प्रथम शमूएल। (First Samuel)



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पहला अध्याय।


अब एफ्रैम पहाड़ के रमथैमजोफ़िम का कोई एक पुरुष था, और उसका नाम एलकना था, यरोहम का बेटा, एलिहू का बेटा, तोलू का बेटा, जुफ का बेटा, एक एफरथी:

और उसके पास दो पत्नियाँ थीं; एक का नाम हन्ना था, और दूसरी का नाम पेनिन्ना था: और पेनिन्ना के पास सन्तानें थीं, परन्तु हन्ना के पास सन्तानें नहीं थीं।

और यह पुरुष प्रति वर्ष अपने नगर से ऊपर शिलो जाता था सेनाओं के प्रभु के प्रति आराधना करने और बलि चढ़ाने। और एली, होफनी और फिनहास प्रभु के पुरोहित वहीं था।

और जब एलकना के चढ़ावे की घड़ी आती थी, वह अपनी पत्नी पेनिन्ना, और उसके सभी बेटों और उसकी बेटियों को भाग प्रदान कर देता था:

परन्तु हन्ना को वह एक दो-गुना भाग दिया करता था; क्योंकि वह हन्ना से प्रेम करता था: परन्तु प्रभु ने उसका गर्भ बँद कर रखा था। 

और उसकी प्रतिद्वंदी भी उसे घोरता से उत्तेजित किया करती थी, उसे चिढ़ाने के लिए, चूँकि प्रभु ने उसका गर्भ बँद कर रखा था। 

और जैसे वह वर्ष-प्रति-वर्ष किया करता था, जब वह ऊपर प्रभु के घर जाती थी, तो वह उसे उत्तेजित करती रहती थी; इसलिए वह रोती थी, और खाती नहीं थी।

तब उसके पति एलकना ने उस से कहा, हन्ना, तुम रोती क्यों हो? और भई तुम खाती क्यों नहीं हो? और तुम्हारा हृदय शोकार्तित क्यों है? क्या मैं तुम्हारे लिए दस बेटों से बेहतर नहीं हूँ क्या?

तो शिलो में उनके खा लेने के पश्चात, और उनके पी लेने के पश्चात, हन्ना उठी। अब वह पुरोहित एली प्रभु के मन्दिर के एक स्तम्भ के साथ एक आसन पर बैठा हुआ था।

१० और उसकी आत्मा में कड़वाहट थी, और प्रभु से उसने प्रार्थना की, और घोरता से रो पड़ी।

११ और उसने एक प्रण का प्रण लिया, और कहा, हे सेनाओं के प्रभु यदि आप अवश्य ही अपनी दासी की उत्पीड़ना पर दृष्टि टिकाएँगे, और मुझे स्मरण में रखेंगे, और अपनी दासी को नहीं भूलेंगे, बल्कि अपनी दासी को एक नर बच्चा प्रदान कर देंगे, तब मैं उसे प्रभु के प्रति उसके जीवन के समस्त दिन प्रदान कर दूँगी, और उसके सर पर कोई भी उस्तरा नहीं फिरेगा।  

१२ और यह होने को आया, जैसे वह प्रभु के समक्ष लगातार प्रार्थना करती रही, कि एली ने उसके मूँह पर ध्यान दिया।

१३ अब हन्ना, वह अपने हृदय में बोल रही थी; बस केवल उसके होंठ ही चल रहे थे, परन्तु उसकी वाणी नहीं सुनी जा रही थी: इसलिए एली ने सोचा कि वह मदिरा से धुत थी।

१४ और एली ने उस से कहा, अरी कब तक तू मदिरा से धुत रहेगी? अपनी मदिरा को अपने से दूर कर दे भई।

१५ और हन्ना ने उत्तर दिया और कहा, नहीं मेरे प्रभु, मैं तो एक दुखियारी भावात्मा लिए एक स्त्री हूँ: मैंने ही अंगूर-रस पिया है ही मदिरा, बल्कि मैंने तो प्रभु के समक्ष अपनी आत्मा उँडेल दी है।

१६ अपनी सेविका की गिनती बलियल की एक बेटी में करें: क्योंकि मेरी शिकायत की बहुतायत और शोक में से ही मैं अब तक बोली हूँ जी।

१७ तब एली ने उत्तर दिया और कहा, शान्ति से चली जाओ: और इस्राएल के ईश्वर तुम्हें तुम्हारी याचना प्रदान कर दें जो तुमने उनसे माँगी है।

१८ और उसने कहा, अपनी सेविका को आपकी दृष्टि में कृपा पा लेने दें। तो वह स्त्री अपने पथ पर चली गई, और उसने खाया, और उसकी मुखाकृति अब और दुखी थी।

१९ और वह सुबह-सुबह उठे, और प्रभु के समक्ष आराधना कर के वापस लौट चले और रमा में अपने घर पहुँचे: और एलकना ने अपनी पत्नी हन्ना को जाना, और प्रभु ने उसका स्मरण किया।

२० इसी कारण वश यह होने को आया, हन्ना के गर्भ-धारण कर लेने के पश्चात जब लगभग वह समय चुका था, कि उसने एक बेटा जना, और उसका नाम शमुएल पुकारा, कहती हुई, क्योंकि मैंने इसे प्रभु से माँगा है। 

२१ और वह पुरुष एलकना और उसका सम्पूर्ण घराना उस वार्षिक बलि को, और उसके प्रण को चढ़ाने हेतु ऊपर प्रभु के पास गए। 

२२ परन्तु हन्ना ऊपर नहीं गई; क्योंकि उसने अपने पति से कहा, मैं तब तक ऊपर नहीं जाऊँगी जब तक बच्चे का दूध नहीं छूट जाता है, और तब मैं उसे ले आऊँगी, ताकि वह प्रभु के समक्ष प्रस्तुत हो जाए, और वहीं अनंता तक रहता रहे।

२३ और एलकना उसके पति ने उस से कहा, जैसा तुम्हें भला प्रतीत हो वैसा ही करो; बैठी रहो जब तक तुम इसका दूध नहीं छुड़ा देती; बस केवल प्रभु ही अपने शब्द को स्थापित करें। तो वह स्त्री बैठी रही, और उसने अपने बेटे को दूध पिलाया जब तक कि उसने उसका दूध नहीं छुड़वा दिया था।

२४ और जब उसने उसका दूध छुड़वा दिया था, वह उसे अपने साथ ऊपर ले गई, तीन सांडों, और आटे के एक एफाह, और अंगूर-रस की एक बोतल के साथ, और उसे शिलो में प्रभु के घर तक ले आई: और वह बालक तरुण ही था।

२५ और उन्होंने एक साँड को मारा, और उस बालक को एली के पास ले आए।

२६ और उसने कहा, हे मेरे प्रभु, मेरी आत्मा के जीते-जी मेरे प्रभु, मैं ही वह स्त्री हूँ जो आपके साथ प्रभु से प्रार्थना करती हुई खड़ी थी।

२७ मैंने इसी बालक के लिए प्रार्थना की थी; और प्रभु ने मुझे मेरी याचना प्रदान कर दी है जो मैंने उनसे माँगी थी:

२८ इसलिए मैंने भी इसे प्रभु को उधार पर दे दिया है; जितने समय भी यह जीता है यह प्रभु को उधार पर दिया हुआ है। और वह वहीं प्रभु के समक्ष नीचे झुक गया।



दूसरा अध्याय।


और हन्ना ने प्रार्थना की, और कहा, मेरा हृदय प्रभु में हर्ष मनाता है, मेरा सींघ प्रभु में पदोन्नत है: मेरा मूँह मेरे शत्रुओं पर अभिवर्दित है; क्योंकि मैं आपके बचाव में हर्ष मनाती हूँ।

प्रभु जैसा तो कोई भी पवित्र नहीं है: क्योंकि आपके अतिरिक्त तो कोई भी नहीं है: ही कोई भी अन्य चट्टान है हमारे ईश्वर समान।

इतने अत्याधिक अभिमान से अब और मत बोलो; तुम्हारे मुँह में से अहंकार को मत बाहर निकलने दो: क्योंकि प्रभु ज्ञान के ईश्वर हैं, और उन्हीं के द्वारा कार्य तोले जाते हैं।

बलशाली आदमियों के धनुष तोड़ दिए गए हैं, और वह जो ठोकर खा रहे थे शक्ती की कमरपेटी से कसे हुए हैं।

वह जो संतुष्ट थे स्वयं को रोटी के लिए भाड़े पर चढ़ा चुके हैं; और वह जो भूखे थे भूखे रहे: ताकि उस बाँझ ने सात को जन्मा है; और जिसके पास कई सन्तानें थीं दुर्बल हो चली।

प्रभु मार डालते हैं, और सजीवित कर देते हैं; वह कब्र में नीचे ले जाते हैं, और ऊपर ले आते हैं।

प्रभु दरिद्र बनाते हैं, और धनवान बनाते हैं: वही नीचे ले आते हैं, और ऊपर उठा देते हैं।

वही दरिद्र को धूल में से ऊपर उठाते हैं, और मल के ढेर में से ऊपर भिखारी को उठाते हैं, उन्हें अध्यक्षों के बीच बिठाने के लिए, और उन्हें उस महिमा के सिंहासन को विरासत में प्राप्त कर लेने के लिए: क्योंकि प्रभु के ही हैं पृथ्वी के स्तम्भ, और उन्हींने संसार को उन पर स्थित कर दिया है।

वही अपने सन्तों के पैरों को सुरक्षित रखेंगे, और वह दुष्ट अन्धकार में चुप रहेंगे; चूँकि कोई भी पुरुष शक्ती से प्रबल नहीं ठहरेगा।

१० प्रभु के विपक्षी टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ दिए जाएँगे; वह उन पर स्वर्ग में से गरजन करेंगे: प्रभु पृथ्वी के छोरों का न्याय-निर्धारण करेंगे; और वह उसके राजा को शक्ती प्रदान करेंगे, और अपने अभिषिक्त के सींघ को पदोन्नत कर देंगे।

११ और एलकाना अपने घर रमा चला गया। और उस बालक ने पुरोहित एली के समक्ष प्रभु की सेवा की।

१२ अब एली के बेटे बलियल के बेटे थे; वह प्रभु को नहीं जानते थे।

१३ और पुरोहित की रीति लोगों के साथ थी, कि जब कोई भी व्यक्ति बलि चढ़ाता था, पुरोहित का सेवक अपने हाथ में एक माँस के तीन दाँत वाला एक काँटा लिए, माँस के उबलते-उबलते आता था;

१४ और वह उसे कढ़ाई में, या हाँडी में, या देगची में, या पतीले में घोंप देता था; वह सभी कुछ जो वह माँस का काँटा ऊपर ले आता था पुरोहित अपने लिए ही रख लेता था। इसी प्रकार शिलो में उन सभी इस्राएल-वंशजों के साथ किया करते थे जो वहाँ आते थे।

१५ और चर्बी को जला देने से पहले ही, वह पुरोहित का नौकर आकर उस बलि चढ़ावे वाले आदमी से कहता था, पुरोहित के लिए भूनने हेतु माँस दे दो; क्योंकि वह तुमसे उबला हुआ माँस नहीं लेगा, बल्कि कच्चा ही।

१६ और यदि कोई भी पुरुष उस से कहता, इन्हें अभी चर्बी जलाना नहीं रोकना चाहिए, और फिर तुम अपनी आत्मा की इच्छानुसार जितना लेना चाहो ले लेना भई; तब वह उसे उत्तर देता, नहीं; परन्तु तुम उसे मुझे अभी ही दे दोगे: और यदि नहीं, तो मैं उसे बलपूर्वक छीन लूँगा।

१७ इसी कारण वश उन युवा पुरुषों का पाप प्रभु के समक्ष बहुत ही बृहत्त था: क्योंकि लोग प्रभु के चढ़ावे का तिरस्कार करते थे।

१८ परन्तु शमुएल प्रभु के समक्ष सेवारत था, छालटी के एफद से कसा हुआ एक बालक।

१९ इसके अतिरिक्त उसकी माता ने उसके लिए एक छोटा अंगरखा बनाया, और वह उसे उसके पास वर्ष-प्रति-वर्ष ले आती थी, जब वह अपने पति के साथ उस वार्षिक आहुति को अर्पण करने ऊपर आती थी।

२० और एली ने एलकना और उसकी पत्नी को आशीष दिया, और कहा, प्रभु तुम्हें उस उधार के लिए इस स्त्री का बीज दें जो उधार प्रभु पर चढ़ाया गया है।

२१ और प्रभु ने हन्ना की सुध ली, ताकि उसने गर्भ धारण कर लिया, और तीन बेटे और दो बेटियाँ जनी। और वह बालक शमुएल प्रभु के समक्ष बढ़ता रहा।

२२ अब एली बहुत ही बूढ़ा था, और वह सभी कुछ सुना जो उसके बेटे इस्राएल के साथ किया करते थे; और कि वह कैसे सभा के तम्बू के द्वार पर संकलित स्त्रियों के साथ लेटा करते थे।

२३ और उसने उनसे कहा, तुम ऐसे काम क्यों करते हो? क्योंकि मैं तुम्हारे बुरे व्यवहारों के विषय में इन सभी लोगों से सुनता हूँ।

२४ नहीं, मेरे बेटों; यह कोई अच्छा विवरण नहीं है जो मैं सुनता हूँ: तुम प्रभु के लोगों से अपराध करवा रहे हो।

२५ यदि कोई आदमी किसी दूसरे के विरुद्ध पाप कर बैठता है, तो न्यायाधीष उसका न्याय करेगा: परन्तु यही कोई आदमी प्रभु के विरुद्ध पाप कर बैठता है, तो कौन उसके लिए मध्यसतथा करेगा? तथापि उन्होंने अपने पिता की वाणी का श्रवण नहीं किया, क्योंकि प्रभु की इच्छा उन्हें मार डालने के लिए थी।

२६ और वह बालक शमुएल बड़ा होता गया, और दोनो, प्रभु और मनुष्यों के भी अनुग्रह में था।

२७ और एली के पास ईश्वर का एक बंदा पधारा, और उसने उस से कहा, इस प्रकार कहते हैं प्रभु, क्या मैं तुम्हारे पित्र के घराने के प्रति प्रकट हुआ था जब वह मिस्र में फैरो के घर में थे?

२८ और क्या मैंने उसे इस्राएल की समस्त प्रजातियों में से चुना था मेरा पुरोहित बनने हेतु, मेरी बलिवेदी पर सुगन्धित-धूप जलाने हेतु, मेरे समक्ष एफद पहनने हेतु? और क्या मैंने तुम्हारे पिता के घराने को इस्राएल की सन्तानों की अग्नी से बनी सभी आहुतियाँ  दे दी थीं क्या?

२९ तो किस कारण वश तुम मेरे बलिदान और मेरी आहुती पर लात मारते हो, जिसका मैंने अपने निवास-स्थान में आदेश दिया है; और मेरे ऊपर अपने बेटों को सम्मानित करते हो, मेरे गण इस्राएल की समस्त आहुतियों की सबसे उत्तम की चर्बी से स्वयं को मोटा करते हुए? 

३० इसलिए इस्राएल के प्रभु ईश्वर कहते हैं, मैंने अवश्य ही कहा कि तुम्हारा घराना, और तुम्हारे पित्र का घराना, मेरे समक्ष सदैवत्वता तक चलेंगे: परन्तु प्रभु अब कहते हैं, इसे तो दूर ही रहने दो मुझ से; क्योंकि उन्हें जो मेरा सम्मान करते हैं मैं सम्मानित करूँगा, और वो जो मुझ से घृणा करते हैं हल्का ही मान रखेंगे।

३१ देखो, वह दिन रहे हैं, कि मैं तुम्हारी भुजा, और तुम्हारे पिता के घराने की भुजा काट डालूँगा, ताकि तुम्हारे घर में एक भी बूढ़ा आदमी नहीं होगा।

३२ और तुम मेरे निवास-स्थान में एक शत्रु को देखोगे, उस समस्त धन-धान्य में जो ईश्वर इस्राएल को प्रदान करेंगे: और तुम्हारे घर में एक भी बूढ़ा आदमी नहीं होगा सदैवत्वता तक।

३३ और वह तुम्हारा आदमी, जिसे मैं अपनी बलिवेदी से नहीं परे काटूँगा, तुम्हारी आँखों को समाप्त कर देने के लिए होगा, और तुम्हारे हृदय को शोकार्तित करने के लिए: और तुम्हारे घराने की समस्त वृद्धी उनके यौवन में ही मर जयेंगे।

३४ और तुम्हारे प्रति यह एक संकेत होगा, जो तुम्हारे दोनो बेटों पर पड़ेगा, होफनी और फिनहास पर; एक ही दिन में वह दोनो के दोनो मर जाएँगे।

३५ और मैं अपने लिए एक विश्वसनीय पुरोहित को ऊपर उठाऊँगा, ताकि वह उसी के अनुसार करेगा जो मेरे हृदय में है और मेरे मन में: और मैं उसके लिए एक निश्चित घर का निर्माण करूँगाल और वह मेरे अभिषिक्त के समक्ष सदैवत्वता के लिए चलेगा।

३६ और यह होने को आएगा, कि वह हर एक जो तुम्हारे घराने में बचा रह जाएगा आकर उसके प्रति चाँदी के एक टुकड़े के लिए और रोटी के एक टुकड़े के लिए झुक कर कहेगा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मुझे पुरोहित-पदों में से किसी एक में ही डाल दो, ताकि मैं रोटी का एक टुकड़ा खा सकूँ। 



तीसरा अध्याय।


और उस बालक शमुएल ने एली के समक्ष प्रभु की सेवा की। और उन दिनों प्रभु का शब्द अनमोल था; प्रकट दृश्य नहीं थे।

२और यह होने को आया उस समय, जब एली अपने स्थान में नीचे लेटा हुआ था, और उसकी आँखे धुँधली होने लग गईं थीं कि वह अब  देख नहीं सकता था;

और प्रभु के मन्दिर में, जहाँ ईश्वर का संदूक था, ईश्वर का दीपक बुझा था, और शमुएल नीचे लेटा हुआ था;

कि प्रभु ने शमुएल को पुकारा: और उसने उत्तर दिया, जी मैं यहाँ हूँ।

और वह एली के पास दौड़ पड़ा, और कहा, जी मैं यहाँ हूँ; क्योंकि अपने मुझे बुलाया। और उसने कहा, मैं नहीं बुलाया; पुनः नीचे लेट जाओ। और वह जाकर नीचे लेट गया।

और तथापि प्रभु ने दोबारा पुकारा, शमुएल। और शमुएल उठा और एली के पास गया, और कहाँ, जी मैं यहाँ हूँ; क्योंकि आपने ही मुझे बुलाया। और उसने उत्तर दिया, मैंने नहीं बुलाया, मेरे बेटे; पुनः लेट जाओ नीचे।

अब शमुएल ने अभी तक प्रभु को नहीं जाना था, ही प्रभु का शब्द उसे अभी तक प्रयक्ष हुआ था।

और प्रभु ने शमुएल को पुनः तीसरी बार पुकारा। और उसने उठ कर एली के पास जाकर कहा, जी मैं यहाँ हूँ; क्योंकि आपने ही मुझे बुलाया। और एली ने आभास किया कि प्रभु ने उस बालक को बुलाया था।

इसलिए एली ने शमुएल से कहा, जाओ, नीचे लेट जाओ: और यह होगा, यदि वह तुम्हें पुकारते हैं, तो तुम कहना, बोलें प्रभु; क्योंकि आपका सेवक सुन रहा है। तो शमुएल चला गया और अपने स्थान में नीचे लेट गया।

१० और प्रभु आए, और खड़े हो गए, और दूसरी बारियों के समान पुकारा, शमुएल, शमुएल। तब शमुएल ने उत्तर दिया, बोलें; क्योंकि अपना सेवक सुन रहा है जी।

११ और प्रभु ने शमुएल से कहा, देखो, मैं इस्राएल में एक काम करूँगा, जिस पर सुनने वाले के दोनो कानों में झनझनाहट मच जाएगी।

१२ उस दिन मैं एली के विरुद्ध वह सभी काम कर डालूँगा जो मैं उसके घराने के विषय में बोल चुका हूँ: जब मैं आरम्भ करूँगा, मैं अन्त भी कर दूँगा।

१३ क्योंकि मैंने उसे बता दिया है कि मैं उसके घराने का न्याय उस अधर्मता के लिए करूँगा जिस से वह परिचित है; क्योंकि उसके बेटों ने स्वयं को नीचतापूर्ण बना डाला, और उसने उन्हें नहीं रोका।

१४ और इसलिए मैंने एली के घराने के प्रति यह शपथ खा ली है, कि एली के घराने की अधर्मता सदैवत्वता के लिए बलिदान या चढ़ावे से शुद्ध नहीं होगी।

१५ और शमुएल सुबह तक लेटा रहा, और प्रभु के घर के द्वार खोल दिए। और शमुएल एली को वह दृश्य बतलाने से डरता था।

१६ तब एली ने शमुएल को बुलाया और कहा, मेरे बेटे शमुएल। और उसने उत्तर दिया, जी मैं यहाँ हूँ।

१७ और उसने कहा, वो क्या बात है जो प्रभु ने तुम से कही है? मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से तुम उसे मुझ से मत छुपाओ: ईश्वर तो यह तुम्हारे साथ कर ही दें और इस से भी और अधिक, यदि तुम मुझ से उन सभी बातों में से कुछ भी छुपाते हो जो उन्होंने तुमसे कहीं थीं। 

१८ और शमुएल ने उसे सब कुछ बता दिया, और उस से कुछ भी नहीं छुपाया। और उसने कहा, यह प्रभु ही हैं: कर लेने दो उन्हें जो कुछ भी उन्हें भला लगे।

१९ और शमुएल बड़ा होता गया, और प्रभु उसके साथ थे, और उसके शब्दों में से कोई भी धरती पर नहीं गिरने दिया।

२० और समस्त इस्राएल दान से लेकर बीरशबा तक भी जान गया कि शमुएल प्रभु का एक पैग़म्बर बनने हेतु संस्थापित था।

२१ और प्रभु पुनः शिलो में प्रकट हुए: क्योंकि प्रभु ने स्वयं को शिलो में शमुएल को प्रत्यक्षित करवाया प्रभु के शब्द के द्वारा।



चौथा अध्याय।


और शमुएल का शब्द समस्त इस्राएल को आया। अब इस्राएल पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध युद्ध करने बाहर निकल पड़ा, और एबनज़र के साथ पड़ाव डाल दिया: और उन पलिश्तिम-वंशजों ने एफक में डेरा डाला।

और उन पलिश्तिम-वंशजों ने इस्राएल के विरुद्ध स्वयं को व्यूह में रचाया: और जब उन्होंने संग्राम जोड़ा, इस्राएल उन पलिश्तिम-वंशजों के समक्ष पिट गया: और उन्होंने रण-भूमी में सेना के लगभग चौदह हज़ार आदमियों को मार डाला।

और जब वह लोग छावनी में अंदर गए थे, इस्राएल के वृद्धों ने कहा, किस कारण वश प्रभु ने हमें इस दिन पलिश्तिम-वंशजों के समक्ष हरा दिया है? हम शिलो में से बाहर प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को अपने पास ले आते हैं, ताकि जब वह हमारे बीच जाएगा, वह हमें हमारे शत्रुओं के हाथ से बचा ले।

तो उन लोगों ने शिलो भिजवा दिए, ताकि वह वहाँ से प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक को ले आएँ, जो चेरुबिमों के बीच वास करते हैं: और एली के दोनो बेटे, होफनी और फिनहास, ईश्वर के प्रतिज्ञा-पत्र के संदूक के साथ थे।

और जब प्रभु के प्रतिज्ञा-पत्र का वह संदूक छावनी में गया था, समस्त इस्राएल एक बड़ी ही चिल्लाहट के साथ चिल्ला पड़ा, कि धरती गूँज उठी।

और जब उन पलिश्तिम-वंशजों ने उस चिल्लाहट का शोर सुना, तो उन्होंने कहा, इब्रानियों के शिविर में उस बड़ी चिल्लाहट के शोर का क्या अर्थ है भई? और उन्होंने समझ लिया कि प्रभु का संदूक छावनी में गया था।

और वह पलिश्तिम-वंशज डर गए, क्योंकि उन्होंने कहा, ईश्वर शिविर में गए हैं भई। और उन्होंने कहा, हाय पड़ेगी हम पर! क्योंकि ऐसी बात अब तक भी कभी नहीं घटी है।

हाय पड़ेगी हम पर! इन बलशाली ईश्वरों के हाथ में से बाहर हमारा कौन बचाव करेगा भई? यही वह ईश्वर हैं जिन्होंने जँगली-क्षेत्र में उन मिस्र-वासियों को उन सभी विपत्तियों से आघातित किया था।

शौर्य वाले, और पुरुषों समान साहसी बनो, तुम पलिश्तिम-वंशजों, ताकि तुम उन इब्रानियों के नौकर बह जाओ, जैसे वह तुम्हारे बने हुए हैं: पुरुषों समान साहसी बनो, और लड़ो।

१० और उन पलिश्तिम-वंशजों ने लड़ाई की, और इस्राएल हरा दिया गया था, और वह भाग खड़े हुए प्रत्येक पुरुष अपने ही तम्बू में: और एक बहुत ही महा संहार मच गया था; क्योंकि इस्राएल के तीस हज़ार पैदल सैनिक गिर गए थे।

११ और ईश्वर का वह संदूक ले लिया गया था; और एली के दोनो बेटे, होफनी और फिनहास मार दिए गए थे।

१२ और सेना में से बिन्यामिन का एक आदमी भाग आया, और उसी दिन शिलो पहुँचा उसके कपड़े फटे हुए, और मिट्टी उसके सर पर।

१३ और जब वह आया, लो भई, एली पथ के साथ एक आसन में बैठा देख रहा था: क्योंकि उसका हृदय ईश्वर के संदूक के लिए कँपकँपा रहा था। और जब वह आदमी नगर में आया, और वह बता दिया, सारा नगर चीख पड़ा।

१४ और जब एली ने उस चीखने का शोर सुना, उसने कहा, इस उपद्रव के शोर का क्या अर्थ है भई? और वह आदमी शीघ्रता से भीतर आया, और एली को बता दिया।

१५ अब एली अट्ठानवे वर्ष की आयु का था; और उसकी आँखे मन्दी थीं, कि वह देख नहीं सकता था।

१६ और उस आदमी ने एली से कहा, मैं वो हूँ सेना में बाहर निकल आया हूँ, और मैं इस दिन सेना से भाग गया। और उसने कहा, क्या कर दिया गया है, मेरे बेटे?

१७ और उस संदेश-वाहक ने उत्तर दिया और कहा, इस्राएल पलिश्तिम-वंशजों के सामने से भाग खड़ा हुआ है, और लोगों के बीच एक महा संहार भी मच चुका है, और आपके दोनो बेटे, होफनी और फिनहास भी मर चुके हैं, और ईश्वर का संदूक ले लिया गया है।

१८ और यह होने को आया, जब उसने ईश्वर के संदूक का ज़िक्र किया, कि वह अपनी कुर्सी पर से पीछे की ओर गिर पड़ा द्वार के साथ ही, और उसकी गर्दन टूट गई, और वह मर गया: क्योंकि वह एक बूढ़ा पुरुष था, और भारी भी। और उसने इस्राएल का चालीस वर्षों तक न्याय किया था।

१९ और उसकी पुत्र-वधु, फिनहास की पत्नी, बच्चे से थी, जन्म दे देने के निकट ही: और जब उसने यह समाचार सुने कि ईश्वर का संदूक ले लिया गया था, और कि उसके ससुर और उसका पति मर चुके थे, वह स्वयं झुक गई और और प्रसाव में पड़ गई; क्योंकि उसकी प्रसाव-पीड़ाएँ उस पड़ीं।

२० और लगभग उसकी मृत्यु के समय उसके साथ खड़ी उन स्त्रियों ने उस से कहा, डरो मत; क्योंकि तुम ने एक बेटे को जन्म दे दिया है। परन्तु उसने उत्तर नहीं दिया, ही इस पर ध्यान दिया।

२१ और उसने उस बच्चे का नाम इकबोद रखा, कहती हुई, इस्राएल से महिमा प्रस्थान कर चुकी है: क्योंकि ईश्वर का संदूक ले लिया गया था, और उसके ससुर और उसके पति के कारण।

२२ और उसने कहा, इस्राएल से महिमा प्रस्थान कर चुकी है: क्योंकि ईश्वर का संदूक ले लिया गया है।



पाँचवाँ अध्याय।


और वह पलिश्तिम-वंशज ईश्वर का संदूक लेकर उसे एबनज़र से अशदोद ले आए।

जब उन पलिश्तिम-वंशजों ने ईश्वर का संदूक ले लिया था, वह उसे दगोन के घर में ली आए, और उसे दगोन के साथ स्थित कर दिया।

और जब वह अशदोद वाले अगले दिन सबह-सुबह उठे, देखो तो, दगोन अपने चहरे के बल धरती पर गिरा पड़ा था, प्रभु के संदूक के समक्ष। और उन्होंने दगोन को लिया, और उसे उसके स्थान में पुनः स्थित कर दिया।

और जब वह अगले दिन सुबह-सुबह उठे, देखो तो, दगोन अपने चहरे के बल धरती पर गिरा पड़ा था, प्रभु के संदूक के समक्ष; और दगोन का सर और उसके हाथों की दोनो हथेलियाँ चौखट पर कटे पड़े थे; बस केवल दगोन का धड़ ही उसे बचा रह गया था।

इसलिए ही दगोन के पुरोहित, ही दगोन के घर में प्रवेश करने वाला कोई भी, अशदोद में इस दिन तक दगोन की चौखट पर पाँव नहीं रखता है।

परन्तु प्रभु का हाथ अशदोद वालों पर भारी था, और उन्होंने उन्हें नष्ट कर दिया, और उन्हें बवासीर से आघातित कर डाला, अशदोद और उसकी सीमाओं को ही।

और जब अशदोद के लोगों ने देखा कि यह ऐसा हो गया था, उन्होंने कहा, इस्राएल के ईश्वर का संदूक हमारे साथ निवास नहीं करेगा: क्योंकि उनका हाथ हम पर और हमारे ईश्वर दगोन पर घोरता से पड़ा है।

इसलिए उन्होंने भिजवाकर पलिश्तिम-वंशजों के सभी अध्यक्षों को अपने पास एकत्रित कर लिया, और कहा, हम इस्राएल के ईश्वर के संदूक के साथ क्या करें? और उन्होंने उत्तर दिया, इस्राएल के ईश्वर के संदूक को उठाकर गथ ले जाय जाए। और वह इस्राएल के ईश्वर के संदूक को वहीं उठाकर ले चले।

और ऐसा हुआ, कि, जब वह उसे उठाकर ले चले थे, प्रभु का हाथ एक बहुत ही भीषण विनाश के साथ नगर के विरुद्ध पड़ा: और उन्होंने उस नगर के आदमियों को, दोनो छोटों को और बड़ों को पीट डाला, और उन्हें उनके गुप्तांगों में बवासीर थी। 

१० इस कारण उन्होंने ईश्वर के संदूक को एक्रोन भेज दिया। और यह होने को आया, कि जैसे वह ईश्वर का संदूक एक्रोन पहुँचा, कि वह एक्रोनवासी चीख पड़े, कहते हुए, वो तो भई इस्राएल के ईश्वर का संदूक हमारे पास ले आए हैं, हमारी और हमारे लोगों की हत्या कर देने के लिए।

११ तो उन्होंने भिजवाकर पलिश्तिम-वंशजों के सभी अध्यक्षों को एकत्रित कर लिया, और कहा, इस्राएल के ईश्वर के संदूक को भिजवा दो, और उसे पुनः अपने ही स्थान चले जाने दो, ताकि यह हमारी और हमारे लोगों की हत्या कर डाले: क्योंकि उस नगर के सर्वत्र में एक घातक विनाश था; वहाँ ईश्वर का हाथ बहुत ही भारी था भई।

१२ और जो लोग मरे नहीं थे बवासीर से आघातित थे: और उस नगर की चीख-पुकार स्वर्ग तक ऊपर जा रही थी।



छटा अध्याय।


और वह प्रभु का संदूक पलिश्तिम-वंशजों के देश में सात माह था।

और उन पलिश्तिम-वंशजों ने पुरोहितों और ज्योतिषियों को बुला लिया, कहते हुए, हम प्रभु के संदूक के साथ क्या करें? हमें बता दो कि हम किसके साथ इसे उसके स्थान भिजवा दें।

और उन्होंने कहा, यदि तुम इस्राएल के ईश्वर के संदूक को भेजते हो, तो उसे रिक्त मत भेजना; बल्कि प्रत्येक प्रकार से उन्हें एक दोष-चढ़ावा लौटा देना: तब तुम स्वास्थ हो जाओगे, और तुम यह जान जाओगे कि उनका हाथ तुम पर से क्यों नहीं हटा है।

तब उन्होंने कहा, वह दोष-चढ़ावा क्या होगा जो हम उन्हें वापस लौटाएँगे? उन्होंने उत्तर दिया, पाँच स्वर्ण बवासीर, और पाँच स्वर्ण चुहियाएँ, पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों की संख्यानुसार: क्योंकि एक ही महामारी तुम सभी पर थी, और तुम्हारे अध्यक्षों पर।

इसलिए तुम अपने बवासीरों की प्रतिमाएँ, और तुम्हारी चुहियों की प्रतिमाएँ जो भूमी को नष्ट कर रही हैं, बना दोगे; और तुम इस्राएल के ईश्वर को गौरव प्रदान करोगे: मान लो वह अपने हाथ का भार तुम पर से, और तुम्हारे ईश्वरों पर से, और तुम्हारी भूमी पर से, घटा दें।

तो फिर किस कारण वश तुम अपने हृदयों को कठोर कर रहे हो भई, जिस प्रकार मिस्र-वासियों और फैरो ने अपने हृदयों को कठोर कर दिया था? जब उन्होंने उनके बीच अचम्भा करने वाले कार्य किए थे, तो क्या उन्होंने लोगों को चले नहीं जाने दिया था क्या, और वो चले गए थे?

अब इसलिए एक नई गाड़ी बना लो, और दो दूध देने वाली गऊओं को ले लो, जिन पर जूआ कभी रखा गया हो, और उन गऊओं को उस गाड़ी के साथ बाँध दो, और उनके बछड़ों को उनसे परे घर ले आओ:

और प्रभु के उस संदूक को लेकर उसे उस गाड़ी पर रख दो; और उन स्वर्ण वस्तुओं को, जिन्हें तुम एक दोष-चढ़ावे के लिए उन्हें वापस कर रहे हो, एक डब्बे में डालकर उसके साथ रख दो; और उसे भिजवा दो, ताकि वह चला जाए।

और देखते रहना, यदि वह ऊपर बेतशमश अपने ही स्वयं के रस्ते से जा रहा हो, तो उन्होंने ही यह बड़ी बुराई हमारे साथ कर डाली है: परन्तु यदि नहीं, तब हम जान जाएँगे कि वह उनका हाथ नहीं है जिसने हमें पीटा: वह एक संयोग था जो हमारे साथ घटा था।

१० और उन जनो ने वैसा की कर दिया; और दो दुग्धारी गऊओं को लेकर उन्हें उस गाड़ी से बाँध दिया, और उनके बछड़ों को घर पर ही बँद कर दिया:

११ और उन्होंने प्रभु के उस संदूक को, और सोने की चुहियों, और उनके बवासीरों की प्रतिमाओं के उस डब्बे को, उस गाड़ी पर रख दिया।

१२ और उन गऊओं ने बेतशमश का पथ सीधा-सीधा पकड़ा, और मुख्य-पथ के साथ-साथ चल पड़ीं, रम्भाती हुई जाती हुईं, और परे नहीं मुड़ीं दाएँ हाथ की ओर या बाएँ की ओर; और पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्ष उनके पीछे-पीछे चल दिए बेतशमश की सीमा तक।

१३ और घाटी में बेतशमश वाले अपनी गेहूं की फसल की कटाई कर रहे थे: और उन्होंने अपनी आँखें उठाईं, और उस संदूक को देखा, और उसे देख कर हर्ष मनाया।

१४ और वह गाड़ी एक बेतशमश वाले यहोशुआ के खेत तक पहुँची, और वहीं खड़ी हो गई, जहाँ एक बड़ा पत्थर था: और उन्होंने उस गाड़ी की लकड़ी चीर डाली, और उन गऊओं को प्रभु के प्रति एक जला-चढ़ावा चढ़ा दिया।

१५ और लेवी-वंशजों ने प्रभु के उस संदूक को, और उसके साथ उस डब्बे को नीचे उतार लिया, जिस में वह स्वर्ण वस्तुएँ थीं, और उन्हें उस बड़े पत्थर पर रख दिया: और बेतशमश के जनो ने प्रभु के प्रति उसी दिन जले चढ़ावे चढ़ाए और बलियों का बलिदान किया  

१६ और जब पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों ने यह देख लिया था, वह उसी दिन एक्रोन वापस लौट चले।

१७ और यही हैं वो सोने के बवासीर जो उन पलिश्तिम-वंशजों ने प्रभु को एक दोष-चढ़ावे हेतु वापस लौटाया था; अशदोद के लिए एक, गाज़ा के लिए एक, अस्कलोन के लिए एक, गाथ के लिए एक, एक्रोन के लिए एक;

१८ और वह स्वर्ण चुहियाएँ उन पलिश्तिम-वंशजों के सभी नगरों की संख्यानुसार जो उनके पाँच अध्यक्षों के थे, दोनो क़िलेबन्द नगरों में से, और देहात के गाँवों में से, उस बड़े पत्थर एबल तक भी, जिस पर उन्होंने प्रभु के संदूक को नीचे टिकाया था: जो पत्थर इस दिन तक भी उस बेतशमश वाले यहोशुआ के खेत में ही है।

१९ और उन्होंने बेतशमश के जनो पर वार कर डाला, क्योंकि उन्होंने प्रभु के संदूक में झाँक लिया था, उन्होंने लोगों में से पचास हज़ार और साठ और दस आदमियों को मार डाला: और लोगों ने शोक-विलाप मनाया क्योंकि प्रभु ने लोगों में से कईयों का संहार कर डाला था।

२० और बेतशमश के लोगों ने कहा, कौन इन पवित्र प्रभु ईश्वर के समक्ष खड़ा होने में सक्षम है? और किसके पास वह हमारे पास से ऊपर जाएँगे?

२१ और उन्होंने किरयतयरीम के निवासियों के पास संदेश-वाहक भिजवाए, कहते हुए, वो पलिश्तिम-वंशज प्रभु के संदूक को पुनः वापस ले आए ; नीच जाओ तुम, और उसे अपने पास ऊपर ले जाओ।



सातवाँ अध्याय।


और किरयतयरीम के जन आए, और प्रभु के संदूक को लेकर ऊपर चले गए, और उसे पहाड़ी में अबिनदाब के घर में ले आए, और उसके बेटे एलाज़र को प्रभु के संदूक की सुरक्षा करने हेतु पुनीत ठहरा दिया।

और यह होने को आया, जैसे संदूक किरयतयरिम में वास कर रहा था, कि वह समय लम्बा था; चूँकी वह बीस वर्ष था: और इस्राएल का समस्त घराना प्रभु के पीछे विलाप करने लगा।

और शमुएल इस्राएल के समस्त घराने से बोला, कहता हुआ, यदि तुम अपने सम्पूर्ण हृदयों से प्रभु के पास वापस लौट रहे हो, तो अपने बीच में से उन परदेशी ईश्वरों और अश्तरोत को परे हटा दो, और अपने हृदयों को प्रभु के प्रति उद्यत कर दो, और केवल उन्हीं की सेवा करो: और वह तुम्हें पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में से बाहर बचा लेंगे।

तब इस्राएल की सन्तानों ने बअलिम और अश्तरोत को परे हटा दिया और केवल प्रभु की ही सेवा की।
और शमुएल ने कहा, समस्त इस्राएल को मिस्पेह में एकत्रित कर लो और मैं तुम्हारे लिए प्रभु से प्रार्थना करूँगा।

और वह एक साथ मिस्पेह में एकत्रित हो गए, और पानी खींच कर उसे प्रभु के समक्ष बाहर उँडेल दिया, और उस दिन उपवास रखा, और वहाँ कहा, हमने प्रभु के विरुद्ध पाप कर दिया है। और शमुएल ने इस्राएल की सन्तानों का मिस्पेह में न्याय किया।

और जब पलिश्तिम-वंशजों ने सुना कि इस्राएल की सन्तानें मिस्पेह में एक साथ एकत्रित थीं, तो उन पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों ने इस्राएल के विरुद्ध चढ़ाई कर दी। और जब इस्राएल की सन्तानों ने यह सुना तो वो पलिश्तिम-वंशजों से डर गए।

और इस्राएल की सन्तानों ने शमुएल से कहा, हमारे लिए हमारे ईश्वर प्रभु से चीखना मात थामिएगा, कि वह हमें पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में से बचा लें।

और शमुएल ने एक दूध पीता हुआ मेमना लिया और उसे पूरा ही प्रभु के प्रति एक जला-चढ़ावा अर्पित कर दिया: और शमुएल इस्राएल के लिए प्रभु से चीख पड़ा; और प्रभु ने उसे सुना।

१० और जैसे शमुएल उस जले-चढ़ावे को चढ़ा रहा था, वह पलिश्तिम-वंशज इस्राएल के विरुद्ध युद्ध करने निकट गए: परन्तु प्रभु ने उस दिन पलिश्तिम-वंशजों पर एक बड़ी ही गर्जन से गर्जन मचा दी, और उन्हें अस्त-व्यस्त कर दिया; और उनकी इस्राएल के सामने पिटाई हो गई।

११ और इस्राएल के जन मिस्पेह ने बाहर निकल चले और उन पलिश्तिम-वंशजों का पीछा किया, और उन्हें पीटते गए, जब तक वो बेतकर के तले नहीं पहुँचे थे।

१२ तब शमुएल ने एक पत्थर लेकर उसे मिस्पेह और शेन के बीच लगा दिया, और उसका नाम एबनज़र रख दिया, कहते हुए, यहाँ तक प्रभु ने हमारी सहायता की है। 

१३ तो उन पलिश्तिम-वंशजों का दमन हो गया था, और वह अब और इस्राएल की सीमा में नहीं आए: और प्रभु का हाथ 

पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध शमुएल के समस्त दिन था।

१४ और वह नगर जिन्हें पलिश्तिम-वंशजों ने इस्राएल से ले लिए थे इस्राएल को वापस पुनःस्थापित हो गए, एक्रोन से लेकर गाथ तक भी; और उनकी सीमाएँ इस्राएल ने पलिश्तिम-वंशजों के हाथों में से बचा लीं। और इस्राएल और एमोरवासियों के बीच शान्ति थी।

१५ और शमुएल ने अपने जीवन के समस्त दिन इस्राएल का न्याय किया।

१६ और वह वर्ष-प्रति-वर्ष बेतएल, और गिलगल, और मिस्पेह चक्कर लगाता हुआ जाता था, और उसने उन सभी स्थानों में इस्राएल का न्याय किया।

१७ और उसकी वापसी रमा में होती थी; क्योंकि वहीं उसका घर था; और वहीं उसने इस्राएल का न्याय किया; और वहीं उसने प्रभु के प्रति एक बलिवेदी का निर्माण किया।



आठवाँ अध्याय।


और यह होने कोइ आया, जब शमुएल बूढ़ा हो चुका था, तो उसने अपने बेटों को इस्राएल पर न्यायाधीष बना दिया।

अब उसके प्रथम-जन्मे का नाम योएल था; और उसके दूसरे का नाम अबिया था: वह बीरशबा में न्यायधीष थे।

और उसके बेटे उसके पथों पर नहीं चले, बल्कि लोभ-लालच के पीछे-पीछे परे मुड़ चले, और रिश्वतें लेते थे, और न्याय-निर्धारण को विकृत कर देते थे।

तब इस्राएल के सभी वृद्ध-गण स्वयं एकत्रित होकर शमुएल के पास रमा गए,

और उस से कहा, देखो, आप तो बूढ़े हो चले हैं जी, और आपके बेटे आपके पथों पर नहीं चलते हैं: अब हमारा न्याय करने के लिए एक राजा स्थापित कर दें समस्त राष्ट्रों के समान।

परन्तु शमुएल इस बात से अप्रसन्न हो उठा, जब उन्होंने कहा, हमारा न्याय करने के लिए एक राजा स्थापित कर दें। और शमुएल ने प्रभु से प्रार्थना की।

और प्रभु ने शमुएल से कहा, उन सभी बातों के विषय में उन लोगों की वाणी का श्रवण कर लो जो वो तुमसे कहते हैं: क्योंकि उन्होंने तुम्हें अस्वीकार नहीं किया है, बल्कि उन्होंने मुझे अस्वीकार कर दिया है, कि मैं इन पर राज करूँ।

उन सभी कर्मोंनुसार ही जो इन्होंने उस दिन से किए हैं जब से मैं इन्हें मिस्र में से बाहर ऊपर ले आया, इसी दिन तक ही, इन्होंने मेरा त्याग कर डाला है, और दूसरे ईश्वरों की सेवा की है, वैसे ही यह तुम्हारे साथ ही कर रहे हैं।

इसलिए अब इनकी वाणी का श्रवण कर लो; तथापि दृढ़ता से इनका विरोध करो, और इन्हें इस राजा की रीति बता दो जो इन पर राज करेगा।

१० और शमुएल ने प्रभु के सभी शब्द लोगों को बता दिए जिन्होंने एक राजा की माँग की थी।

११ और उसने कहा, यह उस राजा की रीति होगी जो तुम पर राज करेगा: वो तुम्हारे बेटों को लेकर उन्हें अपने लिए ही नियुक्त कर देगा, अपने रथों के लिए, और उसके घुड़सवार बनने के लिए; और कुछ उसके रथों के आगे-आगे दौड़ेंगे।

१२ और वो उन्हें अपने लिए हज़ारों पर कप्तान, और पचासों पर कप्तान नियुक्त कर देगा; और उनसे अपनी धरती जुतवाएगा, और अपनी फसल कटवाएगा, और अपने युद्ध-उपकरण, और रथों के उपकरण बनवाएगा।

१३ और वो तुम्हारी बेटियाँ लेकर उनसे मरहमें-इत्रादी बनवाएगा, और रसोईयों, और नान-बाईयों का काम लेगा।

१४ और वो तुम्हारे खेत, और तुम्हारे अंगूर-खेत, और तुम्हारे जैतून के खेत, उन में से अति-उत्तम ही ले लेगा, और उन्हें अपने नौकरों को दे देगा।

१५ और वो तुम्हारे बीज का, और तुम्हारे अंगूर-खेत का दसवाँ भाग लेकर अपने अफ़सरों और अपने नौकरों को दे देगा।

१६ और वो तुम्हारे नौकरों और तुम्हारी नौकरानियों, और तुम्हारे सबसे अच्छे युवकों, और तुम्हारे गधों को लेकर, अपने काम में लगा देगा।

१७ वो तुम्हारे भेड़ों का दसवाँ ले लेगा: और तुम उसके नौकर बन जाओगे।

१८ और तुम उस अपने राजा के कारण उस दिन चीख पड़ोगे जिसे तुमने अपने लिए चुना है; और प्रभु तुम्हें उस दिन में नहीं सुनेंगे। 

१९ तथापि लोगों ने शमुएल की वाणी का अनुपालन करने से मना कर दिया; और उन्होंने कहा, नहीं जी; बल्कि हम तो अपने ऊपर एक राजा को रखेंगे भई;

२० ताकि हम भी उन सभी राष्ट्रों जैसे बन जाएँ; और कि हमारा राजा हमारा न्याय करे, और हमारे आगे बाहर जाकर, हमारे युद्ध लड़े।

२१ और शमुएल ने लोगों के समस्त शब्द सुने, और उसने वो प्रभु के कानों में कह दिए।

२२ और प्रभु ने शमुएल से कहा, श्रवण कर लो भई इनकी वाणी का, और इनके लिए एक राजा बना दो। और शमुएल ने इस्राएल के जनों से कहा, प्रत्येक आदमी तुम अपने-अपने नगर में चले जाओ। 



नौवाँ अध्याय।


अब बिन्यामिन का एक पुरुष था, जिसका नाम किश था, अबिएल का बेटा, ज़रोर का बेटा, बेकोरत का बेटा, अफिया का बेटा, एक बिन्यामिन-वंशज, एक बलशाली शक्तिमान पुरुष।

और उसके पास एक बेटा था जिसका नाम शाऊल था, एक सुंदर और चुनिंदा युवक: और इस्राएल की सन्तानों के बीच उस से सुन्दर और कोई भी था: उसके कन्धों से लेकर और ऊपर वह लोगों में सबसे ऊँचा था।

और शाऊल के पिता किश की गधियाँ घुम गईं थीं। और किश ने शाऊल अपने बेटे से कहा, अपने साथ नौकरों में से एक को अभी लेकर उठो, जाओ उन गधियों को ढूँढ लो।

और वह एफ्रैम पहाड़ में से चलता गया, और शलिशा की भूमी को पार करता गया, परन्तु उन्होंने उन्हें नहीं पाया: फिर वह शलिम की भूमी में से पार गए, और वह वहाँ नहीं थीं: और वह बिन्यामिन-वंशजों की भूमी के पार गया, परन्तु उन्होंने उन्हें नहीं पाया।

और जब वह ज़ुफ की भूमी में पहुँचे थे, शाऊल ने अपने नौकर से कहा जो उसके साथ था, आओ और हम वापस लौट जाते हैं; कहिं मेरे पिता गधियों की चिंता छोड़ हमारी चिंता में पड़ जाएँ।

और उसने उस से कहा, देखें अब, इसी नगर में एक ईश्वर के बन्दे हैं, और वह एक आदरणीय पुरुष हैं; जो कुछ भी वो कहते हैं अवश्य ही घट जाता है: अब हम वहीं चले जाते हैं; मान लो वह हमें हमारा पथ बता दें जिस पर हम जाएँ।

तब शाऊल ने अपने नौकर से कहा, परन्तु देखो भई, यदि हम जाते हैं, हम उन पुरुष के लिए क्या ले जाएँ? क्योंकि हमारे पात्रों में वह रोटी तो समाप्त हो चुकी है, और कोई भी उपहार नहीं है उन ईश्वर के बन्दे के पास ले जाते हेतु: क्या है हमारे पास?  

और उस नौकर ने पुनः शाऊल को उत्तर दिया और कहा, देखें, मेरे पास यहीं मेरे हाथ में  एक चाँदी के शेक्ल का चौथा भाग है: यही मैं उन ईश्वर के बन्दे को हमारा पथ बता देने हेतु दे दूँगा।

इस्राएल में पूर्वकाल में जब कोई आदमी ईश्वर से पूछने जाता था, वह ऐसा बोला करता थे, जाओ, और हम भविष्यदर्शक के पास चले जाते हैं: क्योंकि वो जो अब पैगमबर कहलाया जाता है पूर्वकाल में भविष्यदर्शक कहलाया जाता था।

१० तब शाऊल ने अपने नौकर से कहा, भला कहा तुम ने; आओ हम चलते हैं। तो वो उस नगर चले गए जहाँ वो ईश्वर का बन्दा था।

११ और जैसे वह पहाड़ी पर नगर तक चढ़ाई कर रहे थे, उनसे चार युवती कुँवारियाँ मिलीं पानी खींचने बाहर जाती हुईं, और उनसे कहा, क्या वह भविष्यदर्शक यहीं हैं?

१२ और उन्होंने उन्हें उत्तर दिया और कहा, वह हैं जी; देखें वो आपके सामने ही हैं: फुर्ती से अब चले जाएँ, क्योंकि वो आज ही नगर में आए हैं; क्योंकि आज लोगों का एक बलिदान है उच्च स्थान में:

१३ जैसे ही आप नगर में जाएँगे, आप तुरँत ही उन्हें पा लेंगे, उनके उच्च स्थान में ऊपर भोजन करने हेतु जाने से पहले ही: क्योंकि लोग जब तक वो नहीं जाते नहीं खाएँगे, क्योंकि वही बलि को आशीष देते हैं; और उसके पश्चात वो आमन्त्रित भोजन करते हैं। इसलिए अब आप ऊपर चले जाएँ; क्योंकि लगभग इसी समय आप उन्हें पा लेंगे।

१४ और वह ऊपर नगर में चले गए: और जब उन्होंने नगर में प्रवेश कर लिया था, देखो, शमुएल उनके विपरीत बाहर निकल आया, ऊपर उच्च स्थान में जाने हेतु।

१५ अब प्रभु ने शमुएल को शाऊल के आने से एक दिन पूर्व ही उसके कान में बता दिया था, कहते हुए,     

१६ कल लगभग इस समय मैं तुम्हारे पास बिन्यामिन की भूमी में से बाहर एक आदमी को भेजूँगा, और तुम उसका मेरे लोगों इस्राएल पर कप्तान बनने के लिए अभिषेक कर दोगे, ताकि वह मेरे लोगों का पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में से बाहर बचाव कर ले: क्योंकि मैंने अपने लोगों पर दृष्टि डाल ली है, चूँकि उनकी चीख मुझ तक पहुँची है।

१७ और जब शमुएल ने शाऊल को देखा, प्रभु ने उस से कहा, भई देख लो वो आदमी जिसके विषय में मैं तुमसे बोला था! यही मेरे लोगों पर राज करेगा।

१८ तब शाऊल दरवाज़े में शमुएल के निकट आया, और कहा, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ मूझे बता दें कि भविष्यवक्ता का घर कहाँ है जी।

१९ और शमुएल ने शाऊल को उत्तर दिया और कहा, मैं हूँ वह भविष्यदर्शक: मेरे आगे-आगे ऊपर उस उच्च स्थान तक चले जाओ; क्योंकि तुम मेरे साथ आज भोजन करोगे, और कल मैं तुम्हें विदा कर दूँगा, और तुम्हें वो सभी कुछ बता दूँगा जो तुम्हारे मन में है।

२० और जहाँ तक तुम्हारी गधियों की बात आती है जो तीन दिन पूर्व घुम गई थीं, उनके लिए मन में चिंता मत करो; चूँकी वह ढूँढ ली गई हैं। और किस पर है समस्त इस्राएल की वाँछा? क्या वो तुम पर ही नहीं, और तुम्हारे पिता के समस्त घराने पर ही नहीं है क्या?

२१ और शाऊल ने उत्तर दिया और कहा, क्या मैं एक बिन्यामिन-वंशज नहीं हूँ क्या, इस्राएल की प्रजातियों में से सबसे छोटी का?

२२ और शमुएल, शाऊल और उसके नौकर को लेकर, उन्हें कक्ष में भीतर ले आया, और उन्हें आमंत्रितों के बीच, जो कि लगभग तीस व्यक्ति थे, सबसे मुख्य स्थान में बिठवा दिया।

२३ और शमुएल ने रसोईये से कहा, उस भाग को ले आओ जो मैंने तुम्हें दिया था, जिसके विषय में मैंने तुम से कहा था, इसे अपने पास रख लो।

२४ और उस रसोईये ने वह कन्धा और वो जो उस पर था लेकर, शाऊल के सामने रख दिया। और शमुएल ने कहा, देखो वह जो बचा हुआ है! इसे अपने सामने रख कर खा लो: क्योंकि इसी ही समय के लिए इसे तुम्हारे लिए रखा गया है जब से मैंने कहा, मैंने लोगों को आमन्त्रित कर लिया है। तो शाऊल ने शमुएल के साथ उस दिन भोजन खाया।

२५ और जब वह उस उच्च स्थान ने नगर में नीचे गए थे, शमुएल ने घर की छत पर शाऊल के साथ गोष्ठी ही।

२६ और वह सुबह-सुबह उठे: और लगभग दिन की भोर के समय यह होने को आया, कि शमुएल ने शाऊल को घर की छत पर बुला लिया, कहते हुए, ऊपर आओ, ताकि मैं तुम्हें विदा कर दूँ। और शाऊल उठा और वह दोनो बाहर निकल गए, वह और शमुएल, बाहर ही।  

२७ और जैसे वह नगर के अन्त तक नीचे जाते गए, शमुएल ने शाऊल से कहा, नौकर को हमारे आगे चले जाने के लिए कह दो, और वह पार चलता गया, परन्तु तुम कुछ समय अचल खड़े हो जाओ, ताकि मैं तुम्हें ईश्वर का शब्द बता दूँ।



दसवाँ अध्याय।


तब शमुएल ने एक तेल का प्याला लेकर उसे उसके सर पर उँडेल दिया, और उसे चूमा और कहा, क्या यह इसलिए नहीं है क्या चूँकि प्रभु ने तुम्हारा उनकी विरासत पर कप्तान बनने के लिए अभिषेक कर दिया है?

जब तुम मुझ से विदाई ले लोगे आज, तब तुम ज़लज़ा में बिन्यामिन की सीमा में राहेल के मक़बरे के साथ दो आदमियों से मिलोगे; और वह तुमसे कहेंगे, वो गधियाँ जिन्हें तुम ढूँढने गए थे मिल गईं हैं: और लो, तुम्हारे पिता उन गधियों की चिंता छोड़ कर तुम्हारा शोक मना रहे हैं, कहते हुए, मैं अपने बेटे के लिए क्या करूँ?

तब तुम वहाँ से आगे चलते जाओगे, और तुम तबोर के मैदान पहुँच जाओगे, और वहाँ तुम से तीन आदमी ऊपर ईश्वर के पास बेतएल जाते हुए मिलेंगे, एक तीन हलवान उठाए हुए, और एक तीन पराँठे लिए हुए, और एक अंगूर-रस की बोतल उठाए हुए:

और वह तुम्हें प्रणाम करेंगे, और तुम्हें दो पराँठे दे देंगे; जिन्हें तुम उनके हाथों से ग्रहण कर लोगे।

उसके पश्चात तुम ईश्वर की पहाड़ी तक पहूँच जाओगे, जहाँ पलिश्तिम-वंशजों की चौकी है: और यह होने को आएगा, जब तुम वहाँ नगर पहुँच जाओगे, कि तुम उच्च स्थान ने नीचे आते हुई एकि पैग़म्बरों की टोली से मिलोगे एक सितार, और एक ढपली, और एक बाँसुरी, और एक वीणा उनके आगे-आगे; और वह प्रेरित-उपदेश देंगे:

और प्रभु के भावात्मा तुम पर पड़ेंगे, और तुम उनके संग प्रेरित-उपदेश दोगे, और एक अन्य पुरुष में परिवर्तित हो जाओगे।

और इसे ऐसा होने देना, जब यह संकेत तुम्हारे साथ घट जाएँगे, तब तुम वैसा ही कर देना जैसा तुम्हें अवसर मिले; क्योंकि ईश्वर तुम्हारे साथ हैं।

और तुम मुझ से पहले नीचे गिलगल चले जाओगे; और देखो, मैं तुम्हारे पास जाऊँगा, जले-चढ़ावे चढ़ाने हेतु, और शान्ति-चढ़ावों की बालियों का बलिदान करने हेतु: तुम सात दिन प्रतीक्षा करोगे, जब तक मैं तुम्हारे पास आता हूँ, और तुम्हें बताता हूँ कि तुम क्या करोगे।

और यह ऐसा ही था, कि जब उसने शमुएल से वापस चले जले हेतु अपनी पीठ मोड़ी, ईश्वर ने उसे एक अन्य हृदय प्रदान कर दिया: और वह सभी संकेत उस दिन घट गए।

१० और जब वह वहाँ उस पहाड़ी पर गए थे, देखो तो, पैग़म्बरों की एक टोली उनसे मिली; और ईश्वर का भावात्मा उस पर पड़ा, और उसने उनके बीच प्रेरित उपदेश दिया।

११ और यह होने को आया, जब उसे पहले से जानने वालों ने यह देखा, देखो, वह पैग़म्बरों के बीच प्रेरित उपदेश दे रहा था, तब लोगों ने एक दूसरे से कहा, यह क्या है जो किश के बेटे के साथ हो गया है? क्या शाऊल भी पैग़म्बरों में से ही है क्या?

१२ और उसी स्थान में से एक ने उत्तर दिया और कहा, परन्तु उनका पिता कौन है? इसलिए यह एक कहावत बन गई, क्या शाऊल भी पैग़म्बरों में से ही है क्या?

१३ और जब उसने प्रेरित-उपदेश दे देने का अन्त कर दिया था, वह एक उच्च स्थान में गया।

१४ और शाऊल के चाचा ने उस से और उसके नौकर से कहा, कहाँ गए थे तुम? और उसने कहा, गधियों को खोजने: और जब हमने उन्हें नहीं देखा, हम शमुएल के पास पहुँचे।

१५ और शाऊल के चाचा ने कहा, बताओ मुझे, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, शमुएल ने क्या कहा तुमसे।

१६ और शाऊल ने अपने चाचा से कहा, उन्होंने हमें स्पष्टता से बता दिया कि वह गधियाँ मिल चुकी हैं। परन्तु उस राज्य के विषय में जो शमुएल बोला था, उसने उसे नहीं बताया।

१७ और शमुएल ने लोगों को एक साथ मिस्पेह में प्रभु के पास बुला कर;

१८ इस्राएल की सन्तानों से कहा, इस्राएल के प्रभु ईश्वर इस प्रकार कहते हैं, मैं इस्राएल को मिस्र में से बाहर ऊपर ले आया, और तुम्हारा मिस्रवासियों के हाथ में से बाहर, और उन सभी राज्यों के, और उनके हाथ में से बाहर जो तुम्हारा अत्याचार करते थे, बचाव कर दिया:  

१९ और तुमने इस दिन अपने ईश्वर को अस्वीकार कर दिया है, जिन्होंने स्वयं ही तुम्हारा तुम्हारी समस्त आपदाओं और तुम्हारी आपत्तियों से बचाव कर दिया था; और तुमने उनसे कह दिया है, जी , बल्कि हम पर तो एक राजा नियुक्त कर दें। इसलिए अब अपनी प्रजातियों से, और अपने हज़ारों से स्वयं को प्रभु के समक्ष प्रस्तुत कर दो।

२० और जब शमुएल इस्राएल की समस्त प्रजातियों को निकट ले आया था, बिन्यामिन की प्रजाति पकड़ ली गई थी।

२१ और जब वो बिन्यामिन की प्रजाती को उनके परिवारोंनुसार निकट ले आया था, मत्री का परिवार पकड़ लिया गया था,    और किश का बेटा शाऊल पकड़ा गया था: और जब उन्होंने उसे ढूँढा, वो तो उन्हें मिला ही नहीं!

२२ इसलिए उन्होंने प्रभु से और पूछ-ताछ की, यदि वह पुरुष वहाँ आए। और प्रभु ने उत्तर दिया, देखो, उसने स्वयं को सामान के बीच छुपा लिया है।

२३ और वो भाग कर उसे वहाँ से ले आए: और जब वह लोगों के बीच खड़ा था, वह लोगों में से हर किसी से अपने कन्धों और ऊपर से ऊँचा था।

२४ और शमुएल ने सभी लोगों से कहा, तुम देख रहे हो जिसे प्रभु ने चुना है, कि इसके जैसा समस्त लोगों के बीच कोई भी नहीं है? और सभी लोग ललकार पड़े, राजा जीवित रहे।

२५ तब शमुएल ने लोगों को राज्य की रीति बता दी, और उसे एक पुस्तक में लिख कर उसे प्रभु के समक्ष रख दी। और शमुएल ने सभी लोगों को भेज दिया, प्रत्येक पुरुष को अपनी ही घर।

२६ और शाऊल भी गिब्या घर चला गया; और उसके साथ एक पुरुषों को दल गया जिनके हृदय ईश्वर ने छू दिए थे।

२७ परन्तु बलियल की सन्तानों ने कहा, यह आदमी हमें कैसे बचाएगा? और उन्होंने उस से घृणा की, और उसके लिए कोई उपहार नहीं लाए। परन्तु वह चुप रहा।



ग्यारहवाँ अध्याय।


तब उस अम्मोन-वंशज नहश ने चढ़ाई कर दी और यबेशगिलद के विरुद्ध पड़ाव डाल दिया: और यबश के सभी व्यक्तियों ने नहश से कहा, हमारे साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बना लो और हम तुम्हारी सेवा करेंगे।

और उस अम्मोन-वंशज नहश ने उन्हें उत्तर दिया, इस आधार पर मैं तुम्हारे साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाऊँगा, कि मैं तुम्हारी सारी दाईं आँखें नोच डालूँ, और इसे समस्त इस्राएल के प्रति एक निन्दा बना कर रख दूँ।

और यबश के वृद्ध-गणों ने उस से कहा, हमें सात दिनो की मोहलत दे दो, ताकि हम इस्राएल की समस्त सीमाओं में संदेश-वाहक भेज दें: और तब यदि कोई भी आदमी हमें बचाने वाला हो, तो हम तुम्हारे पास बाहर जाएँगे।

तब वह संदेश-वाहक शाऊल के पास गिब्या पहुँचे, और लोगों के कानों में वह समाचार बता दिए: और सभी लोगों ने अपनी वाणियाँ उठाईं और रो पड़े।

और देखो, खेत में से पशु-समूह के पीछे शाऊल बाहर निकला; और शाऊल ने कहा, लोगों को क्या सता रहा है कि यह रो रहें हैं? और उन्होंने उसे यबश के लोगों के समाचार बता दिए।

और ईश्वर के भावात्मा शाऊल पर पड़े जब उसने वह समाचार सुने, और उसका क्रोध बहुत ही सुलग उठा।

और उसने बैलों का एक जूआ लिया, और उन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में काट डाला, और उन्हें उन संदेश-वाहकों के हाथों इस्राएल की समस्त सीमाओं के सर्वत्र में भिजवा दिया, कहते हुए, जो कोई भी शाऊल के पीछे और शमुएल के पीछे नहीं आता है, वैसा ही उसके बैलों के साथ कर दिया जाएगा। और लोगों पर प्रभु का भय छा गया, और वह एक मत से बाहर निकल आए।

और जब उसने उनकी बज़क में गिनती की, इस्राएल की सन्तानें तीन लाख थीं, और यहूदा के आदमी तीस हज़ार थे।

और उन्होंने उन संदेश-वाहकों से कहा जो आए थे, इस प्रकार तुम यबेशगिलद के पुरुषों से कहोगे, कल ही सूर्य के गरम हो जाने के समय तक तुम्हारे पास सहायता पहुँचेगी। और वह संदेश-वाहक आए और उन्होंने यबश के पुरुषों को यह बता दिया; और वह प्रसन्न हो उठे।

१० इसलिए यबश के आदमियों ने कहा, कल हम तुम्हारे पास बाहर निकल आएँगे, और तुम हमारे साथ वह सभी कुछ कर देना जैसा तुम्हें भला प्रतीत हो।

११ और यह ऐसा ही था, कि शाऊल ने लोगों को तीन दलों में डाल दिया; और वह प्रातः वाली पहरेदारी की घड़ी में सेना के मध्य में गए, और अम्मोन-वंशजों को दिन की गर्मी तक मार डाला: और यह होने को आया, कि वह जो बचे रह गए थे तितर-बीतर हो गए, कि उन में से दो भी एक साथ बचे रहे।

१२ और लोगों ने शमुएल से कहा, वह कौन है जिसने कहा, क्या शाऊल हम पर राज करेगा? उन आदमियों को ले आओ, ताकि हम उन्हें मृत्यु के घाट उतार दें।

१३ और शाऊल ने कहा, कोई भी आदमी इस दिन मृत्यु के घाट नहीं उतारा जाएगा: क्योंकि आज प्रभु ने इस्राएल में बचाव क्रियान्वित कर दिया है।

१४ तब शमुएल ने लोगों से कहा, आओ और हम गिलगल चले जाते हैं, और राज्य को वहीं नवीकृत कर देते हैं।

१५ और सभी लोग गिलगल चल दिए; और वहीं उन्होंने शाऊल को राजा बना दिया प्रभु के समक्ष गिलगल में ही; और वहीं उन्होंने शान्ति चढ़ावों के बलिदानों की बलियाँ दीं प्रभु के समक्ष, और वहीं शाऊल और इस्राएल के समस्त लोगों ने अत्यंत हर्ष मनाया।



बारहवाँ अध्याय।


और शमुएल ने समस्त इस्राएल से कहा, देखो, मैंने उस सभी के विषय में जो तुम ने मुझ से कहा तुम्हारी वाणी का श्रवण कर लिया है, और तुम पर एक राजा बना दिया है।

और देख लो, राजा तुम्हारे सम्मुख चल रहे हैं: और मैं बूढ़ा हूँ और श्वेत बालों वाला हूँ; और देखो मेरे बेटे तुम्हारे साथ ही हैं: और मैं तुम्हारे सम्मुख ही अपने बचपन से लेकर इसी दिन तक चला हूँ।

देख लो भई, यह रहा मैं: प्रभु के समक्ष, और उनके अभिषिक्त के समक्ष मेरे विरुद्ध साक्ष्य दे दो: किसका साँड लिया है मैंने? या किसका गधा ले लिया है मैंने? या किसके साथ मैंने धोखा-धड़ी की है? या किसका मैंने अत्याचार किया है? या फिर किसके हाथ से मैंने कोई भी घूस खाई हो अपने आँखों को उस से अन्धा कर देने हेतु? और मैं उसे तुम्हें पुनः स्थापित कर दूँगा।

और उन्होंने कहा, तुमने हमारे साथ धोखा-धड़ी नहीं की है, ही हमारा अत्याचार किया है, ही तुमने किसी भे आदमी के हाथ से कुछ भी लिया है।

और उन्होंने उनसे कहा, प्रभु तुम्हारे विरुद्ध साक्षी हैं, और उनके अभिषिक्त इस दिन साक्षी हैं, कि तुम्हें मेरे हाथ में कुछ भी नहीं मिला है। और उन्होंने उत्तर दिया, वही साक्षी हैं।

और शमुएल ने लोगों से कहा, वह प्रभु थे जिन्होंने मूसा और हारुन को उन्नत किया, और जो तुम्हारे पित्रों को मिस्र की भूमी में से ऊपर बाहर ले आए।

इसलिए अब अचल खड़े हो जाओ, ताकि मैं तुम्हारे साथ प्रभु के सम्मुख प्रभु के समस्त नेक कार्यों के विषय में विचार-विमर्श करूँ, जो उन्होंने तुम्हारे साथ और तुम्हारे पित्रों के साथ किए।

जब याकूब मिस्र में गए थे, और तुम्हारे पित्र प्रभु के प्रति चीख पड़े थे, तब प्रभु ने मूसा और हारुन को भेज दिया, जिन्होंने तुम्हारे पित्रों को मिस्र में से बाहर निकाल कर उन्हें इस स्थान में बसा दिया।

और जब वह प्रभु अपने ईश्वर को भूल गए थे, उन्होंने उन्हें हज़ोर की सेना के कप्तान, सिसरा के हाथ में, और पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में, और मोआब के राजा के हाथ में बेच डाला, और वह उनके विरुद्ध लड़ पड़े।

१० और वह प्रभु की ओर चीखे, और कहा, हम ने पाप कर दिया है, क्योंकि हमने प्रभु का त्याग कर दिया है, और बअलिम और अश्तरोत की सेवा की है: परन्तु अब हमें हमारे शत्रुओं के हाथ में से बचा लें, और हम आपकी सेवा करेंगे।

११ और प्रभु ने यरुबबअल, और बेदन, और यिफ्ता, और शमुएल को भेजा, और चारों ओर तुम्हारे शत्रुओं के हाथ में से तुम्हें बचा लिया, और तुम सुरक्षित बसते रहे।

१२ और जब तुम ने अम्मोन की सन्तानों के राजा नहश को तुम्हारे विरुद्ध आते देखा, तुम ने मुझ से कहा, नहीं; बल्कि एक राजा हमारे ऊपर राज करेगा: जब प्रभु तुम्हारे ईश्वर तुम्हारे राजा थे।

१३ इसलिए अब देख लो उस राजा को जिसे तुम ने चुना है, और जिसकी तुमने वाँछा की है! और देख लो, प्रभु ने तुम्हारे ऊपर एक राजा को स्थापित कर दिया है।

१४ यदि तुम प्रभु का भय मानोगे, और उनकी सेवा करोगे, और उनकी वाणी का पालन करोगे, और प्रभु के आदेश के विरुद्ध विद्रोह नहीं करोगे, तब दोनो तुम और तुम पर शासन करने वाला वो राजा भी प्रभु तुम्हारे ईश्वर का अनुसरण करते रहोगे:

१५ परन्तु यदि तुम प्रभु की वाणी का पालन नहीं करोगे, बल्कि प्रभु के आदेश के विरुद्ध विद्रोह कर बैठोगे, तब प्रभु का हाथ तुम्हारे विरुद्ध हो जाएगा, जैसे वह तुम्हारे पित्रों के विरुद्ध था।

१६ इसलिए अब खड़े हो जाओ और इस महान घटना को देखो, जिसे प्रभु तुम्हारी आँखों के समक्ष करेंगे।

१७ क्या आज गेहूँ की फसल की कटाई नहीं है क्या? मैं प्रभु को पुकारूँगा, और वह गर्जन और वर्षा भेज देंगे; ताकि तुम आभास कर लो और देख लो कि तुम्हारी दुष्टता विशाल है, जो तुमने प्रभु की दृष्टि में कर डाली है, एक राजा की माँग करने में।

१८ तो शमुएल ने प्रभु को पुकारा; और प्रभु ने उस दिन गर्जन और वर्षा भेज दीं: और सभी लोग प्रभु और शमुएल से बहुत ही डर गए।

१९ और सभी लोगों ने शमुएल से कहा, अपने नौकरों के लिए प्रभु अपने ईश्वर से प्रार्थना कर दो, कि हम मरें : चूँकि हमने अपने समस्त पापों में अपने लिए एक राजा की माँग करने की बुराई भी जोड़ दी है।

२० और शमुएल ने लोगों से कहा, डरो मत: तुम ने यह सारी दुष्टता कर डाली है: तथापि प्रभु का अनुसरण करने से परे मत मुड़ो, बल्कि प्रभु की सेवा अपने सम्पूर्ण हृदय से करो;

२१ और तुम परे मत हटो: क्योंकि तब तुम व्यर्थ बातों के पीछे-पीछे लग जाओगे, जो ही लाभकारी होती हैं ही बचाव करती हैं; क्योंकि वह व्यर्थ ही हैं।

२२ क्योंकि प्रभु अपने लोगों को अपने महान नाम के वास्ते नहीं त्यागेंगे: क्योंकि प्रभु तुम्हें अपना गण बना देने से प्रसन्न हैं।

२३ इसके अतिरिक्त जहाँ तक मेरी बात आती है, ऐसा कतई हो कि मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करना बँद करके प्रभु के विरुद्ध पाप कर बैठूँ: बल्कि मैं तुम्हें वह अच्छा और सही पथ सिखाऊँगा: 

२४ बस केवल प्रभु का भय मानो, और सत्य में अपने सम्पूर्ण हृदय से उनकी सेवा करो: क्योंकि विचार करो भई कितनी बड़ी बातें उन्होंने तुम्हारे लिए कर डाली हैं!

२५ परन्तु यदि तुम फिर भी दुष्टता करोगे, तुम बहाय चले जाओगे, दोनो तुम और तुम्हारा राजा। 



तेरहवाँ अध्याय।


शाऊल ने एक वर्ष राज किया; और जब उसने इस्राएल पर दो वर्ष राज कर लिया था,

शाऊल ने अपने लिए इस्राएल के तीन हज़ार पुरुष चुने; जिन में से दो हज़ार शाऊल के साथ मिकमश और बेतएल पहाड़ में थे, और एक हज़ार योनातन के साथ थे बिन्यामिन के गिब्या में: और शेष लोगों को उसने प्रत्येक पुरुष को उसके तम्बू में भेज दिया।

और योनातन ने पलिश्तिम-वंशजों की चौकी को हरा दिया जो गेबा में थी, और पलिश्तिम-वंशजों ने उसके विषय में सुना। और शाऊल ने समस्त भूमी के सर्वत्र में चिंघाड़ा बजवा दिया, कहता हुआ, इब्रानियों को सुन लेने दो।

और समस्त इस्राएल ने कहा-सुनी कि शाऊल ने पलिश्तिम-वंशजों की एक चौकी पीट डाली थी, और कि इस्राएल पलिश्तिम-वंशजों के प्रति अति-घृणात्मक भी बन चुका था। और लोग शाऊल के पीछे-पीछे गिलगल बुला लिए गए थे।

और उन पलिश्तिम-वंशजों ने स्वयं को एक साथ इस्राएल के साथ लड़ाई करने के लिए एकत्रित किया, तीस हज़ार रथ, और छह हज़ार घुड़-सवार, और जने समुद्र तट पर रेत के समान जनौघ में: और वह ऊपर पहुँचे, और मिकमश में पड़ाव डाल दिया, बेत-आवन के पूर्व की ओर।

जब इस्राएल के आदमियों ने देखा कि वह तो संकट में पड़ गए थे, क्योंकि लोग यातनित हो उठे थे, तब लोगों ने स्वयं को गुफाओं में, और झाड़ियों में, और चट्टानों में, और उच्च-स्थानों में, और गड्ढों में छिपा लिया।

और इब्रानियों में से कुछ यर्दन को पार कर गाद और गिलद की भूमी में चले गए। जहाँ तक शाऊल की बात आती है, वह तो अभी तक भी गिलगल में ही था, और सभी लोग थरथराते हुए उसका अनुसरण कर रहे थे।

और वह सात दिन ठहरा रहा, इस स्थित समायानुसार जो शमुएल ने नियुक्त किया था: परन्तु शमुएल गिलगल नहीं आया; और लोग उस से तितर-बितर हो गए थे।

और शाऊल ने कहा, मेरे पास यहाँ एक जला-चढ़ावा, और शान्ति-चढ़ावे ले आओ। और उसने वह जला-चढ़ावा चढ़ा दिया।

१० और यह होने को आया, कि जैसे ही उसने उस जले-चढ़ावे को चढ़ा देने का अन्त कर दिया था, देखो तो, शमुएल पहुँचा; और शाऊल उस से मिलने बाहर गया, उसे प्रणाम करने।

११ और शमुएल ने कहा, क्या कर दिया है अपने? और शाऊल ने कहा, क्योंकि मैंने देखा कि लोग मुझ से तितर-बितर हो गए थे, और कि आप उन नियुक्त दिनो के अन्दर-अन्दर नहीं पधारे, और कि वो पलिश्तिम-वंशज एक साथ मिकमश में स्वयं एकत्रित हो गए थे;

१२ इसलिए मैंने कहा, भई वो पलिश्तिम-वंशज तो अब नीचे आकर मुझ पर गिलगल तक धमक पड़ेंगे, और मैंने प्रभु से तो अनुनय किया ही नहीं है: इसलिए मैंने अपने आप पर ज़ब्र डाला, और एक जला-चढ़ावा चढ़ा डाला। 

१३ और शमुएल ने शाऊल से कहा, आप ने मूर्खता कर दी है: आपने प्रभु अपने ईश्वर का आदेश नहीं रखा है, जो उन्होंने आपको आदेश दिया था: नहीं तो अभी ही प्रभु ने आपका राज्य इस्राएल पर सदैवत्वता के लिए स्थापित कर दिया होता।

१४ परन्तु अब आपका राज्य बना नहीं रहेगा: प्रभु ने एक पुरुष उनके अपने ही हृदय के पीछे पड़ा हुआ ढूँढ लिया है, और प्रभु  ने उसे अपने लोगों पर कप्तान बनने के लिए आदेश दे दिया है, क्योंकि आपने उसका अनुपालन नहीं किया जो प्रभु ने आपको आदेश दिया था। 

१५ और शमुएल उठा और गिलगल से बिन्यामिन के गिब्या ऊपर चला गया। और शाऊल ने उन लोगों की गिनती की जो उसके साथ उपस्थित थे, लगभग छह सौ आदमी।

१६ और शाऊल और योनातन उसका बेटा, और वो लोग जो उसके साथ उपस्थित थे, बिन्यामिन के गिब्या में ठहरे रहे: परन्तु उन पलिश्तिम-वंशजों ने मिकमश में पड़ाव डाल दिया।

१७ और उन पलिश्तिम-वंशजों की छावनी में से बाहर तीन गुटों में वो विनाशक निकल पड़े: एक गुट उस पथ पर मुड़ गया जो ओफ्रा तक जाता है, शुआल की भूमी तक:

१८ और एक अन्य गुट पथ से मुड़ कर बेतहोरोन की ओर: और एक अन्य गुट उस पथ की ओर मुड़ चला जो जँगली-क्षेत्र की ओर ज़ेबोइम की घाटी को ताकता है।

१९ अब इस्राएल की समस्त भूमी के सर्वत्र में कोई भी कारीगर था: चूँकि उन पलिश्तिम-वंशजों ने कहा था, कहिं ये इब्रानी अपने लिए तलवारें या भालें बना लें:

२० बल्कि सभी इस्राएली उन पलिश्तिम-वंशजों के पास नीचे चले जाते थे, प्रत्येक आदमी अपने हल, और अपने फाल, और अपने कुल्हाड़े, और अपनी दरांति को तेज़ करवाने के लिए।

२१ तथापि उनके पास रेती करने वाला उपकरण था दरांतियों के लिए, और फालों के लिए, और खेती वाले काँटों के लिए, और कुल्हाड़ों के लिए, और अंकुशों की नोकों को तेज़ करने के लिए।

२२ तो रण दिवस पर यह होने को आया, कि शाऊल और योनातन के साथ जो लोग थे उन में से किसी के भी हाथ में ही तलवार ही भाला पाया गया था: बल्कि शाऊल और योनातन उसके बेटे के पास वह पाया गया था।

२३ और उन पलिश्तिम-वंशजों की चौकी मिकमश के मार्ग की ओर बाहर निकल चली।



चौदहवाँ अध्याय।


अब किसी दिन यह होने को आया, कि शाऊल के बेटे योनातन ने अपने अस्त्र ढोने वाले उस युवा पुरुष से कहा, जाओ, और हम उन पलिश्तिम-वंशजों की चौकी तक चले जाते हैं, जो दूसरी ओर है। परन्तु उसने अपने पिता को नहीं बताया।

और शाऊल गिब्या के अंतिम-वर्ती भाग में एक अनानास के पेड़ तले ठहरा रहा जो कि मिग्रोन में है: और वह जने जो उसके साथ थे लगभग छह सौ आदमी थे;

और अहिया, अहितब का बेटा, इकबोद का भाई, फिनहास का बेटा, बेटा एली का, शिलो में एफद पहने हुआ प्रभु का वो पुरोहित। और लोग यह जानते नहीं थे कि योनातन चला जा चुका था।

और उन मार्गों के बीच जिन पर से योनातन उन पलिश्तिम-वंशजों की चौकी तक चले जाने की सोच में था, एक नुकीली चट्टान एक ओर थी, और एक नुकीली चट्टान दूसरी ओर थी: और एक का नाम बोज़ज़ था, और दूसरी का नाम सेने था।

और एक का आगे वाला भाग उत्तर की ओर स्थित था मिकमश के विपरीत, और वो दूसरा दक्षिण की ओर गिब्या के विपरीत।

और योनातन ने अपने अस्त्र ढोने वाले उस युवा पुरुष से कहा, आओ भई, और हम इन बेख़तनितों की चौकी तक पार चले जाते हैं: सम्भव है कि प्रभु हमारे लिए कुछ कर दिखाएँ: क्योंकि प्रभु के लिए तो बचाव करने हेतु कोई भी अंकुश नहीं है, कईयों से या थोड़ों से!

और उसके शस्त्र ढोने वाले ने उस से कहा, आपके मन में जो भी हो वह सभी कुछ कर दें: आप मुड़े; देखें, मैं आपके हृदयानुसार आप ही के साथ हूँ।

तब योनातन ने कहा, देखो, हम इन आदमियों के पास पार चले जाएँगे, और हम स्वयं को उन्हें दिखला देंगे।

यदि वो हम से इस प्रकार कहते हैं, ठहरे रहो जब तक हम तुम्हारे पास नहीं जाते हैं; तब हम अपने स्थान में ही अचल खड़े रहेंगे, और उनके पास ऊपर नहीं जाएँगे।

१० परन्तु यदि वो इस प्रकार कहते हैं, हमारे पास ऊपर जाओ; तब हम ऊपर चले जाएँगे: चूँकी प्रभु ने उन्हें हमारे हाथ में प्रदान कर दिया है: और यही हमारे लिए एक संकेत होगा।

११ और उन दोनो ने उस पलिश्तिम-वंशजों की चौकी को स्वयं प्रकट करवा दिया: और उन पलिश्तिम-वंशजों ने कहा, देखो तो, इब्रानी उन गड्ढों में से बाहर निकल आएँ हैं भई जहाँ उन्होंने अपने आप को छुपा कर रखा हुआ था।

१२ और उस चौकी के लोगों ने योनातन और उसके शस्त्र ढोने वाले को उत्तर दिया और कहा, हमारे पास ऊपर जाओ और हम तुम्हें एक बात जता देंगे। और योनातन ने अपने शस्त्र ढोने वाले से कहा, मेरे पीछे-पीछे जाओ: क्योंकि प्रभु ने इन्हें इस्राएल के हाथ में प्रदान कर दिया है। 

१३ और योनातन ऊपर अपने हाथों पर और अपने पैरों पर चढ़ाई करता गया, और उसका शस्त्र ढोने वाला उसके पीछे-पीछे: और वो योनातन के सामने गिरते गए; और उसका अस्त्र ढोने वाला उन्हें उसके पीछे-पीछे मार डालता गया।

१४ और वह प्रथम संहार जो योनातन और उसके शस्त्र ढोने वाले ने किया था, लगभग बीस आदमियों का था, मान लो कि भूमी के लगभग आधे एकड़ में ही, जिसे बैलों का एक जूआ जोत दे।

१५ और सेना में, रण-भूमी में, और सभी लोगों के बीच कँप-कपी मच गई: वह चौकी और वह विनाशक भी काँप रहे थे, और धरती काँप उठी: तो यह तो एक बहुत ही बड़ी कँप-कपी थी भई।

१६ और बिन्यामिन के गिब्या में शाऊल के पहरेदारों ने देखा; और देखो तो, वह जनौघ पिघलता चला गया, और वह एक दूसरे को पीटते चले गए।

१७ तब शाऊल ने उन लोगों से कहा जो उसके साथ थे, गिनती कर लो, और देखो कि हम में से कौन चला गया है। और जब उन्होंने गिनती कर ली थी, देखो तो, योनातन और उसका अस्त्र-ढोने वाला वहाँ नहीं थे।

१८ और शाऊल ने अहिया से कहा, यहाँ ईश्वर का संदूक ले आओ। क्योंकि ईश्वर का संदूक उस समय इस्राएल की सन्तानों के पास था।

१९ और यह होने को आया, जैसे शाऊल पुरोहित से बात कर रहा था, कि उन पलिश्तिम-वंशजों की सेना में वो शोर होता रहा और बढ़ता चला गया: और शाऊल ने पुरोहित से कहा, अपना हाथ खींच लो।

२० और शाऊल और उसके साथ उन सभी लोगों ने स्वयं को एकत्रित किया, और वह युद्ध करने पहुँचे: और देखो तो, हर एक आदमी की तलवार उसी के साथी के विरुद्ध थी, और एक बहुत ही बड़ी अस्त-व्यस्तता मची हुई थी।

२१ इसके अतिरिक्त उस समय से पूर्व वह इब्रानी जो उन पलिश्तिम-वंशजों के साथ थे, जो उनके साथ चारों ओर के देहात से शिविर में ऊपर चले गए थे, यहाँ तक कि वो भी उन इसराएलियों के साथ होने के लिए मुड़ चले जो शाऊल और योनातन के साथ थे।

२२ इसी प्रकार वह समस्त इस्राएल के पुरुष जिन्होंने स्वयं को एफ्रैम पहाड़ में छुपा लिया था, जब इन्होंने सुना कि वह पलिश्तिम-वंशज भाग गए थे, यहाँ तक कि वह भी युद्ध में उनके पीछे कस के पड़ गए।

२३ तो प्रभु ने उस दिन इस्राएल को बचा लिया: और युद्ध बेत-आवन तक पार चला गया।

२४ और इस्राएल के पुरुष उस दिन दुखी थे: क्योंकि शाऊल ने लोगों से सौगन्ध दिलवा ली थी, कहते हुए, श्रापित हो वो आदमी जो कोई भी भोजन संध्या के समय तक खाता है, ताकि मेरा प्रतिषोध मेरे शत्रुओं पर ले लिया जाए। तो लोगों में से किसी ने भी कोई भोजन नहीं चखा।

२५ और भूमी के वह सभी एक वन में पहुँचे; और धरती पर मधु था।

२६ और जब लोग उस वन में पहुँचे थे, देखो तो, वो मधु टपक रहा था; लेकि कोई भी आदमी अपना हाथ अपने मूँह तक नहीं लाया: क्योंकि वो लोग उस शपथ का भय मान रहे थे।

२७ परन्तु योनातन ने सुना नहीं था जब उसके पिता ने लोगों को उस सौगन्ध का आदेश दे दिया था: इसी कारण वश उसने अपने हाथ में उस लट्ठ की नोक को एक मधु के छत्ते में डुबो कर, अपना हाथ अपने मूँह पर लगा दिया: और उसकी आँखें उज्ज्वलित हो उठीं।

२८ तब उन लोगों में से एक जने ने उत्तर दिया और कहा, आपके पिता ने कड़ाई से लोगों को एक शपथ दिलवाई थी, कहते हुए, श्रापित हो वो आदमी जो कोई भी भोजन इस दिन खाता है। और लोग शिथिल हो रहे थे।

२९ तब योनातन ने कहा, मेरे पिता ने तो भूमी को सता दिया है: मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ, क्योंकि मैंने इस मधु में से थोड़ा सा ही चख लिया है, कि कैसे मेरी आँखें उज्ज्वलित हो गईं हैं!

३० तो भई और कितना अधिक, यदि आज लोगों ने संयोग से अपने शत्रुओं की लूट-पाट में से स्वतंत्रता से खा लिया होता? तो क्या अभी ही उन पलिश्तिम-वंशजों के बीच और भी बड़ा संहार नहीं मच गया होता?

३१ और उन्होंने उन पलिश्तिम-वंशजों को मिकमश से आयलोन तक हरा दिया: और वह लोग बहुत ही शिथिल हो रहे थे।

३२ और लोग लूट पर झपट रहे थे, और भेड़ों, और सांडों, और बछड़ों कोइ लेकर उन्हें धरती पर मार रहे थे: और लोग उन्हें रक्त के साथ ही खा रहे थे।

३३ तब उन्होंने शाऊल को बताया, कहते हुए, देखें, लोग तो प्रभु के विरुद्ध पाप कर रहे हैं कि वो तो रक्त के साथ खा रहे हैं। और उसने कहा, तुमने तो कपटता कर डाली है: इस दिन मुझ पर ही एक बड़ा पत्थर लुढ़का दो।

३४ और शाऊल ने कहा, स्वयं चले जाओ लोगों के बीच और उनसे कहो, यहीं मेरे पास हर आदमी अपना साँड, और हर आदमी अपनी भेड़ ले आए, और इन्हें यहीं मार कर खा ले; और रक्त के संग खाने से प्रभु के विरुद्ध पाप मत करो। और सभी लोग, उस रात प्रत्येक पुरुष अपने संग अपना साँड ले आया, और उन्हें वहीं मार दिया।

३५ और शाऊल ने प्रभु के प्रति एक बलिवेदी का निर्माण किया: वही वो पहली बलिवेदी थी जो उसने प्रभु के प्रति निर्मित की थी।

३६ और शाऊल ने कहा, हम रात को उन पलिश्तिम-वंशजों का पीछा करते हुए नीचे जाते हैं, और उन्हें सुबह के उजाले तक लूट डालते हैं, और हम उन में से एक भी आदमी बचा नहीं रहने देंगे। और उन्होंने कहा, जो कुछ भी आपको भला लगे वो सभी कुछ कर दें। तब उस पुरोहित ने कहा, हम यहीं ईश्वर के समीप आएँ।

३७ और शाऊल ने ईश्वर से परामर्श लिया, क्या मैं नीचे पलिश्तिम-वंशजों का पीछा करता हुआ जाऊँ? क्या आप उन्हें इस्राएल के हाथ में प्रदान कर देंगे? परन्तु उन्होंने उसे उस दिन उत्तर नहीं दिया।

३८ और शाऊल ने कहा, लोगों के समस्त प्रमुख, तुम यहाँ निकट जाओ: और देख कर जान लो कि किस में इस दिन यह पाप हुआ है।

३९ क्योंकि प्रभु के जीते जी, जो इस्राएल का बचाव करते हैं, भले ही वो मेरे बेटे योनातन में ही हो, वो अवश्य ही मरेगा।

परन्तु लोगों के बीच एक भी आदमी था जिसने उसे उत्तर दिया।

४० तब उसने समस्त इस्राएल से कहा, तुम इस ओर हो जाओ, और मैं और मेरा बेटा योनातन दूसरी ओर हो जाएँगे। और लोगों ने शाऊल से कहा, जो आपको भला लगे वो कर दें।

४१ इसलिए शाऊल ने इस्राएल के प्रभु ईश्वर से कहा, एक परिपूर्ण पर्ची प्रदान कर दें। और शाऊल और योनातन पकड़ लिए गए: परन्तु वह लोग बच निकले।

४२ और शाऊल ने कहा, मेरे और मेरे बेटे योनातन के बीच पर्ची डालो। और योनातन पकड़ा गया।

४३ तब शाऊल ने योनातन से कहा, मुझे बता दो कि क्या कर डाला है तुमने? और योनातन ने उसे बता दिया और कहा, मैंने तो बस अपने हाथ में उस लट्ठ की नोक से थोड़ा सा ही मधु चख लिया था बस, और लो भई, मुझे तो मर ही जाना है!

४४ और शाऊल ने उत्तर दिया, ईश्वर तो यह कर ही दें और इस से भी और अधिक: क्योंकि तुम अवश्य ही मरोगे योनातन! 

४५ और उन लोगों ने शाऊल से कहा, क्या योनातन मरेगा क्या, जिसने इस्राएल में यह विशाल बचाव क्रियान्वित किया है? ऐसा कतई हो भई! प्रभु के जीते जी, इसके सर का एक भी बाल धरती पर नहीं गिरेगा जी; चूँकी इसने इस दिन ईश्वर के साथ श्रम किया है। तो उन लोगों ने योनातन को बचा लिया, कि वो मरा नहीं।  

४६ तब शाऊल उन पलिश्तिम-वंशजों का पीछा करने से ऊपर जा चला: और वो पलिश्तिम-वंशज अपने ही स्थान जा चले।

४७ तो शाऊल ने इस्राएल पर राज अपनी पकड़ में ले लिया, और वह प्रत्येक दिशा में अपने समस्त शत्रुओं के विरुद्ध लड़ा, मोआब के विरुद्ध, और अम्मोन की सन्तानों के विरुद्ध, और एदोम के विरुद्ध, और ज़ोबा के राजाओं के विरुद्ध, और पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध: और जहाँ कहिं भी वो मुड़ा, उसने उन्हें संतापित कर डाला।

४८ और उसने एक सेना एकत्रित की, और अमालेक-वंशजों को पीट डाला, और इस्राएल को उनके लुटेरों के हाथों में से बचा लिया।

४९ अब योनातन, और इशुई, और मल्किशुआ, शाऊल के बेटे थे: और उसकी दोनो बेटियों के नाम यह थे: प्रथम जन्मी का नाम मेरब, और छोटी का नाम मिकल था:

५० और शाऊल की पत्नी का नाम अहिनोम था, अहिमाज़ की बेटी: और सेना के कप्तान का नाम अबनर था, नर का बेटा, शाऊल का चाचा।

५१ और किश शाऊल का पिता था; और अबनर का पिता नर अबिएल का बेटा था।

५२ और शाऊल के समस्त दिन पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध घोर लड़ाई छिड़ी रही: और जब कभी भी शाऊल किसी शक्तिशाली पुरुष को, या किसी पराक्रमी पुरुष को देखता था, तो वो उसे अपने पास रख लेता था।



पंद्रहवाँ अध्याय।


शमुएल ने भी शाऊल से कहा, प्रभु ने मुझे उनके लोगों पर, इस्राएल पर आपका राज्य-अभिषेक करने हेतु भेजा: अब इसलिए आप प्रभु के शब्दों की वाणी का श्रवण कर लें।

सेनाओं के प्रभु इस प्रकार कहते हैं, मुझे उसका स्मरण है जो अमालेक ने इस्राएल के साथ किया था, कैसे वह पथ पर उसके लिए घात लगाए बैठा हुआ था, जब वो मिस्र में से ऊपर रहा था।

अब जाकर अमालेक को हरा दो और पूर्णतः से जो कुछ भी उनके पास है विनष्ट कर डालो, और उन्हें बक्शो मत; बल्कि दोनो आदमी और औरत, स्तन से दूध पीता हुआ और दूध पीता हुआ शिशु, साँड और भेड़, ऊँट और गधा, मार डालो।

और शाऊल ने लोगों को एक साथ एकत्रित कर लिया, और उन्हें तलैम में गिना, दो लाख पैदल सैनिक, और यहूदा के दस हज़ार पुरुष।

और शाऊल अमालेक के एक नगर पहुँचा, और घाटी में घात बिठा दी।

और शाऊल ने किनियों से कहा, चले जाओ, प्रस्थान कर लो, अमालेक-वंशजों के बीच में से तुम नीचे चले जाओ, कहिं मैं तुम्हें उनके साथ नष्ट कर डालूँ: क्योंकि तुमने सभी इस्राएल की सन्तानों के प्रति करुणा दिखाई थी जब वो मिस्र में से बाहर ऊपर रहे थे। तो उन किनियों ने उन अमालेक-वंशजों के बीच में से प्रस्थान कर लिया।

और शाऊल ने उन अमालेक-वंशजों को हविला से लेकर, जब तक तुम मिस्र के विप्रीत वाले उस शूर पहुँचते हो, हरा दिया।

और उसने उन अमालेक-वंशजों के राजा अगग को जीवित पकड़ लिया, और सभी लोगों को तलवार की धार से पूर्णतः विनष्ट कर डाला।

परन्तु शाऊल और उन लोगों ने अगग को, और भेड़ों में से सर्वोच्चतम को, और सांडों में से, और मोटे-मोटों में से, और मेमनों में से, और वो सभी कुछ जो अच्छा था बक्श दिया, और उन्हें पूर्णतः विनष्ट नहीं किया: परन्तु वो सभी कुछ जो घृणात्मक और कचड़ा था उन्होंने पूर्णतः विनष्ट कर डाला।

१० तब प्रभु के शब्द शमुएल को आए, कहते हुए,

११ मुझे खेद है कि मैंने शाऊल को राजा बनने हेतु स्थापित किया: क्योंकि वो मेरा अनुसरण करने से पीछे मुड़ गया है, और उसने मेरे आदेशों को क्रियान्वित नहीं किया है। और इस से शमुएल शोक-ग्रस्त हो उठा; और वो सारी रात प्रभु से रोया।

१२ और जब शमुएल सुबह-सुबह शाऊल से भेंट करने प्रातः उठा, तो यह शमुएल को बताया गया, कहते हुए, शाऊल करमल पहुँचे हैं, और देखें जी, उन्होंने अपने लिए एक स्मारक खड़ा कर दिया, और घूम कर पार चलते गए और नीचे गिलगल को चले गए हैं।

१३ और शमुएल शाऊल के पास पहुँचा: और शाऊल ने उस से कहा, धन्य हों आप प्रभु द्वारा: मैंने प्रभु का आदेश क्रियान्वित कर दिया है जी।

१४ और शमुएल ने कहा, तो फिर मेरे कानों में इन भेड़ों के मिमियाने का क्या अर्थ है भई, और इन सांडों का रम्भाना जो मैं सुन रहा हूँ?

१५ और शाऊल ने कहा, वो तो इन्हें उन अमालेक-वंशजों के पास से ले आए हैं जी: क्योंकि लोगों ने तो उन भेड़ों में से सर्वोच्चतम को, और सांडों में से बक्श दिया है, प्रभु आपके ईश्वर के प्रति बलि चढ़ा देने हेतु; और उनका शेष तो हमने पूर्णतः विनष्ट कर डाला है जी।

१६ तब शमुएल ने शाऊल से कहा, ठहर जाएँ अब, और मैं आपको बतलाता हूँ कि प्रभु ने मुझ से इस रात क्या कहा है। और उसने उस से कहा, जी बोलें आप।

१७ और शमुएल ने कहा, जब आप अपनी ही दृष्टि में छोटे ही थे, क्या आपको इस्राएल की प्रजातियों का प्रधान नहीं बना दिया गया था क्या, और प्रभु ने आप को इस्राएल पर राजा अभिषिक्त कर दिया था?

१८ और प्रभु ने आपको एक यात्रा पर विदा कर दिया, और कहा, जाओ और उन पापियों उन अमालेक-वंशजों को पूर्णतः विनष्ट कर डालो, और उनके विरुद्ध लड़ाई करो जब तक कि वो समाप्त नहीं हो जाते हैं।

१९ तो फिर किस कारण वश आपने प्रभु की वाणी का अनुपालन नहीं किया भई, बल्कि उस लूट-पाट पर लपक पड़े, और प्रभु की दृष्टि में बुराई कर डाली? 

२० और शाऊल ने शमुएल से कहा, जी हाँ, मैंने प्रभु की वाणी का अनुपालन किया है, और उस पथ पर जाकर, जिस पर प्रभु ने मुझे भेजा था, अमालेक के राजा अगग को ले आया हूँ, और उन अमालेक-वंशजों को पूर्णतः विनष्ट कर डाला है।

२१ परन्तु लोगों ने उस लूट-पाट में से, प्रभु आपके ईश्वर के प्रति गिलगल में बलि चढ़ाने हेतु, भेड़ें और साँड, और उन वस्तुओं में से सबसे बढ़िया ले लीं जो कि पूर्णतः विनष्ट कर दी जानी चाहिए थीं। 

२२ और शमुएल ने कहा, क्या प्रभु को जले चढ़ावों और बलियों में इतना आनन्द मिलता है, जितना की प्रभु की वाणी का अनुपालन करने में? देख लें, अनुपालन करना बलि से बेहतर है, और श्रवण करना मेढ़ों की चर्बी से।

२३ क्योंकि विद्रोह, तन्त्र-विष ज्ञान के पाप के समान है, और हठ करना अधर्मता और मूर्ति-पूजा के समान। चूँकी आपने प्रभु के शब्द को अस्वीकार कर दिया है, उन्होंने भी आपको राजा बने रहने से अस्वीकार कर दिया है।

२४ और शाऊल ने शमुएल से कहा, मैंने पाप कर दिया है: चूँकि मैंने प्रभु के आदेश और आपके शब्दों का उल्लंघन कर डाला है; क्योंकि मैंने लोगों से डर कर उनकी वाणी का अनुपालन कर लिया।

२५ अब इसलिए, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मेरे पाप को क्षमा कर दें, और मेरे साथ पुनः वापस मुड़ जाएँ, ताकि मैं प्रभु की आराधना करूँ।

२६ और शमुएल ने शाऊल से कहा, मैं आपके साथ पुनः वापस नहीं मुड़ूँगा: क्योंकि आपने प्रभु के शब्द को अस्वीकार कर दिया है, और प्रभु ने आपको इस्राएल पर राजा बने रहने से अस्वीकार कर दिया है।

२७ और जैसे शमुएल घूम कर चले जाने के लिए मुड़ा, उसने उसके चौग़े के किनारे को पकड़ लिया, और उसे फाड़ डाला।

२८ और शमुएल ने उस से कहा, प्रभु ने इस दिन आपके हाथ से इस्राएल का राज्य फाड़ डाला है, और उसे आपके एक पड़ौसी को प्रदान कर दिया है, जो आपसे वरिष्ठ है।

२९ और इस्राएल का बल तो झूठ बोलेंगे ही मन-परिवर्तन करेंगे: क्योंकि वो कोई आदमी नहीं हैं कि वो मन-परिवर्तन करें।

३० तब उसने कहा, मैंने पाप कर दिया है: तथापि मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि मेरे लोगों के वृद्ध-गणों और इस्राएल के समक्ष मेरा अभी आदर करें, और पुनः मेरे साथ वापस मुड़ जाएँ, ताकि मैं प्रभु आपके ईश्वर की आराधना करूँ।

३१ तो शमुएल शाऊल के पीछे पुनः वापस मुड़ गया; और शाऊल ने प्रभु की आराधना की। 

३२ तब शमुएल ने कहा, ले आओ यहाँ मेरे पास उन अमालेक-वंशजों के राजा अगग को। और अगग उसके पास खुशी-खुशी आया। और अगग ने कहा, अवश्य ही मृत्यु की कटुता तो बीत चुकी है।

३३ और शमुएल ने कहा, जिस प्रकार तेरी तलवार ने स्त्रियों को सन्तानहीन बना दिया, उसी प्रकार ही तेरी माँ स्त्रियों के बीच सन्तानहीन होगी। और शमुएल ने प्रभु के समक्ष गिलगल में अगग को टुकड़ों-टुकड़ों में काट डाला।

३४ तब शमुएल रमा चला गया; और शाऊल ऊपर शाऊल के गिब्या में अपने ही घर चला गया।

३५ और शमुएल अपनी मृत्यु के दिवस तक अब और शाऊल से भेंट करने नहीं आया: तथापि शमुएल ने शाऊल के लिए शोक मनाया: और प्रभु को खेद हुआ कि उन्होंने शाऊल को इस्राएल पर राजा बना दिया था।



सोलहवाँ अध्याय।


और प्रभु ने शमुएल से कहा, और कितनी देर तक तुम शाऊल के लिए शोक मनाओगे भई, ये देखते हुए कि मैंने उसे इस्राएल पर शासन करने से अस्वीकार कर दिया है? अपने सींघ को तेल से भर लो, और चले जाओ, मैं तुम्हें बेतलेहम के यिशय के पास भेजूँगा: चूँकी मैंने अपने लिए उसके बेटों में से एक राजा उपलब्ध कर दिया है।

और शमुएल ने कहा, मैं कैसे जा सकता हूँ जी? यदि शाऊल यह सुनेगा, तो वो तो मुझे मार डालेगा। और प्रभु ने कहा, अपने साथ एक बछिया ले लो, और कहना, मैं प्रभु के लिए बलि चढ़ाने आया हूँ।

और यिशय को बलि पर बुला लेना, और मैं तुम्हें अवगत करा दूँगा वो क्या है जो तुमने करना है: और तुम उसका मेरे प्रति अभिषेक कर दोगे जिसका नाम मैं तुम्हें ले दूँगा।

और शमुएल ने वह कर दिया जो प्रभु ने बोला था, और बेतलेहम पहुँचा। और उस नगर के वृद्ध-गण उसके आगमन पर थरथराने लग गए, और कहा, आप शान्तिप्रीयता से ही पधार रहे हैं ?

और उसने कहा, शान्तिप्रीयता से ही: मैं प्रभु के लिए बलि चढ़ाने आया हूँ: पुनीत कर लो स्वयं को, और मेरे साथ बलि-चढ़ावे पर जाओ। और उसने यिशय और उसके बेटों को पुनीत कर दिया, और उन्हें बलि-चढ़ावे पर बुला लिया।

और यह होने को आया, कि जब वो गए थे, कि उसने एलिआब को देखा, और कहा, अवश्य ही प्रभु का अभिषिक्त उनके समक्ष है।

परन्तु प्रभु ने शमुएल से कहा, इसकी मुखाकृति को मत देखो, या इसके डील-डौल के कद को; चूँकी मैंने इसे अस्वीकार कर दिया है: क्योंकि प्रभु वैसे देखते हैं जैसे मानुष नहीं देखता: चूँकि मानुष तो बाहरी रूप-रंग को देखता है, परन्तु प्रभु हृदय को देखते हैं।

तब यिशय ने अबिनदाब को बुला कर उसे शमुएल के सम्मुख भेजा। और उसने कहा, ही प्रभु ने इसको चुना है। 

तब यिशय ने शमा को भेजा। और उसने कहा, ही प्रभु ने इसको चुना है।

१० पुनः, यिशय ने अपने बेटों में से सात को शमुएल के समक्ष भेजा। और शमुएल ने यिशय से कहा, प्रभु ने इन्हें नहीं चुना है।

११ और शमुएल ने यिशय से कहा, क्या तुम्हारे सारे लड़के यहीं हैं क्या? और उसने कहा, सबसे छोटा तो बचा रह गया है जी, और देखें तो, वो भेड़ों को चराता है। और शमुएल ने यिशय से कहा, भिजवा कर उसे ले आओ: क्योंकि हम उसके यहाँ जाने तक बैठेंगे नहीं।

१२ और उसने भिजवाया, और उसे भीतर ले आया। अब उसकी लालिमा झलकती थी, और वह एक रूपवान मुखमण्डल लिए, दिखने में सुंदर था। और प्रभु ने कहा, उठो, इसका अभिषेक कर दो: क्योंकि यह वही है।

१३ तब शमुएल ने उस तेल के सींघ को लेकर उसका उसके भाईयों के बीच अभिषेक कर दिया: और प्रभु के भावात्मा उस दिन से लेकर दाऊद पर गए। तो शमुएल उठा, और रमा चला गया।

१४ परन्तु प्रभु के भावात्मा ने शाऊल ने प्रस्थान कर लिया था, और प्रभु से एक बुरी भावात्मा ने उसे विचलित किया।

१५ और शाऊल के नौकरों ने उस से कहा, देखें अब, ईश्वर से एक बुरी भावात्मा आपको सता रही है।

१६ हमारे प्रभु अपने सेवकों को आदेश दे दें जो आपके समक्ष हैं, एक पुरुष को ढूँढ निकालने का, जो वीणा का एक चतुर वादक हो: और यह होने को जाएगा, जब ईश्वर से वो बुरी भावात्मा आप पर पड़ती है, तो वो अपने हाथ से बजाएगा, और आप अच्छे हो जाएँगे जी।

१७ और शाऊल ने अपने नौकरों से कहा, मुझे अब एक ऐसा पुरुष उपलब्ध करवा दो जो अच्छा वादन करता हो, और उसे मेरे पास ले आओ।

१८ तब उसके नौकरों में से एक ने उत्तर दिया और कहा, देखें, मैंने उस बेतलेहम-वाले यिशय के एक बेटे को देखा है जी, जो वादन में निपुण है, और एक पराक्रमी बलशाली पुरुष है, और एक योद्धा पुरुष, और रीतियों में प्रज्ञावान, और एक रूपवान व्यक्ति, और प्रभु उसके साथ हैं।

१९ इस कारण वश शाऊल ने यिशय के पास संदेश-वाहक भिजवा कर कहा, अपने बेटे दाऊद को जो भेड़ों के साथ है मेरे पास भेज दो।

२० और यिशय ने रोटी से, और एक अंगूर-रस की बोतल से, और एक हलवान से लदा हुआ एक गधा लेकर, उन्हें अपने बेटे दाऊद के साथ शाऊल के लिए भिजवा दिए।

२१ और दाऊद शाऊल के पास पहुँचा, और उसके समक्ष खड़ा हो गया: और वह उस से बहुत प्रेम करता था; और वह उसका शस्त्र-ढोने वाला बन गया।

२२ और शाऊल ने यिशय को भिजवाया, कहते हुए, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से कि दाऊद को मेरे समक्ष ही उपस्थित रहने दो; क्योंकि इसने मेरी दृष्टि में अनुग्रह प्राप्त कर लिया है।

२३ और यह होने को आया, जब ईश्वर से वो बुरी भावात्मा शाऊल पर आती थी, कि दाऊद एक वीणा लेकर उसे अपने हाथ से बजाता था: तो शाऊल सुख-चैन पाकर अच्छा हो जाता था, और वह बुरी आत्मा उस से विदा हो जाती थी।



सत्रहवाँ अध्याय।


अब उन पलिश्तिम-वंशजों ने संग्राम के लिए अपनी सेनाओं को एकत्रित किया, और वो एक साथ यहूदा के शोको में एक साथ एकत्रित थे, और शोको और अज़का के बीच एफसदम्मिम में पड़ाव डाल दिया।

और शाऊल और इस्राएल के आदमी एक साथ एकत्रित थे, और एला की घाटी के साथ पड़ाव डाला, और उन 

पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध रण-व्यूह रचा दिया।

और वो पलिश्तिम-वंशज एक ओर एक पर्वत पर खड़े थे, और इस्राएल दूसरी ओर एक पर्वत पर खड़ा था: और उनके बीच एक घाटी थी।

और उन पलिश्तिम-वंशजों की छावनी में से गथ का एक गोलियत नामक सर्वोत्तम-विजेता बाहर निकला, जिसका कद छह हाथ और एक बित्ता था।

और उसके सर पर पीतल का एक टोप था, और वह एक शल्कदार कवच चढ़ाए था; और उसके कवच का भार पीतल के पाँच हज़ार शेक्ल था।

और उसकी पिंडलीयों पर पीतल के कवच थे, और एक पीतल का भाला उसके कन्धों के बीच था।

और उसके भाले का छड़ एक जुलाहे के करघे की शाट समान था; और उसके भाले के सिरे का भार लोगे के छह सौ शेक्ल था: और एक उसके आगे-आगे एक ढाल ढोता हुआ जा रहा था।

और उसने खड़ा होकर इस्राएल की सेनाओं को ललकारा, और उनसे कहा, भई तुम अपने रण को व्यूह में रचाने क्यूँ बाहर निकल आए हो? क्या मैं एक पलिश्तिम-वंशज नहीं हूँ क्या, और तुम शाऊल के नौकर? अपने लिए तुम एक आदमी चुन लो, और उसे मेरे पास नीचे जाने दो।

यदि वो मेरे साथ लड़ाई करने में और मुझे मार डालने में सक्षम हो, तो हम तुम्हारे नकर बँ जाएँगे: परन्तु यदि मैं उसको परास्त कर देता हूँ, और मार डालता हूँ, तब तुम हमारे नौकर बन कर हमारी सेवा करोगे।

१० और उस पलिश्तिम-वंशज ने कहा, मैं इस दिन इस्राएल की सेनाओं को धुतकारता हूँ; दे दो मुझे एक आदमी ताकि हम एक साथ लड़ाई करें।

११ जब शाऊल और समस्त इस्राएल ने उस पलिश्तिम-वंशज के उन शब्दों को सुना, वह निराश हो गए, और बहुत ही डर गए।

१२ अब दाऊद उस यशय नामक बेतलेहमयहूदा के उस एफरथी का बेटा था; और उसके आठ बेटे थे: और शाऊल के दिनो में वो लोगों के बीच एक वृद्ध पुरुष गिना जाता था।

१३ और यिशय के तीन सबसे बड़े बेटे गए और शाऊल का अनुसरण युद्ध की ओर कर गए: और उसके उन तीनो बेटों के नाम जो युद्ध को चले गए थे एलिआब वो प्रथम-जन्मा, और उसके पश्चात अबिनदाब, और वह तीसरा शमा, थे।

१४ और दाऊद सबसे छोटा था: और वो तीन सबसे बड़े शाऊल के पीछे-पीछे चले गए।

१५ परन्तु दाऊद शाऊल से वापस लौट कर अपने पिता की भेड़ों को चराने बेतलेहम चला गया।

१६ और वो पलिश्तिम-वंशज सुबह और संध्या के समय निकट आता था, और चालीस दिन स्वयं को प्रस्तुत किया।

१७ और यिशय ने अपने बेटे दाऊद से कहा, अब अपने भाई-जनो के लिए इस भुने-अनाज का एक एफा, और ये दस रोटियाँ लेकर अपने भाईयों के पास छावनी दौड़ जाओ; 

१८ और इन दस पनीर की ईंटों को उठाकर उनके हज़ार के कप्तान के पास ले जाना, और अपने भाई-जनो की कुशलता देख कर उनसे एक रेहन ले लेना।

१९ अब शाऊल, और वह जने, और इस्राएल के समस्त पुरुष एला की घाटी में थे, उन पलिश्तिम-वंशजों के साथ लड़ते हुए।

२० और दाऊद सुबह-सुबह उठा, और उन भेड़ों को एक रखवाले के साथ छोड़कर, और उठा-ले-जाता हुआ विदा हो गया, जैसा यिशय ने उसे आदेश दिया था; और वो रण वाले खुदे नाले में पहुँचा, जैसे वो सेना लड़ने के लिए अग्रसर हो रही थे, और युद्ध के लिए ललकार मचा रही थी।

२१ चूँकी इस्राएल और पलिश्तिम-वंशजों ने रण-व्यूह रचा दिया था, सेना के विरुद्ध सेना।

२२ और दाओड ने अपनी सामग्री को सामग्री के रखवाले के हाथ में छोड़ा और वो सेना में दौड़ गया, और आकर अपने भाईयों को प्रणाम कर दिया।

२३ और जैसे वो उनके साथ वार्तालाप कर रहा था, देखो तो, उन पलिश्तिम-वंशजों की सेनाओं में से वो सर्वोत्तम-विजेता, गोलियत नामक गथ का वो पलिश्तिम-वंशज, चढ़ाई करता हुआ बाहर निकला, और उन्हीं शब्दोंनुसार बोला: और दाऊद ने उन्हें सुना।

२४ और इस्राएल के समस्त आदमी उस आदमी को देख कर उस से भाग खड़े हुए, और वो घोरता से भयभीत हो गए।

२५ और इस्राएल के आदमियों ने कहा, क्या तुमने वो आदमी देखा है जो चढ़ाई करता हुआ गया है? अवश्य ही इस्राएल को धुतकारने ही ये ऊपर चढ़ा आया है: और यह होगा, कि वो आदमी जो इसे मार डालता है, राजा उसबहुतेरे धन से धनवान बना देंगे, और उसे अपनी बेटी प्रदान कर देंगे, और उसके पिता का घर इस्राएल में मुक्त कर देंगे।

२६ और दाऊद उन पुरुषों से बोला जो उसके साथ ही खड़े थे, कहता हुआ, उस आदमी के साथ क्या किया जाएगा जो इस पलिश्तिम-वंशज को मारकर इस्राएल से इस धुतकारने को परे हटा दे? भई कौन है ये बेख़तनित पलिश्तिम-वंशज, कि ये उन जीवंत ईश्वर की सेनाओं को धुतकारे? 

२७ और उन लोगों ने उसे इस प्रकार उत्तर दिया, कहते हुए, इस प्रकार यह उसके साथ किया जाएगा जो इसे मार डालता है।

२८ और एलिआब उसके सबसे ज्येष्ठ भ्राता ने सुना जब वो उन आदमियों से बोला था; और एलिआब का क्रोध दाऊद के विरुद्ध सुलग उठा, और उसने कहा, तुम क्यों यहाँ नीचे आए हो? और किसके साथ तुमने जँगली-क्षेत्र में उन थोड़ी सी भेड़ों को छोड़ा है भई? मैं तुम्हारे अभिमान, और तुम्हारे हृदय की द्वेषपूर्णता से परिचित हूँ, क्योंकि तुम तो नीचे युद्ध देखने के लिए धमके हो।

२९ और दाऊद ने कहा, भई क्या कर दिया है मैंने अब? क्या यही कारण है क्या?

३० और वो उस से परे किसी दूसरे की ओर मुड़ गया, और उसी प्रकार बोला: और उन लोगों ने उसे पुनः उसी पहली ही रीतीनुसार उत्तर दे दिया।

३१ और जब दाऊद द्वारा बोले गए उन शब्दों का श्रवण कर लिया गया था, उन्होंने उन्हें शाऊल ने समक्ष दोहरा दिया: और उसने उसके लिए भुलवा भेजा।

३२ और दाऊद ने शाऊल ने कहा, इस के कारण किसी भी व्यक्ति का हृदय विफल हो; आपका नौकर जाकर इस पलिश्तिम-वंशज से लड़ाई करेगा।

३३ और शाऊल ने दाऊद से कहा, भई तुम इस पलिश्तिम-वंशज के विरुद्ध जाकर लड़ाई करने हेतु सक्षम नहीं हो: क्योंकि तुम तो बस एक युवक ही हो, और वो अपनी युवावस्था से लेकर एक योद्धा-पुरुष है!

३४ और दाऊद ने शाऊल से कहा, आपके सेवक ने अपने पिता के भेड़ों को चराया है जी, और एक शेर और एक भालू आकर झुण्ड में से एक मेमना उठा ले गए: 

३५ और मैं उसके पीछे-पीछे बाहर निकल पड़ा जी, और मैंने उसे उसके मूँह में से बचा लिया: और जब वो मेरे विरुद्ध उठ खड़ा हुआ, मैंने उसकी दाढ़ी पकड़ ली और उसका वध कर डाला।

३६ आपके सेवक ने दोनो उस शेर का और उस भालू का वध कर डाला जी: और ये पलिश्तिम-वंशज उन्हीं के समान एक बन जाएगा, देखते हुए कि इसने उन जीवंत ईश्वर की सेनाओं को धुतकार दिया है।

३७ दाऊद ने इसके अतिरिक्त कहा, उन प्रभु ने जिन्होंने मुझे उस शेर के पंजे से बाहर, और उस भालू के पंजे से बाहर बचा लिया, वो मुझे इस पलिश्तिम-वंशज के हाथ में से बाहर बचा लेंगे। और शाऊल ने दाऊद से कहा, जाओ, और प्रभु तुम्हारे साथ रहें। 

३८ और शाऊल ने दाऊद पर अपना कवच चढ़ा दिया, और उसने उसके सर पर एक पीतल का टोप लगा दिया; और उसने उसे एक शल्कदार कवच भी पहनवा दिया।

३९ और दाऊद ने अपनी तलवार अपने कवच पर कसी, और चलने का प्रयत्न किया; चूँकि उसने उसे परखा नहीं था। और दाऊद ने शाऊल से कहा, मैं इन में नहीं चल पारा जी; चूँकि मैंने इन्हें परखा नहीं है। और दाऊद ने उन्हें अपने पर से उतार दिया।

४० और उसने अपने हाथ में अपना लट्ठ लिया, और नदिका में से अपने लिए पाँच चिकने पत्थर चुन कर उन्हें एक चरवाहे के झोले में डाल दिए जो उसके पास था, एक थैली में ही; और उसका गोफन उसके हाथ में ही था: और वो उस पलिश्तिम-वंशज के निकट जाता गया।

४१ और वो पलिश्तिम-वंशज आता गया और दाऊद के निकट आता रहा; और ढाल ढोने वाला वो आदमी उसके आगे-आगे जाता रहा।

४२ और जब उस पलिश्तिम-वंशज ने आस-पास देखते हुए दाऊद को देखा, उसने उस से घृणा की: क्योंकि वह तो केवल एक युवक ही था, लालिमा उसके चेहरे पर, और सुंदर रूपवान था वह।

४३ और उस पलिश्तिम-वंशज ने दाऊद से कहा, क्या मैं कोई कुत्ता हूँ, कि तू मेरे पास छड़ियाँ लिए रहा है? और उस 

पलिश्तिम-वंशज ने दाऊद को गाली दी अपने ईश्वरों से।

४४ और उस पलिश्तिम-वंशज ने दाऊद से कहा, जा मेरे पास, और मैं तेरा माँस पवन के पंछियों को, और खेत के जानवरों को दे दूँगा।

४५ तब दाऊद ने उस पलिश्तिम-वंशज से कहा, तू मेरे पास एक तलवार के साथ, और एक भाले के साथ, और एक ढाल के साथ रहा है: लेकिन मैं तेरे पास इस्राएल की सेनाओं के ईश्वर, सेनाओं के प्रभु के नाम में रहा हूँ, जिन्हें तूने धुतकारा है।

४६ इसी दिन प्रभु तुझे मेरे हाथ में प्रदान कर देंगे; और मैं तुझे पीट डालूँगा, और तेरा सर तुझ पर से उड़ा डालूँगा; और इसी दिन मैं पलिश्तिम-वंशजों की सेना के शवों को पवन के पंछियों को, और पृथ्वी के जँगली जानवरों को दे दूँगा; ताकि समस्त पृथ्वी जान जाए कि इस्राएल में एक ईश्वर हैं।

४७ और यह समस्त समूह जान जाएगा कि प्रभु तलवार और भाले से नहीं बचाते हैं: चूँकि युद्ध प्रभु का है, और वही तुझे हमारे हाथों में प्रदान कर देंगे।

४८ और यह होने को आया, जब वो पलिश्तिम-वंशज उठकर आया और दाऊद से भिड़ने निकट रहा था, कि दाऊद ने शीघ्रता की, और सेना की ओर दौड़ पड़ा उस पलिश्तिम-वंशज से भिड़ने।

४९ और दाऊद ने अपना हाथ अपने थैले में डाला, और वहाँ से एक पत्थर लेकर उसे गोफन चला कर फैंक दिया और उस 

पलिश्तिम-वंशज को उसके माथे पर मार दिया, कि वो पत्थर उसके माथे में ही धँस गया; और वो अपने चहरे के बल धरती पर गिर गया।

५० तो दाऊद उस पलिश्तिम-वंशज पर एक गोफन और एक पत्थर से अभिभावी ठहरा, और उस पलिश्तिम-वंशज को हरा कर उसे मार डाला; परन्तु दाऊद के हाथ में कोई भी तलवार नहीं थी।

५१ इसलिए दाऊद भाग कर उस पलिश्तिम-वंशज पर खड़ा हो गया, और उसकी तलवार लेकर, उसे उसकी म्यान में से बाहर खींच कर उसे मार डाला, और उसका सर उसी से काट डाला। और जब उन पलिश्तिम-वंशजों ने देखा कि उनका 

सर्वोत्तम-विजेता तो मर गया था, वो भाग-खड़े हुए।

५२ और इस्राएल और यहूदा के आदमी उठ खड़े हुए, और ललकार मचा दी, और उन पलिश्तिम-वंशजों के पीछे पड़ गए, जब तक कि तुम घाटी तक, और एक्रोन के दरवाज़ों तक पहूँचते हो। और उन पलिश्तिम-वंशजों के घायल शरेइम के पथ के साथ, गथ तक भी, और एक्रोन तक नीचे गिरते गए।

५३ और इस्राएल की सन्तानें पलिश्तिम-वंशजों का पीछा करने से वापस लौट आईं, और उनके शिविरों में लूट मचा दी।

५४ और दाऊद उस पलिश्तिम-वंशज का सर लेकर उसे यरूशलेम ले आया; परन्तु उसने उसके अस्त्र-शस्त्रादी अपने ही शिविर में रख लिए।

५५ और जब शाऊल ने दाऊद को उस पलिश्तिम-वंशज के विरुद्ध आगे बढ़ता हुआ देखा, तो उसने सेना के कप्तान अबनर से कहा, अबनर, भई किसका बेटा है ये युवक? और अबनर ने कहा, आपकी आत्मा के जीते जी, हे राजा, मैं नहीं बता सकता।

५६ और राजा ने कहा, तुम पूछ-ताछ करो भई किसका बेटा है ये छोरा।

५७ और जैसे दाऊद उस पलिश्तिम-वंशज के संहार से वापस लौट रहा था, अबनर उसे लेकर शाऊल के समक्ष ले आया, उसके हाथ में उस पलिश्तिम-वंशज के सर के साथ।

५८ और शाऊल ने उस से कहा, युवक तुम किस के बेटे हो? और दाऊद ने उत्तर दिया, मैं आपके सेवक उन बेतलेहम-वासी यिशय का बेटा हूँ जी।



अट्ठारहवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब उसने शाऊल के साथ वार्तालाप करना समाप्त कर दिया था, कि योनातन की आत्मा दाऊद की आत्मा के साथ जुड़ गई थी, और योनातन उस से अपनी ही आत्मा समान प्रेम करने लगा। 

और शाऊल ने उसे उस दिन ले लिया, और उसे अब और अपने पिता के घर नहीं जाने दिया।

तब योनातन और दाऊद ने एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया, चूँकी वह उसके साथ अपनी की आत्मा समान प्रेम करता था।

और योनातन ने वो चौगा जो उस पर था स्वयं पर से उतार कर दाऊद को दे दिया, और अपने वस्त्र, अपनी तलवार तक, और अपने धनुष तक, और अपनी कमर-पेटी तक। 

और दाऊद बाहर निकल चला गया जहाँ कहिं भी शाऊल उसे भेजता था, और वो स्वयं बुद्धिमानी से व्यवहार किया करता था: और शाऊल ने उसे योद्धाओं पर स्थापित कर दिया, और वो समस्त लोगों की दृष्टि में, और शाऊल के सेवकों की दृष्टि में भी स्वीकृत था।

और यह होने को आया जैसे वह रहे थे, जब दाऊद उस पलिश्तिम-वंशज के संहार से वापस लौट चुका था, कि सभी नगरों में से स्त्रियाँ बाहर निकल आईं, गाती और नृत्य करती हुई, राजा शाऊल से भेंट करने हेतु, ढ़पलियों के साथ, हर्ष के साथ और संगीत वाद्य-यंत्रों के साथ। 

और उन स्त्रियों ने नाचते-गाते हुए एक दूसरी को उत्तर दिया कहते हुए, शाऊल ने तो अपने हज़ारों को मार डाला, और दाऊद ने अपने दसियों हज़ारों को। 

और शाऊल तो बहुत ही आक्रोशित हो उठा, और इस कथन ने उसे अप्रसन्न कर दिया; और उसने कहा, इन्होंने तो दाऊद के प्रति दसियों हज़ारों ठहरा दिए हैं, और मेरे प्रति बस केवल हज़ार ही: अब और क्या शेष रह गया है उसकी प्राप्ति के लिए, बस राज्य ही क्या? 

और उसी दिन से लेकर शाऊल दाऊद पर ताक लगाए रहा।

१० और अगले दिन यह होने को आया, कि शाऊल पर ईश्वर से वो बुरी आत्मा पड़ी, और वो अपने घर के बीच प्रेरित-उपदेश देने लग गया: और दिन-प्रति-दिन की भाँति दाऊद अपने हाथ से वादन कर रहा था: और शाऊल के हाथ में एक भाला था। 

११ और शाऊल ने वो भाला चला दिया; चूँकि उसने कहा, मैं तो दाऊद को भेदकर दीवार में ही धँसा डालूँगा। और दाऊद उसके सामने से दो बार परे हट गया।

१२ और शाऊल दाऊद से डरता था, क्योंकि प्रभु उसके साथ थे, और शाऊल से प्रस्थान कर चुके थे।

१३ इसलिए शाऊल ने स्वयं को उस से परे हटा लिया, और उसे एक हज़ार पर अपना कप्तान बना दिया; और वो लोगों के समक्ष आया-जाया करता था।

१४ और दाऊद ने अपनी समस्त रीतियों में बुद्धिमानी से व्यवहार किया; और प्रभु उसके साथ थे।

१५ इस कारण वश जब शाऊल ने देखा कि वो तो स्वयं बहुत बुद्धिमानी से व्यवहार किया करता था, तो वो उस से डर गया।

१६ परन्तु समस्त इस्राएल और यहूदा दाऊद से प्रेम करता था, क्योंकि वह उनके सामने आया-जाया करता था।

१७ और शाऊल ने दाऊद से कहा, मेरी बड़ी बेटी मेरब को देख लो भई, इसे मैं तुम्हें पत्नी स्वरूप प्रदान कर दूँगा: बस केवल तुम मेरे लिए पराक्रमी रहना, और प्रभु की लड़ाईयाँ लड़ते रहना। क्योंकि शाऊल ने कहा, मेरा हाथ इस पर पड़े, बल्कि पलिश्तिम-वंशजों का हाथ इस पर पड़े।

१८ और दाऊद ने शाऊल से कहा, मैं कौन हूँ जी? और मेरा जीवन, या मेरे पिता का परिवार इस्राएल में क्या है, कि मैं राजा का दामाद बनूँ?

१९ परन्तु यह होने को आया उस समय जब शाऊल की बेटी मेरब दाऊद को दे दी जानी चाहिए थी, कि उसे उस महोलथ-वाले अद्रियल को पत्नी के रूप में दे दिया गया था।

२० और शाऊल की बेटी मिकल दाऊद से प्रेम करती थी: और उन्होंने शाऊल को बताया, और वो इस बात से प्रसन्न हो गया।

२१ और शाऊल ने कहा, मैं इसे उसे दे दूँगा, ताकि वह इसके लिए एक फंदा बन जाए, और ताकि उन पलिश्तिम-वंशजों का हाथ इसके विरुद्ध हो जाए। इस कारण वश शाऊल ने दाऊद से कहा, तुम इस दिन मेरे दामाद बनोगे उन दोनो में से एक में।

२२ और शाऊल ने अपने सेवकों को आदेश दिया, कहते हुए, गोपनीयता से दाऊद के साथ गोष्ठी करो, और कहना, देखो, राजा तुम से प्रसन्न हैं, और उनके समस्त सेवक तुम से प्रेम करते हैं: अब इसलिए राजा के दामाद बन जाओ।

२३ और शाऊल के सेवकों ने ये शब्द दाऊद के कानो में बोल दिए। और दाऊद ने कहा, क्या ये तुम्हें कोई हल्की सी ही बात लग रही है भई राजा का दामाद बन जाना, यह देखते हुए कि मैं तो एक तुच्छ निर्धन पुरुष हूँ?

२४ और शाऊल के सेवकों ने उसे बता दिया, कहते हुए, दाऊद इस प्रकार बोला जी।

२५ और शाऊल ने कहा, इस प्रकार तुम दाऊद से कहोगे, राजा कोई भी दहेज नहीं चाहते, बल्कि उन पलिश्तिम-वंशजों की एक सौ आगे की चमड़ियाँ, राजा के शत्रुओं से प्रतिषोध हेतु। परन्तु शाऊल ने दाऊद को उन पलिश्तिम-वंशजों के हाथ गिरवा देने की सोची थी।

२६ और जब उसके नौकरों ने दाऊद को यह शब्द बताए, दाऊद को राजा का दामाद बन जाना भली प्रसन्नता लगी: और दिन समाप्त नहीं हुए थे।

२७ इस कारण दाऊद उठा और उसने और उसके आदमियों ने जाकर पलिश्तिम-वंशजों के दो सौ आदमियों को मार डाला; और दाऊद ने उनकी आगे की चमड़ियाँ लाकर, पूरी-पूरी गिन कर उन्हें राजा को प्रदान कर दीं, ताकि वो राजा का दामाद बन जाए। और शाऊल ने उसे अपनी बेटी मिकल पत्नी स्वरूप दे दी।

२८ और शाऊल देख कर यह जान गया कि प्रभु दाऊद के साथ थे, और कि शाऊल की बेटी मिकल उस से प्रेम करती थी।

२९ और शाऊल तथापि दाऊद से और भी अधिक डर गया; और शाऊल लगातार दाऊद का शत्रु बनता चला गया।

३० तब पलिश्तिम-वंशजों के प्रमुख आगे निकल पड़े: और यह होने को आया, उनके आगे निकल पड़ने के पश्चात, कि दाऊद ने शाऊल के समस्त सेवकों की अपेक्षा और भी अधिक बुद्धिमती से स्वयं व्यवहार किया।




उन्नीसवाँ अध्याय।


और शाऊल अपने बेटे योनातन से और अपने समस्त सेवकों से बोला, कि वो दाऊद की हत्या कर दें।

परन्तु शाऊल का बेटा योनातन दाऊद से अति प्रसन्न था: और योनातन ने दाऊद को बताया, कहता हुआ, शाऊल मेरे पिता तुम्हारी हत्या कर देना चाहते हैं: अब इसलिए मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, प्रातःकाल तक अपने स्वयं का ध्यान रख लो, और किसी गुप्त स्थान में ठहरे रहना, और स्वयं को छुपा कर रखना:

और मैं बाहर जाकर अपने पिता के साथ खेत में खड़ा हो जाऊँगा जहाँ तुम हो, और मैं तुम्हारे विषय में अपने पिता के साथ गोष्ठी करूँगा; और जो भी मैं समझ लूँगा, वही मैं तुम्हें बता दूँगा।

और योनातन ने अपने पिता शाऊल से दाऊद के विषय में भला बोला, और उस से कहा, राजा अपने सेवक के विरुद्ध, दाऊद के विरुद्ध पाप कर बैठें; क्योंकि उसने आपके विरुद्ध पाप नहीं किया है, और चूँकि उसके कर्म आपके प्रति बहुत अच्छे रहे हैं जी:

क्योंकि उसने तो अपना जीवन अपनी हथेली में डाल कर, उस पलिश्तिम-वंशज को मार डाला, और प्रभु ने समस्त इस्राएल के लिए एक विशाल बचाव क्रियान्वित कर दिया: आपने यह देखा और हर्ष भी मनाया: तो फिर किस कारण वश आप निर्दोष रक्त के विरुद्ध पाप करेंगे जी, दाऊद को बिन कारण मार डालने में?

और शाऊल ने योनातन की वाणी को सुना: और शाऊल ने शपथ दे दी, प्रभु के जीते जी, उसे नहीं मारा डाला जाएगा।

और योनातन ने दाऊद को बुलाया, और योनातन ने उसे यह सभी बातें बता दी। और योनातन दाऊद को शाऊल के पास ले आया, और वो पहले समयानुसार उसकी उपस्थिति में था।

और पुनः युद्ध छिड़ गया: और दाऊद बाहर निकल पड़ा, और उन पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध लड़ा, और उनका एक महा संहार से संहार कर डाला; और वो उस से भाग पड़े।

और शाऊल पर प्रभु से एक बुरी भावात्मा पड़ी, जैसे वो अपने हाथ में एक भाला लिए अपने घर में बैठा था: और दाऊद अपने हाथ से वादन कर रहा था।

१० और शाऊल उस भाले से दाऊद को भेद कर दीवार में ही धँसवा देना चाहता था; परन्तु वो शाऊल की उपस्थिति से बच निकला, और उसने वह भाला दीवार में ही धँसा दिया: और दाऊद भाग खड़ा हुआ, और उस रात बच निकला।

११ शाऊल ने दाऊद के घर उस पर पहरा बिठाने हेतु दूत भी भेजे, उसे प्रातःकाल में मार डालने हेतु: और दाऊद की पत्नी मिकल ने उसे बताया, कहते हुए, यदि आज रात आप अपना जीवन नहीं बचाएँगे, तो कल आपको मार दिया जाएगा।

१२ तो मिकल ने दाऊद को एक खिड़की में से नीचे उतार दिया: और वह चला गया, और भाग गया, और बच निकला।

१३ और मिकल ने एक प्रतिमा को लेकर उसे बिस्तर में लिटा दिया, और बकरे के बालों का एक तकिया उसके सहारे के लिए लगा दिया, और उसे एक चौग़े से ढक दिया।

१४ और जब शाऊल ने दाऊद को पकड़ने के लिए दूत भेजे, तो उसने कहा, वो तो बीमार हैं जी।

१५ और शाऊल ने उन दूतों को दाऊद को देखने पुनः भेजा, कहते हुए, उसे मेरे पास बिस्तर में ही ले आओ ताकि मैं उसे मार डालूँ। 

१६ और जब वो दूत अन्दर गए थे, देखो तो, बिस्तर में तो एक प्रतिमा थी, उसके सहारे के लिए बकरे के बालों का एक तकिया साथ ही।

१७ और शाऊल ने मिकल से कहा, तुमने मुझे इस प्रकार धोखा क्यों दिया है, और मेरे शत्रु को परे भेज दिया, कि वो बच निकला? और मिकल ने शाऊल को उत्तर दिया, उसने मुझ से कहा, मुझे जाने दो; मैं तुम्हें क्यों मार डालूँ?

१८ तो दाऊद भाग-खड़ा हुआ और बच कर शमुएल के पास रमा पहुँचा, और उसे सब कुछ बता दिया जो शाऊल ने उसके साथ किया था। और वो और शमुएल चले गए और नयोथ में रहने लगे।

१९ और यह शाऊल को बताया गया, देखें जी, दाऊद तो नयोथ में है रमा में।

२० और शाऊल ने दाऊद को पकड़ने के लिए दूत भेज दिए: और जब उन्होंने पैग़म्बरों की टोली को प्रेरित-उपदेश देते हुए, और शमुएल को उन पर नियुक्त खड़ा देखा, ईश्वर का भावात्मा शाऊल के दूतों पर पड़ा, और उन्होंने भी प्रेरित-उपदेश दिए।

२१ और जब ये शाऊल को बता दिया गया था, तो उसने अन्य दूतों को भेजा, और उन्होंने इसी प्रकार प्रेरित-उपदेश दिए। और शाऊल ने पुनः तीसरी बार दूत भेजे, और उन्होंने भी प्रेरित-उपदेश दिए।

२२ तब वो भी रमा चला गया, और सेकू में एक विशाल कुएँ पर पहुँचा: और उसने पूछा और कहा, कहाँ हैं शमुएल और दाऊद? और एक ने कहा, देखें, वो तो नयोथ में हैं रमा में।

२३ और वो वहाँ चला गया रमा में नयोथ: और उस पर भी ईश्वर का भावात्मा था, और वो चलता गया, और प्रेरित-उपदेश देता गया जब तक कि वो रमा में नयोथ पहुँचा था।

२४ और उसने अपने कपड़े भी उतार डाले, और इसी प्रकार शमुएल के समक्ष प्रेरित-उपदेश देता रहा, और उस सारे दिन और उस सारी रात नीचे नग्न ही गिरा पड़ा रहा। इस कारण वश वो कहते है, क्या शाऊल भी पैग़म्बरों में से ही है क्या?




बीसवाँ अध्याय।


और दाऊद रमा में नयोथ से भाग खड़ा हुआ, और आकर योनातन के समक्ष बोला, मैंने क्या किया है? मेरी अधर्मता क्या है? और तुम्हारे पिता के समक्ष क्या है मेरा पाप, कि वह मेरे जीवन के पीछे पड़े हुए हैं?

और उसने उस से कहा, ऐसा कतई हो भई! तुम नहीं मरोगे: देखो, मेरे पिता ही कुछ भी बड़ा या छोटा करेंगे, बल्कि वो मुझे बता देंगे: और मेरे पिता यह बात मुझ से क्यों छिपाएँ? बात ऐसी नहीं है भई।

और इसके अतिरिक्त दाऊद ने शपथ दी, और कहा, तुम्हारे पिता वश्य जानते हैं कि मैंने तुम्हारी दृष्टि में कृपा पा ली है; और वह कहते हैं, योनातन को यह पता लग पाए, कहिं वह दुखी हो जाए: परन्तु सच में प्रभु के जीते जी, और तुम्हारी आत्मा के जीते जी, मेरे और मृत्यु के बीच बस एक ही पग रह गया है।

तब योनातन ने दाऊद से कहा, जो कुछ भी तुम्हारी आत्मा इच्छा करती है, मैं उसे तुम्हारे लिए ही कर दूँगा।

और दाऊद ने योनातन से कहा, देखो, कल नया चंद्रमा है और मुझे भोजन करने राजा के साथ ही अवश्य बैठना है: परन्तु मुझे चले जाने दो ताकि मैं स्वयं को खेत में तीसरे दिन संध्या के समय तक छुपा लूँ।

यदि तुम्हारे पिता मेरा थोड़ा सा भी स्मरण करें, तो कहना, दाऊद ने आग्रहपूर्वक्ता से मुझ से अवकाश माँगा ताकि वो अपने नगर बेतलेहम दौड़ जाए: चूँकि वहीं एक वार्षिक बलिदान है समस्त पारिवर हेतु।

यदि वह ऐसा कहें, कोई बात नहीं; तुम्हारे नौकर के पास शान्ति रहेगी: परन्तु यदि वह बहुत आक्रोशित हो जाएँ, तब अवश्य जान लेना कि उनके द्वारा बुराई निर्धारित कर दी गई है।

इसलिए तुम अपने सेवक के साथ करुणता से व्यवहार करोगे; चूँकि तुमने अपने सेवक को अपने साथ प्रभु के एक प्रतिज्ञा-पत्र में बाँध दिया है: तथापी, यदि मुझ में अधर्मता हो, तो स्वयं ही मुझे मार डालो; तुम अपने पिता के पास मुझे क्यों ले आओ भई?

और योनातन ने कहा, ऐसा नहीं है तुम्हारे साथ: चूँकि यदि मैं अवश्य जानता कि तुम पर पड़ने की बुराई मेरे पिता द्वारा निर्धारित कर दी गई है, तो क्या वो मैंने तुम्हें बता दिया होता?

१० तब दाऊद ने योनातन ने कहा, कौन बताएगा मुझे? या यदि तुम्हारे पिता तुम्हें कठोरता से उत्तर दें?

११ और योनातन ने दाऊद से कहा, आओ और हम बाहर खेत में चले जाते हैं। और वो दोनो बाहर खेत में चले गए।

१२ और योनातन ने दाऊद से कहा, हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, जब मैंने लगभग कल किसी भी समय, या तीसरे दिन अपने पिता की जाँच-पड़ताल कर ली हो, और देखें, यदि दाऊद के प्रति भलाई हो, और मैं तुम्हें भिजवाकर, और तुम्हें बता दूँ;

१३ तो प्रभु योनातन के साथ यह कर ही दें और इस से भी और अधिक: परन्तु यदि मेरे पिता तुम्हारे साथ बुराई करने से प्रसन्न हों, तब मैं वो तुम्हें बता दूँगा, और तुम्हें परे भेज दूँगा, ताकि तुम शान्ति से चले जाओ: और प्रभु तुम्हारे साथ रहें, जैसे वो मेरे पिता के साथ रहे हैं।  

१४ और तुम केवल मेरे साथ मेरे जीते जी प्रभु की करुणा दिखलाओगे, ताकि मैं मरूँ : 

१५ बल्कि तुम अपनी करुणा को भी मेरे घराने से सदैवत्वता तक भी नहीं काटोगे: नहीं, जब प्रभु ने दाऊद के शत्रुओं में से प्रत्येक को धरती के चहरे पर से काट डाला होगा, तब भी नहीं।

१६ तो योनातन ने दाऊद के घराने के साथ एक प्रतिज्ञा-पत्र बना लिया, कहते हुए, प्रभु ही इसकी पूछ-ताछ करें दाऊद के शत्रुओं के हाथ से।  

१७ और योनातन ने दाऊद से पुनः प्रतिज्ञा दिलवाई, क्योंकि वो उस से प्रेम करता था: क्योंकि वो उस से अपनी ही आत्मा समान प्रेम करता था।

१८ तब योनातन ने दाऊद से कहा, कल नया चंद्रमा है: और तुम्हें स्मरण में लाया जाएगा चूँकी तुम्हारा आसन रिक्त होगा।

१९ और जब तुम तीन दिन ठहरे चकोगे, तब तुम शीघ्रता से नीचे जाकर उस स्थान पहुँचोगे जहाँ तुमने स्वयं को छुपा रखा था जब वो कार्य किया जाना था, और तुम एज़ल के पत्थर के साथ ठहरे रहोगे।

२० और मैं तीन तीर उसके पाशर्व की ओर चलाऊँगा, मानो कि मैं मैंने किसी लक्ष्य को भेदना हो।

२१ और देखो तो, मैं एक लड़के को भेजूँगा कहते हुए, जाओ भई, उन बाणों को ढूँढ लो। यदि मैं स्पष्टता से उस लड़के से बोलता हूँ, देखो वो बाण तुम्हारी इस ओर हैं, ले आओ उन्हें; तब तुम जाना: क्योंकि तुम्हारे साथ शान्ति रहेगी, कोई चोट नहीं; प्रभु के जीते जी।

२२ परन्तु यदि मैं उस युवक से इस प्रकार बोलता हूँ, देखो, वो बाण तो तुम्हारे पार हैं; अपने पथ पर चले जाना: चूँकि प्रभु ने तुम्हें विदाई दे दी है।

२३ और उस बात के विषय में जिसकी तुमने और मैंने चर्चा कर ली है, देखो, प्रभु तुम्हारे और मेरे बीच सदैवत्वता तक रहें।  

२४ तो दाऊद ने स्वयं को खेत में छिपा लिया: और जब नया चंद्रमा हो चुका था, राजा भोजन करने स्वयं बैठ गया।

२५ और राजा पहले के समान अपने आसान पर बैठ गया, दीवार के साथ ही एक कुर्सी पर: और योनातन उठा, और अबनर शाऊल के साथ ही बैठा था, और दाऊद का स्थान रिक्त था।

२६ तथापि शाऊल उन दिन कुछ भी नहीं बोला: क्योंकि उसने सोचा, कुछ हो गया होगा उसके साथ, वो स्वच्छ नहीं है; अवश्य ही वो स्वच्छ नहीं है।

२७ और अगले दिन यह होने को आया, जो कि माह का दूसरा दिन था, कि दाऊद का स्थान रिक्त था: और शाऊल ने अपने बेटे योनातन से कहा, किस कारण यिशय का बेटा भोजन करने नहीं रहा है, ही कल, ही आज?

२८ और योनातन ने शाऊल को उत्तर दिया, दाऊद ने मुझ से विनती करके बेतलेहम चले जाने हेतु अवकाश माँगा:

२९ और उसने कहा, मुझे चले जाने दें मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे; चूँकि नगर में हमारे परिवार को एक बलि चढ़नी है; और मेरे भाई ने मुझे वहीं उपस्थित होने का आदेश दिया है: और अब यदि मैंने आपकी दृष्टि में अनुग्रह पा लिया है, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, मुझे जाकर अपने भाई-जनों के साथ भेंट कर लेने दें। इस कारण वश वो राजा की मेज़ पर नहीं रहा है जी।   

३० तब शाऊल का क्रोध योनातन के विरुद्ध सुलग उठा, और उसने उस से कहा, तू उस कुटिल विद्रोही औरत के बेटे, मैं क्या जानता नहीं हूँ क्या कि तूने यीशय के बेटे को अपनी ही भ्रमितता के प्रति, और अपनी माँ के नंगेपने की भ्रमितता के प्रति चुन लिया है?

३१ क्योंकि धरती पर यिशय के बेटे के जीते जी, तू स्थापित नहीं होगा, ही तेरा राज्य। इस कारण अब भिजवाकर उसे मेरे पास ले , क्योंकि वो तो अवश्य ही मरेगा।

३२ और योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर दिया, और उस से कहा, वो किस कारण मारा जाएगा? क्या किया है उसने?

३३ और शाऊल ने उस पर उसे मार डालने हेतु एक भाला चला दिया: जिस से कि योनातन इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि उसके पिता द्वारा दाऊद की हत्या कर डालना निर्धारित किया जा चुका था।

३४ तो योनातन उस मेज़ पर से क्रूर क्रोध में उठ गया, और उस माह के दूसरे दिन उसने कुछ भी भोजन नहीं खाया: चूँकि वो दाऊद के लिए शोकार्तित था, क्योंकि उसके पिता ने उसे लज्जित कर दिया था।

३५ और सुबह यह होने को आया, कि दाऊद के साथ उस नियुक्त समय पर, योनातन बाहर उस खेत में चला गया, और उसके साथ एक छोटा लड़का।

३६ और उसने अपने उस लड़के से कहा, भागो, उन बाणों को ढूँढ निकाल लाओ जिन्हें मैं चलाता हूँ। और जैसे वो लड़का भाग रहा था, उसने एक बाण उसके पार चला दिया।

३७ और जब वो लड़का उस बाण के स्थान पर पहूँच गया था, जो योनातन ने छोड़ा था, योनातन ने उस लड़के की ओर चीखते हुए कहा, क्या वो बाण तुम्हारे पार नहीं है क्या?

३८ और योनातन उस लड़के की ओर चीखा, शीघ्रता करो भई, फुर्ती से, ठहरे मत रहो। और योनातन के उस लड़के ने उन बाणों को एकत्रित किय, और अपने मालिक के पास पहुँचा।

३९ परन्तु वो लड़का कुछ भी नहीं जानता था: बस केवल योनातन और दाऊद ही उस विषय से ज्ञात थे।

४० और योनातन ने अपने अस्त्र-शस्त्रादी अपने उस लड़के को दे दिए, और उस से कहा, चले जाओ, इन्हें उठाकर नगर में ले जाओ।

४१ और उस लड़के के चले जाते ही, दाऊद दक्षिण की ओर के एक स्थान में से उठा, और धरती पर अपने चहरे के बल गिर पड़ा, और वो स्वयं तीन बार झुका: और उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ वो रो पड़े, जब तक दाऊद अधिक बिलख पड़ा।

४२ और योनातन ने दाऊद से कहा, शान्ति से चले जाओ, जितना कि हम दोनो ने ही प्रभु के नाम में शपथ ले ली है, कहते हुए, प्रभु हों मेरे और तुम्हारे बीच, और मेरे बीज के और तुम्हारे बीज के बीच, सदैवत्वता के लिए। और उसने उठ कर प्रस्थान कर लिया: और योनातन नगर में चला गया।



इक्कीसवाँ अध्याय।


तब दाऊद पुरोहित अहिमलेक के पास नोब पहुँचा: और अहिमलेक दाऊद से मिलकर घबरा गया, और उस से कहा, तुम अकेले क्यूँ हो, और कोई भी आदमी तुम्हारे साथ नहीं है?

और दाऊद ने पुरोहित अहिमलेक से कहा, राजा ने मुझे एक कार्य का आदेश दिया है, और मुझ से कहा है, किसी भी आदमी को उस विषय के समबन्ध में पता मत चलने देना, जिसके लिए मैं तुम्हें भेज रहा हूँ, और जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है: और मैंने अपने सेवकों को एक अमुक स्थान पर नियुक्त कर दिया है।

इसलिए अब क्या है आपके हाथ में? मेरे हाथ में पाँच रोटियाँ मुझे दे दें, या वो जो कुछ भी मिलता है।

और पुरोहित ने दाऊद को उत्तर दिया और कहा, मेरे हाथ में तो कोई भी सामान्य रोटी नहीं है, परन्तु पवित्र-रोटी है; यदी युवा पुरुषों ने स्वयं को कम-से-कम स्त्रियों से परे रखा हुआ है।

और दाऊद ने पुरोहित को उत्तर दिया, और उस से कहा, सच में जी, स्त्रियाँ तो हम से इन तीन दिन परे रखी गई हैं, जब से मैं बाहर निकला हूँ, और इन युवा पुरुषों के पात्र पवित्र हैं, और रोटी तो एक प्रकार से सामान्य ही है, हाँ, भले ही वह इस दिन पात्र में पुनीत ठहरा दी गई थी। 

तो पुरोहित ने उसे पवित्र-रोटी दे दी: क्योंकि वहाँ कोई अन्य रोटी नहीं थी बस केवल भेंट-की रोटी, जो कि प्रभु के सामने से ली गई थी, गर्म रोटी रखने हेतु उस दिन में जब वो परे हटा दी जाती थी।

और शाऊल के नौकरों में से कोई एक आदमी उस दिन वहीं था, जो प्रभु के सम्मुख रुका हुआ था; और उसका नाम दोग था, एक एदोम-वंशज, उन गडरियों में से प्रमुख जो शाऊल के थे।

और दाऊद ने अहिमलेक से कहा, और क्या आपके हाथ में यहीं कोई भाला या तलवार नहीं हैं क्या? क्योंकि मैं तो अपने साथ ही अपनी तलवार लाया ही अपने शस्त्र, राजा के काम की शीघ्रता के कारण।

और पुरोहित ने कहा, उस पलिश्तिम-वंशज गोलियत की तलवार, जिसका तुमने एला की घाटी में संहार कर डाला था, देखो, वो यहीं है एफद की पीछे एक कपड़े मी लिपटी हुई: यदि तुम उसे लेते हो, तो उसे ले लो: क्योंकि यहाँ उसके सिवा और कोई भी नहीं है। और दाऊद ने कहा, वैसी तो और कोई भी नहीं है जी; उसे मुझे दे दें।

१० और उस दिन शाऊल के भय के मारे, दाऊद उठ कर, भाग-खड़ा हुआ, और गथ के राजा अकिश के पास चला गया।

११ और अकिश के नौकरों ने उस से कहा, क्या ये भूमी का राजा दाऊद नहीं है क्या? क्या उन्होंने एक दूसरे से इसके विषय में नृत्य करते हुए गाया नहीं था क्या, कहते हुए, शाऊल ने तो अपने हज़ारों को मार डाला, और दाऊद ने अपने दसियों हज़ारों को?

१२ और दाऊद ने यह शब्द अपने हृदय में समा लिए, और वो गथ के राजा अकिश से घोरता से डर गया।

१३ और उसने उनके सामने अपना व्यवहार परिवर्तित कर दिया, और स्वयं को उनके हाथों में पागल होने का ढोंग रचा दिया, और दरवाज़े के द्वारों पर खरोंचने लग गया, और अपनी थूक को नीचे अपनी दाढ़ी पर टपकाता रहा।

१४ तब अकिश ने अपने नौकरों से कहा, लो भई, देख रहे हो तुम कि यह आदमी तो पागल है: तो फिर किस कारण तुम इसे मेरे पास ले आए हो?

१५ क्या मुझे पागल आदमियों की आवश्यकता है क्या, कि तुम इस बन्दे को पागल-आदमी का खेल खेलने मेरी उपस्थिति में ले आए हो? क्या ये बन्दा मेरे घर में प्रवेश करेगा क्या?



बाईसवाँ अध्याय।


इसलिए दाऊद ने वहाँ से प्रस्थान कर लिया, और बच कर अद्युल्लम की गुफा जा चला: और जब उसके भाई-जनो और उसके पिता के समस्त घराने ने यह सुना, तो वह उसके पास नीचे चले गए।

और वह प्रत्येक जो संकट में था, और वह प्रत्येक जो ऋणी था, और वह प्रत्येक जो दुखी था, उन्होंने स्वयं को उसके पास एकत्रित कर लिया; और वो उन पर कप्तान बन गया: और उसके साथ लगभग चार सौ पुरुष थे।

और दाऊद वहाँ से मोआब के मिस्पेह चला गया: और उसने मोआब के राजा से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे कि मेरे पिता और मेरी माँ को आकर आपके साथ रह लेने दें, जब तक कि मैं जान लूँ कि ईश्वर मेरे लिए क्या करेंगे।

और वो उन्हें मोआब के राजा के सम्मुख ले आया: और वह उसके साथ उस समस्त समय तक निवास करते रहे जब तक दाऊद गढ़ में था।

और गाद पैग़म्बर ने दाऊद से कहा, गढ़ में मत रहो, प्रस्थान कर लो, और तुम स्वयं यहूदा की भूमी में जाओ। तब दाऊद ने प्रस्थान कर लिया, और वो हरेत के वन में पहुँचा।

जब शाऊल ने सुना कि दाऊद का पता चल गया था, और उन आदमियों का जो उसके साथ थे, अब शाऊल गिब्या में एक वृक्ष के तले रमा में निवास कर रहा था, अपने हाथ में एक भाला लिए, और उसके सभी सेवक उसके आस-पास ही खड़े थे;

तब शाऊल ने अपने सेवकों से कहा जो उसके आस-पास ही खड़े थे, सुन लो अब, तुम बिन्यामिन-वंशजों; क्या यिशय का बेटा तुम में से हर एक को खेत और अंगूर के खेत देगा, और तुम सभी को हज़ारों-हज़ारों के कप्तान, और सौ-सौ के कप्तान बनाएगा क्या;

कि तुम सभी ने मेरे विरुद्ध षड्यंत्र रचा दिया है, और कोई भी नहीं है जो मुझे बता रहा है कि मेरे बेटे ने यिशय के बेटे के साथ एक संगठन बना लिया है, और तुम में से कोई भी नहीं है जो मेरे लिए दुःख मना रहा है, या मुझे बता रहा है कि मेरे बेटे ने मेरे नौकर को मेरे विरुद्ध उत्तेजित कर दिया है, घात लगा देने के लिए, आज ही के समान?

तब दोग उस एदोम-वंशज ने उत्तर दिया, जो शाऊल के नौकरों पर नियुक्त था, और कहा, मैंने यिशय के बेटे को नोब आता हुआ देखा, अहितब के बेटे अहिमलेक के पास ही।

१० और उसने उसके लिए प्रभु से पूछ-ताछ की, और उसे खाद्य-पदार्थ दिए, और उसे उस पलिश्तिम-वंशक गोलियत की तलवार दे दी।

११ तब राजा ने अहितब के बेटे उस पुरोहित को, और उसके पिता के समस्त घराने को, उन पुरोहितों को जो नोब में थे, बुलवा लेने के लिए भिजवा दिए: और वह सभी राजा के पास गए।

१२ और शाऊल ने कहा, सुन लो अब, तुम अहितब के बेटे। और उसने उत्तर दिया, मैं यहाँ हूँ जी, मेरे प्रभु।

१३ और शाऊल ने उस से कहा, तुमने मेरे विरुद्ध षड्यंत्र क्यों रचा है, तुमने और यिशय के बेटे ने, कि तुम ने उसे रोटी दे दी, और एक तलवार, और उसके लिए ईश्वर से पूछ-ताछ की, कि वो मेरे विरुद्ध उठ खड़ा हो जाए, घात लगाए, आज ही के समान?

१४ तब अहिमलेक ने राजा को उत्तर दिया, और कहा, और दाऊद के समान आपके समस्त सेवकों के बीच कौन इतना निष्ठावान है, जो राजा का दामाद है, और जो आपके कहने पर चल देता है, और आपके समस्त घराने में सम्मानित है?

१५ तो क्या फिर मैंने उसके लिए ईश्वर से पूछ-ताछ करना आरम्भ कर दिया था क्या? इसे तो दूर ही रहने दो मुझ से: राजा कोई भी बात अपने सेवक पर, ही मेरे पिता के समास्त घराने पर ठहराएँ: क्योंकि आपका सेवक इस सब के विषय में कुछ भी नहीं जानता था, कम या अधिक। 

१६ और राजा ने कहा, अहिमलेक तुम तो अवश्य ही मरोगे, तुम, और तुम्हारे पिता का सम्पूर्ण घराना।

१७ और राजा ने उन पैदल-सैनिकों से कहा जो उसके आस-पास खड़े थे, मुड़ कर प्रभु के पुरोहितों को मार डालो; क्योंकि इनका हाथ भी दाऊद के साथ ही है, और क्योंकि यह जानते थे जब वह भाग गया था, और यह मुझे नहीं बताया। परन्तु राजा के नौकर अपने हाथ प्रभु के पुरोहितों पर पड़ने हेतु आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। 

१८ और राजा ने दोग से कहा, मुड़ जाओ तुम, और पुरोहितों पर झपट पड़ो। और दोग वो एदम-वंशज मुड़ गया, और वो उन पुरोहितों पर झपट पड़ा, और उस दिन पिचास्सी पुरुषों की हत्या कर डाली जो छालटी के एफद से आवृत थे।

१९ और उसने तलवार की धार से पुरोहितों के नगर नोब को पीट डाला, दोनो पुरुषों और स्त्रियों, बच्चों और दूध पीते हुओं को, और सांडों, और गधों, और भेड़ों को, तलवार की धार से ही।

२० और अहितब के बेटे अहिमलेक के बेटों में से एक, अबिथर, बच निकला और दाऊद के पीछे-पीछे भाग गया।

२१ और अबिथर ने दाऊद को बताया कि शाऊल ने प्रभु के पुरोहितों को मार डाला था।

२२ और दाऊद ने अबिथर से कहा, मैं जान गया था उसी दिन, जब दोग वो एदम-वंशज वहाँ था, कि वो अवश्य ही शाऊल को बता देगा: मैंने तुम्हारे पिता के घराने के समस्त लोगों की हत्या करवाई है।

२३ तुम मेरे साथ ही ठहर जाओ, डरो मत, चूँकि वो जो मेरे जीवन को खोज रहा है तुम्हारे जीवन को खोज रहा है: परन्तु मेरे साथ तुम सुरक्षित रहोगे।


तेईसवाँ अध्याय।


तब उन्होंने दाऊद को बताया, कहते हुए, देखो, वो पलिश्तिम-वंशज कईला के साथ लड़ाई कर रहे हैं, और वो खलिहानों में लूट-पाट मचा रहे हैं।

इसलिए दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की, कहते हुए, क्या मैं जाकर इन पलिश्तिम-वंशजों को पीट डालूँ? और प्रभु ने दाऊद से कहा, जाओ, और इन पलिश्तिम-वंशजों को पीट डालो, और कईला को बचा लो।

और दाऊद के आदमियों ने उस से कहा, देखो, हम तो यहाँ यहूदा में डरे हुए हैं: और कितना अधिक यदि हम कईला में पलिश्तिम-वंशजों की सेनाओं के विरुद्ध पहुँचते हैं?

तब दाऊद ने प्रभु से पुनः पूछ-ताछ की। और प्रभु ने उसे उत्तर दिया और कहा, उठो, नीचे कईला चले जाओ; क्योंकि मैं इन पलिश्तिम-वंशजों को तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दूँगा।

तो दाऊद और उसके आदमी कईला चले गए, और उन पलिश्तिम-वंशजों के साथ लड़ पड़े, और उनके मवेशी खदेड़ कर ले आए, और उन्हें एक महा संहार से मार डाला। तो दाऊद ने कईला के निवासियों को बचा लिया।

और यह होने को आया, जब अहिमलेक का बेटा अबिथर कईला में दाऊद के पास भाग आया, कि वो अपने हाथ में एक एफद लेकर नीचे आया था।

और यह शाऊल को बता दिया गया था कि दाऊद कईला पहुँचा था। और शाऊल ने कहा, ईश्वर ने उसे मेरे हाथ में प्रदान कर दिया है; क्योंकि वो अन्दर बँद हो गया है, एक दरवाज़ों और पटरों वाले नगर में घुस कर।

और शाऊल ने सभी लोगों को युद्ध के लिए बुलवा लिया, नीचे कईला जाने हेतु, दाऊद और उसके आदमियों पर घेराबन्दी कर देने के लिए।

और दाऊद जानता था कि शाऊल उसके विरुद्ध चोरी-छिपे बुरी युक्तियाँ बना रहा था; और उसने पुरोहित अबिथर से कहा, उस एफद को यहाँ ले आओ।

१० तब दाऊद ने कहा, हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, आपके सेवक ने निश्चितता से सुन लिया है कि शाऊल कईला आने की सोच में हैं, मेरे वास्ते नगर को नष्ट करने। 

११ क्या कईला के पुरुष मुझे उनके हाथ में प्रदान कर देंगे क्या? क्या शाऊल नीचे आएँगे क्या, जैसा अपने सेवक ने सुना है? हे इस्राएल के प्रभु ईश्वर, मैं आपसे विनती करता हूँ, बता दें अपने सेवक को। और प्रभु ने कहा, वो नीचे आएगा।

१२ तब दाऊद ने कहा, क्या कईला के पुरुष मुझे और मेरे आदमियों को शाऊल के हाथ में प्रदान कर देंगे क्या? और प्रभु ने कहा, वह प्रदान कर देंगे।

१३ तब दाऊद और उसके आदमी, जो लगभग छह सौ थे, उठे और कईला से बाहर प्रस्थान कर चले, और जहाँ कहिं भी वह जा सकते थे वो चले गए। और यह शाऊल को बता दिया गया था कि दाऊद कईला से बच निकला था; और उसने अग्रसर होने का विचार त्याग दिया।

१४ और दाऊद जँगली-क्षेत्र में गढ़ों में वास करता रहा, और ज़िफ के जँगली-क्षेत्र में एक पर्वत में ठहरा रहा। और शाऊल उसे प्रत्येक दिन ढूँढता रहा, परन्तु ईश्वर ने उसे उसके हाथ में प्रदान नहीं किया।

१५ और दाऊद ने आभास किया कि शाऊल उसके जीवन की खोज में बाहर निकल पड़ा था: और दाऊद ज़िफ के जँगली-क्षेत्र में एक वन में था।

१६ और शाऊल का बेटा योनातन उठा, और वन में दाऊद के पास गया, और ईश्वर में उसके हाथ को प्रबल किया।

१७ और उसने उस से कहा, डरना मत: क्योंकि मेरे पिता शाऊल का हाथ तुम्हें नहीं खोज पाएगा; और तुम ही इस्राएल पर राजा बनोगे, और मैं तुम से नीचे हूँगा; और यह भी मेरे पिता शाऊल जानते हैं।

१८ और उन दोनो ने प्रभु के सम्मुख एक प्रतिज्ञा-पत्र बनाया: और दाऊद वन में ठहरा रहा, और योनातन अपने घर चला गया।

१९ तब वो ज़िफ-वाले गिब्या में शाऊल के पास ऊपर पहुँचे, कहते हुए, क्या दाऊद हमारे साथ ही वन में गढ़ों में स्वयं को छुपा कर नहीं रखता है क्या, हकिला की पहाड़ी में, जो कि यशिमोन के दक्षिण की ओर है? 

२० अब इसलिए हे राजा, नीचे जाएँ अपनी आत्मा की सम्पूर्ण इच्छानुसार नीचे पहुँचने के लिए; और हमारा कार्य उसे राजा के हाथ में प्रदान कर देने का होगा।

२१ और शाऊल ने कहा, भई प्रभु का आशीष पड़े तुम पर; क्योंकि तुमने मुझ पर तरस खा लिया है।

२२ मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, जाकर, तैयारी कर लो, और देख लो कि उसका अड्डा कहाँ है, और किसने उसे वहाँ देखा है: क्योंकि मुझे ये बताया गया है कि वो तो बहुत ही चालाकी से धन्धा करता है।

२३ इसलिए देख लो भई, और उन सभी लुका-छिपी वाले स्थानों की जानकारी ले लो जहाँ वो स्वयं को छुपाता रहता है, और तुम पुनः मेरे पास जाना उस निश्चितता से, और मैं तुम्हारे साथ चला जाऊँगा: और यह होने को आएगा, यदि वो प्रदेश में होगा, तो मैं उसे यहूदा के समस्त सहस्त्रों के सर्वत्र में से बाहर ढूँढ निकालूँगा।

२४ और वो उठे और शाऊल के आगे-आगे ज़िफ चले गए: लेकिन दाऊद और उसके आदमी मओन के जँगली-क्षेत्र में थे, यशिमोन के दक्षिण में उस मैदान में।

२५ शाऊल भी और उसके आदमी उसे ढूँढने के लिए चले गए। और उन्होंने दाऊद को बताया: इस कारण वो नीचे एक चट्टान में गया, और मओन के जँगली-क्षेत्र में ठहर गया। और जब शाऊल ने यह सुना, तो वो दाऊद के पीछे पड़ गया मओन के जँगली-क्षेत्र में।

२६ और शाऊल पर्वत के इस ओर चला गया, और दाऊद और उसके आदमी पर्वत के उस ओर: और शाऊल के डर के मारे दाऊद शीघ्रता कर रहा था परे हट जाने हेतु; क्योंकि शाऊल और उसके आदमियों ने दाऊद और उसके आदमियों को पकड़ लेने हेतु उन्हें चारों ओर से घेर लिया था।

२७ परन्तु शाऊल के पास एक दूत पहुँचा कहता हुआ, शीघ्रता करें आप और जाएँ; क्योंकि उन पलिश्तिम-वंशजों ने देश पर आक्रमण कर दिया है।

२८ इस कारण वश शाऊल दाऊद का पीछा करने से वापस लौट गया, और पलिश्तिम-वंशजों के विरुद्ध चला गया: इसलिए उन्होंने उस स्थान को सेला-हम्मालेकथ पुकारा।

२९ और दाऊद वहाँ से ऊपर जाकर एनगदी के गढ़ों में बस गया।



चौबीसवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब शाऊल उन पलिश्तिम-वंशजों का पीछा करने से वापस लौट आया, कि यह उसे बताया गया था कहते हुए, देखें, दाऊद तो एनगदी के जँगली-क्षेत्र में है।

तब शाऊल समस्त इस्राएल में से तीन हज़ार चुने हुए आदमियों को लेकर, दाऊद और उसके आदमियों को जँगली बकरों की चट्टानों पर ढूँढने निकल पड़ा। 

और वो पथ पर भेड़-शालाओं के पास पहुँचा, जहाँ एक गुफा थी; और शाऊल अपने पैरों को ढकने भीतर चला गया: और दाऊद और उसके आदमी गुफा की कंद्राओँ में ही ठहरे रहे।

और दाऊद के आदमियों ने उस से कहा, देख लो ये दिन जिसके विषय में प्रभु ने तुम से कहा था, देखो, मैं तुम्हारे हाथ में तुम्हारे शत्रु को प्रदान कर दूँगा, ताकि तुम उसके साथ जैसा तुम्हें भला प्रतीत हो कर दो। तब दाऊद ने उठ कर, शाऊल के चौग़े के किनारे को चुपके से काट डाला।

और तत्-पश्चात ये होने को आया, कि दाऊद के हृदय ने उसे ठेस पहुँचा दी, चूँकि उसने शाऊल के वस्त्र के किनारे को काट डाला था।

और उसने अपने आदमियों से कहा, प्रभु ऐसा होने दें, कि मैं प्रभु के अभिषिक्त अपने मालिक के साथ ऐसी बात कर डालूँ, उनके विरुद्ध अपना हाथ आगे खींचने में, ये देखते हुए कि यह तो प्रभु के ही अभिषिक्त हैं।

तो दाऊद ने इन शब्दों से अपने नौकरों को रोक कर रखा, और उन्हें शाऊल के विरुद्ध खड़े हो जाने की अनुमति नहीं दी। परन्तु शाऊल उस गुफा में से उठ कर बाहर निकल आया, और अपने पथ पर चलता बना।

दाऊद भी तत्-पश्चात उठकर गुफा के बाहर निकल आया, और शाऊल की ओर चीखा, कहता हुआ, मेरे प्रभु राजा जी। और जब शाऊल ने अपने पीछे देखा, दाऊद झुकता हुआ धरती की ओर अपना चेहरा किए हुए, स्वयं झुक गया।

और दाऊद ने शाऊल से कहा, आप किस कारण वश लोगों के शब्द सुन रहे हैं, कहते हुए, देखें दाऊद आपको चोट पहुँचाना चाहता है?

१० देखें, इस दिन आपकी आँखों ने देख लिया है कि कैसे प्रभु ने गुफा में आपको मेरे हाथ में प्रदान कर दिया था: और कुछों ने मुझ से आपको मार डालने के लिए कहा: परन्तु मेरी आँख ने आपको बक्श दिया; और मैंने कहा, मैं अपना हाथ अपने प्रभु के विरुद्ध आगे नहीं बढ़ाऊँगा; क्योंकि वो तो प्रभु के ही अभिषिक्त हैं।

११ इसके अतिरिक्त मेरे पिता जी, देखें, हाँ जी, देख लें मेरे हाथ में आपके चौग़े का ये किनारा: कि मैंने आपके चौग़े का किनारा काट दिया, और आपको मारा नहीं, आप जान लें और देख लें कि मेरे हाथ में ही बुराई ही दोष है, और मैंने आपके विरुद्ध पाप नहीं किया है; तथापि आप मेरी आत्मा लेने के लिए उसका शिकार खेल रहे हैं।

१२ प्रभु मेरे और आपके बीच न्याय करें, और प्रभु मेरा आप से प्रतिषोध ले लें: परन्तु मेरा हाथ आप पर नहीं पड़ेगा।

१३ जैसा प्राचीनता वालों का नीती-वचन कहता है, दुष्टता दुष्टों से ही प्रवृत होती है: परन्तु मेरा हाथ आप पर नहीं पड़ेगा।

१४ किसके पीछे-पीछे इस्राएल के राजा बाहर निकल पड़े हैं जी? किस के पीछे पड़े हुए हैं आप? एक मरे हुए कुत्ते के पीछे, एक पिस्सू के पीछे?

१५ इसलिए प्रभु न्यायाधीष बने, और मेरे और आपके बीच न्याय करें, और देखें, और मेरे लिए अभियोग लड़ें, और मुझे आपके हाथ से बाहर छुटकारा दिला दें।

१६ और यह होने को आया, जब दाऊद ने शाऊल से इन शब्दों का कहना समाप्त कर दिया था, कि शाऊल ने कहा, क्या ये तुम्हारी वाणी है, मेरे बेटे दाऊद? और शाऊल ने अपनी वाणी उठाई और रो पड़ा।

१७ और उसने दाऊद से कहा, तुम मुझ से अधिक नेक हो: क्योंकि तुम ने तो मुझे भलाई प्रदान की, जबकि मैंने तुम्हें बुराई प्रदान की।

१८ और तुम ने दिखला दिया है इस दिन कि तुम ने मेरे साथ कैस प्रकार भला व्यवहार किया है: तथापि जबकि प्रभु ने मुझे तुम्हारे हाथ में प्रदान कर दिया था, तुम ने मेरी हत्या नहीं की।

१९ क्योंकि यदि कोई आदमी अपने शत्रु को पा लेता है, तो क्या वो उसे कुशल-मंगल विदा कर देगा क्या? इस कारण प्रभु तुम्हें उसके लिए जो तुम ने मेरे साथ इस दिन किया है, भलाई प्रदान करें।

२० और अब, देख लो, मैं भली-भाँति जानता हूँ कि तुम ही अवश्य राजा बनोगे, और कि इस्राएल का राज्य तुम्हारे ही हाथ में स्थापित हो जाएगा।

२१ इसलिए मेरे साथ प्रभु की शपथ खा लो, कि तुम मेरे पश्चात मेरे बीज को नहीं काट डालोगे, और कि तुम मेरे नाम को मेरे पिता के घराने से बाहर नहीं नष्ट करोगे।

२२ और दाऊद ने शाऊल को शपथ दे दी। और शाऊल घर चला गया; परन्तु दाऊद और उसके आदमी गढ़ में स्वयं ऊपर जा चले।



पच्चीसवाँ अध्याय।


और शमुएल का देहान्त हो गया; और समस्त इस्राएली एक साथ एकत्रित हो गए थे, और उसका विलाप मनाया, और उसे रमा में उसके घर में दफ़ना दिया। और दाऊद उठ कर नीचे परान के जँगली क्षेत्र चला गया।

और मओन में एक आदमी था जिसकी सम्पत्तियाँ करमल में थीं; और वो आदमी बहुत पहुँचा हुआ था, और उसके पास तीन हज़ार भेड़ें थीं, और एक हज़ार बकरे: और वह करमल में अपनी भेड़ों को कतर रहा था।

तो अब इस आदमी का नाम नबल था; और उसकी पत्नी का नाम अबिगल था: और वह स्त्री अच्छी समझदार रूपवती  थी: परन्तु वो आदमी ढीठ और अपनी करनियों में बुरा था; और वो कालेब के घराने में से था।

और दाऊद ने जँगली-क्षेत्र में सुना कि नबल अपनी भेड़ों को कतर रहा था।

और दाऊद दस युवकों को भेजता है, और दाऊद ने उन युवकों से कहा, तुम स्वयं ऊपर करमल जाकर, नबल के पास चले जाओ और उसे मेरे नाम में प्रणाम कर दो:

और तुम इस प्रकार उस से कहोगे जो समृद्धी में रहता है, शान्ति हो तुम्हारे प्रति, और शान्ति हो तुम्हारे घर के प्रति, और शान्ति हो उस सभी के प्रति जो तुम्हारे पास है।

और अब मैंने सुना है कि आपके पास कतरने वाले हैं: अब आपके चरवाहे जो हमारे साथ थे, हमने उन्हें चोट नहीं पहुँचाई, ही उनके पास से कुछ भी लुप्त हुआ, उस समस्त समय जब वो करमल में थे।

अपने युवकों से पूछ लें जी, और वो आपको बता देंगे। इस कारण वश इन युवकों को अपनी दृष्टि में अनुग्रह पा लेने दें: क्योंकि हम एक अच्छे दिवस पर आए हैं: मैं प्रार्थना  करता हूँ आपसे, अपने सेवकों को, और अपने बेटे दाऊद को, जो कुछ भी आपके हाथ लगता है, दे दें जी।

और जब दाऊद के युवक पहुँचे, तो वो दाऊद के नाम में नबल से उन समस्त शब्दोंनुसार बोल कर चुप कर गए।

१० और नबल ने दाऊद के नौकरों को उत्तर दिया और कहा, भई कौन है दाऊद? और कौन है यिशय का बेटा? भई आज-कल तो कई नौकर-चाकर हैं जो हर एक अपने मालिक से टूट-फिरता है।

११ तो फिर क्या मैं अपनी रोटी, और अपना पानी, और अपना माँस जो मैंने अपने कतरने-वालों के लिए मारा हैम लेकर उन आदमियों को दे दूँ, जिन्हें मैं जानता ही नहीं कि वो कहाँ से आए हैं?

१२ तो दाऊद के युवा पुरुष अपने पथ पर मुड़ चले, और पुनः जाकर, पहुँचे और उसे यह सभी कथन सुना डाले।

१३ और दाऊद ने अपने आदमियों से कहा, हर आदमी अपनी तलवार कस ले। और उन्होंने हर एक ने अपनी तलवार कस ली भई; और दाऊद ने भी अपनी तलवार कस ली: और दाऊद के पीछे-पीछे लगभग चार सौ आदमी चढ़ाई कर पड़े; और दो सौ साज-सामान के साथ ही ठहरे रहे।

१४ परन्तु युवा पुरुषों में से एक ने नबल की पत्नी अबिगल को बता दिया, कहते हुए, देखें, दाऊद ने जँगली-क्षेत्र में से बाहर दूतों को हमारे मालिक को प्रणाम करने भेजा; लेकिन वो तो उन पर झपट ही पड़े जी।

१५ परन्तु वो पुरुष तो हमारे प्रति बहुत ही सभ्य थे, और हमें हानी नहीं पहुँची, ही हम ने कुछ भी खोया, जब तक हम उनके साथ ही थे, जब हम खेतों में थे:  

१६ वो तो हमारे लिए दोनो रात और दिन एक दीवार थे, उस समस्त समय जब हम भेड़ों को चरा रहे थे।

१७ अब इसलिए जान लें और विचार कर लें कि आप क्या करेंगी जी; क्योंकि हमारे मालिक के विरुद्ध और उनके सम्पूर्ण घर-बार के विरुद्ध बुराई निर्धारित कर दी गई है: क्योंकि वो तो भई ऐसे बलियल के बेटे हैं, कि कोई भी उनसे बात ही नहीं कर सकता है जी।

१८ तब अबिगल ने फुर्ती भरी, और दो सौ नान, और अंगूर-रस वाली दो बोतलें, और पाँच तैयार भेड़ें, और भुने हुए अनाज के पाँच माप, और किशमिश के सौ गुच्छे, और अंजीरों की दो सौ टिक्कियाँ लेकर, उन्हें गधों पर रख दिया।

१९ और उसने अपने नौकरों से कहा, मेरे आगे-आगे निकल चलो भई; देखो, मैं तुम्हारे पीछे-पीछे रही हूँ। परन्तु उसने अपने पति नबल को नहीं बताया।

२० और यह ऐसा ही हुआ कि, जैसे वो गधे पर सवारी कर रही थी, कि वो नीचे पहाड़ी की आड़ तक पहुँची, और देखो, दाऊद और उसके आदमी उसके विप्रीत नीचे रहे थे; और उसने उनसे भेंट की।

२१ अब दाऊद ने कह दिया था, अवश्य ही व्यर्थता में ही मैंने जँगली-क्षेत्र में उस सब को सुरक्षित रखा, जो कुछ भी इस बन्दे का था, कि जो उसका था उस में से कुछ भी लुप्त नहीं हुआ: और इसने तो मुझे अच्छाई के बदले बुराई लौटा दी है।

२२ ईश्वर ऐसा और इस से भी अधिक कर डालें दाऊद के शत्रुओं के साथ, यदि मैं भोर का उजाला हो जाने तक उसके सभी दीवार पर मूतने वालों में से किसी को भी बचा हुआ छोड़ दूँ।

२३ और जब अबिगल ने दाऊद को देखा, तो वो फुर्ती से गधे पर से उतर कर अपने मूँह के बल दाऊद के समक्ष गिर पड़ी, और स्वयं को धरती पर झुका लिया,

२४ और उसके पैरों पर गिरती हुई बोली, मुझ पर मेरे प्रभु, मुझ पर ही यह दोष लगा दें जी: और अपनी दासी को, मैं प्रार्थना करती हूँ आपसे, आपकी सुनवाई में बोल लेने दें, और अपनी दासी के शब्दों को सुन लें।

२५ मैं प्रार्थना करती हूँ आपसे, मेरे प्रभु, बलियल के इस आदमी की सोचें, नबल की ही: चूँकि जैसा इसका नाम है, वैसा ही वो है जी; नबल उसका नाम है, और मूर्खता उसके साथ है: परन्तु मैंने, आपकी दासी ने मेरे प्रभु के उन युवा पुरुषों को नहीं देखा था, जिन्हें अपने भेजा था।

२६ अब इसलिए मेरे प्रभु, प्रभु के जीते जी, और आपकी आत्मा के जीते जी, ये देखते हुए कि प्रभु ने आपके आकर लहू बहाने से, और अपने ही हाथ से प्रतिषोध ले लेने से रोक दिया है, अब आपके शत्रु और उन्हें जो मेरे प्रभु के साथ बुराई करने की सोचते हैं, नबल जैसे ही बन जाएँ।

२७ और अब यह आशीष जो आपकी दासी मेरे प्रभु के पास ले आई है, इसी को ही इन युवा पुरुषों को प्रदान कर दिया जाए जो मेरे प्रभु का अनुसरण करते हैं।

२८ मैं प्रार्थना करती हूँ आपसे, अपनी दासी के दोष को क्षमा कर दें: चूँकि प्रभु अवश्य ही मेरे प्रभु का घर-बार एक सुनिश्चित घराना बना देंगे; क्योंकि मेरे प्रभु, प्रभु के ही युद्धों को लड़ते हैं, और आपके समस्त दिन आप में बुराई नहीं पाई गई है।  

२९ तथापि एक आदमी आपका पीछा करने उठे हैं, आपकी आत्मा को ढूँढने: परन्तु मेरे प्रभु की आत्मा प्रभु आपके ईश्वर के पास जीवन की पोटली में बन्धी होगी; और आपके शत्रुओं की आत्माएँ, उन्हीं को ही वो गोफन से बाहर फैंक डालेंगे, गोफन के बीच की पोटली में से ही बाहर।

३० और यह होने को आएगा, जब प्रभु मेरे प्रभु के साथ उस समस्त भलाई के अनुसार कर चुकेंगे, जो उन्होंने आपके समबन्ध में बोल दी है, और इस्राएल पर आपको शासक नियुक्त कर चुकेंगे;

३१ कि इस बात से तो आपको कोई भी दुःख होगा, ही मेरे प्रभु के प्रति हृदय का अवरोधन, या फिर कि आपने बिन कारण लहू बहा दिया है, या फिर कि मेरे प्रभु ने स्वयं ही प्रतिषोध ले लिया है: परन्तु जब प्रभु मेरे प्रभु के साथ भला व्यवहार कर चुकेंगे, तब अपनी दासी को स्मरण में ले आईएगा।

३२ और दाऊद ने अबिगल से कहा, धन्य हों इस्राएल के प्रभु ईश्वर, जिन्होंने तुम्हें इस दिन मुझ से भेंट करने भेजा है:

३३ और धन्य हो तुम्हारा परामर्श, और धन्य हो तुम, जिसने मुझे इस दिन आकर रक्त बहाने से, और स्वयं का प्रतिषोध अपने ही स्वयं के हाथ से लेने से रोक दिया है।

३४ चूँकि सच-मुच ही, इस्राएल के प्रभु ईश्वर के जीते जी, जिन्होंने मुझे तुम पर चोट पहुँचाने से रोका है, सिवाय कि तुमने शीघ्रता की और मुझ से भेंट करने आई, अवश्य ही भोर का उजाला हो जाने तक नबल के पास कोई भी दीवार पर मूतने वाला बचा रहता।

३५ तो दाऊद ने उसके हाथ से वो ग्रहण कर लिया जो वो उसके पास लाई थी, और उस से कहा, शान्ति से ऊपर अपने घर चली जाओ; देखो मैंने तुम्हारी वाणी का श्रवण कर लिया है, और तुम्हें स्वीकृति प्रदान कर दी है।

३६ और अबिगल नबल के पास गई; और देखो उसने अपने घर में एक भोज रखा, राजा के एक भोज जैसा; और नबल का मन उसके भीतर मगन था, चूँकि वो बहुत ही धुत था: इस कारण वश उसने उसे कुछ भी नहीं बताया, कम ज़्यादा, भोर का उजाला हो जाने तक।

३७ परन्तु सुबह यह होने को आया, जब नबल में से वो मदिरा उतरी, और उसकी पत्नी ने उसे यह बातें बताईं, कि उसका हृदय उसके भीतर ही मर गया, और वो एक पत्थर समान बन गया।

३८ और लगभग दस दिनो के पश्चात यह होने को आया, कि प्रभु ने नबल पर वार कर डाला, कि वो मर गया।

३९ और जब दाऊद ने सुना कि नबल मर चुका था, उसने कहा, धन्य हों प्रभु, जिन्होंने नबल के हाथ मेरी निन्दा के कारण का अभियोग लड़ा है, और अपने नौकर को बुराई से रोके रखा है: क्योंकि प्रभु ने नबल की दुष्टता को उसी के ही अपने सर पर लौटा दिया। और दाऊद ने भिजवा कर अबिगल के साथ गोष्ठी की, उसे अपनी पत्नी के रूप में ले लेने के लिए।

४० और जब दाऊद के नौकर करमल में अबिगल के पास पहुँचे थे, उन्होंने उस से कहा, कहते हुए, दाऊद ने हमें आपके पास भेजा है, आपको उनके पास उनकी पत्नी बनने के लिए।

४१ और वो उठी, और स्वयं अपना चेहरा धरती की ओर कर कर झुकी, और कहा, देखें, अपनी दासी को मेरे प्रभु के सेवकों के पैर धोने वाली एक सेविका बन जाने दें।

४२ और अबिगल शीघ्रता से उठ कर एक गधे पर सवारी करती गई, अपनी पाँच युवतियों के साथ जो उसका अनुसरण करती थीं; और वह दाऊद के दूतों के पीछे-पीछे चलती गई, और उसकी पत्नी बन गई।

४३ दाऊद ने जज़रील की अहिनोम को भी ले लिया; और ये दोनो भी उसी की पत्नियाँ थी।

४४ परन्तु शाऊल ने अपनी बेटी मिकल, दाऊद की पत्नी को, लेश के बेटे फलती को दे दिया था, जो गल्लिम का था।



छब्बीसवाँ अध्याय।


और वो ज़िफी गिब्या में शाऊल के पास आए, कहते हुए, क्या दाऊद स्वयं को यशिमोन के सामने वाली हकिला की पहाड़ी में नहीं छुपा रहा है क्या?

तब शाऊल उठा, और ज़िफ के जँगली-क्षेत्र में नीचे चला गया, अपने साथ इस्राएल के चुने हुए तीन हज़ार आदमी लिए हुए, दाऊद को ज़िफ के जँगली-क्षेत्र में ढूँढने।

और शाऊल ने हकिला की पहाड़ी में पड़ाव डाला जो यशिमोन के सामने है, पथ पर ही। परन्तु दाऊद जँगली-क्षेत्र में ठहरा रहा, और उसने देखा कि शाऊल उसके पीछे-पीछे जँगली-क्षेत्र में पहुँचा था।

इसलिए दाऊद ने गुप्तचर बाहर भेजे, और वो समझ गया कि शाऊल वास्तव में ही पहुँचा था।

और दाऊद उठ कर उस स्थान पहुँचा जहाँ शाऊल ने डेरा डाल रखा था: और दाऊद ने उस स्थान को देखा जहाँ शाऊल, और नर का बेटा अबनर उसकी सेना का कप्तान लेटे हुए थे: और शाऊल रण वाले खुदे नाले में लेटा हुआ था, और उन लोगों ने उसके चारों ओर डेरा डाला हुआ था।

तब दाऊद ने उत्तर दिया और उस हित्ती-वंशज अहिमलेक से, और ज़रूआया के बेटे अबिशय, योब के भाई, से कहा, कहते हुए, कौन मेरे साथ नीचे शाऊल के पास शिविर तक जाएगा? और अबिशय ने कहा, मैं आपके साथ नीचे जाऊँगा।

तो दाऊद और अभिशय रात्रि में उन लोगों के पास पहुँचे: और देखो तो, शाऊल रण वाले खुदे नाले में लेटा हुआ सो था, और उसका भाला धरती में धँसा हुआ उसके तकिए के साथ: परन्तु अबनर और वो लोग उसके चारों-ओर लेटे हुए थे।

तब अबिशय ने दाऊद से कहा, ईश्वर ने आपके शत्रु को इस दिन आपके हाथ में प्रदान कर दिया है: इसलिए मैं प्रार्थना करता हूँ आपसे, अब मुझे उन पर वार कर डालने दें, भाले के साथ ही एक ही बार धरती में ही, और मैं उन पर पुनः वार नहीं  करूँगा।

और दाऊद ने अबिशय ने कहा, इनका विनाश मत करो: क्योंकि कौन प्रभु के अभिषिक्त पर अपना हाथ आगे बढ़ा कर, निर्दोष रह सकता है भई?

१० इसके अतिरिक्त दाऊद ने कहा, प्रभु के जीते जी, प्रभु ही इन पर वार करेंगे; या इनका मरने का दिन जाएगा; या वो नीचे रण में जाकर नष्ट हो जाएँगे। 

११ प्रभु करें कि मैं प्रभु के अभिषिक्त के विरुद्ध अपना हाथ आगे बढ़ा डालूँ: परन्तु मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ, तुम अब उस भाले को ले लो जो उनके तकिए के साथ है, और उस पानी की सुराही को, और हम चले जाते हैं।

१२ तो दाऊद ने शाऊल के तकिए से वो भाला और वो पानी की सुराही ले लिए; और वो परे चले गए, और किसी ने भी यह नहीं देखा, ही यह जाना, ही जागा: क्योंकि वो सभी सोए हुए थे; क्योंकि उन पर प्रभु से एक गहरी नींद गिर पड़ी थी।

१३ तब दाऊद दूसरी ओर पर चला गया, और दूर एक पहाड़ी की चोटी पर खड़ा हो गया; उनके बीच एक विशाल अन्तर होता हुआ:

१४ और दाऊद लोगों की ओर चीखा, और नर के बेटे अबनर पर, कहता हुआ, भई उत्तर नहीं दे रहे हो तुम अबनर? तब अबनर ने उत्तर दिया और कहा, भई कौन है तू जो राजा पर चीख रहा है?

१५ और दाऊद ने अबनर से कहा, क्या तुम एक शूरवीर नहीं हो क्या? और तुम्हारे समान और कौन है इस्राएल में? फिर किस कारण वश तुमने अपने प्रभु इन राजा को सुरक्षित नहीं रखा जी? चूँकि लोगों में से एक भीतर घुस आया राजा तुम्हारे प्रभु को नष्ट करने।

१६ भई ये तो कोई अच्छी बात नहीं बनी जो तुमने कर दी है। प्रभु के जीते जी, तुम मृत्यु के योग्य हो, चूँकि तुमने अपने प्रभु, प्रभु के अभिषिक्त को सुरक्षित नहीं रखा! और अब देख लो भई, कहाँ है राजा का भाला, और वो पानी की सुराही जो उनके तकिए के साथ थी?

१७ और शाऊल दाऊद की वाणी पहचान गया, और कहा, क्या ये तुम्हारी वाणी है, मेरे बेटे दाऊद? और दाऊद ने कहा, यह मेरी ही वाणी है मेरे प्रभु, हे राजा।

१८ और उसने कहा, किस कारण वश मेरे प्रभु इस प्रकार अपने नौकर के पीछे पड़े हुए हैं? चूँकि क्या कर दिया है मैंने? या फिर क्या बुराई है मेरे हाथ में जी?

१९ अब इसलिए, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, मेरे प्रभु, राजा अपने सेवक के शब्दों को सुन लें। यदि प्रभु ने आपको मेरे विरुद्ध उत्तेजित कर दिया है, तो उन्हें एक चढ़ावा स्वीकार कर लेने दें: परन्तु यदि वो मनुष्य की सन्तानें हों, वो प्रभु के सम्मुख श्रापित हो जाएँ; चूँकि उन्होंने मुझे इस दिन प्रभु की विरासत में वास करने से बाहर खदेड़ डाला है, कहते हुए, चले जा, दूसरे ईश्वरों की सेवा कर ले।  

२० अब इसलिए, धरती पर मेरे लहू को प्रभु के चहरे के समक्ष गिरने दें: चूँकि इस्राएल के राजा एक पिस्सू को ढूँढने बाहर निकल आए हैं, जैसे कोई पर्वतों पर किसी तीतर का शिकार करता है।

२१ तब शाऊल ने कहा, मैंने पाप कर दिया है: मेरे बेटे दाऊद, लौट आओ: क्योंकि मैं तुम्हें अब और हानी नहीं पहुँचाऊँगा, चूँकि मेरी आत्मा इस दिन तुम्हारी दृष्टि में अनमोल थी: देखो, मैंने तो मूर्खता कर दी है, और बड़ी ही भूल कर दी है।

२२ और दाऊद ने उत्तर दिया और कहा, देखें राजा का भाला! और उन युवा पुरुषों में से एक को पार आकर इसे ले लेने दें।

२३ प्रभु प्रत्येक पुरुष को उसकी नेकी और उसकी विश्वसनीयता का भुक्तान कर दें: क्योंकि इस दिन प्रभु ने आपको मेरे हाथ में प्रदान कर दिया, परन्तु मैंने अपना हाथ प्रभु के अभिषिक्त के विरुद्ध आगे बढ़ाना नहीं चाहा। 

२४ और, देखें, जैसे आपका जीवन इस दिन मेरी दृष्टि में प्रीय था, वैसे ही मेरा जीवन प्रभु की दृष्टि में अति प्रीय हो, और उन्हें मेरा समस्त अत्याचार से बचाव कर लेने दें।

२५ तब शाऊल ने दाऊद से कहा, धन्य बनो तुम, मेरे बेटे दाऊद: तुम महान कार्य करोगे, और अभिभावी भी ठहरे रहोगे। तो दाऊद अपने पथ पर चलता गया, और शाऊल अपने सठन में वापस लौट आया।



सत्ताईस्वाँ अध्याय।


और दाऊद ने अपने मन में कहा, मैं तो शाऊल के हाथ से एक दिन नष्ट हो जाऊँगा: मेरे लिए तो और कुछ भी बेहतर नहीं है सिवाय कि मैं फुर्ती से पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में बच कर भाग निकलूँ; और शाऊल मेरे विषय में निराश हो जाएँगे इस्राएल की किसी भी सीमा में मुझे अब और ढूँढने हेतु: तो इस प्रकार मैं उनके हाथ में से बच निकलूँगा।

और दाऊद उठा, और वो पार निकल चला अपने छह सौ आदमियों के साथ जो उसके साथ थे, गथ के राजा, मओक के बेटे अकिश के पास ही।

और दाऊद गथ में अकिश के साथ निवास करता रहा, वो और उसके आदमी, प्रत्येक आदमी अपने घर-बार के साथ, दाऊद भी अपनी दोनो पत्नियों के साथ, वो यज़रील-वाली अहिनोम, और नबल की पत्नी वो करमल-वाली अबिगल।

और यह शाऊल को बताया गया कि दाऊद गथ भाग गया था: और उसने उसे अब और दोबारा नहीं ढूँढा।

और दाऊद ने अकिश से कहा, यदि मैंने अब आपकी दृष्टि में कृपा पा ली है, तो उन्हें मुझे कोई स्थान दे देने दें, प्रदेश में कोई नगरी, जहाँ मैं बस सकूँ: क्योंकि आपका नौकर आपके साथ राजसी नगर में क्यों वास करे जी?

तब अकिश ने उसे उस दिन ज़िकलग प्रदान कर दिया: इस कारण वश इस दिन तक ज़िकलग यहूदा के राजाओं का ही है।

और वो समय जो दाऊद उन पलिश्तिम-वंशजों के प्रदेश में बसा रहा एक पूरा साल और चार महीने था।

और दाऊद और उसके आदमी ऊपर चले गए, और गशूरीवासियों, और गज़रियों, और अमालेक-वंशजों पर आक्रमण कर डाला: चूँकि वो राष्ट्र प्राचीनता से उस भूमी के निवासी थे, जैसे तुम शूर तक चलते जाते हो, मिस्र की ही भूमी तक।

और दाऊद ने उस भूमी को पीट डाला, और ही आदमी ही औरत को जीवित छोड़ा, और भेड़ों, और सांडों, और गधों, और ऊँटों, और वस्त्रों को लेकर वापस लौट आया, और अकिश के पास पहुँच आया।

१० और अकिश ने कहा, आज कहाँ छापा मार डाला है तुमने भई? और दाऊद ने कहा, यहूदा के दक्षिण में, और यरहमीलों के दक्षिण में, और किनियों के दक्षिण में।

११ और दाऊद ने ही आदमी ही औरत जीवित बचे छोड़े, गथ में सूचना ले आने हेतु, कहते हुए, कहिं वो हमारी पोल खोल दें, कहते हुए, ऐसा कर दिया दाऊद ने, और ऐसी ही इसकी रीती रहेगी उस समस्त समय जब तक वो पलिश्तिम-वंशजों के प्रदेश में बसता रहेगा।

१२ और अकिश ने दाऊद का विश्वास कर लिया, कहते हुए, इसने तो पूर्ण रूप से अपने लोगों इस्राएल के बीच अपनी ही दुर्गन्ध फैला दी है; इस कारण यह सदा के लिए मेरा सेवक बना रहेगा।



अट्ठाईसवाँ अध्याय।


और उन दिनो में यह होने को आया, कि उन पलिश्तिम-वंशजों ने अपनी सेनाओं को एक साथ युद्ध करने हेतु एकत्रित किया, इस्राएल के साथ लड़ाई करने हेतु। और अकिश ने दाऊद से कहा, निश्चितता से तुम जान लो कि तुम मेरे साथ ही युद्ध करने निकल पड़ोगे, तुम और तुम्हारे आदमी।

और दाऊद ने अकिश से कहा, आप अवश्य ही जान लेंगे कि आपका नौकर क्या-क्या कर सकता है। और अकिश ने दाऊद से कहा, इसलिए मैं तुम्हें ही सदा के लिए अपने शीर्ष का रक्षक ठहरा दूँगा।

अब शमुएल की मृत्यु हो चुकी थी, और समस्त इस्राएल ने उसके लिए शोक-विलाप मना कर उसे रमा में दफ़ना दिया था, उसी के ही नगर में। और शाऊल ने प्रेतभावात्माओं के ओझाओं को, और तांत्रिकों को भूमी में से परे हटा दिया था।

और उन पलिश्तिम-वंशजों ने स्वयं को एक साथ संग्रहित कर लिया, और पहूँच कर शुनम में डेरा डाल दिया: और शाऊल ने समस्त इस्राएल को एक साथ संग्रहित किया, और उन्होंने गिलबो में डेरा डाल दिया।

और जब शाऊल ने उन पलिश्तिम-वंशजों की सेना को देखा, तो वो डर गया, और उसका हृदय बहुत ही कँप-कँपाने लग गया।

और जब शाऊल ने प्रभु से पूछ-ताछ की, तो प्रभु ने उसे उत्तर नहीं दिया, ही स्वप्नों द्वारा, ही ऊरीम द्वारा, ही पैग़म्बरों द्वारा।

तब शाऊल ने अपने सेवकों से कहा, मेरे लिए प्रेतभावात्मा वाली एक ओझा स्त्री ढूँढ निकालो, ताकि मैं उसके पास जा कर उस से पूछ-ताछ करूँ। और उसके सेवकों ने उस से कहा, देख लें जी, एनदोर में एक प्रेतभावात्मा वाली ओझा स्त्री है।

और शाऊल ने अपना भेष बदल कर, अन्य वस्त्र पहन लिए, और वो चला गया, और उसके साथ दो आदमी, और वो रात्रि को उस स्त्री के पास पहुँचे: और उसने कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुम से, प्रेतभावात्मा के माध्यम से मेरे लिए ज्योतिष करो, और जिसका नाम मैं तुम्हें बताऊँगा उसे मेरे पास बुलवा लो। 

और उस स्त्री ने उस से कहा, देखो, तुम जानते हो जो शाऊल ने कर दिया है, कि कैसे उसने प्रेतभावात्माओं वाले ओझाओं को, और तांत्रिकों को भूमी से बाहर काट डाला है: तो फिर किस कारण वश तुम मेरे जीवन पर एक फंदा डाल रहे हो भई, मुझे मरवा डालने के लिए?

१० और शाऊल ने उसे प्रभु की शपथ दे दी, कहते हुए, प्रभु के जीते जी, तुम्हें इस बात के लिए कोई भी दण्ड नहीं दिया जाएगा।

११ तब उस स्त्री ने कहा, मैं किसे तुम्हारे पास बुलवाऊँ? और उसने कहा, मेरे पास शमुएल को बुलवा दो।

१२ और जब उस स्त्री ने शमुएल को देखा, तो वो एक ऊँची वाणी से चीख पड़ी: और उस स्त्री ने शाऊल से बोला, कहते हुए, आपने मुझे धोखा क्यों दिया? क्योंकि आप शाऊल हैं।

१३ और राजा ने उस से कहा, डरो मत: क्या देखा तुमने? और उस स्त्री ने शाऊल से कहा, मैंने ईश्वरों को पृथ्वी से बाहर आरोहण करते देखा।

१४ और उसने उस से कहा, किस रूप के हैं वो? और उसने कहा, एक वृद्ध पुरुष आरोहण कर रहे हैं जी; और वो एक चौग़े से ढके हुए हैं। और शाऊल ने आभास किया कि वो शमुएल था, और वो झुक गया उसका चेहरा धरती की ओर, और स्वयं झुक गया।

१५ और शमुएल ने शाऊल से कहा, आपने मुझे बुलवाकर क्यों तंग कर दिया है भई? और शाऊल ने उत्तर दिया, मैं तो घोरता से यातनित हूँ जी; क्योंकि वो पलिश्तिम-वंशज मेरे विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं, और ईश्वर मुझ से प्रस्थान कर चुके हैं, और मुझे अब और उत्तर नहीं दे रहे हैं, ही पैग़म्बरों द्वारा, ही स्वप्नों द्वारा: इस कारण वश मैंने आपको बुलवा भेजा, ताकि आप मुझे ज्ञान दिलवा दें कि मैं क्या करूँ।

१६ तब शमुएल ने कहा, आप किस कारण वश मुझ से पूछ रहे हैं, ये देखते हुए कि प्रभु आपसे प्रस्थान कर चुके हैं, और आपके शत्रु बन गए हैं?

१७ और प्रभु ने उसके साथ कर दिया है, जैसे वो मेरे द्वारा बोले थे: चूँकि प्रभु ने राज्य आपके हाथ से बाहर फाड़ कर, उसे आपके पड़ौसी को प्रदान कर दिया है, दाऊद को ही:

१८ चूँकि आपने प्रभु की वाणी का पालन नहीं किया, ही उनके क्रूर आक्रोश को अमालेक पर क्रियान्वित किया, इसलिए प्रभु ने इस दिन आपके साथ यह बात कर डाली है जी। 

१९ इसके अतिरिक्त प्रभु इस्राएल को भी आपके साथ ही पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में प्रदान कर देंगे: और कल आप और आपके बेटे मेरे साथ होंगे: प्रभु इस्राएल की सेना को भी पलिश्तिम-वंशजों के हाथ में प्रदान कर देंगे।

२० तब शाऊल तुरँत ही धरती पर अपने पूरे ऊँचे कद के बल गिर पड़ा, और वो घोरता से भयभीत हो गया था, शमुएल के शब्दों के कारण: और उस में कोई भी बल बचा रहा; क्योंकि उसने सारे दिन, सारी रात कोई रोटी नहीं खाई थी।

२१ और वो स्त्री शाऊल के पास आई, और देखा कि वो तो घोरता से विचलित हो गया था, और उस से कहा, देखें, आपकी दासी ने आपकी वाणी का पालन किया है जी, और मैंने अपना जीवन अपनी हथेली में डालकर आपके शब्दों का श्रवण कर लिया है, जो आप मुझ से बोले।

२२ अब इसलिए, मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ, आप भी अपनी दासी की वाणी का श्रवण कर लें, और मुझे आपके समक्ष एक रोटी का टुकड़ा रख देने दें; और खाएँ आप, ताकि आप प्रबल हों, जब आप अपने पथ पर चलते जाते हैं।

२३ परन्तु उसने अस्वीकार कर दिया, और कहा, मैं नहीं खाऊँगा। परन्तु उसके नौकरों ने उस स्त्री के साथ उसे विवश कर दिया; और उसने उनकी वाणी का श्रवण कर लिया। तो वो धरती पर से उठकर, बिस्तर पर बैठ गया।

२४ और उस स्त्री के पास घर में एक मोटा बछड़ा था; और उसने उसे फुर्ती से मारा, और आटा लेकर उसे गूँथ लिया, और उस से बेख़मीरी रोटी पका ली:

२५ और वो उसे शाऊल के समक्ष, और उसके सेवकों के समक्ष ले आई; और उन्होंने खाया। तब वो उठे, और उस रात चले गए। 



उन्नतीसवाँ अध्याय।


अब उन पलिश्तिम-वंशजों ने अपनी समस्त सेनाएँ अफक में एक साथ एकत्रित कर लीं थीं: और इस्राएलियों ने जज़रील में एक जल-स्त्रोत के साथ डेरा डाला हुआ था।

और पलिश्तिम-वंशजों के मुखिया सौ-सौ, और हज़ार-हज़ार संग पार चलते गए: परन्तु दाऊद और उसके आदमी अकिश के साथ सबसे पीछे पार चलते जा रहे थे।

तब उन पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों ने कहा, ये इब्रानी यहाँ क्या कर रहे हैं भई? और अकिश ने उन पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों ने कहा, क्या ये इस्राएल के राजा शाऊल का नौकर दाऊद नहीं है क्या, जो मेरे साथ इन दिनो, या इन वर्षों तक रहा है, और मैंने तो इस में इस के भाग कर मेरे पास गिर पड़ने के दिन से लेकर आज तक भी कोई खोट नहीं पाया है?

और पलिश्तिम-वंशजों के वो अध्यक्ष उसके प्रति आक्रोश से भर उठे थे; और पलिश्तिम-वंशजों के उन अध्यक्षों ने उस से कहा, इस जने को वापस लौट जाने दें, ताकि ये पुनः अपने स्थान चला जाए जो आपने उसे नियुक्त किया है, और इसे नीचे हमारे साथ रण करने जाने दें, कहिं युद्ध में ये हमारे प्रति एक प्रतिद्वंदी बन जाए: चूँकि किस कारण वश ये अपने मालिक के साथ सामनजस्य बनाए भई? क्या इन्हीं जनो के सरों के साथ ही नहीं क्या?

क्या यही दाऊद नहीं है क्या, जिसके विषय में वो नाचती हुई एक दूसरे से गाई थीं, कहती हुईं, शाऊल ने तो अपने हज़ारों को मारा, और दाऊद ने अपने दसियों-हज़ारों को?

तब अकिश ने दाऊद को बुलवा कर उस से कहा, अवश्य ही प्रभु के जीते जी, तुम सीधे-सीधे रहे हो, और मेरी दृष्टि में मेरे साथ सेना में तुम्हारा बाहर जाना और तुम्हारा भीतर आना अच्छा रहा है: क्योंकि भई मैंने तो तुम में तुम्हारे मेरे पास पहुँचने के दिन से लेकर आज तक भी कोई बुराई नहीं पाई है: तथापि इन मुखियों की दृष्टि तुम्हारे प्रति भली नहीं है भई।

इस कारण अब वापस लौट जाओ, और शान्ति से चले जाओ, ताकि तुम पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों को अप्रसन्न कर दो।

और दाऊद ने अकिश से कहा, परन्तु क्या कर दिया है जी मैंने? और क्या पा लिया है जी आपने अपने नौकर में इस लम्बे समय तक जब से मैं आपके साथ रहा हूँ इसी दिन तक, कि मैं राजा अपने प्रभु के शत्रुओं के विरुद्ध लड़ाई करने जाऊँ?

और अकिश ने उत्तर दिया और दाऊद से कहा, मैं जानता हूँ कि तुम मेरी दृष्टि में ईश्वर के एक दूत समान अच्छे हो: तथापि पलिश्तिम-वंशजों के अध्यक्षों ने कह दिया है, ये हमारे साथ युद्ध में ऊपर नहीं जाएगा।

१० इस कारण अब सुबह-सुबह अपने मालिक के नौकरों के साथ जो तुम्हारे साथ आए हैं उठ जाना: और सुबह-सुबह ही तुम्हारे उठते ही उजाला होते-होते ही विदा हो जाना।

११ तो दाऊद और उसके आदमी सुबह-सुबह उठ गए प्रातः में प्रस्थान करने हेतु, पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में वापस लौट जाने हेतु। और वो पलिश्तिम-वंशज ऊपर जज़रील चले गए।



तीसवाँ अध्याय।


और यह होने को आया, जब दाऊद और उसके जने तीसरे दिन ज़िकलग पहुँचे थे, कि अमालेक-वंशजों ने दक्षिण पर और ज़िकलग पर आक्रमण कर डाला था, और ज़िकलग को हरा डाला था, और उसे अग्नी से जला डाला था;

और उन स्त्रियों को बन्दी ले लिया था, जो उस में भीतर थीं: उन्होंने किसी को भी मारा नहीं, ही बड़े को या छोटे को, बल्कि उन्हें उठाकर अपने पथ पर चलते बने।

तो दाऊद और उसके जने नगर पहुँचे, और देखो तो, वो तो अग्नी से भस्म हो चुका था; और उनकी पत्नियाँ, और उनके बेटे, और उन्हीं बेटियाँ बन्दी ले लिए गए थे।

तब दाऊद और उसके साथ उन लोगों ने अपनी वाणी उठाई और रो पड़े, जब तक उनके पास रोने के लिए और शक्ती ही नहीं बची रही।

और दाऊद की दोनो पत्नियाँ बन्दी ले ली गई थीं, अहिनोम वो यज़रील-वाली और अबिगल, नबल उस करमल-वाले की पत्नी।

और दाऊद बहुत ही उत्पीड़ित था; चूँकि लोग उस पर पथराव कर देने की बात कर रहे थे, क्योंकि उन सभी लोगों की आत्मा शोकार्तित थी, प्रत्येक पुरुष अपने बेटों के लिए और उसकी बेटियों के लिए: परन्तु दाऊद ने स्वयं को प्रभु अपने ईश्वर में प्रोत्साहित किया। 

और दाऊद ने अहिमलेक के बेटे, पुरोहित अबिथर से कहा, मैं प्रार्थना करता हूँ तुमसे, मेरे पास वो एफद यहाँ ले आओ। और अबिथर वहीं दाऊद के पास वो एफद ले आया।

और दाऊद ने प्रभु से पूछ-ताछ की, कहते हुए, क्या मैं इस सैन्य-दल का पीछा करूँ जी? क्या मैं उन्हें पार कर लूँ? और उन्होंने उसे उत्तर दिया, पीछा करो: क्योंकि तुम अवश्य ही उन्हें पार कर लोगे, और सभी कुछ सफलता से बचा लोगे।

तो दाऊद चला गया, वो और वो छह सौ आदमी जो उसके साथ थे, और बसोर नदिका पहुँचे, जहाँ वो जो पीछे रह गए थे ठहर गए।

१० परन्तु दाऊद पीछा करता रहा, वो और चार सौ आदमी: चूँकि दो सौ पीछे ही ठहर गए थे, जो इतने शिथिल थे कि वो बसोर नदिका को पार ही नहीं कर पाए।

११ और उन्होंने एक मिस्रवासी को खेत में पाया, और वो उसे दाऊद के पास ले आए, और उसे रोटी दी, और उसने खा ली; और उन्होंने उसे पानी भी पिलवाया;

१२ और उन्होंने उसे अंजीरों की एक टिकिया का एक टुकड़ा दिया, और किशमिशों के दो गुच्छे: और जब उसने खा लिया था, उसका भावात्मा उसके पास पुनः गया: क्योंकि उसने कोई रोटी नहीं खाई थी, ही कोई पानी पिया था, तीन दिन और तीन रात।

१३ और दाऊद ने उस से कहा, तुम किसके हो भई? और तुम कहाँ के हो? और उसने कहा, मैं मिस्र का एक युवा पुरुष हूँ, एक अमालेक-वंशज का नौकर; और मेरे मालिक ने मुझे त्याग दिया, क्योंकि तीन दिन बीते मैं बीमार पड़ गया था।

१४ हम ने करथियों के दक्षिण पर, और यहूदा की सीमा पर, और कालेब के दक्षिण में आक्रमण किया; और हमने ज़िकलग को अग्नी से जला डाला।

१५ और दाऊद ने उस से कहा, क्या तुम मुझे इस सैन्य-दल के पास नीचे ले जा सकते हो? और उसने कहा, मुझे ईश्वर की शपथ दे दें, कि आप ही मुझे मारेंगे, ही मुझे मेरे मालिक के हाथों में प्रदान करेंगे, और मैं आपको इस सैन्य-दल तक नीचे ले जाऊँगा।

१६ और जब वो उसे नीचे ले आया था, देखो तो, वो तो पूरी धरती पर बाहर तक फैले हुए थे भई, खाते हुए और पीते हुए, और नाचते हुए, उस समस्त विशाल लूट के कारण जो उन्होंने पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में से, और यहूदा की भूमी में से ले ली थी।

१७ और दाऊद ने उन्हें साँझ से लेकर अगले दिन की संध्या तक भी पीट डाला: और उन में से एक भी आदमी बच नहीं निकला, सिवाय चार सौ युवा पुरुषों के, जो ऊँटों पर सवारी कर भाग खड़े हुए।

१८ और दाऊद ने वो सभी बचा-छुड़ा लिया जो वो अमालेक-वंशज उठाकर ले गए थे: और दाऊद ने अपनी दोनो पत्नियाँ बचा लीं।

१९ और उन्हें कोई भी कमी नहीं पड़ी, ही चोटी या बड़ी, ही बेटों की ही बेटियों की, ही लूट-पाट की, ही किसी भी वस्तु की जो उन्होंने अपने लिए पकड़ ली थी: दाऊद ने वो सभी बचा-छुड़वा लिया।

२० और दाऊद ने सभी झुण्ड और पशु-समूह ले लिए, जिन्हें उन्होंने उन अन्य मवेशियों के सम्मुख हाँका, और कहा, यह तो दाऊद की लूट है।

२१ और दाऊद उन दो सौ आदमियों के पास पहुँचा, जो इतने शिथिल थे कि वो दाऊद के पीछे-पीछे जा सके थे, जिन्हें उन्होंने उस बसोर नदिका पर भी ठहरवा दिया था: और वो दाऊद से मिलने और उसके साथ उन लोगों से मिलने आगे निकल आए: और जब दाऊद उन लोगों के निकट पहुँचा, तो उसने उन्हें प्रणाम किया।

२२ तब उन सभी दुष्ट आदमियों ने और बलियल के आदमियों ने उत्तर दिया, उन में से जो दाऊद के साथ गए थे, और कहा, भई चूँकि ये हमारे साथ नहीं गए थे, हम इन्हें उस लूट में से कुछ भी नहीं देंगे जो हम ने बचाई है, सिवाय हर आदमी को उसकी पत्नी और उसके बच्चे, ताकि वो उनका नेतृत्व कर विदा हो लें।

२३ तब दाऊद ने कहा, तुम ऐसा नहीं करोगे मेरे भाई-जनो, उसके साथ जो प्रभु ने हमें प्रदान किया है, जिन्होंने हमारा परिरक्षण किया है, और हमारे हाथ में उस सैन्य-दल को प्रदान कर दिया जो हमारे विरुद्ध गया था।

२४ क्योंकि कौन तुम्हारा इस विषय समबन्धी श्रवण करेगा भई? बल्कि जैसा उसका भाग है जो युद्ध करने जाता है, वैसा ही उसका भाग होगा जो समान के साथ ठहरा रहता है: वो एक समान ही विभाजन करेंगे।

२५ और उस दिन से लेकर यह ऐसा ही था, कि उसने इसे इस्राएल के लिए इस दिन तक एक अध्यादेश और एक रीति संस्थापित कर दिया। 

२६ और जब दाऊद ज़िकलग पहुँचा था, तो उसने लूट-पाट में से यहूदा के वृद्ध-गणों, अपने मित्रों को ही भिजवा दिया, कहते हुए, देखें प्रभु के शत्रुओं की लूट-पाट में से आपके लिए एक भेंट; 

२७ उनके लिए जो बेतएल में थे, और उनके लिए जो दक्षिणी रमोथ में थे, और उनके लिए जो यतिर में थे,

२८ और उनके लिए जो अरोर में थे, और उनके लिए जो सिफमोथ में थे, और उनके लिए जो एश्तमो में थे,

२९ और उनके लिए जो रकल में थे, और उनके लिए जो यरहमीलियों के नगरों में थे, और उनके लिए जो किनियों के नगरों में थे,

३० और उनके लिए जो होरमा में थे, और उनके लिए जो कोरशन में थे, और उनके लिए जो अथक में थे,

३१ और उनके लिए जो हेब्रोन में थे, और उन समस्त स्थानों के लिए जहाँ दाऊद स्वयं और उसके आदमी चला-फिर करते थे।



इकत्तीसवाँ अध्याय।


अब वो पलिश्तिम-वंशज इस्राएल के विरुद्ध लड़ रहे थे: और इस्राएल के लोग उन पलिश्तिम-वंशजों के सामने से भाग-खड़े हुए, और गिलबो पहाड़ में मृत नीचे गिर पड़े।

और वो पलिश्तिम-वंशज शाऊल और उसके बेटों के पीछे ही पड़े रहे; और उन पलिश्तिम-वंशजों ने योनातन को मार डाला, और अबिनदाब को, और मल्किशुआ को, शाऊल के बेटों को।

और वो युद्ध शाऊल के विरुद्ध घमासान हो चला, और उन धनुर्धारियों ने उसे भेद डाला; और वो उन धनुर्धारियों से बहुत ही घायल हो गया था। 

तब शाऊल ने अपने अस्त्र-ढोने वाले से कहा, अपनी तलवार खींच कर मुझे उस से घोंप दे; कहिं ये बेख़तनित आकर मुझे घोंप दें, और मेरा दुष्प्रयोग करें। परन्तु उसके अस्त्र-ढोने वाले ने यह नहीं किया; क्योंकि वो घोरता से भयभीत हो गया था। इसलिए शाऊल ने एक तलवार ली, और उस पर गिर गया।

और जब उसके अस्त्र-ढोने वाले ने देखा कि शाऊल मर चुका था, तो वो भी इसी प्रकार अपनी तलवार पर गिरकर, उसके साथ ही मर गया।

तो शाऊल मर गया, और उसके तीनों बेटे, और उसके अस्त्र-ढोने वाला, और उसके सभी आदमी, उसी दिन एक साथ ही।

और जब इस्राएल के जनो ने जो घाटी के दूसरी ओर थे, और उन्होंने जो यर्दन के उस पार थे, देखा कि इस्राएल के लोग तो भाग गए थे, और कि शाऊल और उसके बेटे मर चुके थे, तो वो नगरों को त्याग कर भाग खड़े हुए; और वो पलिश्तिम-वंशज आकर उन में बस गए।

और अगले दिन यह होने को आया, जब वो पलिश्तिम-वंशज मरे हुओं को लूटने आए, तो उन्होंने शाऊल और उसके तीनों बेटों को गिलबो पहाड़ में गिरा पड़ा पाया।

और उन्होंने उसका सर काटकर, उसके अस्त्र-शस्त्र उतार कर पलिश्तिम-वंशजों की भूमी में चारों-ओर भिजवा दिए, अपनी मूर्तियों के घर में, और लोगों के बीच घोषणा कर देने हेतु।

१० और उन्होंने उसके अस्त्र-शस्त्र अश्तरोथ के घर में लगा दिए: और उसके शरीर को उन्होंने बेतशन की दीवार पर लगा दिया। 

११ और जब यबेशगिलद के निवासियों ने वो सुना जो पलिश्तिम-वंशजों ने शाऊल के साथ कर डाला था;

१२ तो सभी शूर-वीर पुरुष उठे, और सारी रात चलते गए, और बेतशन की दीवार पर से शाऊल का शव और उसके बेटों के शव लेकर, यबेश पहुँचे, और उन्हें वहीं जला दिया।

१३ और उन्होंने उनकी अस्थियाँ लेकर उन्हें यबेश में एक वृक्ष के तले दफ़ना दिया, और सात दिनो तक उपवास रखा।



०८/०७/२०२५: 

















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