भर दिया था।
३ और जब इस्राएल की समस्त सन्तानों ने देखा कि वो अग्नी कैसे नीचे आई, और कि प्रभु की महिमा घर पर छाई, उन्होंने स्वयं को झुक दिया उनके चहरे धरती की ओर किए हुए उस पटरी पर, और आराधना की, और प्रभु की प्रशन्सा की, कहते हुए, चूँकि वो अच्छे हैं; चूँकि उनकी करुणा सदा के लिए बनी रहती है।
४ तब राजा और उन समस्त लोगों ने प्रभु के समक्ष बलियाँ चढ़ाईं।
५ और राजा सुलेमान ने बाईस हज़ार सांडों, और एक लाख बीस हज़ार भेड़ों की बलि चढ़ाई: तो राजा और समस्त गण ने ईश्वर के घर को समर्पित कर दिया।
६ और वह पुरोहित अपने कार्य-पदों के कार्य-भार के प्रति खड़े थे: और वो लेवी-वंशज भी प्रभु के संगीत वाले वाद्य-यंत्रों के साथ, जिन्हें राजा दाऊद ने निर्मित किए थे प्रभु की प्रशन्सा करने हेतु, चूँकि उनकी करुणा सदा के लिए बनी रहती है, जब दाऊद ने ने उनके सेवाकार्य द्वारा प्रशन्सा की थी; और उन पुरोहितों ने उनके समक्ष चिंघाड़े बजा दिए, और समस्त इस्राएल खड़ा हुआ था।
७ इसके अतिरिक्त सुलेमान ने उस आँगन के मध्य को पुनीत ठहरा दिया जो कि प्रभु के घर के समक्ष था: क्योंकि वहीं उसने जले चढ़ावे, और शान्ति-चढ़ावों की चर्बी चढ़ाई थीं, चूँकि वो पीतल की बलिवेदी जो सुलेमान ने निर्मित की थी उन जले-चढ़ावों, और उन भोज-चढ़ावों को, और उस चर्बी को ग्रहण करने में असक्षम थी।
८ और उसी समय में ही सुलेमान ने और उसके साथ समस्त इस्राएल ने वो भोज सात दिन रखे रखा,एक अति विशाल सभा ने ही, हमात की प्रविष्टि से लेकर मिस्र की नदी तक।
९ और आठवें दिन में उन्होंने एक गम्भीर सभा आयोजित की: क्योंकि उन्होंने उस बलिवेदी का समर्पण सात दिनो तक मनाया था, और वो भोज सात दिनो तक।
१० और सातवें महीने के तेईसवें दिन पर उसने लोगों को उनके शिविरों में विदा कर दिया, उस अच्छाई के कारण प्रसन्न और मगन जिसे प्रभु ने दाऊद के प्रति, और सुलेमान के प्रति, और उनके गण इस्राएल के प्रति क्रियान्वित कर दी थी।
११ तो इस प्रकार सुलेमान ने प्रभु के घर का, और राजा के घर का समापन कर दिया: और वो सभी कुछ जो सुलेमान के मन में आया प्रभु के घर में, और अपने घर में निर्मित कर देने हेतु, उसने मंगलशीलता से क्रियान्वित कर दिया।
१२ और प्रभु रात्रि के समय सुलेमान को प्रकट हुए, और उस से कहा, मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली है, और इस स्थान को अपने प्रति एक आहुति-गृह हेतु चुन लिया है।
१३ यदि मैं स्वर्ग को बँद कर दूँ ताकि कोई भी वर्षा न गिरे, या फिर मैं उन टिड्डियों को आदेश दे दूँ भूमी का भुख-भक्षण कर देने हेतु, या फिर मैं अपने लोगों के बीच महामारी भेज दूँ;
१४ यदि मेरे लोग जो मेरे नाम से पुकारे जाते हैं, स्वयं को विनम्र बना देंगे, और प्रार्थना करेंगे, और मेरे चेहरे को ढूँढेगे, और अपने दुष्ट पथों से मुड़ जाएँगे; तन मैं स्वर्ग में से सुन लूँगा, और उनके पाप को क्षमा कर दूँगा, और उनकी भूमी को स्वास्थ कर दूँगा।
१५ अब मेरी आँखें खुली रहेंगी, और मेरे कान उस प्रार्थना के प्रति ध्यान-केन्द्रित रहेंगे जो इस स्थान में की जाती है।
१६ क्योंकि अभी ही मैंने इस घर को चुन कर इसे पुनीत ठहरा दिया है, ताकि मेरा नाम वहीं सदैवत्वता तक रहता रहे: और मेरी आँखें और मेरा हृदय वहीं लगतार रहता रहेगा।
१७ और जहाँ तक तुम्हारी बात आती है, यदि तुम मेरे सम्मुख वैसे चलोगे, जैसे दाऊद तुम्हारा पिता चला था, और उस सभी के अनुसार कर दोगे जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है, और मेरे अध्यादेशों का और मेरे न्याय-निर्धारणों का पालन करोगे;
१८ तब मैं तुम्हारे राज्य का सिंहासन स्थापित कर दूँगा, उसी के अनुसार जैसा कि मैंने तुम्हारे पिता दाऊद के साथ प्रतिज्ञा-पत्र बनाया था, कहते हुए, कि तुम्हारे प्रति इस्राएल में एक भी पुरुष कटेगा नहीं शासक बनने हेतु।
१९ परन्तु यदि तुम परे मुड़ जाओगे, और मेरे अध्यादेशों और मेरी आज्ञाओं को त्याग डालोगे, जिन्हें मैंने तुम्हारे समक्ष स्थित कर दी हैं, और जाकर अन्य ईश्वरों की सेवा करोगे, और उनकी आराधना करोगे:
२० तब मैं उन्हें जड़ों से ही ऊपर उखाड़ डालूँगा अपनी भूमी में से ही जिसे मैंने उन्हें प्रदान कर दिया है; और यह घर जिसको मैंने अपने नामे के लिए पुनीत ठहरा दिया है, मैं अपनी दृष्टि में से बाहर फैंक डालूँगा, और इसे समस्त गणों के बीच एक नीति-वचन और एक कहावत ही बना डालूँगा।
२१ और यह घर, जो ऊँचा है, उस प्रत्येक के प्रति जो इसके पास से गुज़रेगा एक अचम्भा ही बन कर रह जाएगा; ताकि वो कहेगा, भई प्रभु जी ने ऐसा इस भूमी के साथ और इस घर के साथ क्यों कर दिया है?
२२ और यह उत्तर दिया जाएगा, चूँकि उन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर को त्याग डाला, जो उन्हें मिस्र की भूमी में से बाहर निकाल लाए थे, और अन्य ईश्वरों को पकड़ कर उनकी आराधना कर दी है, और उनकी सेवा कर दी है: इसलिए ही उन्होंने इन पर यह समस्त बुराई डाल दी है।
आठवाँ अध्याय।
१ और बीस वर्षों के अंत में यह होने को आया, जिन में कि सुलेमान ने प्रभु के घर का, और अपने स्वयं के घर का निर्माण कर दिया था,
२ कि उन नगारों का जिन्हें हुरम ने सुलेमान को पुनःस्थापित कर दिए थे, सुलेमान ने उनका निर्माण कर दिया, और इस्राएल की सन्तानों को वहाँ निवासित कर दिया।
३ और सुलेमान ने हमातज़ोबाह जाकर, उसे पकड़ में ले लिया।
४ और उसने जँगली क्षेत्र में तदमोर का निर्माण किया, और उन समस्त भण्डार-घरों वाले नगरों का, जिनका उसने हमात में निर्माण किया।
५ और उसने ऊपर वाले बेतहोरोन, और निचले बेतहोरोन का निर्माण किया, किले-बँद नगर, दीवारों, और दरवाज़ों, और पटरों के साथ;
६ और बअलथ का, और उन सभी भण्डार-घरों वाले समस्त नगरों का जो सुलेमान के पास थे, और उन सभी रथों वाले नगरों का, और घुड़सवारों वाले नगरों का, और उस सभी का जो सुलेमान यरूशलेम में, और लेबनोन में, और उसके अधिराज्य वाली उस समस्त भूमी के सर्वत्र में निर्माण करना चाहता था।
७ और वो सभी लोग जो उन हित्ती-वंशजों, और उन एमोरवासियों, और उन पेरिज़्ज़-वंशजों, और उन हिव्वियों, और उन यबूसी-वंशजों में से बचे रह गए थे, जो कि इस्राएल की सन्तानों में से नहीं थे,
८ उन्हीं की सन्तानों में से ही जो भूमी में उनके पश्चात बची रह गई थीं, जिनकी इस्राएल की सन्तानें ने समाप्ति नहीं की थी, उन्हीं से ही सुलेमान ने इसी दिन तक कर भरवाया।
९ परन्तु इस्राएल की सन्तानों में से सुलेमान ने अपने कार्य के लिए कोई भी नौकर नहीं बनाए: बल्कि वो योद्धा-पुरुष थे, और उसके कप्तानों के प्रमुख, और उसके रथों के, और उसके घुड़सवारों के कप्तान।
१० और यही राजा सुलेमान के उन अफ़सरों के प्रमुख थे, ढाई सौ ही, जिन्होंने लोगों पर अधिकार रखा।
११ और सुलेमान फैरो की बेटी को दाऊद के नगर में से बाहर ऊपर उस घर में ले आया जो उसने उसके लिए बनाया था: क्योंकि उसने कहा, मेरी पत्नी इस्राएल के राजा दाऊद के घर में नहीं निवास करेगी, क्योंकि वो स्थान पवित्र हैं, जहाँ प्रभु का संदूक आ चुका है।
१२ तब सुलेमान ने प्रभु की बलिवेदी पर जिसे उसने आँगन के सामने बनाया था, जले-चढ़ावे प्रभु के प्रति चढ़ाए,
१३ दिन-प्रति-दिन एक निश्चित मात्रानुसार ही, मूसा के अदेशानुसार ही अर्पित करता हुआ, सैबथों पर, और नए चन्द्रमाओं पर, और गम्भीर भोजों पर, वर्ष में तीन बार, बेख़मीरी रोटी के भोज में ही, और सप्ताहों के भोज में, और तम्बुओं के भोज पर।
१४ और अपने पिता दाऊद के अदेशानुसार उसने नियुक्त कर दिए, उन पुरोहितों के कार्यकाल उनकी सेवाओं के प्रति, और उन लेवी-वंशजों को उनके प्रभारों के प्रति, पुरोहितों के समक्ष प्रशन्सा और सेवा करने हेतु, जिस प्रकार प्रत्येक दिन की रीति की अवश्यक्ता थी: प्रत्येक दरवाज़े पर द्वार-पाल भी उनके कार्यकालोंनुसार: क्योंकि इसी प्रकार ही ईश्वर के उस बन्दे दाऊद ने आदेश दे दिया था।
१५ और उन्होंने राजा के पुरोहितों और लेवी-वंशजों के प्रति आदेश से किसी भी विषय के समबन्ध में, या धन-कोषों के समबन्ध में, प्रस्थान नहीं किया।
१६ तो अब सुलेमान का समस्त कार्य प्रभु के घर की नीव डाल देने वाले उस दिन से लेकर, उसकी समाप्ति हो जाने तक तैयार हो गया था। तो प्रभु का गृह परिपूर्ण कर दिया गया था।
१७ तब सुलेमान एज़्योंगेबर और एलोथ चला गया, एदोम की भूमी में समुद्र तट पर ही।
१८ और हुरम में उसे अपने नौकरों के हाथों जल-यान भेजे, और नौकर जिन्हें समुद्र का ज्ञान था; और वो सुलेमान के सेवकों के साथ-साथ ओफर चले गए, और वहाँ से चार सौ पचास तलनतन-भार सोना लेकर उन्हें राजा सुलेमान के पास ले आए।
नौवाँ अध्याय।
१ और जब शबा की रानी ने सुलेमान की कीर्ती के विषय में सुना, तो वो सुलेमान को कठिन प्रश्नों से परखने यरूशलेम आ पहुँची एक बहुत ही विशाल टोली, और मसाले ढोए हुए ऊँटों, और अत्याधिकता में सोने, और अनमोल रत्नों के साथ: और जब वो सुलेमान के पास आ पहुँची थी, उसने उसके साथ उस सभी के विषय में विचार-गोष्ठी की जो कुछ भी उसके मन में था।
२ और सुलेमान ने उसे उसके समस्त प्रश्न बता दिए: और ऐसा कुछ भी सुलेमान से छुपा न था, जो उसने उसे नहीं बताया।
३ और जब शबा की रानी ने सुलेमान की विद्या देख ली थी, और वो निवास-स्थान जिसका उसने निर्माण किया था,
४ और उसकी मेज़ पर वो भोजन, और उसके सेवकों की बैठक, और उसके नौकरों का सेवाकार्य, और उनके वस्त्र; उसके प्याले-उठाने-वाले भी, और उनके वस्त्र; उसका आरोहण जिस से वो प्रभु के गृह में जाता था; तो उस में तो भई कोई भावात्मा ही नहीं बची रही!
५ और उसने राजा से कहा, यह सूचना सच्ची थी जो मैंने अपनी स्वयं की भूमी में आपके कारनामों और आपकी विद्या के विषय में सुनी थी:
६ तथापि मैंने उनके शब्दों पर विश्वास नहीं किया था, जब तक कि मैं आई, और मेरे नयनों में उसे देख लिया है: और देखें जी, मुझे तो आपकी विद्या की महानता का अर्ध भाग भी नहीं बताया गया था: चूँकि आप तो उस कीर्ती के पार हैं जो मैंने सुनी थी!
७ आपके यह लोग खुश हैं, और आपके यह सेवक जो आपके समक्ष निरन्तर खड़े रहते हैं, और आपकी विद्या सुनते हैं, खुश हैं यह।
८ धन्य हों प्रभु आपके ईश्वर, जिन्होंने आप में आनन्द मनाया, आपको उनके सिंहासन पर बिठा देने के लिए: प्रभु आपके ईश्वर हेतु राजा बनने के लिए: क्योंकि आपके ईश्वर ने इस्राएल से प्रेम किया, उन्हें सदा-सदा के लिए स्थापित कर देने हेतु, इसलिए ही उन्होंने आपको उन पर राजा बना दिया है, इन्साफ़ और न्याय करने हेतु।
९ और उसने राजा को एक सौ बीस तलनतन भार का सोना, और सुगन्धित-द्रव्यों की बहुतायत, और अनमोल रत्न प्रदान कर दिए: न ही ऐसा और कोई अन्य सुगन्धित-द्रव्य था जैसा शबा की रानी ने राजा सुलेमान को प्रदान किया था।
१० और हुरम के भी नौकर, और सुलेमान के नौकर, जो ओफर से सोना लाए, अल्मग के पेड़ और बहुमूल्य रत्न ले आए।
११ और राजा ने उन अल्मग के पेड़ों से प्रभु के निवास-स्थान के लिए, और राजा के महल के लिए ऊपर जाने वाले पथ बनाए, और गायकों के लिए वीणाएँ और सारंगियाँ: और ऐसे तो यहूदा की भूमी में कभी भी पहले नहीं देखे गए थे।
१२ और राजा सुलेमान ने शबा की रानी को उसकी समस्त अभिलाषा प्रदान कर दी, जो कुछ भी उसने माँगा, उसके अतिरिक्त जो वो राजा के पास ले आई थी। तो वो मुड़ कर अपनी ही स्वयं की भूमी विदा हो चली, वो और उसके सेवक।
१३ अब उस सोने का भार जो सुलेमान के पास एक वर्ष में आता था छह सौ छियासठ सोने के तलनतन भार था;
१४ उसके अतिरिक्त जो भ्रमण-व्यापारी और सौदागर लाया करते थे। और अरब-देश के समस्त राजा और प्रदेश के राज्यपाल सुलेमान के पास सोना और चाँदी लाया करते थे।
१५ और राजा सुलेमान ने कूटे हुए सोने की दो सौ ढालें बनाईं: सोने के छह सौ शेक्ल गए थे एक ढाल में।
१६ और उसने कूटे हुए सोने वालीं तीन सौ छोटी ढालें बनाईं; सोने के तीन सौ शेक्ल एक ढाल में गए थे: और राजा ने उन्हें लेबनोन के वन के घर में रख दिया।
१७ इसके अतिरिक्त राजा ने हाथी-दाँत का एक विशाल सिंहासन निर्मित किया, और उसे परिशुद्ध स्वर्ण से ऊपर मढ़ दिया।
१८ उस सिंहासन की छह सीढ़ियाँ थीं, सोने के एक पायदान के साथ, जो सिंहासन के साथ जुड़ी हुई थीं, और आसान के स्थान के दोनो ओर सहारे वाले टेक थे, और दो सिंह उन सहारा लेने वाले टेकों के साथ खड़े हुए:
१९ और बारह सिंह वहाँ खड़े थे एक ओर और उस दूसरी ओर उन छह सीढ़ियों पर। इसके समान किसी भी अन्य राज्य में नहीं बनाया गया था।
२० और राजा सुलेमान के समस्त पीने के लिए पात्र सोने के थे, और लेबनोन के वन के घर के समस्त पात्र शुद्ध स्वर्ण के थे; कोई भी चाँदी का न थे: सुलेमान के दिनो में तो उसका कोई मोल ही न था।
२१ चूँकि राजा के जल-यान हुरम के नौकरों के साथ थरशीश जाया करते थे: हर तीसरे वर्ष एक बार थरशीश के वो जल-यान सोना, और चाँदी, हाथी-दाँत, और बन्दर-वानर, और मोर लाया करते थे।
२२ और राजा सुलेमान पृथ्वी के समस्त राजाओं को धन-धान्यों में और विद्या में पार कर चला।
२३ और पृथ्वी के सभी राजा सुलेमान की उपस्थिति को ढूँढ़ा करते थे, उसकी विद्या सुनने, जिसे ईश्वर ने उसके हृदय में डाल दी थी।
२४ और प्रत्येक पुरुष अपना उपहार ले आता था, रजत के पात्र, और स्वर्ण के पात्र, और वस्त्र, कवच, और सुगन्धित-द्रव्य, घोड़े, और खच्चर, वर्ष प्रति वर्ष एक निश्चित मात्रानुसार ही।
२५ और सुलेमान के पास घोड़ों और रथों के लिए चालीस हज़ार घुड़साल थे, और बारह हज़ार घुड़सवार; जिन्हें उसने रथों वाले नगरों में और यरूशलेम में राजा के साथ छोड़े रखा।
२६ और उसने नदी से लेकर उन पलिश्तिम-वंशजों की भूमी तक भी, और मिस्र की सीमा तक समस्त राजाओं पर राज किया।
२७ और राजा ने बृहत्ता के समबन्ध में, यरूशलेम में चाँदी को पत्थरों के समान, और देवदारों को उसने निचले मैदानों में गूलर के पेड़ों समान बना दिया।
२८ और वो सुलेमान के पास मिस्र में से, और समस्त भूमियों में से बाहर घोड़े लाया करते थे।
२९ अब सुलेमान के वो शेष कार्य, पहल वाले और अन्तिम वाले, क्या वो नेथन पैग़म्बर की पुस्तक में, और उस शिलोवासी अहिया के प्रेरित-उपदेश में, और नेबत के बेटे यरोबोम के विरुद्ध इदो उस भविष्य-दर्शक के दृश्यों में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
३० और सुलेमान ने यरूशलेम में समस्त इस्राएल के ऊपर चालीस वर्ष राज किया।
३१ और सुलेमान अपने पित्रों के साथ लेट गया, और वो अपने पिता दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था: और रहोबोम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
दसवाँ अध्याय।
१ और रहोबोम शकेम चला गया: चूँकि समस्त इस्राएल शकेम आ पहुँचे थे उसे राजा बना देने हेतु।
२ और यह होने को आया, कि जब नेबत के बेटे यरोबोम ने, जो मिस्र में ही था, जहाँ वो राजा सुलेमान की उपस्थिति से भाग खड़ा हुआ था, यह सुना, तो यरोबोम मिस्र में से वापस लौट आया।
३ और उन्होंने भेज कर उसे बुलवा लिया। तो यरोबोम और समस्त इस्राएल आ पहुँचे, और रहोबोम से बोले, कहते हुए,
४ आपके पिता ने तो हमारा जुआ कठिन बना दिया: इसलिए अब आप अपने पिता की कठिन सेवा को, और उनके भारी जुए को, जो उन्होंने हम पर लाद दिया था, थोड़ा बहुत हल्का कर दें जी, और हम आपकी सेवा करेंगे।
५ और उसने उन से कहा, पुनः मेरे पास तीन दिनो पश्चात लौट आना। और उन लोगों ने विदाई ले ली।
६ और राजा रहोबोम ने उन वृद्ध पुरुषों से परामर्श लिया, जो उसके पिता सुलेमान के समक्ष खड़ा हुआ करते थे उसके जीते जी,कहते हुए, आप मुझे क्या परामर्श देते हैं इन लोगों को उत्तर देने हेतु?
७ और वो उस से बोले, कहते हुए, यदि आप इस गण के प्रति दया दिखाएँगे, और इन्हें प्रसन्न कर देंगे, और इनके साथ अच्छे शब्द बोलेंगे, तो ये सदा के लिए आपके सेवक बन जाएँगे।
८ परन्तु उसने इन वृद्ध पुरुषों के परामर्श को त्याग डाला, जो उन्होंने उसे दिया था, और उन युवा पुरुषों के साथ परामर्श किया जो उसके साथ ही पले-बड़े थे, और जो उसके समक्ष खड़े होते थे।
९ और उसने उनसे कहा, तुम क्या परामर्श देते हो कि हम इस गण को उत्तर दे दें, जो मुझ से बोले थे, कहते हुए, उस जुए को जो आपके पिता ने हम पर लाद दिया है थोड़ा बहुत हल्का कर दें?
१० और उसके साथ पले-बड़े उन युवा पुरुषों ने उस से बोला, कहते हुए, इस प्रकार आप इस गण को उत्तर देंगे जो आपसे बोले थे, कहते हुए, आपके पिता ने तो हमारा जुआ भारी कर दिया था, परन्तु आप उसे हमारे लिए थोड़ा बहुत हल्का कर दें; इस प्रकार आप उनसे कहेंगे, मेरी छोटी उँगली मेरे पिता की कटि से भी मोटी होगी।
११ क्योंकि जबकि मेरे पिता ने तुम पर एक भारी जुआ लाद दिया था, मैं तुम्हारे जुए में और लाद दूँगा: मेरे पिता ने तो तुम्हें कोडों से अनुशंसित किया, परन्तु मैं तुम्हें बिच्छुओं से अनुशंसित करूँगा।
१२ तो यरोबोम और वो समस्त गण तीसरे दिन रहोबोम के पास आ पहुँचे, जैसा की राजा ने नियुक्त किया था, कहते हुए, मेरे पास पुनः तीसरे दिन आ जाना।
१३ और राजा ने उन लोगों को कर्कशता से उत्तर दिया, और राजा रहोबोम ने उन वृद्ध पुरुषों के परामर्श को त्याग दिया,
१४ और उन्हें उन युवा-पुरुषों के परामर्श के अनुसार उत्तर दिया, कहते हुए, मेरे पिता ने तो तुम्हारा जुआ भारी बना दिया था, परन्तु मैं उस में और भी जोड़ दूँगा: मेरे पिता ने तो तुम्हें कोडों से अनुशंसित किया, परन्तु मैं तुम्हें बिच्छुओं से अनुशंसित करूँगा।
१५ तो राजा ने लोगों का श्रवण नहीं किया; क्योंकि कारण ईश्वर की ओर से था, ताकि प्रभु अपने शब्द को क्रियान्वित कर दें, जो उन्होंने उस शिलोवसी अहिया के हाथ नेबत के बेटे यरोबोम से बोला था।
१६ और जब समस्त इस्राएल ने देखा कि राजा ने उनका श्रवण नहीं किया था, तो उन लोगों ने राजा को उत्तर दिया, कहते हुए, भई दाऊद में हमारे पास क्या भाग है? और यिशय के बेटे में हमारे पास कोई भी विरासत है: अपने-अपने तम्बुओं में चले जाओ भई, हे इस्राएल: और अब, अपने स्वयं के ही घर-बार को देख लो दाऊद! तो समस्त इस्राएल अपने-अपने तम्बुओं में चला गया।
१७ परन्तु इस्राएल की उन सन्तानों पर जो यहूदा के नगरों में निवास करते थे, रहोबोम ने उन पर राज किया।
१८ तब राजा रहोबोम ने हदोरम को भेजा, जो राजकर पर नियुक्त था; और इस्राएल की सन्तानों ने उस पर पत्थरों से पथराव कर दिया, कि वो मर गया। परन्तु राजा रहोबोम वेगता से स्वयं अपने रथ में जा चढ़ा, यरूशलेम भाग जाने के लिए।
१९ और इस्राएल ने इस दिन तक दाऊद के घराने के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
ग्यारहवाँ अध्याय।
१ और जब रहोबोम यरूशलेम आ पहुँचा था, तो उसने यहूदा और बिन्यामिन के घराने में से एकत्रित कर लिए एक लाख अस्सी हज़ार चुने हुए आदमी, जो कि योद्धा थे, इस्राएल के विरुद्ध लड़ाई करने हेतु, ताकि वो राज्य को पुनः रहोबोम के पास वापस ले आए।
२ परन्तु प्रभु के शब्द उस ईश्वर के बन्दे शेमाया के पास आ पहुँचे, कहते हुए,
३ भई यहूदा के राजा, सुलेमान के बेटे रहोबोम से, और यहूदा में समस्त इस्राएल से और बिन्यामिन से बोलो, कहते हुए,
४ इस प्रकार कहते हैं प्रभु, तुम चढ़ाई नहीं करोगे, न ही अपने भाई-जनो के विरुद्ध लड़ाई करोगे: हर आदमी वापस अपने-अपने ही घर चला जाए; क्योंकि यह बात मुझी से की गई है। और उन्होंने प्रभु के शब्द का आज्ञापालन कर लिया और यरोबोम के विरुद्ध प्रस्थान करने से वापस मुड़ चले।
५ और रहोबोम यरूशलेम में निवास किया करता था, और यहूदा में सुरक्षा हेतु नगरों का निर्माण किया।
६ उसने निर्माण किया बेतलेहम, और एतम, और तकोआ का,
७ बेतज़र, और शोको, और अद्युल्लम,
८ और गथ, और मरेशा, और ज़िफ,
९ और अदोरेम, और लकिश, और अज़का,
१० और ज़ोरा, और आयलोन, और हेब्रोन, जो कि यहूदा में हैं और बिन्यामिन में किले-बँद नगर।
११ और उसने उन दुर्गों को सुदृढ़ किया, और उन में कप्तानों को, और खाद्य-सामग्री, और तेल, और अंगूर-रस के भंडार रख दिए।
१२ और प्रत्येक नगर-नगर में उसने ढालें और भाले रखे, और उन्हें अत्याधिकता से बलशाली बना दिया, यहूदा और बिन्यामिन उसके साथ-साथ।
१३ और वो पुरोहित और वो लेवी-वंशज जो समस्त इस्राएल में थे अपनी-अपनी सीमाओं में से बाहर उसके पास चले आए।
१४ चूँकि उन लेवी-वंशजों ने अपने सार्वजनिक-भूमियों और अपने अधिकार का त्याग कर दिया था, और यहूदा और यरूशलेम आ पहुँचे थे: चूँकि यरोबोम और उसके बेटों ने उन्हें प्रभु के प्रति पुरोहित-पद की क्रिया से परे हटा डाला था:
१५ और उसने स्वयं के लिए उन उच्च-स्थानों के लिए पुरोहित विहित-नियुक्त कर दिए, और उन दानवों के लिए, और उन बछड़ों के लिए जिन्हें उसने बना डाला था।
१६ और उनके पीछे-पीछे इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से ऐसे जिन्होंने अपने हृदयों को इस्राएल के प्रभु ईश्वर को ढूँढने हेतु केंद्रित कर दिया था यरूशलेम आ पहुँचे, अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के प्रति बलि चढ़ा देने हेतु।
१७ तो उन्होंने यहुदा के राज्य को सुदृढ़ किया, और सुलेमान के बेटे रहोबोम को सशक्त किया, तीन वर्षों तक: चूँकि वो तीन वर्षों तक दाऊद और सुलेमान के पथ में चले।
१८ और रहोबोम ने दाऊद के बेटे यरिमोथ की बेटी महैलथ को अपने लिए पत्नी स्वरूप ले लिया, और यिशय के बेटे एलिआब की बेटी अबिहेल;
१९ जिसने उसे बच्चे जन्मे; यूश, और शमरिया, और ज़हम।
२० और उसके पश्चात उसने अब्सलोम की बेटी मअकाह को लिया; जिसने उसे जन्मे अबिया, और अत्तय, और ज़िज़ा, और शेलोमिथ।
२१ और रहबोम अब्सलोम की बेटी मअकाह से अपनी समस्त पत्नियों और अपनी रखैलों से अधिक प्रेम किया करता था: चूँकि उसने अट्ठारह पत्नियाँ, और साठ रखैलें लीं; और अट्ठाईस बेटे, और साठ बेटियाँ जननी।
२२ और रहोबोम ने मअकाह के बेटे अबिया को प्रमुख नियुक्त किया, उसके भाई-जनो के बीच राज्यपाल बनने हेतु: चूँकि वो उसे राजा बनाने की सोच रखता था।
२३ और उसने समझदारी से काम लिया, और अपने समस्त बेटों में से यहूदा और बिन्यामिन के देशों में भेज दिया, प्रत्येक क़िलेबन्द नगर में ही: और उसने उन्हें बहुतायत से सम्पोषण प्रदान किया। और वो बहुतेरी पत्नियों की अभिलाषा रखता था।
बारहवाँ अध्याय।
१ और यह होने को आया, जब रहोबोम ने राज्य स्थापित कर दिया था, और स्वयं को सशक्त कर दिया था, उसने प्रभु के नियम का त्याग कर डाला, और समस्त इस्राएल ने उसके साथ ही।
२ और राजा रहोबोम के पाँचवें वर्ष में यह होने को आया कि मिस्र का राजा शिशक यरूशलेम के विरुद्ध चढ़ आया, चूँकि उन्होंने प्रभु के विरुद्ध उल्लंघन कर डाला था,
३ बारह सौ रथों के साथ, और साठ हज़ार घुड़सवारों के साथ ही: और वो लोग असंख्य थे जो उसके साथ-साथ मिस्र में से बाहर निकल पड़े थे; वो लुबिम, सुक्किम, और इथियोपिया-वासी।
४ और उसने उन क़िलेबन्द नगरों पर अधिकार जमा लिया जो यहूदा के थे, और यरूशलेम आ पहुँचा।
५ तब रहोबोम, और यहूदा के प्रमुखों के पास जो शिशक के कारण यरूशलेम में एक साथ एकत्रित थे, पैग़म्बर शेमाया ने आकर उनसे कहा, प्रभु इस प्रकार कहते हैं, तुमने मेरा त्याग कर दिया है, और इसी कारण वश मैंने भी तुम्हें शिशक के हाथ में ही छोड़ दिया है।
६ इस बात पर इस्राएल के उन प्रमुखों ने और राजा ने स्वयं को विनम्र कर दिया; और उन्होंने कहा, प्रभु ही नेक हैं।
७ और जब प्रभु ने देखा कि उन्होंने स्वयं को विनम्र बना दिया था, प्रभु का शब्द शेमाया को आए, कहते हुए, इन्होंने स्वयं को विनम्र बना दिया है; इसलिए मैं इन्हें नष्ट नहीं करूँगा, बल्कि मैं इन्हें कुछ उद्धार प्रदान करूँगा; और मेरा आक्रोश शिशक के हाथ यरूशलेम पर नहीं उंडेला जाएगा।
८ तथापि वो उसके सेवक बनेंगे; ताकि वो मेरी सेवा जान सकें, और देशों के राज्यों की सेवा।
९ तो शिशक मिस्र का राजा यरूशलेम के विरुद्ध चढ़ाई कर बैठा, और और वो प्रभु के घर के धन-कोषों को ले गया, और राजा के धन-कोषों को; उसने तो सभी कुछ ही ले लिया: और वो सोने की उन सभी ढालों को भी ले गया जो सुलेमान ने बनाई थीं।
१० और राजा रहोबोम ने उनके स्थान में पीतल की ढालें बना कर उन्हें रक्षक-गण के प्रमुख के हाथों में सौंप दीं, जो राजा के घर के प्रवेश का रक्षक था।
११ और जब राजा प्रभु के घर में प्रवेश करता था, तो वो रक्षक-गण आकर उन्हें ढोता था, और उन्हें रक्षक-गण के कक्ष में पुनः वापस ले आया करता था।
१२ और जब उसने स्वयं को विनम्र किया, प्रभु का आक्रोश उस से परे मुड़ चला, ताकि उन्होंने उसे पूर्णतः विनष्ट नहीं किया: और यहूदा में भी परिस्थिति भली रही।
१३ तो राजा रहोबोम ने यरूशलेम में स्वयं को सुदृढ़ किया, और राज किया: चूँकि रहोबोम इकतालीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने सत्रह वर्ष यरूशलेम में राज किया, वो नगर जिसे प्रभु ने इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से चुन लिया था, अपने नाम को वहाँ स्थापित कर देने हेतु। और उसकी माँ का नाम नमा था एक अम्मोन-वंशज स्त्री।
१४ और उसने बुराई क्रियान्वित की, चूँकि उसने अपने हृदय को प्रभु को ढूँढने हेतु उद्यत नहीं किया।
१५ अब रहोबोम के कार्य, पहल वाले और अन्त वाले, क्या वो पैग़म्बर शेमाया की, और वंशावलियों के समबन्ध में उस भविष्य-दर्शक इदो की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या? और रहोबोम और यरोबोम के बीच युद्ध लागतार ही छिड़े रहे।
१६ और रहोबोम अपने पित्रों के साथ सो गया, और उसे दाऊद के नगर में दफ़ना दिया गया था: और उसके बेटे अबिया ने उसके स्थान में राज किया।
तेरहवाँ अध्याय।
१ अब राजा यरोबोम के अट्ठारहवें वर्ष में यहूदा पर अबिया ने राज करना आरम्भ किया।
२ उसने यरूशलेम में तीन वर्ष राज किया। और उसकी माता का नाम मिकायाह था, गिब्या वाले उरिएल की बेटी। और अबिया और यरोबोम के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था।
३ और अबिया ने युद्ध को व्युह में रचाया शूरवीर योद्धाओं की एक सेना के साथ, चार लाख चुने हुए आदमी ही: यरोबोम ने भी उसके विरुद्ध रण को व्युह में रचायाआठ लाख चुने हुए आदमियों के साथ ही, पराक्रमी शूरवीर होते हुए।
४ और अबिया ज़मरिम पहाड़ पर खड़ा हुआ, जो कि एफ्रैम पहाड़ में है, और कहा, सुनो मझे, तुम यरोबोम, और समस्त इस्राएल;
५ क्या तुम्हें यह परिचय नहीं रखना चाहिए कि इस्राएल के प्रभु ईश्वर ने इस्राएल पर राज दाऊद को सदा के लिए प्रदान कर दिया था, उन्हीं को ही और उनके बेटों को नमक के एक प्रतिज्ञा-पत्र द्वारा ही?
६ तथापि नेबत का बेटा यरोबोम, दाऊद के बेटे सुलेमान का नौकर, उठ खड़ा हो गया है, और अपने प्रभु के विरुद्ध विद्रोह कर बैठा है!
७ और उसके साथ-साथ व्यर्थ पुरुष एकत्रित हुए-हुए हैं, बलियल की सन्तानें ही, और स्वयं को सुलेमान के बेटे रहोबोम के विरुद्ध शक्तिशाली बना दिया है, जब रहोबोम युवक और कोमल-हृदय लिए ही था, और उनका सामना नहीं कर सकता था।
८ और अब तुम दाऊद के बेटों के हाथ में प्रभु के राज्य का सामना करने की सोच में हो; और तुम एक विशाल जनौघ हो, और तुम्हारे साथ सोने के बछड़े हैं, जिन्हें यरोबोम ने तुम्हारे लिए ईश्वरों के लिए बना डाले हैं!
९ क्या तुमने प्रभु के पुरोहितों को बाहर नहीं निष्कासित कर दिया है क्या, हारुन के बेटों को, और उन लेवी-वंशजों को, और अपने लिए पुरोहित नियुक्त कर दिए हैं अन्य भूमियों के राष्ट्रों की रीतियोंनुसार? ताकि जो कोई भी स्वयं को एक युवा साँड, और सात मेढ़े लिए स्थापित करने पधारता है, वहीं उनके प्रति एक पुरोहित बन जाए जो ईश्वर ही नहीं हैं!
१० परन्तु जहाँ तक हमारी बात आती है, प्रभु ही हमारे ईश्वर हैं, और हमने उनका त्याग नहीं किया है; और वो पुरोहित जो प्रभु के प्रति सेवारत हैं, हारुन के ही बेटे हैं, और वो लेवी-वंशज अपने काम-काज में लगे रहते हैं:
११ और वही प्रभु के प्रति ही प्रत्येक प्रातः और प्रत्येक संध्या जले-चढ़ावे और मधुर सुगन्धित-धूप जलाते हैं: उस भेंट की रोटी को भी जिसे वो उस परिशुद्ध मेज़ पर व्यवस्थित करते हैं; और उस सोने के दीपाधार को उसके दीपकों के साथ ही, प्रत्येक संध्या जलाने हेतु: चूँकि हम प्रभु अपने ईश्वर के प्रभार को रखे रखते हैं; परन्तु तुमने तो उनका त्याग कर डाला है!
१२ और देख लो भई, ईश्वर स्वयं ही हमारे साथ हैं हमारे कप्तान हेतु, और उनके पुरोहित बजने वाले चिंघाड़ों के साथ ही तुम्हारे विरुद्ध चीख-पुकार मचा देने हेतु। हे इस्राएल की सन्तानों, अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के विरुद्ध लड़ाई मत करो भई; चूँकि तुम उन्नत नहीं होगे।
१३ परन्तु यरोबोम ने उनके पीछे से एक घात का घेरा बिठा दिया था: तो वो यहूदा के सामने थे, और वो घात उनके पीछे लगी बैठी थी।
१४ और जब यहूदा ने पीछे देखा, देखो तो, वो युद्ध उनके सामने और उनके पीछे था: और वो प्रभु को चीखे, और उन पुरोहितों ने उन चिंघाड़ों को फूंक कर बजा डाला!
१५ तब यहूदा के आदमी चिल्ला पड़े: और जैसे-जैसे यहूदा के आदमी चिल्ला रहे थे, यह होने को आया, कि ईश्वर ने यरोबोम और समस्त इस्राएल पर अबिया और यहूदा के सम्मुख वार कर डाला।
१६ और इस्राएल की सन्तानें यहूदा के समक्ष भाग खड़ी हुईं: और ईश्वर ने उनके हाथ में प्रदान कर दिया।
१७ और अबिया और उसने गण ने उन्हें एक महा संहार से मार डाला: तो इस्राएल में से पाँच लाख चुनिंदा आदमी मारे गए नीचे गिरे।
१८ तो इस प्रकार इस्राएल की सन्तानें उस समय आधीन कर दी गई थीं, और यहूदा की सन्तानें प्रबल ठहरीं, क्योंकि वो अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर पर निर्भर रहे।
१९ और अबिया ने यरोबोम का पीछा किया, और उस से लेकर नगरों पर अधिकार जमा लिया, बेतएल उसकी नगरीयों के साथ, और येशाना उसकी नगरीयों के साथ, और एफ्रैम उसकी नगरीयों के साथ।
२० न ही यरोबोम अबिया के दिनो में पुनः शक्तीशाली बन सका: और प्रभु ने उस पर वार कर डाला, और वो मर गया।
२१ परन्तु अबिया बलशाली बनता चला गया, और चौदह पत्नियों से विवाह किया, और बाईस बेटों को, और सोलह बेटियों को जनना।
२२ और अबिया के शेष कार्य, और उसके पथ, और उसकी कहावतें पैग़म्बर इदो की कहानी में लिखे हुए हैं।
चौदहवाँ अध्याय।
१ तो अबिया अपने पित्रों के साथ सो गया; और उन्होंने उसे दाऊद के नगर में दफ़ना दिया: और उसके बेटे आसा ने उसके स्थान में राज किया। उसके दिनो में भूमी दस साल शान्त रही।
२ और आसा ने वो किया जो प्रभु उसके ईश्वर की आँखों में अच्छा और सही था:
३ क्योंकि उसने परदेशी बलिवेदियों और उन उच्च स्थानों को परे हटा दिया, और उन प्रतिमाओं को नीचे तोड़ डाला, और उन उपवनों को नीचे काट डाला:
४ और यहूदा को उनके पित्रों के प्रभु ईश्वर को ढूँढने, और नियम और आदेश को क्रियान्वित कर देने हेतु आदेश दिया।
५ और उसने यहूदा के समस्त नगरों में से उन उच्च-स्थानों और उन प्रतिमाओं को बाहर निकाल दिया: और वो राज्य उसके समक्ष शान्त था।
६ और उसने यहूदा में क़िलेबन्द नगरों का निर्माण किया: चूँकि वो भूमी शान्त थी, और उसने उन वर्षों में कोई संग्राम नहीं किया; क्योंकि प्रभु ने उसे विश्राम प्रदान कर दिया था।
७ इसलिए उसने यहूदा से कहा, हमें इन नगारों का निर्माण करना चाहिए, और इनके चारों ओर दीवाररों का, और मीनारों, दरवाज़ों, और पटरों का, जन तक कि ये भूमी हमारे सामने ही है; चूँकि हमने प्रभु हमारे ईश्वर को खोजा है, और उन्होंने हमें हर दिशा में विश्राम प्रदान कर दिया है। तो उन्होंने निर्माण किया और सफल रहे।
८ और आसा के पास आदमियों की एक सेना थी जो ढालें और भले ढोए थे, यहूदा में से ही तीन लाख; और बिन्यामिन में से जो ढालें ढोते थे और धनुष चलाते थे, दो लाख अस्सी हज़ार ही: यह सभी पराक्रमी शूरवीर पुरुष ही।
९ और उनके विरुद्ध ज़ेरा वो इथियोपिया-वासी बाहर निकल आया दस लाख की सेना, और तीन सौ रथों के साथ; और मरेशा तक आ पहुँचा।
१० तब आसा उसके विरुद्ध बाहर निकल चला गया, और उन्होंने मरेशा में जेफ़था की घाटी में युद्ध को रचाया।
११ और आसा प्रभु अपने ईश्वर की ओर चीख पड़ा, और कहा, प्रभु जी, आपके लिए तो सहायता करना कुछ भी नहीं है जी, भले कईयों के साथ, या फिर उनके साथ जिनके पास कोई भी शक्ती न हो: हमारी सहायता कर दें हे प्रभु जी हमारे ईश्वर; क्योंकि हम आप ही का सहारा लिए हैं जी, और आप ही के नाम में हम इस जनौघ के विरुद्ध जा रहे हैं। हे प्रभु, आप ही हमारे ईश्वर हैं जी; आदमी को अपने विरुद्ध प्रबल न ठहरने दें!
१२ तो प्रभु ने आसा के और यहूदा के सामने-सामने ही उन इथियोपिया-वासियों पर वार कर डाला; और वो इथियोपिया-वासी भाग खड़े हुए।
१३ और आसा और उन लोगों ने जो उसके साथ-साथ थे उनका पीछा गेरर तक किया: और वो इथियोपिया-वासी धराशाई हो गए थे, और वो स्वयं को सम्भाल न सके; क्योंकि प्रभु के समक्ष, और उनकी सेना के समक्ष उनका विनाश कर दिया गया था; और वो बहतेरी लूट उठा कर चलते बने।
१४ और उन्होंने गेरर के चारों ओर वाले समस्त नगरों को पीट डाला; चूँकि प्रभु का भय उन पर आ पड़ा था: और उन्होंने उन सभी नगरों को लूट डाला; चूँकि उन में अत्याधिकता से बहुत लूट थी।
१५ उन्होंने मवेशियों के तम्बुओं को भी पीट डाला, और बहुतायत से भेड़ और ऊँट उठा ले चले गए, और यरूशलेम वापस लौट आए।
पन्द्रहवाँ अध्याय।
१ और ओदेद के बेटे अज़रिया पर ईश्वर के भावात्मा आ पड़े:
२ और वो आसा से भेंट करने बाहर निकल पड़ा, और उसने उस से कहा, सुनें मुझे आसा और समस्त यहूदा और बिन्यामिन; प्रभु तुम्हारे साथ हैं, जब तक कि तुम उनके साथ रहो; और यदि तुम उन्हें ढूँढोगे, वो तुम्हारे द्वारा पा लिए जाएँगे; परन्तु यदि तुम उनका त्याग कर देते हो, तो वो तुम्हारा त्याग कर देंगे।
३ अब एक दीर्घ काल के लिए इस्राएल सच्चे ईश्वर से, और एक शिक्षक पुरोहित से, और नियम से वंचित था।
४ परन्तु जब वो अपने कष्ट में इस्राएल के प्रभु ईश्वर की ओर मुड़े, और उन्हें ढूँढा, तो वो उनके द्वारा पा लिए गए थे।
५ और उन समयों में न तो बाहर जाने वाले के पास ही, न ही भीतर आने वाले के पास कोई भी शान्ति थी, बल्कि देशों के समस्त निवासियों पर महा संताप आ आ पड़े थे।
६ और राष्ट्र राष्ट्र द्वारा, और नगर नगर द्वारा नष्ट कर दिया गया था: चूँकि ईश्वर ने उन्हें समस्त आपदा से व्यग्रित कर दिया था।
७ इसलिए तुम सुदृढ़ बनो, और अपने हाथों को निर्बल मत होने दो: क्योंकि तुम्हारे कर्म के फल का भुक्तान कर दिया जाएगा।
८ और जब आसा ने इन शब्दों को, और पैग़म्बर ओदेद के प्रेरित उपदेश को सुना, तो उसने साहस लिया, और यहूदा और बिन्यामिन की समस्त भूमी में से बाहर, और एफ्रैम पहाड़ से छीने हुए उन नगरों में से बाहर उन घृणात्मक मूर्तीयों को परे हटा दिया, और प्रभु की उस बलिवेदी को नवीकृत कर दिया, जो प्रभु के आँगन के सामने थी।
९ और उसने समस्त यहूदा और बिन्यामिन, और एफ्रैम और मनश्शे में से बाहर, और शिमोन में से बाहर, उन परदेशियों को उनके साथ एकत्रित कर लिया: क्योंकि वो इस्राएल में से बहुतायतता से उसकी ओर गिर गए, जब उन्होंने देखा कि प्रभु उसके ईश्वर उसके साथ थे।
१० तो उन्होंने स्वयं को आसा के राज के पन्द्रहवें वर्ष में, तीसरे महीने में यरूशलेम में एक साथ एकत्रित कर लिया।
११ और उन्होंने प्रभु को उसी समय, उस लूट-पाट में से अर्पण कर दिया जो वो लाए था, सात सौ साँड और सात हज़ार भेड़ें।
१२ और उन्होंने एक अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर को ढूँढने के प्रतिज्ञा-पत्र में अपने समस्त हृदय के साथ और अपनी समस्त आत्मा के साथ, प्रवेश कर लिया;
१३ कि जो कोई भी इस्राएल के प्रभु ईश्वर को नहीं ढूँढेगा मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा, भले ही वो छोटा हो या बड़ा, भले ही पुरुष या स्त्री।
१४ और उन्होंने प्रभु के प्रति एक बलशाली वाणी के साथ, और चिल्लाहट के साथ, और चिंघाड़ों के साथ, और तुरहियों के साथ शपथ खाई।
१५ और समस्त यहूदा ने उस सौगन्ध पर हर्ष मनाया: क्योंकि उन्होंने अपने सम्पूर्ण हृदय से शपथ खा ली थी, और उन्हें अपनी सम्पूर्ण वाँछा से ढूँढा; और वो उनके द्वारा पा लिए गए थे: और प्रभु ने उन्हें चारों ओर आस पास विश्राम प्रदान कर दिया।
१६ और राजा आसा की माता मअकाह के समबन्ध में भी, उसने उसे रानी बनने से परे हटा दिया, क्योंकि उसने एक उपवन में एक मूर्ति बना डाली थी: और आसा ने उसकी मूर्ति को नीचे काट डाला, और कूट कर उसे भस्म कर दिया किद्रोन नदी में ही।
१७ परन्तु इस्राएल में से वो उच्च-स्थान बाहर नहीं निकाले गए थे: तथापि आसा का मन उसके समस्त दिन परिपूर्ण था।
१८ और वो ईश्वर के गृह में उन वस्तुओं को ले आया जो उसके पिता ने समर्पित की थीं, और जिन्हें उसने स्वयं समर्पित की थीं, चाँदी, और सोना, और पात्र।
१९ और आसा के राज्य के पैंतीसवें वर्ष तक कोई भी युद्ध नहीं छिड़ा था।
सोलहवाँ अध्याय।
१ आसा के राज के छत्तीसवें वर्ष में इस्राएल का राजा बशा यहूदा के विरुद्ध चढ़ाई कर बैठा, और उसने रमा का निर्माण किया, इस आशय से ताकि वो यहूदा के राजा आसा के पास किसी को भी बाहर निकल जाने या भीतर आ जाने न दे।
२ तब आसा ने प्रभु के घर के और राजा के घर के धन-कोषों में से वो चाँदी और सोना बाहर निकाल लिया, और उसे दमिश्क में बसने वाले सिरीया के राजा बनहदद को भिजवा दिया, कहते हुए,
३ मेरे और आपके बीच, एक संगठन है, जैसा कि मेरे पिता और आपके पिता के बीच था: देखें जी, मैंने आपको चाँदी और सोना भिजवा दिया है; जाकर, इस्राएल के राजा बशा के साथ अपना संगठन तोड़ डालें, ताकि वो मुझ से प्रस्थान कर ले।
४ और बनहदद ने राजा आसा का श्रवण कर लिया, और अपनी सेनाओं के कप्तानों को इस्राएल के नगरों के विरुद्ध भेज दिया; और उन्होंने इयोन, और दान, और एबलमैम, और नफ़्तली के समस्त भण्डार-नगरों को परास्त कर डाला।
५ और यह होने को आया, जब बशा ने इसके विषय में सुना, तो उसने रमा के निर्माण को त्याग दिया, और अपने कार्य को थाम दिया।
६ तब राजा आसा ने समस्त यहूदा को लिया; और वो रमा के पत्थरों को, और उसकी लकड़ी को परे उठाकर ले गए, जिन से बशा निर्माण कर रहा था; और उसने उनसे गेबा और मिज़पाह का निर्माण किया।
७ और उस समय वो भविष्य-दर्शक हननी यहूदा के राजा आसा के पास आया, और उसने उस से कहा, क्योंकि आप सिरिया के राजा पर निर्भर रहे, और प्रभु अपने ईश्वर से समर्थन नहीं लिया, इसलिए सिरिया के राजा की सेना आपके हाथ में से बाहर बच निकली है।
८ क्या वो इथियोपिया-वासी और लुबिम एक विशाल सेना नहीं थे क्या, बहुत सारे रथों और घुड़सवारों के साथ? तथापि, क्योंकि आपने प्रभु का सहारा लिया, उन्होंने उन्हें आपके हाथ में प्रदान कर दिया।
९ चूँकि प्रभु की आँखें इस समस्त पृथ्वी के सर्वत्र में इधर से उधर भागती रहती हैं, स्वयं को उनके प्रति बलशाली प्रदर्शित कर देने हेतु जिनका हृदय उनकी ओर परिपूर्ण है। इस विषय में आपने मूर्खता कर डाली है जी: इसलिए अब से लेकर आप के साथ युद्ध होते रहेंगे।
१० तब आसा उस भविष्य-दर्शक के प्रति आक्रोशित हो गया, और उसे कारावास में डाल दिया; क्योंकि वो उसके साथ इस बात के समबन्ध में रोष से भर उठा था। और आसा ने लोगों में से कुछों का उसी समय दमन कर दिया।
११ और देखो तो, आसा के कार्य, पहले वाले और अन्तिम वाले, वो यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।
१२ और आसा अपने राज के उनतालीसवें वर्ष में अपने पैरों में रोग-ग्रस्त हो गया था, जब तक कि उसका रोग बहुत ही बढ़ गया था: तथापि अपनी बीमारी में उसने प्रभु को नहीं ढूँढा, बल्कि चिकित्सकों को।
१३ और आसा अपने पित्रों के साथ लेट गया, और अपने राज के इकतालीसवें वर्ष में मर गया।
१४ और उन्होंने उसे उसके अपने ही मक़बरों में दफ़ना दिया, जिन्हें उसने अपने स्वयं के लिए ही दाऊद के नगर में बनाया था, और उसे इत्रों की कलानुसार तैयार की गई मधुर सुगन्धों और भिन्न-भिन्न प्रकार के सुगन्धित-द्रव्यों से भरी शय्या में लिटा दिया: और उन्होंने उसके लिए एक विशाल दहन बनाया।
सत्रहवाँ अध्याय।
१ और उसके बेटे यहोशाफट ने उसके स्थान में राज किया, और स्वयं को इस्राएल के विरुद्ध सुदृढ़ किया।
२ और उसने यहूदा के समस्त क़िलेबन्द नगरों में सेना-बल नियुक्त कर दिए, और यहूदा की भूमी में, और एफ्रैम के नगरों में जिन्हें उसके पिता आसा ने हथिया लिए थे, चौकियाँ स्थापित कर दीं।
३ और प्रभु यहोशाफट के साथ थे, क्योंकि वो अपने पिता दाऊद के प्रथम पथों पर चलता था, और बअलिम को नहीं ढूँढता फिरता था;
४ बल्कि वो अपने पिता के ईश्वर की खोज-बीन किया करता था, और उन्हीं के आदेशों में चलता था, और इस्राएल की करनीयों के पीछे-पीछे नहीं।
५ इसलिए प्रभु ने उसके हाथ में राज्य स्थापित कर दिया; और समस्त यहूदा यहोशाफट के पास उपहार लाया; और उसके पास धन-धान्य और आदर-सम्मान बहुतायत से थे।
६ और उसका हृदय प्रभु के पथों में ऊपर उठा हुआ था: इसके अतिरिक्त उसने यहूदा में से वो उच्च-स्थान और उपवन बाहर परे हटा दिए।
७ और उसके राज के तीसरे वर्ष में उसने अपने अध्यक्षों को भिजवाया, बेनहेल को, और ओबदिया को, और ज़क़र्या को, और नेथनील को, और मिकाया को, यहूदा के नगरों में शिक्षा प्रदान करने हेतु।
८ और उनके साथ उसने उन लेवी-वंशजों को भेजा, शेमाया को, और नेथनिया को, और ज़ेबदिया को, और असहेल को, और शेमिरमोथ को, और येहोनेथन को, और अदोनीया को, और तोबिया को, और तोबादोनिया को, लेवी-वंशजों को ही; और उनके साथ एलीशमा और यहोरम, पुरोहित।
९ और उन्होंने यहूदा में शिक्षा प्रदान की, और उनके पास प्रभु के नियम की पुस्तक साथ ही थी, और उन्होंने यहूदा के समस्त नगरों में से चलते-जाते हुए, लोगों को शिक्षा प्रदान की।
१० और प्रभु का भय यहूदा के चारों-ओर की भूमियों वाले समस्त राज्यों पर आ पड़ा, ताकि उन्होंने यहोशाफट के विरुद्ध कोई भी युद्ध नहीं किया।
११ और पलिश्तिम-वंशजों में से कुछ यहोशाफट को उपहार लाए, और कर वाली चाँदी; और अरब-देश वाले उसे पशु-समूह ले आए, सात हज़ार सात सौ मेढ़े, और सात हज़ार सात सौ नर बकरे।
१२ और यहोशाफट अति अत्याधिकता से महानता में बढ़ता चला गया; और उसने यहूदा में किले बनाए और भण्डारों वाले नगर।
१३ और उसके पास यहूदा के नगरों में बहुत सारा व्यापार था: और योद्धा पुरुष, शूरवीर पराक्रमी पुरुष यरूशलेम में थे।
१४ और उनकी संख्या यही है उनके पित्रों के घरानोंनुसार ही: यहूदा में से, हज़ारों-हज़ारों के कप्तान; अदना वो प्रमुख, और उसके साथ शूरवीर पराक्रमी पुरुष तीन लाख।
१५ और उसके साथ कप्तान येहोहनन, और उसके साथ दो लाख अस्सी हज़ार।
१६ और उसके साथ थ ज़िकरी का बेटा अमसिया, जिसने स्वयं को स्वेच्छा से प्रभु के प्रति अर्पित कर दिया; और उसके साथ दो लाख शूरवीर पराक्रमी पुरुष।
१७ और बिन्यामिन में से; एलीअदा एक पराक्रमी शूरवीर, और उसके साथ दो लाख सशस्त्रित पुरुष धनुष और ढाल लिए।
१८ और उसके साथ येहोज़बद, और उसके साथ एक लाख अस्सी हज़ार युद्ध करने हेतु तैयार, उद्यत।
१९ यही राजा की सेवा किया करते थे, उनके अतिरिक्त जिन्हें राजा ने क़िलेबन्द नगरों में नियुक्त किया हुआ था, यहूदा के सर्वत्र में ही।
अट्ठारहवाँ अध्याय।
१ अब यहोशाफट के पास धन-धान्य और आदर-सम्मान अत्याधिकता से था, और उसने अहाब के साथ नाता जोड़ा।
२ और कुछ वर्षों पश्चात वो नीचे अहाब के पास समैरिया गया। और अहाब ने उसके लिए, और उन लोगों के लिए जो उसके साथ थे, बहुतायत से भेड़ें और साँड मारे, और उसे उसके साथ रमोथगिलद पर चढ़ाई करने के लिए मनवा लिया।
३ और इस्राएल के राजा अहाब ने यहूदा के राजा यहोशाफट से कहा, क्या तुम मेरे साथ रमोथगिलद जाओगे क्या? और उसने उसे उत्तर दिया, जैसे तुम हो मैं वैसा ही हूँ, मेरे लोग तुम्हारे लोगों जैसे ही, और हम तुम्हारे साथ ही युद्ध में होंगे।
४ और यहोशाफट ने इस्राएल के राजा से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, कि आज प्रभु के शब्द पर पूछ-ताछ कर लो।
५ इसलिए इस्राएल के राजा ने पैग़म्बरों में से चार सौ आदमियों को एक साथ एकत्रित कर लिया, और उनसे कहा, क्या हम रमोथगिलद से युद्ध करने जाएँ, या मैं रुका रहूँ? और उन्होंने कहा, चढ़ाई कर लें जी; क्योंकि ईश्वर उसे राजा के हाथ में प्रदान कर देंगे।
६ परन्तु यहोशाफट ने कहा, इनके अतिरिक्त क्या यहाँ प्रभु का कोई एक पैग़म्बर नहीं है क्या, ताकि हम उस से पूछ-ताछ कर लें?
७ और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, एक आदमी अभी भी है भई, जिस से कि हम प्रभु से पूछ-ताछ कर सकते हैं: परन्तु मैं तो उस से घृणा करता हूँ; क्योंकि उसने मेरे प्रति कभी भी भलाई वाला प्रेरित-उपदेश नहीं दिया, बल्कि सदैव बुराई वाला ही: वही इम्ला का बेटा मिकाया है। और यहोशाफट ने कहा, राजा को ऐसे नहीं बोलना चाहिए।
८ और इस्राएल के राजा ने एक अफ्सर को बुलवाया, और कहा, फुर्ती से इम्ला के बेटे मिकाया को ले लाओ भई।
९ और इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशाफट प्रत्येक अपने-अपने सिंहासन पर बैठे थे, अपने चौग़े पहने हुए, और वो समैरिया के दरवाज़े के प्रवेश पर एक रिक्त स्थान में बैठे हुए थे; और सभी पैग़म्बर उनके सामने प्रेरित-उपदेश दे रहे थे।
१० और कनेना के बेटे ज़देकिया ने अपने लिए लोहे के सींघ बना लिए थे: और कहा, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, इन्हीं के साथ ही आप सिरिया को घोंप डालेंगे जब तक कि वो समाप्त नहीं हो जाते हैं।
११ और सभी पैग़म्बरों ने ऐसे ही प्रेरित-उपदेश दिए, कहते हुए, रमोथगिलद पर कर लें चढ़ाई और उन्नत हो जाएँ: चूँकि प्रभु उसे राजा के हाथ में प्रदान कर देंगे।
१२ और वो दूत जो मिकाया को बुलाने चला गया था उस से बोला, कहता हुआ, भई देख लो, पैग़म्बरों के शब्द एक ही मूँह से राजा के प्रति अच्छाई घोषित कर रहे हैं: मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इसलिए ही अपने शब्द को उन्हीं में से एक के जैसा ही बन जाने दो, और तुम अच्छाई बोलो।
१३ और मिकाया ने कहा, प्रभु के जीते जी, जो भी मेरे ईश्वर कहते हैं, वही मैं बोलूँगा।
१४ और जब वो राजा के पास आ पहुँचा था, तो राजा ने उस से कहा, मिकाया, क्या हम रमोथगिलद युद्ध करने जाएँ क्या, या मैं रुका रहूँ? और उसने कहा, चढ़ाई कर लो तुम भई और उन्नत हो जाओ: और वो तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिए जाएँगे।
१५ और राजा ने उस से कहा, भई मैं कितनी बार तुम्हें शपथ दिलवाऊँ कि तुम मुझ से प्रभु के नाम में सत्य के सिवा और कुछ भी मत कहो?
१६ तब उसने कहा, मैंने समस्त इस्राएल को पर्वतों पर तितर-बितर देखा, बिन चरवाहे के भेड़ों समान: और प्रभु ने कहा, इनके पास तो कोई भी मालिक नहीं है: इन्हें हर आदमी को अपने ही घर शांति से वापस लौट जाने दो।
१७ और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, क्या बोला नहीं था मैंने तुम से कि ये मेरे प्रति अच्छाई का प्रेरित-उपदेश नहीं देगा, बल्कि बुराई का?
१८ उसने पुनः कहा, इसलिए सुन लो प्रभु के शब्द को: मैंने प्रभु को उनके सिंहासन पर विराजमान देखा, और स्वर्ग की समस्त सेना उनके दाएँ हाथ पर और उनके बाएँ हाथ पर खड़ी हुई।
१९ और प्रभु ने कहा, इस्राएल के राजा अहाब को कौन लुभाएगा, ताकि वो रमोथगिलद पर चढ़ाई कर कर गिर जाए? और भई कोई एक इस रीती से बोल रहा था, और कोई दूसरा किसी दूसरी रीती से बोल रहा था।
२० तब एक भावात्मा बाहर निकल आया, और प्रभु के समक्ष खड़ा हो गया, और कहा, मैं उसे लुभा दूँगा जी।और प्रभु ने उस से कहा, किस से भई?
२१ और उसने कहा, मैं बाहर जाकर उसके सभी पैग़म्बरों के मूँह में एक झूठा-भावात्मा बन जाऊँगा। और उन्होंने कहा, तुम उसे लुभा दोगे, और प्रबल भी ठहरोगे: चले जाओ बाहर, और ऐसा ही कर दो।
२२ अब इसलिए, देख लो भई, प्रभु ने ही तुम्हारे इन सभी पैग़म्बरों के मूँह में एक झूठा-भावात्मा डाल दिया है, और प्रभु ने तुम्हारे समबन्ध में बुराई बोल दी है।
२३ तब कनेना का बेटा ज़देकिया निकट आया, और मिकाया को गाल पर पीट डाला, और कहा, भई प्रभु का वो भावात्मा मुझ में से किस ओर गया तेरे साथ बोलने के लिए?
२४ और मिकाया ने कहा, देख ले, तू उस दिन देखेगा जब तू स्वयं को छुपाने के लिए एक भीतर-वाले कक्ष में चला जाएगा।
२५ तब इस्राएल के राजा ने कहा, मिकाया को लेकर, और इसे उठाकर वापस नगर के राज्यपाल अमोन के पास, और राजा के बेटे योअश के पास ले जाओ;
२६ और कहना, राजा इस प्रकार कह रहे हैं, इसे कारावास में डाल दो, और इसे व्यथा की रोटी से और व्यथा के पानी से खिलाना-पिलाना, जब तक कि मैं शान्ति से वापस न आ जाऊँ।
२७ और मिकाया ने कहा, यदि तुम शान्ति से कतई भी वापस लौटते हो, तो प्रभु मुझ से नहीं बोले हैं। और उसने कहा, अरे तुम सब लोगों सुन लो भई!
२८ तो इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशाफट रमोथगिलद पर चढ़ाई करने निकल पड़े।
२९ और इस्राएल के राजा ने यहोशाफट से कहा, मैं स्वयं का भेष बदल लूँगा, और रण में घुस जाऊँगा; परन्तु तुम अपने ही वस्त्रों को धारण कर लो। तो इस्राएल के राजा ने स्वयं का भेष बदल लिया; और वह रण में प्रवेश कर गए।
३० अब सिरिया के राजा ने उन रथों के कप्तानों को, जो उसके साथ थे, आदेश दिया हुआ था, कहते हुए, तुम न छोटे के साथ न ही बड़े के साथ लड़ाई करना, सिवाय केवल इस्राएल के राजा के साथ ही।
३१ और यह होने को आया, जब उन रथों के कप्तानों ने यहोशाफट को देखा, तो उन्होंने कहा, भई यही इस्राएल का राजा है। इसलिए उन्होंने उसके चारों ओर घेरा बना लिया लड़ने हेतु, परन्तु यहोशाफट चीख पड़ा, और प्रभु ने उसकी सहायता कर दी; और ईश्वर ने उन्हें हटा दिया उस से प्रस्थान कर लेने हेतु।
३२ चूँकि यह होने को आया, कि जब उन रथों के कप्तानों ने आभास किया कि वो तो इस्राएल का राजा नहीं था, तो वो उसका पीछा करने से वापस मुड़ चले।
३३ और एक आदमी ने संयोग से एक धनुष खींच कर, इस्राएल के राजा पर उसके कवच के जोड़ों के बीचों-बीच ही वार कर डाला: इस कारण वश उसने अपने रथ के सारथी से कहा, अपना हाथ मोड़ दो, ताकि तुम मुझे सेना में से बाहर उठा ले जाओ; क्योंकि मैं तो घायल हो गया हूँ!
३४ और उस दिन युद्ध बढ़ता चला गया: तथापि इस्राएल का राजा अपने रथ में सिरियावासियों के विरुद्ध संध्या तक भी खड़ा ही रहा, और लगभग सूर्य के नीचे ढल जाने के समय में वो मर गया।
उन्नीसवाँ अध्याय।
१ और यहूदा का राजा यहोशाफट यरूशलेम अपने घर शान्ति से वापस लौट आया।
२ और हननी उस भविष्य-दर्शक का बेटा येहू उस से मिलने बाहर निकल चला, और राजा यहोशाफट से कहा, क्या आपको ईश्वर-भक्तिहीनों की सहायता करनी चाहिए क्या, और उनसे प्रेम करना चाहिए क्या जो प्रभु से घृणा करते हैं? इसलिए प्रभु के सामने से आप पर आक्रोश आ पड़ा है!
३ तथापि आप में अच्छी बातें पाई गई हैं, कि आपने भूमी में से वो उपवन बाहर हटा दिए हैं, और अपने हृदय को ईश्वर को ढूँढने हेतु उद्यत कर दिया है।
४ और यहोशाफट यरूशलेम में निवास करता रहा: और वो पुनः बीरशबा से लेकर एफ्रैम पहाड़ तक लोगों के बीच बाहर निकल पड़ा, और उन्हें अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के पास वापस ले आया।
५ और उसने भूमी में न्यायाधीष स्थापित कर दिए यहूदा के समस्त क़िलेबन्द नगरों के सर्वत्र में, नगर-नगर,
६ और उसने न्यायाधीषों से कहा, ध्यान रखना कि तुम क्या करोगे: चूँकि तुम मनुष्य हेतु न्याय नहीं करते हो, बल्कि प्रभु के लिए, जो तुम्हारे साथ ही हैं न्याय-निर्धारण में।
७ इस कारण वश प्रभु का भय आप पर बना रहे; ध्यान रखें और उसे कर दें: चूँकि प्रभु हमारे ईश्वर के साथ कोई भी अधर्मता नहीं है, न ही लोगों के प्रति पक्षपात, न ही रिश्वत-खोरी।
८ इसके अतिरिक्त यरूशलेम में यहोशाफट ने प्रभु के न्याय-निर्धारण हेतु, और मत-भेदों हेतु, लेवी-वंशजों में से, और पुरोहितों में से, और इस्राएल के पित्रों के प्रमुख में से स्थापित कर दिए, जब वो यरूशलेम वापस लौट आए थे।
९ और उसने उन्हें निर्देश दिया, कहते हुए, इस प्रकार तुम प्रभु के भय में करोगे, विश्वसनीयता से, और एक परिपूर्ण हृदय के साथ।
१० और जैसा-तैसा भी मसला तुम्हारे पास तुम्हारे भाई-जनो का आता है जो अपने नगरों में निवास करते हैं, रक्त और रक्त के बीच, नियम और आदेश, अध्यादेशों और न्याय-निर्धारणों के बीच, तुम उन्हें चेतावनी तक भी दे दे दोगे कि वो प्रभु के विरुद्ध उल्लंघन न करें, और तो आक्रोश न आ पड़े तुम पर, और तुम्हारे भाई-जनो पर: यही करो, और तुम उल्लंघन नहीं करोगे।
११ और देखो, प्रभु की समस्त रीतियों में प्रमुख पुरोहित अमरिया तुम पर नियुक्त हैं; और इश्माएल का बेटा ज़ेबदिया, यहूदा के घराने का अध्यक्ष, राजा की समस्त रीतियों हेतु ही: वो लेवी-वंशज भी तुम्हारे समक्ष अफ्सर होंगे। वीरता से व्यवहार करना, और प्रभु उन भलों के साथ होंगे।
बीसवाँ अध्याय।
१ और इसके पश्चात भी ये होने को आया, कि मोआब की सन्तानें, और अम्मोन की सन्तानें, और उनके साथ उन अम्मोन-वंशजों के अतिरिक्त कुछ, यहोशाफट के विरुद्ध युद्ध करने आ गए।
२ तब कुछों ने आकर यहोशाफट को बताया, कहते हुए, सिरिया के इस समुद्र के पार से तुम्हारे विरुद्ध एक विशाल जनौघ आ रहा है; और देखो तो वो तो हज़ज़ोंतमार में हैं, जो कि एनगदी है।
३ और यहोशाफट भयभीत हो गया, और स्वयं को प्रभु को ढूँढने हेतु स्थित किया, और यहूदा के सर्वत्र में एक उपवास घोषित कर दिया।
४ और यहूदा ने प्रभु से सहायता माँगने हेतु स्वयं को एक साथ एकत्रित कर लिया: यहूदा के समस्त नगरों में से ही बाहर वो आए प्रभु को ढूँढने के लिए।
५ और यहोशाफट यहूदा और यरूशलेम की सभा में खड़ा था, प्रभु के घर में ही, नए आँगन के समक्ष,
६ और कहा, हे हमारे पित्रों के प्रभु ईश्वर, क्या आप स्वर्ग में ईश्वर नहीं हैं क्या? और क्या आप ही उन अन्य-राष्ट्रों के समस्त राज्यों पर ही राज नहीं करते हैं क्या? और क्या आप ही के हाथ में क्या शक्ती और बल नहीं हैं क्या, कि कोई भी आपका सामना करने का सामर्थ्य नहीं रखता है?
७ क्या आप हमारे ईश्वर नहीं हो क्या जिन्होंने अपने गण इस्राएल के समक्ष ही इस भूमी के निवासियों को बाहर खदेड़ डाला था, और इसे अपने मित्र अब्रहाम के बीज को प्रदान कर दिया था सदा-सदा के लिए ही?
८ और वो इसी में बस गए, और आपके लिए इसी में एक पुण्य-स्थान का निर्माण कर दिया उसी में ही आपके नाम हेतु, कहते हुए,
९ यदि, जब बुराई हम पर आ पड़ती है, मान लो कि तलवार, न्याय-निर्धारण, या महामारी, या अकाल, हम इस घर के सामने खड़े हो जाते हैं, और आपकी ही उपस्थिति में ही, चूँकि आप ही का नाम इस घर में है, और आपके प्रति ही चीखते हैं अपनी उत्पीड़ना में, तब आप सुन लेंगे और सहायता करेंगे।
१० और अब, देखें जी, अम्मोन और मोआब, और सेईर के पहाड़ की सन्तानें, जिन पर आपने इस्राएल को आक्रमण करने हेतु अनुमती नहीं दी थी, जब वह मिस्र की भूमी में से बाहर निकल आए थे, बल्कि वो उनसे मुड़ गए थे, और उनका नाश नहीं किया;
११ देखें, वो हमारा कैसे भुक्तान कर रहे हैं जी, आकर हमें आपके अधिकार में से बाहर फैंक देने हेतु, जिसे आपने हमें विरासत में ले लेने हेतु प्रदान कर दिया है।
१२ हे हमारे ईश्वर जी, क्या आप उनका न्याय नहीं करेंगे क्या? चूँकि हमारे पास इस विशाल भीड़ के विरुद्ध तो कोई भी बल नहीं है जो हमारे विरुद्ध आ रही है जी; न ही हम जानते हैं कि हम क्या करें: परन्तु हमारी आँखें आप पर ही टिकी हुई हैं।
१३ और समस्त यहूदा प्रभु के समक्ष ही खड़ा था, उनके छोटे नन्हों, उनकी पत्नियों, और उनके बच्चों के साथ।
१४ तब असफ के बेटों में से एक लेवी-वंशज पर, मत्तनियाह के बेटे, येइएल के बेटे, बेनाया के बेटे, ज़क़र्या के बेटे यहज़िएल पर ही, प्रभु के भावात्मा सभा के बीच ही आ पड़े;
१५ और उसने कहा, श्रवण कर लो तुम, समस्त यहूदा, और तुम यरूशलेम के निवासियों, और आप राजा यहोशाफट, प्रभु इस प्रकार कह रहे हैं तुम से, इस विशाल जनौघ के कारण न ही भयभीत हो न ही निराश; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं है, बल्कि ईश्वर का।
१६ कल ही तुम नीचे उनके विरुद्ध चले जाना: देखो वो ज़िज़ की चट्टान के साथ-साथ ही चढ़ाई कर रहे हैं; और तुम उन्हें येरुएल के जँगली क्षेत्र के सामने ही, नदी के अन्त पर पा लोगे।
१७ तुम्हें इस युद्ध में लड़ाई करने की आवश्यक्ता नहीं होगी: स्वयं को स्थित कर लेना, खड़े रहना, और तुम्हारे साथ प्रभु के बचाव को देख लेना, हे यहूदा और यरूशलेम: भयभीत मत हो, न ही निराश हो; कल उनके विरुद्ध बाहर निकल पड़ना: क्योंकि प्रभु तुम्हारे साथ ही होंगे।
१८ और यहोशाफट ने अपना सर झुका लिया उसका चेहरा धरती की ओर किया हुआ: और समस्त यहूदा और यरूशलेम के निवासी प्रभु के समक्ष अपने चेहरों के बल गिर पड़े, प्रभु की आराधना करते हुए।
१९ और वो लेवी-वंशज, कहाथ-वंशजों की सन्तानों में से, और कोरा-वंशजों की सन्तानों में से, इस्राएल के प्रभु ईश्वर की एक ऊपर उठी हुई शक्ति भरी ध्वनि के साथ प्रशन्सा करने हेतु खड़े हो गए।
२० और वो प्रातःकाल में शीघ्र ही उठ कर तेकोआ के जँगली-क्षेत्र में आगे निकल चले: और जैसे-जैसे वो आगे-आगे जा रहे थे, यहोशाफट ने खड़े होकर कहा, सुन लो मुझे हे यहूदा और तुम यरूशलेम के निवासियों; प्रभु अपने ईश्वर में विश्वास कर लो, तो इस प्रकार तुम संस्थापित कर दिए जाओगे, तो इस प्रकार तुम उन्नत हो जाओगे।
२१ और जब उसने लोगों के साथ परामर्श कर लिया था, उसने प्रभु के प्रति गायक नियुक्त कर दिए, जो पवित्रता के सौन्दर्य की प्रशन्सा करें, जैसे-जैसे वो सेना के सामने-सामने बाहर निकल कर जा रहे थे, और कहने के लिए, प्रभु की प्रशन्सा करो; क्योंकि उनकी करुणा सदा-सदा के लिए बनी रहती है।
२२ और जब उन्होंने गाना और प्रशन्सा करना आरम्भ किया, तो प्रभु ने यहूदा के विरुद्ध आई हुई अम्मोन, मोआब, और सेईर पहाड़ की सन्तानों के विरुद्ध घात बिठा दीं; और वो पीट डाल दिए गए थे।
२३ क्योंकि अम्मोन और मोआब की सन्तानें सेईर पहाड़ के निवासियों के विरुद्ध खड़े हो गए, उन्हें मार डालने और नष्ट कर देने हेतु ही: और जब उन्होंने सेईर के निवासियों को समाप्त कर दिया था, तो प्रत्येक ने एक दूसरे को नष्ट कर डालने में सहायता कर दी।
२४ और जब यहूदा जँगली-क्षेत्र में उस पहरेदारी वाली मीनार की ओर आए, तो उन्होंने उस जनौघ को देखा, और देखो तो, वो तो मृत शव धरती पर गिरे हुए थे, और कोई भी बच नहीं पाया!
२५ और जब यहोशाफट और उसके लोग उनकी लूट को लेने आए, उन्होंने उनके बीच बहुतायत में दोनो उन शवों के साथ धन-धान्य पाए, और अनमोल गहने, जिन्हें उन्होंने अपने स्वयं के लिए ही उतार लिया, उस से भी अधिक जो वो उठा कर ले जा सकते थे: और वो तीन दिनो तक लूट को एकत्रित कर रहे थे भई, वो इतनी सारी थी!
२६ और चौथे दिन पर उन्होंने स्वयं को बेराका की घाटी में एकत्रित किया; चूँकि वहीं उन्होंने प्रभु को आशीष दिया: इसी कारण वश उसी स्थान का नाम-करण कर दिया गया था, बेराका की घाटी, इसी दिन तक ही।
२७ तब वो वापस लौट आए, यहूदा और यरूशलेम का प्रत्येक पुरुष, और यहोशाफट उनके आगे-आगे, पुनः हर्षितता से यरूशलेम जाने के लिए; चूँकि प्रभु ने उन्हें उनके शत्रुओं पर हर्ष मनवा दिया था।
२८ और वो यरूशलेम सारंगियों और वीणाओं और चिंघाड़ों के साथ आ पहुँचे प्रभु के घर में ही।
२९ और ईश्वर का भय उन देशों के उन समस्त राज्यों पर छा गया था, जब उन्होंने सुना कि प्रभु इस्राएल के शत्रुओं के विरुद्ध लड़े थे।
३० तो यहोशाफट का राज शान्त था: क्योंकि उसके ईश्वर ने उसे चारों-ओर विश्राम प्रदान कर दिया था।
३१ और यहोशाफट ने यहूदा पर राज किया: वो पैंतीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया; और उसने यरूशलेम में पच्चीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम अज़ुबा था, शिल्ही की बेटी।
३२ और वह अपने पिता आसा के पथ पर चला; और वो उस से परे नहीं मुड़ा, प्रभु की दृष्टि में वो जो उचित था करता हुआ।
३३ तथापि वो उच्च-स्थान परे नहीं हटाए गए थे; क्योंकि लोगों ने अभी तक भी अपने हृदय अपने पित्रों के ईश्वर के प्रति उद्यत नहीं किए थे।
३४ अब यहोशाफट के शेष कार्य, पहले वाले और अन्तिम वाले, देखो तो, वो हननी के बेटे येहु की पुस्तक में लिखे हुए हैं, जिसका उल्लेख इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में किया गया है।
३५ और इसके पश्चात यहूदा के राजा यहोशाफट ने स्वयं को इस्राएल के राजा अहज़िया के साथ जोड़ लिया, जिसने अति-दुष्टता क्रियान्वित की थी:
३६ और उसने स्वयं को तरशीश जाने के लिए जल-यान बनाने हेतु उसके साथ जोड़ा: और उन्होंने उन जल-यानों को एज़्योंगेबर में बनाया।
३७ तब मरेशा के दोदवाह के बेटे एलीएज़र ने यहोशाफट के विरुद्ध प्रेरित-उपदेश दिया, कहते हुए, चूँकि आपने स्वयं को अहज़िया के साथ जोड़ लिया है, प्रभु ने आपके कार्यों को तोड़ दिया है। और वो जल-यान तोड़ दिए गए थे, कि वो तरशीश जाने हेतु असमर्थ थे।
इक्कीसवाँ अध्याय।
१ अब यहोशाफट अपने पित्रों के साथ लेट गया, और दाऊद के नगर में अपने पित्रों के साथ दफ़ना दिया गया था। और यहोरम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
२ और उसके पास भाई जन थे यहोशाफट के बेटे, अज़रिया, और येहिएल, और ज़क़र्या, और अज़रिया, और मिखाएल, और शेफतिया: यह सभी इस्राएल के राजा यहोशाफट के बेटे थे।
३ और उनके पिता ने उन्हें बहुतेरे उपहार चाँदी के, और सोने के, और बहुमूल्य वस्तुओं के, यहूदा में क़िलेबन्द नगारों के साथ प्रदान किए थे: परन्तु राज्य उसने यहोरम को प्रदान कर दिया था; क्योंकि वो प्रथम-जन्मा था।
४ तो अब जब यहोरम अपने पिता के राज्य पर ऊपर उठ आया था, तो उसने स्वयं को सशक्त किया, और तलवार से अपने समस्त भाई-जनो को, और इस्राएल के भिन्न-भिन्न अध्यक्षों को भी मार डाला।
५ यहोरम बत्तीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में आठ वर्ष राज किया था।
६ और वो इस्राएल के राजाओं के पथ पर चला करता था, जैसा कि अहाब का घराना किया करता था: क्योंकि उसके पास अहाब की बेटी थी पत्नी के लिए: और उसने प्रभु के दृष्टि में वो क्रियान्वित किया जो बुरा था।
७ तथापि प्रभु की इच्छा दाऊद के घराने को नष्ट कर देने की नहीं थी, उस प्रतिज्ञा-पत्र के कारण जो उन्होंने दाऊद के साथ बनाया था, और जैसा की उन्होंने वचन दे दिया था उसे और उसके बेटों को सदा के लिए एक उजाला प्रदान कर देने का।
८ उसके दिनो में एदोम-वंशजों ने यहूदा के हाथ के तले से विद्रोह कर डाला, और अपने स्वयं के लिए एक राजा नियुक्त कर दिया।
९ तब यहोरम निकल पड़ा अपने अध्यक्षों के साथ, और उसके समस्त रथ उसके साथ: और वो रात्रि को उठा, और उन एदोम-वंशजों को और उन रथों के कप्तानों को पीट डाला जिन्होंने उसे भीतर घेर लिया था।
१० तो उन एदोम-वंशजों ने यहूदा के हाथ के तले से इस दिन तक विद्रोह किए रखा। तब लिब्ना ने भी उसी समय उसके हाथ के तले से विद्रोह कर दिया, चूँकि उसने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर का त्याग कर डाला था।
११ इसके अतिरिक्त उसने यहूदा के पर्वतों में उच्च-स्थान बनाए, और यरूशलेम के निवासियों से अविवाहित-यौन करवाया, और यहूदा को विवश किया।
१२ और उसके पास पैगमबर एलिया से एक लेख आया, कहता हुआ, तेरे पिता दाऊद के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, चूँकि तू अपने पिता यहोशाफट के पथों पर नहीं चला, न ही यहूदा के राजा आसा के पथों पर,'
१३ बल्कि इस्राएल के राजाओं के पथ पर चला है, और यहूदा को और यरूशलेम के निवासियों से राँडपना करवा दिया है, अहाब के घराने के वैश्यापने के समान, और अपने पिता के घराने से अपने भाई-जनो को भी मार डाल दिया है, तो तेरे स्वयं से बहतर थे:
१४ देख ले भई, एक अति विशाल वार से प्रभु तेरे लोगों पर, और तेरी सन्तानों पर, और तेरी पत्नियों पर, और तेरे समस्त माल पर वार कर डालेंगे:
१५ और तेरी अंतड़ियों के रोग द्वारा तुझे विशाल रुग्णता लग जाएगी, जब तक कि तेरी अंतड़ियाँ दिन-दिन करके इस रुग्ण के कारण बाहर नहीं गिर जाएँगी।
१६ इसके अतिरिक्त प्रभु ने यहोरम के विरुद्ध पलिश्तिम-वंशजों, और उन अरब देश वालों के भावात्मा को सक्रीय कर दिया, जो इथियोपिया- वालों के निकट थे:
१७ और वो चढ़ाई कर कर यहूदा में अन्दर आ गए, और उस में भीतर टूट पड़े, और राजा के घर में पाया गया वो सारा माल उठ कर ले गए, और उसके बेटों को भी, और उसकी पत्नियों को; तो उसके पास एक भी बेटा नहीं बचा रहा, सिवाय येहोअहज़ के, उसने बेटों में से सबसे छोटा।
१८ और इस सभी के पश्चात प्रभु ने उसे उसकी अंतड़ियों पर एक असाध्य रुग्ण से वार कर डाला।
१९ और यह होने को आया, कि दिन- दिन समय की प्रक्रिया में, दो वर्षों के अन्त के पश्चात, उसकी अंतड़ियाँ उसके रुग्ण के कारण बाहर गिर पड़ीं: दो वो घोर रोगों से मर गया। और उसके लोगों ने उसके लिए कोई भी दहन नहीं बनाया, उसके पित्रों के दहन के जैसा।
२० बत्तीस वर्ष की आयु का था वो जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में आठ वर्ष राज किया, और चल बसा बिना अनिच्छित ही। तथापि उन्होंने उसे दाऊद के नगर में दफ़नाया, परन्तु राजाओं के मक़बरों में नहीं।
बाईसवाँ अध्याय।
१ और यरूशलेम के निवासियों ने उसके स्थान में उसके सबसे छोटे बेटे अहज़िया को राजा बना दिया: क्योंकि शिविर में
उन अरब देश वालों के साथ आने वाले उस आदमियों के सैन्य-दल ने उन सभी अग्रजों की हत्या कर डाली थी। तो यहूदा के राजा यहोरम के बेटे अहज़िया ने राज किया।
२ अहज़िया बयालीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में एक वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम अथलिया था, ओम्री की बेटी।
३ वो भी अहाब के घराने के पथों पर चलाता था: क्योंकि उसकी माँ उसकी परामर्शदाता थी दुष्टता क्रियान्वित कर देने हेतु।
४ इस कारण वश उसने प्रभु की दृष्टि में बुराई की अहाब के घारने के समान ही: चूँकि वही उसके परामर्शदाता थे उसके विनाश के प्रति ही उसके पिता की मृत्यु के पश्चात।
५ वो उन्हीं के परामर्श के पीछे-पीछे भी चलता था, और इस्राएल के राजा अहाब के बेटे यहोरम के साथ रमोथगिलद में सिरिया के राजा हज़एल के विरुद्ध युद्ध करने चला गया: और उन सिरिया-वासियों ने योरम पर वार कर डाला।
६ और वो यज़रील स्वस्थ होने वापस लौट आया था उन घावों के कारण जो उसे रमा में दिए गए थे, जब को सिरिया के राजा हज़एल के विरुद्ध लड़ा था। और यहूदा के राजा यहोरम का बेटा अज़रिया अहाब के बेटे यहोरम को यज़रील में देखने के लिए नीचे चला गया, क्योंकि वो बीमार था।
७ और अहज़िया का विनाश ईश्वर की ओर से था योरम के पास आ पहूँचने से: क्योंकि जब वो आ पहुँचा था, वो यहोरम के साथ बाहर निकल पड़ा निम्शी के बेटे येहू के विरुद्ध, जिसका प्रभु ने अहाब के घराने को काट डालने हेतु अभिषेक कर दिया था।
८ और यह होने को आया कि, जब येहु अहाब के घराने पर न्याय-निर्धारण क्रियान्वित कर रहा था, और पाए यहूदा के प्रमुख, और अहज़िया के भाई-जनो के बेटे, जो अहज़िया की सेवा किया करते थे,
९ और उसने अहज़िया को ढूँढा: और उन्होंने उसे पकड़ लिया, क्योंकि वो समैरिया में छुपा हुआ था, और उसे येहु के पास ले आए: और जब उन्होंने उसे मार डाल दिया था, उन्होंने उसे दफ़ना दिया: क्योंकि उन्होंने कहा, ये तो यहोशाफट का बेटा है, जिन्होंने अपने सम्पूर्ण हृदय से प्रभु को ढूँढा था। तो अहज़िया के घराने के पास राज्य को बनाए रखने हेतु कोई भी बल न रहा।
१० परन्तु जब अहज़िया की माँ अथलिया ने देखा कि उसका बेटा मर चुका था, तो उसने उठ कर यहूदा के घराने के समस्त राजसी बीज को नष्ट कर डाला।
११ परन्तु राजा की बेटी येहोशबेथ ने अहज़िया के बेटे योअश को लेकर, उसे राजा के मार डाल दिए गए बेटों के बीच में से चुरा लिया; और उसे और उसकी दाई को एक शय्यन-कक्ष में रख दिया। तो राजा यहोरम की बेटी, पुरोहित येहोयदा की पत्नी येहोशबेथ ने, क्योंकि वो अहज़िया की बहन थी, उसे अथलिया से छुपा लिया, ताकि उसने उसे नहीं मार डाला।
१२ और वो उनके साथ ईश्वर के घर में छह वर्ष छुपा हुआ था। और अथलिया ने भूमी पर राज किया।
तेईसवां अध्याय।
१ और सातवें वर्ष में येहोयदा ने स्वयं को सुदृढ़ किया, और सौ-सौ के कप्तानों को लेकर अपने साथ प्रतिज्ञा-बद्ध कर दिया, यरोहम का बेटा अज़रिया, और येहोहनन का बेटा इश्माएल, और ओबद का बेटा अज़रिया, और अदाया का बेटा मअसिया, और ज़िकरी का बेटा एलीशफत।
२ और उन्होंने यहूदा में इधर-उधर जाकर, यहूदा के समस्त नगरों में से उन लेवी-वंशजों को बाहर एकत्रित कर लिया, और इस्राएल के पित्रों के प्रमुख, और वह यरूशलेम आ गए।
३ और समस्त सभा ने ईश्वर के घर में राजा के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया। और उसने उनसे कहा, देख लो, राजा का बेटा राज करेगा, जैसा की प्रभु ने दाऊद के बेटों के विषय में कह दिया है।
४ यही है वो कार्य जो तुम करोगे; तुम्हारा एक तिहाई भाग जो सैबथ पर प्रवेश करता हुआ, पुरोहितों में से और लेवी-वंशजों में से, द्वारों के पहरेदार होंगे;
५ और एक तिहाई भाग राजा के घर पर होंगे; और एक तिहाई भाग नीव के दरवाज़े पर ही: और सभी लोग प्रभु के घर के आँगनों में होंगे।
६ परन्तु किसी को भी प्रभु के घर में मत आ जाने देना, सिवाय पुरोहितों के, और उन्हें जो लेवी-वंशजों में से सेवा करते हैं; वही भीतर जाएँगे, क्योंकि वह पवित्र हैं: परन्तु सभी लोग प्रभु की पहरेदारी को रखेंगे।
७ और वो लेवी-वंशज राजा को चारों ओर से घेरे लेंगे, प्रत्येक पुरुष अपने हाथ में अपने शत्रों के साथ ही: और वो अन्य जो कोई भी घर में भीतर आता है, मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा: परन्तु तुम राजा के साथ ही रहना जब वो भीतर आते हैं और जब वो बाहर निकलते हैं।
८ तो उन लेवी-वंशजों ने और समस्त यहूदा ने उन सभी बातोंनुसार कर दिया जो पुरोहित येहोयदा ने आदेश दे दिए थे, और प्रत्येक पुरुष ने अपने आदमी ले लिए जिन्हें सैबथ पर भीतर प्रवेश करना था, उन्हीं के साथ जिन्हें सैबथ पर बाहर निष्कास करना था, चूँकि पुरोहित येहोयदा ने उन कार्यकालों को विदाई नहीं दी थी।
९ इसके अतिरिक्त पुरोहित येहोयदा ने उन सौ-सौ पर उन कप्तानों को राजा दाऊद के रहे भाले, और चोटी ढालें, और बड़ी ढालें दे दीं, जो ईश्वर के घर में थीं।
१० और उसने उन सभी लोगों को स्थित कर दिया, प्रत्येक पुरुष अपने हाथ में अपने शास्त्र ही के साथ, मंदिर के दाहिने ओर से लेकर मंदिर के बाएँ ओर तक, बलिवेदी और मंदिर के साथ-साथ ही, राजा के चारों ओर।
११ तब वो राजा के बेटे को बाहर निकाल लाए, और उस पर वो मुकुट लगा दिया, और उसे वो साक्ष्य दे दिया; और उसे राजा बना दिया। और येहोयदा और उसके बेटों ने उसका अभिषेक कर दिया, और कहा, राजा जीवित रहें!
१२ अब जब अथलिया ने लोगों का शोर सुना भागते हुए राजा की प्रशन्सा करते हुए, तो वो लोगों के पास प्रभु के मंदिर में भीतर आ पहुँची:
१३ और उसने देखा, और देखो तो, राजा अपने स्तम्भ के साथ खड़ा था प्रवेश पर ही, और वो प्रमुख और चिंघाड़े राजा के साथ-साथ ही, और भूमी के सभी लोग हर्ष मनाते हुए, और चिंघाड़े बजाते हुए, गायक भी संगीत-यंत्रों के साथ, और ऐसे जो गुण-गान के गाने की शिक्षा प्रदान किया करते थे। तब अथलिया ने अपने कपड़े फाड़ डाले, और कहा राजद्रोह, राजद्रोह!
१४ तब पुरोहित येहोयदा उन सौ-सौ के कप्तानों को जो सेना पर नियुक्त थे बाहर ले आया, और उनसे कहा, इसे पंक्तियों में से बाहर निकाल ले जाओ: और वो जो कोई भी इसके पीछे-पीछे लगता है, उसे तलवार से मार डाल दिया जाने देना। क्योंकि पुरोहित ने कहा, इसे प्रभु के घर में मत मार डालना भई।
१५ तो उन्होंने उस पर हाथ धर दिए; और जब वो राजा के घर के साथ ही उस घोड़े-द्वार की प्रविष्टि में आ पहुँची थी, तो उन्होंने उसे वहीं मार डाला
१६ और येहोयदा ने एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया अपने बीच, और समस्त लोगों के बीच, और राजा के बीच, कि वह प्रभु के ही गण हों।
१७ तब सभी लोगों ने बअल के घर में जाकर उसे नीचे तोड़ डाला, और उसकी बलिवेदियों को और उसकी प्रतिमाओं को टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और बअल के पुरोहित मत्तन को बलिवेदियों के सामने ही मार डाला।
१८ और येहोयदा ने प्रभु के घर के निर्देशक-पदों को नियुक्त कर दिया उन लेवी-वंशज पुरोहितों के हाथ ही जिन्हें दाऊद ने प्रभु के घर में वितरित कर दिया था, प्रभु के जले-चढ़ावों को चढ़ाने हेतु ही, जैसा की मूसा के नियम में लिखा हुआ है, हर्ष और गाने के संग ही, ज़िया कि दाऊद ने विहित-नियुक्त कर दिया था।
१९ और उसने प्रभु के घर के दरवाज़ों पर द्वार-पालों को खड़ा कर दिया, ताकि कोई भी जो किसी भी विषय में अस्वच्छ हो भीतर प्रवेश न करे।
२० और उसने उन सौ-सौ पर कप्तानों को, और कुलीन व्यक्तियों को, और लोगों के राज्यपालों को, और भूमी के समस्त लोगों को लिया, और राजा को प्रभु के घर से नीचे ले आए, और वह ऊँचे-दरवाज़े में से होते हुए राजा के घर में आ गए, और राजा को राज्य के सिंहासन पर बिठा दिया।
२१ और भूमी के समस्त लोगों ने हर्ष मनाया, और वो नगर चुप-चाप था, अथलिया को उनके तलवार से मार डाल दिए जाने के पश्चात ही।।
चौबीसवाँ अध्याय।
१ योअश सात वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में चालीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम बेएरशबा की ज़िबिया भी था।
२ और योअश ने वही किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था पुरोहित येहोयदा के समस्त दिन।
३ और येहोयदा ने उसके लिए दो पत्नियाँ लीं; और उसने बेटे और बेटियाँ जनने।
४ और इसके पश्चात यह होने को आया, कि योअश का मन प्रभु के घर का सुधार करने का था।
५ और उसने उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों को एक साथ एकत्रित किया, और उनसे कहा, यहूदा के नगरों में बाहर चले जाओ, और समस्त इस्राएल में से वर्ष-प्रति-वर्ष पैसा एकत्रित कर लो अपने ईश्वर के घर की मरम्मत करने हेतु, और भई देख लेना कि तुम इस बात में शीघ्रता बरत लेना। तथापि उन लेवी-वंशजों ने शीघ्रता नहीं बरती।
६ और राजा ने प्रमुख येहोयदा को बुलवा भेजा, और उस से कहा, भई आपने उन लेवी-वंशजों से माँग क्यों नहीं की कि वो यहूदा और यरूशलेम में से बाहर उस एकत्रण को ले आएँ, प्रभु के और इस्राएल की सभा के सेवक मूसा के आदेशानुसार ही, साक्ष्य के तम्बू के लिए?
७ चूँकि उस दुष्ट औरत अथलिया के बेटों ने ही ईश्वर के घर को तोड़ डाला था; और प्रभु के घर की उन समस्त समर्पित वस्तुओं को उन्होंने बअलिम के प्रति अर्पित कर डाला था!
८ और राजा के आदेश पर उन्होंने एक संदूक बनाया, और उसे प्रभु के घर के दरवाज़े के बाहर ही स्थित कर दिया।
९ और उन्होंने यहूदा और यरूशलेम के सर्वत्र में एक घोषणा की, प्रभु के पास ही उस एकत्रण को ले आने की जो ईश्वर के सेवक मूसा ने इस्राएल पर जँगली-क्षेत्र में लागू की थी।
१० और सभी मुखियों और सभी लोगों ने हर्ष मनाया, और लाते रहे, और उस संदूक में डालते रहे, जब तक कि उन्होंने लक्ष्य प्राप्त कर लिया था।
११ अब यह होने को आया, कि जिस समय पर उस संदूक को उन लेवी-वंशजों के हाथों राज के कार्यालय में लाय गया, और जब उन्होंने देखा कि बहुत सारा पैसा था, तो राजा का लिपिक और उच्च पुरोहित के अफ्सर ने आकर उस संदूक को रिक्त कर दिया, और उसे लेकर, और उसे पुनः उसके स्थान में उठाकर ले गए। इस प्रकार उन्होंने दिन-प्रति-दिन किया, और बहुतायतता से पैसा एकत्रित कर लिया।
१२ और राजा और येहोयदा ने उसे ऐसों को प्रदान कर दिया जो प्रभु के घर की सेवा का कार्य करते थे, और राजगीरों और बढ़ईयों को वेतन पर ले लिया प्रभु के घर का सुधार करने हेतु, और उन्हें भी जो लोहे और पीतल की कारीगरी करते थे प्रभु के घर की मरम्मत करने हेतु ही।
१३ तो उन कामगारों ने काम किया, और उनके हाथों द्वारा काम में उन्नती हुई, और उन्होंने ईश्वर के घर को उसकी परिस्थिति में खड़ा कर दिया, और उसे सुदृढ़ कर दिया।
१४ और जब उन्होंने उसका समापन कर दिया था, तो वो उस शेष पैसे को राजा और येहोयदा के पास ले आए, जिस से कि प्रभु के घर के लिए पात्र बना दिए गए थे, सेवा करने हेतु पात्र ही, और चढ़ाने हेतु, और चम्मच, और सोने और चाँदी के पात्र। और वो प्रभु के घर में येहोयदा के समस्त दिनो में लगातार जले-चढ़ावे चढ़ाते रहे।
१५ परन्तु येहोयदा वृद्ध होता चला गया, और दिनो से भरपूर था जब उसका देहान्त हुआ था; एक सौ तीस वर्षों की आयु का जब उसकी मृत्यु हुई थी।
१६ और उन्होंने उसे राजाओं के बीच दाऊद के नगर में दफ़नाया, चूँकि उसने इस्राएल में भलाई की थी, दोनो ईश्वर के प्रति, और उनके घर के प्रति।
१७ अब येहोयदा के देहान्त के पश्चात यहूदा के प्रमुख आए, और राजा का अभिवादन किया। तब राजा ने उनका श्रवण कर लिया।
१८ और उन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के घर का त्याग कर डाला, और उपवनों और मूर्तीयों की सेवा की: और यहूदा और यरूशलेम पर आक्रोश आ पड़ा उनके उल्लंघन के कारण।
१९ तथापि उन्होंने उनके पास पैग़म्बर भेजे, उन्हें पुनः प्रभु के पास वापस ले आने हेतु; और उन्होंने उनके विरुद्ध साक्ष्य दिया: परन्तु उन्होंने कान नहीं लगाए।
२० और ईश्वर के भावात्मा पुरोहित येहोयदा के बेटे ज़क़र्या पर आ पड़े, जो लोगों पर खड़ा था, और उसने उनसे कहा, ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, भई तुम क्यों प्रभु के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हो, कि तुम उन्नत नहीं हो सकते? चूँकि तुमने प्रभु को त्याग डाला है, उन्होंने भी तुम्हारा त्याग कर दिया है।
२१ और उन्होंने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा कर उस पर प्रभु के घर के आँगन में राजा के आदेश पर पत्थरों से पथराव कर दिया।
२२ इस प्रकार राजा योअश ने उस करुणता को स्मरण में नहीं रखा जो येहोयदा उसके पिता ने उसके प्रति की थी, बल्कि उसके बेटे को मार डाला। और जब वो मरा तो उसने कहा, प्रभु ये देख लें और इसकी पूछ-ताछ कर लें।
२३ और यह होने को आया कि वर्ष के अन्त में, कि सिरिया की सेना ने उसके विरुद्ध चढ़ाई कर दी: और वो यहूदा और यरूशलेम आ पहुँचे, और लोगों के बीच में से लोगों के समस्त मुखियों को नष्ट कर डाला, और उनकी समस्त लूट-पाट को दमिश्क के राजा के पास भिजवा दी।
२४ चूँकि उन सिरीया-वासियों की सेना तो एक लोगों की छोटी सी ही टुकड़ी के साथ ही आई थी, और प्रभु ने उनके हाथ में एक बहुत ही विशाल सेना प्रदान कर दी, चूँकि उन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर का त्याग कर डाला था। तो उन्होंने योअश के विरुद्ध न्याय क्रियान्वित कर डाला।
२५ और जब वो उस से प्रस्थान कर चुके थे, चूँकि उन्होंने उसे बहुत से रोगों से ग्रस्त छोड़ दिया था, तो उसके अपने ही नौकरों ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा दिया पुरोहित येहोयदा के बेटों के रक्त के वास्ते ही, और उसे उसके बिस्तर पर ही मार डाला, और वो मर गया: और उन्होंने उसे दाऊद के नगर में दफ़ना दिया, परन्तु उन्होंने उसे राजाओं के मक़बरों में नहीं दफ़नाया।
२६ और यही हैं वो जिन्होंने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचाया था; एक अम्मोन-वंशज स्त्री शिमेथ का बेटा ज़बद, और शिमरीथ एक मोआब-वंशज स्त्री का बेटा यहोज़ाबद।
२७ अब उसके बेटों के, और उस पर लदे हुए भारों की बृहत्ता के, और ईश्वर के घर के सुधार के समबन्ध में, देखो तो, वह राजाओं की पुस्तक की कहानी में लिखे हुए हैं। और अमज़िया उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
पच्चीसवाँ अध्याय।
१ अमज़िया पच्चीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में उन्नतीस वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम येहोअदन था जो यरूशलेम से थी।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, तथापि एक परिपूर्ण हृदय से नहीं।
३ और यह होने को आया, कि जब राज्य उसके प्रति स्थापित हो गया था, कि उसने अपने नौकरों को मार डाला जिन्होंने राजा उसके पिता की हत्या कर डाली थी।
४ परन्तु उनकी सन्तानों को उसने नहीं मारा, बल्कि वैसा ही किया जैसा मूसा की पुस्तक में नियम में लिखा हुआ है, जहाँ प्रभु ने आदेश दिया, कहते हुए, बेटों के लिए पिता नहीं मरेंगे, न ही पिताओं के लिए बेटे मरेंगे: बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने ही स्वयं के पाप के लिए मरेगा।
५ इसके अतिरिक्त अमज़िया ने यहूदा को एक साथ एकत्रित किया, और उन्हें हज़ार-हज़ार पर कप्तान, और सौ-सौ पर कप्तान नियुक्त किया, उनके पित्रों के घरानोंनुसार, समस्त यहूदा और बिन्यामिन के सर्वत्र में: और उसने उनकी गिनती बीस साल की आयु से लेकर और ऊपर तक की कर दी, और उन्हें तीन लाख चुने हुए पाया आगे बढ़ कर युद्ध करने हेतु, जो भाला और ढाल सम्भाल सकते थे।
६ उसने चाँदी के सौ तलनतन भारों से इस्राएल में से एक लाख शूरवीर पराक्रमी आदमियों को भी भाड़े पर ले लिया।
७ परन्तु उसके पास ईश्वर का बन्दा आया, कहता हुआ, हे राजा, इस्राएल की सेना को अपने साथ मत जाने देना; चूँकि प्रभु इस्राएल के साथ, एफ्रैम की समस्त सन्तानों के साथ नहीं हैं।
८ परन्तु यदि आप जा ही रहे हो, तो भई कर डालो, युद्ध के लिए साहसी बनो: ईश्वर आपको शत्रु के समक्ष गिरा देंगे: चूँकि ईश्वर के पास सहायता करने हेतु शक्ती है, और नीचे पटक डाल देने की।
९ और अमज़िया ने ईश्वर के बन्दे से कहा, परन्तु हम उन सौ तलनतनों के बारे में क्या करें जो मैंने इस्राएल की सेना को दे दिए हैं? और ईश्वर के बन्दे ने उत्तर दिया, प्रभु आपको इस से बहुत अधिक दे देने में सक्षम हैं।
१० तब अमज़िया ने उन्हें पृथक कर दिया, उसी सेना को जो एफ्रैम से उसके पास निकल कर आई थी, पुनः घर चले जाने हेतु: इस कारण वश उनका क्रोध यहूदा के विरुद्ध अत्याधिक सुलग उठा था, और वो बहुत क्रोध में घर वापस चले गए।
११ और अमज़िया ने स्वयं को सुदृढ़ किया, और अपने लोगों का नेतृत्व किया, और नमक की घाटी में जाकर सेईर की सन्तानों में से दस हज़ार पीट डाले।
१२ और अन्य जीवित बचे हुए दस हज़ार यहूदा की सन्तानें बन्दी उठा ले गईं, और उन्हें एक चट्टान की चोटी पर ले आईं, और उन्हें उस चट्टान की छोटे पर से नीचे पटक डाला, कि वो सभी टुकड़ों-टुकड़ों में टूट गए।
१३ परन्तु उस सेना के सैनिक जिन्हें अमज़िया ने वापस भेज दिया था, ताकि वो उसके आठ युद्ध करने न जाएँ, यहूदा के नगरों पर झपट पड़े, समैरिया से लेकर बेतहोरोन तक भी, और उन में से तीन हज़ार पीट डाले, और बहुत लूट-पाट मचा दी।
१४ अब यह होने को आया, अमज़िया के उन एदोम-वंशजों के संहार से वापस आ चुकने के पश्चात, कि वो सेईर की सन्तानों के ईश्वरों को ले आया, और उन्हें अपने ईश्वर बनने हेतु स्थित कर दिया, और स्वयं उनके समक्ष नीचे झुका, और उनके प्रति सुगन्धित-धूप जलाई।
१५ इस कारण वश प्रभु का क्रोध अमज़िया के विरुद्ध सुलह उठा था, और उन्होंने उसके पास एक पैग़म्बर को भेजा, जिसने उस से कहा, आप लोगों के ईश्वरों से पूछ-ताछ क्यों कर रहे हो, जो अपने ही स्वयं के लोगों का आपके हाथ से बचाव नहीं कर पाए?
१६ और यह होने को आया, जैसे वह उस से वार्तालाप कर रहा था, कि राजा ने उस से कहा, भई क्या तुम राजा को परामर्श देने वाले हो क्या? रुक जाओ; तुम्हें मार क्यों डाल दिया जाए? तो वो पैगमबर रुक गया, और कहा, मैं ये जानता हूँ कि ईश्वर ने तुम्हें नष्ट कर डालने का निश्च्य कर लिया है। चूँकि तुमने यह कर दिया है, और मेरे परामर्श का श्रवण नहीं किया है।
१७ तब यहूदा के राजा अमज़िया ने परामर्श लिया, और इस्राएल के राजा येहु के बेटे, येहोअहज़ के बेटे, योअश को भिजवाया, कहते हुए, आ जा भई, हम अपने चेहरों को आमने-सामने ले आएँ।
१८ और इस्राएल के राजा योअश ने यहूदा के राजा अमज़िया को भेजा, कहते हुए, लेबनोन में उस काँटे वाली झाड़ी ने लेबनोन में उस देवदार को भेजा, कहते हुए, अपनी बेटी को मेरे बेटे की पत्नी बनने के लिए दे दो: और लेबनोन में एक जँगली जानवर ने चलते जाते उस काँटे वाली झाड़ी को रौंद डाला।
१९ तुम तो कहते हो, भई तुमने तो एदोम-वंशजों को पीट डाला है, और तुम्हारे हृदय ने तुम्हें दींगे मारने हेतु उठा दिया है: भई अभी घर पर ही रहो: तुम अपनी ही हाने करवाने के लिए हस्तक्षेप क्यों करो भई, कि तुम गिर पड़ो, तुम ही, और यहूदा तुम्हारे साथ?
२० परन्तु अमज़िया ने नहीं सुना; चूँकि यह ईश्वर से आया था, ताकि वो उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में प्रदान कर दें, क्योंकि वो एदोम के इश्वरों से पूछ-ताछ कर रहे थे।
२१ तो इस्राएल के राजा योअश ने चढ़ाई कर दी; और वो एक दूसरे का चेहरा आमने-सामने ताक रहे थे, दोनो वो और यहूदा का राजा अमज़िया, बेतशमश में ही, जो कि यहूदा के अधिकार में था।
२२ और यहूदा इस्राएल के सामने परास्त हो रहा था; और वो भाग-खड़े हुए हर एक अपने ही तम्बू में।
२३ और इस्राएल के राजा योअश ने यहूदा के राजा अमज़िया को पकड़ में ले लिया, बेटा योअश का, बेटा येहोअहज़ का, बेतशमश में ही, और उसे यरूशलेम ले आया, और यरूशलेम की दीवार को तोड़ डाला एफ्रैम के दरवाज़े से लेकर कोने वाले दरवाज़े तक, चार सौ हाथ।
२४ और उसने ओबेदएदोम के साथ ईश्वर के घर में पाए गए समस्त सोने और चाँदी को, और समस्त पात्रों को, और राजा के घर के धन-कोषों को ले लिया, बन्धकों को भी, और वापस समैरिया लौट चला।
२५ और अमज़िया यहूदा के राजा योअश का बेटा इस्राएल के राजा येहोअहज़ के बेटे योअश की मृत्यु के पश्चात पन्द्रह वर्ष जीया।
२६ अब अमज़िया के शेष कार्य, प्रथम और अन्तिम, देखो, क्या वो यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या?
२७ अब उस समय के पश्चात जब अमज़िया प्रभु का अनुसरण करने से परे मुड़ चला था तो उन्होंने उसके विरुद्ध यरूशलेम में एक षड्यंत्र रचाया: और वो लेकिश भाग गया; परन्तु उन्होंने उसके पीछे-पीछे लेकिश भिजवा कर उसे वहीं मार डाला।
२८ और वो उसे घोड़ों पर ले आए: और उसे उसके पित्रों के साथ यहूदा के नगर में दफ़ना दिया।
छब्बीसवाँ अध्याय।
१ तब यहूदा के समस्त लोगों ने उज़्ज़िया को लिया, जो कि सोलह वर्ष की आयु का था, और उसे उसके पिता अमज़िया के स्थान में राजा बना दिया।
२ उसने एलथ का निर्माण किया और उसे यहूदा के प्रति पुनःस्थापित कर दिया, राजा के अपने पित्रों के साथ निद्रा ले लेने के पश्चात।
३ उज़्ज़िया सोलह वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने बावन वर्ष यरूशलेम में राज किया। उसकी माँ का नाम यकोलिया था जो यरूशलेम से थी।
४ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, उस सभी के अनुसार जो उसके पिता अमज़िया ने किया था।
५ और उसने ईश्वर की पूछ-ताछ ज़क़र्या के दिनो में की, जिसे ईश्वर के दृश्यों में प्रज्ञा थी: और जब तक भी वो प्रभु से पूछ-ताछ किया करता था, ईश्वर उसे उन्नति प्रदान कर दिया करते थे।
६ और वो आगे बढ़ कर पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध लड़ा, और गथ की दीवार को, और यबने की दीवार को, और अशदोद की दीवार को तोड़ डाला, और अशदोद के आस-पास, और उन पलिश्तिम-वंशजों के बीच नगरों का निर्माण किया।
७ और ईश्वर ने पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध, और गुरबअल में बसने वाले उन अरब-देश वासियों के विरुद्ध और मेहुनिमों से उसकी सहायता की।
८ और अम्मोन-वंशजों ने उज़्ज़िया को उपहार दिए: और उसके नाम की कीर्ती बाहर फैल गई मिस्र के प्रवेश तक भी; चूँकि उसने स्वयं को अत्याधिकता से सुदृढ़ कर दिया।
९ इसके अतिरिक्त उज़्ज़िया ने यरूशलेम में कोने वाले दरवाज़े पर, और घाटी के दरवाज़े पर, और दीवार के मोड़ पर मीनारें बनाईं, और उन्हें सुदृढ़ कर दिया।
१० और उसने जँगली-क्षेत्र में मीनारें बनाईं, और कई कूएँ खोदे: क्योंकि उसके पास बहुत से मवेशी थे, दोनो निचले प्रदेश में, और मैदानों में: खेतीहर भी, और अंगूर-खेत के रखवाले पर्वतों में, और करमल में: क्योंकि वो कृषि से प्रेम किया करता था।
११ इसके अतिरिक्त उज़्ज़िया के पास योद्धाओं की एक सेना थी, जो सैन्य-दलों द्वारा युद्ध करने जाया करती थी, लिपिक येइएल, और राजा के कप्तानों में से एक हननीया के हाथ के तले अध्यक्ष मअसेया, के हाथ से की गई गणना की संख्यानुसार ही।
१२ उन पराक्रमी शूरवीरों के पित्रों के प्रमुख की सम्पूर्ण संख्या दो हज़ार छह सौ थी।
१३ और उनके हाथ के तले एक सेना थी, तीन लाख सात हज़ार पाँच सौ, जो शक्तिमान बल से युद्ध किया करती थी, शत्रु के विरुद्ध राजा की सहायता करने हेतु ही।
१४ और उज़्ज़िया ने उनके लिए समस्त सेना के सर्वत्र में ढालें, और भाले, और टोप, और जिरह-बख्तर, और धनुष, और पत्थर फेंकने के लिए गोफन उद्यत कर दिए।
१५ और उसने यरूशलेम में कुशल पुरुषों द्वारा अविष्कार किए गए यंत्रों का निर्माण किया, मीनारों पर और प्राचीरों पर स्थित होने हेतु, जिनके द्वारा बाण और विशाल पत्थर दाग दिए जाएँ। और उसके नाम की कीर्ती दूर तक फैल गई; क्योंकि उसकी सहायता आश्चर्यचकितता से की गई थी, जब तक कि वो शक्तिशाली हो गया। था।
१६ परन्तु जब वो सुदृढ़ था, तो उसका हृदय उसके विनाश के प्रति घमण्ड से भर उठा: चूँकि वो प्रभु अपने ईश्वर के विरुद्ध उल्लंघन कर बैठा, और प्रभु के मंदिर में सुगन्धित-धूप की बलिवेदी पर सुगन्धित-धूप जलाने हेतु प्रवेश कर गया।
१७ और पुरोहित अज़रिया ने उसके पीछे-पीछे प्रवेश किया, और उसके साथ-साथ प्रभु के अस्सी पुरोहित, जो कि शूरवीर पुरुष थे:
१८ और उन्होंने खड़े होकर राजा उज़्ज़िया का सामना किया, और उस से कहा, उज़्ज़िया, ये आपसे समबन्ध नहीं रखता है, प्रभु के प्रति सुगन्धित-धूप को जलाना, बल्कि हारुन के बेटों पुरोहितों के प्रति ही, जो सुगन्धित-धूप जलाने हेतु पुनीत ठहरा दिए गए हैं: पुण्य-स्थान में से बाहर निकल जाएँ; क्योंकि आपने उल्लंघन कर डाला है; न ही ये प्रभु ईश्वर से आपके प्रति सम्मान-योग्य होगा।
१९ तब उज़्ज़िया आक्रोश से भर उठा, और सुगन्धित-धूप जलाने हेतु उसके हाथ में एक अग्नी-पात्र था: और जैसे वो उन पुरोहितों के प्रति आक्रोशित था, वो कुष्ठ-रोग ही उसके माथे पर उदय हो उठा प्रभु के घर में ही उन पुरोहितों के समक्ष ही, उस सुगन्धित-धूप की बलिवेदी के साथ ही।
२० और उस प्रमुख पुरोहित अज़रिया, और उन समस्त पुरोहितों ने उसे देखा, और देखो तो, वो अपने माथे पर कुष्ठ-रोग ग्रस्त था, और उन्होंने उस वहाँ से बाहर खदेड़ दिया; हाँ भई, वो तो स्वयं ही बाहर निकल जाने के लिए गतिशील था, चूँकि प्रभु ने उस पर वार कर डाला था।
२१ और राजा उज़्ज़िया अपनी मृत्यु के दिवस तक एक कुष्ठ-रोगी ही रहा, और एक कुष्ठ-रोगी होता हुआ वो एक पृथक घर में ही रहा करता था; क्योंकि उसे प्रभु के घर से पृथक कर दिया गया था: और योथम उसका बेटा राजा के घर पर नियुक्त था, भूमी के लोगों का न्याय करता हुआ।
२२ अब उज़्ज़िया के शेष कार्य, प्रथम और अंतिम, अमोज़ के बेटे पैग़म्बर यशायह ने लिखे थे।
२३ तो उज़्ज़िया अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उन्होंने उसे उसके पित्रों के साथ ही राजाओं के दफ़नाने वाले खेत में दफ़ना दिया; चूँकि उन्होंने कहा, वो तो एक कुष्ठ-रोगी है: और योथम उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
सत्ताईसवाँ अध्याय।
१ योथम पच्चीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में सोलह वर्ष राज किया। और उसकी माँ का नाम भी येरूशा था, ज़दोक की बेटी।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था: उसने अपने पिता उज़्ज़िया की समस्त करनीयोंनुसार ही किया: लेकिन उसने प्रभु के मंदिर में प्रवेश नहीं किया। और लोग तथापि भ्रष्टता ही करते रहे।
३ उसने प्रभु के घर के उस ऊँचे दरवाज़े का निर्माण किया, और ओफेल की दीवार पर उसने बहुत निर्माण किया।
४ इसके अतिरिक्त उसने यहूदा के पर्वतों में नगरों का निर्माण किया, और वनों में उसने गढ़ और मीनारें निर्मित कीं।
५ वो अम्मोन-वंशजों के राजा के साथ भी लड़ा, और उनके विरुद्ध प्रबल ठहरा। और अम्मोन की सन्तानों ने उसे उसी वर्ष चाँदी के सौ तलनतन भार, और गेहूँ के दस हज़ार, और जौ के दस हज़ार माप दे दिए। इतना सारा ही अम्मोन की सन्तानों ने उसे दोनो दूसरे और तीसरे वर्ष भुक्तान किया।
६ तो योथम बलशाली बन गया, क्योंकि उसने अपने पथों को प्रभु अपने ईश्वर के सम्मुख उद्यत कर दिया था।
७ अब योथम के शेष कार्य, और उसके समस्त युद्ध, और उसकी रीतियाँ, लो भई, वो तो इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखित हैं।
८ वो पच्चीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में सोलह वर्ष राज किया।
९ और योथम अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उन्होंने उसे दाऊद के नगर में दफ़ना दिया: और अहज़ उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
अट्ठाईसवाँ अध्याय।
१ अहज़ बीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और यरूशलेम में सोलह वर्ष राज किया, परन्तु उसने वो नहीं किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, उसके पिता दाऊद के समान:
२ क्योंकि वो इस्राएल के राजाओं के पथ पर चलता गया, और बअलिम के लिए ढली हुई मूर्तियाँ भी उसने बनाईं।
३ इसके अतिरिक्त उसने हिन्नोम की घाटी में सुगन्धित-धूप जलाई, और अपने सन्तानों को अग्नी में जलाया, उन अन्यप्रजातियों की ही अतिघृणितताओंनुसार, जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के सामने से निष्कासित कर डाला था।
४ वो उन उच्च-स्थानों में, और पहाड़ियों पर, और प्रत्येक हरे वृक्ष तले बलि भी चढ़ाता था और सुगन्धित धूप जलाता था।
५ इस कारण वश प्रभु उसके ईश्वर ने उसे सिरिया के राजा के हाथ में प्रदान कर दिया; और उन्होंने पीट डाला, और वो उनके एक विशाल जनौघ को बन्दी उठा ले गए, और दमिश्क ले आए। और वो इस्राएल के राजा के हाथ में भी प्रदान कर दिया गया था, जिसने उसे एक महा संहार से पीट डाला।
६ क्योंकि रेमलिया के बेटे पेका ने यहूदा में एक ही दिन में एक लाख बीस हज़ार मार डाले, सभी शूरवीर पुरुष; क्योंकि उन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर का त्याग कर डाला था।
७ और एफ्रैम के एक पराक्रमी पुरुष ज़िकरी ने राजा के बेटे मअसिया को, और घराने के राज्यपाल अज़्रीकम को, और राजा से दूसरे एलकना को मार डाला।
८ और इस्राएल की सन्तानों ने अपने भाई-जनो में से दो लाख, स्त्रियाँ, बेटे, और बेटियाँ बन्दी ले लिए, और उन से बहुत सारी लूट-पाट भी ले ली, और उस लूट को वो समैरिया ले आए।
९ परन्तु प्रभु का एक पैग़म्बर वहीं था, जिसका नाम ओदेद था: और वो समैरिया आने वाली उस सेना के समक्ष बाहर निकल आया, और उन से कहा, देखो, चूँकि तुम्हारे पित्रों के प्रभु ईश्वर यहूदा के साथ आक्रोशित थे, उन्होंने उन्हें तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है, और तुम ने उन्हें एक ऐसे रोष से मार डाला है जो स्वर्ग तक पहूँच रहा है।
१० और तुम अब यहूदा और यरूशलेम की सन्तानों को बंध्वा दास और बंध्वा दासियों के रूप में आधीन रखना चाहते हो: परन्तु तुम्हारे साथ, तुम्हारे ही साथ, प्रभु तुम्हारे ईश्वर के विरुद्ध पाप नहीं हैं क्या?
११ इसलिए अब सुनो मुझे, और इन बंदियों को जिन्हें तुमने अपने भाई-जनो में से बन्दी ले लिया है वापस लौटा दो: चूँकि प्रभु का क्रूर आक्रोश तुम पर है।
१२ तब एफ्रैम की सन्तानों के प्रमुखों में से कुछ, योहनन का बेटा अज़रिया, मेशिल्लेमोथ का बेटा बेरेकिया, और शल्लुम का बेटा येहिज़किया, और हदलय का बेटा अमसा, उनके विरुद्ध उठ खड़े हुए जो युद्ध से वापस लौट रहे थे,
१३ और उनसे कहा, तुम इन बन्दियों को यहाँ भीतर नहीं लाओगे भई: चूँकि भले ही हम तो प्रभु के प्रति अपराध कर ही चुके हैं, तुम तो हमारे पापों के और हमारे उल्लंघन के प्रति और जोड़ने की आशा कर रहे हो: क्योंकि हमारा उल्लंघन विशाल है, और इस्राएल के विरुद्ध क्रूर आक्रोश है!
१४ तो उन सशस्त्रित आदमियों ने उन बन्दियों को और उस लूट-पाट को उन प्रमुखों और समस्त सभा के समक्ष ही छोड़ दिया।
१५ और उन लोगों ने जो नाम से उल्लिखित थे उठ कर उन बन्दियों को लिया, और उस लूट-पाट से उन सभी को आवृत कर दिया जो भी उनके बीच नग्न थे, और उन्हें पहनवा दिया, और जूते पहनवा दिए, और उन्हें खाने के लिए और पीने के लिए प्रदान कर दिया, और विलेप कर दिया, और उनके सभी निर्बलों को गधों पर उठा कर, उन्हें यरीहो ले आए, खजूर के पेड़ों के नगर ही, उनके भाई-जनो के पास ही: तब वो समैरिया वापस लौट आए।
१६ उसी समय राजा अहज़ ने असिरिया के राजाओं को भिजवा भेजा उसकी सहायता करने हेतु।
१७ चूँकि पुनः उन एदोम-वंशजों ने आकर यहूदा पर वार कर डाला था, और बन्दी ले चले थे।
१८ उन पलिश्तिम-वंशजों ने भी निचले प्रदेश के और यहूदा के दक्षिण के नगरों पर आक्रमण कर डाला था, और बेतशमश, और आयलोन, और गदरोथ, और शोको उसके गाँवों के साथ, और तिम्ना उसके गाँवों के साथ, गिमज़ो भी और उसके साथ के गाँव, पकड़ में ले लिए थे: और वो वहीं बस गए।
१९ क्योंकि प्रभु यहूदा को इस्राएल के राजा अहज़ के कारण नीचे ले आए थे; क्योंकि उसने यहूदा को नंगा कर डाला था, और प्रभु के विरुद्ध घोरता से उल्लंघन कर बैठा था।
२० और असिरिया के राजा तिलगथपिलनेसर ने उसके पास पहूँच कर उसे विपत्तित कर दिया और उसे सुदृढ़ नहीं किया।
२१ क्योंकि अहज़ ने एक भाग प्रभु के घर में से, और राजा के घर में से, और अध्यक्षों से लेकर, उसे असिरिया के राजा को दे दिया था: परन्तु उसने उसकी सहायता नहीं की।
२२ और उसकी विपत्ती के समय में उसने प्रभु के विरुद्ध और भी अधिक उल्लंघन कर डाला: ये वही राजा अहज़ है भई।
२३ क्योंकि उसने दमिश्क के ईश्वरों के प्रति बलि चढ़ाई, जिन्होंने उसे पीट डाला था: और उसने कहा, चूँकि सिरिया के राजाओं के ईश्वर उनकी सहायता करते हैं, मैं उनके प्रति बलि चढ़ाऊँगा, ताकि वो मेरी सहायता कर सकें। परन्तु वो उसका और समस्त इस्राएल का पतन थे।
२४ और अहज़ ने ईश्वर के घर के पात्रों को एक साथ एकत्रित कर कर ईश्वर के घर के पात्रों को टुकड़ों-टुकड़ों में काट डाला, और प्रभु के घर के द्वारों को बँद कर दिया, और उसने स्वयं के लिए यरूशलेम में प्रत्येक कोने-कोने में बलिवेदियाँ बना डलीन।
२५ और यहूदा के प्रत्येक पृथक नगर में उसने उच्च-स्थान बना दिए अन्य ईश्वरों के प्रति सुगन्धित-धूप जला देने हेतु, और अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया।
२६ अब उसके शेष कार्य और उसकी समस्त रीतियाँ, प्रथम और अन्तिम, देखो तो, वो यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखित हैं।
२७ और अहज़ अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उन्होंने उसे नगर में दफ़ना दिया, यरूशलेम में ही: परन्तु वो उसे इस्राएल के राजाओं के मक़बरों में नहीं लाए: और हेज़ेकिया उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
उन्नत्तीसवाँ अध्याय।
१ हेज़ेकिया ने पच्चीस वर्ष की आयु में राज करना आम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में उन्नत्तीस वर्ष राज किया। और उसकी माता का नाम अबीया था, ज़क़र्या की बेटी।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित था, उस सभी के अनुसार जो दाऊद उसके पिता ने किया था।
३ उसने अपने राज के प्रथम वर्ष में, प्रथम माह में, प्रभु के घर के घर के द्वार खोल दिए और उनकी मरम्मत की।
४ और वो उन पुरोहितों और लेवी-वंशजों को भीतर ले आया, और उन्हें पूर्वी पथ पर एक साथ एकत्रित कर लिया,
५ और उनसे कहा, सुनें मुझे, आप लेवी-वंशज, अभी ही स्वयं को पुनीत कर लें, और अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के घर को पुनीत कर दें, और पवित्र स्थान की मलिनता को बाहर उठा ले आएँ।
६ चूँकि हमारे पित्रों ने उल्लंघन कर डाला है, और वो कर डाला है जो प्रभु हमारे ईश्वर की दृष्टि में बुरा था, और उन्हें त्याग दिया है, और प्रभु के निवास स्थान से अपने चहरे परे मोड़ दिए हैं, और अपनी पीठें मोड़ दी हैं!
७ उन्होंने आँगन के द्वारों को भी बँद कर दिया है, और दीपों को बुझा दिया है, और सुगन्धित धूप नहीं जलाई है न ही जले चढ़ावे चढ़ाए हैं इस्राएल के ईश्वर के प्रति पवित्र-स्थान में।
८ इसी कारण वश प्रभु का आक्रोश यहूदा और यरूशलेम पर आ पड़ा था, और उन्होंने उन्हें विचलितता के प्रति, भौचक्कापने के प्रति, और सी-सी के प्रति प्रदान कर दिया है, जैसा कि आप अपनी आँखों से देख रहे हैं।
९ क्योंकि लो जी, हमारे पित्र तलवार से गिर चुके हैं, और हमारे बेटे और हमारी बेटियाँ और हमारी पत्नियाँ इसके लिए बन्धन में हैं।
१० अब मेरे हृदय में यह है, इस्राएल के प्रभु ईश्वर के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाने का, ताकि हमारे प्रति उनका क्रूर आक्रोश परे मुड़ जाए।
११ मेरे बेटों, भई अब लापरवाह मत बनो: चूँकि प्रभु ने तुम्हें उनके समक्ष खड़े होने हेतु, उनकी सेवा करने हेतु चुन लिया है, और कि तुम उनके प्रति सेवाकार्य करो, और सुगन्धित-धूप जलाओ।
१२ तब वो लेवी-वंशज उठे, अमसय का बेटा महथ, अज़रिया का बेटा योएल, कहाथ-वंशजों के बेटे: और मरेरी के बेटों में से, अब्दि का बेटा किश, और येहलेलेल का बेटा अज़रिया: और गरशोन-वंशजों में से; ज़िम्मा का बेटा योआ, और योआ का बेटा अदन:
१३ और एलीज़फान के बेटों में से; शीमरी, और येइएल: और असफ के बेटों में से; ज़क़र्या, और मत्तनियाह:
१४ और हेमन के बेटों में से; येइएल, और शिमई; और यदुतुन के बेटों में से; शेमाया, और उज़्ज़िएल।
१५ और उन्होंने अपने भाई-जनो को एकत्रित किया, और स्वयं को पुनीत किया, और आ गए, राजा के आदेशानुसार ही, प्रभु के शब्दों द्वारा ही, प्रभु के गृह को स्वच्छ कर देने हेतु।
१६ और वो पुरोहित प्रभु के गृह के भीतरी भाग में चले गए, और प्रभु के मंदिर में उस समस्त अस्वच्छता को बाहर प्रभु के गृह के आँगन में ही निकाल लाए, जो उन्होंने पाई थी। और उन लेवी-वंशजों ने उसे ले लिया, उसे किद्रोन नदी में बाहर उठा ले जाने हेतु ही।
१७ तो प्रथम माह के प्रथम दिन में उन्होंने पुनीत करने हेतु आरम्भ किया, और माह के आठवें दिन वो प्रभु के आँगन में पहूँच गए: तो उन्होंने प्रभु के गृह को आठ दिनो में ही पुनीत कर दिया; और उस प्रथम माह के सोलहवें दिन में उन्होंने समापन कर दिया।
१८ तब उन्होंने राजा हेज़ेकिया के पास भीतर जाकर कहा, हमने प्रभु के समस्त घर को, और जले-चढ़ावे की बलिवेदी को, उसके समस्त पात्रों संग, और भेंट की रोटी की मेज़ को, उसके समस्त पात्रों संग, स्वच्छ कर दिया है जी।
१९ इसके अतिरिक्त उन समस्त पात्रों को, जिन्हें राजा अहज़ ने अपने राज में अपने उल्लंघन में फैंक दिया था, हमने उद्यत और पुनीत कर दिए हैं, और देखें, वह प्रभु की बलिवेदी के समक्ष हैं।
२० तब राजा हेज़ेकिया सुबह-सुबह उठा, और नगर के प्रमुखों को एकत्रित कर लिया, और प्रभु के घर तक ऊपर चला गया।
२१ और वह सात साँड, और सात मेढ़े, और सात मेमने, और सात नर-बकरे, राज्य के लिए एक पाप-चढ़ावे हेतु, और पुण्य-स्थान के लिए, और यहूदा के लिए ले आए। और उसने हारुन के बेटों उन पुरोहितों को उन्हें प्रभु की बलिवेदी पर अर्पित कर देने का आदेश दे दिया।
२२ तो उन्होंने उन सांडों को मार डाला, और उन पुरोहितों ने उस रक्त को ग्रहण किया, और उसे बलिवेदी पर छिड़क दिया: इसी प्रकार ही, जब उन्होंने उन मेढ़ों को मार डाला था, तो उन्होंने उस रक्त को बलिवेदी पर छिड़क दिया: उन्होंने उन मेमनो को भी मार डाला, और उन्होंने उस रक्त को बलिवेदी पर छिड़क दिया।
२३ और वो उन नर-बकरों को राजा के और सभा के सम्मुख एक पाप-चढ़ावे हेतु ले आए; और उन्होंने उन पर अपने हाथ रख दिए:
२४ और उन पुरोहितों ने उन्हें मार डाला, और उस बलिवेदी पर उनके रक्त से उन्होंने सामंजस्य बना दिया, समस्त इस्राएल के प्रति एक पापमोचन बना देने हेतु: चूँकि राजा ने आदेश दिया कि वी जला-चढ़ावा और वो पाप-चढ़ावा समस्त इस्राएल के लिए चढ़ा दिया जाना चाहिए।
२५ और उसने उन लेवी-वंशजों को प्रभु के घर में स्थित कर दिया झाँझों के साथ, सारंगियों के साथ, और वीणाओं के साथ, दाऊद , और राजा के भविष्यदर्शक गाद के, और पैग़म्बर नेथन के अदेशानुसार ही: क्योंकि ऐसा ही प्रभु का वो आदेश था उनके पैग़म्बरों द्वारा।
२६ और वो लेवी-वंशज दाऊद के यन्त्रों के साथ खड़े थे, और वो पुरोहित उन चिंघाड़ों के साथ।
२७ और हेज़ेकिया ने आदेश दे दिया उस जले-चढ़ावे को बलिवेदी पर चढ़ा देने का। और जब वो जला-चढ़ावा आरम्भ हुआ, तो प्रभु का वो गीत भी उन चिंघाड़ों के साथ, और इस्राएल के राजा दाऊद द्वारा नियुक्त उन यन्त्रों के साथ आरम्भ हो गया।
२८ और समस्त सभा ने पूजा की, और गायकों ने गाया, और उन चिंघाड़-वादकों ने बजाए: और यह सभी कुछ चलता रहा जब तक कि उस जले-चढ़ावे की समाप्ति नहीं हो चुकी थी।
२९ और जब उन्होंने चढ़ावा चढ़ाने की समाप्ति कर दी थी, तो राजा और उन सभी ने जो उसके साथ प्रस्तुत थे स्वयं को झुका लिया, और पूजा।
३० इसके अतिरिक्त राजा हेज़ेकिया और उन प्रमुखों ने उन लेवी-वंशजों को दाऊद के और उस भविष्यदर्शक असफ के शब्दों के साथ प्रभु के प्रति प्रशन्सा गाने का आदेश दिया। और उन्होंने आनन्द सहित प्रशन्साएँ गाईं, और उन्होंने अपने सिरों को झुका कर पूजा की।
३१ तब हेज़ेकिया ने उत्तर देकर कहा, अब तुमने स्वयं को प्रभु के प्रति परिपूर्ण कर दिया है, निकट आ जाओ और बलियों को और उन कृतज्ञता-अर्पणों को प्रभु के गृह में ले आओ। और वो सभा उन बलियों को और उन कृतज्ञता-अर्पणों को भीतर ले आए; और जितनों के भी हृदय इच्छित थे जले-चढ़ावे।
३२ और उन जले-चढ़ावों की संख्या जो वो सभा लाई थी, सत्तर साँड, एक सौ मेढ़े, और दो सौ मेमने थी: यह सभी प्रभु के प्रति एक जले-चढ़ावे हेतु थे।
३३ और वो अर्पित वस्तुएँ छह सौ साँड और तीन हज़ार भेड़ें थीं।
३४ परन्तु वो पुरोहित बहुत ही कम थे, कि वो समस्त जले-चढ़ावों को खालों को नहीं उतार पाए: इस कारण वश उनके भाई-जनो उन लेवी-वंशजों ने उनकी सहायता की, जब तक कि उस कार्य की समाप्ति नहीं हो चुकी थी, और जब तक कि उन अन्य पुरोहितों ने स्वयं को पुनीत नहीं कर लिया था: चूँकि वो लेवी-वंशज हृदय में स्वयं को पुनीत कर देने हेतु पुरोहितों की तुलना में अधिक सीधे थे।
३५ और वो जले चढ़ावे भी बहुतायतता में थे, शान्ति-चढ़ावों की चर्बी के साथ, और वो पेय-चढ़ावे प्रत्येक जले-चढ़ावे हेतु। तो प्रभु के घर की सेवा व्यवस्थित कर दी गई थी।
३६ और हेज़ेकिया ने, और समस्त लोगों ने हर्ष मनाया, कि ईश्वर ने लोगों को उद्यत कर दिया था: चूँकि यह बात अचानक कर दी गई थी।
तीसवाँ अध्याय।
१ और हेज़ेकिया ने समस्त इस्राएल और यहूदा में भिजवाए, और एफ्रैम और मनश्शे को भी पत्र लिखे, कि वह यरूशलेम में प्रभु के घर में आ जाएँ, इस्राएल के प्रभु ईश्वर के प्रति पार-करने को रखने हेतु।
२ क्योंकि राजा ने परामर्श ले लिया था, और उसके प्रमुखों ने, और यरूशलेम में समस्त सभा ने, पार-करने को दूसरे माह में रखने हेतु।
३ क्योंकि वो उसे उस समय नहीं रख पाए थे, क्योंकि उन पुरोहितों ने स्वयं को समुचित पुनीत नहीं किया था, न ही लोगों ने स्वयं को यरूशलेम में एक साथ एकत्रित किया था।
४ और इस बात ने राजा को और समस्त सभा को प्रसन्न कर दिया।
५ तो उन्होंने एक आज्ञप्ति स्थापित कर दी कि समस्त इस्राएल के घोषणा कर देने की, बेएरशबा से लेकर दान तक भी, कि उन्हें यरूशलेम इस्राएल के प्रभु ईश्वर के प्रति पार-करने को रखने हेतु आ जाना चाहिए: क्योंकि उन्होंने बहुत समय से इस रीती से ये नहीं किया था जैसा कि यह लिखा हुआ था।
६ तो वो राजा और उसके प्रमुखों से वो धावक उन पात्रों के साथ समस्त इस्राएल और यहूदा के सर्वत्र में चले गए, और राजा के आदेशानुसार, कहते हुए, तुम इस्राएल की सन्तानों, पुनः वापस मुड़ जाओ अब्राहम, इसहाक, और इस्राएल के प्रभु ईश्वर की ओर, और वो तुम्हारे शेष-गण की ओर वापस आ जाएँगे, जो असिरिया के राजाओं के हाथ में से बाहर बच निकले हैं।
७ और अपने पित्रों, और अपने भाई-जनो के समान मत बनो, जिन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के विरुद्ध उल्लंघन कर डाला, जिन्होंने इसलिए उन्हें उजाड़ता के प्रति त्याग छोड़ा, जैसा कि तुम देख ही रहे हो।
८ तो अब तुम ऐंठी गर्दन लिए मत रहो, जैसे तुम्हारे पित्र थे, बल्कि प्रभु के प्रति स्वयं को प्रदान कर दो, और उनके पुण्य-स्थान में प्रवेश कर लो, जिसे उन्होंने सदा के लिए ही पुनीत ठहरा दिया है: और प्रभु अपने ईश्वर की सेवा करो, ताकि उनके आक्रोश की क्रूरता तुम से परे मुड़ जाए।
९ क्योंकि यदि तुम पुनः प्रभु की ओर मुड़ जाओगे, तो तुम्हारे भाई-जन और तुम्हारी सन्तानें उन्हें बन्दी ले जाने वालों के समक्ष सुहानुभूति पा लेंगे, ताकि वो पुनः इस भूमी में लौट जाएँ: क्योंकि प्रभु तुम्हारे ईश्वर कृपालु और दयावान हैं, और अपने चहरे को तुम से परे नहीं मोड़ेंगे, यदि तुम उनके पास वापस लौट आते हो।
१० तो वो धावक नगर-नगर गुजरते चले गए एफ्रैम और मनश्शे के प्रदेश के सर्वत्र में से ही ज़बूलून तक भी; परन्तु उन्होंने उनकी हँसी उड़ाई, और ताने मारे।
११ तथापि आशेर और मनश्शे और ज़बूलून के विभिन्न जनो ने स्वयं को विनम्र बना दिया, और यरूशलेम आ गए।
१२ यहूदा में भी ईश्वर का हाथ प्रस्तुत था उन्हें राजा और प्रमुखों के आदेश को क्रियान्वित कर देने हेतु उन्हें एक-मन प्रदान कर देने के लिए, प्रभु के शब्द के द्वारा ही।
१३ और दूसरे माह में यरूशलेम में बहुतेरे लोग एकत्रित हो गए बेख़मीरी रोटी के भोज को रखने रखने, एक विशाल महा-सभा।
१४ और उन्होंने उठ कर यरूशलेम में उन बलिवेदियों को परे कर दिया, और सुगन्धित-धूप की बलिवेदियों को वो परे ले गए, और उन्हें किद्रोन नदी में पटक डाला।
१५ तब उन्होंने पार-करने को उस दूसरे माह के चौदहवें दिन पर मार दिया: और वो पुरोहित और वो लेवी-वंशज लज्जित थे, और स्वयं को पुनीत कर दिया, और उन जले चढ़ावों को प्रभु के घर में ले आए।
१६ और वो अपने स्थानों में अपनी रीतिनुसार खड़े हो कर, ईश्वर के बन्दे मूसा के नियमानुसार ही: वो पुरोहित उस रक्त को छिड़क रहे थे, जिसे उन्होंने उन लेवी-वंशजों के हाथ ग्रहण कर लिया था।
१७ चूँकि उस सभा में कई थे जो पुनीत नहीं थे: इसलिए उन लेवी-वंशजों के पास उस प्रत्येक के लिए उन पार-करनो के मारने का प्रभार था जो स्वच्छ नहीं था, उन्हें प्रभु के प्रति पुनीत कर देने हेतु।
१८ चूँकि लोगों के एक जनौघ ने, एफ्रैम और मनश्शे, इसकार, और ज़बूलून में से ही, स्वयं को स्वच्छ नहीं किया था, तथापि उन्होंने उस पार-करने को खा लिया था वो जो लिखा था उसके विपरीत। परन्तु हेज़ेकिया ने उनके लिए प्रार्थना की, कहते हुए, अच्छे प्रभु जी प्रत्येक को क्षमा कर दें जी
१९ जो ईश्वर, उसके पित्रों के प्रभु ईश्वर को ढूँढने हेतु अपने हृदय को उद्यत करता है, भले ही वो पुण्य-स्थान के शुद्धीकरणानुसार स्व्क्च न हो।
२० और प्रभु ने हेज़ेकिया का श्रवण कर लिया, और लोगों को स्वस्थ कर दिया।
२१ और यरूशलेम में प्रस्तुत उन इस्राएल की सन्तानों ने बेख़मीरी रोटी के उस भोज को सात दिन बहुत ही प्रसन्नता से रखा: और उन लेवी-वंशजों और उन पुरोहितों ने प्रभु की दिन-प्रति-दिन प्रशन्सा की प्रभु के प्रति बलपूर्वक्ता से वाद्य-यंत्रों को बजाते हुए।
२२ और हेज़ेकिया ने उन समस्त लेवी-वंशजों के साथ हार्दिकता से बात-चीत की जिन्होंने प्रभु का भला ज्ञान सिखाया: और वो उस भोज के सातों दिन खाते रहे, शान्ति-चढ़ावे चढ़ाते हुए, और अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर के प्रति स्तुति करते हुए।
२३ और उस पूरी सभा ने परामर्श किया उन सात अन्य दिनो को रखने का: और उन्होंने प्रसन्नता सहित उन अन्य सात दिनो का भी पालन किया।
२४ क्योंकि यहूदा के राजा हेज़ेकिया ने उस सभा को एक हज़ार साँड और सात हज़ार भेड़ें प्रदान कर ही दी थीं; और उन प्रमुखों ने उस सभा को एक हज़ार साँड उआर दस हज़ार भेड़ें प्रदान की थीं: और पुरोहितों की एक विशाल संख्या ने स्वयं को पुनीत कर दिया था।
२५ और यहूदा की समस्त सभा ने, उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों के साथ, और इस्राएल में से बाहर निकली हुई उस समस्त सभा ने, और इस्राएल में से बाहर निकले हुए परदेशियों ने, और जो यहूदा में निवास करते थे, हर्ष मनाया।
२६ तो यरूशलेम में विशाल हर्ष था: चूँकि इस्राएल के राजा दाऊद के बेटे सुलेमान के समय से लेकर इसके जैसा हर्ष यरूशलेम में नहीं मनाया गया था।
२७ तब वो पुरोहित वो लेवी-वंशज उठे और लोगों को आशीष दिया: और उनकी वाणी सुन ली गई थी, और उनकी प्रार्थना उनके पवित्र पवित्र निवास स्थान तक ऊपर आ पहुँची, स्वर्ग तक ही।
इकत्तीसवाँ अध्याय।
१ तो अब जब इस सभी का समापन हो चुका था, समस्त इस्राएल जो प्रस्तुत था समस्त यहूदा के नगरों में बाहर निकल कर चले गए, और समस्त यहूदा और बिन्यामिन में से उन प्रतिमाओं को टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और उन उपवनो को नीचे काट डाला, और उन उच्च-स्थानों और उन बलिवेदियों को नीचे पटक डाला, एफ्रैम में भी और मनश्शे में, जब तक कि उन्होंने उन सभी को नष्ट कर डाला था। तब इस्राएल की समस्त सन्तानें वापस लौट आईं, प्रत्येक पुरुष अपने अधिकार को, अपने-अपने नगरों में ही।
२ और हेज़ेकिया ने उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों के कार्यकालों को उनके कार्यकालोंनुसार नियुक्त कर दिया, प्रत्येक पुरुष उसी की ही सेवानुसार, वो पुरोहित और लेवी-वंशज जले-चढ़ावों और शान्ति-चढ़ावों हेतु, सेवाकार्य के लिए, और धन्यवाद देने हेतु, और प्रभु के तम्बुओं के द्वारों में प्रशन्सा करने हेतु ही।
३ उसने नियुक्त कर दिया: उसके पदार्थ में से राजा के भाग को भी जले-चढ़ावों के लिए, प्रातः और संध्या वाले जले-चढ़ावों के लिए, और सैबथों वाले जले-चढ़ावों के लिए, और नए चंद्रमाओं के लिए, और उन स्थित भोजों के लिए, जैसा की प्रभु के नियम में लिखा हुआ है।
४ इसके अतिरिक्त उनसे यरूशलेम में बसने वाले उन लोगों को उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों का भाग प्रदान कर देने का आदेश दिया, ताकि वो प्रभु के नियम में प्रोत्साहित हो जाएँ।
५ और इस आदेश के बाहर फूट पड़ते ही, इस्राएल की सन्तानें अनाज के, अंगूर-रस के, और तेल के, और मधु के, और खेत की समस्त बढ़ौतरी के प्रथम-फलों को बहुतायतता से ले आए; और समस्त वस्तुओं के दसवें अन्श को वो बहुतायतता से ले आए।
६ और इस्राएल और यहूदा की सन्तानों के समबन्ध में, जो यहूदा के नगरों में निवास करते थे, वो भी सांडों और भेड़ों के दसवें अन्श, और उन पवित्र वस्तुओं के दसवें अन्श जो प्रभु उनके ईश्वर के प्रति पुनीत ठहरा दे गए थे, ले आए, और उनके ढेर खड़े कर दिए!
७ तीसरे महीने में उन्होंने उन ढेरों की नीव बिछाना आरम्भ किया था, और उन्हें सातवें महीने में समाप्त कर दिया।
८ और जब हेज़ेकिया और उन प्रमुखों ने आकर उन ढेरों को देखा, तो उन्होंने प्रभु को, और उनके गण इस्राएल को आशीष दिया।
९ तब हेज़ेकिया ने उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों से उन ढेरों के समबन्ध में प्रशन किया।
१० और ज़दोक के घराने से अज़रिया उस प्रमुख पुरोहित ने उसे उत्तर दिया और कहा, जब से लोगों ने प्रभु के घर में चढ़ावे लाना आरम्भ किया है, हमारे पास खाने के लिए समुचित है जी, और बहुत सा बचा रह जाता है: क्योंकि प्रभु ने अपने लोगों को आशीष दे दिया है; और जो बचा रह गया है यही ये विशाल भण्डार है जी!
११ तब हेज़ेकिया ने प्रभु के घर में कमरों की तैय्यारी कर देने का आदेश दे दिया; और उन्होंने उन्हें तैय्यार कर दिया,
१२ और उन चढ़ावों को और उन दसवे-अंशों को और उन समर्पित वस्तुओं को निष्ठा से अन्दर ले आए: जिन पर वो लेवी-वंशज कोनोनिया अध्यक्ष था, और शिमई उसका भाई उसके बाद।
१३ और येईएल, और अज़ज़िया, और नहथ, और असहेल, और येरिमोथ, और योज़बद, और एलिएल, और इस्मकिया, और महथ, और बेनाया, कोनोनिया और शिमई उसके भाई के हाथ तले थे, राजा हेज़ेकिया के और ईश्वर के घर के अध्यक्ष अज़रिया के आदेश पर ही।
१४ और पूर्व की ओर वाला वो द्वारपाल, उस लेवी-वंशज इम्ना का बेटा कोरे, ईश्वर के स्वेच्छा-चढ़ावों पर नियुक्त था, प्रभु के उन चढ़ावों को, और उन अति पवित्र वस्तुओं का वितरण कर देने हेतु।
१५ और उसके बाद थे अदन, और मिन्यामिन, और येशुआ, और शेमाया, अमरिया, और शेकनिया, पुरोहितों के नगरों में ही, उनके स्थित पद में, उनके भाई-जनों को कार्यकालानुसार दे देने हेतु, उस महान को उस न्यून के समान ही:
१६ उनके नरों की वंशावली के अतिरिक्त, तीन वर्ष की आयु से लेकर और ऊपर तक, उस प्रत्येक एक को ही जो प्रभु के घर में प्रवेश करता है, उसका दैनिक भाग उनकी सेवा के लिए उनके प्रभारों में उनके कार्यकालानुसार ही;
१७ उन पुरोहितों की वंशावली को उनके पित्रों के घरानोंनुसार, और उन लेवी-वंशजों को बीस वर्ष की आयु से लेकर और ऊपर तक, उनके प्रभारों में उनके कार्यकालानुसार ही;
१८ और उनकी छोटे-नन्हों की वंशावली को, उनकी पत्नियों को, और उनके बेटों को, और उनकी बेटियों को, समस्त सभा में से ही: चूँकि उनके स्थित कार्य-पद में ही उन्होंने स्वयं को पुनीत किया पवित्रता में ही:
१९ हारुन के पुत्रों में से भी वो पुरोहित, जो कि उनके नगरों की सार्वजनिक-भूमियों के खेतों में थे, प्रत्येक पृथक नगर में, वो पुरुष जो नाम से लिखित थे, पुरोहितों के बीच सभी नरों को भाग दे देने हेतु, और उन सभी को जो उन लेवी-वंशजों के बीच वंशावलियों द्वारा गिने हुए थे।
२० और इस प्रकार किया हेज़ेकिया ने समस्त यहूदा के सर्वत्र में, और वो क्रियान्वित किया जो भला और उचित और सच्चा था प्रभु उसके ईश्वर के समक्ष।
२१ और उस प्रत्येक कार्य में जो उसने आरम्भ किया ईश्वर के घर की सेवा में, और नियम में, और आदेशों में, अपने ईश्वर को ढूँढने हेतु, उसने वो अपने सम्पूर्ण हृदय से किया, और उन्नत हुआ।
बत्तीसवाँ अध्याय।
१ इन बातों के, और उनकी स्थापना के पश्चात, असिरिया का राजा सेनखरिब आ गया, और यहूदा में प्रवेश कर गया, और उन क़िलेबन्द नगरों के विरुद्ध पड़ाव डाल दिया, और उन्हें अपने स्वयं के लिए जीत लेने की सोची।
२ और जब हेज़ेकिया ने देखा कि सेनख़रीब आ गया था, और कि उसका उद्देश्य यरूशलेम के विरुद्ध युद्ध करने का था,
३ तो उसने अपने प्रमुखों और अपने पराक्रमी पुरुषों से उन जालों के स्त्रोतों को रोक देना का परामर्श लिया जो कि नगर के बाहर थे: और उन्होंने उसकी सहायता की।
४ तो कई लोग एक साथ एकत्रित हो गए थे, जिन्होंने उन सभी स्त्रोतों को रोक दिया, और उस दरिया को जो भूमी के मध्य में से जाती थी, कहते हुए, असिरिया के राजा आ कर क्यों बहुत सारा पानी पाएँ?
५ उसने स्वयं को सुदृढ़ भी किया, और उस समस्त दीवार का निर्माण कर दिया जो टूटी हुई थी, और उसे मीनारों तक ऊपर खड़ा कर दिया, और एक अन्य दीवार को बाहर, और मिल्लो की दाऊद के नगर में मरम्मत की, और बहुतायत से भाले और ढालें बनाईं।
६ और उसने लोगों पर युद्ध के कप्तानों को नियुक्त किया, और उन्हें अपने पास नगर के दरवाज़े के पथ पर एक साथ एकत्रित कर लिया, और उनके साथ दृढ़ता से बोला, कहता हुआ,
७ सुदृढ़ और साहसी बनो, न असिरिया के राजा हेतु, न ही उसके साथ उस समस्त जनौघ हेतु डरो, न ही निराश हो: चूँकि हमारे साथ अधिक हैं उसकी तुलना में:
८ उसके साथ तो माँस की एक भुजा हाउ; परन्तु हमारे साथ तो प्रभु हमारे ईश्वर हैं हमारी सहायता करने हेतु, और हमारे युद्धों को लड़ने हेतु। और उन लोगों ने यहूदा के राजा हेज़ेकिया के शब्दों पर स्वयं को समर्थन दिया।
९ इसके पश्चात असिरिया के राजा सेनख़रीब ने अपने नौकरों को यरूशलेम भेजा, (परन्तु उसने स्वयं लकिश के विरद्ध घेराबन्दी करी हुई थी, और उसकी समस्त शक्ती उसके साथ ही,) यहूदा के राजा हेज़ेकिया के पास, और समस्त यहूदा के पास जो यरूशलेम में थे, कहते हुए,
१० इस प्रकार कहते हैं असिरिया के राजा सेनख़रीब, भई तुम किस पर भरोसा कर रहे हो, कि तुम यरूशलेम की घेराबन्दी में बैठे हुए हो?
११ क्या हेज़ेकिया तुम्हें मनवा नहीं रहा है स्वयं को प्रदान कर देने हेतु अकाल और प्यास द्वारा मर जाने के लिए, कहता हुआ, प्रभु हमारे ईश्वर हमारा असिरिया के राजा के हाथ में से बाहर उद्धार कर देंगे?
१२ क्या इसी हेज़ेकिया ने उसके उच्च-स्थानों और उसकी बलिवेदियों को परे नहीं हटा दिया है क्या, और यहूदा और यरूशलेम को आदेश दिया, कहते हुए, तुम एक ही बलिवेदी के समक्ष आराधना करोगे, और उस पर सुगन्धित-धूप जलाओगे?
१३ क्या तुम जानते नहीं हो कि मैंने और मेरे पित्रों ने अन्य भूमियों के समस्त लोगों के साथ क्या-क्या कर डाला है? क्या उन भूमियों के राष्ट्रों के ईश्वर किसी भी रीति से अपनी भूमियों का मेरे हाथ से बाहर बचाव कर लेने में सक्षम थे क्या?
१४ भई कौन था मेरे पित्रों दारा अत्यंतता से नष्ट कर दिए गए उन राष्ट्रों के सभी इश्वरों के बीच, जो मेरे हाथ से बाहर अपने लोगों का बचाव कर पाया था, कि तुम्हारा ईश्वर तुम्हें मेरे हाथ से बाहर बचा लेने में सक्षम होगा?
१५ इसलिए अब हेज़ेकिया को तुम्हें धोखा मत दे देने दो, न ही तुम्हें इस रीति से मनवा लेने दो, न ही उस पर विश्वास करो: चूँकि किसी भी राष्ट्र या राज्य का कोई भी ईश्वर अपने लोगों का मेरे हाथ में से बाहर, और मेरे पित्रों के हाथ में से बाहर बचाव कर देने में सक्षम न था: तो भई कितनी लघुता से तुम्हारा ईश्वर तुम्हें मेरे हाथ में से बाहर बचा पाएगा?
१६ और उसके नौकर और भी अधिक बोलते ही रहे प्रभु ईश्वर के विरुद्ध, और उसके सेवक हेज़ेकिया के विरुद्ध ही।
१७ उसने इस्राएल के प्रभु ईश्वर की निंदा करने हेतु, और उनके विरुद्ध बोलने हेतु, पत्र भी लिखे, कहते हुए, जिस प्रकार अन्य भूमियों के राष्ट्रों के ईश्वर-गणों ने उनके लोगों को मेरे हाथ से बाहर नहीं बचाया, इसी प्रकार हेज़ेकिया का ईश्वर अपने लोगों को मेरे हाथ में से बाहर नहीं बचा पाएगा।
१८ तब वो यहूदियों की भाषा में एक प्रबल वाणी के साथ उन लोगों की ओर चीख पड़े जो दीवार पर थे, उन्हें डरा देने के लिए, और उन्हें विचलित कर देने के लिए; ताकि वो नगर को हथिया लें।
१९ और वो यरूशलेम के ईश्वर के विरुद्ध बोल रहे थे, मानो कि पृथ्वी के लोगों के ईश्वरों के विरुद्ध, जो कि आदमी के हाथों की कारीगरी थे।
२० और इस कारण-वश राजा हेज़ेकिया, और अमोज़ के बेटे यशायाह ने प्रार्थना की और स्वर्ग की ओर चीख पड़े।
२१ और प्रभु ने एक दूत को भेजा, जिसने उन सभी शूरवीर पराक्रमी आदमियों को, और असिरिया के राजा के शिविरों के अफ़सरों और कप्तानों को काट डाला। तो वो लज्जा से भरा अपना चेहरा लिए अपनी स्वयं की ही भूमी वापस लौट चला। और जब वो अपने ईश्वर के घर में आया हुआ था, उन्हीं ने जो उसकी अपनी ही आँतों से बाहर निकले थे उसे वहीं तलवार से मार डाला।
२२ तो इस प्रकार प्रभु ने हिज़किया और यरूशलेम के निवासियों को असिरिया के राजा सेनख़रीब के हाथ से, और अन्य सभी के हाथ से बचा लिया, और वो उनका चारों ओर मार्ग-दर्शन करते रहे।
२३ और कई प्रभु के पास यरूशलेम में भेंटें लाए, और यहूदा के राजा हेज़ेकिया के पास उपहार: ताकि वो तब से लेकर समस्त राष्ट्रों की दृष्टि में आवर्धित हो गया था।
२४ उन्हीं दिनो में हेज़ेकिया मौत की कगार तक भी बीमार था, और प्रभु से प्रार्थना की: और वह उस से बोले, और उन्होंने उसे एक संकेत दिया।
२५ परन्तु हेज़ेकिया ने पुनः भुक्तान नहीं किया उस लाभानुसार जो उसके प्रति कर दिया गया था; क्योंकि उसका हृदय ऊपर उठा हुआ था: इसलिए उस पर आक्रोश आ पड़ा था, और यहूदा और यरूशलेम पर।
२६ तथापी हेज़ेकिया ने अपने हृदय के अभिमान के लिए स्वयं को विनम्र बनाया, दोनो उसने और यरूशलेम के निवासियों ने, तो प्रभु का आक्रोश उन पर हेज़ेकिया के दिनो में नहीं आ पड़ा।
२७ और हेज़ेकिया के पास अत्याधिकता से धन-धान्य और सम्मान थे: और उसने स्वयं के लिए रजत हेतु, और स्वर्ण हेतु, और अनमोल रत्नों हेतु, और सुगन्धित-द्रव्यों हेतु, और ढालों हेतु, और समस्त प्रकार के मनभावन जवाहरातों हेतु धन-कोषों का निर्माण किया;
२८ अनाज, और अंगूर-रस, और तेल की बढ़ौतरी हेतु भण्डार-कोष भी; और समस्त प्रकार के पशुओं हेतु घुड़साल, और झुण्डों के लिए बाड़े।
२९ इनके अतिरिक्त उसने स्वयं नगरों का, और झुण्डों और पशु-समूहों का अत्याधिकता से प्रावधान किया: क्योंकि ईश्वर ने उसे बहुत ही सारे पदार्थ प्रदान कर दिए थे।
३० इसी हेज़ेकिया ने गिहोन के ऊपरी जल-मार्ग को रोक दिया था, और उसे दाऊद के नगर के पश्चिमि पाशर्व तक सीधा-सीधा नीचे ले आया था। और हेज़ेकिया अपने समस्त कार्यों में उन्नत था।
३१ परन्तु बेबिलों के अध्यक्षों के राज-दूतों के विषय में, जिन्होंने उसके पास भजवाए थे उस अचरज के बारे में पूछ-ताछ करने हेतु जो भूमी में कर दिया गया था, ईश्वर ने उसे छोड़ दिया, उसकी परीक्षा लेने हेतु, ताकि वो उस सब को जान जाएँ जो उसके हृदय में था।
३२ अब हेज़ेकिया के शेष कार्य, और उसकी अच्छाई, देखो तो, वो अमोज़ के बेटे यशायाह के दृश्य में, और यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखित हैं।
३३ और हेज़ेकिया अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उन्होंने उसे दाऊद के बेटों के अति-विशिष्ट मक़बरों में दफ़ना दिया: और समस्त यहूदा और यरूशलेम के निवासियों ने उसका उसकी मृत्यु पर सम्मान किया। और मनश्शे उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
तेन्तीसवाँ अध्याय।
१ मनश्शे बारह वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में पचपन वर्ष राज किया।
२ परन्तु वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उन अन्यप्रजातियों की अतिघृणितताओंनुसार ही, जिन्हें प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष बाहर निष्कासित कर डाला था।
३ क्योंकि उसने पुनः उन उच्च-स्थानों का निर्माण कर दिया जिनको उसके पिता हेज़ेकिया ने नीचे तोड़ डाला था; और उसने बअलिम के लिए बलिवादियाँ खड़ी कर दीं, और उपवन बनाए, और स्वर्ग की समस्त सेना की अर्चना की, और उनकी सेवा की।
४ उसने प्रभु के घर में बलिवेदियों का निर्माण भी किया, जिस घर के विषय में प्रभु बोले थे, यरूशलेम में ही मेरा नाम सदा-सदा के लिए रहेगा।
५ और उसने प्रभु के घर के उन दो आँगनों में स्वर्ग की समस्त सेना के लिए बलिवेदियाँ बनाईं।
६ और उसने अपने सन्तानों को हिनम के बेटे की घाटी में अग्नी में से पार भिजवाया, उसने जादू-टोना भी किया, और इन्द्रजाल-तन्त्र-मन्त्रों का उपयोग किया, और चुड़ैल-शास्त्र का प्रयोग किया, और एक प्रेत-भावात्मा का और तांत्रिकों का प्रयोग किया: उसने प्रभु की दृष्टि में उन्हें क्रोध के प्रति उत्तेजित कर देने हेतु बहुत ही बुराई क्रियान्वित की।
७ और उसने ईश्वर के घर में एक उत्कीर्ण प्रतिमा स्थित कर दी जो उसने बनाई थी, जिसके विषय में ईश्वर ने दाऊद से और सुलेमान उसके बेटे से कहा था, इसी घर में, और यरूशलेम में ही, जिसे मैंने इस्राएल की समस्त प्रजातियों के समक्ष चुन लिया है, मैं अपना नाम सदा-सदा के लिए स्थित कर दूँगा:
८ न ही मैं इस्राएल के पैर को इस भूमी में से अब और बाहर हटाऊँगा जिसे मैंने तुम्हारे ही पित्रों के लिए नियुक्त कर दिया था; ताकि वो उस सभी को कर देने का ध्यान देते रहें जो मैंने इन्हें आदेश दे दिया है, उस समस्त नियम और उन अध्यादेशों और उन आदेशों के अनुसार, मूसा के हाथ से ही।
९ तो मनश्शे ने यहूदा को और यरूशलेम के निवासियों को उन आँयप्रजातियों से भी भत्तर कर देने हेतु बहका दिया जिनका विध्वंस प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के समक्ष कर डाला था।
१० और प्रभु मनश्शे से बोले, और उसके लोगों से: परन्तु उन्होंने श्रवण नहीं किया।
११ इस कारण वश प्रभु उन पर असिरिया के राजा की सेना के कप्तानों को ले आए, जिन्होंने मनश्शे को काँटों के बीच पकड़ कर, उसे बेड़ियों में बाँध दिया, और उसे बेबिलों उठा ले गए।
१२ और जब वो उत्पीड़ना में था, उसने प्रभु अपने ईश्वर से विनती की, और स्वयं को बहुत ही विनम्र बना दिया अपने पित्रों के ईश्वर के समक्ष,
१३ और उनसे प्रार्थना की: और उन्होंने उसके विनती स्वीकार कर ली, और उसका अनुनय सुन लिया, और उसे पुनः यरूशलेम में उसके राज्य में ले आए। तब मनश्शे ने जान लिया कि प्रभु ही ईश्वर थे।
१४ अब इसके पश्चात उसने दाऊद के नगर के बाहर एक दीवार का निर्माण किया, गिहोन के पश्चिमि ओर, घाटी में ही, मत्स्य-द्वार की प्रविष्टि तक भी, और ओफ़ेल को घेरे, और उसे एक बहुत ही ऊँचाई तक ऊपर उठा दिया, और युद्ध के कप्तानों को यहूदा के सभी क़िलेबन्द नगारों में स्थित कर दिया।
१५ और उसने प्रभु के घर में से उन परदेशी ईश्वरों को, और उस मूर्ति को बाहर परे हटा दिया, और उन समस्त बलिवेदियों को जिन्हें उसने प्रभु के घर के पहाड़ में बनाई थीं, और यरूशलेम में, और उन्हें नगर के बाहर फैंक दिया।
१६ और उसने प्रभु की बलिवेदी को सुधार दिया, और उस पर शान्ति-चढ़ावों और कृतज्ञता-चढ़ावों का बलिदान किया, और यहूदा को आदेश दिया इस्राएल के प्रभु ईश्वर की सेवा करने का।
१७ तथापी लोग तब भी उन उच्च-स्थानों में बलियाँ चढ़ाया करते थे, परन्तु केवल प्रभु अपने ईश्वर के प्रति ही।
१८ अब मनश्शे के वो शेष कार्य, और उसके ईश्वर के प्रति उसकी प्रार्थना, और उन भविष्य-दर्शकों के शब्द जो वो उस से इस्राएल के प्रभु ईश्वर के नाम में बोले थे, देखो तो, वो इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।
१९ उसकी प्रार्थना भी, और कि कैसे ईश्वर ने उसकी विनती सुन ली थी, और उसका समस्त पाप, और उसका उल्लंघन, और वो स्थान जिन में उसने उच्च-स्थानो का निर्माण कर दिया था, और उपवनों और ढली हुई प्रतिमाओं को स्थित कर दिया था, उसके विनम्र हो जाने से पहले: देखो तो, वह उन भविष्य-दर्शकों के कथनों के बीच लिखे हुए हैं।
२० तो मनश्शे अपने पित्रों के साथ लेट गया, और उन्होंने उसे उसके अपने ही घर में दफ़ना दिया: और अमोन उसके बेटे ने उसके स्थान में राज किया।
२१ अमोन बाईस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में दो वर्ष राज किया।
२२ परन्तु उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था, जैसा कि उसके पिता मनश्शे ने किया था: क्योंकि अमोन ने उन सभी उत्कीर्ण प्रतिमाओं के प्रति बलियाँ चढ़ाईं जिन्हें मनश्शे उसके पिता ने बनाया था, और उनकी सेवा की;
२३ और उसने स्वयं को प्रभु के समक्ष विनम्र नहीं बनाया, जैसा कि उसके पिता मनश्शे ने स्वयं को विनम्र बना दिया थाल बल्कि अमोन अधिक से अधिक उल्लंघन करता चला गया।
२४ और उसके नौकरों ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा कर उसे उसके अपने ही घर में मार डाला।
२५ परन्तु उस भूमी के लोगों ने उन सभी को मार डाला जिन्होंने राजा अमोन के विरुद्ध षड्यंत्र रचाया था; और उस भूमी के लोगों ने उसके बेटे योशियाह को उसके स्थान में राजा बना दिया।
चौनतीसवाँ अध्याय।
१ योशियाह आठ वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और उसने यरूशलेम में इकत्तीस वर्ष राज किया।
२ और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में सही था, और दाऊद अपने पिता के पथों पर चलता रहा, और परे नहीं मुड़ा न ही दाएँ हाथ की ओर न ही बाएँ की ओर।
३ चूँकि उसके राज के आठवें वर्ष में, जब कि वो अभी एक युवक ही था, तो उसने अपने पिता दाऊद के ईश्वर को ढूँढना आरम्भ कर दिया: और बारहवें वर्ष में उसने यहूदा और यरूशलेम का उन उच्च-स्थानों से, और उन उपवनों से, और उन उत्कीर्ण प्रतिमाओं से, और उन ढली हुई मूर्तीयों से शुद्धीकरण करना आरम्भ कर दिया।
४ और उन्होंने बअलिम की बलिवेदियों को उसकी उपस्थिति में नीचे तोड़ डाला; और उन प्रतिमाओं को, जो उनके ऊपर तनी हुई थीं, उसने नीचे काट डाला; और उन उपवनों को, और उन उत्कीर्ण प्रतिमाओं को, और उन ढली हुई मूर्तीयों को, उसने टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ डाला, और उन्हें चूरे-चूरे में पीस डाला, और उसे उनकी क़ब्रों पर छिड़क दिया जिन्होंने उनके प्रति बलियाँ चढ़ाई थीं।
५ और उसने उन पुरोहितों की अस्थियों को भस्म कर डाला उनकी बलिवेदियों पर ही, और यहूदा और यरूशलेम का स्वच्छीकरण कर दिया।
६ और ऐसा ही उसने मनश्शे के, और एफ्रैम के, और शिमोन के नगरों में कर दिया, नफ़्तली तक भी, चारों ओर उनकी दरांतियों के साथ।
७ और जब उसने उन बलिवेदियों को और उन उपवनों को नीचे तोड़ डाला था, और उन ढली हुई प्रतिमाओं को चूरे-चूरे में कूट डाला था, और उन समस्त मूर्तीयों को इस्राएल की भूमी के समस्त सर्वत्र में काट डाल था, तो वो यरूशलेम वापस लौट आया।
८ अब उसके राज के अठ्ठारहवें वर्ष में, जब वो भूमी का और घर का शुद्धीकरण कर चुका था, तो उसने अज़लिया के बेटे शफन, और नगर के राज्यपाल मअसेया, और योआ योअहज़ के बेटे उस अभिलेखक को प्रभु अपने ईश्वर के घर की मरम्मत करने भेजा।,
९ और जब वो उच्च-पुरोहित हिल्किया के पास आ पहुँचे थे, तो उन्होंने उस पैसे को प्रदान कर दिया जो ईश्वर के घर में ले आया गया था, जिसे उन द्वार-पाल लेवी-वंशजों ने मनश्शे और एफ्रैम, और इस्राएल के समस्त अन्श, और समस्त यहूदा और बिन्यामिन के हाथ से एकत्रित कर लिया था; और वो यरूशलेम वापस आ गए।
१० और उन्होंने उसे उन कामगारों के हाथ में प्रदान कर दिया जिनके पास प्रभु के घर का निर्देशन-कार्य था, और उन्होंने उसे उन कामगारों को दे दिया जो प्रभु के घर में काम कर रहे थे, घर की मरम्मत और उसका सुधार कर देने हेतु:
११ उन्हीं कारीगरों और राजगीरों को ही उन्होंने वो दे दिया, काटे हुए पत्थर को, और जोड़ों के लिए लकड़ी को खरीदने हेतु, और उन घरों के फ़र्श बना देने हेतु जिन्हें यहूदा के राजाओं ने नष्ट कर दिया था।
१२ और उन जनो ने वो काम निष्ठा के साथ किया: और उनके निर्देशक यहत और ओबदिया, वो लेवी-वंशज, मरेरी के बेटों में से; और ज़कर्या और मेशुल्लम, और कहाथ के बेटों में से थे; उसे अग्रसर कर देने हेतु; और लेवी-वंशजों में से अन्यों में से, वो सभी जो संगीत वाद्य-यंत्रों में कुशल थे।
१३ और वो भारों को ढोने वालों पर भी थे, वो उस सभी के निर्देशक थे जो कार्य को क्रियान्वित किया करते थे, सेवा की किसी भी रीति में: और उन लेवी-वंशजों में से थे लिपिक, और अफ्सर, और द्वार-पाल।
१४ और जब वो उस पैसे को बाहर निकाल लाए थे जो कि प्रभु के घर में ले आया गया था, तो उस पुरोहित हिल्किया ने मूसा द्वारा प्रदान की गई प्रभु के नियम की एक पुस्तक पाई।
१५ और हिल्किया ने उत्तर दिया और लिपिक शफन से कहा, मैंने प्रभु के घर में नियम की पुस्तक पा ली है भई। और हिल्किया ने शफन को वो पुस्तक प्रदान कर दी।
१६ और शफन राजा के पास वो पुस्तक ले गया, और पुनः राजा को शब्द वापस ले आया, कहते हुए, वो सभी कुछ जो आपके नौकरों के सुपुर्द कर दिया गया था, वो कर रहे हैं जी।
१७ और उन्होंने वो पैसा एक साथ एकत्रित कर लिया है जो प्रभु के घर में पाया गया था, और उसे उन निर्देशकों के हाथ में, और उन कामगारों के हाथ में प्रदान कर दिया है।
१८ तब लिपिक शफन ने राजा को बताया, कहते हुए, जी पुरोहित हिल्किया ने मुझे एक पुस्तक दे दी है। और शफन ने उसे राजा के समक्ष पढ़ा।
१९ और यह होने को आया, कि जब राजा ने नियम के उन शब्दों को सुन लिया था, तो उसने अपने कपड़े फाड़ डाले।
२० और राजा ने पुरोहित हिल्किया, और शफन के बेटे अहिकम, और मिका के बेटे अब्दोन, और लिपिक शफन, और राजा के एक सेवक असाहिया को आदेश दिया, कहते हुए,
२१ चले जाओ, मेरे लिए, और उनके के लिए जो इस्राएल में और यहूदा में बचे रह गए हैं, इस पाई गई पुस्तक के शब्दों के समबन्ध में प्रभु से पूछ-ताछ करो: क्योंकि प्रभु का आक्रोश विशाल है जो हम पर उँडेल दिया जा चुका है, चूँकि हमारे पित्रों ने प्रभु के शब्दों का पालन नहीं किया है, उस सभी के अनुसार कर देने हेतु कर देने हेतु जो इस पुस्तक में लिखा हुआ है।
२२ और हिल्किया, और राजा द्वारा नियुक्त कर दिए गए वो जने, वस्त्रागार का रख-रखाव रखने वाले हसरा के बेटे, तिकवथ के बेटे शल्लुम की पत्नी पैग़म्बरिका हुल्दा के पास चले गए; अब वो यरूशलेम के दूसरे भाग में निवास करती थी: और वो उस से इस प्रकार बोले।
२३ और उसने उन्हें उत्तर दिया, इस प्रकार इस्राएल के प्रभु ईश्वर कहते हैं, उस आदमी को बता दो जिसने तुम्हें मेरे पास भेजा है,
२४ प्रभु इस प्रकार कहते हैं, देखो लो भई, मैं इस स्थान पर, और इसके निवासियों पर बुराई लाऊँगा, उस पुस्तक के ही लिखित समस्त श्राप ही जिन्हें उन्होंने यहूदा के राजा के समक्ष पढ़ लिए हैं:
२५ क्योंकि इन्होंने मुझे त्याग दिया है, और दूसरे इश्वरों के प्रति सुगन्धित-धूप जला डाली है, ताकि वो मुझे क्रोध के प्रति भड़का दें उनके हाथों के समस्त कार्यों द्वारा ही; इसलिए मेरा आक्रोश इस स्थान पर उँडेल दिया जाएगा, और बुझेगा नहीं।
२६ और जहाँ तक यहूदा के राजा की बात आती है, जिसने तुम्हें प्रभु से पूछ-ताछ करने हेतु भेजा है, इस प्रकार तुम उस से कहोगे, इस प्रकार कहते हैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर, उन शब्दों के सन्दर्भ में जो तुमने सुन लिए हैं;
२७ चूँकि तुम्हारा हृदय कोमल था, और तुमने ईश्वर के सम्मुख स्वयं को विनम्र बना दिया, जब तुमने उनके शब्द इस स्थान के विरुद्ध, और इसके निवासियों के विरुद्ध सुन लिए थे, और मेरे सम्मुख स्वयं को विनम्र बना दिया था,
और कि तुमने अपने कपड़े फाड़ डाले थे, और मेरे सम्मुख रोए थे; मैंने भी तुम्हें सुन ही लिया है, कहते हैं प्रभु।
२८ देख लो, मैं तुम्हें तुम्हारे पित्रों के पास एकत्रित कर दूँगा, और तुम अपनी कब्र में शान्ति से एकत्रित हो जाओगे; न ही तुम्हारी आँखें वो समस्त बुराई देखेंगी जो मैं इस स्थान पर, और इसी के निवासियों पर ले आऊँगा। तो वो राजा के पास पुनः ले आए।
२९ तब राजा ने भिजवा दिए, और यहूदा और यरूशलेम के समस्त वृद्ध-गण एक साथ एकत्रित कर दिए।
३० और राजा प्रभु के घर में ऊपर चला गया, और यहूदा के समस्त पुरुष, और यरूशलेम के निवासी, और वो पुरोहित-गण, और वो लेवी-वंशज, और वो समस्त लोग, बड़े और छोटे: और उसने उनके कानों में उस प्रतिज्ञा-पत्र की पुस्तक के वो समस्त शब्द पढ़ दिए जो प्रभु के घर में पा ली गई थी।
३१ और राजा अपने स्थान में खड़ा था, और प्रभु के समक्ष एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, प्रभु के पीछे-पीछे चलने का, और उनके आदेशों और उनके साक्ष्यों और उनके अध्यादेशों को रखने का अपने सम्पूर्ण हृदय के साथ, और अपनी सम्पूर्ण आत्मा के साथ, इस प्रतिज्ञा-पत्र के शब्दों को क्रियान्वित कर देने हेतु जो कि इस पुस्तक में लिखे हुए हैं।
३२ और उसने उन सभी को जो यरूशलेम और बिन्यामिन में प्रस्तुत थे इसके प्रति खड़ा करवा दिया। और यरूशलेम के निवासियों ने उनके पित्रों के ईश्वर, ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्रानुसार ही किया।
३३ और योशियाह ने उन सभी राष्ट्रों में से जो इस्राएल की सन्तानों के थे, उन सभी अतिघृणितताओं को बाहर परे हटा डाला, और उन सभी से जो इस्राएल में प्रस्तुत थे सेवा करवाई, प्रभु उनके ईश्वर की ही सेवा करने हेतु। और उसके समस्त दिनो में उन्होंने प्रभु अपने पित्रों के ईश्वर का अनुसरण करने से प्रस्थान नहीं किया।
पैंतीसवाँ अध्याय।
१ इसके अतिरिक्त योशियाह ने यरूशलेम में प्रभु के प्रति एक पार-करना रखा: और उन्होंने पहले महीने के चौदहवें दिन पर उस पार-करने।
२ और उसने उन पुरोहितों को उनके प्रभारों पर नियुक्त कर दिया, और उन्हें प्रभु के घर की सेवा के प्रति प्रोत्साहित किया,
३ और उन लेवी-वंशजों से कहा जो समस्त इस्राएल को शिक्षण प्रदान किया करते थे, जो प्रभु के प्रति पवित्र थे, पवित्र संदूक को उस घर में रख दो जिसका निर्माण इस्राएल के राजा दाऊद के बेटे सुलेमान ने किया था; और वह तुम्हारे कंधों पर बोझ नहीं बनेगा: सेवा करो अब प्रभु अपने ईश्वर की, और उनके गण इस्राएल की,
४ और स्वयं को अपने पित्रों के घरानों से, और अपने कार्यकालोंनुसार उद्यत कर दो, इस्राएल के राजा दाऊद की लिपिनुसार, और उनके बेटे सुलेमान की लिपिनुसार।
५ और पवित्र स्थान में खड़े हो जाओ इस गण अपने भाई-जनो के पित्रों के परिवारों के विभाजनोनुसार, और लेवी-वंशजों के परिवारों के विभाजनोंनुसार।
६ तो इस प्रकार पार-करने को मार दो, और स्वयं को पुनीत ठहरा दो, और अपने भाई-जनो को उद्यत कर दो, ताकि वो प्रभु के शब्दानुसार कर दें मूसा के हाथ द्वारा।
७ और योशियाह ने लोगों को झुण्ड में से मेमने और हलवान, प्रदान कर दिए, यह सभी पार-करने के चढ़ावों के लिए, उन सभी के लिए ही जो प्रस्तुत थे, संख्या में तीस हज़ार तक, और तीन हज़ार साँड: यह राजा की सम्पत्ती में से ही थे।
८ और उसके अध्यक्षों ने स्वेच्छा से लोगों को, पुरोहितों को, और उन लेवी-वंशजों को दिया: हिल्किया और ज़कर्या और येईएल, ईश्वर के घर के अध्यक्षों ने पार-करने के चढ़ावों हेतु पुरोहितों को दो हज़ार छह सौ छोटे मवेशी, और तीन सौ साँड दे दिए।
९ कोननिया ने भी, और शेमाया और नेथनील, उसके भाई-जनो, और हशबिया और येईएल और योज़अबद, लेवी-वंशजों के प्रमुख, ने लेवी-वंशजों को पार-करने के चढ़ावों हेतु पाँच हज़ार छोटे मवेशी, और पाँच सौ साँड दिए।
१० तो वो सेवा तैयार कर दी गई थी, और वो पुरोहित अपने स्थान में खड़े थे, और वो लेवी-वंशज अपने कार्यकालों में, राजा के आदेशानुसार।
११ और उन्होंने उस पार-करने को मार दिया, और उन पुरोहितों ने अपने हाथों से उस रक्त को छिड़क दिया, और उन लेवी-वंशजों ने उनकी खालें उतार दीं।
१२ और उन्होंने वो जले-चढ़ावे परे हटा दिए, ताकि वो प्रभु को अर्पित कर देने हेतु, लोगों के परिवारों के विभाजनोनुसार दे सकें, जैसा की मूसा की पुस्तक में लिखा हुआ है। और सो उन्होंने सांडों के साथ कर दिया।
१३ और उन्होंने उस पार-करने को अग्नी से भून दिया अध्यादेशानुसार ही: परन्तु उन अन्य पवित्र चढ़ावों को उन्होंने पतीलों में, और कढ़ाईयों में, और पात्रों में उबाल दिया, और उन्हें वेगता से समस्त लोगों के बीच बाँट दिया।
१४ और बाद में उन्होंने स्वयं के लिए तैयारी की, और पुरोहितों के लिए: क्योंकि वो पुरोहित हारुन के बेटे रात्रि तक भी जले-चढ़ावों और उस चर्बी के चढ़ावे में व्यस्त थे; इसलिए उन लेवी-वंशजों ने स्वयं के लिए तैयारी की, और हारुन के बेटों उन पुरोहितों के लिए।
१५ और असफ के बेटे वो गायक अपने स्थान में थे, दाऊद के आदेशानुसार ही, और असफ, और हेमन, आयर यदुतुन राजा का भविष्य-दर्शक; और वो द्वारपाल प्रत्येक द्वार पर नियुक्त थे; ताकि वो अपनी सेवा से प्रस्थान न करें; चूँकि उनके भाई-जनो उन लेवी-वंशजों ने उनके लिए तैयारी की थी।
१६ तो उसी दिन ही प्रभु की वो समस्त सेवा उद्यत कर दी गई थी, उस पार-करने को रखने हेतु, और प्रभु की बलिवेदी पर जले-चढ़ावों को चढ़ा देने हेतु, राजा योशियाह के आदेशानुसार ही।
१७ और उस समय इस्राएल की उन सन्तानों ने जो उपस्थित थीं, पार-करना, और बेख़मीरी रोटी का भोज सात दिन रखा।
१८ और भई ऐसा पार-करना तो इस्राएल में पैग़म्बर शमुएल के दिनो से लेकर नहीं रखा गया था; न ही इस्राएल के समस्त राजाओं ने ऐसा पार-करना रखा था जैसा योशियाह ने, और उन पुरोहितों ने, और उन लेवी-वंशजों ने, और समस्त यहूदा और इस्राएल ने जो उपस्थित थे, और यरूशलेम के निवासियों ने रखा था।
१९ योशियाह के राज के अट्ठारहवें वर्ष में ये पार-करना रखा गया था।
२० इस सभी के पश्चात, जब योशियाह ने मन्दिर को तैयार कर दिया था, मिस्र का राजा नेको फरात के साथ करकेमिष के विरुद्ध लड़ाई करने चढ़ाई कर बैठा: और योशियाह उसके विरुद्ध बाहर निकल पड़ा।
२१ परन्तु उसने उसे राज-दूत भेजे, कहते हुए, भई मुझे तुम से क्या करना-धरना, तुम यहूदा के राजा? मैं इस दिन तुम्हारे विरुद्ध नहीं बल्कि उस घराने के विरुद्ध आया हूँ जिसके साथ मुझे युद्ध करना है: क्योंकि ईश्वर ने मुझे शीघ्रता करने का आदेश दिया: तुम ईश्वर के साथ हस्तक्षेप करने से रुक जाओ, जो कि मेरे साथ हैं, ताकि वो तुम्हें नष्ट न करें।
२२ तथापि योशियाह ने उसकी ओर से अपना चेहरा नहीं मोड़ा, बल्कि स्वयं का भेष बदल लिया, ताकि वो उसके साथ लड़ सके, और ईश्वर के मूँह से नेको के शब्दों का श्रवण नहीं किया, और मगिद्दो की घाटी में लड़ाई करने आ पहुँचा।
२३ और उन धनुर्धारियों ने राजा योशियाह पर बाण चला दिए; और राजा ने अपने सेवकों से कहा, मुझे परे ले जाओ; क्योंकि मैं घोरता से घायल हो गया हूँ।
२४ इसलिए उसके नौकरों ने उसे उस रथ में से बाहर निकाल कर उसे उस दूसरे रथ में सवार कर दिया जो उसके पास था; और वो उसे यरूशलेम ले आए, और वो मर गया, और अपने पित्रों के मक़बरों में से एक में दफ़ना दिया गया था। और समस्त यहूदा और यरूशलेम ने योशिया के लिए शोक मनाया।
२५ और यिर्मियाह ने योशियाह के लिए शोक-विलाप मनाया: और सभी गायक और गायिकाएँ योशियाह के विषय में इस दिन तक अपने शोक-विलापों में बोले, और उन्हें इस्राएल में एक अध्यादेश बना दिया: और देखो तो, वो उन शोक-विलापों में लिखित हैं।
२६ अब योशियाह के वो शेष कार्य, और उसकी प्रभु के नियम में उस लिखाई के अनुसार उसकी अच्छाई,
२७ और उसके कार्य, प्रथम और अन्तिम, देखो, वो इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।
छत्तीसवाँ अध्याय।
१ तब भूमी के लोगों ने योशियाह के बेटे येहोअहज़ को लेकर उसे यरूशलेम में उसके पिता के स्थान में राजा बना दिया।
२ येहोअहज़ तेईस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में तीन माह राज किया।
३ और मिस्र के राजा ने उसे यरूशलेम में नीचे उतार दिया, और भूमी पर चाँदी के सौ तलनतन भारों का और सोने के एक तलनतन भार का अर्थदण्ड लागू कर दिया।
४ और मिस्र के राजा ने उसके भाई एलियाकिम को यहूदा और यरूशलेम पर राजा बना दिया, और उसके नाम को येहोयकिम में परिवर्तित कर दिया। और नेको ने उसके भाई येहोअहज़ को लिया, और उसे मिस्र में ले चला।
५ येहोयकिम पच्चीस वर्ष कि आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था; और उसने यरूशलेम में ग्यारह वर्ष राज किया: और उसने वो किया जो प्रभु उसके ईश्वर की दृष्टि में बुरा था।
६ उसके विरुद्ध बेबिलोन के राजा नबूकदनेज़्ज़र ने चढ़ाई कर दी, और उसे बेड़ियों में बाँध दिया, उसे बेबिलोन ले जाने हेतु।
७ और नबूकदनेज़्ज़र प्रभु के घर के पात्रों को भी बेबिलोन ले आया, और उन्हें बेबिलोन में अपने मन्दिर में स्थित कर दिया।
८ अब येहोयकिम के वो शेष कार्य, और उसकी अति-घृणितताएँ जो उसने क्रियान्वित कीं, और वो जो उस में पाया गया था, देखो तो, वो इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं: और उसके बेटे येहोयकिन ने उसके स्थान में राज किया।
९ येहोयकिन आठ वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया था, और उसने यरूशलेम में तीन माह और दस दिन राज किया: और उसने वो किया जो प्रभु की दृष्टि में बुरा था।
१० और जब वर्ष की समाप्ति हो चुकी थी, तो राजा नबूकदनेज़्ज़र ने भिजवाया, और उसे बेबिलोन ले आया, प्रभु के घर के उन अच्छे पात्रों के साथ, और उसके भाई ज़देकिया को यहूदा और यरूशलेम पर राजा बना दिया।
११ ज़देकिया इक्कीस वर्ष की आयु का था जब उसने राज करना आरम्भ किया, और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष राज किया।
१२ और उसने वो किया जो प्रभु उसके ईश्वर की दृष्टि में बुरा था, और स्वयं को प्रभु के मूँह से बोलते हुए पैग़म्बर यिर्मियाह के समक्ष विनम्र नहीं किया।
१३ और उसने बेबिलोन के राजा नबूकदनेज़्ज़र के विरुद्ध विद्रोह भी कर डाला, जिसने ईश्वर की उस से शपथ खिलवाई थी: लेकिन उसने अपनी गर्दन ऐंठ ली, और इस्राएल के प्रभु ईश्वर की ओर मुड़ने से अपने मन को कठोर बना डाला।
१४ इसके अतिरिक्त पुरोहितों के समस्त प्रमुख, और लोग उन अन्य-राष्ट्रों की अति-घृणितताओं के पीछे-पीछे बहुत सारे ही उल्लंघन कर बैठे भई; और प्रभु के उस घर को प्रदूषित कर डाला जिसे उन्होंने यरूशलेम में पवित्र ठहरा दिया था।
१५ और उनके पित्रों के प्रभु ईश्वर ने उन्हें अपने संदेश-वाहकों के द्वारा भिजवाया, सुबह-सुबह उठ कर ही, और भेजते हुए; क्योंकि उन्हें अपने लोगों के प्रति सहानुभूति थी, और उनके निवास स्थान पर:
१६ परन्तु उन्होंने ईश्वर के दूतों की हँसी उड़ाई, और ईश्वर के शब्दों को तुच्छ माना, और उनके पैग़म्बरों का दुरुप्योग किया, जब तक कि प्रभु का आक्रोश उनके गण के विरुद्ध उठ गया था, जब तक कि कोई उपाय नहीं रहा था।
१७ इसलिए वो उन पर कसदियो के राजा को ले आए थे, जिसने उनके युवा पुरुषों को उनके पुण्य-स्थान के घर में मार डाला, और युवक अथ्वा युवती, वृद्ध पुरुष, अथ्वा उसके प्रति जो आयु के कारण झुका हुआ था कोई सहानुभूति नहीं रखी: उन्होंने उसके हाथ में सभी को प्रदान कर दिया।
१८ और ईश्वर के घर के समस्त पात्र, बड़े और छोटे, और प्रभु के घर के धन-कोष, और राजा के धन-कोष, और उसके प्रमुखों के; यह सभी वो बेबिलोन ले आया।
१९ और उन्होंने ईश्वर के घर को जला डाला, और यरूशलेम की दीवारों को नीचे तोड़ गिराया, और उसके समस्त महलों को अग्नी से जला डाला, और उसके सभी अच्छे-आँचें पात्रों को नष्ट कर डाला।
२० और वो जो तलवार से बच निकले थे वो बेबिलोन में ले चला; जहाँ वो उसके और उसके बेटों के नौकर थे फारस के राज्य के राज तक:
२१ यिर्मियाह के मूँह द्वारा प्रभु के शब्द को पूर्ण कर देने हेतु, जब तक भूमी ने अपने सैबथ नहीं मना लिए थे: क्योंकि जितने समय तक भी वो उजाड़ रही उसने सैबथ का पालन किया, सत्तर वर्षों को पूर्ण कर देने हेतु।
२२ अब फारस के राजा कुरुश के प्रथम वर्ष में, ताकि यिर्मियाह के मूँह द्वारा बोले गए प्रभु के उस शब्द का समापन हो जाए, प्रभु ने फारस के राजा कुरुश के भावात्मा को सक्रीय कर दिया, कि उसने अपने समस्त राज्य के सर्वत्र में एक घोषणा की, और उसे लेखांकित भी कर दिया, कहते हुए,
२३ इस प्रकार कहते हैं, फारस के राजा कुरुश, स्वर्ग के प्रभु ईश्वर ने पृथ्वी के समस्त राज्य मुझे प्रदान कर दिए हैं;
और उन्होंने मुझे प्रभार सौंप दिया है उनके लिए यरूशलेम में एक घर का निर्माण कर देना का, जो कि यहूदा में है। उनके समस्त लोगों में से तुम्हारे बीच वो कौन है? प्रभु उसके ईश्वर उसके साथ रहें, और वो ऊपर चला जाए।
०३/१६/२०२६:
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