एस्थर की पुस्तक। (The Book of Esther.)


(एक सुझाव: इस पुस्तक का सम्पादन इस वर्तमान में क्रियाशील है। कृपया इस पुस्तक को सावधानी से पढ़ें।)



पहला अध्याय। 


तो अब अहस्युरस के दिनो में यह होने को आया, यही अहस्युरस है जो हिन्दुस्तान से लेकर इथियोपिया तक भी राज किया करता था, एक सौ सत्ताईस प्रान्तों पर:

कि उन दिनो में जब राजा अहस्युरस अपने राज्य के सिंहासन पर बैठा करता था, जो कि शुशन के गढ़ में था, 

उसके राज के तीसरे वर्ष में, उसने एक भोज आयोजित किया अपने समस्त प्रमुखों और अपने सेवकों के लिए; फारस और मदय की शक्ती, प्रान्तों के कुलीन-प्रतिष्ठावान और अध्यक्ष, उसके समक्ष होते हुए:

जब उसने कई दिनो तक, एक सौ अस्सी दिनो तक भी अपने प्रतापी राज के धन-धान्यों को और अपनी सर्वश्रेष्ठ भव्यता के सम्मान को प्रदर्शित किया।

और जब यह दिवस समाप्त हो चुके थे, तो राजा ने शुशन गढ़ में उपस्थित उन सभी लोगों के लिए, दोनो बड़ों और छोटों के लिए सात दिनो तक एक भोज आयोजित किया, राजा के महल के उद्यान के आँगन में ही;

जहाँ श्वेत, हरी, और नीली लटकनें, महीन छालटी के डोरों से और जामुनी से चाँदी के घेरों और संगमरमर के स्तंभों तक बँधी हुई थीं: वो आसन सोने और चाँदी के थे, लाल, और नीले, और श्वेत, और काले संगमरमर के फर्श पर।

और उन्होंने उन्हें पेय स्वर्ण-पात्रों में दिए, वो पात्र एक दूसरे से भिन्न थे, और राजसी अंगूर-रस बहुतायत से, राजा के स्तरानुसार ही।

और पीना नियमानुसार था; किसी ने भी विवश नहीं किया: चूँकि ऐसा ही राजा ने अपने घराने के समस्त अफ़सरों को नियुक्त कर दिया था, कि उन्हें प्रत्येक पुरुष की प्रसन्नतानुसार की करना था।

रानी वश्ती ने भी स्त्रियों के लिए राजा अहस्युरस के राजसी-भवन में एक भोज का आयोजन किया।

१० सातवें दिन जब राजा का मन अंगूर-रस से मगन था, तो उसने राज-घराने के उन सात अधिकारियों मेहुमन, बिज़्था, हर्बोना, बिग्था, और अबग्था, ज़ेथर, और कर्कस को, जो राजा अहस्युरस की उपस्थिति में सेवारत थे, आदेश दिया,

११ रानी वश्ती को राजसी मुकुट के साथ राजा के समक्ष ले आने का, लोगों और अध्यक्षों को उसका सौंदर्य प्रदर्शित कर देने हेतु: चूँकि वो देखने में सुंदर थी।

१२ परन्तु रानी वश्ती ने राज-घराने के उन अधिकारियों द्वारा राजा के आदेश पर जाने को अस्वीकार कर दिया: इसी कारण वश राजा अति आक्रोशित हो उठा था, और उसका क्रोध उस में भुन रहा था।

१३ तब राजा ने उन विद्वान पुरुषों से कहा, जो उन समयों से परिचित थे, चूँकि ऐसी ही राजा की रीति थी उन सभी के प्रति जो नियम और न्याय-निर्धारण का ज्ञान रखते थे:

१४ और उसके साथ ही था करशेना, शेथर, अदमथा, तरशिष, मेरेस, मरसेना, और मेमुकन, फारस और मदय के सात अध्यक्ष ही, जो राजा का मुखमंडल देखा करते थे, और जो राज्य में प्रथम बैठा करते थे;

१५ भई हम रानी वश्ती के साथ नियमानुसार क्या करें, चूँकि उसने राज-घराने के अधिकारियों द्वारा राजा के आदेश को क्रियान्वित नहीं किया है?

१६ और मेमुकन ने राजा और उन अध्यक्षों के समक्ष उत्तर दिया, रानी वश्ती ने केवल राजा को ही हानी पहुँचाई है, बल्कि समस्त अध्यक्ष-गण को भी, और राजा अहस्युरस के समस्त प्रान्तों में उन समस्त लोगों को भी।

१७ क्योंकि रानी का ये कर्म बाहर सभी स्त्रियों तक फैल जाएगा, तो वो अपनी आँखों में अपने पतियों से घृणा करने लग जाएँगी, जब ये पता चलेगा कि भई राजा अहस्युरस ने तो रानी वश्ती को अपने समक्ष भीतर ले आने का आदेश तो दे दिया था, लेकिन वो तो आई ही नहीं।

१८ इसी प्रकार ही इस दिन फारस और मदय की वो कुलीन-महिलाएँ कहेंगी राजा के समस्त अध्यक्षों से, जिन्होंने रानी के इस कर्म के विषय में सुन लिया है। तो इस प्रकार अत्याधिक उपेक्षा और आक्रोश उठ खड़ा हो जाएगा।

१९ तो यदि राजा यह भला प्रतीत हो, तो उन से एक राजसी आदेश चला जाए जी, और कि यह फ़ारसियों और मदय-वासियों के नियमों के बीच में लिख दिया जाए, कि ये परिवर्तित कर दिया जाए, कि वश्ती अब और राजा अहस्युरस के सामने आए; और कि राजा उसका राजसी क्षेत्राधिकार किसी और को दे दें जो उस से बहतेर है।

२० और जब राजा की वो आज्ञापती जो वो बनाएँगे उनके साम्राज्य के समस्त सर्वत्र में घोषित कर दी जाएगी, (क्योंकि वो तो विशाल है,) तो समस्त पत्नियाँ अपने पतियों को सम्मान प्रदान कर देंगी, दोनो महान को और निम्न को।

२१ और इस कथन ने राजा को और उन अध्यक्षों को प्रसन्न कर दिया; और राजा ने मेमुकन के शब्दानुसार ही कर दिया:

२२ क्योंकि उसने राजा के समस्त प्रान्तों में पत्र भिजवा दिए, प्रत्येक प्रान्त में ही उसकी लिपिनुसार ही, और प्रत्येक गण को उनकी भाषानुसार ही, कि प्रत्येक पुरुष को अपने स्वयं के ही घर पर शासन करना चाहिए, और कि ये प्रत्येक गण की भाषानुसार ही घोषित कर दिया जाना चाहिए।



दूसरा अध्याय।


इन बातों के पश्चात जब राजा अहस्युरस का क़हर शान्त हो गया था, तो उसने वश्ती का स्मरण किया, और कि उसने क्या कर डाला था, और उसके विरुद्ध कैसी राजाज्ञा लागू कर दी गई थी।

तब राजा के नौकरों ने जो उसके प्रति सेवारत थे कहा, राजा के लिए सुंदर कुँवारी कुमारियों ढूँढी जाएँ:

और राजा अपने राज्य के समस्त प्रान्तों में अफ़सरों को नियुक्त कर दें, ताकि वो शुशन-गढ़ में एक साथ उन सभी कुँवारी कुमारियों को स्त्री-गृह में एकत्रित कर दें, राजा के राज-घराने के अधिकारी स्त्रियों के रखवाले हेगे की पहरेदारी में ही; और उनकी साज-श्रिंगार की वस्तुएँ उन्हें प्रदान कर दी जाने दें:

और उस कुमारी को वश्ती के बजाय रानी बन जाने दें जो राजा को प्रसन्न कर दे। और इस बात ने राजा को प्रसन्न कर दिया; और उसने ऐसा ही कर दिया।

अब शुशन-गढ़ में कोई एक यहूदी था, जिसका नाम मोरदेकाय था, याएर का बेटा, शिमई का बेटा, किश का बेटा, एक बिन्यामिन-वंशज;

जिसे यरूशलेम से निष्कासित ले जाया गया था उसी निष्कासन के साथ ही जो यहूदा के राजा येकोनिया के साथ निष्कासित ले जाया गया था, जिसे बेबिलोन का राजा नबूकदनेज़्ज़र निष्कासित ले गया था।

और उसने हदस्सा को पाला-पोसा था, जो कि एस्थर है, उसके चाचा-ताऊ की बेटी: चूँकि उसके पास ही पिता था ही माता, और वो कुमारी रूपवती और सुंदर थी; जिसे मोरदेकाय ने, जब उसके पिता और माता का देहान्त हो गया था, अपनी स्वयं की ही बेटी समान ले लिए।

तो ये होने को आया, जब राजा का आदेश और उसकी आज्ञप्ति सुन ली गई थीं, और जब कई कुमारियाँ शुशन-गढ़ में एक साथ हेगे की पहरेदारी में एकत्रित कर ली गई थीं, तो एस्थर भी राजा के भवन में ले आई गई थी, हेगे उस स्त्रियों के रखवाले की पहरेदारी में ही।

और उस कुमारी ने उसे प्रसन्न कर दिया, और उसने उस से करुणा प्राप्त कर ली; और उसने शीघ्रता से ही उसे उसकी साज-श्रिंगार के वस्तुएँ प्रदान कर दीं, वैसी ही वस्तुओं के साथ जो उसकी थीं, और सात कुमारियाँ राजा के महल में से, जो उसे प्रदान कर देने के सुयोग्य थीं: और उसने उसे और उसकी सेविकाओं को स्त्री-गृह के सर्वोच्चतम स्थान पर्यत अधिमानता प्रदान कर दी।

१० एस्थर ने ही अपना गण बतलाया ही अपना कुल-वंश: चूँकि मोरदेकाय ने उसे निर्देश दिया था कि वो उसे बताए।

११ और मोरदेकाय प्रत्येक दिन उस स्त्रियों के गृह के आँगन के सामने से चलता जाता था, यह जानने के लिए कि एस्थर कैसा कर रही थी, और कि उसके साथ क्या बीतेगी।  

१२ तो अब जब हर कुमारी की बारी आती थी राजा अहस्युरस के पास भीतर प्रवेश करने की, उसके स्त्रियों की रीतिनुसार ही बारह महीने रह लेने के पश्चात, चूँकि ऐसे ही उनके साज-श्रिंगार के दिन पूर्ण किए जाते थे, छह महीने गंधरस के तेल के साथ, और छह महीने मधुर सुगन्धों के साथ, और उन अन्य वस्तुओं के साथ स्त्रियों के साज-श्रिंगार हेतु ही;

१३ तब इस रीती से हर कुमारी राजा के पास आई; जो कुछ भी उसकी वाँछा होती थी उसे प्रदान कर दिया जाता था उसके साथ ही जाने हेतु स्त्री-गृह से लेकर राजा के घर के तक।

१४ संध्या के समय वो चली जाती थी, और प्रातः में वो दूसरे स्त्री-गृह में वापस लौट आया करती थी, शअशगज़ राजा के राज-घराने के उस अधिकारी की पहरेदारी में ही, जो रखैलों की रखवाली किया करता था: वो राजा के पास भीतर अब और नहीं आया करती थी, सिवाय कि राजा उस में आनन्द लिया करता था, और कि उसे नाम से पुकारा जाया करता था।

१५ तो अब जब एस्थर की बारी, अबिहैल मोरदेकाय के चाचा-ताऊ की बेटी, जिसने उसे अपनी ही बेटी के लिए ले लिया था, राजा के पास अन्दर जाने के लिए आई, तो उसने कुछ भी नहीं चाहा बल्कि वही जो राजा के राज-घराने के उस अधिकारी हेगे, स्त्रियों के रखवाले ने नियुक्त किया था। और एस्थर ने उन सभी की दृष्टि में अनुग्रह प्राप्त कर लिया जो उसे देखा करते थे।

१६ तो एस्थर को राजा अहस्युरस के पास उसके राजसी घर में दसवें महीने में ले जाया गया था, जो कि तेबेथ का महीना है, उसके राज के सातवें वर्ष में।

१७ और राजा ने एस्थर से सभी स्त्रियों से अधिक प्रेम कर लिया, और उसने उन समस्त कुँवारियों से अधिक उसकी दृष्टि में कृपा और अनुग्रह प्राप्त कर लिया; कि उसने उसके सर पर वो राजसी मुकुट रख दिया, और उसे वश्ती के बजाय रानी बना दिया।

१८ तब राजा ने अपने समस्त अध्यक्षों और सेवकों के लिए एक विशाल भोज का आयोजन किया, एस्थर के भोज का ही; और उसने उन प्रान्तों को अवकाश दिया, और उपहार दिए, राजा के स्तरानुसार ही।

१९ और जब वो कुँवारियाँ दूसरी बार एक साथ एकत्रित कर दी गई थीं, तब मोरदेकाय राजा के दरवाज़े पर बैठता था।

२० एस्थर ने अभी तक भी ही अपना कुल-वंश ही अपना गण बतलाया था; जैसा कि मोरदेकाय ने उसे निर्देश दिया हुआ था: चूँकि एस्थर ने मोरदेकाय का आदेश रखा, जैसे जब उसका उसके साथ लालन-पालन हुआ करता था।

२१ उन दिनो में, जैसे मोरदेकाय राजा के दरवाज़े पर बैठा करता था, राजा के राज-घराने के दो अधिकारी, बिग्थन और तेरेष, उन में से जो द्वार पर पहरा दिया करते थे, आक्रोशित हो उठे, और राजा अहस्युरस पर हाथ डाल देने का अवसर खोज रहे थे।

२२ और इस बात की जानकारी मरदेकाय के पास थी, जिसने ये रानी एस्थर को बता दिया; और एस्थर ने ये राजा को मोरदेकाय के नाम में सूचना दे दी।

२३ और जब इस विषय की छान-बीन की गई, ये पता लगा लिया गया था; इसलिए उन दोनो को एक पेड़ पर ही टाँग दिया गया था: और ये राजा के समक्ष इतिहास की पुस्तक में लिख दिया गया था।



तीसरा अध्याय।


इन बातों के पश्चात राजा अहस्युरस ने उस अगगी हमेदथ के बेटे हमन को पदोन्नती प्रदान की, और उसे उन्नत कर दिया, और उसके आसन को उन सभी अध्यक्षों से ऊपर स्थित कर दिया जो उसके साथ थे। 

और राजा के सभी सेवक, जो राजा के दरवाज़े पर होते थे, झुक कर हमन को पूजा करते थे: चूँकि राजा ने ऐसा ही आदेश उसके समबन्ध में दिया हुआ था। परन्तु मोरदेकाय झुका नहीं, ही उसकी पूजा की।

तब राजा के सेवकों ने जो राजा के दरवाज़े पर थे, मोरदेकाय से कहा, तुम राजा के आदेश का उल्लंघन क्यों कर रहे हो भई?

तो अब ये होने को आया, जब वो उस से दिन-प्रति-दिन बात-चीत किया करते थे, और उसने उनका श्रवण नहीं किया, कि उन्होंने हमन को बताया, ये देखने के लिए कि यदि मोरदेकाय की बात ठहरेगी या नहीं: चूँकि उसने उन्हें बता दिया था कि वो एक यहूदी था।

और जब हमन ने देखा कि मोरदेकाय झुकता नहीं था, ही उसकी पूजा की, तब हमन आक्रोशित हो उठा।

और उसे ये तुच्छ लगा कि वो अकेले मोरदेकाय पर ही हाथ डाले; चूँकि उन्होंने उसे मोरदेकाय का गण बतला दिया था: इस कारण वश हमन उन समस्त यहूदियों को नष्ट कर डालना चाहता था जो अहस्युरस के सारे राज्य के सर्वत्र में थे, मोरदेकाय के गण को ही।

राजा अहस्युरस के बारहवें वर्ष में, प्रथम महीन में, जो कि निसन का महीना है, उन्होंने हमन के समक्ष पुर डाली, जिसका अर्थ है पर्चियाँ डालना, दिन-दिन की, और महीने-महीने की, बारहवें महीने तक, जो कि अदर का महीना है।

और हमन ने राजा अहस्युरस से कहा, जी किसी एक प्रकार का गण है जो बाहर फैला हुआ है और लोगों के बीच बिखरा हुआ है आपके राज्य के समस्त प्रान्तों में ही; और उनके नियम समस्त लोगों से भिन्न हैं; ही वो राजा के नियमों का पालन करते हैं: इसी कारण वश उनकी अपेक्षा करना राजा के लिए हितकर नहीं है।

यदि इस से राजा प्रसन्न हों, तो ये लिख दिया जाए कि उन्हें नष्ट कर दिया जाए: और मैं चाँदी के दस हज़ार  तलनतन भार उनके हाथों में दे दूँगा जो इस कार्य का प्रभार रखते हैं, उसे राजा की तिजोरियों में ले आने हेतु।

१० और राजा ने अपनी अंगूठी अपने हाथ से निकाल कर, उसे उस अगगी हमेदथ के बेटे हमन को दे दी, यहूदियों के उस शत्रु को ही!

११ और राजा ने हमन से कहा, चाँदी तुम्हें दे दी जाती है, लोग भी, उनके साथ कर देने हेतु जैसा भी तुम्हें भला प्रतीत हो।

१२ तब पहले माह के तेरहवें दिन राजा के लिपिकों को बुला लिया गया था, और लिख दिया गया था उस सभी के अनुसार जो हमन ने आदेश दे दिया था राजा के क्षत्रप-अधिकारियों को, और राज्यपालों को जो प्रत्येक प्रान्त पर नियुक्त थे, और प्रत्येक प्रान्त के प्रत्येक गण के मुखियों को उन्हीं की लिपिनुसार, और प्रत्येक गण को उन्हीं की भाषानुसार; ये राजा अहस्युरस के नाम में ही लिख दिया गया था, और राजा की अँगूठी से मुहरबंद कर दिया गया था।

१३ और यह पत्र धावक-दूतों द्वारा राजा के समस्त प्रान्तों में भिजवा दिए गए थे, समस्त यहूदियों को, दोनो युवकों और वृद्धों को, छोटे बच्चों और स्त्रियों को नष्ट कर देने हेतु, और उनका विध्वंस करवा देने हेतु एक ही दिन में, बारहवें महीने के तेरहवें दिन में ही, जो की अदर का महीना है, और कि उनकी लूट का शिकार कर लिया जाए।

१४ प्रत्येक प्रान्त में प्रदान कर दिए जाने वाले इस आदेश के आलेख की प्रतिलिपि समस्त लोगों को घोषित कर दी गई थी, ताकि वो उस दिन के लिए तैयारी कर लें।

१५ तो वो धावक-दूत निकल पड़े बाहर राजा के आदेश द्वारा शीघ्रपरस्त कर दिए हुए, और वो आज्ञप्ति शुशन-गढ़ में दे दी गई थी। और वो राजा और हमन पेय-पान करने बैठ गए; परन्तु शुशन नगर व्याकुल हो उठा।



चौथा अध्याय।


तो जब मोरदेकाय को पता चला जो सब कुछ कर दिया गया था, मोरदेकाय ने अपने कपड़े फाड़ डाले, और राखों के साथ टाट-वस्त्र पहन लिए, और नगर के मध्य में बाहर चला गया, और एक प्रबल और कड़वी चीख मचा डाली;

और राजा के ही दरवाज़े के समक्ष पहुँचा: चूँकि कोई भी राजा के दरवाज़े में से टाट-वस्त्र पहने प्रवेश नहीं कर सकता था।

और प्रत्येक प्रान्त में, जहाँ कहीं भी राजा का आदेश और उसकी आज्ञप्ति पहुँचे, यहूदियों के बीच घोर शोक-विलाप मनाया जा रहा था, और उपवास, और रोना-धोना, और बिलखना; और कई टाट-वस्त्र और राखों में ही लेट गए।

तो एस्थर की सेविकाओं और उसके राज-घराने के अधिकारियों ने आकर उसे यर बताया। तब रानी अत्याशिकता से शोकार्तित हो गई; और उसने मोरदेकाय के पहनने के लिए वस्त्र भिजवाए, और उस से उसका टाट-वस्त्र ले लेने हेतु: परन्तु उसने उन्हें ग्रहण नहीं किया।

तब एस्थर ने हतक को बुलवा भेजा, राजा के राज-घराने के अधिकारियों में से एक को ही, जिसे उसने उसकी सेवा करने हेतु नियुक्त किया हुआ था, और उसे मोरदेकाय के लिए एक आदेश दिया, ये जान लेने के लिए कि वो क्या था, और कि ये ऐसा क्यों था।

तो हतक राजा के दरवाज़े के समक्ष वाली नगर की उस सड़क की ओर मोरदेकाय के पास निकल चला।

और मोरदेकाय ने उसे उस सभी के विषय में बतला दिया जो उसके साथ बीती थी, और पैसे के उस भार के विषय में जो हमन ने यहूदियों के लिए राजा की तिजोरियों हेतु तोल देने का वचन दे दिया था, उन्हें नष्ट कर देने हेतु ही।

उसने उसे उनका विध्वंस कर देने की आज्ञप्ति के आलेख की प्रतिलिपि भी दे दी जो कि शुशन में दी गई थी, उसे एस्थर को दिखा देने हेतु, और उसे ये सूचित कर देने हेतु, और उसे निर्देश दे देने हेतु कि उसे राजा के पास उस से अनुनय करने के लिए चले जाना चाहिए, और उसके समक्ष एस्थर के गण के लिए विनती करनी चाहिए।

और हतक ने आकर एस्थर को मोरदेकाय के शब्द बता दिए।

१० पुनः एस्थर हतक से बोली, और उसे मोरदेकाय हेतु आदेश दिया;

११ समस्त राजा के सेवक, और राजा के प्रान्तों के गण ये जानते हैं, कि जो कोई भी, चाहे नर या नारी, राजा के पास भीतरी आँगन में जाता है, जो आमन्त्रित हो, उनका एक मात्र ही नियम है ऐसे को मृत्यु के घाट उतार देना, सिवाय ऐसे के जिसके प्रति राजा वो स्वर्ण राजदण्ड आगे बढ़ा दें, कि वो जी ले: परन्तु मुझे राजा के पास जाने हेतु इन तीस दिनो तक आमन्त्रित नहीं किया गया है! 

१२ और उन्होंने मोरदेकाय को एस्थर के बोल बता दिए।

१३ तब मोरदेकाय ने एस्थर को उत्तर देने का आदेश दिया, भई अपने आप में ये मत सोचो कि तुम राजा के भवन में समस्त यहूदियों से अधिक बच निकलोगी।

१४ चूँकि यदि इस समय तुम पूर्णतः चुप्पी धरी रहोगी, तो यहूदियों के लिए किसी अन्य स्थान से विस्तार और बचाव उठ खड़ा हो जाएगा; परन्तु तुम और तुम्हारे पिता का घराना नष्ट कर दिया जाएगा: और कौन जाने कि यदि तुम राज्य में ऐसे इसी समय के लिए ही आई हो?

१५ तब एसठारने मोरदेकाय को ये उत्तर दे देने के लिए बोला,

१६ चले जाएँ आप, शुशन में प्रस्तुत सभी यहूदियों को एक साथ एकत्रित कर लें, और आप मेरे लिए उपवास रखें, और ही तीन दिनो तक रात-दिन खाएँ ही पीयें: मैं भी और मेरी सेविकाएँ इसी प्रकार वृत रखेंगी; तो इस प्रकार मैं राजा के पास चली जाऊँगी, जो कि नियमानुसार नहीं है: और यदि मैं नष्ट हो जाती हूँ, तो मैं नष्ट हो जाऊँगी!



पाँचवाँ अध्याय।


तो अब तीसरे दिन पर ये होने को आया, कि एस्थर अपने राजसी वस्त्र पहन कर राजा के महल के भीतरी आँगन में खड़ी हो गई, राजा के महल के विपरीत ही: और राजा अपने राजसी सिंहासन पर बैठा हुआ था राजसी भवन में ही, महल के दरवाज़े के विपरीत ही।

और ये ऐसा हुआ, जब राजा ने रानी एस्थर को आँगन में खड़ा देखा, तो उसने उसकी दृष्टि में अनुग्रह प्राप्त कर लिया: और राजा ने एस्थर की ओर उस स्वर्ण राजदण्ड को आगे बढ़ा दिया जो उसके हाथ में ही था। तो एस्थर निकट आई, और उसने उस राजदण्ड के सिरे को छू दिया।

तब राजा ने उस से कहा, भई तुम्हारी क्या इच्छा है रानी एस्थर? और तुम्हारी याचना क्या है? वो तुम्हें प्रदान कर दी जाएगी राज्य के अर्ध भाग तक भी।

और एस्थर ने उत्तर दिया, जी यदि राजा को ये भला प्रतीत हो, तो राजा और हमन इसी दिन उस दावत पर जाएँ जो मैंने उसके लिए तैयार की है।

तब राजा ने कहा, हमन से शीघ्रता करवा दो भई, ताकि वो वैसा ही कर दे जैसा एस्थर ने कह दिया है। तो वो राजा और हमन उस दावत पर पधार गए जिसे एस्थर ने तैयार किया था।

और राजा ने उस अंगूर-रस की दावत पर एस्थर से कहा, भई क्या है तुम्हारी विनती? और वो तुम्हें प्रदान कर दी जाएगी: और क्या है तुम्हारा अनुरोध? राज्य के अर्ध भाग तक भी वो क्रियान्वित कर दिया जाएगा।

तब एस्थर ने उत्तर दिया और कहा, जी मेरी विनती और मेरा अनुरोध है कि;

यदि मैंने राजा की दृष्टि में अनुग्रह पा लिया हो, और यदि राजा मेरी विनती को प्रदान कर देने में, और मेरे अनुरोध को क्रियान्वित कर देने में प्रसन्न हों, तो राजा और हमन उस दावत पर जाएँ जो मैं उनके लिए तैयार करूँगी, और मैं कल ही वो कर दूँगी जैसा राजा ने बोल दिया है जी।

तब हमन उस दिन हर्षित हो और एक प्रसन्नचित्त मन लिए निकल चला: परन्तु जब हमन ने मोरदेकाय को राजा के दरवाज़े में देखा, कि वो उठ नहीं, ही उसके लिए हिला, तो वो मोरदेकाय के विरुद्ध रोष से भर उठा।

१० तथापि हमन ने स्वयं को रोक कर रखा: और जब वो घर पहुँचा था, तो उसने अपने मित्रों को और अपनी पत्नी ज़ेरेष को बुलवा भेजा।

११ और हमन उन्हें विवरण दे रहा था अपने धन-धान्यों की महिमा, और अपनी सन्तानों के जनौघ, और उन समस्त बातों के विषय में जिन में राजा ने उसे पदोन्नत कर दिया था, और कि कैसे उसने उसे राजा के अध्यक्षों और सेवकों से बढ़कर उन्नत कर दिया था।

१२ इसके अतिरिक्त हमन ने कहा, हाँ भई, रानी एस्थर ने तो किसी और को भी राजा के साथ उस दावत पर नहीं बुलाया जो उसने तैयार की थी बस केवल मुझे ही; और कल भी मैं उसके पास राजा के साथ ही आमन्त्रित हूँ।

१३ तब भी यह सब कुछ मेरे लिए कोई भी मोल नहीं रखता, जब तक भी मैं उस यहूदी मोरदेकाय को राजा के दरवाज़े पर बैठा देखता रहता हूँ।  

१४ तब उसकी पत्नी ज़ेरेष और उसके सभी मित्रों ने उस से कहा, पचास हाथ ऊँचा लकड़ी का फाँसी का खम्बा बनवा दें, और कल आप राजा से बोल देना कि मोरदेकाय को उस पर टाँगवा दिया जाए: तब आप मगन-मगन राजा के साथ उस दावत में अंदर चले जाईएगा। और इस बात ने मोरदेकाय को प्रसन्न कर दिया; और उसने वो लकड़ी का फाँसी का खम्बा बनवा दिया।  



छटा अध्याय।


उस रात राजा को नीन्द नहीं आई, और उसने आदेश दिया कि इतिहास के पंजीकरण की पुस्तक को लाया जाए; और उन्हें राजा के समक्ष पढ़ा गया।

और ये लिखा हुआ पाया गया था कि मोरदेकाय ने द्वार के पहरेदारों, राजा के घराने के अधिकारियों में से दो बिग्थन और तेरेष के विषय में, जो राजा अहस्युरस पर हाथ डाल देने का अवसर खोज रहे थे, सूचना प्रदान की थी।

और राजा ने कहा, भई मोरदेकाय के प्रति इसके लिए क्या सम्मान और मर्यादा क्रियान्वित की गई हैं? तब राजा के प्रती सेवारत उन सेवकों ने कहा, जी उसके लिए तो कुछ भी नहीं किया गया है।

और राजा ने कहा, भई आँगन में कौन है? अब हमन राजा के भवन के बाहरी आँगन में पहुँचा था, राजा से उसके द्वारा तैयार कर दिए गए उस लकड़ी वाले फाँसी के खम्बे पर मोरदेकाय को लटकवा देने हेतु बोलने के लिए।

और राजा के नौकरों ने उस से कहा, देखें जी, हमन आँगन में खड़ा है। और राजा ने कहा, उसे अन्दर जाने दो।

तो हमन भीतर गया। और राजा ने उस से कहा, उस आदमी के साथ क्या किया जाए जिसे राजा सम्मानित करने में प्रसन्न हो? अब हमन ने अपने ही मन में सोचा, भई मुझ से अधिक राजा किस को सम्मानित करने में प्रसन्न होगा?

और हमन ने राजा को उत्तर दिया, उस आदमी के लिए जिसे राजा सम्मानित करने में प्रसन्न हैं,

उन राजसी वस्त्रों को जिन्हें राजा पहनते है, और उस घोड़े को जिस पर राजा सवारी करते हैं, और वो शाही मुकुट जो उनके शीर्ष पर है ले आए जाएँ:

और उन वस्त्रों और उस घोड़े को राजा के अति कुलीन-प्रतिष्ठित अध्यक्षों में से एक के हाथ में प्रदान कर दिए जाएँ, ताकि वो उस आदमी को आवृत कर दें जिसे राजा सम्मानित कर देने में प्रसन्न हैं, और उसे नगर के पथ पर से घोड़े पर सवार होते हुए ले आए, और उसके सामने घोषणा करे, इस प्रकार ये उस आदमी के लिए किया जाएगा जिसे राजा सम्मानित कर देने में प्रसन्न हैं।

१० तब राजा ने हमन से कहा, शीघ्रता करो, और वो वस्त्र और वो घोड़ा ले लो, जैसा तुमने कह दिया है, और वैसा ही कर दो मोरदेकाय उस यहूदी के प्रति ही, जो राजा के दरवाज़े पर बैठता है: उस में से कुछ भी चूक जाए जो सभी कुछ तुम बोल चुके हो।

११ तब हमन ने वो वस्त्र और वो घोड़ा लिए, और मोरदेकाय को आवृत कर दिया, और उसे घोड़े पर सवार उस नगर के पथ पर ले आया, और उसके समक्ष घोषणा की, इसी प्रकार ही ये उस आदमी के लिए कर दिया जाएगा जिसे राजा सम्मानित करने में प्रसन्न हैं।

१२ और मोरदेकाय पुनः राजा के दरवाज़े पर वापस लौट आया। परन्तु हमन शोकार्तित हो अपने घर की ओर वेगता से चला गया, अपना शीर्ष ढक कर।

१३ और हमन ने अपनी पत्नी ज़ेरेष और अपने समस्त मित्रों को सभी कुछ बता दिया जो उस पर पड़ा था। तब उसके विद्वान पुरुषों और उसकी पत्नी ज़ेरेष ने उस से कहा, यदि मोरदेकाय  यहूदियों के बीज में से है, जिसके समक्ष आप गिरने लग गए हो, आप उसके विरुद्ध प्रबल नहीं ठहरेंगे, बल्कि आप अवश्य ही उसके समक्ष गिर जाएँगे।

१४ और जैसे वो उसके साथ अभी बस बोल ही रहे थे, राजा के राज-घराने के अधिकारी पहुँचे, और हमन को उस दावत पर ले जाने के लिए जिसे एस्थर ने तैयार किया था शीघ्रता कर रहे थे। 



सातवाँ अध्याय।


तो वो राजा और हमन रानी एस्थर के साथ उस दावत पर पधारे।

और राजा ने उस दूसरे दिन एस्थर से पुनः कहा अंगूर-रस की उस दावत पर, भई क्या है तुम्हारी याचना रानी एस्थर? और वो तुम्हें प्रदान कर दी जाएगी: और क्या है तुम्हारा अनुरोध? और राज्य के अर्ध भाग तक भी वो क्रियान्वित कर दिया जाएगा।

तब रानी एस्थर ने उत्तर दिया और कहा, हे राजा यदि मैंने आपकी दृष्टि में अनुग्रह पा लिया हो, और यदि राजा इस से प्रसन्न हों, तो मेरी विनती पर मेरा जीवन मूझे प्रदान कर दिया जाए, और मेरे गण मेरे अनुरोध पर:

चूकी हमें तो बेच दिया गया है जी, मेरा और मेरे गण का, विध्वंस कर डालने हेतु, मार डालने हेतु, और विनष्ट कर डालने हेतु! बल्कि यदि हमें बंध्वा दासों और बंध्वा दसियों के लिए बेच दिया गाय होता, तो चुप ही रहती जी, भले ही शत्रु राजा की हानी की क्षतिपूर्ती कर पता।

तब राजा अहस्युरस ने उत्तर दिया और रानी एस्थर से कहा, वो कौन है, और कहाँ है वो जो अपने हृदय में ऐसा कर देने की उपधारणा कर रहा है?

और एस्थर ने कहा, जी वो विरोधी और शत्रु ये दुष्ट हमन है जी। तब हमन राजा और रानी के सामने डर गया।

और राजा अपने आक्रोश में अंगूर-रस की उस दावत से उठ कर महल के उद्यान में चला गया: और हमन रानी एस्थर से अपने जीवन के लिए अनुरोध करने के लिए उठा; चूँकि उसने देखा कि उसके विरुद्ध राजा द्वारा बुराई निश्चित कर दी गई थी।

तब राजा महल के उस उद्यान में से अंगूर-रस की उस दावत के स्थान पर वापस लौटा; और हमन उस शय्या पर गिर रहा था जिस पर एस्थर थी। तब राजा ने कहा, क्या ये महल में मेरे ही सामने रानी पर बल डालेगा क्या? जैसे-जैसे वो शब्द राजा के मूँह में से बाहर निकल रहा था, उन्होंने हमन के चहरे को ढक दिया।

और राज-घराने के अधिकारियों में से एक हर्बोना ने, राजा के समक्ष कहा, ये भी देखें जी, वो लकड़ी का फाँसी लगाने वाला स्तम्भ पचास हाथ ऊँचा, जिसे हमन ने मोरदेकाय के लिए बनवाया था, जिसने राजा के प्रति भला बोला था, हमन के घर में ही खड़ा है जी। तब राजा ने कहा, टाँग दो इसे उस पर।

१० तो उन्होंने हमन को उस लकड़ी के फाँसी लगाने वाले स्तम्भ पर टाँग दिया जो उसने मोरदेकाय के लिए तैयार करवाया था। तब राजा का आक्रोश प्रशान्त हुआ।



आठवाँ अध्याय।


उस दिन राजा अहस्युरस ने यहूदियों के उस शत्रु हमन का घर-बार रानी एस्थर को दे दिया। और मोरदेकाय राजा के समक्ष आया; चूँकि एस्थर ने बता दिया था कि वो कौन लगता था उसका।

और राजा ने अपनी अंगूठी उतारी, जिसे उसने हमन से ले ली थी, और उसे मोरदेकाय को दे दी। और एस्थर ने मोरदेकाय को हमन के घर-बार पर नियुक्त कर दिया। 

और एस्थर राजा के समक्ष पुनः बोल रही थी, और उसके पैरों पर गिर पड़ी, और आँसुओं से उस से विनती कर रही थी उस अगगी हमन के कुकर्म को, और उसकी युक्ति को जो उसने यहूदियों के विरुद्ध प्रकल्पित कर दी थी, परे हटा देने हेतु।

तब राजा ने एस्थर की ओर वो स्वर्ण राजदण्ड आगे बढ़ा दिया। तो एस्थर उठी, और राजा के समक्ष खड़ी हो गई,

और कहा, यदि ये राजा को प्रसन्न करता हो, और यदि मैंने राजा की दृष्टि में अनुग्रह पा लिया हो, और ये बात राजा के समक्ष भली प्रतीत हो, और मैं उनकी आँखों में मनभावन हूँ, तो ये लिख दिया जाए उस अगगी हमेदथ के बेटे हमन द्वारा परिकल्पित उन पत्रों को रद्द कर देने के लिए जिन्हें उसने लिखे थे यहूदियों को नष्ट कर देने हेतु जो राजा के समस्त प्रान्तों में हैं:

क्योंकि मैं उस कष्ट को कैसे सहन कर पाऊँगी जो मेरे लोगों पर पड़ेगा? या फिर मैं अपने कुल-वंश के विनाश को देखना कैसे सहन कर पाऊँगी  जी?

तब राजा अहस्युरस ने रानी एस्थर से और उस यहूदी मोरदेकाय से कहा, देखो, मैंने हमन का घराना एस्थर को प्रदान कर दिया है, और उसे उसने लकड़ी के उस फाँसी वाले खम्बे पर लटका दिया है, क्योंकि उसने यहूदियों पर अपने हाथ धर दिए थे।

तुम यहूदियों के लिए भी लिख दो, जैसा तुम्हें भला प्रतीत हो, राजा के नाम में ही, और उसे राजा की अंगूठी से ही मुहरबंद कर देना: चूँकि वो आलेख जो राजा के नाम में लिख दिया जा चुका है, और राजा की अंगूठी से मुहरबंद कर दिया गया है, कोइ भी रद्द करे!

तब राजा के लिपिकों को तीसरे महीने के उस समय में, जो कि सिवन का महीना है, उसके तेईसवें दिन पर बुलवा लिया गया था; और यह उस सभी के अनुसार लिख दिया गया था जो मोरदेकाय ने आदेश दिया उन यहूदियों को, और उन प्रान्तों के क्षत्रपों को, और उन प्रान्तों के अध्यक्षों और प्रमुखों को जो कि हिन्दुस्तान से लेकर इथियोपिया तक हैं, एक सौ सत्ताईस प्रान्त ही, प्रत्येक प्रान्त को उसकी लिपिनुसार ही, और प्रत्येक गण को उनकी भाषानुसार ही, और यहूदियों को उनकी लिपिनुसार, और उनकी भाषानुसार ही।

१० और उसने राजा अहस्युरस के नाम में ही लिख दिया और उसे राजा की अंगूठी से मुहरबँद कर दिया, और उन पत्रों को घुड़सवार-दूतों द्वारा, और खच्चरों, ऊँटों, और युवक अश्वों पर सवारों के द्वारा भिजवा दिए:

११ जिन में कि राजा ने उन यहूदियों को जो प्रत्येक नगर में थे स्वयं का एक साथ एकत्रण करना, और कि अपने जीवन हेतु खड़े हो कर विध्वंस कर डालना, मार डालना, और नष्ट करवा डालना, लोगों की और प्रान्त की समस्त शक्ती को ही जो उन पर घर्षण कर डालते हैं, दोनो छोटे नन्हों को और स्त्रियों को, और उनकी लूट का शिकार कर डालना, प्रदान कर डाला,

१२ एक ही दिन में राजा अहस्युरस के सभी प्रान्तों में, बारहवें महीने के, जो कि अदर का महीना है, तेरहवें दिन में ही। 

१३ उस आदेश के आलेख की प्रतिलिपि जो प्रत्येक प्रान्त में दे दी जानी थी समस्त गणों को प्रत्यक्षित करवा दी गई थी, और कि उन यहूदियों को उस दिन पर स्वयं के प्रति अपने शत्रुओं पर प्रतिषोध ले लेने हेतु उद्यत रहना था।

१४ तो खच्चरों और ऊँटों पर वो सवार दूत निकल पड़े, राजा के आदेश द्वारा शीघ्रपरस्त और बाध्य कर दिए हुए। और वो आज्ञप्ति शुशन-गढ़ में दी गई थी।

१५ और मोरदेकाय राजा की उपस्थिति से निकल पड़ा नीले और श्वेत राजसी आवरण में, और एक सोने के बड़े मुकुट के साथ, और बैंगनी महीन छालटी के एक वस्त्र के साथ: और शुशन के नगर ने हर्ष मनाया और प्रसन्न था।

१६ उन यहूदियों के पास प्रकाश, और प्रसन्नता, और हर्षितता, और सम्मान था।

१७ और प्रत्येक प्रान्त में, और प्रत्येक नगर में, जहाँ कहीं भी राजा का आदेश और उसकी आज्ञप्ति पहुँचे, यहूदियों ने हर्ष और प्रसन्नता, एक भोज और एक अच्छा दिन मनाए। और भूमी के कई लोग यहूदी बन गए; चूँकि उन पर यहूदियों का भय पड़ा था।



नौवाँ अध्याय।


अब उस बारहवें महीने में जो कि अदर का महीना है, उसी के तेरहवें दिन में, जब राजा का आदेश और उसकी आज्ञप्ति निकट रहे थे निष्पादित कर देने हेतु, उस दिन में जब यहूदियों के शत्रु आस लगाए बैठे थे उन पर अधिकार जमा देने हेतु, हालाँकि यह उलट-पलट कर दिया गया था, कि यहूदियों ने उन पर अधिकार जमा दिया था जो उनसे घृणा करते थे;

उन यहूदियों ने स्वयं को अपने नगरों में राजा अहस्युरस के उन समस्त प्रान्तों के सर्वत्र में एक साथ एकत्रित कर लिया, ऐसा पार हाथ धार देने हेतु जो उन पर छोट पहुँचाना चाहते थे: और कोई भी आदमी उनका सामना नहीं कर सकता था; चूँकि उनका भय सभी लोगों पर पड़ा था।

और उन प्रान्तों के सभी प्रमुख, और वो प्रान्तों के क्षत्रप, और वो अध्यक्ष, और राजा के अफ्सर यहूदियों की सहायता कर रहे थे; चूँकि मोरदेकाय का भय उन लोगों पर पड़ा था।

क्योंकि मोरदेकाय राजा के घराने में महान था, और उसकी कीर्ती समस्त प्रान्तों के सर्वत्र में फैल रही थी: कि ये पुरुष मोरदेकाय बढ़ता ही बढ़ता चला गया।

तो इस प्रकार उन यहूदियों ने अपने शत्रुओं को तलवार के वार से, और संहार से, और विनाश से पीट डाला, और जो कुछ भी उन्होंने चाहा उनसे घृणा करने वालों के साथ ही कर डाला। 

और शुशन-गढ़ में यहूदियों ने पाँच सौ आदमियों को मार कर नष्ट कर डाला।

और पर्शनदथ, और दलफ़ोन, और अस्पथ,

और पोरथा, और अदलिया, और अरीदथ,

और परमष्टता, और अरिसय, और अरिदय, और वजज़थ,

१० हमेदथ के बेटे उन यहूदियों के शत्रु हमन के दस बेटों को उन्होंने मार डाला; परन्तु लूट-पाट पर उन्होंने अपना हाथ नहीं डाला।

११ उसी दिन राजा के समक्ष शुशन-गढ़ में मार दिए गयों की संख्या लाई गई।

१२ और राजा ने रानी एस्थर से कहा, यहूदियों ने तो शुशन-गढ़ में पाँच सौ आदमियों को, और हमन के दस बेटों को मार और नष्ट कर डाला है; उन्होंने राजा के शेष प्रान्तों में क्या किया है? अब क्या हैं तुम्हारी विनती? और वो तुम्हें प्रदान कर दी जाएगी: या फिर तुम्हारा और क्या अनुरोध है? और वो कर दिया जाएगा।

१३ तब एस्थर ने कहा, जी यदि ये राजा को प्रसन्न करता हो, तो शुशन में उन यहूदियों को ये अनुदान प्रदान कर दिया जाए कि वो कल भी इसी दिन की आज्ञप्ति अनुसार ही कर दें, और हमन के दस बेटों को लकड़ी के फाँसी देने वाले खम्बे पर टाँग दिया जाए।

१४ और राजा ने आदेश दे दिया कि ये ऐसा ही कर दिया जाए: और वो आज्ञप्ति शुशन में प्रदान कर दी गई थी; और उन्होंने हमन के दस बेटों को लटकवा दिया।

१५ क्योंकि शुशन में उन यहूदियों ने जिन्होंने स्वयं को एक साथ एकत्रित किया हुआ था अदर के महीने के चौदहवें दिन में भी, शुशन में ही तीन सौ आदमियों को मार डाला; परन्तु लूट-पाट पर उन्होंने अपना हाथ नहीं डाला।

१६ परन्तु उन अन्य यहूदीयों ने जो राजा के प्रान्तों में थे स्वयं को एक साथ एकत्रित कर लिया, और अपने जीवनों के लिए खड़े हुए, और उनके शत्रुओं से विश्राम पा लिया, और अपने से घृणा करने वालों में से पिछत्तर हज़ार मार डाले, परन्तु उन्होंने लूट-पाट पर अपने हाथ नहीं डाले।

१७ अदर के महीने के तेरहवें दिन पर; और उसी के चौदहवें दिन उन्होंने विश्राम कर लिया, और उसे भोज और प्रसन्नता का एक दिवस बना दिया।

१८ परन्तु वो यहूदी जो शुशन में एक साथ एकत्रित थे तेरहवें दिन पर, और उसके चौदहवें दिन; और उसी के पन्द्रहवें दिन ही उन्होंने विश्राम किया, और उसे भोज और प्रसन्नता का एक दिवस बना दिया।

१९ इसलिए गावों के उन यहूदियों ने, जो बिना दीवारों की उन नगरीयों में बसा करते थे, अदर महीने के चौदहवें दिन को प्रसन्नता और भोज करने वाला, और एक अच्छा दिवस, और एक दूसरे को भाग भेजने वाला बना दिया।

२० और मोरदेकाय ने इन बातों को लिख कर पत्र उन समस्त यहूदियों को भिजवा दिए जो राजा अहस्युरस के समस्त प्रान्तों में थे, दोनो निकट और दूर,

२१ उनके बीच ये स्थापित कर देने हेतु कि उन्हें अदर के महीने के चौदहवें दिन को, और उसी के पन्द्रहवें दिन को वर्ष प्रति वर्ष रखना होगा,

२२ उन्हीं दिनो के समान जिन में उन यहूदियों ने अपने शत्रुओं से विश्राम कर लिया था, और उस महीने के जो उनके लिए दुःख से सुख में, और शोक-विलाप से एक अच्छे दिन में परिवर्तित हो गया था: कि उन्हें उन्हें भोज और हर्ष के दिवस बना देने थे, और एक दूसरे को भाग, और दरिद्रों को उपहार भेजने वाले।

२३ और जैसा उन्होंने आरम्भ कर दिया था उन यहूदियों ने करना क्रियान्वित कर दिया, और जैसा मोरदेकाय ने उन्हें लिख दिया था;

२४ चूँकि समस्त यहूदियों के उस शत्रु, उस अगगी हमेदथ के बेटे हमन ने ही उन्हें नष्ट कर देने हेतु यहूदियों के विरुद्ध युक्ति निकाली थी, और पूर डलवाई थी, जिसका अर्थ है पर्चियाँ डालना, उन्हें हरा देने हेतु, और उन्हें नष्ट कर देने हेतु;

२५ परन्तु जब एस्थर राजा के समक्ष आई, तो उसने पत्रों द्वारा आदेश दिया कि उसकी दुष्ट युक्ति, जो उसने यशुदियों के विरुद्ध युक्ति निकाली थी, उसी के सर पर वापस पड़े, और कि वो और उसके बेटे लकड़ी के उस फाँसी वाले स्तम्भ पर टाँग दिए जाएँ।

२६ इसी कारण वश उन्होंने इन दिनो को पुरिम नाम दे दिया। इसलिए ही इसी पत्र के समस्त शब्दों हेतु, और वो जो उन्होंने इस विषय सम्बन्धी देख लिया था, और वो जो उनके पास चुका था,

२७ उन यहूदियों ने विहित-नियुक्त कर दिया, और अपने स्वयं पर, और उनके बीज पर, और उन सभी पर जिन्होंने स्वयं को उनके साथ जोड़ लिया था ये दायित्व ले लिया, कि ये विफल हो, ताकि वो इन दोनो दिनो को उनके आलेखानुसार, और वर्ष-प्रति-वर्ष उनके नियुक्त समयानुसार, रखते रहें;

२८ और कि इन दिनो की स्मृति और पालन प्रत्येक पीढ़ी, प्रत्येक परिवार, प्रत्येक प्रान्त, और प्रत्येक नगर में करते रहे जाएँ; और कि पुरिम के ये दिन यहूदियों के बीच विफल हों, ही उनकी स्मृति उनके बीज से समाप्त हो।

२९ तब अबिहेल की बेटी रानी एस्थर ने, और यहूदी मोरदेकाय ने समस्त प्राधिकार के साथ लिख दिया, पुरिम के इस दूसरे पत्र को सुदृढ़ करदेने हेतु।

३० और उसने भेज दिए वो पत्र समस्त यहूदियों के पास, अहस्युरस के राज्य के एक सौ सत्ताईस प्रान्तों को, शान्ति और सत्य के शब्दों के साथ,

३१ इन पुरिम के दिनो को उनके नियुक्त समयों में सुदृढ़ कर देने हेतु, जैसा कि यहूदी मोरदेकाय और रानी एस्थर ने उन्हें संस्थापित कर दिया था, और जैसा कि उन्होंने अपने स्वयं के लिए, और अपने बीज के लिए नियुक्त कर दिया था, उनके उपवासों और उनकी चीख़ों से सम्बन्धित ही।

३२ और एस्थर की आज्ञप्ति ने पुरिम के इन विषयों को सुदृढ़ कर दिया; और ये पुस्तक में लिख दिया गया



दसवाँ अध्याय।


और राजा अहस्युरस ने भूमी पर और समुद्र के द्वीपों पर एक राजकर लागू कर दिया।

और वो समस्त कार्य उसकी शक्ती के और उसके बल के, और मोरदेकाय की महानता की घोषणा, जिस में कि राजा ने उसे उन्नत किया, क्या वो  मदय और फारस के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हुए हैं क्या? 

चूँकि मोरदेकाय वो यहूदी राजा अहस्युरस से अगला ही था, और यहूदियों के बीच महान, और उसके भाई-जनो के जनौघ द्वारा स्वीकृत, अपने गण की भलाई खोजता हुआ, और अपने समस्त बीज से शान्ति बोलता हुआ।



०५/०३/२०२६: 




























Comments

Popular posts from this blog