नेहेम्या की पुस्तक।( The Book of Nehemiah.)



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पहला अध्याय। 


हकलिया के बेटे नेहेम्या के शब्द। और यह होने को आया कि किसलू के महीने में, बारहवें वर्ष में, जैसे मैं शुशन महल में था,

कि मेरे भाई-जनों में से एक हननी, पधारा, वो, और यहूदा के कुछ व्यक्ति; और मैंने उनसे उन यहूदियों के समबन्ध में पूछा जिनका उद्धार हो चुका था, जो बाँधत्व से शेष बचे रह गए थे, और यरूशलेम में समबन्ध में।

और उन्होंने मुझ से कहा, वो शेष-गण जो बाँधत्व में से बचे रह गए हैं वहीं उस प्रान्त में बड़े ही संकट में और निन्दनीय स्थिति में हैं: यरूशलेम की दीवार भी तोड़ दी गई है, और उसके दरवाज़े आग से जला दिए गए हैं।

और यह होने को आया, जब मैंने यह शब्द सुने, तो मैं बैठ गया और रो पड़ा, और कुछ दिन शोक मनाया, और उपवास रखा, और स्वर्ग के ईश्वर के समक्ष प्रार्थना की,

और कहा, हे स्वर्ग के प्रभु ईश्वर, वो महान और आतंकमय ईश्वर, जो उनके लिए अपना प्रतिज्ञा-पत्र और करुणा बनाए रखते हैं जो उनसे प्रेम करते हैं और उनके आदेशों का ध्यान रखते हैं, जी मैं विनती करता हूँ आपसे:

आपका कान अब ध्यान-केंद्रित कर ले, और आपकी आँखें खुल जाएँ, ताकि आप अपने सेवक की प्रार्थना सुन लें, जो मैं आपके समक्ष अब, दिन-रात प्रार्थना कर रहा हूँ, आपके सेवकों इस्राएल की सन्तानों के लिए ही, और इस्राएल की सन्तानों के पापों को स्वीकार कर रहा हूँ, जिन पापों को हमने आपके विरुद्ध कर दिया है: दोनो मैंने और मेरे पित्रों के घराने ने पाप कर दिया है जी।

हमने आपके विरुद्ध अति-भ्रष्टता से व्यवहार किया है, और उन आदेशों का, ही उन अध्यादेशों का, ही उन न्याय-निर्धारणों का पालन किया है, जिनका आपने अपने सेवक मूसा को आदेश दे दिया था।

स्मरण में ले आएँ जी, मैं विनती करता हूँ आपसे, वो शब्द जो आपने अपने सेवक मूसा को आदेश दे दिया था, कहते हुए, यदि तुम अतिक्रमण कर बैठोगे, तो मैं तुम्हें उन राष्ट्रों के बीच बाहर तितर-बितर कर दूँगा:

परन्तु यदि तुम मेरे पास वापस मुड़ आओगे, और मेरे आदेशों को रखोगे और उन्हें क्रियान्वित करोगे; भले ही तुम में से वो हों जो स्वर्ग के अतितम क्षेत्र तक भी खदेड़ दिए जा चुके हों, तथापि मैं उन्हें वहाँ से इकट्ठा कर लूँगा, और उन्हें उस स्थान में ले आऊँगा जिसे मैंने चुन लिया है अपने नाम को वहाँ स्थापित कर देने हेतु।

१० अब यही आपके सेवक और आपके गण हैं जी, जिनका आपने मुक्तिभुकतान अपनी विशाल शक्ति के द्वारा, और अपने बाहुबल के द्वारा कर दिया है।

११ हे प्रभु जी, मैं आपसे विनती करता हूँ, अभी ही अपने कान का ध्यान अपने नौकर की प्रार्थना के प्रति, और अपने नौकरों की प्रार्थना के प्रति केंद्रित कर दें, जो आपके नाम का भय मानने की वाँछा रखते हैं: और उन्नत कर दें जी, मैं प्रार्थना करता हूँ, अपने सेवक को इसी दिन ही, और उसे इन पुरुष की दृष्टि में करुणा प्रदान कर दें। चूँकि मैं राजा का पेय-रस-सेवक था। 



दूसरा अध्याय।


और ये होने को आया राजा अर्तक्षत्र के बीसवें वर्ष में, निसन के महीने में, कि उनके समक्ष अंगूर-रस था: और मैंने वो अंगूर-रस उठाकर उसे राजा को दे दिया। अब इस समय से पूर्व मैं राजा की उपस्थिति में दुखी नहीं रहा था।

इस कारण वश राजा ने मुझ से कहा, तुम्हारा मुखमण्डल दुखी क्यों है भई, ये देखते हुए कि तुम अस्वस्थ नहीं हो? ये और कुछ नहीं बल्कि हृदय की पीड़ा है। तब मैं बहुत ही घोरता से भयभीत हो उठा,

और राजा से कहा, राजा सदा के लिए जीते रहें: जी मेरा मुखमण्डल दुखी क्यों हो जी, जब वो नगर, मेरे पित्रों के मक़बरों का वो स्थान, उजाड़ पड़ा हुआ है, और उसके दरवाज़ों का अग्नी से भुख-भक्षण हो गया है?

तब राजा ने मुझ से कहा, तुम किसके लिए याचना कर रहे हो? तो मैंने स्वर्ग के ईश्वर से प्रार्थना की।

और मैंने राजा से कहा, यदि यह राजा को प्रसन्न करे, और यदि आपके नौकर ने आपकी दृष्टि में अनुग्रह प्राप्त कर लिया हो, तो आप मुझे यहूदा भेज दें जी, मेरे पित्रों के मक़बरों के नगर ही ताकि मैं उसका निर्माण कर दूँ।

और राजा ने मुझ से कहा, रानी भी उनके साथ बैठी हुई थी, तुम्हारी यात्रा कितना समय लेगी? और तुम वापस कब लौटोगे? तो राजा मूझे भेजने हेतु इस से प्रसन्न हो गए; और मैंने उन्हें एक समय बता दिया।

इसके अतिरिक्त मैंने राजा से कहा, यदि यह राजा को प्रसन्न करे, मुझे पत्र प्रदान कर दिए जाएँ नदी पार उन राज्यपालों के प्रति, ताकि वो मुझे पार निकल चले जाने दें जब तक कि मैं यहूदा नहीं जाता हूँ।

और राजा के वन के रखवाले असफ के प्रति एक पत्र, ताकि वो मुझे महल के दरवाज़ों के लिए जो घर से सम्बंधित था, और उस नगर की दीवार के लिए, और उस घर के लिए जिस में में प्रवेश करूँगा, लट्ठों को निर्मित कर देने हेतु लक्कड़ प्रदान कर दे। और राजा ने मुझे अनुदान प्रदान कर दिया, मुझ पर मेरे ईश्वर के भले हाथानुसार ही।

तब मैंने नदी के पार उन राज्य-पालों के पास पहूँचकर उन्हें राजा के पत्र प्रदान कर दिए। अब राजा ने मेरे साथ सेना के कप्तानों को और घुड़सवारों को भेज दिया था।

१० जब होरोन के उस सनबल्लत ने, और उस अम्मोन-वंशज उस नौकर तोबिया ने इस विषय में सुना, तो उन्हें अत्याधिकता से पीड़ा हुई कि इस्राएल की सन्तानों के कल्याण को खोजने एक पुरुष पहुँचा था!

११ तो मैं यरूशलेम पहुँचा, और वहाँ तीन दिन रहा।

१२ और मैं रात्रि में उठा, मैं और मेरे साथ कुछ व्यक्ति; ही मैंने किसी भी बन्दे को बताया कि मेरे ईश्वर ने मेरे हृदय में यरूशलेम में क्रियान्वित कर देने के लिए क्या डाल दिया था: ही मेरे साथ कोई अन्य जानवर था, सिवाय वो जानवर जिसकी मैं सवारी कर रहा था।

१३ और मैंने रात्रि के समय घाटी के दरवाज़े में से बाहर निकल कर, सर्प-कूएँ के सामने से ही, और मल के ढेर तक, यरूशलेम की उन दीवारों का निरीक्षण किया, जो तोड़ दी गई थीं, और उसके उन दरवाज़ों का जिनका अग्नी से भुख-भक्षण कर दिया गया था।

१४ तब मैं झरने के दरवाज़े  तक, और राजा के कुण्ड तक चलता गया: परन्तु उस जानवर के लिए जो मेरे नीचे था निकलने हेतु कोई स्थान था।

१५ तब मैं रात में जलधारा के साथ-साथ ऊपर चलता गया, और दीवार का निरीक्षण करता रहा, और वापस मुड़ गया, और घाटी के दरवाज़े से प्रवेश कर गया, और इस प्रकार वापस लौट आया।

१६ और वो अध्यक्ष जानते नहीं थे कि मैं कहाँ गया था, या मैंने क्या किया था; ही मैंने अभी तक भी ये उन यहूदियों को बताया था, ही पुरोहितों को, ही उन कुलीन-व्यक्तियों को, ही उन अध्यक्षों को, ही उन शेष को जो वो कार्य कर रहे थे।

१७ तब मैंने उनसे कहा, तुम ये कष्ट देख रहे हो जिस में हम हैं, कि कैसे यरूशलेम उजाड़ पड़ा हुआ है, और उसके दरवाज़े अग्नी से जला दिए गए हैं: जाओ, और हम यरूशलेम की दीवार का निर्माण कर दें, ताकि हम अब और एक निन्दा बने रहें!

१८ तब मैंने उन्हें अपने ईश्वर के हाथ के विषय में बताया जो मुझ पर अच्छा-भला था; राजा के शब्दों के समान भी जो उन्होंने मुझ से बोले थे। और उन्होंने कहा, हम उठ कर निर्माण करते हैं। तो उन्होंने अपने हाथों को उस भले कार्य हेतु सशक्त किया।

१९ परन्तु जब होरोन के उस सनबल्लत ने, और उस अम्मोन-वंशज उस नौकर तोबिया ने, और उस अरब-देश वाले गेशम ने इसके विषय में सुना, तो वो हमारी हँसी उड़ाने लग गए, और हमसे घृणा करने लग गए, और कहा, यह क्या काम है हो तुम कर रहे हो? क्या तुम राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दोगे क्या?

२० तब मैंने उन्हें उत्तर दिया, और उनसे कहा, स्वर्ग के ईश्वर, वही हमें उन्नत करेंगे; इसलिए हम उनके सेवक उठ कर निर्माण करेंगे: परन्तु तुम्हारे पास यरूशलेम में कोई भी भाग, या अधिकार, या स्मृति नहीं है।




तीसरा अध्याय।


तब वो उच्च पुरोहित एलिशिब अपने भाई-जनो उन पुरोहितों के साथ उठा, और उन्होंने भेड़ों के द्वार का निर्माण किया; उसे पुनीत किया, और उसके द्वारों को स्थापित कर दिया; मेया की मीनार तक भी उन्होंने उसे पुनीत कर दिया, हननील की मीनार तक।

और उस के साथ सटे हुए यरीहो के जने निर्माण कर रहे थे। और उन के साथ सटे हुए इम्री के बेटे जक्कुर ने निर्माण किया।

परन्तु वो मत्स्य-द्वार हस्सेनअह के बेटों ने बनाया, जिन्होंने उसके लट्ठों को भी स्थित किया, और उसके द्वारों को स्थापित किया, उसके कुण्डों को, और उसके पटरों को।  

और उन से सटे हुए कोज़ का बेटा, ऊरिया का बेटा मेरेमोथ मरम्मत कर रहा था। और उनसे सट कर मेशेज़बील का बेटा, बरेकिया का बेटा मेशुल्लम मरम्मत कर रहा था। और उनके साथ सट कर बअना का बेटा ज़दोक मरम्मत कर रहा था।

और उनसे सट कर वो तेकोआ-वंशज मरम्मत कर रहे थे; परन्तु उनके कुलीन-प्रतिष्ठितों ने अपनी गर्दनें उनके प्रभु के कार्य के प्रति नहीं लगाई।

इसके अतिरिक्त पसेया के बेटे यहोयदा ने, और बेसोदेया के बेटे मेशुल्लम ने उस प्राचीन दरवाज़े की मरम्मत की; उन्होंने उसके लट्ठों को लगाया, और उसके द्वारों को स्थापित किया, और उसके कुण्डों को, और उसके पटरों को।  

और उनसे सटे हुए उस गिब्यन-वाले मेलतिया ने, और उस मरोनोथी यदोन ने, गिब्यन और मिज़्पा के जनों ने मरम्मत की, नदी के इस पार राज्य-पाल के सिंहासन तक। 

उस से सट कर सुनारों में से हरहया का बेटा उज़्ज़िएल मरम्मत कर रहा था। उस से सट कर इत्र-सुगन्धें बनाने वालों में से एक का बेटा हननिया भी मरम्मत कर रहा था, और उन्होंने यरूशलेम को चौड़ी दीवार तक क़िलाबन्द कर दिया।

और उन से सटे हुए हूर का बेटा रेफाया मरम्मत कर रहा था, यरूशलेम के अर्ध भाग का अध्यक्ष।

१० और उनसे सट कर हरुमफ का बेटा येदाया मरम्मत कर रहा था, अपने घर के सामने ही। और उसे सटा हुआ हशबनिया का बेटा हत्तुष मरम्मत कर रहा था।

११ हरिम के बेटे मलकिया ने, और पहथमोआब के बेटे हशुब ने, दूसरे भाग की, और भट्टियों की मीनार की मरम्मत की।

१२ और उस से सट कर हलोहेष का बेटा शल्लुम, यरूशलेम के अर्ध भाग का अध्यक्ष, वो और उसकी बेटियाँ मरम्मत कर रहे थे।

१३ घाटी के दरवाज़े की मरम्मत हनुन और ज़नोआ के निवासियों ने की; उन्होंने उसका निर्माण किया, और उसके द्वारों को स्थापित किया, उसके कुण्डों को, और उसके पटरों को, और दीवार में एक हज़ार हाथ मल के दरवाज़े तक।

१४ परन्तु मल के दरवाज़े की मरम्मत रेकब के बेटे मलकिया ने की, बेतहकरेम के भाग के अध्यक्ष ने; उसने उसका निर्माण किया, और उसके द्वारों को स्थापित किया, उसके कुण्डों को, और उसके पटरों को।

१५ परन्तु झरने के दरवाज़े की मरम्मत कोलहोज़े के बेटे शल्लुन ने की, मिज़्पा के भाग का एक अध्यक्ष; उसने उसका निर्माण किया, और उसे ढका, और उसके द्वारों को स्थापित किया, उसके कुण्डों को, और उसके पटरों को, और राजा के उद्यान से सटे सिलोआ के कुण्ड की दीवार को, और उन सीढ़ियों तक जो दाऊद के नगर से नीचे जाती हैं।

१६ उसके पश्चात अज़्बुक के बेटे नेहेम्या ने मरम्मत कर्र, बेतज़ुर के अर्ध भाग का अध्यक्ष, दाऊद के मक़बरों के विप्रीत उस स्थान तक, और उस कुण्ड तक जो बनाया गया था, और पराक्रमियों के घर तक।

१७ उसके पश्चात उन लेवी-वंशजों ने मरम्मत की, बनी के बेटे रेहम ने। उस से सट कर हशबिया, कईला के अर्ध भाग के अध्यक्ष ने अपने भाग में ही मरम्मत की।

१८ उसके पश्चात उनके भाई-जनो ने मरम्मत की, हेनदद के बेटे बवय, कईला के अर्ध भाग के अध्यक्ष ने ही।

१९ और उस से सट कर मिज़्पा के अध्यक्ष येशुआ के बेटे एज़ेर ने मरम्मत की, अन्य भाग की दीवार के मोड़ पद अस्त्र-शस्त्र-कोष तक ऊपर जाते हुए पथ के विपरीत ही।

२० उसके पश्चात ज़ब्बय के बेटे बरुक ने तत्परता से अन्य भाग की मरम्मत की, दीवार के मोड़ से लेकर उच्च-पुरोहित एलिशिब के घर के द्वार तक।

२१ उसके पश्चात कोज़ के बेटे ऊरीया के बेटे मेरेमोथ ने एक अन्य भाग की मरम्मत की, एलिशिब के घर के द्वार से लेकर एलिशिब के घर के अन्त तक भी।

२२ और उसके पश्चात उन पुरोहितों ने, मैदान के जनो ने मरम्मत की।

२३ उसके पश्चात बिन्यामिन और हशुब ने अपने घर के सामने मरम्मत की। उसके पश्चात अननिया के बेटे मअसिया के बेटे अज़रिया ने अपने घर से सट कर मरम्मत की।

२४ उसके पश्चात हेनदद के बेटे बिन्नूई ने एक अन्य भाग की मरम्मत की, अज़रिया के घर से लेकर दीवार के मोड़ तक, कोने तक ही।

२५ उज़य का बेटा पलल दीवार के मोड़ के विपरीत, और उस मीनार के जो राजा के ऊँचे घर से बाहर निकलती है, जो कारावास के आँगन के साथ है। उसके पश्चात परोश का बेटा पेदाया।

२६ इसके अतिरिक्त वो नेथिनिम ओफेल में बसते थे, उस स्थान में जो विपरीत है उस जल-द्वार के पूर्व की ओर, और उस बाहर निकलती हुई मीनार के। 

२७ इनके पश्चात उन तेकोआ-वंशजों ने एक अन्य भाग का सुधार किया, उस बाहर निकलती हुई विशाल मीनार के विपरीत, ओफेल की दीवार तक भी।

२८ घोड़ों के दरवाज़े के ऊपर से लेकर पुरोहितों ने मरम्मत की, हर एक ने अपने घर के विपरीत।

२९ उनके बाद इम्मर के बेटे ज़दोक ने मरम्मत की अपने घर के सामने। उसके पश्चात पूर्वी दरवाज़े के रखवाले शेकेनया के बेटे शेमाया ने भी मरम्मत की।

३० उसके पश्चात मरम्मत की शेलेमिया के बेटे हननिया ने, और जलफ़ के छटे बेटे हनुन ने, एक अन्य भाग की। उसके पश्चात बेरेकिया के बेटे मेशुल्लम ने उसके कक्ष के विपरीत सुधार किया।

३१ उसके पश्चात सुनार के बेटे मलकिया ने मरम्मत की नेथिनिमो के और व्यापारियों के स्थान तक, विपरीत मिफ़क़द के दरवाज़े के और कोने के ऊपर जाने वाले पथ तक।

३२ और कोने के ऊपर जाने वाले पथ के बीच में से लेकर भेड़ों के दरवाज़े तक उन सुनारों और व्यापारियों ने मरम्मत की।






चौथा अध्याय।


परन्तु यह होने को आया, कि जब सनबल्लत ने सुना कि हम दीवार का निर्माण कर रहे थे, तो वो आक्रोशित हो उठा, और बहुत ही क्षोभित हो गया, और यहूदियों की हँसी उड़ाई।

और वो अपने भाई-जनों के और समैरिया की सेना समक्ष बोला, कहते हुए, ये दुर्बल यहूदी क्या कर रहे हैं? क्या ये अपने आपको क़िलाबन्द कर देंगे क्या? क्या यह बलि चढ़ाएँगे? क्या ये एक ही दिन में समाप्त कर देंगे क्या? क्या ये उन जले हुए कूड़े-कचड़े के ढेरों में से पत्थरों को सजीवित कर देंगे क्या?

अब वो अम्मोन-वंशज तोबिया उसके साथ ही था, और उसने कहा, यहाँ तक की वो जिसका तुम निर्माण कर रहे हो, यदि एक लोमड़ी चढ़ाई कर बैठे, तो वो भी इनकी पत्थर की दीवार में तोड़-फोड़ मचा देगा।

सुन लें जी, हे हमारे ईश्वर; चूँकि हम तो घृणित है: और उनके कोसने को उनके अपने ही सर पर वापस मोड़ दें, और इन्हें बाँधत्व की भूमी में एक शिकार के समान प्रदान कर दें:

और इनकी अधर्मता को मत ढकिएगा, और आपके सामने से इनके पाप को मत मिट जाने दीजिएगा: चूँकि इन्होंने आपको निर्माण-कर्ताओं के सामने क्रोध के प्रति उत्तेजित कर दिया है जी।

तो हम दीवार का निर्माण करते रहे; और वो समस्त दीवार एक साथ जोड़ दी गई थी उसके अर्ध भाग तक: क्योंकि लोगों का मन काम करने का था।

परन्तु यह होने को आया, कि जब सनबल्लत, और तोबिया, और उन अरब-देश वालों ने, और उन अम्मोन-वंशजों ने, और उन अश्दोद-वालों ने सुना कि यरूशलेम की दीवारें निर्मित हो चुकी थीं, और कि तोड़-फोड़ के बँद किया जा रहा था, तो वो बहुत ही आक्रोशित हो उठे भई,

और उन सभी ने एक साथ आकर यरूशलेम के विरुद्ध लड़ाई करने का, और उसे अस्तव्यसत कर देने का षड्यंत्र  रचाया।

तथापि हमने अपने ईश्वर से अपनी प्रार्थना की, और उनके विरुद्ध दिन-रात एक पहरा बिठा दिया, उनके कारण। 

१० और यहूदा ने कहा, भार ढोने वालों की शक्ती क्षीण हो रही है, और बहुतेरा कूड़ा-कचड़ा है भई; तो हम दीवार का निर्माण नहीं कर पाएँगे।

११ और हमारे विरोधियों ने कहा, वो जान नहीं पाएँगे, ही देख पाएँगे, जब तक कि हम उनके बीच में पहूँच कर इन्हें मार डालें, और इस काम को थाम दें।

१२ और यह होने को आया, कि जब उनके साथ बसने वाले वो यहूदी पधारे, तो उन्होंने हमें दस बार बोला, उन सभी स्थानों से जहाँ से तुम हमारे पास वापस लौटोगे वो तुम पर पड़ेंगे।

१३ इसलिए मैंने स्थित कर दिए दीवार के पीछे निचले स्थानों में, और उच्च स्थानों में, मैंने लोगों को ही स्थित कर दिया उनके परिवारोंनुसार उनकी तलवारों, उनके भालों, और उनके धनुषों के साथ।

१४ और मैंने देखा, और उठ कर, उन कुलीन-प्रतिष्ठितों, और उन अध्यक्षों, और शेष लोगों से कहा, उनसे तुम मत डरो: प्रभु को स्मरण में रखो, जो महान और आतंकमय हैं, और अपने भाई-जनों, अपने बेटों, और अपनी बेटियों, अपनी पत्नियों, और अपने घरों के लिए लड़ो।

१५ और ये होने को आया, जब हमारे शत्रुओं ने सुना कि हमें वो जानकारी मिल चुकी थी, और ईश्वर ने उनके परामर्श को रद्द कर डाला था, तो हम दीवार पर हम सभी के सभी वापस लौट आए, हर एक अपने काम पर।

१६ और उस समय से लेकर ये होने को आया, कि मेरे नौकरों में से आधे काम में कार्यरात थे, और उन में से आधे भाले, ढालें, और धनुष, और जिरह-बख्तर पकड़े थे; और वो अध्यक्ष-गण यहूदा के समस्त घराने के पीछे थे।

१७ वो जो दीवार पर निर्माण कर रहे थे, और वो जो भार ढोए थे, उनके साथ-साथ जो लाद रहे थे, हर एक अपने हाथों में से एक के साथ काम में कार्यरत था, और दूसरे हाथ में एक शस्त्र पकड़े था।

१८ चूँकि वो निर्माण-कर्ता, हर एक के पास उसकी तलवार उसकी कमर पर कसी हुई थी, और ऐसे वो निर्माण कर रहे थे। और वो चिंघाड़ा बजाने वाला मेरे साथ ही था।

१९ और मैंने उन कुलीन-प्रतिष्ठितों, और उन अध्यक्षों, और शेष लोगों से कहा, यह कार्य विशाल और फैला हुआ है, और हम दीवार पर अलग-अलग हैं, एक दूसरे से दूर है।

२० जिस किसी भी स्थान में तुम चिंघाड़े की ध्वनि सुनोगे, वहीं हमारे पास एकत्रित हो जाना: हमारे ईश्वर हमारे लिए लड़ाई करेंगे।

२१ तो हमने उस कार्य में श्रम किया: और उन में से आधे पौ फटने से लेकर सितारों के प्रकटन तक भाले पकड़े होते थे।

२२ इसी प्रकार ही मैंने लोगों से कहा, प्रत्येक को अपने नौकर के साथ यरूशलेम में ही निवास कर लेने दो, ताकी रात में वो हमारे लिए पहरा दे सकें, और दिन में श्रम कर सकें।

२३ तो ही मैंने, ही मेरे भाई-जनों ने, ही मेरे नौकरों ने, ही रक्षा वाले उन जनों ने जो मेरे पीछे-पीछे थे, हम में से किसी ने भी अपने वस्त्र नहीं उतारे, सिवाय कि प्रत्येक उन्हें धोने के लिए ही उतारता था।



पाँचवाँ अध्याय।


और लोगों की और उनकी पत्नियों की उनके भाई-जनों उन यहूदियों के विरुद्ध एक बड़ी चीख-पुकार मची।

चूँकि वहीं वो थे जिन्होंने कहा, हम, हमारे बेटे, और हमारी बेटियाँ, अनेक हैं: इसलिए हम उनके लिए अनाज लेंगे, ताकि हम खा लें, और जी लें।

वहीं कुछ वो भी थे जिन्होंने कहा, हमने तो अपनी भूमियाँ, अंगूर-खेत, और घर गिरवी रख दिए हैं, ताकि हम अनाज खरीद सकें, अकाल के कारण।

वहीं वो भी थे जिन्होंने कहा, हमने तो राजा के राजकर हेतु पैसा उधार लिया हुआ है, अपनी भूमियों और अंगूर खेतों के प्रति।

तथापि अब हमारा माँस तो हमारे भाई-जनों के माँस समान ही तो है, हमारी सन्तानों उनकी सन्तानों समान: और लो, हम अपने बेटों और बेटियों को बाँधत्व में ला रहे हैं नौकर बन जाने के लिए, और हमारी बेटियों में से कुछ तो पहले से ही बाँधत्व में लाई जा चुकी हैं: ही हमारी शक्ती में है उनका मुक्तिभुक्तान कर देना; चूँकि अन्य लोगों के पास हमारी भूमियाँ और अँगूर-खेत हैं।

और मैं तो बहुत ही क्रोधित हो उठा था जब मैंने उनकी चीख पुकार और यह शब्द सुनें।

तब मैंने अपने स्वयं से परामर्श किया, और मैंने उन कुलीन-प्रतिष्ठावानों को, और उन अध्यक्षों को डाँटा, और उनसे कहा, तुम तो प्रत्येक एक अपने भाई पर ही सूद लगा रहे हो। और मैंने उनके विरुद्ध एक बड़ी सभा बिठा थी।

और मैंने उनसे कहा, हमने तो अपने सामर्थयानुसार अपने भाई-जनो उन यहूदियों का मुक्ति-भुक्तान कर दिया है, जो अन्य-राष्ट्रों को बेच दिए गए थे; और तो क्या तुम अपने ही भाई-जनों को भी बेच डालोगे क्या? या क्या वो हमें बेच डाल दिए जाएँगे क्या? तब वो जने चुप कर गए, और निरुत्तर रह गए।

और मैंने भी कहा, यह अच्छा नहीं है जो तुम कर रहे हो: क्या तुम्हें इन अन्य-राष्ट्रों हमारे शत्रुओं की निन्दा के कारण हमारे ईश्वर के भय में नहीं चलना चाहिए क्या?

१० इसी रीति से, और मेरे भाई-जन, और मेरे सेवक, उन से पैसा और अनाज सूद पर ले सकते हैं: मैं तुमसे निवेदन करता हूँ, हमें इस सूद को त्याग देना चाहिए।

११ पुनःस्थापित कर दो, मैं तुमसे निवेदन करता हूँ, उन्हें इसी ही दिन, उनकी भूमियों को, उनके अंगूर-खेतों को, उनके जैतूनों के खेतों को, और उनके घरों को, उस पैसे का सौवाँ भाग भी, और अनाज का, अंगूर-रस का, और तेल का, जिसका तुम उनसे सूद लेते हो।

१२ तब उन्होंने कहा, हम उन्हें पुनः-स्थापित कर देंगे, और उनसे कुछ भी नहीं चाहेंगे; ऐसा ही हम कर देंगे जैसा आप कह रहे हैं। तब मैंने उन पुरोहितों को बुलाया, और उनसे शपथ खिलवाई, कि उन्हें इसी वचनानुसार करना चाहिए।

१३ और मैंने अपनी जांघ हिला कर कहा, इसी प्रकार ईश्वर उस प्रत्येक आदमी को अपने घर से, और अपने श्रम से बाहर गिला डालें, जो इस वचन को क्रियान्वित नहीं करता है, इसी प्रकार ही ही वो बाहर हिला दिया जाता हुआ खाली कर दिया जाए। और समस्त सभा ने कहा, तथास्तु, और प्रभु की प्रशन्सा की। और उन लोगों ने इसी वचनानुसार कर दिया।

१४ इसके अतिरिक्त उस समय से लेकर जब मैं यहूदा की भूमी में उनका राज्य-पाल नियुक्त कर दिया गया था, राजा अर्तक्षत्र के बीसवें वर्ष से लेकर बत्तीसवें तक भी, जो कि बारह वर्ष हैं, मैं और मेरे भाई-जनो ने राज्य-पाल की रोटी नहीं खाई है।

१५ परन्तु उन पहले के राज्य-पालों ने जो मुझ से पूर्व रहे थे लोगों पर बोझ बन कर उनसे रोटी और अंगूर रस ले लिए थे, चाँदी के चालीस शेकलों के अतिरिक्त; हाँ भई, यहाँ तक कि उनके नौकरों ने भी लोगों पर राज जमाया: परन्तु मैंने ऐसा नहीं किया, ईश्वर के भय के कारण।

१६ हाँ भई, मैं इस दीवार के काम में निरंतर लगा रहा, ही हमने कोई भी भूमी ख़रीदी: और मेरे समस्त नौकर कार्य हेतु यहीं एकत्रित थे।

१७ इसके अतिरिक्त मेरी मेज़ पर यहूदियों और अध्यक्षों में से एक सौ पचास थे, उनके अतिरिक्त जो हमारे पास हमारे आस पास वाले उन अन्य-राष्ट्र-वालों में से आए थे।

१८ अब वो जो मेरे लिए प्रति दिन तैयार किया जाता था था एक साँड और छह श्रेष्ठ भेड़ें; पक्षी भी मेरे लिए तैयार किए जाते थे, और हर दस दिन समस्त प्रकार के अंगूर-रस: तथापि इस सभी के लिए मैंने राज्य-पाल की रोटी नहीं चाही, चूँकि इन लोगों पर वो बाँधत्व भारी था।

१९ मेरे विषय में भले के लिए सोचिएगा मेरे ईश्वर, उस सभी के अनुसार जो मैंने इस गण के लिए किया है।



छटा अध्याय।


अब यह होने को आया, जब सनबल्लत ने, और तोबिया ने, और उस अरब-देश वाले गेशम ने, और हमारे शेष शत्रुओं ने सुना कि मैंने दीवार का निर्माण कर दिया था, और कि उस में कोई भी टूट-फूट बची नहीं रह गई थी; भले ही मैंने उस समय दरवाज़ों पर द्वार नहीं स्थापित किए थे;)

कि सनबल्लत और गेशम ने मूझे भिजवाया, कहते हुए, जाओ, हम ओनो के मैदान में किन्ही गावों में से एक में एक साथ मिलते हैं। परन्तु उन्होंने मेरे प्रति बुराई करनी चाही थी।

और मैंने उनके पास दूत भेजे, कहते हुए, मैं एक विशाल कार्य कर रहा हूँ, तो मैं नीचे नहीं सकता; कार्य क्यों रुके भई, जैसे मैं इसे छोड़ कर तुम्हारे पास नीचे आता हूँ?

तथापि वो मेरे पास चार बार उसी रीति से भिजवाते रहे; और मैं उन्हें इसी रीतिनुसार उत्तर देता रहा।

तब सनबल्लत ने पाँचवीं बार अपने नौकर को मेरे पास उसी रीति से भेजा उसके हाथ में एक खुली चिट्ठी के साथ;

जिस में लिखित था, या अन्य-राष्ट्रों के बीच यह चर्चा है, और गश्मू यह कह रहा है, कि तुम और वो यहूदी विर्द्रोह करने की सोच में हो: इसी कारण वश तुम दीवार का निर्माण कर रहे हो, ताकि तुम उनके राजा बन जाओ, इन शब्दोंनुसार।

और तुम ने यरूशलेम में तुम्हें प्रचारित कर देने हेतु पैग़म्बरों को भी नियुक्त कर दिया है, कहते हुए, यहूदा में एक राजा है: और अब राजा को सूचित कर दिया जाएगा इन्हीं शब्दोंनुसार ही। इसलिए जाओ अब, और हम एक साथ परामर्श करें।

तब मैंने उसके पास भिजवाया, कहते हुए, ऐसी कोई भी बातें नहीं हैं जैसी तुम कह रहे हो, बल्कि तुम इनकी कल्पना अपने ही स्वयं के मन में कर रहे हो।

क्योंकि वो सभी हमें डरा रहे थे, कहते हुए, इनके हाथ कार्य से दुर्बल हो जाएँगे, ताकि वो किया ही नहीं जाएगा। अब इसलिए हे ईश्वर मेरे हाथों को सुदृढ़ करें।

१० इसके पश्चात मैं मैताबील के बेटे देलाया के बेटे शेमाया के घर पहुँचा, जो की बँद हुआ हुआ था; और उसने कहा, हम एक साथ ईश्वर के घर में मिलते हैं, मन्दिर के भीतर ही, और हमें मन्दिर के द्वारों को बँद कर देना चाहिए: क्योंकि वो तुम्हें मार डालने के लिए जाएँगे; हाँ भई, रात में ही वो तुम्हारी हत्या कर देने के लिए जाएँगे।

११ और मैंने कहा, क्या मेरे जैसा एक आदमी भाग खड़ा हो जाए क्या? और वो कौन है मेरे जैसा, जो मन्दिर के अन्दर चला जाए अपने जीवन को बचा लेने हेतु? मैं अन्दर नहीं जाऊँगा।

१२ और लो, मैंने आभास कर लिया कि ईश्वर ने उसे नहीं भेजा था; बल्कि उसी ने ही ये प्रेरित उपदेश मेरे विरुद्ध उच्चारित किया था: चूँकि तोबिया और सनबल्लत ने उसे भाड़े पर ले लिया हुआ था।

१३ इसलिए उसे भाड़े पर लिया गया था, कि मैं डर जाऊँ, और ऐसा ही कर कर, पाप कर बैठूँ, और तो उनके पास एक बुरी आख्या जाए, ताकि वो मेरी निन्दा कर दें।

१४ मेरे ईश्वर, जा आप तोबिया और सनबल्लत के विषय में सोचें उनके इन्हीं कार्योंनुसार ही, और उस पैग़म्बरिका नोअदिया के विषय में, और उन शेष पैग़म्बरों के, जो मुझे डरा देना चाहते हैं।

१५ तो उस दीवार की समाप्ति एलुल के महीने में पच्चीसवें दिन में, बावन दिनो में हो चुकी थी।

१६ और ये होने को आया, कि जब हमारे समस्त शत्रुओं ने इस विषय में सुना, और हमारे चारों ओर वाले उन समस्त अन्य-राष्ट्रों वालों ने यह बातें देखीं, तो वो अपनी की आँखों में बहुत ही नीचे गिर गए: क्योंकि उन्होंने आभास कर लिया कि यह कार्य हमारे ईश्वर द्वारा श्रमित था।

१७ इसके अतिरिक्त उन दिनो में यहूदा के कुलीनों से तोबिया के पास कई पत्र जाया करते थे, और तोबिया के पत्र उनके पास पहूँचा करते थे। 

१८ चूँकि यहूदा में कई थे जो उसके प्रति शपथ से बाध्य थे, क्योंकि वो अरा के बेटे शेकनिया का दामाद था; और उसके बेटे योहनन ने बरेकिया के बेटे मेशुल्लम की बेटी को लिया हुआ था।

१९ और वो उसके भले कामों की आख्या मेरे समक्ष दिया करते थे, और मेरे शब्दों का अर्णन उसे किया करते थे। और तोबिया मुझे पत्र भेजा करता था मुझे डराने के लिए।



सातवाँ अध्याय।


अब यह होने को आया, जब दीवार का निर्माण हो चुका था, और मैंने द्वारों को स्थापित कर दिया था, और वो द्वार-पाल और गायक और वो लेवी-वंशज नियुक्त कर दिए जा चुके थे,

कि मैंने अपने भाई हननी, और महल के अध्यक्ष हननिया को यरूशलेम पर प्रभार दे दिया: चूँकि वो एक विश्वसनीय पुरुष था, और कईयों से अधिक ईश्वर का भय मानता था।

और मैंने उन से कहा, भई सूर्य के गरम हो जाने तक यरूशलेम के दरवाज़ों को मत खोलना; और जैसे वो जन खड़े होते हैं, उन्हें द्वारों को बँद कर देने देना, और उन रोक लगा देना: और यरूशलेम के निवासियों में से पहरेदारों को नियुक्त कर देना, प्रत्येक को उसके पहरे पर ही, और प्रत्येक को अपने घर के सामने।

अब वो नगर विशाल और बृहत् था: परन्तु उस में लोग कम थे, और घरों का निर्माण नहीं हुआ था।

और मेरे ईश्वर ने मेरे हृदय में डाल दिया था उन कुलीन-प्रतिष्ठितों, और उन अध्यक्षों, और उन लोगों को एक साथ एकत्रित कर देना, ताकि वो वंशावली के माध्यम से गिन लिए जा सकें। और मैंने उनका एक वंशावली का एक गणना-पत्र पाया जो सर्व-प्रथम आये थे, और उस में लिखित पाया,

यही वो उस प्रान्त की सन्तानें हैं, जो बाँधत्व में से बाहर ऊपर गए थे, उन में से जिन्हें निष्कासित कर दिया गया था, जिन्हें बेबिलोन का राजा नबूकदनेज़्ज़र निष्कासित उठा ले गया था, और जो पुनः यरूशलेम और यहूदा वापस लौट आए थे, हर कोई अपने ही नगर में;

जो ज़रुब्बाबेल के साथ आए: येशुआ, नेहेम्या, अज़रिया, रअमिया, नहमनी, मोरदेकाय, बिल्शन, मिस्परेथ, बिगवय, नीहम, बअना। वो संख्या, मैं कहता हूँ, इस्राएल के गण के पुरुषों की यह थी;

परोश की सन्तानें, दो हज़ार एक सौ बहत्तर।

शेफतिया की सन्तानें, तीन सौ बहत्तर।

१० अरह की सन्तानें, छह सौ बावन।

११ पहथमोआब की सन्तानें, येशुआ और योआब की सन्तानों में से, दो हज़ार आठ सौ अट्ठारह।

१२ एलम की सन्तानें, एक हज़ार दो सौ चऊवन।

१३ ज़त्तू की सन्तानें, आठ सौ पैंतालीस।

१४ ज़कई की सन्तानें, सात सौ साठ।

१५ बिन्नुई की सन्तानें, छह सौ अड़तालीस।

१६ बेबय की सन्तानें, छह सौ अट्ठाईस।

१७ अज़गद की सन्तानें, दो हज़ार तीन सौ बाईस।

१८ अदोनिकम की सन्तानें, छह सौ सड़सठ।

१९ बिगवय की सन्तानें, दो हज़ार सड़सठ।

२० अदिन की सन्तानें, छह सौ पचपन।

२१ हज़ेकिया के अतेर की सन्तानें, अठ्ठाणवें।

२२ हशुम की सन्तानें, तीन सौ अट्ठाईस।

२३ बेज़य की सन्तानें, तीन सौ चौबीस।

२४ हरिफ की सन्तानें, एक सौ बारह।

२५ गिब्यन की सन्तानें, पिच्छाणवें।

२६ बेतलहेम और नेतोफा के व्यक्ति, एक सौ अट्ठासी।

२७ अनथोथ के व्यक्ति, एक सौ अठ्ठाईस।

२८ बेतअज़्मवथ की व्यक्ति, बयालीस।

२९ किरयथअरिम, केफिरा, और बीरोथ के व्यक्ति, सात सौ तैंतालीस।

३० रमा और गबा के व्यक्ति, छह सौ इक्कीस।

३१ मिकमस के व्यक्ति, एक सौ बाईस।

३२ बेतएल और एय के व्यक्ति, एक सौ तेईस।

३३ उस दूसरे नेबो के व्यक्ति, बावन।

३४ उस दूसरे एलम की सन्तानें, एक हज़ार दो सौ चऊवन।

३५ हरिम की सन्तानें, तीन सौ बीस।

३६ यरीहो की सन्तानें, तीन सौ पैंतालीस।

३७ लोद, हदिद, और ओनो की सन्तानें, सात सौ इक्कीस।

३८ सेनअह की सन्तानें, तीन हज़ार नौ सौ तीस।

३९ वो पुरोहित-गण: येदाया की सन्तानें, येशुआ के घराने से, नौ सौ तिहत्तर।

४० इम्मर की सन्तानें, एक हज़ार बावन।

४१ पशुर की सन्तानें, एक हज़ार दो सौ सैंतालीस।

४२ हरिम की सन्तानें, एक हज़ार सत्रह।

४३  लेवी-वंशज-गण: येशुआ की सन्तानें, कदमिएल की, और होदेवा की सन्तानों में से, चौहत्तर।

४४ गायक-गण: असफ की सन्तानें, एक सौ अड़तालीस।

४५ द्वारपाल: शल्लुम की सन्तानें, अतेर की सन्तानें, तलमोन की सन्तानें, अक्कुब की सन्तानें, हतिता की सन्तानें, शोबय की सन्तानें, एक सौ अड़तीस।

४६ नेथिनिम-गण: ज़िहा की सन्तानें, हशूफ़ा की सन्तानें, तब्बाओथ की सन्तानें,

४७ केरोस की सन्तानें, सिया की सन्तानें, पदोन की सन्तानें,

४८ लेबना की सन्तानें, हगबा की सन्तानें, शलमय की सन्तानें,

४९ हनन की सन्तानें, गिद्देल की सन्तानें, गहर की सन्तानें, 

५० रेअया की सन्तानें, रेज़िन की सन्तानें, नेकोदा की सन्तानें, 

५१ गज़्ज़म की सन्तानें, उज़्ज़ा की सन्तानें, पसेया की सन्तानें, 

५२ बेसय की सन्तानें, मेयुनिम की सन्तानें, नेफिशेसिम की सन्तानें,

५३ बकबुक की सन्तानें, हक़ूफा की सन्तानें, हरहुर की सन्तानें,

५४ बज़लिथ की सन्तानें, महिदा की सन्तानें, हर्षा की सन्तानें,

५५ बरकोस की सन्तानें, सिसेरा की सन्तानें, तमा की सन्तानें,

५६ नेज़िया की सन्तानें, हतिफ़ा की सन्तानें।

५७ सुलेमान के नौकरों की सन्तानें: सोतय की सन्तानें, सोफेरेथ की सन्तानें, पेरिदा की सन्तानें,

५८ यअला की सन्तानें, दरकोन की सन्तानें, गिद्देल की सन्तानें,

५९ शेफतिया की सन्तानें, हत्तिल की सन्तानें, ज़ेबैम के पोकेरेथ की सन्तानें, अमोन की सन्तानें।

६० समस्त नेथिनिम-गण, और सुलेमान के नौकरों की सन्तानें, तीन सौ बयानवे थीं।

६१ और यह वो थे जो तेलमेला, तेलहरेशा, केरुब, अद्द्योंन, और इम्मर से ऊपर गए थे: परन्तु वो अपने पित्रों के घराने का, और ने ही उनके बीज का विवरण दे पाए, कि यदि वो इस्राएल के थे:

६२ देलाया की सन्तानें, तोबिया की सन्तानें, नेकोदा की सन्तानें, छह सौ बयालीस।

६३ और पुरोहितों में से: हबाया की सन्तानें, कोज़ की सन्तानें, बर्ज़िलाय की सन्तानें; जिसने उस गिलद-वंशज बर्ज़िलाय की बेटियों में से एक पत्नी के लिए ले ली थी, और वो उनके नाम पर पुकारा जाता था,

६४ इन्हीं ने अपना पंजीकरण उनके बीच ढूँढा जो वंशवाली द्वारा लिखित थे, परन्तु वो नहीं पाया गया: इसलिए उन्हें पुरोहित-पद से दूषित समान परे हटा दिया गया था।

६५ और तिरशथ ने उनसे कहा, कि उन्हें उन अति-पवित्रतम वस्तुओं में से खाना नहीं चाहिए, जब तक कि ऊरीम और थुमीम के साथ एक पुरोहित नहीं खड़ा हो जाता है।

६६ वो सम्पूर्ण सभा एक साथ बयालीस हज़ार तीन सौ साठ थी,

६७ उनके नौकरों और उनकी नौकरानियों के अतिरिक्त, जिन में से सात हज़ार तीन सौ सैंतीस थे: और उनके पास दो सौ पैंतालीस गायक और गायिकाएँ थीं।

६८ उनके घोड़े सात सौ छत्तीस थे; उनके खच्चर दो सौ पैंतालीस;

६९ उनके ऊँट चार सौ पैंतीस; गधे छह हज़ार सात सौ बीस।

७० और पित्रों के प्रमुखों में से कुछों ने कार्य के लिए प्रदान किया। तिरशथ ने कोषागार में सोने की एक हज़ार मुद्राएँ, पचास कटोरदान, पाँच सौ तीस पुरोहितों के वस्त्र प्रदान कर दिए।

७१ और पित्रों के प्रमुखों में से कुछों ने कार्य के कोषागार में सोने की बीस हज़ार मुद्राएँ, और दो हज़ार दो सौ चाँदी के मानेह दे दिए।

७२ और वो जो उन शेष लोगों ने दिया था, सोने की बीस हज़ार मुद्राएँ, और दो हज़ार चाँदी के मानेह, और सड़सठ पुरोहितों के वस्त्र।

७३ तो वो पुरोहित, और वो लेवी-वंशज, और वो गायक, और लोगों में से कुछ, और वो नेथिनिम, और समस्त इस्राएल अपने-अपने नगरों में बस गए: और जब सातवाँ महीना गया था, तो इस्राएल की सन्तानें अपने नगारों में ही थीं।



आठवाँ अध्याय।


और सभी लोगों ने स्वयं को एक ही मानुष समान पानी के दरवाज़े के सामने वाले पथ पर एक साथ एकत्रित कर लिया; और वो लिपिक एज़रा से मूसा के नियम की पुस्तक को, जिसका आदेश प्रभु ने इस्राएल को दे दिया था, ले आने हेतु बोले।

और पुरोहित एज़रा दोनो पुरुषों और स्त्रियों, और समस्त प्रज्ञावान श्रोताओं की उस सभा के समक्ष नियम को ले आया, सातवें महीने के पहले दिन ही।

और उसने पानी के दरवाज़े के सामने वाले उस पथ के समक्ष सुबह से लेकर दोपहर तक उस में से पढ़ा, उन पुरुषों, और उन स्त्रियों, और उन प्रज्ञा रखने वालों के समक्ष ही; और सभी लोगों के कर्ण नियम की पुस्तक के प्रति ध्यान-केन्द्रित थे।

और लिपिक एज़रा लकड़ी के एक प्रवचन-मंच पर खड़ा था, जिसे उन्होंने इस उद्देश्य हेतु बना दिया था; और उसके साथ मत्तिथ्या, और शेमा, और अनायाह, और ऊरिया, और हिल्किया, और मअसेया, उसके दाहिने हाथ पर खड़े थे; और उसके बाएँ हाथ पर पेदाया, और मीशाएल, और मलकिया, और हशुम, और हशबदना, ज़क़र्या, और मेशुल्लम।

और एज़रा ने वो पुस्तक उन सभी लोगों की दृष्टि में खोली; चूँकि वो उन सभी लोगों के ऊपर था; और जब उसने उसे खोल लिया था, तो सभी लोग खड़े हो गए:

और एज़रा ने प्रभु, उन महान ईश्वर को आशीष दिया। और सभी लोगों ने उत्तर दिया, तथास्तु, तथास्तु, अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए: और उन्होंने अपने सरों को झुकाया, और उनके चेहरे धरती की ओर किए हुए प्रभु की आराधना की।

येशुआ, और बनी, और शेरेबिया, यमिन, अक्कुब, शब्बेथय, होदिया, मअसेया, केलिता, अज़रिया, योज़बद, हनन, पेलिया, और उन लेवी-वंशजों ने भी उन लोगों को वो नियम समझवाया: और वो लोग अपने-अपने स्थानों में खड़े थे।

तो वो ईश्वर के नियम में उस पुस्तक में स्पष्टता से पढ़ रहे थे, और प्रज्ञा प्रदान कर रहे थे, और उन्हें उस पढ़ाई को समझा रहे थे।

और नेहेम्या, जो कि तिरशथ है, और उस पुरोहित लिपिक एज़रा, और उन लेवी-वंशजों ने, जो लोगों को शिक्षा प्रदान कर रहे थे, उन समस्त लोगों से कहा, यह दिन प्रभु तुम्हारे ईश्वर के प्रति पवित्र है; शोक मत मनाओ, ही रो-धो। चूँकि सभी लोग रो-धो रहे थे, जब वो नियम के शब्द सुन रहे थे।

१० तब उसने उन से कहा, अपने पथ पर जाकर, वो चर्बी खा लो, और वो मिठास पी लो, और उनके पास भाग भेज दो जिनके लिए कुछ भी तैयार नहीं किया गया है: चूँकि ये दिन हमारे प्रभु के प्रति पवित्र है: ही तुम खेद करो; क्योंकि प्रभु का हर्ष ही तुम्हारी शक्ती है।

११ तो उन लेवी-वंशजों ने उन सभी लोगों को चुप कराया, कहते हुए, शान्त हो जाओ भई, चूँकि यह दिन पवित्र है; ही दुःख मनाओ।

१२ और सभी लोग अपने पथ पर भोजन करने, और पीने, और भाग भेजने, और बहुत ख़ुशी मनाने हेतु चले गए, क्योंकि उन्होंने उन शब्दों को समझ लिया था जो उन्हें घोषित करा दिए गए थे।

१३ और दूसरे दिन समस्त गण के पित्रों के प्रमुख, पुरोहित-गण, और लेवी-वंशज लिपिक एज़रा के पास एक साथ एकत्रित हो गए थे, नियम के शब्दों को समझने हेतु ही।

१४ और उन्होंने उस नियम में लिखा हुआ पाया जिसका प्रभु ने मूसा द्वारा आदेश दे दिया था, कि इस्राएल की सन्तानों को सातवें महीने के भोज के अवसर पर कुटियों में निवास करना चाहिए:

१५ और कि उन्हें उनके समस्त नगरों में, और यरूशलेम में घोषणा और ऐलान कर देना चाहिए, कहते हुए, पहाड़ पर निकल चले जाओ, और जैतूनों की डालियाँ, और तेल-वृक्ष की डालियाँ, और सावनी की डालियाँ, और खजूर-पेड़ की डालियाँ, और मोटे-मोटे पेड़ों की डालियाँ ले आओ, कुटियों का निर्माण कर देने हेतु, जैसा की लिखित है।

१६ तो वो लोग निकल चले गए, और उन्हें ले आए, और स्वयं के लिए कुटियाँ बना लीं, हर एक ने ही अपने घर की छत पर, और अपने आँगनों में, और ईश्वर के भवन के आँगनों में, और पानी के दरवाज़े के पथ में, और एफ्रैम के दरवाज़े के पथ में।

१७ और उनकी समस्त सभा ने जो पुनः बाँधत्व में से बाहर निकल आए थे, कुटियाँ बना लीं, और उन कुटियों के नीचे बैठ गए: चूँकि नून के बेटे येशुआ के दिनो से लेकर उस दिन तक इस्राएल की सन्तानों ने ऐसा नहीं किया था। और बहुत ही अत्याधिक प्रसन्नता थी।

१८ और दिन प्रति दिन, पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक, वो ईश्वर के नियम की पुस्तक में पढ़ता रहा। और उन्होंने वो भोज सात दिन रखा; और आठवें दिन एक गम्भीर सभा, रीतिनुसार ही।



नौवाँ अध्याय।


तो अब इस महीने के चौबीसवें दिन में इस्राएल की सन्तानें एकत्रित थीं, उपवास रखती हुई, और टाट-वस्त्रों के साथ, और धूल-मिट्टी उन पर।

और इस्राएल के बीज ने स्वयं को उन समस्त परदेशियों से पृथक कर लिया, और कहदे होकर अपने पापों को, और अपने पित्रों की अधर्मताओं को स्वीकार कर रहे थे।

और उन्होंने अपने स्थान में खड़े होकर प्रभु अपने ईश्वर के नियम की पुस्तक में दिन के एक चौथाई भाग पढ़ाई की; और अन्य एक चौथाई भाग उन्होंने क़ुबूल किया, और प्रभु अपने ईश्वर की आराधना की।

तब सीढ़ियों पर उठ खड़े हुए, लेवी-वंशजों में से, येशुआ, और बनी, क़दमिएल, शेबनिया, बुन्नी, शेरेबिया, बनी, और केननी, और एक प्रबल वाणी से प्रभु अपने ईश्वर के प्रति चीखे।

तब वो लेवी-वंशज, येशुआ, और क़दमिएल, बनी, हशबनिया, शेरेबिया, होदिया, शेबनिया, और पेथहिया ने कहा, खड़े हो जाओ और प्रभु अपने ईश्वर को आशीष दे दो सदा सदा के लिए: और धन्य हो आपका गौरवशाली नाम, जो कि समस्त धन्यता और प्रशन्सा से भी अधिक पदोन्नत है।

आप, आप ही अकेले प्रभु हैं जी; आप ही ने स्वर्ग, स्वर्गों का स्वर्ग, उनकी समस्त सेना सहित, पृथ्वी, और उस में वो सभी कुछ जो हैं, वो सागर, और वो सभी कुछ जो उस में है रचा दिया है, और आप ही उन सभी को परीरक्षित रखते हैं; और स्वर्ग की सेना आपकी अर्चना करती है।

आप ही वही प्रभु वो ईश्वर हैं जी, जिन्होंने अब्राम को ही चुना, और उसे कसदियों के अर में से बाहर निकाल लाए, और उसका नामकरण अब्राहम कर दिया;

और उनका हृदय आपके अपने समक्ष निष्ठावान पाकर, और उनके साथ कनानवासियों, हित्ती वंशजों, एमोरवासियों, और पेरिज़वासियों, और यबूसी वंशजों, और गिरगश-वंशजों की भूमी प्रदान कर देने हेतु एक प्रतिज्ञा-पत्र बना दिया, उसे प्रदान कर देने हेतु, उन्हीं के बीज को ही, और आप अपने शब्दों को क्रियान्वित कर चुके हैं; चूँकि आप की नेक हैं:

और आपने मिस्र में हमारे पित्रों का वो अत्याचार देख ही लिया, और लाल-समुद्र से सटे हुए उनकी हाहाकार सुन ली;

१० और फैरों और उसके सभी नौकरों पर, और उसकी भूमी के समस्त लोगों पर आपने संकेत और चमत्कार प्रदर्शित किए: चूँकि आप ही परिचित थे कि उन्होंने उनके विरुद्ध घमण्डी व्यवहार किया था। तो इस प्रकार आपने इस दिन तक भी अपने लिए एक नाम बना लिया।

११ और अपने ही उनके सामने-सामने समुद्र को विभाजित कर दिया, ताकि वो उस समुद्र के बीच में से सूखी भूमी पर चलते गए; और आपने उनके अत्याचारकों को पटक डाला उन गहराईयों में, प्रबल पानियों में ही एक पत्थर समान।

१२ इसके अतिरिक्त आपने उनका दिन में एक मेघ-स्तम्भ द्वारा नेतृत्व किया; और रात में एक अग्नी-स्तम्भ द्वारा, उन्हें उस पथ पर उजाला प्रदान करने हेतु जिस पर उन्हें जाना होता था।

१३ आपने सिनय पहाड़ पर भी अवरोहण किया, और  स्वर्ग से उनके साथ बोले, और उन्हें उचित न्याय-निर्धारण, और सच्चे नियम, अच्छे अध्यादेश और आदेश प्रदान किया:

१४ और उन्हें अपने पवित्र सैबथ से परिचित किया, और उन्हें अपने सेवक मूसा के हाथों निर्देशों, अद्यादेशों और नियमों का आदेश दिया:

१५ और उन्हें उनकी भूख हेतु स्वर्ग से रोटी प्रदान की, और उनके लिए उनकी प्यास हेतु चट्टान में से पानी बाहर निकाल लाए, और उन्हें प्रतिज्ञा दे दी कि उन्हें भीतर जाकर उस भूमी पर अधिकार कर लेना चाहिए जिसको दे देने की शपथ आप उन्हें प्रदान कर चुके थे।

१६ परन्तु वो और हमारे पित्र घमण्डी थे, और अपनी गरदने ऐंठ लीं, और आपके आदेशों का श्रवण नहीं किया,

१७ और आज्ञापाल अस्वीकार कर दिया, ही आपके अचरजों को स्मरण में रखा जिन्हें आपने उनके बीच किए थे; बल्कि अपनी गरदने ऐंठ लीं, और उनके विद्रोह में एक कप्तान को नियुक्त कर लिया उनके बाँधत्व में वापस लौट जाने हेतु ही: परन्तु आप के ईश्वर हैं क्षमा कर देने हेतु उद्यत, कृपालु और दयावान, क्रोध के प्रति धीमे, और विशाल करुणा वाले, और आपने उन्हें त्याग नहीं।

१८ हाँ जी, जब उन्होंने अपने लिए एक ढलवाँ बछड़ा बना लिया था, और कहा, यही तुम्हारा ईश्वर है, जो तुम्हें मिस्र में से ऊपर निकाल लाया, और विशाल उत्तेजनाएँ क्रियान्वित कर बैठे थे;

१९ तथापि आपने उस जँगली-क्षेत्र में अपनी बहुगुणित दयालुताओं में उनका त्याग नहीं किया: उस मेघ-स्तम्भ ने उनसे दिन में विदाई नहीं ली, उनका पथ पर नेतृत्व करने हेतु; ही रात में उस अग्नी-स्तम्भ ने, उन्हें प्रकाश और उस पथ को प्रदर्शित कर देने हेतु जिस पर उन्हें जाना था।

२० आपने उन्हें अपना अच्छा भावात्मा भी उन्हें निर्देश देने हेतु प्रदान किया, और उनके मुखों से मन्ना नहीं रोका, और उन्हें उनकी प्यास हेतु जल दिया।

२१ हाँ जी, चालीस साल आपने उनका उस जँगली-क्षेत्र में समर्थन किया, ताकि उन्हें किसी भी वस्तु की कमी नहीं पड़ी जी; उनके वस्त्र घिस कर फटे नहीं, और उनके पैर सूजे नहीं।

२२ इसके अतिरिक्त आपने उन्हें राज्य और राष्ट्र प्रदान किए, और उन्हें दिशा-दिशा में विभाजित कर दिया: तो उन्होंने सिहोन की भूमी पर, और हेश्बोन के राजा की भूमी पर, और बशान के राजा ओग की भूमी पर अधिकार जमा लिया। 

२३ उनकी सन्तानों को भी आपने गुणा किया स्वर्ग के सितारों समान ही, और उन्हें भूमी में ले आए, जिसके सम्बन्ध में आपने उनके पितरों को वचन दे दिया था, कि वो अन्दर जाकर उस पर अधिकार कर लें।

२४ तो वो सन्तानें भीतर चली गईं और भूमी पर अधिकार जमा लिया, और आपने उनके समक्ष उस भूमी के निवासियों, उन कनानवासियों को आधीन कर दिया, और उन्हें उनके हाथों में प्रदान कर दिया, उनके राजाओं और भूमी के लोगों के साथ, ताकि वो उनके साथ वैसा ही कर दें उनकी इच्छानुसार।

२५ और उन्होंने शक्तिशाली नगरों को और एक मोटी भूमी को छीन लिया, और समस्त सामग्रियों से भरपूर घरों को, खुदे हुए कूँओं, अंगूर के खेतों, जैतून के खेतों, और आधिक्यता से फल के वृक्षों पर अधिकार कर लिया: इस प्रकार उन्होंने खाया, और संतुष्ट हो गए, और मोटे होते चले गए, स्वयं का आपकी विशाल अच्छाई में आमोद-प्रमोद मनाते हुए।

२६ तथापि वो अवज्ञाकारी बन गए, और आपके विरुद्ध विद्रोह कर बैठे, आपके नियम को अपनी पीठों के पीछे पटक कर, और आपके पैग़म्बरों की हत्या कर कर जिन्होंने उनके विरुद्ध साक्ष्य दिया उन्हें आपकी ओर मोड़ देने हेतु, और उन्होंने बड़ी ही उत्तेजनाएँ क्रियान्वित कीं।

२७ इसलिए आपने उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में प्रदान कर दिया, जिन्होंने उन्हें व्यथित किया: और उनके कष्ट के समय में, जब उन्होंने आपकी ओर चीख-पुकार मचाई, तो आपने उन्हें स्वर्ग से सुन लिया; और अपनी बहुगुणित दयालुताओंनुसार ही आपने उन्हें बचावक प्रदान कर दिए, जिन्हें उन्होंने उनके शत्रुओं के हाथ में से बचा लिया।

२८ परन्तु विश्राम कर लेने के पश्चात, उन्होंने आपके समक्ष पुनः बुराई कर डाली: इसलिए आपने उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में ही छोड़ दिया, ताकि उन्होंने उन पर अधिराज्य जमा लिया: तथापि जब वो वापस लौट आते थे, और आपकी ओर चीख-पुकार मचाते थे, तो आप स्वर्ग से उनका श्रवण कर लेते थे; और कई बार आपने अपनी दयालुताओंनुसार ही उनका बचाव किया;

२९ और उनके विरुद्ध साक्ष्य दिया, ताकि आप उन्हें पुनः अपने नियम के प्रति वापस मोड़ दें: तथापि वो घमण्डी ही रहे, और आपके आदेशों का श्रवण नहीं किया, बल्कि आपके न्याय-निर्धारणों के विरुद्ध पाप करते रहे, जिनका पालन यदि कोई मानुष करता रहे, वही उन्हीं में जीता रहे; और अपने कन्धा परे खींच लिया, और अपनी गर्दनें ऐंठ लीं, और सुनवाई नहीं दी।

३० तब भी कई वर्षों तक आप उन्हें सहते रहे, और उनके विरुद्ध अपने पैग़ामबरों में अपने भावात्मा द्वारा साक्ष्य देते रहे: तब भी उन्होंने सुनवाई नहीं दी: इसलिए आपने उन्हें उन भूमियों के लोगों के हाथ में प्रदान कर दिया।

३१ तथापि आपकी विशाल दयालुताओं के वास्ते ही आपने उन्हें पूर्णता से समाप्त नहीं किया, ही उनका त्याग किया; चूँकि आप एक कृपाशील और दयालु ईश्वर हैं।

३२ अब इसलिए हमारे ईश्वर, वो महान, वो बलशाली, और आतंक-मय ईश्वर जी, जो प्रतिज्ञा-पत्र और दया रखते  रहते हैं, ये समस्त आपत्ती आपके समक्ष छोटी प्रतीत हो, जो हम पर पड़ी है, हमारे राजाओं पर, हमारे मुखियों पर, और हमारे पुरोहितों पर, और हमारे पैग़म्बरों पर, और हमारे पित्रों पर, और आपके समस्त लोगों पर, असिरिया के राजाओं के समय से लेकर इसी दिन तक।

३३ परन्तु आप उस सभी के प्रति न्यायी हैं जो हम पर लाया पड़ा है; क्योंकि आपने उचित किया है, परन्तु हमने दुष्टता कर डाली है:

३४ ही हमारे राजाओं, हमारे मुखियों, हमारे पुरोहितों, ही हमारे पित्रों ने आपके नियम का पालन किया, ही आपके आदेशों और आपके साक्षयों का श्रवण किया, जिन से आपने उनके विरुद्ध साक्ष्य दिया।

३५ क्योंकि उन्होंने अपने राज्य में, और आपकी विशाल भलाई में जो आपने उन्हें प्रदान कर दी थी, और उस बृहत् और मोटी भूमी में जिसे आपने उन्हें उनके सामने प्रदान कर दी थी आपकी सेवा नहीं की, ही वो अपने दुष्ट कर्मों से परे मुड़े।

३६ देख लें जी, हम इस दिन नौकर हैं, और उस भूमी पर जिसे आपने हमारे पित्रों को प्रदान कर दिया था उसके फल और उसकी अच्छाई को भोगने हेतु, देख लें जी, हम तो उसी में ही नौकर हैं:

३७ और वो उन राजाओं को बहुत उपज प्रदान करती है जिन्हें आपने हमारे पापों के कारण हम पर नियुक्त कर दिया है: उनका हमारे शरीरों पर, और हमारे मवेशी पर, उन्हीं की प्रसन्नतानुसार अधिराज्य भी है जी, और हम बहुत ही कष्ट में हैं।

३८ और इस सभी के कारण हम एक निश्चित प्रतिज्ञा-पत्र बनाकर उसे लिख रहे हैं; और हमारे मुखिया, लेवी-वंशज, और पुरोहित-गण मुहर-बन्दी छाप रहे हैं।



दसवाँ अध्याय।


अब वो जिन्होंने मुहरबंदी की छाप लगाई थे, नेहेम्या, वो तिरशथ, हकलिया का बेटा, और ज़िदकिया,

सेराया, अज़रिया, येरेमिया,

पशुर, अमरिया, मलकिया,

हत्तुष, शेबनिया, मल्लुक,

हरिम, मेरेमोथ, ओबदिया,

दानीएल, गिन्नेथन, बरुक,

मेशुल्लम, अबिया, मियामिन,

मअज़िया, बिलगय, शेमाया: यही वो पुरोहित-गण थे।

और वो लेवी-वंशज: दोनो येशुआ अज़निया का बेटा, हेनदद के बेटों में से बिन्नूई, कदमिएल;

१० और उनके भाई-जन, शेबानाय, होदिया, केलिता, पेलाया, हनन,

११ मिका, रेहोब, हशबिया,

१२ जक्कुर, शेरेबिया, शेबनिया,

१३ होदिया, बनी, बेनिननु।

१४ लोगों के मुखिया; परोष, पहथमोआब, एलम, ज़त्तू, बनी,

१५ बुन्नी, अज़गद, बेबय,

१६ अदोनिया, बिगवय, अदिन,

१७ अतेर, हिज़किया, अज़्ज़ुर,

१८ होदिया, हशुम, बेज़य,

१९ हरिफ, अनथोथ, नेबय,

२० मगपियश, मेशुल्लम, हेज़िर,

२१ मेशेज़बील, ज़दोक, यद्दुआ,

२२ पेलतिया, हनन, अनाया,

२३ होशेय, हननिया, हशुब,

२४ हल्लोहेष, पिलेहा, शोबेक,

२५ रेहम, हशबना, मअसेया,

२६ और अहिया, हनन, अनन,

२७ मल्लुक, हरिम, बअना।

२८ और वो शेष गण, वो पुरोहित, लेवी-वंशज, द्वार-पाल, गायक, नेथिनिम-गण, और वो सभी जिन्होंने स्वयं को उन भूमियों के लोगों से ईश्वर के नियम के प्रति पृथक कर दिया था, उनकी पत्नियाँ, उनके बेटे, और उनकी बेटियाँ, प्रत्येक ज्ञान रखता हुआ, और प्रज्ञा रखता हुआ;

२९ यही अपने भाई-जनो, उनके कुलीन-प्रतिष्ठावानों से चिपट गए, और एक श्राप तले, और एक शपथ तले प्रवेश कर गए, ईश्वर के नियम में चलते रहने हेतु, जो कि ईश्वर के सेवक मूसा द्वारा प्रदान कर दिया गया था, और ध्यान देने और प्रभु हमारे प्रभु के समस्त आदेशों को, और उनके न्याय-निर्धारणों और उनके अध्यादेशों को क्रियान्वित कर देने हेतु; 

३० और कि हम अपनी बेटियों को भूमी के लोगों को नहीं प्रदान करेंगे, ही उनकी बेटियों को अपने बेटों के लिए लेंगे:

३१ और यदि भूमी के लोग सैबथ के दिन पर बेचने के लिए सामान या कोई भी खाद्य-पदार्थ लाते हैं, तो हम उसे सैबथ के दिन पर या पवित्र-दिवस पर उनसे नहीं ख़रीदेंगे: और कि हम सातवें वर्ष को, और प्रत्येक ऋण की चुकाई को छोड़ देंगे।

३२ हम ने अपने लिए निर्देश भी बनाए, प्रति वर्ष स्वयं पर हमारे ईश्वर के भवन की सेवा हेतु एक शेक्ल के तीसरे भाग का दे देना;

३३ भेंट की रोटी के लिए, और उस निरंतर भोज-चढ़ावे के लिए, और उस निरन्तर जले चढ़ावे के लिए, सैबथों के, नए-चन्द्रमाओं के, स्थित भोजों हेतु, और उन पवित्र वस्तुओं के लिए, और उन पाप-चढ़ावों हेतु इस्राएल के लिए एक पापमोचन बनाने के लिए, और हमारे ईश्वर के भवन के समस्त कार्य हेतु।

३४ और हमने लकड़ी के चढ़ावे हेतु पुरोहितों, उन लेवी-वंशजों, और उन लोगों के बीच पर्चियाँ डालीं, उसे हमारे ईश्वर के घर में ले आने हेतु, हमारे पित्रों के घरानोंनुसार ही, वर्ष प्रति वर्ष नियुक्त समयों पर, प्रभु हमारे ईश्वर की बलिवेदी पर जला देने हेतु, जैसा कि ये नियम में लिखा हुआ है:

३५ और हमारी धरती के प्रथम-फलों को, और समस्त वृक्षों के फलों के प्रथम-फलों को प्रभु के भवन में वर्ष-प्रति-वर्ष ले आने हेतु:

३६ हमारे बेटों में से, और हमारे मवेशी में से प्रथम जन्मों को, जैसा कि नियम में लिखित है, और हमारे झुण्डों और हमारे पशु-समूहों के पहलौठों को, हमारे ईश्वर के भवन में ले आने हेतु, उन पुरोहितों के पास ही जो हमारे ईश्वर के घर में सेवारत हैं:

३७ और कि हम पुरोहितों के पास, हमारे ईश्वर के भवन के कक्षों में हमारे आटे के, और हमारे चढ़ावों के, सभी प्रकार के पेड़ों के फल के, अंगूर-रस के और तेल के प्रथम फलों को ले आएँ; और हमारी धरती के दसवें-अंशों को उन लेवी-वंशजों के पास, ताकि उन्हीं लेवी-वंशजों के पास सभी नगरों में हमारी जुताई का दसवाँ अंश हो सके।

३८ और हारुन का बेटा वो पुरोहित उन लेवी-वंशजों के साथ होगा, जब वो लेवी-वंशज उन दसवें-अंशों को लेते हैं: और वो लेवी-वंशज उन दसवें-अंशों का दसवाँ-अंश हमारे इश्वर के घर में, उन कक्षों में, उस राजकीय-भण्डार-गृह में ही ऊपर ले आएँगे।

३९ क्योंकि इस्राएल की सन्तानें और लेवी की सन्तानें अनाज के, नए अंगूर-रस के, और तेल के चढ़ावे को, उन कक्षों में ले आएँगे, जहाँ उस पुण्य-स्थान के पात्र, और वो सेवारत पुरोहित, और वो द्वारपाल, और वो गायक हैं: और हम अपने ईश्वर के भवन का त्याग नहीं करेंगे।



ग्यारहवाँ अध्याय।


और लोगों के अध्यक्ष-गण यरूशलेम में निवास किया करते थे: शेष गणों ने भी पर्चियाँ डालीं, दस में से एक को उस पवित्र नगर यरूशलेम में निवास करने हेतु लाने के लिए, और नौ को अन्य नगरों में निवास करने हेतु।

और लोगों ने उन सभी व्यक्तियों को आशीष दिया, जिन्होंने स्वयं अपनी स्वेच्छा से यरूशलेम में निवास करना स्वीकार किया।

अब यह उन प्रान्त के मुखिया हैं जो यरूशलेम में बस गए: परन्तु यहूदा के नगरों में हर एक अपने अधिकार में बसता था, अपने ही नगरों में, इस्राएल, वो पुरोहित-गण, और वो लेवी-वंशज, और वो नेथिनिम, और सुलेमान के नौकरों की सन्तानें।

और यरूशलेम में यहूदा की सन्तानों, और बिन्यामिन की सन्तानों में से कुछ बस गए। यहूदा की सन्तानों में से; अथाया उज़्ज़ीया का बेटा, ज़क़र्या का बेटा, अमरिया का बेटा, शेफतिया का बेटा, महाललील का बेटा, पेरेज़ की सन्तानों में से;

और मअसेया बरुक का बेटा, कोलहोज़े का बेटा, हज़ाया का बेटा, अदाया का बेटा, योयरिब का बेटा, ज़क़र्या का बेटा, शिलोनी का बेटा।

पेरेज़ के समस्त बेटे जो यरूशलेम में निवास करते थे चार सौ अड़सठ शूरवीर व्यक्ति थे।

और यही बिन्यामिन के बेटे हैं; सल्लू मेशुल्लम का बेटा, योएद का बेटा, पेदाया का बेटा, कोलाया का बेटा, मअसेया का बेटा, इथिएल का बेटा, येसाया का बेटा।

और उसके बाद गब्बय, सल्लय, नौ सौ अट्ठाईस।

और ज़िकरी का बेटा योएल उनका निर्देशक था: और सेनुआ का बेटा यहूदा नगर पर दूसरा था।

१० पुरोहितों में से: योयरिब का बेटा येदाया, यकिन।

११ सेराया हिल्किया का बेटा, मेशुल्लम का बेटा, ज़दोक का बेटा, मेरायोथ का बेटा, अहितुब का बेटा, ईश्वर कर भवन का अध्यक्ष था।

१२ और उनके भाई-जन जो भवन का काम-काज किया करते थे आठ सौ बाईस थे: और अदाया यरोहम का बेटा, पेललिया का बेटा, अमज़ी का बेटा, ज़क़र्या का बेटा, पशुर का बेटा, मलकिया का बेटा,

१३ और उसके भाई-जन, पित्रों के प्रमुख, दो सौ बयालीस: और अमशय अज़रील का बेटा, अहसय का बेटा, मेशिल्लेमोथ का बेटा, इम्मर का बेटा,

१४ और उनके भाई-जन, पराक्रमी शूरवीर पुरुष, एक सौ अट्ठाईस: और उनका निर्देशक ज़ब्दीएल था, एक महान व्यक्ति का ही बेटा।

१५ लेवी-वंशजों में से भी: शेमाया हशुब का बेटा, अज़रिकम का बेटा, हशबिया का बेटा, बुन्नी का बेटा; 

१६ और शब्बेथय और योज़बद, लेवी-वंशजों के मुखिया, ईश्वर के घर के बाहर के काम-काज का निरीक्षण लिए हुए थे।

१७ और मत्तनिया मिका का बेटा, ज़ब्दी का बेटा, असफ का बेटा, वो प्रमुख था प्रार्थना में धन्यवाद का आरम्भ करने वाला: और बकबुकिया अपने भाई-जनों में वो दूसरा, और अब्दा शम्मुआ का बेटा, गलल का बेटा, येदूथुन का बेटा।

१८ पवित्र नगर में वो समस्त लेवी-वंशज  दो सौ चौरास्सी थे।

१९ इसके अतिरिक्त वो द्वारपाल, अक्कुब, तलमोन, और उनके भाई-जन जो दरवाज़ों की रक्षा किया करते थे, एक सौ बहत्तर थे।

२० और इस्राएल का शेष भाग, पुरोहितों का, और लेवी-वंशजों का, यहूदा के समस्त नगरों में थे, हर एक अपनी विरासत में ही।

२१ परन्तु वो नेथिनिम ओफ़ेल में निवास करते थे: और ज़िहा और गिस्पा उन नेथिनिमों पर नियुक्त थे।

२२ यरूशलेम में उन लेवी-वंशजों का निर्देशक भी उज़्ज़ी बनी का बेटा, हशबिया का बेटा, मत्तनिया का बेटा, मिका का बेटा था। असफ के बेटों में से, वो गायक ईश्वर के भवन के कार्य-भार पर नियुक्त थे।

२३ क्योंकि यह उनसे सम्बंधित राजा का आदेश था, कि दिन-प्रति-दिन एक निश्चित भाग उन गायकों के लिए बकाया होगा।

२४ और पेथहिया मेशेज़बील का बेटा, यहूदा के बेटे ज़ेरह की सन्तानों में से, राजा के हाथ पर था लोगों से सम्बन्धित सभी विषयों में।

२५ और गावों के समबन्ध में, उनके खेतों के साथ, यहूदा की कुछ सन्तानें किर्यथरबा में बसती थीं, और उसके गावों में, और दिबोन में, और उसके गावों में, और येकबज़ील में, और उसके गावों में,

२६ और येशुआ में, और मोलादा में, और बेतफेलेत में,

२७ और हज़रशुआल में, और बेएरशबा में, और उसके गावों में,

२८ और ज़िकलग में, और मेकोना में, और उसके गावों में,

२९ और एनरिम्मन में, और ज़रेया में, और यरमुथ में,

३० जनोआ, अद्दुल्लम, और उनके गावों में, लकिश में, और उसके खेतों में, अज़ेका में, और उसके गावों में। और वो बेएरशबा से लेकर हिन्नम की घाटी में निवास किया करते थे।

३१ और गेबा से बिन्यामिन की भी सन्तानें मिकमश में, और आईया, और बेतएल, और उसके गावों में,

३२ और अनथोथ, नोब, अननिया,

३३ हज़ोर, रमा, गित्तैम,

३४ हदीद, ज़ेबोइम, नेबल्लत,

३५ लोद, और ओनो, कारीगरों की घाटी में।

३६ और लेवी-वंशजों में से बँटे हुए यहूदा में और बिन्यामिन में थे।



बारहवाँ अध्याय।


अब यही हैं वो पुरोहित-गण और वो लेवी-वंशज जो शेयलतीएल के बेटे ज़रुब्बाबेल, और येशुआ के साथ ऊपर गए थे: सेराया, येरेमिया, एज़रा,

अमरिया, मल्लुक, हत्तुष,

शेकनिया, रेहम, मेरेमोथ,

इद्दो, गिन्नेथो, अबिया,

मियामिन, मअदिया, बिलगा,

शेमाया, और योयरिब, येदाया,

सल्लू, अमोक, हिल्किया, येदाया। यही येशुआ के दिनो में उन पुरोहितों और उनके भाई-जनों के मुखिया थे।

इसके अतिरिक्त वो लेवी-वंशज: येशुआ, बिन्नूई, क़दमिएल, शेरेबिया, यहूदा, और मत्तनिया, जो कि कृतज्ञता पर नियुक्त था, वो और उसके भाई-जन।

बकबुकिया और उन्नी भी, उनके भाई-जन उनके सामने ही थे पहरेदारियों में।

१० और येशुआ ने जना योयकिम, योयकिम ने भी जना एलिशिब, और एलिशिब ने जना योयदा,

११ और योयदा ने जना योनातन, और योनातन ने जना यद्दुआ।

१२ और योयकिम के दिनो में पुरोहित थे, पित्रों के मुखिया: सेराया में से, मेराया; येरेमिया में से, हननिया;

१३ एज़रा में से, मेशुल्लम; अमरिया में से, येहोहनन;

१४ मेलिकु में से, योहनटन; शेबनिया में से, युसुफ;

१५ हरिम में से, अदना; मेरायओथ में से, हेलकय;

१६ इद्दो में से, ज़क़र्या; गिन्नेथोन में से, मेशुल्लम;

१७ अबिया में से, ज़िकरी; मिनिअमिन में से, मोअदिया में से, पिलतय;

१८ बिलगा में से, शम्मुआ; शेमाया में से, येहोनेथन;

१९ योयरिब में से, मत्तेनय; येदाया में से, उज़्ज़ी;

२० सल्लय में से, कल्लय; अमोक में से, एबर;

२१ हिल्किया में से, हशबिया; येदाया में से, नेथनील।

२२ एलिशिब, योयदा, और योहनन, और यद्दुआ के दिनो में वो लेवी-वंशज पित्रों के मुखिया पंजीकृत थे: वो पुरोहित-गण भी, उस फ़ारसी दरयुश के राज तक।

२३ लेवी के बेटे, पित्रों के मुखिया इतिहास की पुस्तक में लिखित थे, एलिशिब के बेटे योहनन के दिनो तक भी।

२४ और उन लेवी-वंशजों के प्रमुख हशबिया, शेरेबिया, और क़दमील का बेटा येशुआ, उनके भाई-जनो के साथ उनके विपरीत ही, प्रशन्सा और धन्यवाद देने हेतु, ईश्वर के बन्दे दाऊद के आदेशानुसार, आमने सामने पहरा-पहरा।

२५ मत्तनिया, और बकबुकिया, ओबदिया, मेशुल्लम, तलमोन, अक्कुब, द्वारपाल थे दरवाज़ों की दहलीज़ों पर पहरेदारी करते हुए।

२६ यही योयकिम के दिनो में थे, येशुआ का बेटा, योज़दक का बेटा, और राज्यपाल नेहेम्या, और पुरोहित एज़रा, उस लिपिक, के दिनो में।

२७ और यरूशलेम की दीवार के समर्पण-अवसर पर उन्होंने लेवी-वंशज उनके समस्त स्थानों में से ढूँढ लिए, उन्हें यरूशलेम ले आने के लिए, उस समर्पण को प्रसन्नता से रखने के लिए, दोनो कृतज्ञताओं के साथ, और गाने के साथ, झाँझों, सारंगियों और वीणाओं के साथ।

२८ और उन गायकों के बेटों ने स्वयं को एक साथ एकत्रित कर लिया, दोनो यरूशलेम के चारों ओर वाले समतल मैदान में से, और नेटोफथी के गावों में से;

२९ गिलगल के घर में से भी, और गेबा और अज़्मवेथ के खेतों में से: क्योंकि उन गायकों ने स्वयं के लिए यरूशलेम के चारों ओर गाँव बना लिए थे।

३० और उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों ने स्वयं का शुद्धीकरण किया, और लोगों, और उन दरवाज़ों और उस दीवार का शुद्धीकरण कर दिया।

३१ तब मैं यहूदा के मुखियों को दीवार पर ले आया, और उनके दो बड़े दलों को कृतज्ञता देने हेतु नियुक्त कर दिया, जिस में से एक दाएँ हाथ पर दीवार पर चला गया मल के दरवाज़े की ओर:

३२ और उनके  पीछे-पीछे गया होशाया, और यहूदा के आधे मुखिया,

३३ और अज़रिया, एज़रा, और मेशुल्लम,

३४ यहूदा, और बिन्यामिन, और शेमाया, और येरेमिया,

३५ और पुरोहितों के कुछ बेटे चिंघाड़ों के साथ; ज़क़र्या योनातन का बेटा, शेमाया का बेटा, मत्तनिया का बेटा, मिकाया का बेटा, जक्कुर का बेटा, असफ का बेटा:

३६ और उसके भाई-जन, शेमाया, और अज़रील, मिललय, गिललय, मअय, नेथनील, और यहूदा, हननी, ईश्वर के उस बन्दे दाऊद के वाद्य-यंत्रों के साथ, और वो लिपिक एज़रा उनके सामने-सामने।

३७ और झरने के दरवाज़े पर, जो कि उनके विपरीत था, वो दाऊद के नगर की सीढ़ियों पर से ऊपर चले गए, दीवार की ऊपर चढ़ाई पर, दाऊद के भवन के ऊपर ही, पूर्व की ओर के जल के दरवाज़े तक भी।

३८ और उन में से वो दूसरा कृतज्ञता देने वाला वो दल उनके विपरीत चला गया, और मैं उनके पीछे-पीछे, और दीवार पर उन लोगों में से वो आधे, भट्टियों की मीनार से लेकर चौड़ी दीवार तक भी;

३९ और एफ्रैम के दरवाज़े से लेकर, और प्राचीन दरवाज़े के ऊपर, और मत्स्य द्वार के ऊपर, और हननील की मीनार, और मेया की मीनार, भेड़ों के दरवाज़े तक भी: और वो कारावास के दरवाज़े में अचल खड़े हो गए।

४० तो इस प्रकार ईश्वर के घर में उन कृतज्ञता देने वालों के दोनो डाल खड़े हो गए थे, और मैं, और आधे अध्यक्ष मेरे साथ ही:

४१ और वो पुरोहित; एलिकिम, मअसेया, मिनिअमिन, मिकाया, एलियोनय, ज़क़र्या, और हननिया, चिंघाड़ों के साथ ही;

४२ और मअसेया, और शेमाया, और एलाज़र, और उज़्ज़ी, और येहोहनन, और मलकिया, और एलम, और एज़र। और वो गायक ज़ोर से गाए, उनके निर्देशक येज्रहिया के साथ ही।

४३ उस दिन उन्होंने विशाल बलियाँ भी चढ़ाईं: चूँकि ईश्वर ने उन्हें बड़े ही हर्ष से हर्षित कर दिया था: उन पत्नियों ने भी और उन बच्चों ने हर्ष मनाया: ताकि यरूशलेम का हर्षोल्लास बहुत ही दूरी तक भी सुन लिया गया था।

४४ और उस समय कुछ धन-भण्डारों, चढ़ावों, प्रथम-फलों, और उन दसवे-अंशों के लिए कक्षों पर नियुक्त किए गए थे, उन में एकत्रित कर देने हेतु नगरों के खेतों में से ही उस नियम के भाग उन पुरोहितों और लेवी-वंशजों के लिए: क्योंकि यहूदा उन पुरोहित-गणों के लिए और उन खड़े हुए लेवी-वंशजों के लिए हर्षित था।

४५ और दोनो वो गायक और वो द्वारपाल अपने ईश्वर का प्रभार, और शुद्धीकरण का प्रभार दाऊद और उसके बेटे सुलेमान के आदेशानुसार सम्भाले हुए थे।

४६ चूँकि दाऊद और असफ के उन प्राचीन दिनो में गायकों के प्रमुख थे, और प्रशन्सा के गीत, और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता।

४७ और समस्त इस्राएल ने ज़रुब्बाबेल के दिनो में, और नेहेम्या के दिनो में, गायकों को और द्वारपालों को भाग दिए, दिन-प्रति-दी उसका भाग: और उन लेवी-वंशजों के प्रति उन पवित्र वस्तुओं को पुनीत कर दिया करते थे; और वो लेवी-वंशज उन्हें हारुन की सन्तानों को पुनीत कर दिया करते थे।



तेरहवाँ अध्याय।


उस दिन उन्होंने उन लोगों की सुनवाई में मूसा की पुस्तक में से पढ़ा; और उसी में ये लिखित पाया गया था, कि अम्मोन-वंशज और मोआब-वंशज को ईश्वर की सभा में सदा के लिए प्रवेश नहीं करेगा;

चूँकि उन्होंने इस्राएल की सन्तानों के साथ रोटी के साथ और पानी के साथ भेंट नहीं की थी, बल्कि बिलाम को उनके विरुद्ध भाड़े पर ले लिया था, ताकि वो उन पर श्राप डाल दे: लेकिन हमारे ईश्वर ने उस श्राप को एक आशीर्वाद में परिवर्तित कर दिया।

तो अब ये होने को आया, कि जब उन्होंने नियम सुन लिया था, तो उन्होंने इस्राएल में से उन सभी मिले-जले जनौघ को पृथक कर दिया।

और इस से पूर्व, वो पुरोहित एलीशिब, हमारे ईश्वर के भवन के कक्ष का निर्देशक होता हुआ, तोबिया से सम्बंधित था:

और उसने उसके लिए एक बड़ा कक्ष तैयार कर दिया था, जहाँ वो बीते समय में रखा करते थे भोज-चढ़ावे, लोहबान, और पात्र, और अनाज के दसवें अन्श, नया अंगूर-रस, और तेल, जिसका लेवी-वंशजों, और गायकों, और द्वारपालों को दे देने का आदेश निर्धारित था; और पुरोहितों के चढ़ावे।

परन्तु इस समस्त समय में में यरूशलेम में नहीं था: चूँकि बेबिलोन के राजा अर्तक्षत्र के बत्तीसवें वर्ष में मैं राजा के पास आया था, और कुछ दिनो पश्चात मैंने राजा से अवकाश प्राप्त कर लिया था:

और मैं यरूशलेम गया था, और उस बुराई को समझ गया था जो एलीशिब ने तोबिया के लिए की थी, उसके लिए ईश्वर के भवन के आँगनों में एक कक्ष को तैयार कर देने की।

और इस बात ने मुझे घोरता से शोकार्तित कर दिया था: इसलिए मैंने तोबिया की समस्त घरेलू सामग्री कक्ष में से बाहर पटक डाली।

तब मैंने आदेश दिया, और उन्होंने उन कक्षों का स्वच्छीकरण कर दिया: और वहीं मैं पुनः ईश्वर के भवन के पात्रों को, भोज-चढ़ावे और लोहबान के साथ ले आया।

१० और मैंने ये आभास किया कि उन लेवी-वंशजों के भाग उन्हें नहीं प्रदान किए गए थे: चूँकि वो लेवी-वंशज और वो गायक जो वो काम किया करते थे, हर एक तो अपने-अपने खेत ही भाग खड़े हो गए थे।

११ तब मैं उन अध्यक्षों के साथ झगड़ पड़ा, और कहा, ईश्वर का घर त्याग क्यों दिया गया है भई/ और मैंने उन्हें एक साथ इकट्ठा किया, और उन्हें उनके स्थान में स्थित कर दिया। 

१२ तब समस्त यहूदा अनाज और नए अंगूर-रस का और तेल का दसवाँ अन्श राजकीय-भण्डार-गृहों में ले आए।

१३ और मैंने राजकीय-भण्डार-गृहों पर धन-कोष मंत्रियों को नियुक्त किया, पुरोहित शेलेमिया, और लिपिक ज़दोक, और लेवी-वंशजों में से, पेदाया: और उनका सहायक हनन ज़क्कुर का बेता, मत्तनिया का बेटा था: चूँकि उन्हें विश्वसनीय गिन लिया गया था, और उनका कार्य-पद उनके भाई-जनो को वितरण कर देने का था।

१४ हे मेरे ईश्वर, स्मरण में रखिएगा मुझे इसके सम्बन्ध में, और मेरे भले कार्यों को पौंछ डालिएगा जो मैंने मेरे ईश्वर के भवन हेतु, और उसके कार्य-पदों हेतु किए हैं।

१५ उन्हीं दिनो में मैंने यहूदा में कुछों को सैबथ पर अंगूर-रस के कुण्डों में रौंदते हुए, और अनाज के गंठलों को अन्दर लाते हुए, और गधों को लादते हुए देखा; अंगूर-रस, अंगूरों, और अंजीर, और हर प्रकार के भारों को भी, जिन्हें वो यरूशलेम में सैबथ के दिन पर लाते थे: और मैंने उनके विरुद्ध उस दिन साक्ष्य दिया जिस में वो खाद्य-पदार्थ बेचा करते थे।

१६ वहीं टाय्र-वासी भी निवास करते थे, जो मछलियाँ लाते थे, और हर प्रकार की सामग्री, और सैबथ के दिन यहूदा की सन्तानों को बेचा करते थे, और यरूशलेम में।

१७ तब मैं यहूदा के कुलीन-प्रतिष्ठावानों से झगड़ पड़ा, और उनसे कहा, ये कैसा बुरा कार्य है जो तुम कर रहे हो भई, और सैबथ के दिन को कलुषित कर रहे हो?

१८ क्या तुम्हारे पित्रों ने ऐसा ही नहीं किया था क्या, और क्या हमारे ईश्वर ये समस्त बुराई हम पर ले आए थे और इस नगर पर? तब भी तुम सैबथ को कलुषित कर इस्राएल पर और भी अधिक आक्रोश ला रहे हो।

१९ और यह होने को आया, कि जब यरूशलेम के दरवाजों पर सैबथ से पूर्व श्यामतव छाने लगता था, मैंने आदेश दिया कि दरवाज़ों को बँद कर दिया जाए, और आज्ञा दी कि उन्हें सैबथ की समाप्ति तक नहीं खोला जाएगा: और मैंने उन दरवाज़ों पर अपने नौकरों में कुछों को खड़ा कर दिया, ताकि सैबथ के दिन कोई भी भार भीतर लाया जाए।

२० तो हर प्रकार की सामग्री के व्यापारी और विक्रेता एक या दो बार यरूशलेम के बाहर ही ठहर जाया करते थे।

२१ तो मैंने उनके विरुद्ध साक्ष्य दिया, और उनसे कहा, भई तुम दीवार के आस पास क्यों ठहरे रहते हो? अगर तुम दोबारा ऐसा करोगे, तो मैं तुम ओर हाथ धार डालूँगा। उस समय से लेकर वो अब और सैबथ पर नहीं आए।

२२ और मैंने उन लेवी-वंशजों को आदेश दिया कि उन्हें स्वयं का स्वच्छीकरण कर लेना चाहिए,और कि उन्हें आकर उन दरवाज़ों की रखवाली करनी चाहिए, सैबथ के दिन को पुनीत रखने के लिए। हे मेरे ईश्वर, मुझे स्मरण में रखिएगा इसके सम्बन्ध में भी, और आपकी दया की विशालतानुसार मुझे बक्श दीजिएगा जी।

२३ उन्हीं दिनो में मैंने उन यहूदियों को भी देखा जिन्होंने अश्दोद की, अम्मोन की, और मोआब की पत्नियों से विवाह कर लिया था:

२४ और उनकी सन्तानें आधी अश्दोद की बोली से बोलती थीं, और यहूदियों की भाषा में नहीं बोल सकते थे, पर हर जन की ही भाषानुसार ही।

२५ और मैं उनके साथ झगड़ पड़ा, और उन्हें गाली थी, और उन में से कुछों की पिटाई कर दी, और उनके बाल चूँट डाले, और उन्हें ईश्वर की सौगन्ध खिलवाई कहते हुए, तुम अपनी बेटियों को उनके बेटों को नहीं दोगे, ही उनकी बेटियों को अपने बेटों के लिए, या अपने स्वयं के लिए नहीं लोगे।

२६ क्या इस्राएल के राजा सुलेमान ने इन बातों द्वारा पाप नहीं कर डाला था क्या? तथापि अनेक राष्ट्रों के बीच उनके जैसा कोई भी राजा था, जो अपने ईश्वर के अतिप्रीय थे, और ईश्वर ने उन्हें समस्त इस्राएल पर राजा बना दिया था: तब भी उनसे ही परदेशी औरतों ने पाप करवा डाला था।

२७ तो फिर क्या हम तुम्हें सुनवाई दें इस महा-बुराई को कर देने में, हमारे ईश्वर के विरुद्ध अवरोध कर देने में परदहसी पत्नियों से शादी कर लेने में?

२८ और उच्च पुरोहित एलीशिब के बेटे योयदा के बेटों में से एक उस होरोन-वाले सनबल्लत का दामाद था: इसलिए मैंने उसे अपने पास से भाग दिया।

२९ इन्हें स्मरण में रखिएगा, हे मेरे ईश्वर, क्योंकि इन्होंने पुरोहित-पद को, और पुरोहित-पद के और लेवी-वंशजों के  प्रतिज्ञा-पत्र को कलुषित कर डाला है जी।

३० तो इस प्रकार मैंने उनका सभी परदेशियों से स्वच्चीकरण कर दिया, और उन पुरोहितों और उन लेवी-वंशजों के प्रभार-पदों को नियुक्त कर दिया, ही एक उसी के कार्य में ही;

३१ और लकड़ी के चढ़ावे के लिए, नियुक्त समयों पर ही, और प्रथम-फलों के लिए। स्मरण में रखिएगा जी मुझे, हे मेरे ईश्वर, भलाई के लिए ही। 


०४/२४/२०२६: 












 

 


















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