न्यायाधीषों की पुस्तक। (Judges)
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पहला अध्याय।
१ अब यहोशुआ के देहान्त के पश्चात यह होने को आया, कि इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु से पूछा, कहते हुए, हमारे लिए कौन पहले कनानवासियों के विरुद्ध ऊपर जाएगा, उनके विरुद्ध लड़ाई करने के लिए?
२ और प्रभु ने कहा, यहूदा ऊपर जाएगा: देखो, मैंने भूमी उसके हाथ में प्रदान कर दी है।
३ और यहूदा ने अपने भाई शिमोन से कहा, मेरे साथ ऊपर मेरे खण्ड में आ जाओ, ताकि हम कनानवासियों के विरुद्ध लड़ाई करें; और मैं इसी प्रकार तुम्हारे साथ तुम्हारे खण्ड में जाऊँगा। तो शिमोन उसके साथ चला गया।
४ और यहूदा ऊपर गया; और प्रभु ने कनानवासी और पेरिज़वासी उनके हाथ में प्रदान कर दिए: और उन्होंने उन में से बज़क में दस हज़ार आदमी मार डाले।
५ और उन्होंने बज़क में अदोनीबज़क को पाया: और उन्होंने उसके विरुद्ध लड़ाई की, और उन्होंने कनानवासियों और पेरिज़वासियों को मार डाला।
६ परन्तु अदोनीबज़क भाग निकला; और वह उसका पीछा करते गए, और उसे पकड़ लिया, और उसके अँगूठों और उसके पादांगुष्ठों को काट डाला।
७ और अदोनीबज़क ने कहा, कटे अँगूठों और पादांगुष्ठों वाले सत्तर राजाओं ने मेरी मेज़ तले अपना भोजन उठाया: जैसा मैंने किया है, वैसा ही ईश्वर ने मुझे वापस भुक्तान कर दिया है। और वह उसे यरूशलेम ले आए, और वहीं वह मर गया।
८ अब यहूदा की सन्तानों ने यरूशलेम के विरुद्ध लड़ाई की थी, और उसे ले लिया था, और उसे तलवार की धार से पीट डाला था, और उस नगर में आग लगा दी थी।
९ और उसके पश्चात यहूदा की सन्तानें नीचे गईं उन कनानवासियों के विरुद्ध लड़ाई करने जो पर्वत में, और दक्षिण में, और घाटी में बसते थे।
१० और यहूदा हेब्रोन में बसने वाले कनानवासियों के विरुद्ध गया: अब हेब्रोन का पहले नाम था किरयतअरबा: और उन्होंने
शेशय, और अहीमन, और तलमय को मार डाला।
११ और वहाँ से वह दबर के निवासियों के विरुद्ध गया: और दबर का पहले नाम था किरयतसफर:
१२ और कालेब ने कहा, वह जो किरयथसफर को परास्त करता है, और उसे ले लेता है, उसी को मैं अक्सा अपनी बेटी पत्नी के लिए दे दूँगा।
१३ और ओतनिएल, कालेब के छोटे भाई कनज़ के बेटे ने उसे ले लिया: और उसने अपनी बेटी अक्सा उसे पत्नी के लिए दे दी।
१४ और यह होने को आया, कि जब वह उसके पास आई, उसने उसे उकसाया उसके पिता से एक खेत की माँग करने हेतु: और वह अपने गधे पर से उतरी; और कालेब ने उस से कहा, क्या चाहती हो तुम?
१५ और उसने उत्तर दिया, मुझे एक आशीर्वाद दे दें; क्योंकि आपने मुझे एक दक्षिणी भूमी दे दी है; मुझे जल-स्त्रोत भी प्रदान कर दें। और उसने उसे ऊपरी स्त्रोत, और निचले स्त्रोत प्रदान कर दिए।
१६ और मूसा के ससुर, उस किनि की सन्तानें, यहूदा की सन्तानों के साथ खजूर के पेड़ों के नगर से ऊपर बाहर यहूदा के जँगली-क्षेत्र में चले गए, जो अरद के दक्षिण में है; और वह गए और लोगों के बीच बस गए।
१७ और यहूदा अपने भाई शिमोन के साथ गया, और उन्होंने ज़ेफथ में बसने वाले कनानवासियों को मार डाला, और उसका अत्यंतता से नाश कर डाला। और उस नगर का नाम होरमा कहलाया जाता था।
१८ यहूदा ने गाज़ा को भी उसकी सीमा के साथ ले लिया, और अस्कलोन उसकी सीमा के साथ, और एक्रोन उसकी सीमा के साथ।
१९ और प्रभु यहूदा के साथ थे; और उसने पर्वत के निवासियों को खदेड़ दिया; परन्तु वह घाटी के निवासियों को नहीं खदेड़ पाया, क्योंकि उनके पास लोहे के रथ थे।
२० और उन्होंने हेब्रोन कालेब को प्रदान कर दिया, जैसा मूसा ने कहा था: और उसने वहाँ से अनक के तीन बेटों को निष्कासित कर दिया।
२१ और बिन्यामिन की सन्तानों ने उन यबूसी-वंशजों को बाहर नहीं खदेड़ा जो यरूशलेम में वास करते थे; बल्कि वह यबूसी-वंशज इस दिन तक बिन्यामिन की सन्तानों के साथ यरूशलेम में बसते हैं।
२२ और युसुफ का घराना, वह भी बेतएल के विरुद्ध ऊपर गए: और प्रभु उनके साथ थे।
२३ और युसुफ के घराने ने बेतएल की छान-बीन करने हेतु भेजे। अब उस नगर का नाम पहले लज़ था।
२४ और उन गुप्तचरों ने एक पुरुष को नगर में बाहर आते देखा, और उन्होंने उस से कहा, हम तुमसे प्रार्थना करते हैं, हमें नगर की प्रविष्टि दिखा दो, और हम तुम्हें करुणा दिखा देंगे।
२५ और जब उसने उन्हें नगर की प्रविष्टि दिखा दी थी, उन्होंने उस नगर को तलवार की धार से पीट डाला; परन्तु उन्होंने उस पुरुष और उसके समस्त परिवार को चले जाने दिया।
२६ और वह पुरुष हित्ती-वंशजों की भूमी में चला गया, और एक नगर का निर्माण किया, और उसका नाम लज़ पुकारा: जो उसका नाम इसी दिन तक है।
२७ न ही मनश्शे ने बेतशान और उसकी नगरीयों के निवासियों को बाहर खदेड़ा, न ही थनक और उसकी नगरीयों के, न ही दोर और उसकी नगरीयों के निवासियों को, न ही इब्लेम और उसकी नगरियों के निवासियों को, न ही मगिद्दो और उसकी नगरीयों के निवासियों को: बल्कि वह कनानवासी उस भूमी में बसे रहे।
२८ और यह होने को आया, जब इस्राएल शक्तिशाली था, कि उन्होंने उन कनानवासियों को कर-भर्ता बना दिया, और उन्हें पूर्णतः से बाहर नहीं खदेड़ा।
२९ न ही एफ्रैम ने उन कनानवासियों को बाहर खदेड़ा जो गज़र में बसते थे; बल्कि वह कनानवासी उन्हीं के बीच गज़र में ही बसते रहे।
३० न ही ज़बूलून ने कित्रों के निवासियों को बाहर खदेड़ा, न ही नलोल के निवासियों को; बल्कि वह कनानवासी उन्हीं के बीच बसते रहे, और कर-भर्ता बन गए।
३१ न ही आशेर ने अको के निवासियों को बाहर खदेड़ा, न ही सिदोन के निवासियों को; न ही अलब के, न ही अकज़िब के, न ही हेलबा के, न ही अफिक के, न ही रहोब के:
३२ परन्तु वह आशेर-वंशज कनानवासियों के बीच बसते रहे, भूमी के निवासी: क्योंकि उन्होंने उन्हें बाहर नहीं खदेड़ा।
३३ न ही नफ़्तली ने बेतशमश के निवासियों को बाहर खदेड़ा, न ही बेतअनत के निवासियों को; बल्कि वह भूमी के निवासियों उन कनानवासियों के बीच बस गया: तथापि बेतशमश के और बेतअनत के निवासी उनके प्रति कर-भर्ता बन गए।
३४ और एमोरवासियों ने दान की सन्तानों को पर्वत में दबा दिया: क्योंकि उन्होंने उन्हें नीचे घाटी में आ जाने क़ीमती नहीं दी:
३५ बल्कि वह एमोरवासी आयलोन में हेरेस पहाड़ में, और शलबिम में बसते रहे: तथापि युसुफ के घराने का हाथ अभिभावी रहा, तो वह उनके कर-भर्ता बन गए।
३६ और एमोरवासियों की सीमा अक्रबिम तक जाने वाली चढ़ाई से लेकर, उस पत्थर से लेकर, और ऊपर की ओर थी।
दूसरा अध्याय।
१ और प्रभु के दूत गिलगल से ऊपर बोकिम आ पहुँचे, और कहा, मैंने तुम्हें मिस्र में से बाहर ऊपर निकलवाया, और तुम्हें उस भूमी में ले आया हूँ जो मैंने तुम्हारे पित्रों को शपथ दी थी; और मैंने कहा, मैं कभी भी तुम्हारे साथ अपने प्रतिज्ञा-पत्र को भंग नहीं करूँगा।
२ और तुम इस भूमी के निवासियों के साथ कोई भी संगठन नहीं बनाओगे; और तुम उनकी बैवेदियों को नीचे तोड़ गिराओगे: परन्तु तुमने मेरी वाणी का आज्ञापालन नहीं किया है: तुम ने यह क्यों किया है?
३ इसी कारण वश मैंने भी कहा, मैं उन्हें तुम्हारे सामने से बाहर नहीं खदेड़ूँगा; बल्कि वह तुम्हारे छाती के पाशर्वों में काँटों समान होंगे, और उनके ईश्वर तुम्हारे लिए एक फंदा होंगे।
४ और यह होने को आया, जब प्रभु के दूत ने यह शब्द इस्राएल की समस्त सन्तानों से बोल दिए थे, कि लोगों ने अपनी वाणी उठाई, और वह रोने लग गए।
५ और उन्होंने उस स्थान का नाम बोकिम पुकारा: और उन्होंने वहीं प्रभु के प्रति बलि चढ़ाई।
६ और जब यहोशुआ ने उन लोगों को चले जाने दिया था, इस्राएल की सन्तानें चल पड़ीं प्रत्येक पुरुष अपनी विरासत की ओर भूमी पर अधिकार करने।
७ और इन लोगों ने प्रभु की सेवा यहोशुआ के समस्त दिनो में की, और उन वृद्ध-गणों के समस्त दिनो में जो यहोशुआ से अधिक जीए, जिन्होंने प्रभु के वह समस्त कार्य देखे थे, जो उन्होंने इस्राएल के लिए किए थे।
८ और प्रभु का सेवक, नून के बेटे यहोशुआ का देहान्त हो गया, एक सौ दस वर्षों का होता हुआ।
९ और उन्होंने उसे उसकी विरासत की सीमा में तिम्नासेरा में दफ़ना दिया, एफ्रैम के पहाड़ में, गाश पहाड़ के उत्तरी पाशर्व पर।
१० और वह समस्त पीढ़ी भी अपने पित्रों के पास एकत्रित हो गई थी: और उनके पश्चात एक दूसरी पीढ़ी उठी, जो प्रभु से परिचित नहीं थी, न ही उन कार्यों से जो उन्होंने इस्राएल के लिए किए थे।
११ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और बअलिम की सेवा की:
१२ और उन्होंने अपने पित्रों के प्रभु ईश्वर को त्याग दिया, जो उन्हें मिस्र की भूमी से बाहर निकल लाए थे, और अन्य ईश्वरों का अनुसरण करने लगे, उन लोगों के इशवारों का जो उनके चारों ओर थे, और स्वयं को उनके प्रति झुकाया, और प्रभु को क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया।
१३ और उन्होंने प्रभु का त्याग कर दिया, और बअल और अश्थ्रोत की सेवा की।
१४ और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध गरमा गया था,और उन्होंने उन्हें लुटेरों के हाथों में प्रदान कर दिया जिन्होंने उन्हें लूट लिया, और उन्होंने उन्हें उनके शत्रुओं के हाथों में बेच डाला चारों ओर, ताकि वह अब और अपने शत्रुओं के सामने खड़े नहीं रह सके।
१५ जहाँ कहिं भी वह बाहर गए, प्रभु का हाथ उनके विरुद्ध बुराई के लिए ही था, जैसा कि प्रभु ने कहा था, और जैसा कि प्रभु ने उन्हें वचन दे दिया था: और वह बहुत ही यातनित थे।
१६ तथापि प्रभु ने न्यायाधीष उठाए, जिन्होंने उन्हें उन लुटेरों के हाथ में से बचाव दिलवाया।
१७ और तब भी उन्होंने अपने न्यायाधीषों का श्रवण नहीं किया, बल्कि वह अन्य ईश्वरों के पीछे वैश्यापना करते चले गए, और स्वयं को उनके प्रति झुका दिया: वह उस पथ पर से शीघ्र ही बाहर मुड़ चले जिस पर उनके पित्र चला करते थे, प्रभु के आदेशों का आज्ञापालन करते हुए; परन्तु इन्होंने वैसा नहीं किया।
१८ और जब प्रभु ने उनके लिए न्यायाधीष खड़े किए, तब प्रभु उस न्यायाधीष के साथ थे, और उस न्यायाधीष के समस्त दिनो उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में से बाहर बचा लिया: क्योंकि प्रभु उनके अत्याचारियों के कारण उनके रोने-कराहने से मन-परिवार्तित होते थे।
१९ और यह होने को आया, जब उस न्यायाधीष की मृत्यु हो जाती थी, वह वापस जाकर, स्वयं को अपने पित्रों से भी बढ़कर भ्रष्ट कर लेते थे, अन्य ईश्वरों के पीछे-पीछे चल कर उनकी सेवा करने हेतु, और उनके प्रति नीचे झुकने; वह रुके नहीं अपनी ही कर्नियों से, न ही अपने हठीले पथ पर से।
२० और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध गरमाया हुआ था, और उन्होंने कहा, चूँकी इन लोगों ने मेरे प्रतिज्ञा-पत्र का जो मैंने इनके पित्रों को आदेश दिया था उल्लंघन कर दिया है, और मेरी वाणी का श्रवण नहीं किया है;
२१ मैं भी अब से लेकर इनके सामने से उन राष्ट्रों में से किसी को भी बाहर नहीं खदेड़ूँगा जिन्हें यहोशुआ ने छोड़ रखा था जब उसकी मृत्यु हुई थी:
२२ ताकि इनके द्वारा मैं इस्राएल को परख लूँ, कि यदि यह प्रभु का पथ रखेंगे उस में चलने के लिए, जैसे इनके पित्रों ने उसे रखा था, या नहीं।
२३ इसलिए प्रभु ने उन राष्ट्रों को छोड़े रखा उन्हें बिना शीघ्रता से खदेड़ते हुए; न ही उन्होंने उन्हें यहोशुआ के हाथ में प्रदान किया।
तीसरा अध्याय।
१ अब यही हैं वह राष्ट्र जिन्हें प्रभु ने रख छोड़ा उनके द्वारा इस्राएल को परखने के लिए, उतनों को ही जो कनान की लड़ाईयों से परिचित नहीं थे;
२ ताकि बस केवल इस्राएल की सन्तानों की पीढ़ियाँ जान जाएँ, उन्हें युद्ध सिखाने हेतु, उन्हें जो उसके विषय में पहले से कुछ नहीं जानते थे;
३ पलिश्तिमवासियों के पाँच प्रमुख, और सभी कनानवासी, और सिदोन-वासी, और हिव्वी-वंशज जो लेबनोन पहाड़ में बसते थे, बअलहरमोन से हमात की प्रविष्टि तक।
४ और उनके द्वारा उन्हें इस्राएल को परखना था, यह जानने हेतु कि यदि वह प्रभु के आदेशों का श्रवण करेंगे, जो उन्होंने मूसा के हाथ उनके पित्रों को आदेश दिए थे।
५ और इस्राएल की सन्तानें कनानवासियों, हित्ती-वंशजों, और एमोरवासियों, और पेरिज़-वंशजों, और हिव्वी-वंशजों, और यबूसी-वंशजों के बीच बस गए:
६ और उन्होंने उनकी बेटियाँ अपनी पत्नियाँ बनने के लिए ले लीं, और अपनी बेटियाँ उनके बेटों को दे दीं, और उनके ईश्वरों की सेवा की।
७ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु की दृष्टि में बुराई की, और प्रभु अपने ईश्वर को भूल गए, और बअलीम और उपवनों की सेवा की।
८ इसलिए प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध गरमा गया था, और उन्होंने उन्हें मेसोपोतामिया के राजा कुशनरशथिम के हाथ बेच डाला: और इस्राएल की सन्तानों ने आठ वर्ष कुशनरशथिम की सेवा की।
९ और जब इस्राएल की सन्तानें प्रभु के प्रति चीखीं, प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों के लिए एक बचनेवाले को उठ खड़ा कर दिया, जिस ने उनका बचाव कर दिया, कालेब के छोटे भाई कनज़ का बेटा ओतनिएल।
१० और प्रभु का भावात्मा उस पर आ पड़ा, और उसने इस्राएल का न्याय किया, और युद्ध करने बाहर गया: और प्रभु ने
मेसोपोतामिया के राजा कुशनरशथिम को उसने हाथ में प्रदान कर दिया; और उसका हाथ कुशनरशथिम के विरुद्ध प्रबल ठहरा।
११ और भूमी ने चालीस वर्ष विश्राम किया। और कनज़ का बेटा ओतनिएल मर गया।
१२ और इस्राएल की सन्तानें ने पुनः प्रभु की दृष्टि में बुराई की: और प्रभु ने इस्राएल के विरुद्ध मोआब के राजा एग्लोन को सशक्त कर दिया, क्योंकि उन्होंने प्रभु की दृष्टि में बुराई की थी।
१३ और उसने अपने पास अम्मोन की और अमालेक की सन्तानों को एकत्रित कर लिया, और जाकर इस्राएल को पीट डाला, और खजूर के पेड़ों के नगर पर अधिकार कर लिया।
१४ तो इस्राएल की सन्तानें ने मोआब के राजा एग्लोन की सेवा अठ्ठारह वर्ष की।
१५ परन्तु जब इस्राएल की सन्तानें प्रभु के प्रति चीखीं, प्रभु ने उनके लिए एक बचनेवाले को उठ खड़ा कर दिया, गेरा का बेटा एहद एक बिन्यामिन-वंशज, एक बयंहत्था: और उसके द्वारा इस्राएल की सन्तानें ने मोआब के राजा एग्लोन को एक भेंट भेजी।
१६ परन्तु एहद ने स्वयं के लिए एक दुधारी कटार बनाई, एक हाथ लम्बी; और उसने उसे अपने वस्त्र के नीचे अपनी दाएँ जांघ पर बाँध ली।
१७ और वह मोआब के राजा एग्लोन के पास वह भेंट ले आया: और एग्लोन एक बहुत ही मोटा आदमी था।
१८ और जब उसने उस भेंट को प्रदान करने का अन्त कर दिया था, उसने उन लोगों को भेज दिया जो उस भेंट को उठाए थे।
१९ परन्तु वह स्वयं पुनः मुड़ गया गिलगल के साथ उन खदानो से, और कहा, हे राजा, मेरे पास आपके लिए एक गुप्त संदेश है: जिसने कहा, शान्त हो जाओ। और वह सभी जो उसके साथ खड़े थे उसके पास से बाहर निकल चले गए।
२० और एहद उसके पास आ पहुँचा; और वह एक ऊपर वाले हवादार कक्ष में बैठा हुआ था, जो उसके पास स्वयं अकेले के लिए था। और एहद ने कहा। मेरे पास आपके लिए ईश्वर से एक संदेश है। और वह अपनी कुर्सी में से बाहर उठा।
२१ और एहद ने अपना बायाँ हाथ आगे बढ़ाया, और उस कटार को अपनी दाहिनी जांघ पर से लिया, और उसे उसके पेट में घोंप दिया:
२२ और वह हत्था भी अंदर घुस गया उसकी धार के पीछे; और वह चर्बी धार पर चिपट गई, ताकि वह उस कटार को उसके पेट में से बाहर नहीं खींच पाया; और मल बाहर निकल आया।
२३ तब एहद स्तंभों की पंक्ति को पार कर आगे गया, और उसने उस ऊपरी कक्ष के द्वारों को उस पर बंद कर दिए, और उन पर ताला लगा दिया।
२४ जब वह बाहर चला जा चुका था, उसके नौकर आ पहुँचे; और जब उन्होंने देखा कि, देखो तो, उस ऊपरी कक्ष के द्वार तो तले से बंद थे, तो उन्होंने कहा, अवश्य ही वह अपने ऊपर वाले हवादार कक्ष में अपने पैरों को ढक रहा होगा।
२५ और वह प्रतीक्षा करते-करते लज्जित हो उठे: और देखो तो, उसने उस ऊपरी कक्ष के द्वारों को नहीं खोला था; इसलिए उन्होंने एक चाबी ली, और उन्हें खोल दिया: और देखो तो, उनका मालिक धरती पर नीचे मरा हुआ गिरा पड़ा था।
२६ और एहद बच निकला जैसे वह प्रतीक्षा कर रहे थे, और वह खदानों के पार चला गया, और सेईरथ तक भाग खड़ा हुआ।
२७ और यह होने को आया, जब वह आ पहुँचा था, कि उसने एफ्रैम के पर्वत में एक चिंघाड़ा बजा दिया, और इस्राएल की सन्तानें उसके साथ नीचे चलीं गईं उस पहाड़ से, और वह उनके आगे-आगे।
२८ और उसने उनसे कहा, मेरे पीछे-पीछे आ जाओ: क्योंकि प्रभु ने तुम्हारे शत्रुओं उन मोआब-वंशजों को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है। और वह उसके पीछे नीचे चले गए, और मोआब की ओर के यर्दन के पारण-स्थानों को ले लिया, और किसी भी आदमी को पार जाने की अनुमती नहीं दी।
२९ और उन्होंने उस समय मोआब के लगभग दस हज़ार आदमियों को मार डाला, सभी जोशीले, और सभी आदमी पराक्रमी; और एक भी आदमी बच नहीं निकला।
३० तो मोआब का उस दिन इस्राएल के हाथ तले दमन हो गया था। और भूमी ने अस्सी वर्ष विश्राम किया।
३१ और उसके पश्चात अनथ का बेटा शमगर था, जिस ने पलिश्तिमों के छह सो आदमियों को बैल के एक अंकुश से मार डाला: और उसने भी इस्राएल का बचाव किया।
चौथा अध्याय।
१ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु की दृष्टि में दोबारा बुराई की, जब एहद मर चुका था।
२ और प्रभु ने उन्हें हज़ोर में राज्य करने वाले कनान के राजा यबिन के हाथ में बेच डाला; जिसकी सेना का कप्तान सिसरा था, जो अन्यप्रजातियों के हरोशेत में बसता था।
३ और इस्राएल की सन्तानें प्रभु के प्रति चीखी पड़ीं: क्योंकि उसके पास लोहे के नौ सौ रथ थे; और बीस वर्ष उसने इस्राएल की सन्तानों का बहुत ही अत्याचार किया।
४ और दबोरा, एक पैग़म्बरिका, लपिदोत की पत्नी इस्राएल का उस समय न्याय करती थी।
५ और वह दबोरा के खजूर के पेड़ के तले बसती थी रमा और बेतएल के बीच एफ्रैम पहाड़ में: और इस्राएल की सन्तानें उसके पास ऊपर न्याय-निर्धारण हेतु आतीं थीं।
६ और उसने कदेशनफ़्तालि में से बाहर अबिनोम के बेटे बरक को भिजवा कर बुलवा लिया, और उसने उस से कहा, क्या इस्राएल के प्रभु ईश्वर ने आदेश नहीं दिया है क्या, कहते हुए, जाओ और तबोर पहाड़ की ओर खिंचे चले जाओ, और अपने साथ नफ़्तली की सन्तानों में से और ज़बूलून की सन्तानों में से अपने साथ दस हज़ार पुरुषों को ले लो?
७ और मैं किशोन नदी पर तुम्हारे निकट यबिन की सेना के कप्तान सिसरा को उसके रथों और उसके जनौघ के साथ खींच ले आऊँगा; और मैं उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कि दूँग।
८ और बरक ने उस से कहा, यदि तुम मेरे साथ जाओगी, तो मैं जाऊँगा: परन्तु यदि तुम मेरे साथ नहीं जाओगी, तो मैं नहीं जाऊँगा।
९ और उसने कहा, मैं अवश्य ही तुम्हारे साथ जाऊँगी: तथापि वह यात्रा जो तुम लोगे तुम्हारे आदर के लिए नहीं होगी; क्योंकि प्रभु सिसरा को एक स्त्री के हाथ में बेच देंगे। और दबोरा उठी, और बरक के साथ कदेश चली गई।
१० और बरक ने ज़बूलून और नफ़्तली को कदेश बुला लिया; और वह उसके पैरों पर दस हज़ार पुरुषों के साथ ऊपर चला गया: और दबोरा उसके साथ ऊपर चली गई।
११ अब हेबर उस किनी ने, जो मूसा के ससुर होबब की सन्तानों में से था, स्वयं को किनियों से पृथक कर लिया था, और अपने तम्बू को ज़अनैम के मैदान तक, जो कि कदेश है, गाढ़ दिया था।
१२ और उन्होंने सिसरा को बताया कि अबिनोम का बेटा बरक तबोर पहाड़ तक ऊपर चला गया था।
१३ और सिसरा ने अपने समस्त रथों को, यहाँ तक कि नौ सो लोहे के रथों को ही, और उन सभी जनो को जो उसके साथ थे, अन्यप्रजातियों के हरोशेत से लेकर किशोन नदी तक एक साथ एकत्रित कर लिया।
१४ और दबोरा ने बरक से कहा, उठो; क्योंकि यही वह दिवस है जिस में प्रभु ने सिसरा को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है: क्या प्रभु तुम्हारे आगे ही नहीं निकल चले हैं क्या? तो बरक तबोर पहाड़ से नीचे चला गया, और दस हज़ार पुरुष उसके पीछे-पीछे।
१५ और प्रभु ने बरक के सम्मुख, तलवार की धार से सिसरा, और उसके सभी रथों को, और उसकी समस्त सेना को अस्त-व्यस्त कर डाला; तो सिसरा अपने रथ पर से नीचे उतर आया, और अपने पैरों पर भाग खड़ा हुआ।
१६ और बरक ने अन्यप्रजातियों के हरोशेत तक रथों और सेना का पीछा किया: और सिसरा की समस्त सेना तलवार की धार पर गिर पड़ी; और कोई भी आदमी बचा नहीं रहा।
१७ परन्तु सिसरा अपने पैरों पर परे भागता हुआ हेबर कीनी की पत्नी यैल के तम्बू तक आ पहुँचा: क्योंकि हज़ोर के राजा यबिन के बीच और हेबर कीनी के घराने के बीच शान्ति थी।
१८ और यैल सिसरा से मिलने बाहर निकली और उस से कहा, भीतर आ जाएँ मेरे प्रभु, मेरे पास भीतर आ जाएँ; डरें न। और जब वह उसके पास तम्बू में भीतर मुड़ आया था, उसने उसे एक ओढ़ने से ढक दिया।
१९ और उसने उस से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मुझे थोड़ा सा पानी पीने के लिए दे दो; क्योंकि मैं प्यासा हूँ। और उसने दूध की एक बोतल खोली, और उसे पेय दे दिया, और उसे उढा दिया।
२० पुनः उसने उस से कहा, तम्बू के द्वार में खड़ी हो जाओ, और यह होगा कि जब कोई भी आदमी आकर तुम से पूछता है, और कहता है, क्या कोई आदमी हैं यहाँ? तो तुम कहोगी, नहीं।
२१ तब हेबर की पत्नी यैल ने तम्बू का एक खूँटा लिया, और अपने हाथ में एक हथौड़ा, और उसके पास चुपके से गई, और उस खूँटे को उसकी कनपटियों में ठोक दिया, और उसे धरती में धँसा डाला: क्योंकि वह गहरी निद्रा में और थका हुआ था। तो वह मर गया।
२२ और देखो तो, जैसे बरक सिसरा का पीछा कर रहा था, यैल उस से मिलने बाहर निकली और उस से कहा, आओ और मैं तुम्हें वह आदमी दिखती हूँ जिसका तुम पीछा कर रहे हो। और जब वह उसके तम्बू में भीतर आया, देखो तो, सिसरा मरा पड़ा था, और वह खूँटा उसकी कनपटियों में था।
२३ तो ईश्वर ने उस दिन कनान के राजा यबिन का इस्राएल की सन्तानों के सम्मुख दमन कर दिया।
२४ और इस्राएल की सन्तानों का हाथ उन्नत हुआ, और कनान के राजा यबिन के विरुद्ध प्रबल रहा, जब तक उन्होंने कनान के राजा यबिन को नष्ट नहीं कर दिया था।
पाँचवाँ अध्याय।
१ तब दबोरा और अबिनोम के बेटे बरक ने उस दिन गाया, कहते हुए,
२ तुम प्रभु की प्रशन्सा करो इस्राएल का प्रतिषोध लेने हेतु, जब लोगों ने स्वयं का स्वेछा से अर्पण किया।
३ सुनो हे राजाओं; कान लगा लो, हे तुम अध्यक्षों; मैं, हाँ मैं ही प्रभु के प्रति गाऊँगी; मैं इस्राएल के प्रभु ईश्वर के प्रति प्रशन्सा गाऊँगी।
४ प्रभु, जब आप सेईर से बाहर निकल चले, जब आपने एदोम के खेत से बाहर कदम-ताल की, पृथ्वी काँप उठी, और स्वर्ग गिर पड़े, उन मेघों ने भी पानी गिराया।
५ प्रभु के सम्मुख वह पर्वत भी पिघल गए, वही सीनय भी इस्राएल के प्रभु ईश्वर के समक्ष।
६ अनथ के बेटे शमगर के दिनो में, यैल के दिनो में, वह मुख्य-पथ रिक्त थे, और यात्री पगडंडियों पर से चले।
७ गाँवों के निवासी छोड़ चले, वह इस्राएल में छोड़ चले, जब तक कि मैं दबोरा उठी, कि मैं एक इस्राएल में माँ उठ गई।
८ उन्होंने नए ईश्वरों को चुना; तब दरवाज़ों में संग्राम छिड़ा: क्या इस्राएल में चालीस हज़ारों के बीच एक ढाल या भाला दिखा?
९ मेरा हृदय इस्राएल के राज्यपालों की ओर है, जिन्होंने लोगों के बीच स्वयं का स्वेछा से अर्पण किया। प्रभु को आशीष दे दो।
१० बोलो भई, तुम जो श्वेत गधियों पर सवारी करते हो, तुम जो न्याय-निर्धारण करने बैठते हो, और पथ के साथ चलते जाते हो।
११ वह जो पनघटों में धनुर्धारियों के शोर से बच निकले हैं, वहीं वह प्रभु के नेक कर्मों का वर्णन करेंगे, उन्हीं नेक कर्मों का इस्राएल में उनके गाँवों के निवासियों के प्रति: तब प्रभु के लोग दरवाज़ों तक नीचे जाएँगे।
१२ जागो, जाग जाओ दबोरा: जागो, जाग जाओ, एक गीत का अर्णन करो: उठो बरक, और अपनी बाँधत्वता को बाँधत्व में ले चलो, तुम अबिनोम के बेटे।
१३ तब उन्होंने उसे जो बचा रह गया था लोगों के बीच कुलीनों पर अधिराज्य रखने वाला बना दिया: प्रभु ने मुझे बलशलियों पर अधिराज्य रखने वाला बना दिया।
१४ एफ्रैम में से थी उनकी एक जड़ अमालेक के विरुद्ध; तुम्हारे पश्चात बिन्यामिन, तुम्हारे लोगों के बीच; मेकर में से बाहर नीचे राज्यपाल आए, और ज़बूलून में से बाहर वह जो लेखक की कलम पकड़ते हैं।
१५ और इस्सकार के अध्यक्ष दबोरा के साथ थे; इस्सकार ही, और बरक भी: वह घाटी में पैदल भेजा गया था। रूबेन के विभाजनों हेतु हृदय के विशाल विचार थे।
१६ तुम भेड़-शालाओं के बीच क्यों ठहरे रहे, झुण्डों के मिमियानों को सुनने के लिए? रूबेन के विभाजनों हेतु हृदय के बड़े ही टटोलने थे।
१७ गिलद तो यर्दन पार ठहरा रहा: और दान क्यों जलयानों में ठहरा रहा? आशेर समुद्र तट पर लगातार रहा, और अपनी खाड़ियों में ठहरा रहा।
१८ ज़बूलून और नफ़्तली थे एक जन जिन्होंने अपने जीवनों को खेत के उच्च स्थानों में मृत्यु तक भी संकट में डाल दिया।
१९ वह राजा आए और लड़ लिए, तब कनान के राजा थनक में मगिद्दो के पानियों के साथ लड़े; उन्होंने पैसे का कोई लाभ नहीं लिया।
२० वह स्वर्ग से लड़े; अपने मार्गों में सितारों ने सिसरा के विरुद्ध लड़ाई की।
२१ किशोन नदी उन्हें बहा ले गई, वही प्राचीन नदी, किशोन नदी। हे मेरी आत्मा, तुम ने बल को रौंद डाला है।
२२ तब उन घोड़ों के खुर उनकी सरपट-दौड़ से टूट गए थे, उनके बलशालियों की सरपट-दौड़ से ही।
२३ तुम मेरोज़ को श्राप दे दो, प्रभु के दूत ने कहा, उसके निवासियों को कड़ा अभिशाप दे दो; क्योंकि वह प्रभु की सहायता को नहीं आए, प्रभु की ही सहायता को बलशालियों के विरुद्ध।
२४ उस कीनी हेबर की पत्नी यैल स्त्रियों से बढ़कर धन्य होगी, तम्बू में स्त्रियों से बढ़कर वह धन्य होगी।
२५ उसने तो पानी माँगा, और उसने उसे दूध दिया; वह मक्खन बाहर ले आई एक कुलीन पात्र में।
२६ उसने खूँटे पर रखा अपना हाथ, और कामगार के हथौड़े पर अपना दायाँ हाथ; और ठोक डाला उसने सिसेरा को हथौड़े से, उसने उसका सर ही ठोक डाला था, जब उसने भेद कर फोड़ डाला था उसकी कनपटियों के आर पार।
२७ उसके पैरों पर वह झुका, वह गिरा, वह नीचे लेट गया: उसके पैरों पर वह झुका, वह गिर गया: जहाँ वह झुका, वहाँ वह नीचे मर कर गिर पड़ा।
२८ सिसरा की माँ ने एक खिड़की से बाहर झाँका, और वह जाली में से झल्लाई, उसका रथ आने में इतना विलम्ब क्यों कर रहा है? उसके रथों के पहिए देर क्यों कर रहे हैं?
२९ उसकी विद्वान महिलाओं ने उसे उत्तर दिया, हाँ भई, उसी ने स्वयं को उत्तर लौटाया,
३१ वेग नहीं किया क्या उन्होंने? लूट-पाट को विभाजित नहीं किया क्या उन्होंने; हर आदमी को एक या दो युवतियाँ; सिसरा को विभिन्न रंगों की एक लूट, सुई से कढ़ी हुई कारीगरी की विभिन्न रंगों की एक लूट, सुई से कढ़ी हुई कारीगरी की विभिन्न रंगों की दोनो तरफ, उनकी गर्दनों के योग्य जो लूट को लेते हैं?
३२ ऐसे ही हे प्रभु, अपने समस्त शत्रुओं को नष्ट हो जाने दें: परन्तु उन्हें जो उनसे प्रेम करते हैं सूर्य समान हों जब वह अपनी शक्ती में आगे बढ़ चलता है। और भूमी ने चालीस वर्ष विश्राम किया।
छटा अध्याय।
१ और इस्राएल की सन्तानों ने पुनः प्रभु की दृष्टि में बुराई की: और प्रभु ने उन्हें मिद्यान के हाथ में सात वर्ष प्रदान कर दिया।
२ और इस्राएल के विरुद्ध मिद्यान का हाथ प्रबल रहा: और मिद्यान-वंशजों के कारण इस्राएल की सन्तानों ने अपने लिए पर्वतों में जो कंद्राएँ हैं, और गुफाएँ, और गढ़ बना लिए।
३ और ऐसा ही यह था, जब इस्राएल ने बुआई कर दी थी, कि मिद्यान-वंशज ऊपर आ गए, और अमालेक-वंशज, और पूर्व की सन्तानें, वह भी उनके विरुद्ध ऊपर आ पहुँचे;
४ और उन्होंने उनके विरुद्ध पड़ाव डाल कर, धरती की उपज को नष्ट कर डाला, जब तक तुम गाज़ा तक पहूँच जाते हो, और उन्होंने इस्राएल के लिए कोई भी जीविका नहीं छोड़ी, न ही भेड़, न ही साँड। न ही गधा।
५ क्योंकि वह ऊपर अपने मवेशी और अपने तम्बुओं के साथ आ गए, और झिंगुरों समान जनौघ जैसे आ गए; क्योंकि दोनो वह और उनके ऊँट असंख्य थे: और उन्होंने भूमी में प्रवेश कर उसे नष्ट कर डाला।
६ और मिद्यान-वंशजों के कारण इस्राएल बहुत ही दरिद्र हो गया था; और इस्राएल की सन्तानें प्रभु की ओर चीखीं।
७ और यह होने को आया, जब इस्राएल की सन्तानें मिद्यान-वंशजों के कारण प्रभु की ओर चीखीं,
८ तो प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों को एक पैगमबर भेजा, जिसने उनसे कहा, इस प्रकार इस्राएल के प्रभु ईश्वर कहते हैं, मैं तुम्हें मिस्र में से ऊपर लाया, और तुम्हें बंध्वा-बेगारी के घराने में से बाहर निकाल लाया;
९ और मैंने तुम्हारा मिस्रवासियों के हाथ में से बाहर उद्धार किया, और उन सभी के हाथों से बाहर जिन्होंने तुम्हारा अत्याचार किया, और उन्हें तुम्हारे सम्मुख बाहर खदेड़ डाला, और तुम्हें उनकी भूमी प्रदान कर दी;
१० और मैंने तुम से कहा, मैं प्रभु तुम्हारा ईश्वर हूँ; एमोरवासियों के ईश्वरों का भय मत मानो, जिनकी भूमी में तुम बसते हो: परन्तु तुमने मेरी वाणी का आज्ञापालन नहीं किया है।
११ और प्रभु का एक दूत आया, और ओफ्रा में एक बांज कर पेड़ तले बैठ गया, जो उस अबिएज़री योअश का था: और उसका बेटा गिदोन अंगूर-रस के कोल्हू के साथ गेहूँ का दाँवना कर रहा था, उसे मिद्यान-वंशजों से छुपाने के लिए।
१२ और प्रभु के दूत उसे प्रकट हुए, और उस से कहा, प्रभु तुम्हारे साथ है, तुम बलशाली पराक्रमी।
१३ और गिदोन ने उस से कहा, हे मेरे प्रभु, यदि प्रभु हमारे साथ हैं, तो फिर यह सब कुछ हम पर क्यों आ पड़ा है? और कहाँ हैं उनके सभी चमत्कार जिनके विषय में हमारे पित्रों ने हमें बताया था, कहते हुए, क्या प्रभु हमें मिस्र में से ऊपर नहीं लाए थे क्या? परन्तु अब प्रभु ने हमें त्याग दिया है, और हमें मिद्यान-वंशजों के हाथों में प्रदान कर दिया है।
१४ और प्रभु ने उस पर दृष्टि टिकाई, और कहा, अपने इस बल में चले जाओ, और तुम इस्राएल को मिद्यान-वंशजों के हाथ में से बचा लोगे: क्या मैंने ही तुम्हें भेजा नहीं है क्या?
१५ और उसने उनसे कहा, हे मेरे प्रभु, मैं कैसे इस्राएल को बचाऊँ? देखें, मेरा परिवार दरिद्र है मनश्शे में, और मैं अपने पिता के घराने में सबसे निम्न हूँ।
१६ और प्रभु ने उस से कहा, अवश्य ही मैं तुम्हारे साथ होऊँगा, और तुम उन मिद्यान-वंशजों को एक पुरुष समान परास्त कर डालोगे।
१७ और उसने उनसे कहा, यदि अब मैंने आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है, तो मुझे एक संकेत दिखा दें कि आप ही मुझ से बात-चीत कर रहे हैं।
१८ चले न जाएँ यहाँ से, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, जब तक कि मैं आपके पास न आ जाऊँ और अपने उपहार को ले आऊँ और उसे आपके समक्ष स्थित कर दूँ। और उसने कहा, मैं रुक रहूँगा जब तक तुम पुनः वापस नहीं आ जाते हो।
१९ और गिदोन भीतर चला गया, और उसने एक हलवान और एक एफाह आटे के बेख़मीरी पराँठे तैयार किए: उस माँस को उसने एक टोकरे में डाला, और उस तरी को उसने एक कलश में डाल दिया, और वह उसे उस बांज के पेड़ तले ले आया, और उसे प्रस्तुत कर दिया।
२० और ईश्वर के दूत ने उस से कहा, उस माँस और उन बख़मीरी पराँठों को ले लो, और उन्हें इस पत्थर पर रख दो, और उस तरी को उँडेल दो। और उसने ऐसा कर दिया।
२१ तब प्रभु के दूत ने उनके हाथ में उस लट्ठ के छोर को आगे बढ़ा कर उस माँस और उन बख़मीरी पराँठों को छू दिया; और उस पत्थर में से बाहर अग्नी जल उठी, और उसने उस माँस और उन बख़मीरी पराँठों का भक्षण कर दिया। तब प्रभु के वह दूत उसकी दृष्टि से परस्थान कर गए।
२२ और जब गिदोन ने आभास किया कि वह तो प्रभु के एक दूत थे, गिदोन ने कहा, हाय! हे प्रभु ईश्वर! क्योंकि मैंने प्रभु के एक दूत को आमने-सामने देख लिया है।
२३ और प्रभु ने उस से कहा, तुम्हारे प्रति शान्ति हो; डरो मत: तुम मरोगे नहीं।
२४ तब गिदोन ने वहीं प्रभु के लिए एक बलिवेदी का निर्माण किया, और उसे यहोवाशलोम पुकारा: इस दिन तक भी वह अबिएज़रियों के ओफ्रा में ही है।
२५ और यह होने को आया कि उसी रात ही प्रभु ने उस से कहा, अपने पिता का युवा साँड ले लो, सात वर्ष की आयु वाला वह दूसरा साँड, और तुम्हारे पिता की बअल की बलिवेदी को तोड़ गिराओ, और उस उपवन को जो उसके साथ है नीचे काट डालो:
२६ और इस पत्थर की चोटी पर प्रभु अपने ईश्वर के प्रति एक बलिवेदी का निर्माण कर दो, उस नियुक्त स्थान में ही, और उस दूसरे साँड को लेकर एक जला-बलिदान चढ़ा देना उस उपवन की लकड़ी सी जो तुम नीचे काट डालोगे।
२७ तब गिदोन ने अपने नौकरों में से दस आदमी लिए, और कर दिया जैसा प्रभु ने उस से कहा था: और तो वैसा ही था, चूँकी उसे अपने पिता के घराने और उस नगर के लोगों का भय था, कि वह इसे दिन-दिन में नहीं कर पाया था, बल्कि उसने इसे रात-रात में कर दिया।
२८ और जब नगर के लोग सुबह-सुबह उठे, देखो तो, बअल की बलिवेदी नीचे टूटी पड़ी थी, और उसके साथ वह उपवन नीचे काट दिया गया था, और वह दूसरा साँड उस बलिवेदी पर चढ़ाया हुआ था जो बना ड़ी गई ठी।
२९ और उन्होंने एक दूसरे से कहा, किसने किया है यह काम? और जब उन्होंने जाँच-पड़ताल और पूछ-ताछ कर ली थी, उन्होंने कहा, योअश के बेटे गिदोन ने यह काम किया है।
३० तब उस नगर के लोगों ने योअश से कहा, अपने बेटे को बाहर ले आओ, ताकि वह मर जाए: क्योंकि उसने बअल की बलिवेदी को नीचे तोड़ डाला है, और क्योंकि उसने उसके साथ उस उपवन को नीचे काट डाला है।
३१ और योअश ने उन सभी से कहा जो उसके विरुद्ध खड़े थे, क्या तुम बअल के लिए निवेदन करोगे? क्या तुम उसे बचाओगे? अभी सुबह होते हुए ही वह जो उसके लिए निवेदन करेगा मृत्यु के घाट उतार दिया जाए: यदि वह कोई ईश्वर हो, तो उसे अपने स्वयं के लिए निवेदन कर लेने दो, क्योंकि किसी ने उसकी बलिवेदी को नीचे तोड़ डाला है।
३२ इसलिए उस दिन उसने उसे यरुबबअल पुकारा, कहता हुआ, बअल को अपने लिए निवेदन कर लेने दो, क्योंकि उसने उसकी बलिवेदी को नीचे तोड़ डाला था।
३३ तब सभी मिद्यान-वंशज, और अमालेक-वंशज, और पूर्व की सन्तानें एक साथ एकत्रित होकर पार चलीं गईं, और यज़रील में पड़ाव डाल दिया।
३४ परन्तु प्रभु का भावात्मा गिदोन पर आ पड़ा, और उसने एक चिंघाड़ा बजा दिया; और अबिएज़र उसके पीछे एकत्रित हो गया था।
३५ और उसने मनश्शे के समस्त सर्वत्र में संदेशवाहक भेजे; जो उसके पीछे भी एकत्रित हो गया था: और उसने संदेशवाहकों को आशेर के पास, और ज़बूलून के पास, और नफ़्तली के पास भेजा; और वह उनसे मिलने आ पहुँचे।
३६ और गिदोन ने ईश्वर से कहा, यदि आप इस्राएल को मेरे हाथ से बचाएँगे, जैसा आपने कह दिया है,
३७ देखें, मैं एक ऊँन का गट्ठा खलिहान की भूमी पर रखूँगा; और यदि ओस केवल उस ऊँन के गट्ठे पर ही पड़े, और आस-पास की सारी भूमी सूखी रहे, तब मैं जान जाऊँगा कि आप इस्राएल को मेरे हाथ से बचाएँगे, जैसा आपने कह दिया है।
३८ और ऐसा ही हुआ: क्योंकि वह अगले दिन सुबह-सुबह उठा, और उस गट्ठे को एक साथ दबा कर उस गट्ठे में से ओस को बाहर निचोड़ दिया, पानी से भरा एक पूरा कटोरा!
३९ और गिदोन ने ईश्वर से कहा, मेरे प्रति अपने क्रोध को मत गरमा जाने दें, और बस केवल इस एक और बार मैं बोलूँगा: मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मुझे परख लेने दें बस इस एक बार गट्ठे से; अब केवल उस गट्ठे पर ही सूखा रहने दें, और सारी धरती पर ओस पड़ जाने दें।
४० और ईश्वर ने उस रात ऐसा ही कर दिया: क्योंकि बस केवल वह गट्ठा ही सूखा था, और सारी धरती पर ओस पड़ी थी!
सातवाँ अध्याय।
१ तब यरुबबअल, जो कि गिदोन है, और उसके साथ वह जो समस्त जन थे, सुबह-सुबह उठे, और हरोद के कुएँ के साथ पड़ाव डाला: ताकि मिद्यान-वंशजों की सेना उनके उत्तर की ओर थी, घाटी में मोरे के पहाड़ के साथ ही।
२ और प्रभु ने गिदोन से कहा, तुम्हारे साथ जो लोग हैं बहुत सारे हैं मेरे लिए उनके हाथों में मिद्यान-वंशजों को प्रदान कर देने हेतु, कहिं इस्राएल स्वयं की मेरे विरुद्ध डींगे मारे, कहता हुआ, मेरे अपने ही हाथ ने मुझे बचा लिया है।
३ भई अब आ जाओ, लोगों के कानों में घोषणा कर दो, कहते हुए, जो कोई भी डर रहा है और भयभीत है, उसे शीघ्र ही गिलद पहाड़ से वापस लौट कर परस्थान कर लेने दो। और लोगों में से बाईस हज़ार वापस लौट चले; और दस हज़ार बचे रह गए।
४ और प्रभु ने गिदोन से कहा, लोग तो अभी भी बहुत सारे हैं; इन्हें नी पानी के पास ले आओ, और मैं इन्हें तुम्हारे लिए वहाँ परखूँगा: और यह होगा, कि जिसके विषय में में तुमसे कहूँगा, यही तुम्हारे साथ जाएगा, वही तुम्हारे साथ चला जाएगा; और जिस किसी के भी विषय में में तुमसे कहता हूँ, यही तुम्हारे साथ नहीं जाएगा, वही तुम्हारे साथ नहीं जाएगा।
५ तो वह उन जनो को नीचे पानी तक ले आया: और प्रभु ने गिदोन से कहा, हर एक जो पानी को अपनी जीभ से चपड़-चपड़ कर एक कुत्ते समान चाटेगा, उसे तुम पृथक कर देना; इसी प्रकार हर एक जो पीने के लिए अपने घुटनो पर नीचे झुकता है।
६ और उनकी संख्या जिन्होंने अपना हाथ अपने मूँह पर रख कर चपड़-चपड़ चाटा था, तीन सौ आदमी थे: परन्तु सभी शेष लोग पानी पीने के लिए नीचे अपने घुटनों पर झुके थे।
७ और प्रभु ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ आदमियों द्वारा जिन्होंने चपड़-चपड़ कर चाटा, मैं तुम्हें बचाऊँगा, और मिद्यान-वंशजों को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा: और उन दूसरे लोगों को हर एक को अपने स्थान चले जाने दो।
८ तो उन लोगों ने अपने हाथ में खाद्य पदार्थ-आदि और अपने चिंघाड़े अपने हाथ में लिए: और उसने समस्त शेष इस्राएल के प्रत्येक आदमी को उसके तम्बू में भेज दिया, और उन तीन सौ को रखे रखा: और मिद्यान की सेना उसके नीचे घाटी में थी।
९ और यह होने को आया उसी रात, कि प्रभु ने उस से कहा, उठो, नीचे उस छावनी के पास चले जाओ; क्योंकि मैंने उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया है।
१० परन्तु यदि तुम नीचे जाने से डरते हो, तो फूरा अपने नौकर के साथ तुम उस छावनी के पास नीचे चले जाओ:
११ और तुम जो वह कह रहे हैं सुन लोगे; और उसके पश्चात तुम्हारे हाथ उस सेना के पास नीचे जाने हेतु सशक्त हो जाएँगे। तब वह फूरा अपने नौकर के साथ नीचे उस छावनी के सशस्त्रित आदमियों के बाहरी छोर तक चला गया।
१२ और वह मिद्यान-वंशज, और अमालेक-वंशज, और पूर्व की समस्त सन्तानें घाटी में झींगुरों के जनौघ समान पड़े हुए थे; और उनके ऊँट असंख्य थे, समुद्र तट के साथ सटे रेत के जनौघ समान।
१३ और जब गिदोन आ पहुँचा था, देखो, एक आदमी अपने साथी को एक सपना सुना रहा था, कहता हुआ, देखो भई, मैंने एक स्वप्न का सपना लिया, और लो, जौ का एक पराँठा लुढ़कता हुआ मिद्यान की छावनी में आ गया, और एक तम्बू में घुस गया, और उस पर वार कर उसे गिरा डाला, और उसे उलट-पलट कर डाला कि वह तम्बू गिरा पड़ा ही रहा।
१४ और उसके साथी ने उसे उत्तर दिया और कहा, यह तो और कुछ नहीं बल्कि इस्राएल के बन्दे योअश के बेटे गिदोन की तलवार है: क्योंकि उसके हाथ में ईश्वर ने मिद्यान और उसकी समस्त सेना प्रदान कर दी है।
१५ और यह ऐसा हुआ, जब गिदोन ने उस स्वप्न के बतलाने को और उसकी व्याख्या को सुना, कि उसने आराधना की, और वापस इस्राएल की छावनी में लौट आया, और कहा, उठो भई; क्योंकि प्रभु ने मिद्यान की सेना तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दी है।
१६ और उसने उन तीन सौ पुरुषों को तीन दलों में विभाजित कर दिया, और उसने हर आदमी के हाथ में एक चिंघाड़ा दे दिया, खाली घड़ों के साथ, और घड़ों में अन्दर मशालें।
१७ और उसने उनसे कहा, मुझे देख कर वैसा ही करना: और देखो, जब मैं छावनी के बाहरी छोर तक आ पहुँचूँगा, कि ऐसा होगा कि जैसा मैं करूँगा, वैसा ही तुम करोगे।
१८ जब मैं चिंघाड़े को बजाऊँगा, मैं और वह सभी जो मेरे साथ हैं, तब तुम भी समस्त छावनी के प्रत्येक पाशर्व में चिंघाड़ों को बजा देना, और कहना, प्रभु की तलवार, और गिदोन की।
१९ तो गिदोन और उसके साथ वह सौ पुरुष जो थे, बीच वाले पहरे के आरम्भ के समय छावनी के बाहरी छोर तक पहूँच गए; और उन्होंने बस अभी-अभी वह पहरा लगाया ही था: और उन्होंने उन चिंघाड़ों को बजाया, और अपने हाथों में उन घड़ों को तोड़ डाला।
२० और उन तीन दलों ने चिंघाड़े बजा डाले, और उन घडों को तोड़ कर अपने बाएँ हाथों में मशालें पकड़ लीं, और बजाने के लिए वह चिंघाड़े उनके दाएँ हाथों में: और वह चीखे, प्रभु की तलवार, और गिदोन की।
२१ और प्रत्येक पुरुष अपने स्थान में खड़ा रहा छावनी के चारों ओर: और समस्त सेना भाग पड़ी, और चीख पड़ी, और भाग खड़ी हुई।
२२ और उन तीन सौ ने चिंघाड़े बजा दिए, और प्रभु ने छावनी के सर्वत्र में ही हर आदमी की तलवार उसके साथी के ही विरुद्ध कर दी: और वह सेना ज़रेरत में बेतशित्ता भाग खड़ी हुई, और एबलमहोला की सीमा तक, तबथ तक।
२३ और इस्राएल के पुरुषों ने स्वयं को नफ़्तली में से, आशेर में से, और मनश्शे में से बाहर एकत्रित कर लिया, और मिद्यान-वंशजों के पीछे पड़ गए।
२४ और गिदोन ने एफ्रैम के सर्वत्र में संदेशवाहक भेजे, कहते हुए, मिद्यान-वंशजों के विरुद्ध नीचे आ जाओ, उनसे पहले बेतबरा और यर्दन तक पानियों पर अधिकार कर लो। तब एफ्रैम के सभी पुरुषों ने स्वयं को एकत्रित कर, बेतबरा और यर्दन तक पानियों पर अधिकार कर लिया।
२५ और उन्होंने मिद्यान-वंशजों के दो अध्यक्षों को पकड़ लिया, ओरेब और ज़ीब को; और उन्होंने ओरेब को ओरेब-पत्थर पर मार डाला, और ज़ीब को उन्होंने ज़ीब के अंगूर-रस के कोल्हू में मार डाला, और मिद्यान का पीछा किया, और वह ओरेब और ज़ीब के सरों को गिदोन के पास यर्दन के दूसरी ओर ले आए।
आठवाँ अध्याय।
१ और एफ्रैम के पुरुषों ने उस से कहा, तुम ने हमारे साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया भई, कि तुम ने हमें बुलाया ही नहीं जब तुम मिद्यान-वंशजों के साथ लड़ाई करने निकल पड़े थे? और वह उसके साथ तीव्रता से विवाद कर बैठे।
२ और उसने उनसे कहा, तुम्हारी तुलना में भला अब मैंने क्या कर दिया है भई? क्या एफ्रैम के छोड़े हुए अंगूर अबिएज़र के संचयकाल से भी बेहतर नहीं हैं क्या?
३ ईश्वर ने तुम्हारे हाथों में मिद्यान के अध्यक्षों ओरेब और ज़ीब दे दिए हैं: और मैं तुम्हारी तुलना में क्या कर पाया भई? तब उसके विरुद्ध उनका क्रोध घट गया, जब उसने यह कह दिया था।
४ और गिदोन यर्दन पहूँच गया, और वह और उसके साथ वह तीन सौ पुरुष, शिथिल, तथापि उनका पीछा करते हुए, पार चले गए।
५ और उसने सुक्कोत के लोगों से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, इन आदमियों को रोटियाँ-पराँठे दे दो जो मेरा अनुसरण कर रहे हैं; क्योंकि यह शिथिल हैं, और मैं मिद्यान के राजाओं ज़ेबा और ज़लमुना का पीछा कर रहा हूँ।
६ और सुक्कोत के मुखियों ने कहा, क्या ज़ेबा और ज़लमुना के हाथ अभी तुम्हारे हाथ में हैं क्या, कि हम तुम्हारी सेना को रोटी दे दें?
७ और गिदोन ने कहा, इस कारण जब प्रभु मेरे हाथ में ज़ेबा और ज़लमुना को प्रदान कर देंगे, तब मैं जँगली-क्षेत्र के काँटों और ऊँटकटारों से तुम्हारे माँस को फाड़ डालूँगा।
८ और वह वहाँ से ऊपर पेनुएल चला गया, और उनसे इसी प्रकार बोला: और पेनुएल के लोगों ने सुक्कोत के लोगों के उत्तर समान ही उसे उत्तर दे दिया।
९ और वह पेनुएल के लोगों से भी बोला, कहता हुआ, जब मैं पुनः शांति में आऊँगा, तो मैं इस मीनार को नीचे तोड़ डालूँगा।
१० अब ज़ेबा और ज़लमुना और उनकी सेना, लगभग पंद्रह हज़ार आदमी उनके साथ, वह सभी जो पूर्व की सन्तानों में से बचे रह गए थे, करकोर में थे: क्योंकि भई तलवार खींचने वाले एक लाख बीस हज़ार आदमी गिर पड़े थे।
११ और गिदोन ने उनके पथ पर से जो नोबा और यगबहा के पूर्व की ओर तम्बुओं में बसते हैं ऊपर जाकर सेना पर वार कर दिया: क्योंकि वह सेना सुरक्षित थी।
१२ और जब ज़ेबा और ज़लमुना भग लिए, वह उनका पीछा करने लग गया, और उसने मिद्यान के उन दोनो राजाओं को पकड़ लिया, ज़ेबा और ज़लमुना को ही, और समस्त सेना को अस्त-व्यस्त कर डाला।
१३ और योअश का बेटा गिदोन सूर्योदय से पूर्व संग्राम से वापस लौटा,
१४ और उसने सुक्कोत के एक युवक को पकड़ कर उस से पूछ-ताछ की: और उसने सुक्कोत के उन अध्यक्षों और उसके वृद्ध-गणों का उसे विवरण दे दिया, सतत्तर आदमी ही।
१५ और वह सुक्कोत के आदमियों के पास पहूँच कर बोला, देख लो भई ज़ेबा और ज़लमुना को, जिनके माध्यम से तुम ने मेरी निन्दा की थी, कहते हुए, क्या ज़ेबा और ज़लमुना के हाथ अब तुम्हारे हाथ में हैं क्या, कि हम तुम्हारी थकी हुई सेना को रोटी दे दें?
१६ और उसने नगर के उन वृद्ध-गणों को, और जँगली-क्षेत्र के काँटों और ऊँटकटारों को लेकर, उनके साथ सुक्कोत के आदमियों को सिखा दिया।
१७ और उसने पेनुएल की मीनार को तोड़ डाला नीचे, और उस नगर के लोगों को मार डाला।
१८ तब उसने ज़ेबा और ज़लमुना से कहा, किस प्रकार के थे वह पुरुष जिन्हें तुमने तबोर में मार डाला था? और उन्होंने उत्तर दिया, जैसे तुम हो, वैसे ही वह थे; वह प्रत्येक एक राजा के बेटों के समरूप था।
१९ और उसने कहा, वह मेरे भाई-जन थे, मेरी माँ के ही बेटे: प्रभु के जीते जी, यदि तुमने उन्हें जीवित बचा कर रखा होता, तो मैं तुमने नहीं मार डालता!
२० और उसने अपने प्रथम जन्मे, यतर से कहा, उठो और इन्हें मार डालो। परन्तु उस युवक ने अपनी तलवार नहीं खींची: क्योंकि वह डर गया, क्योंकि वह अभी एक युवक ही था।
२१ तब ज़ेबा और ज़लमुना ने कहा, तुम उठ कर हम पर वार करो: क्योंकि जैसा आदमी होता है, वैसा ही उसका बल। और गिदोन उठा, और उसने ज़ेबा और ज़लमुना को मार डाला, और उन आभूषणों को जो उनके ऊँटों की गर्दनों पर थे ले लिया।
२२ तब इस्राएल के पुरुषों ने गिदोन से कहा, हम पर तुम शासन करो, दोनो तुम और तुम्हारा बेटा, और तुम्हारे बेटे का बेटा भी: क्योंकि तुम्हीं ने हमें मिद्यान के हाथ में से बचा लिया है।
२३ और गिदोन ने उनसे कहा, न ही मैं तुम पर शासन करूँगा, न ही मेरा बेटा तुम पर शासन करेगा: प्रभु ही तुम पर शासन करेंगे।
२४ और गिदोन ने उनसे कहा, मैं तुम से एक याचना का अनुरोध करता हूँ, कि तुम प्रत्येक पुरुष अपनी लूट की बालियाँ मुझे दे दे। चूँकी वह इश्माएल-वंशज थे, चूँकी उनके पास सोने की बालियाँ थीं
२५ और उन्होंने उत्तर दिया, हम खुशी-खुशी उन्हें दे देंगे। और उन्होंने एक कपड़ा फैला दिया और प्रत्येक आदमी ने उस में अपनी लूट की बालियाँ फैंक दीं।
२६ और उन सोने की बालियों का भार जिनकी उसने याचना की थी सोने के एक हज़ार सात सौ शेक्ल थी; उन आभूषणों और गले के हारों, और जामुनी वस्त्रों के अतिरिक्त जो उन मिद्यान-वंशजों के राजाओं पर थे, और उन कड़ियों के अतिरिक्त जो उनके ऊँटों के गलों पर थीं।
२७ और गिदोन ने उन से एक एफद बना कर उसे अपने नगर ओफ्रा में ही रख दिया: और सारा इस्राएल उसके पीछे वैश्यापना करता हुआ वहीं चल दिया: जो बात गिदोन के लिए, और उसके घराने के लिए, एक फंदा बन गई।
२८ इस प्रकार मिद्यान का इस्राएल की सन्तानों के सम्मुख दमन कर दिया गया था, ताकि उन्होंने अपना सर अब और ऊपर नहीं उठाया। और गिदोन के दिनो में देश चालीस वर्षों तक शान्त था।
२९ और योअश का बेटा यरुबबअल गया और अपने ही घर में बस गया।
३० और गिदोन के सत्तर बेटे थे उसके देह से जनने: क्योंकि उसके पास कई पत्नियाँ थीं।
३१ और शकेम में जो उसकी रखैल थी, उसने भी उसे एक बेटा जना, जिसका नाम उसने अबिमलेक रखा।
३२ योअश का बेटा गिदोन एक अच्छी वृद्ध आयु में मर गया, और अबिएज़रियों के ओफ्रा में, उसके पिता योअश के मक़बरे में दफ़ना दिया गया था।
३३ और यह होने को आया, के गिदोन के मरते ही, इस्राएल की सन्तानें पुनः मुड़ चलीं, और बअलिम के पीछे राँडपना करती चली गईं, और बअलबरित को अपना ईश्वर बना लिया।
३४ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु अपने ईश्वर को स्मरण में नहीं रखा, जिन्होंने उनका प्रत्येक दिशा में उनके समस्त शत्रुओं के हाथों से उद्धार कर दिया था:
३५ न ही उन्होंने यरुबबअल, अर्थात् गिदोन के घराने को दया दिखाई, उस सभी अच्छाई के अनुसार जो उसने इस्राएल के प्रति दिखाई थी।
नौवाँ अध्याय।
१ और यरुबबअल का बेटा अबिमलेक अपनी माँ के भाई-जनों के पास शकेम गया, और उनके साथ और अपनी माँ के पिता के घराने के समस्त परिवार के साथ गोष्ठी की, कहते हुए,
२ मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, शकेम के समस्त जनो के कानों में बोल दो, कि भला तुम्हारे लिए बेहतर है, कि यरुबबअल के सभी सत्तर बेटे तुम पर राज करें, या फिर केवल एक ही तुम पर राज करे? इसका भी स्मरण रखो कि मैं तुम्हारा हाँड-माँस ही हूँ।
३ और उसकी माँ के भाई-जनो ने शकेम के समस्त जनो के कानो में यह शब्द बोल दिए: और उनके हृदय अबिमलेक का अनुसरण करने हेतु झुक गए; क्योंकि उन्होंने कहा, भई यह तो हमारा भाई ही है!
४ और उन्होंने उसे बअलबेरित के घर से सत्तर चाँदी के टुकड़े दे दिए, जिस से अबिमलेक के व्यर्थ लुच्चे-लफंगों को किराए पर ले लिया, जो उसके पीछे चल दिए।
५ और वह ओफ्रा अपने पिता के घर चला गया, और एक ही पत्थर पर अपने भाईयों यरुबबअल के सत्तर बेटों को मार डाला: तदापि यरुबबअल का सबसे छोटा बेटा योतम बचा रह गया; क्योंकि उसने स्वयं को छुपा लिया था।
६ और शकेम के सभी जन एक साथ एकत्रित हो गए, और मिलो का सारा घराना, और जाकर शकेम में उस मीनार के साथ उस मैदान में अबिमलेक को राजा बना दिया।
७ और जब उन्होंने यह योतम को बताया, उसने जाकर गरज़िम पहाड़ की चोटी पर खड़ा होकर, अपनी वाणी उठाई, और चीखा और उनसे कहा, मुझे सुन लो तुम शकेम के लोगों, कि ईश्वर तुम्हारा श्रवण कर लें।
८ किसी समय पेड़ अपने ऊपर एक राजा का अभिषेक करने हेतु चल पड़े; और उन्होंने जैतून के पेड़ से कहा, तुम हम पर राज कर लो।
९ परन्तु उस जैतून के पेड़ ने उन से कहा, क्या मैं अपनी चर्बी को छोड़ दूँ, जिस से वह ईश्वर का सम्मान करते हैं और मनुष्य का, और जाकर पेड़ों पर पदोन्नत हो जाऊँ?
१० और उन पेड़ों ने अंजीर के पेड़ से कहा, भई आ जाओ तुम, और हम पर राज कर लो।
११ परन्तु उस अंजीर के पेड़ ने उनसे कहा, क्या मैं अपनी मिठास का और अपने अच्छे फल त्याग कर कर, जाऊँ और पेड़ों पर पदोन्नत हो जाऊँ?
१२ तब उन पेड़ों ने दाख-लता से कहा, भई आ जाओ तुम, और हम पर राज कर लो।
१३ और उस दाख-लता ने उनसे कहा, क्या मैं अपने रस को छोड़ दूँ, जो ईश्वर को प्रसन्न करता है, और मानुष को, और जाकर पेड़ों पर पदोन्नत हो जाऊँ?
१४ जब सभी पेड़ों ने झाड़ों से कहा, भई आ जाओ तुम, और हम पर राज कर लो।
१५ और उस झाड़ ने उन पेड़ों से कहा, यदि सच्चाई से तुम मुझे अपने पर राजा अभिषिक्त करते हो, तो आओ और मेरी परछाई में अपना भरोसा कर लो: और यदि नहीं, तो झाड़ में से अग्नी बाहर निकल आने दो, और लेबनोन के देवदारों का भक्षण कर देने दो।
१६ अब इसलिए, यदि तुमने सच्चाई और निष्ठा की है, कि तुमने अबिमलेक को राजा बना डाला है, और यदि तुम ने यरुबबअल के साथ और उनके घराने के साथ भला व्यवहार किया है, और उनके साथ उनके हाथों सुयोग्य कर दिया है;
१७ क्योंकि मेरे पिता जी तुम्हारे लिए लड़े थे, और दूर तक अपने जीवन को संकट में डाल कर, उन्होंने तुम्हारा मिद्यान के हाथ में से बचाव कर दिया:
१८ और तुम इस दिन मेरे पिता के घराने के विरुद्ध उठ खड़े हो गए हो, और एक ही पत्थर पर उनके सत्तर बेटों को मार डाला है, और अबिमलेक उनकी नौकरानी के बेटे को शकेम के लोगों पर राजा बना दिया है, क्योंकि वह तुम्हारा भाई है;
१९ तो यदि तुमने यरुबबअल के साथ और उनके घराने के साथ इस दिन सच्चाई और निष्ठा से बर्ताव किया है, तो अबिमलेक में प्रसन्न हो जाओ, और उसे भी तुम में प्रसन्न हो जाने दो:
२० परन्तु यदि नहीं, तो अबिमलेक में से अग्नी बाहर निकल आने दो, और शकेम के लोगों, और मिलो के घराने का भुख-भक्षण कर देने दो; और शकेम के लोगों, और मिलो के घराने में से अग्नी बाहर निकल आने दो, और अबिमलेक का भुख-भक्षण कर देने दो।
२१ और योतम दौड़ चला, और भाग खड़ा हुआ, और बीर चला गया, और वहीं अपने भाई अबिमलेक के डर के मारे बस गया।
२२ जब अबिमलेक ने इस्राएल पर तीन वर्ष राज कर लिया था,
२३ तब ईश्वर ने अबिमलेक और शकेम के लोगों के बीच एक बुरी भावात्मा भेज दी; और शकेम के जने अबिमलेक के साथ विश्वासघाती व्यवहार करने लगे:
२४ ताकि यरुबबअल के सत्तर बेटों पर वह की गई क्रूरता आ पड़े, और उनका रक्त का दोष अबिमलेक उनके भाई पर लग जाए, जिसने उन्हें मार डाला था; और शकेम के जनो पर, जिन्होंने उसके भाईयों के मारे डाले जाने में उसकी सहायता की थी।
२५ और शकेम के लोगों ने उसके लिए पर्वतों की चोटियों पर घात लगा दी, और उन्होंने उन सभी पर डाका डाला जो भी वहीं उस पथ पर से चलते जाते थे: और यह अबिमलेक को बताया गया।
२६ और एबद का बेटा गाल अपने भाई-जनो के साथ आया, और शकेम चला गया: और शकेम के जनो ने अपना भरोसा उस पर डाल दिया।
२७ और वह खेतों में बाहर चले गए, और उनके अँगूर-खेतों से तोड़ा, और उनके अंगूरों को रौंदा, और मगन-मेला मनाया, और उनके ईश्वर के घर में जाकर खाया और पिया, और अबिमलेक को कोसने लगे।
२८ और एबद के बेटे गाल ने कहा, भई कौन है यह अबिमलेक, और शकेम कौन है, कि हम उसकी सेवा करें? क्या वह यरुबबअल का ही बेटा नहीं है क्या? और ज़बुल उसका अफ़सर? शकेम के पित्र हमोर के आदमियों की सेवा करो: हम क्यों इसकी सेवा करें भई?
२९ और काश कि यह लोग मेरे हाथ तले होते! तब मैं अबिमलेक को हटा देता। और उसने अबिमलेक से कहा, अपनी सेना बढ़ा कर बाहर निकल आ।
३० और जब उस नगर के अध्यक्ष ज़बुल ने एबद के बेटे गाल के शब्द सुने, तो उसका क्रोध भड़क उठा।
३१ और उसने अबिमलेक को चुपके से संदेशवाहक भेज दिए, कहते हुए, देखो, एबद का बेटा गाल और उसके भाई-जन शकेम आ पहुँचे हैं; और देखो, वह तुम्हारे विरुद्ध नगर को सुदृढ़ कर रहे हैं।
३२ अब इसलिए तुम और तुम्हारे साथी लोग रात को उठ के, खेत में घात लगा दो:
३३ और यह होने को आएगा, कि सुबह, सूर्य के उदय होते ही, तुम सुबह-सुबह उठ कर, नगर पर टूट पड़ोगे: और देखो जब वह और उसके साथी लोग तुम्हारे विरुद्ध बाहर निकलते हैं, तब तुम उनके साथ अवसरानुसार ही कर देना तुम।
३४ और अबिमलेक और उसके साथी लोग रात्रि में उठे, और चार टुकड़ियों में उन्होंने शकेम के विरुद्ध घात लगा दी।
३५ और एबद का बेटा गाल बाहर निकल कर नगर के द्वार के प्रवेश में खड़ा हो गया: और अबिमलेक और उसके साथ के लोग घात लगाने से उठ गए।
३६ और जब गाल ने लोगों को देखा, उसने ज़बुल से कहा, देखो, लोग पर्वतों की चोटियों पर से नीचे आ रहे हैं। और ज़बुल ने उस से कहा, तुम तो पर्वतों की परछाई को लोगों समान देख रहे हो!
३७ और गाल ने पुनः बोला और कहा, देखो भई भूमी के बीच में से ही लोग नीचे आ रहे हैं, और एक और टुकड़ी मेओननिम के मैदान के साथ आ रही थी।
३८ तब ज़बुल ने उस से कहा, तेरा वह मूँह कहा रह गया जिस से तूने कहा था, अबिमलेक कौन है, कि हम उसकी सेवा करें? क्या यही वह जने नहीं हैं जिन से तूने घृणा की है? तो अब कृपया कर के बाहर चला जा और इनके साथ लड़ ले।
३९ और गाल शकेम के आदमियों के समक्ष बाहर निकल पड़ा, और अबिमलेक के साथ लड़ा।
४० और अबिमलेक ने उसे भगा-दौड़ा दिया, और वह उसके सामने से भाग खड़ा हुआ, और कई घायल गिर-पड़ गए दरवाज़े के प्रवेश तक भी।
४१ और अबिमलेक अरुमा में बस गया: और ज़बुल ने गाल और उसके भाई-जनो को बाहर खदेड़ डाला, ताकि वह शकेम में निवास न करे।
४२ और अगले दिन यह होने को आया कि लोग बाहर खेत में चले गए; और उन्होंने अबिमलेक को बताया।
४३ और उसने लोगों को लेकर उन्हें तीन टुकड़ियों में विभाजित कर लिया, और खेत में घात लगा दी, और देखा, और देखो तो, नगर में से बाहर लोग निकल आए थे; और वह उनके विरुद्ध उठा और उन्हें पीट डाला।
४४ और अबिमलेक और वह टुकड़ी जो उसके साथ थी, आगे वेग से भाग पड़े और नगर के दरवाज़े के प्रवेश में खड़े हो गए: और वह अन्य दो टुकड़ियाँ सभी लोगों पर दौड़ पड़ीं जो खेतों में थे, और उन्हें मार डाला।
४५ और अबिमलेक उस नगर के विरुद्ध सारे दिन लड़ा; और उसने उस नगर पर अधिकार कर लिया, और वहीं भीतर जो लोग थे उन्हें मार डाला, और उस नगर को नीचे तोड़ डाला और उसे नमक से बो दिया।
४६ और जब शकेम के सभी जनो ने यह सुना, तो वह बेरित ईश्वर के घर के एक तहख़ाने में जा घुसे।
४७ और यह अबिमलेक को बताया गया कि शकेम की मीनार के सभी जने एक साथ इकट्ठा हो गए थे।
४८ और अबिमलेक स्वयं को ज़ल्मोन पहाड़ पर ऊपर ले चला, वह और उसके साथ उन सभी लोगों को; और अबिमलेक ने अपने हाथ में एक कुल्हाड़ा लिया, और पेड़ों पर से एक डाल काट कर ली और उसे अपने कंधे पर रख लिया, और उन लोगों से कहा जो उसके साथ थे, जैसा तुमने मुझे करते देखा है, वैसा ही फुर्ती से कर दो।
४९ और इसी प्रकार ही सभी लोगों ने प्रत्येक आदमी ने अपनी डाल काट दी, और अबिमलेक के पीछे-पीछे गए, और उन्हें उस तहख़ाने पर रख दिया, और उस तहख़ाने पर आग लगा दी; ताकि शकेम की मीनार के सभी लोग भी मर गए, लगभग एक हज़ार आदमी और स्त्रियाँ।
५० तब अबिमलेक ने थबज़ जा कर थबज़ के विरुद्ध पड़ाव डाला, और उस पर अधिकार जमा लिया।
५१ परन्तु उस नगर में एक शक्तिशाली गढ़ था, और सभी आदमी और स्त्रियाँ, और सभी उस नगर वाले वहीं भाग गए, और उसे ताला-बँद कर के गढ़ की छत पर वह जा चढ़े।
५२ और अबिमलेक उस गढ़ पर आया, और उस से लड़ा, और उस गढ़ के द्वार के निकट चला गया उसे आग से जला डाल देने के लिए।
५३ और किसी एक स्त्री ने एक चक्की के पत्थर के टुकड़े को अबिमलेक के सर पर पटक डाला, और उसकी खोपड़ी फोड़ दी।
५४ तब उसने शीघ्रता से ही अपने अस्त्र-ढोने वाले उस युवक को बुलाकर उस से कहा, अपनी तलवार खींच कर मुझे मार दे, ताकि मेरे विषय में लोग न कहें, कि एक स्त्रीने उसे मार डाला था। और उसके उस युवा पुरुष ने उसे आर-पार भेद दिया, और वह मर गया।
५५ और जब इस्राएल के पुरुषों ने देखा कि अबिमलेक मर चुका था, उन्होंने प्रस्थान कर लिया प्रत्येक पुरुष ने अपने ही स्थान की ओर।
५६ इस प्रकार ईश्वर ने अबिमलेक की दुष्टता का भुक्तान कर डाला जो उसने अपने पिता के प्रति की थी, अपने सत्तर भाईयों की हत्या कर देने में:
५७ और शकेम के लोगों की समस्त दुष्टता ईश्वर ने उन्हीं के सरों पर लौटा दी: और उन पर यरुबबअल के बेटे योतम का श्राप आ पड़ा।
दसवाँ अध्याय।
१ और अबिमलेक के पश्चात इस्राएल का बचाव करने इस्सकार के एक पुरुष दोदो के बेटे पूआ का बेटा तोला उठा; और वह एफ्रैम पर्वत में शमीर में बसता था।
२ और उसने इस्राएल का न्याय तेईस वर्ष किया, और चल बसा, और वह शमीर में दफ़ना दिया गया था।
३ और उसके पश्चात एक गिलद-वंशज याएर उठा, और इस्राएल का न्याय बाईस वर्ष किया।
४ और उसके तीस बेटे थे जो तीस युवा-गधों की सवारी करते थे, और उनके पास तीस नगर थे, जो इस दिन तक भी हवोतयाएर कहलाए जाते हैं, जो गिलद की भूमी में हैं।
५ और याएर चल बसा, और कमोन में दफ़ना दिया गया था।
६ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु की दृष्टि में पुनः बुराई कर दी, और बअलिम, और अश्तरोत, और सिरिया के ईश्वरों, और सिदोन के ईश्वरों, और मोआब के ईश्वरों, और अम्मोन की सन्तानों के ईश्वरों, और पलिश्तिमवासियों के ईश्वरों की सेवा की, और प्रभु का त्याग कर डाला, और उनकी सेवा नहीं की।
७ और प्रभु का क्रोध इस्राएल के विरुद्ध गरम था, और उन्होंने उन्हें पलिश्तिमवासियों के हाथों में, और अम्मोन की सन्तानों के हाथों में बेच डाला।
८ और उसी वर्ष उन्होंने इस्राएल की सन्तानों को व्यग्रित और उत्पीड़ित किया: अट्ठारह वर्ष इस्राएल की समस्त सन्तानें जो गिलद में एमोरवासियों की भूमी में यर्दन के उस पार थीं।
९ इसके अतिरिक्त अम्मोन की सन्तानें यहूदा के विरुद्ध, और बिन्यामिन के विरुद्ध, और एफ्रैम के घराने के विरुद्ध लड़ने के लिए भी यर्दन के पार चल दीं; ताकि इस्राएल घोरता से पीड़ित था।
१० और इस्राएल की सन्तानें प्रभु के प्रति चीख पड़ीं कहती हुईं, हम ने आपके विरुद्ध पाप कर दिया है, क्योंकि हम ने दोनो, अपने ईश्वर का त्याग कर दिया है, और बअलिम की भी सेवा कर दी है।
११ और प्रभु ने इस्राएल की सन्तानों से कहा, क्या मैंने तुम्हें मिस्रवासियों से, और एमोरवासियों से, और अम्मोन की सन्तानों से, और पलिश्तिमवासियों से बचाया नहीं था क्या?
१२ सिदोनवासियों ने भी, और अमालेक-वंशजों, और मओनवासियों ने तुम्हारा अत्याचार किया; और तुम मेरी ओर चीख पड़े, और मैंने तुम्हें उनके हाथ से बचा लिया।
१३ तब भी तुम ने मुझे त्याग दिया, और अन्य ईश्वरों की सेवा की है: इस कारण वश मैं अब तुम्हारा और बचाव नहीं करूँगा।
१४ जाओ और उन ईश्वरों के प्रति चीखो जिन्हें तुम ने चुन लिया है; उन्हें तुम्हारा बचाव के लेने दो तुम्हारे इस आपत्ती के समय में।
१५ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु से कहा, हम ने पाप कर दिया है: हमारे साथ जैसा आपको भला प्रतीत हो आप कर देना; बस केवल हमें बचा लें, हम आपसे प्रार्थना करते हैं इस दिन।
१६ और उन्होंने अपने बीच में से उन परदेशी ईश्वरों को परे हटा दिया, और प्रभु की सेवा की: और उनका आत्मा इस्राएल के दुःख के कारण दुखी हो उठा।
१७ और अम्मोन की सन्तानों ने एक साथ एकत्रित हो कर, गिलद में पड़ाव डाला। और इस्राएल की सन्तानों ने एक साथ स्वयं एकत्रित हो, मिस्पेह में पड़ाव डाला।
१८ और गिलद के जनो और अध्यक्षों ने एक दूसरे से कहा, वह कौन सा पुरुष है जो अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध लड़ाई करना आरम्भ करेगा? वही गिलद के समस्त निवासियों पर प्रमुख होगा।
ग्यारहवाँ अध्याय।
१ अब वह गिलद-वंशज यिफ्ता एक बलशाली पराक्रमी था, और वह एक वैश्या का बेटा था: और गिलद ने यिफ़्ता को जनना था।
२ और गिलद की पत्नी ने उसे बेटे जने थे; और उसकी पत्नी के बेटों ने बड़ा होकर यिफ्ता को बाहर खदेड़ दिया, और उस से कहा, तुम हमारे पिता के घराने में विरासत नहीं लोगे; क्योंकि तुम तो किसी पराई स्त्रीके बेटे हो।
३ तब यिफ्ता अपने भाई-जनो से भाग गया, और तोब की भूमी में बस गया: और वहीं यिफ्ता के साथ व्यर्थ लुच्चे-लफंगे इकट्ठा हो गए, और उसके साथ आने-जाने लगे।
४ और यह होने को आया समय की प्रक्रिया में, कि अम्मोन की सन्तानों ने इस्राएल के विरुद्ध रण छेड़ दिया।
५ और यह ऐसा था कि जब अम्मोन की सन्तानों ने इस्राएल के विरुद्ध रण छेड़ दिया था, कि गिलद के वृद्ध-गण तोब की भूमी में से यिफ्ता को बाहर निकाल लाने के लिए चले गए:
६ और उन्होंने यिफ्ता से कहा, आ जाओ और हमारे कप्तान बन जाओ, ताकि हम अम्मोन की सन्तानों के साथ लड़ लें।
७ और यिफ्ता ने गिलद के वृद्ध-गणों से कहा, क्या तुम ने मुझ से घृणा नहीं की थी, और मुझे मेरे पिता के घराने में से बाहर खदेड़ डाला था? तो अब तुम क्यों मेरे पास आए हो जब तुम कष्ट में हो?
८ और गिलद के वृद्ध-गणों से यिफ्ता से कहा, इस कारण हम अब पुनः तुम्हारी ओर मुड़े हैं ताकि तुम हमारे साथ जाकर अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध लड़ो, और हमारे मुखिया बन जाओ गिलद के समस्त निवासियों पर।
९ और यिफ्ता ने गिलद के वृद्ध-गणों से कहा, यदि तुम मुझे पुनः घर वापस ले आओगे अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध लड़ने हेतु, और प्रभु उन्हें मेरे सम्मुख प्रदान कर देते हैं, तो क्या मैं तुम्हारा मुखिया बन जाऊँगा?
१० और गिलद के वृद्ध-गणों से यिफ्ता से कहा, प्रभु हमारे बीच साक्षी हों यदि हम ऐसा न कर दें तुम्हारे ही शब्दोंनुसार।
११ तब यिफ्ता गिलद के वृद्ध-गणों के साथ चला गया, और लोगों ने उसे अपने ऊपर मुखिया और कप्तान बना दिया: और यिफ्ता ने अपने समस्त शब्दों का प्रभु के सम्मुख मिस्पेह में अर्णन कर दिया।
१२ और यिफ्ता ने अम्मोन की सन्तानों के राजा को संदेशवाहक भेजे, कहते हुए, तुम्हारे पास मेरे साथ करने-धरने के लिए क्या रखा है भई, कि तुम मेरे ही विरुद्ध मेरी ही भूमी में लड़ाई करने आ धमके हो?
१३ और अम्मोन की सन्तानों के राजा ने यिफ्ता के संदेशवाहकों को उत्तर दिया, क्योंकि इस्राएल ने मेरी भूमी ले ली थी, जब वो मिस्र में से बाहर ऊपर आ गए थे, अर्नोन से लेकर यबक तक, और यर्दन तक भी: अब इसलिए शान्तिप्रीयता से उन भूमियों को पुनः वापस लौटा दो।
१४ और यिफ्ता ने अम्मोन की सन्तानों के राजा को पुनः संदेशवाहक भेजे:
१५ और उस से कहा, यिफ्ता इस प्रकार कहते हैं, इस्राएल ने न ही मोआब की भूमी, न ही अम्मोन की सन्तानों की भूमी ली थी:
१६ बल्कि जब इस्राएल मिस्र में से ऊपर आया था और लाल-समुद्र तक जँगली-क्षेत्र में से चला था और कदेश आ पहुँचा था;
१७ तब इस्राएल ने एदोम के राजा को संदेशवाहक भेजे, कहते हुए, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, मुझे तुम्हारी भूमी में से पार चले जाने दो: परन्तु एदोम के राजा ने इसका श्रवण नहीं किया। और इसी प्रकार उन्होंने मोआब के राजा को भिजवाए: परन्तु उसने अनुमती नहीं दी: और इस्राएल कदेश में बसता रहा।
१८ तब वह चलते चले जँगली-क्षेत्र में से पार, और एदोम की भूमी, और मोआब की भूमी को घेरते हुए, मोआब की भूमी के पूर्व की ओर से आए, और अर्नोन के दूसरी ओर पड़ाव डाल दिया, परन्तु मोआब की सीमा के भीतर नहीं आए: क्योंकि अर्नोन मोआब की सीमा थी।
१९ और इस्राएल ने हेश्बोन के राजा, एमोरवासियों के राजा सिहोन को सन्देशवाहक भेजे; और इस्राएल ने उस से कहा, हम तुम से प्रार्थना करते हैं, हमें अपने स्थान की ओर अपनी भूमी में पार चलते जाने दो।
२० परन्तु सिहोन ने इस्राएल पर अपनी सीमा में से पार जाने हेतु विश्वास नहीं किया: बल्कि सिहोन ने अपने समस्त लोगों को एक साथ एकत्रित कर के यहज़ में पड़ाव डाल दिया, और इस्राएल के विरुद्ध लड़ पड़ा।
२१ और इस्राएल के प्रभु ईश्वर ने सिहोन और उसके समस्त लोगों को इस्राएल के हाथ में प्रदान कर दिया, और उन्होंने उन्हें पीट डाला: तो इस्राएल ने एमोरवासियों की समस्त भूमी पर अधिकार कर लिया, उस देश के निवासी।
२२ और उन्होंने एमोरवासियों की समस्त सीमाओं पर अधिकार कर लिया, अर्नोन से लेकर यबक तक भी, और जँगली-क्षेत्र से लेकर यर्दन तक भी।
२३ तो अब इस्राएल के प्रभु ईश्वर ने अपने गण इस्राएल के समक्ष एमोरवासियों को निष्कासित कर दिया है, और क्या तुम उस पर अधिकार करोगे?
२४ क्या तुम उस पर अधिकार नहीं जमाओगे जो तुम्हारा ईश्वर कमोश तुम्हें अधिकार जमाने के लिए देता है? तो जिस किसी को भी प्रभु हमारे ईश्वर हमारे सामने से बाहर खदेड़ देंगे, उन्हीं पर हम अधिकार जमा लेंगे।
२५ और अब क्या तुम मोआब के राजा ज़िपोर के बेटे बलक से तनिक भी बेहतर हो क्या? क्या उसने इस्राएल के विरुद्ध संघर्ष किया क्या, या उसने कभी भी उनके विरुद्ध लड़ाई की थी क्या,
२६ जिस समय इस्राएल हेश्बोन और उसकी नगरीयों में, और अरोर और उसकी नगरीयों में, और अर्नोन की सीमा के साथ उन सभी नगरीयों में तीन सौ साल बसा था? इसलिए तुम ने क्यों उन्हें उस समय के अन्दर-अन्दर वापस नहीं लिए?
२७ इस कारण वश मैंने तुम्हारे प्रति पाप नहीं किया है, बल्कि तुम मेरे साथ मेरे विरुद्ध युद्ध करने में त्रुटि कर रहे हो: इस्राएल की सन्तानों और अम्मोन की सन्तानों के बीच प्रभु वह न्यायाधीष ही इसी दिन न्यायाधीष बन जाएँ।
२८ तथापि अम्मोन की सन्तानों के राजा ने यिफ्ता के शब्दों का श्रवण नहीं किया जो उसने उसे भिजवाए थे।
२९ तब प्रभु के भावात्मा यिफ्ता पर आ पड़े, और वह गिलद और मनश्शे को पार कर चला, और गिलद के मिस्पेह को पार कर चला, और गिलद के मिस्पेह से वह अम्मोन की सन्तानों के पास पार चला गया।
३० और यिफ्ता ने प्रभु के प्रति एक प्रण का प्रण लिया और कहा, यदि आप निःसंदेह अम्मोन की सन्तानों को मेरे हाथों में प्रदान कर देंगे,
३१ तब यह होगा कि जो कुछ भी मेरे घर के द्वारा में से मुझ से मिलने बाहर आता है, जब मैं अम्मोन की सन्तानों से शान्ति में वापस लौटता हूँ, अवश्य ही प्रभु का होगा, और मैं उसे एक जले-चढ़ावे के लिए चढ़ा दूँगा।
३२ तो यिफ्ता अम्मोन की सन्तानों के पास पार चला गया उनके विरुद्ध लड़ने हेतु; और प्रभु ने उन्हें उसके हाथों में प्रदान कर दिया।
३३ और उसने उन्हें अरोर से लेकर जब तक कि तुम मिनिथ तक भी आ जाते हो, बीस नगरों को ही, और अंगूर के खेतों के मैदान तक, एक बहुत ही बड़े संघार से पीट डाला। इस प्रकार अम्मोन की सन्तानों का इस्राएल की सन्तानों के सम्मुख दमन हो गया था।
३४ और यिफ्ता मिस्पेह अपने घर तक आ पहुँचा, और, देखो तो, उसकी बेटी उस से मिलने बाहर निकली ढ़पलियों के साथ और नृत्यों के साथ: और वह उसकी इकलौती संतान थी; उसके अतिरिक्त उसके पास न ही बेटा न ही बेटी थी।
३५ और यह होने को आया, जब उसने उसे देखा, कि उसने अपने कपड़े फाड़ डाले और कहा, हाय, मेरी बेटी! तुम मुझे बहुत ही नीचा ले आई हो, और तुम उन में से एक हो जो मुझे विचलित करती है; चूँकि मैंने अपना मूँह प्रभु के प्रति खोल दिया है, और मैं वापस नहीं जा सकता।
३६ और उसने उस से कहा, मेरे पिता जी, यदि आपने प्रभु के प्रति अपना मूँह खोल दिया है, मेरे साथ उसी के अनुसार कर दें जो आपके मूँह में से बाहर प्रवृत्त हुआ है; चूँकी प्रभु ने आपके लिए आपके शत्रुओं पर प्रतिषोध ले लिया है, अम्मोन की सन्तानों पर ही।
३७ और उसने अपने पिता से कहा, मेरे लिए यह कर दिया जाए: मुझे दो माह अकेला छोड़ दें, ताकि मैं पर्वतों पर ऊपर और नीचे जा कर, अपने कुँवारेपन का विलाप मना लू, मैं और मेरी सहेलियाँ।
३८ और उसने कहा, चली जाओ। और उसने उसे दो महीनो के लिए भेज दिया: और वह अपनी सहेलियों के साथ गई, और पर्वतों पर अपने कुँवारेपन का विलाप मनाया।
३९ और यह होने को आया उन दो महीनों के अन्त पर कि वह अपने पिता के पास वापस लौट आई, जिस ने उसके साथ अपने प्रणानुसार कर दिया जो उसने प्रण लिया था: और उसने किसी भी पुरुष को नहीं जाना था। और यह इस्राएल में एक रीति थी,
४० कि इस्राएल की बेटियाँ प्रति वर्ष उस गिलद-वंशज यिफ्ता की बेटी का विलाप-स्मरण करने जाती थीं, वर्ष में चार दिन।
बारहवाँ अध्याय।
१ और एफ्रैम के पुरुषों ने स्वयं को एक साथ एकत्रित किया और उत्तर की ओर गए, और यिफ्ता से कहा, किस कारण वश तुम अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध लड़ने पार गए और हमें अपने साथ जाने के लिए नहीं बुलाया? हम तेरा घर तुझ पर आग से जला डालेंगे।
२ और यिफ्ता ने उनसे कहा, मैं और मेरे लोग अम्मोन की सन्तानों के साथ एक बड़े ही संघर्ष में थे; और जब मैंने तुम्हें बुलाया था, तुम ने मुझे उनके हाथों से बाहर नहीं बचाया।
३ और जब मैंने देखा कि तुम ने मुझे नहीं बचाया, मैंने अपना जीवन अपनी हथेली में डाला, और अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध पार चला गया, और प्रभु ने उन्हें मेरे हाथ में प्रदान कर दिया है: किस कारण फिर तुम इस दिन मेरे पास ऊपर आ गए हो, मेरे विरुद्ध लड़ने के लिए?
४ तब यिफ्ता ने गिलद के समस्त लोगों को एकत्रित किया, और एफ्रैम के साथ लड़ गया: और गिलद के आदमियों ने एफ्रैम को पीट डाला, क्योंकि उन्होंने कहा, तुम गिलद-वंशज एफ्रैम के भगोड़े एफ्रैम-वंशजों के बीच, और मनश्शे-वंशजों के बीच।
५ और उन गिलद-वंशजों ने एफ्रैम-वंशजों के समक्ष यर्दन के पारण-स्थानों पर अधिकार कर लिया: और यह ऐसा था कि जब उन एफ्रैम-वंशजों ने जो भाग निकले थे कहा, मुझे पार चले जाने दो; कि गिलद के आदमी उस से कहते, क्या तुम एक एफ्रैम-वंशज हो? यदि उसने कहा, नहीं;
६ तब उन्होंने उस से कहा, अब बोलो शिब्बोलथ: और वह कहता, सिब्बोलथ: क्योंकि वह उसका सही उच्चारण नहीं कर पता था। तब वह उसे लेकर उसे यर्दन के पारण-स्थानों में मार डालते थे: और उस समय एफ्रैम-वंशजों में से बयालीस हज़ार गिरे।
७ और यिफ्ता ने इस्राएल का न्याय छह वर्ष किया, तब वह गिलद-वंशज यिफ्ता चल बसा, और गिलद के नगरों में से एक में दफ़ना दिया गया था।
८ और उसके पश्चात बेतलेहम के इब्ज़न ने इस्राएल का न्याय किया।
९ और उसके पास तीस बेटे थे और तीस बेटियाँ, जिन्हें उसने बाहर भेज दिया, और अपने बेटों के लिए तीस बेटियाँ बाहर से ले लीं। और उसने इस्राएल का न्याय सात वर्ष किया।
१० तब इब्ज़न चल बसा, और बेतलेहम में दफ़ना दिया गया था।
११ और उसके पश्चात एलोन एक ज़बूलून-वंशज ने इस्राएल का न्याय किया; और उसने इस्राएल का न्याय दस वर्ष किया।
१२ और एलोन ज़बूलून-वंशज चल बसा, और उसे ज़बूलून के देश में आयलोन में दफ़ना दिया गया था।
१३ और उसके पश्चात एक पिराथुनि, हिलल के बेटे अब्दोन ने इस्राएल का न्याय किया।
१४ और उसके पास चालीस बेटे थे और तीस पोते जो सत्तर युवा गधों पर सवारी करते थे: और उसने इस्राएल का न्याय आठ वर्ष किया।
१५ और उस पिराथुनि, हिलल का बेटा अब्दोन चल बसा, और अमालेक-वंशजों के पहाड़ में एफ्रैम की भूमी में पिराथुन में दफ़ना दिया गया था।
तेरहवाँ अध्याय।
१ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु के दृष्टि में दोबारा बुराई कर दी; और प्रभु ने उन्हें चालीस बरस पलिश्तिमवासियों के हाथ में प्रदान कर दिया।
२ और दान-वंशजों के परिवार में से ज़ोरह का कोई एक पुरुष था, जिसका नाम मनोह था; और उसकी पत्नी बाँझ थी, और जनती नहीं थी।
३ और प्रभु-दूत ने उस स्त्री को दर्शन दिया और उस से कहा, देखो अब तुम बाँझ हो, और जनती नहीं हो: परन्तु तुम गर्भवति हो जाओगी, और एक बेटा जनोगी।
४ अब इसलिए सावधान हो जाओ, कृपया कर के, न अंगूर-रस पीना न ही मदिरा, और कोई भी अस्वच्छ वस्तु मत खा लेना:
५ क्योंकि लो भई, तुम गर्भवति हो जाओगी, और एक बेटा जनोगी: और उसके सर पर कोई उस्तरा नहीं फिरेगा: क्योंकि वह बच्चा गर्भ से ही ईश्वर के प्रति एक नज़ीर होगा: और वही इस्राएल का पलिश्तिमवासियों के हाथ से बचाव करना आरम्भ करेगा।
६ तब वह स्त्री आई और उसने अपने पति को बताया, कहते हुए, ईश्वर के एक बन्दे ने मेरे पास आगमन किया, और बन्दे का मुखमण्डल तो ईश्वर के एक दूत के मुखमण्डल समान था, बहुत ही भयानक: परन्तु मैंने उन से पूछा नहीं कि आप कहाँ से पधारें हैं। न ही बन्दे ने मुझे अपना नाम बताया:
७ परन्तु उन्होंने मुझ से कहा, देखो, तुम गर्भवति हो जाओगी, और एक बेटा जनोगी; और अब न अंगूर-रस पीना न ही मदिरा, न ही कोई भी अस्वच्छ वस्तु खाना: क्योंकि वह बच्चा गर्भ से ही लेकर अपनी मृत्यु के दिवस तक ईश्वर के प्रति एक नज़ीर होगा।
८ तब मनोह ने प्रभु से विनती की और कहा, हे मेरे प्रभु, जिन ईश्वर-बन्दे को आपने हमारे पास भेजा था पुनः हमारे पास आ जाए, और हमें सिखा दे कि हम उस जन्म लेने वाले बच्चे के साथ क्या करें।
९ और ईश्वर ने मनोह की वाणी का श्रवण कर लिया; और ईश्वर-दूत ने उस स्त्री के पास पुनः आगमन किया जैसे वह खेत में बैठी थी: परन्तु उसका पति मनोह उसके साथ नहीं था।
१० और उस स्त्री फुर्ती से भागी, और अपने पति को बताया, और उस से कहा, देखें, वह पुरुष मुझे प्रकट हुए हैं, जो मेरे पास उस दिन आए थे।
११ और मनोह उठा, और अपनी पत्नी के पीछे-पीछे गया, और पुरुष के पास आ पहुँचा और पुरुष से कहा, क्या आप ही वह पुरुष हैं जो इस स्त्री से बोले थे? और पुरुष ने कहा, मैं हूँ।
१२ और मनोह ने कहा, अब अपने शब्दों की होनी घट जाने दें। हम किस रीति से उस बालक के साथ करें, और हम उसके साथ कैसे करें?
१३ और प्रभु-दूत ने मनोह से कहा, उस सभी के प्रति जो मैंने इस स्त्री से कहा है इसे सावधानी बरत लेने देना।
१४ जो कुछ भी दाख-लता से आता है यह नहीं खा सकती है, न ही इसे अंगूर-रस या मदिरा पीने देना, न ही कोई भी अस्वच्छ वस्तु खाने देना: उस सभी का जो मैं इसे आदेश दे रहा हूँ पालन कर लेने देना।
१५ और मनोह ने प्रभु-दूत से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, हम आपको रोके रखें जब तक कि हम आप के लिए एक हलवान नहीं तैयार कर देते हैं।
१६ और प्रभु-दूत ने मनोह से कहा, भले ही तुम मुझे रोके रखो, मैं तुम्हारी रोटी में से नहीं खाऊँगा: और यदि तुम एक जला-चढ़ावा चढ़ाते हो, तुम्हें अवश्य ही उसे प्रभु के प्रति चढ़ाना होगा। क्योंकि मनोह जानता न था कि वह प्रभु के एक दूत थे।
१७ और मनोह ने प्रभु के दूत से कहा, आपका नाम क्या है, ताकि जब आप के कथन साकार होंगे हम आपका सम्मान कर दें?
१८ और प्रभु के दूत ने उस से कहा, तुम मेरे नाम के विषय में ऐसे क्यों पूछ रहे हो, यह देखते हुए कि वह गुप्त है?
१९ तो मनोह ने एक भोज-चढ़ावे के साथ एक हलवान लिया, और उसे एक पत्थर पर प्रभु के प्रति चढ़ा दिया: और दूत ने अचम्भित कर दिया; और मनोह और उसकी पत्नी देखते ही रह गए।
२० क्योंकि यह होने को आया, जब बलिवेदी पर से वह लपट ऊपर स्वर्ग की ओर गई, कि प्रभु-दूत ने बलिवेदी की लपट में आरोहण कर लिया। और मनोह और उसकी पत्नी यह देखते ही रह गए, और धरती पर अपने चेहरों के बल गिर पड़े।
२१ परन्तु प्रभु-दूत मनोह और उसकी पत्नी को अब और नहीं दिखे। तब मनोह जान गया कि वही प्रभु के एक दूत थे।
२२ और मनोह ने अपनी पत्नी से कहा, हम तो अवश्य ही मर जाएँगे क्योंकि हम ने ईश्वर को देख लिया है।
२३ परन्तु उसकी पत्नी ने उस से कहा, यदि प्रभु हमें मारना ही चाहते तो उन्होंने हमारे हाथों एक जला-चढ़ावा और एक भोज-चढ़ावा ग्रहण नहीं किया होता, न ही उन्होंने हमें यह सभी दिखाया होता, न ही इस समय हमें इन जैसी बातों को बताया होता।
२४ और उस स्त्री ने एक बेटा जना, और उसका नाम शमशोन पुकारा: और वह बालक बड़ा हुआ, और प्रभु ने उसे आशीष दिया।
२५ और प्रभु के भावात्मा ने उसे ज़ोरह और एशतोल के बीच दान के शिविर में समय-समय पर उत्तेजित करना आरम्भ कर दिया।
चौदहवाँ अध्याय।
१ और शमशोन नीचे तिम्ना चला गया, और तिम्ना में पलिश्तिमवासियों की बेटियों में से एक स्त्री को देखा।
२ और वह ऊपर आ पहुँचा और अपने पिता और अपनी माता को बताया, और कहा, मैंने तिम्ना में पलिश्तिमवासियों की बेटियों में से एक स्त्री को देखा है: इसलिए अब उसे मुझे पत्नी के लिए दिलवा दें।
३ तब उसके पिता और उसकी माता ने उस से कहा, मेरे सभी लोगों के बीच या तुम्हारे भाई-जनो की बेटियों के बीच क्या कभी भी कोई स्त्री नहीं होती है क्या, कि तुम उन बेख़तनित पलिश्तिमवासियों में से एक पत्नी लेने जा रहे हो? और शमशोन ने अपने पिता से कहा, उसे मेरे लिए ले आएँ; क्योंकि वह मुझे भला प्रसन्न करती है।
४ परन्तु उसके पिता और उसकी माता जानते न थे कि यह प्रभु की ओर से था, कि वह पलिश्तिमवासियों के विरुद्ध एक अवसर ढूँढ रहे थे: क्योंकि उस समय इस्राएल पर पलिश्तिमवासियों का अधिराज्य था।
५ तो शमशोन और उसका पिता और उसकी माता नीचे तिम्ना चले दिए, और तिम्ना के अंगूर-खेतों के पास आ पहुँचे: और देखो तो, एक युवा शेर उसके विरुद्ध दहाड़ पड़ा!
६ और प्रभु के भावात्मा उस पर शक्ती के साथ आ पड़े, और उसने उसे फाड़ डाला जैसे कि वह एक हलवान को फाड़ डालता, और उसके पास उसके हाथ में कुछ भी न था: परन्तु उसने न ही अपने पिता को न ही अपनी माता को बताया कि उसने क्या कर डाला था।
७ और वह नीचे चला गया, और उसने उस स्त्रीसे बात की; और उसने शमशोन को भला प्रसन्न कर दिया।
८ और कुछ समय पश्चात वह उसे लेने के लिए वापस लौटा, और वह उस शेर के शव को देखने के लिए परे मुड़ चला: और देखो तो, उस शेर के शव में एक मधुमक्खियों का झुण्ड और मधु था।
९ और उसने उस में से अपने हाथों में ले लिया, और खाता हुआ चलता चला गया, और अपने पिता और माता के पास पहूँच कर उस ने उन्हें दे दिया, और उन्होंने खा लिया: परन्तु उसने उन्हें बताया नहीं कि उसने वह मधु शेर के शव में से बाहर ले लिया था।
१० तो उसका पिता उस स्त्रीके पास नीचे गया: और शमशोन ने वहीं एक भोज बनाया; क्योंकि इसी ही प्रकार वह युवा पुरुष किया करते थे।
११ और यह होने को आया, जब उन्होंने उसे देखा, कि वह उसके साथ होने के लिए तीस साथी ले आए।
१२ और शमशोन ने उनसे कहा, मैं अब तुम्हारे सामने एक पहेली बोलूँगा: यदि तुम अवश्य ही उसे पता लगाकर मुझे भोज के सात दिनो के अंदर-अंदर बता दोगे, तब मैं तुम्हें तीस ओढ़ने और वस्त्रों के तीस जोड़े दे दूँगा:
१३ परन्तु यदि तुम उसे मुझे नहीं बता पाओगे, तो तब तुम मुझे तीस ओढ़ने और वस्त्रों के तीस जोड़े दे दोगे। और उन्होंने उस से कहा, अपनी पहेली बुझाओ ताकि हम उसे सुनें।
१४ और उसने उन से कहा, खाने वाले में से बाहर निकला भोजन, और शक्तिमान में से बाहर निकली मिठास। और वह तीन दिनो तक उस पहेली का अर्थ नहीं बता पाए।
१५ और सातवें दिन यह होने को आया, कि उन्होंने शमशोन की पत्नी से कहा, अपने पति को लुभा ले ताकि वह हमें यह पहेली बता दे, कहिं हम तुझे जला डालें और तेरे पिता के घर को अग्नी के साथ: तूने हमारे पास जो है ले लेने के लिए हमें बुलाया है? ऐसा ही नहीं है क्या?
१६ और शमशोन की पत्नी उसके सामने रोई और कहा, तुम तो बस मुझ से घृणा ही करते हो, और मुझ से प्रेम नहीं करते: तुम ने तो मेरे लोगों की सन्तानों को एक पहेली सुना दी है और उसे मूझे नहीं बताया। और उसने उस से कहा, देख लो, मैंने उसे न ही अपने पिता को न ही अपनी माता को बताया है, और क्या मैं वह तुम्हें बता दूँ?
१७ और वह उसके सामने उन सातों दिन रोई, जैसे वह भोज चल रहा था: और यह होने को आया सातवें दिन, कि उसने उसे बता दिया, क्योंकि उसने उसे घोरता से सता दिया था: और उसने वह पहेली अपने लोगों की सन्तानों को बता दी।
१८ और सातवें दिन उस नगर के आदमियों ने सूर्य के ढाल जाने से पहले उस से कहा, वह क्या है जो मधु से मधुर है? और वह क्या है जो शेर से भी शक्तिशाली है? और उसने उनसे कहा, यदि तुम ने मेरी बछिया के साथ हल न जोता होता, तुम मेरी पहेली का पता नहीं लगा पाते।
१९ और प्रभु के भावात्मा उस पर आ पड़े, और वह नीचे अश्कलोन चला गया, और उन में से तीस आदमियों को मार डाला, और उन्हें लूट लिया, और उन्हें वस्त्रों के जोड़े दे दिए जिन्होंने पहेली का अर्थ बता दिया था। और उसका क्रोध सुलग उठा था, और वह ऊपर अपने पिता के घर चला गया।
२० परन्तु शमशोन की पत्नी को उसके साथी को दे दिया गया था, जिसका उसने अपने मित्र जैसा प्रयोग किया था।
पंद्रहवाँ अध्याय।
१ परन्तु कुछ समय पश्चात ही यह होने को आया, गेहूँ की कटाई के समय में, कि शमशोन एक हलवान के साथ अपनी पत्नी से भेंट करने गया: और उसने कहा, मैं अपनी पत्नी के पास भीतर कक्ष में अन्दर जाऊँगा। परन्तु उसके पिता ने उसे भीतर जाने की अनुमती नहीं दी।
२ और उसके पिता ने कहा, मैंने तो सच में सोचा कि तुमने तो उस से बहुत ही घृणा कर ली है; इसलिए मैंने उसे तुम्हारे साथी को दे दिया: क्या उसी छोटी बहन उस से भी सुंदर नहीं है क्या? उसे ले लो, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे उसके स्थान पर।
३ और शमशोन ने उनके विषय में कहा, अब मैं पलिश्तिमवासियों की तुलना में अधिक निर्दोष हूँगा, भले ही मैं उनके साथ बुराई कर दूँ।
४ और शमशोन ने जाकर तीन सौ लोमड़ियाँ पकड़ लीं, और बत्तियाँ लीं, और पूँछ को पूँछ की ओर मोड़ दिया, और उन दोनो पूँछों के बीच, मध्य में एक बत्ती लगा दी।
५ और जब उसने उन बत्तियों को आग लगा दी थी, उसने उन्हें पलिश्तिमवासियों के खड़े अनाज में छोड़ दिया, और जला डाला, दोनो गट्ठों के ढेरों को, और खड़े अनाज को भी, अंगूर-खेतों और जैतूनों के साथ।
६ तब उन पलिश्तिमवासियों ने कहा, यह किसने किया है? और उन्होंने उत्तर दिया उस तिम्नी के दामाद शमशोन ने, क्योंकि उसने उसकी पत्नी लेकर उसे उसके साथी को दे दी थी। और उन पलिश्तिमवासियों ने आकर, उस स्त्री को और उसके पिता को अग्नी से जला डाला।
७ और शमशोन ने उनसे कहा, भले ही तुम ने यह कर दिया है, तब भी मेरा तुम से प्रतिषोध लिया जाएगा, और उसके पश्चात मैं रुक जाऊँगा।
८ और उसने उन्हें एक महा संघार से कूल्हा और जाँघ पीट डाला: और वह नीचे चला गया और एतम चट्टान की चोटी पर बस गया।
९ तब वह पलिश्तिमवासी ऊपर गए, और यहूदा में पड़ाव डाला, और स्वयं को लेही में फैला दिया।
१० आयर यहूदा के पुरुषों ने कहा, तुम हमारे विरुद्ध ऊपर क्यों चले आए हो भई? और उन्होंने उत्तर दिया, शमशोन को बाँधने हम ऊपर आए हैं, उसके साथ वैसा ही करने जैसा उसने हमारे साथ किया है।
११ तब यहूदा के तीन हज़ार पुरुष एतम चट्टान की चोटी पर ऊपर चले गए, और शमशोन से कहा, तुम जाने नहीं हो क्या कि पलिश्तिमवासी हम पर शासक हैं? यह क्या है जो तुमने हमारे साथ कर दिया है? और उसने उनसे कहा, जैसा उन्होंने मेरे साथ किया, वैसा ही मैंने उनके साथ कर दिया है।
१२ और उन्होंने उस से कहा, हम तुम्हें बाँधने आए हैं, ताकि हम तुम्हें पलिश्तिमवासियों के हाथ में प्रदान कर दें। और शमशोन ने उन से कहा, मुझे प्रतिज्ञा दो कि तुम स्वयं ही मुझ पर नहीं टूट पड़ोगे।
१३ और उन्होंने उस से कहम कहते हुए, नहीं; परन्तु हम तुम्हें कस कर बाँधेंगे, और तुम्हें उनके हाथ में प्रदान कर देंगे: परन्तु अवश्य ही हम तुम्हें नहीं मार डालेंगे। और उन्होंने उस दो नए रस्सों से बाँध दिया, और उसे उस चट्टान पर से ले आए।
१४ और जब वह लेही आ पहूँचा था, तो पलिश्तिमवासी उसके विरुद्ध चिल्ला पड़े: और प्रभु का भावात्मा उस पर बलपूर्वकता से आ पड़ा, और वह रस्से जो उसकी बाहों पर थे आग से जली हुई पटसन के समान बन गए, और उसके बन्धन उसके हाथों पर से खुल गए।
१५ और उसने एक गधे की नई जबड़े की हड्डी पाई, और उसने अपना हाथ बढ़ा कर उसे ले लिया, और उस से एक हज़ार आदमियों को मार डाला।
१६ और शमशोन ने कहा, एक गधे के जबड़े की हड्डी से ही, ढेर पर ढेर, एक गधे के जबड़े की हड्डी से ही मैंने एक हज़ार आदमियों को मार डाला है।
१७ और यह होने को आया, जब उस ने बोलने का अन्त कर दिया था, कि उसने वह जबड़े की हड्डी अपने हाथ में से बाहर फैंक दी, और उस स्थान का नाम रमतलेही पुकारा।
१८ और उसे घोर प्यास लगी, और उसने प्रभु को पुकार कर कहा, आपने यह महा बचाव अपने सेवक के हाथ में प्रदान कर दिया है: और अब क्या मैं प्यास के मारे मर जाऊँ, और इन बेख़तनितों के हाथ में पड़ जाऊँ?
१९ परन्तु ईश्वर ने जबड़े में जो एक खोखला स्थान था विभाजित कर दिया, और उस में से बाहर पानी निकल आया; और जब उसने पी लिया था, उसका भावात्मा पुनः लौट आया, और वह सजीवित हो उठा: इसी कारण वश उसने उसका नाम एनअक्कोरे पुकारा, जो इस दिन तक लेही में है।
२० और उसने पलिश्तिमवासियों के दिनो में बीस वर्ष इस्राएल का न्याय किया।
सोलहवाँ अध्याय।
१ तब शमशोन गाज़ा चला गया, और वहाँ एक वैश्या देखी, और उसके पास चला गया।
२ और गाज़ावासियों को यह बता दिया गया था, कहते हुए, शमशोन यहाँ आ गया है। और उन्होंने उसे घेर लिया, और नगर के दरवाज़े पर उसके लिए सारी रात घात लगाए वह बैठे रहे, और सारी रात चुप-चाप ही रहे, कहते हुए, प्रातःकाल में, जब दिन हो जाएगा, हम उसे मार डालेंगे।
३ और शमशोन आधी रात तक लेटा हुआ था, और आधी रात में उठ कर उसने नगर के दरवाज़े के द्वार, और वह दो चौखटें लीं, और उनके साथ चला गया, फाटक और सब इत्यादि, और उन्हें अपने कन्धों पर रख कर, उन्हें हेब्रोन के सामने वाली एक पहाड़ी की चोटी तक उठा ले गया।
४ और यह होने को आया बाद में, कि उसने सोरेक की घाटी में एक स्त्रीके साथ प्रेम किया, जिसका नाम देलीला था।
५ और पलिश्तिमवासियों के अध्यक्ष उसके पास आ पहुँचे, और उस से कहा, उसे लुभा कर देख लो कि किस में रखी है इसकी महा शक्ती, और कि हम किन रीतियों से इसे परास्त कर सकें, ताकि हम इसे बाँध कर इसे उत्पीड़ित कर दें: और हम तुम्हें हम में से प्रत्येक ग्यारह सौ चाँदी के सिक्के दे देगा।
६ और देलीला ने शमशोन से कहा, मुझे बता दो, मैं विनती करती हूँ तुमसे, किस में रखी है तुम्हारी महा शक्ती, और किस के साथ तुम बाँध दिए जा सको तुम्हें उत्पीड़ित कर देने हेतु।
७ और शमशोन ने उस से कहा, यदि वह मुझे सात नई-नई ताँतों से बाँध देंगे जो कभी सुखाई नहीं गईं थीं, तब मैं दुर्बल हो जाऊँगा, और अन्य आदमियों जैसा बन जाऊँगा।
८ तो पलिश्तिमवासियों के अध्यक्ष उसके पास सात नई-नई कभी न सुखाई गईं ताँतें ले आए, और उसने उसे उनके साथ बाँध दिया।
९ अब कक्ष में ही आदमी उस स्त्रीके साथ घात लगाए बैठे थे। और उस स्त्रीने उस से कहा, पलिश्तिमवासी तुम पर टूट पड़ रहे हैं शमशोन! और उसने उन ताँतों को तोड़ डाला, जैसे पटसन का एक धागा अग्नी को छूते ही टूट जाता है। तो उसकी शक्ती का पता नहीं चल पाया।
१० और देलीला ने शमशोन से कहा, देख लो, तुम ने मेरा व्यंग बना दिया है, और मुझ से झूठी बातें बोली हैं: अब बता दो मुझे, मैं तुमसे विनती करती हूँ, किस के साथ तुम बाँधे जा सकते हो।
११ और उसने उस से कहा, यदि वह मुझे नए रस्सों से बाँध देंगे जिन से काम न लिया गया हो, तब मैं दुर्बल हो जाऊँगा, और अन्य आदमियों जैसा बन जाऊँगा।
१२ इसलिए देलीला ने नए रस्से लिए, और उसे उनसे बाँध दिया, और उस से कहा, पलिश्तिमवासी तुम पर टूट पड़ रहे हैं शमशोन! और कक्ष में ही आदमी घात लगाए बैठे थे। और उसने उन्हें अपनी बाँहों पर से एक धागे के समान तोड़ डाला।
१३ और देलीला ने शमशोन से कहा, अब तक भी तुम ने तो मेरा व्यंग ही बना दिया है, और मुझ से झूठी बातें बोली हैं:बता दो मुझे, किस के साथ तुम बाँधे जा सकते हो। और उसने उस से कहा, यदि तुम मेरे सर की सात लटों को तानों से बुन दो।
१४ और उसने उसे खूँटे से जकड़ दिया, और उस से कहा, पलिश्तिमवासी तुम पर टूट पड़ रहे हैं शमशोन! और वह अपनी निद्रा से जाग उठा, और जुलाहे की धरन, खूँटे के साथ, और ताने समेत चला गया।
१५ और उसने उस से कहा, तुम कैसे कह सकते हो, मैं तुम से प्रेम करता हूँ, जब तुम्हारा हृदय तो मेरे साथ ही नहीं है? तुम ने इन तीनों बार मेरा व्यंग बना दिया है, और मुझे नहीं बताया है कि तुम्हारी शक्ती किस में बसती है।
१६ और यह होने को आया, जब वह दिन-प्रति-दिन उस पर अपने शब्दों से दबाव डालती रही और उसे सताती रही, कि उसकी आत्मा तंग आ गई मरने तक भी;
१७ कि उसने उसे अपने हृदय की सम्पूर्ण बात बता दी, और उस से कहा, मेरे सर पर कोई भी उस्तरा नहीं फिरा है; क्योंकि मैं अपनी माँ के गर्भ से लेकर ही ईश्वर के प्रति एक नज़ीर रहा हूँ: यदि मुझ पर उस्तरा चल जाए, तब मेरी शक्ती मुझ से चली जाएगी, और मैं दुर्बल हो जाऊँगा, और किसी भी अन्य आदमी जैसा बन जाऊँगा।
१८ और जब देलीला ने देखा कि उसने उसे अपना सम्पूर्ण हृदय बता दिया था, तो उसने भिजवाया और पलिश्तिमवासियों के अध्यक्षों को बुलवाया, कहते हुए, इस एक बार आ जाओ क्योंकि उसने मुझे अपना सम्पूर्ण हृदय बता दिया है। तब
पलिश्तिमवासियों के वह अध्यक्ष उसके पास आ गए, उनके हाथ में वह पैसा लिए।
१९ और उसने उसे अपने घुटनों पर सुला दिया; और उसने एक आदमी को बुलवाया, और उसके सर पर से उन सात लटों पर उस्तरा फिरवा डाला; और वह उसे उत्पीड़ित करने लगी, और उसका बल उसके पास से चला गया।
२० और उसने कहा, पलिश्तिमवासी तुम पर टूट पड़ रहे हैं शमशोन! और वह अपनी निद्रा में से जाग उठा, और कहा, मैं पहले समयोंनुसार बाहर चला जाऊँगा, और स्वयं झटक दूँगा। और वह जानता न था कि प्रभु उस से प्रस्थान कर चले थे।
२१ परन्तु उन पलिश्तिमवासियों ने उसे पकड़ लिया, और उसकी आँखें खोद डालीं, और उसे नीचे गाज़ा ले आए, और उसे पीतल की बेड़ियों से बाँध दिया; और उसने कारावास में चक्की ही पीसी।
२२ परन्तु उसके सर के बाल पुनः उगने लग गए उस पर उस्तरा फिर जाने के पश्चात।
२३ तब पलिश्तिमवासियों के अध्यक्षों ने उन्हें उनके ईश्वर दगोन के प्रति एक महा बलि चढ़ाने हेतु, और हर्ष मनाने हेतु, एक साथ एकत्रित किया: क्योंकि उन्होंने कहा, हमारे ईश्वर ने हमारे शत्रु शमशोन को हमारे हाथ में प्रदान कर दिया है।
२४ और जब लोगों ने उसे देखा, उन्होंने अपने ईश्वर की प्रशन्सा की: क्योंकि उन्हों कहा, हमारे ईश्वर ने हमारे शत्रु को और हमारे देश के विनाशक को हमारे हाथों में प्रदान कर दिया है, जिस ने हम में से कईयों को मार डाला था।
२५ और यह होने को आया, जब उनके मन मगन थे, कि उन्होंने कहा, शमशोन को बुलवा लो भई, ताकि वह हमारे लिए एक तमाशा बनाए। और उन्होंने शमशोन को उसके कारावास में से बाहर बुलवा लिया; और उसने उनके लिए तमाशा बना दिया: और उन्होंने उसे स्तम्भों के बीच स्थित कर दिया था।
२६ और शमशोन ने उस छोकरे से कहा जो उसका हाथ पकड़े था, मुझे उन खम्बों को जिन पर यह घर खड़ा है छू लेने दे, ताकि मैं उन पर सहारा ले लूँ।
२७ अब वह घर आदमियों और स्त्रियों से भरा हुआ था; और पलिश्तिमवासियों के सभी अध्यक्ष वहीं प्रस्तुत थे; और छत पर लगभग तीन हज़ार आदमी और स्त्रियाँ थीं जो शमशोन का तमाशा बनाना देख रहे थे।
२८ और शमशोन ने प्रभु को पुकारा, और कहा, हे प्रभु ईश्वर, मेरा स्मरण करें, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, और मुझे सशक्त कर दें, मैं विनती करता हूँ आपसे, बस केवल इस एक बार ही हे ईश्वर, ताकि पलिश्तिमवासियों पर मेरी दोनो आँखों का प्रतिषोध इसी समय ही ले लिया जाए।
२९ और शमशोन ने उन दो बीच के स्तम्भों को पकड़ा जिन पर वह घर खड़ा था, और जिन पर वह उठाया हुआ था, एक उसके दाएँ हाथ से, और दूसरा उसके बाएँ हाथ से।
३० और शमशोन ने कहा, मुझे पलिश्तिमवासियों के साथ ही मर जाने दो। और उसने अपने सम्पूर्ण बल से स्वयं को झुका दिया; और वह घर उन अध्यक्षों पर, और उन सभी लोगों पर जो वहीं भीतर थे गिर गया। तो वह मृत जिन्हें उसने अपनी मृत्यु पर मार डाला था उनसे अधिक थे जिन्हें उसने अपने जीवन में मार डाला था।
३१ तब उसके भाई-जन और उसके पिता का सम्पूर्ण घराना आए, और उसे लेकर ले आए, और उसे ज़ोरह और एश्तोल के बीच दफ़ना दिया उसके पिता मनोह के दफ़नाने के स्थान में ही। और उसने इस्राएल का न्याय बीस साल किया।
सत्रहवाँ अध्याय।
१ और एफ्रैम पहाड़ का एक पुरुष था जिसका नाम मिका था।
२ और उसने अपनी माता से कहा, वह ग्यारह सौ चाँदी के शेक्ल जो आपसे ले लिए गए थे, जिनके विषय में आपने श्राप दिया, और मेरे कानों में भी बोली थीं, देखें तो, वह चाँदी तो मेरे साथ ही है; मैंने उसे ले लिया था। और उसकी माँ ने कहा, मेरे बेटे प्रभु से आशीष पा लो तुम।
३ और जब उसने उन ग्यारह सौ चाँदी के शेक्लों को अपनी माँ को वापस लौटा दिया था, तो उसकी माँ ने कहा, मैंने यह चाँदी तो यह अपने बेटे के लिए अपने हाथ से पूर्णतः प्रभु को समर्पित कर दी थी, एक उत्कीर्ण की गई प्रतिमा और एक ढलवाँ प्रतिमा बना देने हेतु: इसलिए अब मैं उसे तुम्हें वापस लौटा दूँगो।
४ तथापि उसने वह पैसा अपनी माँ को वापस लौटा दिया; और उसकी माँ ने उस चाँदी में से दो सौ शेक्ल लेकर उन्हें धातु-पिघलाने वाले को दे दिए, जिस ने उस में से एक उत्कीर्ण की गई प्रतिमा और एक ढलवाँ प्रतिमा निर्मित कर दी: और वह मिका के घर में थीं।
५ और उस पुरुष मिका के पास एक ईश्वरों का घर था, और एक एफद ,और तेरफिम बनाए, और अपने बेटों में से एक को नियुक्त कर दिया, जो उसका पुरोहित बन गया।
६ उन दिनो इस्राएल में कोई राजा नहीं था, बल्कि प्रत्येक पुरुष वही करता था जो कुछ उसकी अपनी ही दृष्टि में सही था।
७ और बेतलेहमयहूदा का एक युवा पुरुष यहूदा के परिवार में से था, जो एक लेवी-वंशज था, और वह वहीं अल्पवास किया करता था।
८ और उस पुरुष ने बेतलेहमयहूदा से नगर में से बाहर प्रस्थान किया जहाँ कहिं भी वह अल्पवास हेतु कोई स्थान पा सके: और वह एफ्रैम के पहाड़ आ पहुँचा मिका के घर, यात्रा करता हुआ।
९ और मिका ने उस से कहा, कहाँ से पधारे हो तुम? और उसने उस से कहा, मैं एक बेतलेहमयहूदा का लेवी-वंशज हूँ, और मैं जहाँ कहिं भी मूझे अल्पवास हेतु कोई स्थान मिले वहीं जा रहा हूँ।
१० और मिका ने इस से कहा, मेरे साथ निवास कर लो, और मेरे प्रति एक पिता और एक पुरोहित बन जाओ, और मैं तुम्हें प्रति वर्ष दस शेक्ल दूँगा, और वस्त्रों का जोड़ा, और तुम्हारी भोजन सामग्री। तो वह लेवी-वंशज भीतर चला गया।
११ और वह लेवी-वंशज उस पुरुष के साथ बस जाने में संतुष्ट था; और वह युवा पुरुष उसके प्रति उसके बेटों में से एक जैसा ही था।
१२ और मिका ने उस लेवी-वंशज को नियुक्त कर दिया; और वह युवा पुरुष उसका पुरोहित बन गया, और वह मिका के घर में था।
१३ तब मिका ने कहा, अब मैं जान गया हूँ कि प्रभु मेरे साथ भला करेंगे, क्योंकि मेरे पास मेरे लिए ही एक लेवी-वंशज है।
अट्ठारहवाँ अध्याय।
१ उन दिनो में इस्राएल में कोई राजा न था: और उन दिनो में दान-वंशजों की प्रजाति अपने लिए निवास करने हेतु एक विरासत ढूँढ रही थी; क्योंकि उस दिन तक इस्राएल की प्रजातियों के बीच उनकी समस्त विरासत उन्हें नियुक्त नहीं हुई थी।
२ और दान की सन्तानों ने अपने पारिवर में से पाँच आदमियों को अपनी सीमाओं से, पराक्रमी पुरुषों को ही, ज़ोरह से और एश्तोल से, भूमी की गुप्तचरी करने और उसका भेद निकालने हेतु भेजा; और उन्होंने उनसे कहा, चले जाओ, भूमी की गुप्तचरी कर लो: जो जब एफ्रैम पहाड़ आ पहुँचे थे, मिका के घर पर, वह वहीं ठहर गए।
३ जब वह मिका के घर के पास आए, उन्होंने उस लेवी-वंशज उस युवा पुरुष की वाणी पहचान ली: और वह वहीं मुड़ गए, और उस से कहा, तुम्हें कौन ले आया यहाँ? और क्या करते हो तुम इस स्थान में/ और क्या हैं तुम्हारे पास यहाँ?
४ और उसने उनसे कहा, मिका ने मेरे साथ ऐसा-ऐसा व्यवहार किया है भई, और मुझे नौकरी दे दी है, और मैं उसका पुरोहित हूँ।
५ और उन्होंने उस से कहा, हम विनती करते हैं तुम से, कि ईश्वर से पूछ लो, ताकि हम जान लें कि यदि वह पथ जिस पर हम जा रहे हैं, मंगलमय होगा कि नहीं।
६ और उस पुरोहित ने उनसे कहा, शान्ति से चले जाओ: प्रभु के सामने ही तुम्हारा पथ है जिस पर तुम जा रहे हो।
७ तब उन पाँच व्यक्तियों ने प्रस्थान कर लिया, और लेश आ पहुँचे, और उन लोगों को देखा जो वहीं थे, कि वह कैसे निश्चिंत होकर निवास कर रहे थे, सिदोनवासियों की रीतिनुसार, शान्त और सुरक्षित; और उस भूमी में कोई भी न्यायाध्यक्ष न था, जो किसी को भी किसी भी बात में लाज्जित करे; और वह सिदोनवासियों से दूर थे, और उनका किसी भी व्यक्ति से कोई भी मेल-जोल न था।
८ और वह ज़ोरह और एश्तोल अपने भाई-जनो के पास आ पहुँचे: और उनके भाई-जनो ने उन से कहा, क्या कहते हो तुम भई?
९ और उन्होंने कहा, उठो, ताकि हम उनके विरुद्ध चढ़ाई कर लें: क्योंकि हमने वह भूमी देख ली है, और देखो तो, वह बहुत ही अच्छी है: और तुम चुप्पी लिए बैठे हो? भई आलसी मत बनो, अंदर जाकर उस भूमी पर अधिकार करने के लिए।
१० जब तुम जाओगे, तुम एक सुरक्षित गण के पास आ पहुँचोगे, और एक बड़ी भूमी में: क्योंकि ईश्वर ने वह तुम्हारे हाथों में प्रदान कर दी है; एक स्थान जहाँ धरती की किसी भी वस्तु की कमी नहीं है।
११ और दान-वंशजों के परिवार में से वहाँ से, ज़ोरह से और एश्तोल से, छह सौ युद्ध-शस्त्र बाँधे हुए पुरुष बाहर निकल पड़े।
१२ और उन्होंने चढ़ाई करते हुए किरयतयरिम में पड़ाव डाला: इसी कारण वश उन्होंने उस स्थान को इस दिन तक महनेदान पुकारा: देखो, यह किरयतयरिम के पीछे ही तो है।
१३ और वह वहाँ से पार एफरिम पहाड़ गए, और मिका के घर तक आ पहुँचे।
१४ तब उन पाँच व्यक्तीयों ने उत्तर दिया जो लेश के देश की गुप्तचरी करने गए थे, और अपने भाई-जनो से कहा, क्या तुम जानते हो कि इन्हीं घरों में एक एफद, और तेरफिम, और एक उत्कीर्ण की गई प्रतिमा और एक ढलवाँ प्रतिमा हैं? इसलिए अब विचार कर लो कि तुम्हें क्या करना है।
१५ और वह वहीं मुड़ गए, और उस लेवी-वंशज उस युवा पुरुष के घर पहूँच गए, मिका के घर तक ही, और उसे प्रणाम किया।
१६ और उन छह सौ युद्ध-शस्त्र बाँधे हुए आदमियों ने, जो दान की सन्तानों में से थे, दरवाज़े के प्रवेश के साथ खड़े हो गए।
१७ और वह पाँच व्यक्ति जो देश की गुप्तचरी करने गए थे, वहीं अन्दर आ गए, और उन्होंने उस उत्कीर्ण की गई प्रतिमा को, और उस एफद को, और उस तेरफिम को, और उस ढलवाँ प्रतिमा को ले लिया: और वह पुरोहित दरवाज़े के प्रवेश में उन छह सौ युद्ध-शस्त्र बाँधे हुए आदमियों के साथ ही खड़ा था।
१८ और यही मिका के घर में बीतर गए, और उस उत्कीर्ण की गई प्रतिमा को, और उस एफद को, और उस तेरफिम को, और उस ढलवाँ प्रतिमा को ले गए। तब उस पुरोहित ने उन से कहा, क्या कर रहे हो तुम?
१९ और उन्होंने उस से कहा, शान्त रहो तुम, अपने हाथ को अपने मूँह पर रख दो, और हमारे साथ चले जाओ, और हमारे प्रति एक पिता और एक पुरोहित बन जाओ: तुम्हारे लिए बेहतर है कि तुम एक आदमी के घर के प्रति पुरोहित बनो, या फिर तुम एक प्रजाती और इस्राएल में एक परिवार के प्रती पुरोहित बनो?
२० और उस पुरोहित का हृदय प्रसन्न हो उठा, और उसने वह एफद, और तेरफिम, और उस उत्कीर्ण की गई प्रतिमा को लेकर, लोगों के बीच चला गया।
२१ तो उन्होंने मुड़कर परस्थान कर लिया, और उन छोटे नन्हों को और मवेशियों को भारी समान को अपने आगे कर दिया।
२२ और जब वह मिका के घर से अच्छी दूरी पर थे, मिका के घर के निकट के घरों में जो लोग थे एक साथ एकत्रित हो दान की सन्तानों को पार कर चले।
२३ और वह दान की सन्तानों को चीखे। और उन्होंने अपने चहरे मोड़े, और मिका से कहा, क्या हो गया तुम्हें भई, कि तुम ऐसी टोली के साथ आ गए हो?
२४ और उसने कहा, तुम मेरे ईश्वरों को ले गए हो, जिन्हें मैंने बनाया, और उस पुरोहित को, और तुम चल दिए हो: और मेरे पास अब और क्या बचा रहा है? और यह क्या है जो तुम मुझ से कह रहे हो, क्या हो गया तुम्हें भई?
२५ और दान की सन्तानों ने उस से कहा, तुम्हारी वाणी हमारे बीच न सुनी जाए कहिं क्रोध-भरे बन्दे तुम पर जा चढ़ें, और तुम अपना जीवन खो दो, अपने घराने के जीवनों के साथ।
२६ और दान की सन्तानें अपने पथ पर चलते बने: और जब मिका ने देखा कि वह तो उसके लिए अत्याधिक शक्तिशाली थे, वह मुड़ कर अपने घर वापस लौट चला।
२७ और उन्होंने उन मिका द्वारा बनाई गई वस्तुओं को ले लिया, और उस पुरोहित को जो उसके पास था, और लेश आ पहुँचे, एक शांत और सुरक्षित लोगों के पास: और उन्होंने उन पर तलवार की धार से वार कर डाला, और उस नगर को अग्नी से जला डाला।
२८ और कोई भी बचाने वाला न था, क्योंकि वह सिदोन से दूर था, और उनका किसी भी व्यक्ति से कोई भी मेल-जोल न था; और वह उस घाटी में था जो बेतरहोब के साथ है। और उन्होंने एक नगर का निर्माण किया और उस में बस गए।
२९ और उन्होंने उस नगर का नाम दान रख दिया, अपने पिता दान के नाम पर ही, जो इस्राएल को पैदा हुआ था: परन्तु पहले से उस नगर का नाम लेश था।
३० और दान की सन्तानों ने उस उत्कीर्ण की हुई प्रतिमा को स्थित कर दिया: और मनश्शे के बेटे, गरशोम का बेटा योनातन, वह और उसके बेटे दान की प्रजाती के प्रती पुरोहित थे भूमी के बाँधत्व के दिन तक भी।
३१ और उन्होंने मिका की उत्कीर्ण की गई प्रतिमा को अपने लिए स्थित कर दिया, जिसे उसने बनाया था, उस सारे समय जब ईश्वर का घर शिलो में था।
उन्नीसवाँ अध्याय।
१ और उन दिनो में यह होने को आया, जब इस्राएल में कोई भी राजा नहीं था, कि कोई एक लेवी-वंशज एफ्रैम के पहाड़ के पाशर्व में अल्पवास कर रहा था, जिसने अपने लिए बेतलेहमयहूदा में से एक रखैल ले ली।
२ और उसकी रखैल ने उसके साथ राँडपाने का खेल खेल दिया, और उसे छोड़ कर अपने पिता के घर बेतलेहमयहूदा चली गई, और वहीं पूरे चार महीने थी।
३ और उसका पति उठा, और उसके पीछे-पीछे गया, उस से मित्र-भाव से बोलने हेतु, और उसे वापस लाने हेतु, उसके साथ उसका नौकर और गधों का एक जोड़ा भी: और वह उसे अपने पिता के घर में ले आई: और जब उस कुमारी के पिता ने उसे देखा, उसने उस से मिल कर हर्ष मनाया।
४ और उसके ससुर ने, उस कुमारी के पिता ने, उसे रोक लिया; और वह उसके साथ तीन दिन ठहरे रहा: तो उन्होंने खाया और पीया, और वहीं बस गए।
५ और चौथे दिन यह होने को आया, जब वह सुबह-सुबह जागे, कि वह प्रस्थान करने के लिए उठा: और उस कुमारी के पिता ने अपने दामाद से कहा, रोटी के एक टुकड़े से अपने हृदय को प्रसन्न कर दो और बाद में अपने पथ पर चले जाना।
६ और वह बैठ गए, और उन दोनो ने एक साथ खाया और पीया: क्योंकि उस कुमारी के पिता ने उस पुरुष से कहा था, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, तृप्त रहो और सारी रात रुके रहो, और अपने मन को मगन होने दो।
७ और जब वह पुरुष प्रस्थान हेतु उठा, उसके ससुर ने उस से अनुरोध किया: इसलिए वह पुनः वहीं ठहर गया।
८ और वह सुबह-सुबह पाँचवे दिन उठा प्रस्थान कर लेने के लिए: और उस कुमारी के पिता ने कहा, मैं विनती करता हूँ तुमसे अपने हृदय को प्रसन्न कर दो। और वह दोपहर तक ठहरे रहे, और उन दोनो ने ही खाया।
९ और जब वह पुरुष प्रस्थान हेतु उठा, वह, और उसकी रखैल, और उसका नौकर, तो उसके ससुर ने, उस कुमारी के पिता ने, उस से कहा, देख लो भई, दिन तो अब संध्या की ओर खिंच रहा है, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे रात भर रुके रहो; देखो, दिन की समाप्ति हो रही है, ठहर जाओ यहाँ, ताकि तुम्हारा मन मगन हो; और कल शीघ्रता से ही तुम अपने पथ पर चले जाना, ताकि तुम घर जा सको।
१० परन्तु उस पुरुष की उस रात ठहरने की कोई इच्छा नहीं थी, बल्कि वह उठकर विदा हो लिया, और येबस के सामने, जो कि यरूशलेम है, आ पहुँचा; और उसके साथ दो काठी वाले गधे थे, उसकी रखैल भी उसके साथ थी।
११ और जब वह येबस के साथ थे, दिन बहुत बीत चुका था; और उस नौकर ने अपने मालिक से कहा, आ जाएँ, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, और हम उस यबूसी-वंशजों के नगर में मुड़ जाएँ, और इस में वास करें।
१२ और उसके मालिक ने उस से कहा, हम यहाँ किसी परदेशी के नगर में परे नहीं मुड़ेंगे, जो इस्राएल की सन्तानों में से नहीं है; हम गिब्या पार चले जाएँगे।
१३ और उसने अपने नौकर से कहा, आओ और हम इन स्थानों में से किसी एक के निकट चलते है सारी रात निवास करने हेतु, गिब्या में, या रमा में।
१४ और वह पार चलते चले और अपने पथ पर जाते गए; और सूर्य उन पर नीचे ढल गया था जब वह गिब्या के साथ थे जो बिन्यामिन का है।
१५ और वह वहीं मुड़ गए, अन्दर जाने हेतु और गिब्या में निवास करने हेतु: और जब उसने प्रवेश किया, वह उस नगर की एक सड़क पर नीचे बैठ गया: क्योंकि कोई भी आदमी न था जिसने उन्हें ठहराने के लिए अपने घर में लिया।
१६ और देखो तो, साँझ के समय एक वृद्ध पुरुष खेत में से अपने काम से आ रहा था, जो एफ्रैम पहाड़ का भी था; और वह गिब्या में अल्पवास करता था: परन्तु उस स्थान के लोग बिन्यामिन-वंशज था।
१७ और जब उसने अपनी आँखे उठा ली थीं, उसने उस नगर की सड़क पर एक यात्री-पुरुष को देखा: और उस वृद्ध पुरुष ने कहा, कहाँ जा रहे हो तुम? और कहाँ सी आ रहे हो तुम?
१८ और उसने उस से कहा, हम तो भई एफ्रैम पहाड़ के पाशर्व की ओर बेतलेहमयहूदा से यात्रा कर रहे हैं; और मैं वहीं से हूँ: और मैं बेतलेहमयहूदा गया, परन्तु मैं अब प्रभु के घर जा रहा हूँ; और कोई भी आदमी नहीं है जो मुझे घर में ठहरा रहा है।
१९ इसके अतिरिक्त हमारे गधों के लिए दोनो सूखी घास और चारा है; और रोटी और अंगूर-रस भी है मेरे लिए, और तुम्हारी दासी के लिए, और उस युवक के लिए जो तुम्हारे नौकरों के साथ है: किसी भी वस्तु की कोई कमी नहीं है।
२० और उस वृद्ध पुरुष ने कहा, तुम्हारे साथ शान्ति रहे; तुम्हारी सभी आवश्यकताएँ मुझ पर आ पड़ें; केवल सड़क पर मत वास करो भई।
२१ तो वह उसे अपने घर में ले आया, और गधों को चारा दिया: और उन्होंने अपने पाँव धोए, और खाया और पिया।
२२ अब जैसे वह अपने मनों को मगन कर रहे थे, देखो, उस नगर के आदमी, बलियल के कुछ बेटों ने उस घर को चारों ओर से घेर लिया, और द्वार को खट-खटाया, और उस घर के मालिक उस वृद्ध पुरुष से बोले, कहते हुए, उस आदमी को आगे ले आओ जो तुम्हारे घर में आया हुआ है, ताकि हम उसे जान सकें।
२३ और वह पुरुष, उस घर का मालिक उनके पास बाहर गया, और उनसे कहा, नहीं मेरे भाई-जनो, नहीं भई, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, इतनी दुष्टता मत करो; यह देखते हुए कि यह पुरुष मेरे घर में पधारा हुआ है, यह अवनति मत करो।
२४ देखो, यह रही मेरी बेटी, एक कुँवारन, और उस पुरुष की रखैल; इन्हें मैं अभी बाहर ले आता हूँ, और लग लो इनके साथ, और जो तुम्हें भला सूझे कर लो इनके साथ: परन्तु इस पुरुष के साथ ऐसा नीच काम मत करो।
२५ परन्तु उन लोगों ने उसका श्रवण नहीं किया: तो उस पुरुष ने अपनी रखैल को लिया, और उसे उनके पास आगे ले आया; और उन्होंने उसे जाना, और सारी रात उसके साथ सुबह तक दुर्व्यवहार किया: और जब भोर हुई, तो उन्होंने उसे चले जाने दिया।
२६ तब वह स्त्री दिन के प्रभात में आई, और उस पुरुष के घर के द्वार पर नीचे गिर पड़ी जहाँ उसका प्रभु था, उजाला हो जाने तक।
२७ और उसका प्रभु सुबह उठा, और घर के द्वार खोले, और अपने पथ पर जाने के लिए बाहर निकला: और देखो, वह स्त्री, उसकी रखैल नीचे गिरी पड़ी थे घर के द्वार पर, और उसके हाथ देवढी पर थे।
२८ और उसने उस से कहा, उठ जा, हमें चलना चाहिए। परन्तु किसी ने भी उत्तर नहीं दिया। तब उस पुरुष ने उसे एक गधे पर ऊपर रख दिया, और वह पुरुष उठा, और अपने स्थान चला गया।
२९ और जब वह अपने घर में पहूँच गया था, उसने एक छुरा लिया, और अपनी रखैल को पकड़ कर उसे बारह टुकड़ों में काट डाला, उसकी हड्डियों के साथ ही, और उसे इस्राएल की सभी सीमाओं में भिजवा दिया।
३० और यह ऐसा था कि जिन सभी ने यह देखा, कहा, भई उस दिन से लेकर जब इस्राएल की सन्तानें मिस्र की भूमी में से बाहर निकल आई थीं, ऐसा तो कोई भी काम, न ही किया गया था, न ही देखा गया था, इस दिन तक: विचार करो इसका, परामर्श लो, और अपना मन बोलो।
बीसवाँ अध्याय।
१ तब इस्राएल की समस्त सन्तानें बाहर निकल चलीं, और वह सभा एक ही पुरुष समान एक साथ संग्रहित थी, दान से लेकर बेएरशबा तक भी, गिलद की भूमी के साथ, मिस्पेह में प्रभु के पास।
२ और सभी लोगों के प्रमुख, इस्राएल की समस्त प्रजातियों के ही, ईश्वर के लोगों की सभा में स्वयं प्रस्तुत थे, चार लाख तलवार खींचने वाले पैरों पर सैनिक।
३ अब बिन्यामिन की सन्तानों ने सुना कि इस्राएल की सन्तानें ऊपर मिस्पेह तक जा चुकी थीं। तब इस्राएल की सन्तानों ने कहा, बताओ हमें, कैसी थी यह दुष्टता?
४ और उस मार दी गई स्त्री के पति उस लेवी-वंशज ने उत्तर दिया और कहा, मैं गिब्या में आया जो बिन्यामिन का है, मैं और मेरी रखैल, ठहरने के लिए।
५ और गिब्या के जनो ने मेरे विरुद्ध उठकर, मुझे घर में रात के समय चारों ओर घेर लिया, मुझे मार डालने की सोच से: और मेरी रखैल का उन्होंने बलात्कार कर दिया है, और वह मर गई है।
६ और मैंने अपनी रखैल को लेकर उसे टुकड़ों-टुकड़ों में काट डाला, और उसे इस्राएल की विरासत के समस्त प्रदेश में भेज दिया: क्योंकि उन्होंने इस्राएल में अपराध और अशनता कर दी है।
७ देखो, तुम सभी इस्राएल की सन्तानें हो; दे दें यहाँ अपनी मंत्रणा और परामर्श।
८ और सभी लोग एक पुरुष समान उठ गए कहते हुए, हम में से कोई भी अपने शिविर में नहीं जाएगा, न ही हम में से कोई भी अपने घर में मुड़ेगा।
९ बल्कि अब हम यह बात गिब्या के साथ करेंगे; हम उसके विरुद्ध पर्चियाँ डाल कर चढ़ाई करेंगे;
१० और हम लोगों के लिए भोजन-सामग्री पहुँचाने हेतु, इस्राएल की सभी प्रजातियों के सर्वत्र में से सौ में से दस पुरुष लेंगे, और एक हज़ार में से सौ, और दस हज़ार में से एक हज़ार, ताकि जब वह बिन्यामिन के गिब्या आते हैं, तो वह उस समस्त अशनतानुसार करें जो उन्होंने इस्राएल में कर डाली है।
११ तो इस्राएल के सभी पुरुष एक ही पुरुष समान संगठित उस नगर के विरुद्ध एकत्रित हो गए।
१२ और इस्राएल की प्रजातियों ने बिन्यामिन की समस्त प्रजाति के सर्वत्र में पुरुष भिजवाए, कहते हुए, यह कैसी दुष्टता है जो तुम्हारे बीच कर दी गई है?
१३ अब इसलिए बलियल के उन बेटों को जो गिब्या में हैं हमें प्रदान कर दो, ताकि हम उन्हें मृत्यु के घाट उतार डें, और इस्राएल में से बुराई हटा दें। परन्तु बिन्यामिन की सन्तानों ने अपने भाई-जनो इस्राएल की सन्तानों की वाणी का श्रवण नहीं किया:
१४ परन्तु बिन्यामिन की सन्तानों ने नगरों में से स्वयं को एक साथ गिब्या के प्रति एकत्रित कर लिया, इस्राएल की सन्तानों के विरुद्ध युद्ध करने हेतु जाने के लिए।
१५ और उस समय उन नगरों में से तलवार खींचने वाली बिन्यामिन की सन्तानों की संख्या छब्बीस हज़ार आदमी थी, गिब्या के निवासियों के अतिरिक, जो गिने हुए सात सौ चुने हुए आदमी थे।
१६ इन सभी जनों के बीच चुने हुए सात सौ बयंहत्थे आदमी थे; प्रत्येक गोफन से पत्थर मारने में एक बाल भर भी नहीं चूकते थे।
१७ और तलवार खींचने वाले इस्राएल के आदमी बिन्यामिन के अतिरिक्त चार लाख आदमी गिने गए थे: यह सभी योद्धा पुरुष थे।
१८ और इस्राएल की सन्तानें उठीं और ईश्वर के घर गईं, और ईश्वर से परामर्श हेतु पूछा, और कहा, बिन्यामिन की सन्तानों के विरुद्ध हम में से कौन युद्ध करने पहले जाएगा? और प्रभु ने कहा, यहूदा पहले जाएगा।
१९ और इस्राएल की सन्तानें सुबह उठीं और गिब्या के विरुद्ध पड़ाव डाल दिया।
२० और इस्राएल के आदमी बिन्यामिन ए विरुद्ध रण करने बाहर निकल चले; और इस्राएल के आदमियों ने गिब्या में उनके विरुद्ध लड़ाई करने हेतु स्वयं को व्यूह रचाया।
२१ और उस दिन, बिन्यामिन की सन्तानों ने गिब्या से बाहर निकल कर बाईस हज़ार इस्राएलियों को नीचे मिट्टी में मिलाकर नष्ट कर डाला।
२२ और उन लोगों ने इस्राएल के आदमियों ने स्वयं को प्रोत्साहित किया, और अपने युद्ध-व्यूह को पुनः उस स्थान में रचाया जहाँ उन्होंने स्वयं को उस पहले दिन व्यूह में रचाया था।
२३ और इस्राएल की सन्तानें ऊपर गईं और प्रभु के समक्ष संध्या तक रोईं, और प्रभु से परामर्श पूछा, कहते हुए, क्या मैं अपने भाई बिन्यामिन की सन्तानों के विरुद्ध पुनः युद्ध करने जाऊँ? और प्रभु ने कहा, चले जाओ उसके विरुद्ध।
२४ और इस्राएल की सन्तानें दूसरे दिन बिन्यामिन की सन्तानों के विरुद्ध निकट आईं।
२५ और दूसरे ही दिन बिन्यामिन ने गिब्या में से बाहर निकल कर उनके विरुद्ध आगे बढ़ कर, इस्राएल की सन्तानों में से पुनः अट्ठारह हज़ार आदमियों को नीचे मिट्टी में मिला डाला; यह सभी तलवार खींचने वाले थे।
२६ तब इस्राएल की समस्त सन्तानें, और सभी लोग ऊपर गए, और ईश्वर के घर में आकर रो पड़े, और वहीं प्रभु के समक्ष बैठे रहे, और उस दिन सांध्य के समय तक उपवास किया, और प्रभु के समक्ष जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे चढ़ाए।
२७ और इस्राएल की सन्तानों ने प्रभु से पूछ-ताछ की, क्योंकि ईश्वर की प्रतिज्ञा-पत्र का संदूक उन दिनो वहीं था,
२८ और हारुन के बेटे एलाज़र का बेटा फिनहास उन दिनो उसके समक्ष खड़ा हुआ, कहता हुआ, क्या मैं तथापि पुनःअपने भाई बिन्यामिन की सन्तानों के विरुद्ध युद्ध करने जाऊँ या मैं रुक जाऊँ? और प्रभु ने कहा, चढ़ाई कर लो; क्योंकि कल मैं उसे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा।
२९ और इस्राएल ने गिब्या के चारों ओर घात लगा दी।
३० और तीसरे दिन इस्राएल की सन्तानों ने बिन्यामिन की सन्तानों के विरुद्ध चढ़ाई की, और स्वयं को पहले जैसे व्यूह में रचा लिया।
३१ और बिन्यामिन की सन्तानें लोगों के विरुद्ध बाहर निकलीं, और नगर से परे खिंच गईं; और उन्होंने लोगों पर वार करना, और पहले समय समान मारना आरम्भ कर दिया, मुख्य-पथों में, जिन में से एक ईश्वर के घर तक ऊपर जाता था, और वह दूसरा खेत में गिब्या तक, इस्राएल के लगभग तीस आदमियों को।
३२ और बिन्यामिन की सन्तानों ने कहा, यह तो पहले समान हमारे समक्ष पिट चुके हैं। परन्तु इस्राएल की सन्तानों ने कहा, हम भाग जाते हैं और उन्हें नगर से खींच कर मुख्य-पथों तक ले आते हैं।
३३ और इस्राएल के समस्त पुरुष अपने स्थान में से बाहर निकल आए, और बअलतमार में स्वयं को व्यूह में रचा लिया: और घात लगाए बैठे इस्राएल वाले अपने स्थानों में से बाहर निकल आए, बाहर गिब्या की चरण-भूमियों में से ही।
३४ और गिब्या के विरुद्ध समस्त इस्राएल में से दस हज़ार चुने हुए पुरुष आ गए, और वह संग्राम घोर था: परन्तु उन्हें पता नहीं था कि बुराई उनके निकट ही थी।
३५ और प्रभु ने बिन्यामिन को इस्राएल के समक्ष हरवा दिया: और इस्राएल की सन्तानों ने उस दिन बिन्यामिन-वंशजों में से पच्चीस हज़ार एक सौ आदमियों को नष्ट कर डाला: यह सभी तलवार खींचने वाले थे।
३६ तो बिन्यामिन की सन्तानों ने देखा कि वह पिट चुके थे: क्योंकि इस्राएल के पुरुषों ने बिन्यामिन-वंशजों को स्थान दिया था, चूँकि उन्होंने अपने घात लगाए बेठों पर विश्वास किया था जिन्हें उन्होंने गिब्या के साथ स्थित किया हुआ था।
३७ और उन घात लगाए हुओं ने फुर्ती से गिब्या पर दौड़ मचा दी; और उन घात लगाए हुओं ने आगे बढ़कर उस सारे नगर को तलवार की धार से मार डाला।
३८ अब इस्राएल के आदमियों के बीच और उन घात लगाए हुओं के बीच एक नियुक्त संकेत था, कि वह एक बहुत बड़ी लपट बना कर धुएँ के साथ नगर में से उठवा डें।
३९ और जब इस्राएल के आदमी लड़ाई में मुड़ चले थे, बिन्यामिन ने इस्राएल के आदमियों को मारना आरम्भ कर दिया लगभग तीस लोग: क्योंकि उन्होंने कहा, अवश्य ही यह तो हमारे समक्ष पहली लड़ाई के समान पिट चुके हैं।
४० परन्तु जब उस नगर में से बाहर वह लपट उठने लगी घुएँ के एक खम्बे के साथ, उन बिन्यामिन-वंशजों ने अपने पीछे देखा, और देखो तो, उस नगर की लपट स्वर्ग की ओर आरोहण कर रही थी।
४१ और जब इस्राएल के आदमी पुनः मुड़ गए, तो बिन्यामिन के आदमी अचम्भित रह गए: क्योंकि उन्होंने देखा कि उन पर तो बुराई आ पड़ी थी।
४२ इसलिए उन्होंने इस्राएल के आदमियों के समक्ष अपनी पीठें मोड़ दीं जँगली-क्षेत्र के पथ तक; परन्तु उस लड़ाई ने उन्हें पार कर लिया; और वह जो नगरों में से बाहर निकल आए थे उन्होंने उन्हें उन्हीं के बीच नष्ट कर डाला।
४३ इस प्रकार उन्होंने बिन्यामिन-वंशजों को चारों ओर घेर लिया, और उन्हें भगा दिया और सूर्योदय की ओर गिब्या के सामने सरलता से उन्हें नीचे रौंद डाला।
४४ और बिन्यामिन में से अट्ठारह हज़ार आदमी गिरे; यह सभी पराक्रमी पुरुष थे।
४५ और वह मुड़ कर जँगली-क्षेत्र की ओर भाग-खड़े हुए रिम्मन चट्टान तक: और मुख्य-पथों में उन्होंने उन में से पाँच हज़ार आदमियों को बीन दिया; और उनका कड़ाई से गिदम तक पीछा किया, और उन में से दो हज़ार को मार डाला।
४६ तो उस दिन बिन्यामिन में से वह सभी जो गिरे तलवार खींचने वाले पच्चीस हज़ार आदमी थे: यह सभी पराक्रमी पुरुष थे।
४७ परन्तु छह सौ आदमी मुड़ कर जँगली-क्षेत्र में भाग गए रिम्मन चट्टान तक, और चार माह रिम्मन चट्टान में बसे रहे।
४८ और इस्राएल के पुरुष बिन्यामिन की सन्तानों पर पुनः मुड़े, और उन्हें तलवार की धार से मार डाला, प्रत्येक नगर में क्या मानुष, क्या पशु, और वह सभी कुछ जो उनके हाथ लगा: इसके अतिरिक्त उन्होंने सभी नगरों को भी अग्नी से जला डाला जहाँ वह पहुँचे थे।
इक्कीसवाँ अध्याय।
१ अब इस्राएल के पुरुषों ने मिस्पेह में शपथ ली थी, कहते हुए, हम में से कोई भी बिन्यामिन को पत्नी के लिए अपनी बेटी नहीं देगा।
२ और वह लोग ईश्वर के घर आ पहुँचे, और ईश्वर के समक्ष संध्या तक भी ठहरे रहे, और अपनी वाणियाँ उठा कर, घोरता से रोए-धोए;
३ और कहा, हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, इस्राएल में यह ऐसा क्यों होने को आया, कि आज इस्राएल में एक प्रजाती का आभाव है?
४ और अगले दिन यह होने को आया, कि वह लोग सुबह-सुबह उठे, और वहाँ एक बलिवेदी का निर्माण किया, और जले-चढ़ावे और शान्ति-चढ़ावे चढ़ा दिए।
५ और इस्राएल की सन्तानों ने कहा, वह कौन है समस्त इस्राएल की प्रजातियों में से जो सभा के साथ प्रभु के पास नहीं आया था? क्योंकि उन्होंने एक बड़ी ही प्रतिज्ञा ली थी उसके समबन्ध में जो प्रभु के पास मिस्पेह नहीं आएगा, कहते हुए, वह तो अवश्य ही मृत्यु के घाट उतार दिया जाएगा।
६ और इस्राएल की सन्तानों ने अपने भाई बिन्यामिन के लिए खेद मनाया, और कहा, इसी दिन इस्राएल में से एक प्रजाती काट दी गई है।
७ जो बचे रह गए हैं हम उनके लिए पत्नियों के विषय में क्या करें भई, यह देखते हुए कि हमने तो प्रभु की शपथ ले ली है कि हम उन्हें अपनी बेटियों में से पत्नियाँ बनाने के लिए नहीं देंगे?
८ और उन्होंने कहा, वह इस्राएल की प्रजातियों में से एक कौन है जो प्रभु के पास मिस्पेह नहीं आया था? और देखो, छावनी में यबेशगिलद में से कोई भी नहीं आया था सभा में।
९ क्योंकि लोगों की गणना की गई, और देखो तो, यबेशगिलद का कोई भी निवासी वहाँ नहीं आया था।
१० और सभा ने वहाँ अति पराक्रमी बारह हज़ार आदमियों को भेजा, और उन्हें आदेश दिया, कहते हुए, जाओ और
तलवार की धार से यबेशगिलद के निवासियों पर वार कर दो, स्त्रियों और बच्चों समेत।
११ और तुम यह कर दोगे, तुम पूर्णतः से प्रत्येक नर को, और प्रत्येक स्त्री को जो किसी पुरुष के साथ लेट चुकी है, नष्ट कर डालोगे।
१२ और उन्होंने यबेशगिलद के निवासियों के बीच चार सौ युवा कुँवारियों को पाया, जिन्होंने किसी भी पुरुष को नहीं जाना था किसी नर के साथ लेटने से: और वह उन्हें शिलो में छावनी में ले आए, जो कि कनान की भूमी में है।
१३ और उस समस्त सभा ने कुछों को रिम्मन चट्टान में उन बिन्यामिन की सन्तानों से बोलने हेतु भेजा उनके प्रति शान्तिप्रीयता घोषित करने हेतु।
१४ और बिन्यामिन उस समय पुनः आया; और उन्होंने उन्हें पत्नियाँ दे दीं जिन्हें उन्होंने यबेशगिलद की स्त्रियों में से जीवित बचा लिया था: और तथापी वह उनके लिए समुचित नहीं रहीं।
१५ और उन लोगों ने बिन्यामिन के लिए खेद मनाया, क्योंकि प्रभु ने इस्राएल की प्रजातियों में एक फूट डाल दी थी।
१६ तब सभा के वृद्ध-गणों ने कहा, जो बचे रह गए हैं हम उनके लिए पत्नियों के विषय में क्या करें भई, यह देखते हुए कि बिन्यामिन में से स्त्रियाँ तो नष्ट हो चुकी हैं?
१७ और उन्होंने कहा, उनके लिए जो बिन्यामिन में से बच निकले हैं एक विरासत अवश्य ही होनी चाहिए, ताकि इस्राएल में से कोई भी प्रजाती मिट न जाए।
१८ तथापि हम उन्हें पत्नियों के लिए अपनी बेटियाँ नहीं देंगे: क्योंकि इस्राएल की सन्तानों ने वचन दिया, कहते हुए, श्रापित हो वो जो बिन्यामिन को पत्नी देगा।
१९ तब उन्होंने कहा, देखो तो, प्रभु का एक भोज शिलो में प्रति वर्ष होता है एक स्थान में जो बेतएल के पूर्व की ओर है, उस मुख्य-पथ के पूर्व की ओर जो बेतएल से लेकर ऊपर शकेम जाता है, और लबोना के दक्षिण में है।
२० इसलिए उन्होंने बिन्यामिन की सन्तानों को आदेश दिया, कहते हुए, जाओ और अंगूर के खेतों में घात लगा दो;
२१ और ताकते रहना, और देखो, यदि शिलो की बेटियाँ नृत्यों से नृत्य करने बाहर निकलती हैं, तब तुम अंगूर के खेतों में से बाहर निकल आना, और तुम प्रत्येक आदमी शिलो की बेटियों में से अपनी पत्नी को पकड़ लेना, और बिन्यामिन की भूमी में चले जाना।
२२ और यह होगा, जब उनके पिता या उनके भाई हमारे पास आकर रोष प्रकट करने आते हैं, हम उनसे कहेंगे, हमारे वास्ते उनके साथ अनुग्रह रखना: क्योंकि हमने युद्ध में प्रत्येक पुरुष की पत्नी नहीं बचाई: क्योंकि तुम ने उन्हें इस समय में नहीं दिया है, कि तुम दोषी ठहराए जाओ।
२३ और बिन्यामिन की सन्तानों ने ऐसा ही किया, और अपने लिए पत्नियाँ ले लीं, अपनी संख्यानुसार, उन में से जो नाचीं थीं, जिन्हें उन्होंने पकड़ लिया था: और वह चले गए और अपनी विरासत में वापस लौट गए, और नगरों को सुधारा और उन में बस गए।
२४ और उस समय इस्राएल की सन्तानों ने वहाँ से परस्थान कर लिया, प्रत्येक पुरुष ने अपनी प्रजाती और अपने परिवार के ओर, और वह वहाँ से बाहर निकल चले प्रत्येक पुरुष अपनी विरासत की ओर।
२५ उन दिनो इस्राएल में कोई राजा नहीं था, बल्कि प्रत्येक पुरुष वही करता था जो कुछ उसकी अपनी ही दृष्टि में सही था।
०६/२६/२०२५:
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